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अवैध खनन पर निगरानी होगी और सशक्त: शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-2140 जारी

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में खनिज संसाधनों के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनसहभागिता आधारित बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लगातार ठोस कदम उठाया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रदेश में खनन गतिविधियों की प्रभावी निगरानी, नागरिकों से सीधा संवाद तथा शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा “खनन सूचना केंद्र (Mining Information Center)” की स्थापना की गई है। प्रदेश में खनिजों से संबंधित गतिविधियों, शिकायतों और सूचनाओं के आदान-प्रदान को सुगम एवं प्रभावी बनाने के लिए संचालनालय, भूविज्ञान एवं खनिकर्म द्वारा टोल फ्री नंबर 1800-233-2140 जारी किया गया है। इस माध्यम से आम नागरिक अवैध खनन, अवैध परिवहन, खनिज संबंधी अनियमितताओं अथवा अन्य शिकायतों की जानकारी सीधे प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे, जिससे समयबद्ध कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था को अधिक सशक्त बनाया जा सकेगा। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की “जीरो टॉलरेंस” नीति के अनुरूप स्थापित यह सूचना केंद्र पारदर्शी और उत्तरदायी प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूती प्रदान करेगा। अब खनन गतिविधियों से जुड़ी शिकायतों और सूचनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए एक संस्थागत तंत्र उपलब्ध होगा, जिससे अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा। खनन सूचना केंद्र का संचालन कार्यालयीन समयानुसार प्रतिदिन प्रातः 10:00 बजे से सायं 5:30 बजे तक किया जाएगा। प्राप्त सूचनाओं पर त्वरित समन्वय और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त संचालक (खनिज प्रशासन) स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि खनिज संपदा का संरक्षण, पारदर्शी उपयोग, राजस्व संवर्धन तथा अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण जनसहभागिता और तकनीकी समन्वय के माध्यम से ही संभव है। “खनन सूचना केंद्र” इस दिशा में शासन की जवाबदेह, संवेदनशील और पारदर्शी कार्यप्रणाली को मजबूत करने वाली एक महत्वपूर्ण जनहितकारी पहल है।

गांव और गरीबों के उत्थान के लिए लगातार काम कर रही सरकार – मंत्री टंक राम वर्मा

​रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आम जनता की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण के लिए चलाए जा रहे ‘सुशासन तिहार-2026’ के अंतर्गत आज धमतरी जिले में विकासखंड स्तरीय समाधान शिविरों का भव्य आयोजन किया गया। इस महाअभियान के तहत कुरूद विकासखंड के ग्राम चोरभट्टी में नौवां और धमतरी विकासखंड के ग्राम पीपरछेड़ी में दसवां समाधान शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। ग्राम पीपरछेड़ी में आयोजित विशाल क्लस्टर शिविर में प्रदेश के राजस्व, आपदा प्रबंधन मंत्री  टंक राम वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।        शिविर को संबोधित करते हुए मंत्री  टंक राम वर्मा ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार पूरी तरह से गांव, गरीब और किसानों के कल्याण के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे। सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की प्रथम कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख गरीब परिवारों के लिए पक्के मकान स्वीकृत किए गए हैं और आवास प्लस योजना की पात्रता में ढील देकर अधिक से अधिक जरूरतमंदों को लाभान्वित किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, समय पर बोनस वितरण, महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को मिल रहे आर्थिक संबल और रामलला दर्शन व मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियों का जिक्र करते हुए ग्रामीणों से इन योजनाओं का खुलकर लाभ उठाने की अपील की।       ​ पीपरछेड़ी क्लस्टर के अंतर्गत आने वाली पीपरछेड़ी, डाही, अंगारा, हंकारा, सेमरा डी, सेंचुवा, बिजनापुरी, बोड़रा, पुरी, धौराभाठा, लिमतरा, गागरा, सांकरा, सम्बलपुर, सेहराडबरी, भोथली, कंडेल, नवागांव, बिरेतरा, छाती और शंकरदाह सहित कुल 22 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने इस शिविर में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।              शिविर के दौरान ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न समस्याओं, मांगों और शिकायतों से जुड़े कुल 3,021 आवेदन प्रस्तुत किए, जिनमें से 164 संवेदनशील मामलों का विभागीय अधिकारियों द्वारा मौके पर ही त्वरित निराकरण कर आम जनता को बड़ी राहत दी गई। शेष आवेदनों को भी समय-सीमा के भीतर निराकृत करने के निर्देश दिए गए हैं।  कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा ने प्रशासनिक तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि जिले में कुल 40 समाधान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें अब तक 10 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और इन शिविरों के माध्यम से शासन की लगभग 120 प्रकार की आवश्यक सेवाएं सीधे ग्रामीणों के घर-द्वार तक पहुंचाई जा रही हैं। हितग्राहियों को बांटी गई खुशियां: कृषि यंत्र से लेकर ट्राईसाइकिल तक का वितरण        ​ इस आयोजन के दौरान विभिन्न शासकीय विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों के माध्यम से हितग्राहियों को सीधे लाभान्वित भी किया गया। मंच से अतिथियों द्वारा किसानों को किसान किताबें और कृषि स्प्रे यंत्र सौंपे गए, वहीं मत्स्य विभाग की ओर से मछुआरों को आईसबॉक्स व मछली जाल प्रदान किए गए। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा सुपोषण किट, बैंक पासबुक और किशोरी बालिकाओं को स्वच्छता किट बांटी गई। इसी तरह श्रम विभाग द्वारा सहायता राशि, स्वास्थ्य विभाग द्वारा बीपी मशीनें, समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांगजनों को ट्राईसाइकिल व वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण और जनपद पंचायत द्वारा सात नवीन राशन कार्डों का वितरण किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र परिवारों को उनके नए पक्के मकान की चाबियां सौंपकर गृह प्रवेश भी कराया गया, जिससे ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी जनता को जागरूक करते हुए शासन की इस अनूठी पहल की सराहना की और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का आह्वान किया।         इस अवसर पर उनके साथ विधायक  ओंकार साहू, पूर्व विधायक मती रंजना साहू, महापौर  रामू रोहरा, कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा, पुलिस अधीक्षक  सूरज सिंह परिहार सहित तमाम वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा ग्रामीण उपस्थित रहे।

‘जनजाति गरिमा उत्सव’ का शंखनाद

​रायपुर छत्तीसगढ़ के अंदरूनी और दूरस्थ अंचलों में बसे जनजातीय परिवारों के सशक्तिकरण और समग्र विकास के लिए नारायणपुर जिले में “सबसे दूर, सबसे पहले” की अनूठी थीम पर 'जनजाति गरिमा उत्सव' जन भागीदारी अभियान की शुरुआत हो गई है। जिले के 262 जनजातीय बाहुल्य गाँवों को पूरी तरह संतृप्त (Saturated) करने के उद्देश्य से जिला स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें कलेक्टर ने अधिकारियों को मिशन मोड में काम करने के कड़े निर्देश दिए।         ​कलेक्टर ने कहा कि इस अभियान का मुख्य ध्येय शासन की हर एक कल्याणकारी योजना का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है। इसके लिए ज़िला प्रशासन और नोडल अधिकारियों की टीम सीधे जमीनी स्तर पर मोर्चा संभालेगी। ​ तीन बड़े अभियानों का त्रिवेणी संगम: गाँव-गाँव शिविर        ​इस अभियान के तहत जिले के दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों में विकास की रफ्तार तेज करने के लिए त्रिस्तरीय रणनीति तैयार की गई है। जिले के सभी 262 जनजातीय बाहुल्य गाँवों में विशेष जन भागीदारी शिविर लगाए जाएंगे। इसके अंतर्गत 255 गाँवों को कवर किया जाएगा, जहाँ 'आदि सेवा केंद्रों' के माध्यम से जनसुनवाई होगी और ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही त्वरित निराकरण किया जाएगा। विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए 204 गाँवों में पात्र हितग्राहियों को चिह्नित कर सीधे शासकीय योजनाओं से जोड़ा जाएगा। ​ एक ही छत के नीचे मिलेंगी सभी सुविधाएँ      ​18 मई से 25 मई 2026 तक चलने वाले इस विशेष अभियान के दौरान गाँवों में ही एकीकृत शिविरों का आयोजन हो रहा है। इन शिविरों के माध्यम से दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए विशेष मेडिकल कैंप,पात्रता के अनुसार ​ऑन-द-स्पॉट जनकल्याणकारी योजनाओं के फॉर्म भरना और मौके पर ही लाभान्वित करना तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी एक ही स्थान पर मौजूद रहकर ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करेंगे। ​     सामूहिक सहयोग और जनभागीदारी से ही जनजातीय क्षेत्रों का समग्र विकास संभव है। यह अभियान केवल सरकारी योजनाओं का वितरण नहीं, बल्कि शासन और ग्रामीणों के बीच के विश्वास को और मजबूत करने का माध्यम है। यह आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण, सम्मान और विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।" जनप्रतिनिधियों और समाज से सहयोग की अपील     ​ कलेक्टर ने जिले के सभी जनप्रतिनिधियों, त्रिस्तरीय पंचायत पदाधिकारियों, सामाजिक संगठनों तथा जागरूक ग्रामीणों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। प्रशासन का मुख्य फोकस ग्रामीणों को उनके अधिकारों और सुविधाओं के प्रति जागरूक कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति हक से वंचित न रहे।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने राजनांदगांव से वाहनों को किया रवाना

रायपु आम नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राजनांदगांव में आयोजित एक गरिमापूर्ण कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112’ सेवा के अंतर्गत अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नए आपातकालीन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। आधुनिक तकनीक से और मजबूत होगी पुलिस व्यवस्था            वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि आपातकालीन सेवाओं का आधुनिकीकरण नागरिकों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। “एक नंबर, अनेक माध्यम, त्वरित सहायता” की सोच पर आधारित डायल-112 सेवा प्रदेशवासियों को किसी भी संकट की स्थिति में तुरंत रेस्क्यू और मदद उपलब्ध कराने का सबसे सशक्त माध्यम बन रही है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित छत्तीसगढ़ का निर्माण हमारी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इन आधुनिक तकनीक-आधारित वाहनों से पुलिस की रिस्पॉन्स टाइमिंग बेहतर होगी और कानून व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी। वाहनों का वर्गीकरण और उनकी खासियतें            ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112’ सेवा के विस्तार के तहत कुल 22 आधुनिक वाहनों को बेड़े में शामिल किया गया है, जिनका वर्गीकरण इस प्रकार है। डायल-112 वाहन  18 (त्वरित आपातकालीन रिस्पॉन्स के लिए), हाईवे पेट्रोलिंग वाहन के लिए  03 (राजमार्गों पर दुर्घटनाओं और सुरक्षा की निगरानी के लिए), फॉरेंसिक वाहन 01 (घटनास्थल पर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए) ये सभी वाहन नवीनतम जीपीएस (ळच्ै), उन्नत संचार प्रणालियों और अत्याधुनिक उपकरणों से लैस हैं। इससे कंट्रोल रूम को रियल-टाइम लोकेशन मिलेगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति या दुर्घटना की सूचना पर पुलिस बल बिना समय गंवाए मौके पर पहुंच सकेगा। जनता को मिलेगा त्वरित लाभ             इन नए हाई-टेक वाहनों के सड़कों पर उतरने से न केवल आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी, बल्कि आम नागरिकों को भी तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद आपातकालीन चिकित्सा व सुरक्षा सहायता मिल सकेगी। स्थानीय स्तर पर छत्तीसगढ़ी स्लोगन एक्के नम्बर, सब्बो बर के साथ इस सेवा को लेकर नागरिकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। इन वाहनों के संचालन से कानून व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी तथा आम नागरिकों को तेज, सुरक्षित एवं बेहतर आपातकालीन सहायता उपलब्ध हो सकेगी।

“लखपति से करोड़पति दीदी” बनने का मुख्यमंत्री ने दिया मंत्र, महिलाओं को उद्यम विस्तार के लिए किया प्रेरित

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज ग्राम रामपुर में सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में विभिन्न शासकीय योजनाओं के हितग्राहियों से आत्मीय संवाद कर उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को करीब से जाना। मुख्यमंत्री ने महिलाओं, किसानों और ग्रामीण परिवारों से योजनाओं के लाभ, आयवृद्धि, आजीविका और जीवनस्तर में आए सुधारों की जानकारी लेते हुए कहा कि जब शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचता है, तभी सुशासन की वास्तविक सार्थकता सिद्ध होती है। संवाद के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने साधना महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी मती जागेश्वरी प्रजापति से उनके समूह द्वारा तैयार किए जा रहे आलू चिप्स के व्यवसाय की जानकारी ली। मती जागेश्वरी ने बताया कि समूह अब तक आलू चिप्स की बिक्री से लगभग 1 लाख 85 हजार रुपये की आय अर्जित कर चुका है। यह सुनकर मुख्यमंत्री ने सहज मुस्कान के साथ कहा, “आलू चिप्स का नाम सुनकर ही मुंह में पानी आ रहा है।” मुख्यमंत्री की इस आत्मीय टिप्पणी से शिविर स्थल पर हर्ष और आत्मीयता का वातावरण बन गया।  मुख्यमंत्री ने समूह की महिलाओं की मेहनत और उद्यमशीलता की सराहना करते हुए उन्हें अपने उत्पादों का विस्तार करने, बेहतर पैकेजिंग और बाज़ार से जुड़कर आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान महिलाओं से “लखपति दीदी योजना” की प्रगति पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश में अब तक 8 लाख से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं तथा सरकार का लक्ष्य 10 लाख लखपति दीदियां तैयार करना है। उन्होंने महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि अब समय केवल लखपति बनने का नहीं, बल्कि आगे बढ़कर “करोड़पति दीदी” बनने का है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक रूप से सशक्त महिलाएं परिवार, समाज और राज्य के विकास की सबसे मजबूत आधारशिला होती हैं।शिविर में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही  प्राण साय प्रजापति से भी आत्मीय चर्चा की। हितग्राही ने बताया कि योजना के माध्यम से उनके परिवार का पक्के मकान का सपना पूरा हुआ है। मुख्यमंत्री ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हर गरीब परिवार को सम्मानपूर्वक पक्की छत उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इस दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। सुशासन तिहार की सार्थकता उस समय और स्पष्ट दिखी जब ग्राम चंद्रपुर निवासी मती प्रिया सिंह ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने शिविर में राशन कार्ड के लिए आवेदन दिया था और उसी दिन उनका आवेदन निराकृत कर राशन कार्ड उपलब्ध करा दिया गया। मुख्यमंत्री ने इसे प्रशासन की तत्परता और संवेदनशीलता का उदाहरण बताते हुए संबंधित अधिकारियों की सराहना की तथा कहा कि सुशासन तिहार का मूल उद्देश्य ही आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित, सरल और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है, ताकि लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और सरकार स्वयं उनके द्वार तक पहुँचे। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के एक लाभार्थी से भी संवाद किया, जिन्होंने बताया कि वे प्राप्त राशि का उपयोग सब्जी उत्पादन में कर रहे हैं, जिससे उनकी आय और आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री ने उनकी पहल की सराहना करते हुए उन्हें प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत सोलर पंप लगाने के लिए प्रेरित किया, ताकि सिंचाई लागत कम हो, खेती अधिक लाभकारी बने और किसानों को बिजली खर्च से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा और नवाचार आधारित खेती ही किसानों की आय वृद्धि का मजबूत आधार बनेगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने हितग्राहियों के अनुभव सुनने के बाद प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि योजनाओं का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देता है जब उसका लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुँचकर उसके जीवन में बदलाव लाए। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे शासन की योजनाओं की जानकारी लेकर उनका अधिकाधिक लाभ उठाएं और आत्मनिर्भर, समृद्ध तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागी बनें।

नीति आयोग समर्थित ‘मिशन कामयाबी’ के तहत वर्चुअल रियलिटी और आधुनिक तकनीक से होगा शिक्षण

रायपु मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड के ग्राम कुशहा में आयोजित चौपाल के दौरान नीति आयोग द्वारा वित्तपोषित ‘मिशन कामयाबी’ के तहत संचालित ‘कामयाबी वेन’ को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया। इस पहल के माध्यम से दूरस्थ एवं ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों तक आधुनिक डिजिटल शिक्षा और तकनीकी आधारित सीखने के अवसर पहुंचाए जाएंगे, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और सीखने के अनुभव में सकारात्मक बदलाव आएगा। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक तकनीक का समान अवसर मिले। उन्होंने कहा कि आज का दौर ज्ञान, नवाचार और तकनीक का है, ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी डिजिटल संसाधनों और नई शिक्षण पद्धतियों से जोड़ना आवश्यक है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें। उल्लेखनीय है कि ‘कामयाबी वेन’ के माध्यम से विद्यार्थियों को वर्चुअल रियलिटी (VR) एवं ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) तकनीक आधारित शिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। यह वेन विज्ञान, गणित, तकनीकी अवधारणाओं और अन्य विषयों को अधिक रोचक, अनुभवात्मक और व्यवहारिक तरीके से समझाने में सहायक होगी। इससे विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता, तकनीकी जागरूकता तथा बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में सुधार आने की संभावना है। मुख्यमंत्री  साय  ने विश्वास व्यक्त किया कि यह अभिनव पहल दूरस्थ गांवों के विद्यार्थियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी तथा उन्हें विज्ञान, डिजिटल तकनीक और आधुनिक शिक्षा से सरल एवं प्रभावी ढंग से जोड़ने का माध्यम बनेगी। इस अवसर पर विधायक  भैया लाल राजवाड़े, स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध सिंह, विशेष सचिव  रजत बंसल, कलेक्टर मती रोक्तिमा यादव, पुलिस अधीक्षक  रवि कुमार कुर्रे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के 86वें सम्मेलन में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी, 45 करोड़ की परियोजनाओं को मिली स्वीकृति

नवा रायपुर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का 86वाँ मंडल सम्मेलन बुधवार को नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंडल मुख्यालय में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन की अध्यक्षता मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने की। बैठक में प्रदेशभर में आवासीय एवं अधोसंरचना विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा कर उन्हें स्वीकृति प्रदान की गई। सम्मेलन में लगभग 45 करोड़ रुपये की विभिन्न निर्माण परियोजनाओं को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई। अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने बताया कि रायपुर जिले के तिल्दा स्थित दीनदयाल आवास कॉलोनी, कोहका में व्यवसायिक सह आवासीय प्रकोष्ठ भवनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना के तहत 76 आवासीय एवं व्यावसायिक भवन बनाए जाएंगे, जिसकी अनुमानित लागत 10.37 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इसी प्रकार स्ववित्तीय अटल विहार योजना के अंतर्गत जशपुर जिले के गिनाबहार क्षेत्र में 97 आवासीय भवनों के निर्माण एवं 7 एकड़ भूमि विकास कार्य को स्वीकृति प्रदान की गई। इसमें 6 एमआईजी, 64 एलआईजी और 27 ईडब्ल्यूएस भवन शामिल हैं। इस परियोजना की अनुमानित लागत 17.51 करोड़ रुपये बताई गई है। वहीं, मुंगेली जिले के सारधा (लोरमी) क्षेत्र में स्ववित्तीय योजना के तहत 200 ईडब्ल्यूएस भवनों के निर्माण और 5 एकड़ भूमि के बाह्य विकास कार्य को भी मंजूरी मिली। इस परियोजना पर लगभग 16.94 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सम्मेलन में निर्माण कार्यों में जीएसटी भुगतान प्रणाली और रॉयल्टी क्लीयरेंस प्रमाण पत्र की वर्तमान व्यवस्था में एकरूपता लाने के लिए समान मानक प्रक्रिया लागू करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत सीधी भर्ती में दिव्यांगजनों के आरक्षण संबंधी पदों के चिन्हांकन को समाज कल्याण विभाग की 25 फरवरी 2026 की अधिसूचना के अनुरूप लागू रखने का निर्णय भी लिया गया। मंडल के अधिकारियों और कर्मचारियों को राज्य शासन के कर्मचारियों के अनुरूप पुनरीक्षित महंगाई भत्ता देने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई। साथ ही क्वींस क्लब ऑफ इंडिया के विकास, संचालन और रख-रखाव के लिए पीपीपी मोड पर एजेंसी नियुक्त करने हेतु निविदा प्रपत्र एवं लाइसेंस अनुबंध प्रारूप का अनुमोदन किया गया। सम्मेलन में यह जानकारी भी दी गई कि मंडल द्वारा वर्ष 2026 के पहले चार महीनों में करीब 317 करोड़ रुपये मूल्य की 1647 संपत्तियों का विक्रय किया गया है। बैठक में मंडल आयुक्त अवनीश कुमार शरण, आवास एवं पर्यावरण विभाग के विशेष सचिव डी.एस. भारद्वाज, लोक निर्माण विभाग के प्रतिनिधि जी.आर. रावटे, वित्त विभाग के प्रतिनिधि निखिल अग्रवाल तथा हुडको के प्रतिनिधि हितेश बरोट सहित मंडल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

धमतरी हादसे का LIVE VIDEO वायरल, पिकअप की चपेट में आने से युवक की मौत

धमतरी. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में आज एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ है, जहां एक बाइक सवार युवक तेज रफ्तार पिकअप के नीचे आ गया। इस घटना में युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जिसका वीडियो भी सामने आया है। यह घटना मगरलोड थाना क्षेत्र की है। जानकारी के मुताबिक, मृतक की पहचान यशवंत निषाद के रूप में हुई है, जो कि अमलीडीह का रहने वाला था। गुरुवार सुबह 11 बजे वो मगरलोड थाना क्षेत्र से गुजर रहा था, तभी अचानक बाइक से गिर गया और पिकअप ने उसे कुचल दिया। इस हादसे में उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना का सीसीटीवी आया सामने घटना का सीसीटीवी सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि किस तरह से युवक हादसे का शिकार हुआ। वीडियो में दिख रहा है कि युवक अचानक चलती बाइक के साथ गिर गया और बाजू से गुजर रहे पिकअप ने उसके सिर को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरु कर दी है। 

चुनावी ड्यूटी के दौरान हादसे का शिकार हुआ आरक्षक, कवर्धा में उपचार के दौरान मौत

कवर्धा. छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में सोमवार को हुए भीषण सड़क हादसे में घायल पुलिस आरक्षक रुपेश राजपूत की आज इलाज के दौरान मौत हो गई, एक पुलिसकर्मी समेत दो लोगों का इलाज जारी है। यह घटना लोहारा थाना क्षेत्र की है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, आरक्षक रुपेश राजपूत डीएसबी शाखा में पदस्थ थे। सोमवार को अपने एक साथी आरक्षक रेखूराम धुर्वे के साथ लोहारा नगर पंचायत उपचुनाव से जुड़ी जानकारी एकत्रित करने ड्यूटी पर गए थे। ड्यूटी पूरी कर दोनों बाइक से वापस लौट रहे थे। इसी दौरान लोहारा नगर पंचायत की सीमा में सामने से आ रही तेज रफ्तार बाइक ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। दो पुलिसकर्मी समेत तीन घायल हादसा इतना भीषण था कि दोनों पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं दूसरी बाइक सवार युवक भी घायल हुआ। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों की मदद से तीनों घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल आरक्षक रुपेश राजपूत को बेहतर इलाज के लिए रायपुर के एक निजी अस्पताल रेफर किया गया था। इलाज के दौरान आरक्षक की मौत रायपुर के एक निजी अस्पताल तीन दिन जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़के के बाद आखिर में आरक्षक रुपेश राजपूत ने दम तोड़ दिया। हादसे में घायल अन्य दो लोगों का इलाज जिला अस्पताल में जारी है। थाना प्रभारी मनीष मिश्रा ने क्या कहा ? लोहारा थाना प्रभारी मनीष मिश्रा ने बताया कि दो दिन पूर्व दो बाइकों की भिड़ंत में दो पुलिसकर्मियों समेत तीन लोग घायल हुए थे। गंभीर रूप से घायल पुलिस जवान रुपेश राजपूत की आज इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई कर रही है।

ट्रांसफर के खिलाफ जनपद में विरोध तेज, जनप्रतिनिधियों ने जताई नाराजगी

कोरबा/पोंडी उपरोड़ा. कोरबा जिले के जनपद पंचायत पोंडी उपरोड़ा में प्रशासनिक फेरबदल के बाद एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी कोरबा द्वारा जारी एक ताजा आदेश के तहत पोंडी उपरोड़ा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जय प्रकाश डड़सेना को अचानक जिला पंचायत कोरबा में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया गया है। वहीं, उनके स्थान पर भूपेन्द्र कुमार सोनवानी को आगामी आदेश तक पोंडी उपरोड़ा जनपद पंचायत का संपूर्ण प्रभार सौंपा गया है। ​इस अचानक हुए ट्रांसफर आदेश के बाद पोंडी उपरोड़ा जनपद पंचायत के जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है। जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और समस्त जनपद सदस्यों ने इस प्रशासनिक फैसले पर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है और वर्तमान में चल रहे ‘सुशासन तिहार’ (सुशासन सप्ताह) का पूर्ण रूप से बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है। ​”अच्छे अधिकारी को हटाकर विकास कार्य बाधित करने की कोशिश” ​जनपद उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों का कहना है कि वर्तमान सीईओ जय प्रकाश डड़सेना एक बेहद ईमानदार, मिलनसार और क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को अच्छी तरह समझने वाले अधिकारी हैं। उनके कार्यकाल में जनपद के विकास कार्यों को गति मिल रही थी और भ्रष्टाचार पर पूरी तरह लगाम लगी हुई थी। ‘सुशासन तिहार’ के बीच में ही ऐसे कर्मठ अधिकारी को कोरबा अटैच करना सीधे तौर पर पोंडी उपरोड़ा के विकास कार्यों को बाधित करने जैसा है। जनपद उपाध्यक्ष का बयान “पूरे छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार चल रहा है, जिसके तहत मौके पर ही लोगों की समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है। आगामी 5 जून तक यह अभियान चलना है, लेकिन इसी बीच अचानक हमारे मुख्य कार्यपालन अधिकारी को कोरबा अटैच कर दिया गया। उन्हें क्षेत्र के चप्पे-चप्पे की और विकास कार्यों की पूरी जानकारी है। हम इस तरह के अटैचमेंट का पुरजोर विरोध करते हैं।” ​तालाबंदी और उग्र आंदोलन की चेतावनी ​जनपद जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि इस आदेश को वापस नहीं लिया गया और पुराने सीईओ की वापसी नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।   जनपद अध्यक्ष (महिला प्रतिनिधि) का बयान “आज हमारे पोंडी उपरोड़ा में सुशासन तिहार का आयोजन होना था, लेकिन हम सभी जनपद सदस्य इस अटैचमेंट के विरोध में इसका बहिष्कार कर रहे हैं। हमारे सीईओ साहब बहुत अच्छे हैं, उनका जनता और जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर तालमेल है। अगर हमारे सीईओ साहब को वापस यहां नहीं लाया गया, तो हम जनपद पंचायत कार्यालय में तालाबंदी करेंगे और आगे कोई भी काम नहीं होने देंगे।” ​शांतिपूर्ण ढंग से रखेंगे अपनी बात ​जनप्रतिनिधियों का कहना है कि वे इस विषय को लेकर सबसे पहले जिले के प्रभारी मंत्री, स्थानीय मंत्रियों और कलेक्टर महोदय के समक्ष शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांग रखेंगे। यदि शासन-प्रशासन स्तर पर उनकी जायज मांग को स्वीकार नहीं किया जाता है, तो जनपद क्षेत्र के विकास को बचाने के लिए वे जनपद कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने से भी पीछे नहीं हटेंगे।