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छत्तीसगढ़ रेरा ने नक्शे से हटकर निर्माण पर प्रमोटर पर लगाया 10 लाख का जुर्माना

रायपुर. रायपुर की आवासीय परियोजना ‘वॉलफोर्ट एलेन्सिया’ के प्रमोटर के खिलाफ छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने सख्त कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने रियल एस्टेट अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए प्रमोटर पर 10 लाख रुपए का आर्थिक दंड लगाया है। रेरा में हुई सुनवाई के दौरान सामने आया कि परियोजना का विकास नगर और ग्राम निवेश विभाग की ओर स्वीकृत ले-आउट के अनुसार नहीं किया गया। जांच में यह पाया गया कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण तय नक्शे से हटकर किया गया है, जो अधिनियम की धारा 14(1) का उल्लंघन है। इस धारा के तहत किसी भी परियोजना में निर्माण कार्य केवल अनुमोदित योजना और निर्देशों के अनुसार करना अनिवार्य होता है। प्राधिकरण ने यह भी ध्यान में रखा कि वर्तमान में उक्त एसटीपी का उपयोग परियोजना के आवंटित लोग कर रहे हैं। आवंटितियों के हितों और रोजमर्रा की सुविधाओं को प्रभावित न करने के उद्देश्य से फिलहाल एसटीपी को तोड़ने या दोबारा निर्माण करने का निर्देश नहीं दिया गया। इसके बावजूद, बिना अनुमति ले-आउट में बदलाव को गंभीर चूक मानते हुए प्रमोटर को दोषी ठहराया गया है। रेरा ने स्पष्ट किया है कि स्वीकृत ले-आउट या योजनाओं में सक्षम प्राधिकरण की पूर्व अनुमति के बिना किया गया कोई भी परिवर्तन कानूनन अपराध है और ऐसे मामलों में आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह फैसला रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और नियमों के सख्त पालन का संदेश देता है।

छत्तीसगढ़ में GPM के मनोज कुमार खिलारी बने नए एसपी

रायपुर. गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पुलिस महकमे को नया नेतृत्व मिल गया है। राज्य शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी मनोज कुमार खिलारी को गौरेला-पेंड्रा-मरवाही का नया पुलिस अधीक्षक (एसपी) नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे दूसरी वाहिनी बिलासपुर में कमांडेंट के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। जिले के पूर्व पुलिस अधीक्षक एस. आर. भगत 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो गए थे, जिसके बाद से एसपी का पद रिक्त चल रहा था। प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मनोज कुमार खिलारी एक अनुशासित और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं। उनके पास पुलिसिंग के क्षेत्र में और बल प्रबंधन का व्यापक अनुभव है। उम्मीद जताई जा रही है कि उनके नेतृत्व में जिले की कानून-व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। नए एसपी द्वारा अपराध नियंत्रण, यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने और आम जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। नवनियुक्त एसपी शीघ्र ही जिले का पदभार ग्रहण करेंगे, जिसके बाद से पुलिसिंग व्यवस्था में नई सक्रियता और सख्ती देखी जा सकती है।

छत्तीसगढ़ में वरिष्ठ नागरिकों को आधार कार्ड एवं अन्य वैध दस्तावेजों से मिल रहा योजनाओं का लाभ

रायपुर. छत्तीसगढ़ शासन वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा और समग्र कल्याण के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। समाज कल्याण विभाग के माध्यम से राज्य में वृद्धजनों के लिए सुनियोजित, व्यापक एवं सतत सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ संचालित की जा रही हैं, जिनका लाभ पात्र वरिष्ठ नागरिकों को बिना किसी पृथक “सीनियर सिटीजन कार्ड” के उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य शासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए अलग पहचान पत्र की आवश्यकता नहीं है, बल्कि आधार कार्ड एवं अन्य वैध दस्तावेजों के माध्यम से आयु एवं पात्रता का सत्यापन कर योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इससे प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और सुगम बनी है। 26 वृद्धाश्रमों के माध्यम से सुरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन राज्य में वर्तमान में 26 वृद्धाश्रम संचालित हैं, जहाँ निराश्रित, असहाय एवं देखभाल की आवश्यकता वाले वृद्धजनों को निःशुल्क आवास, पौष्टिक भोजन, वस्त्र एवं आवश्यक मूलभूत सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। यह व्यवस्था ऐसे वरिष्ठ नागरिकों के लिए संबल बनी है, जिनके पास पारिवारिक या सामाजिक सहारा उपलब्ध नहीं है। 13 प्रशामक गृहों में विशेष देखभाल गंभीर रोगों से ग्रस्त एवं बिस्तर पर आश्रित वृद्धजनों के लिए राज्य में 13 प्रशामक गृह संचालित किए जा रहे हैं। यहाँ उन्हें निःशुल्क आवास, निरंतर देखभाल, उपचार सहयोग एवं सहायक सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे अत्यंत संवेदनशील वृद्धजनों को मानवीय और सम्मानजनक जीवन मिल सके। वृद्धावस्था पेंशन से आर्थिक संबल सामाजिक सुरक्षा के तहत समाज कल्याण विभाग द्वारा बीपीएल एवं एसईसीसी वंचन समूह के पात्र वृद्धजनों को 500 रुपए प्रतिमाह तथा 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के वृद्धजनों को 680 रुपए प्रतिमाह वृद्धावस्था पेंशन नियमित रूप से दी जा रही है। यह पेंशन वृद्धजनों को न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा और आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन में सहायक सिद्ध हो रही है। सहायक उपकरण और तीर्थ यात्रा से जीवन में नई ऊर्जा राज्य शासन द्वारा आवश्यकता के अनुरूप वृद्धजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे दैनिक जीवन में अधिक आत्मनिर्भर बन सकें। साथ ही, वरिष्ठ नागरिकों के सामाजिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक सशक्तिकरण के लिए 19 प्रमुख तीर्थ स्थलों की तीर्थ यात्रा योजना भी संचालित की जा रही है। समग्र संरक्षण की दिशा में निरंतर प्रयास छत्तीसगढ़ शासन का स्पष्ट संदेश है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए समग्र सामाजिक सुरक्षा, संरक्षण और सहभागिता सुनिश्चित करना राज्य की प्राथमिकता है। पेंशन, आवास, स्वास्थ्य देखभाल, सहायक सुविधाएँ और सामाजिक जुड़ाव के माध्यम से राज्य अपने वरिष्ठ नागरिकों को गरिमापूर्ण, सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन प्रदान करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।

छत्तीसगढ़ में वन संरक्षण हेतु वन विभाग ले रहा प्रबंधन समितियों की बैठकें

रायपुर. राज्य में वन संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा के लिए वन विभाग लगातार कार्य कर रहा है। इसके बावजूद कहीं-कहीं वन एवं वन्यजीव अपराध, वनाग्नि तथा वन अतिक्रमण की घटनाएँ सामने आती हैं। इन पर प्रभावी नियंत्रण और वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वन मंत्री श्री केदार कश्यप द्वारा वन विभाग के अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें की जा रही हैं तथा आवश्यक निर्देश दिए जा रहे हैं। वन एवं वन्यजीव अपराधों में कमी लाने जनजागृति अभियान वन मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व में तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री अरुण कुमार पाण्डेय के निर्देशानुसार 02 जनवरी को सरगुजा वनमण्डल अंतर्गत लगभग 300 वन प्रबंधन समितियों (जॉइंट फॉरेस्ट मैनेजमेंट कमेटी) की बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य वन संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना रहा। बैठकों में वन एवं वन्यजीव अपराधों में कमी लाने, वनाग्नि की रोकथाम, वन अतिक्रमण पर नियंत्रण तथा स्थानीय स्तर पर सतत आजीविका के अवसर सृजित करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। 7 हजार से अधिक वन प्रबंधन समितियाँ कार्यरत इसी क्रम में कटघोरा वनमण्डल अंतर्गत कोनकोना, बरपाली एवं मड़ई वन प्रबंधन समितियों के साथ भी बैठक आयोजित की गई। बैठक में समिति अध्यक्ष, सदस्य, ग्राम सरपंच एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे। सभी ने वनों में अवैध कटाई, अवैध खनन, अतिक्रमण एवं अवैध शिकार की रोकथाम तथा वनाग्नि से सुरक्षा के लिए सहयोग करने का संकल्प लिया। समिति सदस्यों को वनों की सुरक्षा, संरक्षण एवं संवर्धन में उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया गया। उल्लेखनीय है कि राज्य में 7,000 से अधिक वन प्रबंधन समितियाँ कार्यरत हैं, जिनके माध्यम से सहभागी वन प्रबंधन को मजबूती मिलती है। ये समितियाँ वन विभाग और स्थानीय समुदाय के बीच समन्वय स्थापित करती हैं तथा वनों के संरक्षण, संसाधनों के सतत उपयोग और ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे वन प्रबंधन प्रणाली अधिक प्रभावी, पारदर्शी और दीर्घकालिक बन रही है।

छत्तीसगढ़ में अपराधियों पर सख्त कार्रवाई करने वन विभाग दे रहा विधिक साक्षरता प्रशिक्षण

रायपुर. राज्य के वन क्षेत्रों में अवैध शिकार की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। कई मामलों में अपराधी पकड़े भी जाते हैं, लेकिन कभी-कभी वनकर्मियों को कानूनी प्रावधानों की पूरी जानकारी न होने के कारण अपराधियों के विरुद्ध मजबूत प्रकरण तैयार नहीं हो पाता, जिससे वे आसानी से छूट जाते हैं।  विधिक साक्षरता कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम ऐसी स्थिति से बचने और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वन मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व में तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय के निर्देशानुसार वन विभाग के कर्मचारियों के लिए विधिक साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में दिसंबर माह में वनमण्डल कार्यालय दुर्ग के सभागार में “प्रोटेक्ट टुडे एंड सिक्योर टुमारो” परियोजना के अंतर्गत एक दिवसीय विधिक साक्षरता कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें जिला न्यायालय दुर्ग के काउंसलर श्री चंद्राकर ने मुख्य वक्ता के रूप में वन एवं वन्यजीव संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी जानकारी दी। वन एवं वन्यजीव अपराधियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके इस प्रशिक्षण का उद्देश्य वनकर्मियों को वन कानूनों, नियमों और धाराओं की स्पष्ट जानकारी देना है, ताकि प्रकरणों को मजबूत बनाया जा सके और अपराधियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके। इसके लिए समय-समय पर संशोधित नियमों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी कार्यशालाओं के माध्यम से दी जा रही है। आरक्षित और संरक्षित वनों से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं की दी गई जानकारी कार्यक्रम के दौरान भारतीय वन अधिनियम, 1927 तथा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रमुख प्रावधानों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। विशेषज्ञों द्वारा आरक्षित और संरक्षित वनों से संबंधित कानूनी धाराओं तथा विभागीय कार्रवाई की प्रक्रियाओं को सरल भाषा में समझाया गया। साथ ही राजस्व क्षेत्रों में होने वाले वन अपराधों की रोकथाम और नियंत्रण के उपायों पर भी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के एक विशेष सत्र में नालसा के विशेषज्ञों ने अदालती मामलों के प्रबंधन से संबंधित “क्या करें और क्या न करें” पर व्यावहारिक सुझाव दिए, जिससे वनकर्मी विधिक प्रक्रियाओं का सही ढंग से पालन कर सकें। इस अवसर पर वन परिक्षेत्र अधिकारी दुर्ग एवं धमधा सहित वनमण्डल के समस्त कार्यपालिक और क्षेत्रीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे, जिन्हें वन्यजीव और वन संपदा की सुरक्षा हेतु विधिक रूप से सजग रहने के लिए प्रशिक्षित किया गया।

छत्तीसगढ़ में छेरछेरा तिहार पर्व है लोक परम्परा में दान और समर्पण की जीवंत मिसाल

रायपुर. घर-घर अन्न दान लेकर मंत्री टंक राम वर्मा ने निभाई छेरछेरा की परम्पराछत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परम्पराओं में विशेष स्थान रखने वाले छेरछेरा तिहार के अवसर पर राज्य के राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने धरसींवा विकासखंड के ग्राम तरपोंगी में पारंपरिक रूप से घर-घर जाकर अन्न दान ग्रहण किया। इस अवसर पर गांव में उत्साह, अपनत्व और लोक उल्लास का वातावरण देखने को मिला। मंत्री वर्मा ने छेरछेरा की परम्परा का निर्वहन करते हुए ग्रामीणों से आत्मीय भेंट की और अन्न दान स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि छेरछेरा तिहार छत्तीसगढ़ की आत्मा से जुड़ा पर्व है, जो समाज में समानता, सहयोग और दान की भावना को सशक्त करता है। यह लोक पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और सामाजिक समरसता का संदेश देता है। घर-घर अन्न दान लेकर मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने निभाई छेरछेरा की परम्परा मंत्री वर्मा ने कहा कि छेरछेरा केवल अन्न संग्रह का तिहार नहीं, बल्कि यह लोक संस्कृति, भाईचारे और मानवीय संवेदनाओं का उत्सव है। छत्तीसगढ़ की लोक परम्पराएं हमारी पहचान हैं और इन्हें संजोकर रखना हम सभी का दायित्व है। ऐसे पर्व समाज को जोड़ते हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराते हैं। इस अवसर पर ग्रामीणों ने पारंपरिक उल्लास के साथ मंत्री का स्वागत किया। गांव में छेरछेरा तिहार की रौनक देखते ही बन रही थी। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने पूरे उत्साह के साथ इस लोक पर्व में सहभागिता निभाई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि छेरछेरा छत्तीसगढ़ का लोकप्रिय पारंपरिक लोक-पर्व है, जिसे धान कटाई के बाद पौष मास (दिसंबर-जनवरी) में मनाया जाता है। यह पर्व राज्य की कृषि संस्कृति से गहराई से जुड़ा है। फसल कटने के उपरांत किसान ईश्वर और समाज के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता है। छेरछेरा मूल रूप से दान, सहयोग और आपसी भाईचारे का पर्व है। इस दिन गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग टोली बनाकर घर-घर जाते हैं और लोकगीत गाते हुए अन्न या दान मांगते हैं। दरवाजे पर पहुंचकर “छेरछेरा छेरछेरा, माई कोठी के धान ला हेरा…” का गायन किया जाता है, जिसका भाव यह होता है कि माता के भंडार में भरपूर धान है, उसमें से थोड़ा दान प्रदान करें।इकट्ठा की गई सामग्री का उपयोग सामूहिक भोज, जरूरतमंदों की सहायता एवं सामाजिक कार्यों में किया जाता है। यह पर्व अमीर-गरीब, जाति-धर्म के भेद को मिटाकर सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ाता है और नई पीढ़ी को साझा संस्कृति एवं लोक परम्पराओं से जोड़ता है।छेरछेरा तिहार के माध्यम से एक बार फिर छत्तीसगढ़ की लोक परम्पराओं की जीवंत झलक देखने को मिली, जिसने सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का सशक्त संदेश दिया।

घर-घर अन्न दान लेकर मंत्री टंक राम वर्मा ने निभाई छेरछेरा की परम्परा

रायपुर : छेरछेरा तिहार : सामाजिक समरसता और लोक संस्कृति का उत्सव घर-घर अन्न दान लेकर मंत्री टंक राम वर्मा ने निभाई छेरछेरा की परम्परा छेरछेरा तिहार : लोक परम्परा में दान और समर्पण की जीवंत मिसाल रायपुर घर-घर अन्न दान लेकर मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने निभाई छेरछेरा की परम्पराछत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परम्पराओं में विशेष स्थान रखने वाले छेरछेरा तिहार के अवसर पर राज्य के राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने धरसींवा विकासखंड के ग्राम तरपोंगी में पारंपरिक रूप से घर-घर जाकर अन्न दान ग्रहण किया। इस अवसर पर गांव में उत्साह, अपनत्व और लोक उल्लास का वातावरण देखने को मिला।      मंत्री श्री वर्मा ने छेरछेरा की परम्परा का निर्वहन करते हुए ग्रामीणों से आत्मीय भेंट की और अन्न दान स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि छेरछेरा तिहार छत्तीसगढ़ की आत्मा से जुड़ा पर्व है, जो समाज में समानता, सहयोग और दान की भावना को सशक्त करता है। यह लोक पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और सामाजिक समरसता का संदेश देता है।      मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि छेरछेरा केवल अन्न संग्रह का तिहार नहीं, बल्कि यह लोक संस्कृति, भाईचारे और मानवीय संवेदनाओं का उत्सव है। छत्तीसगढ़ की लोक परम्पराएं हमारी पहचान हैं और इन्हें संजोकर रखना हम सभी का दायित्व है। ऐसे पर्व समाज को जोड़ते हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराते हैं।       इस अवसर पर ग्रामीणों ने पारंपरिक उल्लास के साथ मंत्री का स्वागत किया। गांव में छेरछेरा तिहार की रौनक देखते ही बन रही थी। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने पूरे उत्साह के साथ इस लोक पर्व में सहभागिता निभाई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।       उल्लेखनीय है कि छेरछेरा छत्तीसगढ़ का लोकप्रिय पारंपरिक लोक-पर्व है, जिसे धान कटाई के बाद पौष मास (दिसंबर-जनवरी) में मनाया जाता है। यह पर्व राज्य की कृषि संस्कृति से गहराई से जुड़ा है। फसल कटने के उपरांत किसान ईश्वर और समाज के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता है।       छेरछेरा मूल रूप से दान, सहयोग और आपसी भाईचारे का पर्व है। इस दिन गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग टोली बनाकर घर-घर जाते हैं और लोकगीत गाते हुए अन्न या दान मांगते हैं। दरवाजे पर पहुंचकर “छेरछेरा छेरछेरा, माई कोठी के धान ला हेरा…”     का गायन किया जाता है, जिसका भाव यह होता है कि माता के भंडार में भरपूर धान है, उसमें से थोड़ा दान प्रदान करें।इकट्ठा की गई सामग्री का उपयोग सामूहिक भोज, जरूरतमंदों की सहायता एवं सामाजिक कार्यों में किया जाता है। यह पर्व अमीर-गरीब, जाति-धर्म के भेद को मिटाकर सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ाता है और नई पीढ़ी को साझा संस्कृति एवं लोक परम्पराओं से जोड़ता है।छेरछेरा तिहार के माध्यम से एक बार फिर छत्तीसगढ़ की लोक परम्पराओं की जीवंत झलक देखने को मिली, जिसने सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का सशक्त संदेश दिया।

3 IAS व 5 IPS अधिकारियों को पंजाब सरकार ने दी पदोन्नति

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने 3 (IAS) अधिकारियों को पदोन्नत किया है। यह पदोन्नति 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगी। जिन अधिकारियों को प्रमोट किया गया है, उनमें घनश्याम थोरी, कुमार अमित और विमल कुमार सेतिया के नाम शामिल हैं। जिन्हें पंजाब सरकार में सचिव स्तर पर पदोन्नत किया गया है। प्रवक्ता ने बताया कि ये तीनों अधिकारी आगामी आदेशों तक अपने वर्तमान पदों पर कार्य करते रहेंगे और उच्च वेतनमान का लाभ प्राप्त करेंगे। इसी तरह पंजाब सरकार ने चार IPS अधिकारियों को आईजीपी पद पर पदोन्नति दी है। आईजीपी पद पर पदोन्नत होने वाले IPS अधिकारियों में जगदाले नीलांबरी विजय, राहुल एस., बिक्रम पाल सिंह भट्टी, राजपाल सिंह शामिल हैं, जबकि  इंदरबीर सिंह का नाम आईजीपी पद के लिए सील्ड कवर में रखा गया है, क्योंकि उनके विरुद्ध आपराधिक एवं विभागीय कार्यवाही लंबित है। यह सील्ड कवर केवल कार्यवाही के अंतिम निपटारे के बाद ही खोला जाएगा। एक IPS अधिकारी को ADGP पद पर पदोन्नति पंजाब सरकार के गृह विभाग ने भारतीय पुलिस सेवा के एक अधिकारी को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) पद पर पदोन्नत करने के आदेश जारी किए हैं। जानकारी अनुसार कौस्तुभ शर्मा, IPS को यह पदोन्नति दी गई है। जबकि दो अधिकारियों के नाम सील्ड कवर में रखे गए हैं, जिनमें गौतम चीमा व परमराज सिंह उमरानंगल के नाम शामिल है। आदेश के अनुसार, संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध लंबित मामलों के निपटारे के बाद ही सील्ड कवर खोला जाएगा।

नक्सली बारसे देवा का तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर

सुकमा. नए साल की शुरुआत होते ही लाल आतंक को बड़ा झटका लगा है। शीर्ष नक्सली हिड़मा के करीबी और पीएलजीए कमांडर बारसे देवा ने आज शनिवार, 3 दिसंबर 2026 को तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। नक्सली कमांडर बारसे देवा के सरेंडर के बाद की सबसे पहली तस्वीर सामने आई है। तेलंगाना पुलिस जल्द ही देवा के सरेंडर की आधिकारिक घोषणा करने वाली है। आपको बता दें कि कल पीएलजीए कमांडर बारसे देवा के सरेंडर करने की सूचना मिली थी। बताया गया था कि आज वह तेलंगाना के डीजीपी के सामने हैदराबाद में आत्मसमर्पण करेंगे। बारसे देवा पर 50 लाख रुपये से अधिक का इनाम घोषित था। वह नक्सल संगठन के भीतर एक प्रभावशाली चेहरा माना जाता रहा है। हिड़मा के एनकाउंटर के बाद बारसे देवा को पीएलजीए का कमांडर बनाया गया था। इसके बाद से वह संगठन की सैन्य गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे थे। 2025 में तेलंगाना में घुसा देवा सूत्रों के अनुसार, यह समूह अक्टूबर 2025 में तेलंगाना के जंगलों में घुसा था और वरिष्ठ माओवादी बारे चोक्का राव उर्फ दामोदर के नेतृत्व वाली राज्य समिति के साथ मिलकर काम कर रहा था। तेलंगाना की खास ग्रेहाउंड्स फोर्स और खुफिया अधिकारियों द्वारा लगातार की गई घेराबंदी और तलाशी अभियानों ने उनकी गतिविधियों को सीमित कर दिया था। साथ ही, पुलिस के शीर्ष अधिकारियों द्वारा लगातार की गई अपीलें भी देवा के आत्मसमर्पण का कारण बनीं। बारसे देवा ने 2000 में माओवादी आंदोलन में कदम रखा था। 2003 तक, उसने छत्तीसगढ़ के पुव्वारथी में दंडकारण्य आदिवासी किसान मजदूर संघ के लिए काम किया। दिसंबर 2022 में, वह दंडकारण्य विशेष ज़ोनल समिति के सदस्य बने और जून 2023 में उन्हें PLGA का बटालियन कमांडर नियुक्त किया गया। सबसे खूंखार हमलों से जुड़ा था देवा देवा का सीपीआई (Maoists) के साथ 25 साल का जुड़ाव मध्य भारत के कुछ सबसे खूंखार हमलों से जुड़ा था। पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, उस पर 2013 में झीरम घाटी नरसंहार का आरोप है, जिसमें बस्तर में 27 कांग्रेस नेताओं की जान चली गई थी। इसके अलावा, अप्रैल 2021 में बीजापुर के टेकलगुडेम में हुए हमले में 22 पुलिसकर्मी मारे गए थे। 2006 से 2019 के बीच कम से कम पांच बड़े IED हमलों में भी उनका हाथ माना जाता है, जिसमें बीजेपी विधायक भीमा मंडावी की मौत वाला धमाका भी शामिल था। जांचकर्ताओं का मानना है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से 16 जनवरी 2025 को तेलंगाना के कुमारम भीम आसिफाबाद जिले में धर्माराम बेस पर हमला और 30 जनवरी को छत्तीसगढ़ के जीरमगुडा में सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले का नेतृत्व किया था।   बारसे देवा माओवादी पार्टी की सैन्य टुकड़ियों (सशस्त्र बलों) की गतिविधियों को संभाल रहा था। नक्सलियों की बटालियन नंबर 1 को संगठन की सबसे खतरनाक टीम माना जाता है, और इसका कमांडर बारसे देवा है। दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा इन तीन जिलों में बटालियन का ज्यादा प्रभाव रहा है। माओवादी पार्टी को हथियारों की सप्लाई में बारसे देवा की भूमिका बेहद अहम मानी जाती रही है। हिड़मा और बारसे देवा दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे हिड़मा पूवर्ती गांव का रहने वाला था। वहीं बारसे देवा भी सुकमा जिले के पूवर्ती गांव का रहने वाला है। करीब 2 साल पहले जब हिड़मा को सेंट्रल कमेटी में शामिल किया गया तो उसने ही बारसे देवा को PLGA बटालियन नंबर 1 का कमांडर बनाया था। देवा के साथ बड़ी संख्या में नक्सली थे। लेकिन अब पुलिस के बढ़ते दबाव और लगातार हो रहे एनकाउंटर के बाद से बटालियन भी लगभग टूट गई है। 3 जिलों में बटालियन का ज्यादा प्रभाव नक्सलियों की बटालियन नंबर 1 को नक्सल संगठन की सबसे खतरनाक टीम माना जाता है। दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा इन 3 जिलों में बटालियन का ज्यादा प्रभाव रहा है। हालांकि, अब फोर्स ने इस टीम को काफी बैकफुट कर दिया है। इस टीम में AK-47, इंसास, SLR, स्नाइपर गन जैसे हथियारों से लैस सैकड़ों नक्सली थे। टेकलगुडेम, बुरकापाल, मिनपा, ताड़मेटला, टहकवाड़ा में नक्सलियों की इसी टीम ने बड़े हमले किए थे। जिसमें सैकड़ों जवानों की शहादत हुई है। हालांकि, अब ये टीम भी कमजोर हो गई है। अब देवा सरेंडर करना चाह रहा है। जानकारी ये भी है कि किसी माध्यम से उसने अपना संदेश बाहर भी भिजवाया है। देवा सरेंडर करता है तो उसकी बटालियन टूट जाएगी। इसका नेतृत्व करने वाला कोई नक्सली नहीं रहेगा। गृह मंत्री ने मां से की थी मुलाकात दरअसल, छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा कुछ दिन पहले पूवर्ती गांव गए थे। वहां उन्होंने देवा और हिड़मा इन दोनों की मां से मुलाकात की थी। इनके माध्यम से उनसे सरेंडर करने की अपील की थी। वहीं हिड़मा नहीं माना और आंध्र प्रदेश के जंगल में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में पत्नी राजे समेत 6 साथियों के साथ मारा गया। जिसके बाद अब देवा बारसे छत्तीसगढ़ में सरेंडर करने की कोशिश कर रहा है। 15 में से 7 एरिया कमेटी बची, डिवीजन भी खत्म बस्तर IG सुंदरराज पी के मुताबिक बस्तर में नक्सलियों की कुल 7 डिवीजन और 15 एरिया कमेटी सक्रिय थी। माड़ डिवीजन, केशकाल और दरभा डिवीजन में नक्सली लगभग खत्म हो गए हैं। पश्चिम बस्तर डिवीजन में कुछ नक्सली हैं। लेकिन अब 7 एरिया कमेटी में कुछ छिटपुट नक्सली ही बचे हैं। दंडकारण्य इलाके में महज 120 से 150 सशस्त्र नक्सली ही सक्रिय हैं। ये नक्सली खत्म हुए तो नक्सलवाद लगभग खत्म हो जाएगा।

विभागीय जांच में पकड़े गए 4 कथित कर्मचारी

खैरागढ़. राज्य शिक्षा आयोग के नाम से जारी फर्जी आदेशों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाया है. जांच में दोषी पाए गए टीकमचंद साहू, फगेंद्र सिंहा, रजिया अहमद और अजहर अहमद को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है. विभागीय जांच में सामने आया कि वर्ष 2021 में इन चारों की नियुक्ति सहायक ग्रेड-3 और संबंधित पदों पर जिन आदेशों के आधार पर हुई थी, वे आधिकारिक रूप से जारी ही नहीं किए गए थे. दस्तावेजों की सत्यता परखने पर पत्र क्रमांक और हस्ताक्षर विभागीय अभिलेखों से मेल नहीं खाए. मामले के खुलासे के बाद सभी कर्मचारियों से जवाब-तलब किया गया, लेकिन प्रस्तुत स्पष्टीकरण और दस्तावेज नियुक्ति को वैध सिद्ध नहीं कर सके. इसके बाद शिक्षा विभाग ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए चारों को सेवा से पृथक करने का आदेश जारी किया. यह मामला सामने आने के बाद विभागीय नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और सत्यापन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.