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शिक्षा सेवा चयन आयोग, यूपी: अध्यक्ष पद हेतु आवेदन मांगे गए

उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष पद के लिए मांगे गए आवेदन 10 दिसंबर तक कर सकते हैं आवेदन उच्च शिक्षा विभाग की वेबसाइट www.uphed.gov. in पर उपलब्ध है आवेदन पत्र लखनऊ उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष की जल्द ही नियुक्ति होगी। इस प्रक्रिया के तहत बायोडाटा समेत आवेदन पत्र मांगे गए हैं। आवेदन पत्र प्राप्त होने की अंतिम तिथि 10 दिसंबर शाम छह बजे तक होगी। यह जानकारी उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव गिरिजेश त्यागी ने दी। अध्यक्ष पद के लिए नियुक्ति की तिथि से तीन वर्ष की अवधि अथवा 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, जो भी पहले हो, पद धारण करेगा। इच्छुक आवेदकों को निर्धारित प्रारूप में बायोडाटा समेत प्रार्थना पत्र विशेष सचिव, उच्च शिक्षा अनुभाग-5, नवीन भवन, कक्ष संख्या-40, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ के नाम से पंजीकृत डाक द्वारा प्रेषित करना होगा। आवेदन पत्र के साथ समस्त शैक्षणिक व अन्य अभिलेख की स्वप्रमाणित प्रति भी संलग्न रहेगी। अध्यक्ष पद की कार्यावधि, आयु, अहर्ता, आवेदन पत्र के प्रारूप आदि जानकारी उच्च शिक्षा विभाग की वेबसाइट www. uphed. gov. in पर प्राप्त की जा सकती है। इसमें पद के लिए न्यूनतम अहर्ता की भी जानकारी दी गई है। अध्यक्ष पद के लिए राज्य सरकार के प्रमुख सचिव के पद या उनके समकक्ष पद पर रहे, विश्वविद्यालय के कुलपति हों या रहे हों तथा किसी विश्वविद्यालय के न्यूनतम 10 वर्ष तक आचार्य हों या रहे हों और उनके पास कम से कम तीन वर्ष का प्रशासनिक अनुभव हो, ऐसे लोग आवेदन कर सकते हैं।

योगी सरकार की सख्ती: एटीएस ने आठ जिलों से सभी मदरसों की रिपोर्ट मांगी

लखनऊ उत्तर प्रदेश की एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (यूपी एटीएस) ने मदरसों को लेकर सख्त कदम उठाया है। लखनऊ स्थित एटीएस मुख्यालय ने प्रयागराज, प्रतापगढ़, कौशाम्बी, फतेहपुर, बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को पत्र भेजा है। इस पत्र में हर मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों, पढ़ाने वाले मौलवियों और प्रबंधकों की पूरी डिटेल मांगी गई है। हर व्यक्ति का नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि, पूरा पता और मोबाइल नंबर सहित सारी जानकारी जल्द से जल्द भेजने को कहा गया है।  खासकर प्रयागराज जिले के सभी मदरसों की पूरी लिस्ट और विस्तृत जानकारी एटीएस की प्रयागराज यूनिट को सबसे पहले उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। बाकी सात जिलों की रिपोर्ट भी जल्द मुख्यालय भेजनी होगी। एटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कुछ खुफिया इनपुट मिले थे, जिनमें कुछ मदरसों में संदिग्ध गतिविधियों की आशंका जताई गई थी, इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर यह कवायद की जा रही है। उन्होंने साफ किया कि ज्यादातर मदरसे अच्छा काम कर रहे हैं और यह सिर्फ सत्यापन का काम है, लेकिन किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कुछ लोग इसे सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं तो कुछ इसे अल्पसंख्यक समुदाय पर दबाव मान रहे हैं। प्रयागराज के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने बताया कि उनके विभाग ने सभी मदरसों को नोटिस भेज दिया है और अगले कुछ दिनों में पूरी सूची एटीएस को सौंप दी जाएगी। इसी तरह बाकी जिलों में भी काम तेजी से चल रहा है। एटीएस ने स्पष्ट किया है कि अभी सिर्फ जानकारी इकट्ठा की जा रही है। इसके बाद जरूरत पड़ी तो मौके पर जाकर सत्यापन किया जाएगा। फिलहाल, किसी मदरसे पर कोई छापा या सीधी कार्रवाई नहीं हुई है। उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग के सूत्रों का कहना है कि यह नियमित सुरक्षा जांच का हिस्सा है और इससे घबराने की कोई बात नहीं है।

पीएम मोदी के नेतृत्व में किसानों के सम्मान व कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही डबल इंजन सरकारः सीएम योगी

पीएम नरेंद्र मोदी ने कोयम्बटूर से जारी की किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त देश के 9 करोड़ से अधिक किसानों के खाते में आई 18000 करोड़ से अधिक की राशि, उत्तर प्रदेश के 2.15 करोड़ से अधिक किसान भी हुए लाभान्वित  सीएम योगी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त का उपहार देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति जताया आभार  बोले सीएम- पीएम मोदी ने सशक्त कृषि व आत्मनिर्भऱ किसान के संकल्प को किया दृढ़  उप्र के कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई ऊर्जाः मुख्यमंत्री  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त का उपहार देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कोयम्बटूर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त जारी की। इससे देश के 9 करोड़ से अधिक किसानों के खाते में 18000 करोड़ रुपये आए। वहीं इससे उत्तर प्रदेश के भी 2.15 करोड़ से अधिक किसान लाभान्वित हुए।  सशक्त कृषि-आत्मनिर्भर किसान के संकल्प को किया और दृढ़ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के यशस्वी नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार अन्नदाता किसानों के सम्मान एवं कल्याण हेतु निरंतर समर्पित भाव से कार्यरत है। आज इसी शृंखला में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के कोयंबटूर में आयोजित 'दक्षिण भारत प्राकृतिक कृषि शिखर सम्मेलन-2025' में देश भर के 9 करोड़ से अधिक किसान बंधुओं को 18,000 करोड़ रुपये से अधिक राशि की किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त हस्तांतरित कर सशक्त कृषि और आत्मनिर्भर किसान के संकल्प को और दृढ़ किया है। उप्र के कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई ऊर्जा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पोस्ट में लिखा कि उत्तर प्रदेश के 2.15 करोड़ से अधिक किसानों को भी इस किस्त का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हुआ है, जिससे राज्य के कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस उपहार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया।

दिव्यांगजन को विशेष अवसर देने पर बल, वंचित समाज को मुख्यधारा में लाया जाएगा

महिला और बाल विकास पर विशेष प्राथमिकता, महिलाएं देश और समाज की मुख्य धुरी कामकाजी महिलाओं के लिए पिंक इंडस्ट्रियल पार्क बनेगा, पिंक ट्रांसपोर्ट की भी व्यवस्था उत्तर प्रदेश 2047 तक बनेगा विकसित प्रदेश, AI और महिला सशक्तिकरण से होगा वास्तविक विकास  स्टेकहोल्डर वर्कशॉप में सामाजिक सुरक्षा पर बनी रणनीति विकसित उत्तर प्रदेश विजन-2047 पर एक साथ 9 विभागों ने साझा की अपनी रणनीति समाज कल्याण विभाग की स्टेकहोल्डर वर्कशॉप में योजना के क्रियान्वयन पर दिया गया जोर लखनऊ उत्तर प्रदेश को 2047 तक विकसित प्रदेश बनाने के लिए समाज कल्याण विभाग ने बुधवार को गोमतीनगर स्थित भागीदारी भवन में विभागीय स्टेकहोल्डर वर्कशॉप आयोजित की। यह वर्कशॉप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समावेशी व सक्षम उत्तर प्रदेश के संकल्प को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। इसमें प्रदेश के 9 विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिभाग कर उज्जवल भविष्य की नई परिकल्पना और नीतियों को दिशा देने वाले महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए। 2047 तक प्रत्येक क्षेत्र में होगा समेकित विकास समाज कल्याण विभाग की इस कार्यशाला का उद्देश्य सशक्त समाज, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, तकनीकी प्रगति, महिला सशक्तिकरण और सतत विकास की दिशा में आवश्यक नीतिगत हस्तक्षेपों पर विचार-विमर्श करना था। हितधारकों के सामूहिक विमर्श ने राज्य के दीर्घकालिक विकास एजेंडे को नई दिशा देने का कार्य किया। ‘उत्तर प्रदेश बनेगा बदलाव का मॉडल’ समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव एल. वेंकटेश्वर लू ने कहा कि विजन 2047 केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि समाज-केन्द्रित बदलाव का संकल्प है। हमारा लक्ष्य है कि प्रत्येक कमजोर वर्ग महिलाएं, दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, बच्चे, अल्पसंख्यक और ट्रांसजेंडर समुदाय तक नीतियों का लाभ तेजी और समानता के साथ पहुंचे। दिव्यांगजन को विशेष अवसर देने की रणनीति पर बल समाज कल्याण विभाग की इस कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि समाज के हर वर्ग और समुदाय का विकास होगा। उत्तर प्रदेश की आबादी 25 करोड़ है जिसमें 75 लाख दिव्यांगजन हैं। विकसित उत्तर प्रदेश के तहत उनके सर्वांगीण विकास पर काम किए जाने के लिए एक रुपरेखा प्रस्तुत की गई । इस कार्यशाला में दिव्यांगजन के उत्थान पर विशेष चर्चा हुई। उत्तर प्रदेश सरकार नौकरी के साथ साथ, उद्योग के लिए ऋण की भी व्यवस्था कराएगी। वंचित समाज और बुजुर्गों को मुख्यधारा में लाया जाएगा उत्तर प्रदेश विकसित सही मायने में तभी बनेगा जब हाशिए पर पड़ी अनुसूचित जाति, जनजाति ओबीसी और अल्पसंख्यकों को भी शिक्षित और समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही बच्चों और बुजुर्गों की सामाजिक सुरक्षा और विकास पर कार्य करने के लिए प्रतिबद्धता जताई गई। कार्यशाला में बताया गया कि उत्तर प्रदेश में अभी 3 करोड़ वृद्धजन हैं। इनके लिए सेवा साथी एप से रोजगार और स्वावलंबन की दिशा में काम किया जा रहा है। वृद्धजनों के लिए एक व्यापक रणनीति पर चर्चा करते हुए बताया गया कि इनके सामाजिक सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाएगा। वृद्धों के लिए आवास बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। युवाओं और बच्चे के विकास पर जोर देना होगा उत्तर प्रदेश के विकास में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और आगे निभाएंगे। प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार उपलब्ध करना सरकार की प्राथमिकता है जिस पर कई विभाग अपने स्तर पर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही जो बच्चे विकास की दौड़ में पीछे छूट गए हैं उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत किया जाएगा।     महिला और बाल विकास पर विशेष प्राथमिकता विकसित उत्तर प्रदेश @47 विजन में महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके स्वावलंबन पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई। इसके लिए पिंक इंडस्ट्रियल पार्क बनेगा जो केवल कामकाजी महिलाओं के लिए होगा। इस इंडस्ट्रियल पार्क में केवल महिलाएं ही उद्योग संचालित करेंगी और काम करेंगी। उनके लिए  महिला आधारित पिंक ट्रांसपोर्ट सेवा होगी जिसमें केवल महिलाएं ही यात्रा करेंगी। इस इंडस्ट्रियल पार्क में क्रेच होगा जहां छोटे बच्चों का ध्यान रखा जाएगा। आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए बच्चों को उचित पोषाहार महिला और बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव लीना जौहरी ने कहा कि अगर सही मायने में विकास करना है तो सबको साथ में मिलकर काम करना होगा। हमें केवल योजनाएं ही नहीं बनानी है बल्कि उसका क्रियान्वयन भी करना है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 1890000 आंगनबाड़ी हैं। इसके माध्यम से बच्चों के पोषण का भरपूर ध्यान रखा जा रहा है। इसके माध्यम से हम बच्चों का ध्यान रखते हैं। उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं। जब बच्चें स्वस्थ होंगे तो स्वत: प्रदेश और देश का विकास हो जाएगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त करने से देश सशक्त होता है। उन्होंने बच्चों के मानसिक विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्र आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित होंगे ‌ 2047 तक उन्हें प्ले स्कूल की तरह विकसित किया जाएगा।  2047 के लिए एक विस्तृत रुपरेखा पर काम करने का आवश्यकता  पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव सुभाष चंद्र शर्मा ने कहा कि देश काल और परिस्थिति तीनों को ध्यान में रखते हुए काम करना होगा। भारत अन्य देशों के मुकाबले भिन्न है इसलिए इसकी विविधता को देखते हुए कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमें 2047 में प्रदेश की जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करना होगा।   

वैश्विक जंबूरी में दमकेंगे उत्तर प्रदेश के रंग–संस्कृति, शिल्प और उद्यमिता को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय मंच

लखनऊ बनेगा सांस्कृतिक राजधानी: जंबूरी में यूपी की कला, शिल्प और स्वाद दिखेगा दुनिया को ओडीओपी की वैश्विक उड़ान: जंबूरी में बढ़ेगी यूपी के शिल्पकारों की अंतरराष्ट्रीय पहचान छह दशक बाद ऐतिहासिक मेजबानी: जंबूरी से यूपी में पर्यटन और निवेश को नई गति बनारसी साड़ी से चिकनकारी तक—जंबूरी में दुनिया देखेगी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर लखनऊ उत्तर प्रदेश की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और शिल्पकला अब वैश्विक मंच पर नई पहचान बनाने जा रही है। भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के 19वें राष्ट्रीय जंबूरी में इस वर्ष पहली बार बड़े पैमाने पर एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) के प्रोडक्ट प्रदर्शित किए जाएंगे। उत्तर प्रदेश छह दशक बाद इस प्रतिष्ठित आयोजन की मेजबानी कर रहा है, जिसमें 23 से 29 नवंबर तक लाखों प्रतिभागियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत राजधानी लखनऊ करेगी।  योगी सरकार के मार्गदर्शन में आयोजित इस जंबूरी में उत्तर प्रदेश के शिल्पकारों और स्थानीय उत्पादों को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। बनारसी और रेशम की साड़ियाँ, चंदौली की ज़री-ज़रदोज़ी, लखनऊ की चिकनकारी, आगरा का पेठा, ग़ाज़ीपुर की जूट वॉल हैंगिंग्स, जौनपुर के ऊनी कारपेट—इन सभी को समर्पित ओडीओपी पवेलियन  में विशेष स्थान दिया गया है। यह पवेलियन न केवल उत्पादों की सुंदरता को दर्शाएगा बल्कि इनके पीछे काम करने वाले शिल्पकारों की मेहनत और कौशल को भी दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा। राष्ट्रीय जंबूरी जैसा बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच उत्तर प्रदेश के लिए बहुआयामी आर्थिक अवसर लेकर आया है। हजारों प्रतिभागियों और विदेशी प्रतिनिधियों की उपस्थिति से स्थानीय उद्योगों, पारंपरिक कलाओं और शिल्पकारों को व्यापक बाजार और नई पहचान मिलेगी। ओडीओपी उत्पादों का ऐसा वैश्विक प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुँच बनाने का एक सशक्त माध्यम है, जिससे मांग बढ़ेगी और प्रदेश के कारीगरों को नए आर्थिक अवसर प्राप्त होंगे। यह प्रयास राज्य में रोजगार सृजन और निवेश आकर्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। असिस्टेंट रीजनल ऑर्गनाइजेशन कमिश्नर जयप्रकाश दक्ष ने बताया कि विश्वभर से आए स्काउट्स, गाइड्स और प्रतिनिधि इन कारीगरों के कौशल को नज़दीक से समझ सकेंगे। यह अवसर न केवल युवा प्रतिभागियों को प्रेरित करेगा बल्कि उन्हें भारत की सांस्कृतिक विरासत की गहराई से भी परिचित कराएगा। वहीं लीडर ट्रेनर स्काउट अमिताभ पाठक ने कहा कि यह मंच उत्तर प्रदेश के ओडीओपी उत्पादों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे न केवल शिल्पकारों को सम्मान मिलेगा बल्कि उनकी कृतियों की अंतरराष्ट्रीय मांग भी बढ़ेगी। जंबूरी में भारत की सांस्कृतिक विविधता का जीवंत प्रदर्शन खान पान, परिधान और लोक कलाओं के माध्यम से भी होगा। पूड़ी–कचौरी, जलेबी, बनारसी पान, चाट और क्षेत्रीय मिठाइयाँ जैसे पारंपरिक व्यंजन प्रतिभागियों को उत्तर प्रदेश के स्वाद से रूबरू कराएँगे। विविध लोककलाओं, पारंपरिक परिधानों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रतिभागी देश की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत अनुभव करेंगे। “सशक्त युवा–विकसित भारत” की थीम पर आधारित यह जंबूरी 32,000 से अधिक प्रतिभागियों की मेजबानी करेगी, जिनमें एशिया–प्रशांत क्षेत्र के लगभग 2,000 प्रतिनिधि शामिल हैं। यह आयोजन न केवल युवाओं की ऊर्जा, रचनात्मकता और नेतृत्व क्षमता का उत्सव है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक समृद्धि को वैश्विक दर्शकों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर भी है। जंबूरी के माध्यम से उत्तर प्रदेश की कला, व्यंजन, विरासत और लोक संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। इस आयोजन से पर्यटन, निवेश और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिलने की संभावना है। अंततः यह वैश्विक मंच उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और आर्थिक उपस्थिति को दुनिया में मजबूत करेगा और राज्य की दीर्घकालिक प्रगति के नए द्वार खोलेगा।

निवेश का नया केंद्र बना उत्तर प्रदेश: नीतियों और सुधारों से बढ़ी उद्योगों की रफ्तार

योगी सरकार की नीतियों से स्टार्टअप इकोसिस्टम भी हुआ मज़बूत वैश्विक निवेशकों की पहली पसंद बना उत्तर प्रदेश, 6.77 लाख करोड़ के LOC से बढ़ी विकास की गति 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश: उद्योग, निवेश और स्टार्टअप्स की नई छलांग योगी सरकार की नीतियों का असर– यूपी में तेज़ी से बढ़ रहे उद्योग, लाखों युवाओं को मिला रोजगार लखनऊ, उत्तर प्रदेश आज देश के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में तेजी से उभर रहा है। राज्य की निवेश-अनुकूल नीतियाँ, पारदर्शी प्रोत्साहन व्यवस्था, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल ने घरेलू व वैश्विक निवेशकों के बीच विश्वास को और मजबूत किया है। पिछले आठ वर्षों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक सशक्त औद्योगिक इकोसिस्टम का निर्माण हुआ है, जिसने ईज आफ डूइंग बिजनेस के मानकों को उल्लेखनीय रूप से बेहतर किया है। निवेश मित्र पोर्टल जैसे ऑनलाइन सिंगल विंडो सिस्टम ने निवेश अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और त्वरित बनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी विजन के तहत उत्तर प्रदेश 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की ओर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने निवेश बढाने के लिए 33 से अधिक क्षेत्र विशिष्ट नीतियाँ लागू की हैं, जो उभरते औद्योगिक क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं। राज्य की फ्लैगशिप “औद्योगिक निवेश और रोजगार प्रोत्साहन नीति 2022”, एफडीआई/एफसीआई नीति 2023 के साथ ही सेमीकंडक्टर, रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रिक वाहन, ऊर्जा और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों की नीतियों ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेशकों के लिए विश्वसनीय और संभावनाओं से भरपूर गंतव्य बना दिया है। निवेश उपरांत प्रोत्साहनों को सरल और तेज बनाने के लिए प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण किया गया है। वही एक उच्च-स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति (HLEC) द्वारा हर महीने औसतन 10 लेटर ऑफ कम्फर्ट (LOC) भी जारी किये जा रहे है। वर्ष 2025 में ही औद्योगिक निवेश और रोजगार प्रोत्साहन नीति 2022 के तहत 6.77 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 70 से अधिक LOC स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही एफडीआई/एफसीआई नीति 2023 के अंतर्गत 12,000 करोड़ रुपये से अधिक के LOC जारी किए जा चुके हैं, जो वैश्विक स्तर पर उत्तर प्रदेश की बढ़ती प्रतिष्ठा को प्रदर्शित करता है। इन नीतिगत सुधारों और पारदर्शी प्रक्रियाओं का परिणाम है कि प्रदेश में निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ उन्हें जमीन पर उतारने में भी उल्लेखनीय सफलता मिल रही है। आगामी भूमि पूजन समारोह (GBC-5) के लिए सरकार 5  लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को धरातल पर उतारने की तैयारी कर रही है। इससे पहले आयोजित चार ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी ने उत्तर प्रदेश को औद्योगिक विकास के नए दौर में प्रवेश कराया है। वर्ष 2018 से अब तक आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, रक्षा, कौशल विकास, आवास और विनिर्माण समेत विभिन्न क्षेत्रों में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को मूर्त रूप दिया जा चुका है, जो राज्य की नीतिगत स्थिरता और निवेश-अनुकूल वातावरण का प्रमाण है। जिसकी वजह से पिछले आठ वर्षों में सैमसंग, वीवो, डिक्सन, एसीसी, जेके सीमेंट, डालमिया सीमेंट, अदानी पावर, टाटा पावर, Azure, SLMG एसएलएमजी (कोका-कोला बॉटलर्स), वरुण बेवरेजेज (पेप्सी बॉटलर्स), एसटी  टेलीमीडिया, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब जैसी कंपनियों ने उत्तर प्रदेश में निवेश कर हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। उद्यमिता प्रोत्साहन: उत्तर प्रदेश सरकार की स्टार्टअप पहल बड़े निवेश के साथ प्रदेश में ईज आफ डूइंग बिजनेस का इकोसिस्टम मजबूत होने से वर्तमान में करीब 18127 स्टार्टअप है, जिसमें से 7800 से अधिक स्टार्टअप महिला संचालित है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए छोटे छोटे स्टार्टअप्स को भी आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है।जिससे छोटे छोटे शहरों के युवाओं उद्यमियों को अपने स्टार्टअप्स को शुरू करने में प्रोत्साहन मिल रहा है। केस स्टडी 1: मनुपुरा फूड्स प्राइवेट लिमिटेड (प्रवीन वर्मा) झांसी के प्रवीन वर्मा द्वारा स्थापित इस स्टार्टअप को योगी सरकार ने ₹11 लाख का फंड (जिसमें से ₹4.5 लाख प्रदान किए गए) स्वीकृत किया है। प्रवीन लगभग दस वर्षों से मशरूम की खेती कर रहे हैं और नाबार्ड की मदद से एक फार्म संचालित करते हैं। उनका स्टार्टअप मशरूम से ड्राई मशरूम, बिस्किट, चॉकलेट, लड्डू, अचार आदि जैसे विविध मूल्य-वर्धित उत्पाद तैयार करता है, जिनकी बाजार में काफी मांग है। यह पहल कृषि-आधारित नवाचार और ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहित करती है। केस स्टडी 2: सिहारी लैब्स प्राइवेट लिमिटेड (वैशाली कुशवाहा) जालौन की वैशाली कुशवाहा के इस स्टार्टअप को ₹3.14 लाख का फंड (जिसमें से ₹78,000 प्रदान किए गए) स्वीकृत किया गया है। सिहारी लैब्स एक एआई-आधारित टूल विकसित कर रहा है जो लघु और मध्यम उद्यमियों को उनके उपभोक्ताओं की समस्याओं के समाधान में मदद करेगा। यह टूल न केवल उपभोक्ता से बातचीत कर सकता है, बल्कि जटिल मामलों में प्रतिष्ठान के मालिक या प्रबंधक से भी बात करा सकता है। यह तकनीकी नवाचार 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और ग्राहक सेवा को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

योगी सरकार में ओडीओपी और नीतिगत सुधार बन रहे आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम

ओडीओपी से बदला महिलाओं का आर्थिक परिदृश्य, लाखों हस्तशिल्पियों को मिला वैश्विक मंच स्वयं सहायता समूह व मुद्रा ऋण से मजबूत हुई ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति परंपरागत कलाओं को पुनर्जीवित कर महिलाओं ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बढ़ाया उत्तर प्रदेश का मान मिशन शक्ति से लेकर ई–कॉमर्स लिंकेज तक, नीतिगत सुधारों से महिलाओं की सशक्त भागीदारी हुई सुनिश्चित लखनऊ, उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार की सर्व समावेशी नीतियां अब राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपना व्यापक प्रभाव दिखा रही हैं। इसी का सकारात्मक परिणाम अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (आईआईटीएफ) में भी देखने को मिल रहा है। इस वृहद आयोजन में इस वर्ष उत्तर प्रदेश की महिलाओं की असाधारण भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि योगी सरकार की योजनाएँ महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। मिशन शक्ति, मुद्रा ऋण, कन्या सुमंगला, महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के विस्तार और ओडीओपी जैसी पहल ने महिलाओं को न केवल स्वरोजगार से जोड़ा है बल्कि उन्हें वैश्विक मंच तक पहुँचाने का मार्ग भी प्रशस्त किया है। यही कारण है कि आईआईटीएफ के ओडीओपी पवेलियन में 60% भागीदारी महिलाओं की रही है, जहां उनकी पारंपरिक कलाओं, हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों ने देश–विदेश के खरीदारों का ध्यान आकर्षित किया है। ओडीओपी और सरकारी नीतियों ने लुप्त होती कलाओं को पुनर्जीवित कर महिलाओं की आय, सम्मान और पहचान तीनों में वृद्धि की है। योगी सरकार की नीतियां बदल रहीं महिलाओं की तकदीर महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता दिलाने के लिए योगी सरकार ने मिशन शक्ति को बड़े स्तर पर लागू किया है। इसके तहत 15.35 लाख महिलाओं को विभिन्न योजनाओं से जोड़कर स्वरोजगार उपलब्ध कराया गया है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2022-23 में 1.14 करोड़ से अधिक खाते स्वीकृत हुए, जिनमें 80% से अधिक लाभार्थी महिलाएँ थीं। वहीं, कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से 15 लाख से अधिक बालिकाओं को शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें विकास की मुख्यधारा में जोड़ा गया। इन नीतियों से महिलाओं की श्रम भागीदारी दर में भी तेजी से सुधार हुआ  है, जो 2017 के 10.6% से बढ़कर 2023 में 17.5% से अधिक हो चुकी है। सरकार की योजनाओं ने महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता व उद्यमिता को सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक आधार दोनों प्रदान किए हैं। ओडीओपी से महिलाएं बनीं बड़े स्तर की उद्यमी, आईआईटीएफ में दिखा प्रभाव उत्तर प्रदेश की ओडीओपी योजना महिलाओं के लिए आर्थिक परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। ओडीओपी के जरिए लाखों महिला कारीगरों, बुनकरों और उद्यमियों को लाभ मिला है। इनमें चिकनकारी, जरी-जरदोजी, पीतल उद्योग, बनारसी सिल्क, टेराकोटा, लकड़ी के खिलौने और अनेक पारंपरिक शिल्प शामिल हैं। 60,000 से अधिक महिला कारीगरों को फ्री प्रशिक्षण और आधुनिक टूलकिट प्रदान किए जाने से उनकी उत्पादकता और गुणवत्ता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। ई-कॉमर्स के माध्यम से हजारों महिला एमएसएमई उद्यमियों को अमेजॉन, फ्लिपकार्ट और अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्मों से जोड़कर वैश्विक बाजारों तक पहुँचाया गया, जिससे निर्यात में वृद्धि हुई और आय में स्थायी सुधार दर्ज हुआ। आईआईटीएफ के ओडीओपी पवेलियन में 60% महिलाएं शामिल हुईं, जिन्होंने अपनी कला से उत्तर प्रदेश को देश–विदेश में पहचान दिलाई। यह न सिर्फ राज्य की परंपरागत कला के पुनरुत्थान का सबूत है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक उत्थान का भी। महिला सशक्तिकरण के लिए सरकार के सतत प्रयास बने बदलाव की आधारशिला महिलाओं की आर्थिक मजबूती सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार ने स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाओं को स्वावलंबन की दिशा में अग्रसर किया है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 4.5 लाख से अधिक महिला स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय वर्ष 2022-23 में ₹1,000 करोड़ से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया। योगी सरकार के सकारात्मक प्रयासों का संपूर्ण प्रभाव आईआईटीएफ में साफ नजर आया, जहां महिला उद्यमियों ने न केवल बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान दिलाई। झांसी की वंदना व शिवानी शर्मा का उदाहरण अनुकरणीय है। इन्होंने ओडीओपी केटेगरी के अंतर्गत न केवल प्रशिक्षण व वित्तीय सहायता प्राप्त की, बल्कि घर आधारित काम को संगठित उद्यम में बदला। इसका परिणाम है कि आईआईटीएफ में उनके पारंपरिक खिलौना उत्पादों को न केवल बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं बल्कि आर्थिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। यह इस बात का भी उदाहरण है कि कैसे परंपरागत कलाओं को नया जीवन और महिलाओं को नई उड़ान देने में योगी सरकार की नीतियां निर्णायक साबित हुई हैं।

सीएम योगी की नीतियों से अनुसूचित जनजातीय गांवों में संतृप्ति आधारित विकास को मिला बल

आवास, भूमि अधिकार, रोजगार और शिक्षा बनीं व्यापक कल्याण का माध्यम ऊदा देवी सहित महिला वीरांगनाओं के नाम पर तीन पीएसी बटालियन का गठन बिरसा मुंडा, सुहेलदेव जैसे उपेक्षित नायकों को पहचान दिलाकर सांस्कृतिक पुनर्जागरण को दिशा दे रहीं योगी सरकार की नीतियां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियाँ समाज के अंतिम पायदान पर स्थित वंचितों को मुख्यधारा में लाने का बन रहीं मजबूत आधार लखनऊ, उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक सम्मान और अवसरों की समानता को शासन का आधार बनाते हुए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को मुख्यधारा में प्रतिष्ठित करने की दिशा में निर्णायक कदम उठा रही है। इसी का परिणाम है कि जनजातीय गांवों में संतृप्ति आधारित विकास, महिलाओं की सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण, युवाओं की शिक्षा और रोजगार के अवसर सृजित करने के साथ ही योगी सरकार उपेक्षित नायकों, धरती आबा बिरसा मुंडा, महाराजा सुहेलदेव और वीरांगना ऊदा देवी को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की पहल पर कार्य कर रही है। इससे कमजोर वर्गों में आत्मविश्वास और सम्मान की नई भावना पैदा हुई है। मुख्यमंत्री योगी की नीतियाँ विकास और सम्मान दोनों के संतुलित सूत्र पर आधारित हैं, जिनका लक्ष्य प्रदेश के हर वंचित परिवार को सशक्त बनाना है। जनजातीय गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर योगी सरकार की जनजातीय विकास नीति धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के रूप में मूर्त रूप ले चुकी है। इसके जरिए 26 जिलों के 517 जनजातीय बहुल गांवों में संतृप्ति आधारित विकास लागू किया गया है, जिससे सरकारी योजनाओं की सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित हो सके। थारू और बुक्सा समेत विभिन्न जनजातियों से जुड़े 11 लाख से अधिक लोगों को सड़क, बिजली, आवास और स्वच्छ जल जैसी बुनियादी सुविधाएँ प्रदान की गई हैं। विशेष रूप से 815 बुक्सा परिवारों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत सुरक्षित आवास उपलब्ध कराए गए हैं। उल्लेखनीय है कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत 13 जिलों के 23,000 से अधिक वनवासी परिवारों के भूमि दावों को रिकॉर्ड में दर्ज कर उनकी पीढ़ियों से लंबित मांगों को पूरा किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में 1.5 लाख से अधिक जनजातीय विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियाँ और शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ मिला, जबकि लखीमपुर खीरी और बलरामपुर के नौ आश्रम पद्धति विद्यालय 2,000 से अधिक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। युवाओं के लिए अवसर, महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ावा योगी सरकार ने युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं और सरकारी नौकरियों में व्यापक अवसर देते हुए प्री एग्जामिनेशन ट्रेनिंग सेंटर योजना के तहत 6,500 युवाओं को प्रशिक्षण उपलब्ध कराया, जिनमें से 700 से अधिक उम्मीदवार प्रशासनिक पदों के लिए चयनित हुए हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में पुलिस विभाग में 60,244 पदों की भर्ती प्रक्रिया में अनुसूचित जनजाति वर्ग के सभी आरक्षित पद भरे जाना इस परिवर्तन का बड़ा प्रमाण है। वहीं महिला सुरक्षा और सम्मान को नई पहचान देने के लिए योगी सरकार ने तीन पीएसी बटालियनों का गठन वीरांगनाओं के नाम पर किया है, जिनमें 1857 की बहादुर दलित नायिका ऊदा देवी का नाम शामिल है। ऊदा देवी के ही नाम पर प्रदेश की राजधानी में प्रतिमा की स्थापना भी की गई है, जो पासी समाज के गौरवशाली अतीत का प्रतिनिधित्व कर रही है। यह कदम न केवल सुरक्षा बलों में महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ाता है, बल्कि इतिहास की उन स्त्रियों को सम्मान देता है जिन्हें लंबे समय तक उपेक्षित रखा गया। इसी के साथ थारू हस्तशिल्प कंपनी ने 371 महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह को मजबूत किया है। नट और बंजारा जैसे विमुक्त घुमंतू समुदायों के लिए 101 आश्रम विद्यालय और 9 सर्वोदय स्कूल सामाजिक सुरक्षा और स्थिरता के केंद्र के रूप में विकसित किए गए हैं। सामाजिक एकता और आत्मगौरव का संदेश योगी सरकार ने ऐतिहासिक उपेक्षा का शिकार रहे जननायकों और नायिकाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का मिशन चलाया है। मिर्जापुर और सोनभद्र में धरती आबा बिरसा मुंडा के नाम पर निर्मित संग्रहालय और बलरामपुर में थारू संग्रहालय जनजातीय विरासत को सहेजने के महत्वपूर्ण केंद्र बने हैं। महाराजा सुहेलदेव के सम्मान में किए गए सरकारी उपक्रमों ने ओबीसी समाज में गौरव और आत्मसम्मान को मजबूत आधार दिया है। यह सांस्कृतिक पुनर्जागरण केवल इतिहास को पुनर्स्थापित नहीं कर रहा, बल्कि सामाजिक एकता और आत्मगौरव का नया संदेश दे रहा है। स्कूल पाठ्यक्रम में सुधार, छात्रवृत्तियों का विस्तार, महिला सुरक्षा ढांचे का सुदृढ़ीकरण और कमजोर वर्गों की सांस्कृतिक पहचान को प्रतिष्ठा देना, ये सभी कदम मिलकर स्पष्ट करते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित वर्गों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं।

यूपी पीईटी की फाइनल आंसर-की रिलीज़, कुछ प्रश्नों को ग्रेस मार्क्स

  लखनऊ उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी) की फाइनल आंसर-की जारी की जा चुकी है। अभ्यर्थी आयोग की वेबसाइट upsssc.gov.in पर शिफ्ट वाइज फाइनल आंसर-की देख सकते हैं। 6 सितंबर को सेकेंड शिफ्ट के पेपर में एक प्रश्न, 7 सितंबर को पहली शिफ्ट के लिए एक प्रश्न, 7 सितंबर सेकेंड शिफ्ट के दो प्रश्नों के लिए फुल मार्क्स मिलेंगे। यूपी पीईटी 6 व 7 सितंबर को आयोजित हुई थी। अब किसी भी समय रिजल्ट आ सकता है। बता दें कि दो दिन की परीक्षा में 1941993 अभ्यर्थी शामिल हुए हैं। यूपीएसएसएससी पीईटी 2025 के लिए 25,31,996 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। पीईटी स्कोर 3 साल के लिए वैलिड रहेगा। इस भर्ती परीक्षा के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में खाली पड़े ग्रुप सी लेवल के हजारों पदों को भरा जाएगा। सबसे पहले प्रारंभिक अर्हता परीक्षा ( पीईटी ) होगी और इसके बाद भर्तियों के संबंध में विज्ञापन निकाल कर आयोग आवेदन लेगा। पीईटी स्कोर के आधार पर अलग-अलग भर्तियों में अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा/स्किल टेस्ट/शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा। यूपी पीईटी रिजल्ट के बाद होंगी 44000 पदों पर भर्तियां उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को 44778 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव मिल चुका है। प्रारंभिक अर्हता परीक्षा-2025 पीईटी का परिणाम ( UPSSSC PET Result 2025 ) जारी होने के बाद इन्हें भरने के लिए आवेदन लिए जाएंगे। राज्य सरकार ने समूह ‘ग’ तक के पदों को भरने का अधिकार उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को दे रखा है। आयोग द्वारा शासन को उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक उसे 868 भर्तियों के प्रस्ताव मिले हैं। इनमें कुल 44778 पद हैं। इस बार लेखपालों की भर्ती के लिए सर्वाधिक प्रस्ताव इस बार सर्वाधिक लेखपाल भर्ती के लिए प्रस्ताव हैं। लेखपाल के 7994, तकनीकी सेवा के 5431, कनिष्ठ सहायक के 4582 अधिशासी अधिकारी के 320 पदों के प्रस्ताव आयोग को मिल चुके हैं। मत्स्य अधिकारी के 105, होम्योपैथिक फार्मासिस्ट के 397, बीजीसी तकनीशियन के 255, कंपाउंडर 560, आबकारी सिपाही 564, सहायक विकास अधिकारी 545, सहायक बोरिंग तकनीशियन 419 पद हैं। मानचित्रकार, स्पर्श दृष्टिबाधित प्रशिक्षण स्नातक अध्यापक, अधीक्षक कार्यशाला, सहायक सांख्यिकीय अधिकारी-मत्स्य निरीक्षक के प्रस्ताव आयोग को मिले हैं।  

रानी लक्ष्मीबाई की 197वीं जयंती पर झांसी में महिलाओं ने हाथ में तलवारें और बाइक लेकर किया प्रदर्शन

 झांसी बुंदेलखंड की ऐतिहासिक धरती झांसी में बुधवार को एक अनोखा दृश्य देखने को मिला. वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की 197वीं जयंती पर 500 से 600 महिलाओं ने रानी के परिधान पहनकर दोपहिया वाहनों पर भव्य रैली निकाली. यह रैली न केवल रानी लक्ष्मीबाई के साहस की याद दिला रही थी, बल्कि आधुनिक महिला शक्ति का एक सामूहिक रूप भी दिखा रही थी. समर्पण सेवा समिति द्वारा आयोजित इस वीरांगना वाहन रैली को उत्तर प्रदेश सरकार की मंत्री बेबी रानी मौर्य ने हरी झंडी दिखाकर शुरू किया. रैली झांसी किले की तलहटी से शुरू हुई. सुबह से ही रानी के स्वरूप में सजी महिलाओं का उत्साह देखने लायक था. डीजे पर बजते गीतों की धुन पर महिलाएं तलवारें हाथ में लिए पूरी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रही थीं. वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की 197वीं जयंती रैली झांसी किला, इलाइट चौराहा, झांसी होटल, सदर बाजार और गोविंद चौराहा होते हुए रानी लक्ष्मीबाई पार्क में संपन्न हुई. पूरे मार्ग पर लोगों ने जगह जगह पुष्पवर्षा करके महिलाओं का स्वागत किया. रानी के भेष में स्कूटी और बाइक पर सवार महिलाएं शहर के लिए आकर्षण का केंद्र बन गईं. समर्पण सेवा समिति की अध्यक्ष अपर्णा दुबे ने कहा कि यह रैली सिर्फ शोभायात्रा नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण का संदेश है. उन्होंने बताया कि सभी महिलाएं रानी लक्ष्मीबाई के परिधान में थीं और यह दृश्य आधुनिक नारी की ताकत को दर्शाता है. रानी के रूप में सजी हिमांशी समाधिया ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे उस भूमि से हैं जहां रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी थी. महिलाएं तलवारें हाथ में लिए पूरी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ीं युवती रितु ने कहा कि स्कूटी पर रानी के रूप में बैठना एक विशेष अनुभव है और वह इस रैली में शामिल होकर खुश हैं. झांसी की सड़कों पर महिलाओं की यह रैली वीरांगना के साहस और आधुनिक नारी की शक्ति को एक साथ दिखाती रही.