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ED कोर्ट का आदेश: चैतन्य को नहीं मिली जमानत, इन्वेस्टिगेशन प्रभावित होने की चिंता

रायपुर  पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे की जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय के कोर्ट में 24 अक्टूबर को सुनवाई हुई थी. जिसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था.  ईडी कोर्ट ने चैतन्य बघेल की जमानत याचिका को खारिज कर दिया. एक बार फिर से चैतन्य बघेल को बेल नहीं मिल पाई. चैतन्य बघेल पिछले 100 दिनों से रायपुर के सेंट्रल जेल में बंद हैं. प्रवर्तन निदेशालय ने शराब घोटाला मामले में चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को भिलाई के निवास से गिरफ्तार किया था. चैतन्य बघेल को नहीं मिली जमानत: प्रवर्तन निदेशालय के अधिवक्ता सौरभ कुमार पांडेय ने बताया कि "प्रवर्तन निदेशालय अपनी जांच कर रहा था और यह जांच मुख्य रूप से शराब घोटाला से जुड़े हुए मामले में हो रहा था. जांच के दौरान ऐसे प्रमाण मिले जिसमें ऐसा लगा कि शराब घोटाला मामले में चैतन्य बघेल की मुख्य भूमिका रही है. प्रत्यक्ष रूप से चैतन्य बघेल इससे लाभ लेने के साथ बहुत सारा पैसा का हैंडलिंग भी किया है. हैंडलिंग करने वाले पैसा लगभग 1000 करोड़ के आसपास है. शराब घोटाला के लगभग 20 करोड़ के लगभग लाभ चैतन्य बघेल ने लिया है. इसी भूमिका को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था. 24 अक्टूबर को हुई सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे सोमवार को सुनाया गया । ED की स्पेशल कोर्ट ने कहा कि चैतन्य बघेल की रिहाई से जांच प्रभावित हो सकती है, इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती। चैतन्य बघेल ने इससे पहले हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी, लेकिन किसी भी स्तर पर राहत नहीं मिल सकी। 17 अक्टूबर को हाई कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को वैध बताया था, जिसके बाद यह याचिका विशेष अदालत में दायर की गई थी। चैतन्य बघेल मनी लॉन्ड्रिंग केस में 101 दिन से जेल में बंद है। चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपए मिले- ED दरअसल, शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चैतन्य बघेल को भी आरोपी बनाया है। आरोप है कि शराब घोटाले की रकम से चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपए मिले हैं। शराब घोटाले से मिले ब्लैक मनी को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में इन्वेस्ट किया गया। ED के मुताबिक चैतन्य बघेल ने ब्लैक मनी को वाइट करने के लिए फर्जी निवेश दिखाया है। साथ ही सिंडिकेट के साथ मिलकर 1000 करोड़ रुपए की हैंडलिंग (हेराफेरी) की गई है। ED ने चैतन्य बघेल को मनी लॉन्ड्रिंग केस में जुलाई में गिरफ्तार किया था। बर्थडे के दिन चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी चैतन्य के वकीलों ने अदालत में इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया, लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। गौरतलब है कि 18 जुलाई को ईडी ने उनके भिलाई स्थित घर से जन्मदिन के दिन उन्हें गिरफ्तार किया था। ईडी के अनुसार, कुल घोटाले में करीब 1,000 करोड़ रुपए को विभिन्न चैनलों के जरिए सफेद किया गया है। चैतन्य के प्रोजेक्ट में 13-15 करोड़ इन्वेस्ट ED ने अपनी जांच में पाया कि, चैतन्य बघेल के विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट (बघेल डेवलपर्स) में घोटाले के पैसे को इन्वेस्ट किया गया है। इस प्रोजेक्ट से जुड़े अकाउंटेंट के ठिकानों पर छापेमारी कर ED ने रिकॉर्ड जब्त किए थे। प्रोजेक्ट के कंसल्टेंट राजेन्द्र जैन ने बताया कि, इस प्रोजेक्ट में वास्तविक खर्च 13-15 करोड़ था। जबकि रिकॉर्ड में 7.14 करोड़ ही दिखाया गया। जब्त डिजिटल डिवाइसेस से पता चला कि, बघेल की कंपनी ने एक ठेकेदार को 4.2 करोड़ कैश पेमेंट किया, जो रिकॉर्ड में नहीं दिखाया गया। फर्जी फ्लैट खरीदी के जरिए पैसों की हेराफेरी ED ने अपनी जांच में पाया है कि त्रिलोक सिंह ढिल्लो ने 19 फ्लैट खरीदने के लिए 5 करोड़ बघेल डेवलपर्स को ट्रांसफर किए। ढिल्लन ने ये फ्लैट अपने कर्मचारियों के नाम पर खरीदे लेकिन पेमेंट त्रिलोक ढिल्लो ने खुद दिया। ED ने जब ढिल्लन के कर्मचारियों से पूछताछ की तो कर्मचारियों ने बताया कि, ये फ्लैट की खरीदी उन्हीं के नाम पर हुई, लेकिन पैसे ढिल्लो ने दिए। ये सारा ट्रांजेक्शन 19 अक्टूबर 2020 को एक ही दिन हुआ। ED ने कहा कि ब्लैक को लीगल करने के लिए यह एक पूर्व-योजना के तहत किया गया लेन-देन था। इसका मकसद पैसे को छिपाकर चैतन्य बघेल तक पहुंचाना था।

मतदाता सूची अपडेट: छत्तीसगढ़ में SIR की तैयारी पूरी, फरवरी तक रहेगी खुली प्रक्रिया

रायपुर  बिहार में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआइआर) का काम पूरा होने के बाद चुनाव आयोग ने सोमवार को उत्तर प्रदेश, बंगाल, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ सहित 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआइआर के दूसरे चरण की घोषणा की। यहां एसआइआर का काम मंगलवार यानी आज 28 अक्टूबर से शुरू हो जाएगा और सात फरवरी तक चलेगा। प्रदेश में राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) की तैयारी पूरी कर ली गई है। केंद्रीय निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मंगलवार से प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। प्रदेश में 2 करोड़ 12 लाख 30 हजार मतदाता हैं। प्रदेश में पंचायत चुनाव में निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने 1 जनवरी 2025 की तिथि में मतदाताओं की संख्या 2 करोड़ 11 लाख 5,391 बताई थी। इसमें 1 करोड़ 4 लाख 27,834 पुरुष, 1 करोड़ 6 लाख 76,821 महिला और 736 तृतीय जेंडर मतदाता शामिल हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर को लेकर पुरानी और वर्तमान लिस्ट का मिलान किया जा चुका है। प्रदेश के सभी जिलों में एसआईआर एक साथ लागू किया जाएगा। सर्वे को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है। एसआईआर में नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाएंगे और लिस्ट में सामने आने वाली गलतियों को सुधारा जाएगा। बीएलओ घर-घर जाकर 2003 की लिस्ट से मिलान करेंगे और कमियों को दूर करेंगे। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने किया निर्णय का स्वागत उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग के एसआईआर के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि नियमानुसार जो पात्र और देश के नागरिक हो, उनके ही नाम मतदाता सूची में होने चाहिए। एसआईआर का निर्णय स्वागत योग्य है। भूपेश बघेल ने सरकार पर साधा निशाना पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केद्रीय निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए अवैध प्रवासियों की पहचान पर स्पष्टता की मांग की है। दिल्ली रवाना होने से पहले सोमवार को राजधानी के स्वामी विवेकानंद विमानतल पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि एसआईआर की घोषणा हो गई है, लेकिन चुनाव आयोग को बताना चाहिए कि बिहार में कितने बांग्लादेशी चिन्हित किए गए और उनमें से कितने की सूची केंद्र सरकार को दी गई है। इनमें कितने लोग बाहर हुए हैं क्योंकि एसआईआर से विदेशी नागरिक भगाने की बात कही गई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय अभी तक यह नहीं बता पाया है कि छत्तीसगढ़ में कितने पाकिस्तानी हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने निर्देश दिया था कि तीन दिनों के भीतर जितने भी पाकिस्तानी हैं, उन्हें बाहर किया जाए। लेकिन, राज्य सरकार अभी तक पाकिस्तानी लोगों की पहचान नहीं कर पाई है। 12 राज्यों में करीब 51 करोड़ मतदाता जिन 12 राज्यों में दूसरे चरण में एसआइआर का काम होने जा रहा है, उनमें मतदाता की संख्या करीब 51 करोड़ है। इनमें सबसे अधिक 15.44 करोड़ मतदाता अकेले उत्तर प्रदेश में है, जबकि बंगाल में 7.66 करोड़, तमिलनाडु में 6.41 करोड़, मध्य प्रदेश में 5.74 करोड़, राजस्थान में 5.48 करोड़ व छत्तीसगढ़ में 2.12 करोड़ मतदाता हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस दौरान साफ किया है कि जिन 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में एसआइआर की घोषणा की गई है, उन सभी राज्यों की मतदाता सूची में तत्काल प्रभाव से फेरबदल पर रोक लगा दी है। इस बीच इनमें न तो कोई नाम जोड़ा जा सकेगा और न ही हटाया जा सकेगा। एसआइआर के दौरान प्रत्येक मतदाता को एक यूनिक फॉर्म दिया जाएगा। इसमें पुराना पता, फोटो आदि छपा हुआ होगा। यदि मतदाता उस पते पर नहीं रह रहा है तो वह उसमें संशोधन कर सकता है। आयोग ने इस दौरान मतदाताओं को सुझाव दिया है कि गणना फार्म में अपने रंगीन फोटो लगाएं ताकि जो पहचान पत्र जारी किए जाने हैं, उनमें चेहरे उभरकर सामने आ सकें। इन 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेश में होगा एसआइआर उत्तर प्रदेश, बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, राजस्थान, केरल, गुजरात, गोवा, पुडुचेरी, लक्षद्वीप और अंडमान निकोबार। इनमें से बंगाल, तमिलनाडु, केरल व पुडुचेरी में अगले साल यानी 2026 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, गुजरात, गोवा में 2027 में विधानसभा होने हैं। यह रहेगा मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्यक्रम     गणना पत्रों की छपाई व बीएलओ को प्रशिक्षण: 28 अक्टूबर से तीन नवंबर तक।     घर-घर जाकर पुनरीक्षण का काम- चार नवंबर से चार दिसंबर तक।     मतदाता सूची के मसौदे का प्रकाशन- नौ दिसंबर दावे और आपत्तियों का समय- नौ दिसंबर से आठ जनवरी 2026 तक।     दस्तावेजों की जांच के लिए नोटिस, सुनवाई, सत्यापन : नौ दिसंबर से 31 जनवरी 2026 तक ।     अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन- सात फरवरी 2026। अब तक आठ बार एसआइआर मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण का काम देश में कोई पहली बार नहीं हो रहा है। 1951 से 2004 तक यह आठ बार हो चुका है। अंतिम बार यह 21 साल पहले 2002 से 2004 के बीच देश के अधिकांश राज्यों में हुआ था। आयोग ने कहा कि एसआइआर का यह काम राजनीतिक दलों की ओर से लगातार मतदाता सूची की गडबड़ियों को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बाद शुरू किया गया है। इसके जरिए मतदाता सूची को पूरी तरह से शुद्ध और पारदर्शी बनाने का लक्ष्य है। आखिर, एसआइआर क्यों जरूरी? आयोग ने बताया कि एसआइआर क्यों जरूरी है? उसके मुताबिक, बदलते शहरीकरण में लोगों का तेजी से विस्थापन हो रहा है। यह इसकी एक बड़ी वजह है। दूसरा इसके चलते काफी लोगों के मतदाता सूची में दो-दो जगह नाम दर्ज हैं। तीसरा मतदाता सूची में मतदाताओं के मृत होने के बाद भी नामों का हटाया नहीं जाना है। चौथी वजह देश के तमाम हिस्सों में गलत तरीके से घुसपैठ करके बड़ी संख्या में लोगों ने मतदाता सूची में गलत तरीके से नाम जुड़वा लिया है। एसआइआर के दौरान इन सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच हो सकेगी। सभी राज्य सरकारें सहयोग के लिए प्रतिबद्ध, किसी दल से कोई मनमुटाव नहीं बंगाल में एसआइआर को लेकर सत्ताधारी दलों की ओर से की जा रही विरोधी टिप्पणियों से जुड़े सवाल पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश ने कहा कि एसआइआर एक संवैधानिक प्रक्रिया है। संविधान के तहत … Read more

छत्तीसगढ़ के माओवादी नेता बंडी प्रकाश ने समर्पण किया, DGP के सामने हथियार सौंपे

बीजापुर  छत्तीसगढ़ के माओवादी पार्टी के प्रमुख नेता बंदी प्रकाश ने तेलंगाना DGP के सामने सरेंडर कर दिया है। बंदी प्रकाश नक्सलियों के तेलंगाना स्टेट कमेटी का मेम्बर और स्पेशल जोनल कमेटी मेम्बर भी है। बंदी प्रकाश पर छत्तीसगढ़ में 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। बंदी प्रकाश का नाम माओवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल है। बंदी प्रकाश उर्फ ​​प्रभात, अशोक, क्रांति मंचेरियल जिले के मंदामरी से हैं। प्रकाश के पिता सिंगरेनी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने 1982-84 के बीच "गाँव चलो" आंदोलन के माध्यम से रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन (आरएसयू) के लिए संघर्ष किया। इसके बाद वे माओवादी पार्टी से संबद्ध सिंगरेनी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष बने और वहाँ से राज्य समिति के सदस्य बने। छात्र नेता से बना माओवादी नेता संगठन में ‘प्रभात’, ‘अशोक’ और ‘क्रांति’ जैसे नामों से पहचाने जाने वाला बंडी प्रकाश तेलंगाना के मंचेरियल जिले के मंदामरी क्षेत्र का रहने वाला है। उसके पिता सिंगरेनी कोलियरी में कर्मचारी हैं। छात्र जीवन में ही वह वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हुआ और 1982–84 के बीच हुए गांव चलो आंदोलन के दौरान रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़ गया। इसके बाद सिंगरेनी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष के रूप में काम किया और धीरे-धीरे संगठन की ऊंची कमेटियों तक पहुंच गया। हाल के महीनों में माओवादियों पर बढ़ते दबाव और शीर्ष नेताओं के मारे जाने व मुख्यधारा में लौटने के बाद उसने भी मुख्यधारा का रास्ता चुन लिया। यहां बता दें कि कुछ दिन पहले पोलित ब्यूरो सदस्य एवं केंद्रीय क्षेत्रीय ब्यूरो प्रमुख भूपति और केंद्रीय समिति सदस्य रूपेश उर्फ सतीश के नेतृत्व में 271 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। इसके एक दिन बाद कांकेर क्षेत्र में 20 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए। बताया जा रहा है कि बंडी प्रकाश के आत्मसमर्पण से दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी इकाई की गतिविधियों पर असर पड़ना तय है। इससे पहले भूपति की पत्नी तारक्का, उसकी भाभी सुजाता, और माओवादी नेता सुधाकर की पत्नी ककराला सुनीता भी आत्मसमर्पण कर चुकी हैं। लगातार आत्मसमर्पण की यह श्रृंखला माओवादी संगठन में तेजी से घटते मनोबल और आंतरिक असंतोष की ओर संकेत करती है। सुरक्षाबलों के ऑपरेशन से नक्सलियों में दहशत ज्ञात हो कि, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हाल ही में पुलिस शहीद दिवस के अवसर पर माओवादियों से आत्मसमर्पण करने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा कि कुछ माओवादी पहले ही आत्मसमर्पण कर चुके हैं और बाकी भी जन-जीवन में शामिल होकर देश के विकास का हिस्सा बनना चाहते हैं। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय के तत्वावधान में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन कगार के प्रभाव से पार्टी के प्रमुख सदस्य एक के बाद एक अपनी सेना के साथ आत्मसमर्पण कर रहे हैं। पिछले 45 वर्षों से नक्सल संगठन में थे सक्रिय बंदी प्रकाश माओवादी पार्टी में राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण संगठनकर्ता हैं। पिछले 45 वर्षों से विभिन्न स्तरों पर काम कर रहे उनके आत्मसमर्पण को पार्टी के लिए एक बड़ा झटका कहा जा सकता है।

छठ पर्व पर मुख्यमंत्री साय ने सूर्य को अर्घ्य दिया, प्रदेश में खुशहाली और उन्नति की की प्रार्थना

रायपुर : मुख्यमंत्री  साय ने जशपुर में दुलदुला छठ घाट में सूर्य को दिया अर्घ्य: प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय एवं उनकी धर्मपत्नी मती कौशल्या साय ने आज छठ महापर्व के अवसर पर दुलदुला छठ घाट में पहुँचकर सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और प्रदेश की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री  साय ने प्रदेशवासियों को छठ पूजा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत सौभाग्य का अवसर है कि मुझे छठ पर्व में सम्मिलित होने का अवसर मिला।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जनता के विश्वास और स्नेह से ही उन्हें जनसेवा का अवसर मिला है, और वे क्षेत्र के विकास एवं जनता की अपेक्षाओं की पूर्ति के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री  साय ने दुलदुला क्षेत्रवासियों की माँग पर छठ घाट के सौन्दर्यीकरण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि आगामी छठ पर्व तक दुलदुला छठ घाट का सौन्दर्यीकरण कार्य पूर्ण कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुनकुरी छठ घाट का सौन्दर्यीकरण लगभग ₹5 करोड़ 17 लाख की लागत से किया गया है, जहाँ इस वर्ष व्रती महिलाएँ पूर्ण श्रद्धा-भाव से पूजा-अर्चना कर रही हैं। इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, जनपद पंचायत दुलदुला अध्यक्ष  रामकुमार सिंह, आईजी  दीपक कुमार झा, कलेक्टर  रोहित व्यास, पुलिस अधीक्षक  शशिमोहन सिंह सहित छठ व्रत करने वाली महिलाएँ, जनप्रतिनिधिगण एवं ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

छठ पर्व पर महिलाओं ने अर्पित किया अर्घ्य, आमातालाब घाट पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

लोक आस्‍था के पर्व छठ पर महिलाओं ने अस्‍ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्‍य, आमातालाब छठ घाट पर उमड़े श्रद्धालु रायपुर लोक आस्था का महापर्व छठ पर  व्रती महिलाओं राजधानी रायपुर के आमातालाब छठ घाट पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया. 4 दिनों तक चलने वाले इस लोक आस्था के पर्व का आज तीसरा दिन है। रायपुर विश्वकर्मा समाज के अध्यक्ष श्री रमेश शर्मा ने बताया कि राजधानी रायपुर के आमातालाब छठ घाट पर लोक आस्था का महापर्व छठ पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है. सोमवार शाम को अस्‍ताचलगामी सूर्य को अर्घ्‍य देने के लिए आमातालाब छठ घाट पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी. पारंपरिक गीतों और पूजा के बीच माहौल आस्थामय नजर आया. इस मौके पर भोजपुरी इंडस्‍ट्री के कलाकार भी भक्ति में सराबोर नजर आए. घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और प्रशासन ने व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष टीम तैनात की थी. छठ पूजा की खासियत यह रही कि लोग सुबह से ही तैयारी में जुटे रहे और शाम होते ही सूर्य को अर्घ्‍य देने के लिए घाटों पर पहुंचे. सोमवार को इस पर्व के तीसरे दिन व्रती महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। कल 28 अक्टूबर को प्रातः 6 बजे उषा अर्घ्य उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इस अवसर पर क्षेत्र के विधायक एवं पार्षद गण,मंडल अध्यक्ष सहित समाज के सभी सदस्य सपरिवार उपस्थित रहेंगे। आज के कार्यक्रम में विशेष रूप से  विश्वकर्मा समाज के पूजन व्यवस्था हेतु युवा वर्ग से सुरज शर्मा,विनय शर्मा,रोहित,विश्वकर्मा संतोष विश्वकर्मा,शंकर शर्मा,सुनील शर्मा,सन्नी शर्मा,आकाश शर्मा एवं अन्य सदस्यों ने अपना योगदान दिया है।  

मुख्यमंत्री साय ने जशपुर में दुलदुला छठ घाट में सूर्य को दिया अर्घ्य: प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने आज छठ महापर्व के अवसर पर दुलदुला छठ घाट में पहुँचकर सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और प्रदेश की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों को छठ पूजा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत सौभाग्य का अवसर है कि मुझे छठ पर्व में सम्मिलित होने का अवसर मिला।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनता के विश्वास और स्नेह से ही उन्हें जनसेवा का अवसर मिला है, और वे क्षेत्र के विकास एवं जनता की अपेक्षाओं की पूर्ति के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री साय ने दुलदुला क्षेत्रवासियों की माँग पर छठ घाट के सौन्दर्यीकरण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि आगामी छठ पर्व तक दुलदुला छठ घाट का सौन्दर्यीकरण कार्य पूर्ण कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुनकुरी छठ घाट का सौन्दर्यीकरण लगभग ₹5 करोड़ 17 लाख की लागत से किया गया है, जहाँ इस वर्ष व्रती महिलाएँ पूर्ण श्रद्धा-भाव से पूजा-अर्चना कर रही हैं। इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, जनपद पंचायत दुलदुला अध्यक्ष रामकुमार सिंह, आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह सहित छठ व्रत करने वाली महिलाएँ, जनप्रतिनिधिगण एवं ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

महासमुंद जिले के 323 तीर्थयात्री मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत निकल पड़े प्रयागराज-काशी यात्रा पर

विधायक श्री सिन्हा ने फूल माला पहनाकर तीर्थयात्रियों को दी शुभकामना महासमुंद मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत महासमुंद जिले के पांचों विकासखंडों से आज कुल 323 श्रद्धालु 18 बसों के माध्यम से पवित्र तीर्थस्थलों — प्रयागराज, हनुमानगढ़ एवं काशी विश्वनाथ — के दर्शन हेतु रवाना हुए। यह पांच दिवसीय यात्रा 27 से 31 अक्टूबर 2025 तक आयोजित की गई है। रवाना होने के पूर्व सभी श्रद्धालुओं का मेडिकल चेक अप कराया गया। इस अवसर पर महासमुंद विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा ने ध्वज दिखाकर श्रद्धालुओं को यात्रा के लिए रवाना किया। कार्यक्रम में नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री देवी चंद राठी, श्री येतराम साहू, श्री पवन पटेल, श्री महेंद्र सिक्का, श्री राजू चंद्राकर, श्री माखन पटेल, श्री मीना वर्मा, श्री रिंकू चंद्राकर, श्री शरद मराठा, श्री राकेश चंद्राकर सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, समाज कल्याण विभाग, जनपद पंचायत एवं नगरीय निकायों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। विधायक श्री सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा आरंभ की गई थी, किंतु पूर्ववर्ती सरकार के पांच वर्ष के कार्यकाल में यह योजना बंद रही। वर्तमान में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में इस जनकल्याणकारी योजना को पुनः प्रारंभ किया गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं को फूल माला पहनाकर और तिलक लगाकर शुभकामनाएं दी।  ज्ञातव्य है कि योजना अंतर्गत 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के श्रद्धालु तीर्थ यात्रा के पात्र हैं। यदि पति-पत्नी साथ यात्रा करना चाहें तो उनमें से एक को आयु सीमा में छूट दी जाती है। योजना के तहत प्रत्येक माह पात्र श्रद्धालुओं को शासन द्वारा निर्धारित तीर्थस्थलों का निःशुल्क दर्शन कराया जाएगा। यह योजना पूर्णतः निःशुल्क है । यात्रा के दौरान आवागमन, ठहरने एवं भोजन की सभी व्यवस्थाओं का वहन राज्य शासन द्वारा किया जाता है। इससे वरिष्ठ नागरिकों को न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव प्राप्त होगा, बल्कि समाज और संस्कृति से उनका आत्मिक जुड़ाव भी सुदृढ़ होगा। महासमुंद जनपद से 52, बागबाहरा से 47, पिथौरा से 50, बसना से 40, सरायपाली से 43, नगरपालिका महासमुंद से 50, बागबाहरा से 6, सरायपाली से 15, तुमगांव से 6, पिथौरा से 6 तथा नगर पंचायत बसना से 5 श्रद्धालु शामिल हैं। इनके साथ कुल 9 अनुरक्षक भी यात्रा पर गए हैं। इस तीर्थ यात्रा से श्रद्धालुओं में उत्साह एवं श्रद्धा का भाव देखा गया। श्रद्धालु सुखिया ध्रुव,मचेवा, दुलारी साहू, बागबाहरा से फौज सिंह और ठाकुर दीवान,पिथोरा की रेखा प्रधान सहित सभी श्रद्धालुओं ने राज्य सरकार का आभार व्यक्त करते हुए इस जनकल्याणकारी योजना को जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।

संस्कृति, इतिहास और अध्यात्म का संगम जहां इतिहास बोलता है, संस्कृति मुस्कुराती है और अध्यात्म सांस लेता है

रायपुर, छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित सिरपुर (श्रीपुर) केवल एक पुरातात्त्विक स्थल ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों का जीवंत प्रतीक है। यह नगर महान सम्राट महाशिवगुप्त बालार्जुन की राजधानी रहा है और अपनी स्थापत्य कला, बौद्ध धरोहरों तथा प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। सिरपुर का उल्लेख प्राचीन भारतीय ग्रंथों और अभिलेखों में मिलता है। यहाँ भगवान शिव, विष्णु, बुद्ध और जैन धर्म के उपासना स्थलों के अवशेष मिले हैं। 7वीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी सिरपुर का उल्लेख अपनी यात्राओं में किया है, जिससे इसकी अंर्तराष्ट्रीय ख्याति सिद्ध होती है। यह नगर धार्मिक सहिष्णुता और कला का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। यहाँ 22 शिव मंदिर, 5 विष्णु मंदिर, 3 जैन विहार और एक विशाल बौद्ध विहार के अवशेष प्राप्त हुए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा सिरपुर में लगातार संरक्षण और मरम्मत का कार्य किया जा रहा है जिससे इसकी ऐतिहासिक गरिमा बनी रहे। डिजिटल टूर, क्यूआर कोड आधारित जानकारी और थ्रीडी गाइडेंस सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग हो रहा है। सिरपुर बौद्ध, जैन और हिन्दू स्थापत्य कला का त्रिवेणी संगम है। यहां स्थित लक्ष्मण मंदिर भारत का पहला ईंटों से निर्मित मंदिर है जो वास्तुकला का अनुपम उदाहरण है। आनंदप्रभु कुटीर विहार बौद्ध भिक्षुओं का प्रमुख केंद्र है, जहाँ चीन से आए भिक्षु रह चुके हैं। गंधेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित मंदिर है, जिसमें अनेक मूर्तियाँ और सांस्कृतिक प्रतीक हैं। 1872 में अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा सिरपुर के अवशेषों की खोज की गई थी। इसके बाद यहाँ अनेक उत्खनन कार्य हुए, जिनमें बुद्ध, विष्णु, शिव और जैन परंपराओं के असंख्य साक्ष्य मिले। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के विद्वान भी सिरपुर को एशिया की बौद्ध धरोहरों में महत्वपूर्ण स्थान मानते हैं।     हर वर्ष आयोजित होने वाला सिरपुर महोत्सव छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। इसमें देश-विदेश के कलाकार शास्त्रीय नृत्य, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियाँ देते हैं। यहाँ ईको-ट्रेल, हस्तशिल्प बिक्री केंद्र और स्थानीय भोजनालयों की योजनाएँ चलाई जा रही हैं, ताकि स्थानीय समुदाय को रोजगार मिले और पर्यटन को बढ़ावा मिले। विद्यार्थियों के लिए सिरपुर की ऐतिहासिक धरोहरों पर आधारित पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किया गया है।     साय सरकार ने सिरपुर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। विजन 2047 के तहत आधुनिक बुनियादी ढांचा, सड़क, प्रकाश व्यवस्था और अंर्तराष्ट्रीय स्तर का पर्यटक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। सिरपुर की पुरातात्त्विक संरचनाओं को संरक्षित रखने के लिए अत्याधुनिक तकनीकें अपनाई जा रही हैं। सिरपुर केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है। यहाँ के मंदिर, विहार, मूर्तियाँ और जीवंत परंपराएँ हमें यह सिखाती हैं कि भारत की संस्कृति, सहिष्णुता, कला और ज्ञान का संगम है। सिरपुर सचमुच वह स्थान है जहाँ इतिहास बोलता है, संस्कृति मुस्कुराती है और अध्यात्म सांस लेता है।

सोशल मीडिया पर साड़ी बेचने के बहाने ठगे 50 करोड़, पुलिस ने साइबर गिरोह का किया भंडाफोड़

खैरागढ़ छत्तीसगढ़ की खैरागढ़ पुलिस ने एक ऐसी सनसनीखेज कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है. इंस्टाग्राम पर साड़ी बेचने के नाम पर हुई एक छोटी-सी ऑनलाइन ठगी के मामले ने पुलिस को 50 करोड़ रुपए के बड़े साइबर फ्रॉड करने वाले गिरोह तक पहुंचा दिया. छोटी शिकायत, बड़ा खुलासा मामला खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय की छात्रा वसुधा सिन्हा की शिकायत से शुरू हुआ. छात्रा ने पुलिस को बताया था कि उसने इंस्टाग्राम पर एक ऑनलाइन पेज से साड़ी खरीदी और पेमेंट करने के बाद उसके साथ ₹64,000 की ठगी हो गई. पहली नज़र में यह एक छोटा मामला लग रहा था, लेकिन खैरागढ़ साइबर सेल ने जब इंस्टाग्राम पेज, पेमेंट ऐप और बैंक खातों की गहन जांच शुरू की, तो ठगी के एक बड़े जाल का पता चला. ‘100 बुक’ गेमिंग ऐप के जरिए भी ठगी जांच में सामने आया कि इस फ्रॉड के पीछे मुंबई के डोम्बिवली और कल्याण में सक्रिय एक बड़ा गैंग काम कर रहा था. ये शातिर ठग इंस्टाग्राम पर साड़ी बेचने के फर्जी शॉपिंग पेज बनाकर देशभर के लोगों को निशाना बना रहे थे. चौंकाने वाली बात यह है कि ये लोग “100 बुक” नाम का एक ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग ऐप भी चला रहे थे, जिसके जरिए ठगी के इस काले कारोबार को और बड़ा किया जा रहा था. ₹50 करोड़ का ट्रांजेक्शन, 100 से ज्यादा फर्जी खाते साइबर सेल ने जब आरोपियों के बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया, तो सामने आया कि गिरोह ने ठगी के लिए 100 से अधिक फर्जी सिम कार्ड और बैंक खाते बना रखे थे. इन खातों के माध्यम से ही करीब ₹50 करोड़ का बड़ा लेन-देन हुआ था. डिलीवरी ब्वॉय बनकर की गई रेकी, फिर छापा गिरोह की धरपकड़ के लिए खैरागढ़ पुलिस की टीम ने 7 दिन तक मुंबई में डेरा डाला. टीम ने आरोपियों की पहचान और ठिकाने की पुष्टि के लिए खुद को ‘डिलीवरी ब्वॉय’ बताकर इलाके में रेकी की. सही मौका देखकर, पुलिस ने डोम्बिवली के दो फ्लैटों में एक साथ छापा मारा और 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. आरोपियों की पहचान गिरफ्तार किए गए आरोपियों में महाराष्ट्र और बिहार के निवासी शामिल हैं, जिनके नाम गौतम पंजाबी, पवन सुरूसे, विनायक मोरे, अमित मोरे, रामचंद्र चौके, अमोल दिवनाने, अभिषेक डंबडे और मनोज मुखिया बताए जा रहे हैं. पुलिस ने इनके पास से 5 लैपटॉप, 14 मोबाइल, 51 बैंक पासबुक, 51 एटीएम कार्ड, 15 चेकबुक और 25 सिम कार्ड जब्त किए हैं. राजनांदगांव रेंज के आईजी अभिषेक शांडिल्य ने बताया कि सभी आरोपियों पर संगठित अपराध और जुआ अधिनियम (Gambling Act) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेजा जा रहा है. पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके ठगी के तरीकों की और कड़ियां तलाश रही है. खैरागढ़ पुलिस की इस पेशेवर कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी देश के किसी भी कोने में क्यों न छिपे हों, कानून के हाथ उन तक जरूर पहुंचेंगे.

सुरक्षा से विकास तक: नक्सल प्रभावित इलाकों में बदली तस्वीर

बीजापुर बीजापुर जिले के थाना भोपालपटनम क्षेत्रान्तर्गत कैम्प कांडलापर्ती-2 और थाना फरसेगढ़ क्षेत्रान्तर्गत ग्राम पील्लूर में नवीन सुरक्षा और जन-सुविधा कैम्प की स्थापना की गई है. यह पहल छत्तीसगढ़ शासन की “नियद नेल्ला नार” योजना के अंतर्गत ग्रामीणों को मूलभूत सुविधा और सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए की गई है. विपरीत मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए इन कैम्पों की स्थापना सफलतापूर्वक की. यह कदम न केवल सुरक्षा दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि क्षेत्रीय विकास की गति को भी सशक्त करेगा. अंतर्राज्यीय सम्पर्क और आधारभूत संरचना का विस्तार भोपालपटनम् से फरसेगढ़, सेण्ड्रा और गढ़चिरौली को जोड़ने की दिशा में यह एक अहम प्रगति है. आगामी समय में नेशनल पार्क क्षेत्र के ग्रामों को सड़क और अन्य सुविधाओं से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त होगा. सुरक्षा और विकास का समन्वय कैम्प की स्थापना से स्थानीय नागरिकों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पेयजल, पीडीएस दुकानें, मोबाइल नेटवर्क, सड़क और पुल-पुलिया जैसी सुविधाएं सुलभ होंगी. इससे माओवादियों की अंतर्राज्यीय गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा. नक्सल उन्मूलन में उल्लेखनीय उपलब्धियां वर्ष 2024 से अब तक बीजापुर जिले में कुल 21 सुरक्षा कैम्प स्थापित किए गए हैं. इन प्रयासों के फलस्वरूप 599 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, 196 माओवादी अलग अलग मुठभेड़ में मारे गए हैं तथा 986 माओवादियों को सुरक्षा बलो की कार्यवाही में गिरफ्तारी हुई है. सुरक्षा बलो के द्वारा किये जा रहे प्रयासों के फलस्वरूप बस्तर संभाग मे 210 माओवादियों ने हथियार के साथ आत्मसमर्पण किये है, यह नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी रणनीतिक सफलता है. प्रशासनिक नेतृत्व और सहयोग जिला बीजापुर के सुदूर अंचल क्षेत्रों में नक्सल उन्मूलन अभियान एवं विकासात्मक कार्यो में तेजी लाने के लिए बस्तर रेंज आईजी सुन्दरराज पी., शालिन महानिरीक्षक केरिपु ऑप्स छ.ग. सेक्टर रायपुर, कमलोचन कश्यप पुलिस उप महानिरीक्षक रेंज दंतेवाड़ा, बी0एस0नेगी उप महानिरीक्षक (परि) सीआरपीएफ रेंज बीजापुर के मार्ग-दर्शन एवं डॉ0 जितेन्द्र कुमार यादव पुलिस अधीक्षक जिला बीजापुर, मोहित कुमार कमांडेंट केरिपु 22 बटालियन, के डी जोशी कमांडेंट केरिपु 214 बटालियन, विजेंद्र सिंह कमांडेंट केरिपु 222 बटालियन, अमित कुमार, कमांडेंट 153 सीआरपीएफ अशोक कुमार कमांडेंट कोबरा 210, पुष्पेन्द्र कुमार कमांडेंट कोबरा 206, रविन्द्र कुमार मीणा अति0 पुलिस अधीक्षक ऑप्स बीजापुर, अमन कुमार झा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नक्सल ऑप्स बीजापुर, संजय ध्रुव अति0 पुलिस अधीक्षक, मनोज तिर्की उप पुलिस अधीक्षक, अनुविभागीय अधिकारी भोपालपटनम घनश्याम कामड़े, कुलदीप सिंह डीसी ऑप्स बीजापुर की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ शासन की ‘‘नियद नेल्ला नार’’ योजना के तहत जिला बीजापुर थाना भोपालपटनम क्षेत्र के ग्राम कांडलापर्ती-2 में दिनांक 24/10/2025 एवं थाना फरसेगढ़ क्षेत्रअंतर्गत ग्राम पिल्लूर मे दिनांक 27/10/2025 को नवीन सुरक्षा कैम्प स्थापित किया गया. नवीन कैम्प स्थापित होने से क्षेत्र में माओवादियों के अन्तर्राज्यीय गतिविधियों पर अंकुश लगेगा व नक्सल विरोधी अभियान संचालन में तेजी आयेगी एवं आप-पास क्षेत्रों में निवासरत ग्रामीणों को विकासात्मक कार्य एवं मूलभूत सुविधायें जैसे कि सड़क, पुल/पुलिया निर्माण, बिजली, पानी, स्वास्थ्य सुविधा, पीडीएस दुकाने, अच्छी शिक्षा, मोबाईल कनेक्टिविटी का विस्तार आदि की सुविधायें मिल पायेगा. नवीन सुरक्षा कैम्प स्थापित होने से क्षेत्र के आम-जन उत्साहित है. विकास की गति वर्ष 2023-24 और 2024-25 में अब तक जिले में कुल 43 नवीन सुरक्षा कैम्प स्थापित किए जा चुके हैं. “नियद नेल्ला नार” योजना के तहत इन क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, मोबाइल टावर, आंगनबाड़ी और अन्य जन-सुविधाओं का तीव्र विस्तार हुआ है.