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पलामू में बड़ी कार्रवाई, अयोग्य पाए गए लाभुकों को राशन सूची से बाहर किया गया

 पलामू झारखंड के पलामू जिले में 41 हजार 681 लाभुकों को अयोग्य पाए जाने पर राशन कार्ड से नाम डिलिट कर दिया गया, जबकि 12 हजार 689 लाभुक ऐसे पाए गए जिनका आधार कार्ड संदेहास्पद पाया गया. पिछले कई वर्षों से राशन का लाभ उठा रहे थे. बताया जाता है कि इसके अलावा, दूसरे जगहों से भी राशन का उठाव किया जा रहा था. विभागीय सूत्रों के अनुसार राशन कार्ड मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से 1985 लोगों को चिन्हित कर नाम हटाया गया है. 23 हजार 544 वैसे लाभुकों का नाम हटाया गया है, जिनके नाम से राशन कार्ड बन चुका था, लेकिन राशन का उठाव नहीं कर रहे थे. विभागीय कर्मियों ने बताया कि तीन हजार 283 लाभुक ऐसे थे, जो डुप्लीकेट के रूप में पहचान किए गए है. अवैध पाए जाने पर उन सभी लाभुकों का नाम हटाया गया. विभाग द्वारा 41 हजार 681 लोगों को चिन्हित कर सूची से नाम हटाया. केंद्र सरकार के द्वारा चिन्हित कर नाम जिला को भेजा गया था. जिसके बाद वैसे लोगों को सूची से राशन कार्ड से नाम हटाया गया. इनकम टैक्स, जीएसटी व फोर व्हीलर वाले उठा रहे हैं राशन कार्ड का लाभ दूसरे फेज में पलामू जिले में दो लाख 45 हजार 931 लोगों को चिन्हित किया गया है, जिनकी जांच की जा रही है. इसमें दो लाख 37 हजार 528 वैसे लोग हैं. जिनके पास पांच एकड़ से ज्यादा जमीन है. 6782 लोग ऐसे हैं जो इनकम टैक्स भरते हैं. 96 लोग ऐसे हैं जो जीएसटी भरते हैं. 1525 लोग ऐसे है जिनके नाम से फोर व्हीलर गाड़ी है. इन सभी को चिन्हित कर आपूर्ति विभाग को भेजा गया है. आपूर्ति विभाग के द्वारा जिले के सभी मार्केटिंग ऑफिसर को इसकी सूची भेज दी गई है. मार्केटिंग ऑफिसर के द्वारा सभी डीलरों को इसका डिटेल भेज दिया गया है. डीलर के द्वारा इसकी जांच कर इसकी रिपोर्ट मार्केटिंग ऑफिसर को देंगे. मार्केटिंग ऑफिसर के द्वारा जिले को प्रतिवेदन भेजा जाएगा. जिला स्तर से उनके नाम को राशन कार्ड से हटा दिया जाएगा. उनके स्थान पर जरूरतमंदों के नाम को जोड़ा जाएगा. जिले में करीब साढ़े चार लाख राशन कार्डधारी है. जिसमें 18 लाख 28 हजार 926 सदस्य हैं. राज्य सरकार के निर्देशानुसार 18 लाख 28 हजार 926 सदस्य से अधिक नहीं करना है. जिनका नाम हटेगा उसके स्थान पर नए सदस्यों का नाम जोड़ा जाएगा. दूसरे पेज में 245931 सदस्य जांच के घेरे में हुसैनाबाद में 19803, हैदरनगर में 6488 , मोहम्मदगंज 3647, हरिहरगंज 4885, पीपरा 3408, पाटन 15791, विश्रामपुर में 6474 , चैनपुर में 36652, छतरपुर में 18785, नौडीहा बाजार 9669, पड़वा में 4417, पांकी 38775 , तरहसी में 16166 , मनातू में 4868, नावाबाजार में 5877, पांडू में 10280 , सतबरवा में 7801, लेस्लीगंज 12098, मेदिनीनगर सदर में 10991, उंटारी रोड प्रखंड में 4223, हुसैनाबाद नगर पंचायत में 751, विश्रामपुर नगर पंचायत में 1931 और मेदिनीनगर नगर निगम में 2179 लोगों को नाम हटाने के लिए चिन्हित किया गया है.

मकान सूचीकरण कार्य को लेकर सरायकेला में फील्ड ट्रेनर्स को प्रशिक्षण

 सरायकेला झारखंड के सरायकेला-खरसावां उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना पदाधिकारी, नीतिश कुमार सिंह के निर्देशानुसार भारत की जनगणना 2027 के प्रथम चरण अंतर्गत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना (HLO) कार्य के सफल लागू करने के लिए जिला स्तर पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हो गया. प्रखंड कार्यालय सभागार, सरायकेला में आयोजित प्रशिक्षण के समापन में मुख्य अतिथि के रूप में अपर उपायुक्त जयवर्धन कुमार मौजूद थे. तीन दिवसीय प्रशिक्षण में अधिकारियों और फील्ड ट्रेनर्स की सहभागिता प्रशिक्षण 8 अप्रैल से 10 अप्रैल तक आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न प्रखंडों के प्रखंड विकास पदाधिकारी, नगर परिषद और नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी-सह-चार्ज जनगणना पदाधिकारी और नामित फील्ड ट्रेनर्स ने सहभागिता की. प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर एम.डी. तासिकुर रहमान और अविनाश ठाकुर द्वारा प्रदान किया गया. तकनीकी जानकारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (HLO) से संबंधित तकनीकी और व्यवहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई तथा उनकी शंकाओं का समाधान किया गया. प्रशिक्षण के क्रम में सभी प्रशिक्षार्थियों को नगरीय नक्शा निर्माण हेतु व्यावहारिक प्रशिक्षण सरायकेला प्रखंड अंतर्गत अवस्थित मानिक बाजार क्षेत्र में कराया गया, जिससे उन्हें क्षेत्रीय स्तर पर कार्य निष्पादन की वास्तविक समझ प्राप्त हो सके. निष्पक्ष और समयबद्ध जनगणना कार्य के निर्देश प्रशिक्षण उपरांत सभी फील्ड ट्रेनर्स को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने प्रखंड और नगर क्षेत्रों में प्रगणक एवं पर्यवेक्षकों को निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान करना सुनिश्चित करेंगे, जिससे जनगणना कार्य निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध रूप से संपन्न हो सके. अपर उपायुक्त जयवर्धन कुमार ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विभागीय दिशा-निर्देशों के आलोक में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (HLO) कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया जाना है. उन्होंने क्षेत्र में कार्य करते समय धैर्य, अनुशासन एवं आमजनों के प्रति सहयोगात्मक व्यवहार बनाए रखते हुए दायित्वों का निर्वहन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया,साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि जनगणना कार्य के दौरान आंकड़ों की शुद्धता एवं गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा जाए और भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा निर्गत दिशा-निर्देशों का पूरी तरह अनुपालन सुनिश्चित किया जाए. प्रशिक्षण कार्यशाला में अपर जिला जनगणना पदाधिकारी कमलेश कुमार दास सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे.

सिदो-कान्हू जयंती पर सीएम हेमंत सोरेन का संदेश, संघर्ष और साहस से लें प्रेरणा

 रांची झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने आज हूल विद्रोह के महानायक वीर शहीद सिदो-कान्हू की जयंती के अवसर पर मोरहाबादी स्थित सिदो-कान्हू उद्यान पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा – झारखंड वीरों की भूमि है इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मीडिया के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड वीरों की भूमि है. झारखंड प्रदेश भारतवर्ष का एक ऐसा क्षेत्र है, जहां अनेक वीर सपूतों ने जन्म लिया है. उन्होंने कहा कि इस राज्य के आदिवासी तथा मूलवासियों ने जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा एवं अपने हक-अधिकार की लड़ाई तब से लड़ी, जब देश के लोगों ने आजादी का सपना भी नहीं देखा था . सिदो-कान्हू के संघर्ष से मिलती है प्रेरणा मुख्यमंत्री ने कहा कि वीर शहीद सिदो-कान्हू ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अन्याय, शोषण और अत्याचार के विरुद्ध ऐतिहासिक बिगुल फूंका, जो हम सबों को संघर्ष, साहस और स्वाभिमान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है. झारखंड के वीर सपूतों ने अलग-अलग समय काल में अपने दायित्वों एवं राज्य के प्रति स्वयं को समर्पित किया है . सिदो-कान्हू जयंती का ऐतिहासिक महत्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वीर शहीद सिदो-कान्हू जयंती का यह शुभ दिन भारत के इतिहास के पन्नों में अमिट रूप से दर्ज है. आज के दिन हम सभी लोग वीर शहीद सिदो-कान्हू के संघर्ष, अदम्य साहस और उनके आदर्शों को याद करते हैं. इन महान विभूतियों को उनकी जयंती पर पूरे आदर और सम्मान के साथ अलग-अलग जगहों पर स्थापित उनकी प्रतिमा, तस्वीर, जन्मस्थली तथा शहादत स्थल पर लाखों की संख्या में लोग भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्हें शत-शत नमन करते हैं. वीर सपूतों पर पूरे देश को गर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आज के दिन देश के आदिवासी समुदाय सहित पूरे देशवासी गर्व महसूस करते हैं कि ऐसे वीर सपूतों ने इस धरती पर जन्म लिया और यहां के लोगों के साथ-साथ संपूर्ण व्यवस्था को एक नई और स्थायी दिशा देने का काम किया.

बिहार के शिवहर में सरकारी अस्पताल की लापरवाही पर सवाल

 शिवहर बिहार के शिवहर स्वास्थ्य विभाग की एक शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। सरकारी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे एक दारोगा का ऐसा इलाज किया गया कि तस्वीरें वायरल हो गईं और इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गई। अस्पताल के डॉक्टर ने कार्टन के गत्ते और पुराने ड्रीप पाइप से पैर को बांध कर ऐसा जुगाड़ु इलाज किया जो शिवहर डीएम को भी खटक गया। डीएम ने इसका संज्ञान ले लिया है। उन्होंने मामले की पूरी रिपोर्ट तलब किया है। कहा है कि जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह तस्वीर बिहार के शिवहर सदर अस्पताल की है जो दुनिया भर में चर्चा में है। तस्वीर इस बात की तस्दीक करता है कि सरकार के दावों के बिपरीत बिार का स्वास्थ्य महकमा खुद ही स्ट्रेचर पर है। अब आगे की बात करते हैं। जिले के श्यामपुर भटहा थाना में तैनात दरोगा श्यामलाल सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके सहयोगी तत्काल उन्हें सरकारी अस्पताल लाए। पता चला कि हादसे में उनका पैर बुरी तरह टूट गया था। लेकिन शिवहर सदर अस्पताल में जिस प्रकार से उनका प्राथमिक उपचार किया गया उसे सभी खेदजनक ही नहीं बता रहे बल्कि स्वस्थ भारत मिशन पर ही सवाल उठा रहे हैं। अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मियों ने दारोगा के टूटे पैर के जख्मों पर मरहम लगाने के बाद उसे पुराने कार्टन के गत्ते में मरीजों को पानी चढ़ाने वाले पाइप(ड्रीप पाइप) से बांध दिया। किसी ने इसका वीडियो और फोटो बना लिया जो इंटरनेट मीडिया की सनसनी बना हुआ है। इस घटना से बिहार की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी फ्रैक्चर के मामले में उचित प्लास्टर या मेडिकल सपोर्ट का इस्तेमाल जरूरी होता है ताकि टूटी हुई हड्डी स्थिर रहे। इस प्रकार से गैर-मानक तरीकों से मरीज को गंभीर नुकसान हो सकता है। जब मामला सिविल सर्जन के पास पहुंचा तो अपने डॉक्टर और कर्मियों के बचाव में उतर गए। कहा कि मरीज के पैर में मल्टिपल फ्रैक्चर था। इसलिए प्लास्टर करना ठीक नहीं था। पैर को स्थिर और सीधा रखने के लिए उसे तत्काल यही उपाय किया गया। ऐक्शन में डीएम यह सनसनीखेज मामला सामने आते ही जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट प्रतिभा रानी मामले में संज्ञान लिया है। उन्होंने सिविल सर्जन से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। डीएम ने कहा कि इसमें किसी स्तर पर लापरवाही साबित होती है तो कार्रवाई की जाएगी। प्रारंभिक जांच में बताया गया है कि टूटी हड्डी को स्थिर रखने के लिए कार्टन से बांधा गया। इसमें एसओपी और गाइडलाइन का पालन किया गया या नहीं इसकी जांच की जा रही है।

आस्था कंपनी का बड़ा फ्रॉड, निवेशकों का पैसा लेकर फरार

  गोपालगंज बिहार के गोपालगंज जिले से धोखाधड़ी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां 'आस्था' नामक एक निजी कंपनी के संचालकों ने निवेश को दोगुना करने का लालच देकर करीब 256 लोगों से 80 करोड़ रुपये की ठगी की और रातों-रात चंपत हो गए। इस बड़ी धोखाधड़ी के बाद पीड़ित निवेशकों में हड़कंप मचा हुआ है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में पीड़ितों ने एसपी विनय तिवारी से मुलाकात कर न्याय और आरोपियों की गिरफ्तारी की गुहार लगाई। 20 महीने में पैसे डबल करने का दिया था झांसा मिली जानकारी के अनुसार, इस ठगी का खेल साल 2023 में शुरू हुआ था। 'आस्था' कंपनी के कर्मचारियों और प्रबंधकों ने शहर के एक प्रतिष्ठित होटल में भव्य बैठक आयोजित की थी। इस बैठक में स्थानीय लोगों को निवेश की लुभावनी योजनाओं की जानकारी दी गई। कंपनी ने दावा किया था कि जो भी व्यक्ति उनके पास पैसा जमा करेगा, उसे मात्र 20 महीने की अवधि में दोगुना रिटर्न दिया जाएगा। ज्यादा मुनाफे के लालच में आकर मध्यम वर्गीय परिवारों, छोटे व्यापारियों और ग्रामीणों ने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी इस कंपनी में निवेश कर दी। रातों-रात दफ्तर बंद कर फरार हुए कर्मचारी ठगी का खुलासा तब हुआ जब करीब एक सप्ताह पहले कंपनी के गोपालगंज और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित कार्यालयों पर अचानक ताला लटक गया। पीड़ित जब अपने निवेश की स्थिति जानने दफ्तर पहुंचे, तो वहां सन्नाटा पसरा था। मैनेजर और कर्मचारी सभी अपने मोबाइल फोन बंद कर फरार हो चुके थे। काफी तलाश करने के बाद जब उनका कोई सुराग नहीं मिला, तो पीड़ितों को एहसास हुआ कि वे एक सोची-समझी साजिश का शिकार हो चुके हैं। एसपी से मिलकर दर्ज कराई एफआईआर दर्ज शुक्रवार को एसपी विनय तिवारी से मिलने पहुंचे पीड़ितों में सुदामा कुशवाहा, हरेंद्र राय, राजन कुमार, सागर गुप्ता, दिलीप शर्मा, आलोक कुमार बरनवाल और अजय कुमार सहित कई लोग शामिल थे। पीड़ितों ने बताया कि करीब 256 लोगों का पैसा फंसा हुआ है।नगर थानाध्यक्ष प्रवीण कुमार प्रभाकर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बताया कि ठगी के इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस की एक विशेष टीम गठित की जा रही है जो कंपनी के बैंक खातों और फरार कर्मचारियों के लोकेशन की जांच करेगी। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और निवेश की गई राशि की बरामदगी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

रांची को मिली विकास की रफ्तार: टनल-ओवरब्रिज प्रोजेक्ट शुरू, हजारों करोड़ से सड़क नेटवर्क मजबूत होगा

रांची/ओरमांझी. झारखंड की राजधानी रांची की विकास यात्रा में शुक्रवार को एक नया अध्याय जुड़ गया, जब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से 303 करोड़ रुपये की दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का शिलान्यास किया, जबकि रांची में आयोजित समारोह में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने रिमोट दबाकर योजनाओं की आधारशिला रखी। इन परियोजनाओं के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग-33 पर रामपुर चौक (रांची–जमशेदपुर मार्ग) के पास भूमिगत टनल और इरबा स्थित विकास चौक (रांची–हजारीबाग मार्ग) पर आधुनिक ओवरब्रिज का निर्माण किया जाएगा। 303 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली ये परियोजनाएं अगले दो वर्षों में पूरी होंगी। सेठ ने कहा कि इनसे रांची और आसपास के क्षेत्रों में यातायात सुगम होगा, जाम की समस्या कम होगी और सड़क हादसों पर भी अंकुश लगेगा। 15 दिनों के अंदर मिली मंजूरी: संजय सेठ संजय सेठ ने बताया कि उन्होंने बताया कि रामपुर चौक और विकास चौक ऐसे स्थान हैं, जहां अक्सर जाम और दुर्घटनाएं होती थीं। इस समस्या की जानकारी देने के मात्र 15 दिनों के भीतर नितिन गडकरी ने डीपीआर तैयार कराकर परियोजना को मंजूरी दे दी। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री गडकरी के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम के दौरान सेठ ने झारखंड में चल रही और प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि वर्तमान में राज्य में लगभग 45 हजार करोड़ रुपये की लागत से 1500 किमी से अधिक सड़क परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें गोला–ओरमांझी सड़क परियोजना लगभग 90 प्रतिशत पूरी हो चुकी है, ओरमांझी फ्लाईओवर को स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि घोरालिंग, फुलदुंगरी और बहरागोड़ा में तीन अंडरपास बनाए जा रहे हैं। चिल्गु नदी पर पुल का निर्माण 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। वहीं, इटकी और चांडिल में रेल ओवरब्रिज का निर्माण प्रगति पर है। इसके अलावा चरही और चुटुपालू घाटी में सड़क चौड़ीकरण जल्द शुरू होगा और रांची–महुलिया तथा कोडरमा–मेघातरी सड़क परियोजनाओं पर भी काम जारी है। नई सड़क योजनाओं पर जल्द शुरू होगा काम उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में झारखंड को 17 हजार करोड़ रुपये की नई सड़क परियोजनाएं मिलेंगी, जिनमें 450 किमी सड़क निर्माण शामिल है। वाराणसी–कोलकाता एक्सप्रेसवे का महत्वपूर्ण हिस्सा भी इसमें शामिल होगा, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और व्यापार को नई दिशा मिलेगी। इसके अलावा रांची में 6000 करोड़ रुपये की लागत से 195 किमी लंबी आउटर रिंग रोड बनाने की योजना है, जिसकी डीपीआर तैयार हो चुकी है। सेठ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में देश में तेजी से सड़क निर्माण हो रहा है। वर्तमान में देश में प्रतिदिन लगभग 34 किमी और सालाना 15 हजार किमी सड़कें बनाई जा रही हैं, जो भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार कर रहा है। कार्यक्रम में टोल प्लाजा से जुड़ी समस्याएं भी उठीं। खिजरी विधायक राजेश कच्छप ने बुंडू, ओरमांझी और तरूप टोल प्लाजा पर नियमों के विपरीत वसूली का मुद्दा उठाया। इस पर संजय सेठ ने एनएचएआई अधिकारियों को निर्देश दिया कि 60 किमी के नियम का उल्लंघन होने पर तुरंत टोल प्लाजा को हटाया जाए। साथ ही उन्होंने ओरमांझी शास्त्री चौक पर जाम और दुर्घटनाओं को देखते हुए ओवरब्रिज निर्माण की भी जानकारी दी। विधायक ने जताई नाराजगी विधायक कच्छप ने मंच से यह भी कहा कि सरकारी कार्यक्रमों को राजनीति से दूर रखना चाहिए और सभी जनप्रतिनिधि चुनाव के बाद पूरे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कुछ सड़कों के शिलान्यास के बाद निर्माण कार्य शुरू नहीं होने पर भी नाराजगी जताई। वहीं राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने कहा कि बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से झारखंड का समग्र विकास होगा और पलायन व मानव तस्करी पर भी रोक लगेगी। मेयर रोशनी खलखो ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से रांची में आवागमन और अधिक सुगम होगा।

एसएसबी और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में नक्सली प्रदीप यादव पकड़ा गया

डुमरिया करीब डेढ़ दशक से फरार चल रहे कुख्यात नक्सली प्रदीप यादव को आखिरकार सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार कर लिया। शुक्रवार को खुफिया सूचना के आधार पर एसएसबी और डुमरिया पुलिस की संयुक्त टीम ने सीमावर्ती रबदी गांव में छापेमारी कर उसे धर दबोचा। पुलिस इस गिरफ्तारी को बड़ी सफलता मान रही है। प्रदीप यादव मूल रूप से झारखंड का निवासी है लेकिन बिहार और कई पड़ोस के राज्यों में वह अपनी गतिविधियों को अंजाम देता था। वह अंधाधुंध फायरिंग में माहिर है। पुलिस पर हमले में भी वह एक्सपर्ट है। प्रदीप यादव की गिरफ्तारी के लिए एसएसबी की 29वीं वाहिनी के कार्यवाहक कमांडेंट रविशंकर कुमार और ‘सी’ समवाय डुमरिया के निरीक्षक मंतोष कुमार के नेतृत्व में विशेष अभियान चलाया गया। टीम ने सटीक घेराबंदी कर लंबे समय से फरार आरोपी को पकड़ने में सफलता हासिल की। गिरफ्तारी के बाद कड़ी सुरक्षा में उसे मुख्यालय लाया गया। गिरफ्तार नक्सली से पूछताछ की जा रही है। पुलिस पर की थी अंधाधुंध फायरिंग प्रदीप यादव झारखंड के पलामू जिले के नौडीहा बाजार थाना क्षेत्र के कोवल गांव का निवासी है लेकिन बिहार समेत आस पास के राज्यों में नक्सल गतिविधियों को ऑपरेट करता है। वह वर्ष 2012 में पुलिस और सीआरपीएफ की सर्चिंग पार्टी पर हुए जानलेवा हमले में शामिल था। इसके अलावा 24 जनवरी 2012 को बागपुर के पहाड़ी इलाके में हथियार लूटने की साजिश के तहत अपने साथियों के साथ अंधाधुंध फायरिंग की थी, जिसमें एक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गया था। हालांकि, हथियार लूटने में उसे कामयाबी नहीं मिली। इस मामले में डुमरिया थाना में आर्म्स एक्ट और सीएलए के तहत प्राथमिकी दर्ज है। वर्षों तक फरारी के दौरान वह लगातार ठिकाना बदलता रहा और पुलिस को चकमा देता रहा। फिलहाल गिरफ्तारी के बाद उसे डुमरिया थाना को सौंप दिया गया है, जहां आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।पुलिस उसके पूरे दस्ते का सफाया करने की कार्रवाई में जुट गई है। केंद्र सरकार बिहार, झारखंड समेत अन्य राज्यों से नक्सल समस्या के समाधान के लिए कार्रवाई कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कहते हैं कि जल्द ही देश को नक्सल मुक्त कर दिया जाएगा। पॉइंटर ● एसएसबी और डुमरिया पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मिली सफलता ● 2012 में सीआरपीएफ-पुलिस पर हमले और फायरिंग में रहा था शामिल ● लंबे समय से ठिकाना बदलकर पुलिस को दे रहा था चकमा

नीतीश कुमार का राज्यसभा में प्रवेश, नेताओं ने दी बधाई

 पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली। देश के उच्च सदन के सदस्य बनने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। कहा,नीतीश जी के लंबे राजनीतिक अनुभव से संसद की गरिमा और बढ़ेगी। भाजपा और जदयू के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने एक संक्षिप्त समारोह में नीतीश कुमार को शपथ दिलाई। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा है कि नीतीश कुमार जी देश के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं। सुशासन को लेकर उनकी प्रतिबद्धता की हर तरफ सराहना हुई है। उन्होंने बिहार के विकास में अमिट योगदान दिया है। उन्हें एक बार फिर संसद में देखना बहुत सुखद होगा। पीएम ने आगे कहा है कि सांसद और केंद्रीय मंत्री के रूप में भी नीतीश कुमार ने कई वर्षों तक अपनी सेवाएं दी हैं। बिहार को नीतीश कुमार ने जंगलराज से मुक्त कराया इधर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा है कि राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने पर नीतीश कुमार जी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। उन्होंने कहा है कि नीतीश कुमार ने सुशासन और विकास के विजन से बिहार को जंगलराज से मुक्त कर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने का अभूतपूर्व कार्य किया है। अमित शाह ने कहा कि केंद्र में मंत्री से लेकर बिहार में लंबे समय तक सीएम तक, सार्वजनिक जीवन का उनका लंबा अनुभव अब संसद में नीतियां बनाने और विकसित भारत की निर्माण यात्रा को गति देने में अहम सिद्ध होने वाला है। नीतीश कुमार का संसदीय कार्यकाल और भी उपलब्धियों से भरा हो, यह कामना करता हूं। बधाइयों का तांता लगा बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने पर नीतीश कुमार को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार में सुशासन, विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किया। न्याय के साथ विकास के मंत्र के साथ बिहार ने प्रगति और समावेशी विकास का नया अध्याय लिखा है। उपमुख्यमंत्री ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में सुदृढ़ आधारभूत संरचना, बेहतर शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था, महिलाओं के सशक्तीकरण की प्रभावी पहल और मजबूत कानून-व्यवस्था ने राज्य को नई पहचान दी है। 2005 से पहले अदालत ने भी जिस बिहार को जंगलराज का उपमा दिया था, वहां नीतीश जी ने सुशासन स्थापित किया। आधी आबादी को सम्मान देने के लिए पंचायत और निकाय चुनाव में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया गया, जो पूरे देश के लिए अनुकरणीय उदाहरण बना। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार देश के उन विरले राजनीतिज्ञों में शामिल हो गए हैं, जिन्हें लोकतांत्रिक व्यवस्था के सभी सदनों का सदस्य रहने का गौरव प्राप्त है। स्पष्ट दृष्टि, दृढ़ इच्छाशक्ति और जनता के प्रति अथाह समर्पण के साथ नीतीश कुमार ने पिछले दो दशकों में बिहार को विकास और सुशासन की नई दिशा दी है। यही कारण है कि बिहार की जनता ने उन्हें बार-बार अपना विश्वास दिया शपथ लेने के बाद संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए नीतीश कुमार ने खुशी का इजहार किया। उन्होंने कहा, पहले तो हम यहीं थे। शपथग्रहण समारोह में जेपी नड्डा, निर्मला सीतारमण, राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, रामनाथ ठाकुर अर्जुन राम मेघवाल, संजय कुमार झा, जयराम रमेश, सम्राट चौधरी, विजय चौधरी, अशोक चौधरी, राजीव प्रताप रूड़ी, संजय जायसवाल, कौशलेन्द्र कुमार, चन्देश्वर चन्द्रवंशी मौजूद थे।

न्याय प्रक्रिया हुई आसान: गवाह अब स्पेशल सेंटर से ही दर्ज कर सकेंगे अपने बयान

भागलपुर. गवाहों की सुरक्षा को लेकर सरकार की नई कार्य योजना जल्द ही साकार होने जा रही है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर संवेदनशील गवाही केंद्र (Vulnerable Witness Deposition Center) का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए आवश्यक भूमि का चयन कर लिया गया है। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी के नेतृत्व में अधिकारियों की एक टीम ने 9 अप्रैल 2026 को जिला विधिज्ञ संघ परिसर के निकट इस सेंटर के लिए भूमि चिह्नित की थी। इस सेंटर के निर्माण से गवाहों को न केवल सुरक्षित माहौल मिलेगा, बल्कि वे वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही भी दे सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उच्च न्यायालय को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिसके तहत सभी कचहरी परिसरों में ऐसे सेंटर का निर्माण किया जाएगा। इन सेंटरों का उद्देश्य गवाहों की पहचान को गुप्त रखते हुए उन्हें पूरी सुरक्षा प्रदान करना है। गवाहों को अब अदालत में जाने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित होगी। गवाहों को बिना डर के गवाही देने का अवसर इस सेंटर में विशेष रूप से बच्चों, महिलाओं, यौन उत्पीड़न पीड़िताओं, दिव्यांगों और धमकी के शिकार गवाहों के लिए गवाही देने की व्यवस्था की जाएगी। यह सेंटर उन्हें सुरक्षित और भयमुक्त माहौल में बयान दर्ज कराने की सुविधा प्रदान करेगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर देशभर में ऐसे केंद्रों का निर्माण किया जा रहा है। वल्नरेबल विटनेस डिपोजिशन सेंटर की विशेषताएं वल्नरेबल विटनेस डिपोजिशन सेंटर एक विशेष प्रकार का कोर्ट रूम है, जो सामान्य अदालतों से भिन्न है। इसे 'कमजोर या संवेदनशील गवाहों' के लिए डिजाइन किया गया है, जहां गवाहों का आरोपितों से सामना नहीं होगा। गवाह एक अलग कमरे में बैठता है, जबकि न्यायाधीश, अधिवक्ता और आरोपित दूसरे कमरे में स्क्रीन पर गवाही की प्रक्रिया देखते हैं। इस सेंटर में चाइल्ड-फ्रेंडली माहौल प्रदान किया जाएगा, जिसमें रंगीन दीवारें, खिलौने, किताबें और आरामदायक फर्नीचर होंगे, ताकि बच्चे सहज महसूस करें। गवाहों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी, और उनके आने-जाने का रास्ता भी अलग होगा। गवाही के दौरान गवाह के साथ मनोवैज्ञानिक, काउंसलर या परिवार का सदस्य रह सकता है। एक बार में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी, जिससे पीड़ित को बार-बार कोर्ट में उपस्थित होकर घटना को दोहराने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। पॉक्सो और महिला अपराध के मामलों में तेजी भागलपुर रेंज में पॉक्सो एक्ट, दुष्कर्म और घरेलू हिंसा के सैकड़ों मामले लंबित हैं। अक्सर नाबालिग पीड़ित कोर्ट में आरोपित को देखकर सहम जाते हैं और अपने बयान से पलट जाते हैं, जिससे दोषसिद्धि दर में कमी आती है।

पान महासम्मेलन से विपक्षी एकजुटता का शक्ति प्रदर्शन

पटना 12 अप्रैल को कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी का पटना दौरा इस हलचल को और तेज करने वाला है. नीतीश कुमार के एमएलसी पद से इस्तीफे के बाद बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज है और इसी बीच राहुल गांधी का आना महज संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी सियासी बिसात का हिस्सा माना जा रहा है. पान महासम्मेलन के मंच से सजेगी चुनावी बिसात इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के अध्यक्ष आईपी गुप्ता के अनुसार, राहुल गांधी 12 अप्रैल को पटना के ऐतिहासिक बापू सभागार में आयोजित होने वाले “पान महासम्मेलन” का उद्घाटन करेंगे. कहने को तो यह पान व्यवसाय से जुड़े समाज का एक सम्मेलन है, लेकिन जिस तरह से इसमें बड़े सियासी दिग्गजों का जमावड़ा होने वाला है, उसने साफ कर दिया है कि असली मकसद 2024 के चुनावों से पहले विपक्षी एकजुटता की धार को और तेज करना है. पटना की सड़कों पर राहुल गांधी की मौजूदगी उस वक्त होगी जब सत्ता पक्ष (एनडीए) नए मुख्यमंत्री के नाम पर मंथन कर रहा होगा. तेजस्वी और दीपंकर के साथ ‘पावर शो’ की तैयारी इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी हाईलाइट राहुल गांधी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और भाकपा (माले) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य का एक साथ मंच साझा करना होगा. नीतीश कुमार के संभावित विदाई के बाद पैदा हुए ‘पॉलिटिकल वैक्यूम’ को भरने के लिए विपक्ष इस मौके का भरपूर इस्तेमाल करना चाहता है. यह एक ऐसा मंच होगा जहां से महागठबंधन के नेता न केवल सामाजिक संदेश देंगे, बल्कि राज्य में बदलते समीकरणों के बीच अपनी मजबूती का अहसास भी कराएंगे. नीतीश की विदाई और विपक्ष की नई रणनीति बिहार में इस वक्त एनडीए के भीतर नए मुखिया को लेकर खींचतान और मंथन का दौर जारी है. ऐसे में राहुल गांधी का यह दौरा कांग्रेस और राजद के कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का काम करेगा. नीतीश कुमार के राज्यसभा की राह पकड़ने के बाद बिहार की राजनीति में जो नया समीकरण उभर रहा है, उसमें राहुल और तेजस्वी की जुगलबंदी काफी निर्णायक साबित हो सकती है. अब सबकी निगाहें 12 अप्रैल के उस संबोधन पर टिकी हैं, जो बापू सभागार से गूंजेगा और आने वाले दिनों में बिहार की सत्ता की दिशा तय करेगा.