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प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला अपना घर, सड़क किनारे अस्थायी आशियाने में रहने की मजबूरी हुई दूर

सेवा संकल्प अभियान 2026 : सेवा की कहानी कभी बैनर की दीवारों के बीच गुजरती थी जिंदगी, आज पक्के आशियाने में संवर रहे आशा के सपने प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला अपना घर, सड़क किनारे अस्थायी आशियाने में रहने की मजबूरी हुई दूर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जरूरतमंद परिवारों को मिल रहा आवास योजनाओं का लाभ वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में आवासीय सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर सुकन्या समृद्धि योजना में बेटियों के लिए कर रही हैं बचत, सुरक्षित भविष्य की दिशा में बढ़ाए कदम रायपुर,  कभी सड़क किनारे बैनर से बनी दीवारें ही उनके घर का सहारा थीं। न पक्की छत थी और न ही सुरक्षित आशियाना। हर दिन परिवार की जरूरतों को पूरा करने की चिंता और बेहतर भविष्य की उम्मीद के बीच जिंदगी गुजर रही थी। लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। नवा रायपुर के सेक्टर-7 स्थित ग्राम चीचा की आशा के जीवन में प्रधानमंत्री आवास योजना नई खुशियां लेकर आई है। कभी बैनर की दीवारों के बीच रहने वाली आशा आज अपने पक्के घर में परिवार के साथ रह रही हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि वर्षों की परेशानियों से मिली राहत, सुरक्षा और सम्मान के साथ जीवन जीने का नया आधार है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने और उनके जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में प्रदेश में आवासीय सुविधाओं के विस्तार और आम नागरिकों को बेहतर आवास उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर जरूरतमंद परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराने के संकल्प को आगे बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से आशा जैसे परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार मिल रहा है। बैनर की दीवारों से पक्के घर तक का सफर आशा के लिए अपना पक्का घर होना कभी एक बड़ा सपना था। सीमित संसाधनों के कारण उन्हें सड़क किनारे बैनर की दीवारों से बने अस्थायी घर में रहना पड़ता था। ऐसे घर में परिवार के साथ जीवन गुजारना आसान नहीं था। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलने के बाद उनकी जिंदगी में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। अब उनके पास अपना पक्का आशियाना है, जहां वे परिवार के साथ सुरक्षित और सुकून भरा जीवन व्यतीत कर रही हैं। आशा के लिए घर मिलने की खुशी इसलिए भी खास है, क्योंकि यह उनके परिवार के भविष्य को लेकर एक नई शुरुआत है। जिस परिवार के पास कभी रहने के लिए स्थायी ठिकाना नहीं था, आज उसके पास अपना घर है। आशा इस बदलाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। अब बेटियों के भविष्य को संवारने में जुटीं आशा अपना घर मिलने के बाद आशा अब अपनी बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही हैं। एक मां के रूप में उनकी इच्छा है कि उनकी बेटियां अच्छी शिक्षा प्राप्त करें और भविष्य में आत्मनिर्भर बनें। इसी सोच के साथ उन्होंने सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत अपनी बेटियों के लिए बचत शुरू की है। वे अपनी बच्चियों के खातों में ढाई-ढाई सौ रुपये जमा कर रही हैं। आशा के लिए यह बचत भले ही छोटी राशि से शुरू हुई हो, लेकिन इसके पीछे एक मां के बड़े सपने जुड़े हैं। वे चाहती हैं कि आने वाले समय में बेटियों की पढ़ाई और अन्य जरूरतों के लिए उनके पास आर्थिक सहारा हो। नियमित बचत के माध्यम से वे आज ही अपनी बेटियों के बेहतर कल की नींव रख रही हैं। एक योजना से मिला आशियाना, दूसरी से बेटियों के भविष्य को सहारा आशा की कहानी जनकल्याणकारी योजनाओं से आम परिवारों के जीवन में आ रहे बदलाव का प्रेरक उदाहरण है। प्रधानमंत्री आवास योजना ने उन्हें सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया है, वहीं सुकन्या समृद्धि योजना के माध्यम से वे बेटियों के भविष्य के लिए आर्थिक बचत कर रही हैं। इन दोनों योजनाओं ने उनके जीवन की दो महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं को नई दिशा दी है। पहली, परिवार के लिए सुरक्षित घर और दूसरी, बेटियों के भविष्य के लिए आर्थिक तैयारी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का प्रयास है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे और उन्हें बेहतर जीवन के अवसर मिलें। वहीं वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के विजन के अनुरूप आवासीय विकास और नागरिक सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी सुरक्षित आवास और बेहतर जीवन स्तर प्राप्त हो सके। सेवा संकल्प अभियान में सामने आई बदलाव की प्रेरक कहानी सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आशा की यह कहानी बताती है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक महत्व तब सामने आता है, जब उनका लाभ जरूरतमंद परिवारों के जीवन में ठोस बदलाव लेकर आता है। कभी बैनर की दीवारों के सहारे जीवन गुजारने वाली आशा आज अपने पक्के घर में रह रही हैं और अपनी बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं। आशा की जिंदगी में आया यह बदलाव केवल एक परिवार को आवास मिलने की कहानी नहीं है, बल्कि एक मां के संघर्ष, उम्मीद और सपनों के साकार होने की कहानी है। कभी उनकी सबसे बड़ी चिंता परिवार के लिए सुरक्षित छत थी, आज वे उस चिंता से आगे बढ़कर बेटियों के भविष्य को संवारने में जुटी हैं। बैनर की अस्थायी दीवारों से शुरू हुआ आशा का सफर आज पक्के घर की मजबूत दीवारों तक पहुंच चुका है। अब इसी घर में उनकी बेटियों के सुनहरे भविष्य के सपने भी आकार ले रहे हैं। आशा की यह कहानी बताती है कि जब जरूरतमंद परिवारों को योजनाओं का लाभ मिलता है, तो केवल उनकी वर्तमान परिस्थितियां ही नहीं बदलतीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य की उम्मीदें भी मजबूत होती हैं।

छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में दिखेगा ओलंपियन्स का दम, दिग्गज खिलाड़ी संभालेंगे टीमों की कमान

छत्तीसगढ़ हॉकी लीग : टीमों की अगुवाई करेंगे हॉकी ओलंपियन्स ओलंपियन सुरेंद्र कुमार, प्रदीप मोर, एस.वी. सुtनील, ललित कुमार उपाध्याय, शमशेर सिंह और चिंगलेनसाना सिंह मार्की खिलाड़ी के रूप में शामिल राज्य के युवाओं को अनुभवी खिलाड़ियों और ओलंपियन्स के साथ खेलने का मिलेगा मौका, लीग के दौरान अनुभवी प्रशिक्षकों से कोचिंग भी मिलेगी अजय कुमार, अजितेश राय, मोहम्मद रियाज, देवेश चौहान, राजेन्दर सिंह जूनियर और रजनीश मिश्रा होंगे टीमों के मुख्य प्रशिक्षक रायपुर. रायपुर में होने वाले छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के लिए सभी छह फ्रेंचाइजी टीमों के मुख्य प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों का चयन कर लिया गया है। ओलंपिक खेलों में भारत की ओर से खेल चुके प्रतिष्ठित और अनुभवी हॉकी खिलाड़ियों को प्रत्येक टीम में मार्की (Marquee) खिलाड़ी के रूप में शामिल किया गया है। लीग में खेलने वाले वरिष्ठ खिलाड़ियों के सानिध्य में राज्य के युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने का मौका मिलेगा। अनुभवी प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में टीमें खिताब के लिए दावेदारी करेंगी। इस दौरान नामी प्रशिक्षकों से राज्य के खिलाड़ियों को हॉकी के गुर सीखने के साथ ही बड़े मुकाबलों के दबाव से निपटने की कला भी सीखने मिलेंगी। प्रतियोगिता के सभी मुकाबलों का विधिवत आयोजन हॉकी इंडिया के ऑफिशल्स और अधिकारी करेंगे। छत्तीसगढ़ हॉकी लीग की टीमों में राष्ट्रीय स्तर के दिग्गज खिलाड़ियों, ओलंपियनों, स्थानीय प्रतिभाओं और छत्तीसगढ़ के अनुभवी खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। लीग में राज्य की प्रतिभाओं को उच्च स्तरीय मंच मिलने के साथ ही घरेलू हॉकी के ढांचे को भी मजबूती मिलेगी। लीग के सभी मैच 21 अक्टूबर से 1 नवम्बर के बीच रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में खेले जाएंगे। पहला मुकाबला शाम साढ़े पांच बजे और दूसरा मुकाबला शाम साढ़े सात बजे शुरू होगा। दोनों मैचों के बीच प्रतिदिन मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जो दर्शक स्टेडियम नहीं पहुंच पाएंगे, वे भी मुकाबलों का आनंद ले सकेंगे। लीग का लाइव प्रसारण जियोहॉटस्टार (JioHotstar) पर किया जाएगा। स्टेडियम में दर्शकों का प्रवेश पूरी तरह नि:शुल्क रहेगा। राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित की जा रही छत्तीसगढ़ हॉकी लीग की छह फ्रेंचाइजी टीमों के साथ प्रतिष्ठित संस्थान जुड़े हैं। चक्रधर चैंपियंस की फ्रेंचाइजी जिंदल स्टील लिमिटेड, न्यायधानी नाइट्स की साउथ इस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL), राजधानी रॉयल्स की बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड, मैनपाट टाइगर्स की छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल, संस्कारधानी स्ट्राइकर्स की सारडा एनर्जी एंड मिनरल्स लिमिटेड और बैलाडीला बुल्स की फ्रेंचाइजी एनएमडीसी लिमिटेड के पास है। इन टीमों के मुख्य प्रशिक्षक और खिलाड़ी इस प्रकार हैं –  न्यायधानी नाइट्स मुख्य प्रशिक्षक – मोहम्मद रियाज खिलाड़ी – सुरेंद्र कुमार (Marquee), राहुल ठाकुर, मोहम्मद अनीश रजा, लवी मानिकपुरी, अमित टोप्पो, अश्विन कुजूर, रोहित रजक, सागर सूर्यवंशी, सैय्यद समीर अली, कश्मीर मिंज, अभिजीत श्रीवास, सोनू निषाद, सुखवेद निर्मलकर, शादाब अहमद खान, अरबाज अली, ओम रुद्र नामदेव, अमन वर्मा, आदर्श राज सिंह, प्रिंस महतो, केतन कुशवाहा, रोहित कुल्लू, चिराग  मैनपाट टाइटन्स मुख्य प्रशिक्षक – अजय कुमार  खिलाड़ी – प्रदीप मोर (Marquee), अल्फ़ाज़ खान, सौर्य वर्मा, अजय तांडी, रेहान खान, प्रवीण यादव, साहिल ज़ाक्सा, मोहित नायक, अर्पण टोप्पो, आदित्य मेश्राम, अकविनाश तिग्गा, नरेंद्र निषाद, संदीप ठाकुर, प्रिंस भगत, राहुल पन्नू, प्रांजल यादव, नेहाल बरेठ, मनीष वट्टी, दक्ष चौबे, प्रह्लाद, आनंद लकड़ा, अवि मानिकपुरी  चक्रधर चैंपियंस मुख्य प्रशिक्षक – अजितेश राय खिलाड़ी – एस.वी. सुनील (Marquee), असीम हंश, वैभव सिंह चंदेल, विष्णु यादव, अविनाश तिर्की, करण कुमार साहू, अर्जुन यादव, प्रेम राव, मोहित कश्यप, अनुज जाल्क्सो, शैलेन्द्र वर्मा, गगन बाकवाले, खोगेश्वर बाग, कार्तिक यादव, हार्दिक आहूजा, भेद चौरे, भावेश धनकड़, मनीष मौर्य, बलदेव कवासी, युवराज वाल्मिकी, परमप्रीत, अद्रोहित एक्का  राजधानी रॉयल्स मुख्य प्रशिक्षक – राजेन्दर सिंह जूनियर  खिलाड़ी – ललित कुमार उपाध्याय (Marquee), हिमांशु मलिक, विनोद यादव, जुनैद अहमद, संदीप यादव, सुमित मिंज, तौफिक अहमद, अनिकेत कुजूर, ओंकार यादव, अविनाश एक्का, श्रेयांश चौरसिया, योगेश मेश्राम, जुबैर मोहम्मद, खुशाल यादव, कुणाल सेंद्रे, योगेश यादव, चिंता राम, अर्पण लकड़ा, पीयूष कुमार साहू, संजीत तिर्की, प्रेमचंद सोय, रौशन कुमार  संस्कारधानी स्ट्राइकर्स मुख्य प्रशिक्षक – रजनीश मिश्रा  खिलाड़ी – शमशेर सिंह (Marquee), आदित्य कुमार नेताम, रोशन राजपूत, झकमक लकड़ा, मानस पटेल, सोमदेव सूर्यवंशी, निशांत तिर्की, तरूण यादव, जीतू हेमला, कुशल यादव, सोमनाथ यादव, मुहुर्त कौशिक, ओम कुमार यादव, प्रकाश पटेल, सारिख अहमद, मुनीस्वर कुमार, महेंद्र सिंह नाग, अभिषेक यादव, आयुष साहू, आर्यन जेस, शाहरुख, आशीष तानी पूर्ति  बैलाडीला बुल्स मुख्य प्रशिक्षक – देवेश चौहान  खिलाड़ी – चिंगलेनसाना सिंह कंगुजाम (Marquee), दलेश्वर यादव, संतोष मौर्य, रोबिट एक्का, गुलशन कौशिक, प्रह्लाद तांडी, आनंद सूर्यवंशी, निहाल हुसैन, विशाल किस्पोट्टा, चन्द्रशेखर कुसवाहा, प्रभात सिंह, प्रीतम कुजूर, गणेश यादव, आदित्य मेरावी, करण वर्मा, तोमन साहू, हिमेश बंशोद, गोपाल पैकरा, अमन नाग, जसकरण सिंह, राहुल यादव, करण धानुक

24 वैकल्पिक शालाओं से लगभग 800 बच्चों को जोड़ने की पहल

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले व्यक्तियों और उनके परिवारों को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं बेहतर जीवन जीने का अवसर प्रदान रही है। इसी दिशा में कोण्डागांव जिले के मर्दापाल क्षेत्र के ग्राम चांगेर निवासी  चीतुराम शोरी के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। कभी हिंसा के रास्ते पर चले गए चीतुराम ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आज शासन की पुनर्वास नीति और विशेष परियोजना के तहत मिले पक्के आवास ने उनके परिवार को एक सुरक्षित आशियाना प्रदान किया है। पुनर्वास से मिली नई राह, परिवार को मिला सुरक्षित आशियाना चीतुराम शोरी पूर्व में हिंसा के रास्ते पर चले गए थे, लेकिन उन्होंने माओवाद के हिंसात्मक मार्ग को छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। उनके इस निर्णय के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया के तहत शासन की योजनाओं से उन्हें लाभान्वित किया गया। जिला प्रशासन द्वारा आत्मसमर्पित परिवारों के लिए संचालित विशेष परियोजना आवास के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पक्का मकान स्वीकृत किया गया। योजना के अंतर्गत उन्हें 1 लाख 20 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई, जिससे उन्होंने निर्धारित समय में अपने पक्के मकान का निर्माण पूरा किया। अब वे अपने परिवार के साथ इसी मकान में रह रहे हैं। पक्के घर की उपलब्धता से उनके परिवार को सुरक्षित आवास मिला है और भविष्य के प्रति भरोसा मजबूत हुआ है। आत्मसमर्पित परिवारों के जीवन में बदलाव की पहल  छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव की पुनर्वास नीति केवल हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का अवसर ही नहीं देती, बल्कि आत्मसमर्पित व्यक्तियों और उनके परिवारों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आवश्यक सुविधाओं से जोड़ने का भी प्रयास करती है। आवास सहित कई बुनियादी सुविधाएं एवं शासन की योजनाओं का लाभ मिलने से ऐसे परिवारों को स्थायित्व मिला है और वे अपने बच्चों के भविष्य, परिवार की जरूरतों तथा आजीविका के अवसर भी उपलब्ध कराया जा रहा है।  परिवार को मिला सुरक्षित और स्थायी आशियाना  माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास की पहुंच सुनिश्चित करने और समाज की मुख्यधारा से दूर हुए परिवारों को जोड़ने के लिए पुनर्वास के साथ-साथ जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना महत्वपूर्ण है।  चीतुराम को मिला पक्का आवास इसी प्रयास का बेहतर उदाहरण है, जहां शासकीय सहायता ने उनके परिवार को सुरक्षित रहने की स्थायी सुविधा उपलब्ध कराई है। आज वह अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। पक्का मकान उनके लिए केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि नए जीवन की स्वर्णिम शुरुआत और बेहतर भविष्य की उम्मीद का आधार भी है। इस सकारात्मक बदलाव के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय को धन्यवाद ज्ञापित किया।

समिति प्रबंधकों और फड़मुंशियों को मिलेगी 2-2 लाख रुपए की सामाजिक सुरक्षा बीमा

रायपुर सरकार की कल्याणकारी पहलों के तहत इन जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को जोखिम सुरक्षा प्रदान करने के लिए समूह बीमा योजना के माध्यम से 2-2 लाख रुपये का सामाजिक सुरक्षा कवच (बीमा सुरक्षा) उपलब्ध कराया जाता है। छत्तीसगढ़ में लघु वनोपज सहकारी समितियों के प्रबंधकों और फड़मुंशियों के लिए एक बड़ी राहत भरा कदम उठाया गया है। अब इन्हें दो-दो लाख रुपए की सामाजिक सुरक्षा योजना के दायरे में लाया जाएगा। इसके साथ ही, समिति प्रबंधकों को सेवानिवृत्ति पर एक लाख रुपए की आर्थिक सहायता दिए जाने का भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। वन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित की 27वीं वार्षिक साधारण सभा में कर्मचारी कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और अधोसंरचना विकास से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। लंबित प्रकरणों का भुगतान और सामाजिक सुरक्षा का प्रावधान बैठक में शहीद महेंद्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना के पूर्व के लंबित प्रकरणों का संघ मद से चरणबद्ध तरीके से भुगतान करने का निर्णय लिया गया, जिसके तहत 69 पात्र हितग्राहियों को ऑनलाइन माध्यम से सीधे राशि ट्रांसफर की गई। मैदानी स्तर पर दिन-रात मेहनत करने वाले समिति प्रबंधकों और फड़मुंशियों के लिए बीमा योजना के स्थान पर अब सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत दो-दो लाख रुपए की राशि का प्रावधान किया गया है। आधारभूत संरचनाओं को मिलेगा बढ़ावा साधारण सभा में यह भी तय किया गया कि जिन प्राथमिक सहकारी समितियों के पास अपने भवन नहीं हैं, उनके लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर नए भवनों का निर्माण किया जाएगा। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के वन धन विकास केंद्रों के लिए भी नए भवन बनाए जाएंगे, जिससे जनजातीय आजीविका और लघु वनोपज से जुड़ी गतिविधियों को और अधिक मजबूती मिलेगी। साथ ही, समितियों के कार्यालयों में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों के भव्य आयोजन के लिए पृथक से बजट का प्रावधान किया गया है। इस महत्वपूर्ण साधारण सभा में संघ के अध्यक्ष  रूपसाय सलाम, उपाध्यक्ष  यज्ञदत्त शर्मा, वन विभाग के सचिव  अमरनाथ प्रसाद, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  अरुण पांडेय तथा लघु वनोपज संघ की प्रबंध संचालक मती संजीता गुप्ता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

जनदर्शन में उप मुख्यमंत्री ने सुनी नागरिकों की समस्याएं

रायपुर लोगों की समस्याओं का समाधान शासन-प्रशासन की प्राथमिकता :  अरुण साव नागरिकों की समस्याओं, मांगों एवं शिकायतों को सुनकर उनके निराकरण के लिए शासन-प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से लोरमी रेस्ट हाउस में जनदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने जनदर्शन में पहुंचे नागरिकों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं, मांगों एवं शिकायतों को गंभीरता से सुना। उन्होंने नागरिकों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे तथा प्राप्त आवेदनों पर संबंधित विभागों के माध्यम से नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।  लोगों की समस्याओं का समाधान शासन-प्रशासन की प्राथमिकता :  अरुण साव जनदर्शन कार्यक्रम में क्षेत्र के नागरिकों ने अपनी समस्याएं सीधे उप मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं। इस दौरान लोगों ने अपनी आवश्यकताओं, स्थानीय समस्याओं और विकास से जुड़ी मांगों को सामने रखा। उप मुख्यमंत्री  साव ने नागरिकों की बातों को सुनते हुए उनके आवेदनों पर नियमानुसार कार्यवाही करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि आम जनता की समस्याओं का समाधान शासन की प्राथमिकता है और लोगों को अपनी जायज मांगों के निराकरण के लिए अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। जनदर्शन में 520 से अधिक आवेदकों ने उनके समक्ष अपनी मांगें एवं समस्याएं रखीं।  लोगों की समस्याओं का समाधान शासन-प्रशासन की प्राथमिकता :  अरुण साव उप मुख्यमंत्री  साव ने ग्राम तुलसाघाट निवासी  लाल दास खाण्डेकर की मांग पर तत्काल श्रवण यंत्र प्रदान कर लाभान्वित किया। इसके साथ ही ग्राम लाखासार निवासी  हितेश साहू को आय प्रमाण पत्र प्रदान किया। उन्होंने शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर सभी नागरिकों को शुभकामनाएं एवं बधाई दी। उन्होंने कामना की कि मां दुर्गा की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली आए। उन्होंने इस पावन पर्व को आस्था, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक बताते हुए सभी के सुखमय जीवन की कामना की। उप मुख्यमंत्री  साव ने कहा कि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विभिन्न क्षेत्रों में विकास एवं निर्माण कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। विकास कार्यों के माध्यम से नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप अधोसंरचना को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देते हुए आवश्यकतानुसार कार्यवाही की जाएगी।  उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास में आम नागरिकों की आवश्यकताओं और सुझावों का महत्वपूर्ण योगदान है। जनदर्शन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों की समस्याओं को सीधे सुनने और उनके समाधान की दिशा में आवश्यक पहल करने का अवसर मिलता है। शासन की मंशा है कि आम नागरिकों को योजनाओं और विकास कार्यों का लाभ मिले तथा उनकी समस्याओं का नियमानुसार निराकरण हो।  उप मुख्यमंत्री  साव ने धान खरीदी को लेकर कहा कि किसानों को धान विक्रय के दौरान किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए सभी स्तरों पर आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। धान खरीदी प्रदेश के किसानों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है, इसलिए इसकी व्यवस्थाओं को व्यवस्थित एवं सुचारू बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। जनदर्शन में मुंगेली जिला पंचायत के सीईओ  गोकुल रावटे, वनमंडलाधिकारी  तन्यम कौशिक, लोरमी एसडीएम मती रेखा चंद्रा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया तीन दिवसीय शिवरीनारायण महोत्सव का शुभारंभ

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज माता शबरी की पावन नगरी शिवरीनारायण में तीन दिवसीय शिवरीनारायण महोत्सव के शुभारंभ के अवसर पर महानदी पर 63 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से नए पुल के निर्माण की घोषणा की। उन्होंने नगर के गंदे पानी के समुचित शोधन के लिए एसटीपी प्लांट की स्थापना तथा राम वनगमन पर्यटन परिपथ के अंतर्गत शिवरीनारायण के विकास की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने शिवरीनारायण को नगरपालिका बनाने की दिशा में आवश्यक सर्वे कराने की बात कही। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से शिवरीनारायण का विशेष महत्व है। यहां की आवश्यकताओं और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अधोसंरचना एवं नागरिक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। महानदी पर नए पुल के निर्माण से क्षेत्र में आवागमन अधिक सुगम होगा और आसपास के गांवों एवं क्षेत्रों को बेहतर संपर्क सुविधा मिलेगी। एसटीपी प्लांट की स्थापना से नगर की स्वच्छता व्यवस्था सुदृढ़ होने के साथ महानदी के संरक्षण में भी सहायता मिलेगी। माता शबरी की पावन धरती पर आना मेरे लिए सौभाग्य : मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री  साय ने शिवरीनारायण महोत्सव एवं शारदीय नवरात्रि की प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान राम के चरणों से पावन हुई माता शबरी की इस धरती पर आना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि माता शबरी के बुलावे पर वे सपत्नीक यहां पहुंचे हैं। शिवरीनारायण की भूमि आस्था, भक्ति और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर गौमाता की पूजा की और मां चित्रोत्पला गंगा की महाआरती में शामिल होकर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं कल्याण की कामना की। उन्होंने शिवरीनारायण में प्रतिदिन संध्या आरती की परंपरा पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी परंपराएं हमारी आस्था और संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ती हैं। उन्होंने इस परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने का आह्वान किया। मोदी की गारंटी को तेजी से धरातल पर उतार रही सरकार मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रदेशवासियों को दी गई गारंटियों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सरकार गठन के बाद शपथ ग्रहण के 24 घंटे के भीतर आयोजित पहली मंत्रिपरिषद की बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति का निर्णय लिया गया। इनमें से लगभग साढ़े 11 लाख आवास पूर्ण हो चुके हैं और प्रतिदिन लगभग 1600 आवासों का निर्माण पूरा हो रहा है। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए 15 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 6 हजार आवास दिए जा चुके हैं। इसी प्रकार प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए भी 32 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक जरूरतमंद परिवार के सिर पर पक्की छत हो और वह सम्मानपूर्वक जीवन जी सके। किसानों की समृद्धि सरकार की प्राथमिकता मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों से किए गए वादों को सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूरा किया है। किसानों को वर्षों से लंबित धान का बकाया बोनस दिया गया है। प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। किसानों को धान बेचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए प्रदेश में 250 से अधिक नए धान खरीदी केंद्र भी खोले गए हैं। उन्होंने कहा कि वनांचल में रहने वाले परिवारों की आय बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। तेंदूपत्ता संग्रहण की दर बढ़ाकर 5500 रुपए प्रति मानक बोरा की गई है। तेंदूपत्ता संग्राहकों को चरण पादुकाएं भी प्रदान की जा रही हैं। सरकार गांव, गरीब, किसान और वनवासी परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। महतारी वंदन से मजबूत हो रहा माताओं-बहनों का आर्थिक स्वावलंबन मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से पात्र माताओं-बहनों को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह राशि महिलाओं के लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उनके आत्मविश्वास और स्वावलंबन को मजबूत करने का माध्यम बनी है। अनेक महिलाएं इस राशि का उपयोग परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ छोटे व्यवसाय शुरू करने और अपनी आय बढ़ाने में कर रही हैं। लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं ने किए रामलला के दर्शन मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि भगवान राम का छत्तीसगढ़ से अत्यंत आत्मीय संबंध है। छत्तीसगढ़ को भगवान राम का ननिहाल माना जाता है और यहां उन्हें भांजे के रूप में सम्मान देने की विशिष्ट परंपरा है। प्रदेशवासियों को अयोध्या में प्रभु रामलला के दर्शन कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने रामलला दर्शन योजना प्रारंभ की है। इस योजना के माध्यम से अब तक लगभग 50 हजार श्रद्धालु अयोध्या जाकर प्रभु रामलला के दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि शिवरीनारायण भी भगवान राम की वनगमन यात्रा से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। राम वनगमन पर्यटन परिपथ के अंतर्गत इसके विकास से यहां धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को नई गति मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के अवसर भी बढ़ेंगे। बस्तर में शांति के साथ विकास की नई शुरुआत मुख्यमंत्री ने बस्तर में आ रहे सकारात्मक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि नियद नेल्लानार योजना और अग्रणी बस्तर अभियान के माध्यम से उन दूरस्थ क्षेत्रों तक शासन की योजनाएं और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं, जो लंबे समय तक विकास से वंचित रहे। उन्होंने कहा कि बस्तर में 421 बंद पड़े स्कूलों को फिर से प्रारंभ किया गया है। जहां कभी नक्सलवाद के कारण शिक्षा और विकास की राह कठिन थी, वहां आज बच्चे स्कूल जा रहे हैं और विकास की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। सरकार का लक्ष्य बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में शांति, सुरक्षा और विकास को स्थायी आधार देना है। विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज, वन संपदा और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इस राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने में छत्तीसगढ़ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए अधोसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, रोजगार और … Read more

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित पीपीपीएसी की बैठक संपन्न

रायपु मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मूल्यांकन समिति की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में चिकित्सा शिक्षा संचालनालय द्वारा बिलासपुर के कोनी स्थित सिम्स मेडिकल कैंपस में निर्मित 240 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और 100 बिस्तरों वाले स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट को सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत संचालित और रखरखाव करने के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई।  बैठक में पीपीपी मॉडल अस्पताल को 10 वर्षों के लिए बिलासपुर के कोनी में कुल 340 बिस्तरों वाले इन दोनों अस्पतालों को एक ही 10-वर्षीय लाइसेंस समझौते के तहत निजी डेवलपर, ऑपरेटर को संचालन और रखरखाव के लिए सौंपने के प्रस्ताव पर विचार किया गया।    अस्पताल में सरकारी योजनाओं (आयुष्मान भारत आदि) के लाभार्थियों और पूरी तरह निःशुल्क मरीजों के लिए आरक्षित रहेंगे। केवल 20 प्रतिशत बिस्तरों का उपयोग पेड मरीजों के इलाज के लिए किया जा सकेगा। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी जैसी प्रमुख चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होंगी।  बैठक में विधि एवं विधायी विभाग के प्रमुख सचिव  मनीष कुमार ठाकुर, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव  अमित कटारिया, वित्त एवं जनसंपर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, आदिम जाति विकास विभाग के सचिव  भूवनेश यादव सहित अन्य विभागों के अधिकारी एवं संबंधित ऑपरेटर संस्था केपीएमजी के प्रतिनिधि शामिल हुए।  

24 वैकल्पिक शालाओं से लगभग 800 बच्चों को जोड़ने की पहल

रायपुर नारायणपुर जिले के दूरस्थ एवं नक्सल प्रभावित अंचलों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के प्रयासों से बच्चों के लिए पढ़ाई के नए अवसर खुल रहे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विगत दो वर्षों में नए विद्यालयों के संचालन, बंद शालाओं को पुनः प्रारंभ करने और वैकल्पिक शालाओं की स्थापना के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में अनेक पहल की गई हैं। जिले में 24 वैकल्पिक शालाओं के माध्यम से लगभग 800 बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की पहल की गई है। वहीं, निःशुल्क प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग, डिजिटल शिक्षण और व्यावसायिक शिक्षा से विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत शिक्षा सत्र 2024-25 में ईरक्कभट्टी, जड्डा, ताडोबेडा एवं तोयामेटा (एनमेटा) में चार नवीन प्राथमिक विद्यालय प्रारंभ किए गए। इसके साथ ही लंबे समय से बंद नौ प्राथमिक शालाओं में दोबारा पढ़ाई शुरू कराई गई। इन प्रयासों से 207 विद्यार्थियों को लाभ मिला। शिक्षा सत्र 2025-26 एवं 2026-27 में 24 वैकल्पिक शालाओं का संचालन शुरू किया गया, जिससे ऐसे गांवों के बच्चों तक भी शिक्षा पहुंची, जिन्हें पहले विद्यालय जाने का अवसर नहीं मिला था। सत्र 2026-27 में चार प्राथमिक शालाओं का शुभारंभ भी किया गया है। ‘स्कूल केईंता’ अभियान से शिक्षा से वंचित बच्चों की पहचान  शाला त्यागी एवं अप्रवेशी बच्चों को विद्यालयों से जोड़ने के लिए जिले में विशेष ‘स्कूल केईंता’ अभियान चलाया गया। इसके अंतर्गत 24,701 परिवारों का सर्वेक्षण कर 1,047 शाला त्यागी और 1,295 अप्रवेशी बच्चों की पहचान की गई। इन बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश दिलाकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की पहल की गई है। जिले में वर्तमान में 538 विद्यालय संचालित हैं। आवासीय शिक्षा के लिए दो कस्तूरबा गांधी विद्यालय, दो पोर्टा केबिन विद्यालय और एक डॉरमेट्री की सुविधा उपलब्ध है। केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय भी विद्यार्थियों को शैक्षणिक अवसर प्रदान कर रहे हैं। शिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए 187 शासकीय शालाओं में 273 अतिथि शिक्षकों की स्वीकृति दी गई है। जरूरत वाले गांवों में शिक्षा दूतों के माध्यम से भी बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था की जा रही है। निःशुल्क कोचिंग से उच्च शिक्षा की राह हुई आसान जेईई और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जिले में पिछले दो वर्षों से निःशुल्क कोचिंग संचालित की जा रही है। शिक्षा सत्र 2025-26 में गणित संकाय के 29 विद्यार्थियों में से 16 का चयन विभिन्न प्रतिष्ठित शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालयों में हुआ। जीवविज्ञान संकाय के सात विद्यार्थियों ने नीट के माध्यम से काउंसलिंग प्रक्रिया में सफलता प्राप्त की। इनमें एक विद्यार्थी का चयन शासकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए हुआ है। डिजिटल शिक्षा और नवाचार से बढ़ रहे सीखने के अवसर  जिले में 10 आईसीटी लैब और 32 स्मार्ट क्लास संचालित हैं। डिजिटल शिक्षण सामग्री से विद्यार्थियों को विषयों को सरल और रुचिकर तरीके से समझने में मदद मिल रही है। आठ विद्यालयों में अटल टिंकरिंग लैब के माध्यम से बच्चों को वैज्ञानिक प्रयोग और मॉडल निर्माण के अवसर दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही 12 हायर सेकेंडरी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के जरिए विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान और रोजगारोन्मुखी कौशल से परिचित कराया जा रहा है। दोनों विकासखंडों में एक-एक पीएम  विद्यालय तथा जिले में कुल सात स्वामी आत्मानंद विद्यालय संचालित हैं। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के विद्यार्थियों के लिए पीएम जनमन योजना के अंतर्गत 100-100 सीटों वाले बालक एवं बालिका छात्रावासों के संचालन की दिशा में कार्य प्रारंभ किया गया है। नारायणपुर जिले के बोर्ड परीक्षा परिणामों में भी जिले की स्थिति बेहतर हुई है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कवर्धा में मां महामाया और मां विंध्यवासिनी के दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

’रायपुर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कवर्धा में मां महामाया और मां विंध्यवासिनी के दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक  विजय शर्मा ने आज नवरात्रि के अवसर पर कबीरधाम जिले के विभिन्न देवी मंदिरों में दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और कल्याण की कामना की। उन्होंने कवर्धा स्थित प्रसिद्ध मां महामाया मंदिर और मां विंध्यवासिनी मंदिर पहुंचकर माता रानी का आशीर्वाद लिया। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने सर्वप्रथम मां महामाया मंदिर पहुंचकर माता के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात उन्होंने मां विंध्यवासिनी मंदिर में दर्शन कर प्रदेश एवं कबीरधाम जिले की सुख-शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की। ’मां विंध्यवासिनी मंदिर में निर्माणाधीन ज्योति कलश भवन का किया निरीक्षण’ उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने मां विंध्यवासिनी मंदिर परिसर में निर्माणाधीन ज्योति कलश भवन का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने भवन निर्माण से जुड़ी व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। ज्योति कलश भवन के निर्माण से मंदिर परिसर में धार्मिक आयोजनों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार में सहायता मिलेगी। ’छिरपानी कॉलोनी के मां दुर्गा पंडाल में किए दर्शन’ उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कवर्धा के छिरपानी कॉलोनी स्थित मां दुर्गा पंडाल पहुंचकर माता रानी के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने श्रद्धालुओं से मुलाकात भी की।

महानदी केवल हमारी जीवनदायिनी नहीं, छत्तीसगढ़ की आस्था, संस्कृति और सभ्यता की अविरल धारा : मुख्यमंत्री साय

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज माता शबरी की पावन नगरी शिवरीनारायण में महानदी के पवित्र तट पर आयोजित चित्रोत्पला गंगा महाआरती में शामिल हुए।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने धर्मपत्नी मती कौशल्या देवी साय के साथ श्रद्धा और भक्तिभाव से महाआरती में सहभागिता की तथा महानदी मैया से छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, खुशहाली और प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना की। महानदी के तट पर दीपों की जगमगाहट, वैदिक मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति के बीच आयोजित महाआरती ने शिवरीनारायण की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गरिमा को और भव्यता प्रदान की। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को शिवरीनारायण महोत्सव और शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज का दिन अत्यंत मंगलमय है। माता शबरी की पुण्यभूमि में महानदी के पावन तट पर चित्रोत्पला गंगा महाआरती में सपत्नीक शामिल होना उनके लिए सौभाग्य का अवसर है। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता हमारी आस्था, परंपरा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति समाज के गहरे जुड़ाव को दर्शाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महानदी छत्तीसगढ़ की गंगा मैया है। यह केवल जल की धारा नहीं, बल्कि हमारे प्रदेश की आस्था, संस्कृति, सभ्यता और जनजीवन की अविरल धारा है। सदियों से महानदी ने छत्तीसगढ़ की धरती को सींचा है, हमारी कृषि और अर्थव्यवस्था को संबल दिया है तथा इसके तटों पर हमारी समृद्ध संस्कृति और सभ्यता पुष्पित-पल्लवित हुई है। जिस प्रकार पूरे देश में गंगा मैया के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव है, उसी प्रकार महानदी के प्रति भी छत्तीसगढ़वासियों के मन में अगाध श्रद्धा है। उन्होंने कहा कि नदियों के प्रति हमारी आस्था तभी सार्थक होगी, जब हम उनके संरक्षण, संवर्धन और स्वच्छता को भी अपनी सामूहिक जिम्मेदारी मानें। जल संरक्षण को जनभागीदारी से जनआंदोलन बनाना होगा : मुख्यमंत्री  साय मुख्यमंत्री  साय ने जल संरक्षण का आह्वान करते हुए कहा कि जल है तो कल है। जल के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। प्रकृति से प्राप्त जल अनमोल धरोहर है और इसे भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। आज किए गए हमारे प्रयास ही आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तय करेंगे। इसलिए जल संरक्षण प्रत्येक नागरिक का दायित्व बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के लिए समाज की सामूहिक चेतना और सक्रिय जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। हमें वर्षा जल की एक-एक बूंद सहेजने की संस्कृति विकसित करनी होगी।  मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव हो या शहर, घर हो या सार्वजनिक परिसर – जहां भी संभव हो, वर्षा जल संचय की प्रभावी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। जब जल बचाना प्रत्येक परिवार और प्रत्येक नागरिक का संकल्प बनेगा, तभी जल संरक्षण वास्तविक अर्थों में एक व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप ले सकेगा। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने जल संरक्षण को देश की प्राथमिकताओं से जोड़ते हुए इसे जनभागीदारी का अभियान बनाया है। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में देशभर में जल संचय-जनभागीदारी अभियान के माध्यम से वर्षा जल को सहेजने और भूजल स्तर बढ़ाने की दिशा में व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री जी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ सहित विभिन्न अवसरों पर जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित कर देशवासियों को इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से हमें छत्तीसगढ़ में भी जल संरक्षण के प्रयासों को और व्यापक बनाना है। प्रत्येक गांव, नगर और परिवार को जल संचय की मुहिम से जोड़कर इसे जन-जन का संकल्प बनाना होगा। वर्षा जल का अधिकतम संचय और भूजल संवर्धन समय की आवश्यकता मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण और जल संचय की दिशा में अनेक अच्छे प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप किए जा रहे नवाचारों को और विस्तार देने की आवश्यकता है। उन्होंने जल संरक्षण के लिए अपनाए जा रहे पांच प्रतिशत मॉडल सहित विभिन्न नवाचारों को प्रोत्साहित करने पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों के माध्यम से वर्षा जल को अधिक से अधिक सहेजा जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्षा का पानी बहकर निकल जाने के बजाय धरती के भीतर पहुंचे, इसके लिए हमें वैज्ञानिक और स्थानीय दोनों प्रकार के उपाय अपनाने होंगे। सोकपिट निर्माण, हैंडपंपों के आसपास भूजल पुनर्भरण की व्यवस्था, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और स्थानीय जल संरचनाओं का संरक्षण जैसे छोटे-छोटे प्रयास व्यापक परिणाम दे सकते हैं। गांवों और शहरों में उपलब्ध संसाधनों तथा भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप जल संचय की व्यवस्थाएं विकसित करने से भूजल स्तर में सुधार होगा और भविष्य की जल आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे परंपरागत तालाब, कुएं और अन्य जल स्रोत केवल जल संरचनाएं नहीं, बल्कि हमारी विरासत का भी हिस्सा हैं। इनका संरक्षण और पुनर्जीवन आवश्यक है। उन्होंने प्रदेशवासियों से नदियों, तालाबों, कुओं सहित सभी जल स्रोतों को स्वच्छ रखने, उनके संरक्षण में सहभागी बनने और वर्षा जल का अधिकतम संचय करने की अपील की। नदियों के प्रति श्रद्धा के साथ उनके संरक्षण का भी लें संकल्प मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महानदी सहित प्रदेश की सभी नदियां हमारी जीवनरेखा हैं। नदियों के प्रति हमारी श्रद्धा हमें उनके संरक्षण के लिए भी प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि चित्रोत्पला गंगा महाआरती जैसे आयोजन हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को सशक्त करने के साथ प्रकृति और नदियों के प्रति हमारे दायित्व का भी स्मरण कराते हैं। आज इस पवित्र अवसर पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि जल का अपव्यय नहीं करेंगे, जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाएंगे और जल संरक्षण के प्रयासों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार अपने स्तर पर जल संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है, लेकिन इस अभियान की वास्तविक शक्ति समाज की भागीदारी है। जब शासन और समाज मिलकर एक दिशा में प्रयास करेंगे, तब हम अपनी नदियों और जल स्रोतों को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्याप्त जल सुनिश्चित कर सकेंगे। शिवरीनारायण हमारी आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र मुख्यमंत्री  साय ने शिवरीनारायण की धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पावन भूमि भगवान राम और माता शबरी की भक्ति से जुड़ी हुई है। शिवरीनारायण … Read more