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रांची में नई पहल: NEP 2020 के तहत झारखंड का इंटरनेशनल एजुकेशन हब बनाने की तैयारी

रांची  झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने राज्य में 'ऑफिस ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स' (Office of International Affairs) की स्थापना का निर्णय लिया है। यह कार्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के प्रावधानों के तहत कार्य करेगा। उच्च शिक्षा के वैश्वीकरण के लिए एक 'सिंगल विंडो' सुविधा प्रदान करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य झारखंड के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मानकों से जोड़ना और विदेशी संस्थानों तक उनकी पहुंच को सुलभ बनाना है। एक्सचेंज प्रोग्राम और अंतरराष्ट्रीय सहयोग यह कार्यालय प्रमुख रूप से एक्सचेंज प्रोग्राम संचालित करेगा, जिससे झारखंड के विद्यार्थी विदेशों में जाकर उच्च शिक्षा और शोध (Research) कर सकेंगे। इसके साथ ही, विदेशी छात्रों को भी झारखंड के शिक्षण संस्थानों में अध्ययन और शोध के अवसर दिए जाएंगे। कार्यालय की मुख्य भूमिकाएं         नामांकन में सहायता: विदेशी विश्वविद्यालयों में चलने वाले कोर्सेज और उनकी जटिल नामांकन प्रक्रिया की जानकारी विद्यार्थियों को यहां उपलब्ध होगी।         कार्यशालाओं का आयोजन: शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में कार्यशालाएं होंगी, जहां विदेशी संस्थानों के प्रतिनिधि छात्रों का मार्गदर्शन करेंगे।         झारखंड की ब्रांडिंग: विदेशों में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर झारखंड के संस्थानों की शोध क्षमताओं और अवसरों से दुनिया को अवगत कराया जाएगा।         वित्तीय योजनाओं का संचालन: भविष्य में उच्च शिक्षा के लिए स्वीकृत होने वाली आर्थिक सहायता योजनाओं का क्रियान्वयन भी इसी कार्यालय के माध्यम से होगा।   मरांगगोके पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना को मिलेगा बल झारखंड सरकार वर्तमान में 'मरांगगोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना' के माध्यम से राज्य के प्रतिभाशाली बच्चों को विदेश भेज रही है। हाल ही में इस योजना के लाभार्थियों की संख्या 25 से बढ़ाकर 50 कर दी गई है।   इस योजना के तहत एसटी, एससी और ओबीसी श्रेणी के छात्रों को यूनाइटेड किंगडम और उत्तरी आयरलैंड के विश्वविद्यालयों में मास्टर और एमफिल करने के लिए 100% वित्तीय सहायता दी जाती है। 'ऑफिस ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स' के गठन के बाद इस योजना का संचालन और भी अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित होने की संभावना है।   राज्य सरकार के इस कदम से न केवल झारखंड के मेधावी छात्र वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकेंगे, बल्कि झारखंड भी उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूती से उभरेगा।

पटना से दिल्ली तक सियासी हलचल तेज, मंत्रिमंडल विस्तार से पहले अहम बैठकों का दौर जारी

पटना  बिहार की राजनीति में हलचल तेज है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल विस्तार से पहले दूसरी बार दिल्ली दौरे पर हैं। रविवार को उनकी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और कई केंद्रीय मंत्रियों से अहम मुलाकातें तय हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण बैठक अमित शाह के साथ मानी जा रही है। 6 मई को प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार से पहले यह दौरा निर्णायक माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री के साथ बैठक में मंत्रिमंडल के अंतिम स्वरूप पर मुहर लग सकती है। दिनभर बैठकों का मैराथन दिल्ली में मुख्यमंत्री का पूरा दिन बैठकों से भरा रहेगा। सुबह 10:15 बजे वे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। इसके बाद 11 बजे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मिले।र 11:30 बजे जीतन राम मांझी से मुलाकात निर्धारित है। दोपहर 1 बजे गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, शाम 6 बजे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और 6:30 बजे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से उनकी बैठक होगी। मंत्रिमंडल विस्तार पर क्या संकेत? राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, बिहार में भाजपा कोटे से 16 मंत्री बनाए जाने की तैयारी है। इनमें 13 पुराने चेहरे बरकरार रह सकते हैं, जबकि 3 नए चेहरों को मौका मिलने की चर्चा है। इन नए नामों को लेकर पार्टी के भीतर मंथन जारी है। जदयू खेमे में बड़े बदलाव के संकेत कम हैं, लेकिन वहां से भी 2–3 नए चेहरों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए के अन्य घटक दलों में भी लगभग नाम तय माने जा रहे हैं। नीतीश से मुलाकात के बाद दिल्ली रवाना दिल्ली रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। करीब आधे घंटे चली इस बैठक को अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच मंत्रिमंडल के फॉर्मूले पर चर्चा हुई। यह वीडियो भी देखें सादगी से शपथ, विस्तार होगा भव्य सूत्रों के अनुसार, हालिया शपथ ग्रहण समारोह सादगी से संपन्न हुआ था, लेकिन अब मंत्रिमंडल विस्तार को भव्य रूप देने की तैयारी है। संभावना है कि इस कार्यक्रम में भाजपा के कई वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता शामिल हो सकते हैं। फिलहाल, सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि भाजपा कोटे से वे तीन नए चेहरे कौन होंगे, जो बिहार की सियासत में नई भूमिका में नजर आएंगे।

बिक्रमगंज की बिस्को इंडस्ट्रीज का अंत, 30 एकड़ का औद्योगिक परिसर खंडहर में तब्दील हुआ

 रोहतास  कभी बिक्रमगंज की पहचान और औद्योगिक शान रहा बिस्को इंडस्ट्रीज अब इतिहास बन चुका है। वर्षों से उपेक्षा और बदहाली झेल रहे इस प्रतिष्ठान को आखिरकार कबाड़ में बेच दिया गया। इसके साथ ही इसके दोबारा चालू होने की बची-खुची उम्मीद भी खत्म हो गई। करीब 30 एकड़ में फैला यह औद्योगिक परिसर कभी सैकड़ों लोगों को रोजगार देता था और इलाके की अर्थव्यवस्था की धुरी माना जाता था। आज यहां सिर्फ जर्जर इमारतें, बंद गोदाम और वीरानी नजर आती है। कभी वीआईपी ठहरते थे, अब खंडहर एक समय ऐसा था जब बिस्कोमान परिसर का निरीक्षण भवन वीआईपी मूवमेंट का केंद्र हुआ करता था। पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह से लेकर कई केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी यहां ठहर चुके हैं। 9 अप्रैल 1984 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रशेखर सिंह ने बिक्रमगंज अनुमंडल का उद्घाटन भी यहीं से किया था। लेकिन आज हालात यह हैं कि परिसर में जब्त ट्रक, पत्थर-गिट्टी और कबाड़ जमा है। कभी यहां जब्त शराब और मांस के विनष्टीकरण जैसी कार्रवाई भी की जाती थी, जिसे बाद में अधिकारियों की आपत्ति के बाद बंद करना पड़ा। आय के स्रोत बंद, हालत बदतर बिस्को इंडस्ट्रीज की आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई। पहले यहां चावल मिल, गोदाम किराया, ब्रान बिक्री और बिस्कोमान भवन से अच्छी आमदनी होती थी। लेकिन चावल मिल बंद होने से ब्रान उत्पादन ठप हो गया। भवन जर्जर होने के कारण यहां अब कोई ठहरता नहीं है। पहले जहां एफसीआई और एसएफसी समेत कई एजेंसियां गोदाम किराए पर लेती थीं। वहीं अब सिर्फ एक गोदाम एसएफसी को किराए पर है। वर्तमान में यहां सीमित स्तर पर केवल रासायनिक खाद की बिक्री हो रही है और महज 3–4 कर्मचारी बचे हैं। सरकारी उपेक्षा से बुझा उद्योग करीब आठ दशक पहले स्थापित यह राइस मिल अपने समय में अत्याधुनिक मानी जाती थी। बताया जाता है कि 1940 के दशक में जापानी तकनीक से इसकी शुरुआत हुई थी। हालांकि बिजली की कमी के कारण यह पूरी तरह स्वचालित रूप से संचालित नहीं हो सका और धीरे-धीरे बंद हो गया। 80 के दशक में सहकारिता नेता स्व. तपेश्वर सिंह के प्रयास से बिस्कोमान ने इसे अधिग्रहित किया। यहां कैटल फीड और साल्वेंट प्लांट जैसी परियोजनाओं की शुरुआत भी हुई, लेकिन उनके निधन के बाद योजनाएं अधूरी रह गईं और उद्योग लगातार गिरावट की ओर बढ़ता गया। हजारों रोजगार की उम्मीद टूटी अगर समय रहते इस उद्योग को पुनर्जीवित किया जाता, तो आज यहां करीब एक हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता था। स्थानीय लोग मानते हैं कि यह सिर्फ एक फैक्ट्री का बंद होना नहीं, बल्कि पूरे इलाके की आर्थिक संभावनाओं का खत्म होना है। आज बिस्को इंडस्ट्रीज का कबाड़ में बिकना न सिर्फ एक औद्योगिक इकाई का अंत है, बल्कि बिक्रमगंज के स्वर्णिम औद्योगिक अतीत के अंतिम अध्याय का भी समापन है।  

रेलवे विकास योजना: भागलपुर में एफओबी, ड्रेनेज और रूट रिले सिस्टम से बदलेगा स्टेशन

भागलपुर  भागलपुर रेलवे स्टेशन में बड़े पैमाने पर यार्ड आधुनिकीकरण की शुरुआत हो गई है। स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 2 और 3 के विस्तार के साथ ही फुटओवर ब्रिज (एफओबी) की सीढ़ियों को चौड़ा किया जा रहा है। एफओबी की एक सीढ़ी को तोड़कर उसके स्थान पर चौड़ी सीढ़ी का निर्माण किया जाएगा। हालांकि इस काम की शुरुआत अप्रैल में करने की योजना थी, लेकिन कुछ तकनीकी खामियों के कारण देरी हुई। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि प्लेटफार्म के विस्तार और यार्ड आधुनिकीकरण का कार्य दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना के लिए कुल 20 करोड़ रुपये की राशि भी मंजूर की जा चुकी है। मालदा एडीआरएम ने किया निरीक्षण शनिवार को मालदा एडीआरएम अमरेंद्र कुमार मौर्य अधिकारियों की टीम के साथ भागलपुर पहुंचे और निर्माणस्थल का निरीक्षण किया। यह उनके पद संभालने के बाद पहली बार निरीक्षण था। एडीआरएम ने कहा कि यार्ड का आधुनिकीकरण चरणबद्ध तरीके से होगा। प्लेटफार्म संख्या 2 और 3 का विस्तार कर 23 कोच तक लंबाई बढ़ाई जाएगी। स्टेशन का आधुनिकीकरण ट्रेनों की संचालन क्षमता और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर किया जाएगा। यह वीडियो भी देखें दो चरणों में होगा काम यार्ड और प्लेटफार्म के विस्तार का काम दो चरणों में पूरा किया जाएगा।     पहले चरण में: लोहिया पुल की ओर वाले एफओबी की सीढ़ियों की चौड़ाई बढ़ाई जाएगी।     दूसरे चरण में: नाथनगर छोर वाली सीढ़ियों का काम शुरू होगा। इसके साथ ही प्लेटफार्मों को चौड़ा करने का काम भी धीरे-धीरे शुरू किया जाएगा। एफओबी की चौड़ाई बढ़ाने और प्लेटफार्म विस्तार से यात्रियों की आने-जाने में सुविधा होगी प्लेटफार्म विस्तार से ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी वर्तमान में भागलपुर स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 2, 3, 5 और 6 की लंबाई कम है, जिससे बड़ी ट्रेनों को प्लेटफार्म 1 और 4 पर ही ठहराया जाता है। प्लेटफार्म दो-तीन के विस्तार और एफओबी की चौड़ाई बढ़ाने के बाद दो नंबर प्लेटफार्म की रेल लाइन को मेन ट्रैक में बदला जाएगा, जिससे ट्रेनें 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गुजर सकेंगी। वर्तमान में ट्रेनें 30 किमी प्रति घंटे की गति से ही प्लेटफार्म पार कर पाती हैं। प्लेटफार्म का विस्तार करने के लिए स्वीच और प्लेटफार्म बदलने होंगे, जिससे स्टेशन में अधिक जगह मिलेगी और ट्रेनों की संचालन क्षमता बढ़ेगी। रूट रिले सिस्टम से ट्रेन संचालन होगा आसान भविष्य में भागलपुर स्टेशन पर रूट रिले सिस्टम की व्यवस्था की जाएगी। इसके तहत सेंट्रलाइज पैनल से ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। इस प्रणाली के लागू होने के बाद, स्टेशन के पूर्वी और पश्चिमी पैनल की अलग-अलग मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। स्टेशन मास्टर एक ही पैनल से ट्रेन संचालन और शंटिंग का निर्णय ले सकेंगे। पुराने सिस्टम की जगह सिंगलिंग और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली लागू होगी। सेंट्रलाइज पैनल के लिए दो मंजिला भवन का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए कुछ रेलवे क्वार्टर तोड़े जाएंगे। यह व्यवस्था भागलपुर-दुमका रेललाइन के दोहरीकरण से भी जोड़ी जाएगी। यार्ड परिसर में ड्रेनेज और नई लाइनों का विकास यार्ड में ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाएगा, जिससे बरसात में जल जमाव की समस्या खत्म होगी। इसके अलावा बड़हरवा से भागलपुर तक तीसरी और चौथी रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा। यार्ड के भीतर तीन नए लेवल क्रॉसिंग (एलसी) गेट भी लगाए जाएंगे। सुरक्षा और दुर्घटना रोकने की दृष्टि से यह कार्य अहम माना जा रहा है। इस विकास योजना पर 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे, और राशि मंजूर भी हो चुकी है। माड्यूल होल्डिंग और पार्सल बुकिंग कार्यालय का स्थानांतरण मालदा एडीआरएम ने सर्कुलेटिंग एरिया में माड्यूल होल्डिंग एरिया का निरीक्षण किया। इसके लिए रिजर्वेशन टिकट बुकिंग केंद्र के सामने स्थान चिन्हित किया गया है। होल्डिंग एरिया के निर्माण के लिए रेलवे कर्मियों के क्वार्टर तोड़े जाएंगे, और पार्सल बुकिंग कार्यालय को होल्डिंग एरिया के बगल में शिफ्ट किया जाएगा। बुक किए गए पार्सलों को स्टेशन तक पहुंचाने के लिए लिंक रोड का निर्माण किया जाएगा। होल्डिंग एरिया से प्लेटफार्म तक जाने के लिए फुटओवर ब्रिज का निर्माण होगा। एडीआरएम ने कहा कि नक्शा मंजूर होने के बाद ही काम शुरू किया जाएगा। योजना के अनुसार, इस साल छठ पर्व से पहले कार्य शुरू हो पाएगा

पटना पीएमसीएच में डिजिटल क्रांति, हाई-स्पीड इंटरनेट से बदलेगी इलाज की व्यवस्था

 पटना पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) अब पूरी तरह डिजिटल और हाई-टेक अस्पताल बनाने की कवायद आरंभ हुई है। नए भवन में इंटरनेट की परेशानी को देखते हुए अब यहां लीज लाइन लगाने की कवायद हो गई है। मई के दूसरे सप्ताह से नए भवन में हाई-स्पीड इंटरनेट और ऑनलाइन सुविधाएं शुरू होने जा रही हैं, इससे इलाज की व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। करीब 40 लाख रुपये की लागत से भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) पूरे परिसर में लीज लाइन (BSNL Lease Line in PMCH) बिछा रहा है। इसके तहत हर फ्लोर को हाई-स्पीड वाई-फाई से जोड़ा जाएगा। इससे डाक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को मरीजों का डेटा तुरंत उपलब्ध हो सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने योजना स्वीकृत कर पीएमसीएच को पत्र भेज दिया है। रियल-टाइम डेटा से बेहतर निगरानी पीएमसीएच अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि डिजिटल सिस्टम (PMCH Patna Digital Hospital) का सबसे अधिक असर स्त्री एवं प्रसूति और शिशु रोग विभाग में दिखेगा। जन्म और मृत्यु से जुड़ी जानकारी रियल-टाइम में सीधे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूनिसेफ, भारत सरकार और बिहार सरकार को भेजी जा सकेगी। इससे स्वास्थ्य निगरानी और नीति निर्माण में सटीकता बढ़ेगी। पेपरलेस सिस्टम: रिपोर्ट सीधे स्क्रीन पर अस्पताल को पूरी तरह पेपरलेस (Paperless Treatment in PMCH) बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया जा रहा है। एक्स-रे, पैथोलाजी और अन्य जांच की रिपोर्ट सीधे डॉक्टर के कंप्यूटर पर उपलब्ध होगी। मरीजों को रिपोर्ट के लिए लाइन में लगने या भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डिजिटल रिकार्ड से फाइल खोने की समस्या खत्म होगी और इलाज तेज व पारदर्शी बनेगा। नेटवर्क समस्या होगी खत्म नए भवन में लंबे समय से बनी नेटवर्क की समस्या भी इस पहल से समाप्त हो जाएगी। डाक्टरों को मरीजों का डेटा एक्सेस करने और कर्मचारियों को प्रशासनिक कार्य निपटाने में अब कोई बाधा नहीं होगी। साथ ही, मेडिकल छात्रों के लिए डिजिटल सेमिनार और अध्ययन भी आसान होगा। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन से खत्म होगी भीड़ भीड़ नियंत्रण के लिए ऑनलाइन अपाइंटमेंट सिस्टम (PMCH Online Registration System) लागू करने की तैयारी है। मरीज घर बैठे रजिस्ट्रेशन कर नंबर ले सकेंगे। इससे उन्हें तय समय पर डाक्टर से मिलने की सुविधा मिलेगी और ओपीडी में लंबी कतारों से राहत मिलेगी। नंबर में हेराफेरी की आशंका भी खत्म होगी। स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल को आधुनिक बनाने के लिए कनेक्टिविटी को मजबूत करना पहला कदम है। लक्ष्य है कि मरीज को केवल इलाज के लिए अस्पताल आना पड़े, न कि रिपोर्ट या नंबर के लिए लाइन में लगना पड़े। यह डिजिटल पहल न सिर्फ मरीजों को बेहतर सुविधा देगी, बल्कि पीएमसीएच को वैश्विक स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं के करीब ले जाने में भी अहम भूमिका निभाएगी। फाइव-जी लीज लाइन लगने के बाद     मरीजों का डेटा तेजी से ऑनलाइन अपडेट हो सकेगा     डाक्टरों को डिजिटल रिपोर्ट और इमेजिंग तुरंत उपलब्ध होगी     टेलीमेडिसिन और ई-हेल्थ सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा     अस्पताल की प्रशासनिक कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी  

चुनावी नतीजों से पहले पप्पू यादव का ऐलान: BJP जीती तो राजनीति से पीछे हटेंगे

पटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए दो चरणों में मतदान संपन्न हो चुका है और अब सभी को नतीजों का इंतजार है। लेकिन इससे पहले सियासी सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। इसी बीच बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पप्पू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए ऐलान किया कि अगर बंगाल चुनाव में BJP की जीत होती है, तो वह अपना संघर्ष छोड़ देंगे। पप्पू यादव का ऐलान सांसद पप्पू यादव ने एग्जिट पोल के उन अनुमानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है जिनमें बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने की संभावना जताई गई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'अगर बंगाल में बीजेपी जीत जाती है तो हम सेवा, मदद और इंसाफ के लिए संघर्ष छोड़ देंगे।' हालांकि, उन्होंने इसके साथ ही अपना अटूट विश्वास भी प्रकट किया और कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि बंगाल की जनता ने बीजेपी का पूरी तरह सफाया कर दिया है। तेजस्वी यादव का ममता को समर्थन और बीजेपी पर प्रहार पप्पू यादव के अलावा बिहार के कई अन्य नेताओं णे भी बंगाल चुनाव ओर अपनी प्रकातिक्रिया दी है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बंगाल चुनाव को लेकर दावा किया है कि इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की जीत तय है। उन्होंने कहा कि जनता ममता बनर्जी को फिर से मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है और टीएमसी को भारी जनसमर्थन मिल रहा है। तेजस्वी यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए यहाँ तक कह दिया कि भाजपा की हार में ही देश की जीत है। दो चरणों में संपन्न हुआ मतदान, अब 4 मई का इंतजार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार मतदान दो चरणों में आयोजित किया गया है। पहले चरण की वोटिंग के बाद, दूसरे और अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। अब सभी राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम (EVM) में कैद हो गई है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, 4 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे।

JMM-कांग्रेस में दूरी बढ़ने के संकेत, राज्यसभा चुनाव पर असर की आशंका

रांची  झारखंड में अगले कुछ दिनों बाद होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गयी है। दो सीटों पर होने वाले इस चुनाव में सत्ता पक्ष यानी इंडिया गठबंधन फिलहाल मजबूत स्थिति में दिख रहा है, लेकिन विपक्षी एनडीए भी बिहार मॉडल की तर्ज पर एक सीट के लिए समीकरण साधने में जुटा है। जेएमएम का रुख कांग्रेस के साथ अब सहज नहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के कुछ महीनों में झारखंड मुक्ति मोर्चा का रुख सहयोगी दल कांग्रेस के साथ पूरी तरह से सहज नहीं दिख रहा है। जिस तरह से असम विधानसभा में जेएमएम के कांग्रेस के कोई तालमेल किए बगैर अकेले चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लिया, उससे कांग्रेस नेतृत्व को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। असम में हेमंत सोरेन ने एक सप्ताह से अधिक समय तक कैंप कर दर्जनों चुनावी सभाएं की, जिससे वहां गैर भाजपा मतों में बंटवारे की संभावना जताई जा रही है। असम में हेमंत सोरेन के साथ कल्पना सोरेन ने चाय बगान में रहने वाले झारखंडी मूल के मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की। दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी जेएमएम ने कांग्रेस की जगह ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के पक्ष में कई चुनावी सभाओं को संबोधित किया। इससे भी कांग्रेस और जेएमएम के बीच दूरियां बढ़ने के संकेत मिले। लेकिन झारखंड में अब भी हेमंत सोरेन सरकार में कांग्रेस और आरजेडी शामिल है। असम और पश्चिम बंगाल की सियासत का झारखंड में भी दिखेगा असर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि असम और पश्चिम बंगाल में झामुमो की अलग राह का सीधा असर झारखंड की सियासत पर भी पड़ सकता है। असम में जेएमएम और कांग्रेस के बीच बढ़ी दूरी ने विपक्षी एकता पर सवाल खड़े किये हैं। वहीं पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के साथ झुकाव से भी झारखंड में दोनों दलों के रिश्तों में खटास की आशंका बढ़ गई। ऐसे में राज्यसभा चुनाव के दौरान अंदरूनी असंतोष या रणनीतिक दूरी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। एक सीट जीतने के लिए 27-28 विधायकों के वोटों की आवश्यकता झारखंड में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए आम तौर पर 27-28 विधायकों के वोटों की आवश्यकता होती है। यह संख्या झारखंड विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 81 के आधार पर तय होती है। जहां प्रथम और द्वितीय वरीयता के मतों से एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा चुनाव होता है। सीट बंटवारे को लेकर पेच फंसने की आशंका 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास 56 विधायक का समर्थन प्राप्त है, जो दोनों सीटों पर कब्जा करने के लिए पर्याप्त है। लेकिन जिस तरह से जेएमएम की ओर से कांग्रेस की अनदेखी की जा रही है। इसके कारण सीट बंटवारे को लेकर पेच फंस सकता है। जेएमएम अपने बल पर एक सीट निकालने में सक्षम है, जबकि दूसरी सीट पर जीत के लिए कांग्रेस विधायकों का समर्थन जरूरी है। इन परिस्थितियों में जेएमएम की ओर से दूसरी सीट के लिए किसी ऐसे राजनेता या उद्योगपति को प्रत्याशी बनाया जा सकता है या समर्थन दिया जा सकता है, जो अपने बलबूते कई विधायकों का समर्थन हासिल कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स में झारखंड के एक पूर्व सांसद के नाम की भी चर्चा हो रही है।  

पटना में शराब तस्करी का नेटवर्क, होम डिलीवरी से लेकर ‘निंजा तकनीक’ तक का खुलासा

पटना राजधानी के पॉश इलाके कंकड़बाग में 'प्योर मिल्क' (शुद्ध दूध) का मतलब पाश्चुरीकृत दूध का कोई पैकेट नहीं है। ये महंगी ब्लेंडेड स्कॉच व्हिस्की का एक कोड वर्ड है, जो जासूसी नजरों से बचने के लिए टेट्रा पैक में आती है। सूखे बिहार (शराबबंदी) में जहां पिछले 10 वर्षों से शराबबंदी ने 'सोनपापड़ी' को महंगी शराब (जो झारखंड, यूपी और बंगाल से तस्करी कर लाई जाती है) के कोड में बदल दिया है। यहां, ये अवैध कारोबार न केवल जीवित है, बल्कि चूहे-बिल्ली के खेल की तरह फल-फूल रहा है। कई जिलों, कस्बों और राजधानी पटना में 'समोसेवाला', 'ग्रॉसरीवाला' और 'संन्यासी बाबा' उन युवाओं के लिए कोड वर्ड हैं, जो समय पर विदेशी शराब (IMFL) की होम डिलीवरी सुनिश्चित करते हैं। 'सर, मैं खुशियां पहुंचाता हूं' बिहार अप्रैल 2016 से 'ड्राई' है, लेकिन यह केवल कागजों पर है। वास्तव में ये एक बेहद प्यासी भूमि है, जहां अधिकांश पिज्जा डिलीवरी से भी तेज एक सटीक होम-डिलीवरी सिस्टम काम कर रहा है। शराबबंदी ने एक फलता-फूलता काला बाजार बना दिया है, जहां युवा एजेंटों द्वारा शराब दरवाजे तक पहुंचाई जाती है। विपक्षी नेताओं के अनुसार, ये एजेंट एक सक्रिय अवैध सप्लाई चेन की साइलेंट समझ के साथ काम करते हैं। शराब पर पूर्ण प्रतिबंध के एक दशक बाद भी शराब की मांग खत्म नहीं हुई है। ये बस पर्दे के पीछे चली गई है। पटना के कई पॉश इलाकों में होम डिलीवरी के धंधे में शामिल 'ट्यूशन मैम', 'नर्स मैम' और 'पार्लरवाली' उन युवतियों के कोड हैं, जो शराब की डिलीवरी करती हैं। पटना में होम-डिलीवरी एजेंट मुन्ना से मुलाकात हुई। वो फॉर्मल शर्ट पहनता है। स्कूटर चलाता है और लैपटॉप बैग ले जाता है। उसने टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) संवाददाता से कहा, 'सर, मैं खुशियां पहुंचाता हूं।' साथ ही जोड़ा कि वो 'खुशी' यूपी या झारखंड से तस्करी कर लाई गई प्रीमियम विदेशी शराब होती है। मुन्ना की सबसे बेहतरीन तरकीब ब्रांडेड कंपनियों के खाने के खाली डिब्बों के अंदर छिपी बोतलें पहुंचाना है। वो 'किराना-वाला' बनकर घरों में जाता है। 5 मिनट में 'संन्यासी बाबा' की डिलिवरी पटना के मोहल्लों में शराबबंदी ने पार्टियों को नहीं रोका। बस, उन्हें गुप्त बना दिया। 'संन्यासी बाबा' से भी मुलाकात हुई, जो एक स्थानीय होम-डिलीवरी नेटवर्क के अनौपचारिक सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) हैं। जहां प्रमुख ऐप्स 10 मिनट में किराना सामान पहुंचाते हैं, वहीं 'संन्यासी' का नेटवर्क पांच मिनट में डिलीवरी करता है, बेशक अतिरिक्त शुल्क के साथ। यहां ब्रांड के आधार पर 180 मिलीलीटर के पैक की कीमत 200 रुपये से बढ़कर 600 रुपये तक हो जाती है। ये सिस्टम लगभग अचूक है। कोई दुकान या साइनबोर्ड नहीं है। बस 'हेल्थ एंड फिटनेस' नाम का एक व्हाट्सएप ग्रुप है। एक मैसेज 'दो प्रोटीन शेक' और 'दो प्योर मिल्'क चाहिए। कुछ ही मिनटों में एक 'दूधवाला' भारी दूध के केन लेकर मोटरसाइकिल पर आ जाता है। विवादित सामाजिक प्रयोगों में से एक बिहार की शराबबंदी नीति भारत के सबसे विवादित सामाजिक प्रयोगों में से एक बनी हुई है, जो मापने योग्य सामाजिक लाभों, भारी राजकोषीय लागतों और प्रवर्तन की लगातार विफलताओं से चिह्नित है। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार न बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद शुल्क अधिनियम, 2016 के जरिए से शुरू किया गया ये प्रतिबंध शराबखोरी, गरीबी और घरेलू हिंसा को कम करने के लिए महिलाओं की मांगों के जवाब के रूप में पेश किया गया था। एक दशक बाद, इसका रिकॉर्ड एक तरफ घरेलू कल्याण और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार, तो दूसरी तरफ राजस्व का पतन, काले बाजार का विस्तार और न्यायिक बोझ के बीच बुरी तरह विभाजित है। कानूनी बाजार के गायब होने से मांग खत्म नहीं हुई। इसके बजाय, इसने एक विशाल अवैध व्यापार के लिए जगह बना दी। अनुमान बताते हैं कि बिहार में अब 25,000 करोड़ रुपये से 30,000 करोड़ रुपये की समानांतर शराब अर्थव्यवस्था चल रही है। इसके अलावा, दशक भर की शराबबंदी ने आम नागरिकों को 'आविष्कारशील' तस्करों में बदल दिया है, जिनकी इंजीनियरिंग की महारत बड़े-बड़े मैकेनिकों को मात दे सकती है। बिहार में शराब तस्करी का 'निंजा तकनीक' तस्करों ने हाल ही में वो अपनाया है जिसे पुलिस 'निंजा तकनीक' कहती है। फरवरी में एक व्यक्ति को अपनी मोटरसाइकिल से बंधी खोखली प्लास्टिक की कुर्सियों के अंदर छिपाई गई दर्जनों बोतलों के साथ पकड़ा गया था। ब्लॉकबस्टर फिल्म 'पुष्पा' से प्रेरणा लेते हुए, किशनगंज जिले में ताजे टमाटर और गोभी के नीचे छिपाई गई 862 लीटर विदेशी शराब ले जाते हुए तस्करों को पकड़ा गया। मुजफ्फरपुर जाने वाला एक साधारण सब्जी का ट्रक लग रहा था, लेकिन आखिरकार व्हिस्की की गंध सब्जियों की खुशबू पर भारी पड़ गई और भेद खुल गया। नवादा में पुलिस ने एक ऐसी मोटरसाइकिल बरामद की जिसका ईंधन टैंक पूरी तरह से शराब के लिए इस्तेमाल किया गया था। बाइक को चालू रखने के लिए तस्करों ने सीट के नीचे एक छोटा सा अलग पेट्रोल बॉक्स लगाया था। शराब के पाउच या बोतलें कटे हुए गैस सिलेंडरों, पानी के टैंकरों और एम्बुलेंस के अंदर भी ठूंस दी जाती हैं। सारण में 'स्वच्छ भारत अभियान' और 'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ' जैसे सरकारी नारों वाला एक टैंकर हरियाणा निर्मित व्हिस्की के 330 कार्टन से भरा पाया गया। शराब तस्करी में इस्तेमाल कोडवर्ड का मतलब बिहार में शराब तस्करी के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कोड वर्ड्स और उनके असली मतलब जानें।     प्योर मिल्क: पॉश इलाकों में 'महंगी स्कॉच व्हिस्की' के लिए इस्तेमाल होने वाला कोड।     सोनपापड़ी: पड़ोसी राज्यों से तस्करी कर लाई गई 'महंगी शराब' का गुप्त नाम।     प्रोटीन शेक: वाट्सऐप ग्रुप्स पर 'शराब की बोतलों' के ऑर्डर के लिए कोड।     संन्यासी बाबा: स्थानीय शराब नेटवर्क के 'मुख्य संचालक या मास्टरमाइंड' का नाम।     समोसेवाला/ग्रॉसरीवाला: घर पर शराब पहुंचाने वाले 'युवा डिलीवरी एजेंटों' की पहचान।     हेल्थ एंड फिटनेस: शराब के शौकीनों के लिए बना गुप्त 'वाट्सऐप सप्लाई ग्रुप'।     ट्यूशन मैम/नर्स मैम/पार्लरवाली: होम डिलीवरी करने वाली 'महिला एजेंटों' के कोड।     खुशियां: डिलीवरी एजेंटों की ओर से प्रीमियम 'विदेशी शराब' के लिए संबोधन।     निंजा तकनीक: खाली कुर्सियों या सब्जियों के नीचे 'शराब छिपाने' का तरीका।     दूधवाला: मोटरसाइकिल पर दूध के केन में 'शराब की खेप' ढोने वाला। सूखे नशे की चपेट में … Read more

CID की बड़ी कार्रवाई, करोड़ों के घोटाले में नकदी और संपत्ति बरामद

 रांची झारखंड के जिला कोषागारों से अवैध तरीके से वेतन निकासी के करोड़ों रुपये के घोटाले में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की विशेष जांच टीम (SIT) ने कार्रवाई की। SIT ने गुरुवार को बोकारो के एसपी कार्यालय की लेखा शाखा में तैनात सिपाही काजल मंडल को गिरफ्तार किया है। आरोपित के घर से नकदी की बरामदगी   यह इस घोटाले में अब तक की चौथी गिरफ्तारी है। गिरफ्तार सिपाही काजल मंडल बोकारो स्टील सिटी का निवासी है। पुलिस की पूछताछ और उसकी निशानदेही पर SIT ने बोकारो स्थित उसके आवास पर छापेमारी की, जहां से 8.75 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह राशि अवैध तरीके से सरकारी खजाने से निकाली गई थी। मुख्य आरोपित के साथ साठगांठ जांच में यह खुलासा हुआ है कि काजल मंडल इस घोटाले के मुख्य मास्टरमाइंड और लेखापाल (Accountant) कौशल कुमार पांडेय का सक्रिय सहयोगी था। कौशल पांडेय ने यात्रा मद (Travel Allowance) और अन्य मदों से प्राप्त अवैध राशि काजल मंडल के बैंक खाते में ट्रांसफर की थी। सिपाही ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में इस राशि को घर में छिपाने की बात स्वीकार की है। इस मामले में SIT पूर्व में ही तीन अन्य आरोपितों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है:         कौशल कुमार पांडेय: मुख्य आरोपित, लेखापाल (एसपी कार्यालय)।         सतीश कुमार उर्फ सतीश कुमार सिंह: सहयोगी गृह रक्षक।         अशोक कुमार भंडारी: एएसआई (ASI) और सहयोगी। ये तीनों वर्तमान में रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद हैं। अब काजल मंडल सहित सभी चारों आरोपितों को रिमांड पर लेकर अन्य साथियों और नेटवर्क के बारे में पूछताछ की जाएगी। जब्त संपत्तियों का विवरण SIT ने इस घोटाले की जांच के दौरान अब तक करोड़ों की संपत्ति और दस्तावेज जब्त किए हैं :         भूमि व मकान: बोकारो के तेलीडीह में 4.08 डिसमिल और 4.98 डिसमिल भूमि के दस्तावेज। साथ ही, उक्त भूमि पर निर्मित तीन मंजिला आलीशान मकान।         फिक्स्ड डिपॉजिट: विभिन्न बैंकों में जमा 1.93 करोड़ रुपये और 18 लाख रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट को फ्रीज (Seize) कर दिया गया है।         नकद: ताजा कार्रवाई में जब्त 8.75 लाख रुपये। राज्य सरकार के आदेश पर SIT की पैनी नजर झारखंड सरकार के कड़े रुख के बाद CID की विशेष टीम बोकारो, हजारीबाग और चाईबासा में दर्ज अवैध निकासी के मामलों की जांच कर रही है। SIT ने इन सभी मामलों को टेकओवर करते हुए रांची के CID थाने में प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों का मानना है कि रिमांड पर पूछताछ के बाद इस सिंडिकेट में शामिल कई अन्य बड़े नामों का खुलासा हो सकता है। कार्रवाई को लेकर पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।  

सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई, नक्सलियों की साजिश नाकाम

 चाईबासा झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में कोबरा 209 बटालियन के नेतृत्व में चल रहे अभियान में अब फॉलो-अप कार्रवाई के दौरान बड़ी बरामदगी सामने आई है। सारंडा और टोंटो-गोइलकेरा क्षेत्र के रूटुगुटू जंगल में मुठभेड़ के बाद चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन में भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री जब्त की गई है सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, घटनास्थल से एक SLR राइफल, मैगजीन और जिंदा कारतूस, करीब 182 राउंड SLR गोली, खाली कारतूस और एक कार्बाइन हथियार बरामद हुआ है। इसके अलावा एक AK-47 का खाली केस भी मिला है। सबसे अहम बरामदगी विस्फोटक सामग्री की है। कोबरा 209 और अन्य सुरक्षाबलों ने कुल 4 पैकेट जिलेटिन (करीब 5 किलो), डेटोनेटर, कॉर्टेक्स वायर और अन्य विस्फोटक उपकरण बरामद किए हैं। इससे संकेत मिलता है कि नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में थे। बरामद सामानों में पिट्ठू, बैग, पाउच, पानी की बोतलें, बैटरी, टेप, धागा, पिन, कैंची, मल्टीपर्पज चाकू, प्लेट, छाता, सिरिंज, नीडल, सिरिंज बोतलें, हेडफोन और डेटा केबल जैसे दैनिक उपयोग और संचार से जुड़े उपकरण भी शामिल हैं। यह दर्शाता है कि नक्सली लंबे समय तक जंगल में ठहरने की तैयारी में थे। अभी भी फंसे हैं कुछ नक्सली इधर, मुठभेड़ में मारे गए नक्सली अमृत उर्फ इजरायल पूर्ति का पोस्टमार्टम पूरा कर लिया गया है। सुरक्षा कारणों से शव को 48 घंटे बाद शुक्रवार को चाईबासा लाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उसका पोस्टमार्टम किया। बताया जा रहा है कि वह करीब 14 साल की उम्र से माओवादी संगठन से जुड़ा हुआ था और अजय महतो दस्ते का सक्रिय सदस्य था। सूत्रों के मुताबिक, इलाके में अभी भी कुछ नक्सलियों के फंसे होने की आशंका है। इसी को ध्यान में रखते हुए कोबरा 209 और अन्य सुरक्षाबलों ने पूरे जंगल क्षेत्र की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन और तेज कर दिया है। बीच-बीच में रुक-रुक कर फायरिंग की भी सूचना है, हालांकि अब स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। पूरे इलाके में हाई अलर्ट सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह दस्ता हाल ही में सारंडा जंगल से निकलकर इस इलाके में सक्रिय हुआ था और कुख्यात नक्सली नेता मिसिर बेसरा तथा अजय महतो समूह से जुड़ा हुआ था। फिलहाल पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी है और अभियान लगातार जारी है। अधिकारियों का कहना है कि बरामद सामग्री की जांच से माओवादी नेटवर्क और उनकी भविष्य की योजनाओं को लेकर अहम सुराग मिल सकते हैं।