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पहले चरण की वोटिंग से पहले बड़ा झटका, संजय सिंह ने जन सुराज छोड़ BJP में किया शामिल

मुंगेर  विधानसभा चुनाव से ठीक एक दिन पहले मुंगेर सीट पर बड़ा उलटफेर हो गया है. जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार संजय सिंह ने अचानक पार्टी छोड़कर भाजपा (एनडीए) का दामन थाम लिया है. संजय सिंह ने आज भाजपा प्रत्याशी कुमार प्रणय की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली और उनके समर्थन में उतर आए. इस कदम से मुंगेर में चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं. मतदान से ठीक पहले जन सुराज के उम्मीदवार का भाजपा में शामिल होना विपक्ष के लिए झटका साबित हो सकता है. अब देखना यह होगा कि इस फैसले का असर मतदान पर कितना पड़ता है. बता दें कि मुंगेर में कल वोटिंग है. इससे पहले अक्टूबर में जन सुराज के तीन और उम्मीदवारों ने नाम वापल ले लिए थे. ये कैंडिडेट दानापुर, ब्रह्मपुर और गोपालगंज शामिल थे. और अब इस लिस्ट में मुंगेर का नाम शामिल हो गया है. जोरदार स्वागत मुंगेर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जन सुराज के पूर्व प्रत्याशी संजय सिंह का भाजपा में जोरदार स्वागत किया गया. इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष अरुण पोद्दार, जिला प्रभारी विकास सिंह, क्षेत्रीय प्रभारी राजेश झा, प्रीति सिंह समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे. भाजपा में शामिल होते हुए संजय सिंह ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही बिहार और देश का विकास संभव है. जन सुराज की सोच अच्छी थी, लेकिन जनता भाजपा के विकास मॉडल पर भरोसा करती है. अब मैं भाजपा प्रत्याशी कुमार प्रणय की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम करूंगा.” मुकाबले में अब नए समीकरण संजय सिंह के भाजपा में शामिल होने के बाद मुंगेर की सियासत में हलचल तेज हो गई है. माना जा रहा है कि यह कदम विधानसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर ला सकता है. सूत्रों के मुताबिक, भाजपा इसे “मास्टरस्ट्रोक” मान रही है, जबकि जन सुराज समर्थकों में नाराजगी देखने को मिल रही है. पहले से ही त्रिकोणीय माने जा रहे मुकाबले में अब नए समीकरण बनते दिख रहे हैं. चर्चा में कुमार प्रणय की प्रॉपर्टी बता दें कि मुंगेर सीट से बीजेपी उम्मीदवार कुमार प्रणय इन दिनों अपनी संपत्ति को लेकर चर्चा में हैं. नामांकन के दौरान दिए गए हलफनामे में उन्होंने इतनी बड़ी संपत्ति की जानकारी दी है कि लोग हैरान रह गए. प्रणय की कुल संपत्ति करीब 177 करोड़ रुपये बताई गई है, जिससे वे बिहार चुनाव के सबसे अमीर उम्मीदवारों में शामिल हो गए हैं.

पहले चरण की वोटिंग से पहले सियासी संग्राम थमा! Bihar Election 2025 में तेजस्वी-खेसारी के बीच मुकाबला रोचक

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पहले चरण में 6 नवंबर को होने वाले मतदान के लिए आज चुनाव प्रचार खत्म हो गया। पहले चरण में राज्य के कुल 121 विधानसभा सीटों पर मतदान होने वाले हैं। इसके लिए चुनाव आयोग ने पूरी तैयारी कर ली है। पहले चरण के चुनाव प्रचार के आखिरी दिन सभी दलों ने जनता को अपने पक्ष में वोट करने के लिए अपील किया। बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मुख्य मुकाबला दो मुख्य गठबंधनों, एनडीए और महागठबंधन के बीच माना जा रहा है लेकिन प्रशांत किशोर की जन सुराज ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। एनडीए में जहां भाजपा, जनता दल (यूनाइटेड), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल हैं। वहीं महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस, वीआईपी, भाकपा, भाकपा-माले और माकपा साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं।    पहले चरण के प्रमुख विधानसभा क्षेत्र पहले चरण के लिए लिए अगर प्रमुख विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो तारापुर में उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (भाजपा) और राजद के अरुण कुमार के बीच के मुकाबले पर सबकी नजर रहेगी। वहीं इस चरण पूरे बिहार नजर  राजद के पारंपरिक गढ़ राघोपुर पर रहने वाली है। यहां से महागठबंधन के सीएम कैंडिडेट तेजस्वी यादव का मुकाबला भाजपा के सतीश कुमार यादव से होने वाला है।  इसके अलावा महुआ विधानसभा सीट पर भी सबकी निगाहें रहने वाली है। यहां मुख्य मुकाबला लालू यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के तेज प्रताप यादव और मुकेश कुमार रौशन के बीच माना जा रहा है। महुआ में तेजस्वी की रैली ने इस सीट पर परिवार की लड़ाई और तेज कर दी है। साथ ही अलीनगर और छपरा सीट पर सबकी नजरें रहने वाली है। अलीनगर से भाजपा की मैथिली ठाकुर तो छपरा से खेसारी लाल यादव चुनावी मैदान में हैं। पहले चरण के प्रमुख उम्मीदवार बिहार चुनाव के पहले चरण में कई दिग्गजों के किस्मत का फैसला होने वाला है। जिसमें  राजद नेता तेजस्वी यादव से लेकर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा का नाम शामिल है। इसके अलावा लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा नाम भी शामिल है। साथ ही भोजपुरी के ट्रेंडिंग स्टार खेसारी लाल यादव और मैथिली ठाकुर के भाग्य का फैसला भी पहले चरण में ही होने वाला है। चुनाव आयोग के आंकड़ों को देखें तो पहले चरण में कुल 1,314 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।   

PM मोदी का दावा: इस बार बिहार में NDA की जीत होगी ऐतिहासिक, टूटेंगे सारे रिकॉर्ड

नई दिल्ली  बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता भी चुनाव मैदान में उतर गए हैं। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बिहार की मातृशक्ति के साथ ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत- महिला संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन हुआ। पीएम मोदी ने ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत- महिला संवाद’ कार्यक्रम में कहा कि इस चुनाव में मुझे जहां-जहां जाने का मौका मिला और जब-जब कार्यकर्ताओं से बात करने का अवसर मिला, मैं देख रहा हूं कि इस बार बिहार का कार्यकर्ता जी-जान से जुटा हुआ है। आप सभी बहुत परिश्रम कर रहे हैं। हर रैली पहले वाली रैली का रिकॉर्ड तोड़ रही है, और उसमें भी हमारी बहनें-बेटियां बहुत बड़ी संख्या में आ रही हैं। बिहार भाजपा की महिला कार्यकर्ताएं 'मेरा बूथ, सबसे मजबूत' संकल्प के साथ बहुत शानदार काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में ये पक्का हो चुका है कि एनडीए की विजय हो रही है, बहुत भारी विजय हो रही है। आज बिहार में जो विकास हो रहा है, वो गरीब, दलित, महादलित, पिछड़ा, अति-पिछड़ा, सभी के मन में रच-बस गया है। बिहार के लोग मन बना चुके हैं कि इस बार एनडीए की जीत का पिछले 20 साल का रिकॉर्ड तोड़ देंगे। वही जंगलराज वालों को अब तक की सबसे करारी हार मिलेगी। बिहार का विकास एनडीए ही कर सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बिहार में एनडीए सरकार ही बहनों-बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है, इसलिए बिहार की हर नारीशक्ति कह रही है- फिर एक बार एनडीए सरकार, फिर एक बार सुशासन की सरकार। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार महिलाओं के जीवन को आसान बनाने और उन्हें सशक्त करने के लिए लगातार काम कर रही है। बिहार में बिजली का खर्च कम हुआ है। सीएम नीतीश कुमार ने तय यूनिट बिजली मुफ्त कर दी है। इससे लोगों को बहुत लाभ हो रहा है। हमने बिहार के कई शहरों में मेट्रो चलाने की तैयारी की है। उन्होंने कहा कि जंगलराज के दौर में बेटियों का बाहर निकलना मुश्किल था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। आज रात के समय में भी अस्पतालों में, रेलवे स्टेशनों पर, और अनेक जगहों पर बेटियां बिना डर के काम कर रही हैं। बिहार की महिलाएं जंगलराज के सामने दीवार बनकर खड़ी हो गई हैं। उन्होंने ठान लिया है कि जंगलराज की वापसी कभी नहीं होने देंगी, इसलिए जंगलराज वाले बिहार की महिलाओं को तरह-तरह के झूठ बोलने में जुटे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि जब सुशासन होता है, कानून व्यवस्था का राज होता है तो महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं, इसलिए बिहार की बेटियां अब स्वरोजगार के जरिए नौकरी देने वाली भी बन रही हैं। मुद्रा योजना ने छोटे व्यापार के सपने पूरे किए हैं। जीविका दीदी और डेयरी योजनाओं ने आत्मनिर्भरता की ताकत दी है। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में ऐसी विजय देनी है कि जिन्होंने झूठ बोला है, छठी मईया का अपमान किया है, और बिहार को जिन्होंने जंगलराज में रखा था, उनकी जमानत जब्त होनी चाहिए।

जनसुराज बनाम महागठबंधन: प्रशांत किशोर की पार्टी को मिलेगी कितनी सीटें, देखें सर्वे रिपोर्ट

पटना बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान चरम पर पहुंच चुका है। एनडीए और महागठबंधन की ओर से अपनी-अपनी जीत के दावे किए जा रहे हैं। इस बीच आए एक और सर्वे में बिहार में एक बार फिर नीतीश सरकार का अनुमान जाहिर किया गया है। आईएएनएस और मैटराइज की ओर से किए गए ओपिनियन पोल में एनडीए को 153 से 164 सीटें मिलने का अनुमान जाहिर किया गया है। वहीं, सर्वे ने प्रशांत किशोर की जनसुराज के प्रदर्शन को भी भांपने की कोशिश की है। ओपिनियन पोल के मुताबिक जनसुराज इस चुनाव में खाता तो खोल सकती है, लेकिन सीटों की संख्या प्रशांत किशोर के दावों से काफी कम रह सकती हैं। सर्वे में जनसुराज को एक से 3 सीटें ही मिलने का अनुमान जाहिर किया गया है। पार्टी को 4 फीसदी वोट मिलने का अनुमान जाहिर किया गया है। प्रशांत किशोर की पार्टी बिहार की 243 में से 238 सीटों पर लड़ रही है। पार्टी उम्मीदवारों के लिए प्रचार में व्यस्तता की वजह से खुद प्रशांत किशोर किसी सीट से नहीं लड़ रहे हैं। ओवैसी की एआईएमआईएम का क्या हाल महागठबंधन में शामिल होने में विफल रही असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को महज एक फीसदी वोट शेयर मिलने का अनुमान जाहिर किया गया है। ओवैसी की पार्टी के खाते में एक से दो सीटें जा सकती हैं। अन्य को 8 फीसदी वोट शेयर और 0-4 सीटें मिलने की भविष्यवाणी की गई है। एनडीए को 153-164 सीटें मिलने का अनुमान भारतीय जनता पार्टी- 83-87 सीटें जनता दल यूनाइटेड- 61-65 सीटें हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा- 4-5 सीटें लोक जनशक्ति पार्टी- 4-5 सीटें राष्ट्रीय लोक मोर्चा- 1-2 सीटें महागठबंधन के लिए क्या अनुमान राष्ट्रीय जनता दल- 62-66 सीटें कांग्रेस- 7-9 सीटें सीपीआई (ML)- 6-8 सीटें सीपीआई- 0-1 सीट सीपीआई- (एम)- 0-1 सीट विकासशील इंसान पार्टी- 1-2 सीटें

बिहार चुनाव सर्वे: NDA को प्रचंड बढ़त, विपक्ष हुआ बेअसर! देखें कौन टॉप, कौन फ्लॉप

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एक और ओपिनियन पोल आ गया है। IANS-MATRIZE के सर्वे में एनडीए सरकार की वापसी का अनुमान लगाया गया है। एनडीए की इस चुनाव में भारी बहुमत से वापसी हो सकती है और भाजपा से लेकर जेडीयू तक को छप्परफाड़ सीटें मिलने की भविष्यवाणी की गई है। एजेंसी के अनुसार भाजपा इस चुनाव में सबसे बड़ा दल बनकर उभरेगी और उसे 83 से 87 सीटें मिल सकती हैं। इसके अलावा उसकी सहयोगी नीतीश कुमार की जेडीयू को 61 से 65 सीटें मिल सकती हैं। एनडीए को कुल मिलाकर 153 से 164 तक सीटें मिल सकती हैं। वोट शेयर की बात करें तो एनडीए 49 फीसदी मत हासिल कर सकता है।   वहीं महागठबंधन को बड़ा झटका लगने की संभावना है। पोल में बताया गया है कि लालू यादव की आरजेडी 62 से 66 सीटें ही हासिल करेगी और गठबंधन 76 से 87 सीटों तक ही सिमट सकता है। अनुमान है कि सबसे ज्यादा झटका कांग्रेस को लगेगा, जो महज 7 से 9 सीटें ही पाने की स्थिति में है। इसके अलावा वामपंथी दल सीपीआई-एमएल को 6 से 8 सीटें मिल सकती है। मुकेश सहनी की वीआईपी के खाते में 1 से 2 सीट जा सकती है। इससे पहले भी कई सर्वे आ चुके हैं, जिनमें एनडीए की ही वापसी का अनुमान लगाया गया है। यदि यह ओपिनियन पोल नतीजे में तब्दील होता है तो फिर नीतीश कुमार के कामकाज पर भी मुहर होगी, जो लगातार 20 सालों से राज्य का नेतृत्व कर रहे हैं। अनुमान है कि सबसे ज्यादा 22 फीसदी वोट आरजेडी को मिल सकता है। भाजपा के खाते में 21 फीसदी वोट जाएंगे, लेकिन सीटों में तब्दीली के मामले में भाजपा आगे है। ऐसा इसलिए क्योंकि जेडीयू, लोजपा जैसे दलों का वोट उसके खाते में काफी हद तक ट्रांसफर हो रहा है। माना जा रहा है कि सीट बंटवारे में समझदारी और समन्वय के चलते भी एनडीए को बढ़त मिली है। कांग्रेस को ज्यादा सीटें देने से होगा आरजेडी को नुकसान? वहीं कांग्रेस को 62 सीटों पर मौका मिला है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यही अनुमान सही रहा तो फिर इसका मतलब है कि आरजेडी को कांग्रेस के खाते में ज्यादा सीटें देने का नुकसान हुआ है। ऐसा ही यूपी में भी 2017 में हुआ था, जब सपा ने उसे 100 सीटें दी थीं और महज 7 पर ही उसे जीत हासिल हुई थी। ऐसे में यूपी की 2017 वाली गलती आरजेडी के लिए भी साबित हो सकती है।

चुनावी प्रचार खत्म होने से पहले तेजस्वी का मास्टरस्ट्रोक — महिलाओं को 30 हजार देने का ऐलान

पटना  महागठबंधन के सीएम उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने पहले चरण का चुनाव प्रचार थमने से कई बड़े वादे किए. तेजस्वी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि इस बार जनता बदलाव मूड में है. इस बार का वोट परिवर्तन का है. उन्होंने कहा कि जनता पुरानी सरकार को उखाड़ फेंकेगी. तेजस्वी यादव ने यह भी वादा किया कि सरकार सरकार बनते ही माई-बहिन मान योजना लागू कर दी जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि मकर संक्रांति के दिन 14 जनवरी के दिन पूरे एक साल का 30 हजार रुपये माताओं-बहनों के खाते में डालने का काम हम करेंगे. तेजस्वी ने कहा कि जीविका दीदियों का जितना शोषण इस सरकार में हुआ है, उनको कुछ नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि जीविका दीदी जो कम्युनिटी मोबिलाइजर्स हैं, उनको स्थायी करेंगे और 30 हजार मानदेय करेंगे. तेजस्वी ने कहा कि जो कैडर (जीविका दीदी) हैं, उनके लिए भी दो हजार रुपये प्रतिमाह देंगे. पांच लाख का बीमा कराएंगे और इंट्रेस्ट माफ करेंगे. उन्होंने पुरानी पेंशन योजना लागू करने का भी वादा किया. तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि पुलिसकर्मी हों, शिक्षक हों, स्वास्थ्यकर्मी हों या अन्य कर्मचारी हों, उनकी ट्रांसफर पोस्टिंग गृह जनपद से 70 किलोमीटर के दायरे में ही कराया जाएगा. उन्होंने किसानों के लिए भी बड़ा ऐलान किया. महागठबंधन के सीएम उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने कहा कि हमारी सरकार आएगी तो धान की फसल पर एमएसपी के अलावा प्रति क्विंटल तीन सौ रुपये, गेहूं पर प्रति क्विंटल चार सौ रुपये बोनस दिया जाएगा. उन्होंने सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली देने का भी वादा किया और यह भी कहा कि हम पैक्स के प्रतिनिधियों को भी जनप्रतिनिधि का दर्जा देंगे. तेजस्वी ने यह भी कहा कि पैक्स के प्रबंधकों को मानदेय देने पर भी विचार किया जाएगा. उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी ने आजतक कोई काम नहीं किया है. जो करना चाहता है, उसे भी नहीं करने देती. गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 121 विधानसभा सीटों के लिए 6 नवंबर को वोट डाले जाने हैं. इसके लिए चुनाव प्रचार 4 नवंबर की शाम पांच बजे थम जाएगा. चुनाव प्रचार थमने से पहले तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार बनने पर महिलाओं के खाते में पैसे भेजने की तारीख का ऐलान कर दिया है.

बिहार की हॉट सीट मोकामा: बाहुबलियों के गढ़ में दांव पर नीतीश की साख

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक चर्चा मोकामा सीट की हो रही है. पटना जिले के अंदर आने वाला मोकामा इसबार हॉट सीट होगा, ये तभी तय हो गया था जब जेडीयू से चुनाव लड़ रहे बाहुबली अनंत सिंह के खिलाफ इलाके के दूसरे बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को आरजेडी ने मैदान में उतार दिया. दो बाहुबलियों का मोकामा में आमने–सामने आना इस बात का संकेत था कि इस बार का बिहार चुनाव खास होगा. वोटिंग से ठीक 6 दिन पहले दुलारचंद यादव की हत्या हुई तो मोकामा एकबार फिर सुर्खियों में आ गया. दुलारचंद की हत्या का आरोप अनंत सिंह और उनके समर्थकों पर लगा. अब इसी मामले में अनंत सिंह जेल के अंदर हैं. जिस दुलारचंद यादव की हत्या हुई वह जन सुराज पार्टी के समर्थक बताए जा रहे हैं. उनकी हत्या के बाद लगभग 36 घंटे तक मोकामा से लेकर बाढ़ तक के इलाके में बवाल होता रहा. यह बवाल शांत नहीं होता अगर अनंत सिंह की गिरफ्तारी नहीं की जाती. दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में अनंत सिंह की गिरफ्तारी के बाद प्रशासन ने मोकामा में चुनावी हिंसा को नियंत्रित करने का प्रयास किया है. राज्य के डीजीपी खुद कह रहे हैं कि इस मामले में दूसरे पक्ष के आरोपियों की भी गिरफ्तारी होगी. मोकामा मानी जाती है भूमिहार बहुल सीट दुलारचंद यादव की हत्या के बाद मोकामा में जो तूफान मचा था उसको नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने भले ही कदम उठाए हों, लेकिन चुनावी हिंसा के बाद मोकामा में जातीय समीकरण नई तस्वीर गढ़ सकता है. मोकामा को भूमिहार बहुल सीट माना जाता है. शायद यही वजह है कि आजादी के बाद से लेकर अब तक हर विधानसभा चुनाव में यहां से जीत का सेहरा भूमिहार जाति से आने वाले किसी न किसी नेता के माथे पर ही बंधा है. मोकामा में कुल मतदाताओं का 30 फीसदी भूमिहार जाति से हैं. इस सीट पर लगभग 82 हजार भूमिहार वोटर्स हैं. यहां जाति के लिहाज से दूसरी सबसे बड़ी संख्या यादवों की है. मोकामा में 20 फीसदी यादव यानी लगभग 61 हजार वोटर्स हैं. यहां निर्णायक भूमिका में हैं धानुक वोटर्स अन्य सवर्ण जातियों में राजपूत और ब्राह्मण वोटर्स की संख्या को मिला दें तो उनकी तादाद लगभग 28 हजार है. मोकामा में तीसरी बड़ी आबादी कुर्मी और उसकी ही उपजाति कहे जाने वाली धानुक वोटर्स की है. कुर्मी और धानुक वोटर्स की तादाद यहां लगभग 47 हजार है. माना जाता है कि धानुक जाति के वोटर्स मोकामा में निर्णायक भूमिका अदा करते हैं. इसके अलावा दलित–महादलित वोटर्स तकरीबन 25 से 28 हजार और मुस्लिम वोटर्स की संख्या लगभग 11 हजार है. पिछले 20 साल से मोकामा विधानसभा सीट पर बाहुबली अनंत सिंह का कब्जा रहा है. दो दशक में अनंत सिंह जेडीयू के टिकट पर चुनाव जीते और निर्दलीय भी. उनकी पत्नी नीलम देवी ने पिछले उपचुनाव में आरजेडी के टिकट से जीत हासिल की थी. अनंत सिंह और वीणा देवी के बीच टक्कर अनंत सिंह एक बार फिर से जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. मोकामा में अनंत सिंह जिस जातीय समीकरण को साधते हुए लगातार जीत हासिल करते रहे हैं उसके पीछे भूमिहार और धानुक जाति के वोटर के गठजोड़ के अलावे अति पिछड़ी जातियों की गोलबंदी बड़ी वजह मानी जाती है. यही वजह है कि अनंत सिंह के खिलाफ भूमिहार जाति से आने वाले दूसरे उम्मीदवारों को हार का मुंह देखना पड़ता है. मोकामा में इस बार अनंत सिंह और सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी के बीच टक्कर है. ये दोनों भूमिहार जाति से आते हैं. दो भूमिहार उम्मीदवारों की टक्कर के बीच जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी की एंट्री ने जातीय समीकरण को ट्वीस्ट दे दिया है. एक तरफ सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी अनंत सिंह को जहां आरजेडी के आधार वोट के जरिए चुनौती दे रही हैं, वहीं दूसरी तरफ धानुक जाति के वोट बैंक में पीयूष प्रियदर्शी भी सेंध लगा सकते हैं. दुलारचंद यादव पीयूष प्रियदर्शी को समर्थन दे रहे थे और अब उनकी हत्या के बाद मोकामा में नए जातीय समीकरण बनने की आशंका है. बिहार का चुनावी इतिहास बताता है कि यादव और धानुक जाति के वोटर कभी जातीय गोलबंदी के साथ एकजुट होकर मतदान नहीं करते हैं. यादवों का समर्थन जिस तरफ होता है, धानुक जाति के वोटर्स उसके खिलाफ ही वोटिंग करते रहे हैं. यही वजह है कि बिहार में नीतीश कुमार गैर यादव पिछड़ा और अति पिछड़ा मतदाताओं की गोलबंदी के सहारे दो दशक से शासन में हैं. नीतीश की सोशल इंजिनियरिंग में धानुक जाति के मतदाताओं की भूमिका बेहद खास रही है. नीतीश के विरोधी भी इस बात को भली भांति समझते हैं और यही वजह रही कि तेजस्वी यादव ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कुछ नए प्रयोग के जरिए नीतीश के इस सोशल इंजीनियरिंग को साधने की कोशिश की थी. लव-कुश समीकरण को तोड़ने की कोशिश नीतीश के लव-कुश समीकरण को तोड़ने के लिए तेजस्वी यादव ने बीते लोकसभा चुनाव में कुशवाहा जाति के कई उम्मीदवार मैदान में उतारे थे. तेजस्वी ने यह प्रयोग इसबार भी जारी रखा है. आरजेडी ने कई कुशवाहा उम्मीदवारों को टिकट दिया है. तेजस्वी की नजर बीते लोकसभा चुनाव में भी धानुक वोटर्स को नीतीश से अलग करने की थी. इसीलिए मुंगेर लोकसभा सीट पर आरजेडी ने धानुक जाति के मतदाताओं को साधने के लिए अशोक महतो की पत्नी को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन ललन सिंह ने नीतीश की सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर चलते हुए तेजस्वी के इस प्रयोग को विफल कर दिया था. धानुक वोटर्स को साधने में तेजस्वी भले ही फेल रहे थे लेकिन इस बार प्रशांत किशोर ने शायद उनका काम आसान कर दिया. जन सुराज पार्टी ने मोकामा जैसी सीट पर धानुक जाति से आने वाले पीयूष प्रियदर्शी को उम्मीदवार बनाकर एनडीए के जातीय समीकरण को तोड़ने की कोशिश की है. हालांकि दुलारचंद यादव की हत्या के बाद अगर धानुक वोटर्स वाकई अनंत सिंह का साथ छोड़ते हैं तो इसका फायदा प्रशांत किशोर के उम्मीदवार से ज्यादा आरजेडी के उम्मीदवार को मिल सकता है. दुलारचंद यादव की हत्या के बाद मोकामा में जातीय गोलबंदी के लिए यह … Read more

झारखंड में ‘मोंथा’ तूफान शांत, अब बढ़ेगी सर्द हवाओं की सिहरन

रांची झारखंड में चक्रवाती तूफान‘मोंथा'का प्रभाव अब लगभग समाप्त हो चुका है। पिछले तीन दिनों से राज्य में लगातार बारिश हो रही थी, लेकिन अब बारिश के बादल छंट चुके हैं। मौसम विभाग ने बताया है कि आज यानी 4 नवंबर से रांची और आसपास का आसमान पूरी तरह साफ हो जाएगा। वहीं, अगले सात दिनों तक सुबह के समय धुंध और कोहरा सामान्य रहेगा। दिन के समय धूप खिली रहेगी और शाम को ठंड बढ़ने लगेगी और लोग गर्म कपड़ों का सहारा लेंगे। पिछले 24 घंटों में राज्य के बड़े जिलों में बारिश नहीं हुई है। साथ ही, शाम को ठंडी हवाओं के कारण तापमान में गिरावट आएगी। मौसम विभाग ने संभावना जताया है कि आने वाले दिनों में झारखंड में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की और गिरावट हो सकती है, जिससे ठंड के मौसम की औपचारिक शुरुआत मानी जाएगी। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो नवंबर के महीने में ठंड में तेज वृद्धि हुई है। वर्ष 2020 में 1 नवंबर को न्यूनतम तापमान 10.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था, जो उस वर्ष का सबसे कम तापमान था। वर्ष 2024 में भी 1 नवंबर को न्यूनतम तापमान 10.6 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचा था, जिससे ठंड का असर जल्दी दिखा था। अगले कुछ दिन झारखंड में ठंडक बढ़ने के संकेत हैं। इस दौरान सुबह के समय धुंध और शाम को ठंडी हवाओं के साथ ठंड में वृद्धि अनुभव की जाएगी। इस मौसम में गर्म कपड़ों का इस्तेमाल करना आवश्यक हो गया है।

घाटशिला उपचुनाव: झामुमो का तीर या भाजपा का कमल — जनता किसका देगी साथ?

घाटशिला घाटशिला उपचुनाव नजदीक है। 11 नवंबर को घाटशिला सीट पर चुनाव कराया जाएगा। वहीं, बता दें कि घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन, झामुमो के उम्मीदवार सोमेश चंद्र सोरेन और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के उम्मीदवार रामदास मुर्मू के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है जिससे घाटशिला विधानसभा उपचुनाव दिलचस्प बन गया है। बता दें कि कुल 13 प्रत्याशी घाटशिला विधानसभा उपचुनाव लड़ेंगे। 13 में से 9 प्रत्याशी पहली बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं, मुख्य मुकाबला फिलहाल सत्तारूढ़ झामुमो के सोमेश चंद्र सोरेन और भाजपा के बाबूलाल सोरेन के बीच है। एक तरफ झामुमो अपने दिवंगत नेता रामदास सोरेन की विरासत पर भरोसा जता रहे है तो दूसरी ओर, भाजपा नेता चंपई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन मोदी सरकार की योजनाओं के दम पर मैदान में उतरे हैं, लेकिन झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के प्रत्याशी रामदास मुर्मू ने मैदान में उतरकर इस बार मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। रामदास सोरेन के आकस्मिक निधन से खाली हुई इस सीट पर अब उनके बेटे सोमेश चंद्र सोरेन मैदान में हैं और भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन ताल ठोक रहे हैं। दोनों ही संताल समाज से आते हैं। इसलिए इसकी संभावना है कि आदिवासी मत दोनों तरफ जाएगा। भाजपा के अपने सहयोगी लोजपा के सहारे चार प्रतिशत दलित मतों को साथ लाने की कोशिश में हैं। झामुमो गठबंधन के मुस्लिम मंत्री भी अल्पसंख्यक मतों को अपने पाले में लाने के लिए लगे हैं, लेकिन भाजपा आदिवासी मतों के अलावा कुड़मी, पिछड़ी और अन्य दलित मतों पर नजर रख रही है। चंपाई के गहरे मित्र विद्युतवरण महतो की भी इस क्षेत्र में काफी पकड़ है। वे तीन बार से जमशेदपुर लोकसभा के सांसद भी हैं। ज्ञात हो कि रामदास सोरेन एक साल से ज्यादा समय से किडनी संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनका 15 अगस्त को एक अस्पताल में निधन हो गया था। इसी के कारण घाटशिला सीट पर उपचुनाव कराने की आवश्यकता पड़ी जिसके लिए 11 नवंबर को मतदान होगा। वहीं, चुनाव आयोग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस निर्वाचन क्षेत्र में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से लगभग पांच प्रतिशत अधिक है। 2,56,252 मतदाताओं में से 1,31,180 महिलाएं और 1,25,078 पुरुष मतदाता हैं।  

विदेशी शराब की अवैध फैक्ट्री पर छापा, पुलिस ने 11 लोगों को पकड़ा

बोकारो झारखंड में बोकारो जिले के चीरा चास थाना पुलिस में अवैध विदेशी शराब बनाने के आरोप में 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। बोकारो पुलिस ने बताया कि जिले के चिरा चास थाना क्षेत्र स्थित नन्दुआस्थान में झारखंड एटीएस, बिहार मद्य निषेध इकाई और चिरा चास थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अंतरराज्यीय अवैध शराब निर्माण गिरोह का भंडाफोड़ किया गया। कार्रवाई गोपाल सिंह के मकान में की गई, जहां अवैध विदेशी शराब का निर्माण और पैकिंग चल रही थी। गुप्त सूचना पर दोपहर पुलिस ने घेराबंदी कर छापामारी की। मौके से 11 लोगों सौरभ कुमार सिंह, शिवजी गुप्ता, गणेश गोराई, रितेश कुमार सिंह, उत्तम गोराई, संजीव कुमार, रोहित कुमार, बजरंग स्वर्णकार, विकाश कुमार, सन्नी कुमार और चंदन कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया जो शराब निर्माण व पैकिंग कार्य में शामिल थे।       पूछताछ में पता चला कि इस अवैध कारोबार का मुख्य सरगना गोपाल सिंह है, जो झारखंड व बिहार में अवैध शराब की सप्लाई करता था। छापामारी में पुलिस ने कुल बाजार मूल्य करीब 17 लाख रुपए हमारे विदेशी शराब एवं अन्य सामग्री बरामद की है।