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नीट यूजी में प्रवेश प्राप्त करने हेतु प्रदेश के संगठित क्षेत्र के बीमित श्रमिकों के बच्चों के लिए सुनहरा अवसर

बारनवापारा के देवपुर जंगल में दिखी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी वन मंत्री  केदार कश्यप ने दी बधाई जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों को मिली बड़ी सफलता रायपुर छत्तीसगढ़ के बारनवापारा क्षेत्र ने एक बार फिर अपनी समृद्ध जैव विविधता से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। बलौदाबाजार वनमंडल के अंतर्गत देवपुर जंगल में आयोजित देवपुर समर कैंप 2026 के दौरान दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी (जायंट मालाबार स्क्विरल) दिखाई दी। इस दुर्लभ वन्यजीव के दिखने से वन विभाग, प्रकृति प्रेमियों और वैज्ञानिकों में उत्साह है।           वन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर वन विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ सरकार की वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की योजनाओं का सकारात्मक परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है, जिससे दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास विकसित हो रहे हैं। देवपुर समर कैंप में दिखी दुर्लभ प्रजाति          बलौदाबाजार वनमंडल द्वारा 16 मई से 22 मई 2026 तक देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया था। कैंप के पहले दिन 16 मई को आयोजित बर्डिंग ट्रेल के दौरान इस दुर्लभ गिलहरी को देखा गया। इसकी पहचान प्रकृति प्रेमी एवं साइबर रिस्क एक्सपर्ट हेमंत वर्मा ने की। विशाल भारतीय गिलहरी की खासियत          विशाल भारतीय गिलहरी, जिसका वैज्ञानिक नाम रेटूफा इंडिका  (Ratufa indica) है, भारत की सबसे बड़ी वृक्षवासी गिलहरियों में से एक है। इसकी पूंछ सहित लंबाई लगभग तीन फीट तक होती है। इसके शरीर पर गहरे लाल, भूरे, काले और क्रीम रंगों का सुंदर मिश्रण होता है। यह अपना अधिकांश जीवन पेड़ों पर ही बिताती है और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक लंबी छलांग लगाने में सक्षम होती है। कानूनी संरक्षण प्राप्त दुर्लभ प्रजाति          यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-2 के तहत संरक्षित है। इसका शिकार या व्यापार करना कानूनन अपराध है। स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने कहा कि बारनवापारा अभ्यारण्य और आसपास का वन क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है। देवपुर जंगल में इस दुर्लभ गिलहरी का दिखना इस बात का प्रमाण है कि यहां का वन पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ और सुरक्षित है। बच्चों में बढ़ी प्रकृति संरक्षण की जागरूकता         वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया जिसमें शामिल बच्चों और युवाओं के लिए यह अनुभव बेहद खास रहा। वन विभाग का मानना है कि ऐसे दुर्लभ वन्यजीवों के दर्शन से नई पीढ़ी में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ती है। यह आयोजन राज्य सरकार की पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता आधारित योजनाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

वन मंत्री सख्त, बीजापुर DFO को हटाकर निष्पक्ष जांच के दिए आदेश

रायपुर. बीजापुर जिले में हुए तेंदूपत्ता अग्निकांड को लेकर वन मंत्री केदार कश्यप ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। वनवासियों और तेंदूपत्ता संग्राहकों की मेहनत की कमाई को नुकसान पहुंचाने वाली इस गंभीर घटना पर मंत्री कश्यप ने तत्काल संज्ञान लेते हुए बीजापुर के वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) रमेश कुमार जांगड़े को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। उन्हें प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय रायपुर में संबद्ध किया गया है। वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर तेंदूपत्ता संग्रहण एवं प्रबंधन में अनुभवी अधिकारी जाधव सागर रामचंद्र को बीजापुर का नया डीएफओ नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में की गई इस कार्रवाई को शासन का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि वनवासियों के हितों से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। वन मंत्री कश्यप ने दो टूक कहा कि तेंदूपत्ता केवल वन उपज नहीं, हजारों आदिवासी और वनवासी परिवारों की आजीविका का आधार है। उनकी मेहनत और अधिकारों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। इस मामले में किसी भी स्तर की लापरवाही को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। घटना की जानकारी मिलते ही मंत्री कश्यप ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक लेकर पूरे मामले की तत्काल जांच के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, समयबद्ध और तथ्यात्मक होनी चाहिए ताकि जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जा सके। अनुभवी अधिकारी को मिली जिम्मेदारी नवनियुक्त डीएफओ जाधव सागर रामचंद्र वर्तमान में राज्य लघु वनोपज संघ में पदस्थ हैं और तेंदूपत्ता संग्रहण एवं प्रबंधन के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखते हैं। दंतेवाड़ा जिले में उनके प्रभावी कार्य और प्रशासनिक दक्षता को देखते हुए शासन ने बीजापुर जैसे संवेदनशील जिले की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है। 10 करोड़ से अधिक नुकसान का प्रारंभिक अनुमान उल्लेखनीय है कि 25 मई 2026 को बीजापुर जिले के इटपाल स्थित एक निजी गोदाम में भीषण आग लगने से विभिन्न समितियों का संग्रहित तेंदूपत्ता जलकर नष्ट हो गया। प्रारंभिक आकलन के अनुसार लगभग 10 करोड़ रुपये की क्षति का अनुमान है। वास्तविक नुकसान का विस्तृत भौतिक सत्यापन वर्तमान में जारी है। सुरक्षा व्यवस्था होगी और मजबूत शासन ने घटना के कारणों, गोदामीकरण प्रक्रिया, सुरक्षा मानकों के पालन, अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका तथा संभावित वित्तीय क्षति सहित सभी पहलुओं की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वन संपदा की सुरक्षा और आदिवासी हितों की रक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बारनवापारा के जंगल में दिखी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी, वन विभाग भी हुआ उत्साहित

बारनवापारा के देवपुर जंगल में दिखी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी वन मंत्री  केदार कश्यप ने दी बधाई जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों को मिली बड़ी सफलता रायपुर छत्तीसगढ़ के बारनवापारा क्षेत्र ने एक बार फिर अपनी समृद्ध जैव विविधता से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। बलौदाबाजार वनमंडल के अंतर्गत देवपुर जंगल में आयोजित देवपुर समर कैंप 2026 के दौरान दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी (जायंट मालाबार स्क्विरल) दिखाई दी। इस दुर्लभ वन्यजीव के दिखने से वन विभाग, प्रकृति प्रेमियों और वैज्ञानिकों में उत्साह है।           वन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर वन विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ सरकार की वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की योजनाओं का सकारात्मक परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है, जिससे दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास विकसित हो रहे हैं। देवपुर समर कैंप में दिखी दुर्लभ प्रजाति          बलौदाबाजार वनमंडल द्वारा 16 मई से 22 मई 2026 तक देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया था। कैंप के पहले दिन 16 मई को आयोजित बर्डिंग ट्रेल के दौरान इस दुर्लभ गिलहरी को देखा गया। इसकी पहचान प्रकृति प्रेमी एवं साइबर रिस्क एक्सपर्ट हेमंत वर्मा ने की। विशाल भारतीय गिलहरी की खासियत          विशाल भारतीय गिलहरी, जिसका वैज्ञानिक नाम रेटूफा इंडिका  (Ratufa indica) है, भारत की सबसे बड़ी वृक्षवासी गिलहरियों में से एक है। इसकी पूंछ सहित लंबाई लगभग तीन फीट तक होती है। इसके शरीर पर गहरे लाल, भूरे, काले और क्रीम रंगों का सुंदर मिश्रण होता है। यह अपना अधिकांश जीवन पेड़ों पर ही बिताती है और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक लंबी छलांग लगाने में सक्षम होती है। कानूनी संरक्षण प्राप्त दुर्लभ प्रजाति          यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-2 के तहत संरक्षित है। इसका शिकार या व्यापार करना कानूनन अपराध है। स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने कहा कि बारनवापारा अभ्यारण्य और आसपास का वन क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है। देवपुर जंगल में इस दुर्लभ गिलहरी का दिखना इस बात का प्रमाण है कि यहां का वन पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ और सुरक्षित है। बच्चों में बढ़ी प्रकृति संरक्षण की जागरूकता         वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया जिसमें शामिल बच्चों और युवाओं के लिए यह अनुभव बेहद खास रहा। वन विभाग का मानना है कि ऐसे दुर्लभ वन्यजीवों के दर्शन से नई पीढ़ी में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ती है। यह आयोजन राज्य सरकार की पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता आधारित योजनाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

UD मिंज ने डी-लिस्टिंग का किया विरोध, अरविंद नेताम का बड़ा बयान- देर-सवेर लागू होगी

रायपुर. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जनजाति सांस्कृतिक समागम के मंच पर डी-लिस्टिंग की मांग के बाद छत्तीसगढ़ में भी इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई है. अन्य धर्म अपना चुके लोगों को एसटी सूची से बाहर करने की मांग की जा रही है. इस बहस में एक और समर्थन तो दूसरी तरफ खुलकर विरोध भी किया जा रहा है.  देर-सवेर डी-लिस्टिंग होकर रहेगी : नेताम छत्तीसगढ़ से इस मांग का वनवासी सुरक्षा मंच के बैनर तले पूर्व मंत्री गणेशराम भगत और सांसद भोजराम नाग नेतृत्व कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविन्द नेताम भी कार्यक्रम में शिरकत करने वाले थे, लेकिन किसी कारण से वह नहीं जा पाए. उन्होंने डी-लिस्टिंग को लेकर कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर तैयारी की गई है और समाज की भावनाओं के अनुरूप यह मांग लगातार मजबूत हो रही है. देर-सबेर डी-लिस्टिंग होकर रहेगी. धर्मांतरण के मुद्दे पर छत्तीसगढ़ में कड़े कानून की दिशा में भी प्रयास हो रहे हैं. अरविन्द नेताम ने कहा कि यह एक संवेदनशील विषय है, जो धीरे-धीरे राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनता जा रहा है, इसलिए सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा. डी-लिस्टिंग की मांग का विरोध जशपुर में डी-लिस्टिंग की मांग का विरोध का माहौल है. पूर्व संसदीय सचिव यूडी मिंज और गीता उरांव के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया गया. यूडी मिंज का कहना है कि डी-लिस्टिंग की मांग संविधान की भावना के विपरीत है और इसे अनावश्यक राजनीतिक रंग दिया जा रहा है. धर्म परिवर्तन के बाद भी आदिवासी समाज की परंपराएं, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक पहचान खत्म नहीं होती है. जशपुर जिले में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय निवास करता है और समाज की पहचान उसके सांस्कृतिक जीवन से जुड़ी हुई है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस सरकार के दौरान रौतिया समेत अन्य समाजों को आदिवासी वर्ग में शामिल करने के लिए टीआरआई के माध्यम से प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था. क्यो होती है डी-लिस्टिंग ? आसान भाषा में डी-लिस्टिंग यानी लिस्ट से बाहर करना. आदिवासियों की इस मांग के सन्दर्भ में डीलिस्टिंग का मतलब, किसी समुदाय को अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर करना है. क्या है संविधान का अनुच्छेद 342?   केंद्र सरकार से आदिवासी नेता संविधान के अनुच्छेद 342 में संशोधन करने की मांग कर रहे हैं. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 (article 342) राष्ट्रपति को राज्य के राज्यपाल से परामर्श करने के बाद उस विशिष्ट राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में अनुसूचित जनजाति (एसटी) माने जाने वाली जनजातियों या आदिवासी समुदायों को अधिसूचित करने का अधिकार देता है.

निवेश बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम, छत्तीसगढ़ में बदलेगी भूमि उपयोग और बिल्डिंग परमिशन व्यवस्था

रायपुर. भारत में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) सुधारों का दायरा अब केवल उद्योग और कर व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है. अब केंद्र सरकार का फोकस शहरी नियोजन (Urban Planning), भूमि उपयोग (Land Use) और निर्माण स्वीकृति प्रक्रियाओं को आधुनिक, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनाने पर है. इसी दिशा में भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय द्वारा “Compliance Reduction and Deregulation Reforms” के तहत राज्यों को महत्वपूर्ण सुधार लागू करने की सिफारिश की गई है. इन सुधारों का उद्देश्य शहरों को अधिक लचीला, निवेश-तैयार और आर्थिक गतिविधियों के अनुरूप बनाना है, ताकि उद्योग, आवास, वाणिज्यिक गतिविधियां और आधुनिक शहरी विकास को नई गति मिल सके. विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा केवल औद्योगिक नीति या कर छूट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कोई राज्य निवेशकों को कितनी तेज, पारदर्शी और सरल स्वीकृति प्रणाली उपलब्ध कराता है. इसी दृष्टि से छत्तीसगढ़ द्वारा किए जा रहे सुधार भविष्य के निवेश वातावरण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. “जो प्रतिबंधित नहीं, वह अनुमति प्राप्त” मॉडल पर जोर कैबिनेट सचिवालय ने राज्यों को “डिमांड-ड्रिवन भूमि उपयोग प्रणाली” (Demand-Driven Land Use System) अपनाने की सलाह दी है, जो “Everything is Permitted Unless Prohibited” अर्थात “जो प्रतिबंधित नहीं है, वह अनुमति प्राप्त है” के सिद्धांत पर आधारित है. इसके तहत प्रत्येक क्षेत्र में केवल प्रतिबंधित गतिविधियों की “Negative List” तय की जाएगी, जबकि अन्य सभी गतिविधियों को स्वतः अनुमति प्राप्त होगी. इस व्यवस्था से भूमि उपयोग परिवर्तन की जटिल और लंबी प्रक्रियाएं कम होंगी तथा निवेशकों को अधिक स्पष्टता और सुविधा मिलेगी. त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, केरल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने इस दिशा में पहल शुरू कर दी है. त्रिपुरा ने वर्ष 2025 में “Negative List of Industries” लागू कर इस मॉडल को व्यवहार में उतार दिया है. Flexible Zoning और Mixed Land Use को मिल रहा बढ़ावा छत्तीसगढ़ सरकार ने भी शहरी नियोजन और निर्माण स्वीकृति प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में आवश्यक संशोधन किए गए हैं. विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य शासन द्वारा “Flexible Zoning Framework” को बढ़ावा देते हुए मिश्रित भूमि उपयोग (Mixed Land Use) को प्रोत्साहित किया जा रहा है. संशोधित प्रावधानों के अनुसार आवासीय क्षेत्रों में रेड, ऑरेंज, ग्रीन एवं ब्लू श्रेणी के उद्योगों को प्रतिबंधित किया गया है, जबकि वाणिज्यिक क्षेत्रों में केवल रेड एवं ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों पर प्रतिबंध रहेगा. उद्योगों का वर्गीकरण छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाएगा. इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योगों से जुड़े कर्मचारियों के लिए अधिकतम 60 वर्गमीटर तक के किफायती आवास निर्माण की अनुमति दी गई है. इसके लिए अधिकतम FAR 2.0 तथा 70 प्रतिशत भू-आच्छादन की अनुमति होगी. यह व्यवस्था “Walk to Work” जैसी अवधारणाओं को बढ़ावा देने के साथ उद्योग आधारित किफायती आवास परियोजनाओं को गति देगी. इससे श्रमिकों और कर्मचारियों को कार्यस्थल के नजदीक आवास उपलब्ध हो सकेंगे, परिवहन लागत कम होगी तथा शहरों में अनियोजित विस्तार को नियंत्रित करने में भी सहायता मिलेगी. ऑनलाइन सेवाओं और Deemed Approval से निवेशकों को मिलेगा लाभ राज्य सरकार ने भूमि उपयोग परिवर्तन (CLU – Change of Land Use) प्रक्रिया को भी सरल और डिजिटाइज करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार नगर निगम, नगरपालिका, नगर पंचायत क्षेत्रों तथा उनकी बाहरी सीमाओं से लगे निर्धारित क्षेत्रों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ श्रेणियों की भूमि के व्यपवर्तन के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति की आवश्यकता समाप्त की गई है. इससे भूमि उपयोग परिवर्तन प्रक्रिया में तेजी आएगी, अनुमोदन स्तरों का युक्तिकरण होगा और निवेशकों को समयबद्ध सेवाएं मिल सकेंगी. साथ ही ऑनलाइन सिंगल विंडो प्रणाली, सभी NOC को ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ने तथा निर्धारित समय सीमा में स्वीकृति न मिलने पर “Deemed Approval” जैसे प्रावधानों की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उद्योग स्थापना की प्रक्रिया तेज होगी, परियोजनाओं की लागत में कमी आएगी और निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा. ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योगों की स्थापना होगी आसान विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को बढ़ावा देने के लिए सड़क चौड़ाई मानकों में भी युक्तिकरण किया है. संशोधित नियमों के अनुसार 0.1 हेक्टेयर तक के गैर-प्रदूषणकारी ग्रीन एवं व्हाइट श्रेणी के MSME उद्योगों के लिए न्यूनतम पहुंच मार्ग की चौड़ाई 7.5 मीटर तथा 0.1 से 0.25 हेक्टेयर तक के उद्योगों के लिए 9 मीटर निर्धारित की गई है. इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योगों की स्थापना आसान होगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा तथा औद्योगिक क्लस्टर विकास को गति मिलेगी. इसके साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना भी बढ़ेगी. Third Party Inspection और Self Certification से घटेगा समय विश्वस्त सूत्रों के अनुसार भवन निर्माण स्वीकृतियों में देरी को समाप्त करने के लिए राज्य सरकार ने निरीक्षण एवं अनुमोदन प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण सुधार किए हैं. छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 के नियम 96 एवं 98 में संशोधन कर प्लींथ सर्टिफिकेट, Completion Certificate और Occupancy Certificate जारी करने की समय-सीमा निर्धारित की गई है. नए प्रावधानों के तहत निरीक्षण 4 दिवस के भीतर किया जाएगा तथा निरीक्षण रिपोर्ट 48 घंटे में प्रस्तुत करनी होगी. निर्धारित समय सीमा में प्रमाण पत्र जारी नहीं होने पर उसे “Deemed Approval” माना जाएगा. इसके साथ ही तृतीय पक्ष (Third Party) एजेंसियों के माध्यम से संयुक्त निरीक्षण तथा आर्किटेक्ट आधारित Self Certification व्यवस्था को भी बढ़ावा दिया गया है. इससे निर्माण परियोजनाओं में अनावश्यक देरी कम होगी, भ्रष्टाचार और प्रक्रियागत जटिलताओं में कमी आएगी तथा उद्योग और रियल एस्टेट क्षेत्र को गति मिलेगी. ALBPMS सॉफ्टवेयर से पूरी प्रक्रिया हुई ऑनलाइन राज्य सरकार ने भवन अनुमति प्रणाली को पूर्णतः डिजिटल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किए हैं. ALBPMS सॉफ्टवेयर के माध्यम से अब ऑनलाइन आवेदन, एकीकृत भुगतान प्रणाली, डिजिटल हस्ताक्षरित भवन योजनाएं, Auto-DCR द्वारा स्वचालित भवन परीक्षण, निर्माण प्रारंभ एवं पूर्णता की ई-सूचना तथा डिजिटल Occupancy … Read more

तेज धूप से बिगड़ रही स्किन, सनबर्न और जलन के मामलों में इजाफा

जगदलपुर. बस्तर में बढ़ती गर्मी अब केवल तापमान तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोगों की त्वचा और सेहत पर असर दिखाने लगी है. 40 डिग्री के करीब पहुंचते पारे ने सनबर्न और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ा दी है. मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं. डॉक्टरों के मुताबिक हर 100 मरीजों में 10 से 15 मरीज लू और गर्मी से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित हैं. सीधी धूप में निकलने वाले लोगों की त्वचा लाल और सूखी पड़ रही है. पराबैंगनी किरणों (UV Rays) के असर से त्वचा में जलन और धब्बों की शिकायतें बढ़ रही हैं. मौसम में बादल छाने के बावजूद उमस और तपिश से राहत नहीं मिल रही. बच्चों और बुजुर्गों पर गर्मी का असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है. अस्पतालों में डिहाइड्रेशन के मरीज भी तेजी से बढ़ रहे हैं. डॉक्टरों ने लोगों को धूप में निकलने से पहले पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है. साथ ही पानी में नमक और नींबू मिलाकर पीने और सूती कपड़े पहनने को कहा गया है. बस्तर में अब गर्मी केवल मौसम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनती नजर आ रही है.

शानदार कामकाज का मिला सम्मान, प्रदेश के दो IPS अफसरों को अहम जिम्मेवारी

रायपुर   प्रदेश के 2 IPS अफसरों को बड़ी जिम्मेदारी से नवाजा गया है। नीतू कमल और डी श्रवण को बड़ी सौगात मिली है। इन दोनों अधिकारियों को केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी में आईजी के लिए इंपैनल किया गया है जो बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। 2008 बैच के आईपीएस अधिकारी नीतू कमल और डी श्रवण को बड़ी जिम्मेवारी छत्तीसगढ़ कैडर के  इन दो IPS अफसरों को यह अहम जिम्मेदारी मानी जा रही है। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को केंद्र सरकार ने बड़ी सौगात दी है।  2008 बैच के आईपीएस अधिकारी नीतू कमल और डी श्रवण के केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी में आईजी के लिए इंपैनल होने को एक बड़ा मुकाम माना जा रहा है। आपको बता दें कि आईपीएस नीतू कमल मौजूदा समय में CBI  में प्रतिनियुक्ति पर हैं, जबकि डी श्रवण राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।  दोनों अधिकारियों के अनुभव को देखते हुए केंद्र ने उन्हें अहम जिम्मेदारी सौंपी है। गृह मंत्रालय की ओर से  जारी सूची में देश से वर्ष 2001 से 2008 बैच तक के 67 आईपीएस अधिकारियों को आईजी और डीआईजी स्तर के पदों के लिए इंपैनल किया गया है। छत्तीसगढ़ कैडर के  इन दो IPS अफसरों को ये सौगात मिली है जो एक अहम बात मानी जा रही है।

कोर्ट से हुआ लंबित मामलों का निराकरण, 24 राशन दुकानें रद्द

दुर्ग. जिले की 24 राशन दुकानों का संचालन लंबे समय से अटैचमेंट में चल रहा था। कोर्ट में प्रकरण लंबित होने के कारण इन दुकानों के संचालन के लिए नई समितियों का निर्धारण नहीं हो पा रहा था। कोर्ट से प्रकरणों के निराकरण के बाद इन सारी दुकानों का आवंटन निरस्त कर दिया गया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2016 की कंडिका 16 के तहत यह कार्यवाही की गई है। निरस्त दुकान-महिला स्व सहायता समूह, संगवारी खाद्य सुरक्षा पोषण एवं उप सेवा सह समिति, नवीन महिला स्व सहायता समूह, शंकरा महिला स्व सहायता समूह, जय शक्ति महिला स्व सहायता समूह, जय श्री कृष्ण महिला स्व सहायता समूह, दुर्ग सहकारी विपणन समिति, कृषक सेवा सहकारी समिति कोहका, जय सदाराम महिला स्व सहायता समूह, मां अन्नपूर्णा स्व सहायता समूह, सामुदायिक विकास समिति भिलाई, एकता महिला स्व सहायता समूह, सामुदायिक विकास समिति भिलाई, बीएसपी प्राथमिक सहकारी उपभोक्ता भण्डार, सहकारी उपभोक्ता भण्डार भिलाई, विन्ध्यवासिनी महिला स्व सहायता समूह, नवीन प्राथमिक सहकारी उपभोक्ता भण्डार, स्टील नगर महिला स्व सहायता समूह, मं जय भवानी महिला स्व सहायता समूह, इस्पात कर्मचारी कन्ज्यूमर कोआपरेटिव स्टोर्स भिलाई, सामुदायिक विकास समिति रविदास नगर भिलाई, संतोषी महिला स्व सहायता समूह, भूतपूर्व सैनिक कल्याण संघ केम्प 1 भिलाई और प्रेरणा महिला स्व सहायता समूह शामिल हैं। शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन के लिए आवेदन केवल संबंधित वार्ड की स्थानीय संस्था द्वारा ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। 15 जून तक आवेदन किया जा सकता है। खाद्य नियंत्रक अनुराग सिंह भदौरिया ने बताया कि पूर्व में लंबित मामलों के निराकरण के बाद ही दुकानों के आवंटन को निरस्त किया गया है। नए का निर्धारित गाइडलाइन के अनुरूप आवंटन किया जाएगा।

वन विभाग में बड़ा बदलाव, अरूण पांडे बने नए PCCF

रायपुर. राज्य शासन ने 1994 बैच के वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी अरुण कुमार पाण्डेय को छत्तीसगढ़ का नया प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख नियुक्त कर दिया है। छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा आज 27 मई 2026 को मंत्रालय (महानदी भवन) से यह आधिकारिक आदेश जारी किया गया है। विभाग के विशेष सचिव जे.पी. पाठक के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश के अनुसार, यह नियुक्ति वर्तमान प्रमुख वी. श्रीनिवास राव, भा.व.से. (1990) की सेवानिवृत्ति के उपरांत की गई है। नवनियुक्त वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय, भा.व.से. (1994) वर्तमान में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव प्रबंधन एवं जैव विविधता संरक्षण-सह-मुख्य वन्यजीव वार्डन) के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। अब उन्हें अरण्य भवन, नवा रायपुर के शीर्षस्थ पद पर पदस्थ करते हुए शीर्षस्थ वेतनमान में नियुक्त किया गया है। राज्यपाल के नाम से जारी इस आदेश की प्रतिलिपि भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय और मुख्यमंत्री सचिवालय सहित सभी संबंधित विभागों को तत्काल भेज दी गई है।

CM साय ने दिवंगत रूपनारायण के घर पहुंचकर जताया शोक, कई मंत्री रहे साथ

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुधवार सुबह योग आयोग के अध्यक्ष रूपनारायण सिन्हा के कबीर नगर स्थित निवास पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी. इस दौरान गृहमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप भी मौजूद रहे. मंगलवार को प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान रूपनारायण सिन्हा की अचानक तबियत बिगड़ गई. इस बीच उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की, जिसके बाद सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां उनकी कार्डियक अरेस्ट से उनकी मौत हो गई. आज कुछ देर बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि रूपनारायण से उनका बहुत पुराना संबंध रहा है. वे लंबे समय से संगठन से जुड़े हुए थे और उनके साथ व्यक्तिगत रिश्ते भी बेहद आत्मीय रहे. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दुख की घड़ी में भगवान उनके परिवार को संबल प्रदान करें और दिवंगत रूपनारायण सिन्हा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें. पंडित दीनदयाल प्रशिक्षण महाअभियान स्थगित रूपनारायण सिन्हा के निधन के बाद BJP का पंडित दीनदयाल प्रशिक्षण महाअभियान स्थगित कर दिया गया है. तिफरा के झूलेलाल मंगलम में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होना था, जिसे अब स्थगित कर दिया गया है.