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81 वर्षीय सोनकुंवर के लिए आसान हुआ बेटे के नाम जमीन का हस्तांतरण

सेवा की कहानी 81 वर्षीय सोनकुंवर के लिए आसान हुआ बेटे के नाम जमीन का हस्तांतरण पारिवारिक दानपत्र पर पंजीयन शुल्क अब केवल 500 रुपये, परिवार को मिली 6,600 रुपये से अधिक की प्रत्यक्ष बचत सरल प्रक्रिया और डिजिटल सुविधाओं से बुजुर्गों को मिली सहूलियत, ‘सेवा संकल्प अभियान’ में साझा किया अनुभव रायपुर,  उम्र के इस पड़ाव में जब कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाना और लंबी प्रक्रियाओं से गुजरना बुजुर्गों के लिए कठिन हो सकता है, तब सरल और सुविधाजनक पंजीयन व्यवस्था उन्हें बड़ी राहत देती है। महासमुंद जिले के ग्राम बम्हनी निवासी 81 वर्षीय श्रीमती सोनकुंवर के लिए अपने पुत्र रवि राम पाल के नाम जमीन का दानपत्र कराना ऐसा ही अनुभव रहा। पारिवारिक संपत्ति के दानपत्र पर पंजीयन शुल्क केवल 500 रुपये होने से उनके परिवार को 6,600 रुपये से अधिक की प्रत्यक्ष आर्थिक बचत हुई। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद के दौरान उन्होंने पंजीयन प्रक्रिया से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में विभिन्न सुधार किए जा रहे हैं। इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों को कम समय में सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराना और संपत्ति से जुड़े कार्यों में अनावश्यक दौड़भाग को कम करना है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर यह भी जान रहा है कि इन सुविधाओं का उनके जीवन में किस तरह प्रभाव पड़ रहा है। मां के लिए कम हुई दौड़भाग, बेटे के नाम आसानी से हुआ संपत्ति हस्तांतरण श्रीमती सोनकुंवर ने बताया कि उम्रदराज लोगों के लिए संपत्ति से जुड़े कार्यों को पूरा करने में बार-बार कार्यालय जाना परेशानी का कारण बन सकता है। अपने पुत्र के नाम जमीन का दानपत्र कराने के दौरान उन्हें पंजीयन प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान लगी। प्रक्रिया सरल होने और शुल्क कम होने से उनके परिवार को आर्थिक राहत के साथ-साथ अनावश्यक दौड़भाग से भी सहूलियत मिली। उनके लिए यह सुविधा इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि पारिवारिक संपत्ति का हस्तांतरण किसी परिवार के लिए केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होता, बल्कि संपत्ति और परिवार के भविष्य से जुड़ा निर्णय भी होता है। सरल पंजीयन व्यवस्था ने इस प्रक्रिया को उनके लिए अधिक सहज बनाया। शुल्क 0.8 प्रतिशत से घटकर अब केवल 500 रुपये राज्य शासन द्वारा पारिवारिक दानपत्र, हकत्याग पत्र एवं बंटवारे के पंजीयन शुल्क में महत्वपूर्ण राहत दी गई है। इन दस्तावेजों पर पहले संपत्ति मूल्य के आधार पर 0.8 प्रतिशत पंजीयन शुल्क लिया जाता था, जिसे घटाकर अब केवल 500 रुपये निर्धारित किया गया है। श्रीमती सोनकुंवर के मामले में भी इसी शुल्क सुधार का लाभ मिला। पंजीयन शुल्क कम होने से उनके परिवार को 6,600 रुपये से अधिक की बचत हुई। कम खर्च में पारिवारिक संपत्ति का हस्तांतरण पूरा होना उनके लिए सीधे तौर पर आर्थिक राहत का कारण बना। तकनीक से आसान हो रही पंजीयन के बाद की प्रक्रिया पंजीयन विभाग द्वारा प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ तकनीक आधारित सुविधाओं का विस्तार भी किया जा रहा है। ऑनलाइन दस्तावेज तैयार करने, ऑनलाइन शुल्क भुगतान, आधार सत्यापन और डिजिटल माध्यम से दस्तावेज उपलब्ध कराने जैसी सुविधाओं से नागरिकों की सुविधा बढ़ी है। पंजीयन के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को भी ऑटोम्यूटेशन के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे नागरिकों को अलग से आवेदन करने और कार्यालय के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होती है। इस तरह पंजीयन से जुड़ी सेवाओं को एक सरल और सुविधाजनक प्रक्रिया के रूप में विकसित किया जा रहा है। शुल्क में राहत और सरल व्यवस्था ने बनाया अनुभव आसान श्रीमती सोनकुंवर और उनके पुत्र रवि राम पाल ने पारिवारिक संपत्ति के हस्तांतरण पर शुल्क में मिली राहत तथा पंजीयन प्रक्रिया में मिली सुविधा के लिए छत्तीसगढ़ शासन और पंजीयन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। 81 वर्षीय सोनकुंवर की यह कहानी बताती है कि जब शासन की नीति में कम शुल्क और सरल प्रक्रिया दोनों का समावेश होता है, तो उसका सीधा लाभ नागरिकों तक पहुंचता है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सामने आई यह कहानी इसी बदलाव की एक झलक है, जहां पारिवारिक संपत्ति के हस्तांतरण की प्रक्रिया कम खर्चीली, सुविधाजनक और बुजुर्ग नागरिकों के लिए अधिक सहज बनी।

दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में सेवा का संकल्प, शिविरों में मिली सुविधाओं की सौगात

दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में सेवा का संकल्प, शिविरों में मिली सुविधाओं की सौगात मूल्यांकन-चिन्हांकन से लेकर UDID, मेडिकल प्रमाण पत्र, पेंशन और सहायक उपकरण तक एक ही स्थान पर मिली सेवाएं रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार दिव्यांगजनों को आवश्यक सेवाएं, सुविधाएं और शासकीय योजनाओं का लाभ सहज एवं समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में दुर्ग और उत्तर बस्तर कांकेर जिले में आयोजित मूल्यांकन एवं चिन्हांकन शिविरों के माध्यम से दिव्यांगजनों को विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं से जोड़ा गया। दुर्ग जिले के जनपद पंचायत धमधा स्थित अंबेडकर भवन में आयोजित शिविर में दिव्यांगजनों का आवश्यक मूल्यांकन एवं चिन्हांकन किया गया। पात्र हितग्राहियों को शासन की कल्याणकारी योजनाओं एवं सहायक उपकरणों से लाभान्वित करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई। साथ ही विभागीय योजनाओं की जानकारी और आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया। इसी तरह उत्तर बस्तर कांकेर जिले में कोयलीबेड़ा, पखांजूर और बांदे जैसे दूरस्थ क्षेत्रों से पहुंचे दिव्यांगजनों को एक ही स्थान पर अनेक आवश्यक सेवाओं का लाभ मिला। शिविर में दिव्यांगजनों के तत्काल मेडिकल प्रमाण पत्र एवं यूडीआईडी (UDID) कार्ड बनाने की कार्यवाही की गई। राशन कार्ड और बस पास से संबंधित जानकारी एवं मार्गदर्शन देने के साथ पेंशन योजनाओं के लिए भी आवश्यक कार्यवाही की गई। शिविर में 6 दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, ट्राइसाइकिल एवं बैटरी संचालित ट्राइसाइकिल वितरित किए गए। आवश्यक सहायक उपकरण मिलने से दिव्यांगजनों को दैनिक जीवन में सुविधा और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का संबल मिला। सुविधाएं प्राप्त करने के बाद हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार जताया। सेवा की कहानी  इन शिविरों की खासियत यह रही कि दिव्यांगजनों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने के बजाय एक ही स्थान पर मूल्यांकन, चिन्हांकन, प्रमाण पत्र, यूडीआईडी कार्ड, पेंशन संबंधी कार्यवाही और सहायक उपकरण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। यह पहल दिव्यांगजनों तक योजनाओं की पहुंच आसान बनाने और उन्हें सम्मानपूर्वक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

बस्तर में सुरक्षा को लेकर मंथन, DGP अरुण देव गौतम पहुंचे जगदलपुर

जगदलपुर. जगदलपुर. नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण के बाद अब बस्तर में सुरक्षा व्यवस्था के अगले चरण पर पुलिस का फोकस है. इसी सिलसिले में पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम जगदलपुर पहुंचे. उन्होंने बस्तर संभाग के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की. बैठक में नक्सल मुक्त हुए इलाकों की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई. मैदानी अधिकारियों से अभियान और जमीनी हालात को लेकर फीडबैक लिया गया. अब चुनौती नक्सल गतिविधियों की वापसी रोकने के साथ सामान्य व्यवस्था को मजबूत करना है. बैठक में आगामी सुरक्षा रणनीति और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई. नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस की मौजूदगी और निगरानी को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया. साथ ही सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए पुलिस की आगामी कार्ययोजना पर मंथन किया गया. डीजीपी का यह दौरा नक्सल उन्मूलन के बाद बदले सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है. गांवों तक पहुंचे पुलिस, विकास कार्यों पर भी नजर डीजीपी ने पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को अंदरूनी इलाकों और गांवों में नियमित भ्रमण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि, जवान क्षेत्र में जाकर स्थानीय लोगों की समस्याओं को समझें और वहां चल रहे विकास कार्यों का भी अवलोकन करें। शासन-प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर जनता का विश्वास जीतने को पुलिसिंग की प्राथमिकता बताया। सरेंडर करने वालों को पुनर्वास नीति का पूरा लाभ बैठक में नक्सल पुनर्वास नीति के क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई। डीजीपी ने पात्र पुनर्वासितों को नीति के प्रावधानों के अनुसार अधिकतम लाभ दिलाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के निर्देश दिए। तकनीक के इस्तेमाल और पारदर्शिता पर जोर सभी जिलों में तकनीक आधारित पुलिसिंग को मजबूत करने के निर्देश दिए गए। पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ आधुनिक तकनीक के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया गया। ये अफसर भी रहे मौजूद बैठक में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद सिन्हा, आईजी बस्तर बीएन मीणा, आईजी सीआरपीएफ कबीब के, आईजी बीएसएफ संजय पंत, केंद्रीय सुरक्षा बलों के डीआईजी, बस्तर, कोंडागांव और सुकमा के एसपी समेत अन्य राजपत्रित अधिकारी मौजूद रहे।

दूरस्थ अंचलों में माताओं का सहारा बन रही प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना

दूरस्थ अंचलों में माताओं का सहारा बन रही प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना शीला कर्मा को मिली सहायता से बेहतर हुई जच्चा-बच्चा की देखभाल रायपुर प्रदेश के दूरस्थ अंचलों तक जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से लाभान्वित सुकमा की श्रीमती शीला कर्मा को गर्भावस्था के संवेदनशील समय में मिली आर्थिक सहायता ने उन्हें न केवल पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें पूरी करने में मदद की, बल्कि भविष्य के प्रति नया आत्मविश्वास भी दिया। नगर पालिका परिषद सुकमा के देवी चौक निवासी श्रीमती शीला कर्मा को योजना के तहत उनके बैंक खाते में सीधे 5 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। उन्होंने इस राशि का उपयोग पौष्टिक आहार, दवाइयों और अन्य आवश्यक सामग्री के लिए किया। समय पर मिली सहायता से गर्भावस्था के दौरान उनकी देखभाल बेहतर हुई और शिशु के स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में भी परिवार को सहारा मिला। श्रीमती कर्मा बताती हैं कि आर्थिक आवश्यकता के समय मिली यह सहायता उनके परिवार के लिए बड़ी राहत साबित हुई। आवश्यक खर्च के बाद बची राशि उन्होंने अपने नवजात शिशु के सुरक्षित भविष्य के लिए बैंक खाते में सहेजकर रखी है। उन्होंने कहा कि योजना ने मातृत्व के कठिन समय में परिवार के सदस्य की तरह उनका साथ दिया।श्रीमती कर्मा ने कहा कि दूरस्थ अंचलों तक योजना का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंचना शासन की संवेदनशीलता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत गर्भवती एवं धात्री माताओं को डीबीटी के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य माताओं के पोषण स्तर में सुधार के साथ गर्भावस्था और प्रसव के बाद होने वाले आर्थिक खर्च की आंशिक भरपाई करना है।

छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में आयोग का भ्रमण

छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में आयोग का भ्रमण चार जिले रायपुर, सक्ती, जशपुर और कांकेर में आश्रम छात्रावासों का स्थलीय निरीक्षण रायपुर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की टीम छत्तीसगढ़ में जनजातीय समुदायों से जुड़े विभिन्न प्रकरणों की जमीनी स्थिति जानने के लिए चार जिलों के दौरे पर है। 20 से 25 सितंबर तक चलने वाले इस दौरे में रायपुर, सक्ती, जशपुर और कांकेर में जनजातीय आवासीय छात्रावासों का आकस्मिक निरीक्षण, ग्राम भ्रमण और समुदाय के लोगों से सीधे संवाद किया जा रहा है। आयोग की टीम विशेष रूप से नागवंशी, संसारी उरांव, पहाड़ी कोरवा और दिहाड़ी कोरवा समुदायों से जुड़े क्षेत्रों में पहुंचकर उनकी समस्याओं एवं शिकायतों से संबंधित अभ्यावेदन प्राप्त करेगी। जशपुर में 22 और 23 सितंबर को विशेष रूप से जनजातीय ग्रामों का भ्रमण निर्धारित है। कांकेर में 24 सितंबर को जनजाति महिला जनप्रतिनिधियों के सशक्तिकरण को लेकर संवाद कार्यक्रम होगा। इसमें पंचायत एवं जिला स्तर की महिला जनप्रतिनिधियां शामिल होंगी। 25 सितंबर को रायपुर में आयोग में लंबित प्रकरणों को लेकर संबंधित अधिकारियों एवं प्राधिकारियों के साथ बैठक होगी। आयोग की ओर से संबंधित अधिकारियों को जांच दल को आवश्यक सहयोग, दस्तावेज उपलब्ध कराने और मौके पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

सिंचाई योजनाओं को रफ्तार, दुर्ग जिले में 40.85 करोड़ रुपये की मंजूरी

दुर्ग जिले के विभिन्न सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 40.85 करोड़ रुपये स्वीकृत रायपुर  छत्तीसगढ़-शासन जल संसाधन विभाग द्वारा दुर्ग जिले विभिन्न सिंचाई योजनाओं के कार्यों के लिए 40 करोड़ 85 लाख 2 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं।     जल संसाधन विभाग द्वारा स्वीकृत सिंचाई योजनाओं में दुर्ग जिले के सुरपा व्यपवर्तन योजना का जीर्णोद्धार एवं नहर प्रणाली का रिमाडलिंग एवं लाईनिंग कार्य के लिए दो करोड़ 23 लाख 56 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 121 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाइ्र सुविधा मिलेगी। इसी तरह से मोहंदी जलाशय का जीर्णोद्धार एवं नहरों का लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 96 लाख 55 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 100 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। तिरगा जलाशय का जीर्णोद्धार एवं लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 71 लाख 26 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 107 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। गनियारी जलाशय का जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 71 लाख 26 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 254 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। रिसाली उमरपोटी जलाशय का जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 97 लाख 94 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 162 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी।  दुर्ग जिले के निगम क्षेत्र के तालाबों में निस्तारी जल भरने हेतु चैनल निर्माण कार्य के लिए 4 करोड़ 93 लाख 56 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। शिवनाथ मण्डल कार्यालय दुर्ग का जीर्णोद्धार एवं नव निर्माण कार्य के लिए 4 करोड़ 96 लाख 24 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। कपसदा जलाशय का जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 57 लाख 8 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने पर 90 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। नंदौरी जलाशय का जीर्णोद्धार एवं नहरों के लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 77 लाख 57 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने पर 49 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी।

महादेव सट्टा मामले में बड़ी कार्रवाई, पिट्टी के 59.6 करोड़ के शेयर अटैच

रायपुर. महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ईजमाय ट्रिप के सह-संस्थापक निशांत पिट्टी के खिलाफ 10 सितंबर को आरोप-पत्र दाखिल किया है. ईडी की पांचवीं पूरक अभियोजन शिकायत में पिट्टी के करीब 59.6 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों को भी अस्थायी रूप से अटैच किया गया है. एजेंसी ने इन शेयरों को अपराध से अर्जित आय बताते हुए अदालत से इन्हें जब्त करने की अनुमति मांगी है. ईडी का आरोप है कि निशांत पिट्टी ने दुबई में रहने वाले स्काई एक्सचेंज के संचालक हरिशंकर टिबरेवाल के साथ मिलकर सट्टेबाजी से हासिल रकम को विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के जरिए भारतीय शेयर बाजार में लगाने और अलग-अलग स्तरों पर उसे घुमाने में मदद की. एजेंसी के मुताबिक, पिट्टी और टिबरेवाल के बीच कारोबारी संबंध थे. ईडी ने आरोप लगाया है कि ईजमाय ट्रिप प्लानर्स लिमिटेड के प्रवर्तकों की ओर से शेयरों की कीमत पहले से तय कर सौदे किए गए. एजेंसी के अनुसार, इन लेन-देन के जरिए कंपनी के शेयर भाव और बाजार पूंजीकरण को कृत्रिम रूप से बढ़ाने का प्रयास किया गया. दोनों पक्षों के कारोबारी संबंधों के समर्थन में ईडी ने 2022 में भारत में आयोजित एक क्रिकेट सीरीज की स्पॉन्सरशिप का भी उल्लेख किया है. इस सीरीज में ईजमाय ट्रिप और स्काई एक्सचेंज सह-प्रायोजक थे. हालांकि, कंपनी पहले महादेव सट्टा एप या किसी अन्य सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध होने से इनकार कर चुकी है. ईडी की इस पूरक आरोप-पत्र में ईबीआईएक्स समूह के अध्यक्ष विकास गर्ग समेत कुल 42 लोगों और कंपनियों को आरोपी बनाया गया है. एजेंसी का आरोप है कि विकास गर्ग और उनसे जुड़ी कंपनियों को हरिशंकर टिबरेवाल से संबंधित कंपनियों से 765.77 करोड़ रुपये प्राप्त हुए. ईडी के मुताबिक, इस रकम का इस्तेमाल अमेरिकी कंपनी ईबीआईएक्स इंक के अधिग्रहण में किया गया. ईडी के अनुसार, महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले में अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और करीब 1885 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई है. छह आरोप-पत्रों में कुल 116 लोगों को आरोपी बनाया गया है. मामले में ईडी और सीबीआई की जांच अभी जारी है. महादेव बुक के प्रमोटर और मूल रूप से भिलाई निवासी सौरभचंद्राकर को भारत लाने के प्रयास भी जारी हैं. बताया गया है कि पिछले तीन महीनों से उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन अब तक रास्ता साफ नहीं हो पाया है. सौरभ को ओमान पुलिस ने गिरफ्तार किया है और वह मस्कट के अल खौद डिटेंशन सेंटर में रखा गया है. उसे भारत लाने के लिए ईडी ने आवेदन किया है और विदेश मंत्रालय के माध्यम से भी प्रयास किए जा रहे हैं. पिछले डेढ़ साल में यह तीसरी बार है, जब सौरभ विदेश में पकड़ा गया है. इससे पहले रवि उप्पल और शुभम सोनी को भी भारत लाने के प्रयास किए गए थे. हालांकि, विदेश में पकड़े गए महादेव सट्टा मामले के किसी प्रमुख आरोपी को अब तक भारतीय एजेंसियां भारत नहीं ला सकी हैं. जांच एजेंसियों की लगातार कार्रवाई के बावजूद ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क सक्रिय होने की बात सामने आती रही है. एजेंसियों के आकलन के मुताबिक, सौरभचंद्राकर और उसके सहयोगियों से जुड़े अवैध सट्टा कारोबार का आकार 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है.

सब्जी कारोबारियों पर कार्रवाई की तैयारी, रायपुर में मौके से वापस लौटा दस्ता

रायपुर. भाठागांव पानी टंकी के पास रोड किनारे व फुटपाथ पर रोजाना सब्जी बेचने वालों को खदेड़ने गये निगम के दस्ते को विरोध के चलते अपने बुलडोजर के साथ वापस लौटना पड़ गया. यहां नगर निगम द्वारा लगभग 1 करोड़ 29 लाख रुपये की लागत से चबूतरे वाला सब्जी बाजार बनाया गया है. इस चबूतरे का आवंटन पूर्व में चिन्हित सब्जी बेचने वालों को लॉटरी सिस्टम से निगम मुख्यालय के बाजार विभाग ने कर दिया. आवंटन करने के बाद आसपास और नदी पार से सब्जी बेचने के लिए आने वाले ग्रामीण जो रोड किनारे पसरा बिछाकर दुकानदारी करते थे, उन्हें खदेड़ने निगम का दस्ता बुलडोजर व पुलिस के साथ पहुंच गया. इसका सब्जी बेचने वालों ने विरोध कर वापस लौटा दिया. पूर्व पार्षद सतनाम सिंग पनाग और छाया पार्षद ब्रम्हा सोनकर ने बताया कि चबूतरा आवंटन में जमकर अनियमितता बरती गई है. कई लोगों के वाजिब नाम को व्हाइटनर लगाकर मिटाने के बाद दूसरों का नाम डाला गया है. यह किसके दबाव में हुआ, यह भाठागांव के नागरिक जानना चाहते हैं. सतनाम सिंग पनाग ने बताया कि इस बाजार का निर्माण कांग्रेस के पूर्व कार्यकाल में हुआ था, क्योंकि इस बाजार में स्थानीय के साथ ही गांव के कृषक भी अपनी सब्जी बेचने आते थे. छाया पार्षद सोनकर ने बताया कि बाजार आवंटन में अलग-अलग नंबर दिया गया है. इन नंबरों के हिसाब से किसी को 8 तो किसी के लिए 6 फीट जगह की मार्किंग की गई है. वहीं छाया पार्षद ब्रम्हा ने कहा कि एक ही परिवार के तीन-तीन अथवा चार-चार सदस्यों को स्थान आवंटित कर देने से यहां के वास्तविक सब्जी बेचने वालों को जगह नहीं मिली. साथ ही वार्ड के बाहर के लोगों को भी स्थान दिए जाने की शिकायत सामने आई है. इसके लिए वोटर आईडी और आधार कार्ड के माध्यम से स्थानीय और बाहरी की पहचान निगम प्रशासन पहले करे, फिर चबूतरा व जगह आवंटित करे. इस मामले में पीड़ित सब्जी व्यापारी निगम आयुक्त से 22 सितंबर को सुबह 11 बजे मुलाकात के लिए जाएंगे.

बसों की छत पर सामान ढोने पर 49 स्लीपर बसों के चालान

बसों की छत पर सामान ढोने पर 49 स्लीपर बसों के चालान रायपुर यात्री बसों में छत पर सामान ढोने और अन्य नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ परिवहन विभाग ने कार्रवाई की। परिवहन उड़नदस्ता रायपुर ने अंतरराज्यीय बस स्टैंड भाठागांव समेत प्रमुख मार्गों पर सघन जांच अभियान चलाया। जांच के दौरान छत पर सामान ले जाने वाली 49 स्लीपर बसों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 2 लाख 64 हजार रुपए के चालान किए गए। अधिकारियों के मुताबिक बसों की छत पर सामान ढोना सड़क सुरक्षा मानकों के विपरीत है। इससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। अभियान के दौरान बसों के दस्तावेज, फिटनेस और परमिट की वैधता भी जांची गई। शासन द्वारा निर्धारित दर से अधिक किराया वसूलने, किराया सूची प्रदर्शित नहीं करने और अन्य नियमों का उल्लंघन करने वाले 111 वाहनों से 42 हजार 800 रुपए शास्ति वसूल की गई। इस तरह कुल 160 यात्री बसों पर 3 लाख 6 हजार 800 रुपए की चालानी कार्रवाई की गई। परिवहन विभाग के अनुसार कार्रवाई के बाद बस संचालकों को नियमों का पालन करने और वाहनों में आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं।

गणेश झांकी चल समारोह में बदलाव, रायपुर में सड़क के एक हिस्से पर ही होंगे स्वागत मंच

रायपुर. राजधानी रायपुर में 27 सितंबर की रात निकलने वाली गणेश झांकी के दौरान भीड़ और भगदड़ की स्थिति रोकने के लिए इस बार कई नई व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी. सड़क के केवल एक हिस्से में ही मंच लगाने की अनुमति होगी, जबकि दूसरा हिस्सा झांकियों की आवाजाही के लिए खाली रखा जाएगा. मंच का आकार भी निर्धारित किया जाएगा और बड़े मंच लगाने की अनुमति नहीं होगी. फिलहाल गणेश झांकी को पुराने रूट शारदा चौक, जयस्तंभ चौक, मालवीय रोड, कोतवाली और सदरबाजार से निकालने की तैयारी है. हालांकि, कुछ झांकी समितियों ने कोतवाली से सप्रे शाला रोड, बूढ़ातालाब होते हुए पुरानी बस्ती तक वैकल्पिक मार्ग का सुझाव दिया है. समितियों का कहना है कि सदरबाजार की सड़क संकरी है और दोनों ओर दुकानें व मकान होने के कारण भीड़ बढ़ने पर भगदड़ का खतरा बना रहता है. कई मकान जर्जर हालत में भी हैं. वहीं सप्रे शाला रोड अपेक्षाकृत चौड़ी है, लेकिन एक ओर तालाब होने के कारण वहां अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम करने होंगे. गणेश झांकी के रूट को लेकर पुलिस ने समितियों की बैठक बुलाई है. बैठक में दोनों मार्गों पर चर्चा और रायशुमारी के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा. विसर्जन के लिए जाने वाली गणेश प्रतिमाओं को शारदा चौक या गुरुनानक चौक से ही झांकी मार्ग में प्रवेश दिया जाएगा. पुरानी बस्ती, लाखेनगर, अश्वनी नगर और सुंदर नगर रोड से सीधे प्रवेश की अनुमति नहीं होगी. झांकियों के गुजरने के बाद जरूरत के मुताबिक बीच के रास्तों से प्रवेश दिया जा सकेगा या प्रतिमाओं को वैकल्पिक मार्ग से भेजा जाएगा. झांकी के दौरान निकालने और आतिशबाजी जैसे करतब पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे. स्वागत या डांस के लिए झांकी को बीच रास्ते में रोकने की अनुमति नहीं होगी. झांकी को धीमी गति से लगातार आगे बढ़ाना होगा, ताकि किसी एक स्थान पर भीड़ जमा न हो. झांकी में डीजे के इस्तेमाल पर भी पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी है. धुमाल, बैंड-बाजा और साउंड सिस्टम का इस्तेमाल अनुमति मिलने के बाद निर्धारित ध्वनि सीमा के भीतर ही किया जा सकेगा. गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए भी पुलिस-प्रशासन की अनुमति जरूरी होगी. फूहड़ गाने बजाने पर संबंधित झांकी समिति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. तात्यापारा चौक स्थित श्री भारतीय समाज समिति के कुशल गेड़ेकर ने कहा कि सदर बाजार से पिछले 100 वर्षों से अधिक समय से झांकी निकलती आ रही है और प्रशासन का हमेशा सहयोग मिलता रहा है. उन्होंने कहा कि किसी को नुकसान न हो, इसके लिए समिति प्रशासन के साथ है और तय गाइडलाइन के अनुसार ही झांकी निकाली जाएगी. गंजपारा स्थित श्रीश्री विनायक गणेशोत्सव समिति के अध्यक्ष लवी ठाकुर ने कहा कि कुछ दिन पहले सदर बाजार में एक बिल्डिंग गिर चुकी है और कई मकान जर्जर हालत में हैं. तेज डीजे साउंड से भी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. ऐसे में बूढ़ापारा की ओर से झांकी निकालना उचित रहेगा. उन्होंने कहा कि जान-माल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन के साथ बैठक कर आगे की रूपरेखा तय की जाएगी. सेंट्रल जोन डीसीपी तारकेश्वर पटेल ने झांकी के रूट को लेकर बताया कि सभी समितियों की बैठक बुलाई गई है. बैठक में रूट को लेकर चर्चा और रायशुमारी के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि झांकी के दौरान नशे और डीजे को लेकर पुलिस की सख्ती रहेगी.