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रामलला के भक्त ध्यान दें! इस तारीख को नहीं मिल पाएंगे दर्शन, प्रशासन ने जारी की गाइडलाइन

अयोध्या  राम मंदिर में होने वाले ऐतिहासिक ध्वजारोहण समारोह की तैयारी तेज हो चुकी है,,, ध्वजारोहण समारोह के दिन आम श्रद्धालुओं को रामलला के दर्शन नहीं मिल पाएंगे। आपको बता दें कि 25 नवंबर को भव्य ध्वजारोहण समारोह का आयोजन होगा…इसकी तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं,,,इसमें पीएम नरेंद्र मोदी समेत आठ से दस हजार मेहमान शामिल होंगे,,, ऐसे में सुरक्षा कारणों से मंदिर में आम श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक रहेगी,,,,राम मंदिर भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बैठक से पहले तैयारियों की विस्तृत जानकारी साझा की। राम मंदिर भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि समारोह के दिन बड़ी संख्या में मेहमान मौजूद रहेंगे,,,विवाह पंचमी का भी दिन है,,,ऐसे में राम मंदिर में अचानक भीड़ बढ़ सकती है,,,इसलिए हमने निर्णय लिया है कि सुबह सात बजे से ही मंदिर में आम श्रद्धालुओं का प्रवेश रोका जाएगा। दरअसल मेहमानों के ठहरने के लिए तीन हजार से अधिक कमरे आरक्षित किए गए हैं,,,वहीं अतिथियों को आमंत्रण भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है,,,मेहमानों को राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव की ओर से मैसेज भेजा जा रहा है। उन्हें कार्यक्रम के समय रूपरेखा की जानकारी दी जा रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को मिल रही उड़ान, घरेलू यात्रियों में 15.7% और एयर कार्गो में 19.1% का आया उछाल

आसमान में नई ऊंचाइयां छू रहा उत्तर प्रदेश, हवाई यात्री और कार्गो ट्रैफिक में रिकॉर्ड वृद्धि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को मिल रही उड़ान, घरेलू यात्रियों में 15.7% और एयर कार्गो में 19.1% का आया उछाल वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज और गोरखपुर जैसे शहर बने उत्तर प्रदेश की हवाई ग्रोथ के इंजन अप्रैल से अगस्त 2025 की अवधि में उत्तर प्रदेश के हवाई अड्डों से 60 लाख से अधिक यात्रियों ने किया सफर इन तीन महीनों में भारत के कुल हवाई यातायात में राज्य की हिस्सेदारी 3.52% तक पहुंची 2016-17 में 59.97 लाख यात्रियों की तुलना में 2024-25 में 142.28 लाख तक पहुंचे एयर पैसेंजर्स नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुभारंभ से प्रदेश और अन्य राज्यों के पैसेंजर्स को मिलेगी और भी बेहतर कनेक्टिविटी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब न केवल सड़क पर, बल्कि आसमान में भी विकास की उड़ान भर रहा है। राज्य की हवाई कनेक्टिविटी और यात्री संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे प्रदेश अब भारत की हवाई ग्रोथ स्टोरी में एक अहम किरदार बन गया है। अप्रैल से अगस्त 2025 की अवधि में उत्तर प्रदेश के हवाई अड्डों पर यात्रियों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 14.6% बढ़कर 60.02 लाख हो गई है। वहीं इस अवधि में भारत के कुल हवाई यातायात में राज्य की हिस्सेदारी 3.52% तक पहुंच गई, जो 2024 की तुलना में 34 बेसिस पॉइंट्स अधिक है। इससे साफ है कि अब देश के हर 30 में से एक हवाई यात्री उत्तर प्रदेश से यात्रा कर रहा है। राज्य में हवाई यात्रियों की बढ़ती संख्या केवल आंकड़ों की बात नहीं, बल्कि उस दूरदर्शी सोच का परिणाम है जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने ‘कनेक्टेड यूपी, समृद्ध यूपी’ विजन के तहत पेश की थी। उनका लक्ष्य रहा है कि हर क्षेत्र, हर जिला आधुनिक परिवहन से जुड़े ताकि पर्यटन, व्यापार और रोजगार में नई गति आए। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुभारंभ के साथ इस रफ्तार में और भी वृद्धि होगी और सिर्फ यूपी ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों को भी कनेक्टिविटी के नए अवसर प्राप्त होंगे। 2017 से 2025 तक यूपी की हवाई यात्रा का सफर साल 2016-17 में जहां उत्तर प्रदेश के हवाई अड्डों से 59.97 लाख यात्री यात्रा करते थे, वहीं FY2024-25 में यह संख्या बढ़कर 142.28 लाख तक पहुंच गई। इनमें 129.29 लाख घरेलू और 12.99 लाख अंतरराष्ट्रीय यात्री शामिल रहे। इस दौरान राज्य का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 10.1% रहा, जो एविएशन सेक्टर में तेजी से बढ़ती मांग को दर्शाता है। कोविड-19 महामारी के दौरान FY2020-21 में यात्री संख्या 48.35 लाख तक गिर गई थी, लेकिन यूपी ने सबसे तेज रिकवरी दिखाई। महज दो वर्षों में यात्रियों की संख्या दोगुनी हो गई, जो राज्य की मजबूत हवाई नीति और बेहतर प्रबंधन का प्रमाण है। 2023-24 की तुलना में 2024-25 में हवाई यात्रियों की संख्या में 25.9 प्रतिशत का ग्रोथ दर्ज किया गया है, जबकि 2023-24 और 2024-25 में अप्रैल-अगस्त माह के बीच कंपैरिजन करें तो यह ग्रोथ 14.6% रही। इस दौरान डॉमेस्टिक एयर पैसेंजर्स में 15.7% और इंटरनेशनल पैसेंजर्स की संख्या में 4.3% ग्रोथ दर्ज की गई। अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी बने स्टार परफॉर्मर राज्य के कई शहरों ने इस ग्रोथ में अहम योगदान दिया है। 2023-24 से 2024-25 के बीच वाराणसी में 34.4%, प्रयागराज में 76.4%, गोरखपुर में 27.6% और कानपुर में 13.3% की वृद्धि दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी ने यात्री संख्या को तेजी से बढ़ाया है। खासतौर पर अयोध्या एयरपोर्ट, जिसे मुख्यमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि के नाम पर समर्पित किया था, अब उत्तर भारत के सबसे तेजी से बढ़ते टर्मिनल्स में शामिल है। 2023-24 में जहां 2 लाख से ज्यादा पैसेंजर्स ने यहां से हवाई उड़ान भरी थी तो वहीं 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 11 लाख से अधिक पहुंच गया। वहीं प्रयागराज और वाराणसी से भी धार्मिक और व्यावसायिक उड़ानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रयागराज में 2023-24 में 6 लाख से अधिक एयर पैसेंजर्स ने यात्रा की तो वहीं 2024-25 में यह संख्या 10.77 लाख से अधिक पहुंच गई। इसी तरह वाराणसी में 2023-24 में करीब 30 लाख एयर पैसेंजर्स यात्रा कर रहे थे तो वहीं 2024-25 यह संख्या 40 लाख का आंकड़ा पार कर गई। गोरखपुर में 2023-24 में 6.8 लाख की तुलना में 2024-25 में 8.67 लाख से अधिक हवाई यात्रियों ने सफर किया। लखनऊ ने भी अपनी रफ्तार में इजाफा किया है, जहां 2023-24 की तुलना में 2024-25 में 4.1% की वृद्धि हुई है। कार्गो ट्रैफिक में भी जबरदस्त वृद्धि उत्तर प्रदेश अब व्यापार और निर्यात के लिए भी एयर कनेक्टिविटी का बड़ा केंद्र बन रहा है। FY2016-17 से FY2024-25 तक राज्य के एयर कार्गो में 19.1% का CAGR दर्ज किया गया है। यह 5.89 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर 28.36 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गया है, जो कि अब तक का सर्वाधिक है। FY2024-25 में लखनऊ एयरपोर्ट ने 22,099 मीट्रिक टन कार्गो हैंडल किया, जबकि वाराणसी में 27.7% और प्रयागराज में 50% की बढ़ोतरी दर्ज हुई। 2023-24 से 2024-25 के बीच टोटल ग्रोथ 9.4% रही और इस दौरान एयर कॉर्गो 25,915 मीट्रिक टन से 28,356 मीट्रिक टन पहुंच गया। अप्रैल-अगस्त 2025 में कानपुर (165%) और आगरा (247%) में रिकॉर्ड ग्रोथ दर्ज हुई जो बताता है कि राज्य के इंडस्ट्रियल क्लस्टर अब अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन से जुड़ रहे हैं। अप्रैल-अगस्त 2025 में राज्य का भारत के कुल एयर कार्गो में हिस्सा 0.79% हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1 बेसिस पॉइंट अधिक है। साकार हो रहा योगी सरकार का विजन उत्तर प्रदेश सिविल एविएशन के डायरेक्टर ईशान प्रताप सिंह ने बताया कि हवाई कनेक्टिविटी सिर्फ परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि रोजगार, पर्यटन और निवेश की नई शक्ति है। जब हर जिले से उड़ान संभव होगी, तो हर नागरिक का जीवन स्तर ऊंचा होगा। इसी सोच के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में अयोध्या, कुशीनगर और जेवर (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) जैसे नए हवाई अड्डों का तेजी से विकास किया गया है। जेवर एयरपोर्ट के शुरू होते ही उत्तर प्रदेश उत्तरी भारत का सबसे बड़ा एविएशन हब बनने की ओर अग्रसर होगा। इसी क्रम में प्रदेश सरकार कई नए एयर … Read more

योगी को गाली देने का अंजाम! युवती के घर पहुंची भीड़, पुलिस तैनात

गाजियाबाद  बयानबाजी, बवाल, तमाशा,,,जी हां, एक मुस्लिम लड़की के बयान ने माहौल को ही गरमा दिया,,उसके द्वारा सीएम योगी और सनातन पर दिए गये बयान से हिंदू संगठन का ऐसा गुस्सा फूटा कि सड़कों पर उतरकर तो हंगामा किया ही किया,,बल्कि लड़की के घर पर जाकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर भारी बवाल काटा। दरअसल, गाजियाबाद के तुलसी निकेतन की रहने वाली एक लड़की का वीडियो सोशल मीडिया पर बीती 23 अक्टूबर से तेजी से वायरल हो रहा है,,,जिसमें वह योगी आदित्यनाथ, गृहमंत्री अमित शाह और हिंदू धार्मिक भावनाओं के खिलाफ आपत्तिजनक बातें करती हुई नजर आ रही है,,वायरल वीडियो की जांच के बाद थाना टीला मोड़ पुलिस ने फरजाना के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरु कर दी है। लड़की के घर के बाहर पहुंचकर अभद्र भाषा का प्रयोग वहीं इस घटना के बाद माहौल उस वक्त गरमा गया,,, जब हिंदू संगठन से जुड़े कुछ युवकों ने लड़की के घर के बाहर पहुंचकर अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए प्रदर्शन किया,,,उसके खिलाफ जमकर हंगामा किया,, वहीं मामले पर हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी चौधरी ने अपने कार्यकर्ताओं दक्ष चौधरी और साथियों का समर्थन जताते हुए विवादित बयान दिया,, पिंकी चौधरी ने कहा हमने लड़की का दिमाग दुरुस्त करने का काम किया है,, उसकी पिटाई की है,, जो भी योगी या सनातन के विरोध में बोलेगा, उसका यही हाल होगा,, हमें कानूनी प्रक्रिया की कोई चिंता नहीं है। गाय और धर्म के सम्मान में हम मैदान में डटे रहेंगे। बता दें कि, इस मामले में पुलिस ने युवकों की पहचान कर ली है,, एसीपी शालीमार अतुल कुमार सिंह ने बताया दोनों पक्षों के विरुद्ध तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी… पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि बयान देने वाली लड़की नाबालिग है,, पिछले छह महीने से घर से बाहर रह रही थी,, वायरल वीडियो में दिए गए बयान उसके द्वारा ही रिकॉर्ड किए गए हैं। बहरहाल, एक बयान की वजह से कैसे लोगों की भावनाएं आहत होती है,,और कैसे सोशल मीडिया पर कुछ भी कहने पर इतना बड़ा इश्यू हो जाता है,, इस मामले से समझा जा सकता है,,,लिहाजा, नाराजगी अपनी जगह है,, लेकिन किसी को भी सोशल मीडिया पर भड़काऊ बात नहीं कहनी चाहिए,,वर्ना अंजाम बुरे होते है,,भुगतने पड़ते हैं,,  

योगी सरकार के प्रयास से देव दीपावली से पहले काशी के घाटों पर संगीत, नृत्य और लोक कलाओं की सुनाई देगी गूंज

काशी गंगा महोत्सव में भजनों से भक्ति रस की सरिता बहाएंगे हंसराज रघुवंशी योगी सरकार के प्रयास से देव दीपावली से पहले काशी के घाटों पर संगीत, नृत्य और लोक कलाओं की सुनाई देगी गूंज नामो घाट व राजघाट पर देशभर के नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुति देकर काशी की सांस्कृतिक परंपरा को बनाएंगे भव्य व समृद्ध लोक गायन से उत्तर भारत की लोक परंपराओं को जीवंत करेंगी पद्मश्री मालिनी अवस्थी, पद्मश्री गीता चन्द्रन देंगी भरतनाट्यम की प्रस्तुति -1 से 4 नवम्बर तक माँ जान्हवी के पावन तट पर होगा भव्य आयोजन, काशी गंगा महोत्सव बनेगा माध्यम -नमो घाट पर काशी सांसद सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतियोगिता के प्रमुख कलाकार भी देंगे विभिन्न प्रकार की प्रस्तुति वाराणसी  देव दीपावली से पहले काशी के घाटों पर संगीत, नृत्य व लोक कलाओं की संगीतमय सरिता बहेगी। माँ जान्हवी के पावन तट पर इस वर्ष गंगा महोत्सव का आयोजन 1 से 4 नवम्बर तक किया जाएगा। योगी सरकार के प्रयास से राजघाट पर देशभर के नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुति देकर काशी की इस सांस्कृतिक परंपरा को और भव्य बनाएंगे जिनमें शास्त्रीय, भक्ति तथा लोक संगीत का अद्भुत संगम दिखाई देगा। इस महोत्सव में गायक हंसराज रघुवंशी अपने भजनों से श्रोताओं को भक्ति रस से ओत-प्रोत करेंगे। वहीं, पद्मश्री मालिनी अवस्थी अपने लोक गायन से उत्तर भारत की लोक परंपराओं को जीवंत करेंगी। पद्मश्री गीता चन्द्रन का भरतनाट्यम नृत्य भी कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहेगा। वहीं, नमो घाट पर काशी सांसद सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतियोगिता के प्रमुख कलाकार भी अपनी प्रस्तुति देंगे। कई मायनों में विशिष्ट होगा आयोजन संयुक्त निदेशक पर्यटन दिनेश कुमार ने बताया कि चार दिवसीय इस उत्सव में गीत, संगीत, नृत्य और वादन की गंगा बहेगी। गंगा महोत्सव के मंच पर लोक और शास्त्रीय संगीत की स्वर लहरियां गूंजेंगी तो साथ ही पारंपरिक नृत्य शैलियों की झलक भी देखने को मिलेगी। महोत्सव में विशेष रूप से गायक हंसराज रघुवंशी आयोजन के अंतिम दिन अपने भजनों से श्रद्धा और भक्ति का भाव जगाएंगे। वहीं, पद्मश्री मालिनी अवस्थी 3 अक्टूबर को लोक गायन से काशी की धरती पर उत्तर भारत की लोक परंपराओं को सजीव करेंगी। इसके अतिरिक्त, 2 अक्टूबर को पद्मश्री गीता चंद्रन भरतनाट्यम की प्रस्तुति देंगी। गंगा महोत्सव के अंतर्गत होने वाली प्रस्तुतियां शाम 4 बजे से शुरू होंगी।  काशी गंगा महोत्सव ये प्रमुख कलाकार देंगे प्रस्तुति… प्रथम दिन, 1 नवंबर पं० माता प्रसाद मिश्र एवं पं० रविशंकर मिश्र–कथक युगल नृत्य कविता मोहन्ती–ओडिसी नृत्य विदुषी श्वेता दुबे–गायन विदुषी कमला शंकर–स्लाइड गिटार डॉ० रिपि मिश्र–शास्त्रीय गायन डॉ० दिवाकर कश्यप एवं डॉ० प्रभाकर कश्यप–उपशास्त्रीय गायन रवि शर्मा एवं समूह–ब्रज लोक नृत्य एवं संगीत पं० नवल किशोर मल्लिक–शास्त्रीय गायन दूसरा दिन, 2 नवंबर शिवानी शुक्ला–गायन प्रवीण उद्भव–तालयात्रा राजकुमार तिवारी उर्फ राजन तिवारी–गायन डॉ० अर्चना आदित्य महास्कर–गायन सवीर, साकार कलाकृति–पारम्परिक लोक नृत्य वन्दना मिश्रा–गायन प्रो० पं० साहित्य नाहर एवं डॉ० पं० संतोष नाहर–सितार एवं वायलिन जुगलबन्दी ओम प्रकाश–भजन गायन पद्मश्री गीता चन्द्रन–भरतनाट्यम तीसरा दिन 3 नवंबर मीना मिश्रा–गायन विशाल कृष्ण–कथक नृत्य दिव्या शर्मा–हिन्दुस्तानी खयाल गायकी  राकेश कुमार–जनजातीय लोक नृत्य  इन्दु गुप्ता–लोक गायन चेतन जोशी–बांसुरी वादन  विदुषी कविता द्विवेदी–ओडिसी नृत्य  पद्मश्री मालिनी अवस्थी–लोक गायन  चौथा दिन, 4 नवंबर डॉ० शुभांकर डे–गायन डॉ० प्रेम किशोर मिश्र एवं साथी-सितार, सरोद जुगलबन्दी व गायन राहुल रोहित मिश्र–शास्त्रीय गायन रूपन सरकार समन्ता–शास्त्रीय गायन वासुमती बद्रीनाथन–शास्त्रीय गायन शिवानी मिश्रा–कथक समूह नृत्य मानसी रघुवंशी–गायन हंसराज रघुवंशी–भजन गायन

विकसित यूपी @2047 : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप चल रहा विकसित यूपी @2047 महा अभियान

विकसित यूपी @2047 2047 का विजन बना जनआंदोलन, 60 लाख सुझावों से सजे ‘समर्थ यूपी’ के सपने – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप चल रहा विकसित यूपी @2047 महा अभियान – छात्रों, शिक्षकों, उद्यमियों, महिलाओं और किसानों ने रखी अपनी राय – कृषि और शिक्षा रहे सबसे ज्यादा चर्चा के विषय – ग्रामीण युवाओं ने रोजगार और स्किल डेवलपमेंट पर दिया जोर – एमएसएमई को सशक्त बनाने, महिला सुरक्षा और डिजिटल सशक्तिकरण पर मिल रहे सुझाव – पर्यटन स्थलों के विकास को लेकर नागरिकों ने जताई अपेक्षा – खेलो इंडिया जैसे कार्यक्रमों के स्थानीय विस्तार की मांग – साफ-सुथरे प्रशासन और बेहतर कानून व्यवस्था की मांग – शिक्षा को व्यावहारिक और कौशल आधारित बनाने की अपील – महिला उद्यमिता और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के सुझाव – आईटी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी बढ़ती रुचि दिखी – अभियान बना जनता और शासन के बीच संवाद का सेतु लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश को 2047 तक विकसित प्रदेश बनाने के लक्ष्य को लेकर चल रहा “समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047 : समृद्धि का शताब्दी पर्व महा अभियान” जनभागीदारी का प्रतीक बनता जा रहा है। मंगलवार तक प्रदेश के 75 जनपदों में नोडल अधिकारियों एवं प्रबुद्ध जनों द्वारा भ्रमण कर विभिन्न लक्षित समूहों छात्र, शिक्षक, उद्यमी, कृषक, स्वयंसेवी संगठन, श्रमिक संगठन, मीडिया एवं आम नागरिकों से संवाद स्थापित किया गया। इस दौरान लोगों से प्रदेश की विकास यात्रा और भविष्य के रोडमैप पर सुझाव लिए गए। अब तक पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर करीब 60 लाख फीडबैक प्राप्त हुए हैं। इनमें से 75 फीसदी से ज्यादा सुझाव ग्रामीण क्षेत्रों से मिले हैं। ग्रामीण जन से लेकर उद्यमियों तक सभी ने रखी राय बुलंदशहर के रिकेश कुमार ने कहा कि गांव में उद्योग और शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए। यदि सरकार निजी साझेदारी (पीपीपी मॉडल) के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को प्राथमिकता दे, तो पलायन की समस्या खत्म हो सकती है। वहीं, शकील खान ने कहा कि राज्य को औद्योगिक शक्ति बनाने के लिए एमएसएमई को आसान ऋण, तकनीकी सहयोग और जिला-आधारित उद्योग पार्क की जरूरत है। निगार फातिमा ने निवेश आकर्षित करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और महिला स्किल मिशन पर जोर दिया। सीमा कुमारी ने कढ़ाई, सिलाई और अगरबत्ती निर्माण जैसे कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने की बात कही। जोगिंदर सिंह ने कहा कि स्कूल स्तर से ही शिक्षा को व्यावहारिक और कौशल आधारित बनाया जाए ताकि युवा आत्मनिर्भर बन सकें। नागरिकों ने पर्यटन विकास पर जोर दिया अंकित गुप्ता ने मां बेला देवी धाम व शनिदेव मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों के विकास की बात की, डॉ. सुनील शाह ने बेल्हा देवी मंदिर के आसपास कॉरिडोर निर्माण का सुझाव दिया, जबकि रीता जायसवाल और रामेन्द्र त्रिपाठी ने पर्यटन स्थलों पर सुव्यवस्थित दर्शन व्यवस्था और सांस्कृतिक पुनर्जीवन की जरूरत बताई। खेलो इंडिया और डिजिटल लाइब्रेरी के लिए सुझाव बलिया से गीता देवी ने खेलो इंडिया जैसे कार्यक्रमों को स्थानीय स्तर पर विस्तार देने का सुझाव दिया, जबकि प्रदीप कुमार ने गांवों में डिजिटल लाइब्रेरी और रोजगार सृजन केंद्र खोलने की मांग रखी। साफ-सुथरा प्रशासन, बेहतर कानून व्यवस्था पर जोर बरेली के राजकुमार सिंह ने भिखारियों व साधुओं की पहचान प्रणाली, फलदार वृक्षारोपण अनिवार्यता और पुरानी पेंशन योजना लागू करने की बात कही। बस्ती की शाइस्ता फिरोज ने महिला सुरक्षा, स्किल मिशन, डीबीटी व्यवस्था और बाल विकास योजनाओं को सशक्त करने पर जोर दिया। गाजियाबाद के राजेश अग्निहोत्री ने साफ-सुथरा प्रशासन, बेहतर कानून व्यवस्था और इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार की मांग की। युवाओं ने दिखाई सबसे अधिक भागीदारी आंकड़ों के अनुसार, करीब 30 लाख सुझाव 31 वर्ष से कम आयु वर्ग के युवाओं ने दिए हैं, जबकि 26 लाख से अधिक सुझाव 31-60 वर्ष आयु वर्ग से और 3 लाख से अधिक सुझाव वरिष्ठ नागरिकों से प्राप्त हुए हैं। कृषि और शिक्षा सबसे बड़े फोकस सेक्टर विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त सुझावों में कृषि (16 लाख) और शिक्षा (15 लाख) सबसे आगे हैं। इसके अलावा ग्रामीण विकास (12 लाख), समाज कल्याण (5 लाख), स्वास्थ्य (4 लाख), पशुधन (3 लाख), इंडस्ट्री (2.5 लाख) और आईटी-टेक (2 लाख) से भी भारी संख्या में सुझाव मिले हैं। जनपदवार आंकड़ों में जौनपुर पहले, संभल दूसरे, गाजीपुर तीसरे, प्रतापगढ़ चौथे और बिजनौर पांचवें स्थान पर हैं। वहीं, इटावा, महोबा, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर और ललितपुर में सुझाव अपेक्षाकृत कम प्राप्त हुए हैं। जन-जागरूकता बैठकों से बढ़ा संवाद महाभियान के तहत राज्यभर में व्यापक जनसंवाद अभियान चलाया गया है। अब तक 214 नगर पालिकाओं, 18 नगर निगमों, 63 जिला पंचायतों, 556 नगर पंचायतों, 751 क्षेत्र पंचायतों और करीब 50 हजार ग्राम पंचायतों में बैठकों व गोष्ठियों का आयोजन किया जा चुका है। इन आयोजनों से स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और विभागों के बीच संवाद को मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन 'समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047' के अनुरूप प्राप्त सुझावों के आधार पर अब विजन डॉक्यूमेंट निर्माण प्रक्रिया जारी है। यह अभियान न केवल विकास का खाका तैयार कर रहा है, बल्कि साझा भागीदारी के माध्यम से जन-जन तक संवाद का सशक्त सेतु बनता जा रहा है।    

इतिहास में नया अध्याय: राम मंदिर निर्माण हुआ पूरा, रामलला और अन्य भगवानों की भी प्रतिष्ठा

अयोध्या  पूरे विश्व में प्रभु राम के भक्तों में एक अलग ही उत्साह आज देखने को मिल रही है. अयोध्या में आखिरकार वह दिन आ गया. जब प्रभु राम का भव्य मंदिर बनकर तैयार हो गया है. राम मंदिर से जुड़ी एक बड़ी जानकारी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने साझा की है. चंपत राय ने बताया कि अयोध्या में बनने वाला प्रभु राम का भव्य मंदिर बनकर तैयार हो गया है. इसके अलावा राम मंदिर के साथ ही परकोटे में बनाए जा रहे सभी मुख्य मंदिरों में, जिसमें भगवान शंकर, भगवान गणेश, हनुमान जी, सूर्य, भगवती माता, माता अन्नपूर्णा, शेषअवतार मंदिर पूर्ण रूप से तैयार कर लिया गया है. इन मंदिरों का हो चुका है निर्माण इस पर ध्वज दंड एवं कलश भी स्थापित कर दिया गया है. सप्त मंडप में जितने भी मंदिर हैं, जिसमें महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त, निषादराज, माता शबरी, माता अहिल्या के मंदिर भी पूर्ण हो चुके हैं. इसके अलावा संत तुलसीदास जटायु गिलहरी की प्रतिमा भी स्थापित कर दी गई है. दरअसल, अयोध्या में 25 नवंबर को ध्वजारोहण का कार्यक्रम होना है, जिसके मौके पर 10000 विशेष मेहमान और खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में मौजूद रहेंगे. 25 नवंबर की वह तारीख है, जब राम मंदिर से प्रधानमंत्री मोदी राम मंदिर की पूर्णता का संदेश देंगे तो विश्व में बैठे राम भक्त भी उत्साहित होंगे. दर्शनार्थियों से जुड़े सभी कार्य पूरे चंपत राय ने स्पष्ट किया कि दर्शनार्थियों की सुविधा और व्यवस्था से जुड़े सभी कार्य पूरे कर दिए गए हैं. वहीं मानचित्र अनुसार सड़कें और फर्श पर पत्थर लगाने का काम एलएंडटी (L&T) द्वारा किया जा रहा है. साथ ही भूमि सौंदर्यीकरण और हरियाली का कार्य जारी है. जबकि 10 एकड़ में पंचवटी का निर्माण GMR कंपनी द्वारा तेज़ी से किया जा रहा है. सिर्फ प्रशासनिक व तकनीकी कार्य शेष ट्रस्ट महासचिव ने बताया कि ऐसे कार्य ही शेष हैं, जिनका सीधा संबंध जनता से नहीं है. जिसमें 3.5 किलोमीटर लंबी परिसर की चारदीवारी (बाउंड्री वॉल),ट्रस्ट कार्यालय भवन, अतिथि गृह, भव्य सभागार (ऑडिटोरियम) जैसे कार्य साल 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.  

बच्चों की पढ़ाई अब किताबों के ज्ञान के साथ प्रयोगशाला और जीवन से जुड़ेगी

'लर्निंग बाय डूइंग' को नई उड़ान दे रही योगी सरकार, 3288 विज्ञान-गणित शिक्षक बनेंगे कौशल शिक्षक बच्चों की पढ़ाई अब किताबों के ज्ञान के साथ प्रयोगशाला और जीवन से जुड़ेगी ‘लर्निंग बाय डूइंग’ से बदलेंगे कक्षाओं के रंग' बुनियादी शिक्षा में नवाचार की पाठशाला होगी शुरू  3 नवंबर से शुरू होगा नव चयनित 3288 अध्यापकों का महाकैंप दीन दयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, लखनऊ में 03 नवम्बर 2025 से 14 फरवरी 2026 तक तथा उद्यमिता विकास संस्थान लखनऊ में 16 फरवरी से 18 मार्च तक चलेगा प्रशिक्षण अब स्कूल शिक्षक तैयार करेंगे जिज्ञासा और कौशल-आधारित कक्षाएं, निखरे नौनिहाल गढ़ेंगे भारत का भविष्य  बच्चों को समझने और खोजने की शिक्षा देना है लक्ष्य: संदीप सिंह लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बुनियादी शिक्षा को प्रयोगधर्मी, कौशल-आधारित और भविष्य-केंद्रित बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठा रही है। बच्चों में रटने की प्रवृत्ति के स्थान पर ‘सीखो करके’ (Learning by Doing) की संस्कृति विकसित करने के लिए सरकार शिक्षण पद्धति में व्यापक नवाचार लागू कर रही है। इसी के तहत प्रदेश के 3288 चयनित परिषदीय विद्यालयों और डायट संस्थानों में एलबीडी मॉडल को प्रभावी रूप से लागू करने की विस्तृत कार्ययोजना पर मिशन मोड में काम जारी है। योगी सरकार अब 3 नवंबर 2025 से दीन दयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, लखनऊ में 1888 अध्यापकों तथा उद्यमिता विकास संस्थान लखनऊ में 16 फरवरी से 18 मार्च तक 1400 (कुल 3288) विज्ञान एवं गणित अध्यापकों के त्रिदिवसीय कौशल आधारित ट्रेनर्स प्रशिक्षण महाकैंप की शुरुआत करने जा रही है। यह आवासीय प्रशिक्षण इस अवधि में कुल 66 बैचों में पूरा होगा। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे कौशल युक्त शिक्षक तैयार करना है, जो आगे विद्यालय स्तर पर बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को प्रयोगशाला, प्रोजेक्ट, मॉडल, गतिविधि और वास्तविक जीवन अनुभवों से जोड़कर पढ़ाएंगे।  बच्चों को 'समझने, परखने और खोजने' की शिक्षा देना है लक्ष्य:  बेसिक शिक्षा मंत्री बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह का कहना है कि सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश के कक्षाकक्ष ऐसे हों, जहाँ 'याद करने' की जगह 'समझने, परखने और खोजने' पर ज़ोर हो। यह पहल NEP-2020 के मूल दर्शन और भविष्य की स्किल-इकोनॉमी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युग और नवाचार-प्रधान भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप भी है। बच्चों को निष्क्रिय श्रोता से सक्रिय शिक्षार्थी में बदलता 'लर्निंग बाय डूइंग' शिक्षा विशेषज्ञों की मानें तो जब एक बच्चा स्वयं प्रयोग करता है, वस्तुओं से खेलते-खेलते सीखता है, प्रश्न पूछता है और समाधान खोजता है; तब उसकी जिज्ञासा, तार्किक सोच, वैज्ञानिक दृष्टि, अभिव्यक्ति और समस्या-समाधान क्षमता अत्यधिक तीव्र होती है। यही 'लर्निंग बाय डूइंग' की सबसे बड़ी शक्ति है। यह बच्चों को निष्क्रिय श्रोता से सक्रिय शिक्षार्थी में बदलता भी है। बुनियादी शिक्षा में नई संस्कृति विकसित करने का है प्रयास इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को बुनियादी शिक्षा में एक नई संस्कृति विकसित करने का प्रयास माना जा रहा है। इससे उत्तर प्रदेश में बुनियादी शिक्षा की एक नई संस्कृति विकसित होगी, जहाँ विद्यालय ज्ञान देने के केंद्र के साथ अनुभवों की प्रयोगशाला बनकर उभरेंगे। यह प्रयास आने वाली पीढ़ी को अधिक सक्षम, आत्मविश्वासी और रचनात्मक बनाकर नए भारत के निर्माण में उत्तर प्रदेश की भूमिका को मजबूत करेगा। महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने कहा महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी का कहना है कि हमारा प्रयास है कि बच्चे, निःसंकोच रूप से प्रश्न पूछें, विद्यालयों की प्रयोगशालाएं जीवंत हों, वे मॉडल बनें और अध्यापक, हर कक्षा के विद्यार्थी में सोचने की ताकत जगाने का माध्यम बनें। यही भविष्य के उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था की नई पहचान होगी।

लखनऊ में मुख्यमंत्री ने किया चरण सुहावे गुरु चरण (जोड़े साहिब) यात्रा का स्वागत

गुरु परंपरा ने भारत को दिया त्याग और बलिदान का संदेश- सीएम योगी  लखनऊ में मुख्यमंत्री ने किया चरण सुहावे गुरु चरण (जोड़े साहिब) यात्रा का स्वागत  जहां गुरु के चरण पड़ते हैं, वह स्थान रामराज्य की तरह पवित्र बन जाता है- सीएम योगी   यह यात्रा हमें उस गौरवशाली गुरु परंपरा से जोड़ती है, जिसने भारत की संस्कृति, साहस और बलिदान की भावना को नई दिशा दी- सीएम योगी सिख गुरुओं का भारत की सनातन परंपरा में योगदान अविस्मरणीय है- मुख्यमंत्री – यह यात्रा केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शन है- मुख्यमंत्री लखनऊ  सिख समुदाय की आस्था का प्रतीक 'चरण सुहावे गुरु चरण  यात्रा' के पवित्र जोड़ा साहिब का लखनऊ में भव्य स्वागत हुआ। यह यात्रा सिख समुदाय के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी और माता साहिब कौर के पवित्र जोड़ा साहिब से जुड़ी है, जो सिख आस्था का अत्यंत पवित्र प्रतीक मानी जाती है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु परंपरा ने भारत को केवल आस्था नहीं, बल्कि राष्ट्र की रक्षा, सेवा और बलिदान का आदर्श भी दिया है। उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस विरासत को अक्षुण्ण रखें और आने वाली पीढ़ियों तक इसकी प्रेरणा पहुंचाएं। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी मौजूद रहे। लखनऊ के यहियागंज गुरुद्वारे में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवाणी सुनी और यात्रा सदस्यों को पटुका पहनाकर सम्मानित किया। गुरुद्वारा कमेटी ने सीएम योगी को अंग वस्त्र व स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारी परंपरा में यह कहा गया है, ‘जिथे जाए बहे मेरा सतगुरु, सो थान सुहावा राम राजे।’ अर्थात जहां भी गुरु महाराज के पावन चरण पड़ते हैं, वह स्थान रामराज्य की तरह पवित्र और पुण्यभूमि बन जाता है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा हमें उस गौरवशाली गुरु परंपरा से जोड़ती है, जिसने भारत की संस्कृति, साहस और बलिदान की भावना को नई दिशा दी। यह त्याग, बलिदान और राष्ट्र समर्पण की प्रेरणा देने वाली यात्रा है- सीएम सीएम योगी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की उपस्थिति के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह यात्रा गुरु तेग बहादुर जी महाराज के 350वें शहीदी दिवस के अवसर पर शुरू हुई है। यह केवल श्रद्धा की यात्रा नहीं, बल्कि त्याग, बलिदान और राष्ट्र समर्पण की प्रेरणा देने वाली यात्रा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिख गुरुओं का भारत की सनातन परंपरा में योगदान अविस्मरणीय है। गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोविंद सिंह जी महाराज और उनके चार साहिबजादों ने जिस प्रकार धर्म, देश और मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया, वह भारत के इतिहास को नई प्रेरणा देता है। यहियागंज गुरुद्वारा हमारी साझा आस्था और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है- मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग ढाई सौ वर्षों से गुरु महाराज के पावन चरण पादुकाएं, जो पहले अखंड भारत के हिस्से पाकिस्तान में थीं, अब पटना साहिब में स्थापित की जा रही हैं। दिल्ली से शुरू हुई यह यात्रा पूरे देश में गुरु परंपरा के प्रति सम्मान और गौरव का भाव जगाती जा रही है। उन्होंने कहा कि लखनऊ का यहियागंज गुरुद्वारा इसलिए भी विशेष है क्योंकि गुरु तेग बहादुर जी और गुरु गोविंद सिंह जी महाराज की स्मृतियां इस स्थान से जुड़ी हैं। यह गुरुद्वारा हमारी साझा आस्था और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। यह यात्रा केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शन है- मुख्यमंत्री सीएम योगी ने सिख समुदाय के प्रति आदर व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु परंपरा ने भारत को केवल आस्था नहीं, बल्कि राष्ट्र की रक्षा, सेवा और बलिदान का आदर्श भी दिया है। उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस विरासत को अक्षुण्ण रखें और आने वाली पीढ़ियों तक इसकी प्रेरणा पहुंचाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिख समाज की यह यात्रा केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शन है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे इस “गुरु चरण यात्रा” को राष्ट्रीय एकता और आध्यात्मिक जागरण के संदेश के रूप में आगे बढ़ाएं। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, यूपी कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य सरदार परबिंदर सिंह के अलावा गुरुद्वारा कमेटी के पदाधिकारी व कई जनप्रतिनिधिगण मौजूद रहे।

उत्तर प्रदेश की महिलाओं के लिए महाअभियान, मिशन शक्ति फेज-5.0 की शुरुआत

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित मिशन शक्ति एक क्रांतिकारी पहल है, जो महिलाओं और बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए समर्पित है। फेज-5.0 का शुभारंभ 20 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया गया, यह एक माह लंबा अभियान है, जो महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को मजबूत करने पर केंद्रित है। मिशन शक्ति की आधिकारिक वेबसाइट (upmissionshakti.in) के अनुसार, यह पहल जागरूकता बढ़ाने, सुरक्षित वातावरण बनाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखती है। अब तक के चरणों में लाखों महिलाओं को लाभ पहुंचाने वाली यह योजना फेज-5.0 में नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रही है, जिसमें स्वास्थ्य हेल्पलाइन, ड्राइविंग प्रशिक्षण और मासिक धर्म स्वच्छता जागरूकता जैसे नवीन आयाम जोड़े गए हैं। मिशन शक्ति फेज-5.0 का उद्देश्य- मिशन शक्ति फेज-5.0 का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को हिंसा, शोषण और असमानता से मुक्त समाज प्रदान करना है। यह तीन प्रमुख स्तंभों—सुरक्षा (Safety), सम्मान (Dignity) और स्वावलंबन (Self-Reliance)—पर आधारित है। • सुरक्षा: अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, जैसे कि अभियान के दौरान 2,500 से अधिक FIR और 3,900 गिरफ्तारियां। • सम्मान: सामाजिक जागरूकता के माध्यम से महिलाओं को समाज का अभिन्न अंग मानना। • स्वावलंबन: कौशल विकास, उद्यमिता और आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लॉन्च के दौरान कहा, "मिशन शक्ति महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्रता का मार्ग दिखा रहा है, और इसके सकारात्मक परिणाम हर जगह दिखाई दे रहे हैं।" यह अभियान न केवल सरकारी योजना है, बल्कि पूरे समाज को जोड़ने वाला जन आंदोलन बन चुका है। सरकार द्वारा महिलाओं को जागरूक करने के तरीके: उत्तर प्रदेश सरकार मिशन शक्ति फेज-5.0 के तहत बहुआयामी जागरूकता अभियान चला रही है, जो ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। यह अभियान स्कूलों, पंचायतों, पुलिस स्टेशनों और सामुदायिक केंद्रों के माध्यम से संचालित हो रहा है। यहां कुछ प्रमुख उदाहरण दिए जा रहे हैं: 1. बाइक रैलियां और सड़क नाटक: 21 सितंबर 2025 को सभी जिलों में विशाल बाइक रैलियां आयोजित की गईं, जिसमें हजारों महिलाएं और युवतियां शामिल हुईं। इसके अलावा, 45,000 से अधिक स्कूलों में छात्राओं द्वारा नौ दुर्गा रूपों पर आधारित स्ट्रीट प्ले (नुक्कड़ नाटक) प्रस्तुत किए गए, जो महिलाओं की शक्ति और सुरक्षा पर केंद्रित थे। ये कार्यक्रम जागरूकता फैलाने के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं। 2. महिला बीट ऑफिसर तैनाती: अभियान के दौरान 44,177 महिला पुलिसकर्मियों को 57,000 ग्राम पंचायतों और 14,000 शहरी वार्डों में तैनात किया गया। ये अधिकारी घर-घर जाकर महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों, हेल्पलाइन नंबरों (जैसे 1090, 181) और सेल्फ-डिफेंस तकनीकों के बारे में जागरूक कर रही हैं। 3. स्वास्थ्य और स्वच्छता जागरूकता कार्यशालाएं: 10 अक्टूबर 2025 को मासिक धर्म स्वच्छता पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित की गईं, जहां विशेषज्ञों ने सैनिटरी पैड के सुरक्षित उपयोग और निपटान पर चर्चा की। मिथकों को दूर करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया गया, जिससे हजारों महिलाओं को लाभ हुआ। इसके अलावा, 'ड्राइविंग माय ड्रीम्स' पहल के तहत 3,000 से अधिक लड़कियों को मुफ्त ड्राइविंग ट्रेनिंग दी जा रही है, जो उनकी स्वावलंबन को बढ़ावा दे रही है। 4. कन्या पूजन और सम्मान समारोह: नवरात्रि के दौरान 5 लाख से अधिक बालिकाओं का कन्या पूजन किया गया, जो शिक्षा, सम्मान और आर्थिक सहायता (कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से) पर जोर देता है। झांसी जैसे जिलों में विशेष आयोजनों में महिलाओं को सम्मानित किया गया, जहां मिशन शक्ति की सफलताओं पर चर्चा हुई। ये अभियान न केवल जागरूकता फैला रहे हैं, बल्कि महिलाओं को सक्रिय भागीदार बना रहे हैं, जिससे अपराध दर में कमी आ रही है। महिलाओं के सम्मान की प्रेरणादायक कहानियां मिशन शक्ति फेज-5.0 ने कई महिलाओं को नई दिशा दी है, जो अब समाज के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई हैं। यहां कुछ चुनिंदा कहानियां हैं: • जौनपुर की रानी देवी: मत्स्य पालन की 'लाखपति दीदी': जौनपुर जिले की रानी देवी एक साधारण गृहिणी थीं, लेकिन मिशन शक्ति और ब्लू रेवोल्यूशन योजना के तहत 15 लाख रुपये की अनुदान राशि और वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने मत्स्य पालन व्यवसाय शुरू किया। आज वे न केवल आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं, बल्कि स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें भी सशक्त बना रही हैं। उनकी सफलता उत्तर प्रदेश के मत्स्य क्षेत्र में लहरें पैदा कर रही है। • लखपति दीदी कार्यक्रम की लाभार्थी: आशा और उद्यमिता की मिसाल: नवंबर 2024 तक लाखपति दीदी योजना के तहत हजारों महिलाओं ने स्वरोजगार अपनाया। लखनऊ की एक महिला, जिन्होंने मिशन शक्ति के कौशल विकास केंद्र से सिलाई प्रशिक्षण लिया, आज अपना बुटीक चला रही हैं और 10 अन्य महिलाओं को रोजगार दे रही हैं। यह योजना महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी दिला रही है। • कन्या सुमंगला की कहानी: शिक्षा से सशक्तिकरण: नवरात्रि के कन्या पूजन में सम्मानित एक बालिका, वाराणसी की प्रिया, ने योजना की सहायता से अपनी पढ़ाई पूरी की और अब आईएएस की तैयारी कर रही हैं। मुख्यमंत्री योगी ने कहा, "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएं उत्तर प्रदेश को महिलाओं के सशक्तिकरण में अग्रणी बना रही हैं।" ये कहानियां साबित करती हैं कि मिशन शक्ति केवल योजना नहीं, बल्कि जीवन बदलने वाला आंदोलन है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रेरक भाषणों में महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिशन शक्ति फेज-5.0 के लॉन्च और विभिन्न आयोजनों में महिलाओं के सशक्तिकरण पर गहन चर्चा की है। उनके भाषण समाज को दिशा दे रहे हैं: • लॉन्च समारोह (20 सितंबर 2025): लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा, "महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन एक मजबूत समाज और समृद्ध राष्ट्र की नींव हैं। मिशन शक्ति केवल अभियान नहीं, बल्कि जन आंदोलन है। 2017 से पहले बेटियां असुरक्षित महसूस करती थीं, लेकिन आज अंगनवाड़ी केंद्रों से लेकर पुलिस स्टेशनों तक परिवर्तन आया है।" उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की महिला सशक्तिकरण योजनाओं की भी प्रशंसा की। • झांसी सम्मान समारोह (27 सितंबर 2025): "उत्तर प्रदेश ने महिलाओं को सशक्त करने में मजबूत उदाहरण स्थापित किया है। मिशन शक्ति के माध्यम से हम बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, कन्या सुमंगला जैसी योजनाओं को मजबूत कर रहे हैं। महिलाओं को शक्ति देना राष्ट्र निर्माण का मूल मंत्र है।" • नवरात्रि कन्या पूजन (अक्टूबर 2025): "कन्या पूजन से हम न … Read more

विकसित उत्तर प्रदेश: 57 लाख से ज्यादा नागरिकों ने साझा किया अपना फीडबैक

विकसित यूपी के लिए अब तक 57 लाख से अधिक लोगों ने दिया फीडबैक फीडबैक में शीर्ष पर रहे जौनपुर, संभल और गाजीपुर 75 जिलों में नोडल अधिकारियों ने किया जनसंवाद  ग्रामीण इलाकों से आए 45 लाख से अधिक सुझाव  28 लाख युवाओं ने दिया भविष्य के विकास पर मत  करीब 50 हजार ग्राम पंचायतों में हुई बैठकें और गोष्ठियां  शिक्षा, कृषि और आईटी पर जनता ने दिए सर्वाधिक सुझाव मुख्यमंत्री योगी का विजन 2047 बना जनआंदोलन  जनता के सुझावों से बनेगा यूपी का विजन डॉक्यूमेंट  सामूहिक भागीदारी से साकार होगा 'विकसित उत्तर प्रदेश' का सपना लखनऊ उत्तर प्रदेश को 2047 तक समर्थ और विकसित राज्य के रूप में स्थापित करने के लक्ष्य के साथ शुरू किया गया 'समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047: समृद्धि का शताब्दी पर्व महाभियान' जनसहभागिता का एक ऐतिहासिक अभियान बन गया है। इस महाभियान के तहत सोमवार तक प्रदेश के सभी 75 जनपदों में नोडल अधिकारियों और प्रबुद्धजनों ने भ्रमण कर जनता से संवाद स्थापित किया और प्रदेश के विकास यात्रा से संबंधित जानकारी साझा की। इस दौरान छात्रों, शिक्षकों, व्यापारियों, उद्यमियों, कृषकों, स्वयंसेवी संगठनों, श्रमिक संघों, मीडिया और आम नागरिकों के साथ विकास के रोडमैप पर चर्चा कर सुझाव लिए गए। प्रदेश सरकार द्वारा तैयार किए गए पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर अब तक करीब 57 लाख से अधिक फीडबैक प्राप्त हुए हैं। इनमें से लगभग 45 लाख ग्रामीण क्षेत्रों से और 12 लाख नगरीय क्षेत्रों से सुझाव आए हैं। फीडबैक देने वालों में करीब 28 लाख युवा (31 वर्ष से कम आयु), 26 लाख मध्यम आयु वर्ग (31-60 वर्ष) और करीब 3 लाख वरिष्ठ नागरिक (60 वर्ष से अधिक) शामिल हैं। इन सेक्टर के लिए मिले अमूल्य सुझाव विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त सुझावों में कृषि क्षेत्र में लगभग 14.4 लाख, पशुधन एवं डेरी में 2.3 लाख, उद्योग क्षेत्र में 2 लाख, आईटी एवं टेक सेक्टर में 1.6 लाख, पर्यटन क्षेत्र में 1.4 लाख, ग्रामीण विकास में 11.4 लाख, इन्फ्रास्ट्रक्चर में 50 हजार, संतुलित विकास में 83 हजार, समाज कल्याण में 4.4 लाख, नगरीय एवं स्वास्थ्य में 3.9 लाख, शिक्षा क्षेत्र में 13.4 लाख और सुरक्षा सम्बंधित 1 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। सुझाव देने में ये हैं टॉप और बॉटम जिले जनपदवार सर्वाधिक फीडबैक देने वाले जिलों में जौनपुर (4.5 लाख), संभल (3.8 लाख), गाजीपुर (2.5 लाख), प्रतापगढ़ (1.8 लाख) और बिजनौर (1.7 लाख) रहे। वहीं सबसे कम फीडबैक इटावा (20 हजार), महोबा (26 हजार), हापुड़ (29 हजार), गौतमबुद्ध नगर (29 हजार) और ललितपुर (30 हजार) से मिले। व्यापक जनसंवाद और गोष्ठियों का हुआ आयोजन महाभियान के अंतर्गत प्रदेशभर में नगर निकायों से लेकर ग्राम पंचायतों तक संवाद बैठकों और गोष्ठियों का आयोजन किया गया। इनमें 214 नगर पालिकाओं में बैठकें, 227 नगर पालिकाओं में सम्मेलन/गोष्ठियां, 18 नगर निगमों में बैठकें एवं सम्मेलन, 63 जिला पंचायतों में गोष्ठियां, 556 नगर पंचायतों में बैठकें और 577 में सम्मेलन, 751 क्षेत्र पंचायतों में बैठकें और गोष्ठियां तथा करीब 50 हजार ग्राम पंचायतों में भी सफल आयोजन किए गए। इन बैठकों से स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों के बीच संवाद और समन्वय को नई दिशा मिली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन 'समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047' के अनुरूप प्राप्त सुझावों के आधार पर राज्य सरकार विजन डॉक्यूमेंट तैयार कर रही है। यह महाभियान जनसहभागिता और सामूहिक विकास की भावना को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।