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प्रेमानंद महाराज के शिष्य की संदिग्ध मौत, CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस; कई एंगल से जांच

मथुरा मथुरा के वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे बाराह घाट मार्ग स्थित गुरु कृपा कुंज आश्रम की छत से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई। उन्हें आनन-फानन में निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस बीच घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें वह अचानक आश्रम की छत से सड़क पर गिरते दिखाई दे रहे हैं। घटना के समय सड़क पर लोगों की आवाजाही थी। कुछ लोग साइकिल से गुजर रहे थे और एक साइकिल सवार के सामने ही दीपक के गिरने से वह चौंक गया। उसके पीछे आ रहा दूसरा साइकिल सवार भी रुक गया। इसी दौरान सामने से एक चार पहिया वाहन भी गुजर रहा था। घटना के बाद आसपास हड़कंप मच गया। अब सवाल उठ रहे हैं कि दीपक ने सुसाइड किया या फिर मामला कुछ और है। चौथी मंजिल से गिरने से वीडियो सामने आया प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक पटेल उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत की गुत्थी सुलझाने में पुलिस जुट गयी है। जो दिख रहा है, उस पर तो पुलिस जांच कर ही रही है। पुलिस इस दिशा में भी जांच कर रही है कि कहीं कुछ ऐसा तो नहीं है जो अभी नजर नहीं आया हो। जो सीसीटीवी फुटेज पुलिस को मिले हैं, उन्हें जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा जा रहा है। यही नहीं ऐसी भी आशंका है कि घटना के समय मृतक किसी ड्रग्स के प्रभाव में तो नहीं था। इसलिए उसके रक्त का नमूना जांच के लिए भेजा गया है। प्राइवेट पार्ट कैसे कटा? कोई सामान्य व्यक्ति कैसे अपने प्राइवेट पार्ट को ग्राइंडर से काट सकता है, यह बात किसी के गले नहीं उतर रही। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जो सीसीटीवी फुटेज आश्रम के मिले हैं, उसे देखकर आश्चर्यचकित होना स्वाभाविक है। इन फुटेज के अनुसार रसिक दुलारी शरण कक्ष से निकलता दिखता है। उस समय एक धोती वह लपेटे हुए है, जिस पर खून दिख रहा है और एक धोती वह आगे की ओर किए हुए है, जिससे उसके आगे का हिस्सा दिख न सके। वह सीढ़ियों की ओर जाता दिखता है और छत पर पहुंच जाता है। वह पैर चौड़ाकर चल रहा होता है। छत पर पहुंचकर वह बाउंड्री पर बैठ जाता है। सीसीटीवी फुटेज की जांच में जुटी पुलिस पुलिस सूत्रों के अनुसार समूचे घटनाक्रम, सीसीटीवी और परिस्थितियों को देखते हुए रक्त नमूने जांच को भेजे गए हैं, ताकि यह पता चल सके कि उस समय मृतक किसी ड्रग्स के प्रभाव में तो नहीं था। हालांकि यह संतों का आश्रम है लेकिन जांच में सभी एंगल ध्यान में रखे जा रहे हैं। इसके अलावा पुलिस ने आश्रम से सीसीटीवी फुटेज कलेक्ट कर लिए हैं और उनको फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनसे कोई छेड़छाड़ तो नहीं हुई।

योगी सरकार में खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास को नई रफ्तार, 1548 करोड़ रुपये से 8,397 परियोजनाएं ला रहीं बदलाव

लखनऊ उत्तर प्रदेश में खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और वहां रहने वाले लोगों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) निधि का योगी सरकार में व्यापक इस्तेमाल हो रहा है। वर्ष 2017 से अगस्त 2026 तक प्रदेश में इस निधि से कुल 8,397 परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन परियोजनाओं पर अब तक 1548 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इसके जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे से लेकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के कल्याण तक विभिन्न क्षेत्रों में इन परियोजनाओं का सुधारात्मक असर दिखाई दे रहा है। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के मुताबिक खनन से प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिए जिला खनिज फाउंडेशन निधि का उपयोग किया जा रहा है। इसके तहत अवैध खनन और परिवहन पर रोक के लिए चेकिंग रोड का निर्माण और समय-समय पर मरम्मत, वृक्षारोपण व रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसे कार्य भी कराए गए हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष जोर योगी सरकार के पिछले 9 वर्षों से अधिक में डीएमएफ निधि से प्रत्येक जनपद में शिक्षा से जुड़ी 3,419 परियोजनाओं के तहत प्राथमिक विद्यालयों का जीर्णोद्धार कराया गया। स्कूलों में स्मार्ट कक्षाएं, स्पेस लैब, कंप्यूटर सिस्टम समेत आधुनिक सुविधाएं व तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराए गए। वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में 323 परियोजनाओं के तहत अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आधुनिक एवं नवीन उपकरण उपलब्ध कराकर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया गया है। गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार ग्रामीण खनन प्रभावित क्षेत्रों में 516 भौतिक अवस्थापना परियोजनाओं के तहत सामुदायिक भवनों का निर्माण और जीर्णोद्धार कराया गया है। इसके साथ ही ग्रामीण विकास, स्वच्छता, सौर प्रकाश, पेयजल, कृषि और सिंचाई से जुड़ी परियोजनाएं भी संचालित हैं। महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए 3,070 परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण, वजन मापने की मशीन, लंबाई मापने के लिए टेप जैसी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। वहीं बुजुर्गों के लिए रात्रि केंद्र, किचन और हैंडपंप जैसी सुविधाओं पर भी काम किया गया। पैदल यात्रा के लिए फुटपाथ निर्माण जैसी योजनाएं भी जिला खनिज फाउंडेशन के माध्यम से कई जनपदों में पूरी हो गईं हैं। कौशल विकास से रोजगार के अवसर प्रदेश में खनन प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं और अन्य लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण, डेयरी फार्मिंग में रोजगार सृजन, कौशल विकास प्रशिक्षण और सिलाई प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है।

भारत की बदलती व्यापार नीति ने उत्तर प्रदेश के उद्यमियों के लिए खोले वैश्विक बाजारों के नए अवसर: भूपेंद्र चौधरी

ग्रेटर नोएडा  उत्तर प्रदेश के एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि भारत की बदलती व्यापार नीति ने उत्तर प्रदेश के उद्यमियों और एमएसएमई क्षेत्र के लिए वैश्विक बाजारों के नए अवसर खोले हैं। भारत द्वारा विभिन्न देशों के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौतों से टेक्सटाइल, लेदर, इंजीनियरिंग गुड्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, फार्मास्यूटिकल्स तथा ओडीओपी जैसे क्षेत्रों को लाभ मिल सकता है। 'लीवरेजिंग इंडियाज फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स फॉर ग्लोबल बिजनेस ग्रोथ' सेशन में उन्होंने कहा कि मुरादाबाद का पीतल, भदोही के कालीन, अलीगढ़ के ताले और कन्नौज का इत्र जैसे उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों में वैश्विक बाजार में अपनी पहचान मजबूत करने की क्षमता है। प्रदेश के विशाल एमएसएमई आधार, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर कनेक्टिविटी और ई-इकोनॉमिक एक्सपोर्ट हब तथा लॉजिस्टिक सुविधाओं के विकास से निर्यातकों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है। उन्होंने उद्यमियों और निर्यातकों से भारत के व्यापार समझौतों से उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि गुणवत्ता, नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के बल पर उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़कर ‘लोकल से ग्लोबल’ की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है। यूपीआईटीएस नए भारत के नए उत्तर प्रदेश की तस्वीर: नंद गोपाल गुप्ता नंदी औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने कहा कि यूपीआईटीएस नए भारत के नए उत्तर प्रदेश की तस्वीर है, जो प्रदेश की स्थानीय ताकत, कारीगरों के हुनर और उद्यमियों की प्रतिभा को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का प्रभावी मंच बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के व्यापार एवं औद्योगिक क्षेत्र को नई गति मिली है। वर्ष 2023 में शुरू हुआ यूपीआईटीएस अपने चौथे संस्करण तक पहुंच चुका है और इसमें विदेशी खरीदारों, प्रदर्शकों तथा विभिन्न देशों की भागीदारी प्रदेश की बढ़ती वैश्विक व्यापारिक पहुंच को दर्शाती है।  उन्होंने कहा कि यूपीआईटीएस के माध्यम से ओडीओपी, हस्तशिल्प, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल, लेदर, इलेक्ट्रॉनिक्स सहित विभिन्न क्षेत्रों के उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिल रहा है। भारत के विभिन्न देशों के साथ व्यापार समझौतों और एफटीए से निर्यातकों के लिए नए अवसर खुले हैं, जिनका लाभ उत्तर प्रदेश के उद्यमी उठा सकते हैं। प्रदेश में एक करोड़ से अधिक एमएसएमई, बेहतर कनेक्टिविटी, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रतिभाशाली युवाओं की उपलब्धता इसकी बड़ी ताकत है। जापान, वियतनाम, सिंगापुर, रूस, ऑस्ट्रिया और बेलारूस जैसे देशों की भागीदारी यूपीआईटीएस की वैश्विक पहुंच को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ते हुए विकसित भारत की विकास यात्रा में मजबूत भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

देवीपाटन मंडल के चार जिलों के बच्चों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजी आभार भरी चिट्ठियां

लखनऊ किसी ने फूलों से चिट्ठी सजाई, किसी ने अपनी नई स्टडी टेबल का चित्र बनाया तो किसी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर के साथ ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश उकेरा। देवीपाटन मंडल में एक लाख बच्चों को मिली स्टडी टेबल अब उनके घर में पढ़ाई का अपना छोटा सा कोना बन रही है। इस पहल से खुश बच्चों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने हाथों से पत्र लिखकर धन्यवाद दिया है। इन मासूम चिट्ठियों में सरकारी योजना के आंकड़ों से इतर बच्चों की वह खुशी दिखाई देती है, जो घर में पढ़ाई के लिए अपनी स्टडी टेबल मिलने से उनके जीवन में आई है। स्वाती ने लिखा- स्टडी टेबल पाकर काफी प्रसन्न हूं स्टडी टेबल पाने वाली स्वाती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे अपने पत्र में खुशी जाहिर की है। उसने लिखा कि उसे स्टडी टेबल और पढ़ने की सामग्री दी गई है, जिसके लिए वह दिल से धन्यवाद करती है। स्वाती ने बताया कि वह प्रतिदिन स्टडी टेबल पर पढ़ाई करती है और मिली सामग्री का उपयोग करती है। उसने अपने पत्र को फूलों से सजाने के साथ नीचे स्टडी टेबल, किताब और पेंसिल का चित्र भी बनाया है। सबा की खुशी- अब मेरी पीठ भी दर्द नहीं करती कक्षा छह की छात्रा सबा की चिट्ठी स्टडी टेबल से उसकी रोजमर्रा की पढ़ाई में आए बदलाव को बयां करती है। मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए सबा ने लिखा कि पहले उसे घर पर पढ़ाई करने में बहुत असुविधा होती थी। अब स्टडी टेबल मिलने से उसे पढ़ने में सहूलियत हुई है। अपनी मासूम भाषा में उसने लिखा कि अब उसकी पीठ भी दर्द नहीं करती। पत्र के साथ सबा ने स्टडी टेबल का चित्र भी बनाया और ‘सब पढ़ें-सब बढ़ें’ का संदेश लिखा। नुजहत फातिमा ने लिखा- अब पहले से अधिक एकाग्र होकर पढ़ रही हूं कक्षा सात की नुजहत फातिमा ने मुख्यमंत्री के नाम नीले चार्ट पेपर पर ‘आभार पत्र’ तैयार किया। नुजहत ने लिखा कि स्टडी टेबल मिलने से उसे पढ़ाई का अच्छा वातावरण मिला है। इससे पढ़ाई में उसकी रुचि बढ़ी है और वह पहले की तुलना में अधिक एकाग्र होकर पढ़ पा रही है। उसने यह भी लिखा कि गृहकार्य पूरा करने और पढ़े हुए पाठ को दोहराने में वह स्टडी टेबल का इस्तेमाल कर रही है। पत्र में रंगीन पेंसिलों के साथ पढ़ती हुई छात्रा का चित्र बनाकर उसने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। बच्चों ने कागज पर उतारी खुशी, CM योगी के बनाए चित्र बच्चों के आभार पत्र केवल शब्दों तक सीमित नहीं हैं। कई छात्र-छात्राओं ने पूरी रचनात्मकता के साथ पोस्टर तैयार किए हैं। एक बच्चे ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा चित्र बनाया और दोनों ओर ‘बेटी बचाओ’ और ‘बेटी पढ़ाओ’ लिखा। नीचे स्टडी टेबल प्राप्त करती छात्रा का चित्र बनाया गया है। एक अन्य पोस्टर में स्कूल के गेट पर छात्रा को टेबल सौंपते दिखाते हुए लिखा गया ‘बेटी पढ़ेगी, आगे बढ़ेगी, उत्तर प्रदेश का नाम बढ़ाएगी।’ एक बच्चे ने बड़े अक्षरों में ‘Thank You’ लिखकर मुख्यमंत्री, छात्रा और स्टडी टेबल को एक साथ चित्रित किया। एक लाख मेधावी बच्चों के घर पहुंची पढ़ाई की मेज मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि देवीपाटन मंडल के चार जिलों में ‘शिक्षा की उड़ान’ स्टडी टेबल वितरण अभियान के तहत एक लाख टेबल बांटने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे शत-प्रतिशत पूरा किया गया है। अभियान का उद्देश्य घर पर अनुशासित पढ़ाई की संस्कृति विकसित करने के साथ सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करना है। मेधावी विद्यार्थियों को स्टडी टेबल उपलब्ध कराकर कक्षा के बाहर भी निरंतर और एकाग्र अध्ययन के लिए जगह उपलब्ध कराने की पहल की गई है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण परिवेश के बच्चों को स्टडी टेबल दी गई है, जो अब उनका पर्सनल स्टडी स्पेस बन चुका है।  बहराइच में सबसे ज्यादा 34,260 टेबल का वितरण मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल के अनुसार अभियान में सबसे अधिक बहराइच में 34,260 टेबल दी गईं। इसके बाद गोंडा में 27,650, बलरामपुर में 26,984 और श्रावस्ती में 11,106 स्टडी टेबल का वितरण किया गया। इस तरह मंडल ने एक लाख टेबल का निर्धारित लक्ष्य पूरा किया। मेधावी छात्रों के साथ कस्तूरबा की सभी छात्राओं को लाभ उन्होंने बताया कि ‘शिक्षा की उड़ान’ अभियान में सरकारी विद्यालयों के सर्वोच्च प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्टडी टेबल देने की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की सभी छात्राओं को लाभार्थियों में शामिल किया गया है। इसे सतत अभियान के रूप में तैयार किया गया है, ताकि भविष्य में भी टॉपर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जा सके।

उत्तर प्रदेश में बारिश-आंधी का कहर, 60 घंटे में 56 लोगों की मौत; 107 पशुहानि की सूचना

लखनऊ  यूपी में पिछले 48 घंटों से ज्यादा समय से बारिश जारी है। तेज हवाओं और बारिश ने कई जिलों में भारी तबाही मचाई है। कई किसानों की खेतों में खड़ी धान की फसलें बर्बाद हो गई हैं। कई जगहों पर मकान ही गिर गए हैं। जिसको देखते हुए यूपी सरकार ने सभी अफसरों को फील्ड में रहकर पीड़ितों को हर संभव मदद के निर्देश दिए गए हैं। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने रविवार को प्रभावित जनपदों के जिलाधिकारियों एवं अपर जिलाधिकारियों से संवाद कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा करते हुए राहत कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। राहुल आयुक्त ने सभी डीएम, एडीएम एवं आपदा विशेषज्ञों को फील्ड में रहकर राहत एवं बचाव कार्यों की प्रभावी निगरानी करने तथा उच्च प्राथमिकता के आधार पर राहत सामग्री एवं सहायता राशि का वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। राहत आयुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जिलाधिकारियों को अतिवृष्टि से प्रभावित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनकी समस्याओं की जानकारी लेने तथा आवश्यक सहायता तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों के लिए समय-सीमा निर्धारित करते हुए कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा है। यूपी में सामान्य से 775 प्रतिशत अधिक वर्षा राहत आयुक्त ने बताया कि 25 सितम्बर से 27 सितम्बर की सुबह तक प्रदेश में 66.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 7.6 मिमी है। इस प्रकार प्रदेश में वर्षा सामान्य से 775 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 75 जनपदों में से 56 जनपदों में अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि फर्रूखाबाद में सामान्य से 7385 प्रतिशत, कन्नौज में 5664 प्रतिशत, शाहजहांपुर में 4408 प्रतिशत, हमीरपुर में 4240 प्रतिशत तथा महोबा में 4100 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है। 56 जनहानि, 107 पशुहानि एवं 1021 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना राहत आयुक्त ने बताया कि पिछले 60 घंटों में अतिवृष्टि एवं आंधी-तूफान के कारण प्रदेश में 56 जनहानि, 107 पशुहानि तथा 1021 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई है। इसके अतिरिक्त 46 व्यक्तियों के घायल होने की सूचना है। जनहानि के मामलों में सीतापुर में 7, लखीमपुर खीरी में 5, बहराइच में 5, बलरामपुर में 5, अयोध्या में 4 तथा गोरखपुर में 4 जनहानि की सूचना प्राप्त हुई है। घायलों में हरदोई में 7, मैनपुरी में 5, श्रावस्ती में 5 तथा बाराबंकी में 5, जबकि सीतापुर एवं लखीमपुर खीरी में 3-3 घायल होने की सूचना है। पशुहानि के मामलों में हरदोई में 28, सीतापुर में 16, कन्नौज में 14, बहराइच में 7, कानपुर देहात में 7 तथा उन्नाव में 6 पशुहानि की सूचना प्राप्त हुई है। मकान क्षति के मामलों में हरदोई में 272, सीतापुर में 108, चंदौली में 75, औरैया में 60, गोंडा में 54, हमीरपुर में 51, शाहजहांपुर में 47 तथा बहराइच में 44 मकान क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। फसल क्षति का तत्काल आकलन कर सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश राहत आयुक्त ने फसल क्षति का तत्काल सर्वेक्षण एवं आकलन कर नियमानुसार मुआवजा प्रदान करने की कार्यवाही सर्वाेच्च प्राथमिकता पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके लिए आवश्यकता के अनुसार वैकल्पिक आवास की व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि जहां आवश्यक हो, पात्र प्रभावित परिवारों को नियमानुसार आवास योजनाओं से लाभान्वित कराने की कार्रवाई की जाए। राहत आयुक्त ने यह भी निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों को राहत एवं बचाव कार्यों तथा प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई से नियमित रूप से अवगत कराया जाए। राहत आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वर्तमान परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों में त्वरितता, संवेदनशीलता एवं समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्रभावित परिवारों को हरसंभव आवश्यक सहायता समय से उपलब्ध कराई जाए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक आवागमन से बचें राहत आयुक्त ने बताया कि जलभराव वाले क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राहत एवं बचाव दलों द्वारा लगातार रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने के साथ ही आवश्यक सहायता एवं राहत उपलब्ध कराई जा रही है। आमजन से अपील है कि जल प्रभावित एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक आवागमन से बचें। जलभराव, नदियों एवं नालों के तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। आपातकालीन सहायता हेतु राहत आयुक्त कार्यालय की हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क करें।

सरधना के किसान का 29 लाख रुपये से अधिक पहुंचा फूल उत्पादन का कारोबार

ग्रेटर नोएडा  इंडिया एक्सपो मार्ट में चल रहे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में मेरठ की खेती और कृषि आधारित उद्यमिता लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। उद्यान विभाग के आउटलेट पर मेरठ के किसानों की पॉलीहाउस में तैयार फसल, फूल और शहद के उत्पादों को देखकर देश-विदेश से आए खरीदार और आगंतुक जानकारी ले रहे हैं। जरबेरा और गुलाब के फूलों के साथ कमल ककड़ी, शिमला मिर्च और बैंगन जैसी फसलों ने लोगों का ध्यान खींचा है। खास बात यह है कि प्रदर्शनी में उत्पादों के प्रदर्शन के साथ किसानों को नए बाजार और कारोबार के अवसर भी मिल रहे हैं। सरधना तहसील के खेड़ा गांव निवासी रविन्द्र कुमार पांच एकड़ क्षेत्र में पॉलीहाउस के माध्यम से फल और सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उद्यान विभाग की योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने संरक्षित खेती को अपनाया। इससे उनके कृषि कारोबार का सालाना आंकड़ा 29 लाख रुपये से अधिक पहुंच गया है। उनके पॉलीहाउस में 300 से 400 ग्राम तक वजन वाली पीली, हरी और लाल शिमला मिर्च तैयार हो रही है। इस फसल की दिल्ली की आजादपुर मंडी में मांग है। ट्रेड शो ने बढ़ाई फूलों की मांग, कंपनियों ने संपर्क किया रविन्द्र कुमार ने बताया कि वह पिछले वर्ष भी ट्रेड शो में शामिल हुए थे। प्रदर्शनी में अपने उत्पादों को बाजार और खरीदारों के सामने रखने से उन्हें नई पहचान मिली। इस बार भी कई इवेंट कंपनियों ने जरबेरा और गुलाब के फूलों की आपूर्ति के लिए उनसे संपर्क किया है। कुछ कंपनियों की ओर से समझौता ज्ञापन (एमओयू) के लिए भी बातचीत की गई है। उनका कहना है कि सरकार की योजनाओं से किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक और बाजार आधारित उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार के उद्यान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने भी उद्यान विभाग के आउटलेट का निरीक्षण कर किसानों के उत्पाद देखे और उनका उत्साहवर्धन किया। आउटलेट पर मेरठ की फसलों के साथ कृषि से जुड़े अन्य उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए हैं। मेरठ के शहद को मिला अंतरराष्ट्रीय बाजार उद्यान विभाग के आउटलेट पर मेरठ के रेनट्रॉव नैचुरल के शहद उत्पाद भी लोगों की रुचि का केंद्र बने हुए हैं। युवा उद्यमी राखी अघेरा और उनके भाई भारत अघेरा ने बताया कि पिछले वर्ष उनकी कंपनी को इंडोनेशिया, मलेशिया और वियतनाम से 46 टन शहद का आर्डर मिला था। ट्रेड शो में इस बार भी उन्हें नए कारोबार और बेहतर आर्डर मिलने की उम्मीद है। आउटलेट की व्यवस्था में लगे वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक संजय सिंह ने कहा कि मेरठ के किसानों और कृषि उद्यमियों के लिए ट्रेड शो केवल उत्पादों के प्रदर्शन का मंच नहीं, बल्कि सीधे खरीदारों और कारोबारी संस्थानों से संपर्क का अवसर भी बन रहा है। पॉलीहाउस की सब्जियों और फूलों से लेकर शहद तक, मेरठ के उत्पाद यहां खेती को बाजार से जोड़ने की नई तस्वीर पेश कर रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री बोले – उत्तर प्रदेश की सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास आज उसकी नई पहचान बन चुके हैं: पीयूष गोयल

ग्रेटर नोएडा केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित चौथे इंटरनेशनल ट्रेड शो में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश ने विकास की नई यात्रा तय की है। आज प्रदेश की सकारात्मक सोच, उद्यमियों का आत्मविश्वास और विकास के प्रति प्रतिबद्धता उसकी नई पहचान बन चुके हैं। उत्तर प्रदेश के विकास की गूंज अब देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। यूपीआईटीएस के तीसरे दिन आयोजित स्पेशल बिजनेस सेशन लीवरेजिंग इंडियाज फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स फॉर ग्लोबल बिजनेस ग्रोथ में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए पीयूष गोयल ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर शुरू हुआ यह आयोजन आने वाले वर्षों में और बड़ा तथा प्रभावी होता जाएगा। उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा को पूरी दुनिया एक उदाहरण के रूप में देखेगी। प्रदेश में निर्मित एक्सप्रेसवे, नए एयरपोर्ट, बड़े औद्योगिक पार्क तथा डिफेंस, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आधुनिक क्षेत्रों में हो रहा निवेश बदलते उत्तर प्रदेश की तस्वीर प्रस्तुत करता है। उत्तर प्रदेश के स्थानीय ब्रांड और उत्पाद दुनिया के बाजारों में पहचान बना रहे पीयूष गोयल ने कहा कि नोएडा के निकट तेजी से विकसित हो रही रोबोटिक्स फैक्ट्री इस बात का उदाहरण है कि उत्तर प्रदेश अब आधुनिक और उभरते हुए क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। प्रदेश के विकास की अगली कड़ी अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निर्यात, विदेशी निवेश और पर्यटन से जुड़ रही है। उत्तर प्रदेश के स्थानीय ब्रांड और उत्पाद दुनिया के बाजारों में अपनी पहचान बना रहे हैं।उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के निर्यात को वर्ष 2030 तक पांच लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य प्रदेश के बढ़ते आत्मविश्वास और आर्थिक क्षमता को दर्शाता है। केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय से प्रदेश को विकास के नए अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने व्यापार और उद्योग जगत से जुड़े लोगों का आह्वान किया कि वे इन अवसरों को पहचानें और पूरी ऊर्जा के साथ उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा को आगे बढ़ाएं। 2017 से पहले के माहौल का किया उल्लेख केंद्रीय मंत्री ने वर्ष 2017 के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उस समय उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और कारोबारी माहौल को लेकर लोगों में चिंता थी। उद्यमियों में पर्याप्त विश्वास नहीं था और प्रदेश में नए बड़े उद्योग लगाने को लेकर उत्साह का अभाव था। देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से भी उत्तर प्रदेश की ओर निवेश के लिए देखने की स्थिति नहीं थी, जबकि अंतरराष्ट्रीय निवेश की कल्पना और भी दूर की बात थी। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के कारण आम लोगों के साथ-साथ व्यापार और उद्योग जगत में भी निराशा का माहौल था। बड़े पैमाने पर पलायन की चर्चा होती थी और उत्तर प्रदेश को पिछड़े राज्यों की श्रेणी में देखा जाता था। ऐसे वातावरण में रोबोटिक्स, डिफेंस कॉरिडोर और सेमीकंडक्टर जैसे आधुनिक क्षेत्रों में निवेश की कल्पना करना कठिन था। युवाओं, महिलाओं और समाज के विभिन्न वर्गों के सुझावों को संकलित कर संकल्प पत्र तैयार किया पीयूष गोयल ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के संकल्प पत्र तैयार करने की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदेश के गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों से सुझाव लिए थे। युवाओं, महिलाओं और समाज के विभिन्न वर्गों ने अपनी आकांक्षाएं और अपेक्षाएं सामने रखीं। इन सुझावों को संकलित कर संकल्प पत्र तैयार किया गया। उन्होंने कहा कि उस समय सामने आई जन-आकांक्षाएं बहुत व्यापक थीं और उन्हें पूरा करने के लिए बड़ी वित्तीय आवश्यकता थी। उत्तर प्रदेश का बजट सीमित था और वित्तीय संसाधनों पर दबाव था। सरकारी कर्मचारियों के वेतन सहित नियमित दायित्वों के बाद विकास कार्यों के लिए सीमित संसाधन बचते थे। इसके बावजूद जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए हर वर्ष बड़ी अतिरिक्त राशि की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया था। ईमानदार और पारदर्शी व्यवस्था से बढ़ा राजस्व पीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने विकास के साथ-साथ राजस्व संग्रह के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। सरकार की नीतियों और बेहतर प्रशासन के कारण विभिन्न स्रोतों से प्राप्त राजस्व में कई गुना वृद्धि हुई है और इसका उपयोग प्रदेश के विकास कार्यों में किया जा रहा है। उन्होंने आबकारी राजस्व का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2016-17 की तुलना में वर्तमान समय में प्रदेश के आबकारी राजस्व में लगभग पांच गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के विभिन्न राजस्व स्रोतों में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि भूमि वही है, लेकिन भूमि हस्तांतरण, रजिस्ट्रेशन फीस और स्टांप ड्यूटी से प्राप्त राजस्व में बड़ा बदलाव आया है। खनन क्षेत्र का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 2016-17 में बालू, मौरंग, पत्थर और अन्य खनिजों से प्रदेश का खनन राजस्व लगभग 1,548 करोड़ रुपये था। आज इस क्षेत्र से प्राप्त राजस्व में कई गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि राजस्व संग्रह में यह बदलाव सरकार की बेहतर व्यवस्था और संसाधनों के प्रभावी उपयोग को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि राजस्व में वृद्धि का असर प्रदेश की विकास यात्रा में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। बेहतर राजस्व संग्रह के कारण सरकार के पास सड़क, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक विकास और अन्य विकास एवं जनकल्याणकारी कार्यों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हुए हैं। पीयूष गोयल ने कहा कि जहां पहले प्रदेश को वित्तीय दबाव और राजस्व घाटे का सामना करना पड़ता था, वहीं आज उत्तर प्रदेश सरकार सरप्लस बजट प्रस्तुत करने की स्थिति में है। यह वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों पर अनावश्यक कर्ज का बोझ कम रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। यूपीआईटीएस ग्लोबल मार्केट एक्सेस की दिशा में बड़ा कदम केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो केवल एक ट्रेड फेयर नहीं, बल्कि प्रदेश के व्यापार और उद्योग को वैश्विक बाजार से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच है। इसके माध्यम से प्रदेश के उद्यमियों को दुनिया के बाजारों तक पहुंच बनाने और भारत के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स का लाभ उठाने के नए … Read more

अमरोहा के मसालों की महक, अयोध्या की हर्बल चाय और कन्नौज के इत्र की खुशबू खींच रही लोगों का ध्यान

लखनऊ  आगरा की जरी-जरदोजी, अमरोहा के मसाले, अयोध्या की हर्बल चाय, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी, कन्नौज का इत्र, गोरखपुर की टेराकोटा ज्वेलरी और बनारस के कालीन…। उत्तर प्रदेश के गांवों और कस्बों में महिलाओं के हाथों तैयार हो रहे उत्पाद अब स्थानीय हाट-बाजार की सीमा से निकलकर बड़े बाजार की ओर बढ़ रहे हैं। ग्रेटर नोएडा में चल रहे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदेश के 75 जिलों से पहुंची स्वयं सहायता समूहों की महिला उद्यमियों ने अपने हुनर से उत्तर प्रदेश की ऐसी ही तस्वीर सामने रखी है। यहां सिर्फ उत्पाद नहीं बिक रहे, बल्कि हर स्टॉल के साथ किसी गांव, किसी परंपरागत कला और उसे रोजगार में बदलने वाली महिला की कहानी भी जुड़ी है। आगरा की रहनुमा जरी-जरदोजी लेकर पहुंची हैं तो अमरोहा की कौशल्या गौतम के पिसे मसाले अपनी महक बिखेर रहे हैं। अयोध्या की रेणु सिंह की हर्बल चाय और लेमन ग्रास के उत्पाद हैं तो आजमगढ़ की रीता प्रजापति ब्लैक पॉटरी को बड़े बाजार के सामने लेकर आई हैं। कन्नौज की तारावती के पास इत्र है, जबकि वाराणसी की सीता देवी कालीन, फुटमैट और रनर के जरिए बनारस के हुनर की नुमाइंदगी कर रही हैं। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए यह भागीदारी महज प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है। यहां उन्हें अपने उत्पाद बेचने के साथ ग्राहक की पसंद समझने, पैकेजिंग और प्रस्तुति देखने तथा बड़े बाजार में अपने उत्पाद की संभावनाएं तलाशने का अवसर मिल रहा है। हर जिले के साथ एक अलग हुनर प्रदेश के एक छोर से दूसरे छोर तक बदलते ही उत्पाद भी बदल रहे हैं। कहीं परंपरागत शिल्प बाजार में जगह बना रहा है तो कहीं गांव की महिलाओं ने रोजमर्रा की जरूरत के उत्पादों को अपने उद्यम का आधार बनाया है। गोरखपुर की सरोज पाल टेराकोटा ज्वेलरी लेकर आई हैं तो सहारनपुर की सुधा सैनी लकड़ी के हस्तशिल्प और खिलौनों के साथ ट्रेड शो में पहुंची हैं। प्रयागराज की तब्बसुम मकसूद मूंज से टोकरी, डलिया और सजावटी सामान तैयार कर रही हैं। प्रतापगढ़ की प्रज्ञा जायसवाल आंवला-मुरब्बा और आम का अचार लेकर आई हैं। महोबा की रानी के स्टॉल पर पीतल की मूर्तियां और दूसरे शिल्प उत्पाद हैं। सिद्धार्थनगर की सरोज देवी ने केले के रेशे को उद्यम में बदलकर बनाना फाइबर उत्पाद तैयार किए हैं। सोनभद्र की मधुबाला हर्बल साबुन, शहद, फिनाइल और जूट बैग के साथ पहुंची हैं, जबकि खीरी की शफीका जूते, चप्पल और बेल्ट जैसे उत्पाद लेकर आई हैं। चित्रकूट की प्रिया सिंह के लकड़ी के खिलौने, बुलंदशहर की शाहजहां की खुर्जा पॉटरी, कन्नौज की तारावती का इत्र, मथुरा की रेखा के टेराकोटा और मिट्टी के उत्पाद तथा ललितपुर की लीला देवी के गोमय उत्पाद इस विविधता को और विस्तार देते हैं। जूट से जरी, मूंज से बनाना फाइबर तक राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि ट्रेड शो में महिला समूहों की उद्यमशीलता का दायरा केवल पारंपरिक हस्तशिल्प तक सीमित नहीं है। यहां जूट बैग और जरी साड़ी से लेकर चिकनकारी, हैंडलूम, कालीन, लकड़ी के खिलौने, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, शहद, मसाले, अचार-मुरब्बा, हर्बल उत्पाद और घरेलू उपयोग के सामान तक मौजूद हैं। चंदौली की अंजू जरी-जरदोजी सिल्क, बनारसी साड़ी, सूट और दुपट्टे लेकर आई हैं। बाराबंकी की शशि माला चिकनकारी और आर्टिफिशियल आभूषण, रायबरेली की रूबी बानो हैंड ब्लॉक प्रिंट के सूट, साड़ी और दुपट्टे तथा मऊ की माधुरी देवी सिल्क साड़ी प्रदर्शित कर रही हैं। दूसरी तरफ बलिया की रंजना देवी फिनाइल, टॉयलेट क्लीनर, डिशवॉश और हैंडवॉश लेकर आई हैं। जौनपुर की सुषमा सिंह भी क्लीनिंग उत्पादों के साथ मौजूद हैं। मुजफ्फरनगर की दीपिका साबुन, सर्फ और हर्बल तेल तथा कौशाम्बी की शिमला देवी कुशवाहा अचार और देसी घी के साथ क्लीनर व हैंडवॉश जैसे उत्पाद लेकर पहुंची हैं। इस विविधता में गांव की परंपरा भी है और बदलते बाजार के साथ कदम मिलाता ग्रामीण उद्यम भी। बिक्री से आगे, बाजार समझने का मौका : अरुण कुमार स्वयं सहायता समूहों के लिए किसी उत्पाद को तैयार करना कारोबार की पहली सीढ़ी है। उसके बाद सबसे बड़ी चुनौती ग्राहक और बाजार तक पहुंचने की होती है। इंटरनेशनल ट्रेड शो इस दूरी को कम करने का माध्यम बन रहा है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के मुताबिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए उत्पाद तैयार करना ही पूरी प्रक्रिया नहीं है, उन्हें बाजार तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इंटरनेशनल ट्रेड शो में अलग-अलग जिलों के उत्पादों को एक मंच पर रखने से महिला उद्यमियों की खरीदारों और ग्राहकों तक पहुंच बढ़ रही है। बड़े आयोजन में सीधे ग्राहकों के बीच पहुंचने से महिला उद्यमियों को यह देखने-समझने का अवसर भी मिल रहा है कि बाजार किस तरह के उत्पाद पसंद कर रहा है, पैकेजिंग और प्रस्तुति में क्या बदलाव किए जा सकते हैं और स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार के अनुरूप किस तरह आगे बढ़ाया जा सकता है। यही वह कड़ी है जो गांव में तैयार उत्पाद को स्थानीय बाजार से प्रदेश, देश और आगे बड़े बाजार की ओर ले जा सकती है। प्रदेश के 75 जिलों से महिला उद्यमियों की मौजूदगी इस आयोजन को महज 75 स्टॉल की कतार से आगे ले जाती है। इनके जरिए गांवों में तैयार हो रहा हुनर, स्थानीय शिल्प, खानपान और महिलाओं की उद्यमशीलता एक ही मंच पर बड़े बाजार के सामने आई है। बॉक्स : यूपी के चार कोनों का हुनर पश्चिमी यूपी : बागपत की दरी और हैंडलूम चादर, बुलंदशहर की खुर्जा पॉटरी, सहारनपुर का लकड़ी हस्तशिल्प, मेरठ का नेचुरल फूड। अवध : अयोध्या की हर्बल चाय और लेमन ग्रास उत्पाद, लखनऊ का हैंडलूम, बाराबंकी की चिकनकारी और आर्टिफिशियल आभूषण। पूर्वांचल : आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी, गोरखपुर की टेराकोटा ज्वेलरी, वाराणसी का कालीन और मऊ की सिल्क साड़ी। बुंदेलखंड : चित्रकूट के लकड़ी के खिलौने, महोबा की पीतल मूर्तियां और झांसी का हस्तनिर्मित सजावटी सामान।

साचीज के पवेलियन में आयुष्मान कार्ड से लेकर डिजिटल हेल्थ और आधुनिक चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धियां काे किया गया प्रदर्शित

लखनऊ/ग्रेटर नोएडा  उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-26 के हाल नं. 8 में साचीज के "नई दिशा, नया संकल्प-आयुष्मान पीएमजेएवाई : बिल्डिंग हेल्थकेयर एक्सिलेंस इन उत्तर प्रदेश" थीम पर आधारित पवेलियन में प्रदेश की स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था के बढ़ते दायरे को प्रदर्शित किया गया, जहां लोग आयुष्मान कार्ड बनवाने के साथ योजना से संबंधित जानकारी ले रहे थे। इसके साथ ही साचीज की ओर से एक विशेष सेशन में योजना की अब तक की उपलब्धियों को साझा किया गया। पीडियाट्रिक सर्जरी, न्यूरो सर्जरी समेत आठ गंभीर बीमारियों का किया जा रहा इलाज साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने सेशन में स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोगों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से संवाद किया। उन्हाेंने बताया कि जर्नी ऑफ क्वालिटी के माध्यम से जुड़े अस्पतालों को एनएबीएच मानकों और बेहतर गुणवत्ता व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सहयोग और मार्गदर्शन दिया जा रहा है। इससे अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, मानकीकृत प्रक्रियाओं और बेहतर उपचार परिणामों में सुधार हुआ है। योजना में आठ गंभीर बीमारियों के इलाज को जोड़ा गया है। इसमें अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण, न्यूरो सर्जरी, ऑन्कोलॉजी, प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी, पीडियाट्रिक सर्जरी, बर्न मैनेजमेंट, ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी और यूरोलॉजी शामिल हैं। उन्होंने प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे और सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने निजी अस्पतालों और बड़े कॉरपोरेट अस्पताल समूहों से प्रदेश के उन जिलों में अपनी सेवाओं का विस्तार करने का आग्रह किया, जहां विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता अभी सीमित है। नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज को पायलट प्रोजेक्ट के तहत किया जाएगा शुरू साचीज के पवेलियन में नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज (एनएचसीएक्स) को प्रदर्शित किया गया है, जिसमें बताया गया कि इसे योजना से जुड़े दो सरकारी और दो निजी अस्पतालों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू किया जा रहा है। फिलहाल अस्पतालों के चयन को लेकर विचार विर्मश किया जा रहा है। इसका लक्ष्य स्वास्थ्य संबंधी क्लेम की जानकारी के आदान-प्रदान को अधिक व्यवस्थित और इंटरऑपरेबल बनाने तथा क्लेम के निस्तारण की प्रक्रिया को आसान करने का है। इसके साथ ही ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (टीएमएस) के माध्यम से एआई आधारित क्लेम जांच की व्यवस्था भी प्रदर्शित की गई। पवेलियन में प्रदेश के डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र को भी प्रदर्शित किया गया है। इसमें लाभार्थी डेटाबेस मैनेजमेंट पोर्टल, आयुष्मान सारथी ऐप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फीडबैक और शिकायत निवारण व्यवस्था तथा डिजिटल क्लेम इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। इन तकनीकों के जरिए लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच देने और सेवा वितरण को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। 9 सितंबर तक बनाए गए 6 करोड़ आयुष्मान कार्ड साचीज की सीईओ ने बताया कि 9 सितंबर तक प्रदेश में छह करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। वहीं 2.13 करोड़ से अधिक परिवारों को आयुष्मान भारत और प्रदेश की स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में लाया गया है। 2 अगस्त तक प्रदेश में कुल 6,562 अस्पताल योजना से जुड़े। इनमें 2910 सरकारी और 3652 निजी अस्पताल शामिल हैं। 31 अगस्त तक योजना के तहत एक करोड़ से अधिक उपचार उपलब्ध कराए जा चुके हैं। वहीं साचीज द्वारा पवेलियन में जीएस युनिवर्सिटी, एरा युनिवर्सिटी, लखनऊ कैंसर इंस्टीट्यूट और यशोदा मेडिसिटी आदि संस्थानों के जरिये स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की क्षमताओं को प्रदर्शित किया गया। इनमें सुपर स्पेशियलिटी इलाज, एआई आधारित मॉनिटरिंग, कनेक्टेड हेल्थकेयर, कैंसर स्क्रीनिंग, एडवांस्ड ऑन्कोलॉजी, रोबोटिक सर्जरी, डिजिटल हेल्थ और मेडिकल एजुकेशन से जुड़ी तकनीकों को शामिल किया गया।

राजनीतिक स्वार्थ के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने की साजिश कर रही कांग्रेसः मुख्यमंत्री

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों को खूब खरी-खरी सुनाई। अपने सरकारी आवास पर रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह लोग भारत की संवैधानिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने, राजनीतिक स्वार्थ के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने की हर साजिश का हिस्सा रहे हैं। सीएम ने कहा कि देश का मुख्य विपक्षी दल व यूपीए गठबंधन से जुड़े अन्य दलों की हरकतें-बयानबाजी गैरजिम्मेदाराना हैं व लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचाने जैसी हैं। इन्होंने एसआईआर को लेकर भ्रम फैलाया है। एसआईआर पहली बार नहीं हुआ है। देश में इससे पहले वर्ष 1952, 1957, 1961, 1965-66, 2003 समेत अनेक बार एसआईआर हुआ है। कांग्रेस व विपक्षी दलों की हायतौबा दुर्भाग्यपूर्ण मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार की एसआईआर की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस, सपा, राजद समेत अन्य दलों ने जो हायतौबा मचाई है, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। देश में सर्वाधिक समय तक शासन करने वाली कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा कर रही है। उन्होंने तंज किया कि सपा, कांग्रेस, राजद आदि विपक्षी दल यदि चुनाव जीतें तो इनका पुरुषार्थ है परंतु भ्रष्टाचार, आर्थिक कदाचार, कुनीति, अराजकतापूर्ण कार्यों के कारण यदि जनता इन्हें खारिज करे तो इसके लिए चुनाव आयोग और ईवीएम दोषी है। इन दलों को अपने बचकाने बयानों को लेकर चिंतन व आत्मावलोकन करना चाहिए। राहुल गांधी ने न्यायपालिका की निष्पक्षता पर कैंब्रिज में उठाया था सवाल मुख्यमंत्री ने कहा कि इन लोगों द्वारा हर संवैधानिक संस्था को लगातार कटघरे में खड़ा किया जाता है। यह लोग चुनाव आयोग पर लगातार हमलावर हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कैंब्रिज में भारत की न्यायपालिका की निष्पक्षता पर प्रश्न खड़ा किया था। 2019 में कैग ने राफेल के मुद्दे पर अपना आब्जर्वेशन दिया था, इस पर भी कांग्रेस ने सवाल खड़े किए थे। ईवीएम से हुए चुनाव में केंद्र व कई राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनी, उस ईवीएम को ब्लैक बॉक्स कहकर भारत की चुनाव प्रणाली व दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र पर सवाल खड़ा करना दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस का संवैधानिक व लोकतांत्रिक मूल्यों पर विश्वास नहीं मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि इनका संवैधानिक व लोकतांत्रिक मूल्यों पर विश्वास नहीं है। 25 जून 1975 को कांग्रेस ने जब देश के संविधान का गला घोंटने का पाप किया था, तब उनके नेतृत्व की सरकारों ने विपक्षी दलों की चुनी गई तमाम सरकारों को अनैतिक तरीके से गिराने का पाप किया था। अपनी भ्रष्ट कार्यप्रणाली, आर्थिक कदाचार के कारण देश की आंतरिक-वाह्य सुरक्षा के साथ लगातार खिलवाड़ किया। बालाकोट की एयर स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के बहादुर जवानों के शौर्य-पराक्रम पर इनके द्वारा सवाल खड़ा करना देशभक्ति नहीं है। वर्तमान में ऐसी ही गैरजिम्मेदाराना हरकतें कांग्रेस व उनके सहयोगी दल कर रहे हैं। गैरजिम्मेदाराना हरकतों को कंट्रोल करे कांग्रेस मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईआर के बारे में पहले से ही निर्देश दिए गए थे कि छूटे हुए मतदाताओं को फॉर्म भरने की पूरी छूट है। फॉर्म-6 को लेकर उच्चतम न्यायालय ने चुनाव आयोग की कार्रवाई को उचित ठहराया, फिर भी चुनाव आयोग, मुख्य निर्वाचन आयुक्त व हर संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करके भारत की बदनामी कराना और सबसे बड़े लोकतंत्र को कमजोर करने की चेष्टा करने वाली कांग्रेस व उनके सहयोगी दलों का यह कृत्य अत्यंत हैरान करने वाला है। कांग्रेस अपनी गैरजिम्मेदाराना हरकतों को कंट्रोल करे। लोकतंत्र में हिंसा, तोड़फोड़ व दुष्प्रचार के लिए कोई जगह नहीं है। कांग्रेस व उसके सहयोगी दल जनता से मांगें माफी सीएम ने कहाकि तीनों चुनाव आयुक्त ने मीडिया के सामने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, छूटे मतदाताओं व फॉर्म-6 को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। अब कोई प्रश्न खड़े नहीं होते, लेकिन कांग्रेस, सपा व सहयोगी दलों द्वारा बाल की खाल उधेड़ने जैसी स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। लोकतांत्रिक मूल्यों व संस्थाओं को कमजोर करने की साजिश हो रही है। भारत ने हर वयस्क मतदाता को पहले दिन से जाति, क्षेत्र, भाषा, लिंग समेत बिना भेदभाव मतदान करने की स्वतंत्रता और चुनाव के एक दिन पहले तक मतदाता सूची में नाम बढ़ाने का अधिकार दिया है। पूरी पारदर्शी प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न उठाना लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने जैसा है। कांग्रेस व सहयोगी दलों को अपने कृत्य के लिए आमजन व देश की संवैधानिक संस्थाओं से माफी मांगनी चाहिए।