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सीएम योगी के पास पहुंच कर बालहठ के साथ निश्छल मन से अपनी बात रखते हैं प्रदेश भर के बच्चे

सीएम योगी का बाल प्रेम  जनसेवा, संवेदना और सुशासन की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करते हैं मुख्यमंत्री सीएम योगी के पास पहुंच कर बालहठ के साथ निश्छल मन से अपनी बात रखते हैं प्रदेश भर के बच्चे  बच्चों के सामने झलक पड़ता है सीएम योगी का कोमल हृदय, समाज को जोड़ती है सीएम की बच्चों से यह दोस्ती बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा व सुरक्षा पर सीएम योगी का है विशेष फोकस एडमिशन, उपचार के लिए तत्काल आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराते हैं मुख्यमंत्री  लखनऊ  नर्सरी में एडमिशन कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंची मासूम बच्ची की जिद हो या चॉकलेट की मांग करने वाले बच्चों की हठ। जिन मुख्यमंत्री का नाम सुनकर अपराधी कांप उठते हैं, बच्चे उन्हीं से मिलकर सहजता से अपनी जिद मनवा लेते हैं। कहते हैं, ‘बच्चे मन के सच्चे’, वे अपने दिल की भावना को अत्यंत निश्छलता से प्रकट कर देते हैं, यही भाव उस समय सामने आया, जब सीएम योगी आदित्यनाथ को देखते ही एक छोटी बच्ची ने उन्हें सैल्यूट किया। सीएम ने भी मुस्कुराते हुए बच्ची को खूब मन लगाकर पढ़ने के लिए कहा। उनका यह बाल प्रेम उनके कोमल हृदय व सर्वसुलभ होने के साथ-साथ जनसेवा, संवेदना व सुशासन की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करता है। मुख्यमंत्री के बच्चों से जुड़ाव और उनके साथ भावनात्मक संवाद के कई दृश्य समय-समय पर सामने आते रहते हैं। विगत सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में मां के साथ आई बच्ची अनाबी अली से सीएम का संवाद इन दिनों चर्चा में है। अपने एडमिशन के लिए जिद, फिर एबीसीडी व कविता सुनाकर अनाबी ने सीएम का दिल जीत लिया। वहीं मकर संक्रांति पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गोरखनाथ मंदिर में एक बच्चे से “और क्या चाहिए” पूछना और उसका मासूम जवाब सुनकर खिलखिलाकर हंसना भी उनके बालप्रेम को प्रकट करता है। बच्चों से अत्यंत आत्मीयता से संवाद और उनके भविष्य को लेकर त्वरित निर्णय मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता को प्रदर्शित करते हैं। बीते दिनों ‘जनता दर्शन’ में दो साल की अनन्या से संवाद भी लोगों के मन को छू गया। इसी तरह 31 दिसंबर को मेजर की बेटी अंजना भट्ट ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपने मकान पर कब्जे की शिकायत की, जिस पर मुख्यमंत्री ने 24 घंटे के भीतर न सिर्फ मकान को कब्जा मुक्त कराया, बल्कि आरोपियों पर एफआईआर व तत्काल गिरफ्तारी भी कराई। यह मामला सीएम की जन समस्याओं के प्रति गंभीरता को प्रकट करते हुए स्पष्ट संदेश देता है कि वे कानून व्यवस्था, बच्चों, महिलाओं और कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों का समाधान कराने में तनिक भी विलंब नहीं करते।  कानपुर की मूक-बधिर युवती खुशी गुप्ता की कहानी भी इन दिनों हर किसी की जुबां पर है। मुख्यमंत्री से मिलने की उसकी जिद और अकेले पैदल चलकर लखनऊ पहुंचने की जानकारी जब सीएम योगी आदित्यनाथ को मिली तो उन्होंने उसे बुलाकर उसके बनाए चित्रों को स्वीकार किया और उसके शिक्षित-सुरक्षित भविष्य का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री के अपनत्व से भाव-विभोर खुशी की ‘अनकही भावनाओं’ ने 25 करोड़ प्रदेशवासियों के बीच मुख्यमंत्री की ‘प्रदेश ही परिवार’ धारणा की विश्वसनीय तस्वीर पेश की।  ‘जनता दर्शन’ के जरिए लखनऊ की अनाबी अली, कानपुर की मायरा, गोरखपुर की पंखुड़ी और मुरादाबाद की वाची का स्कूल में एडमिशन कराना भी सीएम योगी की संवेदनशीलता का हिस्सा है। कानपुर की नन्ही मायरा ने कहा था कि मैं बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती हूं। इस पर सीएम ने तत्काल उसका प्रवेश कराने का निर्देश दिया। वाची ने कहा कि मैं पढ़ना चाहती हूं,  सीएम ने उसका भी प्रवेश कराया। गोरखपुर की पंखुड़ी की फीस माफ कराने के साथ ही उसे पुनः विद्यालय भेजना भी सुनिश्चित कराया। गणतंत्र दिवस परेड में भी सीएम के पास पहुंच गए बच्चे 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में आए बच्चे सीधे सीएम योगी के पास पहुंच गए। सभी ने सीएम के साथ फोटो खिंचवाई, उनसे बातचीत की। सीएम ने उन्हें दुलारा और एक नन्ही बच्ची को गोद में लेकर अपना वात्सल्य भाव प्रकट किया।   वृद्ध मां के दर्द से द्रवित सीएम ने कैंसर पीड़ित बेटे को भिजवाया अस्पताल बीते सितंबर में ‘जनता दर्शन’ में कानपुर की रायपुरवा निवासी एक वृद्ध मां अपने कैंसर पीड़ित बेटे का दर्द लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंची थीं। उनकी तकलीफ देखकर सीएम द्रवित हो गए और कैंसर पीड़ित बेटे को एंबुलेंस से सीधे कल्याण सिंह सुपर स्पेशियिलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट भिजवाकर उसका इलाज प्रारंभ कराया। ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बाल प्रेम, जनसेवा, संवेदना व सुशासन की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।

सभी पात्र आवंटियों तक ओटीएस योजना की जानकारी पहुंचे, मुख्यमंत्री ने व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए

लंबित आवास मामलों के निस्तारण हेतु ‘एकमुश्त समाधान योजना’ लागू करें: मुख्यमंत्री सभी पात्र आवंटियों तक ओटीएस योजना की जानकारी पहुंचे, मुख्यमंत्री ने व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए लंबित देयों का मानवीय व न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री डिफॉल्टर मामलों के निस्तारण में गति लाएं, प्रक्रिया को पूरी तरह यूजर-फ्रेंडली बनाएं: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की बैठक में लंबित आवासीय और व्यावसायिक आवंटनों के त्वरित निस्तारण के लिए एक नई ‘एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस-2026)’ लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्षों से लंबित देयों और विवादित मामलों के कारण न केवल योजनाओं की प्रगति प्रभावित होती है, बल्कि आम नागरिकों को भी अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था लागू करना है, जिसमें समाधान तेज, पारदर्शी और सभी के लिए व्यावहारिक हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की किसी भी योजना में लंबित भुगतान या विवादित आवंटन राज्य की विकास गति को धीमा करते हैं। इसलिए आवास विभाग को ऐसी समाधान-प्रधान व्यवस्था लागू करनी चाहिए, जिससे विभाग को आवश्यक राजस्व प्राप्त हो और आवंटियों को भी राहत मिले। उन्होंने कहा कि यह योजना जन-केंद्रित होनी चाहिए, जिसमें हर वास्तविक आवंटी को स्पष्ट और सरल विकल्प उपलब्ध हों। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2020 में लागू की गई ओटीएस-2020 योजना से बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण हुआ था, लेकिन कोविड-19 के कारण कई आवंटी अंतिम भुगतान नहीं कर पाए। विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों में प्रदेश के विभिन्न आवासीय और व्यावसायिक परिसरों में मौजूद ऐसे सभी डिफॉल्ट मामलों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओटीएस-2026 योजना को अधिक व्यावहारिक और लाभकारी स्वरूप दिया जाए। एकमुश्त भुगतान करने वाले आवंटियों को देयों पर उपयुक्त छूट दी जाए। साथ ही, किस्तों में भुगतान की सुविधा हो। उन्होंने कहा कि योजना के प्रावधानों को अंतिम रूप देते समय यह ध्यान रहे कि योजना के मूल में आम आदमी को राहत देने का ही भाव निहित हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि विभाग द्वारा प्रत्येक आवेदन का निस्तारण निर्धारित समयसीमा में कर दिया जाए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि नई योजना लागू होने से हजारों आवंटियों को राहत मिलेगी और विभाग को राजस्व भी प्राप्त होगा।  मुख्यमंत्री ने विभाग को निर्देश दिया कि योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार की विशेष व्यवस्था की जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे अवगत हो सकें। उन्होंने कहा, 'एकमुश्त समाधान योजना' के बारे में आम जनता के बीच सक्रिय रूप से जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि सभी पात्र लोग इसका लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि योजना की संपूर्ण प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल होनी चाहिए।

परीक्षा के समय समाज और परिवार की सामूहिक जिम्मेदारी

परीक्षा के समय समाज और परिवार की सामूहिक जिम्मेदारी  वाराणसी परीक्षा केवल प्रश्नपत्र और उत्तरपुस्तिका के बीच घटित होने वाली एक शैक्षणिक प्रक्रिया नहीं है। यह एक ऐसा समय होता है जब किसी विद्यार्थी का मन, उसका आत्मविश्वास, उसका पारिवारिक परिवेश और पूरा सामाजिक वातावरण—सब मिलकर उसके भविष्य की दिशा तय करते हैं। परीक्षा के दिनों में बच्चे अकेले परीक्षार्थी नहीं होते; सच तो यह है कि उस अवधि में पूरा परिवार और समाज, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, परीक्षार्थी बन जाता है। आज जब बोर्ड परीक्षाएँ समीप आती हैं, तो समाज में अचानक एक विशेष प्रकार की हलचल दिखाई देने लगती है। जगह-जगह मोटिवेशनल भाषण, लंबे-चौड़े वक्तव्य, सोशल मीडिया पर उपदेशात्मक संदेश, सफलता के किस्से और असफलता से डराने वाले उदाहरण—सब कुछ एक साथ बच्चों पर बरसने लगता है। मंशा भले ही अच्छी हो, पर प्रश्न यह है कि क्या यही वह सहयोग है जिसकी एक परीक्षार्थी को सबसे अधिक आवश्यकता होती है? परीक्षार्थी को इस समय सबसे अधिक आवश्यकता होती है—शांति, स्थिरता और अनुकूलता की। विषयवस्तु की तैयारी जितनी महत्त्वपूर्ण है, उतना ही महत्त्वपूर्ण वह मानसिक और भावनात्मक परिवेश है जिसमें वह तैयारी की जा रही है। ज्ञान तभी फलित होता है जब मन शांत हो, जब वातावरण सहयोगी हो और जब परीक्षार्थी स्वयं को सुरक्षित महसूस करे। अक्सर यह देखा जाता है कि परीक्षा के समय घर का वातावरण अनजाने में ही तनावपूर्ण बना दिया जाता है। छोटी-छोटी बातों पर चर्चा, पारिवारिक समस्याओं का अनावश्यक विस्तार, रिश्तों के तनाव, भविष्य को लेकर आशंकाएँ—ये सब बातें उस मन पर अतिरिक्त बोझ डाल देती हैं, जो पहले ही परीक्षा की जिम्मेदारी से भरा होता है। बच्चे इन बातों को व्यक्त नहीं कर पाते, पर भीतर ही भीतर उनका मन विचलित होता चला जाता है। यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि परीक्षा के दौरान परीक्षार्थी से अधिक अपेक्षा नहीं, बल्कि अधिक समझ की आवश्यकता होती है। उसे बार-बार यह याद दिलाना कि यह परीक्षा जीवन का निर्णायक मोड़ है, उसे और अधिक दबाव में डाल देता है। वास्तव में, परीक्षार्थी स्वयं इस तथ्य से परिचित होता है; उसे इसकी पुनरावृत्ति नहीं, बल्कि भरोसे की ज़रूरत होती है। परीक्षा के समय समाज और परिवार को कुछ समय के लिए स्वयं परीक्षार्थी बनने की आवश्यकता होती है। इसका अर्थ यह नहीं कि वे किताबें खोलकर पढ़ने लगें, बल्कि यह कि वे परीक्षार्थी की संवेदनाओं को पढ़ें। वे यह समझने का प्रयास करें कि इस समय कौन-सी बात उसे सशक्त बनाएगी और कौन-सी उसे कमजोर कर देगी। एक सकारात्मक परीक्षा-परिवेश वही होता है जहाँ अनावश्यक हस्तक्षेप न हो। जहाँ बच्चे को अपनी दिनचर्या तय करने की स्वतंत्रता मिले। जहाँ उसकी नींद, भोजन और एकांत का सम्मान किया जाए। जहाँ उससे यह अपेक्षा न की जाए कि वह हर समय प्रसन्न दिखाई दे या हर प्रश्न का उत्तर दे। कई बार परीक्षार्थी को परीक्षा देने के लिए रिश्तेदारों या परिचितों के यहाँ जाना पड़ता है। ऐसे में वहाँ उपस्थित लोगों का व्यवहार अत्यंत संवेदनशील होना चाहिए। जिज्ञासावश पूछे गए प्रश्न—“तैयारी कैसी है?”, “इस बार कितने प्रतिशत आएँगे?”—अक्सर मन पर अनावश्यक दबाव बना देते हैं। उस समय सबसे बड़ा सहयोग यह होता है कि परीक्षार्थी को सामान्य, सहज और स्वाभाविक वातावरण दिया जाए। यह भी देखा गया है कि कई अत्यंत प्रतिभाशाली विद्यार्थी केवल इसलिए अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाते क्योंकि परीक्षा के दौरान उनका पारिवारिक या सामाजिक परिवेश असंतुलित रहा। विषय की समझ और परिश्रम के बावजूद, मन की अस्थिरता उनकी क्षमता को सीमित कर देती है। यह एक गंभीर सामाजिक प्रश्न है, जिस पर सामूहिक चिंतन आवश्यक है। परीक्षा के समय जीवन की अन्य समस्याओं को परीक्षार्थी से यथासंभव दूर रखना चाहिए। जीवन में समस्याएँ हमेशा रहेंगी—यह जीवन का स्वभाव है। पर परीक्षा के कुछ सप्ताह ऐसे होते हैं, जब समाज और परिवार को यह जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि वे उन समस्याओं का भार परीक्षार्थी के कंधों पर न डालें। एक संतुलित परिवार वही है जो परीक्षा के समय विवादों को स्थगित करना जानता है। जहाँ यह समझ हो कि अभी प्राथमिकता क्या है। जहाँ सहयोग शब्दों से नहीं, व्यवहार से दिखाई दे। समाज की भूमिका भी कम महत्त्वपूर्ण नहीं है। शिक्षक, पड़ोसी, रिश्तेदार, मित्र—सभी को यह समझना चाहिए कि उनका एक छोटा सा वाक्य भी परीक्षार्थी के मन पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। सकारात्मक ऊर्जा वही नहीं होती जो ऊँचे स्वर में प्रेरणा देती है, बल्कि वह भी होती है जो मौन में सुरक्षा का एहसास कराती है। परीक्षा के दौरान समाज को एक सामूहिक सकारात्मक वातावरण का निर्माण करना चाहिए—जहाँ तुलना न हो, उपहास न हो, डर न हो। जहाँ सफलता को सम्मान मिले और असफलता को स्वीकार्यता। यह भी आवश्यक है कि परीक्षार्थी को यह महसूस कराया जाए कि उसका मूल्य केवल परीक्षा परिणाम से निर्धारित नहीं होता। परीक्षा जीवन का एक चरण है, सम्पूर्ण जीवन नहीं। यह भाव यदि ईमानदारी से व्यवहार में उतारा जाए, तो परीक्षार्थी का आत्मविश्वास स्वतः सुदृढ़ होता है। परीक्षा के समय परिवार और समाज का दायित्व केवल समर्थन देना नहीं, बल्कि सही समय पर चुप रहना भी है। यह मौन कई बार सबसे बड़ा सहयोग बन जाता है। यदि हम वास्तव में चाहते हैं कि हमारे बच्चे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें, तो हमें उनके लिए एक ऐसा वातावरण बनाना होगा जहाँ वे स्वयं को बोझ नहीं, बल्कि भरोसे से घिरा हुआ महसूस करें। अंततः परीक्षा एक व्यक्तिगत प्रयास है, पर उसकी सफलता सामूहिक संवेदनशीलता पर निर्भर करती है। जिस दिन समाज और परिवार यह समझ लेंगे कि परीक्षा के समय उन्हें भी परीक्षार्थी बनना है—उस दिन न केवल परिणाम बेहतर होंगे, बल्कि हमारी शिक्षा व्यवस्था अधिक मानवीय और संवेदनशील बन सकेगी। लेखक  डॉ० सदानन्द गुप्ता अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वाराणसी

प्रदेश में कुल 32,679 पदों के लिए तीन दिन होगी लिखित परीक्षा, दो पालियों में होगा आयोजन

उत्तर प्रदेश पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा की तारीख घोषित, 8 से 10 जून तक होगी लिखित परीक्षा प्रदेश में कुल 32,679 पदों के लिए तीन दिन होगी लिखित परीक्षा, दो पालियों में होगा आयोजन उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होगी परीक्षा से जुड़ी सभी जानकारी व निर्देश लखनऊ  उत्तर प्रदेश पुलिस में बतौर सिपाही भर्ती होने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। योगी सरकार ने आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 के तहत होने वाली लिखित परीक्षा की तारीखें घोषित कर दी हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPBPB) की ओर से मंगलवार को जारी सूचना के अनुसार सिपाही भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा 8 जून (सोमवार), 9 जून (मंगलवार) और 10 जून (बुधवार) को आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा तीनों दिनों में दो-दो पालियों में कराई जाएगी। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से कुल 32,679 पदों को भरा जाएगा। सिपाही भर्ती परीक्षा से संबंधित अन्य जानकारी, परीक्षा केंद्र, एडमिट कार्ड एवं दिशा-निर्देश उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत बना योगी सरकार का फैसला उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं को योगी आदित्यनाथ सरकार ने वर्तमान सिपाही भर्ती प्रक्रिया में बड़ी राहत दी है। अभ्यर्थियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस में आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर प्रस्तावित सीधी भर्ती-2025 के लिए अधिकतम आयु सीमा में एकमुश्त तीन वर्ष का शिथिलीकरण प्रदान किया गया है। सरकार द्वारा यह निर्णय उत्तर प्रदेश लोक सेवा (भर्ती के लिए आयु सीमा का शिथिलीकरण) नियमावली-1992 के नियम-3 के आलोक में लिया गया। यह फैसला 31 दिसंबर 2025 को जारी भर्ती विज्ञप्ति के अनुक्रम में 5 जनवरी 2026 को जारी शासनादेश के माध्यम से लागू किया गया, जिससे बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों को अवसर मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ जो आयु सीमा के कारण अब तक भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो रहे थे। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा वर्ष 2024 में प्रदेश में कांस्टेबल के कुल 60,244 पदों पर भर्तियां की गई थीं। यह प्रदेश सरकार की अब तक की सबसे बड़ी भर्ती थी। भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत चयनित सभी पदों में से 20 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित रखते हुए उन्हें नियुक्ति प्रदान की गई है।

प्रदेश में कुल 32,679 पदों के लिए तीन दिन होगी लिखित परीक्षा, दो पालियों में होगा आयोजन

उत्तर प्रदेश पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा की तारीख घोषित, 8 से 10 जून तक होगी लिखित परीक्षा प्रदेश में कुल 32,679 पदों के लिए तीन दिन होगी लिखित परीक्षा, दो पालियों में होगा आयोजन उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होगी परीक्षा से जुड़ी सभी जानकारी व निर्देश लखनऊ  उत्तर प्रदेश पुलिस में बतौर सिपाही भर्ती होने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। योगी सरकार ने आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 के तहत होने वाली लिखित परीक्षा की तारीखें घोषित कर दी हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPBPB) की ओर से मंगलवार को जारी सूचना के अनुसार सिपाही भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा 8 जून (सोमवार), 9 जून (मंगलवार) और 10 जून (बुधवार) को आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा तीनों दिनों में दो-दो पालियों में कराई जाएगी। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से कुल 32,679 पदों को भरा जाएगा। सिपाही भर्ती परीक्षा से संबंधित अन्य जानकारी, परीक्षा केंद्र, एडमिट कार्ड एवं दिशा-निर्देश उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत बना योगी सरकार का फैसला उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं को योगी आदित्यनाथ सरकार ने वर्तमान सिपाही भर्ती प्रक्रिया में बड़ी राहत दी है। अभ्यर्थियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस में आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर प्रस्तावित सीधी भर्ती-2025 के लिए अधिकतम आयु सीमा में एकमुश्त तीन वर्ष का शिथिलीकरण प्रदान किया गया है। सरकार द्वारा यह निर्णय उत्तर प्रदेश लोक सेवा (भर्ती के लिए आयु सीमा का शिथिलीकरण) नियमावली-1992 के नियम-3 के आलोक में लिया गया। यह फैसला 31 दिसंबर 2025 को जारी भर्ती विज्ञप्ति के अनुक्रम में 5 जनवरी 2026 को जारी शासनादेश के माध्यम से लागू किया गया, जिससे बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों को अवसर मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ जो आयु सीमा के कारण अब तक भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो रहे थे। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा वर्ष 2024 में प्रदेश में कांस्टेबल के कुल 60,244 पदों पर भर्तियां की गई थीं। यह प्रदेश सरकार की अब तक की सबसे बड़ी भर्ती थी। भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत चयनित सभी पदों में से 20 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित रखते हुए उन्हें नियुक्ति प्रदान की गई है।

तीन तलाक का मामला: हिबा राना ने पति के खिलाफ दर्ज कराया केस, परिवार में चर्चा

सआदतगंज दिवंगत मशहूर शायर मुनव्वर राना की बेटी हिबा राना को उनके पति ने तीन तलाक दे दिया. सआदतगंज पुलिस केस दर्ज कर मामले की जांच में जुट गई है. हिबा राना ने अपने पति मोहम्मद साकिब और ससुर हसीब अहमद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है. 2013 में सुन्नी रीति रिवाज से हुई हिबा राना की शादी मुनव्वर राना की बेटी हिबा राना की शादी साल 2013 में सुन्नी रीति रिवाज के अनुसार हुई थी. एफआईआर की कॉपी के मुताबिक शादी में दहेज के रूप में पिता और घरवालों ने साकिब को सोने और हीरे के गहनों के अलावा 10 लाख रुपये भी दिए थे. दहेज लोभियों ने की 20 लाख रुपये और देने की मांग थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक जब हिबा राना शादी के बाद विदा होकर ससुराल गई तो साकिब और उसके पिता की ओर से बीस लाख रुपये और देने की मांग की जाने लगी. कई बार दहेज लोभियों की मांग पूरी भी की गई ताकि वैवाहिक जीवन पर खराब असर न पड़े. हिबा राना और साकिब के दो बच्चे हैं. एक बेटा और बेटी है. साकिब आए दिन अपनी पत्नी हिबा राना के साथ मारपीट भी करता था. तीन बार तलाक देते हुए हिबा राना को घर से निकाला एफआईआर में इस बात का भी जिक्र है कि 9 अप्रैल 2025 को हिबा राना के साथ उसके पति ने काफी मारपीट और गाली गलौज की थी. जब पीड़िता की बहन आर्शिया राना उनसे मिलने के लिए गई तो साकिब काफी उग्र हो गया और गाली गलौज करते हुए हमले का प्रयास किया. इस बीच साकिब ने हिबा राना को तीन बार तलाक देते हुए उसे अपने घर से धक्के मारकर बाहर निकाल दिया. साथ ही दोनों बच्चों को घर के कमरे में बंद कर दिया.  एफआईआर के मुताबिक पीड़िता मानसिक रूप से परेशान हो गई है और काफी डरी हुई है. पति साकिब और उसके ससुर की ओर से हिबा राना के परिवार को लगातार धमकी भी दी जा रही है. 

गाजियाबाद सुसाइड केस: तीन बहनों की मौत और ‘कोरियन लवर’ गेम की रहस्यमयी कहानी

 गाजियाबाद गाजियाबाद से सनसनीखेज मामला सामने आया है. जहां तीन सगी नाबालिग बहनों ने देर रात 9वीं मंज़िल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली. घटना बीती रात करीब 2:30 बजे की बताई जा रही है. घटना से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है. मृतक तीनों बहनें नाबालिग थीं. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार तीनों बहनें एक गेमिंग ऐप की आदी हो गई थीं. बताया जा रहा है कि वे ऑनलाइन टास्क-बेस्ड कोरियन लवर गेम खेला करती थीं. तीनों ने सामूहिक आत्महत्या क्यों की, इसका कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाया है. सुसाइड नोट में लिखा है मम्मी-पापा सॉरी सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. मामला गाजियाबाद के थाना टीला मोड़ क्षेत्र स्थित भारत सिटी का है. पुलिस का कहना है कि परिजनों से पूछताछ की जा रही है और मोबाइल फोन व डिजिटल गतिविधियों की भी जांच की जा रही है. फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की गहन जांच में जुटी है. मृतक लड़कियों ने नाम निशिका 16 साल, प्राची 14 साल, पाखी 12 साल है. पुलिस को एक पेज का सुसाइड नोट भी मिला है. जिस पर मम्मी- पापा सॉरी लिखा है.  स्थानीय लोगों का कहना है कि तीनों बहनें रात में एक साथ 9वें फ्लोर से कूद गईं. ऐसे में किसी चीज के नीचे गिरने और तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे. इस दौरान डराने वाला नजारा था. क्योंकि तीन डेडबॉडी जमीन पर पड़ी थीं और खून बह रहा था. जिसके बाद लड़कियों के परिजन भी मौके पर पहुंच गए. पुलिस को सूचना दी गई और पुलिस भी मौके पर पहुंच गई. इसके बाद पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा.  पुलिस ने क्या बताया? शालीमार गार्डन, पुलिस आयुक्त अतुल कुमार सिंह ने बताया कि रात्रि करीब 02.15 बजे पीआरवी द्वारा सूचना प्राप्त हुई. जिसमें कहा गया कि थाना टीलामोड़ स्थित भारत सिटी में टावर बी-1 फ्लैट नं0 907 की नवीं मंजिल की बालकनी से तीन बच्चियां कूद गईं. जिससे तीनों की मौत हो गई है. मौके पर पहुंचकर जांच की गई तो तीन बच्चियां क्रमश निशिका उम्र करीब 16 वर्ष, प्राची उम्र लगभग 14 वर्ष, पाखी उम्र लगभग 12 वर्ष पुत्रियां चेतन कुमार की जमीन पर गिरने के कारण मृत्यु हो गई है. जिनको एम्बुलेंस द्वारा 50 शैय्या अस्पताल लोनी भेजा गया. जहां पर डॉक्टरों द्वारा तीनों बच्चियों को मृत घोषित कर दिया गया. मामले में पुलिस द्वारा अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा रही है.  क्या है 'कोरियन लवर' गेम का रहस्य? गाजियाबाद के थाना टीला मोड़ स्थित भारत सिटी में देर रात करीब 2:30 बजे निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) ने नौवीं मंजिल से छलांग लगा दी. चेतन कुमार की ये तीनों बेटियां 'कोरियन लवर' नामक ऑनलाइन टास्क-बेस्ड गेम की आदी थीं. प्रारंभिक जांच में इस जानलेवा गेम की लत को ही सामूहिक आत्महत्या की वजह माना जा रहा है. पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर परिजनों से पूछताछ और मोबाइल फोन की डिजिटल जांच शुरू कर दी है. आधी रात को पसरा मातम सन्नाटे को चीरती हुई चीखों ने पूरी सोसाइटी को झकझोर कर रख दिया. तीनों बहनें एक साथ मौत के आगोश में समा गईं. पुलिस को घटनास्थल से एक पेज का सुसाइड नोट मिला है, जिस पर सिर्फ 'मम्मी पापा सॉरी' लिखा था. यह साधारण शब्द उस गहरे मानसिक दबाव की ओर इशारा कर रहे हैं, जो शायद उस गेम के टास्क ने पैदा किया था. क्या है 'कोरियन लवर' गेम का रहस्य? जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें अपनी डिजिटल दुनिया में खोई रहती थीं. वे एक कोरियन गेम के टास्क पूरा कर रही थीं. पुलिस अब उन मोबाइल फोन्स को खंगाल रही है, जिनमें छिपे टास्क ने इन मासूमों को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया.  फिलहाल, परिवार और पड़ोसियों के लिए यह यकीन करना मुश्किल है कि स्क्रीन के पीछे बैठा कोई अदृश्य खेल तीन जिंदगियां छीन लेगा. वहीं, गाजियाबाद पुलिस हर एंगल से जांच-पड़ताल में जुट गई है.  पिता ने कही ये बात  मृतक बहनों के पिता चेतन कुमार के मुताबिक, बेटियां कोरियन गेम खेलती थीं. कल आखिरी टास्क था. जांच के लिए पुलिस उनके फोन अपने साथ ले गई है. गेम में कुल कुल 50 टास्क थे, घटना वाले दिन यानी कल आखिरी था. कूदने के लिए बेटियों ने दो स्टेप वाली सीढ़ी का इस्तेमाल किया था. पुलिस का बयान  इस मामले में एसीपी अतुल कुमार ने बताया कि रात करीब 2.15 बजे पीआरवी द्वारा थाना टीलामोड़ स्थित भारत सिटी में टावर बी-1 फ्लैट नंबर 907 की नवीं मंजिल की बालकनी से तीन बच्चियों के कूदने की और मौके पर ही उनकी मृत्यु होने की सूचना प्राप्त हुई. फ़ौरन घटनास्थल पर पहुंचकर जांच की गई तो तीन बच्चियां- निशिका, प्राची, पाखी ग्राउंड पर बेसुध पाई गईं. उनको एम्बुलेंस द्वारा 50 शैय्या अस्पताल लोनी भेजा गया जहां पर डॉक्टरों द्वारा तीनों बच्चियों को मृत घोषित किया गया. अब पुलिस द्वारा आगे की वैधानिक कार्यवाही की जा रही है. 

BJP का बड़ा कदम: 2027 यूपी चुनाव से पहले अगले 15 दिनों में हो सकते हैं महत्वपूर्ण बदलाव

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी अलग-अलग मोर्चों की टीम बदलने की तैयारी में जुट गई है. सूत्रों के मुताबिक अगले 15 दिन के भीतर पार्टी में बदलाव होने की संभावना है. एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद संगठन में बड़ा बदलाव किया जा सकता है.  यूपी बीजेपी जल्द ही अनुसूचित जाति मोर्चे, किसान मोर्चा, युवा मोर्चा, महिला मोर्चा और अन्य मोर्चो के अध्यक्ष समेत टीम में बदलाव की संभावना है. माना जा रहा है कि 28 फरवरी से पहले ये पूरी प्रक्रिया हो जाएगी. एक बार इन तमाम मोर्चों में बदलाव होने के बाद पार्टी चुनावी मोड में जुट जाएगी.  बीजेपी के मोर्चों में बदलाव की तैयारी सूत्रों के मुताबिक बीजेपी के अलग-अलग मोर्चों के बदलाव में जातीय समीकरण का साधने पर ज़ोर दिया जा सकता है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वयं ओबीसी (कुर्मी) समाज से आते हैं. वहीं पश्चिमी यूपी में जाट, ब्रज में यादव और ब्राह्मणों को समीकरण देखने को मिल सकता हैं. जानकारों का मानना है कि सपा के पीडीए की काट की भी झलक भी इस नए बदलाव में दिखाई दे सकती है.   यूपी बीजेपी की ये कवायद आगामी पंचायत चुनाव, विधान परिषद की शिक्षक व स्नातक कोटे की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखी जा रही है. ताकि पार्टी का प्रदर्शन और मज़बूत हो सके और यूपी में लगातार तीसरी बार सरकार बनाई जा सके. सूत्रों के मुताबिक़ इन मोर्चों में 30-40 फ़ीसद तक फेरबदल हो सकता है.  विधानसभा चुनाव को लेकर कवायद तेज बीते दिनों बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की अध्यक्षता में लखनऊ में एक बैठक भी हो चुकी हैं. जिसमें पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ट, विभागों के अध्यक्ष, महामंत्री, संयोजक व अन्य पदाधिकारी शामिल हुए थे. इस बैठक में महामंत्री धर्मपाल सिंह भी मौजूद रहे थे. इस बैठक में विभिन्न मोर्चों में किए जाने वाले बदलाव को लेकर चर्चा की गई.  पंकज चौधरी ने इस बैठक के बाद कहा था कि पार्टी के विभिन्न विभाग और प्रकोष्ठों में काम करने वाले पदाधिकारियों को भूमिका काफी अहम होती है. संगठन में कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता है. समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों तक पार्टी की कार्यशैली और नीतियों की जानकारी पहुंचाने में इन मोर्चों को अहम भूमिका होता है. जिससे विभिन्न संगठन के लोग पार्टी के साथ जुड़ते हैं और पार्टी मजबूत होती है.  

सहायक शिक्षक नियुक्तियों की समीक्षा: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मांगी पूरी जांच

इलाहाबाद उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग के भीतर जड़ें जमा चुके भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। एक ऐतिहासिक फैसले में अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि पूरे उत्तर प्रदेश में सहायक अध्यापकों की नियुक्तियों की व्यापक जांच की जाए। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हथियाने वाले शिक्षकों को न केवल बर्खास्त किया जाए, बल्कि उनसे अब तक ली गई सैलरी की वसूली भी की जाए। 6 महीने के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को यह जिम्मेदारी सौंपी है। अदालत ने निर्देश दिया है कि पूरी जांच प्रक्रिया को छह महीने के भीतर पूरा किया जाए। हाईकोर्ट ने उन अधिकारियों को भी कड़ी चेतावनी दी है जिनकी मिलीभगत या लापरवाही की वजह से ऐसे फर्जी शिक्षक सिस्टम में बने रहे। अदालत ने आदेश दिया है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त दंडात्मक और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। 15 साल की सेवा के बाद खुली पोल यह पूरा मामला गरिमा सिंह नाम की एक शिक्षिका की याचिका से शुरू हुआ। गरिमा सिंह को जुलाई 2010 में देवरिया जिले के सलेमपुर विकास खंड के एक उच्चतर प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त किया गया था। वह लगभग 15 वर्षों से अपनी सेवा दे रही थीं। 2025 में एक शिकायत के आधार पर हुई जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और अन्य संबंधित अधिकारियों की जांच में पाया गया कि गरिमा सिंह ने जिन शैक्षिक दस्तावेजों और निवास प्रमाण पत्र का उपयोग किया था, वे फर्जी थे। असल में वे दस्तावेज किसी अन्य व्यक्ति के थे, जिनके नाम का सहारा लेकर उन्होंने धोखाधड़ी से नौकरी हासिल की थी। इसके बाद अगस्त 2025 में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) देवरिया ने उनकी नियुक्ति रद्द कर दी थी। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए जताई चिंता गरिमा सिंह ने अपनी बर्खास्तगी को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनके वकील का तर्क था कि वह 15 साल से निष्कलंक सेवा दे रही हैं और नियुक्ति के समय उनके दस्तावेजों का वेरिफिकेशन हो चुका था। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति चौहान ने टिप्पणी की कि "धोखाधड़ी से प्राप्त लाभ का लाभ उठाने वाला व्यक्ति किसी भी तरह की रियायत या जांच का हकदार नहीं है।" अदालत ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा प्रणाली में फर्जी प्रमाण पत्रों के बढ़ते पैटर्न पर गहरी चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि कई सहायक अध्यापक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बरसों से नौकरी कर रहे हैं और यह सब प्रबंधन या शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। छात्रों का भविष्य सबसे ऊपर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अधिकारियों की निष्क्रियता न केवल धोखाधड़ी को बढ़ावा देती है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की नींव पर प्रहार करती है। अदालत के अनुसार, छात्रों का हित सर्वोपरि है और अयोग्य शिक्षकों द्वारा बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा के साथ समझौता नहीं किया जा सकता।  

टैरिफ में की गई ऐतिहासिक कटौती सीएम योगी के $1 ट्रिलियन इकोनॉमी विजन को देगी मजबूती

लखनऊ  भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में संपन्न हुई आर्थिक साझेदारी और अमेरिकी टैरिफ में की गई कटौती ने उत्तर प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक संभावनाओं को नई दिशा दे दी है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लागू टैरिफ को पहले के लगभग 50 प्रतिशत स्तर से घटाकर औसतन 18 प्रतिशत कर दिया है। यह निर्णय भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे भारत की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक और दृढ़ नेतृत्व का परिणाम है, जिसमें भारत ने अपनी नीतियों पर अडिग रहते हुए वैश्विक शक्तियों के साथ समानता के आधार पर संवाद किया। वैश्विक भरोसे की कसौटी पर खरा उतरा भारत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फार्मा कॉन्क्लेव में स्पष्ट शब्दों में कहा कि 2014 से पहले जिस भारत को गंभीरता से नहीं लिया जाता था, आज वही भारत अपनी नीतियों पर दृढ़ रहते हुए वैश्विक शक्तियों को भी संवाद और सहयोग के लिए विवश कर रहा है। भारत अब अपनी शर्तों पर आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी टैरिफ में की गई यह कटौती इसी बदले हुए वैश्विक दृष्टिकोण का प्रमाण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब भारतीय निर्यातकों पर लगने वाला अतिरिक्त ‘पेनल्टी टैरिफ’ हट चुका है और केवल रेसिप्रोकल टैक्स स्ट्रक्चर लागू है, जिससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में पहले से कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी बन गए हैं। एमएसएमई और ओडीओपी सेक्टर को मिलेगा सीधा और दीर्घकालिक लाभ अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए जाने वाले आयात शुल्क में की गई कटौती का व्यापक और प्रत्यक्ष असर उत्तर प्रदेश के एमएसएमई और ओडीओपी सेक्टर पर पड़ने वाला है। भदोही के हस्तनिर्मित कालीन, मुरादाबाद के पीतल व धातु उत्पाद, आगरा का चमड़ा उद्योग, वाराणसी की रेशमी साड़ियां और कन्नौज का पारंपरिक इत्र अब अमेरिकी बाजार में पहले की तुलना में कम लागत और बेहतर लाभांश के साथ पहुंच सकेगा। अब तक ऊंचे टैरिफ के कारण ये उत्पाद कीमत के मामले में चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से पिछड़ जाते थे, लेकिन शुल्क में कमी के बाद उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती से खड़े हो सकेंगे।  आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल निर्यात ऑर्डर बढ़ेंगे, बल्कि सीधे निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता घटेगी और कारीगरों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिलेगा। इसका सकारात्मक असर रोजगार पर भी दिखाई देगा। उत्पादन बढ़ने से बुनकरों, शिल्पकारों, कारीगरों और छोटे उद्योगों में काम करने वाले लाखों लोगों को नियमित रोजगार मिलेगा, वहीं नई यूनिट्स की स्थापना से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।  डिफेंस कॉरिडोर में तकनीक का होगा प्रवेश भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ में कटौती और व्यापारिक रिश्तों में आई मजबूती का प्रभाव अब रणनीतिक क्षेत्रों तक भी महसूस किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब दो देश व्यापार और निवेश के मोर्चे पर एक-दूसरे के प्रति भरोसा जताते हैं, तो उसका स्वाभाविक विस्तार रक्षा और उन्नत तकनीक जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी होता है। इसी क्रम में भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते सहयोग का सकारात्मक असर उत्तर प्रदेश के डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर भी दिख सकता है। झांसी, कानपुर, लखनऊ, अलीगढ़ और आगरा जैसे रणनीतिक नोड्स अब केवल असेंबली यूनिट्स तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि यहां टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, संयुक्त उपक्रमों और उच्चस्तरीय अनुसंधान के माध्यम से उन्नत रक्षा उपकरणों के निर्माण की संभावनाएं आकार ले रही हैं।  जानकारों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा कंपनियों के साथ संभावित सहयोग से ड्रोन सिस्टम, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, संचार एवं राडार सिस्टम तथा अत्याधुनिक कंपोनेंट्स का निर्माण प्रदेश में ही संभव हो सकता है। टैरिफ में कटौती से बने अनुकूल निवेश माहौल और भारत की नीतिगत स्थिरता ने विदेशी कंपनियों का भरोसा बढ़ाया है, जिसका लाभ रक्षा क्षेत्र को भी मिलने की संभावना जताई जा रही है। इससे न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त होगी।  इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के युवाओं को मिलने वाला है। उन्नत मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा तकनीक से जुड़े प्रोजेक्ट्स के कारण इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही एमएसएमई सेक्टर को भी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने का अवसर मिलेगा, जिससे स्थानीय उद्योगों को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी। आईटी, जीसीसी और डेटा सेंटर सेक्टर को मिलेगी गति भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ में कटौती और द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों में आई मजबूती का असर केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार उच्च तकनीक और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब वैश्विक स्तर पर व्यापार बाधाएं कम होती हैं और नीतिगत स्थिरता का संकेत मिलता है, तो अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों के लिए निवेश निर्णय लेना आसान हो जाता है। इसी पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश की जीसीसी नीति-2024 को नया बल मिलता नजर आ रहा है। नोएडा और लखनऊ में विकसित हो रहा एआई, आईटी और डेटा सेंटर इकोसिस्टम अब अमेरिकी और अन्य वैश्विक टेक कंपनियों के लिए अधिक आकर्षक बनता जा रहा है। टैरिफ कटौती से आईटी हार्डवेयर, सर्वर, नेटवर्किंग उपकरण और सेमीकंडक्टर से जुड़ी आयात लागत में संभावित कमी आने से डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स की आर्थिक संभाव्यता और बेहतर होगी। इससे बड़े पैमाने पर कैपिटल-इंटेंसिव निवेश को गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। जानकारों का मानना है कि अनुकूल व्यापार माहौल और मजबूत भारत-अमेरिका तकनीकी सहयोग के चलते नोएडा, ग्रेटर नोएडा और लखनऊ जैसे शहर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के नए हब के रूप में उभर सकते हैं। इन केंद्रों के माध्यम से क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, फिनटेक और एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में उच्चस्तरीय कार्य होंगे, जिससे प्रदेश के युवाओं को वैश्विक स्तर के रोजगार के अवसर मिलेंगे।  राज्य सरकार का फोकस डेटा सेंटर, एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और स्थिर बिजली आपूर्ति जैसे बुनियादी ढांचे पर है। इन कारकों और टैरिफ कटौती से बने सकारात्मक वैश्विक माहौल के चलते डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और आईटी सेवाओं में आने वाले वर्षों में हजारों करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं बन सकती हैं। … Read more