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जबरन गले लगाकर किया Kiss, प्रतिष्ठित सराफ के बेटे की करतूत कैमरे में कैद

झांसी  यूपी के झांसी में नामचीन सराफा कारोबारी के बेटे की गंदी हरकत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उसने बार रेस्टूरेंट में रिसेप्शन पर मौजूद युवती को पहले फ्लाइंग Kiss दी। इसके बाद उसे जबरन गले लगाया और गाल पर भी दो बार Kiss किया। वीडियो वायरल होते ही पुलिस हरकत में आई। युवती की शिकायत पर केस दर्ज किया और सराफ के बेटे को हिरासत में ले लिया है। मामला नाबाबाद थाना क्षेत्र के इलाहाबाद बैंक चौराहा स्थित एक बार रेस्टोरेंट का है। पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई और उसी का फुटेज किसी ने सोशल मीडिया पर डाला तो वह वायरल हो गया है। आरोपी सराफा कारोबारी के बेटे का नाम अमन अग्रवाल बताया जा रहा है।   वायरल हो रहे 36 सेंकेड के वीडियो में दिख रहा है कि अमन अग्रवाल दो युवतियों के साथ रेस्टूरेंट में आता है और रिसेप्शन पर तैनात एक युवती के साथ बात कर रहा है। बातचीत शायद हल्के मूड में हो रही है, क्योंकि सभी हंसते दिखाई दे रहे हैं। इसी बीच वह रिसेप्शन पर तैनात युवती को पहले फ्लाइंग Kiss देता है। फिर लिफ्ट की तरफ दोनों युवतियों के साथ जाते-जाते अचानक रुक जाता है। रिसेप्शनिस्ट के पास आता है। इस पर रिसेप्शनिस्ट डर कर कुछ पीछे चली जाती है। रिसेप्शनिस्ट के पीछे हटने के बाद भी अमन उसके पास जाकर उसे जबरिया गले लगाता है। फिर एक नहीं दो बार उसके गालों पर kiss करता है। युवक के साथ आई युवती भी वहां खड़ी होकर यह नजारा देखती है और हंसती है। रेस्टूरेंट के रिसेप्शन पर तैनात अनजान युवती को जबरिया गले लगाने और kiss करने के बाद युवक आराम से निकल भी जाता है। इधर अचनाक हुई इस हरकत से रिसेप्शनिस्ट हैरान रह जाती है। कुछ समय तक तो उसे समझ ही नहीं आता कि हुआ क्या है। इसके बाद इसकी जानकारी रेस्टूरेंट के अन्य कर्मचारियों को होती है। पीड़िता ने इसकी शिकायत थाने में की। उसने अपनी शिकायत में कहा है कि अमन अग्रवाल नशे की हालत में आया है और उसके साथ अश्लील हरकतें की हैं। इसी बीच घटना का वीडियो भी वायरल हो जाता है। वीडियो वायरल होते ही पुलिस फास्ट हुई और अमन को हिरासत में ले लिया गया है। नबाबाद थाना प्रभारी निरीक्षक जेपी पाल ने बताया कि जांच की जा रही है।

देश के अन्य राज्यों को पीछे छोड़कर उत्तर प्रदेश विकास के क्षेत्र में बना अग्रणी राज्य

ODOP के क्षेत्र में 3 करोड़ से अधिक व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त हुआ ODOP योजना के तहत 5 लाख से अधिक युवाओं को बैंकों से जोड़ा गया यूपी में लगभग 96 लाख MSME इकाइयाँ हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं GST रजिस्ट्रेशन वाले हर व्यापारी को ₹5 लाख का सुरक्षा बीमा कवर दिया जा रहा है उत्तर प्रदेश में मनरेगा के तहत महिलाओं की भागीदारी 42% तक पहुंची  'नमो ड्रोन दीदी योजना' की पहल से महिलाओं का सशक्तीकरण    लखनऊ उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले साढ़े 8 वर्ष में तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए विकास की नई इबारत लिखी है। 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की गणना पिछड़े राज्यों में होती थी। युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करने के लिए मजबूर थे। पिछली सरकारों में माफियाराज, भ्रष्टाचार, परिवारवाद और अराजकता का बोलबाला था। सीएम योगी ने अपने कुशल नेतृत्व में लॉ एंड ऑर्डर की व्यवस्था स्थापित की और राज्य में निवेश और उद्यमियों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया। उत्तर प्रदेश आज वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनने की राह पर है।   उत्तर प्रदेश विकास के क्षेत्र में बना अग्रणी राज्य  उत्तर प्रदेश, भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है। लेकिन अब ये सिर्फ संख्या में नहीं बल्कि विकास की दिशा में भी अगुआ बनने की राह पर है। पिछले साढ़े 8 वर्षों में राज्य ने तीन बड़े क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है। पहला, एक जिला, एक उत्पाद(ODOP) के तहत युवाओं को रोजगार देना। दूसरा, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSMEs) का तेजी से विकास। तीसरा, कृषि-टेक्नोलॉजी-महिलाओं पर विशेष फोकस। इन प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य को “परंपरा से प्रगति” की राह पर चलने वाला मॉडल बनाया है। ओडीओपी से युवाओं को रोजगार ODOP कार्यक्रम 2018 में लॉन्च हुआ था, जिसका उद्देश्य प्रत्येक जिले की विशिष्ट पारंपरिक उत्पाद हस्तशिल्प, हस्तनिर्मित वस्तुएँ, कृषि-उत्पाद को उचित मूल्य दिलाकर बाजार तक ले जाना था। ODOP सेक्टर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 3 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। ODOP योजना के तहत 5 लाख से अधिक युवाओं को बैंकों से जोड़ा गया है जो स्वरोजगार की गारंटी देता है। ODOP योजना की सफलता के कारण उत्तर प्रदेश निर्यात का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। 2016-17 में राज्य का निर्यात लगभग ₹80,000 करोड़ था, जो बढ़कर ₹1.56 लाख करोड़ से अधिक हो गया है। ODOP उत्पादों का हिस्सा राज्य के निर्यात का करीब 70% तक पहुंच चुका है। ये आंकड़े केवल संख्या नहीं, बल्कि सीएम योगी की मजबूत इच्छाशक्ति का संकेत हैं। इसने युवाओं को रोजगार के  लिए पलायन की सोच से बाहर निकाला है। आज गांव-शहर की इकाइया, मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और डिजिटली जुड़ी मार्केटिंग मॉडल युवाओं को स्वरोजगार और नए रोजगार के अवसर दे रही हैं। एमएसएमई-इकोसिस्टम से लघु उद्योगों का विकास  उत्तर प्रदेश में लघु एवं मध्यम उद्योग ने विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य में लगभग 96 लाख MSME इकाइयाँ हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं। सूक्ष्म इकाइयों से लेकर छोटी विनिर्माण इकाइयां जिसमें रेल-मेनेटल, कपड़ा, हैंडीक्राफ्ट, खाद्य-प्रोसेसिंग हैं, रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार हर 1 करोड़ निवेश से लगभग 8 रोजगार उत्पन्न हो सकते हैं। इस प्रकार लघु उद्योगों ने स्थानीय स्तर पर विकास की नींव रखी है। जहा बड़े उद्योग दूर-दराज होते हैं, वहीं एमएसएमई ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता को गति प्रदान की है।  सरकार प्रदेश के 11 जिलों में 15 नए MSME औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित कर रही है, जो छोटे और मझोले उद्योगों को भूमि और आवश्यक सुविधाएँ प्रदान करेंगे। MSME उद्यमियों के लिए 1,000 दिनों तक किसी भी प्रकार की NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) की आवश्यकता नहीं है। वे अपना आवेदन जमा करके उत्पादन शुरू कर सकते हैं, जिससे उद्योग लगाना आसान हुआ है। सुरक्षा और खरीद प्रोत्साहन के तहत राज्य सरकार के विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) द्वारा राज्य के MSME से 25% खरीद अनिवार्य कर दी गई है। इसके अलावा, GST रजिस्ट्रेशन वाले हर व्यापारी को ₹5 लाख का सुरक्षा बीमा कवर भी दिया गया है। कृषि-तकनीक ने अर्थव्यवस्था को दी नई दिशा  उत्तर प्रदेश में कृषि और टेक्नोलॉजी ने विकास को बुलेट ट्रेन की रफ्तार से आगे बढ़ाया है। कृषि-उत्पादन में बढ़ावा देने के लिए फूड-प्रोसेसिंग क्लस्टर, फल-फूल निर्यात मंडल, कोल्ड-चेन इंफ्रा जैसी परियोजनाएँ चल रही हैं। मुख्यमंत्री योगी ने प्रदेश में डिजिटल एग्रीकल्चर इकोसिस्टम विकसित करने हेतु नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज और बाजार तक सीधी पहुंच प्रदान करना है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है। सरकार कृषि में शोध और विज्ञान के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। यह प्रयास है कि किसानों का जुड़ाव आधुनिक तकनीकों और अनुसंधान से बढ़े, जिससे वर्तमान कृषि भूमि से तीन गुना तक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। उत्तर प्रदेश के विकास में महिलाओं की अहम भागीदारी महिलाओं की भागीदारी ने भी राज्य की अर्थव्यवस्था को नया आयाम दिया है। 2025 में मनरेगा के तहत महिलाओं की भागीदारी 42% तक पहुंच गई है। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सामाजिक परिवर्तन का संकेत है। टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से महिलाओं को ई-मोबाइल तकनीक, स्मार्ट कृषि जानकारी, डिजिटल मार्केटिंग जैसे उपकरण मिले हैं, जिससे ग्रामीण महिला उद्यमिता को मदद मिली है। 

एमएसएमई इकाइयों को त्वरित सुविधा देने पर मुख्यमंत्री का फोकस

मुख्यमंत्री का निर्देश, रेवेन्यू शेयरिंग आधारित लीज़ रेंटल नीति का प्रारूप तैयार करें लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में औद्योगिक विकास के लिए लैंड बैंक के विस्तार और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को त्वरित सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु प्लग एंड प्ले मॉडल को लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। शनिवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक परियोजनाओं के लिए पर्याप्त और सतत उपलब्ध भूमि सुनिश्चित करने के लिए लीज़ रेंटल मॉडल को रेवेन्यू शेयरिंग के आधार पर आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि यह मॉडल उत्तर प्रदेश के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकता है और इसी आधार पर विस्तृत नीति तैयार की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इस नीति का मुख्य फोकस एमएसएमई क्षेत्र पर हो, ताकि छोटे और मध्यम उद्योग बिना अतिरिक्त जटिलताओं के तुरंत उत्पादन शुरू कर सकें। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में औद्योगिक भूमि की दरें अपेक्षाकृत अधिक हैं और खासकर एनसीआर से जुड़े जिलों में यह दबाव अधिक महसूस होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि की लागत उद्योगों के विस्तार, तकनीकी उन्नयन और नई इकाइयों की स्थापना के मार्ग में प्रमुख बाधा है। इसी कारण एमएसएमई के लिए किफायती आकार के भूखंडों और तैयार औद्योगिक शेड उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नए मॉडल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा है कि उद्योग भूमि खरीद और निर्माण संबंधी प्रक्रियाओं में समय और संसाधन खर्च करने के बजाय सीधे उत्पादन, मशीनरी स्थापना और रोजगार सृजन पर ध्यान केंद्रित कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्लग एंड प्ले मॉडल के अंतर्गत औद्योगिक विकास प्राधिकरण अपनी भूमि का स्वामित्व बरकरार रखते हुए उस पर तैयार औद्योगिक शेड विकसित करेंगे या सार्वजनिक निजी सहभागिता के माध्यम से निर्माण कराया जाएगा। इन शेडों को उद्योगों को पूर्वनिर्मित उपयोग योग्य परिसर के रूप में किराये पर उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मॉडल को पीपीपी की डीबीएफओटी संरचना के तहत लागू किया जा सकता है जिसमें निजी क्षेत्र डिज़ाइन, निर्माण, वित्त और संचालन की जिम्मेदारी संभालेगा जबकि भूमि स्वामित्व और नियामकीय नियंत्रण प्राधिकरण के पास रहेगा। उन्होंने कहा कि रेवेन्यू शेयरिंग आधारित लीज़ रेंटल व्यवस्था से प्राधिकरण को स्थायी आय सुनिश्चित होगी और उद्यमियों को बिना भूमि खरीद के चरणबद्ध तरीके से उद्योग विस्तार का अवसर मिलेगा। यह मॉडल एमएसएमई के वित्तीय जोखिम को कम करेगा और उन्हें व्यवसाय संचालन में अधिक लचीलापन प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रस्तावित नीति में उद्योग को दीर्घकालिक स्थिरता और स्पष्टता मिले जबकि भूमि का नियंत्रण राज्य के पास सुरक्षित रहे। रेवेन्यू शेयरिंग व्यवस्था सरल, पारदर्शी और औद्योगिक विकास के लिए सहायक होनी चाहिए ताकि राज्य की भूमि संपदा का अधिकतम और उचित उपयोग सुनिश्चित हो सके।

‘सेवा ही सर्वोच्च धर्म’ के सिद्धांत पर सशक्त युवा, विकसित भारत बनाने के उत्सव की मेजबानी करेगी उत्तर प्रदेश की सरकार

डायमंड जुबली जंबूरी: जब एशिया-पैसिफिक के प्रतिनिधि चखेंगे बनारसी खाने का स्वाद और देखेंगे भारतीय हस्तकला परंपरा और तकनीक का संगम: 19वीं राष्ट्रीय जंबूरी युवाओं में राष्ट्रीय सेवा और वैश्विक भाईचारे की भावना करेगी मजबूत सांस्कृतिक गौरव का उत्सव: लखनऊ में भारत स्काउट्स एवं गाइड्स का महाकुंभ, 75वीं वर्षगांठ का भव्य समारोह लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ 61 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भारत स्काउट्स और गाइड्स के महाकुम्भ की मेज़बानी के लिए पूरी तरह तैयार है। योगी सरकार 23 से 29 नवंबर तक 19वें राष्ट्रीय जम्बूरी कार्यक्रम का आयोजन कर रही है, जो भारतीय संस्कृति और एकता में विविधता का एक भव्य उत्सव होगा। "सशक्त युवा विकसित भारत" थीम पर आधारित इस "डायमंड जुबली" कार्यक्रम में देश भर से लगभग 30,000 स्काउट-गाइड और यूनिट लीडर्स के साथ 1500 विदेशी प्रतिभागियों समेत कुल 33,000 से अधिक प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। यह आयोजन न केवल स्काउटिंग परंपरा का उत्सव है, बल्कि युवाओं में सेवा, अनुशासन और नेतृत्व कौशल को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण मंच भी है। काशी के घाटों पर आस्था और संस्कृति का संगम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर, आयोजन स्थल को 'लघु भारत' का भव्य स्वरुप दिया जा रहा है, जहाँ देश के हर कोने की पहचान एक साथ जीवंत होगी। इस सांस्कृतिक समागम का मुख्य आकर्षण काशी के घाटों का प्रतिरूप होगा। विश्व भर से आए प्रतिभागियों के समक्ष सातों दिन काशी के घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती की शानदार प्रस्तुति की जाएगी। यह प्रस्तुति विश्व पटल पर भारत के आध्यात्मिक गौरव और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाएगी। देशभर के स्वाद और कला का अनुभव यह जम्बूरी 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को साकार करती हुई, प्रतिनिधियों को देश की विविधता का प्रत्यक्ष अनुभव कराएगी। वाराणसी के कंटीजेंट लीडर आशु कुमार वर्मा के अनुसार, फूड प्लाजा में न केवल बनारसी पान का स्टाल लगेगा, बल्कि बनारसी चाट, पूड़ी-कचौड़ी और जलेबी का स्वाद भी विश्वभर से आए मेहमान चख सकेंगे। इसके साथ ही, हस्तकला में वेस्ट मटेरियल से हस्तशिल्प और मिट्टी को आकार देकर कलाकृतियाँ बनाई जाएंगी, जो भारत की कलात्मक विरासत को प्रदर्शित करेंगी। नवाचार और भविष्य का नेतृत्व युवाओं में नवाचार और नेतृत्व कौशल को प्रोत्साहित करने के लिए, आयोजन स्थल पर एक विशेष आईटी एवं एआई हब स्थापित किया जा रहा है। यहाँ डिजिटल लर्निंग, इनोवेशन और लीडरशिप से जुड़े वर्कशॉप आयोजित होंगे। स्काउट्स को शिक्षा, रोबोटिक्स और साइंस एक्सपो के माध्यम से आधुनिक तकनीकों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, ताकि वे विकसित भारत के लिए सक्षम नेतृत्वकर्ता बन सकें। यह जम्बूरी युवाओं को "सेवा ही सर्वोच्च धर्म" के आदर्श से प्रेरित करेगी। 61 वर्षों के बाद उत्तर प्रदेश में हो रहा यह भव्य आयोजन, युवा नेतृत्व, अनुशासन और राष्ट्र सेवा की भावना का प्रतीक बनकर, देश और विदेश में एक अमिट छाप छोड़ेगा।

आजीविका मिशन की मदद से ग्रामीण महिलाओं का समूह तैयार कर रहा एलईडी बल्ब

झांसी में ग्रामीण महिलाओं का समूह एलईडी बल्ब बनाने और मार्केटिंग का खुद कर रहा काम झांसी उत्तर प्रदेश की योगी सरकार राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित कर रही है। महिलाओं के कई समूहों ने अभिनव पहल करते हुए प्रेरणा देने वाली मिसाल कायम की है। ऐसा ही एक उदाहरण प्रस्तुत किया है झांसी जिले के चिरगांव ब्लॉक के ग्राम जरियाई की जय मां रतनगढ़ वाली महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने। इन महिलाओं ने उद्यमिता की राह पर कदम बढ़ाते हुए एलईडी बल्ब बनाने का काम शुरू किया है। महिलाओं का समूह बल्ब बनाकर इस एलईडी बल्ब को अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में बिक्री करता है। जय मां रतनगढ़ वाली महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष अंजना के अनुसार ने उनके समूह से 12 महिलाएं जुड़ी हैं। लगभग 8 महीने पहले एलईडी बल्ब बनाने का काम उनके समूह ने शुरू किया है। महिलाओं के समूह ने इस काम को शुरू करने के लिए दस हजार रूपये जुटाए और उससे जरूरी सामान मंगवाए। समूह की महिलाओं ने लोन भी लिया। योगी सरकार ने महिलाओं को बल्ब निर्माण का प्रशिक्षण दिलाया। समूह की महिलाओं को बल्ब बनाने के लिए रॉ मैटेरियल प्रदान किया जाता है। महिलाएं इस मैटेरियल से एलईडी बल्ब बनाकर बिक्री का काम करती हैं। समूह की महिलाएं हर रोज 150 से अधिक बल्ब तैयार करती हैं और उसकी बिक्री की रणनीति भी खुद तैयार करती हैं।  चिरगांव ब्लॉक की बीएमएम कल्पना के अनुसार स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को समूह का गठन कराने के बाद संबंधित काम का प्रशिक्षण दिलाया गया। इन उत्पादों की बिक्री के लिए प्रदर्शनियों और मेलों में सरकार की ओर से निशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराया जाता है। महिलाओं के समूह ने इस पहल के माध्यम से आजीविका अर्जित करने की ओर कदम बढ़ाया है।

स्टार्टअप संस्कृति को और मजबूत बनाया जाए, प्रशिक्षण, परीक्षण और मार्केट लिंकेज की हर जरूरत पूरी हो: मुख्यमंत्री

आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा, कहा; निवेशकों को इंसेंटिव के लिए न करनी पड़े प्रतीक्षा सेमीकंडक्टर परियोजनाओं पर तेजी से कार्य, 02 नई परियोजनाओं के लिए भारत सरकार से सतत संवाद बनाए रखें: मुख्यमंत्री आईटी और आईटीईएस सेक्टर में युवाओं की प्रत्यक्ष सहभागिता बढ़ाई जाए: मुख्यमंत्री नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा में नए लैंड बैंक विकसित किए जाएं: मुख्यमंत्री 08 वर्षों में यूपी का इलेक्ट्रॉनिक निर्यात 3,862 करोड़ से बढ़कर 44,744 करोड़ के पार आईटी निर्यात ₹82,055 करोड़ और डाटा सेंटर में ₹21,342 करोड़ का निवेश आया 06 एसटीपीआई सेंटर संचालित, तीन नए प्रस्तावित मुख्यमंत्री ने उभरती तकनीकों में रिसर्च और इनोवेशन को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। इसे और सशक्त बनाने के लिए प्रशिक्षण, परीक्षण और मार्केट लिंकेज की सभी जरूरतों को पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि युवाओं को तकनीक आधारित नई अर्थव्यवस्था से जोड़ना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। आईटी और आईटीईएस सेक्टर में अधिक युवाओं को जोड़ने के लिए प्रायोगिक प्रशिक्षण मॉडल विकसित किए जाएं और इसके लिए इयान रियलिटी जैसी संस्थाओं के साथ सहयोग बढ़ाया जाए। शनिवार को सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि आईटी और आईटीईएस सेक्टर से जुड़े निवेशकों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध अनुमति व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि पात्र निवेशकों को प्रोत्साहन राशि के लिए प्रतीक्षा नहीं करनी पड़े और इस संबंध में विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टार्टअप, सेमीकंडक्टर, डाटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण में उत्तर प्रदेश की स्थिति लगातार मजबूत हुई है। अब लक्ष्य इसे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में शीर्ष श्रेणी में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक परियोजना स्वीकृत हो चुकी है जबकि दो अन्य प्रस्तावों के लिए भारत सरकार से सतत संवाद बनाए रखा जाए। उन्होंने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा में नए लैंड बैंक विकसित करने का निर्देश भी दिया। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017-18 में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्यात ₹3,862 करोड़ था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर ₹44,744 करोड़ तक पहुंच गया। इसी अवधि में आईटी निर्यात ₹55,711 करोड़ से बढ़कर ₹82,055 करोड़ हो चुका है। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति 2020 के तहत 67 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें ₹15,477 करोड़ के निवेश और 1,48,710 रोजगार की संभावनाएं हैं। अब तक ₹430 करोड़ की प्रोत्साहन धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है और मार्च 2026 तक 25 अन्य प्रस्तावों के आगे बढ़ने की संभावना है। डाटा सेंटर नीति के अंतर्गत हीरानंदानी समूह, एनटीटी ग्लोबल, वेब वर्क्स, अदाणी एंटरप्राइजेज और एसटी टेलीमीडिया सहित कई कंपनियों ने ₹21,342 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव दिए हैं, जिनसे लगभग 10 हजार नए रोजगार सृजित हो रहे हैं। स्टार्टअप नीति के तहत भी निरंतर प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2021-22 में जहां ₹274 लाख की धनराशि स्टार्टअप प्रोत्साहन के लिए जारी की गई थी, वहीं जनवरी 2025 तक यह मूल्य बढ़कर ₹2,600 लाख तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ने स्टार्टअप फंड के प्रभावी उपयोग और निगरानी व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।

जिला स्तर पर आर्थिक आंकड़ों के प्रभावी उपयोग के लिए उन्नत तकनीक का हो इस्तेमालः प्रमुख सचिव नियोजन

-सांख्यिकीय अधिकारियों के सुदृढ़ीकरण पर केंद्रित विशेष कार्यशाला में प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव व निर्देश कार्यशाला में जनपदीय/ मंडलीय अधिकारियों को ओ.टी.डी. सेल की बैठकों की समीक्षा कराते हुए अपेक्षित सुधार की आवश्यकता पर दिया गया बल जनपद स्तर पर तैयार किये जा रहे ‘जिला आर्थिक प्रतिवेदन’ को विकास तथा समावेशी बनाने की आवश्यकता को किया गया रेखांकित जिला घरेलू उत्पाद (DDP) अनुमान, जिला ओ.टी.डी. सेल, डी.डी.पी. टूलकिट एवं वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण की उपयोगिता के विषय में कराया गया अवगत कार्यशाला में नियोजन विभाग के महत्त्व को रेखांकित करते हुए दायित्वों के तत्परता से निर्वहन के लिए अधिकारियों को किया गया निर्देशित लखनऊ प्रदेश को 'वन ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी' बनाने के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार ने सांख्यिकीय अधिकारियों के सुदृढ़ीकरण पर केंद्रित विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। शनिवार को योजना विभाग द्वारा योजना भवन, कक्ष संख्या 111, लखनऊ में 'फ्रॉम डाटा टू डेवलपमेंटः स्ट्रेंदनिंग डिस्ट्रिक्ट लेवल इकॉनमिक लाइट' विषय पर एकदिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला की अध्यक्षता प्रमुख सचिव, नियोजन आलोक कुमार द्वारा की गई तथा उन्होंने अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण सुझाव व निर्देश दिए। कार्यशाला का शुभारंभ अतिथि एवं क्षेत्रीय अधिकारियों के स्वागत से हुआ, जिसके बाद निदेशक, अर्थ एवं संख्या, अलका बहुगुणा ढौंडियाल ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए अवगत कराया कि बदलते परिवेश में नीतियों के प्रभावी एवं सटीक निर्धारण के लिए सांख्यिकीय आंकड़ों की विश्वसनीयता, गुणवत्ता, समयबद्धता तथा उनके समुचित उपयोग का सुनिश्चित होना अत्यंत आवश्यक है।  जिला स्तर पर आर्थिक आंकड़ों की भूमिका पर बल प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने अपने मुख्य वक्तव्य में जिला स्तर पर आर्थिक आंकड़ों की भूमिका और उनके प्रभावी उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने नवीन पद्धतियों एवं सुसंगत आंकड़ों के प्रयोग से जनपद/ मण्डल स्तर पर विकास को वांछनीय गति देने के लिए जिला/ मंडल प्रशासन को अवगत कराने तथा आवश्यकतानुसार उन्हें सकारात्मक हस्तक्षेप के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया। साथ ही, प्रमुख सचिव द्वारा जनपदीय/ मंडलीय अधिकारियों से अपेक्षा की गयी कि ओ.टी.डी. सेल की बैठकों में तथ्यपरक समीक्षा कराते हुए अपेक्षित सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। प्रमुख सचिव द्वारा ओ.टी.डी. मिशन को आर्थिक विकास मिशन के रूप में देखते हुए अपेक्षित कार्यवाही किये जाने की आवश्यकता पर बल दिया।  ‘जिला आर्थिक प्रतिवेदन’ से समावेशी विकास की राह होगी सुनिश्चित कार्यशाला में जनपद स्तर पर तैयार किये जा रहे ‘जिला आर्थिक प्रतिवेदन’ के माध्यम से जनपद में कुशल नीतियों के निर्माण से विकास के साथ ही उसके समावेशी होने की प्रबल आवश्यकता को रेखांकित किया। जिला घरेलू उत्पाद (DDP) अनुमान, जिला ओ.टी.डी. सेल, डी.डी.पी. टूलकिट एवं वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण की जनपदीय विकास हेतु उपयोगिता को तथ्यपरक रूप में अवगत कराया। आलोक कुमार ने कहा कि जनपद स्तर पर सटीक आंकड़ों के प्रयोग से जनपद की विकास में सक्षम भागीदारी से प्रदेश के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे राष्ट्रीय विकास की अवधारणा साकार होगी। प्रमुख सचिव ने नियोजन विभाग के महत्त्व को रेखांकित करते हुए प्रदेश के चौमुखी विकास में आंकड़ों के महत्त्व तथा अर्थ एवं संख्या प्रभाग के अति महत्वपूर्ण दायित्व के तत्परता से निर्वहन के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। सभी अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों के लिए सजग रहने का निर्देश  सचिव, नियोजन मासूम अली सरवर द्वारा सभी अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारियों के लिए सजग एवं सचेत रहते हुए शासन की प्राथमिकता की योजनाओं को आंकड़ों के माध्यम से लागू किये जाने की अपेक्षा से अवगत कराते हुए सभी अधिकारियों का उत्साहवर्धन किया। साथ ही, उन्हें भविष्य में आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण/ वर्कशॉप के माध्यम से अपने को भिज्ञ एवं प्रासंगिक बनाए रखने पर विशेष बल दिया। प्रदेश के डिजिटल पद्धति से आंकड़ों के एकत्रीकरण की प्रशंसा आशीष कुमार, सेवानिवृत्त महानिदेशक, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम मंत्रालय द्वारा अपने उद्बोधन में प्रदेश के डिजिटल पद्धति से आंकड़ों के एकत्रीकरण जैसे नवाचार की प्रशंसा की एवं आंकड़ों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पर्यवेक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उनके द्वारा जिला घरेलू उत्पाद अनुमान की बहुचर्चित उत्तर प्रदेश की पुस्तिका की भी प्रशंसा करते हुए अवगत कराया गया उत्तर प्रदेश अनेक प्रदेशों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। उनके द्वारा आगामी समय में संख्याविदों की सेवाओं की बढ़ती जिम्मेदारियों के प्रति सजग कराया गया। तकनीकी सत्रों के माध्यम से कई विषयों पर की गई चर्चा कार्यशाला में तकनीकी सत्रों के माध्यम से जिला घरेलू उत्पाद (DDP) अनुमान, जिला ओ.टी.डी. सेल, डी.डी.पी. टूलकिट, वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक, PLFS/ASUSE सर्वेक्षण, महिला आर्थिक सशक्तिकरण सूचकांक (WEE Index) एवं "विकसित उत्तर प्रदेश @2047" जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यशाला में आशीष कुमार, सेवानिवृत्त महानिदेशक, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम मंत्रालय, भारत सरकार, मासूम अली सरवर, सचिव नियोजन/ महानिदेशक, अर्थ एवं संख्या प्रभाग, उत्तर प्रदेश, अक्षत वर्मा, विशेष सचिव, नियोजन विभाग, अलका बहुगुणा, निदेशक, अर्थ एवं संख्या प्रभाग, संजय कुमार श्रीवास्तव, अपर निदेशक, श्री आर.के. मिश्रा, अपर निदेशक एवं क्षेत्रीय उप निदेशक (अर्थ एवं संख्या) एवं अर्थ एवं संख्याधिकारी उपस्थित रहे।  

वीरांगना ऊदा देवी पासी की प्रतिमा का अनावरण करेंगे रक्षा मंत्री व सीएम योगी

वीरांगना ऊदा देवी पासी का बलिदान दिवस रविवार 16 नवम्बर को स्वाभिमान समारोह का भी उद्घाटन करेंगे रक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री  रविवार को सेक्टर-19 वृंदावन कॉलोनी, पासी चौराहा लखनऊ में होगा आयोजन लखनऊ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वीरांगना ऊदा देवी पासी की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। शौर्य, त्याग व बलिदान की प्रतिमूर्ति वीरांगना ऊदा देवी पासी का रविवार को बलिदान दिवस है। इस दौरान स्वाभिमान समारोह का भी उद्घाटन होगा। यह आयोजन रविवार सुबह 10 बजे सेक्टर-19 वृंदावन कॉलोनी, पासी चौराहे पर होगा। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक समेत कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। गौरतलब है कि वीरांगना ऊदा देवी पासी ने 1857 के प्रथम भारतीय स्वाधीनता संग्राम में अपने अदम्य साहस व पराक्रम से 36 अंग्रेज सैनिकों को मौत के घाट उतारकर वीरगति का वरण किया था। इसलिए वीरांगना ऊदा देवी के बलिदान दिवस पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है।

समग्र और सुव्यवस्थित विकास का ख़ाका खींच कर योगी सरकार काशी को विश्व पर्यटन के मानचित्र पर तेजी से उभार रही है

प्राचीन काल से ही काशी अपनी संस्कृति, धर्म, अध्यात्म और विरासत के लिए विश्वभर में रही है ख्यातिप्राप्त वाराणसी प्राचीन संस्कृति,आध्यात्मिक चेतना और ऐतिहासिक विरासत से समृद्ध काशी जिसे दुनिया "वाराणसी" और 'बनारस' के नाम से भी जानती है। अब ये शहर एक बार फिर अपने पुराने वैभव की ओर लौट रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार के नेतृत्व में चल रहे सतत विकास कार्यों के चलते यह नगरी न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बनी हुई है, बल्कि वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर भी नई चमक के साथ उभर रही है। योगी सरकार द्वारा 2017 में प्रदेश की बागड़ोर संभाले के बाद वाराणसी के पर्यटन विकास को प्राथमिकता मिली। आठ सालों के दौरान 35,705.07 लाख रुपये की लागत से 79 परियोजनाओं का शिलान्यास हुआ । इन परियोजनाओं में से कई कार्य पूर्ण हो चुका हैं, जबकि कई पर्यटन विकास कार्यो पर काम तीव्र गति से चल रहा हैं। काशी के समग्र और सुव्यवस्थित विकास का ख़ाका खींच कर योगी सरकार काशी को विश्व पर्यटन के मानचित्र पर तेजी से उभार रही है। पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक दिनेश कुमार ने बताया कि पिछले करीब 8 सालों में 19219.57 लाख की लागत से 49 पर्यटन के विकास कार्यो को कराया जा चुका है। जबकि 30 पर्यटन विकास के महत्वपूर्ण विकास कार्यों को 16485.5 लाख रूपये की लागत तेजी से कराया जा रहा है।   19219.57 लाख की लागत से पूर्ण हुए प्रमुख पर्यटन विकास के कार्य  गलियों का शहर कहे जाने वाली काशी की गलियों के सौंदर्यीकरण को आधुनिक तरीके से विकसित किया गया है। घाटों का सौंदर्यीकरण कर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाया गया है। काशी की चार धाम यात्रा,काशी विष्णु यात्रा,द्वादश आदित्य यात्रा, नव दुर्गा, अष्ट भैरव, नव गौरी, विनायक, द्वादशज्योतिर्लिंग के लिए पावन पथ का निर्माण कार्य, पंचक्रोशी यात्रा के पांच पड़ाव के पर्यटन विकास का कार्य एवं अन्य कई धार्मिक यात्राओ और मार्ग में पड़ने वाले मंदिरो का विकास, रोहनिया, पिंडरा, शिवपुर आदि क्षेत्रो के ग्रामीण इलाकों में प्राचीन आस्था के केंद्र, मंदिरो, तालाबों, कुंडो आदि का कार्य, सामने घाट एवं रामनगर में शास्त्रीय घाट का पक्के घाट के रूप में निर्माण।  मांर्कण्डये महादेव मंदिर, सारंग नाथ तालाब, शूलटंकेश्वर मदिर गंगा घाट व अन्य मंदिरो और घाटों, सारनाथ में लाइट एंड साउंड शो, बुद्धा थीम पार्क, संत शिरोमणि रविदास जी के जन्म स्थली पर जन सुविधा के कार्य,  क्रूज़ बोट का संचालन, लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट पर पर्यटन सूचना केंद्र, नरसिंह मठ, शंकुलधारा मठ, राजघाट पर चेंजिंग रूम, पिंडरा में माँ भद्रकाली मंदिर का सौंदर्यीकरण आदि कार्य है।  16485.5 लाख की लागत से  प्रमुख से गतिमान पर्यटन विकास के कार्य  टूरिज्म डेवलपमेंट के योजना के अंतर्गत, जैन तीर्थंकर चंद्रप्रभु की जन्मस्थली चंद्रावती, सारनाथ के सारंग नाथ मंदिर का पर्यटन विकास, मणिकर्णिका घाट सतुआ बाबा आश्रम का पर्यटन विकास एवं सौंदर्यीकरण एवं डोमरी स्थित आश्रम में यात्री निवास, पर्यटन आवास गृह परेड कोठी व राही पर्यटक आवास गृह का उच्चीकरण मनारी रोड पर सरफेस पार्किंग, संत रविदास पार्क सौंदर्यीकरण व जीर्णोद्धार, तेलियाना घाट पर निषादराज की प्रतिमा, मांडवी कुंड व गणेश मंदिर, हेलीपोर्ट, सात प्रमुख घाटों पर 7 जेटी चेंजिंग रूम, गुरुधाम मंदिर का पर्यटन विकास, थाईवट टेम्पल (बुद्धा स्टेचू ) पर फसाद लाइट, करखियाँव में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पार्क का निर्माण, लमही स्थित मुंशी प्रेमचंद के घर को संग्रहालय के रूप में विकसित करना, बौद्ध परिपथ में साइनेज, नगवा स्थित संत रविदास पार्क का सौंदर्यीकरण एवं जीर्णोद्धार, मांडवी कुंड का सौंदर्यीकरण, संत कबीर प्राकट्य स्थल का पर्यटन विकास आदि पर्यटन विकास के कई कार्य निर्माणाधीन है।  काशी में पर्यटन विकास पर लोगों की राय  "योगी सरकार ने काशी  का चौतरफा विकास कराया है,जिसमे छोटे से लेकर बड़े पर्यटन स्थल का जीर्णोद्धार हुआ है। जिसको देखने के लिए पर्यटकों अब अधिक दिन तक काशी प्रवास कर रहे है। इससे होटल उद्योग को लाभ हो रहा है।"   होटल व्यवसायी , विकास अग्रवाल  "पहले पर्यटकों श्री काशी विश्वनाथ धाम, घाट ,सारनाथ  आदि स्थानों तक सिमित रहते थे , योगी सरकार ने पिछेल साढ़े आठ सालो में पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से विकास कराया है। इन स्थलों तक आसानी से पहुंचना ,अच्छी सुविधा होना ,और रख-रखाव अच्छा होने से पर्यटकों का आवागमन बढ़ रहा है। जिससे काशी के पर्यटन उद्योग को काफी फायदा हों रहा है।"   अभिषेक शर्मा, गवर्मेंट एप्रूव्ड गाइड, यूपी टूरिज्म

प्रतिदिन बढ़ रहे किसानों के पंजीकरण, धान क्रय में भी आ रही तेजी

शनिवार तक 53330 किसानों से की जा चुकी 3.12 लाख मीट्रिक टन से अधिक की धान खरीद धान खरीद के लिए पंजीकरण कराने वाले किसानों की संख्या 3.93 लाख पार  लखनऊ धान की सरकारी खरीद को किसानों का निरंतर साथ मिल रहा है। धान खरीद की नियमित समीक्षा भी हो रही है। इसके मुताबिक धान खरीद में प्रतिदिन किसानों के पंजीकरण में वृद्धि हो रही है तो दूसरी तरफ धान क्रय में भी तेजी आ रही है। आंकड़े इसकी गवाही भी दे रहे हैं। शनिवार दोपहर तक धान खरीद सत्र में पंजीकृत होने वाले किसानों की संख्या 3.93 लाख पार कर गई। वहीं अब तक 3.12 लाख मीट्रिक टन की भी खरीद हो चुकी है। सरकार ने 4000 धान क्रय केंद्र का लक्ष्य रखा था, जिससे आगे बढ़ते हुए किसानों की सुविधा के लिए 4143 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। वहीं धान लेकर पहुंच रहे किसानों के लिए क्रय केंद्रों पर मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।   53330 किसानों से की जा चुकी 3.12 लाख मीट्रिक टन से अधिक की धान खरीद  खाद व रसद विभाग के मुताबिक शनिवार दोपहर तक 53,330 किसानों से 3.12 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। वहीं धान खरीद विपणन सत्र 2025-26 के लिए 3,93,389 किसानों ने शनिवार तक पंजीकरण भी करा लिया है। सरकार के प्रयासों का नतीजा है कि 4143 धान क्रय केंद्र भी स्थापित हो चुके हैं।  एक नजर  – धान (कॉमन) 2369 रुपये प्रति कुंतल की दर से हो रही खरीद  – धान (ग्रेड-ए) 2389 रुपये प्रति कुंतल की दर से हो रही खरीद – टोल फ्री नंबर 18001800150 के साथ ही जिला खाद्य विपणन अधिकारी, क्षेत्रीय विपणन अधिकारी, विपणन निरीक्षक से संपर्क कर सकते हैं किसान  – विभाग की अपील- 17 फीसदी नमी का धान खरीदा जा सकता है। धान को अच्छी तरह सुखाकर, साफ करके क्रय केंद्र पर ले आएं किसान  – खाद्य विभाग के पोर्टल www.fcs.up.gov.in या UP KISAN MITRA पर पंजीकरण अनिवार्य, पंजीकृत किसानों से ही होगी धान खरीद  – क्रय केंद्र सुबह 9 से शाम पांच बजे तक खुले हैं। – पश्चिम उत्तर प्रदेश में 31 जनवरी तक होगी धान खरीद  – पूर्वी उत्तर प्रदेश में 28 फरवरी 2026 तक होगी खरीद