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“अब नहीं सुनूंगा!” सांसद की डांट पर निरीक्षक का गुस्सा फूटा, किसानों के सामने छोड़ा माइक

कांकेर. सांसद भोजराज नाग का गुस्सा एक बार फिर चर्चा में है. गुस्से का शिकार बने मत्स्य विभाग के निरीक्षक ने किसानों के सामने जलील किए जाने पर बिना कोई जवाब दिए माइक छोड़कर निकल लिए, लेकिन इससे सांसद का पारा और चढ़ गया. अब जनप्रतिनिधि और सरकारी कर्मचारी के बीच का तकरार आगे चलकर क्या रुख लेता है, इस पर लोगों की निगाहें टिकी हुई है. दरअसल, कांकेर जिले के ग्राम दसपुर में आयोजित विकसित कृषि संकल्प अभियान कार्यक्रम के दौरान सांसद भोजराज नाग किसानों से बातचीत कर रहे थे, और उन्होंने सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर जानकारी ली. इस दौरान उन्होंने मत्स्य विभाग के निरीक्षक से पूछा कि क्या किसानों को विभागीय योजनाओं का लाभ मिल रहा है. निरीक्षक इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए, जिस पर सांसद नाराज़ हो गए. सांसद ने मंच से ही माइक के माध्यम से निरीक्षक को फटकार लगाते हुए कहा कि “किसानों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है, और आपको इसकी जानकारी तक नहीं है, यह गंभीर लापरवाही है. किसान दर-दर भटकने को मजबूर हैं”. सांसद की फटकार के बाद मत्स्य विभाग के निरीक्षक कार्यक्रम स्थल से माइक छोड़कर बिना जवाब दिए चले गए, जिससे सांसद और अधिक नाराज़ हो गए. गौरतलब है कि इस कार्यक्रम में मत्स्य विभाग के अन्य अधिकारी भी अनुपस्थित रहे, जिसे लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. विकसित कृषि संकल्प अभियान जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों की अनुपस्थिति और जानकारी का अभाव किसानों के हितों पर असर डाल सकता है. इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर विभागीय कार्यप्रणाली और किसानों को मिलने वाले लाभों को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

वन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी सुधारने के निर्देश

रायपुर मुख्य सचिव ने वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि कैम्पा मद के अंतर्गत वन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं जैसे- पुल-पुलियों, मार्गों और आवश्यक भवनों के निर्माण को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने विशेष रूप से नक्सल मुक्त हुए क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए, ताकि वहां शासन की पहुंच और विकास की गति बढ़ सके।             छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ प्रतिकात्मक वनरोपण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैम्पा) की नवमीं बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य रूप से वर्ष 2024-25 और 2025-26 के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई तथा आगामी भविष्य की योजनाओं पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। आगामी कार्ययोजना (2026-27) वन विभाग के अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2026-27 के लिए 713 करोड़ 73 लाख रुपये की वार्षिक कार्ययोजना को अनुमोदित कर भारत सरकार (पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय) को अंतिम स्वीकृति हेतु भेज दिया गया है। कैम्पा के प्रमुख कार्यक्षेत्र अधिकारियों ने बैठक में बताया कि कैम्पा मद का उपयोग निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्यों के लिए किया जा रहा है। सिंचित व असिंचित वृक्षारोपण और बांस वनों की पुनर्स्थापना किया जा रहा है। वनों के घनत्व में वृद्धि हेतु सिल्वीकल्चरल का कार्य किया जा रहा है। वन्यप्राणियों के रहवास में सुधार और भू-जल संरक्षण के प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश  मुख्य सचिव  विकासाशील ने आगामी मानसून को देखते हुए वन क्षेत्रों में चल रहे जरूरी कार्यों को बारिश शुरू होने से पहले शीघ्रता से पूर्ण करने की हिदायत दी है। कैम्पा वनीकरण, मृदा और जल संरक्षण के कार्यों को मानसून शुरू होने से पहले पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।  बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव मती ऋचा शर्मा, पीसीसीएफ  व्ही.निवास राव,  अरूण पांडे, प्रमुख सचिव (कृषि) मती शहला निगार, वित्त सचिव  मुकेश बंसल सहित राजस्व, आवास एवं पर्यावरण तथा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मतांतरण छोड़ 50 लोगों ने अपनाया हिंदू धर्म, तेंदुआ धाम में भावुक दृश्य

जांजगीर-चांपा शिवरीनारायण के समीप स्थित श्री राम मिलेंगे आश्रम तेंदुआ धाम में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा के दौरान सोमवार को जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज के सान्निध्य में एक विशेष कार्यक्रम में लगभग 50 लोगों ने सनातन संस्कृति के प्रति अपनी अटूट आस्था व्यक्त करते हुए पुनः घर वापसी का संकल्प लिया। इस आयोजन में अखिल भारतीय घर वापसी प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रहा, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण और अपनी जड़ों से पुनः जुड़ने का सशक्त प्रतीक बनकर सामने आया। सांस्कृतिक पुनर्जागरण और श्रद्धा का अद्भुत संगम कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा, विश्वास और सनातन परंपराओं के प्रति समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिला। उपस्थित लोगों ने भावुक माहौल में अपने पूर्वजों की संस्कृति को अपनाने और उसे आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। घर वापसी प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव और अन्य वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि सनातन संस्कृति केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समृद्ध और व्यापक परंपरा है, जो समाज को एकता, नैतिकता और सकारात्मक दिशा प्रदान करती है। 'शबरी की निष्ठा' रामकथा में जुटे दिग्गज ज्ञात हो कि श्री राम मिलेंगे आश्रम तेंदुआ धाम में जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज के सान्निध्य में 27 अप्रैल से 5 मई तक ‘शबरी की निष्ठा’ विषय पर नौ दिवसीय रामकथा का आयोजन किया गया है। इसी क्रम में सोमवार को सनातन संस्कृति से भटके हुए लोगों के लिए घर वापसी कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में डबरा मठ कोटमी सोनार के महंत सर्वेश्वर दास जी महाराज, समाजसेवी अंजू गबेल, आश्रम के संचालक डॉ. अशोक हरिवंश सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। क्षेत्र में नई चेतना और सामाजिक समरसता का संचार शिवरीनारायण क्षेत्र के ग्राम गोधना, कुरियारी, तुस्मा, कटौद सहित आसपास गांव के लोग बड़ी संख्या में मतांतरित हो चुके हैं। क्षेत्र के भोले-भाले लोगों को लालच देकर ईसाई बनाया गया है। रामकथा के दौरान हुए इस घर वापसी के आयोजन ने क्षेत्र में नई चेतना का संचार करते हुए सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकजुटता का संदेश दिया, जो उपस्थित जनसमूह के लिए प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।

बस्तर में इनोवेशन को मिलेगा बढ़ावा, महाकुंभ 1.0 से नई पहल – मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने जगदलपुर में शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित “इनोवेशन महाकुंभ 1.0” के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र में प्रतिभा और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल सही मंच, मार्गदर्शन और अवसर की है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से युवाओं को नवाचार और उद्यमिता के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म मिल रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने बस्तर के समग्र विकास के लिए तैयार रोडमैप का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें रोजगार, शिक्षा, स्टार्टअप और अधोसंरचना का विशेष ध्यान रखा गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि “नियद नेल्ला नार योजना” का विस्तार कर इसे “नियद नेल्ला नार 2.0” के रूप में 10 जिलों में लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को इनोवेशन हब बनाने के उद्देश्य से “नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-30” लागू की गई है। इस नीति के तहत युवाओं को आइडिया से लेकर व्यवसाय विस्तार तक हर स्तर पर सहायता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहायता जैसी सुविधाओं से स्टार्टअप को बढ़ावा मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि विकसित भारत 2047 के संकल्प को पूरा करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। विकसित छत्तीसगढ़ का मार्ग विकसित बस्तर से होकर जाता है। उन्होंने कहा कि बस्तर में आदिवासी कला, लघु वनोपज, जैविक कृषि, पर्यटन और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें तकनीक, ब्रांडिंग और ई-कॉमर्स से जोड़कर नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि बस्तर में पर्यटन के बढ़ने से होमस्टे, स्थानीय गाइड, हस्तशिल्प और वनोपज की मांग बढ़ेगी, जिससे गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने विश्वास जताया कि बस्तर का युवा उद्यमिता के माध्यम से विकसित बस्तर, विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा। कार्यक्रम में नवाचार करने वाले बेस्ट आइडिया और बेस्ट स्टार्टअप के विजयी प्रतिभागियों को  प्रोत्साहन राशि, प्रमाण पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि उद्यमिता और स्वरोजगार को अपनाकर युवा आगे बढ़ें, ताकि अपने घर-परिवार को खुशहाल बना सकें। उच्च शिक्षा मंत्री  वर्मा ने कहा कि इस इनोवेशन महाकुंभ के माध्यम से युवाओं को एक मंच मिला है, जिससे वे अपने नवाचार को आगे बढ़ाने के साथ ही आत्मनिर्भर बन सकेंगे। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि स्वयं का व्यवसाय या स्वरोजगार स्थापित कर नौकरी देने वाले बनें और अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनें। इस अवसर पर सांसद बस्तर  महेश कश्यप एवं विधायक जगदलपुर  किरण देव ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नवाचार के जरिये उद्यमिता एवं स्वरोजगार अपनाकर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में सहभागिता निभाने के लिए युवाओं से आह्वान किया। कार्यक्रम के आरंभ में शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर के कुलपति प्रोफेसर मनोज वास्तव ने इनोवेशन महाकुंभ आयोजन के उद्देश्य और विश्वविद्यालय की स्थापना सहित संस्थान के विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों एवं नवोन्मेषी प्रयासों के बारे में विस्तारपूर्वक अवगत कराया। इस अवसर पर विधायक चित्रकोट  विनायक गोयल, छत्तीसगढ़ ब्रेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष  निवास मद्दी, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष  रूपसिंह मंडावी, जिला पंचायत अध्यक्ष मती वेदवती कश्यप, महापौर  संजय पांडेय सहित अन्य  जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहे बीजापुर से राजमिस्त्री बने रमेश पासपुल, आत्मनिर्भरता की मिसाल

रायपुर  जनपद पंचायत बीजापुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत संतोषपुर, जो कभी लंबे समय तक नक्सल प्रभाव से प्रभावित रहा, आज बदलाव और विकास की नई पहचान बनता जा रहा है। ‘‘नियद नेल्लनार योजना‘‘ के शुरू होने के बाद गांव में बुनियादी सुविधाओं और रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस बदलाव की कहानी के केंद्र हैं संतोषपुर निवासी  रमेश पासपुल। कभी स्थायी रोजगार के अभाव में आर्थिक तंगी से जूझ रहे रमेश का जीवन आज पूरी तरह बदल चुका है। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच आय का कोई निश्चित साधन न होने से उनका भविष्य अनिश्चित नजर आता था। परिस्थितियां तब बदलीं जब  ‘‘नियद नेल्लनार योजना‘‘  के तहत उन्हें राजमिस्त्री (मेसन) का प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की बारीकियों, तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक कौशल में दक्षता हासिल की। यह प्रशिक्षण उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। प्रशिक्षण के बाद वित्तीय वर्ष 2024-25 में रमेश को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की स्वीकृति मिली। पहली किश्त प्राप्त होते ही उन्होंने अपने घर का निर्माण स्वयं शुरू किया और निर्धारित समय-सीमा में इसे पूरा कर लिया। उनके कार्य की गुणवत्ता देखकर गांव के अन्य हितग्राहियों ने भी अपने-अपने आवास निर्माण के लिए उन्हें बुलाने लगे, जिससे उनके लिए नियमित आय का साधन तैयार हो गया। आज रमेश पासपुल एक कुशल राजमिस्त्री के रूप में गांव में पहचान बना चुके हैं। वे न केवल आत्मनिर्भर बने, बल्कि अन्य ग्रामीणों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। उनकी बढ़ती मांग ने उनके जीवन में स्थिरता और खुशहाली ला दी है। रमेश की यह प्रेरक यात्रा इस बात का प्रमाण है कि सही दिशा में मिला प्रशिक्षण और अवसर किसी भी व्यक्ति के जीवन को नई दिशा दे सकता है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र से निकलकर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ना आसान नहीं था। लेकिन उन्होंने अपने परिश्रम और शासन की योजनाओं के सहयोग से इसे संभव कर दिखाया। यह कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन की सशक्त मिसाल है।

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से आय बढ़ाने के नए अवसरों की मिली जानकारी

रायपुर कृषि क्रांति अभियान जशपुर जिला प्रशासन द्वारा “आत्मा योजना” एवं “कृषि क्रांति अभियान” के तहत किसानों को आधुनिक और लाभकारी खेती की दिशा में प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में चयनित किसानों को रायपुर स्थित सेमीना एग्रो कंपनी में अध्ययन भ्रमण के लिए भेजा गया। इस भ्रमण का उद्देश्य किसानों को उच्च मूल्य वाली औषधीय एवं सुगंधित फसलों की वैज्ञानिक खेती से अवगत कराना और उन्हें कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के माध्यम से सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम के दौरान कंपनी के विशेषज्ञों ने मोरिंगा, पपीता, लेमनग्रास, पिपरमिंट, पचौली, अश्वगंधा, तुलसी और रोसेला जैसी फसलों की उन्नत तकनीक, लागत-लाभ विश्लेषण और बाजार संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही यह भी बताया गया कि इन फसलों की मांग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बढ़ रही है। उप संचालक कृषि जशपुर ने बताया कि किसानों को विशेष रूप से कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग मॉडल के बारे में समझाया गया, जिसमें कंपनियां पूर्व निर्धारित दर पर फसल की खरीद (बायबैक) करती हैं। इससे किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से राहत मिलती है और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित होता है। उन्होंने बताया कि इस पहल को आगामी खरीफ/मानसून सत्र 2026-27 की कार्ययोजना से जोड़ा गया है, जिसके तहत जिले में क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। लेमनग्रास, पाल्मारोसा, पचौली, यूकेलिप्टस सिट्रियोडोरा, हल्दी, अदरक, तुलसी, सतावर और सर्पगंधा जैसी फसलों को प्राथमिकता दी जाएगी। विकासखंड स्तर पर इच्छुक किसानों का चयन कर उनकी सहमति से जानकारी संकलित की जा रही है, ताकि उन्हें प्रशिक्षण, फील्ड विजिट और कंपनियों के साथ अनुबंधित खेती से जोड़ा जा सके। इसके साथ ही किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के माध्यम से अनुबंध और मूल्य संवर्धन गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि क्रांति अभियान के तहत यह पहल किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर व्यावसायिक और निर्यातोन्मुख कृषि की ओर प्रेरित कर रही है। इससे जिले में नवाचार को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों की आय में स्थायी वृद्धि की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण और अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम जारी रहेंगे, ताकि किसान आधुनिक तकनीकों और बाजार के अवसरों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें।

‘बकाया बिल से घबराने की जरूरत नहीं, समाधान योजना से मिलेगी राहत’ – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर प्रदेश के मुखिया  विष्णुदेव साय का 4 मई को सुदूर वनांचल ग्राम कमराखोल का दौरा आमजन के लिए राहत और विश्वास का संदेश लेकर आया। सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत आम पेड़ के नीचे आयोजित चौपाल में मुख्यमंत्री  साय ने ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए उनकी समस्याओं को आत्मीयता से सुना और मौके पर ही समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। यह दृश्य शासन और जनता के बीच विश्वास के मजबूत रिश्ते का जीवंत उदाहरण बन गया। बिजली बिल की चिंता पर मिला भरोसे का समाधान चौपाल के दौरान जब एक ग्रामीण ने बढ़ते बिजली बिल और बकाया राशि को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की, तो मुख्यमंत्री ने उसे बीच में ही आश्वस्त करते हुए कहा -“परेशान होने की जरूरत नहीं है, आपकी सरकार आपके साथ है।” उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की बिजली बिल भुगतान समाधान योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से लागू की गई है, जिसके तहत पुराने बकाया बिलों में व्यापक छूट प्रदान की जा रही है। घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ कृषि पंप धारकों को भी योजना का लाभ मिल रहा है, जबकि बीपीएल परिवारों के लिए विशेष रियायतों का प्रावधान किया गया है। जमीन पर दिखी संवेदनशीलता, मौके पर निर्देश मुख्यमंत्री  साय की कार्यशैली केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रही। उन्होंने तत्काल कलेक्टर को निर्देशित किया कि ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएं, ताकि कमराखोल सहित आसपास के गांवों के लोगों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और समस्याओं का समाधान उनके अपने गांव में ही हो सके।इस दौरान कलेक्टर  गोपाल वर्मा ने जानकारी दी कि जिले में अब तक 13 हजार से अधिक उपभोक्ता इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं और उन्हें कुल 11.75 करोड़ रुपये से अधिक की छूट प्रदान की जा चुकी है। सुशासन का जीवंत उदाहरण बना कमराखोल कमराखोल की इस चौपाल ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब शासन का नेतृत्व सीधे जनता से संवाद करता है, तो जटिल समस्याओं का समाधान भी सरल हो जाता है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि सुशासन केवल योजनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि उन्हें अंतिम व्यक्ति तक सहजता से पहुंचाने की प्रतिबद्धता का नाम है।

सरोधी की चौपाल में उभरी बदलाव की प्रेरक कहानी, स्वच्छता दीदी मनीषा मरकाम की आर्थिक स्थिति हुई सशक्त

रायपुर सुशासन तिहार के अंतर्गत ग्राम सरोधी में आयोजित मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की चौपाल केवल समस्याओं के समाधान का मंच नहीं रही, बल्कि यह ग्रामीण जीवन में आ रहे सकारात्मक बदलावों की सजीव तस्वीर भी बनी। इसी चौपाल में स्वच्छता दीदी मती मनीषा मरकाम की कहानी ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। मनीषा मरकाम अपने पति  रंजीत मरकाम और तीन बेटों के साथ एक साधारण परिवार से हैं। उनके बच्चे वर्तमान में अध्ययनरत हैं और परिवार की आजीविका खेती-किसानी एवं मजदूरी पर निर्भर है। सीमित आय के बीच घर का खर्च और बच्चों की पढ़ाई संभालना पहले चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अब परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव आया है। मनीषा बताती हैं कि पिछले दो वर्षों से वे “स्वच्छता दीदी” के रूप में कार्य कर रही हैं, जिससे उन्हें प्रतिमाह 1000 रुपए की आय प्राप्त होती है। इसके साथ ही महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली 1000 रुपए की मासिक सहायता उनके लिए बड़ा सहारा बनी है। इन दोनों आय स्रोतों से वे घरेलू खर्चों के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई में भी सहयोग कर पा रही हैं। उन्होंने बताया कि उज्ज्वला योजना के तहत निःशुल्क गैस सिलेंडर मिलने से रसोई का कार्य आसान हुआ है। मनीषा मरकाम “जय मां बंजारी महिला स्व सहायता समूह” से भी जुड़ी हैं, जहां वे अन्य महिलाओं के साथ मिलकर आत्मनिर्भरता की दिशा में कार्य कर रही हैं। मनीषा कहती हैं कि पहले जहां हर खर्च चिंता का कारण बनता था, वहीं अब उन्हें एक स्थिर आर्थिक संबल मिल गया है। महतारी वंदन योजना ने उनके जीवन में आत्मविश्वास और सम्मान की भावना को मजबूत किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं ने उनके जैसे अनेक परिवारों को नई उम्मीद और बेहतर भविष्य की दिशा दी है। ग्राम सरोधी की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब योजनाएं जमीनी स्तर तक प्रभावी रूप से पहुंचती हैं, तो वे केवल आर्थिक सहायता नहीं देतीं, बल्कि पूरे परिवार के जीवन में स्थायित्व और सशक्तिकरण भी लाती हैं।

चौपाल में मिली राहत, सरलाबाई मरावी की समस्या का मुख्यमंत्री ने किया त्वरित समाधान

रायपुर  सुशासन तिहार के अंतर्गत ग्राम सरोधी में आयोजित चौपाल में शासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्यवाही का एक भावनात्मक उदाहरण सामने आया। सरोधी की रहने वाली सरलाबाई मरावी ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के समक्ष अपनी समस्या रखी और कुछ ही पलों में उसका समाधान भी मिल गया। सरलाबाई मरावी, पति  लल्लूराम मरावी, एक साधारण कृषक परिवार से हैं। उनके पास लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि है और परिवार में उनका एक बेटा है। खेती ही उनके जीवनयापन का मुख्य साधन है। चौपाल के दौरान सरलाबाई ने बताया कि उन्होंने एक माह पहले किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत 1.50 लाख रुपए के ऋण के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली थी। मुख्यमंत्री ने जैसे ही यह बात सुनी, उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए और तुरंत निराकरण सुनिश्चित कराया। अपनी समस्या का त्वरित समाधान होते देख सरलाबाई भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी बात इतनी जल्दी सुनी जाएगी और समाधान भी मिल जाएगा। उनकी आंखों में संतोष और चेहरे पर राहत साफ झलक रही थी। सरलाबाई ने यह भी बताया कि उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे घरेलू खर्चों में सहारा मिलता है। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज उन्हें महसूस हुआ कि सरकार वास्तव में गांव-गांव तक पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनका समाधान कर रही है। ग्राम सरोधी की यह घटना इस बात का सजीव प्रमाण है कि सुशासन तिहार केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में भरोसा और राहत लेकर आने वाली पहल बन चुका है।

रेत माफिया पर प्रशासन का शिकंजा, 9 वाहन जप्त

रायपुर रेत के अवैध परिवहन पर बड़ी कार्रवाई, 6 हाइवा और 3 ट्रैक्टर जब्त प्रदेश में रेत के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर रोक लगाने के लिए प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई जारी है। इसी क्रम में  राजस्व, पुलिस और खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने जांजगीर-चांपा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण किया। रेत के अवैध परिवहन पर बड़ी कार्रवाई, 6 हाइवा और 3 ट्रैक्टर जब्त जांच के दौरान बम्हनीडीह क्षेत्र में अवैध रेत परिवहन करते पाए जाने पर 2 हाइवा वाहनों को जब्त कर थाना बम्हनीडीह के सुपुर्द किया गया। वहीं जांजगीर क्षेत्र में 3 ट्रैक्टर जब्त कर खनिज विभाग को आगे की कार्रवाई के लिए सौंपा गया। इसके अलावा देवरहा, पीथमपुर, हाथनेवरा, गढ़ापाली, केवा नवापारा और जांजगीर मुख्य मार्ग पर जांच के दौरान 4 और हाइवा अवैध रेत परिवहन करते पाए गए, जिन्हें जब्त कर पुलिस लाइन खोखरा में सुरक्षित रखा गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध परिवहन में संलिप्त लोगों के खिलाफ खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 से 23(ख) के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।