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दिशोम गुरु शिबू सोरेन को बड़ा सम्मान: राष्ट्रपति मुर्मू ने परिवार को सौंपा पद्म भूषण

रांची झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. मंगलवार को संसद भवन में आयोजित सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन को यह सम्मान प्रदान किया. इस अवसर पर गांडेय विधायक कल्पना सोरेन, अंजनी सोरेन और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे. शिबू सोरेन को यह सम्मान आदिवासी समाज, झारखंड आंदोलन और सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे योगदान के लिए दिया गया है. नेमरा गांव से शुरू हुआ था संघर्ष का सफर शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को वर्तमान रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था. बचपन में उनका नाम शिवलाल था, लेकिन बाद में वे शिबू सोरेन के नाम से देशभर में पहचान बनाने लगे. उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा नेमरा गांव के स्कूल और बाद में गोला हाई स्कूल से प्राप्त की. उनके पिता सोबरन सोरेन शिक्षक होने के साथ गांधीवादी विचारधारा के समर्थक थे. 27 नवंबर 1957 को महाजनों द्वारा उनकी हत्या कर दी गई. जमीन कब्जे और शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के कारण हुई इस घटना ने किशोरावस्था में ही शिबू सोरेन के जीवन की दिशा बदल दी. इसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का रास्ता चुना. महाजनों के खिलाफ आंदोलन से मिली पहचान युवा अवस्था में उन्होंने आदिवासी समाज को संगठित करने का काम शुरू किया. उन्होंने संताल नवयुवक संघ और सोनोत संताल समाज का गठन किया. इसके बाद धनकटनी आंदोलन चलाकर आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी. गोला, बोकारो, जैनामोड़ और टुंडी क्षेत्र में आंदोलन को मजबूत करने के दौरान उनकी मुलाकात विनोद बिहारी महतो से हुई. बाद में पारसनाथ की पहाड़ियों और टुंडी क्षेत्र को उन्होंने अपने आंदोलन का केंद्र बनाया. टुंडी में बनाई सामाजिक व्यवस्था की नई मिसाल टुंडी और आसपास के इलाकों में शिबू सोरेन ने सामूहिक खेती, पशुपालन और रात्रि पाठशालाओं की शुरुआत कर ग्रामीण समाज को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया. उस समय क्षेत्र में उनकी एक तरह की समानांतर सामाजिक व्यवस्था भी चलती थी, जहां स्थानीय विवादों का निपटारा किया जाता था. इन्हीं प्रयासों के कारण आदिवासी और मूलवासी समाज में उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई और वे “दिशोम गुरु” के नाम से पहचाने जाने लगे. झारखंड आंदोलन को दी नई दिशा साल 1973 में शिबू सोरेन ने विनोद बिहारी महतो और एके राय के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की स्थापना की. पार्टी में विनोद बिहारी महतो अध्यक्ष और शिबू सोरेन महासचिव बने. अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन आने वाले वर्षों में व्यापक जन आंदोलन में बदल गया. आपातकाल के दौरान वर्ष 1975 में उन्हें जेल भी जाना पड़ा. 1977 में उन्होंने टुंडी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. सांसद से लेकर मुख्यमंत्री तक का सफर 1980 में वे पहली बार दुमका से लोकसभा सांसद चुने गए. इसके बाद कई बार संसद पहुंचे और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई. 1987 में निर्मल महतो की हत्या के बाद उन्होंने झामुमो की कमान संभाली और पार्टी अध्यक्ष बने. 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का गठन हुआ, लेकिन वे पहले मुख्यमंत्री नहीं बन सके. हालांकि बाद के वर्षों में उन्होंने तीन बार राज्य की कमान संभाली.     2005 में पहली बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन बहुमत साबित नहीं कर सके.     2008 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने.     2009 में तमाड़ विधानसभा उपचुनाव हारने के बाद इस्तीफा देना पड़ा.     दिसंबर 2009 में तीसरी बार मुख्यमंत्री बने.     वर्ष 2010 में उनकी सरकार गिर गई. मोदी लहर में भी बरकरार रखा जनाधार 2014 के लोकसभा चुनाव में देशभर में भाजपा और नरेंद्र मोदी की लहर के बावजूद शिबू सोरेन दुमका से सांसद चुने गए. 2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया और वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय बने रहे. 15 अप्रैल 2025 को झामुमो के महाधिवेशन में हेमंत सोरेन को पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया, जबकि शिबू सोरेन को संस्थापक संरक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई. लंबी बीमारी के बाद हुआ निधन लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे शिबू सोरेन का 4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की आयु में नई दिल्ली स्थित सर गंगा राम अस्पताल में निधन हो गया. उनके निधन से झारखंड की राजनीति और आदिवासी आंदोलन के एक युग का अंत माना गया. संघर्ष से सम्मान तक की यात्रा शिबू सोरेन का राजनीतिक जीवन केवल सत्ता तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने दशकों तक आदिवासियों, वंचितों और झारखंड की पहचान के लिए संघर्ष किया. यही कारण है कि उनके समर्थक उन्हें केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि “दिशोम गुरु” के रूप में याद करते हैं. अब मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान के साथ उनके सार्वजनिक जीवन और योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर भी औपचारिक मान्यता मिली है. नेमरा गांव के एक साधारण परिवार से निकलकर देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान तक पहुंचने की यह यात्रा भारतीय लोकतंत्र और जन आंदोलनों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज रहेगी.

परीक्षा देने वालों को बड़ी राहत: 23 और 24 जून को दौड़ेंगी 13 विशेष ट्रेनें

 पटना बिहार में पुलिस भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले लाखों अभ्यर्थियों के सफर को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए पूर्व मध्य रेलवे ने एक बड़ा फैसला लिया है। परीक्षार्थियों की भारी भीड़ और सहूलियत को ध्यान में रखते हुए दानापुर मंडल द्वारा 23 और 24 जून को कुल 13 विशेष ट्रेनों का परिचालन करने का निर्णय लिया गया है। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, इन परीक्षा स्पेशल ट्रेनों का संचालन मुख्य रूप से पटना जंक्शन, पाटलिपुत्र और दानापुर समेत मंडल के अन्य महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों से किया जाएगा। रेलवे प्रशासन की इस मुस्तैदी से दूर-दराज के परीक्षा केंद्रों पर जाने वाले छात्रों को बसों में होने वाली भारी धक्का-मुक्की और सीटों की किल्लत से बड़ी राहत मिलेगी। 23 जून को पटरी पर उतरेंगी छह विशेष ट्रेनें परीक्षा स्पेशल ट्रेनों के पहले चरण में 23 जून को कुल छह विशेष गाड़ियां चलाई जा रही हैं, जो अभ्यर्थियों को उनके परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाएंगी। टाइम टेबल के मुताबिक, पहली ट्रेन पाटलिपुत्र जंक्शन से रात 8 बजे खुलकर सुबह 5 बजे सहरसा पहुंचेगी। वहीं, पटना जंक्शन से रात 8:50 बजे भभुआ के लिए और रात 9 बजे बेतिया के लिए विशेष ट्रेनें रवाना होंगी। इसके अतिरिक्त, पाटलिपुत्र जंक्शन से रात 9:45 बजे पूर्णिया के लिए, दानापुर स्टेशन से रात 10 बजे अररिया के लिए और पटना जंक्शन से ही रात 11 बजे सीवान के लिए आखिरी स्पेशल ट्रेन खुलेगी। यह सभी ट्रेनें देर रात सफर तय कर सुबह तड़के ही अभ्यर्थियों को उनके गंतव्य स्टेशन पर पहुंचा देंगी। 24 जून को चलेंगी सात और परीक्षा स्पेशल गाड़ियां ट्रेन परिचालन के दूसरे दिन यानी 24 जून को परीक्षार्थियों की वापसी और सहूलियत के लिए सात और विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। रिपोर्ट के अनुसार, 24 जून को बख्तियारपुर से सुबह 7 बजे राजगीर के लिए पहली ट्रेन खुलेगी। इसके बाद किउल से दोपहर 12:30 बजे गया के लिए, राजगीर से दोपहर 1 बजे बख्तियारपुर के लिए और नवादा से दोपहर 1 बजे झाझा के लिए ट्रेनें चलेंगी। दोपहर बाद बक्सर से दोपहर 1:30 बजे दानापुर के लिए विशेष गाड़ी रवाना होगी। शाम के वक्त झाझा से शाम 5 बजे पटना जंक्शन के लिए और गया से शाम 5:30 बजे किउल के लिए अंतिम ट्रेनें चलाई जाएंगी, जिससे परीक्षा देकर लौट रहे युवाओं का सफर बेहद सुगम और सुरक्षित हो जाएगा।

बिहार में थानों का अपग्रेडेशन: 425 थानों में इंस्पेक्टर होंगे थाना प्रभारी

पटना बिहार में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और अपराधों की जांच को ज्यादा असरदार बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने एक बड़ा निर्णय लिया है। अब राज्य के 425 महत्वपूर्ण पुलिस थानों की कमान सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) के हाथों में नहीं होगी, बल्कि इन थानों में केवल इंस्पेक्टर रैंक के सीनियर अधिकारियों को ही थानाध्यक्ष (थाना प्रभारी) बनाया जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीजीपी विनय कुमार ने सोमवार को यह नया आदेश जारी कर दिया है। इन अनुभवी इंस्पेक्टरों के पास अब अंचल निरीक्षक (सर्किल इंस्पेक्टर) जैसी शक्तियां होंगी। इनके आने से थानों के अंदर मुकदमों की जांच और सुरक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए दो अलग-अलग विशेष टीमें पूरी मुस्तैदी से काम करेंगी। 217 नए थाने किए गए अपग्रेड इस नई प्रशासनिक व्यवस्था को लागू करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने थानों को चुनने का एक बहुत ही साफ-सुथरा पैमाना तय किया है। पहले से तय 208 थानों के अलावा अब राज्य के 217 और थानों को अपग्रेड किया गया है। इन थानों को उनके बड़े आकार, अपराध के लिहाज से संवेदनशीलता और वहां हर साल दर्ज होने वाले कम से कम 350 या उससे अधिक मुकदमों की संख्या को देखकर चुना गया है। डीजीपी के आदेश के बाद यह नया नियम तुरंत पूरे बिहार में लागू कर दिया गया है। रेलवे और जिला पुलिस को सख्त हिदायत दी गई है कि अगर कोई इंस्पेक्टर छुट्टी पर भी जाता है, तो उसकी जगह नीचे के रैंक के किसी अधिकारी को इन थानों का परमानेंट चार्ज नहीं दिया जाएगा। थानेदार के नीचे काम करेंगे दो सब-इंस्पेक्टर इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन थानों में इंस्पेक्टर स्तर के थाना प्रभारी के नीचे दो अलग-अलग सब-इंस्पेक्टर (SI) तैनात किए जाएंगे। इनमें से एक सब-इंस्पेक्टर का काम सिर्फ केसों की जांच करना होगा, जबकि दूसरे सब-इंस्पेक्टर का काम इलाके में शांति बनाए रखना होगा। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि 425 थानों में इस नए तरीके से अफसरों की तैनाती करने से बिहार सरकार की तिजोरी पर कोई भी अतिरिक्त नया आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा और न ही इसके लिए किसी नए पद को बनाने की जरूरत होगी। इस बेहतर व्यवस्था से जहां पुलिस को काम करने में आसानी होगी, वहीं आम जनता की शिकायतों का निपटारा भी बिना किसी देरी के सीधे थानों में ही हो जाएगा।

रांची RSS ऑफिस अटैक केस में बड़ा खुलासा, दुबई और मुंबई तक जुड़े तार

 रांची  रांची के चुटिया थाना क्षेत्र के निवारणपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला मामले में एटीएस ने रविवार को रांची जिले के चुटिया में दर्ज कांड का प्रभार ले लिया है। इस केस को टेकओवर करते हुए एटीएस ने अपनी जांच शुरू कर दी है। जांच के क्रम में ही एटीएस के अधिकारियों की टीम सोमवार को घटनास्थल पर पहुंची। घटना की रात आरएसएस कार्यालय में मौजूद लोगों, आसपास के लोगों से भी पूछताछ की। अपराधियों के आने-जाने वाले मार्ग की भी जानकारी ली, ताकि अपराध की जांच की कड़ियों को जोड़ा जा सके। टीम ने पेट्रोल बम से हमले से जुड़े साक्ष्य को संकलित की है। एटीएस की जांच टीम ने आरएसएस कार्यालय में लगे सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला है। रांची पुलिस व एटीएस की जांच में गिरफ्तार तीनों ही आरोपितों का चार राज्यों से कनेक्शन जुड़ा है, जिनमें झारखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली व मुंबई शामिल है। जांच टीम आरोपितों के विदेश से आने-जाने, संदिग्धों से मुलाकात, संबंधित राज्यों के अन्य सहयोगियों से मुलाकात सहित उनकी ट्रेवेल हिस्ट्री को खंगाल रही है। जांच टीम को उम्मीद है कि आरोपितों की ट्रेवेल हिस्ट्री जांच की कड़ी को आगे बढ़ाएगी। अमन का जब्त हुआ है पासपोर्ट, इंटरनेट प्लेटफार्म को भी खंगाल रही एटीएस आरएसएस कार्यालय पर हमला मामले में रांची पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया था। इन आरोपितों में सैफ अंसारी, अमन अंसारी उर्फ गोलू व सायम सुजान शामिल हैं। तीनों ही मूल रूप से लोहरदगा के निवासी हैं। इन तीनों ही आरोपितों में एक आरोपित अमन अंसारी उर्फ गोलू का विदेश कनेक्शन सामने आया। पुलिस ने उसके पासपोर्ट को जब्त किया था। अमन का यह पासपोर्ट उसके पिता स्व. सनोफ अंसारी के निधन के बाद उसके सौतेले पिता नसीम खान ने 2022 में बनवाया था। अमन दुबई में काम करने गया था और वहीं पर उसके दिमाग में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की खौफनाक साजिश भरी गई। एटीएस सभी आरोपितों के इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म को भी खंगाल रही है, जिसके माध्यम से तीनों व उनके अन्य सहयोगी जुड़े थे। एटीएस इन तीनों ही आरोपितों से जुड़े अन्य सहयोगियों का डेटा भी खंगाल रही है। तीनों ही आरोपितों को एक बार फिर रिमांड पर लेकर एटीएस उनके संदिग्ध सहयोगियों का सत्यापन कराएगी। 16 जून की रात हुई थी घटना, तीन आरोपित हुए थे गिरफ्तार 16 जून की रात चुटिया के निवारणपुर स्थित आरएसएस कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला हुआ था। इस मामले में चुटिया थाने में 17 जून को कांड संख्या 85/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई थी। जांच के क्रम में पुलिस ने कोडरमा के पास गझंडी रेलवे स्टेशन के पास से सैफ अंसारी व अमन अंसारी उर्फ गोलू को गिरफ्तार किया था। सैफ अंसारी लोहरदगा के बगरू मोड़, ईमली मोड़ के पास बड़ा तलाब का निवासी है, जबकि अमन अंसारी उर्फ गोलू भी लोहरदगा के न्यू आजाद बस्ती का रहने वाला है। दोनों ने पूछताछ में अपने तीसरे साथी सायम सुजान का नाम लिया, जिसकी गिरफ्तारी रांची से हुई थी। सायम सुजान भी लोहरदगा के पत्थलकुदवा स्थित फुलबगान का निवासी है। गिरफ्तार आरोपित सैफ अंसारी 18 जून को कोतवाली थाना परिसर से भाग गया था, जिससे चान्हो थाना क्षेत्र में पुलिस से मुठभेड़ हुई थी। मुठभेड़ में पैर में गोली लगने के बाद सैफ फिर से पकड़ा गया था। इस मामले में उसके विरुद्ध रांची के कोतवाली में हाजत से भागने व चान्हो में पुलिस का हथियार छिनने व मुठभेड़ मामले में भी अलग-अलग दो प्राथमिकियां दर्ज हैं। सैफ न्यायिक हिरासत में इलाजरत है, जबकि दो अन्य सहयोगी रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद हैं। दुबई के भट्ठी व राणा, मुंबई के जिशान व अमृतसर के बीर का भी सत्यापन इस पूरे प्रकरण में एटीएस जांच के क्रम में चार संदिग्धों का सत्यापन कर रही है। इनमें दुबई के शहबाज आलम उर्फ भट्टी व राणा हुसैन, मुंबई के ट्रेवेल एजेंट जिशान तथा अमृतसर के बीर शामिल हैं। जांच व आरोपितों से पूछताछ में इनके नाम सामने आए हैं गिरफ्तार आरोपित अमन एसी तकनीशियन के काम के सिलसिले में दुबई गया था और वहां उसकी मुलाकात शहबाज आलम उर्फ भट्टी व राणा हुसैन से हुई थी। दोनों पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर सर्विस इंटेलिजेंस (आइएसआइ) व आतंकी संगठन तहरीक ए तालिबान हिंदुस्तान (टीटीएच) से जुड़े थे। दोनों ने अमन अंसारी का ब्रेनवाश किया और हिंदुस्तान में आतंक फैलाने का टास्क सौंपा। जिशान मुंबई का ट्रेवेल एजेंट है, जिसके माध्यम से अमन ओमान व दुबई जा चुका है। जांच में अमृतसर के बीर का नाम आया है, जो आतंकियों के संपर्क में था। सभी इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर एक-दूसरे से जुड़े थे। उनकी योजनाओं से संबंधित जानकारी भी जांच टीम को मिली है, जिसका सत्यापन चल रहा है। आरएसएस कार्यालय पर हमला से संबंधित वीडियो दुबई के भट्टी को भेजे जाने संबंधित सबूत भी मिले हैं, जिसके बाद जांच की कड़ी विदेशी कनेक्शन पर आगे बढ़ी है।

बिहार में खेल प्रतिभाओं के लिए बड़ा मौका, राज्य खेल सम्मान की प्रक्रिया शुरू

पटना   बिहार के खेल जगत और प्रतिभावान खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य में खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए बिहार राज्य खेल प्राधिकरण (BSSA) ने 'बिहार राज्य खेल सम्मान 2026' के लिए आधिकारिक तौर पर नोटिफिकेशन जारी कर दी है। इस सम्मान के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन करने वाले प्रतिभावान खिलाड़ियों, अनुभवी कोचों, खेल संघों और खेल अधिकारियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। सरकार के इस कदम से बिहार के खेल गलियारे में भारी उत्साह का माहौल है। यह सम्मान उन लोगों को दिया जाएगा जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और प्रतिभा से खेल के मैदान में बिहार का गौरव बढ़ाया है। 24 जून से शुरू होगी ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया बिहार राज्य खेल प्राधिकरण द्वारा जारी की गई सूचना के मुताबिक, इस खेल सम्मान के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की प्रक्रिया कल यानी 24 जून से पूरी तरह शुरू होने जा रही है। इच्छुक और योग्य दावेदार घर बैठे ही इंटरनेट के माध्यम से अपना फॉर्म भर सकते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2026 तय की गई है। सभी आवेदकों को 15 जुलाई की शाम 5 बजे से पहले अपना फॉर्म और उससे जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। तय समय सीमा के बाद मिलने वाले किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने जारी किया विशेष QR कोड इस बार पूरी आवेदन प्रक्रिया को बेहद डिजिटल और आसान बनाया गया है ताकि खिलाड़ियों को फॉर्म भरने में किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ने आवेदन के लिए एक विशेष QR कोड भी जारी किया है, जिसे स्कैन करके खिलाड़ी सीधे मुख्य एप्लीकेशन पेज पर पहुंच सकते हैं। इसके अलावा, यदि किसी खिलाड़ी या कोच को फॉर्म भरने या दस्तावेज अपलोड करने में कोई दिक्कत आती है, तो उसकी सहायता के लिए विभाग ने एक विशेष हेल्पलाइन नंबर 9031045384 भी जारी किया है। इस नंबर पर कॉल करके खेल सम्मान से जुड़ी किसी भी तकनीकी समस्या या नियम की जानकारी तुरंत हासिल की जा सकती है।

फायर सेफ्टी टीम की जांच में मिलीं कई कमियां, खान सर की कोचिंग को 10 दिन की मोहलत

पटना. पटना के बोरिंग रोड स्थित Khan Global Studies में फायर सेफ्टी विभाग की दोबारा जांच के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। विभाग ने संस्थान को फिर से नोटिस जारी करते हुए 10 दिनों के भीतर सभी कमियां दूर करने का निर्देश दिया है। यह पिछले 15 दिनों में दूसरी बार है जब कोचिंग को नोटिस मिला है। फायर सेफ्टी टीम की जांच में पाया गया कि संस्थान में अभी भी कई जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है। प्रमुख कमियों में- पर्याप्त इमरजेंसी एग्जिट की कमी फायर अलार्म सिस्टम में खामियां स्प्रिंकलर सिस्टम का अभाव फायर स्टेयर (आपातकालीन सीढ़ी) का अधूरा निर्माण फायर डिटेक्टर सिस्टम का पूरी तरह ऑटोमैटिक न होना इलेक्ट्रिक पैनल के नीचे बैठने की व्यवस्था डीआईजी ने जताई चिंता निरीक्षण के दौरान अग्निशमन विभाग के डीआईजी Manoj Kumar Nat ने कहा कि इलेक्ट्रिक पैनल के नीचे सीटिंग अरेंजमेंट सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं है। इसके अलावा भवन में स्प्रिंकलर सिस्टम भी नहीं मिला, जो आग लगने की स्थिति में गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। 10 दिन में सुधार नहीं हुआ तो हो सकती है सख्त कार्रवाई अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि संस्थान को 10 दिनों का अंतिम मौका दिया गया है। यदि निर्धारित समय में सभी कमियों को दूर नहीं किया गया तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग के अनुसार जरूरत पड़ने पर कोचिंग सेंटर को सील भी किया जा सकता है। मुसल्लहपुर और अन्य कोचिंग संस्थानों में भी मिलीं खामियां अग्निशमन विभाग ने पटना के कई कोचिंग संस्थानों का ऑडिट किया। अधिकारियों के मुताबिक अब तक जांचे गए लगभग सभी संस्थानों में किसी न किसी स्तर पर फायर सेफ्टी संबंधी कमियां मिली हैं। दूसरी बार ऑडिट किया गया, लेकिन कई कमियों में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा। किसान कोल्ड स्टोरेज परिसर में संचालित: – Kautilya GS Teaching Centre Gyan Bindu GS Academy Khan Global Studies लखनऊ हादसे के बाद बढ़ी सख्ती हाल ही में Lucknow में एक इमारत में आग लगने की घटना में 15 लोगों की मौत के बाद देशभर में कोचिंग संस्थानों और शैक्षणिक भवनों की फायर सेफ्टी जांच तेज कर दी गई है। इसी अभियान के तहत पटना में भी व्यापक ऑडिट चल रहा है। क्या खान सर की कोचिंग पर लगेगा ताला? फिलहाल कोचिंग संस्थान को बंद करने का आदेश नहीं दिया गया है। हालांकि विभाग ने साफ संकेत दिया है कि यदि 10 दिनों के भीतर सुरक्षा मानकों के अनुसार सुधार नहीं किए गए, तो सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। जिसमें संस्थान को सील करना भी शामिल हो सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में विभाग की अगली जांच काफी महत्वपूर्ण होगी।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन देंगे नियुक्ति पत्र, 151 विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती पूरीस्वास्थ्य विभाग में 262 पदों पर नई भर्ती और नियुक्ति प्रक्रिया जारी

 रांची  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बुधवार 151 विशेषज्ञ चिकित्सक सहित कुल 262 पदों पर अनुशंसित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। इसे लेकर प्रोजेक्ट भवन सभागार में पूर्वाह्न 11 बजे नियुक्त पत्र वितरण समारोह का आयोजन किया गया है। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी एवं अन्य मंत्री भी उपस्थित रहेंगे। जिन पदों के लिए अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिलेगा, उनमें खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी के 56, वरीय अस्पताल प्रबंधक के 29 तथा वित्त प्रबंधक के 26 पद भी सम्मिलित हैं। इनमें खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों की नियुक्ति झारखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से हुई है। राज्य में खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों के पद लंबे समय से रिक्त था। इस पद पर नियमित नियुक्ति हुई है। अब इन पदों पर नियुक्ति होने से राज्य में खाद्य पदार्थों में मिलावट पर शिकंजा कसेगा। वहीं, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के तहत अनुबंध पर टेंडर के माध्यम से हुई है। चयनित चिकित्सकों को उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए विकल्प के अनुसार पदस्थापन भी कर दिया है। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद अभ्यर्थी वहां योगदान देंगे। इन सभी चिकित्सकों को उनके द्वारा कोट की गई मानदेय राशि मिलेगी, जो अधिकतम तीन लाख रुपये मासिक होगी। इनके अलावा वरीय अस्पताल प्रबंधक तथा वित्त प्रबंधक के पदों पर भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के अंतर्गत अनुबंध पर हुई है। इन्हें निर्धारित मानदेय देय होगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के तहत ही अस्पताल प्रबंधक तथा आइटी एग्जीक्यूटिव के पदों पर भी नियुक्ति होनी है, जिसकी प्रक्रिया चल रही है। अस्पताल प्रबंधक के पदों पर नियुक्ति के लिए 25 जून को साक्षात्कार आयोजित किया जाना है। पहले इस पद के लिए 24 जून को ही साक्षात्कार होना था, लेकिन नियुक्त पत्र वितरण समारोह को देखते हुए इसे एक दिन बढ़ा दिया गया है

पूर्व मध्य रेल की नई साप्ताहिक ट्रेन, पुणे रूट पर यात्रियों को बड़ी राहत

 पटना बिहार से महाराष्ट्र के पुणे जाने वाले रेल यात्रियों के लिए पूर्व मध्य रेल की ओर से एक बहुत ही शानदार और बड़ी सुविधा सामने आई है। यात्रियों की भारी भीड़ और सहूलियत को देखते हुए रेलवे ने दानापुर और पुणे के बीच एक नई 'अमृत भारत एक्सप्रेस' स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया है। मिली जानकारी के अनुसार, पूर्व मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) सरस्वती चंद्र ने सोमवार को बताया कि इस नई अमृत भारत एक्सप्रेस साप्ताहिक ट्रेन का नियमित परिचालन आगामी 27 जून से शुरू होने जा रहा है। इस आधुनिक ट्रेन के शुरू होने से नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और व्यापारियों को सीटों के लिए होने वाली मारामारी से बड़ी राहत मिलेगी और सफर काफी आरामदायक हो जाएगा। ट्रेन का ये रहेगा रूट और पूरा टाइम टेबल यह नई स्पेशल ट्रेन पूरी तरह से साप्ताहिक आधार पर चलाई जाएगी, जिससे यात्रियों को दोनों तरफ से आने-जाने का बेहतर विकल्प मिलेगा। यह गाड़ी दानापुर से खुलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (DDU), प्रयागराज छिवकी, जबलपुर, इटारसी और भुसावल के रास्ते होते हुए पुणे तक का सफर तय करेगी। गाड़ी संख्या 11431 पुणे-दानापुर अमृत भारत एक्सप्रेस प्रत्येक शनिवार को पुणे से दोपहर 3 बजकर 25 मिनट पर रवाना होगी और सोमवार की रात 1 बजकर 30 मिनट पर दानापुर पहुंचेगी। वहीं वापसी में, गाड़ी संख्या 11432 दानापुर-पुणे अमृत भारत एक्सप्रेस प्रत्येक सोमवार की सुबह 3 बजकर 30 मिनट पर दानापुर स्टेशन से खुलकर अगले दिन यानी मंगलवार की सुबह 11 बजकर 5 मिनट पर पुणे पहुंचेगी। ट्रेन में यात्रियों को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं इस नई अमृत भारत ट्रेन को यात्रियों के सफर को पूरी तरह सुरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए तैयार किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस ट्रेन में कुल 18 आधुनिक कोच लगाए गए हैं। इनमें स्लीपर क्लास के 8 कोच, जनरल के 7 कोच, पैंट्रीकार का 1 कोच और एसएलआरडी (SLRD) के 2 कोच शामिल हैं। रेलवे प्रशासन ने बताया कि पुश-पुल तकनीक वाली इस ट्रेन के चलने से कम किराए में लोगों को बेहतरीन वेंटिलेशन, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट और बायो-टॉयलेट जैसी आधुनिक सुविधाओं के साथ सफर करने का मौका मिलेगा। इस रूट पर नई ट्रेन के आने से यात्रियों को यात्रा करने के लिए अब एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प मिल गया है।

शैक्षणिक सत्र 2026-27 से बड़ा बदलाव: विश्वविद्यालयों में अपार आईडी से होगा एडमिशन

रांची  राज्य के विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत कालेजों में चांसलर पोर्टल से नामांकन में अनिवार्य रूप से अपार आइडी देनी होगी। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने इसे अनिवार्य किया है। विभाग ने इसे लेकर सभी विश्वविद्यालयों को पत्र जारी कर दिया है। यह शैक्षणिक सत्र 2026-27 से ही लागू होगा। दरअसल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के आलोक में राज्य में एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट, नेशनल एकेडमिक डिपाजिटरी, क्रेडिट ट्रांसफर तथा मल्टीपल एंट्री-एग्जीट जैसी सुविधाएं लागू की गई हैं। इन सभी सुविधाओं के लिए शैक्षणिक प्रमापपत्रों का डिजिटल प्रबंधन तथा सत्यापित अपार आइडी अनिवार्य है। इसे ध्यान में रखते हुए विभाग ने नामांकन के समय सत्यापित अपार आइडी अपलोड करने को कहा है। विभाग ने यह भी कहा है कि चांसलर पोर्टल पर इसके सफल प्रमाणीकरण के बिना आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं होगी। विद्यार्थियों को यह भी जानकारी दी गई है कि प्रवेश, नामांकन, पंजीकरण सहित अन्य प्रक्रियाएं भी चांसलर पोर्टल के माध्यम से संचालित होंगी, जिनमें अपार आइडी अनिवार्य होगा। विभाग ने सभी अभ्यर्थियों से सत्यापित अपार आइडी तैयार रखने तथा नामांकन प्रक्रिया में उसके इस्तेमाल का सुझाव दिया है। साथ ही सभी विश्वविद्यालयों को भी इसे सख्ती से अनुपालन कराने को कहा गया है। कैसे बनाएं अपार आइडी? अपार आइडी अर्थात एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट्स कार्ड डिजी लाकर या एबीसी पोर्टल के माध्यम से घर बैठे बनाया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले डिजीलाकर की वेबसाइट पर लागिन कर अपना अकाउंट बनाएं। डिजीलाकर मोबाइल ऐप का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि आप नए यूजर हैं, तो 'साइन अप' पर क्लिक कर अपना आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर दर्ज करें और ओटीपी के माध्यम से उसे सत्यापित करें। इसके बाद छह अंकों का सेक्युरिटी पिन सेट करें। इसके बाद अपने अकाउंट में लागिन कर सर्च डाक्यूमेंट में जाएं और एबीसी आइडी और अपार सर्च करें। इसमें मांगी गई सभी जानकारी भरने के बाद कंसेंट बाक्स को चेक करें ओर गेट डाक्यूमेंट या सबमिट पर क्लिक करें। इसी के साथ आपकी अपार आइडी जेनरेट हो जाएगी।  

1975 का आपातकाल याद करते हुए संजय सरावगी बोले बिहार बना था लोकतंत्र बचाने की ताकत

पटना  आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ के मौके पर बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष Sanjay Saraogi ने उस दौर को याद करते हुए दावा किया है कि देश में लोकतंत्र की रक्षा की सबसे मजबूत लड़ाई बिहार की धरती से लड़ी गई थी। उनके अनुसार, आपातकाल केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर सबसे बड़ा हमला था। उन्होंने कहा कि आज भी बिहार की गलियों और परिवारों में उस संघर्ष की यादें जीवित हैं, जिसने तानाशाही के खिलाफ जनआंदोलन का रूप लिया था। 25 जून 1975: जब एक रात में बदल गया देश का राजनीतिक माहौल 25 जून 1975 की रात तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi ने देश में आपातकाल लागू किया था। इसके बाद नागरिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियां शुरू हुईं और प्रेस पर सेंसरशिप लागू कर दी गई। बिहार में भी इसका व्यापक असर देखने को मिला। कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया गया और विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगा दी गई। जेपी आंदोलन को बताया लोकतंत्र की सबसे बड़ी लड़ाई भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बिहार में शुरू हुआ छात्र आंदोलन आगे चलकर लोकतंत्र बचाने के राष्ट्रीय अभियान में बदल गया। इस आंदोलन का नेतृत्व Jayaprakash Narayan ने किया था। उनके अनुसार, जेपी के आह्वान पर हजारों छात्र और युवा सड़कों पर उतरे और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली के लिए संघर्ष किया। कर्पूरी ठाकुर और जॉर्ज फर्नांडिस के संघर्ष का किया जिक्र लेख में Karpoori Thakur और George Fernandes की भूमिका को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। दावा किया गया कि आपातकाल के दौरान कई नेता भूमिगत रहकर आंदोलन को आगे बढ़ाते रहे। उस समय सरकारी कार्रवाई के बावजूद विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध जारी रखा। संघ और जनसंघ की भूमिका को बताया आंदोलन की रीढ़ संजय सरावगी ने कहा कि आपातकाल के दौरान Rashtriya Swayamsevak Sangh और Bharatiya Jana Sangh के कार्यकर्ताओं ने संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका कहना है कि प्रतिबंधों और गिरफ्तारियों के बावजूद कार्यकर्ता भूमिगत रहकर संदेशों और आंदोलन की गतिविधियों को आगे बढ़ाते रहे। 1977 का चुनाव बना लोकतंत्र की वापसी का प्रतीक लेख में 1977 के आम चुनाव को लोकतंत्र की पुनर्स्थापना का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया गया है। भाजपा नेता के अनुसार, जनता ने चुनाव के माध्यम से आपातकाल की नीतियों के खिलाफ अपना फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि बिहार ने उस दौर में सत्ता परिवर्तन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने का संदेश दिया। 51वीं वर्षगांठ पर लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का आह्वान आपातकाल की वर्षगांठ पर भाजपा ने इसे लोकतंत्र की रक्षा के संकल्प से जोड़ते हुए याद किया है। संजय सरावगी ने कार्यकर्ताओं और नागरिकों से लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आपातकाल का इतिहास केवल अतीत की कहानी नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के प्रति सतर्क रहने का संदेश भी देता है।