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तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिली बड़ी सौगात, मुख्यमंत्री ने 33.40 लाख रुपये भुगतान का किया शुभारंभ

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर मुख्यमंत्री के एमसीबी जिले के प्रवास के दौरान पोंडी स्थित तानसेन भवन परिसर में वन विभाग द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉल का अवलोकन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जिले के तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में महत्वपूर्ण पहल करते हुए चार प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के संग्राहकों को कुल 33 लाख 40 हजार 40 रुपये की राशि का प्रतीकात्मक चेक प्रदान कर भुगतान प्रक्रिया का शुभारंभ किया। वन विभाग के स्टॉल में प्रदेश में समर्थन मूल्य पर खरीदी जाने वाली 67 प्रकार की लघु वनोपजों की जानकारी एवं प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा वनौषधीय उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संजीवनी केंद्र के माध्यम से छत्तीसगढ़ हर्बल उत्पादों की बिक्री एवं प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम के दौरान हर्बल उत्पादों की 4 हजार 120 रुपये की बिक्री दर्ज की गई। मुख्यमंत्री ने स्टॉल में प्रदर्शित विभिन्न वन उत्पादों एवं जनजातीय आजीविका संवर्धन से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी ली तथा विभागीय प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ), वन मंडलाधिकारी मनेंद्रगढ़ सहित वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

जनसेवा ही भाजपा की पहचान, कार्यकर्ता रहें हमेशा सक्रिय: किरण सिंह देव

जगदलपुर  भारतीय जनता पार्टी द्वारा अपने कार्यकर्त्ताओं को लगातार प्रशिक्षण वर्ग के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा रहा है। पं. दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान 2026 के अन्तर्गत गुरुवार को ग्राम आसना में भाजपा के दो दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण वर्ग का आरंभ किया गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव व केबिनेट मंत्री केदार कश्यप प्रशिक्षण वर्ग में विशेष रुप से शामिल हुए और उन्होंने विभिन्न विषयों पर संबोधन भी दिया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने प्रशिक्षण वर्ग के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भाजपा की पहचान उनके कर्मठ व समर्पित कार्यकर्ता हैं। राष्ट्रसेवा व जनसेवा में भाजपा कार्यकर्ता सदैव अग्रणी भूमिका निभाएं, इस हेतु कार्यकर्ताओं को निपुण, प्रवीण और प्रखर बनाने प्रशिक्षण वर्ग आवश्यक है, जो कि संगठन का नियमित कार्यक्रम है। देव ने कहा कि प्रशिक्षण वर्ग में भाजपा की रीति नीति, सिद्धांत, कार्य पद्धति से कार्यकर्ता पूर्णतः परिचित व प्रशिक्षित होते हैं। भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता राष्ट्र सर्वोपरि की भावना से कार्य करता है, संगठन को सशक्त रुप देने सदैव समर्पित भाव रखता है।  केबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने अपनी सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में संगठन की भूमिका विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचे, अंतिम पंक्ति के गरीब परिवार कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हो सके, इस भावना को साकार रुप देने भाजपा के कार्यकर्ता जनता के बीच पहुंच कर कार्य करें। राष्ट्र सर्वप्रथम है और जनता की सेवा सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशिक्षण वर्ग को भाजपा प्रदेश प्रवक्ता शिवनारायण पाण्डेय ने हमारा सैद्धांतिक अधिष्ठान विषय पर व प्रदेश प्रवक्ता टेकेश्वर जैन ने भाजपा की कार्यपद्धति विषय पर विस्तार से अपना उद्बोधन दिया।  मीडिया प्रबंधन विषय पर भाजपा प्रदेश मीडिया संयोजक हेमंत पाणिग्रही ने, हमारा इतिहास व विकास विषय पर जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक उपाध्यक्ष श्रीनिवास मिश्रा ने, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत व धरोहर विषय पर कमलचंद्र भंजदेव ने, सोशल मीडिया के उपयोग पर दिनेश सुंदरानी ने संबोधन दिया। कार्यक्रम का संचालन जिला महामंत्री रजनीश पाणिग्रही व परिस बेसरा ने किया।प्रशिक्षण वर्ग में प्रमुख रूप से भाजपा जिला उपाध्यक्ष सतीश लाटिया, भाजपा जिला अध्यक्ष वेदप्रकाश पाण्डेय, विधायक विनायक गोयल, डॉ. सुभाऊ कश्यप, बैदूराम कश्यप, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, सुधीर पाण्डेय, महापौर संजय पाण्डेय, रामाश्रय सिंह, खेमसिंह देवांगन, बलदेव मंडावी, आर्येंद्र सिंह आर्य, नरसिंह राव, ललिता बघेल, सफीरा साहू, रामकुमारी यादव, फूलसिंह सेठिया,किरण सेन, खीतेश मौर्य, प्रकाश झा, अविनाश श्रीवास्तव, संतोष बघेल, माहेश्वरी ठाकुर, योगेश सिंह ठाकुर, अभिलाष यादव, विनय सोना, अजीज खान आदि सहित भाजपा पदाधिकारी कार्यकर्ता मौजूद रहे।

रायपुर आबकारी कार्यालय में वर्षों से जमे अधिकारियों पर चर्चा तेज, तबादला नीति पर घिरा विभाग

रायपुर छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग में लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक रायपुर आबकारी कार्यालय में पदस्थ एडीओ जेबा खान और एडीओ हरिशंकर पैकरा लगभग तीन वर्षों से एक ही जगह पर कार्यरत हैं। इसे लेकर विभागीय गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानकारों का कहना है कि शासन समय-समय पर तबादला नीति लागू करता है, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और किसी अधिकारी का लंबे समय तक एक ही स्थान पर प्रभाव न बढ़े। हालांकि आबकारी विभाग में कुछ अधिकारियों पर यह नीति प्रभावी होती नजर नहीं आ रही है। सूत्रों के अनुसार विभाग में यह चर्चा भी है कि संबंधित अधिकारी खुद को काफी प्रभावशाली बताते हैं और दावा करते हैं कि सरकार किसी की भी आए या जाए, उनसे कोई फर्क नहीं पड़ता। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विभागीय चर्चाओं में यह मुद्दा लगातार बना हुआ है। बताया जा रहा है कि इन अधिकारियों का प्रभाव पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के दौरान भी काफी मजबूत माना जाता था। लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों को लेकर विभागीय कर्मचारियों और आम लोगों के बीच भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर तबादला नीति का पालन कब होगा। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि सुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समय-समय पर अधिकारियों का स्थानांतरण आवश्यक होता है। इस मामले में आबकारी कमिश्नर एल्मा और एडिशनल कमिश्नर साहू से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। वहीं संबंधित अधिकारियों ने भी कॉल रिसीव नहीं किया। अब देखना होगा कि शासन और वरिष्ठ अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या लंबे समय से जमे अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।

बड़ाकरौंजा में 23 मई को लगेगा सुशासन तिहार जनशिविर

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार प्रदेशभर में “सुशासन तिहार 2026” के अंतर्गत जनसमस्या निवारण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में जशपुर जिले के जनपद पंचायत जशपुर अंतर्गत ग्राम बड़ाकरौंजा में 23 मई 2026 को शिविर आयोजित किया जाएगा। शिविर के माध्यम से ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी एवं लाभ भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस शिविर में बड़ाकरौंजा, नीमगांव, रातामाटी, पैकू, पीड़ी, बघिमा, गलौण्डा, टेकूल, तुरीलोदाम, झरगांव, गिरांग, घोलेंग, देवीडड़गांव, जशपुर एवं जुरगुम सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के नागरिक अपनी मांगों एवं समस्याओं से संबंधित आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे। सुशासन तिहार के तहत नागरिकों से लिखित आवेदन प्राप्त कर उनका प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा शिविरों को शासन और आमजन के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रभावी माध्यम बनाया जा रहा है, ताकि लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दूरस्थ कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। कलेक्टर रोहित व्यास ने शिविर के सुचारू संचालन के लिए नोडल एवं विभागीय अधिकारियों को अपने दायित्वों का गंभीरता एवं निष्ठा के साथ निर्वहन करने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन ने संबंधित क्षेत्रों के नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में शिविर में पहुंचकर शासन की योजनाओं का लाभ उठाने और अपनी समस्याओं के समाधान हेतु आवेदन प्रस्तुत करने की अपील की है।

छत्तीसगढ़ के किसान की बदली किस्मत, सागौन खेती से कमाए 9.69 लाख रुपए

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए एग्रोफॉरेस्ट्री (कृषि-वानिकी) एवं निजी भूमि पर वृक्षारोपण को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार की इसी दूरगामी पहल का एक बेहद सफल और प्रेरणादायी परिणाम बालोद जिले के किसान अनिल जाजू की सफलता के रूप में सामने आया है। नवा रायपुर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने ग्राम पलारी (तहसील गुरूर) निवासी कृषक अनिल जाजू को उनकी निजी भूमि पर तैयार किए गए सागौन वृक्षों के एवज में 9.69 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि का चेक प्रदान किया।  एग्रोफॉरेस्ट्री और जनभागीदारी से हरित छत्तीसगढ़ का संकल्प इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को पारंपरिक खेती के जोखिमों से उबारने के लिए वृक्ष आधारित कृषि प्रणाली अपनाने हेतु प्रेरित कर रही है।  उन्होंने कहा कि एग्रोफॉरेस्ट्री किसानों के लिए दीर्घकालिक आय का मजबूत माध्यम बन रही है। साथ ही एक पेड़ माँ के नाम अभियान के जरिए जनभागीदारी से हरित छत्तीसगढ़ निर्माण को भी गति मिल रही है। 'एक पेड़ माँ के नाम अभियान वन मंत्री ने कहा कि इस अभियान के माध्यम से अब जनभागीदारी से पूरे प्रदेश को हरा-भरा बनाने की मुहिम को एक नई और अभूतपूर्व गति मिल रही है। 24 वर्षों की मेहनत का  फल मीठा मिला, किसान अनिल जाजू की यह सफलता अन्य किसानों के लिए एक बेहतरीन केस-स्टडी है। वर्ष 2001 में अपनी 3.35 हेक्टेयर निजी भूमि पर सागौन के पौधे लगाए थे। लगभग 24 वर्षों तक देखरेख और संरक्षण के बाद वर्ष 2025 में उन्होंने वृक्ष कटाई नियम 2022 के तहत अनुमति लेकर सागौन वृक्षों की कटाई कराई। वन विभाग की देखरेख में कुल 173 सागौन वृक्षों की कटाई की गई, जिससे 949 नग लकड़ी प्राप्त हुई। इसका कुल आयतन 33.24 घनमीटर दर्ज किया गया। वन विभाग द्वारा निर्धारित दर पर लकड़ी का क्रय किया गया और इसके बदले लगभग 9.69 लाख रूपए की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में जमा कराई गई। ’पर्यावरण और आर्थिक समृद्धि का अनूठा संगम’ जाजू की यह शानदार सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से वृक्षारोपण किया जाए, तो यह किसानों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह काम करता है। इससे न केवल किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनते हैं, बल्कि प्रदेश के हरित आवरण में भारी वृद्धि होती है। जलवायु परिवर्तन के खतरों से लड़ने में मदद मिलती है। स्थानीय स्तर पर जैव विविधता का संरक्षण होता है। किसानों को वन विभाग का निरंतर सहयोग मिलता है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा निजी भूमि पर व्यावसायिक वृक्षारोपण करने वाले इच्छुक किसानों को पौधों के चयन से लेकर तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशासनिक प्रोत्साहन और आवश्यक सहायता लगातार मुहैया कराई जा रही है। शासन का मुख्य ध्येय यही है कि अधिक से अधिक किसान एग्रोफॉरेस्ट्री मॉडल को अपनाएं और अपनी बंजर या खाली जमीनों को मुनाफे के जंगल में बदल सकें।

सुशासन तिहार 2026: बालोद के राहुद में जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हुए हजारों हितग्राही, 1428 आवेदन निपटाए गए

रायपुर सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम राहुद में गुरुवार को शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में ग्राम पंचायत राहुद सहित राहुद कलस्टर में शामिल आसपास के 18 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों को शासन के विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित किया गया।  इसके अंतर्गत गुण्डरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारणी पुष्पेन्द्र चंद्राकर, पूर्व विधायक वीरेन्द्र साहू, जनपद अध्यक्ष पुरूषोत्तम चंद्राकर, जनपद उपाध्यक्ष नीतेश मोंटी यादव, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती कांति सोेनेश्वर सहित अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इस अवसर पर हितग्राहियों को कृषि विभाग अंतर्गत मृदा स्वास्थ्य कार्ड, मत्स्य पालन प्रसार योजना अंतर्गत जाल एवं आईस बॉक्स का वितरण किया गया। इसी तरह समाज कल्याण विभाग अंतर्गत श्रवण यंत्र एवं छड़ी, स्वामित्व योजना अंतर्गत अधिकार अभिलेख पत्र का वितरण किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवास निर्माण पूर्णता प्रमाण पत्र एवं केसीसी कार्ड का वितरण किया। इसके अलावा शिविर में राज्य शासन के निर्देशानुसार दिव्यांगजनों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने हेतु मेडिकल बोर्ड लगाया गया था। इस दौरान मेडिकल बोर्ड में शामिल विशेषज्ञ चिकित्सकों के द्वारा शिविर में दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने पहुँचे दिव्यांगजनों का दिव्यांगता प्रमाण पत्र भी बनाया गया। शिविर में अतिथियों के द्वारा नन्हें-मुन्हें बच्चों को स्वादिष्ट खीर खिलाकर उनका अन्नप्राशन संस्कार कराया गया। इसके अलावा गर्भवती माताओं को सुपोषण किट भेंटकर उनके गोदभराई के रस्म को पूरा किया गया। ग्राम राहुद में आयोजित शिविर में आज विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 1838 आवेदन प्राप्त हुए थे जिसमें से 1428 आवेदनों को मौके पर निराकरण सुनिश्चित किया गया।  शिविर को संबोधित करते हुए विधायक कुंवर सिंह निषाद ने विभिन्न विभाग के अधिकारियों को सुशासन तिहार के दौरान आम जनता से प्राप्त आवेदनों का समुचित निराकरण सुनिश्चित करने को कहा। जिससे सुशासन तिहार का आयोजन सार्थक हो सके। उन्होंने शिविर में उपस्थित लोगों को बाल विवाह के दुष्प्रभावों के संबंध में जानकारी देते हुए इसके रोकथाम के कार्य में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने की शपथ भी दिलाई। बालोद जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारणी पुष्पेन्द्र चंद्राकर ने आम नागरिकों को सुशासन तिहार के उद्देश्यों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केेन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। सुशासन तिहार के दौरान शासन-प्रशासन के लोग आम जनता के बीच पहुँचकर इनके वास्तविक समस्याओं का पड़ताल कर रहे हैं।  शिविर में अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी सुशासन तिहार के उद्देश्यों के संबंध में सभी विभाग के अधिकारियों को पूरी संवेदनशीलता के साथ आम जनता से प्राप्त आवेदनों का समुचित निराकरण भी सुनिश्चित करने को कहा। इस मौके पर विभिन्न विभागों के द्वारा शिविर में आज अपने-अपने विभागों से संबंधित कुल आवेदन एवं उनके निराकरण की स्थिति के अलावा आम नागरिकों को शासन के जनकल्याणकारी योजनाओं के संबंध में जानकारी दी। शिविर में आज ग्रामीण महिलाओं द्वारा नीर चेतना अभियान के अंतर्गत पानी के महत्व के संबंध में आम जनता को जानकारी प्रदान करने हेतु नुक्कड़ नाटक की भी प्रस्तुति दी।

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से उपभोक्ताओं को मिली बड़ी राहत

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत सुशासन तिहार 2026 के समाधान शिविर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हितग्राहियों से किया सीधा संवाद रायपुर सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत बलौदबाजार जिले के करहीबाजार में आयोजित समाधान शिविर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों से संवाद कर योजनाओं से मिल रहे लाभों की जानकारी ली। शिविर में मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 के तहत अनेक उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत प्रदान की गई। हितग्राहियों ने बताया कि योजना से उन्हें आर्थिक राहत मिली है और लंबित बिजली बिल की चिंता काफी हद तक कम हुई है। बालोदबाजार जिले के ग्राम बिटकुली निवासी आशाराम को 11 हजार 625 रुपये, बाबूलाल को 14 हजार 922 रुपये, जगदीश को 9 हजार 832 रुपये, श्रीमती बुधयारिन को 8 हजार 467 रुपये तथा चोवाराम को 13 हजार 325 रुपये की छूट प्राप्त हुई। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री से चर्चा के दौरान बताया कि पहले बढ़े हुए बिजली बिल के कारण आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता था, लेकिन मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से उन्हें बड़ी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि अब वे बिना किसी अतिरिक्त बोझ के नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान कर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य आम जनता को राहत पहुंचाना और उनकी समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान करना है। उन्होंने कहा कि सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक सहायता पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी सहायता साबित हो रही है।

मंत्री टंक राम वर्मा का सख्त निर्देश, कॉलेज स्टाफ समय पर पहुंचे महाविद्यालय

शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ अनिवार्य रूप से निर्धारित समय पर महाविद्यालय में उपस्थित रहें-मंत्री टंक राम वर्मा ​उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा का औचक निरीक्षण  व्यवस्था सुधारने के कड़े निर्देश, छात्रों के लिए बनेगा ‘हेल्प डेस्क’ ​रायपुर       राज्य में उच्च शिक्षा के स्तर को सुधारने और आगामी शिक्षा सत्र से पहले व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने के लिए सरकार पूरी तरह मुस्तैद है। इसी कड़ी में उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने मोपका निपनिया महाविद्यालय का औचक निरीक्षण किया। मंत्री  के इस कदम से जहां लापरवाह कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है, वहीं छात्र हित में सरकार की संवेदनशीलता एक बार फिर खुलकर सामने आई है। ​लापरवाही पर बरती जाएगी 'जीरो टॉलरेंस' की नीति     ​निरीक्षण के दौरान महाविद्यालय की प्राचार्य अनुपस्थित पाई गईं। साथ ही, स्टाफ की उपस्थिति में भी भारी कमी देखने को मिली; वहां केवल 03 सहायक प्राध्यापक और कार्यालयीन स्टाफ के महज 02 कर्मचारी ही उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त, मौके पर महाविद्यालय के वित्तीय लेखा-जोखा (एकाउंट्स) की जानकारी भी उपलब्ध नहीं हो सकी, जिस पर  मंत्री वर्मा ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ​सरकार का साफ संदेश है  शासकीय संस्थाओं में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक शिथिलता या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ​साफ-सफाई और अनुशासन पर कड़े निर्देश     ​महाविद्यालय परिसर में स्वच्छता का अभाव दिखने पर मंत्री टंक राम वर्मा ने अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़े शब्दों में फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ अनिवार्य रूप से निर्धारित समय पर महाविद्यालय में उपस्थित रहें। इसके साथ ही छात्र-छात्राओं को एक स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण मिले, इसके लिए साफ-सफाई की व्यवस्था तुरंत दुरुस्त की जाए। ​नए सत्र से पहले छात्र-सुविधाएं होंगी सर्वोपरि: बनेगा ‘हेल्प डेस्क’   ​ नवीन शिक्षा सत्र जल्द ही प्रारंभ होने वाला है, इसलिए सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि नए प्रवेश लेने वाले और पुराने छात्रों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। कॉलेज में आने वाले छात्र-छात्राओं की समस्याओं के त्वरित निराकरण और मार्गदर्शन के लिए तत्काल एक 'हेल्प डेस्क' (Help Desk) स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। ​इसके साथ ही, उन्होंने आगामी सत्र के मद्देनजर कॉलेज में पेयजल, बैठक व्यवस्था और अन्य सभी आवश्यक छात्र-सुविधाओं को समय सीमा के भीतर पूर्ण करने की कड़ी हिदायत दी है। ​जनता और छात्रों के प्रति सजग सरकार    ​उच्च शिक्षा मंत्री का यह औचक निरीक्षण  केवल कागजी दावों पर नहीं, बल्कि धरातल पर उतरकर काम करने में विश्वास रखती है। सरकार का संकल्प है कि प्रदेश के सुदूर और ग्रामीण क्षेत्रों के महाविद्यालयों में भी शहरी क्षेत्रों की तरह उच्च स्तरीय सुविधाएं और कड़ा प्रशासनिक अनुशासन सुनिश्चित किया जाए, ताकि छत्तीसगढ़ के युवाओं का भविष्य उज्ज्वल हो सके।

खेत की मेड़ पर करें सतावर की खेती, कम लागत में बढ़ेगी किसानों की आय

“खेतों की मेड़ पर पैसों का पेड़” योजना से छत्तीसगढ़ के किसानों को मिला अतिरिक्त आमदनी का नया अवसर रायपुर छत्तीसगढ़ में पारंपरिक कृषि के साथ-साथ किसानों को औषधीय खेती से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की एक अभिनव पहल शुरू की गई है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार, छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा “खेतों की मेड़ पर पैसों का पेड़” नामक नवाचार योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत किसानों को सतावर के पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि वे अपने खेतों की खाली पड़ी मेड़ और सुरक्षा बाड़ का उपयोग अतिरिक्त आय के स्रोत के रूप में कर सकें। एक पौधा, दोहरे फायदे खेतों की सुरक्षा भी और बंपर कमाई भी सतावर एक कांटेदार लता प्रजाति का औषधीय पौधा है, जो किसानों को दोहरा लाभ पहुंचाता है। सतावर कांटेदार होने के कारण इसे खेत की मेड़ पर लगाने से मवेशियों और आवारा पशुओं से फसलों की चौतरफा सुरक्षा होती है। मेड़ की खाली जगह का कोई उपयोग नहीं होता था, वहां सतावर उगाकर किसान लाखों रुपये की अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। औषधि उद्योगों में भारी मांग और औषधीय गुण सतावर के कंद में अद्भुत औषधीय गुण पाए जाते हैं, जिसके कारण आयुर्वेदिक और हर्बल दवा उद्योगों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इसका मुख्य उपयोग दवाओं के निर्माण में होता है। शारीरिक कमजोरी दूर करने और ताकत बढ़ाने में, स्तनपान कराने वाली माताओं में दुग्धवर्धन के लिए, शरीर की सूजन, दर्द और मानसिक तनाव को कम करने में किया जाता है।  योजना की मुख्य विशेषताएं और सरकारी सहायता किसानों को बढ़ावा देने के लिए औषधि पादप बोर्ड द्वारा हर स्तर पर मदद दी जा रही है। किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सतावर के पौधे पूरी तरह मुफ्त (निःशुल्क पौधे) दिए जा रहे हैं, इसके लिए उन्हें केवल औषधि पादप बोर्ड से संपर्क करना होगा। पौधरोपण से लेकर फसल की कटाई और कंद तैयार होने तक की पूरी तकनीक का प्रशिक्षण बोर्ड द्वारा दिया जाएगा। किसानों को फसल बेचने के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए बोर्ड ने पहले से ही अनुबंधित क्रेताओं (अनुभवी खरीदारों) की व्यवस्था की है, जो सीधे किसानों से उपज खरीदेंगे। सतावर की फसल लगभग 16 महीने में तैयार हो जाती है। एक बार फसल तैयार होने के बाद यह कई वर्षों तक किसानों के लिए नियमित और सुनिश्चित आय का माध्यम बनी रहती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने इस योजना को किसानों के लिए “दुधारू गाय” के समान लाभकारी बताया है। वहीं बोर्ड के उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला का कहना है कि यह योजना किसानों की सुनिश्चित आय की चिंता को दूर करने में मील का पत्थर साबित होगी। “खेतों की मेड़ पर पैसों का पेड़” योजना न केवल छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में औषधीय पौधों के संरक्षण को बढ़ावा दे रही है, बल्कि पारंपरिक खेती की लागत के बीच किसानों के लिए मुनाफे का एक नया और सुरक्षित रास्ता खोल रही है।

छत्तीसगढ़ के उसूर ब्लॉक ने बढ़ाया प्रदेश का मान, नीति आयोग रैंकिंग में मिला दूसरा स्थान

वन मंत्री केदार कश्यप ने दी बीजापुरवासियों को बधाई, मुख्यमंत्री साय बोले – यह सुशासन का प्रमाण रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के 'सुशासन' और जन- कल्याणकारी नीतियों का असर अब राज्य के सबसे दूरस्थ अंचलों में दिखने लगा है। इसी कड़ी में बीजापुर जिले से एक गौरवशाली खबर सामने आई है। नीति आयोग द्वारा जारी देश के आकांक्षी ब्लॉकों की 'चैंपियंस ऑफ द क्वार्टर' (अक्टूबर- दिसंबर 2025) की रिपोर्ट में बीजापुर के उसूर ब्लॉक ने सेंट्रल जोन में पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री साय ने दी बधाई, कहा – यह जनता के भरोसे की जीत है   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर उसूर ब्लॉक और बीजापुर जिले के नागरिकों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं एवं जिला प्रशासन को बधाई दी। उन्होंने कहा, "उसूर ब्लॉक का राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त करना हमारे सुशासन और अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष प्रमाण है। बस्तर के सुदूर गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है। उसूर ने कठिन परिस्थितियों में जो कर दिखाया है, वह पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा है। यह सफलता जमीनी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, मितानिन बहनों, एएनएम और डॉक्टरों के समर्पण का परिणाम है। हमारा लक्ष्य अब देश में प्रथम स्थान हासिल करना है।" मंत्री कश्यप ने जताया हर्ष, बढ़ाया हौसला   वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में उसूर ब्लॉक की यह राष्ट्रीय सफलता बेहद गौरवशाली है। उन्होंने कहा, "यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि हमारी सरकार की नीतियां प्रदेश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पूरी प्रामाणिकता के साथ पहुंच रही हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद स्वास्थ्य कर्मियों और जिला प्रशासन ने जो समर्पण दिखाया है, वह सराहनीय है। हमारा संकल्प बस्तर के हर गांव तक विकास की रोशनी पहुंचाना है।" मंत्री कश्यप कहा कि कभी बुनियादी सुविधाओं से दूर माना जाने वाला उसूर ब्लॉक आज देश के लिए विकास का मॉडल बन गया है। इस सफलता का श्रेय जमीनी डॉक्टरों, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मितानिन बहनों की दिन-रात की मेहनत को जाता है। विकास की नई इबारत: कड़े मानकों पर खरा उतरा उसूर   नीति आयोग ने स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण संकेतकों के आधार पर मूल्यांकन किया था, जिसमें उसूर ब्लॉक ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया : 1. संचारी रोगों पर नियंत्रण: मलेरिया, डेंगी और अन्य संचारी रोगों की रोकथाम के लिए सुदूर गांवों तक प्रभावी अभियान चलाया गया। 2. सुरक्षित मातृत्व: संस्थागत प्रसव की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई, जिससे शिशु और मातृ मृत्यु दर में भारी कमी आई। 3. सशक्त टीकाकरण कवच: बच्चों और गर्भवती महिलाओं के नियमित टीकाकरण के साथ एचपीवी टीकाकरण को जमीनी स्तर पर सफल बनाया गया। 4. गंभीर बीमारियों की जांच: बीपी, शुगर और कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों की मुफ्त जांच व उपचार की सुविधा गांव-गांव तक पहुंचाई गई। अगला संकल्प: देश में हासिल करना है प्रथम स्थान  कलेक्टर विश्वदीप और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय गौरव पूरे जिले के लिए बड़ी प्रेरणा है। शासन और प्रशासन का अगला लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और निखारते हुए आगामी तिमाहियों में देश में पहला स्थान हासिल करना है, जिसके लिए काम तेज कर दिया गया है।