samacharsecretary.com

जशपुर के लिए मुख्यमंत्री का तोहफा: 4 प्रमुख सड़कों के लिए 12.69 करोड़ की मंजूरी

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले के सर्वांगीण विकास को नई गति देने के लिए जिले की चार प्रमुख सड़कों के निर्माण के लिए कुल 12 करोड़ 69 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इस निर्णय से ग्रामीण-शहरी संपर्क मजबूत होगा, आवागमन आसान बनेगा और क्षेत्र की आर्थिक प्रगति को बल मिलेगा। जशपुरवासियों ने मुख्यमंत्री के इस जनहितकारी फैसले पर उत्साह व्यक्त करते हुए श्री साय के प्रति गहरा आभार जताया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा स्वीकृत सड़क परियोजनाओं में 3 किमी लंबी कंडोरा से आराकोना पहुंच मार्ग के लिए 3 करोड़ 86 लाख रुपये, 3 किमी लंबी माडो से ढेंगनी पहुंच मार्ग के लिए 3 करोड़ 77 लाख रुपये, 1.9 किमी लंबी चराईडांड के मलेरिया बस्ती से एनएच-43 तक पहुंच मार्ग के लिए 2 करोड़ 20 लाख रुपये तथा 2.86 किमी लंबी बेहराखार अटल चौक से कुरूमढ़ोड़ा तक पहुंच मार्ग के लिए 3 करोड़ 76 लाख रुपये शामिल हैं। इन सड़कों के निर्माण से दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में यातायात सुगम होगा, जिससे व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हो जाएगी। दो वर्षों में 1000 करोड़ से अधिक की सड़क सौगात, ग्रामीण तस्वीर बदली उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने दो वर्ष के कार्यकाल में जशपुर जिले को सड़क निर्माण के लिए लगभग 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की है। इससे न केवल बुनियादी ढांचा मजबूत हुआ है, बल्कि ग्रामीण अंचलों की समग्र विकास की गति तेज हो गई है। राज्य शासन की इस विकासोन्मुखी नीति से जशपुर जैसे आदिवासी बहुल जिलों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है, जो छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस सौगात पर जशपुर के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद ज्ञापित किया है। लोगों का मानना है कि इन सड़कों से न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि क्षेत्र की पर्यटन क्षमता भी मजबूत होगी। छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल राज्य के हर कोने तक विकास पहुंचाने के संकल्प को साकार कर रही है। विष्णुदेव साय सरकार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ बुनियादी विकास के नए मानक गढ़ रहा है, जिससे लाखों नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं।

जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम, 10 स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट बनाएगा निगम

रायपुर राजधानी में लगातार गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए नगर निगम ने जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाया है. शहर में भू-जल स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा 10 स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट बनाए जाने की योजना तैयार की गई है. इस योजना के लिए लगभग 50 लाख रुपये का प्रस्ताव केंद्रीय जल आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजा गया है. नगर निगम के जल विभाग के अनुसार, प्रत्येक रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट पर करीब 5 लाख रुपये की लागत आएगी. इन पिटों के जरिए वर्षा जल को संग्रहित कर सीधे जमीन में पहुंचाया जाएगा, जिससे भू-जल का पुनर्भरण हो सके. फिलहाल शहर में उपयुक्त स्थानों का चिन्हांकन किया जा रहा है. कई इलाकों में काफी नीचे चला गया है जल स्तर नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक रायपुर में भू-जल स्तर तेजी से गिर रहा है. कचना, सड्डू और सेजबहार जैसे क्षेत्रों में जल स्तर 800 से 1000 फीट तक पहुंच गया है. इससे बोरवेल की गहराई बढ़ रही है और जल आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव भी लगातार बढ़ रहा है. 62 एकड़ क्षेत्र में पहले से विकसित है रेन वाटर हार्वेस्टिंग इससे पहले भी नगर निगम द्वारा दलदल सिवनी क्षेत्र में लगभग 62 एकड़ में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली विकसित की जा चुकी है. इंदिरा स्मृति वन के पास बनाए गए परकोलेशन टैंकों में मानसून के दौरान वर्षा जल को एकत्र कर जमीन में समाहित किया जाएगा. विशेषज्ञों के अनुसार इस व्यवस्था से करीब 21 करोड़ लीटर पानी का भंडारण संभव है. नगर निगम का मानना है कि वर्षा जल संरक्षण से भविष्य में जल संकट को काफी हद तक रोका जा सकता है. निगम आयुक्त विश्वदीप ने बताया कि प्रस्ताव को स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू किया जाएगा. साथ ही आने वाले समय में सरकारी भवनों और सार्वजनिक स्थलों पर भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं विकसित करने की योजना है.

सीएम साय बोले- दो सालों में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुआ जबरदस्त विकास, मेगा हेल्थ कैंप हुआ शुरू

रायपुर राजधानी रायपुर स्थित आयुर्वेदिक कॉलेज के परिसर में आज मेगा हेल्थ कैंप का मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुभारंभ किया. पांच दिनों तक चलने वाले इस मेगा कैंप में 45 से अधिक अस्पताल और देशभर के सुपरस्पेशलिस्ट कैंप से जुड़े हैं. मेगा कैंप का आयोजन कर रहे विधायक राजेश मूणत ने कहा कि यह स्वास्थ्य शिविर राजधानी रायपुर को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाओं से जोड़ने वाला ऐतिहासिक आयोजन होगा. उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन के सभी संबंधित विभाग इस सेवा अभियान में मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान कर रहे हैं, तथा रायपुर की अनेक सामाजिक संस्थाएं भी सक्रिय रूप से सहभागी हैं. भाजपा के सेवाभावी कार्यकर्ता शिविर में मरीजों की देखभाल की जिम्मेदारी संभालेंगे. उन्होंने कहा कि दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद सहित देशभर के सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर इस शिविर में सेवाएं देंगे, ताकि किसी भी व्यक्ति को बड़े महानगरों की यात्रा किए बिना उच्चस्तरीय परामर्श और उपचार मिल सके. उन्होंने यह भी बताया कि मेगा हेल्थ कैंप में श्री विनय मित्र मंडल के माध्यम से दिव्यांगों को कृत्रिम जयपुर पैर, हाथ कटे विकलांगों को कृत्रिम हाथ बनाकर दिए जाएंगे, साथ ही श्रवण यंत्र, ट्राइसिकल, वैशाखी भी प्रदान की जाएगी. मूणत ने 45 से अधिक सहयोगी अस्पतालों की सूची प्रस्तुत करते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर अस्पतालों का एक मंच पर आना अपने आप में एक अनूठी मिसाल है. कैंप में कैंसर, हृदय रोग, नेत्र रोग, स्त्री रोग, अस्थि रोग, बांझपन उपचार, आयुर्वेद और अन्य विधाओं से जुड़े डॉक्टरों की विस्तृत टीम निःशुल्क जांच, परामर्श, उपचार और दवाइयों का वितरण करेगी. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ने कहा कि मेघा हेल्थ कैंप के लिए राजेश मूणत और पूरी टीम को बधाई देता हूं. छठवीं बार ये कैंप हमने किया है, छत्तीसगढ़ को बने 25 साल हुआ है. छत्तीसगढ़ ने हर क्षेत्र में विकास किया है. हर क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने काम किया है. छत्तीसगढ़ में 15 मेडिकल कॉलेज हो गए हैं. स्वास्थ्य के क्षेत्र में 2 वर्ष में बहुत विकास हुआ है. विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि विधायक राजेश मूणत की पहचान पूरे छत्तीसगढ़ में बन गई है. इसे मैं राष्ट्रीय स्तर का हेल्थ कैंप कह सकता हूं. करीब 100 से ज्यादा चिकित्सक लगे हैं. ये शिविर इलाज से निदान तक पहुंचाने के लिए है. इस शिविर की खासियत है कि 40 से 50 समाजसेवी संगठनों के साथ डाक्टरों की टीम, छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ चिकित्सक यहां मौजूद हैं. इससे पहले मैने कभी नहीं देखा था. स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि रायपुर और पूरे प्रदेश के लिए आज का पवित्र है. एक तरफ बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती है, तो दूसरी ओर स्वास्थ्य का महाकुंभ लग रहा है. यहां 300 मीटर तक हॉस्पिटल ही हॉस्पिटल नजर आ रहा है. हमारा उद्देश्य है कि छत्तीसगढ़ में लोग स्वस्थ हों. मैं राजेश मूणत और उनकी टीम की प्रशंसा करता हूं. जांच के बाद इलाज की भी व्यवस्था होगी. आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराएंगे. मुख्यमंत्री स्वास्थ्य के प्रति सजग है. आयुर्वेदिक कॉलेज में आयोजित मेगा हेल्थ कैंप के उद्घघाटन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के अलावा मंत्री केदार कश्यप, मंत्री गुरु खुशवंत साहब सहित कई विधायक और जनप्रतिनिधि शामिल हुए.

धान खरीदी पर ब्रेक के हालात, बफर से ज्यादा स्टॉक, मिलर नहीं उठा रहे धान

गरियाबंद देवभोग के 10 और गोहरापदर ब्रांच के 17 समेत कुल 27 खरीदी केंद्रों में बफर लिमिट से ढाई गुना ज्यादा धान खरीदी हो गई. वहीं दूसरी ओर मिलरों भी धान उठाने से कतरा रहे हैं. स्थिति को देखते हुए शाखा प्रबंधकों ने उच्च कार्यालय को पत्र लिखकर उठाव की मांग करते हुए धान खरीदी बंद होने की आशंकाओं से अवगत करा दिया है. धान उठाव के लिए जिला विपणन अधिकारी को भेजे गए मांग पत्र के मुताबिक देवभोग के 10 खरीदी केंद्र में खरीदी की बफर लिमिट 1 लाख 2000 तय थी, पर यहां 2 लाख 41546 क्विंटल धान की खरीदी हो चुकी है. इसी तरह गोहरापदर ब्रांच के 17 खरीदी केंद्र की बफर लिमिट 1 लाख 69200 क्विंटल की है, लेकिन यहां 3 लाख 45214 क्विंटल धान की खरीदी हो गई है. केंद्रों में अब रखरखाव की समस्या आ रही है. देवभोग केंद्र के प्राधिकृत अधिकारी कुंज बिहारी बेहरा ने कहा कि तय लिमिट से कई गुना ज्यादा खरीदी होने से धान की रख-रखाव में समस्या आ रही है. खरीदी सुचारु रूप से चलता रहे उसके लिए उठाव की नितान्त आवश्यकता है. इस हफ्ते उठाव नहीं हुआ तो आने वाले सप्ताह से कई केंद्रों में खरीदी बंद करने की नौबत आ जाएगी. देवभोग बीएम अमरसिंह ठाकुर और गोहरापदर बीएम दुष्यन्त इंग्ले ने धान की मात्रा बफर लिमिट से पार होने की पुष्टि किया है. दोनों ब्रांच अफसरों ने बताया कि जिला विपणन और अपने नोडल को पत्र लिख कर समस्या से अवगत कराने की बात कही है. करोड़ों का भुगतान अटका, मिलर भी पीछे हट रहे संग्रहण केंद्र के अलावा डीओ के जरिए मिलरों से उठाव होता था. जिले में लगभग 60 मिलर थे, इनमें से अब तक 24 ने अनुबंध कराया. 22 ऐसे हैं, जिन्हें अपात्र श्रेणी में रख मॉड्यूल से ही लॉक कर दिया गया है. इसके अलावा फोर्टीफाइड चावल की राशि, पिछले साल हुए परिवहन चार्ज, कस्टम मिलिंग की बिलिंग का करोड़ों रुपए का भुगतान शासन से लंबित है, इसलिए कई मिलर धान उठाव के लिए अनुबंध करने में रुचि नहीं ले रहे हैं. सोमवार से शुरू होगी उठाव – डीएमओ जिला विपणन अधिकारी किशोर चंद्रा ने कहा कि ट्रांसपोर्टर से अनुबंध के बाद राज्य कमेटी के एप्रूवल की प्रकिया हो रही थी, लेकिन अब पूरी हो गई है. कुछ जगहों पर उठाव शुरू हो चुकी थी. सोमवार से देवभोग क्षेत्र से उठाव करेंगे. मिलरो की संख्या कम है. मौजूद 56 में से 24 ने ही अनुबंध कराया है. ऐसे में पड़ोसी जिले के मिलर से भी जल्द अनुबंध कराया जाएगा, ताकि उठाव प्रकिया तेजी से बढ़ सके. गरियाबंद में कुछ मिलर्स के भौतिक सत्यापन के दौरान कस्टम मिलिंग के लिए दिए गए धान की मात्रा में कमी पाई गई थी, ऐसे में वे अपात्र की श्रेणी में हैं.

राज्यपाल डेका ने संत बाबा गुरु घासीदास जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की

रायपुर, राज्यपाल रमेन डेका ने संत बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती के अवसर पर लोकभवन में गुरु घासीदास जी के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। राज्यपाल डेका ने कहा कि गुरु घासीदास जी ने मानव समाज को प्रेम और सद्भावना का संदेश दिया और समाज में व्याप्त भेदभाव एवं असमानता को दूर कर समतामूलक समाज स्थापित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि गुरु घासीदास जी के विचार आज भी प्रासंगिक हैं और समाज को एकता और सद्भावना का मार्ग दिखाते हैं। इस अवसर पर लोकभवन के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी संत बाबा गुरु घासीदास के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।

आत्मसमर्पित माओवादियों की वापसी: छत्तीसगढ़ की नीति ने लौटाई उम्मीदें

रायपुर   छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशील और दूरदर्शी नक्सल पुनर्वास नीति ज़मीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव का सशक्त उदाहरण बन रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के स्पष्ट निर्देशों एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में सुकमा जिले के नक्सल पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित माओवादियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। आत्मसमर्पण करने वाल 25 युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट इस क्रम में 75 आत्मसमर्पित नक्सलियों को अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन तथा 25 युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट वितरित की गई। यह कार्यक्रम कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव एवं पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। 75 आत्मसमर्पित नक्सलियों को अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन कार्यक्रम के दौरान 75 पुनर्वासित युवाओं को सैमसंग गैलेक्सी M06 5G स्मार्टफोन प्रदान किए गए, जिनमें 50 मेगापिक्सल डुअल कैमरा तथा 5000 mAh फास्ट-चार्जिंग बैटरी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन स्मार्टफोनों के माध्यम से युवा अब डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास कार्यक्रमों, सरकारी योजनाओं तथा देश-दुनिया की जानकारी से सहजता से जुड़ सकेंगे। इसके साथ ही 25 पुनर्वासित युवाओं को मेसन किट प्रदान कर निर्माण क्षेत्र में रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया गया। यह पहल प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण सहित अन्य विकास कार्यों के लिए कुशल श्रमशक्ति तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आत्मसमर्पण करने वाले लोगों स्वरोजगार के नए अवसरों उपलब्ध कराने संकल्पित जिला प्रशासन ने बताया कि नक्सल पुनर्वास को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रखते हुए इसे आत्मनिर्भरता, सम्मान और सामाजिक समावेशन से जोड़ा जा रहा है। 5G स्मार्टफोन के माध्यम से पुनर्वासित युवा अब ऑनलाइन प्रशिक्षण, आधुनिक कृषि तकनीकों, छोटे व्यवसायों और स्वरोजगार के नए अवसरों को समझने और अपनाने में सक्षम होंगे। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी लोगों स्वरोजगार के नए अवसरों उपलब्ध कराने सरकार संकल्पित है। पुनर्वासित युवाओं ने साझा किए अनुभव पोलमपल्ली निवासी पुनर्वासित पोड़ियम भीमा ने बताया कि वे लगभग 30 वर्षों तक डीवीसी सदस्य के रूप में संगठन से जुड़े रहे। पुनर्वास के बाद उन्हें बेहतर आवास, भोजन और प्रशिक्षण की सुविधा मिल रही है। उन्होंने बताया कि वे राजमिस्त्री के साथ-साथ इलेक्ट्रीशियन और मैकेनिक का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर चुके हैं। पुवर्ती निवासी मुचाकी रनवती ने बताया कि वे 24 वर्षों तक एसीएम सदस्य के रूप में नक्सल संगठन से जुड़ी रहीं। पुनर्वास के बाद उन्होंने सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त किया और वर्तमान में राजमिस्त्री प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने परिजनों से मिलने का अवसर मिला तथा बस्तर ओलंपिक की संभागस्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रथम पुरस्कार भी प्राप्त किया। डब्बमरका, सुकमा निवासी गंगा वेट्टी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जिला प्रशासन द्वारा मोबाइल और मेसन किट मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जंगल के जीवन की तुलना में वर्तमान जीवन सुरक्षित और सम्मानजनक है। शिविर लगाकर उनका आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड एवं जॉब कार्ड बनाया गया तथा शासन की सभी योजनाओं का लाभ उन्हें मिल रहा है। सुकमा में की गई यह पहल इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ शासन की नीति केवल नक्सलवाद से मुकाबले तक सीमित नहीं है, बल्कि भटके हुए युवाओं को विश्वास, अवसर और सम्मान के साथ नया जीवन देने की ठोस कोशिश भी है। यह मॉडल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और सामाजिक समरसता की मजबूत नींव रख रहा है। इस अवसर पर जिले के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गुरु घासीदास जयंती पर दी बधाई, सामाजिक समरसता के संदेश को बताया कालजयी

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महान समाज सुधारक और आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक बाबा गुरु घासीदास की 18 दिसम्बर को जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास ने अपने दिव्य उपदेशों और आचरण से समाज को सत्य, अहिंसा, समानता और सामाजिक सद्भाव के मार्ग पर अग्रसर किया. उनका अमर संदेश “मनखे-मनखे एक समान” केवल एक विचार नहीं, बल्कि मानवता को जोड़ने वाला ऐसा जीवन-दर्शन है, जो भेदभाव रहित, न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज की मजबूत नींव रखता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास ने छत्तीसगढ़ की धरती पर सामाजिक एवं आध्यात्मिक जागरण की सुदृढ़ आधारशिला रखी. उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों, असमानताओं और अंधविश्वासों के विरुद्ध चेतना जगाते हुए नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना की और जनमानस को आत्मसम्मान एवं मानवीय गरिमा का बोध कराया. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बाबा का जीवन-दर्शन करुणा, सहिष्णुता, प्रेम, सत्यनिष्ठा और परस्पर सम्मान जैसे मानवीय गुणों के विकास का मार्गदर्शक है. उनके विचार और आदर्श समय की कसौटी पर खरे उतरते हुए आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और वर्तमान समाज के लिए प्रेरणा का सशक्त स्रोत बने हुए हैं. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे बाबा गुरु घासीदास के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें तथा सामाजिक समरसता, शांति और सौहार्द के साथ एक समृद्ध एवं समावेशी छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं.

मुख्यमंत्री साय बोले—वंदे मातरम् का इतिहास भारत की आत्मा और गौरव का प्रतीक

रायपुर राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने  वंदेमातरम के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वंदे मातरम्  देशप्रेम का वह जज्बा था जिसकी गूंज से ब्रिटिश हुकूमत तक कांप उठती थी। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह उद्घोष करोड़ों भारतीयों के हृदय में साहस, त्याग और बलिदान की अग्नि प्रज्वलित करता रहा। उन्होंने कहा कि यह वही स्वर था जिसने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने की शक्ति प्रदान की। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों को स्मरण करते हुए कहा कि भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, खुदीराम बोस सहित असंख्य क्रांतिकारी वंदे मातरम् का जयघोष करते हुए मां भारती के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर चढ़ गए। उनका बलिदान आज भी हर भारतीय को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वंदे मातरम् की गौरव गाथा का स्मरण करना हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। यह गीत हमें उस संघर्ष, उस पीड़ा और उस अदम्य साहस की याद दिलाता है, जिसने भारत को स्वतंत्रता दिलाई। यह हमारी राष्ट्रीय चेतना का आधार स्तंभ है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं होती, जो मानचित्र पर अंकित होती हैं। किसी राष्ट्र की वास्तविक पहचान उसकी सभ्यता, संस्कृति, परंपराओं और उन मूल्यों से होती है, जो सदियों से उसके आचार-विचार और जीवन पद्धति का हिस्सा रहे हैं। भारत की यह सांस्कृतिक निरंतरता विश्व में अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा आयोजित करने का उद्देश्य यह भी है कि हम इतिहास की उन गलतियों को कभी न भूलें, जिन्होंने देश को गहरे घाव दिए, जिनकी पीड़ा आज भी हमारे समाज में कहीं-न-कहीं महसूस की जाती है। इतिहास से सीख लेकर ही हम एक सशक्त और समरस भारत का निर्माण कर सकते हैं। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के उन सभी वीर सपूतों को नमन किया, जिन्होंने वंदे मातरम् के भाव को अपने जीवन का लक्ष्य बनाकर भारत माता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् हमें हमारी विरासत, हमारी सांस्कृतिक चेतना और हजारों वर्षों की सभ्यता से जोड़ता है। यह उन आदर्शों की सामूहिक अभिव्यक्ति है, जिन्हें हमने युगों-युगों में आत्मसात किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में धरती को माता के रूप में पूजने की भावना रही है, जिसे हम मातृभूमि कहते हैं। वंदे मातरम् इसी भाव का सशक्त और पवित्र स्वरूप है, जो हमें प्रकृति, भूमि और राष्ट्र के प्रति सम्मान और कर्तव्यबोध सिखाता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस विशेष चर्चा के आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष तथा सभी  सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे विमर्श नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और ऐतिहासिक चेतना से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

श्रद्धालुओं की बस दुर्घटनाग्रस्त: तिरुपति यात्रा के दौरान एक की मौत

जगदलपुर भानपुरी थाना क्षेत्र के ग्राम तारागांव में गुरुवार सुबह एक दर्शनार्थी बस अनियंत्रित होकर पेड़ से जा टकराई. हादसे में राजनांदगांव निवासी तामेश्वर साहू की मौत हो गई, जबकि बस में सवार अन्य दर्शनार्थी घायल हो गए. जानकारी के अनुसार, दुर्ग से करीब 30 से अधिक लोगों को लेकर तिरुपति जा रही बस गुरुवार सुबह लगभग 5–6 बजे तारागांव के पास पहुंची थी. इस दौरान चालक को झपकी आने से बस का संतुलन बिगड़ गया और दुर्घटना का शिकार हो गई. घटना की सूचना मिलते ही भानपुरी थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल भिजवाया गया. मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज परिजनों को सूचना दे दी गई है. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है.

GST विभाग की बड़ी कार्रवाई: नवीन इंजीनियरिंग वर्क्स में छापेमारी, रिकॉर्ड खंगाले गए

अंबिकापुर शहर के एमजी रोड स्थित नवीन इंजीनियरिंग संस्थान में जीएसटी विभाग ने छापेमार कार्रवाई की है. जीएसटी विभाग के अधिकारी लगातार 12 घंटे तक दस्तावेजों और उपकरणों की जांच करते रहे. जीएसटी विभाग की टीम ने रेड कार्रवाई में फर्म से संबंधित दस्तावेज और बिजली उपकरण ज्बत किया है. जानकारी के अनुसार, नवीन इंजीनियरिंग संस्थान मशीन मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ विभिन्न सरकारी विभागों में सामग्री सप्लाई का कार्य करता है. छापेमारी के दौरान विभागीय टीम ने संस्थान से बड़ी मात्रा में बिल, वाउचर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं. हालांकि, अधिकारियों ने फिलहाल किसी भी तरह की अनियमितता या कार्रवाई के निष्कर्ष पर टिप्पणी करने से इंकार करते हुए इसे नियमित प्रक्रिया बताया है. गौरतलब है कि अंबिकापुर में जीएसटी विभाग द्वारा लगातार जांच और कार्रवाई की जा रही है, जिससे व्यापारिक प्रतिष्ठानों में हलचल का माहौल बना हुआ है.