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बिहार के CM नीतीश कुमार देंगे बुजुर्गों को घर बैठे इलाज से लेकर इमरजेंसी तक की सुविधाएं

पटना. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उम्रदराज और बुजुर्ग लोगों को नए साल पर बड़ा तोहफा दिया है. ऐसे लोगों को अब घर बैठे ही स्वास्थ्य जांच और इलाज मिल सकेगा. मुख्यमंत्री ने सात निश्चय पार्ट-3 के तहत ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए यह निर्णय लिया है. राज्य सरकार के फैसले के तहत अब बुजुर्गों को घर पर ही पैथोलॉजी जांच, ब्लड प्रेशर मापने और ईसीजी जैसी जरूरी जांच की सुविधा मिलेगी. यही नहीं इमरजेंसी के हालात में भी डॉक्टर घर पहुंचकर इलाज भी करेंगे. फिजियोथेरेपी की भी सुविधा मुहैया करवाई जायेगी. मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही आम जनता से सुझाव भी मांगे हैं. सात निश्चय के तहत लोगों के जीवन को और आसान बनाने के लिए सरकार ने एक क्यूआर कोड जारी किया है. इसे स्कैन कर आम लोग सरकार तक अपने सुझाव और विचार सीधे पहुंचा सकते हैं.  क्यूआर कोड जारी कर लोगों से मांगे सुझाव सीएम नीतीश कुमार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स के जरिए जानकारी साझा करते हुए लिखा- '24 नवंबर 2005 को राज्य में जब से हमलोगों की सरकार बनी तब से न्याय के साथ विकास के सिद्धांत पर चलते हुए हमलोगों ने समाज के सभी वर्ग के लोगों के उत्थान एवं हर क्षेत्र के विकास के लिए काम किया है. हम लोगों ने पूरे बिहार को अपना परिवार माना है और सबके मान और सम्मान का पूरा ख्याल रखा है. अब राज्य में समाज के हर वर्ग के लोग सम्मान के साथ आसानी से जीवन व्यतीत कर सकें इसे लेकर हमलोगों ने गंभीरता से कार्य प्रारंभ कर दिया है. हमलोगों ने वर्ष 2025 से 2030 के लिए राज्य को देश के सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल करने हेतु सात निश्चय-3 के कार्यक्रमों को लागू किया है. सात निश्चय-3 के सातवें निश्चय ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ (Ease of Living) का उद्देश्य राज्य के सभी नागरिकों के जीवन में आने वाली कठिनाइयों को कम करना तथा उनके जीवन को और भी आसान बनाना है. सबसे पहले हमलोगों की कोशिश है कि राज्य के जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को जरूरत के समय उनके घर पर ही अत्यावश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें. 1. नर्सिंग सहायता की सुविधा 2. घर पर ही पैथोलॉजी जांच की सुविधा 3. ब्लड प्रेशर जांच और ई॰सी॰जी॰ जांच की सुविधा 4. फिजियोथेरेपी की सुविधा 5. आपातकालीन स्थिति में सभी प्रकार की चिकित्सकीय सहायता राज्य के वरिष्ठ नागरिकों को स्वास्थ्य संबंधित उपरोक्त सभी सुविधाएं उन्हें घर पर ही मिल सकें, इसे लेकर हमलोगों ने स्वास्थ्य विभाग को तेजी से काम करने का निर्देश दिया है. राज्य के वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को आसान बनाने हेतु और क्या-क्या सुविधाएं दी जा सकती हैं, इसे चिह्नित किया जाना भी आवश्यक है. इस संबंध में अगर आप कोई विशिष्ट सुझाव देना चाहते हैं तो अपने बहुमूल्य सुझाव निम्न में से किसी एक माध्यम से दे सकते हैं.'  लोगों को अपने सुझाव देने के लिए एक क्यूआर कोड भी जारी किया गया है. जिसके माध्यम से अपनी बात सरकार तक पहुंचाई जा सकती है.

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत बोले- खरसावां के वीर शहीदों के वंशजों को सम्मानित करने बनेगा विशेष आयोग

रांची. श्झारखंड की मिट्टी शहादत की गाथाओं से भरी है। जितना समृद्ध इतिहास हमारे राज्य का हैए उतना किसी अन्य प्रदेश का नहीं।श् अनगिनत लोगों ने जलए जंगल और जमीन की रक्षा तथा आदिवासी अस्मिता के लिए अपनी जानें न्योछावर कीं। श्हम लड़े हैंए तभी बचे हैं। हमारे वीर सपूतों ने कभी हार नहीं मानी। उक्त बातें खरसावां गोलीकांड की 78वीं शहादत दिवस पर आज सरायकेला.खरसावां जिले के खरसावां स्थित शहीद पार्क में मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहीं। मौके पर मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक ;शहीद बेदीद्ध तथा वीर शहीद केरसे मुंडा चौक स्थित शहीद स्मृति.चिह्न पर श्रद्धांजलि अर्पित कर अमर वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। मंत्री दीपक बिरुवा, सांसद जोबा मांझी, विधायक दशरथ गगराई, विधायक सुखराम उरांव, विधायक सविता महतो, विधायक जगत मांझी तथा पूर्व विधायक लक्ष्मण टुडू सहित अनेक जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य व्यक्तियों ने भी शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर खरसावां के अमर वीरों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। खरसावां के वीर शहीदों के वंशजों को सम्मानित करने हेतु विशेष आयोग का होगा गठन झारखंड की धरती शौर्य और बलिदान की प्रतीक रही है। इस मिट्टी की हर कण में आदिवासियों और मूलनिवासियों के संघर्ष की गाथा समाई हुई है। इसी गौरवशाली परंपरा को नमन करते हुए मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने खरसावां गोलीकांड की 78वीं शहादत दिवस पर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है कि खरसावां के वीर शहीदों के वंशजों की पहचान कर उन्हें सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस दिशा में निर्णायक कदम की घोषणा करते हुए कहा कि एक विशेष आयोग का गठन किया जाएगाए जिसमें रिटायर्ड जजए स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाएगा। यह आयोग सभी दस्तावेजोंए ऐतिहासिक अभिलेखों और स्थानीय परंपराओं के आधार पर शहीद परिवारों की पहचान करेगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य उन परिवारों को उचित सम्मानए मान्यता और आर्थिक सहायता सुनिश्चित करना हैए जिन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर किए। मुख्यमंत्री ने इसे राज्य सरकार की प्राथमिकता के रूप में रेखांकित करते हुए कहाए श्हमारा यह नैतिक दायित्व है कि जिनकी कुर्बानी से झारखंड की अस्मिता और स्वतंत्र पहचान बचीए उनके वंशजों को गर्व और सम्मान के साथ जीने का अवसर मिले।श् उन्होंने कहा कि आगामी वर्ष तक सभी शहीद परिवारों की शिनाख्त कर समारोहपूर्वक सम्मानित किया जाएगा।मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह पहल केवल श्रद्धांजलि मात्र नहींए बल्कि एक इतिहास.संरक्षण अभियान है। इस अभियान से युवा पीढ़ी को अपने पूर्वजों के संघर्ष और बलिदान की जानकारी मिलेगी तथा उनमें राज्य के प्रति आत्मसम्मान की भावना प्रबल होगी। राज्य सरकार ने पहले भी स्वतंत्रता सेनानियोंए आंदोलनकारियों एवं शहीदों के परिजनों के कल्याण के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। अब खरसावां के वीरों के प्रति यह संवेदनशील कदम झारखंड की पहचान को और सशक्त करेगा। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि श्हमारा संघर्ष जीवित रहेगाए जब तक हर शहीद के परिवार को उसका सम्मान नहीं मिल जाता। यही हमारे राज्य की असली दिशा और पहचान है।श् आदिवासियों की अस्मिता के रक्षक, हमारे पथप्रदर्शक बाबा शिबू सोरेन को विनम्र नमन मुख्यमंत्री ने कहा कृ श्आज हमारे बीच झारखंड आंदोलन के दिशा.निर्देशकए हमारे बाबाए हमारे पथप्रदर्शक गुरुजी शिबू सोरेन नहीं हैं। हमने एक ऐसा वृक्ष खो दिया जिसकी छांव में राज्य के आदिवासियों और मूलवासी समाज ने अपना मार्ग पाया। गुरुजी हमारे लिए सदैव प्रेरणास्त्रोत रहेंगे।श् मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि  झारखंड के हर आंदोलनकारीए हर आदिवासीए हर ग्रामीण के दिल में गुरुजी का स्थान अमिट है। उन्होंने झारखंड की राजनीति में मानवीयताए सरलता और संघर्षशीलता की मिसाल कायम की। श्गुरुजी केवल एक व्यक्ति नहींए एक विचारधारा हैं कृ जो न्यायए समानता और आत्मसम्मान की राह दिखाती है।श् उन्होंने आगे कहा कि गुरुजी के सान्निध्य में झारखंड के आदिवासी समाज ने अपनी पहचान को पहचाना और उसे संविधान के दायरे में दर्ज कराया। हमने उनका मार्गदर्शन हमेशा अपने लिए ऊर्जा की तरह महसूस किया। उनका संघर्ष ही हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। गुरुजी अब हमारे बीच भले नहीं हैंए लेकिन उनकी छांवए उनका आशीर्वाद और उनका मार्गदर्शन हमेशा रहेगा। पेसा कानून से सशक्त होगा ग्राम स्वराज मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार ने झारखंड में पेसा कानून को लागू कर दिया हैए जिससे अब ग्रामसभा और ग्राम पंचायतों के माध्यम से ग्रामीणों को उनके अधिकार प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि श्यह कानून हमारे जलए जंगल और जमीन की सुरक्षा का आधार है। इसके माध्यम से ग्रामीण अपने संसाधनों पर स्वयं निर्णय ले सकेंगे और स्वशासन की भावना सशक्त होगी।श् मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सरकार का प्रयास रहेगा कि पेसा अधिनियम से संबंधित जानकारी प्रत्येक गांव तक पहुंचे। इसके लिए राज्यभर में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा ताकि हर ग्रामीण अपने अधिकारों को जान सके और उनका उपयोग कर सके। उन्होंने कहा कि पेसा कानून हमारे पूर्वजों के संघर्ष और अधिकार भावना का प्रतीक हैए जो ग्राम स्वराज के वास्तविक स्वरूप को साकार करेगा। झारखंड का 25वां वर्षए नए विकास और सशक्तिकरण का प्रतीक मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड राज्य को बने 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं और अब यह युवा झारखंड विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहाए श्हमारा संकल्प है कि आने वाले वर्षों में झारखंड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल किया जाए। श्मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही हैए क्योंकि श्एक शिक्षित पीढ़ी ही मजबूत राज्य की नींव होती है।श् उन्होंने बताया कि गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना के तहत छात्र 15 लाख रुपये तक का ऋण 4ः ब्याज दर पर लेकर पढ़ाई कर सकते हैंए जिसकी वापसी नौकरी लगने के बाद ही करनी होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना को महिला सशक्तिकरण की मिसाल बताते हुए कहा कि इससे राज्य की बेटियां शिक्षितए आत्मनिर्भर और समाज में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। मुख्यमंत्री ने युवाओं से शहीदों के आदर्शों पर चलकर झारखंड के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। इस अवसर पर मंत्री दीपक बिरुवाए सांसद जोबा मांझी, विधायक दशरथ गगराई, विधायक सुखराम उरांव, विधायक समीर मोहंती, विधायक सविता महतो, विधायक जगत मांझी एवं पूर्व विधायक लक्ष्मण टुडू सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जिला के उपायुक्तए पुलिस अधीक्षकए सभी विभागों के पदाधिकारी तथा … Read more

बिहार के बड़े शहरों में बसाने नेपाल रूट से घुसाये जा रहे बांग्लादेशी

पटना/रक्सौल. भारत–नेपाल सीमा पर तीन बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी ने एक बार फिर उस अदृश्य नेटवर्क की ओर इशारा किया है, जो वर्षों से नेपाल को ट्रांजिट रूट बनाकर विदेशी नागरिकों को भारत में अवैध रूप से प्रवेश कराता रहा है। यह गिरफ्तारी महज संयोग नहीं, बल्कि सीमा क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय मानव तस्करी और घुसपैठ तंत्र का संकेत मानी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार बांग्लादेशी नागरिकों के लिए नेपाल सबसे आसान प्रवेश द्वार बन चुका है। नेपाल की वीजा नीति अपेक्षाकृत सरल होने के कारण विदेशी नागरिक पहले वहां टूरिस्ट वीजा पर पहुंचते हैं। इसके बाद सीमावर्ती भारतीय जिलों में सक्रिय एजेंट उन्हें बिना भारतीय वीजा के सीमा पार कराते हैं। स्थानीय गाइड नेटवर्क की पहली कड़ी गिरफ्तार सरफराज अंसारी को इस नेटवर्क की अहम कड़ी माना जा रहा है। पुलिस को संदेह है कि वह सिर्फ एक गाइड नहीं, बल्कि ऐसे कई लोग हैं, जो सीमावर्ती गांवों में रहकर विदेशी नागरिकों को सुरक्षित रास्तों से भारत में दाखिल कराते हैं। बदले में मोटी रकम वसूली जाती है। सूत्रों का दावा है कि अवैध रूप से भारत में प्रवेश कराने के बाद इन विदेशी नागरिकों को पटना, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था पहले से तय रहती है। वहां उनके ठहरने, काम और पहचान छिपाने तक की योजना बनाई जाती है। सीमा सुरक्षा पर गंभीर सवाल इस घटना ने सीमा सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि यदि एसएसबी द्वारा नए वर्ष को लेकर विशेष अलर्ट जारी नहीं किया गया होता, तो यह समूह भी आसानी से सीमा पार कर जाता। यह दर्शाता है कि सामान्य दिनों में नेटवर्क कितनी सहजता से सक्रिय रहता है। भारत–नेपाल सीमा से पहले भी घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज और मानव तस्करी से जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद नेटवर्क का पूरी तरह भंडाफोड़ न होना प्रशासनिक चुनौतियों को उजागर करता है। एसएसबी और पुलिस कर रही गहन जांच एसएसबी और जिला पुलिस की संयुक्त टीम मोबाइल डेटा, काल डिटेल, नेपाल में ठहरने के रिकार्ड और भारत में संपर्क सूत्रों की गहन जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि नेटवर्क से जुड़े कितने एजेंट अब भी सक्रिय हैं और किन-किन रास्तों का इस्तेमाल किया जाता है। यह मामला केवल चार लोगों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते इस नेटवर्क की जड़ तक नहीं पहुंचा गया, तो सीमावर्ती इलाकों के रास्ते अवैध गतिविधियों का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।

नए साल का जश्न प्रकृति के बीच: लोध फॉल में उमड़ी सैलानियों की भीड़, झरने का नजारा बना आकर्षण

रांची नववर्ष के पहले दिन झारखंड के लातेहार जिले में स्थित राज्य का सबसे ऊंचा जलप्रपात लोध फॉल पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण बना रहा। राजधानी रांची से लगभग 200 किलोमीटर और लातेहार जिला मुख्यालय से करीब 110 किलोमीटर दूर महुआडांड़ प्रखंड में स्थित इस प्राकृतिक धरोहर को देखने के लिए हजारों की संख्या में पर्यटक पहुंचे। लोध फॉल झारखंड का सबसे ऊंचा जलप्रपात है नए साल की शुरुआत प्रकृति के बीच करने की चाह में आए सैलानियों से पूरा क्षेत्र गुलजार नजर आया। लोध फॉल झारखंड का सबसे ऊंचा जलप्रपात है, जहां बूढ़ा नदी का पानी लगभग 143 मीटर की ऊंचाई से सीधे धरती पर गिरता है। पहाड़ियों से घिरा यह जलप्रपात न केवल झारखंड बल्कि आसपास के राज्यों के पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। नववर्ष के अवसर पर यहां पहुंचे पर्यटक जलप्रपात की ऊंचाई, कलकल करती जलधारा और चारों ओर फैली हरियाली को देखकर मंत्रमुग्ध नजर आए। पर्यटकों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और वन विभाग की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। जलप्रपात के नीचे जहां पानी काफी गहरा है, वहां किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचाव के लिए पानी में उतरने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी वन विभाग द्वारा गठित विकास समिति के माध्यम से की जाती है, क्योंकि यहां देश के साथ-साथ विदेशों से भी पर्यटक पहुंचते हैं। नवंबर महीने से यहां पर्यटकों की आमद शुरू हो जाती है घूमने आए सैलानियों ने बताया कि लोध फॉल की खूबसूरती मन को सुकून देने वाली है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी से तीन अलग-अलग दिशाओं में गिरती जलधाराएं इस स्थान की सुंदरता को और भी खास बना देती हैं। हालांकि कुछ पर्यटकों ने यह भी कहा कि यदि जलप्रपात के पास बने लकड़ी के पुल की मरम्मत कर दी जाए, तो भ्रमण का अनुभव और बेहतर हो सकता है। लोध फॉल झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के पर्यटकों के लिए पसंदीदा पर्यटन स्थल है। नवंबर महीने से यहां पर्यटकों की आमद शुरू हो जाती है, जो मार्च तक लगातार बनी रहती है। लोध फॉल तक सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। रांची, पलामू, लातेहार या छत्तीसगढ़ से सड़क मार्ग द्वारा पहले महुआडांड़ पहुंचना होता है। इसके बाद महुआडांड़ से करीब 17 किलोमीटर दूर स्थित पाकिर्ंग स्थल तक वाहन ले जाया जा सकता है। वहां से लगभग एक किलोमीटर पैदल चलकर पर्यटक जलप्रपात तक पहुंचते हैं।  

डॉ. नुसरत समेत आयुष डॉक्टरों को एक और मौका, ज्वाइनिंग डेट बढ़ाने का फैसला

पटना हिजाब विवाद से चर्चित डॉ. नुसरत परवीन को नीतीश सरकार ने नौकरी ज्वाइन करने का एक और मौका दिया है। 31 दिसम्बर को लास्ट डेट तक नुसरत ने योगदान नहीं दिया था। शुक्रवार को एक बार फिर आयुष चिकित्सकों के लिए योगदान करने की तारीख बढ़ा दी गई। अब सात जनवरी तक आयुष डॉक्टर नौकरी ले सकते हैं। 15 दिसम्बर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अंतिम रूप से चयनित डॉक्टरों के बीच नियुक्ति पत्र का वितरण किया था। वितरण समारोह का एक वीडियो विपक्षी दल राजद ने वायरल कर नीतीश कुमार की जमकर आलोचना की। इस मामले में बिहार के अलावे झारखंड और कश्मीर में भी राजनीति की गई।   मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जिन आयुष चिकित्सकों की बहाली की गई उनमें करीब 12 प्रतिशत डॉक्टरों ने योगदान नहीं किया है। इनमें डॉ.नुसरत भी शामिल हैं। इन्हें फिर से मौका दिया गया है। पहले ज्वाइनिंग के लिए 20 दिसम्बर की तारीख तय थी। बड़ी संख्या में डॉक्टरों ने ज्वाइन नहीं किया। उसके बाद 31 दिसम्बर तक तारीख बढ़ा दी गई। इंतजार किया जा रहा था कि नुसरत नौकरी पर आ जाएंगी। पर ना वह खुद पहुंची और ना ही उनके परिजनों से कोई जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी। पटना सिविल सर्जन ने यह जानकारी दी। शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग ने एक बार फिर डेट बढ़ा दिया। अब सात जनवरी तक आयुष डॉक्टर योगदान दे सकते हैं। बताया जा रहा है कि सरकार चाहती है कि नुसरत नौकरी करें और मरीजों की सेवा करें क्योंकि इस प्रकरण में नीतीश कुमार की काफी किड़किड़ी हुई थी। नियुक्ति पत्र लेने आई डॉ नुसरत ने नकाब पहन रखा था जिसे नीतीश कुमार ने हटा दिया। राजद ने यही वीडियो वायरल कर दिया। दरअसल डॉ नुसरत की नौकरी स्वास्थ्य विभाग से ज्यादा सियासी मामला बन गया है। पॉलिटिकल वार, प्रतिवार के बीच नुसरत और उसका पूरा परिवार खामोश है। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भी उन्हें नौकरी कर लेने की सलाह दी है। उधर झारखंड में हेल्थ मिनिस्टर डॉ इरफान अंसारी ने उन्हें तीन लाख मासिक तनख्वार पर नौकरी पेशकश कर दी। बाद में सीएम हेमंत सोरेन की पार्टी ने इस पर अलग राय जाहिर कर दिया। कश्मीर में पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती की बहू बिल्किस सीएम नीतीश कुमार पर केस दर्ज कराने थाने पहुंच गईं।  

न्यू ईयर सेलिब्रेशन में झारखंडियों ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, तीन दिन में करोड़ों की शराब बिकी

रांची नए साल के जश्न ने झारखंड में शराब की बिक्री के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। 31 दिसंबर की रात राज्यभर में जश्न, पार्टियों और नाइट सेलिब्रेशन का असर सीधा शराब की दुकानों पर दिखा, जहां देर रात तक भारी भीड़ लगी रही। तीन दिनों में 65 करोड़ रुपये की शराब बिकी 30 दिसंबर से 1 जनवरी तक राज्य में लगभग 65 करोड़ रुपये के शराब की बिक्री का अनुमान है। झारखंड शराब व्यापारी संघ के प्रदेश महासचिव सुबोध कुमार जायसवाल ने बताया कि तीन दिनों में बिक्री 65 से 70 करोड़ रुपये के बीच रही। उन्होंने कहा कि मांग के अनुरूप पूरी बिक्री नहीं हो पाई। सर्वाधिक बिक्री 31 दिसंबर को हुई, जब पूरे राज्य में लगभग 30 करोड़ रुपये की शराब बिकी। पिछले वर्ष 60 करोड़ रुपये की शराब की बिक्री हुई थी कहा जा रहा है कि यह पिछले साल 31 दिसंबर की तुलना में लगभग ढाई करोड़ रुपये अधिक है। पिछले वर्ष इसी मौके पर तीन दिनों में लगभग 60 करोड़ रुपये की शराब की बिक्री हुई थी।  

अखिल भारतीय न्यायाधीश बैडमिंटन टूर्नामेंट की मेजबानी करेगा रांची, 3 जनवरी से होगा आगाज़

रांची झारखंड उच्च न्यायालय के तत्वावधान में दूसरा ऑल इंडिया न्यायाधीश बैडमिंटन टूर्नामेंट का आयोजन 03 से 04 जनवरी तक रांची में किया जाएगा। इस प्रतियोगिता का आयोजन रांची के होटवार स्थित खेल गांव परिसर के ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव इंडोर स्टेडियम में किया जाएगा। 30 से ज्यादा न्यायाधीश प्रतियोगिता में लेंगे भाग इस प्रतियोगिता में देश के विभिन्न 09 उच्च न्यायालयों के 30 से ज्यादा न्यायाधीश भाग लेंगे। टूर्नामेंट का उद्देश्य न्यायपालिका से जुड़े पदाधिकारियों के बीच खेल भावना, आपसी सौहार्द, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता तथा सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देना है। उच्च न्यायालय द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता के सफल एवं सुचारु संचालन को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। खेल गांव परिसर में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बैडमिंटन कोर्ट, खिलाड़ियों के विश्राम, चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा व्यवस्था एवं अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। चार श्रेणियों में मुकाबले आयोजित किए जाएंगे प्रतियोगिता के दौरान चार श्रेणियों में मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। मेन सिंगल, मेन डबल्स, वूमेन सिंगल्स और मिक्स्ड डबल्स में देशभर से आए न्यायाधीश अपने खेल कौशल का प्रदर्शन करेंगे। टूर्नामेंट के समापन पर विजेता एवं उपविजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा सभी प्रतिभागियों एवं आगंतुकों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। उल्लेखनीय है कि पहला ऑल इंडिया न्यायाधीश बैडमिंटन टूर्नामेंट का आयोजन 05-06 जनवरी 2025 को ओडिशा में आयोजित किया गया था।  

मुख्यमंत्री नितीश ने सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भवन का किया निरीक्षण

पटना. मुख्यमंत्री नीतीष कुमार ने आज राजवंषी नगर स्थित लोकनायक जयप्रकाष नारायण सुपर स्पेषयलिटी अस्पताल के भवन निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देष दिया कि इस 400 बेड के हड्डी रोग के अति विषिष्ट अस्पताल भवन के निर्माण कार्य को तेजी से पूर्ण करें। उन्होंने कहा कि हमलोगों का उद्देष्य है कि मरीजों को एक ही छत के नीचे व्यापक और इलाज की अत्याधुनिक सुविधायें उपलब्ध हो। इसी के तहत लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल, राजवंशी नगर, पटना को हड्डी रोग के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित किया गया है और इस अति विषिष्ट अस्पताल का नया भवन बनाया जा रहा है। यहां हड्डी रोग से संबंधित बीमारियों के इलाज की आधुनिक सुविधाओं से युक्त बेहतर व्यवस्था की गयी है। मुख्यमंत्री ने लोकनायक जयप्रकाष नारायण अस्पताल का भी निरीक्षण किया और वहां की व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली। वहां उपस्थित मरीजों एवं उनके अभिभावकों से स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों निर्देष दिया कि मरीजों का इलाज बेहतर ढंग से हो, इसमें किसी प्रकार की कोताही न हो। ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2012 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल, राजवंशीनगर, पटना को हड्डी रोग के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित करने की घोषणा की गयी थी, जहां पर हड्डी रोग से संबंधित सभी प्रकार के इलाज की अच्छी व्यवस्था रहे। इसके आलोक में इस अस्पताल परिसर में ही 215 करोड़ रुपये की लागत से 400 बेड के अति विशिष्ट अस्पताल भवन के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गयी। इस 6 मंजिला अस्पताल भवन का निर्माण कार्य जारी है जो मार्च 2026 तक पूरा हो जाएगा। इसमें 250 वाहनों के पार्किंग, 6 लिफ्ट, 6 ऑपरेशन थियेटर, 42 आई0सी0यू0 बेड, 15 प्राइवेट वार्ड इत्यादि की व्यवस्था है। इस अति विशिष्ट अस्पताल में समुचित इलाज के लिए 66 चिकित्सकों सहित कुल 140 पदों का सृजन किया गया है। इस अति विशिष्ट अस्पताल के शुरू हो जाने से हड्डी रोग के मरीजों को काफी फायदा होगा। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेष कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, मुख्यमंत्री के सचिव डाॅ. चन्द्रषेखर सिंह, जिलाधिकारी डाॅ. त्यागराजन एस0एम0 सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।    

बिहार को इस साल मिलेगा पहला छह लेन हाइवे

पटना. नए वर्ष (2026) में सड़क के मामले में बिहार को नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे की सौगात मिल सकती है। इस वर्ष बिहार को पहली छह लेन सड़क मिल जाएगी। बिहार का पहला एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे का काम भी नए साल में पूरा होगा, जबकि चार एक्सप्रेस-वे पर इसी साल काम शुरू होने की उम्मीद है। पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार वाराणसी-औरंगाबाद छह लेन सड़क परियोजना अंतिम चरण में है। बिहार का यह पहला छह लेन नेशनल हाईवे है। इसका काम नए वर्ष में पूरा हो जाएगा। इसके बनने से बिहार से यूपी होते हुए दिल्ली तक आना-जाना आसान हो जाएगा। इसी तरह औरंगाबाद से चोरदाहा छह लेन सड़क परियोजना का काम भी पूरा हो जाएगा। इसके बनने से बिहार से झारखंड व बंगाल तक का सफर आसान होगा। नए वर्ष में बिहार को पहला एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे का काम पूरा होगा। आमस से दरभंगा के बीच बन रहा नेशनल हाईवे का काम 2025 में ही पूरा होना था। संशोधित लक्ष्य वर्ष 2026 तय किया गया है। कुछेक और सड़क परियोजनाओं का काम नए साल में पूरा होगा। चकिया-बैरगनिया दो लेन सड़क और परसरमा-सहरसा-महिषि दो लेन सड़क का काम भी इसी वर्ष पूरा होगा। पटना-बेतिया का खंड सोनपुर-बकरपुर-मानिकपुर का काम पूरा होगा। इससे पटना एम्स से जेपी गंगा पथ होते हुए सोनपुर, बकरपुर आना-जाना आसान होगा। कच्ची दरगाह-बिदुपुर और बख्तियारपुर-ताजपुर का काम नए साल में पूरा हो जाएगा। गया-बिहारशरीफ चार लेन, बायसी-बहादुरगंज-दीघलबैंक, बेतिया-नरकटियागंज, कादिरगंज-खैरा, मीठापुर-महुली, कटिहार-बलरामपुर, मानसी-सिमरी बख्तियारपुर, अम्बा-देव-मदनपुर का काम नए साल में पूरा हो जाएगा। केंद्र सरकार ने पटना से पूर्णिया के बीच बन रही सड़क को एक्सप्रेस-वे को दर्जा दे दिया है। जल्द ही वित्तीय मंजूरी मिल जाएगी। इस तरह बिहार के पहले एक्सप्रेस-वे का काम नए साल में शुरू हो जाएगा। अन्य एक्सप्रेस-वे में गोरखपुर-सिलीगुड़ी, रक्सौल-हल्दिया और बक्सर-भागलपुर का काम शुरू हो सकता है। पटना-आरा-सासाराम के बीच बन रहा एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे का काम भी नए साल में शुरू हो जाएगा। सोन नद पर पुल बनाने का काम भी शुरू होगा वाराणसी-कोलकाता के दो खंड में रोहतास के सुरक्षित वन क्षेत्र में सड़क का नए सिरे से निर्धारण और सोन नद पर पुल बनाने का काम नए साल में शुरू हो जाएगा। भागलपुर-हंसडीहा चार लेन, पटना-औरंगाबाद में अरवल, दाउदनगर बाईपास का काम नए साल में शुरू हो जाएगा। इसके अलावा राज्य के कई स्टेट हाईवे का काम भी नए साल में पूरा होगा। इससे लोगों को और अधिक सुविधा मिलेगी। भागलपुर-मुंगेर में मरीन ड्राइव का काम शुरू होगा वित्तीय संस्थानों की मदद से राज्य सरकार अपनी ओर से कुछेक स्टेट हाईवे का काम शुरू कर सकता है। खासकर भागलपुर और मुंगेर में गंगा किनारे मरीन ड्राइव की योजना पर काम शुरू होगा। इसका भी लोगों को इंतजार है। देश के सबसे बड़े पुल का काम होगा शुरू समस्तीपुर के मुक्ता में नए आरओबी, बूढ़ी गंडक पर दो लेन पुल, बरबीघा-शेखपुरा-जमुई-बांका-पंजवारा दो लेन सड़क का काम नए साल में शुरू होगा। दरभंगा-जयनगर चार लेन चौड़ीकरण का काम शुरू होगा। मोकामा-मुंगेर चार लेन सड़क, डुमरांव, नासरीगंज, दावथ बाइपास, अररिया-परसरमा दो लेन, बक्सर-चौसा चार लेन बाईपास का काम नए साल में शुरू होगा। गंडक नदी पर देश का सबसे बड़े पुल का काम नए साल में शुरू होगा। खगड़िया-पूर्णिया चार लेन और मुजफ्फरपुर-सोनबरसा चार लेन सड़क का काम भी शुरू होगा।

बिहार में नये साल पर 3 लाख नौकरियां और दस लाख मिलेंगे रोजगार

पटना. नये साल 2026 में बिहार में जॉब की बहार आएगी। बिहार के 25 हजार युवाओं को इंटर्नशिप का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना के अंतर्गत विभिन्न कंपनियों में युवाओं को इंटर्नशिप कराया जा रहा है। मार्च तक पांच हजार तथा इसके बाद अप्रैल माह से नये वित्तीय वर्ष में 20 हजार युवाओं को इसका लाभ दिया जाएगा। इसके लिए प्रदेश और दूसरे राज्यों की 50 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियों ने अपनी रुचि दिखायी है। अपनी जरूरत के अनुसार कंपनियों युवाओं का चयन कर इंटर्नशिप करा रही है। वहीं, राज्य सरकार के द्वारा इन युवाओं को चार से छह हजार रुपये महीने इंटर्नशिप दिया जा रहा है। 1.5 लाख रिक्तियों को भरने की अनुशंसा नये वर्ष में इन पदों पर नियुक्ति करने वाली संस्थाओं एवं आयोगों को अनुशंसा के साथ भेजी जाएगी। जबकि, 1.5 लाख रिक्तियों को भरने की अनुशंसा नियुक्ति करने वाली विभिन्न संस्थाओं एवं आयोगों को भेजी जा चुकी है। इन पदों पर रिक्तियों को लेकर आवेदन प्राप्त किए जाने और नियुक्ति हेतु प्रारंभिक परीक्षाओं के आयोजन की तैयारी शुरू हो चुकी है। विभाग के अनुसार, राज्य सरकार के सात निश्चय-2 के तहत वर्ष 2020-25 के बीच पांच साल में राज्य में 50 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी एवं रोजगार दिया गया है। पुलिस में 30 हजार से अधिक पदों पर होगी बहाली नये साल में 24 हजार से अधिक सिपाही सहित 30 हजार से अधिक विभिन्न पदों पर बहाली को पूरा किया जायेगा। बहाली विभिन्न चरण में प्रक्रियागत है। इनमें 19838 पुलिस सिपाही, 4366 चालक सिपाही, 1799 पुलिस दारोगा, 2417 कक्षपाल, 1685 मद्य निषेध सिपाही बहाल होंगे।108 चलंत दस्ता सिपाही, 33 प्रवर्तन अवर निरीक्षक, 25 सहायक जेल अधीक्षक (भूतपूर्व सैनिक) और 24 वनों के क्षेत्र पदाधिकारी (रेंज ऑफिसर) के पद शामिल हैं। उद्योगों में दस लाख रोजगार उपलब्ध होंगे सूबे के उद्योग में नये साल में लगभग दस लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा। इसके अलावा उद्योगों में एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष नौकरी मिलने की संभावना है। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में 11 हजार नए उद्यमी बनेंगे। इसके माध्यम से अलग से युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। बिहार में इस समय उद्योगों में सालाना लगभग 50 हजार लोगों को नौकरी मिल रही है। लेकिन इसकी संख्या हर साल लगभग दोगुनी हो रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस साल एक लाख लोगों को नौकरी के अवसर मिलेंगे। आने वाले समय में यह संख्या बढ़ सकती है। वहीं, अगले पांच वर्षों (2025-30) में 1 करोड़ युवाओं को नौकरी एवं रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।