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राजधानी में बढ़ी महिला कामगारों की भागीदारी, मजदूरी असमानता दूर करने की तैयारी

दिल्ली  दिल्ली में बीते कई साल के मुकाबले महिला कामगारों की आबादी में इजाफा हुआ है लेकिन मजदूरी पुरुषों से कम है। दिल्ली सरकार की दिल्ली राज्य फ्रेमवर्क इंडिकेटर रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं की श्रम बल भागीदारी बढ़ी है लेकिन उनकी दैनिक मजदूरी पुरुषों से कम बनी हुई है। यह रिपोर्ट सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी) की प्रगति पर नजर रखने के लिए डायरेक्टोरेट ऑफ इकोनॉमिक्स एंड स्टैटिस्टिक्स ने जारी की है। दिल्ली राज्य फ्रेमवर्क इंडिकेटर रिपोर्ट सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स की स्थिति पर आधारित है और हाल ही में अर्थशास्त्र और सांख्यिकी निदेशालय ने इसे जारी किया है। रिपोर्ट दिखाती है कि 2017-18 में महिलाओं और पुरुषों की श्रम बल भागीदारी दर का अनुपात 0.19 था। यह आंकड़ा 2023-24 में बढ़कर 0.28 हो गया। यह वृद्धि सकारात्मक है लेकिन 0.28 का अनुपात यह भी दिखाता है कि लैंगिक असमानता अभी बनी हुई है। इसके अतिरिक्त रिपोर्ट दिखाती है कि महिला श्रम बल भागीदारी दर 2017-18 में 11.2 फीसदी थी, 2023-24 में बढ़कर 14.5 फीसदी हो गई। यह 2018-19 में 13.7 फीसदी, 2019-20 में 12.8 फीसदी, 2020-21 में 10.7 फीसदी, 2021-22 में 9.4 फीसदी और 2022-23 में 11.3 फीसदी थी। मजदूरी के आंकड़े चिंताजनक गैर-सार्वजनिक कामों में 2017-18 की जुलाई-सितंबर तिमाही में पुरुषों को 403 रुपये हर दिन और महिलाओं को 300 रुपये मिल रहे थे। 2017-18 की अप्रैल-जून तिमाही में पुरुषों को 376 रुपये हर दिन व महिलाओं को 400 हर दिन, 2023-24 में पुरुषों को 556 रुपये हर दिन व महिलाओं को 500 रुपये हर दिन मिल रहे थे। 2023-24 में यह 548 और 500 रुपये मिल रहा था। इसमें दिखता है कि महिलाओं की मजदूरी बढ़ी लेकिन मजदूरी का अंतर 48 से 100 रुपये का बरकरार है। पेशेवर क्षेत्र में महिलाओं की संख्या घटी पेशेवर और तकनीकी क्षेत्र में महिला कामगारों की संख्या घटी है। इस क्षेत्र में 2020-21 में महिलाओं का अनुपात 28.5 फीसदी था, जोकि 2022-23 में 21.3 फीसदी रह गया है। रिपोर्ट में महिलाओं के आर्थिक संसाधनों में हिस्सेदारी का मूल्यांकन किया गया है। इसमें जमीन, संपत्ति, बैंक सेवाएं, उत्तराधिकार और प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण को शामिल किया है। लेकिन इसमें ये भी कहा गया है कि महिला कामगारों के लिए दिल्ली सरकार कानूनों में सुधार कर रही है।

पीएम पर केंद्रित विशेष गैलरी: दिल्ली विधानसभा में विभिन्न भाषाओं की किताबों का संग्राहलय

दिल्ली  विधानसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लिखे साहित्य पर सबसे बड़ी किताब गैलरी बनाई गई है। ये पीएम के प्रेरक जीवन, शासनकाल, उपलब्धियों को एक छत के नीचे समेटे हुए है। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सेवा पखवाड़े के तहत इस गैलरी का उद्घाटन किया। दो अक्तूबर तक आम नागरिकों के लिए गैलरी खुली रहेगी। ये युवाओं व शोधकर्ताओं के पास पीएम के विजन से प्रेरणा लेने का खास मौका है। शीर्षक अपने प्रधानमंत्री को जानें किताब गैलरी पीएम के जीवन, शासन व भारत को विकसित बनाने के उनके संकल्प को समर्पित की गई है। विधानसभा पुस्तकालय में इसके लिए खास गैलरी बनाई गई है। इसके उद्घाटन के मौके पर विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट और कई विधायक मौजूद रहे। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह गैलरी पीएम की प्रेरक यात्रा को एक पुस्तकालय में समेटने का अनोखा प्रयास है। यह न केवल उनकी उपलब्धियों को दर्शाती है बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। विज्ञापन 200 से ज्यादा खास किताबें विजेंद्र ने कहा कि यह एक जीवंत दस्तावेज है जो पीएम के विजन और भारत के विकास की कहानी बयां करती है। इस संग्रह को समय के साथ और समृद्ध बनाएंगे। ये छात्रों, शोधकर्ताओं और विधायकों के लिए उपयोगी है। गैलरी में पीएम की लिखी और उनके जीवन पर आधारित करीब 200 से ज्यादा खास किताबें हैं। इनमें एग्जाम वारियर्स, मोदी एट द रेट 20, मन की बात एट द रेट 100, ज्योतिपुंज, सामाजिक समरसता और द मोदी इफैक्ट जैसी किताबें शामिल हैं। ये किताबें देशभर से जुटाई गई हैं और कई भाषाओं में उपलब्ध हैं। अगर दिल्लीवासियों के पास पीएम पर लिखी कोई किताब है तो उसे इस गैलरी में जोड़ा जाएगा।

छात्र राजनीति में करारी हार: NSUI की नाकामी से कांग्रेस के लिए दिल्ली अब भी दूर

नई दिल्ली दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के नतीजों से संकेत मिला है कि राजधानी की राजनीति में कांग्रेस की वापसी की राह अभी लंबी है। एबीवीपी की प्रचंड जीत और एनएसयूआई की कमजोर मौजूदगी से कांग्रेस का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली छात्र राजनीति उससे लगभग पूरी तरह छिन चुकी है। इस बार कांग्रेस का छात्र संगठन केवल उपाध्यक्ष पर पर ही जीत सका, जबकि गत वर्ष वह अध्यक्ष व संयुक्त सचिव पद जीतने में सफल हो गया था। डूसू में कभी निर्णायक भूमिका निभाने वाली एनएसयूआई लगातार हाशिये पर जा रही है। इस बार के चुनाव में भी वह छात्रों के बीच प्रभावशाली प्रदर्शन करने में नाकाम रही। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह केवल चुनावी नतीजे नहीं, बल्कि दिल्ली की जमीनी राजनीति का संकेत भी है।  छात्र राजनीति से ही भविष्य के नेता तैयार होते हैं और कांग्रेस के लिए लोकसभा, विधानसभा व एमसीडी चुनाव के बाद इस मोर्चे पर लगातार पराजय चिंता का विषय है। एनएसयूआई की लगातार हार से स्पष्ट है कि कांग्रेस का संगठन युवाओं के बीच पकड़ बनाने में असफल रहा है। दिल्ली में लंबे समय तक सत्ता में रहने के दौरान छात्र राजनीति उसका महत्वपूर्ण सहारा हुआ करती थी। विश्वविद्यालय की राजनीति से ही कांग्रेस ने कई मजबूत चेहरे तैयार किए, लेकिन पिछले एक दशक में उसका यह आधार तेजी से कमजोर हो रहा है। इस पराजय का असर  आने वाले एमसीडी चुनाव में भी देखा जा सकता है। एनएसयूआई के पास    न तो प्रभावी नेतृत्व दिख रहा है न ही कैंपस में सक्रिय संगठनात्मक  ताकत है।  राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर कांग्रेस ने समय रहते अपनी छात्र इकाई को पुनर्जीवित करने और युवाओं से जुड़ने की ठोस रणनीति नहीं बनाई तो दिल्ली की राजनीति में उसकी स्थिति सुधरनी मुश्किल है।  ‘आरएसएस-भाजपा के खिलाफ बहादुरी से लड़े’ एनएसयूआई ने कहा कि आरएसएस-भाजपा और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी। डूसू चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर राहुल झांसला ने जीत हासिल की है। यह जीत एक कठिन संघर्ष के बाद मिली है। एनएसयूआई ने केवल एबीवीपी का ही नहीं बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन, दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, आरएसएस-भाजपा और दिल्ली पुलिस जैसी संयुक्त ताकतों का भी डटकर मुकाबला किया। एनएसयूआई के अनुसार भारी पैमाने पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के बावजूद हजारों छात्रों ने एनएसयूआई और उसके उम्मीदवारों का मजबूती से साथ दिया। एनएसयूआई अध्यक्ष वरुण चौधरी ने कहा कि हमें अपने उम्मीदवारों पर गर्व है जिन्होंने यह चुनाव साहस और ईमानदारी के साथ लड़ा। आरएसएस-भाजपा समर्थित एबीवीपी ने चुनाव अधिकारियों की मदद से ईवीएम में गड़बड़ी और प्रोफेसरों को शामिल कर चुनाव चोरी करने की शर्मनाक कोशिश की। अदालत ने विजय जुलूस पर लगा दी थी रोक  अदालत ने अपने 17 सितंबर के आदेश में दिल्ली विश्वविद्यालय के उम्मीदवारों और छात्र संगठनों को डूसू चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद राष्ट्रीय राजधानी में कहीं भी विजय जुलूस निकालने पर रोक लगा दी थी। याचिकाकर्ता, अधिवक्ता प्रशांत मनचंदा ने पीठ के सामने कई तस्वीरें और समाचार रिपोर्ट साझा कीं और न्यायिक आदेश और लिंगदोह समिति की सिफारिशों के उल्लंघन का दावा किया।

निगम कर्मचारी संघ के नए पदाधिकारी 22 को लेंगे शपथ, समारोह की धूम

गाजियाबाद नगर निगम कर्मचारी संघ का शपथ समारोह 22 सितंबर को कराया जाएगा। नेहरू नगर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में दोपहर तीन बजे शपथ समारोह होगा। मुख्य चुनाव अधिकारी ब्रज मोहन सिंघल ने बताया कि निगम कर्मचारी संघ चुनाव में अनुराग गुट ने जीत दर्ज की है।  अनुराग को कर्मचारी संघ का अध्यक्ष चुना गया है। शपथ ग्रहण कराने की सभी तैयारी पूरी हो गई है। उन्होंने बताया कार्यक्रम में महापौर सुनीता दयाल मुख्य अतिथि मौजूद रहेंगी। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक विशिष्ट अतिथि रहेंगे।

अब दिल्ली के स्टेडियम में इवेंट आयोजित करना हुआ सस्ता और सुविधाजनक

नई दिल्ली  दिल्ली के बड़े स्टेडियमों को लेकर सरकार ने एक अहम फैसला लिया है. दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने बताया कि स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने बड़े स्टेडियमों की बुकिंग की राशि में भारी कटौती की है, जिससे अब स्टेडियमों में कार्यक्रम का आयोजन कराना बहुत आसान हो जाएगा. उन्होंने कहा कि इस निर्णय का उद्देश्य दिल्ली को लाइव इवेंट्स और कॉन्सर्ट इकोनॉमी का हब बनाना है. दरअसल, इससे पहले भी मंत्री कपिल मिश्रा स्टेडियम के अधिक किराए को लेकर आपत्ति जता चुके हैं. उन्होंने हाल ही में कहा था कि इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और JLN के किराए में 100% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. इस वजह से आयोजकों को कार्यक्रमों, म्यूजिक कॉन्सर्ट और लाइव शो के आयोजन के लिए अहमदाबाद और मुंबई जैसे दूसरे शहरों में जाना पड़ रहा है, जिसकी वजह से दिल्ली टूरिज्म रेवेन्यू भी खो रही है. उन्होंने स्टेडियमों के किराए को कम करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था. कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया के जरिए दी जानकारी दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर SAI के नोटिस को शेयर करते हुए लिखा कि दिल्ली के बड़े स्टेडियमों में अब कार्यक्रमों का आयोजन बहुत आसान हो गया है. स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने इन स्टेडियमों के बुकिंग की राशि में भारी कमी की घोषणा की है. इसके आगे उन्होंने लिखा कि यह निर्णय दिल्ली को लाइव इवेंट्स और कॉन्सर्ट इकोनॉमी का हब बनाने को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के विजन को साकार करेगा.   तीन कैटेगरी में डिवाइड किए आयोजक SAI द्वारा जारी नोटिस में स्टेडियम में किसी भी कार्यक्रम को आयोजित करने वाले आयोजकों को तीन कैटेगरी में डिवाइड किया गया है. हर एक कैटेगरी के लिए स्टेडियम का शुल्क अलग-अलग होगा. पहली कैटेगरी में सरकारी संस्थाओं द्वारा किए जाने वाले आयोजन आएंगे, जिसमें सरकारी स्कूल या कॉलेज, भारत मंत्रालय, और MYAS द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थाएं, जो लड़कियों या दिव्यांग लड़कों के लिए खेल का आयोजन करते हैं, के कार्यक्रम शामिल हैं. दूसरी कैटेगरी में वे खेल प्रतियोगिताएं या आयोजन आएंगे, जो किसी निजी स्कूल या कॉलेज, रजिस्टर्ड सोसाइटी जो पिछले 5 साल से खेलों के विकास में काम कर रही हों, लड़कियों और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रतियोगिताएं जो कैटेगरी 1 में शामिल न हों, ऐसे कार्यक्रम कैटेगरी 2 में आएंगे. इसके अलावा, बाकी सभी आयोजन जो कैटेगरी 1 या 2 में नहीं आते हैं, उन्हें कैटेगरी 3 में शामिल किया जाएगा. नोटिस में कहा गया कि सबसे पहले, जब भी कोई खेल आयोजन के लिए बुकिंग होगी, तो एडमिन स्टाफ को यह देखना होगा कि आयोजक किस कैटेगरी में आते हैं और उसी के आधार पर शुल्क लागू होगा. किस कैटेगिरी का कितना शुल्क है? अगर दिल्ली के प्रमुख स्टेडियम जवाहर लाल नेहरू (JLN) की बात करें तो कैटेगिरी 1 के लिए इसके मेन एरिया का किराया 40 हजार रुपये है. वहीं कैटेगिरी 2 के लिए इस स्टेडियम के मेन एरिया का किराया 1 लाख रुपये है और कैटेगिरी 3 के लिए इसका किराया 25 लाख रुपये है. हालांकि, लाइट का बिल इसमें नहीं जोड़ा गया है, जिसे अलग से देना पड़ेगा. वहीं पहले जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम के मेन एरिया का किराया 50 लाख रुपये होता था.इसके अलावा SAI ने कई और स्टेडियमों के किराए के बारे में विस्तार से बताया, जिसमें JLN, मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम, इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स आदि स्टेडियम शामिल हैं.  

दिल्ली को मिली नई सौगात: स्वच्छ हवा के साथ बढ़ेगा राजस्व भी

दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को शहरवासियों को एक बड़ी सौगात देते हुए नांगली डेयरी इलाके में राष्ट्रीय राजधानी के पहले बड़े बायोगैस संयंत्र का उद्घाटन किया। उन्होंने इसे बेहद गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि शहर को मवेशियों के गोबर और नगरपालिका के कचरे से मुक्त बनाने के लिए ऐसे कई संयंत्रों की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने बताया कि यह संयंत्र ना केवल शहर को कचरे से मुक्ति दिलाएगा, बल्कि इससे सरकार को राजस्व की प्राप्ति भी होगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब 2.72 एकड़ जमीन पर फैले इस संयंत्र की क्षमता 200 टन प्रतिदिन (TPD) है। यह संयंत्र मवेशियों के गोबर और बायो-डिग्रेडेबल कचरे को कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और खाद में बदलेगा और प्रतिदिन लगभग 14,000 घन मीटर कच्ची बायोगैस का उत्पादन करेगा। इसके बाद इससे 5.6 टन कंप्रेस्ड बायोगैस प्राप्त होगी, जिसकी आपूर्ति इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) को की जाएगी। सह-उत्पाद के रूप में संयंत्र से खाद भी तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री ने इस संयंत्र को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के ड्रीम प्रोजेक्ट का हिस्सा बताया। इस मौके पर सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, 'यह संयंत्र न केवल नालों की सफाई और यमुना में प्रदूषण कम करने में मदद करेगा, बल्कि हरित ऊर्जा और राजस्व भी उत्पन्न करेगा। दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 1,500 मीट्रिक टन गोबर का उत्पादन होता है और एक संयंत्र पर्याप्त नहीं है। शहर को भविष्य में ऐसे कई और संयंत्रों की आवश्यकता होगी।' गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर चल रहे सेवा पखवाड़े के अंतर्गत दिल्ली को यह ऐतिहासिक सौगात मिली है। यह बायोगैस प्लांट न केवल गोबर और डेयरी अपशिष्ट के प्रबंधन का स्थायी समाधान देगा, बल्कि हजारों गौशालाओं और डेयरियों की समस्याओं का हल भी बनेगा। अब गोबर से हरित ऊर्जा बनेगी। पर्यावरण स्वच्छ होगा, यमुना का प्रदूषण घटेगा और किसानों और पशुपालकों को भी सहारा मिलेगा। आगे उन्होंने कहा, ‘यह परियोजना प्रधानमंत्री के हरित ऊर्जा अभियान को सशक्त बनाते हुए, दिल्ली को स्वच्छ, आत्मनिर्भर और हरित राजधानी बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम और मील का पत्थर साबित होगी।’ इस मौके पर दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद, सांसद कमलजीत सहरावत, महापौर राजा इकबाल सिंह, विधायक संदीप सेहरावत समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पिछली आम आदमी पार्टी सरकार पर हमला बोलते हुए गुप्ता ने आरोप लगाया कि इस संयंत्र के लिए साल 2018 में ही धनराशि स्वीकृत कर दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद परियोजना में सालों की देरी हुई। उन्होंने कहा, 'इस परियोजना को पूरा होने में आठ साल लग गए क्योंकि पिछली सरकार काम करने के बजाय मोदी जी को दोष देती रही। वे हर बात पर राजनीति करते रहे। जब केंद्र सरकार और ट्रिपल इंजन वाली सरकार ने मिलकर काम किया, तभी यह परियोजना आगे बढ़ पाई।'

कई दिल्ली स्कूलों को मिली बम की धमकी, केजरीवाल बोले- सुरक्षा का सवाल, अभिभावक चिंतित

नई दिल्ली  दिल्ली के कई स्कूलों को शनिवार सुबह बम से उड़ाने की धमकी मिली, जिसके बाद स्कूलों को तुरंत खाली करवाया गया और बड़े पैमाने पर सुरक्षा की जांच की जा रही है. स्कूलों को मिली धमकी को लेकर अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि चार इंजन वाली BJP सरकार दिल्ली की सुरक्षा नहीं संभाल पा रही है. बच्चों के मां-बाप हर रोज डर के जीते हैं. स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी एक फोन कॉल के जरिए मिली. जिन स्कूलों को धमकियां मिलीं उनमें द्वारका का दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), कृष्णा मॉडल पब्लिक स्कूल और सर्वोदय विद्यालय शामिल हैं. सूचना मिलने पर पुलिस और बम स्क्वाड घटनास्थल पर पहुंचे और सर्च अभियान शुरू किया. चार इंजन वाली सरकार नहीं संभाल पा रही दिल्ली: केजरीवाल दिल्ली के स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर बीजेपी पर निशाना साधा. केजरीवाल ने लिखा, ‘दिल्ली के स्कूलों को बार-बार बम धमकी मिल रही है. हर तरफ अफरा-तफरी हो जाती है, स्कूलों की छुट्टी होती है, बच्चों और अभिभावकों में डर फैलता है. लेकिन एक साल से न कोई पकड़ा गया, न कोई कार्रवाई हुई.’ इसके आगे उन्होंने लिखा कि चार इंजन वाली BJP सरकार राजधानी की सुरक्षा तक नहीं संभाल पा रही. माता-पिता रोज डर में जी रहे हैं. स्कूल प्रबंधक ने अभिभावकों को दी सूचना द्वारका के डीपीएस स्कूल के प्रबंधक ने तत्काल ऐलान किया कि स्कूल आज बंद रहेगा. इसके अलावा, शनिवार को स्कूल में होने वाली परीक्षाएं भी रद्द कर दी गई. स्कूल ने बच्चों के अभिभावकों को जारी एक नोटिस में लिखा कि कुछ कारणों की वजह से आज यानी 20 सितंबर को स्कूल बंद रहेगा. स्कूलों की सभी बसों और वैन को तुरंत वापस भेजा जा रहा है. सभी अभिभावक अपने बच्चों को लेने स्टॉप पर पहुंच जाएं. इसके आगे लिखा गया कि आज होने वाली परीक्षा स्थगित कर दी गई है. नई तारीखों की सूचना जल्द दी जाएगी. इस महीने में ऐसा दूसरी बार नहीं हुआ है जब किसी शिक्षण संस्थान को बम से उड़ाने की धमकी मिली हो. इससे पहले 9 सितंबर को नई दिल्ली के यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली थी. धमकी मिलने के बाद कॉलेज कैंपस को खाली करा दिया गया था. इसके अलावा, मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज और मुख्यमंत्री सचिवालय को भी ऐसी धमकियां मिल चुकी हैं. हालांकि, ये सारी धमकियां झूठ साबित हुईं.  

नवरात्रि पर मांस बेचने व काटने-पकाने पर रोक लगे, दिल्ली BJP विधायक ने उठाई मांग

नई दिल्ली  देशभर में त्योहारों की शुरुआत हो चुकी है। नवरात्रि भी जल्द ही शुरू होने वाले हैं। ऐसे में एक बार फिर खुले में मांस की बिक्री पर रोक लगने की मांग उठाई जा रही है। दिल्ली में ये मांग बीजेपी विधायक अजय महावर ने की है। उनका कहना है कि नवरात्रि के दौरान 9 दिनों का समय सनातन धर्म बहुत पवित्र समय होता है। ऐसे में खुले में मीट की बिक्री पर रोक लगनी चाहिए। उन्होंने कहा है कि इसके लिए सोमवार को एक पत्र भी लिखेंगे। उन्होंने आगे कहा, किसी को अपना रेस्टोरेंट चलाना होतो वह शीशे के अंदर पका सकता है, हमें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन खुले में मांस काटने-पकाने और बेचने पर पाबंदी होनी चाहिए। इससे पहले सावन मास में कांवड़ यात्रा के दौरान भी इस तरह की मांग करते हुए पत्र लिखा गया था। इससे पहले दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिवाली के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर संतुलित रुख अपनाने का आह्वान कियाथा । सिरसा ने कहा था कि लोगों को पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना त्योहार मनाने की अनुमति दी जानी चाहिए। पर्यावरण मंत्री ने कहा कि दिवाली न केवल एक धार्मिक त्योहार है, बल्कि लाखों लोगों के लिए एक भावनात्मक अवसर भी है, जो अपनी परंपराओं और संस्कृति से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि दिवाली का त्योहार उत्सव और खुशी का समय है, जो लोगों की भावनाओं और सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता ने कहा कि जब पूरा देश पटाखे फोड़कर इस अवसर का जश्न मनाता है, तो अकेले राष्ट्रीय राजधानी में पूर्ण प्रतिबंध का सामना करना कोई मायने नहीं रखता।

2,700 करोड़ रुपए की ठगी करने वाला नेक्सा एवरग्रीन घोटाले का मुख्य आरोपी दबोचा गया

नई दिल्ली दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने एक बड़े निवेश घोटाले का पर्दाफाश करते हुए 57 वर्षीय जुगल किशोर शर्मा को गिरफ्तार किया है। जुगल पर आरोप है कि उसने धोलेरा, अहमदाबाद में प्लॉट और 3 प्रतिशत साप्ताहिक रिटर्न का लालच देकर देशभर के निवेशकों से 2,700 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की। जुगल किशोर ने इस दौरान झूठा दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस प्रोजेक्ट के "ब्रांड एंबेसडर" हैं, जिससे लोगों का विश्वास जीता जा सके। यह धोखाधड़ी नेक्सा एवरग्रीन प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के माध्यम से की गई। जांच में सामने आया है कि इस मामले में देश भर में 150 से अधिक एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें से अधिकांश राजस्थान से हैं। इस मामले में पहले भी दो आरोपी, सुभाष बिजारणिया और ओपेन्द्र बिजारणिया को दिसंबर 2024 में गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस को 98 पीड़ितों की शिकायत मिली थी, जिन्होंने बताया कि कंपनी के निदेशक जुगल किशोर और विनोद कुमार ने उन्हें धोलेरा में प्लॉट देने और प्रति सप्ताह 3 प्रतिशत का भारी रिटर्न देने का आश्वासन दिया था। जुगल निवेशकों को लुभाने के लिए जूम मीटिंग्स करते थे और प्रधानमंत्री के वीडियो दिखाकर झूठा प्रचार करते थे। वे आकर्षक उपहारों जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप और रॉयल एनफील्ड बाइक का भी लालच देते थे। जनवरी 2023 से, कंपनी के पदाधिकारी फरार हो गए और उनकी वेबसाइट व मोबाइल ऐप बंद हो गई। इसी पैटर्न पर राजस्थान के सीकर और मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भी मामले दर्ज हुए हैं। जांच में पता चला है कि पीड़ितों से वसूले गए पैसे नेक्सा एवरग्रीन डेवलपर्स धोलेरा और 9 ओक डेवलपर्स धोलेरा के बैंक खातों में जमा किए गए थे। जुगल किशोर इन फर्मों का अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता था और दिल्ली के शाहदरा से अपना ऑफिस चला रहा था। पुलिस ने बताया कि अधिकांश पीड़ित सरकारी कर्मचारी हैं। कंपनी ने धोलेरा क्षेत्र में करीब 1,200 बीघा जमीन खरीदने का दावा किया था, हालांकि जांच में 168 एकड़ जमीन की ही पुष्टि हुई है। जुगल किशोर ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अपना घर बेच दिया था और छिप रहा था। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने लोगों को आगाह किया है कि ऊंचे रिटर्न का वादा करने वाली किसी भी योजना में निवेश करने से पहले अच्छी तरह से जांच-पड़ताल करें। किसी भी कंपनी की वैधता की पुष्टि आरओसी, सेबी या आरबीआई से अवश्य करें।

देर से गर्भपात के नियम स्पष्ट: 22 हफ्ते बाद अबॉर्शन पर दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा आदेश

नई दिल्ली  दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 30 वर्षीय महिला को 22 हफ्तों की प्रेग्नेंसी को खत्म करने का आदेश दिया है. हालांकि, ऐसा हर महिला के साथ संभव नहीं है. इसके अलावा, भारतीय कानून के मुताबित, 22 हफ्ते की प्रेग्नेंसी को खत्म करने के लिए भी कोर्ट की मंजूरी चाहिए होती है. ऐसे में क्यों महिला को बिना किसी मौजूदा कारणों के बाद गर्भपात की मंजूरी दी गई? चलिए जानते हैं पूरी बात. किस मामले में सुनाया यह फैसला? दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट मे एक 30 वर्षीय महिला के केस की सुनवाई चल रही थी. महिला अपने बॉयफ्रेंड के साथ लिव-इन-रिलेशनशिप में रह रही थी. उस दौरान वह दो बार प्रेग्नेंट हुई थी. पहली बार भी उसे अपने पार्टनर द्वारा बहलाये जाने के बाद गर्भनिरोधक गोलियों से अबॉर्शन किया. मगर दूसरी बार जब वह फिर गर्भवती हुई तो अब लंबे समय की प्रेग्नेंसी थी. हालांकि, महिला ने पहले ही बच्चे को गिराने से इंकार किया था लेकिन पार्टनर ने उसे जबरदस्ती मेडिकल अबॉर्शन करने के लिए कहा. दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस की टिपण्णी पार्टनर की बात न मानने पर उसके साथ मारपीट की गई और प्रताड़ित किया गया. इसके बाद महिला ने FIR कर केस दर्ज करवाया था. इस पर दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस रविंद्र डुडेजा ने स्पष्ट कहा है कि गर्भावस्था को जारी रखना पीड़िता की तकलीफों को बढ़ाना होगा. दरअसल, महिला को शादी का झूठा वादा किया गया था. मगर अब ऐसा नहीं होगा तो गर्भावस्था को जारी रखना युवती के लिए कठिन हो सकता है. किस संदर्भ में दिया गया फैसला? जस्टिस ने यह फैसला महिला को और कष्ट न पहुंचाने और सामाजिक कलंक से बचाने के लिए सुनाया था. पीड़ित महिला को पहले से ही आरोपी मित्र से काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था और कोर्ट भी उसकी मनोस्थिति को नहीं समझेगा तो उसके लिए मुश्किल आ सकती है. कोर्ट ने महिला को एम्स में गर्भपात करवाने की अनुमति दे दी है. क्या है यह नियम और कब महिला को ऐसे अधिकार मिलते हैं? भारतीय कानून में यह नियम नया नहीं है. इस नियम को साल 1970 में ही लागू कर दिया गया था, जिसमें 20 हफ्ते के भ्रूण को गिराने का प्रावधान है लेकिन कुछ विशेष मामलों में. इसे MTP Act, 1971 कहते हैं. इसमें लीगल अबॉर्शन प्रोसेस के बारे में बताया जाता है. इसे साल 2021 में बदला गया जिसके बाद 24 हफ्तों तक गर्भपात करने की अनुमति दी जाती है. मगर विशेष परिस्थितियों में. एक्ट के मुताबिक, शादीशुदा और अविवाहित महिलाओं के बीच अब कोई फर्क नहीं रखा गया है. दोनों को समान अधिकार हैं. रेप सर्वाइवर, नाबालिग, विकलांग महिलाओं को 24 हफ्ते तक गर्भपात का अधिकार दिया गया है. इस केस में भी मामला यौन शोषण से जुड़ा था. इसलिए, गर्भपात की अनुमती दी गई है.