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रायपुर : नैनो डीएपी किसानों के लिए ठोस डीएपी उर्वरक का स्मार्ट विकल्प

रायपुर : नैनो डीएपी किसानों के लिए ठोस डीएपी उर्वरक का स्मार्ट विकल्प   रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को रासायनिक उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत है। खरीफ 2025 के दौरान डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) की कमी को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन ने इसके व्यवहारिक विकल्प के रूप में नैनो डीएपी के भंडारण एवं वितरण की विशेष व्यवस्था की है। इसके साथ ही एनपीके और एसएसपी जैसे वैकल्पिक उर्वरकों का भी लक्ष्य से अधिक मात्रा में भंडारण कराया गया है। खेती में ठोस डीएपी उर्वरक की कमी को पूरा करने के लिए किसानों को उसके विकल्प के अनुरूप कृषि वैज्ञानिकों के सुझाव के अनुरूप नैनो डीएपी अथवा एनपीके और सिंगल सुपर फास्फेट खाद की मात्रा का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है।  नैनो डीएपी एक आधुनिक, किफायती और प्रभावशाली तरल उर्वरक है, जो पारंपरिक डीएपी की तुलना में कहीं अधिक उपयोगी और पोषक तत्वों से भरपूर है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के वैज्ञानिकों ने नैनो डीएपी का समर्थन करते हुए कहा है कि इसके उपयोग से खेती की लागत में कमी आती है। नैनो डीएपी खेत में पोषण की कमी को प्रभावी ढंग से पूरा करता है और उत्पादन की गुणवत्ता को भी बढ़ाता है। नैनो डीएपी पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है। एक एकड़ धान की फसल के लिए एक बोरी ठोस डीएपी का उपयोग होता है। जिसकी लागत 1350 रूपए होती हैै, जबकि एक एकड़ में 25 किलो ठोस डीएपी और 500 मिली नैनो डीएपी के मिश्रण का उपयोग किया जाए तो इसकी लागत घटकर 1275 रूपए आती है।   इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने एक एकड़ धान की खेती के लिए नैनो डीएपी की उपयोग की विधि की विस्तार से जानकारी दी है। इसके अनुसार नैनो डीएपी की मात्र साढ़े 600 मिली मात्रा एक एकड़ धान की खेती में लगती है। धान की बुआई से पहले एक एकड़ के लिए 30 किलो बीज को 150 मिली नैनो डीएपी को तीन लीटर पानी में घोलकर उसमें बीज उपचारित कर आधा घंटा छाव में सुखाने के बाद बुआई की जाती है। रोपा के समय 50 लीटर पानी में 250 मिली नैनो डीएपी को मिलाकर उसमें थरहा की जड़ों को आधा घंटा डूबाकर रखने के बाद रोपाई तथा फसल बोआई के तीस दिन बाद 125 लीटर पानी में 250 मिली नैनो डीएपी को घोलकर खड़ी फसल पर इसका छिड़काव करना होता है। इससे फसलों को पोषक तत्व मिल जाते है।  नैनो डीएपी फसलों को भरपूर मात्रा में पोषक तत्व प्रदान करने के लिए बेहतर विकल्प है। यह पारंपरिक डीएपी के मुकाबले लागत कम और प्रभाव अधिक है। पारंपरिक डीएपी की एक बोरी की कीमत लगभग 1350 रूपए होती है, वहीं नैनो डीएपी की एक बोतल से कई एकड़ भूमि को लाभ पहुंचाया जा सकता है। यह स्प्रे के माध्यम से सीधे पौधों पर छिड़का जाता है, जिससे पोषक तत्वों का त्वरित अवशोषण होता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश के अनुरूप राज्य शासन द्वारा किसानों को डीएपी उर्वरक के विकल्प के रूप में नैनो डीएपी सहित वैकल्पिक उर्वरकों का पर्याप्त भण्डारण समितियों में किया जा रहा है। किसानों को इसके उपयोग के लिए प्रशिक्षण एवं जागरूकता शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं। कृषि विभाग ने किसानों से नैनो डीएपी तथा एनपीके, एसएसपी जैसे वैकल्पिक उर्वरकों का उपयोग करने की अपील की है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर महिलाओं ने स्वरोजगार की राह अपनाई

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान योजना का फायदा उठाकर अपने जीवन में साकारात्मक बदलाव ला रही है। इस कड़ी में जशपुर जिले की ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की मिसाल गढ़ रही हैं। कांसाबेल विकासखंड के ग्राम सेम्हर कछार की हरियाली स्वसहायता समूह की 11 महिलाओं ने छिंद कासा से आकर्षक टोकरी और अन्य पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पाद तैयार कर अपनी आजीविका को मजबूत किया है। समूह की सदस्य श्रीमती बालमुनि भगत ने बताया कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें स्वरोजगार का अवसर मिला। पहले महिलाएं केवल घरेलू कामकाज तक सीमित थीं, लेकिन अब वे सालाना लगभग 60 से 70 हजार रुपये तक की कमाई कर रही हैं। यह कार्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ आत्मविश्वास भी दे रहा है। महिलाओं ने बताया कि बिहान योजना ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। समूह के माध्यम से प्रशिक्षण, सहयोग और विपणन सुविधा मिलने से उनका उत्पाद अब स्थानीय हाट-बाजार और मेलों में लोकप्रिय हो चुका है। महिलाएं कहती हैं कि अब वे सिर्फ घर तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि अपनी पहचान खुद बना रही हैं। समूह की दीदियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं से हम सशक्त और आत्मनिर्भर हो रहे हैं।

रायपुर : राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु से राज्यपाल श्री डेका ने की सौजन्य भेंट

रायपुर राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज नई दिल्ली राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से सौजन्य भेंट की।

कलेक्टर ने जनदर्शन में सुनी लोगों की समस्याएं

कलेक्टर ने जनदर्शन में सुनी लोगों की समस्याएं अधिकारियों को समस्याओं का त्वरित निराकरण करने दिए निर्देश बिलासपुर कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने आज साप्ताहिक जनदर्शन में दूर-दराज से आये लोगों की समस्याएं सुनी। कलेक्टर ने सभी की समस्याओं को इत्मीनान से सुना। निराकरण योग्य आवेदनों का मौके पर ही संबंधित अधिकारियों द्वारा निराकरण किया गया। साप्ताहिक जनदर्शन में लोगों ने कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी निजी और सामुदायिक समस्याओं से संबंधित आवेदन दिए। कलेक्टर ने त्वरित निराकरण के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए।         साप्ताहिक जनदर्शन में आज बोदरी तहसील के ग्राम पोड़ी निवासी वृद्ध श्री रामसहाय दिवाकर ने आज कलेक्टर से मिलकर पेंशन राशि दिलाये जाने हेतु आवेदन दिया। 74 वर्षीय वृद्ध श्री दिवाकर ने कहा कि मैं एक उम्रदराज व्यक्ति हूं तथा रोजी मजदूरी कार्य करने में असमर्थ हूँ। शासन के योजनांतर्गत प्राप्त होने वाली पेंशन राशि मुझे नहीं मिल रही है। ग्राम पंचायत सचिव के समक्ष भी पेंशन राशि के लिए आवेदन किया गया, किन्तु आज तक लाभ प्राप्त नहीं हुआ है। कलेक्टर ने जनपद पंचायत बिल्हा सीईओ को मामले को सौंपते हुए इसके निराकरण के निर्देश दिए। सीपत तहसील के ग्राम जांजी निवासी गरिमा सिंह ने शिक्षा सहायता राशि प्रदान करने हेतु आवेदन दिया। गरिमा ने बताया कि वर्तमान में वह अभी बीपीएड की पढ़ाई कर रही है। पिता जी लकवाग्रस्त होने के कारण शारीरिक रूप से चलने-फिरने में असमर्थ है, जिससे पूरे परिवार का पालन-पोषण उनकी माता मजदूरी करके कर रही है। कलेक्टर ने आवेदन जिला शिक्षा अधिकारी को भेजते हुए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। बिल्हा तहसील के ग्राम पत्थरखान निवासी श्री मनोज पांडे ने खाद एवं दवा सोसाइटी से दिलाने की मांग की। उन्होंने बताया कि ग्राम पत्थरखान बिटकुली सोसाइटी के अंतर्गत 6 गांव आते हैं। उनमें से एक गांव पत्थरखान है। सोसाइटी से खाद और दवा मिल नहीं पा रही है। कलेक्टर ने डीएमओ को इस पर तत्काल आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। ग्राम पंचायत मस्तूरी निवासी श्री मनहरण टण्डन ने कलेक्टर के समक्ष अपना आवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा आवास मित्र के विरूद्ध आवश्यक कार्रवाई किये जाने की का निवेदन किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत उनके नाम पर आवास स्वीकृत हुआ है। आवास निर्माण के लिए शासन से आई हुई राशि को आवास मित्र के द्वारा आहरण कर लिया गया। बार-बार राशि मांगने पर भी वह देने से इंकार कर रहा है। कलेक्टर ने जिला पंचायत सीईओ को इस संबंध में आवश्यक जांच करने के निर्देश दिए है।  रचना/44/1058

पुजारी को मंदिर की संपत्ति का मालिक नहीं माना जा सकता, केवल पूजा और प्रबंधन का होता है अधिकार: हाईकोर्ट

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मंदिर की संपत्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि पुजारी को मंदिर की संपत्ति का मालिक नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि पुजारी केवल देवता की पूजा करने और मंदिर का सीमित प्रबंधन करने के लिए नियुक्त एक प्रतिनिधि होता है, न कि स्वामी। बता दें कि यह फैसला जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने उस याचिका पर सुनाया, जो धमतरी जिले के श्री विंध्यवासिनी मां बिलाईमाता मंदिर के पुजारी परिषद अध्यक्ष मुरली मनोहर शर्मा ने दायर की थी। शर्मा ने राजस्व मंडल, बिलासपुर के 3 अक्टूबर 2015 के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनकी पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई थी। विवाद की शुरुआत तब हुई जब मुरली मनोहर शर्मा ने तहसीलदार के समक्ष आवेदन देकर अपना नाम मंदिर ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग की थी। तहसीलदार ने उनके पक्ष में आदेश जारी किया, लेकिन एसडीओ ने इस आदेश को रद्द कर दिया। इसके खिलाफ शर्मा ने अपर आयुक्त रायपुर के समक्ष अपील की, जो खारिज कर दी गई। इसके बाद उन्होंने राजस्व मंडल में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की, जिसे भी खारिज कर दिया गया। शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर यह दलील दी कि तहसीलदार का आदेश न्यायोचित था और अन्य अधिकारियों ने मामले की सही समीक्षा नहीं की। हाईकोर्ट की टिप्पणी हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि विंध्यवासिनी मंदिर ट्रस्ट समिति 23 जनवरी 1974 से विधिवत पंजीकृत संस्था है और वही मंदिर की संपत्ति का वैधानिक प्रबंधन करती है। कोर्ट ने 21 सितंबर 1989 को सिविल जज, वर्ग-2, धमतरी द्वारा पारित एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ट्रस्ट समिति ट्रस्ट की संपत्ति की देखरेख के लिए किसी भी व्यक्ति को प्रबंधक नियुक्त कर सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि उस व्यक्ति को संपत्ति का स्वामित्व प्राप्त हो गया। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पुजारी एक “ग्राही” यानी धारक होता है, जो मंदिर की पूजा संबंधी गतिविधियों के लिए नियुक्त होता है। यदि वह अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करता, तो यह अधिकार वापस भी लिया जा सकता है। इसलिए पुजारी को मंदिर की भूमि या संपत्ति का मालिक नहीं माना जा सकता। यह निर्णय उन मामलों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है जहां मंदिर की संपत्ति को लेकर पुजारियों और ट्रस्ट के बीच विवाद खड़े होते हैं। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि धार्मिक सेवा का अधिकार और मालिकाना हक अलग-अलग बातें हैं और पुजारी केवल सेवा के लिए नियुक्त व्यक्ति है, स्वामी नहीं।

कोरबा में वाटरफॉल में फंसे 5 युवक-युवतियों का सफल रेस्क्यू, सेल्फी-पॉइंट पर मौजूद थे, अचानक बढ़ा जलस्तर

कोरबा  छत्तीसगढ़ में लगातार दो दिनों से हो रही बारिश से आफत बढ़ती ही जा रही है। हालांकि इस पानी से गर्मी-उमस से भी राहत मिली है। कोरबा जिले में तेज पानी गिर रहा है। है। कोरबा के पाली में पिछले 24 घंटे के दौरान 260 मिमी बारिश हुई। यानी हर घंटे करीब 11 मिमी की औसत से बारिश हुई। कई जगहों पर भारी वर्षा रिकॉर्ड की गई। इस बीच, घूमने के लिए देवपहरी पहुंचा 5 दोस्तों का ग्रुप जलस्तर बढ़ने से टापू पर फंस गया। 5 दोस्तों का ग्रुप बारिश का नजारा देखने देवपहरी के गोविंदझुंझा जलप्रताप पहुंचा था। इनमें तीन युवती और दो युवक शामिल हैं।  जलप्रताप में बारिश के दौरान नजारा मनमोहक होने से दोस्तों का ग्रुप आगे टापू की ओर चला गया, जहां फोटो और सेल्फी लेने के बाद लौट रहे थे, तभी ऊपर से पहाड़ी की ओर से बारिश का पानी तेजी से पहुंचा। वे सभी जलस्तर बढ़ने से टापू पर बने गुंबद में पहुंचे। चारों ओर तेज पानी का बहाव होने से वे फंस गए हैं। दूसरी ओर, अमरकंटक से लौटते वक्त पेंड्रा इलाके में सजहा नाले के तेज बहाव में एक कार बह गई। इसमें नर्स प्रीति यादव, उनके पति चंद्रशेखर यादव और दो बच्चे सवार थे। हादसे में चारों की मौत हो गई। घटना किरर टोल प्लाजा के पास हुई, जहां पुल पर तेज पानी होने के बावजूद कार को पार कराने की कोशिश की गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बस के पार होते देख चंद्रशेखर ने भी कार बढ़ा दी, जो तेज बहाव में बह गई। सोमवार को शव बरामद कर लिया गया है। मप्र के मंत्री दिलीप जायसवाल ने परिजन को सांत्वना दी और 25-25 हजार रुपए की सहायता घोषित की। वहीं, रतनपुर से केंवची के रास्ते में मझवानी गांव के पास पुल के ऊपर से पानी बहता हुआ देखने के बावजूद पार करने की कोशिश में कोयला लोड ट्रक बह गया। हालांकि सड़क के दूसरी छोर पर मौजूद लोगाें ने ड्राइवर को बचा लिया। बारिश के कारण धमतरी जिले में सोंढूर नदी उफान पर है। इससे घोरागांव, छोटे गोबरा, दौड़ पंडरीपानी, समेत 15 गांव जिला मुख्यालय से कट गए। वहीं मगरलोड मार्ग पर महानदी पर मेघा एनीकट के पास निर्माणाधीन पुल से लगकर 50 गांव की आवाजाही के लिए वैकल्पिक रास्ता बनाया गया था, जो बह गया। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक तेज बारिश होगी। 9 जुलाई के बाद बारिश की गतिविधियों में कमी आने लगेगी। मंगलवार को भी प्रदेश के बिलासपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग में कहीं-कहीं पर भारी बारिश की संभावना है। लगातार हो रही बारिश से 15 जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। भिलाई में भी रविवार की रात से सोमवार सुबह 10 बजे तक दुर्ग- भिलाई में तेज बारिश होने से ट्विनसिटी के अलावा रिसाली और भिलाई-तीन चरोदा नगर निगम क्षेत्र की बहुत सी निचली बस्तियों में पानी भर गया। अभी तक इतनी हो चुकी है बारिश रायपुर समेत छत्तीसगढ़ के कई शहरों में पिछले 24 घंटे से हो रही भारी बारिश के कारण छत्तीसगढ़ में अब तक की बारिश सामान्य से ऊपर हो गई है। 7 जुलाई तक पूरे प्रदेश में 306 मिमी पानी गिर चुका है, जबकि औसत 271.9 मिमी है। यानी औसत से 13 फीसदी ज्यादा पानी गिर चुका है। उत्तरी और मध्य छत्तीसगढ़ में पिछले दो-तीन दिनों से हो रही तेज बारिश के कारण 7 जुलाई तक का कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। कोरबा के पाली में पिछले 24 घंटे के दौरान 260 मिमी बारिश हुई। यानी हर घंटे करीब 11 मिमी की औसत से बारिश हुई। कई जगहों पर भारी वर्षा रिकॉर्ड की गई।  

कवर्धा जिले में सरकारी कार्यालयों में अनुशासन की नई मिसाल कायम हुई, देर से ऑफिस पहुंचने वाले कर्मचारियों को सबक सिखाया

कवर्धा  छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में सरकारी कार्यालयों में अनुशासन की नई मिसाल कायम हुई है। कलेक्टर गोपाल वर्मा ने देर से ऑफिस पहुंचने वाले कर्मचारियों को ऐसा सबक सिखाया कि अब शायद ही कोई समय पर न आए। जिला पंचायत कार्यालय के मुख्य द्वार पर हाजिरी रजिस्टर लेकर खुद बैठ गए कलेक्टर साहब और जो भी लेटलतीफ कर्मचारी दिखा, उससे कान पकड़वाकर उठक-बैठक कराई। इस अनोखे दृश्य का वीडियो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। गेट पर कलेक्टर, हाथ में रजिस्टर गुरुवार सुबह कलेक्टर गोपाल वर्मा ने जिला पंचायत कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। सुबह 10 बजे के बाद भी कई कर्मचारी अपनी कुर्सियों पर नदारद थे। बस फिर क्या, कलेक्टर ने कुर्सी जमा ली और कार्यालय के मुख्य द्वार पर डेरा डाल दिया। कलेक्टर ने देरी से दफ्तर पहुंचने वाले कर्मचारियों की क्लास लगा दी। उन्होंने कर्मचारियों को कान पकड़कर माफी मांगने और उठक-बैठक करने को कहा गया। क्यों सख्त हुए कलेक्टर साहब? कवर्धा में सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों की समयबद्धता पर सवाल उठते रहे हैं। पंचिंग मशीन के बावजूद कई कर्मचरारी समय पर नहीं पहुंचते, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है। कलेक्टर ने कहा, 'जनता के लिए काम समय पर हो, यह सुनिश्चित करना हमारा फर्ज है। अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी।' इस कार्रवाई के बाद कर्मचारियों ने भविष्य में समय पर आने का वचन दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। कुछ लोग कलेक्टर की तारीफ कर रहे हैं, कह रहे हैं कि ऐसी सख्ती जरूरी थी।

रेल यात्रियों की बढ़ी मुसीबत, रेलवे ने CG से होकर चलने वाली 16 ट्रेनों को किया रदद्, 16 अगस्त से 24 दिन तक नहीं चलेंगी गाड़ियां

रायपुर  छत्तीसगढ़ से होकर गुजरने वाली 16 ट्रेनों को भारतीय रेलवे ने कैंसिल कर दिया है, यह ट्रेनें अगस्त और सितंबर के पूरे महीने में नहीं चलेगी, ऐसे में यहां से गुजरने वाले यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. बताया जा रहा है कि यह गाड़ियां अगले आदेश बदले हुए रूट से चलाई जाएगी, जबकि कुछ ट्रेनों की दूरी को शॉर्ट कर दिया गया है. बिलासपुर रेलवे जोन पर चक्रधरपुर मंडल के झारसुगड़ा यार्ड में नॉन इंटरलॉकिंग का काम शुरू होना है, यह काम 16 अगस्त से 10 सितंबर के बीच चलेगा, जिससे यहां ट्रैफिक पूरी तरह से ब्लॉक रहेगा, यही वजह है कि एक साथ इतनी ट्रेनों को कैंसिल किया गया है.  छत्तीसगढ़ के यात्री होंगे परेशान  दरअसल, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, गुजरात और तेलंगाना की तरफ जाने वाली ज्यादातर गाड़ियां प्रभावित हुई है, जिससे यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा, 24 दिनों तक होने वाले नॉन इंटरलॉकिंग काम की वजह से यात्री ट्रेनों को कैंसिल कर दिया गया है. बताया जा रहा है कि रेलवे अगले आदेश तक इन ट्रेनों को कैंसिल रखेगा. हालांकि ट्रेनों के संचालन की प्रक्रिया दोबारा से शुरू होने की जानकारी तुरंत ही दी जाएगी.  छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली यह ट्रेनें कैंसिल      एनएससीबी इतवारी-टाटा एक्सप्रेस 5 से 10 सितंबर के बीच कैंसिल रहेगी.      एनएससीबी इतवारी-टाटा एक्सप्रेस 19 से 21 अगस्त और 24 अगस्त से 2 सितंबर के बीच भी नहीं चलेगी.      गाड़ी संख्या 17007 चर्लापल्ली-दरभंगा एक्सप्रेस 26 अगस्त से 9 सितंबर के बीच नहीं चलेगी.      चर्लापल्ली-दरभंगा एक्सप्रेस 29 अगस्त से 12 सितंबर के बीच भी कैंसिल रहेगी.       हैदराबाद-रक्सौल गाड़ी संख्या 17005 भी 31 अगस्त को नहीं चलेगी.      रक्सौल-हैदराबाद गाड़ी संख्या 17006 भी 30 अगस्त को संचालित नहीं होगी.      रक्सौल-चर्लापल्ली एक्सप्रेस भी 1 और 4 सिंतबर को कैंसिल रहेगी.      नांदेड़-संतरागाछी एक्सप्रेस 8 और 10 सितंबर को संचालित नहीं होगी.      मालदाटाउन-सूरत एक्सप्रेस भी 6 और 8 सितंबर को नहीं चलेगी.      संतरागाछी-पुणे एक्सप्रेस भी 6 और 8 सितंबर को संचालित नहीं होगी.  फिलहाल भारतीय रेलवे की तरफ से इन ट्रेनों को लेकर कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हुई है, ऐसे में जिन यात्रियों ने पहले से ही इन ट्रेनों में रिजर्वेशन करवा लिया था, उन्हें क्या व्यवस्था मिलेगी, इसकी जानकारी जल्द ही रेलवे की तरफ से दी जाएगी या फिर यात्रियों को पैसा रिफंड किया जाएगा. हालांकि यात्रियों को रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट को विजिट करते रहना चाहिए. क्योंकि किसी भी अपडेट की जानकारी सबसे पहले यही जारी की जाएगी. इन ट्रेनों के कैंसिल होने से छत्तीसगढ़ में भी लंबी दूरी की यात्रा तय करने वाले रेलवे यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा.  

साय कैबिनेट की बैठक में सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी को लेकर भी अहम फैसला लिया जा सकता

रायपुर छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने 11 जुलाई को अपने अधिनस्त मंत्रियों की बैठक बुलाई है। बताया जा रहा है ​कि साय कैबिनेट की बैठक​ मंत्रालय में 11 जुलाई शुक्रवार को 11.30 बजे आयोजित की जाएगी। चूंकि छत्तीसगढ़ में मानसून के आगमन के साथ ही किसानी का काम शुरू हो चुका है, ऐसे में ये माना जा रहा है कि किसानों और खाद से जुड़ी समस्याओं को लेकर लेकर साय कैबिनेट में अहम फैसला लिया जा सकता है। दूसरी ओर कयास लगाए जा रहे हैं कि बैठक में सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी को लेकर भी अहम फैसला लिया जा सकता है। मिली जानकारी के अनुसार कयास लगाए जा रहे हैं कि छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी को लेकर साय कैबिनेट की बैठक में अहम फैसला लिया जा सकता है। हालांकि अभी इस संबंध में अधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अगर सरकार इस संबंध में फैसला लेती है तो सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाला महंगाई भत्ता 55 प्रतिशत हो जाएगा। बता दें कि केंद्रीय कर्मचारियों को फिलहाल 53 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ते का भुगतान किया जा रहा है। दरअसल छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों को फिलहाल 53 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ते का भुगतान किया जा रहा है, जो केंद्रीय कर्मचारियों से दो प्रतिशत कम है। वहीं, जुलाई में एक बार फिर कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी होनी है। ऐसे में साय कैबिनेट की बैठक को लेकर एक बार फिर सरकारी कर्मचारियों की उम्मीद जग गई है। गौरतलब है कि मार्च में छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की गई थी। 3 मार्च को विधानसभा में साल 2025-26 के वार्षिक बजट में 53 प्रतिशत डीए किए जाने की घोषणा की थी। इस दौरान सातवें वेतनमान में कार्यरत कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी। इसके बाद उन्हें 53 प्रतिशत महंगाई भत्ता, जबकि छठवें वेतनमान के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 7 प्रतिशत की दर से डीए का भुगतान किया जा रहा है।

सरगुजा: मैनपाट में बीजेपी का प्रशिक्षण शिविर का दूसरा दिन, SC-ST पर केंद्रित है चौथा सत्र

सरगुजा   छत्तीसगढ़ के शिमला का मौसम खुशमिजाज है. इस खुशमिजाज मौसम में छत्तीसगढ़ सरकार मैनपाट में है. बीजेपी के तीन दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग का आज दूसरा दिन है. इस दिन की शुरुआत योगा से हुई. सुबह उठने के बाद सभी प्रशिक्षु विधायक, मंत्री और सांसद योग करते देखे गए. वर्ग के पहले दिन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने क्लास लगाईं थी. योगा से हुई दूसरे दिन की शुरुआत  शिवराज सिंह चौहान लेंगे क्लास : आज दूसरा दिन भी बेहद खास रहने वाला है, क्योंकि बीजेपी के सबसे अनुभवी पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ट्रेनर बनकर आ रहे हैं. हालांकि शिवराज रायपुर आ चुके हैं. जारी प्रोटोकाल के अनुसार सुबह दस बजे उनको दरिमा एयरपोर्ट पहुंचना था. लेकिन सभी तक शिवराज रायपुर से उड़ान नहीं भर पाए हैं. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह पहुंचे शिविर, लोक व्यवहार और समय प्रबंधन पर देंगे प्रशिक्षण… भाजपा प्रशिक्षण शिविर में शामिल होने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह और राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े आज मैनपाट पहुंचे. केंद्रीय मंत्री चौहान जहां लोक व्यवहार और समय प्रबंधन पर, तो वहीं विनोद तावड़े सोशल मीडिया और मीडिया पर सांसदों-विधायकों को प्रशिक्षण देंगे.  शिविर में शामिल होने के लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह के अंबिकापुर स्थित मां महामाया एयरपोर्ट पहुंचने पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने गर्मजोशी से स्वागत किया. अंबिकापुर से सड़क के जरिए मैनपाट स्थित शिविर स्थल पहुंचने पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े का भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव सहित अन्य भाजपा पदाधिकारियों, सांसदों-विधायकों ने स्वागत किया. शिविर स्थल पर अतिथियों ने पौधरोपण किया. कृषि मंत्री शिवराज सिंह शिविर में लोक व्यवहार और समय प्रबंधन वक्तृत्व कौशल पर तो वहीं राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े सोशल मीडिया और मीडिया स्थानीय, क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय विमर्श निर्माण: हमारी भूमिका विषय पर सांसदों-विधायकों को प्रशिक्षण देंगे.  नेताओं ने किया योग  जेपी नड्डा ने किया था शुभारंभ : मैनपाट में आयोजित बीजेपी के तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने किया था. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और डिप्टी सीएम विजय शर्मा दुर्ग अंबिकापुर ट्रेन से सुबह ही अंबिकापुर पहुंच गए थे. वहां दोनों ने महामाया मंदिर में दर्शन किया और दरिमा एयरपोर्ट में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को रिसीव किया. विमान से नड्डा अंबिकापुर के दरिमा एयरपोर्ट तक तो आ गए. लेकिन दरिमा से मैनपाट तक इन सभी नेताओं को हेलीकॉप्टर से आना था. खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर नही उड़ सका जिसके बाद सभी सड़क मार्ग से दरिमा से मैनपाट पहुंचे थे. वापसी में मौसम खराब हुआ और जेपी नड्डा को करीब एक घंटे विमान में बैठकर विमान के उड़ने का इंतजार करना पड़ा था. नड्‌डा की क्लास में क्या हुआ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बंद कमरे में सभी नेताओं से बातचीत की। जहां नड्‌डा बोल रहे थे वहां मोबाइल फोन ले जाने की किसी को अनुमति नहीं थी। सभी सांसद, विधायक और मंत्रियों के मोबाइल फोन बाहर ही जमा करवा लिए गए। इसके बाद शुरू हुई क्लास, भीतर मौजूद सूत्रों ने बताया कि नड्डा ने सांसद विधायकों को कड़ी नसीहत दी। जेपी नड्‌डा ने कहा कि- व्यवहार ऐसा हो की जब जनता के बीच जाए तो शर्मिंदगी महसूस न हो। जनता के बीच अपने आप को बड़ा महसूस न होने दें क्योंकि जनता बड़ी है। ग्राउंड पर रहें, साधारण बन कर रहें। मीडिया में सोच समझ कर बयान दीजिए। कोई ऐसा बयान न दें जिससे पार्टी की छवि पर बुरा असर हो। किसी भी विषय पर अनावश्यक टिप्पणी करने से बचें, किसी तरह की भ्रष्टाचार की शिकायत नहीं हो ये ध्यान रखें। नड्‌डा ने सोमवार को छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के कमलेश्वरपुर में ‘एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत एक पेड़ लगाया। उसके बाद छत्तीसगढ़ भाजपा के सांसदों और विधायकों के प्रशिक्षण वर्ग का उद्घाटन किया। नड्‌डा के बताए 5 मंत्र     समाज, संगठन और सरकार के प्रति जागरूक हो। तैयारी अगले चुनाव की रखिए, आपके काम और व्यवहार का प्रभाव जनता पर होता है।     भारतीय जनता पार्टी केवल एक राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि विचार, मूल्य और सेवा का एक समर्पित आंदोलन है। जनता को इससे जोड़ना है।     सरकार में मौजूद सांसद-विधायकों को संगठन के साथ अधिक तालमेल बैठाकर जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है।     बूथ स्तर पर पार्टी की उपस्थिति हो केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का काम आपका है। विपक्ष के दुष्प्रचार का तथ्यपूर्ण जवाब देने की रणनीति हमें अपनानी है।     ये प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं है, यह नेतृत्व को तैयार करने, संगठन को सशक्त बनाने और कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने का माध्यम है।     देश और प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की डबल इंजन वाली सरकार के विकास कार्यों और इनिशिएटिव को छत्तीसगढ़ के गांव–गांव, घर–घर पहुंचाना है। सरगुजिया पगड़ी और स्टूडेंट्स की तरह लाइन में नेताजी छत्तीसगढ़ के तमाम मंत्री विधायक और सांसद मैनपाट में चल रहे इस प्रशिक्षण शिविर में ट्रेनिंग ले रहे हैं। इस दौरान सभी किसी स्टूडेंट की तरह अनुशासन में दिखाई दिए। सभी को सफेद और सुर्ख लाल रंग के कॉम्बिनेशन में तैयार की गई सरगुजिया पगड़ी पहनाई गई। इस तरह के रंगों के गमछे सरगुजा के आदिवासी धारण करते हैं। वैसी ही पगड़ी सभी नेताओं के सिर पर थी। एक मौका ऐसा भी आया जब प्रशिक्षण शिविर की जगह पर सभी एक लाइन एक कतार में ग्रुप फोटो सेशन करते दिखे जैसे स्कूलों में स्टूडेंट्स करवाते हैं।