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लाल आतंक को बड़ा झटका: छत्तीसगढ़ में 34 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, कुल इनाम 84 लाख

बीजापुर  छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में मंगलवार को सात महिलाओं समेत 34 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें आठ-आठ लाख रुपये के इनामी पांच प्रमुख नक्सली भी शामिल हैं। इनमें में 45 वर्षीय पांड्रू पुनेम, 25 वर्षीय रुकनी हेमला, 22 वर्षीय देवा उइका, 27 वर्षीय रामलाल पोयम और 21 वर्षीय मोटू पुनेम शामिल हैं। बीजापुर जिले के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र यादव ने बताया कि इनमें से 26 नक्सलियों पर सामूहिक रूप से 84 लाख रुपये का इनाम था। उन्होंने कहा कि पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को कौशल विकास प्रशिक्षण और 50 हजार रुपये की तत्काल सहायता प्रदान की जाएगी। सात महिलाओं ने भी किया सरेंडर बीजापुर जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) जितेंद्र यादव ने बताया कि 7 महिलाओं सहित 34 नक्सलियों ने यहां वरिष्ठ पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के अधिकारियों के समक्ष सरेंडर किया। उन्होंने बताया कि यह नक्सली माओवादियों की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी, तेलंगाना राज्य कमेटी और आंध्र ओडिशा सीमा डिवीजन में सक्रिय थे। अधिकारी ने बताया कि सरेंडर करने वाले प्रमुख नक्सलियों में पांड्रू पुनेम (45), रुकनी हेमला (25), देवा उइका (22), रामलाल पोयम (27) और मोटू पुनेम (21) शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक पर आठ लाख रुपये का इनाम है।  सरकार की ओर से दी जाएंगी सुविधाएं एसपी जितेंद्र यादव ने बताया कि पुनर्वास नीति के तहत, सरेंडर करने वाले कैडरों को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से प्रदान की जाने वाली अन्य सुविधाओं जैसे कौशल विकास प्रशिक्षण और अन्य सुविधाओं के साथ-साथ 50 हजार रुपये की तत्काल सहायता प्रदान की जाएगी। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति माओवादियों को हिंसा छोड़ने के लिए आकर्षित कर रही है। एसपी जितेंद्र यादव ने कहा कि सरेंडर करने वालों नक्सलियों के परिवार भी चाहते हैं कि वे सामान्य जीवन जिएं और समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलें। दो साल में 2200 से अधिक नक्सलियों ने किया सरेंडर एसपी ने बताया कि सरकार की सरेंडर और पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर, पिछले दो सालों में दंतेवाड़ा जिले में 824 माओवादियों ने हिंसा छोड़ दी है और मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। पुलिस ने बताया कि पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में शीर्ष माओवादियों सहित 2200 से अधिक नक्सलियों ने सरेंडर किया है। केंद्र सरकार ने मार्च, 2026 तक देश से नक्सलवाद को खत्म करने का संकल्प लिया है। सरेंडर करने वाले नक्सली पंडरू पूनेम उर्फ संजू (45), बीजापुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के मेटापाल एर्रापारा का रहने वाला. इनाम- 8 लाख रुपये. रूकनी हेमला (25), बासागुड़ा थाना क्षेत्र के कोरसागुड़ा मेटापारा गांव निवासी. इनाम- 8 लाख रुपये. देवा उईका (22), बासागुड़ा के सुकनपल्ली कुंजामपारा गांव निवासी. इनाम- 8 लाख रुपये. रामलाल पोयाम उर्फ रामलू (27), जांगला थाना क्षेत्र के कोतरापाल काकड़पारा निवासी. इनाम- 8 लाख रुपये. मोटू पुनेम उर्फ रवि (21), हिरोली सरपंचपारा निवासी. इनाम- 8 लाख रुपये. मीना माड़वी उर्फ जमली (26), एड़समेटा कड़ियापारा निवासी. इनामी- 5 लाख रुपये. सुदरू पुनेम (27), एड़समेटा निवासी. इनाम- 5 लाख रुपये लिंगे कुंजाम उर्फ सुमित्रा (25), दुरनदरभा कुरसमपारा निवासी, सुकमा. इनाम- 5 लाख रुपये. पाले उईका (25), मल्लेपल्ली स्कूलपारा निवासी बीजापुर. इनाम- 2 लाख रुपये. सुखराम उरसा उर्फ गंगा (21), तुर्रेनार सरपंचपारा निवासी बीजापुर. इनाम- 2 लाख रुपये. दिनेश करटाम उर्फ बामड़ा (30), दुरधा डोडरेपारा निवासी बीजापुर. इनाम- 2 लाख रुपये. शंकर पोडियाम (25), परकेली स्कूलपारा निवासी बीजापुर. इनाम- 2 लाख रुपये. सुखराम पोडियम (25), हकवा बोटेमपारा निवासी बीजापुर. इनाम- 2 लाख रुपये मुन्ना पोयाम (35), जप्पेली स्कूलपारा निवासी बीजापुर. इनामी- 2 लाख रुपये. सुखमती बोड्डू (39), कमकानार तेलगापारा निवासी बीजापुर. इनाम- 2 लाख रुपये. लक्ष्मण गोंदे उर्फ डेंगा (25), पदमुर नदीपारा निवासी, बीजापुर. इनाम 2 लाख रुपये. लक्ष्मण हेमला (31), घुमरा थना नैमेड़ जिला बीजापुर इनाम- 2 लाख रुपये अर्जुन बोड्डू (29), कमकानार तेलगापारा थाना गंगालूर जिला बीजापुर इनाम- 2 लाख रुपये. पण्डरू मड़कम उर्फ सलीम (30), कोतरापाल लक्खापारा थाना जांगला जिला बीजापुर इनाम- 1 लाख रुपये. राजू कुरसम उर्फ दुरूम (22) ईसुलनार स्कूलपारा थाना गंगालूर जिला बीजापुर इनाम- 1 लाख रुपये. सोमारू मड़कम (25) कोतरापाल काकडीपारा थाना जांगला जिला बीजापुर इनाम- 1 लाख रुपये. संतो पोड़ियाम ऊर्फ संतोषी (20) पोंदुम कर्रेपारा थाना भैरमगढ़ जिला बीजापुर इनाम- 1 लाख रुपये. हिड़मा माड़वी ऊर्फ गुडडी (20) कोतरापाल लक्खापारा थाना जांगला जिला बीजापुर इनाम- 1 लाख रुपये. सुखमती उरसा (26) पोमरा पटेलपारा थाना मिरतुर जिला बीजापुर इनाम- 1 लाख रुपये. चमरू ओयाम (46) पदमुर सरपंचपारा थाना गंगालूर जिला बीजापुर इनाम- 1 लाख रुपये. पण्डरू बड़दी (47), बीजापुर पायकू ओयाम (45), बीजापुर सुखराम तेलम (33), बीजापुर जग्गू पोडियम (19), बीजापुर सन्नू कुरसम (18), बीजापुर राजू हेमला (40), बीजापुर फगनू मड़कम (21), बीजापुर सुरेश कुरसम (20), बीजापुर मोती उरसा (30), बीजापुर एसपी ने की नक्सलियों से ये अपील बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने माओवादियों से अपील करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति माओवादियों को आकर्षित कर रही है. पुनर्वास करने वालों के परिजन भी चाहते हैं कि वे सामान्य जीवन जियें और समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें. उन्होंने आगे कहा कि माओवादी भ्रामक और हिंसक विचारधाराओं को त्यागकर निर्भय होकर समाज की मुख्यधारा में लौटें. सरकार की ‘पूना मारगेम' नीति उनके भविष्य को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वावलंबी बनाने के लिए हर संभव सुविधा प्रदान कर रही है. सीएम ने भी नक्सलियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की     नक्सलियों के समर्पण पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी एक्स पर पोस्ट किया. उन्होंने लिखा, "पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन, बस्तर में शांति की ओर निर्णायक कदम. बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में आज एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ी है. बीजापुर जिले में ₹84 लाख के इनामी 34 माओवादी कैडरों ने हिंसा और लाल आतंक का रास्ता छोड़कर भारतीय संविधान में आस्था जताते हुए समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है.     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति के अनुरूप छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर ठोस और मानवीय प्रयास कर रही है. ‘पूना मारगेम' नीति ने यह सिद्ध किया है कि संवाद, संवेदनशीलता और विकास हिंसा से कहीं अधिक प्रभावी समाधान हैं. यह आत्मसमर्पण केवल हथियार छोड़ने का नहीं, बल्कि भय से मुक्त होकर सम्मानजनक जीवन की ओर लौटने का निर्णय है.     … Read more

छत्तीसगढ़ सरकार की बड़ी सर्जरी: 11 IAS ट्रांसफर, सरगुजा और कोरबा को मिले नए कलेक्टर

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने मंगलवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। 11 IAS अफसरों का तबादला हुआ है। भोसकर विलास को अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी बनाया गया है। इसके अलावा 6 जिलों के कलेक्टर भी बदले गए हैं। इनमें सरगुजा, कोरबा, दंतेवाड़ा, सुकमा, बेमेतरा और नारायणपुर शामिल हैं। कलेक्टरों के तबादले का आदेश मंगलवार को गृह विभाग द्वारा जारी किया गया है। कोरबा जिले के कलेक्टर रहे अजीत वसंत को सरगुजा का नया कलेक्टर बनाया गया है। कुणाल दुदावत को दंतेवाड़ा से हटाकर कोरबा का कलेक्टर नियुक्त किया गया है। देवेश कुमार ध्रुव को सुकमा से ट्रांसफर कर दंतेवाड़ा जिले का कलेक्टर बनाया गया है। बेमेतरा और नारायणपुर जिले में भी बदलाव सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रतिष्ठा ममगाई को नारायणपुर से ट्रांसफर कर बेमेतरा का कलेक्टर बनाया है। वहीं नम्रता जैन को रायपुर से हटाकर नारायणपुर जिले की नई कलेक्टर नियुक्त किया गया है। अमित कुमार को नगर निगम बिलासपुर के आयुक्त पद से हटाकर सुकमा जिले का कलेक्टर बनाया गया है। अमित कुमार की जगह पर प्रकाश कुमार सर्वे को नगर निगम बिलासपुर का नया आयुक्त नियुक्त किया गया है। स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम में फेरबदल बेमेतरा के कलेक्टर रहे रणबीर शर्मा को नई जिम्मेदारी देते हुए उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) का प्रबंध संचालक बनाया गया है। उनके पदभार संभालने के बाद संजीव कुमार झा को एनएचएम के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। जिला पंचायत और मंत्रालय में भी तबादले प्रशासनिक आदेश के तहत गजेन्द्र सिंह ठाकुर को जिला पंचायत धमतरी का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। वहीं रोमा श्रीवास्तव को धमतरी जिला पंचायत से हटाकर मंत्रालय में उप सचिव पद पर पदस्थ किया गया है। नगर निगम में फेरबदल बेमेतरा के कलेक्टर रहे रणबीर शर्मा को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का प्रबंध संचालक बनाया गया है। संजीव कुमार झा को एनएचएम के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। गजेन्द्र सिंह ठाकुर को जिला पंचायत धमतरी का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। वहीं, रोमा श्रीवास्तव को धमतरी जिला पंचायत से हटाकर मंत्रालय में उप सचिव पद पर पदस्थ किया गया है। चुनाव आयोग भेजे गए सरगुजा कलेक्टर सरगुजा जिले के कलेक्टर भोसकर विलास को अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति अस्थाई रूप से की गई है। अधिकारियों के तबादले का ऑर्डर सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव रजत कुमार के नाम से जारी किया गया है। कलेक्टरों का तबादला विधानसभा के शीतकालीन सत्र के बीच किया गया है।  

पं. प्रदीप मिश्रा दुर्ग में सुनाएंगे शिव महापुराण कथा, श्रद्धालुओं के लिए जारी हुआ पूरा कार्यक्रम

दुर्ग  ग्राम नगपुरा में प्रस्तावित कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के शिव महापुराण आयोजन को दृष्टिगत रखते हुए यातायात पुलिस ने आवश्यक रूट डायवर्सन प्लान एवं – पृथक पार्किंग व्यवस्था निर्धारित की है, जिससे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं एवं आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की यातायात असुविधा न हो. ये शिव महापुराण 17 दिसंबर से आयोजित होने वाली है. यातायात पुलिस ने बताया कि गनियारी बोरई मार्ग श्रीराम पान पैलेस के पास दुर्ग, पुलगांव की ओर से आने वाली भारी वाहनों को ग्राम बोरई, घुमका, ठेलका डीह, राजनांदगांव की ओर से भेजा जाएगा. हरिओम किराना स्टोर के पास ग्राम बोरई तिराहा की ओर से भारी वाहनों को डायवर्सन करेंगे. सृष्टि इंजीनियर के पास चौराहा पर भारी वाहनों को डायवर्सन किया जाएगा. शनि मंदिर अंजोरा मोड नगपुरा, जल बांधा, खैरागढ़ मार्ग की ओर से भारी वाहनों का आवागमन रखा जाएगा. चिखली चौक, धमधा रोड से कार्यक्रम की ओर किसी भी प्रकार की भारी वाहन को प्रतिबंधित रखा जाएगा. रावण भाठा चौक नगपुरा की ओर से भारी वाहनों को दुर्ग की ओर डायवर्सन करेंगे दुर्ग, कोटनी, भिलाई, रायपुर की ओर से आने वाले श्रद्धालु गण बाजार चौक से बिजली सब स्टेशन के आगे पार्किंग में अपनी वाहनों को खड़ा करेंगे. बाईपास महमरा, गनियारी, अंजोरा की ओर से आने वाले श्रद्धालुगण नगपुरा पुलिस चौकी के बगल मैदान में वाहन पार्क करेंगे. खैरागढ़, जाल बांधा, धमधा की ओर से आने वाले श्रद्धालु गण नगपुरा चौकी के पहले दाएं बाएं और पार्किंग में वाहन पार्क करेंगे.

छत्तीसगढ़ को शांति, विश्वास और उज्ज्वल भविष्य का प्रदेश बनाना राज्य सरकार का अटल संकल्प – मुख्यमंत्री साय

‘पूना मारगेम’ से शांति की ओर मजबूती से बढ़ते कदम: बीजापुर में 34 माओवादी कैडरों ने किया आत्मसमर्पण रायपुर  बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। बीजापुर जिले में ₹84 लाख के इनामी 34 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागते हुए भारतीय संविधान में आस्था जताई है और समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व एवं केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी की दृढ़ इच्छाशक्ति के अनुरूप छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त बनाने की दिशा में चल रहे सतत और ठोस प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की ‘पूना मारगेम’ नीति ने यह सिद्ध कर दिया है कि संवाद, संवेदनशीलता और विकास, हिंसा से कहीं अधिक प्रभावी समाधान हैं। यह आत्मसमर्पण केवल हथियार छोड़ने की घटना नहीं है, बल्कि भय और भ्रम से मुक्त होकर सम्मानजनक जीवन की ओर लौटने का निर्णय है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार आत्मसमर्पण करने वाले सभी व्यक्तियों के पुनर्वास, सुरक्षा, आजीविका, कौशल विकास और सामाजिक पुनर्समावेशन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि वे समाज में आत्मनिर्भर बन सकें। मुख्यमंत्री ने आज भी भटके हुए युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे हिंसा का मार्ग त्यागें, लोकतंत्र और विकास के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें तथा प्रदेश और देश के निर्माण में सहभागी बनें। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को शांति, विश्वास और उज्ज्वल भविष्य का प्रदेश बनाना राज्य सरकार का अटल संकल्प है और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सभी स्तरों पर समन्वित प्रयास जारी रहेंगे।

उज्ज्वला योजना ने बदली द्रोपदी यादव की रसोई और जिंदगी

स्वच्छ ईंधन से मिली राहत, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत रायपुर बेमेतरा जिला के ग्राम देवरबीजा निवासी द्रोपदी यादव के जीवन में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने एक सकारात्मक बदलाव ला दिया है। भारत सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत उन्हें निःशुल्क एलपीजी गैस कनेक्शन प्राप्त हुआ, जिससे वर्षों से धुएँ से भरे परंपरागत चूल्हे पर खाना पकाने की मजबूरी समाप्त हो गई। गैस कनेक्शन मिलने के बाद द्रोपदी यादव और उनके परिवार को स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक ईंधन उपलब्ध हुआ है। इससे न केवल रसोई का वातावरण स्वच्छ हुआ, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य, समय और जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। अब उन्हें लकड़ी, कोयला या उपलों की व्यवस्था के लिए दूर-दराज नहीं जाना पड़ता, जिससे उनका दैनिक जीवन पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल और सुरक्षित हो गया है। गैस कनेक्शन मिलने पर द्रोपदी यादव ने भावुक होते हुए कहा कि उज्ज्वला योजना ने मेरी रसोई के साथ-साथ मेरी जिंदगी भी बदल दी है। अब धुएँ से आँखों में जलन और खांसी जैसी समस्याएँ नहीं होतीं। समय की बचत हो रही है, जिसे मैं अपने परिवार और बच्चों के साथ बिता पा रही हूँ। उन्होंने इस जनकल्याणकारी योजना के लिए राज्य शासन एवं केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उज्ज्वला योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराकर उन्हें धुएँ से होने वाली बीमारियों से बचाना और जीवन को सहज बनाना है। इस योजना के तहत गैस कनेक्शन मिलने से द्रोपदी यादव जैसी अनेक महिलाओं को स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ-साथ सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिला है। ग्राम देवरबीजा में द्रोपदी यादव को गैस कनेक्शन मिलने के बाद अन्य ग्रामीण महिलाओं में भी योजना के प्रति जागरूकता और उत्साह देखा जा रहा है। महिलाएँ आगे बढ़कर आवेदन कर रही हैं और योजना का लाभ ले रही हैं। द्रोपदी यादव की यह कहानी उज्ज्वला योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की एक प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है।

कानन पेंडारी जू से आई दुखद खबर, बाघिन रागिनी का निधन

बिलासपुर बिलासपुर के कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क की 22 साल की बाधिन रागिनी ने दम तोड़ दिया है. रागिनी वर्ष 2018 में रायपुर के नंदन वन जंगल सफारी से एक्सचेंज के तहत कानन पेंडारी लाई गई थी. रागिनी को असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से रेस्क्यू किया गया था. वह उम्रदराज हो चुकी थी और पिछले सात वर्षों से पार्क के अस्पताल परिसर के केज में रखी गई थी. जू प्रशासन के अनुसार, जब रागिनी को 11 अगस्त 2018 को नंदन वन जंगल सफारी, रायपुर से कानन पेंडारी लाया गया था, तब जांच में सामने आया कि उसके के-नाइन दांत नहीं थे. इसी कारण वह कच्चा मटन नहीं खा पाती थी, और उसे रोजाना 5 से 6 किलो बारीक कीमा बनाकर दिया जाता था. पशु चिकित्सकों की सतत निगरानी और विशेष देखभाल के चलते रागिनी सात साल तक जीवित रही. वह ऑस्टियोपोरोसिस नामक बीमारी से भी पीड़ित थी, जिसमें हड्डियों की संरचना प्रभावित हो जाती है. मृत्यु के बाद जिला स्तर की पशु चिकित्सक समिति ने पोस्टमार्टम किया. इस दौरान जू प्रशासन और नेचर क्लब बिलासपुर के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे. गौरतलब है कि काजीरंगा क्षेत्र में रागिनी और उसके तीन साथी बाघों ने लंबे समय तक आतंक फैला रखा था. रेस्क्यू के बाद तीन बाघों को गुवाहाटी जू भेजा गया, जबकि रागिनी को छत्तीसगढ़ लाया गया था. उसके साथ लाए गए बाघ शिवा की वर्तमान उम्र करीब 15 वर्ष बताई जा रही है. इस तरह कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क ने एक उम्रदराज और दुर्लभ बाधिन को खो दिया है. बाघ आकाश और शेर भीम ने तोड़ा था दम इससे पहले कानन पेंडारी जू के एक बाघ और शेर की मौत हुई थी. 5 मार्च, 2025 को शेर भीम की मौत हुई थी. वहीं 21 अप्रैल, 2025 में बाघ आकाश की तबियत बिगड़ने से मृत्यु हो गई थी.

रूसे जलाशय में लौटी दुर्लभ Steppe Gull, 5 वर्षों बाद दर्ज हुई खास मौजूदगी

खैरागढ़ मैकाल पर्वत श्रृंखला से घिरे खैरागढ़ के जंगलों ने एक बार फिर अपनी समृद्ध जैव विविधता का प्रमाण दिया है। करीब पांच वर्षों के अंतराल के बाद खैरागढ़ स्थित रूसे जलाशय में दुर्लभ प्रवासी पक्षी स्टेपे गल (Steppe Gull) की मौजूदगी दर्ज की गई है। पक्षी विज्ञानी प्रतीक ठाकुर ने इसे अपने कैमरे में रिकॉर्ड किया है। पक्षी विज्ञानी और विशेषज्ञों द्वारा इसकी पहचान की पुष्टि के बाद यह घटना छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य भारत के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है। स्टेपे गल मूल रूप से पूर्वी यूरोप, दक्षिणी रूस और मध्य एशिया की स्टेपी क्षेत्रों में प्रजनन करता है। सर्दियों के मौसम में यह हजारों किलोमीटर की उड़ान भरकर पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया तक पहुंचता है। भारत में इसकी उपस्थिति अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है और वह भी अधिकतर समुद्री तटों तक सीमित रहती है। ऐसे में छत्तीसगढ़ जैसे आंतरिक वन क्षेत्र के रूसे जलाशय में इसका दिखना वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी प्रवासी गल का आंतरिक भू-भाग के जलाशय में ठहरना इस बात का संकेत होता है कि वहां जल गुणवत्ता, भोजन उपलब्धता और प्राकृतिक शांति का संतुलन बना हुआ है। यही कारण है कि स्टेपे गल जैसे संवेदनशील प्रवासी पक्षी इस क्षेत्र को अस्थायी आश्रय के रूप में चुन रहे हैं। रूसे जलाशय पहले से ही अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता रहा है। यह छत्तीसगढ़ का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जहां हर वर्ष कॉमन क्रेन जैसे दुर्लभ पक्षियों की नियमित उपस्थिति दर्ज होती है। इसके अलावा जलपक्षियों और प्रवासी पक्षियों की कई प्रजातियां यहां देखी जाती रही हैं, जो खैरागढ़ को पक्षी विज्ञान के मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाती हैं। पर्यावरणविदों का मानना है कि स्टेपे गल की मौजूदगी इस बात की पुष्टि करती है कि रूसे जलाशय अब केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि प्रवासी और संभावित रूप से संकटग्रस्त पक्षियों के लिए सुरक्षित ठिकाने के रूप में विकसित हो रहा है। यदि इस क्षेत्र में अवैध शिकार, अतिक्रमण और अनियंत्रित मानवीय गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा गया, तो खैरागढ़ भविष्य में मध्य भारत के प्रमुख पक्षी क्षेत्रों में शामिल हो सकता है। विशेषज्ञ यह भी सुझाव दे रहे हैं कि संरक्षण को प्राथमिकता में रखते हुए यहां बर्ड टूरिज्म की संभावनाओं को विकसित किया जाए। इससे न सिर्फ जैव विविधता के संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यावरणीय जागरूकता को भी बढ़ावा मिलेगा। रूसे जलाशय में स्टेपे गल की यह दुर्लभ उपस्थिति खैरागढ़ के लिए एक मजबूत संदेश है, यदि प्रकृति को संरक्षण और सम्मान दिया जाए, तो वह स्वयं अपनी पहचान और समृद्धि लौटाकर देती है।

वाहन छोड़ने के नाम पर प्रधान आरक्षक ने मांगे 80 हजार, SP की सख्त कार्रवाई

जांजगीर-चांपा जिले में पुलिस महकमे की छवि को धूमिल करने वाला एक मामला सामने आया है, जहां गाड़ी छुड़वाने के नाम पर अवैध उगाही के आरोप में एक प्रधान आरक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक ने की है। मिली जानकारी के अनुसार, प्रार्थी मड़वा निवासी टी. आर. साहू ने अपनी गाड़ी किसी अन्य व्यक्ति के पास गिरवी रखी थी। उसी गाड़ी को दिलाने के नाम पर प्रधान आरक्षक विनोद दिवाकर ने 80 हजार रुपये की मांग की थी। जिसके बाद प्रार्थी ने पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडे से इसकी शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने तत्काल प्रधान आरक्षक को निलंबित कर दिया और जांच की पूरी जिम्मेदारी डीएसपी योगिता खापर्डे को सौंप दी है। प्रधान आरक्षक (प्र.आर. 138) विनोद दिवाकर को निलंबन के बाद रक्षित केंद्र जांजगीर-चांपा में संबद्ध किया गया है। नियमों के अनुसार निलंबन अवधि में उन्हें निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।

छत बचाने सड़क पर उतरे 250 परिवार, रेलवे नोटिस के खिलाफ मुख्य चौक पर प्रदर्शन

 कोरबा शहर के इंदिरा नगर बस्ती के 250 परिवारों के सिर से छत छिनने का संकट मंडरा रहा है. घर खाली करने के लिए रेलवे ने परिवारों को नोटिस जारी किया. रेलवे प्रबंधन के खिलाफ आक्रोशित लोगों ने मंगलवार को मुख्य चौक (पवन टॉकिज फाटक के पास) पर धरने पर बैठे. इस दौरान काफी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं. धरने के बाद मचा हड़कप प्रदर्शन से चौक के चारों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं है. सोमवार को रेलवे अधिकारियों ने इन घरों पर खाली कराने के लिए निशान लगाए. मुआवजा इसके विरोध में सोमवार को भी बड़ी संख्या में लोगों ने स्टेशन परिसर में प्रदर्शन किया था. उन्होंने मंगलवार को शहर के मुख्य चौक पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया. विस्थापन और मुआवजे की मांग प्रदर्शनकारियों की मांग है कि उन्हें विस्थापन और मुआवजा तत्काल दिया जाए. मांगें पूरी नहीं होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. जिन घरों को हटाने का नोटिस दिया गया है, उन्हें पहले रहने के लिए वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराई जाए. आश्वासन के बाद खत्म हुआ प्रदर्शन नायब तहसीलदार दीपक पटेल ने बताया कि बस्तीवासियों ने ज्ञापन सौंपा है. उनकी मांग है कि विस्थापन और मुआवजा के बाद रेलवे कार्रवाई करें. इस संबंध में जिला प्रशासन के समक्ष बातें रखेंगे. फिलहाल अभी किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं होगी. कार्रवाई से पहले जिला प्रशासन को सूचना रेलवे द्वारा दी जाएगी. वार्ड पार्षद तामेश अग्रवाल ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया गया जहां जिला प्रशासन के आश्वासन के बाद समाप्त किया गया है. अगर मांगे पूरे नहीं होने पर आने वाले दिनों में कलेक्ट्रेट का घेराव किया जाएगा.

ओपी चौधरी का 35 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट पेश, छत्तीसगढ़ विधानसभा शीतकालीन सत्र में चर्चा

रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने 35 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया. वित्तीय वर्ष समाप्त होने से महज तीन महीने पहले भारी-भरकम अनुपूरक बजट पर कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने सवाल उठाते हुए इसमें विजन नहीं होने की बात कही, वहीं भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने रोजगार मूलक उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर दिया. अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज कर्ज में डूबते जा रहा है. मुझे समझ नहीं आ रहा है कि 35 हजार करोड़ का भारी-भरकम अनुपूरक बजट की मांग क्यों की जा रही है. वह भी वित्तीय वर्ष के ठीक 3 महीने पहले. मुझे इस अनुपूरक बजट में ऐसी कोई बात दिख नहीं रही है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में आज महिलाओं के साथ क्या हो रहा है ? महतारी वंदन के नाम पर 1 हजार दिया जा रहा है, लेकिन बिजली बिल पर उससे ज्यादा लिया जा रहा है. सरकार इवेंट मैनेजमेंट पर फोकस है. सरकार कार्यक्रम ज्यादा आयोजित कर रही है, काम कम हो रहा है. उत्सव जनता को मनाने दिया जा रहा है. सरकार उत्सव मनाने के लिए बजट खर्च कर रही है. दरअसल, सरकार का विजन क्या है यह स्पष्ट नहीं है. इस अनुपूरक बजट में भी कोई विजन नहीं है. कांग्रेस विधायक ने कहा कि नए पदों पर भर्ती की बात की थी, इसमें कुछ नहीं है. अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने की बात कही गई थी, नहीं है. 5 प्रतिशत किसानों का पंजीयन ही नहीं हो पाया. किसानों को समय पर भुगतान नहीं हो पा रहा है. गिरदावरी का काम नए लड़कों से करा लिया गया. सड़क, धान, आदिवासी, किसान, युवा, महिलाओं के विकास पर लक्ष्य निर्धारित कर काम करना होगा. रोजगार मूलक उद्योगों को देना होगा बढ़ावा अजय चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा अनुपूरक बजट आया है. राजस्व व्यय को बढ़ाने की शुरुआत भूपेश बघेल सरकार ने की. कांग्रेस सरकार ने धान खरीदी को राजनीतिक विषय बनाया. छत्तीसगढ़ में नए क्षेत्रों में रोजगार का सृजन हो, इस दिशा में काम करना होगा. ऐसे उद्योगों को प्राथमिकता देना है, जिसमें छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ियों का हित हो. कृषि क्षेत्र आज भी रोजगार का सबसे मजबूत क्षेत्र है. राज्य की ओर से कृषि अनुसंधान केंद्रों को पैसा नहीं मिल रहा है. इसकी चिंता की जाए. भाजपा विधायक ने कहा कि महिला स्व-सहायता समूह की अवधारणा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की थी. जिससे आज कुटीर और पारंपरिक उद्योगों के साथ रोजगार के साधन बने. महिलाएं मजबूत हुईं हैं. छत्तीसगढ़ में 42 प्रतिशत से आबादी एससी-एसटी की है. उनके हित के बारे में हमारी सरकार बेहतर काम कर रही है.