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योगी सरकार का बड़ा फैसला: कम लोड वाले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार लगातार बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए अहम कदम उठा रही है। इसी क्रम में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने विद्युत उपभोक्ताओं के हित में बड़ा निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि 1 किलोवाट तक के घरेलू विद्युत कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी गई है। अगर उनका बैलेंस नेगेटिव हो जाता है, तब भी 30 दिनों तक उनका बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं। यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से लागू की गई है। 5-स्तरीय एसएमएस सूचना प्रणाली लागू की गई ऊर्जा मंत्री ने साफ किया कि नेगेटिव बैलेंस की स्थिति में भी एक माह का चक्र पूरा होने से पहले किसी भी स्थिति में कनेक्शन विच्छेद नहीं किया जाएगा। साथ ही पारदर्शिता और उपभोक्ता सुविधा को ध्यान में रखते हुए कनेक्शन काटने से पूर्व उपभोक्ताओं को 5 अनिवार्य एसएमएस अलर्ट भेजे जाएंगे। जिससे उन्हें समय रहते भुगतान का अवसर मिल सकेगा। इसके साथ ही 2 किलोवाट के कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को भी राहत प्रदान की गई है। ऐसे उपभोक्ताओं का विद्युत कनेक्शन 200 रुपए तक के माइनस बैलेंस पर नहीं काटा जाएगा। इनके लिए भी 5 चरणों में एसएमएस सूचना प्रणाली लागू की गई है, जिससे किसी भी असुविधा से बचा जा सके।   अब तक करीब 30 लाख नए बिजली खंभे लगाए जा चुके हैं वहीं बढ़ती गर्मी को देखते हुए ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने सभी जिलों के अधिकारियों को विद्युत अनुरक्षण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में विद्युत आपूर्ति को सुदृढ़ करने के लिए बड़े पैमाने पर कार्य किए गए हैं। अब तक लगभग 30 लाख नए विद्युत खंभे स्थापित किए जा चुके हैं। साथ ही ट्रांसफार्मरों की क्षमता में भी व्यापक वृद्धि की गई है। ऊर्जा मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति करने वाला राज्य बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि इस भीषण गर्मी में प्रदेश की जनता को बिजली की दृष्टि से किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। सरकार पूरी तरह से सजग है और निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 में छाया ‘योगी मॉडल’, यूपी की शिक्षा नीति बनी देशभर में चर्चा का विषय

लखनऊ.  देश में शिक्षा सुधार को लेकर आयोजित एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 में उत्तर प्रदेश का ‘योगी मॉडल’ प्रमुख रूप से उभरकर सामने आया। सेंट्रल स्क्वेयर फाउंडेशन (सीएसएफ) द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय मंच पर बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में हुए बदलावों को रेखांकित किया। कार्यक्रम में मौजूद विभिन्न राज्यों के नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और प्रशासकों के बीच उत्तर प्रदेश का मॉडल चर्चा का केंद्र रहा। कॉन्क्लेव में मूल्यांकन प्रणाली को भी सुधार के दृष्टिकोण से विकसित परख, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएनएल), प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (ईसीई), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और एडटेक के उपयोग जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। ‘निपुण भारत मिशन’ के अंतर्गत राज्यों के अनुभवों और सफल मॉडलों को साझा किया गया। इस दौरान एसीएस शर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधार को स्पष्ट लक्ष्य, सतत मूल्यांकन और सशक्त शिक्षक के आधार पर आगे बढ़ाया गया है। राज्य में ‘लक्ष्य’ आधारित शिक्षण, निरंतर आकलन और शिक्षक-केंद्रित दृष्टिकोण ने शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी है। योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए उन्हें जमीन पर परिणाम में बदला गया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार देखने को मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षकों को सहयोग देने और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने पर प्रदेश सरकार ने विशेष जोर दिया है। एआरपी (अकादमिक रिसोर्स पर्सन) जैसे मेंटर कैडर, संकुल बैठकों के माध्यम से संवाद और ‘तालिका’ के जरिए छात्रों की प्रगति की नियमित निगरानी ने सिस्टम को अधिक जवाबदेह और परिणाममुखी बनाया है। मूल्यांकन प्रणाली को सुधारात्मक दृष्टिकोण के साथ विकसित करते हुए इसे पुरस्कार या दंड के बजाय अधिगम की कमियों की पहचान और उनके समाधान के प्रभावी उपकरण के रूप में उपयोग किया जा रहा है, जिससे वास्तविक सीखने के परिणामों पर फोकस बढ़ा है। निपुणता हासिल करने में जिन विद्यालयों को कठिनाइयां आ रही हैं, उन्हें निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया जा रहा है, जबकि तकनीक के प्रभावी उपयोग से प्रशासन और शिक्षक के बीच रियल-टाइम कनेक्टिविटी स्थापित होकर त्वरित निर्णय और प्रभावी क्रियान्वयन संभव हुआ है, जो शिक्षा प्रणाली की एक बड़ी ताकत बनकर उभरा है; साथ ही रणनीति को केवल ‘निपुण विद्यालयों’ की मान्यता तक सीमित न रखते हुए उन सफल प्रक्रियाओं और प्रथाओं की पहचान कर पूरे राज्य में लागू करने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे मॉडल के विस्तार और संस्थागत मजबूती को गति मिल रही है।

खाद्य सुरक्षा विभाग का बड़ा एक्शन, असुरक्षित तेल उत्पादों की बिक्री पर रोक

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मानक के विपरीत बिक्री पर 14 फर्मों के खाद्य तेलों एवं अन्य उत्पादों पर पाबंदी लगा दी गई है। ये फर्में खाद्य तेल और वसायुक्त किसी भी उत्पाद को नहीं बना सकेंगी। इनके उत्पाद की बिक्री, भंडारण और वितरण प्रतिबंधित किया गया है। यह प्रतिबंध खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की आयुक्त डा. रोशन जैकब ने लगाया है। प्रदेश में खाद्य तेलों में मिलावट की शिकायत पर 23 फरवरी को प्रदेशभर में 58 टीमों ने 64 खाद्य तेल इकाइयों की जांच की। इसमें 56 इकाइयों से 206 नमूने लिए गए। नमूनों की जांच भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा अधिकृत प्रयोगशालाओं में कराई गई। जांच में संबंधित नमूने असुरक्षित और अधोमानक पाए गए हैं। कुछ उत्पादों में लेड तत्व की अधिक मात्रा पाई गई है, जो मानव जीवन के लिए खतरनाक है। कई उत्पादों में अनधिकृत रूप से एक से अधिक खाद्य तेलों का मिश्रण किया गया। फोर्टिफाइड तेलों में विटामिन की मात्रा कम पाई गई, जिससे उपभोक्ताओं को धोखा दिया जा रहा था। ऐसे में इन कंपनियों के तेल और वसायुक्त उत्पादों पर प्रतिबंध लगा लगा दिया गया है। इन कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध     हिंद वेज ऑइल प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ     संकट मोचन एंटरप्राइसेस, लखनऊ     भीम श्री, प्रोडक्ट कानपुर एनआर उद्योग, कानपुर     कटारिया एडिबल्स, कानपुर     वैभव एडिबल्स, कानपुर देहात     मंटोरा ऑयल प्रोडक्शन प्राइवेट लि., कानपुर देहात     आगरा ऑयल जनरल इंडस्ट्री लि, हाथरस     एनएम ऑयल कॉरपॉरेशन, आगरा     जीएस एग्रो फूड्स, मेरठ     जेपी एग्रो ऑयल, मेरठ     राजेन्द्र कुमार सुशील चंद, मेरठ     केएल वेजिटेबल ऑयल प्रोडक्ट, प्रा लि, हापुड़     जय लक्ष्मी सोलवेंटस प्रा लि, गोरखपुर सेहत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं खाद्य पदार्थ एवं वसा तेल में लेड तत्व की अधिक मात्रा सेहत के लिए हानिकारक है। इसी तरह अलग- अलग पैरामीटर पर अधोमानक पाए गए उत्पादों की फर्मों पर प्रतिबंध लगाया गया है। डॉ. रोशन जैकब, आयुक्त एफएसडीए  

महिला सामर्थ्य योजना से अवध में डेढ़ हजार से ज्यादा गांवों का कायाकल्प

लखनऊ.  योगी सरकार की महिला सामर्थ्य योजना अवध क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने वाली बड़ी पहल बनकर उभरी है। अयोध्या, सुल्तानपुर, रायबरेली, अमेठी, प्रतापगढ़, फतेहपुर और कानपुर नगर के डेढ़ हजार से अधिक गांवों में इस योजना के तहत एक लाख से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बनीं हैं। वहीं, लखनऊ, उन्नाव और बाराबंकी में योजना का विस्तार किया जा रहा है। इस योजना की सबसे बड़ी बात यह है कि इस पहल के जरिए एक लाख से अधिक महिलाएं डेयरी नेटवर्क से जुड़ चुकीं हैं और अब तक 1380 करोड़ रुपये से अधिक सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर भी किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री का फोकस : आत्मनिर्भर महिला, सशक्त परिवार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि महिलाओं की आर्थिक मजबूती ही मजबूत परिवार और समृद्ध समाज की नींव है। महिला सामर्थ्य योजना इसी सोच का विस्तार है, जहां महिलाओं को उत्पादन से लेकर बाजार और भुगतान तक सीधे जोड़ा गया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनीं महिलाएं अवध क्षेत्र के इन जिलों में आज महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रहीं हैं। रोज करीब 4 लाख लीटर दूध का संग्रह इस बात का प्रमाण है कि डेयरी अब केवल परंपरागत काम नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक गतिविधि बन चुकी है। यह नेटवर्क गांव-गांव में रोजगार, आय का नया आधार तैयार कर रहा है। व्यवसाय की रफ्तार : 8000 से एक लाख पार का सफर मार्च 2023 में 340 गांवों और 8000 महिलाओं से शुरू हुआ यह अभियान आज 1550 गांवों और एक लाख से भी अधिक महिलाओं तक पहुंच चुका है। दुग्ध व्यवसाय का तेजी से हुआ यह विस्तार दर्शाता है कि योगी सरकार की योजनाएं अब सीधे जमीन पर असर डाल रही हैं। बिचौलिया खत्म, सीधे खाते में पैसा जाने से बढ़ा भरोसा योजना की सबसे बड़ी ताकत है डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी)। महिलाओं को भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में मिल रहा है, जिससे पर्ची-खर्ची और बिचौलिया तंत्र पूरी तरह खत्म हो गया है। इस पारदर्शिता ने महिलाओं के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है। सुल्तानपुर की अनीता वर्मा बनीं सफलता का मॉडल सुल्तानपुर के दूबेपुर ब्लॉक के मुकुंदपुर गांव की अनीता वर्मा इस योजना की सफलता की सशक्त मिसाल हैं। दो गायों से उन्होंने छोटा सा प्रयास शुरू किया। गत वर्ष उन्हें  करीब साढ़े छह लाख रुपये का भुगतान हुआ है। उनकी कहानी न सिर्फ आर्थिक बदलाव की है, बल्कि यह दिखाती है कि सही अवसर और समय पर योजनाओं का लाभ मिलने पर ग्रामीण महिलाएं कैसे अपने परिवार और समाज का भविष्य बदल सकती हैं।

राजधानी में गूंजेगी महिला शक्ति: 986 आरक्षियों की पासिंग आउट परेड में CM योगी लेंगे सलामी

लखनऊ. आरक्षी नागरिक पुलिस भर्ती-2025 के तहत चयनित 60,244 आरक्षियों में से पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ की आरटीसी में प्रशिक्षण प्राप्त 986 महिला रिक्रूट आरक्षियों की दीक्षांत परेड 26 अप्रैल को रिजर्व पुलिस लाइंस, महानगर, लखनऊ में आयोजित होगी। परेड का निरीक्षण कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सलामी लेंगे। प्रशिक्षण के दौरान इन महिला आरक्षियों को आधुनिक पुलिसिंग से लेकर साइबर क्राइम तक का प्रशिक्षण दिया गया है। कार्यक्रम सुबह करीब 8 बजे शुरू होगा और इसे प्रदेश के सभी जनपदों के पुलिस लाइंस, पीएसी वाहिनियों व प्रशिक्षण संस्थानों में लाइव टेलीकास्ट किया जाएगा। इससे एक साथ पूरे प्रदेश में महिला सशक्तीकरण के साथ-साथ पुलिस बल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी मजबूत संदेश जाएगा। 2017 के बाद महिलाओं की रिकॉर्ड भर्ती 1947 से लेकर 2017 तक यूपी पुलिस में सिर्फ 10 हजार महिलाओं की भर्ती हुई थी, जबकि 2017 के बाद यह संख्या 44 से 45 हजार पहुंच गई है। अब प्रदेश में पुलिस भर्ती होने पर 20 प्रतिशत महिलाओं की भर्ती को अनिवार्य कर दिया गया है। फिजिकल ट्रेनिंग के साथ कानून, तकनीक, अनुशासन और व्यावहारिक पुलिसिंग पर फोकस आरक्षी नागरिक पुलिस भर्ती-2025 के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहीं महिला आरक्षियों को फिजिकल ट्रेनिंग के साथ-साथ आधुनिक पुलिसिंग के सभी जरूरी पहलुओं में प्रशिक्षित किया गया है। प्रशिक्षण में सोशल पुलिसिंग, साइबर क्राइम की रोकथाम, आधुनिक तकनीक, सीसीटीएनएस, फॉरेंसिक साइंस व मेडिसिन, हथियार संचालन, अपराध नियंत्रण, विवेचना, पुलिस अभियोजन, सुरक्षा व्यवस्था, आपदा प्रबंधन, यातायात प्रबंधन और पुलिस रेडियो संचार प्रणाली जैसे विषय शामिल रहे। आधुनिक, संवेदनशील और सक्षम पुलिस कर्मी के रूप में किया गया तैयार  इसके साथ ही भारतीय संविधान, मानवाधिकार, लैंगिक संवेदनशीलता, पुलिस की कार्यप्रणाली, अनुशासन, नैतिकता और जवाबदेही पर भी विशेष जोर दिया गया। व्यावहारिक प्रशिक्षण के तहत आरक्षियों को गार्ड ड्यूटी, बंदी एस्कॉर्ट, हवालात ड्यूटी, वर्दी पहनने के नियम, अधिकारियों की वर्दी पहचान, सैल्यूट की विधि, योग, खेल और श्रमदान जैसी गतिविधियों में भी दक्ष बनाया गया। यह प्रशिक्षण महिला आरक्षियों को आधुनिक, संवेदनशील और सक्षम पुलिस कर्मी के रूप में तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

योगी सरकार की योजना का असर, डेयरी नेटवर्क से महिलाओं की आय बढ़ी

 लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा शुरू की गई 'महिला सामर्थ्य योजना' आज अवध क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के कायाकल्प का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। अयोध्या से लेकर कानपुर नगर तक के सात जनपदों के डेढ़ हजार से अधिक गांवों में इस योजना ने न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक स्तर को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है। अब इस योजना का सफल विस्तार लखनऊ, उन्नाव और बाराबंकी जैसे जिलों में भी किया जा रहा है, जो प्रदेश की 'आधी आबादी' के सशक्तिकरण के प्रति सरकार के संकल्प को दर्शाता है। मुख्यमंत्री का विजन: सशक्त महिला, समृद्ध समाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि जब एक महिला आर्थिक रूप से मजबूत होती है, तो पूरा परिवार और समाज समृद्ध होता है। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए 'महिला सामर्थ्य योजना' के माध्यम से महिलाओं को उत्पादन से लेकर बाजार उपलब्ध कराने और भुगतान की प्रक्रिया तक सीधे जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री के इस फोकस का नतीजा है कि आज अवध की महिलाएं डेयरी नेटवर्क का हिस्सा बनकर अपने परिवारों की मुख्य आर्थिक संरक्षक बन चुकी हैं। डेयरी नेटवर्क से श्वेत क्रांति और 1380 करोड़ का डीबीटी इस योजना की सबसे बड़ी सफलता इसका विशाल डेयरी नेटवर्क है। अवध क्षेत्र के गांवों से आज प्रतिदिन लगभग 4 लाख लीटर दूध का संग्रह किया जा रहा है। यह महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक गतिविधि का प्रमाण है। योजना की पारदर्शिता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक महिलाओं के बैंक खातों में 1380 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे भेजी जा चुकी है। इस व्यवस्था ने बिचौलिया तंत्र को जड़ से खत्म कर महिलाओं का भरोसा सरकार और सिस्टम पर मजबूत किया है। शून्य से शिखर तक: एक लाख महिलाओं का जुड़ाव योजना की विकास यात्रा किसी मिसाल से कम नहीं है। मार्च 2023 में महज 340 गांवों और 8000 महिलाओं के साथ शुरू हुआ यह अभियान आज 1550 गांवों तक फैल चुका है, जिसमें एक लाख से अधिक महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हैं। दुग्ध व्यवसाय का यह तेजी से हुआ विस्तार यह सिद्ध करता है कि योगी सरकार की नीतियां सीधे जमीन पर असर डाल रही हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए द्वार खोल रही हैं। सफलता की मिसाल: सुल्तानपुर की अनीता वर्मा योजना की कामयाबी को सुल्तानपुर के दूबेपुर ब्लॉक की अनीता वर्मा जैसी हजारों महिलाओं की सफलता से समझा जा सकता है। मुकुंदपुर गांव की रहने वाली अनीता ने केवल दो गायों से अपना काम शुरू किया था और आज वह सफलता का एक वैश्विक मॉडल बन चुकी हैं। गत वर्ष उन्हें लगभग साढ़े छह लाख रुपये का भुगतान हुआ है। अनीता की यह कहानी न केवल आर्थिक बदलाव की गाथा है, बल्कि यह साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही अवसर और सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो वे समाज का भविष्य बदलने की क्षमता रखती हैं।  

योगी सरकार ने बुजुर्गों को दिया सुरक्षा कवच, हर जिले में वृद्धाश्रमों से बेघर और असहाय बुजुर्गों को मिल रहा सहारा

लखनऊ.  योगी सरकार प्रदेश के बुजुर्गों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन देने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। सरकार द्वारा समाज कल्याण विभाग के माध्यम से प्रदेश के सभी 75 जिलों में वृद्धाश्रम संचालित किए जा रहे हैं, जहां बेघर, निराश्रित और असहाय बुजुर्गों को आश्रय, भोजन, चिकित्सा और देखभाल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रहीं हैं। इस व्यवस्था से वर्तमान समय में 6055 बुजुर्गों को सुरक्षा और सहारा मिल रहा है। नाश्ते से लेकर भोजन तक पौष्टिक खानपान प्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल आश्रय देना नहीं, बल्कि बुजुर्गों को सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना है। वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों के लिए सुबह नाश्ते से लेकर दोपहर और रात के भोजन तक पौष्टिक खानपान की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही साफ-सुथरे वस्त्र, स्वच्छ बिस्तर और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रहीं हैं। वहीं वृद्धाश्रमों में बुजुर्गों की चिकित्सा सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नियमित स्वास्थ्य जांच, आवश्यक दवाएं, डॉक्टरों की परामर्श सेवा और आपातकालीन स्थिति में तत्काल उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इससे उन बुजुर्गों को राहत मिली है, जो आर्थिक तंगी या पारिवारिक उपेक्षा के कारण इलाज नहीं करा पाते थे। सभी जिलों में संचालित हैं वृद्धाश्रम योगी सरकार में यूपी के सभी 75 जिलों में 150 क्षमता वाले वृद्धाश्रम संचालित हैं जहां नाश्ते में चाय, हलवा, चना, नमकीन दलिया, नमकीन पूड़ी, पोहा और मीठी दलिया दी जाती है। वहीं दिन के खाने में अरहर दाल, राजमा, मिक्स वेज, मौसमी सब्जी, कढ़ी, रोटी, सब्जी, चावल और सलाद निर्धारित दिनों के अनुसार दिया जाता है। इसी तरह रात्रि के भोजन में रसेदार सब्जी, तहड़ी, खिचड़ी, पूड़ी, रोटी, चावल और खीर दी जाती है। योगी सरकार में बुजुर्गों को मिला नया जीवन योगी सरकार की इस बेहतर व्यवस्था से कई ऐसे बुजुर्गों को नया जीवन मिला है, जो पहले सड़कों, रेलवे स्टेशनों या सार्वजनिक स्थानों पर बेसहारा जीवन जीने को मजबूर थे। उन्हें सुरक्षित छत, समय पर भोजन और देखभाल मिल रही है। कई वृद्धाश्रमों में मनोरंजन, योग, भजन-कीर्तन और सामूहिक संवाद जैसी गतिविधियां भी कराई जाती हैं, जिससे बुजुर्ग मानसिक रूप से प्रसन्न और सक्रिय बने रहें। 1 हजार रुपए वृद्धापेंशन दे रही सरकार समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वृद्धाश्रमों की व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर निरीक्षण, समीक्षा और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। जहां जरूरत है, वहां अतिरिक्त सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। इसके अलावा प्रतिमाह बुजुर्गों को 1 हजार रुपए वृद्धापेंशन और आयुष्मान कार्ड के जरिए 5 लाख तक निशुल्क इलाज दिलवाने का काम भी विभाग के द्वारा किया जा रहा है। सबसे ज्यादा संख्या बरेली में  लखनऊ में 128, मैनपुरी में 116, प्रयागराज में 120, हमीरपुर में 107, मुरादाबाद में 127, बरेली में 134, गोरखपुर में 107, कानपुर देहात में 116, जालौन में 114, गौतमबुद्ध नगर में 104 बुजुर्ग रह रहे हैं।

योगी सरकार की नई नीति लागू, 30 जून तक होगा सर्वे और डेटा सीधे सर्वर पर अपलोड

 लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी की गई है। इसके तहत गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग गन्ने की फसल का जीपीएस सर्वेक्षण कराएगा। यह जीपीएस सर्वेक्षण 1 मई से शुरू होकर 30 जून 2026 तक चलेगा। इसकी सूचना 3 दिन पहले सभी रजिस्टर्ड गन्ना किसानों को मोबाइल एसएमएस के जरिए दी जाएगी। गन्ना सर्वेक्षण टीम में एक राजकीय गन्ना पर्यवेक्षक और एक चीनी मिल कर्मचारी शामिल होंगे। इनको सर्वेक्षण से पहले प्रशिक्षित भी किया जाएगा। सर्वेक्षण के दौरान किसान की मौजूदगी जरूरी होगी। टीम किसान के खेत पर पहुंचकर जीपीएस के जरिए उत्पादन का डाटा सीधे विभाग के सर्वर पर फीड करेगी। वहीं सर्वेक्षण के बाद खेत का क्षेत्रफल, गन्ने की किस्म समेत अन्य जानकारी भी किसानों को एसएमएस के जरिए दी जाएगी। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग आयुक्त वीना कुमारी मीना ने बताया कि पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी कर दी गई है। सर्वेक्षण कार्य 1 मई से प्रारम्भ कर 30 जून तक पूरा किया जाएगा। साथ ही बताया कि किसी भी गन्ना कृषक के सर्वेक्षित भूमि का सत्यापन राजस्व विभाग की वेबसाइट www.upbhulekh.gov.in से किया जा सकता है। चीनी मिलें गन्ना सर्वेक्षण के अंतिम आंकड़े सीधे विभागीय वेबसाइट पर ऑनलाइन पोर्ट करेंगी और अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित करेंगी। सर्वेक्षण के दौरान होगा नए किसानों का पंजीकरण विभाग के मुताबिक गन्ना सर्वेक्षण के दौरान नए सदस्यों (किसान) का पंजीकरण भी किया जाएगा। 30 सितम्बर 2026 तक पंजीकृत कृषकों को ही गन्ना आपूर्ति का लाभ मिलेगा। उपज बढ़ोत्तरी के लिए गन्ना सर्वेक्षण से लेकर 30 सितम्बर 2026 तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इसके लिए अनुसूचित जाति व जनजाति के कृषकों, लघु कृषकों और अन्य कृषकों से क्रमशः 10, 100 एवं 200 रुपये प्रति कृषक शुल्क जमा कराया जाएगा।  

मेरठ-करनाल हाईवे पर बाइक से गिरे नोट, पुलिस ने बरामद की बड़ी रकम

शामली उत्तर प्रदेश के शामली जनपद से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां मेरठ-करनाल हाईवे पर उस समय हड़कंप मच गया, जब सड़क पर अचानक नोटों की बारिश होने लगी। इसकी पुलिस को मिली तो टीम ने तत्काल मौके पर पहुंच कर मोर्चा संभाल लिया। नोटों को सड़क के उठवाकर अपने कब्जे में ले लिया। गिनती कराई तो चार लाख रुपए थे। इनमें पांच सौ, दो सौ और सौ के नोट शामिल हैं। बताया जाता है कि यह नोट एक बाइक सवार के बैग से गिर रहे थे और उसे पता नहीं चल पाया। हालांकि वह बाइक सवार अभी तक अपने नोटों पर दावा करने भी नहीं पहुंचा है। नोट पर लगी स्लीप से पता चलता है कि उसे किसी बैंक से निकाला गया था। बाइक चलती रही, नोट बिखरते रहे यह वाकया गुरुवार देर शाम का है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक बाइक सवार युवक मेरठ-करनाल हाईवे से तेज रफ्तार में गुजर रहा था। उसकी पीठ पर एक काला बैग टंगा था, जिसकी चेन संभवतः सफर के दौरान खुल गई थी। युवक को इस बात की भनक नहीं लगी और बैग में रखी नोटों की गड्डियां सरककर गिरने लगीं। कुछ नोट बिखर गए तो कुछ गड्डी समेत सड़क पर गिर गए। बताया जाता है कि हाईवे पर करीब आधा किलोमीटर तक नोट बिखरते रहे और बाइक सवाल अपनी ही धुन में गाड़ी लेकर चलता रहा। राहगीर की ईमानदारी और पुलिस की फुर्ती उसी समय मुजफ्फरनगर के थाना फुगाना क्षेत्र के गांव खरड निवासी अमित कुमार वहां से गुजर रहे थे। उन्होंने काबड़ौत पुल के पास जब नोट बिखरते देखे और बाइक सवार को दूर जाते देखा तो तुरंत पास ही चेकिंग कर रहे बलवा चौकी इंचार्ज मुकेश दिनकर को इसकी सूचना दी। पुलिस टीम बिना देरी किए मौके पर पहुंची और मोर्चा संभाल लिया। सड़क पर बिखरी नोटों की गड्डियों को उठाना शुरू किया। पुलिस ने करीब 500 मीटर के दायरे में फैले नोटों को इकट्ठा किया। सड़क से चार लाख बरामद पुलिस ने कुल 4 लाख रुपये बरामद किए हैं। इनमें 500-500 के नोटों की 6 गड्डियां, 200-200 के नोटों की 4 गड्डियां और 100-100 के नोटों की 2 गड्डियां शामिल हैं। खास बात यह है कि इन गड्डियों पर एक बैंक की पर्ची और मोहर भी लगी हुई है, जिससे मालिक तक पहुंचने का रास्ता आसान हो सकता है। मालिक की तलाश में जुटी पुलिस अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) सुमित शुक्ला ने बताया कि बरामद की गई रकम को फिलहाल थाने के मालखाने में जमा करा दिया गया है। पुलिस अब हाईवे पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि उस बाइक सवार की पहचान की जा सके। साथ ही, संबंधित बैंक से भी संपर्क किया जा रहा है जिसकी पर्ची गड्डियों पर लगी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब तक जिले के किसी भी थाने में इतनी बड़ी रकम खोने की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। पुलिस ने अपील की है कि जिस भी व्यक्ति के ये रुपये खोए हैं, वह उचित प्रमाण और बैंक संबंधी दस्तावेज पेश कर अपनी रकम वापस ले सकता है। फिलहाल, पुलिस और प्रशासन अमित जैसे ईमानदार नागरिक की भी सराहना कर रहे हैं, जिनकी सतर्कता से यह बड़ी रकम सुरक्षित पुलिस तक पहुंच गई।

हनुमान कथा में नीतीश भारद्वाज का संबोधन, कहा– “आज भी चल रही है महाभारत”

प्रयागराज संगम नगरी प्रयागराज में बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से आयोजित तीन दिवसीय हनुमान कथा में आध्यात्म, संस्कृति और समकालीन मुद्दों का संगम देखने को मिला। इस अवसर पर टीवी धारावाहिक महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका निभाने वाले अभिनेता नीतीश भारद्वाज भी शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में गुरु-शिष्य परंपरा, सनातन धर्म, समाज की एकता और वर्तमान समय की चुनौतियों पर विस्तार से बात की। साथ ही उनके बयान ने कार्यक्रम में खास चर्चा बटोरी, जिसमें उन्होंने कहा, 'प्रेम उसी को देंगे जो हमसे प्रेम करेगा, और जो तलवार लेकर सामने खड़ा होगा, उसके सामने अहिंसा परमो धर्म: नहीं कहेंगे। बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, आज भी महाभारत चल रही है और हिंदू धर्म को अलग-थलग करने के लिए कई शक्तियां पीछे लगी हैं। गुरु-शिष्य परंपरा से की शुरुआत नीतीश भारद्वाज ने अपने उद्बोधन की शुरुआत 'सदाशिवसमारम्भां शंकराचार्यमध्यमाम्…' श्लोक के साथ की और कहा कि भारत की संस्कृति गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित है। उन्होंने प्रयागराज की पावन धरती को ऋषि परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि यह स्थान सदियों से ज्ञान और आध्यात्म का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि महाकुंभ के दौरान पहली बार प्रयाग आने का अवसर मिला था और अब धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के आमंत्रण पर दोबारा यहां आने का सौभाग्य मिला है। 'आज भी चल रही है महाभारत' उन्होंने वर्तमान समय को महाभारत काल से जोड़ते हुए कहा कि आज भी समाज एक प्रकार के संघर्ष से गुजर रहा है। उनके अनुसार, जैसे द्वापर युग में धर्म की रक्षा की आवश्यकता थी, उसी प्रकार आज कलयुग में भी धर्म और मूल्यों की रक्षा जरूरी हो गई है। आज के समय को देखते हुए कह सकता हूं कि आज भी महाभारत चल रही है, एक अलग तरह की महाभारत। धर्म की रक्षा की आवश्यकता फिर से आन पड़ी है। आज हिंदू धर्म को अलग-थलग करने के लिए कई शक्तियां पीछे लगी हैं। गीता के श्लोक से दिया प्रेरणा संदेश नीतीश भारद्वाज ने गीता का श्लोक 'कुतस्त्वा कश्मलमिदं…' उद्धृत करते हुए कहा कि कठिन और विपरीत परिस्थितियों में निराश नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में कई तरह की शक्तियां सक्रिय हैं, लेकिन ऐसे समय में धैर्य और आत्मविश्वास बनाए रखना जरूरी है। 'सनातन ही मूल आधार' उन्होंने कहा कि सनातन धर्म ही इस देश की मूल पहचान है और इसकी सहिष्णुता के कारण ही अन्य धर्म यहां फल-फूल सके। उन्होंने यह भी कहा कि आज इसी सहिष्णुता का कुछ लोग गलत फायदा उठा रहे हैं और सनातन पर सवाल खड़े कर रहे हैं। समाज में एकता की जरूरत अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि समाज को लंबे समय तक जातियों और वर्गों में बांटा गया, लेकिन अब समय है कि सभी लोग एकजुट हों। उन्होंने गीता के 'चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टम्…' श्लोक का उल्लेख करते हुए बताया कि समाज का संतुलन सभी वर्गों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) के समन्वय से ही संभव है और किसी एक हिस्से के कमजोर होने से पूरा ढांचा प्रभावित होता है। 'प्रेम का उत्तर प्रेम, लेकिन आक्रमण का जवाब भी' अपने संबोधन के अंत में नीतीश भारद्वाज ने स्पष्ट कहा कि प्रेम का उत्तर प्रेम से दिया जाएगा, लेकिन अगर कोई आक्रमण करेगा तो उसका जवाब भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'हम अहिंसा के मार्ग पर चलने वाले हैं, लेकिन यदि कोई तलवार लेकर सामने खड़ा होगा तो हमें छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रपति संभाजी महाराज बनना भी आता है।' उन्होंने इसे धर्म की रक्षा का कर्तव्य बताते हुए कहा कि समय के अनुसार आचरण करना ही सच्चा धर्म है।