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पंजाब सदन में कांग्रेस विधायक की आपत्तिजनक टिप्पणी पर जमकर हंगामा

चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा के शून्य काल के दौरान एक बार फिर से हंगामा हो गया। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कांग्रेस के विधायक सुखपाल सिंह खैरा का एक इंटरनेट मीडिया पर दिया गया बयान पढ़कर सुनाया जिसमें उन्होंने कहा कि 1000 रुपये लेकर औरतें कौन से सूरमाओं को पैदा कर देंगी। हरपाल चीमा ने इस अनुसूचित जाति समुदाय की बहू, बेटियों का अपमान बताते हुए कहा कि कांग्रेस की नेताओं की हर समय यही बयानबाजी रहती है। कभी यह किसी को काला कह देते हैं तो कभी किसी को बैंड बाजे बजाने वाला, इन्हें मानसिक तौर पर स्वास्थ्य लाभ लेने की जरूरत है। विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि उन्होंने सुखपाल सिंह खैहरा का यह बयान नहीं देखा है लेकिन अगर उन्होंने ऐसा कहा है तो वह इसके लिए क्षमा मांगते हैं और इस बात को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। 'ये शब्दावली नहीं करेंगे बर्दाश्त' उन्होंने हरपाल चीमा की ओर से कांग्रेसी नेताओं की ओर से अनुसूचित जाति के प्रति बरती गई शब्दावली को लेकर भी कहा कि जिन लोगों की वित्त मंत्री ने बात की है वह इस सदन का हिस्सा नहीं है और वह अपनी बात कई बार स्पष्ट भी कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने ही बूटा सिंह जैसे नेताओं को केंद्र सरकार में गृहमंत्री बनाया है इसलिए उनके प्रति सम्मान में कोई कमी नहीं है। इसलिए बार-बार उसे तरफ जाना ठीक नहीं है। माफी योग्य नहीं है बयान: सरबजीत कौर प्रताप सिंह बाजवा के माफी मांगने के बाद ऐसा लग रहा था की बात यहीं खत्म हो जाएगी। लेकिन आम आदमी पार्टी की विधायक इंद्रजीत मान और सरबजीत कौर अपनी सीटों पर खड़े होकर सुखपाल सिंह खैहरा के बयान का विरोध करने लगी और उन्होंने कहा कि बेशक प्रताप सिंह बाजवा ने इसकी माफी मांग ली हो लेकिन उनका यह बयान माफी योग्य नहीं है इसे लोगों में लेकर जाया जाएगा साथ ही उन्होंने खेहरा के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की। मसला बढ़ते देखकर स्पीकर ने सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए मुल्तवी कर दी।

पंजाब में 10वीं की अब ऑनलाइन चेक होंगी Answer Sheets

लुधियाना. पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) ने 10वीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा 2026 को लेकर अहम निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड के अनुसार इस बार 10वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच ऑनलाइन माध्यम से की जाएगी। जारी आदेशों के मुताबिक संबंधित अध्यापक अपने Registered E-mail ID और Registered Phone Number के जरिए लॉगिन करके Answer Sheets की मार्किंग करेंगे। यदि किसी शिक्षक के पास लॉगिन आईडी या पासवर्ड नहीं है तो वे बोर्ड कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। बोर्ड की ओर से जानकारी दी गई है कि 11 मार्च 2026 को सुबह 5 बजे से शिक्षकों की Login ID में 5 Dummy Answer Sheets अपलोड की जाएंगी, जिनकी जांच करके उन्हें Evaluation के लिए अपलोड करना होगा। इसके बाद उसी दिन सुबह 4 बजे तक उनकी स्क्रीन पर परिणाम दिखाई देगा और सही जांच करने वाले अध्यापकों को आगे की प्रक्रिया के लिए चुना जाएगा। इसके बाद चयनित शिक्षकों को पेन-पेपर टेस्ट और अन्य चरणों से भी गुजरना होगा। यह प्रक्रिया 12 मार्च 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। इस दौरान तकनीकी टीम भी मौजूद रहेगी, ताकि अध्यापक अपनी किसी भी प्रकार की Doubts या Query का समाधान कर सकें। बोर्ड ने कहा है कि इस नई प्रणाली का उद्देश्य परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाना है।

लुधियाना में तीन स्कूलों को मिली बम से उड़ाने की धमकी

लुधियाना. महानगर के 3 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह करीब 7 बजे ई-मेल के जरिए सीबीएसई से संबंधित 3 स्कूलों को धमकी भरा संदेश मिला, जिसमें स्कूल परिसर में बम होने की बात कही गई थी। धमकी भरा मेल मिलते ही स्कूल प्रबंधन ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। इसके बाद पुलिस, बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड की टीमें मौके पर पहुंच गईं और स्कूल परिसरों की गहन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और ई-मेल भेजने वाले की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि घबराने की जरूरत नहीं है, सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से सतर्क हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

ऑनलाइन बुकिंग के बिना नहीं मिलेगा गैस सिलेंडर

फरीदकोट. मध्य पूर्व में बढ़ रहे ईरान–इजराइल तनाव का असर अब भारत में एलपीजी गैस सप्लाई पर भी दिखाई देने लगा है। भारत सरकार द्वारा जारी नई हिदायतों के अनुसार. अब उपभोक्ताओं को एलपीजी गैस सिलेंडर केवल ऑनलाइन बुकिंग के बाद ही मिलेगा। उल्लेखनीय है कि नई प्रक्रिया के मुताबिक,अब सिलेंडर की डिलीवरी बुकिंग के बाद मिलने वाले डीएसी कोड के आधार पर ही की जाएगी। इसका उद्देश्य सप्लाई प्रणाली को पारदर्शी बनाना और गलत इस्तेमाल को रोकना बताया जा रहा है। दूसरी ओर कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई को लेकर भी दिक्कतें आने की संभावना जताई जा रही है। कमर्शिल सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित गैस एजेंसी संचालकों के अनुसार फिलहाल 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित हो रही है। फरीदकोट की गैस एजेंसियों के संचालकों ने बताया कि सरकार के निर्देशों के अनुसार अब हर उपभोक्ता को सिलेंडर लेने के लिए पहले ऑनलाइन बुकिंग करनी होगी और डिलीवरी के समय मिलने वाला डीएसी कोड दिखाना जरूरी होगा। गैस एजेंसी संचालक संजीव जैन ने बताया कि पिछले दो-तीन दिनों से 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि जब सप्लाई फिर से शुरू होगी तभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे अपनी ई-केवाइसी जल्द से जल्द करवा लें, ताकि भविष्य में सिलेंडर लेने के समय किसी तरह की परेशानी न हो। फिलहाल घरेलू गैस सिलेंडरों की कोई बड़ी कमी नहीं है और बुकिंग के बाद एक से दो दिनों के भीतर सप्लाई दी जा रही है। हालांकि आने वाले दिनों में सरकार सप्लाई को लेकर कोई कोटा भी तय कर सकती है।

बिना बीमा दौड़ रहे 1 करोड़ वाहन, हादसे के पीड़ितों को मुआवजा मुश्किल; संसद के आंकड़ों पर हाईकोर्ट में अर्जी

चंडीगढ़ चंडीगढ़ में करीब 14.27 लाख वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें से दो लाख से अधिक वाहन बिना वैध बीमा के सड़कों पर चल रहे हैं। वहीं हरियाणा में करीब 1.3 करोड़ वाहनों में से 41 लाख से अधिक वाहन बिना इंश्योरेंस के हैं।  पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में करीब एक करोड़ वाहन बिना वैध बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर मोटर वाहन अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान नई अर्जी पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल की गई है। मामले पर हाईकोर्ट 10 मार्च को सुनवाई करेगा। वाहनों का बीमा न होने से दुर्घटना की स्थिति पीड़ितों को मुआवजा मिलने में समस्या आ रही है। मोहाली निवासी एडवोकेट कुंवर पाहुल सिंह द्वारा दाखिल अर्जी में संसद में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों का हवाला दिया गया है। अर्जी में बताया गया है कि ट्राइसिटी और दोनों राज्यों में बड़ी संख्या में वाहन बिना थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के सड़कों पर चल रहे हैं, जो न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए भी गंभीर समस्या पैदा कर रहा है। जानिए… क्या है वाहनों की स्थिति अदालत को दिए गए आंकड़ों के अनुसार चंडीगढ़ में करीब 14.27 लाख वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें से दो लाख से अधिक वाहन बिना वैध बीमा के सड़कों पर चल रहे हैं। वहीं हरियाणा में करीब 1.3 करोड़ वाहनों में से 41 लाख से अधिक वाहन बिना इंश्योरेंस के हैं। पंजाब की स्थिति इससे भी अधिक चिंताजनक बताई गई है, जहां लगभग 1.3 करोड़ वाहनों में से 56 लाख से ज्यादा वाहन बिना वैध बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। प्रतिशत के लिहाज से देखा जाए तो चंडीगढ़ में लगभग 15 प्रतिशत, हरियाणा में 32 प्रतिशत और पंजाब में करीब 42 प्रतिशत वाहन बिना बीमा के चल रहे हैं। दुर्घटनाओं के मामलों में पीड़ितों को समय पर नहीं मिल रहा मुआवजा अर्जी में कहा गया है कि ऐसी स्थिति में सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को समय पर मुआवजा दिलाने का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। सामान्यतः किसी सड़क दुर्घटना के बाद पीड़ित या उसके आश्रित मुआवजे के लिए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल) में याचिका दाखिल करते हैं। अधिकरण मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए मुआवजे की राशि तय करता है और यह निर्धारित करता है कि भुगतान की जिम्मेदारी किसकी होगी। यदि वाहन का बीमा होता है तो पीड़ित परिवार को बीमा कंपनी से मुआवजा मिलना अपेक्षाकृत आसान होता है। लेकिन यदि वाहन बिना बीमा के होता है तो मुआवजे की जिम्मेदारी सीधे वाहन चालक या मालिक पर आ जाती है। ऐसे मामलों में मुआवजा राशि की वसूली बेहद कठिन हो जाती है। कई बार चालक या मालिक के नाम पर पर्याप्त संपत्ति नहीं होती, जिससे पीड़ित परिवारों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है और कई मामलों में उन्हें मुआवजा मिल भी नहीं पाता। पीड़ितों को समय पर नहीं मिल रहा मुआवजा अर्जी में यह भी कहा गया है कि दुर्घटनाओं के मामलों में कई बार पुलिस द्वारा एक्सीडेंट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट समय पर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में दाखिल नहीं की जाती, जिससे मुआवजा प्रक्रिया और भी लंबी हो जाती है। इसमें हाल ही में हाईकोर्ट द्वारा जारी प्रशासनिक आदेश का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को निर्देश दिया गया है कि मोटर दुर्घटना मामलों में मुआवजा राशि सीधे पीड़ितों के बैंक खातों में ट्रांसफर होने की निगरानी करें। हालांकि अर्जी में सवाल उठाया गया है कि यदि बड़ी संख्या में वाहन बिना वैध बीमा के सड़कों पर चलते रहेंगे तो पीड़ितों को समय पर मुआवजा देने का उद्देश्य कैसे पूरा होगा।

Tourist सावधान! छतबीड़ चिड़ियाघर में अब नहीं चलेगी मनमानी, जंगलात विभाग ने कसे नियम

जीरकपुर अब छतबीड़ चिड़ियाघर में किसी भी गाड़ी के हॉर्न बजाने पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया है। यह फैसला जंगलात डिपार्टमेंट के बड़े अधिकारियों ने एक टूरिस्ट की शिकायत सामने आने और मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लिया है। डिपार्टमेंट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत आदेश जारी किए हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, कुछ दिन पहले जू घूमने आए एक टूरिस्ट ने शिकायत की थी कि अंदर चल रही कुछ गाड़ियों के हॉर्न की आवाज से जानवरों और पक्षियों को परेशानी हो रही है। सोशल मीडिया पर यह मामला सामने आने के बाद जंगलात डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने जांच की और तुरंत एक्शन लिया। बताया जा रहा है कि अधिकारियों ने मामले को इतना गंभीरता से लिया कि होली की छुट्टी होने के बावजूद छुट्टी वाले दिन ही इस बारे में आदेश जारी कर दिए गए। डिपार्टमेंट का कहना है कि चिड़ियाघर में रहने वाले जंगली जानवरों को शांत और कुदरती माहौल देना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। चिड़ियाघर के अंदर बाहरी गाड़ियों की एंट्री पहले से ही बंद है, ताकि जानवरों और पक्षियों को गाड़ियों के शोर से परेशानी न हो। प्रशासनिक काम के लिए कुछ ही गाड़ियों को अंदर आने की इजाजत है। इनमें जानवरों के लिए चारा ले जाने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली और डिपार्टमेंट की दूसरी जरूरी गाड़ियां शामिल हैं। नए ऑर्डर के मुताबिक, इन गाड़ियों के ड्राइवरों को भी हॉर्न बजाने से मना किया गया है। नियम तोड़ने वालों पर एक्शन होगा जंगलात डिपार्टमेंट ने साफ कर दिया है कि अगर कोई गाड़ी वाला चिड़ियाघर के अंदर हॉर्न बजाता हुआ पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। चिड़ियाघर में चलने वाली बैटरी से चलने वाली गाड़ियों के ड्राइवरों को भी इन नियमों का पालन करने को कहा गया है।   तेज आवाज जानवरों के व्यवहार पर डालती है असर वाइल्डलाइफ लवर्स के मुताबिक, तेज और लगातार शोर जानवरों के व्यवहार पर गंभीर असर डालता है। कई जानवर अचानक तेज आवाज से डर जाते हैं और उनमें स्ट्रेस बढ़ सकता है। कभी-कभी पक्षी भी अपने घोंसले छोड़ देते हैं और जानवरों की नॉर्मल एक्टिविटीज पर असर पड़ता है। लगातार शोर उनकी नींद, खाने और रिप्रोडक्टिव प्रोसेस पर भी बुरा असर डालता है। नियमों का सख्ती से पालन करें: सुपरिटेंडेंट इस बात की पुष्टि करते हुए छतबीड़ चिड़ियाघर के सुपरिटेंडेंट चंचल कुमार ने कहा कि हॉर्न बजाने की शिकायत मिलने के बाद डिपार्टमेंट ने तुरंत फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि जानवरों को शांतिपूर्ण माहौल देने के लिए अब चिड़ियाघर के अंदर किसी भी गाड़ी को हॉर्न बजाने की इजाजत नहीं होगी और सभी ड्राइवरों को नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

कबड्डी खिलाड़ी की रहस्यमयी मौत से हड़कंप, ड्रग ओवरडोज होने का शक

जालंधर मेहतपुर के गांव उदोवाल में एक कबड्डी खिलाड़ी वंश की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। गांव के लोगों का कहना है कि उसकी मौत नशे की ओवरडोज से हुई है, हालांकि पुलिस ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है। जानकारी के अनुसार वंश दो साल पहले 12वीं पास कर चुका था और स्कूल स्तर से ही कबड्डी खेलता था। वह कई टूर्नामेंट में हिस्सा ले चुका था। बताया जा रहा है कि वह घर से पास के गांव बालोकी खेड़ा रोड गया हुआ था, जहां उसका शव संदिग्ध हालत में मिला। राहगीरों ने इसकी सूचना गांव के सरपंच और परिवार को दी। परिवार में उसके माता-पिता, एक छोटा भाई और एक छोटी बहन हैं। परिवार ने इस मामले में पुलिस को कोई शिकायत नहीं दी और अंतिम संस्कार कर दिया। गांव उदोवाल के पंच मनप्रीत सिंह ने बताया कि वंश एक अच्छा खिलाड़ी था और उसने कई कबड्डी टूर्नामेंट में स्कूल का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने कहा कि स्कूल छोड़ने के बाद वह नशे की गिरफ्त में आ गया था। गांव में इससे पहले भी नशे से मौत का मामला सामने आ चुका है। 17 फरवरी को पड़ोसी जसदीप सिंह जस्सा की भी संदिग्ध ओवरडोज से मौत हुई थी, जिसकी शिकायत पुलिस को दी गई थी।

कंपनियों ने रोकी कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति, हालात बिगड़ने की आशंका

लुधियाना अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान सहित दर्जनों खाड़ी देशों पर किए जा रहे मिसाइल हमलों के बाद अब देश भर में पेट्रोल डीजल और एलपीजी गैस का संकट मंडराने लगा है मौजूदा हालात कुछ यूं बन चुके हैं कि देश की तीनों प्रमुख गैस कंपनियों द्वारा कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई बंद कर दी गई है जिसके कारण आने वाले दिनों में हालत बिगड़ने की संभावना बढ़ने लगी है l केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय सहित गैस कंपनियो के द्वारा जहां घरेलू उपभोक्ताओं को रसोई गैस सिलेंडर की सप्लाई देने के लिए कई तरह के नियम और शर्तें लागू की गई है वहीं 5,19 और 425 किलो ग्राम वाले जंबो कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई बंद होने के कारण व्यापारिक संस्थानों सहित औद्योगिक घरानों में भी संकट गहराने के आसार बन गए हैं l बताया जा रहा है कि गैस कंपनियों के प्लांट्स पर कमर्शियल गैस सिलेंडर का कोटा भरने के लिए गाड़ियों की बड़ी लाइन लगी हुई है  जबकि कंपनियों द्वारा डीलरों को कोर जवाब देकर सप्लाई देने से हाथ खड़े कर दिए गए हैं जिसके चलते सिस्टम पूरी तरह से तहस-नहस  पड़ने का संकट तेजी के साथ बढ़ाने की संभावनाएं बनती जा रही है जो कि आने वाले दिनों में आम लोगों के साथ ही बड़े औद्योगिक घरानों की आर्थिक और व्यापारिक दशा पर बड़ी मार मरेगा और वही बेरोजगारी बढ़ने से देशभर में एक बार फिर से कोरोना महामारी जैसे गंभीर हालत पैदा कर सकता है l  

पंजाब में दिवालिया होने पर 41 हजार से अधिक GST रजिस्ट्रेशन रद्द

चंडीगढ़. पंजाब में पिछले करीब साढ़े तीन वर्षों के दौरान बड़ी संख्या में जीएसटी रजिस्ट्रेशन रद किए गए हैं। विधानसभा में सरकार ने जानकारी दी कि अप्रैल 2022 से दिसंबर 2025 तक राज्य में कुल 41,290 जीएसटी रजिस्ट्रेशन रद किए गए, जिनमें व्यापार बंद होने, असफलता या दिवालिया होने जैसे कारण भी शामिल हैं। यह जानकारी वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने विधानसभा में विधायक डॉ. सुखविंदर कुमार सखी की ओर से पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में दी। विधायक ने पूछा था कि अप्रैल 2022 से दिसंबर 2025 तक पंजाब में कितनी जीएसटी रजिस्ट्रेशन विशेष तौर पर व्यापार असफल होने, व्यापार बंद होने या दिवालिया होने के कारण रद की गई हैं। वित्त मंत्री ने जवाब में बताया कि इस अवधि के दौरान करदाताओं द्वारा दी गई आवेदनों के आधार पर कुल 41,290 जीएसटी रजिस्ट्रेशन रद की गई हैं। इन रद की गई रजिस्ट्रेशन में व्यापार असफल होने, व्यापार बंद होने या दिवालिया होने के कारण भी शामिल हैं। विधायक के एक अन्य सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया कि टैक्स पालन से जुड़े मुद्दों या नोटिस के कारण अधिकारियों ने 36,017 जीएसटी रजिस्ट्रेशन रद की गई हैं। डॉ. सुखविंदर कुमार सखी ने यह भी पूछा था कि प्रभावित छोटी पार्टियों या कारोबारियों के लिए कोई भलाई योजना, बीमा या पेंशन योजना है या नहीं। इस पर वित्त मंत्री ने बताया कि आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना पंजाब राज्य के लाभार्थियों के लिए एक प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना है। मौजूदा प्रावधानों के अनुसार जिन लाभार्थियों का जीएसटी एक्ट 2017 के तहत सालाना टर्नओवर 2 करोड़ रुपये तक है और जिन्होंने संबंधित वित्तीय वर्ष के सभी रिटर्न दाखिल किए हैं, वे इस योजना के तहत प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का नकद रहित स्वास्थ्य बीमा कवर पाने के हकदार हैं। इस योजना के तहत सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कैशलेस और पेपरलेस इलाज उपलब्ध कराया जाता है। विधानसभा में यह भी जानकारी दी गई कि अप्रैल 2022 से दिसंबर 2025 तक कुल 1963 इंस्पेक्शनों के दौरान 157,11,34,388 रुपये की रिकवरी की गई है। इसके अलावा जीएसटी एक्ट के तहत टैक्स दाताओं के लिए राहत फंड जैसा कोई अलग फंड नहीं बनाया गया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि जीएसटी एक्ट के तहत इस तरह का कोई फंड फिलहाल अस्तित्व में नहीं है।

पंजाब में ट्रैफिक नियमों पर बड़ा एक्शन, इन गाड़ियों के कटेंगे मोटे चालान

लुधियाना पंजाब में अब फर्जी वी.आई.पी. गाड़ियों वाले सावधान हो जाएं। दरअसल, अब अगर गाड़ियों पर अवैध तौर पर लाल-नीली चमकदार लाइट लगाई तो ट्रैफिक पुलिस द्वारा चालान किया जाएगा। इन लाइटों का प्रयोग सिर्फ पुलिस, एम्बुलैंस या फायर ब्रिगेड की गाड़ियां ही कर सकती हैं। अपने वाहनों पर ऐसी चमकदार लाइट लगाकर फर्जी वी.आई.पी. बनने वाले लोग पुलिस की पकड़ में आएंगे बता दें कि जिला लुधियाना के कई इलाकों में महंगी गाड़ियों और एस.यू.वी. पर लाल-नीली बत्तियां लगाकर लोग खुद को वी.आई.पी. दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे आम जनता में भ्रम की स्थिति पैदा होती है और ट्रैफिक व्यवस्था भी प्रभावित होती है। मोटर व्हीकल नियमों के मुताबिक लाल और नीली फ्लैशर लाइट का उपयोग केवल आपातकालीन सेवाओं और अधिकृत सरकारी अधिकारियों के वाहनों के लिए ही निर्धारित है। किसी भी निजी वाहन पर इन लाइटों का इस्तेमाल पूरी तरह अवैध माना जाता है। इन वाहनों को है अनुमति पुलिस वाहन, एम्बुलैंस, फायर ब्रिगेड, कुछ अधिकृत आपातकालीन सरकारी वाहन पहले किया जागरूक, अब शुरू किए चालान : ए.सी.पी. गुरदेव सिंह ए.सी.पी. ट्रैफिक गुरदेव सिंह का कहना है कि लाल नीली फ्लैशर लाइटों का प्रयोग सिर्फ पुलिस, एम्बुलैंस या फायर ब्रिगेड की गाड़ियां ही कर सकती हैं। अगर कोई अवैध तौर पर इन लाइटों का प्रयोग करता है तो धारा-177 के तहत पहली बार जुर्म में 500 रुपए तथा इसके बाद 1500 रुपए का जुर्माना किया जा सकता है, जबकि अगर धारा 190(2) में चालान किया जाए तो पहली बार में 5000 रुपए तथा दूसरी बार नियम तोड़ने पर 10,000 रुपए का जुर्माना नियत किया गया है। ट्रैफिक पुलिस द्वारा पहले लोगों को जागरूक किया गया है। इसके बावजूद न सुधरने वाले लोगों के चालान शुरू कर दिए गए हैं।