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ओबीसी आरक्षण के लिए बनेगा समर्पित आयोग, पंचायत चुनाव में अब वैज्ञानिक तरीके से तय होगा कोटा

लखनऊ उत्तर प्रदेश पंचायत चुनावों को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। राज्य में पहली बार ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का आरक्षण 'ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूले' (Triple Test Formula) के तहत तय किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा एक 'समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' का गठन किया जा रहा है। सोमवार को कैबिनेट ने आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। 2021 के पंचायत चुनावों में केवल रैपिड सर्वे के आधार पर ही आरक्षण की सीटें तय कर दी गई थीं, लेकिन इस बार प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक, अनुभवजन्य और विधिक होगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2023 के नगर निकाय चुनावों में पहली बार इस फॉर्मूले को आजमाया था, और अब इसे पंचायत चुनावों में भी पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। क्या है ‘ट्रिपल टेस्ट फार्मूला’ ट्रिपल टेस्ट सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित किया गया एक कड़ा विधिक पैमाना है। शीर्ष अदालत ने पहली बार साल 2010 में 'के. कृष्णमूर्ति बनाम भारत संघ' मामले में और बाद में साल 2021 में 'विकास किशनराव गवली बनाम महाराष्ट्र राज्य' मामले में इस फॉर्मूले को स्थानीय निकाय चुनावों के लिए अनिवार्य किया था। इसके तहत राज्य सरकार को आरक्षण लागू करने से पहले तीन मुख्य शर्तों (तीन टेस्ट) को अनिवार्य रूप से पार करना होता है। 1. पहला टेस्ट: समर्पित आयोग का गठन इसके तहत राज्य सरकार को एक विशेष और समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन करना होता है। इस आयोग का मुख्य काम स्थानीय निकायों में पिछड़ेपन की प्रकृति, प्रभाव और उसकी स्थिति की समकालीन व गहन अनुभवजन्य (Empirical) जांच और अध्ययन करना है। 2. दूसरा टेस्ट: आरक्षण का सटीक अनुपात तय करना आयोग द्वारा जुटाए गए जमीनी और अनुभवजन्य आंकड़ों (Empirical Data) के आधार पर ही स्थानीय निकायवार (Local Body-wise) ओबीसी वर्ग के लिए सीटों के आरक्षण का सटीक प्रतिशत तय किया जाना चाहिए। अदालत के नियमों के मुताबिक, यह आरक्षण बिना किसी वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन के नहीं दिया जा सकता। 3. तीसरा टेस्ट: 50% की अधिकतम सीमा यह इस फॉर्मूले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके तहत यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि किसी भी स्थानीय निकाय (जैसे कोई ग्राम पंचायत या जिला पंचायत) में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को मिलाकर दिया जाने वाला कुल आरक्षण किसी भी परिस्थिति में कुल सीटों के 50% से अधिक न हो। आखिर क्यों पड़ी इस कड़े फॉर्मूले की जरूरत? सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि नौकरियों और शिक्षा में मिलने वाला आरक्षण (संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के तहत) और राजनीति या स्थानीय निकाय चुनावों में मिलने वाला प्रतिनिधित्व (अनुच्छेद 243D और 243T के तहत) दोनों बिल्कुल अलग चीजें हैं। राजनीतिक पिछड़ेपन को साबित करने के लिए सरकार के पास पुख्ता और समकालीन आंकड़े होने जरूरी हैं। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि आरक्षण का वास्तविक लाभ धरातल पर मौजूद जरूरतमंदों तक पहुंचे और पूरी चुनावी प्रक्रिया संवैधानिक रूप से वैध रहे नियम यह भी है कि यदि कोई राज्य सरकार इन तीनों शर्तों (ट्रिपल टेस्ट) को पूरा किए बिना या आयोग की रिपोर्ट के बिना चुनाव कराती है, तो उन ओबीसी सीटों को 'सामान्य श्रेणी' (General Category) की सीट मानकर ही चुनाव कराना होगा। यही वजह है कि यूपी सरकार अब पूरी विधिक तैयारी के साथ कदम आगे बढ़ा रही है। जून के पहले हफ्ते तक हो जाएगी आयोग में नियुक्तियां शासन स्तर से मिली जानकारी के अनुसार, समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल 6 महीने का तय किया गया है। आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया इस महीने (मई) के अंत तक या जून के प्रथम सप्ताह में पूरी होने की उम्मीद है। यह आयोग जमीनी स्तर पर जाकर पिछड़पेपन की प्रकृति, उसके प्रभावों की समकालीन व सतत जांच करेगा। जिन क्षेत्रों में पिछड़ा वर्ग के सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, वहां नए सिरे से सर्वे कराया जाएगा और उसी के आधार पर आरक्षण की रूपरेखा तैयार होगी।

अमरनाथ यात्रा से पहले बड़ी राहत, यूपी-बिहार समेत कई राज्यों के यात्रियों को फायदा

लखनऊ यूपी-बिहार, उत्तराखंड से जम्मू, कटरा और अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए राहत भरी खबर है। रावी नदी पर क्षतिग्रस्त हुए रेलवे पुल का मरम्मत कार्य रिकॉर्ड आठ माह में पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही करीब नौ महीने से रद चल रही जम्मू और कटरा रूट की ट्रेनों के दोबारा संचालन का रास्ता साफ हो गया है। 26 अगस्त 2025 को आई भीषण बाढ़ के चलते रावी नदी पर बने रेलवे पुल को भारी नुकसान पहुंचा था। पुल की स्थिति को देखते हुए रेलवे ने सुरक्षा कारणों से जम्मू और कटरा जाने वाली करीब 20 ट्रेनों का संचालन रोक दिया था। पुल की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर कराया गया। करीब आठ महीने तक लगातार चले निर्माण और तकनीकी परीक्षण के बाद पुल को पूरी तरह सुरक्षित घोषित कर दिया गया है। इसके बाद रेलवे ने चरणबद्ध तरीके से ट्रेनों के संचालन की तैयारी शुरू कर दी है। फिलहाल जम्मू और कटरा रूट की कई प्रमुख ट्रेनें अस्थायी रूप से रद चल रही हैं। ट्रेन संख्या 12207 काठगोदाम-जम्मूतवी एक्सप्रेस दो जून तक और 12208 जम्मूतवी-काठगोदाम एक्सप्रेस 31 मई तक निरस्त रहेगी। इसी तरह 14611 गाजीपुर सिटी-श्री माता वैष्णोदेवी कटरा एक्सप्रेस 29 मई तक तथा 14612 श्री माता वैष्णोदेवी कटरा-गाजीपुर सिटी एक्सप्रेस 28 मई तक रद है। वहीं, 22431 सबदरगंज-शहीद कैप्टन तुषार महाजन एक्सप्रेस 13 जून और 22432 शहीद कैप्टन तुषार महाजन-सबदरगंज एक्सप्रेस 14 जून तक निरस्त रहेगी। रेलवे सूत्रों का कहना है कि पुल की मरम्मत पूरी होने के बाद जल्द इन ट्रेनों का नियमित संचालन शुरू कर दिया जाएगा। ट्रेनों के दोबारा चलने से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार समेत कई राज्यों के यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। गर्मी की छुट्टियों और आगामी अमरनाथ यात्रा को देखते हुए यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इन ट्रेनों को किया गया था रद ट्रेन नंबर, ट्रेन नाम रद तिथि 12207 काठगोदाम – जम्मू तवी गरीब रथ एक्सप्रेस काठगोदाम (KGM) जम्मू तवी (JAT) 02-06-2026 12208 जम्मू तवी – काठगोदाम गरीब रथ एक्सप्रेस जम्मू तवी (JAT) काठगोदाम (KGM) 31-05-2026 12209 कानपुर सेंट्रल – काठगोदाम गरीब रथ एक्सप्रेस कानपुर सेंट्रल (CNB) काठगोदाम (KGM) 02-06-2026 12210 काठगोदाम – कानपुर सेंट्रल गरीब रथ एक्सप्रेस काठगोदाम (KGM) कानपुर सेंट्रल (CNB) 01-06-2026 12265 दिल्ली सराय रोहिल्ला – जम्मू तवी दुरंतो एक्सप्रेस दिल्ली सराय रोहिल्ला (DEE) जम्मू तवी (JAT) 14-06-2026 12266 जम्मू तवी – दिल्ली सराय रोहिल्ला दुरंतो एक्सप्रेस जम्मू तवी (JAT) दिल्ली सराय रोहिल्ला (DEE) 15-06-2026 14503 कालका – श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा एक्सप्रेस कालका (KLK) श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा (SVDK) 12-06-2026 14504 श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा – कालका एक्सप्रेस श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा (SVDK) कालका (KLK) 13-06-2026 14611 गाजीपुर सिटी – श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा एक्सप्रेस गाजीपुर सिटी (GCT) श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा (SVDK) 29-05-2026 14612 श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा – गाजीपुर सिटी एक्सप्रेस श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा (SVDK) गाजीपुर सिटी (GCT) 28-05-2026 19107 भावनगर टर्मिनस – उधमपुर जन्मभूमि एक्सप्रेस भावनगर टर्मिनस (BVC) उधमपुर / म्याड़ता (UHP/MCTM) 31-05-2026 19108 उधमपुर – भावनगर टर्मिनस जन्मभूमि एक्सप्रेस उधमपुर / म्याड़ता (MCTM/UHP) भावनगर टर्मिनस (BVC) 01-06-2026 22401 दिल्ली सराय रोहिल्ला – उधमपुर एसी एक्सप्रेस दिल्ली सराय रोहिल्ला (DEE) उधमपुर / म्याड़ता (UHP/MCTM) 13-06-2026 22402 उधमपुर – दिल्ली सराय रोहिल्ला एसी एक्सप्रेस उधमपुर / म्याड़ता (MCTM/UHP) दिल्ली सराय रोहिल्ला (DEE) 14-06-2026 22431 प्रयागराज – उधमपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) उधमपुर / म्याड़ता (UHP/MCTM) 13-06-2026 22432 उधमपुर – प्रयागराज सुपरफास्ट एक्सप्रेस उधमपुर / म्याड़ता (MCTM/UHP) प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) 14-06-2026 22705 तिरुपति – जम्मू तवी हमसफर एक्सप्रेस तिरुपति (TPTY) जम्मू तवी (JAT) 26-05-2026 22706 जम्मू तवी – तिरुपति हमसफर एक्सप्रेस जम्मू तवी (JAT) तिरुपति (TPTY) 29-05-2026 26405* कामाख्या – वैष्णो देवी कटड़ा स्पेशल एक्सप्रेस कामाख्या (KYQ) श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा (SVDK) 15-06-2026 26406* वैष्णो देवी कटड़ा – कामाख्या स्पेशल एक्सप्रेस श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा (SVDK) कामाख्या (KYQ) 15-06-26

एमडीए की बड़ी सौगात: सहयाद्रि योजना में आधुनिक सुविधाओं के साथ आवासीय विकास

मुरादाबाद यूपी में मुरादाबाद महानगरवासियों के लिए अच्छी खबर है। दिल्ली रोड व कांठ रोड के बीचो बीच विकसित की जा रही सहयाद्रि योजना सोमवार को लांच कर दी गई। योजना के तहत 18 मई से 17 जून तक ऑनलाइन आवेदन किए जा सकेंगे। फेज-1 योजना में कुल 609 प्लॉट शामिल किए गए हैं। लाटरी के जरिए आवंटन किया जाएगा। सोमवार को योजना का मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह, डीएम राजेंद्र पैंसिया, एमडीए उपाध्यक्ष अनुभव सिंह व सचिव पंकज वर्मा के द्वारा विधिवत उद्घाटन किया गया। एमडीए अधिकारियों का कहना है कि बहुत जल्द योजना का फेस-2 भी लांच किया जाएगा। 54 एकड़ में विकसित की जाने वाली सहयाद्रि योजना में 609 प्लॉट के अलावा एक इंटर कालेज, एक जूनियर हाई स्कूल, दो नर्सरी स्कूल भी बनेंगे। एमडीए उपाध्यक्ष अनुभव सिंह ने बताया कि सहयाद्रि योजना के प्लॉटों का आवंटन लाटरी के द्वारा निकाला जाएगा। एक मुश्त धनराशि जमा करने पर चार से छह प्रतिशत की छूट भी पा सकते हैं। 24 पार्क किए जाएंगे विकसित, बनेगा हाईटेक एसटीपी प्लॉट मुरादाबाद। 26 साल बाद मात्र पांच माह के भीतर शहरवासियों को गोविंदपुरम और अब सहयाद्रि योजना की सौगात मिली है। इसका सीधा श्रेय मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह का कुशल नेतृत्व, विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अनुभव सिंह व सचिव एमडीए पंकज वर्मा के सराहनीय प्रयास को जाता है। यह होंगे सहयाद्रि योजना के आकर्षण – दो स्थानों पर स्पोर्ट्स सेंटरों का किया जाएगा निर्माण – योजना के दोनों भागों में विभिन्न आकार के आठ व्यवसायिक भूखंड शिक्षण संस्थानों के लिए रहेंगे। – योजना में आंगनबाड़ी केंद्र, पुलिस पोस्ट, पोस्ट ऑफिस, ई-सुविधा सेंटर, – बैंक, पब्लिक टॉयलेट, गारबेज कलेक्शन, इलेक्ट्रिक सब स्टेशन के साथ एसटीपी की भी व्यवस्था होगी। – पूरी योजना 350 करोड़ रुपये में विकसित की जाएगी, प्लॉटों की अनुमानित दर 39600 प्रति वर्ग मीटर निर्धारित की गई है। उपाध्यक्ष एमडीए, अनुभव सिंह ने कहा कि विकास प्राधिकरण का उद्देश्य केवल आवास उपलब्ध कराना नहीं है। बल्कि संपूर्ण आधुनिक शहरी जीवन शैली प्रदान करना है। सहयाद्रि योजना को एक आधुनिक एवं नियोजित आवासीय परिसर के रूप में विकसित किया जाएगा। मंडलायुक्त, आन्जनेय कुमार सिंह ने कहा कि सहयाद्रि योजना मंडल के नियोजित एवं संतुलित शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। वर्षों से लंबित इस क्षेत्र को दोबारा विकास की मुख्य धारा में लाना केवल एक परियोजना नहीं बल्कि संस्थागत प्रतिबद्धता एवं दूरदृष्टि का उदाहरण है। डेढ़ हजार रुपये निर्धारित किया गया आवेदन शुल्क एमडीए उपाध्यक्ष अनुभव सिंह ने बताया कि सहयाद्रि योजना में आवेदन करने के लिए 18 मई से 17 जून तक ऑन लाइन आवेदन कर सकेंगे। इच्छुक लोग जनहित पोर्टल तथा एमडीए की आधिकारिक वेबसाइट पर भी आवेदन कर सकेंगे। आवेदन शुल्क डेढ़ हजार निर्धारित किया गया है। विवाद के कारण 14 साल तक फंसी रही योजना करीब चौदह साल पहले ग्राम पंचायत सोनकपुर देहात के पास विभिन्न श्रेणियों के 434 आवास बनाकर योजना को लांच किया गया था। लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए बनाए गए रास्ते को लेकर कुछ किसानों से एमडीए का विवाद हो गया था। मामला कोर्ट में पहुंचने के बाद यह योजना लटक गई। वर्तमान में विभिन्न श्रेणियों के बने आवास जर्जर अवस्था में पहुंच गए हैं। बनाए गए आवासों को प्राधिकरण नए तरीके से सौंदर्यीकरण कराएगा। योजना में लागू होगा आरक्षण सहयाद्रि योजना में शासन की नीतियों के अनुसार आरक्षण भी लागू होगा। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांगजन, सरकारी सेवाओं के कर्मचारी, रिटायर्ड सैनिक एवं अन्य पात्र वर्गों के लिए आरक्षण उपलब्ध रहेगा।

अमरोहा में मुठभेड़ के बाद अपहृत युवक बरामद, दो बदमाश गोली लगने से घायल

अमरोहा यूपी के अमरोहा में रजबपुर पुलिस ने रविवार रात कालाखेड़ा के जंगल में हुई मुठभेड़ के बाद तीन शातिर बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इनके कब्जे से दो दिन पूर्व अगवा किए गए युवक दीपांशु को सकुशल बरामद किया है। घेराबंदी के दौरान बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग की, जिसकी जवाबी कार्रवाई में दो बदमाश पैर में गोली लगने से घायल हो गए। पकड़े गए बदमाशों ने युवक को असली नोटों के बदले तीन गुना नकली करेंसी देने के जाल में फंसाकर अगवा किया था और परिजनों से पांच लाख रुपये की फिरौती मांग रहे थे। एसपी लखन सिंह यादव ने बताया कि शनिवार शाम रजबपुर क्षेत्र से मुस्तफापुर नवादा निवासी दीपांशु का अपहरण हुआ था। रविवार रात पुलिस को आरोपियों की लोकेशन कालाखेड़ा के जंगल में मिली। पुलिस की जवाबी फायरिंग में विजेंद्र सिंह प्रजापति और धर्मेंद्र घायल हो गए, जबकि उनके तीसरे साथी योगेश पाल को घेराबंदी कर दबोच लिया गया। गिरोह का चौथा सदस्य झम्मन फरार है। पुलिस ने मौके से घटना में प्रयुक्त कार, दो तमंचे और कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस पूछताछ में अपहरण की जो वजह सामने आई वह चौंकाने वाली है। मुख्य आरोपी धर्मेंद्र ने दीपांशु को झांसा दिया था कि उसके पास ऐसे नकली नोट हैं जिन्हें बाजार में कोई नहीं पकड़ सकता। यकीन दिलाने के लिए उसने दीपांशु को 500-500 के तीन असली नोट दिए और उन्हें नकली बताया। शनिवार को धर्मेंद्र ने उसे एक लाख के बदले तीन लाख रुपये देने का लालच देकर रजबपुर बुलाया और वहीं से उसे अगवा कर लिया। अपहरण के बाद रात भर पी शराब दो गाड़ियां बदलकर घूमते रहे अपहरण के बाद बदमाश दीपांशु को लेकर रातभर घूमते रहे। पुलिस को चकमा देने के लिए उन्होंने रास्ते में गाड़ी बदली और बोलेरो की जगह फ्रोंक्स कार का इस्तेमाल किया। आरोपियों के पास नकदी खत्म हुई तो उन्होंने दीपांशु के गाजियाबाद निवासी दोस्त को डरा-धमकाकर पांच हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कराए। पुलिस के मुताबिक, बदमाशों ने इन पैसों से रातभर शराब पी और उसका भुगतान दीपांशु के ही मोबाइल से किया। फिलहाल पुलिस फरार चौथे आरोपी की तलाश में दबिश दे रही है। बरेली और बिजनौर के लोग बन चुके थे शिकार मुठभेड़ में गिरफ्तार तीन बदमाशों का फिलहाल कोई अपराधिक रिकार्ड सामने नहीं आया है हालांकि पूछताछ के दौरान तीनों ने इसके पहले बरेली व बिजनौर में दो-तीन युवाओं से एक-दो लाख रुपये की धोखाधड़ी करना स्वीकार किया है। पुलिस के मुताबिक नकली नोटों का लालच देकर ये गिरोह युवाओं को अपने जाल में फंसाता था। रकम लेने के बाद नकली नोट देने के लिए समय ले लेते थे और बाद में पूरी रकम हड़प कर लेते थे। क्योंकि, मामला नकली नोटों से जुड़ा होता था लिहाजा पीड़ित शिकायत लेकर पुलिस तक जाने में झिझकते थे। इसी बीच इन लोगों ने अब दिपांशु को अपना शिकार बनाने का प्रयास किया लेकिन उसने एक लाख रुपये देने से पहले तीन लाख रुपये मांग लिए। इसी जिद पर बात बिगड़ गई। करीब 15 मिनट तक चली बहस के बाद बोलेरो सवार लोगों ने पैसे हड़पने के लिए दिपांशु को अगवा कर लिया। बताया जा रहा है कि फरार आरोपी झम्मन गाजियाबाद में ठेकेदारी करता है। इस काम को अंजाम देने के लिए धर्मेंद्र ने उसकी बोलेरो ली थी लेकिन दिपांशु के अपहरण के बाद जब काफी देर तक फिरौती मिलने की बात नहीं बनी तो झम्मन भांप गया कि पुलिस उनके पीछे पड़ चुकी है लिहाजा मां की तबियत खराब होने का बहाना किया और अपनी बोलेरो ले गया।

‘डॉक्टर’ बनकर चला रहा था फर्जीवाड़ा का धंधा, 12वीं पास आरोपी गिरफ्तार

कानपूर उत्तर प्रदेश के कानपुर में फर्जी मार्कशीट और सर्टिफिकेट तैयार करने वाले बड़े नेटवर्क का खुलासा होने के बाद जांच में एक के बाद एक चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं. फरवरी में पुलिस ने शहर में फर्जी मार्कशीट तैयार करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया था. अब इसी मामले की जांच के दौरान पुलिस ने ऐसे सरगना को गिरफ्तार किया है, जो हैदराबाद से बैठकर बड़े पैमाने पर इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था. 12वीं पास था 'डॉक्टर मनीष कुमार' पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान मनीष कुमार के रूप में हुई है, जो खुद को 'डॉक्टर मनीष कुमार' बताता था, जबकि जांच में सामने आया कि उसकी शैक्षणिक योग्यता केवल 12वीं तक है. आरोप है कि वह 'ग्लोबल बुक ऑफ एक्सीलेंस अवॉर्ड यूके लंदन' नाम से देश के अलग-अलग शहरों में कार्यक्रम आयोजित कर खुद की अलग पहचान बना रहा था. वह मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों में कई कार्यक्रम कर चुका था, जहां समाजसेवियों और अन्य लोगों को सम्मानित करने के नाम पर अपनी पहुंच और प्रभाव बढ़ा रहा था. फर्जी मार्कशीट गिरोह से संपर्क पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के मुताबिक, मनीष मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला था. बाद में वह बिहार में रहा और फिर हैदराबाद जाकर कंपनी और कॉल सेंटर संचालित करने लगा. जांच में पता चला कि उसका संपर्क कानपुर में पकड़े गए फर्जी मार्कशीट गिरोह से था. पुलिस के अनुसार, मनीष ने 80 से अधिक फर्जी मार्कशीट और सर्टिफिकेट तैयार कर लोगों तक पहुंचाए थे. बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क के जरिए दस्तावेज तैयार करने के बदले 80 से 90 हजार रुपये तक वसूले जाते थे. पुलिस का दावा है कि यह पूरा काम व्हाट्सएप के माध्यम से संचालित किया जाता था, जहां लोगों से डिटेल लेकर नकली दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते थे. देश के कई राज्यों तक फैला नेटवर्क जांच में यह भी सामने आया कि उन्नाव में अर्जुन यादव नाम के युवक को फ्रेंचाइजी दी गई थी, जो कोचिंग सेंटर संचालित करता था. पुलिस ने मनीष कुमार और अर्जुन यादव को गिरफ्तार कर लिया है. पूछताछ के दौरान कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं. पुलिस का मानना है कि इस गिरोह का नेटवर्क देश के कई राज्यों तक फैला हुआ था और जांच अभी जारी है.

पंचायत चुनाव से पहले OBC आरक्षण पर होगा ट्रिपल टेस्ट, आयोग गठन की तैयारी तेज

लखनऊ यूपी में पंचायत चुनाव समय पर न होने से ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो जाएगा। ऐसे में प्रशासक समिति के माध्यम से ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। पंचायती राज विभाग की ओर से शासन को प्रशासक समिति के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों को ही बागडोर सौंपने का प्रस्ताव भेजा गया है। ग्राम प्रधान के साथ ही ब्लॉक प्रमुख व जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल भी प्रशासक समिति के माध्यम से बढ़ाया जाएगा। प्रधानों और अध्यक्षों कार्यकाल बढ़ाकर भाजपा सरकार की कोशिश उनकी हमदर्दी हासिल करने की है। माना जा रहा है कि अब पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद ही होंगे। ऐसे में कार्यकाल बढ़ाए गए प्रधान और अध्यक्ष विधानसभा चुनाव में भाजपा के काम आ सकते हैं। हालांकि प्रधानी की तैयारी में लगे लोगों को इस फैसले से झटका भी लगेगा। ऐसे में यह लोग नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। पहली बार ट्रिपल टेस्ट से ओबीसी आरक्षण होगा तय वहीं, पंचायत चुनावों में पहली बार समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठित कर ट्रिपल टेस्ट के आधार पर ओबीसी का आरक्षण तय किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वर्ष 2023 में नगर निकाय चुनावों में पहली बार इसे लागू कर आयोग गठित किया गया था। वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव में रैपिड सर्वे से आरक्षण तय किया गया था। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल छह महीने का तय किया गया है। अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया इस महीने के अंत तक या जून के प्रथम सप्ताह में होने की उम्मीद है। यह आयोग पिछड़नेपन की प्रकृति व प्रभावों की समकालीन, सतत व अनुभवजन्य जांच और अध्ययन, पिछड़ा वर्ग के आंकड़े न होने पर सर्वे और फिर आरक्षण तय करेगा। वर्ष 2021 में पंचायत चुनाव रैपिड सर्वे से हुआ था और वर्ष 2015 के ओबीसी आंकड़े भी रखे गए थे। क्योंकि उत्तराखंड, मध्य प्रदेश व राजस्थान की तर्ज पर यूपी में भी पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने की मांग जोर-शोर से उठाई जा रही है। वर्ष 2021 में पंचायत चुनाव चार चरणों में अप्रैल-मई में हुए थे। दूसरी ओर अब राज्य निर्वाचन आयोग भी अपना काम तेजी से करेगा। लगातार पांचवीं बार अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तारीख बढ़ाकर 10 जून की गई है। अब 10 जून को पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची जारी होने की उम्मीदें हैं। विस चुनाव से पहले पंचायत चुनाव की संभावना कम विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव होना आसान नहीं होगा। क्योंकि समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल जून से अगर शुरू हुआ तो यह नवंबर तक रहेगा। वहीं आयोग ने रिपोर्ट देने में समय लगाया तो शासन इसका कार्यकाल बढ़ा सकता है। फिलहाल, सत्तापक्ष ही नहीं विपक्षी दल भी पंचायत चुनाव समय पर कराए जाने को लेकर शांत हैं। ऐसे में ज्यादा उम्मीदें विधानसभा चुनाव के बाद हों। मामला न्यायालय में विचाराधीन है, ऐसे में वहां से जो दिशा-निर्देश मिलेंगे उसका सरकार पालन करेगी।

कैंसर इलाज में उम्मीद की नई किरण, IIT प्रोफेसर बुशरा अतीक का अहम रिसर्च

कानपुर  आईआईटी के बायोलाजिकल साइंस और बायोइंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर बुशरा अतीक और उनकी शोध टीम को कैंसर अनुसंधान में बड़ी कामयाबी मिली है। प्रो. अतीक ने कोलोरेक्टल कैंसर (आंत का कैंसर) को शरीर में तेजी से फैलाने वाले और इसके इलाज को बेअसर करने वाले एक खास प्रोटीन डीकेसी -1 की पहचान की है। चिकित्सा जगत में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही यह खोज प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल 'नेचर कम्युनिकेशंस' ने 18 मई को ही प्रकाशित की है। इस खोज से भविष्य में आंत के कैंसर का अधिक सटीक और प्रभावी इलाज संभव हो सकेगा। प्रो. बुशरा अतीक के शोध के मुताबिक शरीर में डीकेसी-1 प्रोटीन का स्तर बढ़ने से कैंसर कोशिकाएं न सिर्फ बेहद आक्रामक हो जाती हैं, बल्कि उन पर दवाओं का असर भी खत्म होने लगता है। शोध के अनुसार यह प्रोटीन शरीर में स्फिंगोलिपिड नामक फैट के निर्माण की प्रक्रिया को बाधित करता है। स्फिंगोलिपिड आमतौर पर कोशिकाओं की बनावट और उनकी प्राकृतिक मृत्यु (अपोप्टोसिस) को नियंत्रित करते हैं। जब डीकेसी-1 का स्तर बढ़ता है तो शरीर में ऐसे लिपिड ज्यादा बनने लगते हैं जो कैंसर कोशिकाओं को सुरक्षा कवच देते हैं। यही वजह है कि कई गंभीर मरीजों में कीमोथेरेपी और अन्य दवाएं बेअसर हो जाती हैं। शोध अध्ययन में सामने आया है कि जिन मरीजों में इस प्रोटीन का स्तर ज्यादा था, उनमें कैंसर बेहद उन्नत (एडवांस्ड) स्टेज में पहुंच चुका था। इस आधार पर जब शोधकर्ताओं ने लैब के भीतर आरएनए इंटरफेरेंस तकनीक के जरिए जब डीकेसी-1 प्रोटीन के स्तर को कम किया तो इसके चौंकाने वाले और सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। ऐसा करने से कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने की रफ्तार काफी धीमी हो गई। कैंसर कोशिकाएं दवाओं और कीमोथेरेपी के प्रति अधिक संवेदनशील हो गईं, यानी उन पर दवाओं ने दोबारा काम करना शुरू कर दिया। प्रो. बुशरा अतीक के अनुसार कैंसर सिर्फ जीन या कोशिकाओं की खराबी नहीं है, बल्कि यह शरीर के मेटाबालिज्म (उपापचय) से भी गहराई से जुड़ा है। अब शोधकर्ता डीकेसी-1 और स्फिंगोलिपिड मेटाबालिज्म को टारगेट करने वाली नई दवाएं विकसित कर सकेंगे, जो कैंसर के मरीजों के लिए एक नई जीवनदायिनी साबित हो सकती हैं।  

सोशल मीडिया स्टंट बना मुसीबत, नदी के बीच ले गए थार; वायरल वीडियो पर बवाल

बिजनौर उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के कालागढ़ क्षेत्र से सोशल मीडिया की सनक का एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां कुछ युवकों ने इंटरनेट पर वायरल होने के लिए अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डाल दी. मामला रामगंगा नदी का बताया जा रहा है, जहां तेज बहाव और गहरे पानी के बीच थार गाड़ी उतारकर रील बनाई गई. इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।  वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि नदी के बीच तेज बहते पानी में एक थार गाड़ी खड़ी है और उसके आसपास कई युवक मौजूद हैं. बताया जा रहा है कि वहां मौजूद कुछ लोग नदी में नहाने आए थे, लेकिन रील बनाने की होड़ में माहौल अचानक खतरनाक बन गया. वीडियो देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि जरा सी चूक किसी बड़े हादसे को जन्म दे सकती थी।  स्थानीय लोगों के मुताबिक, हाल के दिनों में डैम और नदी किनारे रील बनाने का चलन तेजी से बढ़ा है. कई बार लोग जोखिम भरे स्टंट करते हुए नजर आते हैं, लेकिन इस बार मामला बेहद गंभीर माना जा रहा है. लोगों का कहना है कि कुछ मिनट की सोशल मीडिया प्रसिद्धि के लिए इस तरह जीवन से खिलवाड़ करना बेहद चिंताजनक है।  घटना सामने आने के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में भी हलचल बढ़ गई है. वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस संबंधित युवकों की पहचान में जुटी है. हालांकि जांच में सबसे बड़ी परेशानी यह आ रही है कि वीडियो में थार का नंबर स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा।  सूत्रों के अनुसार, यह गाड़ी उत्तराखंड के जसपुर क्षेत्र की बताई जा रही है. जानकारी मिली है कि दो नई थार खरीदने के बाद कुछ युवक उनकी रील बनाने के लिए रामगंगा नदी पहुंचे थे. बताया जा रहा है कि गाड़ियों का अभी रजिस्ट्रेशन भी नहीं हुआ था, इसलिए उन पर नंबर प्लेट नहीं लगी थी. फिलहाल पुलिस वाहन और उसके मालिकों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी और डैम जैसे संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई जाए ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही किसी बड़े हादसे की वजह न बने। 

वेटरनरी स्टूडेंट्स के लिए खुशखबरी, सरकार ने बढ़ाया इंटर्नशिप स्टाइपेंड

पशु चिकित्सा छात्रों का इंटर्नशिप भत्ता तीन गुना बढ़ा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में प्रदेश में अध्ययनरत पशु चिकित्सा के छात्रों के इंटर्नशिप भत्ते को 4,000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 12,000 रुपये प्रतिमाह किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के पशु चिकित्सा छात्रों को बड़ा आर्थिक सहारा मिलेगा और उनका मनोबल भी बढ़ेगा। दुग्ध विकास एवं पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश विशाल जनसंख्या, बड़ी पशुधन संख्या और विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र वाला राज्य है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पशुधन की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में पशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण, विभिन्न पशु महामारियों के नियंत्रण और उन्मूलन तथा उन्नत नस्लों के संवर्धन में पशु चिकित्सकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार उत्तर प्रदेश पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान, आचार्य नरेंद्र देव यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी तथा सरदार वल्लभभाई पटेल यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी में अध्ययनरत पशु चिकित्सा छात्रों को अब बढ़ा हुआ इंटर्नशिप भत्ता मिलेगा। सरकार के अनुसार वर्तमान में इन छात्रों को 4,000 रुपये प्रतिमाह इंटर्नशिप भत्ता दिया जा रहा था, जिसे अब बढ़ाकर 12,000 रुपये प्रतिमाह किया गया है। इस निर्णय से तीनों विश्वविद्यालयों में अनुमोदित 300 छात्रों को लाभ मिलेगा। पशुपालन मंत्री ने कहा कि हरियाणा, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में अधिक इंटर्नशिप भत्ता दिए जाने का अध्ययन करने के बाद यह फैसला लिया गया है। प्रस्ताव लागू होने पर सरकार पर लगभग 4.20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार आएगा, जिसकी व्यवस्था विश्वविद्यालयों को दिए जाने वाले शासकीय अनुदान के गैर-वेतन मद से की जाएगी। इससे छात्रों का मनोबल बढ़ेगा, शिक्षा के प्रति रुचि और कार्य के प्रति उत्साह बढ़ेगा तथा समानता के सिद्धांत को भी मजबूती मिलेगी। मंत्री धर्मपाल सिंह ने इसे “समानता के सिद्धांत” के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा: केंद्र सरकार ने 4800 नए EV चार्जिंग स्टेशन को दी मंजूरी

लखनऊ पेट्रोल-डीजल, सीएनजी के महंगे होते जाने के बीच इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) वालों के लिए गुड न्यूज है। सफर के दौरान बैटरी खत्म होने का उनका तनाव कम करने की दिशा में केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश समेत आठ राज्यों में 4800 नए ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाने की मंजूरी दे दी है। ये नए चार्जिंग स्टेशन हाईवे, एक्सप्रेसवे, पेट्रोल पंप और सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जाएंगे। उत्तर प्रदेश को केंद्र सरकार ने 714 चार्जिंग स्टेशन दिया है और इसके लिए बजट भी जारी कर दिया गया है। इन्हें लगाने का काम अगले छह महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशनों के निर्माण के लिए पहले चरण में 500 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके साथ ही केंद्र ने अगले चरण के लिए भी राज्यों से प्रस्ताव मांगे हैं। यूपी में पहले से मौजूद चार्जिंग स्टेशन के जाल को इस चरण के पूरा होने के बाद बढ़ती मांग और लंबे सफर की जरूरतों के लिए हिसाब से मजबूती मिलेगी। केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने के साथ ही वाहनों के होने वाले प्रदूषण में कमी लाने के लिए इलेक्ट्रानिक वेहकिल (EV) को बढ़ावा देने की लगातार कोशिश कर रही है। लेकिन इस बदलाव में रेंज एंजाइटी यानी इलेक्ट्रानिक व्हीकल में सफर करने वालों का वह डर एक बड़ी बाधा है, जो उन्हें गाड़ी की बैटरी खत्म होने और बीच रास्ते में फंस जाने की आशंका के चलते डराता है। अब जब ईरान-अमरीका-इजराइल युद्ध के चलते दुनिया एक नए तरह के संकट से जूझ रही है, सरकार ने एक बार फिर ईवी को बढ़ावा देने की नीति पर जोर दिया है। इस नीति के तहत रास्तों पर पर्याप्त चार्जिंग पॉइंट की व्यवस्था करने की कोशिश प्रमुख है। इसी कोशिश के तहत केद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश समेत आठ राज्यों और पीएसयू को कुल 4800 नए चार्जिंग स्टेशन बनाने की मंजूरी दी। इनमें उत्तर प्रदेश में 714 चार्जिंग स्टेशन खुलेंगे। जिनके लिए 61.33 करोड़ रुपए स्वीकृ़त किए गए हैं। इसी तरह राजस्थान में 591 चार्जिंग स्टेशन खुलेंगे। 81.12 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। आंध्र प्रदेश में 577 चार्जिंग स्टेशन खुलेंगे। इनके लिए 39.79 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। गुजरात में 56 चार्जिंग स्टेशनों के लिए 1.74 करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत की गई है। केरल में 335 चार्जिंग स्टेशनों के लिए 63.12 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। तेलंगाना में 169 चार्जिंग स्टेशनों के लिए 10.24 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। सबसे ज्यादा चार्जिंग स्टेशन कर्नाटक में बनेंगे। यहां 1243 चार्जिंग स्टेशनों के लिए 123.26 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। तमिलनाडु में 498 चार्जिंग स्टेशनों के लिए 34.61 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इस तरह कुल 4800 नए चार्जिं