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योगी आदित्यनाथ की सरकार के एसटीईएम विजन को मिला राष्ट्रीय मंच, निखरीं ग्रामीण प्रतिभाएं

सरकारी स्कूल से आईआईटी बॉम्बे तक उड़ान: संभल के बच्चों ने रचा इतिहास योगी आदित्यनाथ की सरकार के एसटीईएम विजन को मिला राष्ट्रीय मंच, निखरीं ग्रामीण प्रतिभाएं परिषदीय विद्यालयों के छात्रों ने टेकफेस्ट-2025 में इंजीनियरिंग छात्रों के समक्ष प्रस्तुत की चुनौती कोज्मोक्लेंच और मेसमराइज जैसी जटिल रोबोटिक्स स्पर्धाओं में सहभागिता कर प्रतिभा का मनवाया लोहा संभल  योगी आदित्यनाथ सरकार की गुणवत्तापरक शिक्षा नीति, एसटीईएम आधारित नवाचार और समान अवसरों के विजन का प्रभाव अब राष्ट्रीय मंच पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। संभल के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले परिषदीय पृष्ठभूमि के बच्चों ने वह उपलब्धि हासिल की है, जिसे अब तक बड़े और प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों तक सीमित माना जाता रहा है। इन विद्यार्थियों ने IIT Bombay के टेकफेस्ट 2025 में भाग लेकर तकनीकी उत्कृष्टता का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है। योगी सरकार की एसटीईएम विजन को मिला राष्ट्रीय मंच सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन द्वारा प्रशिक्षित संभल जनपद के विद्यार्थियों ने एशिया के प्रतिष्ठित विज्ञान एवं तकनीकी महोत्सव टेकफेस्ट 2025 में कोज्मोक्लेंच और मेसमराइज जैसी जटिल रोबोटिक्स स्पर्धाओं में सहभागिता की। कक्षा 4 से 9 तक के इन छात्रों ने देशभर के बीटेक विद्यार्थियों की 250 से अधिक टीमों को सीधी चुनौती दी। उनके तकनीकी कौशल और नवाचार क्षमता से प्रभावित होकर आईआईटी बॉम्बे ने विद्यार्थियों को तकनीकी उत्कृष्टता के लिए विशेष प्रशंसा तथा उत्कृष्टता प्रमाण पत्र से सम्मानित किया। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि परिषदीय विद्यालयों के छात्र भी उच्च स्तरीय तकनीकी मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने में सक्षम हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद इन बच्चों ने रोबोटिक्स जैसी जटिल विधाओं में अपनी दक्षता दिखाई और इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों के समक्ष कड़ी प्रतिस्पर्धा प्रस्तुत की। प्रशासनिक संबल और गुणवत्तापरक शिक्षा बन रही पहचान इस सफलता के पीछे योगी आदित्यनाथ की सरकार के शिक्षा सुधारों की स्पष्ट भूमिका दिखाई देती है। एसटीईएम शिक्षा पर विशेष फोकस, अवसरों की समानता और जमीनी स्तर पर प्रशासनिक सहयोग ने इन विद्यार्थियों को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का अवसर दिया। जिलाधिकारी डॉ राजेन्द्र पैंसिया के संरक्षण में चयनित 11 मेधावी छात्र, जिनमें बालिकाएं, दिव्यांग तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थी भी शामिल थे, शिक्षक दल के साथ मुंबई पहुंचे। बेसिक शिक्षा अधिकारी अलका शर्मा ने बताया कि ये विद्यार्थी इससे पहले आईआईटी दिल्ली और आईआईटी कानपुर में भी पुरस्कृत हो चुके हैं। अब आईआईटी बॉम्बे में दो रोबोटिक्स स्पर्धाओं में सम्मान प्राप्त कर संभल ने शिक्षा और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ा है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की शिक्षा नीति गांव देहात की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में सफल हो रही है।

बिना गारंटी और बिना ब्याज के 5 लाख रुपये तक का आसान लोन, सरकार की नई योजना

लखनऊ  केंद्र और राज्‍य की सरकारें गरीब और मध्‍यम वर्ग को आगे बढ़ाने के लिए कई सरकारी योजनाएं चलाती हैं. कुछ योजना वित्तीय सहायत देती हैं, तो कुछ योजना के तहत कारोबार शुरू करने के लिए लोन दिया जाता है. आज इसी तरह की एक योजना के बारे में बता रहे हैं, जिसके तहत आप लोन लेकर कोई भी कारोबार शुरू कर सकते हैं.  यह योजना बिना ब्‍याज और बिना गारंटी पर लोन देती है और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित है. योगी सरकार युवाओं और गरीब परिवारों को आगे बढ़ाने के लिए यह लोन योजना चला रही है. इस योजना का नाम 'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (MYUVA)' है. यह योजना 5 लाख रुपये तक का लोन बिना ब्‍याज और बिना गारंटी पर देती है.  8वीं पास भी ले सकता है ये लोन?  अगर कोई युवा इस योजना के तहत अप्‍लाई करता है और 5 लाख रुपये तक का लोन लेना चाहते हैं तो उसकी आयु 21 से 40 वर्ष की आयु के बीच होनी चाहिए . इसके तहत न्‍यूनतम शिक्षा योग्‍यता 8वीं पास होनी चाहिए और मान्‍यता प्राप्‍त संस्‍थान से स्किल ट्रेनिंग सर्टिफिकेट या डिग्री प्राप्‍त होना चाहिए. पीएम स्वनिधि योजना को छोड़कर आवेदक को किसी अन्य केंद्र या राज्‍य सरकार की योजना (जिसमें ब्याज या पूंजी शामिल हो) का लाभ नही मिल रहा होना चाहिए.  क्‍या है इस योजना का उद्देश्‍य?  इस योजना का उद्देश्‍य 21 से 40 साल की आयु वाले युवक और युवतियों को आत्‍मनिर्भर बनाना और उन्‍हें अपने कारोबार शुरू करने के लिए प्रेरित करना है और  उन्‍हें अपने कारोबार शुरू करने के लिए प्रेरित करना है. इसका मकसद राज्‍य से ज्‍यादा से ज्‍यादा उद्यमी उभरकर निकलें. मुख्यमंत्री युवा उद्यमी अभियान योजना के तहत 10 साल में 10 लाख युवाओं को स्‍वरोजगार देना है. कैसे कर सकते हैं अप्‍लाई?  सबसे पहले आपको MSME पोर्टल msme.up.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा. फिर जिला उद्योग प्रोत्‍साहन और उद्यमिता विकास केंद्र पर इस ऑनलाइन आवेदन की जांच की जाएगी और जांच के बाद बैंक को ये फॉर्म भेजा जाएगा. इसके बाद बैंक की ओर से इस आवेदन की जांच और लोन अप्रूव किया जाएगा, जिसके बाद लोन देने की व्‍यवस्‍था की जाएगी.  5 लाख योजना लेने के लिए क्‍या-क्‍या देना हेागा?  इस लोन के बदले कोई भी ब्‍याज देने की आवश्‍यकता नहीं है. 4 साल तक इस लोन को जमा करना होगा. अगर आप यह लोन लेते हैं तो किसी भी तरह की गारंटी भी देने की आवश्‍यकता नहीं है. लेकिन इसके बदले आपको कुछ डिपॉजिट करना होगा. जनरल को 15 फीसदी, OBC को 12.5 फीसदी, SC/ST और दिव्‍यांग को 10 फीसदी का कंट्रीब्‍यूशन देना होगा. सब्सिडी भी मिलेगी उत्तर प्रदेश सरकार की यह योजना प्रोजेक्‍ट के तहत 10 फीसदी मार्जिन मनी भी दी जाएगी. अगर 2 साल तक बिजनेस का सफल संचालन होगा तो यह मार्जिन मनी सब्सिडी में बदल जाएगी. इसका मतलब है कि आपको यह पैसा लौटाने की जरूरत नहीं है. 

धर्म-आस्था का वैश्विक इतिहास: 2025 में अयोध्या और काशी में रिकॉर्डतोड़ भीड़, उत्तर प्रदेश बना विश्व विजेता

अयोध्या  साल 2025 उत्तर प्रदेश के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के विजन के चलते आज यूपी न केवल भारत का, बल्कि पूरी दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन केंद्र बनकर उभरा है। अयोध्या में राम मंदिर की भव्यता और काशी विश्वनाथ धाम के दिव्य स्वरूप ने श्रद्धालुओं की संख्या में वो उछाल लाया है, जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक नामुमकिन थी। रिकॉर्ड तोड़ आंकड़ों ने सबको चौंकाया पर्यटन विभाग द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 2025 में उत्तर प्रदेश में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या ने पिछले सभी दशकों के रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों पर दर्शनार्थियों की संख्या करोड़ों में पहुंच गई है। यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि यूपी की अर्थव्यवस्था के लिए एक नई संजीवनी साबित हो रही है। अयोध्या: दुनिया की नई आध्यात्मिक राजधानी रामलला के विराजमान होने के बाद अयोध्या की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। अब यहां न केवल देश के कोने-कोने से, बल्कि विदेशों से भी भारी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। हाई-टेक रेलवे स्टेशन, इंटरनेशनल एयरपोर्ट और चौड़ी सड़कों ने श्रद्धालुओं की राह आसान कर दी है। 2025 में अयोध्या में उमड़ी भीड़ ने यह साबित कर दिया है कि यह शहर अब दुनिया का प्रमुख टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन चुका है। काशी और मथुरा का कायाकल्प काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के बाद बनारस की गलियों में अब आस्था का नया उत्साह दिखता है। गंगा आरती से लेकर मणिकर्णिका घाट तक, हर जगह श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। वहीं, मथुरा-वृंदावन में भी 'बांके बिहारी कॉरिडोर' और अन्य विकास कार्यों के चलते भक्तों का रेला लगा हुआ है। ब्रज क्षेत्र में भी पर्यटन की अपार संभावनाओं ने स्थानीय रोजगार को पंख लगा दिए हैं।   बुनियादी ढांचे का बड़ा योगदान पर्यटन में इस ऐतिहासिक वृद्धि का मुख्य कारण यूपी का आधुनिक ढांचा है। कनेक्टिविटी एक्सप्रेसवे और नए हवाई अड्डों ने यात्रा का समय आधा कर दिया है। सुविधाएं तीर्थस्थलों पर बेहतर ठहरने की व्यवस्था और सुरक्षा के कड़े इंतजामों ने पर्यटकों का भरोसा जीता है। डिजिटल दर्शन ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग और दर्शन की सुगम व्यवस्था ने भीड़ प्रबंधन को आसान बनाया है। अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिली नई दिशा धार्मिक पर्यटन के इस केंद्र बनने से उत्तर प्रदेश में होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यापार में भारी तेजी आई है। लाखों युवाओं को गाइड, होटल मैनेजमेंट और अन्य सेवाओं में रोजगार के अवसर मिले हैं। पर्यटन अब यूपी की 'ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी' के लक्ष्य को पूरा करने का सबसे बड़ा इंजन बन गया है।

सीएम योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह- 2026 के लिए तय किया गया ‘जीरो फेटेलिटी’ का लक्ष्य

परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायती राज और सूचना विभाग समन्वित रूप से चलाएगा प्रदेशव्यापी अभियान नो हेलमेट, नो फ्यूल का चलेगा प्रदेशव्यापी अभियान, दोपहिया वाहन चालकों को किया जाएगा जागरूक लखनऊ- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को शून्य करने के लक्ष्य के साथ राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह को ‘जीरो फेटेलिटी माह’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह- 2026, 01 जनवरी से शुरू होकर 31 जनवरी तक चलेगा । इस दौरान प्रदेश का परिवहन, पुलिस, लोक निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायती राज और सूचना विभाग सहित सभी संबंधित स्टेकहोल्डर विभागों को समन्वित रूप से कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इस क्रम में प्रदेश के सभी जनपदों में 25 दिसंबर से जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें सड़क सुरक्षा माह के दौरान चलाये जाने वाले विशेष अभियानों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। प्रदेश में 363 हाई रिस्क कॉरिडोर चिह्नित, होगी सख्त प्रवर्तन कार्रवाई सीएम के विजन के अनुरूप राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह में जीरो फेटेलिटी के लक्ष्य को पाने के उद्देश्य से प्रदेश के परिवहन एवं पुलिस विभाग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस क्रम में प्रदेश में 363 हाई रिस्क कॉरिडोर चिह्नित किये हैं, जहां सख्त प्रवर्तन अभियान चलाये जाएंगे। इसके साथ ही पहले से चल रही जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना के तहत चुने गये 20 जनपदों में 233 क्रिटिकल पुलिस थाना क्षेत्रों का चयन किया गया है। जिनमें विशेष अभियान चलाकर दुर्घटनाओं पर नियंत्रण सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही शराब पीकर वाहन चलाने, ओवरस्पीडिंग, लेन उल्लंघन, गलत दिशा में वाहन चलाने, हेलमेट व सीट-बेल्ट न पहनने, रिफ्लेक्टर टेप, फॉग लाइट, बिना परमिट व बिना फिटनेस संचालित वाहनों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने के दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। स्वास्थ्य विभाग कर रहा इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्रोटोकॉल में सुधार   जनवरी माह में “नो हेलमेट, नो फ्यूल” का प्रदेशव्यापी अभियान चलाया जाएगा, ताकि दोपहिया चालकों में हेलमेट पहनने की आदत विकसित की जा सके। रोड एक्सीडेंट से होने वाली मौतों की संख्या में कमी लायी जा सके। लोक निर्माण विभाग व अन्य रोड ओनिंग एजेंसियों को चिह्नित किये गये 1484 ब्लैक स्पॉट्स पर अल्पकालिक सुधार कार्यों जैसे- रोड मार्किंग, साइनेज और क्रैश बैरियर लगाने का कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग द्वारा इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्रोटोकॉल सुधारने, एएलएस एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाने तथा ट्रॉमा केयर सेंटरों में गैप, इंफ्रास्ट्रक्चर और मैनपावर की कमी दूर करने के जरूरी प्रयास किये जा रहे हैं। शिक्षा और सूचना विभाग चलायेगा जागरूकता अभियान पंचायती राज विभाग, प्रत्येक ग्राम सभा में सड़क सुरक्षा पर बैठकें आयोजित करेगा, जो ग्रामीण स्तर पर जागरूकता बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में पड़ने वाली सड़कों पर दुर्घटनाओं में कमी लाने के जरूरी इंतजाम को सुनिश्चित करेगीं। तो वहीं शिक्षा विभाग स्कूलों में चित्रकला, भाषण और नाटक प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करेगा, जबकि सूचना विभाग परिवहन विभाग के साथ मिलकर यातायात नियमों के व्यापक प्रचार-प्रसार का कार्य को अंजाम देगा। सरकार का लक्ष्य है कि इन समन्वित प्रयासों से विशेषकर राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह, जनवरी 2026 में सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जाए और सीएम योगी आदित्यनाथ के ‘जीरो फेटेलिटी’ के सपने को साकार किया जा सके। साथ ही इस अभियान को आगे भी लागू किया जाएगा।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को यमुना, ईस्टर्न पेरिफेरल और दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे से मिलेगी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी

  RRTS और रेल नेटवर्क से दिल्ली–हावड़ा व दिल्ली–मुंबई कॉरिडोर से सीधा जुड़ाव ग्रीन एनर्जी, ईवी और सोलर सेक्टर में निवेश से रोजगार और निर्यात को नई रफ्तार लखनऊ/नोएडा,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र को देश के सबसे महत्वाकांक्षी मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब (MMTH) के रूप में विकसित कर रही है। इस समग्र योजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को निवेश, उद्योग, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के क्षेत्र में राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। इस पूरे विजन का केंद्र नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर है, जो पूर्ण होने के बाद उत्तर भारत का सबसे बड़ा एविएशन और लॉजिस्टिक्स गेटवे बनेगा। निर्बाध कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने पर फोकस यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के एसीईओ शैलेन्द्र कुमार भाटिया ने बताया कि योगी सरकार की प्राथमिकता है कि एयर, रोड, रेल, आरआरटीएस और एक्सप्रेसवे—पांचों माध्यमों से निर्बाध कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाए। इसके तहत 8 लेन एक्सेस कंट्रोल यमुना एक्सप्रेसवे को एयरपोर्ट से सीधे जोड़ा गया है, जिससे दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक तेज आवाजाही संभव होगी। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के माध्यम से हरियाणा और उत्तराखंड की सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी, जबकि दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे बल्लभगढ़ इंटरचेंज के जरिए जेवर एयरपोर्ट से जुड़कर देश के सबसे बड़े औद्योगिक और वाणिज्यिक कॉरिडोर को सीधा लाभ पहुंचाएगा। नॉर्थ और ईस्ट डेडिकेटेड एक्सेस रोड विकसित करने की योजना लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार ने एयर कार्गो हेतु नॉर्थ और ईस्ट डेडिकेटेड एक्सेस रोड विकसित करने की योजना बनाई है, जिससे भारी मालवाहक वाहनों को शहरों में प्रवेश किए बिना एयरपोर्ट तक सीधा रास्ता मिलेगा। इसके साथ ही भविष्य में गंगा एक्सप्रेसवे और NH-34 को YEIDA सेक्टर और यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ने की तैयारी है, जिससे पूर्वांचल, मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। RRTS नेटवर्क से दिल्ली और एनसीआर से जुड़ेगा YEIDA सेक्टर शहरी परिवहन को आधुनिक बनाने की दिशा में प्रस्तावित RRTS नेटवर्क के जरिए दिल्ली और एनसीआर से YEIDA सेक्टर और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जोड़ने की योजना है। इसके अलावा औद्योगिक इकाइयों और एयरपोर्ट के लिए रेल कनेक्टिविटी भी विकसित की जा रही है, जिसमें दिल्ली–हावड़ा और दिल्ली–मुंबई रेल कॉरिडोर से सीधा जुड़ाव शामिल है। इससे माल परिवहन की लागत कम होगी और निर्यात को नई गति मिलेगी। EMC पार्क में बड़े पैमाने पर हो रहा निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ योगी सरकार की उद्योग-हितैषी नीतियों का असर यह है कि यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक क्षेत्र और EMC पार्क में बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एचसीएल–फॉक्सकॉन समूह की वामा सुंदरी इन्वेस्टमेंट द्वारा सेमीकंडक्टर टेस्टिंग सुविधा, हैवेल्स इंडिया की एंकर यूनिट, डिक्सन टेक्नोलॉजीज, एडिटेक सेमीकंडक्टर्स, एसेंट के सर्किट जैसी कंपनियां इस क्षेत्र को हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग हब बना रही हैं। ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर में भारी निवेश इसके अतिरिक्त ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर में एस्कॉर्ट कुबोटा, मिंडा कॉर्पोरेशन, नीनजास इलेक्ट्रिक जैसी कंपनियों के निवेश से रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सैल सोलर, एंबर एंटरप्राइजेज और इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरर्स वेलफेयर ट्रस्ट जैसी इकाइयों की मौजूदगी उत्तर प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वहीं पाइन वैली वेंचर और डेकी इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे प्रोजेक्ट्स टेक्सटाइल और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स सेक्टर को मजबूती दे रहे हैं। लाखों युवाओं के लिए उपलब्ध हो रहे रोजगार के अवसर सरकार का मानना है कि मजबूत कनेक्टिविटी, आधुनिक लॉजिस्टिक्स और उद्योगों के अनुकूल वातावरण से YEIDA क्षेत्र लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगा।

31 दिसंबर को मनाई जाएगी श्रीरामलला प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ

27 दिसंबर से शुरू होंगे धार्मिक अनुष्ठान, 2 जनवरी तक चलेंगे कार्यक्रम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह होंगे मुख्य अतिथि, सीएम योगी की भी रहेगी उपस्थिति मां अन्नपूर्णा मंदिर में ध्वजारोहण, प्रतिष्ठा द्वादशी में विशिष्ट सहभागिता अयोध्या,  रामनगरी अयोध्या में भगवान श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ आगामी 31 दिसंबर 2025 को श्रद्धा, भव्यता और धार्मिक उल्लास के साथ मनाई जाएगी। श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को संपन्न हुई थी, लेकिन वर्षगांठ का निर्धारण हिंदू पंचांग के अनुसार किया जा रहा है। इसी परंपरा के तहत पहली वर्षगांठ 11 जनवरी 2025 को मनाई गई थी। दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत 27 दिसंबर 2025 से होगी। मुख्य समारोह 31 दिसंबर को आयोजित किया जाएगा, जबकि पूजन-अनुष्ठान और अन्य धार्मिक कार्यक्रम 2 जनवरी 2026 तक चलते रहेंगे। इस भव्य आयोजन में देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। पूजन-अनुष्ठान जगद्गुरु मध्वाचार्य जी की देखरेख में संपन्न कराए जाएंगे। कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत 29 दिसंबर से सांस्कृतिक आयोजनों की शुरुआत होगी, जिसमें विविध धार्मिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी।श्रद्धालुओं की सुविधा और सुव्यवस्थित आवागमन को ध्यान में रखते हुए अंगद टीला तक पहुंचने के लिए सुग्रीव पथ से आने-जाने की व्यवस्था की गई है।इसी क्रम में 31 दिसंबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर में ध्वजारोहण भी करेंगे। वे प्रतिष्ठा द्वादशी कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उनके साथ उपस्थित रहेंगे। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े गोपाल जी ने आयोजित कार्यकर्ताओं की बैठक में इन कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयोजन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। रामनगरी में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत और सुचारु व्यवस्था के लिए व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आईटी सेक्टर को मिला नया विस्तार

लखनऊ  उत्तर प्रदेश तेजी से देश के प्रमुख आईटी और डिजिटल हब के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू की गई नीतियों और मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था का असर अब धरातल स्टार पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। प्रदेश में आईटी कंपनियों का लगातार विस्तार हो रहा है, जो रोजगार सृजन निवेश और तकनीकी नवाचार के नए अवसर पैदा कर रही हैं। इनमें से सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 400 आईटी कंपनियां पंजीकृत हैं।    उत्तर प्रदेश में संचालित आईटी कंपनियों में स्टार्टअप्स, मध्यम उद्यम और वैश्विक स्तर की बड़ी कंपनियां शामिल हैं। ये कंपनियां मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, आईटीईएस, क्लाउड सर्विसेज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित सेवाओं पर कार्य कर रही हैं। आईटी विशेषज्ञ प्रदीप यादव का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टेक्नोलॉजी सेक्टर को बढ़ावा देने विज़न से आईटी कंपनियों का उत्तर प्रदेश की ओर रुझान बढ़ रहा है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े आईटी गंतव्य के रूप में स्थापित हो चुके हैं। जो डेटा सेंटर और नई तकनीकों पर आधारित सेवाएं प्रदान करने का काम कर रही हैं। इसके अलावा कानपुर और वाराणसी जैसे शहर भी तेजी से उभरते डिजिटल केंद्र बन रहे हैं, जिससे प्रदेश के संतुलित विकास को मजबूती मिल रही है। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 400 इकाइयां पंजीकृत हैं। ये इकाइयां आईटी निर्यात में अहम भूमिका निभा रही हैं। आईटी विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2026  तक प्रदेश में एसटीपीआई पंजीकृत इकाइयों की संख्या 500 से अधिक हो जाएगी। उत्तर प्रदेश में माइक्रोसॉफ्ट, टीसीएस, एचसीएल, विप्रो, इंफोसिस, पेटीएम और एडोब जैसी प्रमुख कंपनियां बड़े स्तर पर संचालन कर रही हैं। इसके साथ ही लगभग 90 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) स्थापित किए जा चुके हैं, जहां रिसर्च और उच्च स्तरीय सेवाओं पर काम हो रहा है। इन कंपनियों की मौजूदगी से प्रदेश के युवाओं को वैश्विक स्तर पर काम करने का अवसर मिल रहा है। सरकार की स्किल डेवलपमेंट योजनाओं के अंतर्गत युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कड़ाके की ठंड से यूपी कांपा, कोहरे-शीतलहर के बीच प्रशासन ने स्कूलों में छुट्टी का ऐलान

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में कड़ाके की ठंड और भीषण शीतलहर का प्रकोप जारी है। गिरते तापमान और सुबह के समय छाने वाले घने कोहरे को देखते हुए प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम उठाए हैं। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में जिलाधिकारियों ने स्कूलों को बंद करने या उनके समय में बदलाव करने के निर्देश जारी किए हैं।   भीषण ठंड के कारण स्कूल बंद शीतलहर की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के कई प्रमुख जिलों में कक्षा 1 से 8वीं तक के स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मेरठ और आगरा जैसे जिलों में स्कूलों को अगले कुछ दिनों के लिए बंद रखने का निर्णय लिया गया है। कुछ जिलों में यह अवकाश फिलहाल दो से तीन दिनों के लिए है, लेकिन यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो इसे बढ़ाया भी जा सकता है। यह आदेश सरकारी, सहायता प्राप्त और सभी निजी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा। समय में हुआ बदलाव जिन जिलों में स्कूलों को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है, वहां बच्चों को सुबह की ठिठुरन से बचाने के लिए समय में बदलाव किया गया है। अब अधिकांश स्कूल सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच संचालित किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सुबह के समय विजिबिलिटी बहुत कम होती है, जिससे स्कूली वाहनों के साथ दुर्घटना का खतरा बना रहता है। इसलिए सुबह जल्दी स्कूल खोलने पर पाबंदी लगा दी गई है। मौसम विभाग का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में ठंड से राहत मिलने की उम्मीद कम है। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का सीधा असर यूपी के तापमान पर पड़ रहा है। पछुआ हवाओं के कारण 'कोल्ड डे' की स्थिति बनी हुई है। कोहरे के कारण सड़कों पर यातायात प्रभावित है और ट्रेनें भी देरी से चल रही हैं। प्रशासन ने अभिभावकों को सलाह दी है कि वे बच्चों को ठंड से बचाकर रखें और केवल जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे सरकारी आदेशों का पालन करें। यदि कोई स्कूल इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्कूलों को यह भी कहा गया है कि वे ऑनलाइन क्लास के विकल्प पर विचार कर सकते हैं ताकि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो।

विदेश से चल रहा था मदरसा नेटवर्क? लंदन में बसे आजमगढ़ के मौलाना पर ED का शिकंजा

आजमगढ़  प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ब्रिटेन में रह रहे आजमगढ़ के इस्लामिक उपदेशक मौलाना शम्सुल हुदा खान के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर लिया है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश एटीएस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है। ईडी ने मौलाना के खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियों के अनुसार, शम्सुल हुदा खान पर कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने और धार्मिक शिक्षा की आड़ में अवैध फंडिंग करने के गंभीर आरोप हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक, शम्सुल हुदा खान की नियुक्ति वर्ष 1984 में आजमगढ़ के एक सरकारी सहायता प्राप्त मदरसे में सहायक शिक्षक के रूप में हुई थी। हालांकि 2013 में उन्होंने ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर ली, इसके बावजूद आरोप है कि वे 2013 से 2017 तक भारत में वेतन लेते रहे थे। इस समय वे न तो भारतीय नागरिक थे और न ही शिक्षण कार्य कर रहे थे। इस दौरान वे ब्रिटेन में रहकर धार्मिक प्रवचन देते रहे और भारत की सरकारी व्यवस्था उनकी अनुपस्थिति पर दस वर्षों तक आंख मूंदे रही। जांच में सामने आया है कि बीते दो दशकों में शम्सुल हुदा खान ने कई देशों की यात्राएं कीं और भारत में संचालित 7 से 8 बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये प्राप्त किए। ईडी के अनुसार, उन्होंने 30 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की एक दर्जन से ज्यादा अचल संपत्तियां भी खरीदीं। बताया गया है कि उन्होंने राजा फाउंडेशन नामक एनजीओ और अपने निजी खातों के माध्यम से विभिन्न मदरसों को धन मुहैया कराया। कहां-कहां स्थापित किए मदरसे शम्सुल हुदा खान ने आजमगढ़ और संत कबीर नगर में दो मदरसे स्थापित किए थे, जिनकी मान्यता बाद में अधिकारियों द्वारा रद्द कर दी गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन संस्थानों के जरिए विदेशी धन के उपयोग और कट्टरपंथी गतिविधियों की आशंका है। सूत्रों के मुताबिक, शम्सुल हुदा खान के ब्रिटेन स्थित कट्टरपंथी संगठनों से संबंधों की जांच की जा रही है। इसके अलावा, उनके पाकिस्तान दौरे और वहां के चरमपंथी संगठनों से कथित संपर्क भी जांच के दायरे में हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि वह पाकिस्तानी कट्टरपंथी संगठन ‘दावत-ए-इस्लामी’ से जुड़ा हो सकता है। अवैध वेतन में कई अधिकारी 25 दिसंबर को इस मामले में बड़ा खुलासा भी हुआ। जांच में सामने आया कि शम्सुल हुदा खान को अवैध रूप से वेतन, मेडिकल लीव और अंततः स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के सभी लाभ दिलाने में कई अधिकारी शामिल थे। इसके बाद यूपी सरकार ने चार वरिष्ठ अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों संयुक्त निदेशक एसएन पांडेय, गाजियाबाद के डीएमओ साहित्य निकाश सिंह, बरेली के लालमन और अमेठी के प्रभात कुमार को निलंबित कर दिया। शम्सुल हुदा खान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत धोखाधड़ी, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 के तहत मामला दर्ज किया गया है। अब ईडी उनके फंडिंग नेटवर्क, विदेशी संपर्कों और संपत्तियों की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।  

मुख्यमंत्री बोले—त्याग और बलिदान की भावना रखने वालों का ही इतिहास बनता है

इतिहास उन्हीं का बनता है जिनके मन में त्याग और बलिदान का भाव होः मुख्यमंत्री  वीर बाल दिवस के कार्यक्रम में सम्मिलित हुए योगी आदित्यनाथ, सिख गुरुओं के अमर बलिदान को किया नमन सीएम ने साहिबज़ादों के शहीदी दिवस को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने के लिए प्रधानमंत्री का किया धन्यवाद लखनऊ धर्म रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के सुपुत्रों की स्मृति में वीर बाल दिवस एवं श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष पर शुक्रवार को आयोजित कीर्तन समागम कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इतिहास उन्हीं का बनता है जिनके मन में त्याग और बलिदान का भाव हो। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं ने स्वदेश और स्वधर्म के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की जो परंपरा स्थापित की, वही हमारी प्रगति का मार्ग है। वीर बाल दिवस के अवसर पर शबद पाठ और कीर्तन समागम का आयोजन मुख्यमंत्री आवास, 5 कालिदास मार्ग पर हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम की शुरुआत में गुरु ग्रंथ साहिब को माथे लगाकर प्रणाम किया। इसके बाद उन्होंने शबद कीर्तन और साहिबज़ादों के अमर बलिदान की गाथा को सुना। कीर्तन पाठ करने वाले बच्चों को पटका पहनाकर और पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया। उन्होंने ‘छोटे साहिबज़ादे’ नाम की पुस्तिका का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद  सिंह जी के साहिबज़ादों बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह के शहीदी दिवस को वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाना, उनके स्वधर्म और स्वदेश के प्रति अमर बलिदान को नमन करने का अवसर है। उन्होंने प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद दिया कि उन्होंने देशभर के सिख समाज की भावना को स्वीकार करते हुए इस दिवस को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं का इतिहास भारत में भक्ति और शक्ति का इतिहास है। गुरु नानक देव जी ने सिख धर्म की जो अलख जगाई, उसके प्रचार-प्रसार के लिए देश के कोने-कोने में गए। गुरु तेग बहादुर जी और गुरु गोबिंद  सिंह जी ने अपने त्याग और बलिदान से इसे अनुकरणीय बनाया। शबद कीर्तन समागम में मुख्यमंत्री ने सिख गुरुओं की परंपरा, उनके त्याग और बलिदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस का 350वां वर्ष मनाया जा रहा है और मेरा सौभाग्य रहा कि मुझे कई बार उनके शहीदी दिवस के कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिला। यह विशेष संयोग था कि जिस समय हम गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास में कार्यक्रम का आयोजन कर रहे थे, उसी दिन 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।  मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश के हर स्कूल, कॉलेज और कार्यालय में वीर बाल दिवस के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं तथा साहिबज़ादों की गाथाएं पाठ्यक्रम में शामिल की गई हैं, ताकि नई पीढ़ी को बलिदान की प्रेरणा मिल सके। उन्होंने कहा कि इतिहास उन्हीं का बनता है जिनके मन में त्याग और बलिदान का भाव होता है। सिख धर्म की लंगर परंपरा सामाजिक समरसता का उदाहरण है, जहाँ किसी की जाति या धर्म नहीं पूछा जाता। गुरु गोबिंद  सिंह जी ने समाज को एकता के सूत्र में बाँधने का कार्य किया। मुख्यमंत्री ने गुरु गोबिंद  सिंह जी महाराज, माता गुजरी देवी, बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की स्मृतियों को नमन करते हुए कहा कि वीर बाल दिवस प्रत्येक भारतीय युवा के लिए प्रेरणा का दिन है। उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष के आयोजनों में डबल इंजन सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। कार्यक्रम के अंत में आनंद साहिब का पाठ और अरदास हुई। इसके बाद वह मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ एवं असीम अरुण के साथ लंगर में भी सम्मिलित हुए।