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कैमूर में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास के 8027 लाभार्थियों का होगा वेरिफिकेशन

कैमूर/भभुआ. जिले में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना प्लस के अंतर्गत पात्र लोगों को आवास उपलब्ध कराने के लिए सभी प्रखंडों में सर्वे किया गया था। सर्वे का कार्य विभाग के दिशा- निर्देश के तहत 10 जनवरी से 15 मई तक कर्मियों के द्वारा किया गया था। सर्वे सूची में शामिल लोगों की पात्रता के सत्यापन के लिए 29 जनवरी 2026 तक पदाधिकारी व कर्मियों के द्वारा अभियान चलाकर सर्वे किया जा रहा है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में सत्यापन करने के लिए मात्र तीन दिनों का समय शेष बचा हुआ है। तीन दिनों के अंदर 8027 लोगों की पात्रता की जांच की जानी है। इस संबंध में एमआईएस पदाधिकारी सुधीर कुमार पांडेय ने बताया कि विभाग के दिशा- निर्देश के अनुसार आवास योजना की सूची में शामिल लोगों की पात्रता का सत्यापन का कार्य पूरा होने के बाद चिह्नित किए गए अपात्र परिवारों का नाम सूची से हटाने की कार्रवाई शुरू होगी। बता दें कि जिले में पीएम आवास योजना के लाभुकों की पात्रता की जांच का कार्य पदाधिकारियों के द्वारा कई चरणों में की जा रही है। जिला स्तर पर सत्यापन कार्य की समीक्षा उप विकास आयुक्त व निदेशक डीआरडीए के माध्यम से की जा रही है।

सवर्ण होने के बावजूद UGC नियमों के पक्ष में उतरे गुरु रहमान, बोले– शिक्षा में बदलाव ज़रूरी

पटना विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए समानता नियमों को लेकर बिहार समेत देश भर में हंगामा मचा है। खासकर सवर्ण वर्ग के लोग इन नियमों का विरोध कर रहे हैं। इस बीच पटना के चर्चित कोचिंग शिक्षक गुरु रहमान ने यूजीसी के नए इक्विलिटी रूल्स का समर्थन किया है। उनका कहना है कि वह खुद सवर्ण हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी में उन्होंने धर्म, लिंग, जाति के आधार पर भेदभाव होते देखा है। इसलिए समानता लाने के लिए ये नियम जरूरी हैं।   बातचीत में गुरु रहमान ने मंगलवार को कहा, "मैं खुद सवर्ण हूं, बावजूद इसके जिस यूनिवर्सिटी से मैंने पढ़ाई की, वहां देखा है कि लोगों के साथ भेदभाव होता है। इसलिए मैं यूजीसी के नए नियमों का समर्थन करता हूं। समानता तभी आएगी जब लोगों के मन में भय रहेगा। भय का वातावरण इसलिए पैदा किया गया है ताकि कोई किसी के खिलाफ न बोले। जब कोई किसी के विरूद्ध नहीं बोलेगा तो अपने आप समानता आ जाएगी।" गुरु रहमान ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया और कहा कि सरकार का यह फैसला ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि जिस परिस्थिति में यूजीसी इक्विटी बिल लाया गया है, सवर्ण चाहे इसका विरोध करे, उनका भी विरोध करे, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। बता दें कि यूजीसी ने यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में एससी, एसटी और ओबीसी स्टूडेंट्स के साथ भेदभाव को रोकने के लिए इक्विटी नियम लागू किए हैं। सवर्ण वर्ग इसका विरोध कर रहा है। जनरल कैटगरी के छात्र-छात्राओं और लोगों क कहना है कि इन नियमों का दुरुपयोग किया जा सकता है। देश भर में इस पर हंगामा मचा हुआ है। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। उत्तर प्रदेश में एक भाजपा नेता और एक अधिकारी ने पद से इस्तीफा भी दे दिया।  

नीतीश सरकार ने सड़क परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण के दिए निर्देश

पटना. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने दो दर्जन से अधिक सड़क परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया है। भू अर्जन निदेशक कमलेश कुमार सिंह ने जिलों को उन सड़कों की सूची भेजी है, जिनके लिए जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई चल रही है। मुख्यालय स्तर पर हुई समीक्षा में पाया गया कि अधिसंख्य मामला मुआवजा भुगतान के कारण लटका हुआ है। शेरपुर-दिघवारा के बीच गंगा नदी पर छह लेन के पुल के रास्ते में मंदिर-मस्जिद और स्कूल के आ जाने से कठिनाई हो रही है। एनएच 27 के किशनगंज-बहादुरगंज खंड एलाइनमेंट में सुधार के कारण जमीन अधिग्रहण में समस्या आ रही है। इस खंड के साढ़े चार किमी हिस्से के लिए जमीन की जरूरत है। मुआवजा भुगतान का प्रबंध करने के लिए विभाग को लिखा गया है। एनएच 231 के महेशखूंट-सहरसा-पूर्णिया खंड में मरंगा एवं सुखिया मौजा के रैयत मुआवजे की दर को लेकर विरोध कर रहे हैं। एनएच 139 डब्ल्यू के बाकरपुर-मानिकपुर खंड में भी समस्या है। इस हिस्से में संरचनाओं का भुगतान बाकी हे। इसी परियोजना के मुजफ्फरपुर वाले हिस्से में अधिग्रहण का एक विवाद हाई कोर्ट में लंबित है। शेरपुर-दिघवारा के बीच गंगा नदी पर छह लेन के पुल का निर्माण हो रहा है। सारण जिला में इसके लिए 580 मीटर जमीन अधिग्रहण का मामला अटक गया है, क्योंकि अधिग्रहण के रास्ते में मंदिर, मस्जिद और स्कूल पड़ रहे हैं। एनएच 139 डब्ल्यू के साहेबगंज-अरेराज-बेतिया खंड पर करीब 55 किमी सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई लंबित है। पश्चिमी चंपारण में भी इस सड़क के लिए करीब 24 किमी सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण होना बाकी है। इसी तरह एनएच 119 डी के लिए वैशाली जिले में भी 24 किमी सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। जिला भू अर्जन अधिकारी को कहा गया है कि वे अधियाची विभाग से समन्वय बना कर मुआवजा भुगतान की गति को तेज करें। इस परियोजना के लिए दरभंगा एवं समस्तीपुर जिलों में भी जमीन अधिग्रहण हो रहा है। एनएच 119 डी के पटना जिले के खंड में भरगांवा मौजा के रैयतों के विरोध का सामना हो रहा है। यह मुआवजे की कम दर को लेकर है। निदेशक, भू अर्जन कमलेश कुमार सिंह ने जिला भू अर्जन पदाधिकारियों को कहा है कि वे संबंधित विभागों एवं रैयतों के बीच समन्वय कर अधिग्रहण की कार्रवाई तेज करें।

बिहार में सीएम पर आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला, आरोपी गिरफ्तार

बेतिया, बिहार पुलिस सोशल मीडिया पर लगातार नजर बनाए हुए है। इस पर आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर कार्रवाई भी की जा रही है। ऐसा ही एक मामला पश्चिम चंपारण जिले में देखने को मिला जब सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री के खिलाफ अमर्यादित, आपत्तिजनक टिप्पणी कर माहौल को बिगाड़ने की कोशिश करना एक व्यक्ति को महंगा पड़ गया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। दरअसल, यह पूरा मामला पश्चिम चंपारण जिले के शिकारपुर थाना क्षेत्र का है। बताया गया कि सरस्वती पूजा के अवसर पर मूर्ति विसर्जन के समय सेक्टर पुलिस पदाधिकारी को सूचना प्राप्त हुई कि सरस्वती पूजाकी मूर्ति विसर्जन के अवसर पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में बिहार के मुख्यमंत्री के संबंध में अमर्यादित, असंसदीय भाषाओं का प्रयोग करते हुए एक व्यक्ति द्वारा अपने फेसबुक आईडी से एक बेहद शर्मनाक और आपत्तिजनक वीडियो को वायरल किया जा रहा है। इस वीडियो के सामने आते ही क्षेत्र में सौहार्दपूर्ण वातावरण के बिगड़ने की आशंका बन गई। मामले के संज्ञान में आते ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। इस संबंध में पुलिस अवर निरीक्षक सोनू कुमार के लिखित आवेदन के आधार पर शिकारपुर थाना में एक मामला दर्ज किया गया। जांच के क्रम में यह बात सामने आई कि यह वीडियो सिसवा गांव के वार्ड नंबर 11 के रहने वाले राजू कुमार द्वारा जानबूझकर सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है। पुलिस के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि शिकारपुर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए नामजद आरोपी राजू कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश की जा रही है कि इसके पीछे उसकी मंशा क्या थी? पुलिस ने ऐसे लोगों को चेतावनी भी दी है कि आस्था पर चोट करने वाले और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले किसी को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस सोशल मीडिया की लगातार निगरानी कर रही है।  

होली पर बिहारवासी अब बिना ट्रेन के धक्के खाए पहुंचेंगे घर, लग्जरी बसें होंगी उपलब्ध!

पटना  होली के मौके पर बिहार से बाहर काम या पढ़ाई करने वाले लाखों प्रवासी बिहारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. ट्रेन में भारी भीड़ और कन्फर्म टिकट न मिलने की परेशानी से जूझ रहे लोगों को इस बार बिहार सरकार ने सीधा और सुरक्षित विकल्प दिया है. होली के त्योहारी सीजन में यात्रियों को घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी अब राज्य सरकार भी उठाएगी. दरअसल, बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) ने होली के अवसर पर अलग-अलग राज्यों से बिहार के लिए होली स्पेशल बसों के संचालन की तैयारी शुरू कर दी है. 15 फरवरी से 15 मार्च तक कुल लगभग 200 अंतरराज्यीय बसें चलाई जाएंगी. इन बसों के लिए टिकटों की बुकिंग ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन भी होगी. तीन कैटेगरी की बस बीएसआरटीसी की ओर से चलाई जाने वाली ये फेस्टिवल स्पेशल बसें एसी डीलक्स और नॉन-एसी डीलक्स श्रेणी की होंगी. हर बस में 50 से 60 सीटों की क्षमता होगी, ताकि यात्रियों को आरामदायक सफर मिल सके. यात्रियों को अतिरिक्त राहत देने के लिए राज्य सरकार इन बसों के किराये पर विशेष छूट भी देगी. टिकट बुकिंग की शुरुआत एक फरवरी से हो जाएगी. ये विशेष बसें पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर चलाई जाएंगी. दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड के प्रमुख रूटों पर इनका संचालन किया जाएगा. फिलहाल विभाग रूट निर्धारण और किराये को अंतिम रूप देने में जुटा है. इनमें से सबसे अधिक बसें दिल्ली के लिए होंगी. यहां से कर सकेंगे टिकट बुक यात्री बीएसआरटीसी की आधिकारिक वेबसाइट https://bsrtc.bihar.gov.in/ पर जाकर आसानी से टिकट बुक कर सकेंगे. भुगतान के लिए यूपीआई, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और नेट बैंकिंग की सुविधा उपलब्ध रहेगी. यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए चिन्हित बस पड़ावों पर महिला और पुरुष यात्रियों के लिए स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था भी की जाएगी. पहले भी हुई थी पहल बीएसआरटीसी ने पिछले साल भी त्योहारी सीजन में इसी तरह की पहल की थी. 20 सितंबर से 19 नवंबर 2025 तक करीब 220 अंतरराज्यीय फेस्टिवल बसों का संचालन किया गया था. इससे लगभग 2.50 लाख यात्रियों को लाभ मिला. उस दौरान औसतन रोजाना 107 बसें एकतरफा चलीं, जिनमें 81 प्रतिशत सीटें भरी रहीं और आठ हजार से अधिक टिकट ऑनलाइन बुक हुए थे. होली के बाद बिहार से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के लिए सीधी सरकारी बस सेवा शुरू करने की भी तैयारी है. बिहार के अलग-अलग जिलों से कुल 150 नई अंतरराज्यीय बसों का परिचालन किया जाएगा. इसके लिए संबंधित राज्यों की सरकारों के साथ अंतरराज्यीय परिवहन समझौते की प्रक्रिया चल रही है. यह अगले महीने तक पूरी होने की उम्मीद है.

होली स्पेशल ट्रैवल प्लान: दिल्ली और पंजाब से बिहार के लिए 200 अतिरिक्त बसें, जानें बुकिंग डेट

पटना होली के रंग में सराबोर होने के लिए अपने घर बिहार लौटने की तैयारी कर रहे प्रवासियों के लिए राज्य सरकार ने इस साल बड़ा तोहफा दिया है। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) ने होली के त्योहार पर ट्रेनों में होने वाली भारी भीड़ और वेटिंग लिस्ट की समस्या को देखते हुए 200 विशेष फेस्टिवल बसों के परिचालन का निर्णय लिया है। ये बसें न केवल आरामदायक होंगी, बल्कि दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे दूरदराज के राज्यों से आने वाले यात्रियों के लिए किफायती भी साबित होंगी। 15 फरवरी से शुरू होगा परिचालन इन विशेष बसों का परिचालन 15 फरवरी से शुरू होकर 15 मार्च 2026 तक जारी रहेगा, जिससे यात्रियों को आने और वापस लौटने, दोनों ही समय सुविधा मिल सके। यात्रियों की सुविधा के लिए टिकट बुकिंग की प्रक्रिया 1 फरवरी से आधिकारिक वेबसाइट https://bsrtc.bihar.gov.in/ पर शुरू कर दी जाएगी। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि निजी ऑपरेटरों की मनमानी को रोकने के लिए इन बसों के किराए में विशेष छूट दी जाए, जिससे गरीब प्रवासियों पर आर्थिक बोझ न पड़े। भुगतान के लिए डिजिटल माध्यम जैसे यूपीआई, डेबिट और क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।   पांच राज्यों के प्रमुख रूटों पर संचालन ये बसें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के प्रमुख शहरों के लिए चलाई जाएंगी। ये बसें पीपीपी (PPP) मोड पर संचालित होंगी और इनमें एसी डीलक्स व नॉन-एसी डीलक्स दोनों तरह के विकल्प मौजूद रहेंगे। बसों की क्षमता 50 से 60 सीटों की होगी, जिससे अधिक से अधिक लोगों को सफर का मौका मिल सके। विभाग वर्तमान में रूटों के अंतिम निर्धारण और समय-सारणी को अंतिम रूप देने में जुटा है ताकि 1 फरवरी से बिना किसी बाधा के बुकिंग शुरू हो सके। होली पर आरामदायक होगी यात्रा: मंत्री परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने इस संबंध में कहा कि त्योहारों के समय ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं होती, जिससे प्रवासियों को काफी कठिनाई होती है। इसी समस्या के समाधान के लिए विभाग लगातार सकारात्मक योजनाओं पर काम कर रहा है। इन बसों के माध्यम से यात्री न केवल आरामदायक सफर कर सकेंगे, बल्कि समय पर अपने घर भी पहुंच पाएंगे। इसके अलावा, यात्रियों की बुनियादी सुविधाओं का ध्यान रखते हुए बस पड़ावों पर महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।   पिछले साल ढाई लाख यात्रियों ने किया था सफर पिछला रिकॉर्ड देखें तो बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की यह रणनीति काफी सफल रही है। पिछले साल भी निगम ने 220 बसों का सफल संचालन किया था, जिससे लगभग 2.50 लाख यात्रियों को लाभ मिला था। उस दौरान औसतन रोजाना 107 बसें चलाई गई, जिसमें 81 प्रतिशत सीटें भरी रही थीं। इस साल भी वैसी ही सफलता की उम्मीद की जा रही है।

झारखंड में एक हजार अभ्यर्थियों को मिलेगी सरकारी नौकरी

रांची. राज्य सरकार एक और बड़ा कार्यक्रम आयोजित कर अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विदेश से लौटने पर इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। संबंधित विभागों की तैयारी के अनुसार फरवरी के पहले या दूसरे सप्ताह में रांची में बड़ा कार्यक्रम आयोजित कर झारखंड लोक सेवा आयोग तथा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग से अनुशंसित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जा सकता है। Jharkhand Government Jobs राज्य सरकार द्वारा जिन अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जाना है, उनमें सबसे महत्वपूर्ण झारखंड लोक सेवा आयोग से बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) पद के लिए अनुशंसित अभ्यर्थी हैं। आयोग ने इस पद पर नियुक्ति के लिए आयोजित परीक्षा का अंतिम परिणाम जारी कर दिया। इसमें 64 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा की गई है। इनमें अनारक्षित श्रेणी के 34, एससी श्रेणी के दो, एसटी श्रेणी के 21, बीसी-वन के एक तथा आर्थिक रूप से कमजाेर श्रेणी के छह अभ्यर्थी सम्मिलित हैं। हालांकि विभाग ने अभी इन अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच नहीं की है। मेडिकल कालेजों में सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी जेपीएससी ने मेडिकल कालेजों में सहायक प्राध्यापक (एनेस्थेसिया) की नियुक्ति प्रक्रिया भी पूरी कर ली है। इसके माध्यम से चयनित छह अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिल सकता है। JPSC के माध्यम से खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी सहित कुछ एकल पदों पर भी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की गई है। इन अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति पत्र दिया जाना है। इधर, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने सीजीएल परीक्षा (CGL Exam) के तहत कुछ अन्य अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया है, जिन्हें नियुक्ति पत्र दिया जाना है। इसी तरह, सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा के तहत भी कुछ अन्य अभ्यर्थियों का परिणाम जारी किया गया है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा इन अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाने की तैयारी चल रही है।

झारखंड में सिविल सेवा प्री सहित सालभर में होंगी 28 परीक्षाएं

रांची. झारखंड लोक सेवा आयोग की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 आठ मार्च को होगी। इस परीक्षा का अप्रैल माह में परिणाम जारी हो सकता है। इसकी मुख्य परीक्षा दो से चार मई तक संभावित है। मई अंतिम सप्ताह में इसका परिणाम जारी हो सकता है। इसके बाद 16 से 19 जून तक साक्षात्कार आयोजित होगा। इस तरह सभी परीक्षाएं समय पर आयोजित हुईं तथा परिणाम जारी हुआ तो जून माह तक यह परीक्षा पूरी हो जाएगी। हालांकि अभी इस परीक्षा के लिए विज्ञापन प्रकाशित नहीं हुआ है। आयोग ने मंगलवार को जून माह तक आयोजित होनेवाली विभिन्न प्रतियाेगिता परीक्षाओं का कैलेंडर जारी करते हुए परीक्षाओं की उक्त संभावित तिथि घोषित की। जारी कैलेंडर के अनुसार, 29 मार्च को झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट) आयोजित हो सकती है। यह परीक्षा के तहत दो पत्रों की परीक्षा होगी, जिसमें वस्त़ुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएंगे। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों की नियुक्ति के लिए साक्षात्कार बुधवार से शुरू होगा जो नौ जनवरी तक चलेगा। छठी सीमित उपसमाहर्ता लिखित परीक्षा 10-11 जनवरी को आयोजित होगी। इसी तरह, विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक बैकलाग नियुक्ति प्रतियोगिता के तहत सांख्यिकी, मैथिली और श्रम एवं समाज कल्याण विषय के लिए 18 जनवरी को प्रमाणपत्रों का सत्यापन होगा, जबकि साक्षात्कार 19 जनवरी को होगा। वहीं, सहायक प्राध्यापक नियमित नियुक्ति के तहत जुलाजी तथा अंग्रेेजी विषय के लिए प्रमाणपत्रों की जांच 19 से 21 जनवरी तक होगी। नियमित नियुक्ति के तहत ही हो एवं पंचपरगनिया विषय के लिए प्रमाणपत्रों की जांच तथा साक्षात्कार 10 फरवरी को निर्धारित है। आयोग ने कुल 28 प्रतियोगिता परीक्षाओं की संभावित तिथि घोषित की है, जिससे हजारों पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ होगा। अन्य परीक्षाओं की संभावित तिथि परीक्षा का नाम     परीक्षा की प्रकृति     संभावित तिथि वन क्षेत्र पदाधिकारी नियुक्ति     मुख्य परीक्षा     22-24 जनवरी खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी     साक्षात्कार     29-31 जनवरी यूनिवर्सिटी प्रोफेसर कम चीफ साइंटिस्ट     साक्षात्कार     12 फरवरी एसोसिएट प्रोफेसर कम सीनियर साइंटिस्ट     साक्षात्कार     13 फरवरी आयुर्वेदिक चिकित्सा पदाधिकारी     लिखित परीक्षा     05-07 मार्च होम्योपैथी चिकित्सा पदाधिकारी     लिखित परीक्षा     05-07 मार्च यूनानी चिकित्सा पदाधिकारी     लिखित परीक्षा     05-07 मार्च संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025     प्रारंभिक परीक्षा     08 मार्च संयुक्त सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा-2025     प्रारंभिक परीक्षा     15 मार्च संयुक्त सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा-2023     प्रारंभिक परीक्षा     22 मार्च झारखंड पात्रता परीक्षा-2024     लिखित परीक्षा     29 मार्च सहायक वन संरक्षक नियुक्ति     मुख्य परीक्षा     04-07 अप्रैल प्रोजेक्ट मैनेजर एवं समकक्ष नियुक्ति     लिखित परीक्षा     18-19 अप्रैल कारखाना निरीक्षक नियुक्ति     लिखित परीक्षा     25-26 अप्रैल संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2025     मुख्य परीक्षा     02-04 मई संयुक्त सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा-2025     मुख्य परीक्षा     09-11 मई संयुक्त सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा-2023     मुख्य परीक्षा     16-18 मई ब्वायल इंसपेक्टर नियुक्ति     लिखित परीक्षा     29-30 मई सहायक निदेशक/सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर बैकलॉग परीक्षा     लिखित परीक्षा     07 जून सहायक निदेशक/सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर बैकलॉग परीक्षा     लिखित परीक्षा     14 जून संयुक्त सिविल सेवा नियमित परीक्षा-2025     साक्षात्कार     16-19 जून संयुक्त सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा-2025     साक्षात्कार     22-23 जून संयुक्त सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा-2023     साक्षात्कार     24 जून

बोकारो स्टील का सबसे मजबूत सुरक्षा सूट: 260°C तक की गर्मी को झेलने की क्षमता, कीमत क्या?

बोकारो अक्सर इंडस्ट्री में काम करने के दौरान कर्मचारियों को कई तरह के सुरक्षा उपकरणों के साथ ड्यूटी करनी पड़ती है. खासतौर पर स्टील इंडस्ट्री, फायर डिपार्टमेंट और बिजली विभाग में कार्यरत कर्मचारियों को आग, चिंगारी और अत्यधिक गर्मी का खतरा हेमशा बना रहता है और इन जोखिम भरे माहौल में फ्लेम रिटार्डेंट सूट कर्मचारियों के लिए विशेष सुरक्षा कवच का काम करता है और उन्हें दुर्घटना से बचाता है. ऐसे में बोकारो इस्पात संयंत्र के सुरक्षा विभाग में कार्यरत सतीश कुमार ने बताया कि बोकारो स्टील प्लांट में कार्यरत कर्मचारियों को आग से बचाने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए फ्लेम रिटार्डेंट सूट उपलब्ध कराए जाते हैं. यह सूट सामान्य कपड़ों की तरह तुरंत आग नहीं पकड़ता है. बल्कि आग के प्रभाव को सीमित कर देता है, जिससे कर्मचारी को सुरक्षित स्थान तक पहुंचने या रेस्क्यू का कीमती समय मिल जाता है और और बहुत अधिक डैमेज से लोगों का शरीर बच जाता है. 260°C की गर्मी ये सूट कर लेगा सहन इसके अलावा यह सूट खासतौर पर चिंगारी, फ्लैश फायर और अत्यधिक तापमान के खतरे को भी कम करता है. आग के संपर्क में आने से यह जल्दी पिघलता नहीं है और यह इससे जलने की गंभीरता काफी हद तक कम हो जाती है. वहीं, यह सूट विशेष फाइबर और केमिकल से तैयार होता है, जिससे सूट लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करता है. यह गर्मी 150°C से 260°C सीमित समय तक  सुरक्षित रखने में सक्षम है और यह सूट बचाव के लिए बनाया गया है. जानें सूट की कीमत वहीं, फ्लेम रिटार्डेंट सूट की कीमत क्वालिटी के अनुसार ₹3000 रुपये से लेकर 1 लाख रूपये तक होती है. वहीं, इसकी गुणवत्ता को ध्यान रखते हुए हमेशा ISO Certified और फ्लेम रिटार्डेंट सूट का ही उपयोग किया जाता है. यह सर्टिफिकेशन सूट की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और आग से बचाव की क्षमता को प्रमाणित करता है.

ना फूल–ना बेलपत्र, यहां बैगन से होती है पूजा—बिहार के अनूठे शिवधाम की खास परंपरा

वैशाली वैशाली जिले के जंदाहा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत वसंतपुर धधुआ स्थित बाबा बटेश्वरनाथ धाम देश का एकमात्र ऐसा मंदिर माना जाता है, जहां वटवृक्ष के कंदरा से प्रकट काले रंग का शिवलिंग विराजमान है। यह प्राचीन और आस्था का केंद्र मंदिर दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के लिए जाना जाता है, जहां बड़ी संख्या में भक्त पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। बैगन चढ़ाने की अनोखी परंपरा बाबा बटेश्वरनाथ धाम के गर्भगृह में स्थापित भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर श्रद्धालु प्रसाद के रूप में बैगन (सब्जी) अर्पित करते हैं। क्षेत्र के किसान अपने खेतों में सब्जी की खेती करने के बाद पहली उपज के रूप में बैगन भगवान भोलेनाथ को चढ़ाते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें यहां अवश्य पूरी होती हैं और मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु बैगन चढ़ाने जरूर आते हैं। मंदिर के उपाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने बताया कि यह एक अत्यंत प्राचीन मंदिर है, जिसकी स्थापना का कोई लिखित इतिहास उपलब्ध नहीं है। मान्यता है कि शिवलिंग स्वयं वटवृक्ष के कंदरा से प्रकट हुआ है। मंदिर परिसर में भगवान नंदी महाराज की प्रतिमा भी स्थापित है और यहां शिवलिंग के साथ-साथ नंदी महाराज की भी विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। राजा जनक से जुड़ी ऐतिहासिक मान्यता अनिल कुमार सिंह ने बताया कि एक मान्यता के अनुसार, राजा जनक जब जनकपुर से चंपा घाट स्नान के लिए आते थे, तो उनका हाथी, जिस पर पुष्पक विमान सजा होता था, बाबा बटेश्वरनाथ धाम में रुकता था। राजा जनक यहां भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने के बाद ही जनकपुर की ओर प्रस्थान करते थे। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र कृषि प्रधान है। जब किसानों की सब्जी की फसल तैयार होती है, तो वे सब्जियों में से बैगन को प्रसाद और चढ़ावे के रूप में बाबा बटेश्वरनाथ को अर्पित करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए बिहार के वैशाली, छपरा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, पटना समेत कई जिलों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके अलावा असम के सिलचर, साथ ही नेपाल और रूस जैसे देशों से भी भक्त यहां आकर आशीर्वाद प्राप्त कर चुके हैं। अनिल कुमार सिंह ने बताया कि रूस से आए एक शिवभक्त ने रूस की मुद्रा चढ़ावे के रूप में अर्पित की थी, जिसे मंदिर संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है। मंदिर प्रशासन का दावा है कि पूरे विश्व में इस आकार और स्वरूप का काले रंग का शिवलिंग कहीं और नहीं है, जो वटवृक्ष के कंदरा से प्राकृतिक रूप से प्रकट हुआ हो। यही कारण है कि बाबा बटेश्वरनाथ धाम की पहचान देश-विदेश तक फैली हुई है। महाशिवरात्रि और बसंत पंचमी पर भव्य मेला उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि और बसंत पंचमी के अवसर पर मंदिर परिसर में भव्य मेला लगता है। महाशिवरात्रि पर एक माह तक मेला आयोजित होता है, जिसमें सैकड़ों क्विंटल बैगन भगवान को चढ़ाया जाता है। वहीं, बसंत पंचमी पर एक दिन का मेला लगता है, जिसमें भी बैगन चढ़ाया जाता है, हालांकि मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है। मेले में तेजपत्ता और लकड़ी से बने सामानों की खूब बिक्री होती है। इसके अलावा सावन माह में भी पूजा-अर्चना और जलाभिषेक को लेकर शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। पूरा मंदिर परिसर और आसपास का वातावरण भक्ति और श्रद्धा से सराबोर नजर आता है।