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ड्यूटी के साथ UPSC की तैयारी, धमतरी के डायमंड सिंह ध्रुव बने SP

धमतरी जिले के मगरलोड ब्लाक के ग्राम परसवानी निवासी डायमंड सिंह ध्रुव का संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) में चयन हुआ है। उन्होंने परीक्षा में 623वीं रैंक हासिल की है। वर्तमान में वह डीएसपी के पद पर पदस्थ हैं और अब यूपीएससी में चयन के बाद एसपी बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। बीएचयू और जेएनयू से पढ़ाई मगरलोड ब्लाक के ग्राम परसवानी निवासी अंबिका सूर्यवंशी के पुत्र डायमंड सिंह ध्रुव ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर मगरलोड में पहली से पांचवीं तक प्राप्त की। इसके बाद कक्षा छठवीं से 12वीं तक की पढ़ाई रेडिएंट पब्लिक स्कूल निमोरा रायपुर से पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से बीए ऑनर्स किया, जबकि पीजी की पढ़ाई जेएनयू दिल्ली से पूरी की। डायमंड सिंह ध्रुव वर्ष 2023 से यूपीएससी की तैयारी में जुटे हुए थे। दिल्ली में रहकर उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की और अब तक तीन बार यूपीएससी मेंस की परीक्षा दे चुके हैं। कठिन मेहनत और लगातार प्रयास के बाद उन्हें यह सफलता मिली है। पहले ही प्रयास में सीजीपीएससी परीक्षा पास परिवारजनों ने बताया कि डायमंड ने पहले ही प्रयास में सीजीपीएससी परीक्षा पास कर परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया था। अब यूपीएससी में चयन होने से परिवार सहित जिले में खुशी का माहौल है। डायमंड सिंह ध्रुव ने बताया कि उनके पिता जनपद पंचायत मगरलोड में कर्मचारी थे, जिससे बचपन से ही शासकीय सेवा के प्रति उनका झुकाव रहा। उन्होंने पीजी की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली में रहकर दोस्तों के साथ यूपीएससी की तैयारी शुरू की। तैयारी के दौरान वह रोजाना छह से सात घंटे तक पढ़ाई करते थे और सेल्फ स्टडी के साथ इंटरनेट का भी उपयोग करते थे।  

गार्ड से मोबाइल पर गाना बजाकर ठुमके लगवाए, फिर डंडों और बेल्ट से पिटाई, बेइज्जती का वीडियो वायरल

 सूरजपुर छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के देवनगर इलाके से एक विचलित करने वाला मामला सामने आया है. यहां एक फॉरेस्ट नर्सरी में तैनात फॉरेस्ट गार्ड के साथ कुछ स्थानीय युवकों ने न केवल मारपीट की, बल्कि उसे सबके सामने नाचने के लिए भी मजबूर किया. इस पूरी घटना का वीडियो हमलावरों ने खुद रिकॉर्ड किया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।  दरअसल, फॉरेस्ट गार्ड अपनी एक महिला साथी के साथ नर्सरी में मौजूद था. इसी दौरान वहां स्थानीय लड़कों का एक गुट पहुंचा और विवाद करने लगा. बात इतनी बढ़ गई कि उन लड़कों ने गार्ड को घेर लिया और डंडों व बेल्ट से उसकी जमकर पिटाई की।  डांस करने पर किया मजबूर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि हमलावर डरे-सहमे गार्ड को मोबाइल पर म्यूजिक बजाकर नाचने के लिए मजबूर कर रहे हैं. गार्ड वर्दी में था और हाथ जोड़कर उनसे विनती कर रहा था, लेकिन युवकों ने उसकी एक न सुनी और उसकी बेइज्जती का वीडियो रिकॉर्ड करते रहे।  विभाग ने जारी किया 'कारण बताओ' नोटिस वीडियो वायरल होने के बाद सूरजपुर फॉरेस्ट डिवीजन के अधिकारियों ने संज्ञान लिया है. हालांकि, गार्ड के साथ हुई मारपीट की निंदा हो रही है, लेकिन वन विभाग ने खुद गार्ड को ही 'कारण बताओ नोटिस' जारी कर दिया है. विभाग ने पूछा है कि वह ड्यूटी के दौरान किन परिस्थितियों में एक महिला के साथ नर्सरी में मौजूद था।  पुलिस की कार्रवाई का इंतजार पुलिस का कहना है कि अब तक फॉरेस्ट गार्ड की ओर से इस हमले को लेकर कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही लिखित शिकायत मिलेगी, वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

किसानों की खुशहाली को मिला बल, अंतर राशि से शिक्षा और आवास कार्य को सहारा

रायपुर  कृषक उन्नति योजना से सशक्त हो रहे अन्नदाता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ऐसी प्रभावी नीतियों को अमल में लाया है, जिनसे अन्नदाताओं के जीवन में स्थायी और व्यापक परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं। इन पहलों ने न केवल किसानों की आय और आत्मविश्वास को सुदृढ़ किया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति और मजबूती प्रदान की है। सुशासन की प्रतिबद्धता को साकार करते हुए कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान विक्रय करने वाले किसानों को अंतर राशि का एकमुश्त भुगतान किया गया है।      मुख्यमंत्री साय की मंशा के अनुरूप यह सुनिश्चित किया गया कि होली पर्व से पूर्व किसानों के खातों में राशि अंतरित की जाए, ताकि वे अपने परिवार के साथ त्यौहार हर्षोल्लास और सम्मान के साथ मना सकें। शासन के इस संवेदनशील निर्णय से कोरबा जिले के किसानों में विशेष उत्साह का माहौल है।      कोरबा जिले के ग्राम दादरखुर्द निवासी कृषक शैलेन्द्र कुमार थवाईत ने इस वर्ष लगभग 32 क्विंटल धान का विक्रय किया, जिसके एवज में उन्हें 23 हजार 392 रुपये की अंतर राशि प्राप्त हुई। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार का यह निर्णय किसानों के हित में है और सही समय पर मिली राशि से उन्हें बड़ी राहत मिली है। वे इस राशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा तथा उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने में करेंगे, जिससे उत्पादन क्षमता और आय दोनों में वृद्धि होगी।      इसी प्रकार ग्राम कल्दामार के कृषक जिमी राठिया ने कहा कि होली से पूर्व राशि प्राप्त होना उनके लिए किसी उपहार से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि प्राप्त धनराशि का उपयोग घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति तथा प्रधानमंत्री आवास के निर्माण कार्य में किया जाएगा। शासन द्वारा समयबद्ध भुगतान किए जाने को उन्होंने किसानों के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक बताया।      कृषकों ने उन्होंने मुख्यमंत्री साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ शासन के इस संवेदनशील और समयबद्ध निर्णय से किसानों के जीवन में स्थिरता और सुरक्षा की भावना बढ़ी है।  सरकार का यह प्रयास किसानों की समृद्धि ही प्रदेश की समग्र प्रगति का आधार है।

बिहान योजना से मिली नई उड़ान, जानकी बनीं सफल महिला उद्यमी

रायपुर : महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल जानकी बिहान योजना से मिली नई उड़ान, जानकी बनीं सफल महिला उद्यमी बिहान योजना :सरकारी योजनाओं के सहारे जानकी ने बदली अपनी और गांव की तस्वीर रायपुर जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो वे अद्भुत काम कर सकती हैं। वे शिक्षा प्राप्त कर सकती हैं, किसी भी क्षेत्र में काम कर सकती हैं और अपने लिए निर्णय ले सकती हैं। इससे न केवल उन्हें लाभ होता है, बल्कि परिवार और समुदाय भी मजबूत होते हैं। महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसालें यह दर्शाती हैं कि शिक्षा, दृढ़ संकल्प और आर्थिक स्वतंत्रता से महिलाएं न केवल अपना भाग्य बदल सकती हैं, बल्कि समाज में भी क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती हैं।               धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम खर्रा की निवासी जानकी की सफलता की कहानी आज महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बन चुकी है। कभी एक साधारण गृहिणी के रूप में खेती-बाड़ी में परिवार का सहयोग करने वाली जानकी आज एक सफल व्यवसायी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। उनकी इस उपलब्धि के पीछे ग्रामीण आजीविका मिशन की ‘बिहान’ योजना से मिला मार्गदर्शन और उनकी निरंतर मेहनत है।       जानकी ने जय मां गायत्री महिला स्व-सहायता समूह से जुड़कर आर्थिक गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। समूह के माध्यम से उन्हें बचत, बैंकिंग और स्व-रोजगार के अवसरों के बारे में जागरूकता मिली। इसके बाद उन्होंने सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से प्राप्त ऋण की सहायता से कपड़ा व्यवसाय की शुरुआत की। मेहनत और ग्राहकों के विश्वास से उनका व्यवसाय धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया।       समूह के बैंक लिंकेज के माध्यम से अतिरिक्त ऋण प्राप्त कर उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार करते हुए फैंसी स्टोर की शुरुआत की। इसके बाद मुद्रा योजना के तहत ऋण लेकर उन्होंने जूते-चप्पल की दुकान भी खोल ली। वर्तमान में उनके व्यवसाय में कपड़े, फैंसी सामग्री और जूते-चप्पल की बिक्री होती है, जिससे उन्हें हर माह अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।       जानकी केवल स्वयं ही आत्मनिर्भर नहीं बनीं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गई हैं। वे खेती-बाड़ी समूह की अध्यक्ष, ग्राम संगठन (वीओ) की अध्यक्ष तथा बीआरसी सदस्य के रूप में सक्रिय भूमिका निभाते हुए महिलाओं को बचत, स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनके प्रयासों से गांव की कई महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी कर रही हैं।      जानकी की सफलता यह दर्शाती है कि यदि महिलाओं को सही अवसर, प्रशिक्षण और सहयोग मिले तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं, बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक बदलाव की मजबूत मिसाल भी बन सकती हैं।

नेचर कैंप मड हाउस से बढ़ेगा ईको-टूरिज्म, स्थानीय लोगों के लिए खुलेंगे रोजगार के अवसर

रायपुर नेचर कैंप मड हाउस से स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में बारनवापारा अभ्यारण्य के पास स्थित देवपुर रेंज में ईको-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नए नेचर कैंप मड हाउस (मिट्टी के घर) शुरू किए गए हैं। ये घर पारंपरिक तरीके से मिट्टी और प्राकृतिक सामग्रियों से बने हैं, जो सैलानियों को प्रकृति के करीब रहने का अनूठा और शांत अनुभव प्रदान करते हैं।  नेचर कैंप मड हाउस से स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार           बलौदाबाजार वनमंडल के देवपुर वन परिक्षेत्र में ईको-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘नेचर कैंप मड हाउस’ का शुभारंभ किया गया। यह पहल वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डे के विशेष प्रयासों से शुरू की गई है। इससे स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे। गौरतलब है कि नेचर कैंप मड हाउस को प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक शैली से तैयार किया गया है। यहां आने वाले पर्यटकों को प्रकृति के करीब रहने का अनूठा अनुभव मिलेगा। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय लोगों की आय के स्थायी साधन विकसित करना है। इस परियोजना के संचालन में स्थानीय वन प्रबंधन समिति और स्व-सहायता समूहों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।               इसी क्रम में बारनवापारा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के पर्यटन ग्राम में एक आधुनिक रिसेप्शन भवन का भी शुभारंभ किया गया। पर्यटन विभाग की ओर से यहां पर मड हाउस मॉडल बनाए गए हैं। इन मड हाउस में ठहरने वालों को प्रकृति और ग्रामीण परिवेश का पूरा आनंद मिलेए इसकी व्यवस्था की गई है। बारनवापारा में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक रिसेप्शन भवन भी बनाए गए हैं। इन तमाम सुविधाओं और व्यवस्थाओं से स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि होगी, उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा, बेरोजगारी भी कम होगी।               इस नए कैंप को स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक निर्माण शैली के साथ तैयार किया गया है। मिट्टी, लकड़ी और प्राकृतिक सामग्री से बने मड हाउस पर्यावरण के अनुकूल हैं। आसपास के जंगल के साथ पूरी तरह घुलते.मिलते नजर आने वाले ये मड हाउस पर्यटकों को आकर्षित करेंगे। वन विभाग का उद्देश्य है, कि पर्यटन हो लेकिन प्रकृति पर दबाव कम से कम पड़े। इस केंद्र के माध्यम से आने वाले पर्यटकों को अभ्यारण्य की जैव विविधता, वन्यजीवों और प्राकृतिक विरासत की जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि वन मंत्री केदार कश्यप की मंशा के अनुरूप वन विभाग ऐसे विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है, जिनमें वन संरक्षण और स्थानीय विकास का संतुलन बना रहे।               इस अवसर पर वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर सहित विभागीय अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। यह पहल देवपुर क्षेत्र को ईको-पर्यटन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

तेन्दूपत्ता संग्राहकों को साप्ताहिक खरीदी के तीसरे दिन किया जाएगा भुगतान

रायपुर तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले शाखा-कर्तन कार्य के लिए कार्यशाला तेन्दूपत्ता की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाने के लिए संग्रहण (मार्च-अप्रैल) से पहले फरवरी-मार्च में वैज्ञानिक तरीके से शाखा-कर्तन किया जाता है। इस प्रक्रिया में झाड़ियों की कटाई-छंटाई की जाती है, जिससे नई कोमल पत्तियां (फड़) निकलती हैं, जो बीड़ी उद्योग के लिए उच्च गुणवत्ता वाली होती हैं।              वनमंडलाधिकारी कोरिया ने कहा कि छत्तीसगढ़ में तेन्दूपत्ता को हरा सोना कहा जाता है। यह कार्य ऐसे समय में होता है जब ग्रामीण और संग्राहकों के पास अन्य रोजगार कम होते हैं, इसलिए यह उनके लिए आय का महत्वपूर्ण साधन बनता है। उन्होंने निर्देश दिए कि तेन्दूपत्ता खरीदी का भुगतान साप्ताहिक खरीदी के तीसरे दिन तक अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि संग्राहकों को समय पर लाभ मिल सके। कोरिया वनमंडल अंतर्गत जिला लघु वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित बैकुंठपुर द्वारा तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य से पहले शाखा-कर्तन (बूटा कटाई) के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला बैकुंठपुर स्थित गेज रोपणी परिसर में आयोजित की गई। इसमें कोरिया वनमंडल के अंतर्गत आने वाली 17 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के 16 इकाइयों के फड़मुंशी, प्रबंधक, पोषक अधिकारी, फड़ अभिरक्षक सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए।  तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले शाखा-कर्तन कार्य के लिए कार्यशाला             परिक्षेत्र अधिकारी सोनहत जिला कोरिया वनमंडल ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले शाखा-कर्तन का कार्य कराया जाता है, जिससे बेहतर गुणवत्ता का पत्ता प्राप्त हो सके। यह कार्य प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से मार्च के प्रथम और द्वितीय सप्ताह में अनिवार्य रूप से पूरा किया जाएगा। साथ ही फड़मुंशी और फड़ अभिरक्षकों को उनके कर्तव्यों और जिम्मेदारियों की जानकारी भी दी गई। शाखा-कर्तन कार्य के लिए निर्धारित राशि के अनुसार 70 रुपये प्रति मानक बोरा भुगतान किया जाएगा, जिसका भुगतान समिति के पोषक अधिकारी और प्रबंधक द्वारा संयुक्त रूप से कार्य पूरा होने के तुरंत बाद किया जाएगा। परिक्षेत्र अधिकारी देवगढ़ ने तेन्दूपत्ता बूटा कटाई की तकनीकी जानकारी देते हुए फड़ों के चयन, शाखा-कर्तन की प्रक्रिया, तेन्दूपत्ता तोड़ाई, गड्डी बांधने तथा संग्रहण केंद्र में खरीदी की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति पटना के प्रबंधक ने भी तेन्दूपत्ता संग्रहण से लेकर क्रेता को पत्ता सुपुर्द करने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। कार्यक्रम में जिला यूनियन कोरिया के अध्यक्ष ने अधिकारियों और कर्मचारियों को उच्च गुणवत्ता का तेन्दूपत्ता संग्रहित करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर परिक्षेत्र अधिकारी सोनहत अजीत सिंह ने कोरिया वनमंडल की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 के तेन्दूपत्ता सीजन के लिए वनमंडल की सभी लॉट अग्रिम निवर्तन में पहले ही विक्रय हो चुकी हैं इस अवसर पर उप प्रबंध संचालक अखिलेश मिश्रा, तकनीकी अधिकारी सी.पी. पटेल सहित वनमंडल के अधिकारी-कर्मचारी, फड़ अभिरक्षक, फड़मुंशी, समिति के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, अग्रिम क्रेता के प्रतिनिधि और स्व.सहायता समूहों के सदस्य उपस्थित रहे।

त्योहार पर भी कर्तव्य निभाते रहे वनकर्मी, होली पर जंगलों की सुरक्षा में तैनात

रायपुर सोनाखान के जंगलों में लगी आग पर पाया काबू वन केवल हमारी प्रकृति की सुंदरता नहीं बढ़ाते, बल्कि जलवायु संतुलन, जैव विविधता और जीवन के लिए आवश्यक संसाधन भी प्रदान करते हैं। छत्तीसगढ़ के जंगलों की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए वन विभाग लगातार सतर्कता के साथ कार्य कर रहा है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में वन अग्नि प्रबंधन को लेकर प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।            होली के त्यौहार के दौरान भी वन विभाग की टीम पूरी मुस्तैदी से अपने दायित्वों का निर्वहन करती रही। जब पूरा प्रदेश होली के उत्सव में व्यस्त था, उस समय वनकर्मी जंगलों को आग से बचाने के लिए फील्ड में तैनात रहे। बीती रात बलौदाबाजार वनमंडल के सोनाखान परिक्षेत्र अंतर्गत कसडोल-कोठारी मार्ग पर देवतराई और पौड़ी के बीच जंगल में आग लगने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और आग बुझाने की कार्रवाई शुरू की।        स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वनमंडलाधिकारी श्री धम्मशील गणवीर स्वयं मौके पर पहुंचे और टीम का नेतृत्व करते हुए आग पर काबू पाया। स्थानीय रेंज अधिकारी और बीट प्रभारियों ने फायर लाइन बनाकर, फायर बीटर और अन्य संसाधनों की मदद से आग को फैलने से रोक दिया। वनमंडलाधिकारी ने मौके पर मौजूद वनकर्मियों का उत्साह बढ़ाते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। वन विभाग का उद्देश्य बेहतर प्रबंधन, जागरूकता और जनसहभागिता के माध्यम से वनों को आग से सुरक्षित रखना और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना है।

रायपुर: प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जमुना पाण्डे का घर सौर ऊर्जा से हो रहा रोशन

रायपुर : प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना: जमुना पाण्डे का घर सौर ऊर्जा से हो रहा रोशन बिजली बिल से मिली राहत रायपुर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की मंशानुरूप प्रत्येक घरों में छत पर सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाकर आमजनों को ऊर्जा के लिए आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का संचालन किया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से  मुंगेली जिले के अनेक घर सौर ऊर्जा से रोशन हो रहे हैं और लोग बिजली खर्च से मुक्त होकर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह योजना न केवल नागरिकों को आर्थिक राहत प्रदान कर रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित हो रही है।          नगर पंचायत सरगॉव की जमुना पाण्डे ने अपने आवास पर 02 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित कराया है। सोलर संयंत्र के चालू होते ही उनका घर सौर ऊर्जा से रोशन हो रहा है। जमुना पाण्डे ने बताया कि सोलर पैनल स्थापना होने से बिजली बिल से राहत मिली है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत सरल प्रक्रिया और सब्सिडी सुविधा ने उन्हें सोलर सिस्टम अपनाने के लिए प्रेरित किया। 02 किलोवाट सोलर सिस्टम स्थापित होने के बाद न केवल उनके घर के बिजली बिल में कमी आई है, बल्कि वे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में भी अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने इस योजना को आम आदमी के लिए राहत और भविष्य के लिए निवेश बताते हुए शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने अन्य नागरिकों से भी अपील की कि वे सौर ऊर्जा को अपनाकर न केवल आर्थिक लाभ प्राप्त करें, बल्कि ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में सहभागी बनें।            उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापना पर केन्द्र और राज्य शासन द्वारा 30 हजार रूपए से 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। 01 किलोवाट क्षमता पर 45 हजार रुपये, 02 किलोवाट पर 90 हजार रुपये तथा 03 किलोवाट क्षमता के सोलर सिस्टम पर 01 लाख 08 हजार रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। यह प्रावधान सोलर ऊर्जा को आम नागरिकों के लिए सुलभ और किफायती बना रहा है। आमजनों को योजना के लिए प्रोत्साहित करने शासन के निर्देशानुसार बैंकों द्वारा कम ब्याज दर पर आसान किश्तों में ऋण की सुविधा प्रदान की जा रही है। इससे आमजनों को योजना का लाभ लेना आसान हो गया है।

दूरस्थ गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच, नारायणपुर में 107 ग्रामीणों का इलाज

रायपुर नारायणपुर के सुदूर गांवों में पहुंच रही हैं स्वास्थ्य सेवाएं नारायणपुर जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ग्राम पंचायत घमंडी के आश्रित ग्राम जटवर में सुशासन एक्सप्रेस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान लगाए गए विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।            शिविर में ग्राम पंचायत घमंडी के अंतर्गत आने वाले जटवर, घमंडी, कोगालीं, ओरछापार, कारकाबेड़ा, हिकोनार, गोडेलेमाका और वाडापेंदा जैसे गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। दो दिनों तक चले इस शिविर में कुल 107 मरीजों का उपचार किया गया और उन्हें आवश्यक दवाइयों के साथ स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी दिया गया।       स्वास्थ्य जांच के दौरान 84 लोगों की मलेरिया जांच की गई, जिनमें 15 मरीज पॉजिटिव पाए गए। इसके अलावा टीबी स्क्रीनिंग, रक्तचाप, शुगर, हीमोग्लोबिन और नेत्र जांच भी की गई। गर्भवती महिलाओं की विशेष एएनसी जांच कर उन्हें आवश्यक सलाह दी गई, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।            शिविर में मौसमी बीमारियों जैसे सर्दी-खांसी, बुखार, खुजली, दस्त, कमजोरी और दर्द से पीड़ित मरीजों को भी उपचार और आवश्यक दवाइयां प्रदान की गईं। साथ ही ग्रामीणों को विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी दी गई और उन्हें अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर 80 ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना के तहत् आयुष्मान कार्ड भी वितरित किए गए।              इस स्वास्थ्य शिविर में 10 सदस्यीय स्वास्थ्य टीम ने सेवाएं दीं, जिसमें डॉ. बृजनंदन बनपुरिया, राजीव सिंह, डॉ. हेमेंद्र जुरी, प्रदीप देवांगन, सूरज साहू, रामनाथ उसेंडी, जयसिंह मांझी, नकुल पोटाई, कमलेश कुमार नाग और कु. चंद्रिका गोटा शामिल थे। शिविर का संचालन उप स्वास्थ्य केंद्र वाडापेंदा के माध्यम से किया गया।              दो दिवसीय सुशासन एक्सप्रेस कार्यक्रम के सफल आयोजन से ग्रामीणों को अपने ही क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हुईं। इससे न केवल लोगों को समय पर उपचार मिला, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ी। यह पहल दूरस्थ गांवों तक शासन की सेवाएं पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

किसानों की खुशहाली को मिला बल, अंतर राशि से शिक्षा और आवास कार्य को सहारा

रायपुर : कृषक उन्नति योजना से सशक्त हो रहे अन्नदाता किसानों की खुशहाली को मिला बल, अंतर राशि से शिक्षा और आवास कार्य को सहारा रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ऐसी प्रभावी नीतियों को अमल में लाया है, जिनसे अन्नदाताओं के जीवन में स्थायी और व्यापक परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं। इन पहलों ने न केवल किसानों की आय और आत्मविश्वास को सुदृढ़ किया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति और मजबूती प्रदान की है। सुशासन की प्रतिबद्धता को साकार करते हुए कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान विक्रय करने वाले किसानों को अंतर राशि का एकमुश्त भुगतान किया गया है।     मुख्यमंत्री  साय की मंशा के अनुरूप यह सुनिश्चित किया गया कि होली पर्व से पूर्व किसानों के खातों में राशि अंतरित की जाए, ताकि वे अपने परिवार के साथ त्यौहार हर्षोल्लास और सम्मान के साथ मना सकें। शासन के इस संवेदनशील निर्णय से कोरबा जिले के किसानों में विशेष उत्साह का माहौल है।     कोरबा जिले के ग्राम दादरखुर्द निवासी कृषक श्री शैलेन्द्र कुमार थवाईत ने इस वर्ष लगभग 32 क्विंटल धान का विक्रय किया, जिसके एवज में उन्हें 23 हजार 392 रुपये की अंतर राशि प्राप्त हुई। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार का यह निर्णय किसानों के हित में है और सही समय पर मिली राशि से उन्हें बड़ी राहत मिली है। वे इस राशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा तथा उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने में करेंगे, जिससे उत्पादन क्षमता और आय दोनों में वृद्धि होगी।     इसी प्रकार ग्राम कल्दामार के कृषक जिमी राठिया ने कहा कि होली से पूर्व राशि प्राप्त होना उनके लिए किसी उपहार से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि प्राप्त धनराशि का उपयोग घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति तथा प्रधानमंत्री आवास के निर्माण कार्य में किया जाएगा। शासन द्वारा समयबद्ध भुगतान किए जाने को उन्होंने किसानों के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक बताया।     कृषकों ने उन्होंने मुख्यमंत्री  साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ शासन के इस संवेदनशील और समयबद्ध निर्णय से किसानों के जीवन में स्थिरता और सुरक्षा की भावना बढ़ी है।  सरकार का यह प्रयास किसानों की समृद्धि ही प्रदेश की समग्र प्रगति का आधार है।