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17% मुस्लिम आबादी, फिर भी NDA के सिर्फ 4 मुस्लिम उम्मीदवार — क्या है रणनीति?

पटना  एनडीए के सभी घटक दलों ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. इस मामले में महागठबंधन पिछड़ गया. एनडीए में जेडीयू को छोड़ किसी भी घटक दल ने मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारे हैं. जेडीयू ने 17 प्रतिशत आबादी वाले मुस्लिम समाज से सिर्फ 4 कैंडिडेट देकर एनडीए की लाज बचा ली है. बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए के सभी घटक दलों ने अपने हिस्से की सीटों पर उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं. जेडीयू ने बुधवार को 57 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी और गुरुवार को दूसरी सूची जारी कर बचे उम्मीदवारों के नाम भी घोषित कर दिए. एनडीए की दूसरी सहयोगी भाजपा ने भी अपने 101 उम्मीदवारों के नाम 3 किस्तों में जारी कर दिए हैं. एनडीए की तीसरी पार्टी हम (HAM) ने भी हिस्से में मिली 6 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए हैं. चौथी सहयोगी चिराग पासवान की लोजपा-आर ने भी 14 उम्मीदवारों की एक सूची जारी की है. उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम ने भी नाम तय कर दिए हैं. चिराग पासवान को बंटवारे में 29 सीटें मिली हैं. एनडीए की कैंडिडेट लिस्ट में जेडीयू को छोड़ किसी ने मुस्लिम कैंडिडेटट नहीं दिए. जेडीयू ने सिर्फ 4 मुसलमानों को इस बार मौका दिया है. जेडीयू ने 2020 में 11 मुस्लिम कैंडिडेट दिए थे. उम्मीदवारों के चयन में जातीय समीकरण यह बात किसी से छिपी नहीं है कि बिहार की सियासत में जातीय समीकरण की कितनी अहमियत होती है. इसी अहमियत को ध्यान में रख कर लालू यादव के नेतृत्व वाले आरजेडी ने वर्षों पहले मुस्लिम-यादव समीकरण बनाया था. नीतीश कुमार ने जब से लालू का साथ छोड़ा, तब से लेकर अब तक सभी जातियों को समान रूप से साधने का प्रयास किया है. यही वजह है 5 प्रतिशत से भी कम आबादी वाली कुर्मी जाति से आने वाले नीतीश ने अपना बड़ा जनाधार तैयार कर लिया है. हर बार की तरह इस बार भी उन्होंने उम्मीदवारों के चयन में यह सावधानी बरती है. जेडीयू की लिस्ट में 4 मुस्लिम कैंडिडेट जेडीयू की सूची में एक बात खटकती है. इस बार सिर्फ 4 मुस्लिम कैंडिडेट सूची में हैं. जेडीयू ने अक्टूबर 2005 के चुनाव में 9 मुस्लिम कैंडिडेट दिए थे. 2010 में भी यह सिलसिला बरकरार रहा. तब 17 मुससलमानों को विधानसभा का टिकट जेडीयू से मिला था. 2015 में जेडीयू को इस बार की तरह ही 101 सीटें मिली थीं. फिर भी नीतीश ने 7 मुसलमानों को उम्मीदवार बनाया था. तब नीतीश आरजेडी के साथ चुनाव लड़े थे. बाद में वे भाजपा में लौट गए. नतीजा यह हुआ कि 2020 में जब उन्होंने 11 मुसलमानों को टिकट दिया तो उनकी जमात ने स्वजातीय या स्वधर्मी उम्मीदवारों का साथ नहीं दिया. जेडीयू के सारे मुस्लिम कैंडिडेट हार गए. 2015 तक मुसलमानों का मिला साथ मुस्लिम-यादव के मजूबत समीकरण की वजह से आरजेडी के प्रति मुसलमानों का आकर्षण भले कभी अधिक रहा हो, लेकिन नीतीश कुमार के उदय के बाद और उनके द्वारा किए गए काम से खुश होकर मुसलमानों का बड़ा तबका जेडीयू के साथ आ गया था. मुसलमानों में पिछड़े तबके की पहचान कर नीतीश ने उनके विकास के लिए काम किए तो उनका झुकाव उनके प्रति स्वाभाविक था. आम मुसलमानों के हित में भी नीतीश ने कई उल्लेखनीय काम कर उनके दिलों में अपनी जगह बना ली थी. नीतीश ने भी मुसलमानों को सम्मान देने में कोई कसर नहीं छोड़ी. इसके बावजूद 2020 के चुनाव में मुसलमानों ने उनका साथ नहीं दिया. जेडीयू ने 11 मुस्लिम कैंडिडेट उतारे थे, लेकिन एक भी नहीं जीत पाया. बसपा के जमा खान अगर नीतीश के साथ नहीं आते तो विधानसभा में जेडीयू का कोई मुस्लिम विधायक ही नहीं होता. इसके संकेत पहले से ही मिलने लगे थे जेडीयू पर मुसलमानों का भरोसा नहीं रहा, यह संकेत तो स्पष्ट तौर पर 2020 में ही मिल गया था, जब उसके सारे मुस्लिम कैंडिडेट हार गए. 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद सांसद देवेश चंद्र ठाकुर और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने खुल कर कहना शुरू किया कि जेडीयू को मुसलमानों के वोट नहीं मिलते. यह अलग बात है कि नीतीश कुमार ने मुसलमानों के लिए सर्वाधिक और उल्लेखनीय काम किए हैं. मुसलमानों में नीतीश के प्रति नाराजगी की वजह शायद भाजपा की संगत रही है. भाजपा के साथ तो वे सर्वाधिक समय तक सरकार चलाते रहे हैं, लेकिन कई मौकों पर उन्होंने भाजपा की खुल कर मुखालफत भी की है. सांसद चुने जाने के बाद देवेश चंद्र ठाकुर ने गुस्से में यहां तक कह दिया कि उन्हें मुसलमानों ने वोट नहीं दिया, इसलिए वे उनका काम नहीं करेंगे. वक्फ कानून पर भाजपा के साथ जेडीयू का खड़ा होना भी मुसललमानों को नागवार लगा था. इसकी झलक उस दिन मिली, जब नीतीश ने रमजान के महीने में इफ्तार की पार्टी दी. मुस्लिम जमात के लोगों ने उसका बायकाट किया था. जेडीयू ने इस बार सिर्फ 4 मुसलमानों को ही मौका दिया है तो इसकी यही वजह समझ में आती है.  

मोदी-शाह के साथ पवन सिंह मैदान में, भाजपा के 40 स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी

पटना  भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए अपने 40 स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी कर दी है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा भोजपुरी स्टार पवन सिंह, निरहुआ, मनोज तिवारी और रवि किशन का नाम भी शामिल है। पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे को भी स्टार प्रचारक बनाया है। बिहार भाजपा के स्टार प्रचारकों की पूरी लिस्ट यहां देखें-     नरेंद्र मोदी     जगत प्रकाश नड्डा (जेपी नड्डा)     राजनाथ सिंह     अमित शाह     नितिन गडकरी     शिवराज सिंह चौहान     धर्मेंद्र प्रधान     गिरिराज सिंह     योगी आदित्यनाथ     देवेंद्र फडणवीस     हिमंता बिस्वा सरमा     मोहन यादव     रेखा गुप्ता     स्मृति ईरानी     केशव प्रसाद मौर्य     सी.आर. पाटिल     दिलीप कुमार जायसवाल     सम्राट चौधरी     विजय कुमार सिन्हा     रेणु देवी     प्रेम कुमार     नित्यानंद राय     राधामोहन सिंह     साध्वी निरंजन ज्योति     सतीश चंद्र दुबे     राज भूषण चौधरी     अश्विनी कुमार चौबे     रवि शंकर प्रसाद     नंद किशोर यादव     राजीव प्रताप रूडी     संजय जायसवाल     विनोद तावड़े     बाबुलाल मरांडी     प्रदीप कुमार सिंह     गोपालजी ठाकुर     जनक राम     पवन सिंह     मनोज तिवारी     रवि किशन     दिनेश लाल यादव "निरहुआ" 5 राज्यों के सीएम बिहार में भाजपा का प्रचार करेंगे भाजपा ने बिहार चुनाव में पांच राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी स्टार प्रचारक बनाया है। यूपी के योगी आदित्यनाथ, एमपी के मोहन यादव, असम के हिमंता बिस्वा सरमा और महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस के साथ दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का नाम भी लिस्ट में शामिल है। इनमें से योगी की सबसे ज्यादा रैलियां होने की संभावना है, क्योंकि यूपी सीएम की सभा के लिए कई प्रत्याशियों ने मांग भाजपा नेतृत्व से की है। 4 भोजपुरी सितारे भी स्टार प्रचारक भाजपा ने 40 स्टार प्रचारकों की लिस्ट में 4 भोजपुरी सिनेमा के स्टार को भी शामिल किया है। पवन सिंह, मनोज तिवारी, रवि किशन और निरहुआ बिहार चुनाव में भाजपा का प्रचार करेंगे। पवन सिंह पिछले दिनों ही भाजपा में शामिल हुए थे।  

JDU का धमाका! काराकाट में खुद उतारा उम्मीदवार, पवन सिंह और बीजेपी का रास्ता रोक दिया

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव के सबसे चर्चित इलाकों में से एक काराकाट सीट पर आखिरकार सियासी सस्पेंस खत्म हो गया है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने बुधवार को इस सीट से महाबली सिंह को उम्मीदवार घोषित कर दिया और इसके साथ ही भोजपुरी स्टार पवन सिंह और उनके समर्थकों की उम्मीदों पर विराम लग गया। एनडीए के भीतर चली लंबी रस्साकशी पिछले कई दिनों से चर्चा थी कि एनडीए पवन सिंह की मां को काराकाट से उतार सकता है। बीजेपी और जेडीयू के बीच सीट को लेकर तगड़ी खींचतान चल रही थी। लेकिन अंत में सीट शेयरिंग फॉर्मूला तय हुआ और काराकाट जेडीयू के खाते में चली गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भरोसा दिखाते हुए महाबली सिंह को मैदान में उतारने का फैसला किया। पवन सिंह एंड फैमिली बनी थी चर्चा हालांकि पवन सिंह पहले ही साफ कर चुके थे कि वे खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे, मगर उनके परिवार की हलचल ने काराकाट को बिहार की सबसे हॉट सीट बना दिया था। हाल ही में उनकी पत्नी ज्योति सिंह ने टिकट बंटवारे को लेकर खुलेआम नाराजगी जताई थी। इतना ही नहीं, उन्होंने जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर से भी मुलाकात की थी, जिससे ये अटकलें तेज हो गई थीं कि वो शायद बागी उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतर सकती हैं। नीतीश का दांव पर बीजेपी की खामोशी महाबली सिंह की उम्मीदवारी के साथ नीतीश कुमार ने एक तरह से बीजेपी पर दबाव बना दिया है। कहा जा रहा था कि बीजेपी अब इस सीट पर अलग रणनीति बनाने में जुटी है, जबकि एनडीए के भीतर भी जेडीयू की चालाकी की चर्चा जोरों पर है।  

आज बाढ़ में नामांकन, मोकामा में RJD ने वीणा को बनाया उम्मीदवार

 पटना  बिहार में मोकामा सीट पर अनंत सिंह और सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी के बीच मुकाबला 100 फीसदी कन्फर्म हो गया है। लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने मोकामा सीट से मुंगेर की पूर्व सांसद वीणा देवी को टिकट दे दिया है। सिंबल लेकर मोकामा के बाहुबली सूरजभान सिंह वीणा देवी का नामांकन कराने बाढ़ निकल गए हैं। मोकामा में पहले चरण में चुनाव है। नामांकन का आखिरी दिन कल है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के उम्मीदवार और बाढ़ के बाहुबली अनंत सिंह 14 अक्टूबर को पर्चा भर चुके हैं। अनंत सिंह इस सीट से पहले पांच बार लगातार जीते हैं। 2022 में अनंत सिंह को एके 47 रखने के केस में जब सजा हुई तो विधायकी जाने के बाद उनकी पत्नी नीलम देवी उप-चुनाव जीती थीं। अनंत सिंह 2005 से 2010 तक तीन बार जेडीयू के टिकट पर जीते, 2015 में निर्दलीय जीत गए और 2020 में राजद के सिंबल पर जीते। 2022 में नीलम देवी राजद से ही जीती, लेकिन 2024 में नीतीश कुमार के बहुमत परीक्षण में सरकार के साथ चली गईं। विधानसभा के रिकॉर्ड में यह सीट राजद के ही खाते में दर्ज है।   दूसरी ओर, सूरजभान सिंह 2000 में मोकामा से पहली बार और आखिरी बार विधायक बने थे। तब उन्होंने अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह को बड़े अंतर से हराया था। दिलीप सिंह राजद के दबंग नेता और राबड़ी देवी की सरकार में कद्दावर मंत्री थे। 2004 में सूरजभान सिंह लोजपा के टिकट पर बलिया से लोकसभा सांसद बन गए। बाद में सजा हुई और चुनाव नहीं लड़ पाए तो 2014 में पत्नी वीणा देवी को मुंगेर से लोजपा का सांसद बनाया।  

टिकट की राजनीति: क्या तेजस्वी का फैसला पारिवारिक विवाद थामने की चाल है या यादव वोट बैंक को साधने की रणनीति?

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव की जंग जीतने के लिए सियासी दलों ने हर दांव चल रहे हैं. आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद के सियासी विरासत संभाल रहे तेजस्वी यादव ने अपने बड़े भाई तेज प्रताप यादव की चचेरी साली करिश्मा राय को परसा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है. हालांकि, तेज प्रताप का अपनी पत्नी ऐश्वर्या राय के साथ विवाद चल रहा है और मामला अदालत में है. करिश्मा राय बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय की पोती हैं. दरोगा राय के छोटे बेटे पूर्व मंत्री चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय के साथ तेज प्रताप की शादी हुई थी, कुछ समय के बाद उनके रिश्ते खराब हो गए. इसे लेकर लालू परिवार बैकफुट पर आ गया है. तेजस्वी यादव ने तेज प्रताप के ससुर चंद्रिका राय के बड़े भाई विधानचंद्र राय की बेटी करिश्मा राय को प्रत्याशी बनाया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या तेजस्वी का यह सियासी डैमेज कंट्रोल करने का दांव है या फिर यादव वोटों को जोड़े रखने की स्ट्रैटेजी है? करिश्मा राय पिछले विधानसभा चुनाव में भी आरजेडी से टिकट मांग रही थीं, लेकिन तब उन्हें टिकट नहीं मिल पाया था. तेज प्रताप और उनकी पत्नी ऐश्वर्या के बीच चल रहे केस की वजह से लालू परिवार ने करिश्मा को टिकट नहीं दिया था. लालू परिवार उस समय तेज प्रताप के साथ था, लेकिन पिछले दिनों लालू यादव ने तेज प्रताप को परिवार और पार्टी से बेदखल कर दिया. तेज प्रताप यादव इस बार के विधानसभा चुनाव में खुद अपनी पार्टी बनाकर लड़ रहे हैं. तेज प्रताप यादव महुआ सीट से ताल ठोक रहे हैं. लालू यादव द्वारा पारिवारिक संबंधों और राजनीतिक समीकरणों को साधते हुए करिश्मा राय को परसा सीट से मैदान में उतारना, क्षेत्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है. परसा से टिकट देकर तेजस्वी एक तीर से कई दांव साधते नजर आ रहे हैं. परसा विधानसभा सीट जीतने का सियासी दांव   बिहार की सियासत में दरोगा प्रसाद का राजनीतिक रसूख किसी से छिपा नहीं है. वह बिहार के सीएम रहे और परसा सीट पर उनका सियासी दबदबा था. 1952 में पहली बार परसा सीट से जीतकर विधायक बने दरोगा राय ने 1970 में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली. इस सीट को दरोगा राय के बेटे चंद्रिका राय ने अपनी कर्मभूमि बनाते हुए अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया. 2015 में परसा सीट पर चंद्रिका राय आरजेडी से विधायक चुने गए, उससे पहले जेडीयू से जीतते रहे. तेज प्रताप और ऐश्वर्या के रिश्ते बिगड़े तो चंद्रिका राय ने आरजेडी का दामन छोड़कर जेडीयू में वापसी कर ली. 2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू के टिकट पर चंद्रिका राय चुनाव लड़े और आरजेडी से छोटे राय मैदान में थे. छोटे लाल राय ने जीत दर्ज कर विधायक बने, लेकिन बाद में वे पार्टी छोड़कर जेडीयू में शामिल हो गए. अब 2025 के चुनाव में परसा में मुकाबला दिलचस्प होगा. चंद्रिका राय के जेडीयू में अलग-थलग पड़ जाने के चलते तेजस्वी ने बड़ा दांव चला. आरजेडी ने करिश्मा राय को उतारा है तो जेडीयू से छोटे लाल राय मैदान में है. इस तरह मुकाबला काफी रोचक होगा. तेजस्वी यादव ने सियासी संदेश देने का चला दांव  तेजस्वी यादव ने तेज प्रताप यादव की साली को टिकट देकर सियासी संदेश दे दिया है. तेजस्वी ने तेज प्रताप को स्पष्ट संदेश दिया है कि आरजेडी अब उन लोगों से दूरी बनाकर नहीं रखेगा, जिनसे उनके निजी विवाद के चलते 2020 में दूरी बनाई गई थी. इसी के चलते तेजस्वी ने करिश्मा को पार्टी का टिकट दिया है. चंद्रिका राय अब जब खुद चुनावी मैदान में नहीं हैं तो अपनी भतीजी के लिए सियासी समर्थन कर सकते हैं. बिहार में यादव समुदाय के करीब 15 फीसदी वोटर हैं, जो ओबीसी में सबसे ज्यादा हैं. यादव आरजेडी का परंपरागत वोटर माना जाता है. तेज प्रताप यादव के हरकतों से यादव समाज नाराज भी माना जा रहा था, चाहे ऐश्वर्या राय के साथ विवाद का मामला हो या फिर अनुष्का यादव के साथ फोटो वायरल होने की बात हो. ऐसे में तेजस्वी ने करिश्मा राय को प्रत्याशी बनाकर यादव समुदाय की नाराजगी को दूर करने का दांव चला है.

तेजस्वी यादव की करोड़ों की संपत्ति, दर्जनों केस — जानें हलफनामे के चौंकाने वाले खुलासे

पटना  बिहार की सियासत के युवा चेहरा और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बुधवार को राघोपुर विधानसभा सीट से नामांकन दाखिल किया। तेजस्वी ने साथ ही हलफनामा भी दायर किया जिसमें उन्होंने अपनी पूरी संपत्ति का ब्यौरा दिया। 35 साल के तेजस्वी यादव के पास नगद रकम 1.5 लाख रुपये हैं, कुल चल-अचल संपत्ति 6.12 करोड़ से ज्यादा की है, वहीं उन पर 55.52 लाख रुपये का कर्ज भी है। 9वीं पास हैं तेजस्वी तेजस्वी ने हलफनामे में बताया कि उन्होंने 2006 में दिल्ली पब्लिक स्कूल आरके पुरम (नई दिल्ली) से 9वीं तक की पढ़ाई की है। इससे पहले भी वे अपने शैक्षणिक विवरण को लेकर विरोधियों के निशाने पर रहे हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा इसे जमीन से जुड़े अनुभव कहकर टाल दिया है। 18 आपराधिक मामले दर्ज हलफनामे में सबसे ध्यान खींचने वाली बात यह रही कि तेजस्वी ने स्वीकार किया है कि उनके खिलाफ कुल 18 आपराधिक मामले चल रहे हैं, जिनमें चार मामले अपील पर हैं। ये मामले राजनीतिक रैलियों, धरनों, विरोध प्रदर्शनों और बयानों से जुड़े हैं। हाल ही में 13 अक्टूबर 2025 को दिल्ली की अदालत ने IRCTC होटल और लैंड-फॉर-जॉब्स घोटाले में तेजस्वी, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के खिलाफ आरोप तय किए, जिससे आरजेडी का कानूनी सिरदर्द चुनाव से ठीक पहले बढ़ गया है। गौरतलब है कि तेजस्वी यादव ने राघोपुर से तीसरी बार चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल किया है। नामांकन के लिए तेजस्वी हाजीपुर कलेक्टोरेट पहुंचे तो उनके साथ पिता लालू प्रसाद यादव, मां राबड़ी देवी, बहन मीसा भारती और सैकड़ों समर्थक मौजूद थे। पार्टी सुप्रीमो के घर से लेकर हाजीपुर तक 40 किलोमीटर के रास्ते पर लालू परिवार के समर्थक फूल बरसाते नजर आए। राघोपुर यादव परिवार का गढ़ राघोपुर विधानसभा सीट को आरजेडी का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। यहां यादव मतदाता लगभग 25%, मुस्लिम 20% और ईबीसी करीब 30% हैं। तेजस्वी 2015 और 2020 दोनों चुनाव यहीं से जीत चुके हैं और अब लगातार तीसरी बार मैदान में हैं।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने सहरसा में नामांकन रैली को किया संबोधित

राजद-कांग्रेस पर योगी का प्रहार, बोले- यह फर्जी वोट डलवाएंगे, चेहरा नहीं दिखलाएंगे बिहार विधानसभा चुनाव सीएम योगी आदित्यनाथ ने सहरसा में नामांकन रैली को किया संबोधित सहरसा से भाजपा उम्मीदवार आलोक रंजन झा, प्रदेश सरकार के मंत्री व सोनबरसा से एनडीए प्रत्याशी रत्नेश सादा, महिषी से गुंजेश्वर शाह तथा सिमरी बख्तियारपुर से संजय सिंह को जिताने की अपील की कोई भी बिहार को पुराने लालटेन युग में नहीं ले जाएगा, क्योंकि नीतीश जी इसे एलईडी की दूधिया लाइट में लेकर आगे बढ़ चुके हैंः मुख्यमंत्री माफिया, गुंडागर्दी, देशद्रोही, अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ सिर्फ एनडीए सरकार व कार्यकर्ता ही लड़ पाएगाः सीएम योगी बोले- पीएम मोदी कहते है कि 140 करोड़ का भारत मेरा परिवार, लालू कहते हैं कि राबड़ी देवी का परिवार ही मेरा परिवार यूपी में किसी ने 10 एकड़ जमीन कब्जा की है और उसके पास पुश्तैनी भूमि है तो सब मिलाकर ब्याज सहित वापस लिया गया, फिर गरीबों के मकान बनाए गएः योगी योगी ने राजद को खूब धोया वाले, बोले- कहते थे कि सड़क बनाओगे तो फिर कच्ची शराब कैसे बना पाओगे एनडीए गरीबों के मकान बनाती है, पहले यह पैसा कांग्रेस, राजद व उनके पार्टनर्स में बंट जाता था, जिसे दुनिया के बैंकों में जमा करके यह लोग आने वाली पीढ़ियों के लिए खजाना भरते थेः योगी सहरसा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार से बिहार विधानसभा के चुनावी रण में उतरे। उन्होंने दूसरी जनसभा सहरसा में की। यहां नामांकन रैली में सहरसा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार आलोक रंजन झा, प्रदेश सरकार के मंत्री व सोनबरसा से एनडीए प्रत्याशी रत्नेश सादा, महिषी से गुंजेश्वर शाह व सिमरी बख्तियारपुर से संजय सिंह (लोजपा) को जिताने की अपील की। सीएम ने कहा कि बिहार को आज जब मेट्रो, रेल कनेक्टिविटी, हाईवे, एक्सप्रेस वे, एयरपोर्ट, वाटरवे के रूप में पहचान मिल रही है तो इस पहचान को फिर से धूमिल करने के लिए राजद- कांग्रेस ने शिगूफा छोड़ा है कि विकास नहीं, बुर्का चाहिए, जिससे यह लोग फर्जी मतदान कराकर गरीबों-दलितों के हकों पर डकैती डाल सकें। चुनाव में यह विकास की बात नहीं कर रहे। इन्हें बुर्का चाहिए। सीएम ने दोनों विपक्षी दलों पर कटाक्ष किया कि फर्जी वोट डलवाएंगे, लेकिन चेहरा नहीं दिखवाएंगे। तीर्थयात्रा में विदेश जाएंगे, एयरपोर्ट पर चेहरा दिखाएंगे, पासपोर्ट पर फोटो भी दिखाएंगे, लेकिन बिहार में वोटिंग पर कहेंगे कि बुरका को छेड़ो मत, चेहरा दिखाओ मत, फर्जी वोट डलवाने दो। कांग्रेस व राजद फिर से गरीबों के हकों पर डकैती डालने की साजिश कर रही है। इनकी साजिश को सफल नहीं होने देना है, क्योंकि कांग्रेस व राजद ने बिहार के सामने पहचान का संकट खड़ा किया था। पीएम मोदी कहते है कि 140 करोड़ का भारत मेरा परिवार, लालू कहते हैं कि राबड़ी देवी का परिवार ही मेरा परिवार सीएम ने कांग्रेस पर प्रहार करते हुए कहा कि यह अपने शासनकाल में भारत को अपमानित करते थे। यह कहते थे कि राम-कृष्ण हुए ही नहीं। यह भारत व भारतीयों को गाली देते थे। घुसपैठ कराकर अराजकता फैलाते थे। राजद ने बिहार का नहीं, परिवार का विकास किया। एनडीए पूरे भारत के लिए सोचता है। पीएम मोदी कहते है कि 140 करोड़ का भारत मेरा परिवार है, जबकि लालू कहते हैं कि राबड़ी देवी का परिवार ही मेरा परिवार है। 20 वर्षों में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। बिहार में विकास नई आभा के साथ आगे बढ़ रहा है। बाढ़ की समस्या का समाधान बढ़ रहा है। अब गरीबों को मिलता है योजनाओं का लाभ, पहले यह कांग्रेस-राजद व उनके पार्टनर्स में बंट जाता था सीएम योगी ने कहा कि सर्वाधिक समय तक शासन करने वाली कांग्रेस गरीबों का मकान नहीं बना पाई, लेकिन एनडीए शासन में बिना भेदभाव गरीब, किसान, नौजवान को हर योजनाओं का लाभ मिल रहा है। पहले पैसा कांग्रेस, राजद व उनके पार्टनर्स में बंट जाता था और गरीब ताकता था। यहां का पैसा दुनिया के बैंकों में जमा करके आने वाली पीढ़ियों के लिए खजाना भर देते थे। मोदी जी अब कहते हैं कि गरीब के हक पर जो डाका डालेगा, उसकी जगह जेल में होगी। यूपी में हमने इसका उदाहरण दिया है। सीएम योगी ने यूपी के प्रयागराज जनपद से उपस्थित विधायक सिद्धार्थनाथ सिंह का नाम लेकर कहा कि इनकी विधानसभा में एक दुर्दांत माफिया के बंगले को हमने खाली कराया, बुलडोजर चलवाया। फिर हाईराइज बिल्डिंग बनाकर गरीबों को फ्री में आवास उपलब्ध करा दिया। हर जनपद में माफिया द्वारा कब्जा की गई भूमि पर यही कर रहे हैं। किसी ने 10 एकड़ जमीन कब्जा की है और उसके पास पुश्तैनी भूमि है तो सब मिलाकर ब्याज सहित वापस लिया गया, फिर गरीबों के मकान बनाए जा रहे हैं। माफिया, गुंडागर्दी, देशद्रोही, अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ सिर्फ एनडीए सरकार व कार्यकर्ता ही लड़ पाएगा सीएम योगी ने कहा कि माफिया, गुंडागर्दी, देशद्रोही, अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ एनडीए सरकार व कार्यकर्ता ही लड़ पाएगा। कांग्रेस व राजद के कारण 2005 के पहले यहां का नौजवान पहचान को छिपाता था। किसान आत्महत्या को मजबूर था। उपचार और सड़कें नहीं थीं, राजद वाले कहते थे कि सड़क बनाओगे तो फिर कच्ची शराब कैसे बना पाओगे। यह लोग राज्य की पहचान को धूमिल करते थे। जिस बिहार ने देश को नेतृत्व दिया, जिस बिहार ने स्वर्णयुग में ले जाने का कार्य किया। वह बिहार कांग्रेस व राजद के समय पहचान के लिए मोहताज हो गया था पर जब एनडीए सरकार आई तो बिहार को उसकी पहचान मिली। भाजपा व एनडीए की डबल इंजन सरकार बिहार को विकास के पथ पर डबल स्पीड से ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। अब बिहार को कोई पुराने लालटेन युग में नहीं ले जाएगा सीएम योगी ने कहा कि अब कोई भी बिहार को पुराने लालटेन युग में नहीं ले जाएगा, क्योंकि नीतीश जी अब एलईडी की दूधिया लाइट में बिहार को लेकर आगे बढ़ चुके हैं। सीएम ने कहा कि जब भी अवसर मिला तो महापुरुषों की प्रेरणा से यूपी में हमने नया करने का कार्य किया है। सीएम ने जयप्रकाश जी की जन्मभूमि (सिताबदियारा) का जिक्र किया और कहा कि हमने उनका पावन स्मारक बनाया। 2017 … Read more

बिहार विधानसभा चुनाव : चुनावी रण में उतरे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री

विकास को बाधित करने के लिए राजद-कांग्रेस ने शुरू की 'बुरके' की शरारतः योगी बिहार विधानसभा चुनाव चुनावी रण में उतरे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री दानापुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार रामकृपाल यादव की नामांकन रैली में हुए शामिल सीएम ने फुलवारी शरीफ से एनडीए प्रत्याशी श्याम रजक को भी जिताने की अपील की योगी ने दानापुर से किया आह्वान- लोकतंत्र की धरती पर खिलना चाहिए लोकतंत्र का कमल बोले- 1990 से 2005 तक बिहार के जंगलराज व परिवारवाद से हर कोई वाकिफ बिहार में अपराध को बपौती बनाकर अपहरण का उद्योग चलाने का कोई दुस्साहस नहीं कर सकताः योगी राजद व कांग्रेस के भ्रष्टाचार व आपराधिक उद्योग को भी नियंत्रित करेगी एनडीए सरकारः आदित्यनाथ लोकतंत्र का गला घोंटने वाले कांग्रेस की झोली में गिरवी है राजदः सीएम अपहरण उद्योग में लिप्त राजद के पार्टनर यूपी में पहले छाती ठोककर अराजकता फैलाते थे, आज उनकी दुर्गति हो गईः योगी पटना उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार से बिहार विधानसभा के चुनावी रण में उतरे। वे दानापुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी रामकृपाल यादव की नामांकन रैली में शामिल हुए। सीएम ने फुलवारी शरीफ से एनडीए प्रत्याशी श्याम रजक को भी जिताने की अपील की। सीएम योगी यहां विपक्षी दल राजद व कांग्रेस पर खूब बरसे। उन्होंने कहा कि बिहार में विकास की दौड़ को बाधित करने के लिए राजद, कांग्रेस व इंडी गठबंधन के सहयोगी दलों ने विकास बनाम बुरके की शरारत शुरू की है। जब बिहार विकास की चर्चा कर रहा है तो कांग्रेस, राजद ने बुरके की नई बहस को बढ़ाने का प्रयास किया है। सीएम ने कहा कि इन्हें फर्जी पोलिंग का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। राजद व कांग्रेस फर्जी पोलिंग करवाने की चेष्टा कर रहे हैं, लेकिन विदेशी घुसपैठियों को यहां आकर बिहार के नागरिकों, गरीबों व दलितों के अधिकार पर डकैती की छूट नहीं मिलनी चाहिए। यह लोग ईवीएम नहीं, बल्कि पहले के जैसे जबर्दस्ती मतदान और मतपत्रों की छिनैती करना चाहते हैं। राजद व कांग्रेस बिहार को उसी कालखंड में ले जाने का प्रयास कर रही है। 1990 से 2005 तक बिहार के जंगलराज व परिवारवाद से हर कोई वाकिफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1990 से 2005 तक फैले बिहार के जंगलराज और परिवारवाद को हर कोई जानता है। राजद व कांग्रेस को घेरते हुए सीएम योगी ने कहा कि इन लोगों ने बिहार की आध्यात्मिक ज्ञानभूमि को परिवारवाद और अपराध की भूमि बना दिया था। विकास के नाम पर फैलाई गई अराजकता किसी से छिपी नहीं है। उस समय पेशेवर माफिया, गुंडों को सत्ता का संरक्षण प्रदान कर बिहार के विकास को बाधित कर दिया गया था। जिस बिहार ने कभी भारत का नेतृत्व किया, 2000 वर्ष पहले भारत को स्वर्ण युग दिया। इन लोगों के कारण उस बिहार से लोग पलायन कर रहे थे। राजद-कांग्रेस के भ्रष्टाचार व आपराधिक उद्योग को भी नियंत्रित करेगी एनडीए सरकार सीएम ने कहा कि एनडीए सरकार राजद व कांग्रेस के भ्रष्टाचार व आपराधिक उद्योग को भी नियंत्रित करेगी। यूपी में माफिया जहन्नुम की यात्रा पर जा चुके हैं। यूपी में अपहरण उद्योग में लिप्त राजद के पार्टनर पहले छाती ठोककर अराजकता फैलाते थे, लेकिन आज उनकी दुर्गति हो रही है। इनकी प्रॉपर्टी जब्त कर गरीबों का आवास बना रहे हैं। सीएम ने पीएम मोदी के नेतृत्व में देश में चल रहीं विकास योजनाओं का जिक्र करते हुए विपक्षी दलों पर कटाक्ष किया कि कांग्रेस-राजद के एजेंडे में गरीब कल्याण नहीं, बल्कि परिवार कल्याण था, जबकि एनडीए ने पूरे भारत व बिहार को परिवार मानकर बिना भेदभाव योजनाओं का लाभ दिया। विकास कार्यों में खर्च होने वाले पैसे को चारा महाघोटाला में खर्च किया गया सीएम योगी ने कहा कि एनडीए ने 20 वर्ष में बिहार को उस कलंक से मुक्त किया है। अब बिहार में विकास को कोई बाधित नहीं कर सकता। कोई अपराध को जन्मसिद्ध अधिकार या बपौती बनाकर अपहरण का उद्योग चलाने का दुस्साहस नहीं कर सकता। केंद्र व प्रदेश सरकार ने मिलकर विकास के जिन कार्यों को आगे बढ़ाया है, उसमें पेशेवर माफिया बाधक नहीं बन पाएंगे क्योंकि एनडीए सरकार यहां प्रभावी भूमिका में कार्य कर रही है। बिहार का नौजवान जब बाहर जाता है तो हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाता है, लेकिन 1990 से 2005 तक कुछ लोगों ने बिहार के नौजवानों की प्रतिभा को कुंद कर दिया था। बिहार लंबे समय तक यह दंश झेलता रहा। यहां अनेक घोटाले हुए। विकास कार्यों में खर्च होने वाले पैसे को चारा महाघोटाला में खर्च किया गया, वहीं एनडीए सरकार ने बिहार से पहचान का संकट समाप्त किया है। बिहार में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर दिखाई दे रहा है। फर्जी पोलिंग चाहते हैं राजद-कांग्रेस सीएम योगी ने कहा कि पारदर्शी व स्वच्छ चुनाव प्रक्रिया के तहत हर मतदाता को अपनी पहचान देनी है। पहचान पत्र दिखाकर ही हर कोई मतदान कर सकता है। एनडीए के सभी दल इसे आगे बढ़ाने की कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन राजद, कांग्रेस व उनके सहयोगी दल कहते हैं कि फर्जी पोलिंग होनी चाहिए। सीएम ने इसे लोकतंत्र के लिए चुनौती बताया और कहा कि इन्हें (राजद-कांग्रेस) बिहार के नागरिकों, नौजवानों, दलितों-वंचितों के अधिकार पर डकैती डालने का अवसर नहीं मिलना चाहिए। जब चुनाव आयोग आगे बढ़ा तो यह लोग दुष्प्रचार का सहारा ले रहे हैं। सीएम ने मतदाताओं से पूछा कि दुनिया में हर जगह अपना चेहरा- पहचान दिखानी पड़ती है, लेकिन यह लोग चाहते हैं कि बिना चेहरा-पहचान पत्र देखे, जिसकी मर्जी आए वह वोट डाल दे। लोकतंत्र का गला घोंटने वाले कांग्रेस की झोली में गिरवी है राजद सीएम ने कहा कि जब कांग्रेस ने लोकतंत्र के गले को घोंटा था, तब यही बिहार उठ खड़ा हुआ था। जयप्रकाश जी ने पटना में हुंकार भरी थी और कहा था कि लोकतंत्र का गला घोंटने का अधिकार किसी को नहीं देंगे। जिस कांग्रेस ने लोकतंत्र का गला घोंटा था, उसी की झोली में राजद ने खुद को गिरवी रख दिया है। यह जेपी के सपनों पर पानी फेर रहे हैं और लूट, भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए कांग्रेस की झोली में चले गए हैं। बिहार ने दुनिया को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाया था, वैशाली का गणतंत्र उसका उदाहरण है। बिहार ने … Read more

AIMIM का बड़ा दांव, बिहार में ASP और मौर्य की पार्टी के साथ मिलकर लड़ेगी चुनाव

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने नया गठबंधन बना लिया है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने बुधवार को किशनगंज में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी घोषणा की. उन्होंने बताया कि मजलिस ने आजाद समाज पार्टी और स्वामी प्रसाद मौर्य की अपनी जनता पार्टी के साथ गठबंधन किया है, ताकि 'सांप्रदायिक ताकतों को रोका जा सके'. अख्तरुल ईमान ने कहा कि AIMIM बिहार में 35 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी. वहीं, आजाद समाज पार्टी 25 सीटों पर और स्वामी प्रसाद मौर्य की अपनी जनता पार्टी 4 सीटों पर मैदान में उतरेगी. ईमान ने दावा किया कि तीनों पार्टियां मजबूती से चुनावी मैदान में उतरेंगी और जनता के बीच एक नया विकल्प पेश करेंगी. उन्होंने कहा, हमारी असली लड़ाई सत्ता हासिल करने की नहीं, बल्कि देश में इंसाफ कायम करने की है. ईमान ने यह भी बताया कि उम्मीदवारों के नाम लगभग तय हो चुके हैं और उनका ऐलान देर शाम तक कर दिया जाएगा. इस ऐलान के साथ ही बिहार की सियासत में एक नया मोर्चा बन गया है. ओवैसी की पार्टी पहले से ही सीमांचल इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है. किशनगंज, कटिहार और अररिया जैसे जिलों में AIMIM का असर पहले भी देखा जा चुका है. ओवैसी ने किया आरजेडी पर हमला गठबंधन के ऐलान से पहले असदुद्दीन ओवैसी ने आरजेडी की लीडरशिप पर हमला बोला था. उन्होंने कहा था कि आरजेडी की मौजूदा नेतृत्व नादान है और उसमें दूरदर्शिता की कमी है. ओवैसी ने कहा, आरजेडी समझ रही है कि अपनी ताकत पर सबकुछ कर लेगी, लेकिन ऐसा नहीं होगा. मजलिस हमेशा हवाओं को सूंघकर आने वाले सैलाब का अंदाजा लगा लेती है. ओवैसी ने चेतावनी देते हुए कहा, हम देख रहे हैं कि तूफान आने वाला है, लेकिन ये लोग पानी से भीगने के बाद कहेंगे कि सैलाब आ गया. बहुत देर हो जाएगी. अगर बराबरी की बात करेंगे तभी बीजेपी और मोदी को रोका जा सकता है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने पहले भी विपक्षी एकता की बात की थी, लेकिन इन लोगों ने हमारी बात को नहीं माना. ओवैसी ने यह भी कहा कि जब चुनाव परिणाम आएंगे, तब सबको एहसास होगा कि AIMIM ने सही मायने में कोशिश की थी.

जेपी गंगा पथ एक्सटेंशन: दीघा-कोईलवर के बीच जनवरी से शुरू होगा काम, बढ़ेगी कई इलाकों की कनेक्टिविटी

पटना बिहार की राजधानी पटना के दीघा से कोईलवर तक जेपी गंगा पथ के निर्माण कार्य की शुरुआत जनवरी 2026 से की जाएगी। यह प्रोजेक्ट न केवल पटना को सोन नदी के पार क्षेत्रों से जोड़ेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश और दिल्ली की यात्रा को भी आसान बनाएगा। इस नए गंगा पथ के निर्माण का आम लोगों को सीधा फायदा होगा। जेपी गंगा पथ कुल 5500 करोड़ रुपए की लागत से तैयार होगा। इसकी कुल लंबाई 35.65 किमी है. इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण हम मॉडल पर किया जा रहा है। इसका गंगा पथ का निर्माण कार्य 4 वर्षों में पूरा किया जाएगा। निर्माण के बाद अगले 15 वर्षों तक इसके रखरखाव का जिम्मा एजेंसी का होगा। निर्माण में क्या होगा खास?     18 किमी एलिवेटेड (उपरिगामी) रोड     17.65 किमी ग्राउंड लेवल रोड     सड़क दीघा से शुरू होकर शेरपुर होते हुए कोईलवर के पास सोन नदी पर बने नए पुल से जुड़ेगी। ऐसे होगा फंडिंग का बंटवारा कुल 5500 करोड़ रुपए की लागत में से 60% (₹3300 करोड़) निर्माण एजेंसी वहन करेगी। वहीं 40% (₹2200 करोड़) राशि राज्य सरकार देगी।  15 वर्षों तक एजेंसी को इसका भुगतान ब्याज सहित किया जाएगा। रखरखाव की राशि अलग से सरकार द्वारा दी जाएगी इन जगहों से होगी कनेक्टिविटी     दानापुर, शाहपुर बाजार जैसे प्रमुख इलाकों से डायरेक्ट लिंक     दीघा सेतु, शेरपुर-दिघवारा सेतु, कोईलवर सेतु, बक्सर सेतु, जनेश्वर मिश्र सेतु और आरा-छपरा सेतु से बेहतर संपर्क     पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के ज़रिए दिल्ली और उत्तर प्रदेश तक आसान सफर लोगों को क्या होगा फायदा?     पटना से बक्सर तक गाड़ियां 100-120 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकेंगी     जाम-मुक्त यात्रा का अनुभव मिलेगा     दिल्ली, बलिया, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, देवरिया और गोरखपुर जैसे शहरों तक यात्रा होगी आसान     व्यावसायिक और आर्थिक गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा कनेक्टिविटी     इस नए रूट से बड़े सेतु और पुलों से जुड़ाव होगा, जैसे –     दीघा सेतु, शेरपुर-दिघवारा सेतु     कोईलवर सेतु, आरा-छपरा सेतु     जनेश्वर मिश्र सेतु, बक्सर सेतु     साथ ही दानापुर, शाहपुर बाजार आदि महत्वपूर्ण स्थान भी इस मार्ग से जुड़े होंगे