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रायपुर: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बालोद जिला चिकित्सालय का निरीक्षण कर सुविधाओं का लिया जायजा

रायपुर : स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जिला चिकित्सालय बालोद का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का लिया जायजा स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जिला चिकित्सालय बालोद का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का लिया जायजा अधिकारियों की बैठक लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं का किया पड़ताल, आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने हेतु जरूरी उपाय सुनिश्चित करने के दिए निर्देश जिला चिकित्सालय में 03 विशेषज्ञ चिकित्सक एवं जिले के लिए 04 मेडिकल मोबाईल यूनिट प्रदान करने की दी जानकारी रायपुर प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आज बालोद जिले के प्रवास के दौरान जिला चिकित्सालय बालोद का निरीक्षण कर अस्पताल के व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने जिला चिकित्सालय बालोद के सभाकक्ष में स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की बैठक लेकर जिले के स्वास्थ्य सुविधाओं का पड़ताल किया।  स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रत्येक नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने बैठक में उपस्थित अधिकारियों को आम जनता को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने हेतु जरूरी उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने जिला चिकित्सालय बालोद में निश्चेतना विशेषज्ञ, नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ एवं रेडियोलॉजिस्ट सहित 03 विशेषज्ञ चिकित्सकों के अलावा जिले के अनुसूचित क्षेत्रों एवं दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को त्वरित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की दृष्टि से बालोद जिले के लिए 04 मोबाईल मेडिकल यूनिट शीघ्र प्रदान करने की भी जानकारी दी। इसके अलावा उन्होंने जिला चिकित्सालय बालोद में भर्ती मरीजों के परिजनों के विश्राम हेतु जिला चिकित्सालय परिसर में अतिरिक्त भवन निर्माण हेतु 25 लाख रुपये प्रदान करने की भी घोषणा की।  इसके अलावा उन्होंने जिले के जनप्रतिनिधियों से सुझाव लेकर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में आवश्यकतानुसार शव गृहोें के निर्माण के साथ-साथ वहाँ पर फ्रीजर आदि सभी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके लिए उन्होंने जरूरी मदद उपलब्ध कराने की बात कही। इस मौके पर संजारी बालोद विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती संगीता सिन्हा, डौण्डीलोहारा विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती अनिला भेड़िया, गुण्डरदेही विधानसभा क्षेत्र के विधायक कुंवर सिंह निषाद, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारणी पुष्पेन्द्र चंद्राकर,  सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के अलावा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जेएल उइके, मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरके श्रीमाली सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने जिला चिकित्सालय बालोद के निरीक्षण के दौरान पंजीयन कक्ष में पहुँचकर अस्पताल में प्रतिदिन भर्ती होने वाले मरीजों की औसतन संख्या के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने जिला चिकित्सालय के ओपीडी कक्ष, आपात चिकित्सा कक्ष के अलावा अस्पताल के विभिन्न कक्षों का मुआयना किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल के विभिन्न वार्डों में पहुँचकर मरीजों का हाल-चाल जाना। उन्होंने अस्पताल मेें भर्ती मरीजों से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य का हालचाल के अलावा उनका इलाज, दवाइयों की समुचित उपलब्धता, समय पर भोजन, नाश्ता आदि सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। इसके अलावा उन्होंने अस्पताल के वार्डों एवं स्नानागार की स्थिति एवं समय पर चिकित्सकों एवं चिकित्सा कर्मियों की उपलब्धता के संबंध में भी जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने पुरूष मेडिकल वार्ड में भर्ती दल्लीराजहरा के मरीज रामप्रसाद एवं बालोद निवासी चेतन प्रकाश से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने मौके पर उपस्थित चिकित्सकों को तलब कर मरीजों के बेहतर इलाज के लिए निर्देशित भी किया। स्वास्थ्य मंत्री ने महिला मेडिकल वार्ड में भर्ती ग्राम संबलपुर निवासी बुजुर्ग महिला से बातचीत कर उनका कुशलक्षेम पुछा। उन्होंने मुख्य अस्पताल अधीक्षक को बुजुर्ग महिला की बेहतर इलाज करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने जिला अस्पताल में नर्सिंग के विद्यार्थियों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना। जिला चिकित्सालय के निरीक्षण के उपरांत स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल के सभाकक्ष में जिले के वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के साथ चिकित्सा विभाग के आला अधिकारियों की बैठक लेकर जिले के चिकित्सा व्यवस्था का पड़ताल किया। इस दौरान उन्होंने मुख्य अस्पताल अधीक्षक को जिला चिकित्सालय में प्रतिमाह होने वाले प्रसव की संख्या एवं अन्य सुविधाओं के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी ली। इसके अलावा उन्होंने जिला चिकित्सालय में विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं चिकित्सा अधिकारियों के कुल स्वीकृत पद के विरूद्ध वर्तमान में कार्यरत चिकित्सकों की संख्या इसके अलावा उन्होंने अस्पताल में एक्सरे एवं सोनोग्राफी मशीन तथा अन्य चिकित्सीय सुविधा एवं मानवीय संसाधनों की उपलब्धता के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी ली। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने तथा अस्पताल की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों में अपने कार्यों के प्रति प्रतिबद्धता एवं ईच्छा शक्ति का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने चिकित्सीय पेशा को बहुत ही पावन, पुनीत कार्य बताते हुए चिकित्सा विभाग के सभी अधिकारी-कर्मचारियों को पूरी निष्ठा, लगन, मनोयोग तथा प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते हुए मरीजों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के निर्देश भी दिए।  मंत्री जायसवाल ने जिला चिकित्सालय बालोद के अलावा जिले के अन्य चिकित्सालयों में भी उपलब्ध संसाधनों के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं कलेक्टर को सूचित कर आवश्यकतानुसार जिला खनिज न्यास निधि के माध्यम से संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने को कहा। इसके अलावा बड़े स्तर पर संसाधन एवं सुविधा उलपब्ध कराने के लिए उन्हें सूचित करने के निर्देश भी दिए। बैठक में जायसवाल ने मौके पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से जिले में चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर बनाने हेतु आवश्यक सुझाव भी दिया। इस दौरान उन्होंने जनप्रतिनिधियों के मांग पर जिले के दुर्घटनाजन्य पुरूर क्षेत्र में 108  एवं मंगचुवा क्षेत्र में 102 एम्बुलेंस सेवा शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से आम जनता के हित में बालोद जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा सुनिश्चित की जाएंगी।

उप मुख्यमंत्री ने ‘वीमेन फॉर ट्रीज’ अभियान का किया राज्य स्तरीय शुभारंभ

रायपुर : पर्यावरण के प्रति जागरूक हो ज्यादा से ज्यादा संख्या में लगाएं पौधे – अरुण साव उप मुख्यमंत्री ने 'वीमेन फॉर ट्रीज' अभियान का किया राज्य स्तरीय शुभारंभ उप मुख्यमंत्री साव और अन्य अतिथियों ने लगाए सिंदूर के पौधे अभियान के तहत प्रदेशभर में 444 परियोजनाएं स्वीकृत, 1.66 लाख पौधे लगाए जाएंगे रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने आज रायपुर के कौशल्या विहार (कमल विहार) में 'वीमेन फॉर ट्रीज' अभियान का प्रदेश स्तरीय शुभारंभ किया। उन्होंने अभियान का शुभारंभ करते हुए कहा कि पर्यावरण के प्रति जागरूक होकर हम सभी को ज्यादा से ज्यादा संख्या में पौधे लगाना चाहिए। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष नंद कुमार साहू, विधायक मोतीलाल साहू और रायपुर नगर निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे भी अभियान के शुभारम्भ कार्यक्रम में शामिल हुईं। सभी ने कार्यक्रम स्थल पर सिंदूर के पौधे लगाकर 'वीमेन फॉर ट्रीज' अभियान का राज्य स्तरीय शुभारंभ किया। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कार्यक्रम में कहा कि पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तीकरण के लिए 'वीमेन फॉर ट्रीज' अभियान से स्वसहायता समूहों की महिलाओं को जोड़ा गया है। वे इस अभियान में चयनित स्थलों पर वृक्षारोपण करेंगी और पौधों की देखभाल एवं सुरक्षा भी करेंगी। इस अभियान से 1701 समूहों की 2300 से अधिक महिलाओं को जोड़ा गया है। भारत सरकार द्वारा अभियान के तहत राज्य के नगरीय निकायों में वृक्षारोपण के लिए 444 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। विधायक मोतीलाल साहू ने 'वीमेन फॉर ट्रीज' अभियान के शुभारम्भ के मौके पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर देशभर में लगातार वृक्षारोपण के काम हो रहे हैं। पर्यावरण के संरक्षण के साथ ही ग्लोबल वार्मिंग की चुनौतियों से निपटने में इससे मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि 'वीमेन फॉर ट्रीज' अभियान को महिलाओं के माध्यम से अमलीजामा पहनाया जाएगा। हम सभी को भी इसमें सहभागिता देनी है। महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने कार्यक्रम में बताया कि 'वीमेन फॉर ट्रीज' अभियान के अंतर्गत रायपुर नगर निगम में 60 स्थानों पर वृक्षारोपण किया जाएगा। इसके लिए स्वसहायता समूहों की 232 महिलाओं को अभियान से जोड़ा गया है। मातृशक्ति ही इस अभियान को आगे बढ़ाएंगी। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ ही महिलाओं को आर्थिक मजबूती प्रदान करेगा। रायपुर नगर निगम के सभापति सूर्यकांत राठौर, आयुक्त विश्वदीप, सुडा के सीईओ शशांक पाण्डेय और गजराज बांध संरक्षण समिति के अध्यक्ष पी.के. साहू सहित जोन अध्यक्षगण, एमआईसी सदस्य, पार्षदगण तथा स्थानीय नागरिक भी बड़ी संख्या में शुभारंभ कार्यक्रम में मौजूद थे। शहरों में हरियाली बढ़ाने "वीमेन फॉर ट्रीज" अभियान शहरों में हरित स्थानों की संख्या में बढ़ोतरी के लिए महिला स्वसहायता समूहों की सहभागिता बढ़ाने "वीमेन फॉर ट्रीज" (Women for Trees) अभियान शुरू किया गया है। यह भारत सरकार के "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान से प्रेरित है। केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की अनूठी पहल "अमृत मित्र" (अमृत 2.0 और डे-एनयूएलएम का अभिसरण) के तहत स्वसहायता समूहों को प्रेरित करने इस वृक्षारोपण अभियान को प्रारंभ किया गया है।   मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत नगरीय निकायों में सरकारी स्वामीत्व की भूमियों, वाटर बॉडीज, आंगनबाड़ियों, सरकारी अस्पतालों, स्कूलों, उद्यानों, एसटीपी/डब्ल्यूटीपी, एसएलआरएम सेंटर्स, मुक्तिधामों, कृष्णकुंजों, गौठानों, धार्मिक स्थलों, एएचपी आवासों, रोड डिवाइडर्स इत्यादि में महिला समूहों के माध्यम से वृक्षारोपण किए जाएंगे। "वीमेन फॉर ट्रीज" अभियान के क्रियान्वयन के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा सभी कलेक्टरों और नगरीय निकायों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने राज्य के 133 नगरीय निकायों में 444 परियोजनाओं को दी है मंजूरी नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा भारत सरकार के आवास और शहरी कार्य मंत्रालय को “वीमेन फॉर ट्रीज – अमृत मित्र योजना” के अंतर्गत प्रदेश के 169 नगरीय निकायों में कुल दो लाख 21 हजार 145 पौधों के रोपण के लिए 37 करोड़ 79 लाख रुपए लागत की 684 परियोजनाओं के प्रस्ताव भेजे गए थे। इनमें से भारत सरकार द्वारा 27 करोड़ 48 लाख रुपए की 444 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसके तहत एक लाख 65 हजार 997 पौधे लगाए जाएंगे। ये परियोजनाएँ 13 नगर निगमों, 39 नगर पालिकाओं तथा 81 नगर पंचायतों में क्रियान्वित की जाएंगी। शेष 201 परियोजनाएँ संशोधित कर स्वीकृति के लिए भारत सरकार को पुनः प्रेषित की गई हैं। "वीमेन फॉर ट्रीज" से महिला सशक्तीकरण और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा "वीमेन फॉर ट्रीज" अभियान से महिला सशक्तीकरण और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी। अभियान के अंतर्गत स्वसहायता समूहों (SHG) की महिलाओं को वृक्षारोपण एवं रखरखाव की ज़िम्मेदारी दी गई है। साथ ही स्थानीय नागरिकों की भागीदारी भी इसमें सुनिश्चित की जा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर इस अभियान के प्रथम चरण में बड़े राज्यों की श्रेणी में मध्यप्रदेश के बाद छत्तीसगढ़ को सर्वाधिक पौधरोपण की स्वीकृति मिली है। वहीं परियोजना राशि प्राप्त करने की दृष्टि से छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल के बाद दूसरे स्थान पर है। इस अभियान से 1701 स्वसहायता समूहों की महिलाओं को सीधा लाभ प्राप्त होगा। प्रत्येक महिला को पौधों के रखरखाव एवं देखरेख के लिए एक वर्ष तक प्रतिमाह आठ हजार रुपए तथा जियो-टैगिंग एवं निगरानी कार्य हेतु एक हजार रुपए प्रतिमाह अतिरिक्त प्रदान किया जाएगा। इससे महिलाएँ न केवल आर्थिक रूप से सशक्त होंगी, बल्कि वे पर्यावरण संरक्षण में भी अहम योगदान दे सकेंगी।

रायपुर: उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की अध्यक्षता में कार्यशाला, पूर्ण ग्राम सुराज और स्वावलम्बन का नया संकल्प

रायपुर गाँवों के समग्र विकास और आत्मनिर्भरता की अवधारणा को साकार करने की दिशा में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा आज नया रायपुर स्थित ग्रामीण संपर्क एवं प्रशिक्षण संस्थान, झांझ में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने की। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्राम सभा को और अधिक मजबूत बनाना तथा ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर, उत्तरदायी और निर्णायक बनाने की दिशा में ठोस पहल करना था। उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र की असली शक्ति गाँव की चौपाल और ग्राम सभा में निहित है। ग्राम सभा के निर्णय ही गाँव के विकास का आधार बन सकते हैं और इसीलिए आवश्यक है कि पंचायतें न केवल योजनाओं को लागू करें बल्कि जनता की आकांक्षाओं को दिशा देने वाली संस्था के रूप में कार्य करें। कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागियों को पाँच अलग-अलग समूहों में विभाजित किया गया। जहाँ ग्राम सभा के सशक्तीकरण, वित्तीय विकेन्द्रीकरण, पंचायतों पर नियंत्रण, सामाजिक सहभागिता तथा अधिकार एवं कर्तव्यों के विभाजन जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई। समूह चर्चा के दौरान पंचायतों की वर्तमान व्यवस्था का मूल्यांकन करते हुए अनेक महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए, जिनसे भविष्य में ग्राम पंचायतों को और अधिक सशक्त तथा उत्तरदायी बनाने का मार्ग प्रशस्त होगा। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यशाला में सुनील कुमार सिंह, सेवानिवृत्त सचिव भारत सरकार, प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, सचिव भीम सिंह, नरेगा आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा, पंचायत संचालक श्रीमती प्रियंका ऋषि महोबिया, स्वच्छ भारत मिशन के मिशन संचालक अश्वनी देवांगन सहित जिला एवं जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, ग्राम पंचायत सचिव और रोजगार सहायक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में टीआरआई फाउंडेशन, यूनिसेफ, पिरामल फाउंडेशन और समर्थन जैसी प्रतिष्ठित स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी अपनी सहभागिता दर्ज करायी। सभी विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने ग्रामीण विकास की नयी राह सुझाते हुए ग्राम स्वावलम्बन को साकार करने के लिए साझा प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया। उपमुख्यमंत्री शर्मा ने अंत में कहा कि पूर्ण ग्राम सुराज केवल शासन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह हर ग्रामवासी का स्वप्न है। जब ग्राम पंचायतें आत्मनिर्भर होंगी और ग्राम सभा निर्णायक बनेगी, तभी वास्तविक अर्थों में सुराज की स्थापना होगी।

उप मुख्यमंत्री ने 5.3 करोड़ के कार्यों का किया लोकार्पण-भूमिपूजन

रायपुर : अलग राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ की बदली है दशा और दिशा – अरुण साव अलग राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ की बदली है दशा और दिशा – अरुण साव उप मुख्यमंत्री ने 5.3 करोड़ के कार्यों का किया लोकार्पण-भूमिपूजन 1.23 करोड़ के व्यावसायिक परिसर, 71 लाख से निर्मित तहसील कार्यालय और 30 लाख से विकसित अटल परिसर का किया लोकार्पण 28 लाख रुपए की लागत से बनने वाले आकांक्षी शौचालय का हुआ भूमिपूजन उप मुख्यमंत्री साव ने गोबरा नवापारा में विकास कार्यों के लिए दो करोड़ देने की घोषणा की रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने आज रायपुर जिले के गोबरा नवापारा नगर पालिका में पांच करोड़ 30 लाख रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इनमें चार करोड़ 80 लाख रुपए लागत के 11 कार्यों का लोकार्पण और 50 लाख 20 हजार रुपए के तीन कार्यों का भूमिपूजन शामिल हैं। उप मुख्यमंत्री साव ने शहर में विकास कार्यों के लिए दो करोड़ रुपए देने की घोषणा की। उन्होंने गोबरा नवापारा के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से कहा कि आप लोग तुरंत प्रस्ताव बनाकर भेजिए। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा तत्काल इन प्रस्तावों को मंजूर कर राशि जारी की जाएगी। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा और अभनपुर के विधायक इंद्र कुमार साहू भी लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने गोबरा नवापारा में 71 लाख 12 हजार रुपए की लागत से निर्मित तहसील कार्यालय और 30 लाख रुपए की लागत से विकसित अटल परिसर का लोकार्पण किया। उन्होंने क्रमशः 25 लाख रुपए और 30 लाख रुपए से निर्मित धीवर और कसेर समाज के सामुदायिक भवनों, कुल 48 लाख 42 हजार रुपए की लागत के दो स्कूलों में तीन -तीन अतिरिक्त कक्षों, 98 लाख 78 हजार रुपए लागत के स्ट्रीट पोल विस्तारीकरण कार्यों, बस स्टैंड में एक करोड़ 23 लाख रुपए से बनाए गए व्यावसायिक परिसर तथा 53 लाख 17 हजार रुपए लागत के सांस्कृतिक भवन का भी लोकार्पण किया। उप मुख्यमंत्री साव ने गोबरा नवापारा के सामुदायिक भवन में आयोजित कार्यक्रम में 15 लाख रुपए लागत के तीन वार्डों में सीसी रोड निर्माण, सात लाख रुपए लागत के कहार भोई समाज के सामुदायिक भवन और 28 लाख 20 हजार रुपए लागत के आकांक्षी शौचालय के निर्माण के लिए भूमिपूजन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत हितग्राहियों को उनके स्वीकृत आवासों के निर्माण के लिए अनुज्ञा पत्र प्रदान किए। कार्यक्रम में शहर की स्वच्छता दीदियों को सम्मानित किया गया। उप मुख्यमंत्री साव ने नवनिर्मित तहसील कार्यालय परिसर में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत रुद्राक्ष का और राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कपूर का पौधा लगाया।  उप मुख्यमंत्री साव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले डेढ़ वर्षों में गोबरा नवापारा को विभिन्न विकास कार्यों के लिए 23 करोड़ रुपए दिए गए हैं। इससे शहर का तेजी से विकास हो रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि अलग राज्य बनने के बाद पिछले 25 बरसों में यहां की दशा और दिशा बदली है। उन्होंने कहा कि सभी शहरों के सुनियोजित और सुव्यवस्थित विकास के लिए हम सिटी डेवलपमेंट प्लान बनाकर काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में हम मोदी की एक-एक गारंटी को पूरा कर रहे हैं। आज हर गांव और शहर में प्रधानमंत्री आवास बनते दिख रहे हैं।   राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ का तेजी से विकास कर समृद्धि के रास्ते पर लेकर जा रही है। पिछले 20 महीनों में राजस्व विभाग सहित कई विभागों में सुधार के बड़े काम हुए हैं जिसका लाभ प्रदेशवासियों को मिल रहा है। लोगों के काम तेजी से हो रहे हैं, फर्जीवाड़ा रुक रहा है। राजस्व विभाग के सभी कार्यों को लोक सेवा गारंटी में शामल किया गया है। उन्होंने कहा कि विष्णु देव साय की सुशासन सरकार मोदी की सभी गारंटियों को धरातल पर उतार रही है।   लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम को विधायक इंद्र कुमार साहू और गोबरा नवापारा नगर पालिका की अध्यक्ष श्रीमती ओमकुमारी साहू ने भी संबोधित किया। पूर्व मंत्री चंद्रशेखर साहू, जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष अशोक बजाज, नगर पालिका के उपाध्यक्ष भूपेन्द्र सोनी, सीएमओ लवकेश कुमार, श्याम नारंग और नागेन्द्र वर्मा सहित पार्षदगण, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में कार्यक्रम में मौजूद थे।

रायपुर में कैंसर अस्पताल का होगा उन्नयन, सीएम साय ने जनता को अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की सौगात दी

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर कैंसर अस्पताल का होगा उन्नयन, जनता को मिलेगी अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधा की सौगात रायपुर में कैंसर अस्पताल का होगा उन्नयन, सीएम साय ने जनता को अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की सौगात दी कैंसर अस्पताल की बिल्डिंग बनेगी जी प्लस टू (G+2) से जी प्लस सिक्स (G+6)- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय विस्तार के लिए लगभग रु. 39.36 करोड़ की पुनरीक्षित राशि स्वीकृत  रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन में और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के कुशल नेतृत्व में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएँ नई ऊंचाइयों की तरफ अग्रसर हैं। इसी क्रम में डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित कैंसर अस्पताल की जी प्लस टू (ग्राउंड फ्लोर प्लस दो मंजिल) बिल्डिंग का विस्तार होकर जी प्लस सिक्स (ग्राउंड फ्लोर प्लस छः मंजिल) में उन्नयन होने जा रहा है।  स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने बताया कि इन परियोजना के लिए लगभग 39.36 करोड़ रूपए की पुनरीक्षित राशि स्वीकृत की गई है। उन्होंने एक बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए कार्य को जल्द गति दी जाए। स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार यह बिल्डिंग सिर्फ किसी भवन या निर्माण कार्य का विस्तार नहीं बल्कि प्रदेश की जनता के लिए उम्मीद की नई किरण है। कैंसर अस्पताल के जी प्लस सिक्स के विस्तार के साथ राज्य की जनता को भी अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त होंगी। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार प्रकट करते हुए कहा है कि यह कदम छत्तीसगढ़ राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को नई पहचान दिलाने की दिशा में अग्रसर होगा।

छात्रावास की बदहाली उजागर: जिम्मेदारों की लापरवाही से बच्चों पर मंडरा रहा हादसे का खतरा

बलरामपुर रामानुजगंज बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के शंकरगढ़ विकासखंड अंतर्गत जोका पाठ छात्रावास की हालत किसी खंडहर से कम नहीं है। यहां पढ़ने और रहने वाले 50 से अधिक आदिवासी बच्चे अपनी जान दांव पर लगाकर जर्जर भवन में रहने को मजबूर हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि पूरे छात्रावास को बारिश से बचाने के लिए प्लास्टिक की चादर से ढककर रखा गया है। छात्रावास अधीक्षक का कहना है कि बरसात के दिनों में भवन की छत से लगातार पानी टपकता है, जिसके कारण बच्चों का रहना और पढ़ाई करना बेहद कठिन हो जाता है। अधीक्षक ने बताया कि इस समस्या की जानकारी कई बार उच्च अधिकारियों को दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पिछले वर्ष भी यही समस्या थी और इस साल भी वही स्थिति दोहराई जा रही है। दीवारें पूरी तरह सीलन और नमी से भर चुकी हैं। जगह-जगह दरारें और गड्ढे हो गए हैं। किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है। 30 बिस्तरों पर 50 बच्चों का ठिकाना छात्रावास में वर्तमान समय में 50 बच्चे रह रहे हैं। लेकिन यहां बिस्तर सिर्फ 30 ही उपलब्ध हैं। मजबूरीवश दो-दो बच्चे एक ही बिस्तर पर सोने को विवश हैं। बच्चों को न तो उचित सोने की व्यवस्था मिल रही है और न ही रहने के लिए सुरक्षित भवन। उल्लेखनीय है कि यह छात्रावास विशेष रूप से सुदूर अंचल के आदिवासी बच्चों के लिए बनाया गया था, ताकि वे यहां रहकर पढ़ाई कर सकें और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सकें। लेकिन जिस स्थिति में यह भवन आज खड़ा है, उसे देखकर कहना मुश्किल है कि यहां कोई सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध हो रहा है। प्रशासन की अनदेखी पर उठे सवाल सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आज तक यहां किसी भी जिला अधिकारी ने दौरा तक नहीं किया। अधीक्षक से जब पूछा गया कि आपके जिला अधिकारी का क्या नाम है, तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें याद नहीं। इसका सीधा मतलब यह है कि आज तक इस छात्रावास की स्थिति जानने कोई जिम्मेदार अधिकारी यहां पहुंचे ही नहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आदिवासी आयुक्त अधिकारी की गंभीर लापरवाही का परिणाम है। वर्षों से यहां के बच्चे प्लास्टिक से ढंके भवन में रह रहे हैं और प्रशासन आंख मूंदकर बैठा है। बच्चों की जिंदगी से बड़ा कोई विषय नहीं, लेकिन अफसरों की उदासीनता ने यह स्थिति बना दी है। बच्चों के भविष्य पर संकट आदिवासी विभाग के प्रयासों के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि आदिवासी अंचलों में शिक्षा की मूलभूत सुविधाएं बेहद खराब हैं। जोका पाठ छात्रावास इसका जीता-जागता उदाहरण है। जहां मासूम बच्चे तंग हालात में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। न समय पर बिस्तर, न सुरक्षित भवन और न ही स्वच्छ वातावरण। बारिश के दिनों में प्लास्टिक की छत के नीचे बच्चों का सोना और पढ़ाई करना यह दर्शाता है कि शिक्षा के अधिकार का सपना यहां कितना अधूरा है। तुरंत कार्रवाई की मांग स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन तुरंत इस भवन की मरम्मत या नए भवन के निर्माण की दिशा में कदम उठाए। क्योंकि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो किसी भी दिन बड़ी दुर्घटना हो सकती है। बच्चों के भविष्य और जीवन की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द उच्च अधिकारियों की टीम मौके पर भेजी जाए और उचित कदम उठाए जाएं।  

खनन क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की बड़ी छलांग: वर्ष 2024-25 में 15 हजार करोड़ से अधिक का राजस्व

रायपुर राज्य स्तरीय भू-वैज्ञानिक कार्यक्रम मंडल छत्तीसगढ़ की रजत महोत्सव के रूप में 25वी बैठक आज सिविल लाईन स्थित न्यू सर्किट हाऊस में श्री पी. दयानंद, सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, खनिज साधन विभाग एवं अध्यक्ष छत्तीसगढ़ भू-वैज्ञानिक कार्यक्रम मंडल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में श्री रजत बंसल, संचालक भौमिकी तथा खनिकर्म एवं केन्द्र सरकार तथा राज्य शासन के विभिन्न विभागो, उपक्रमों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग, नए खनन परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार करना और गत वर्ष की उपलब्धियों की समीक्षा करना रहा। बैठक में वर्ष 2024-25 के दौरान पूरे हुए खनन कार्यों और उनसे प्राप्त उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पिछले वित्तीय वर्ष में प्रदेश को खनिज राजस्व के रूप में लगभग 15 हजार करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई है। यह उपलब्धि वर्ष 2023-24 की तुलना में लगभग 34 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि ने न केवल प्रदेश के आर्थिक ढांचे को मजबूती दी है, बल्कि खनन क्षेत्र में नए निवेश और अवसरों के द्वार खोले हैं। छत्तीसगढ़ राज्य में खनिज अन्वेषण एवं खनिज दोहन के क्षेत्र में कार्यरत भारत सरकार एवं राज्य सरकार के विभागों एवं संस्थानों के द्वारा वर्ष 2024-25 में किये गये भू-वैज्ञानिक कार्यों की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान जहां वर्ष 2024-25 के सम्पादित कार्यों की उपलब्धियों पर चर्चा की गई वही प्रदेश में पाये जाने वाले खनिजों की खोज के लिए वर्ष 2025-26 में प्रस्तावित भू-वैज्ञानिक कार्यों को अंतिम रूप दिया गया। मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद ने अपने उ‌द्बोधन में कहा कि खनिज किसी भी राज्य और देश के सर्वांगीण विकास की रीढ़ होती है। राज्य में स्ट्रेटजिक एवं क्रिटिकल मिनरल की खोज राज्य में विकास के एक नए युग की शुरूआत का संकेत देती है। उन्होने कहा कि छत्तीसगढ़ में खनिज अधारित नये उद्योगों की स्थापना के लिए राज्य में विद्यमान विभिन्न खनिजों का सतत् एवं व्यवस्थित तरीके से अन्वेषण किया जाना चाहिए। बैठक में उपस्थित अन्वेषण कार्यों से संबद्ध सभी विभागों एवं संस्थानों से यह आग्रह किया गया कि छत्तीसगढ़ के समग्र विकास हेतु वे अपनी कुशलता, संसाधन एवं उपलब्ध नवीनतम तकनीकियों का उपयोग कर प्रदेश में पाये जाने वाले महत्वपूर्ण खनिजों का अन्वेषण करे। मुख्यमंत्री के सचिव और खनिज सचिव श्री दयानंद ने छत्तीसगढ़ में खनिज के विकास के लिए कार्य करने वाली एजेंसियों के मध्य उत्पादित आंकड़ों के साझा किये जाने एवं समन्वय स्थापित किये जाने की सलाह दी। बैठक में संचालक भौमिकी तथा खनिकर्म छत्तीसगढ़ श्री रजत बंसल के द्वारा क्षेत्रीय सत्र 2024-25 में सम्पन्न कार्यों की जानकारी देते हुए बताया गया कि वर्ष 2024-25 में लगभग 2500 मिलियन टन चूनापत्थर एवं लौह अयस्क के लगभग 93 मिलियन टन भण्डार आंकलित किये गये। आगामी क्षेत्रीय सत्र 2025-26 के अन्वेषण परियोजनाओं में विभाग द्वारा महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों को शामिल किया गया है। यह परियोजना देश के लिए आवश्यक खनिज संसाधनों की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा। यह आत्मनिर्भर भारत मिशन को सशक्त करेगी और रणनीतिक क्षेत्रों में सतत् एवं आत्मनिर्भर विकास को प्रोत्साहित करेगी। उन्होने कहा कि "छत्तीसगढ़ शासन वैज्ञानिक एवं विस्तृत खनिज अन्वेषण तथा विकास को पूर्ण समर्थन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।" खान मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में एनएमइटी के तहत वर्ष 2024-25 में चूनापत्थर हेतु 01 एवं बाक्साइट हेतु 01 अन्वेषण परियोजना की स्वीकृति प्राप्त हुई है। अधिसूचित निजी अन्वेषण संस्थान को एनएमइटी के तहत् राज्य के अन्वेषण कार्य हेतु दो प्रस्ताव स्वीकृत किये गये थे। जिसमें एक लिथियम, नियोबियम, टेण्टेलम, टाईटेनियम दुर्लभ मृदा धातुएँ एवं एक लौहअयस्क के प्रस्ताव सम्मिलित है। विभाग द्वारा निजी संस्थानों के साथ सहयोग को बढ़ावा देकर अन्वेषण एवं खनिज संसाधनों के परिशोधन को सशक्त बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। केन्द्र सरकार तथा राज्य शासन के विभिन्न विभागों, उपक्रमों के प्रतिनिधियों द्वारा भी छत्तीसगढ़ राज्य में किये गये खनिज अन्वेषण कार्यों की जानकारियों प्रस्तुत की गई। सर्व प्रथम भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग के उप महानिदेशक डॉ. अमित धारवारकर द्वारा बताया गया कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में बाक्साइट, गोल्ड, ग्लूकोनाईट, लिथियम, टाईटेनियम दुर्लभ मृदा धातुएँ, फास्फोराइट, फ्लोराईट, लेड एवं जिंक खनिज हेतु सर्वेक्षण कार्य किया गया है। वर्ष 2025-26 में विभिन्न खनिजों के कुल 29 परियोजनाओं पर कार्य लिया जा रहा है। संचालनालय भौमिकी तथा खनिकर्म, छत्तीसगढ़ द्वारा वर्ष 2025-26 में कुल 11 अन्वेषण परियोजना को सर्वेक्षण / पूर्वेक्षण कार्य हेतु अनुमोदित किया गया। जिसमें स्ट्रेटजिक एवं किटिकल मिनरल पर 02, ग्लूकोनाईट पर 02, लेपिडोलाईट पर 01, चूनापत्थर पर 02, लौह अयस्क पर 02 एवं बॉक्साइट पर 02 परियोजना सम्मिलित है। इस अवसर पर आईबीएम रायपुर के रीजनल कंट्रोलर श्री प्रेम प्रकाश, रीजनल माइनिंग जियोलॉजिस्ट श्री डी. दास, जीएसआई रायपुर के डिप्टी डायरेक्टर जनरल श्री अमित ए धारवाड़कर, एएमडी के सेंट्रल रीजन के क्षेत्रीय निदेशक श्री एस.आर. मंथनवार सहित एन.एम.डी. सी., सीआईएल, वेदांता, अल्ट्राटेक, डेक्कन गोल्ड के अधिकारी एवं अन्य संबंधित विभाग के अधिकारीगण उपस्थित थे।

30 से अधिक हाथियों का दल गांव में घुसा, ग्रामीणों में मची भगदड़

सूरजपुर जिले के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के करंजवार गांव में हाथियों का विशाल झुंड देखा गया है. करीब 30 से 35 हाथियों का यह दल क्षेत्र में डेरा जमाए हुए है. हाथियों की मौजूदगी से ग्रामीणों और किसानों में दहशत का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों ने धान और मक्का की फसलों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है. बता दें, झुंड में बड़े दतैल हाथियों के साथ छोटे-छोटे शावक भी शामिल हैं. स्थिति को देखते हुए वन विभाग की टीम लगातार मौके पर डटी हुई है. विभागीय अधिकारियों ने ग्रामीणों से सतर्क रहने और हाथियों से दूर रहने की अपील की है.

हमर छत्तीसगढ़ की मिसाल: जहां गुरुजी पढ़ाते भी हैं और बच्चों के बाल भी संवारते हैं

कबीरधाम  छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों की बदहाली और शिक्षकों की लापरवाही की खबरें तो आपने बहुत देखी और सुनी होगी, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे सरकारी स्कूल के मास्टरजी यानी शिक्षक के बारे में बताने जा रहे हैं जो 'सैलून वाले गुरुजी' के नाम से मशहूर हैं। चौक गए न आप भी। दरअसल, कबीरधाम जिले के सरकारी मिडिल स्कूल में पदस्थ टीचर पूनाराम पनागर की पहल भी गजब है। यह शिक्षक स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के साथ विद्यार्थियों के बाल भी निःशुल्क कटिंग करते हैं। शिक्षक आखिर क्यों ऐसा करता है,नाई बनने के पीछे उनका क्या मकसद है? तो चलिए आपको इस मास्टरजी के बारे में बताते हैं। कौन हैं ये शिक्षक? कबीरधाम जिले में बोड़ला स्थित पूर्व माध्यमिक स्कूल में शिक्षक पूनाराम पनागर की पोस्टिंग हैं। वह बच्चों को पढ़ाने के उनके बाल भी मुफ्त में काटते हैं। बाल कटिंग में खर्च होने वाले पैसों को शिक्षक बच्चों से कॉपी, पेन या स्कूल से संबंधी जरूरी काम करने को कहते हैं। शिक्षक पूनाराम बताते हैं कि मैं पहले बोड़ला के महलीघाट गांव के प्राइमरी स्कूल में था। इस आदिवासी क्षेत्र में सेलून नहीं थे। ऐसे में स्कूल के बच्चों के बाल काफी बढ़ जाते थे। तब मैंने 2012 से खुद ही बच्चों के बाल काटना शुरू कर दिया। बाद में मेरा ट्रांसफर यहां बोड़ला के स्कूल में हो गया। यहां भी सरकारी हॉस्टल में रहने वाले बच्चे गरीब परिवारों से है। शिक्षक पूनाराम ने बताया कि सरकारी SC-ST हॉस्टल के बच्चों के बाल महीने में किसी एक रविवार को काटता हूं। इससे बच्चों के सेलून का खर्चा बच जाता है। इतना ही नहीं शिक्षक पूनाराम सरकारी स्कूल के पहली से दसवीं क्लास के बच्चों को 15 साल से स्कूल के अलावा फ्री कोचिंग भी दे रहे हैं। अपने पढ़ाए बच्चों के बीच यह स्पर्धा भी कराते हैं कि जो जिले में टॉप करेंगे या प्रदेश में टॉपर सूची में आएंगे तो उन्हें 10 से 15 हजार इनाम भी देंगे। वे हर साल पर्चा छपवाकर इलाके में बंटवाते हैं कि लोग अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूल में ही कराएं। शिक्षक के इस पहल की पूरे प्रदेश में जमकर चर्चा हो रही है।   घर पर बच्चों को निःशुल्क कोचिंग भी पढ़ाते हैं पूनाराम पनागर की इस पहल की सराहना न सिर्फ छात्र बल्कि अन्य शिक्षक और अभिभावक भी करते हैं। पूनाराम के काम को समाज सेवा की मिसाल मानते हैं। शिक्षक कृष्ण कुमार ध्रुवे बताते हैं कि पूनाराम सर… बच्चों के शैक्षणिक उत्थान को लेकर बहुत सजग हैं। उनकी सोच यह है कि बच्चे पैसों की बचत करके उसका उपयोग शैक्षणिक गतिविधियों में करें। वे गरीब और कमजोर बच्चों को निःशुल्क कोचिंग भी देते हैं, ताकि वे पीछे न रहे। अपने कोचिंग में पढ़ने वाले बच्चों के बीच प्रतिस्पर्धा भी करवाते हैं और यह भी कहते हैं कि 10वीं और 12वीं में टॉप करने वाले बच्चों को पुरस्कार भी अपनी जेब से देंगे। सरकारी स्कूलों में दाखिला कराने बांटते हैं पर्चा कबीरधाम जिले में एक सरकारी शिक्षक अपनी सेवा भावना से मिसाल बन गए हैं। सरकारी स्कूलों में हर साल बच्चों का दाखिला घट रहा है, लेकिन शिक्षक पूनाराम हर साल खुद पर्चा छपवाकर ग्रामीणों से अपील करते हैं कि वे अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों में कराएं। महंगी फीस से बचें और उन पैसों को बच्चों के आगे की पढ़ाई के लिए बचाएं…। गरीब और कमजोर बच्चों को शिक्षक अपने पैसों से पुस्तक-कापी भी खरीदकर देते हैं, ताकि उन्हें पढ़ने में कोई दिक्कत न हो। ऐसे शिक्षक की प्रतिबद्धता ने यह साबित कर दिया है कि एक शिक्षक अगर चाहे तो समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।  

लापरवाही का शिकार ग्रामीण: लाखों खर्च के बाद भी सड़क बेहाल, ठेकेदार को नोटिस

बीजापुर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करोड़ों की योजनाएं गांवों तक बेहतर आवागमन की सुविधा देने के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन उसूर तहसील की बासागुड़ा-कुम्हारपारा सड़क इसका बिल्कुल उल्टा उदाहरण बन गई है। साल 2020 में ठेकेदार आकाश चांडक ने 60 लाख की लागत से 1.60 किमी लंबी मिट्टी-मुरुम सड़क बनाई थी। पांच साल बीतने को हैं लेकिन ठेकेदार ने इस सड़क की एक बार भी मरम्मत नहीं की। नतीजा यह हुआ कि आज यह सड़क पूरी तरह से उबड़-खाबड़ और गड्ढों से भरी खाई में तब्दील हो चुकी है। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क पर चलना किसी नदी को पार करने से कम नहीं है। जगह-जगह गड्ढे, कटे किनारे और झाड़ियों ने इसे मौत का जाल बना दिया है। आलम यह है कि धरमापुर, मल्लेपल्ली और डल्ला गांव के करीब 1000 ग्रामीण रोजाना इसी सड़क से गुजरने को मजबूर हैं। पैदल यात्री, बाइक सवार और ट्रैक्टर चालकों के लिए यह सफर किसी चुनौती से कम नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने सड़क निर्माण में शुरुआत से ही लापरवाही बरती और काम अधूरा छोड़ दिया। अब मरम्मत न होने से हालात बदतर हो गए हैं। उनका कहना है कि सड़क पर चलने से ज़्यादा आसान तो खेतों में चलना है। इस मामले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यपालन अभियंता नवीन कुमार टोंडे और उप अभियंता परमानंद रामटेके ने बताया कि ठेकेदार को 5 अगस्त 2025 को मरम्मत करने के लिए नोटिस भेजा गया है। लेकिन ठेकेदार ने मरम्मत कार्य शुरू नहीं किया तो विभाग 18 लाख रुपये की वसूली ठेकेदार से करेगा। लेकिन सवाल यह है कि आखिर ग्रामीणों की पांच साल से चली आ रही परेशानी का जिम्मेदार कौन है? और कब तक ऐसी योजनाएं सिर्फ कागजों पर ही टिकाऊ साबित होंगी?