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झारखंड की लोक संस्कृति और हस्तशिल्प का संगम, बच्चों की पेंटिंग प्रदर्शनी भी

रांची झारखंड की राजधानी रांची के आड्रे हाउस में एक से तीन मई तक तीन दिवसीय सांसद सांस्कृतिक महोत्सव सह स्वदेशी मेला का आयोजन किया जाएगा. महोत्सव में सुबह नौ से रात 10 बजे तक आम लोगों के लिए निशुल्क प्रवेश रहेगा. केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि आयोजन में कला, संस्कृति और स्वदेशी उत्पादों का संगम देखने को मिलेगा. तीन दिनों तक यहां झारखंड की लोक संस्कृति, हस्तशिल्प, पारंपरिक खानपान और मोटे अनाज से बने उत्पाद आकर्षण का केंद्र होंगे. 125 स्टॉलधारकों को निशुल्क स्टॉल स्वदेशी मेले में 125 स्टॉलधारकों को निशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराए जा रहे हैं. मेले में हस्तशिल्प, सोहराय पेंटिंग, हाथ से बने खिलौने और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा. साथ ही मोटे अनाज से बने चॉकलेट, केक और बिस्किट जैसे उत्पाद भी लोगों को आकर्षित करेंगे. बच्चों की पेंटिंग प्रदर्शनी भी आकर्षण संजय सेठ ने कहा कि महोत्सव में ऑपरेशन सिंदूर विषय पर रांची के बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी. इसमें बच्चों ने सैन्य बलों की शौर्यगाथा को कैनवास पर उकेरा है. महोत्सव के दौरान स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के बीच सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं होंगी. शाम छह बजे से तक देशभर के कलाकार तीन अलग-अलग मंचों पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे. उद्घाटन में गणमान्य होंगे शामिल एक मई की सुबह 11 बजे स्वदेशी मेले का शुभारंभ होगा. शाम पांच बजे महोत्सव का विधिवत उद्घाटन किया जाएगा. उद्घाटन समारोह में राज्यपाल संतोष गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्यसभा सांसद आदित्य साहू और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ सहित कई गणमान्य अतिथि शामिल होंगे. दो मई को केंद्रीय संस्कृति, पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और तीन मई को केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की उपस्थिति प्रस्तावित है. तीनों दिन विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम एक मई: गरबा, डालखाई, झूमर और पद्मश्री मुकुंद नायक की प्रस्तुति. दो मई: छऊ, पाईका, शास्त्रीय संगीत और वंदे मातरम पर विशेष कार्यक्रम. तीन मई: उलगुलान नाटिका, बिहू नृत्य, जनजातीय लोक नृत्य और अन्य प्रस्तुतियां.

परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर पर लगे पाबंदी, अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई

  गढ़वा आगामी 3 मई (रविवार) को आयोजित होने वाली नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) को लेकर गढ़वा जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है. परीक्षा को निष्पक्ष, कदाचारमुक्त और शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराने के लिए सदर अनुमंडल दंडाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार ने जिले के तीनों परीक्षा केंद्रों के आसपास निषेधाज्ञा लागू कर दी है. गढ़वा सदर अनुमंडल के अंतर्गत कुल तीन केंद्रों पर परीक्षा आयोजित की जाएगी प्लस टू गोविंद उच्च विद्यालय, नामधारी कॉलेज और केंद्रीय विद्यालय. सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक लागू रहेगा आदेश मिली जानकारी के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत जारी यह आदेश रविवार सुबह 6 बजे से प्रभावी होगा और शाम 7 बजे तक लागू रहेगा. परीक्षा केंद्रों की चहारदीवारी से 200 मीटर की परिधि को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया है. अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि परीक्षा की शुचिता भंग करने या किसी भी तरह की अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने सभी केंद्रों पर दंडाधिकारियों और पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति कर दी है. किसी भी तरह की अव्यवस्था या कदाचार की स्थिति से निपटने के लिए फ्लाइंग स्क्वाड भी सक्रिय रहेगा. इन गतिविधियों पर पाबंदी प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, परीक्षा केंद्रों के आसपास निम्नलिखित कार्यों पर रोक रहेगी अनाधिकृत प्रवेश:- परीक्षा से संबंधित व्यक्तियों के अलावा अन्य बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित होगा. हथियार और गैजेट:- किसी भी तरह के घातक हथियार, विस्फोटक या एनटीए  द्वारा प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स ले जाने पर रोक. भीड़ और नारेबाजी:- निर्धारित परिधि में अनावश्यक आवागमन, मजमा लगाने, प्रदर्शन करने या नारेबाजी करने पर पाबंदी. लाउडस्पीकर या किसी भी प्रकार के शोर मचाने वाले यंत्रों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होगी.

JPSC की विश्वसनीयता पर सवाल, राज्यपाल ने अध्यक्ष को दिए जवाबदेही तय करने के निर्देश

 रांची  झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की कार्यशैली और परीक्षाओं में लगातार मिल रही त्रुटियों पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने गहरी चिंता जताते हुए जांच के आदेश दिए हैं. राज्यपाल ने इस संबंध में जेपीएससी के अध्यक्ष एल खिंग्यांते को एक पत्र भेजकर कड़ी नाराजगी जाहिर की है. प्रश्नों और उत्तर कुंजी में गड़बड़ी पर कड़ा रुख झारखंड के राज्यपाल ने अपने पत्र में हाल ही में संपन्न हुई सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) और सहायक वन संरक्षक मुख्य परीक्षा का जिक्र किया है. उन्होंने कहा कि विभिन्न माध्यमों से यह तथ्य सामने आए हैं कि इन परीक्षाओं के प्रश्न-पत्रों में गंभीर त्रुटियां थीं और जारी की गई मॉडल उत्तर कुंजी में भी कई उत्तर गलत थे. आयोग की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिह्न झारखंड के राज्यपाल ने अध्यक्ष का ध्यान आकृष्ट कराते हुए लिखा कि इस प्रकार की लापरवाहियां अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति पैदा करती हैं. इससे परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे मामले आयोग की साख को धूमिल करते हैं, जो अत्यंत चिंताजनक है. जवाबदेही तय कर कार्रवाई के निर्देश राज्यपाल ने जेपीएससी अध्यक्ष को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उक्त प्रकरणों की पूरी पारदर्शिता के साथ समुचित जांच की जाए. साथ ही लापरवाही बरतने वालों की जिम्मेदारी निर्धारित की जाए और दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो. राज्यपाल बोले- गलतियों से बचने के लिए उठाएं सतर्कतापूर्ण उपाय राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा है कि भविष्य में ऐसी गलतियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधारात्मक और सतर्कतापूर्ण उपाय अपनाए जाएं. उन्होंने यह भी अपेक्षा व्यक्त की है कि आयोग पारदर्शिता और उच्च मानकों को बनाए रखते हुए परीक्षाओं का संचालन करे, ताकि प्रदेश के युवाओं और अभ्यर्थियों का विश्वास आयोग पर बना रहे.

अभिषेक अग्रवाल की ठगी का पर्दाफाश: नकदी और मोबाइल बरामद, भोजपुर DM को बनाया शिकार

नालंदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शुक्रवार को नालंदा जिले के परनावा गांव पहुंचे, जहां उन्होंने शरण निवास बाबा महतो साहब की जन्मस्थली पर आयोजित राजकीय मेले का विधिवत शुभारंभ किया। इस दौरान जनसभा को संबोधित करते हुए  करीब 14 मिनट के अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के भविष्य के विजन को साझा किया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बिहार विकसित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हर ब्लॉक में वर्ल्ड क्लास शिक्षा का प्लान शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव का संकल्प दोहराते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार हर ब्लॉक में उच्च गुणवत्ता वाले मॉडल स्कूल और कॉलेज विकसित करेगी। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में शिक्षा का स्तर इतना बेहतर होगा कि बड़े अधिकारी और राजनेता भी अपने बच्चों का वहां दाखिला कराने के लिए उत्सुक होंगे। उन्होंने कहा कि जिस दिन इन स्कूलों में एडमिशन के लिए पैरवी आने लगेगी, उसी दिन वे मानेंगे कि सरकार का सपना पूरा हो गया है। बेटियों की सुरक्षा पर सख्त निर्देश मुख्यमंत्री ने महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जब तक बेटियां स्कूल-कॉलेज से सुरक्षित घर नहीं लौट आतीं, तब तक पुलिस चैन की नींद नहीं सोएगी। पंचायत स्तर पर शिकायतों का समाधान आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए उन्होंने घोषणा की कि आगामी 19 मई से हर पंचायत में अधिकारी बैठेंगे, जो ब्लॉक, अंचल और थाने से जुड़ी जन शिकायतों का मौके पर ही निपटारा करेंगे। बाबा महतो धाम के विकास की घोषणा बाबा महतो धाम के विकास को लेकर उन्होंने मंदिर समिति को आश्वस्त किया कि मेले के आयोजन में जमीन की कमी नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए सरकार भूमि अधिग्रहण करेगी और मुख्य मार्ग से मंदिर तक सीधी कनेक्टिविटी के लिए नई सड़क का निर्माण कराया जाएगा। साथ ही, उन्होंने स्थानीय आईटीआई और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का नाम बाबा महतो साहब के नाम पर रखने की भी घोषणा की। विपक्ष पर चुप्पी विकास पर रहा फोकस प्रदेश की आर्थिक समृद्धि पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2025 से 2030 के बीच एक करोड़ युवाओं को सरकारी नौकरी और रोजगार के अवसर प्रदान करना है। उन्होंने निवेश के मोर्चे पर जानकारी देते हुए कहा कि आगामी 20 नवंबर तक बिहार में 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश लाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि बिजली और सड़क के बुनियादी ढांचे के साथ-साथ उद्योगों के जरिए राज्य को समृद्ध बनाया जा सके। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विपक्ष पर कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं की और पूरी तरह से विकास और सुशासन के एजेंडे पर अपनी बात केंद्रित रखी।

बोकारो फाइनेंशियल फ्रॉड: SIT ने करोड़ों की संपत्ति और फिक्स्ड डिपॉजिट जब्त की

बोकारो  झारखंड सरकार के निर्देश पर बोकारो कोषागार से हुई करोड़ों की अवैध निकासी मामले की जांच कर रही साआईडी (CID) को बड़ी कामयाबी मिली है. अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की विशेष जांच दल (SIT) ने इस घोटाले में संलिप्त बोकारो पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लेखा शाखा में तैनात आरक्षी काजल मंडल को गिरफ्तार किया है. लेखापाल का सहयोगी था आरक्षी काजल मंडल सीआईडी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, काजल मंडल पूर्व में गिरफ्तार मुख्य आरोपी लेखापाल कौशल कुमार पांडेय का करीबी सहयोगी था. उनके बयान के आधार पर बोकारो स्थित उसके आवास से 8.75 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं. यह राशि कौशल कुमार पांडेय के खाते से ट्रैवलिंग अलाउंस (TA) के नाम पर अवैध रूप से भेजी गई थी. इस मामले में अब तक कौशल कुमार पांडेय, सतीश कुमार (होमगार्ड) और सहायक अवर निरीक्षक अशोक कुमार भंडारी को पहले ही जेल भेजा जा चुका है. करोड़ों की संपत्ति और फिक्स्ड डिपॉजिट जब्त अनुसंधान के दौरान सीआईडी ने आरोपियों द्वारा अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों का भी खुलासा किया है. अब तक की कार्रवाई में तेलीडीह, बोकारो स्थित 4.08 डिसमिल भूमि पर निर्मित तीन मंजिला आलीशान मकान और अन्य 4.98 डिसमिल भूमि के दस्तावेज जब्त किए गए हैं. इसके अलावा, विभिन्न बैंकों में हस्तांतरित 1 करोड़ 93 लाख रुपये और 18 लाख रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को सीज (Freeze) कर दिया गया है. सख्त धाराओं के तहत अनुसंधान जारी सीआईडी ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(2), 318(4) सहित आईटी एक्ट की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत कांड संख्या 06/26 दर्ज किया है. एसआईटी द्वारा मामले का प्रभावी और गहन अनुसंधान जारी है, जिसमें आने वाले दिनों में कुछ और सफेदपोशों और कर्मचारियों की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है.

सख्त कार्रवाई: बिहार में 730 अपराधी गिरफ्तार, इनामी अपराधियों पर STF की पकड़

 पटना हथियार दिखाकर चुनौती देने वाले अपराधियों पर बिहार पुलिस की एसटीएफ (विशेष कार्य इकाई) कड़े प्रहार में जुटी है। बिहार में हर महीने औसतन तीन पुलिस मुठभेड़ की घटनाएं इसकी गवाही दे रहे हैं। 2026 के पहले चार महीने के दौरान राज्य में पुलिस मुठभेड़ की 12 घटनाएं हुई हैं, जिनमें चार अपराधी ढेर किए गए। वहीं, भागने का प्रयास कर रहे 9 अपराधियों को पुलिस ने पैर में गोली मारकर लंगड़ा कर दिया। अब ये बदमाशों को अपनी बाकी की जिंदगी अफसोस के साथ बितानी पड़ेगी। वैशाली में प्रिंस, मोतिहारी में कुंदन और प्रियांश हुआ ढेर इस साल 6 फरवरी को एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने वैशाली (हाजीपुर) में एक संयुक्त ऑपरेशन के दौरान कुख्यात अपराधी प्रिंस उर्फ अभिजीत को मार गिराया। वह सोना लूट, हत्या और डकैती के 30 से अधिक मामलों में वांछित था और उस पर दो लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। इसके बाद 17 मार्च को कुंदन ठाकुर और प्रियांश दुबे को मोतिहारी के चकिया में पुलिस मुठभेड़ के दौरान मार गिराया गया। घटना से एक दिन पहले कुंदन ठाकुर ने चकिया के अपर थानाध्यक्ष को फोन कर धमकी दी थी। इस एनकाउंटर में एसटीएफ के एक जवान श्रीराम यादव भी गंभीर रूप से घायल होकर इलाज के दौरान शहीद हो गए थे। ईओ की हत्या करने वाला रामधनी यादव मारा गया हाल ही में 29 अप्रैल को एसटीएफ ने सुल्तानगंज नगर परिषद गोलीकांड में फरार चल रहे कुख्यात अपराधी रामधनी यादव को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया। आरोपी ने अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर कार्यालय में घुसकर दिनदहाड़े सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी की हत्या कर दी थी, जबकि सभापति गंभीर रूप से घायल होकर इलाजरत हैं। इनके अलावा मुठभेड़ की अन्य घटनाओं में अपराधियों को पैर में गोली मारी गई। सीवान में पूर्व एमएलसी मनोज कुमार सिंह के भांजे की हत्या करने वाले अपराधी छोटू कुमार यादव को मुठभेड़ के दौरान गुरुवार तड़के दोनों पैर में गोलियां लगी हैं। 38 इनामी सहित 730 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया बिहार पुलिस की एसटीएफ ने पिछले 4 महीने में 38 इनामी कुख्यातों सहित जिलों की टॉप 10 और 20 की सूची में शामिल 730 अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इनके अलावा इनामी सहित 18 नक्सली भी गिरफ्तार हुए। इनामी अपराधियों में तीन लाख, दो लाख एवं एक लाख रुपये के घोषित एक-एक इनामी को पकड़ा गया। 50 हजार रुपये के 9 इनामी, जबकि 25 हजार रुपये के 26 इनामी अपराधियों को पकड़ा गया है। 17 अपराधियों को दूसरे राज्यों से किया गिरफ्तार बिहार में अपराध कर फरार होने वाले अपराधियों पर भी एसटीएफ की कड़ी नजर है। बिहार के कुल 17 अपराधियों को देश के विभिन्न राज्यों से गिरफ्तार कर लाया गया। वहीं, दूसरे राज्यों में अपराध कर बिहार में छिपे 21 अपराधियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई। ऑपरेशन लंगड़ा में घायल हुए ये अपराधी मैनेजर राय (दीदारगंज), प्रह्लाद कुमार (अथमलगोला), नीतीश कुमार (मनेर), परमानंद यादव उर्फ नेपाली, लातेहार (झारखंड), राजीव कुमार उर्फ सूर्या डॉन (खाजेकलां), धीरज कुमार (पंडारक), मंगल कुमार, बलिया (बेगूसराय), छोटू कुमार यादव (सीवान)।

फरार आरोपियों दिलीप और बबलू के खिलाफ बाढ़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई

पटना पटना जिले के बाढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत दाहौर गांव में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कुख्यात सोनू-मोनू गिरोह के सक्रिय सदस्यों के खिलाफ कुर्की-जब्ती की कार्रवाई की है। बाढ़ एसडीपीओ रामकृष्ण के नेतृत्व में कई थानों की पुलिस टीम ने दिलीप सिंह और बबलू सिंह के घर पहुंचकर न्यायालय के आदेश पर चौखट, किवाड़ समेत घरेलू सामान जब्त कर लिया। यह कार्रवाई बाढ़ थाना कांड संख्या 418/23 के तहत की गई है। फरार आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पुलिस के अनुसार, इस मामले में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है। पुलिस ने पहले ही दोनों को आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी थी, लेकिन आरोपियों ने कानून की अनदेखी की, जिसके बाद उनके घरों की कुर्की-जब्ती की गई। शराब के खिलाफ आवाज उठाने पर हुई थी फायरिंग एसडीपीओ रामकृष्ण ने बताया कि यह पूरा मामला शराब के खिलाफ आवाज उठाने को लेकर हुई हिंसा से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, शराब पीने से मना करने पर अपराधियों ने फायरिंग की थी। इसी मामले में नामजद होने के बाद से ही दिलीप सिंह और बबलू सिंह फरार चल रहे थे। सोनू-मोनू गिरोह से जुड़े हैं आरोपी पुलिस ने बताया कि दिलीप और बबलू कुख्यात सोनू-मोनू गिरोह के सदस्य हैं। इन दोनों के खिलाफ पहले से दो दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं और क्षेत्र में इस गिरोह की काफी दहशत रही है। स्थानीय स्तर पर इस गिरोह को मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह के विरोधी गुट के रूप में भी देखा जाता रहा है। हालांकि, वर्तमान मामले में सोनू और मोनू की सीधी भूमिका को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। मास्टरमाइंड की भूमिका की जांच जारी एसडीपीओ ने बताया कि सूचक के आधार पर आरोपियों का संबंध इस गिरोह से बताया जा रहा है, लेकिन इस पूरे मामले में मास्टरमाइंड की भूमिका को लेकर गहन जांच की जा रही है। बाढ़ पुलिस का कहना है कि फरार अपराधियों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। इस कार्रवाई के दौरान दाहौर गांव में पुलिस की मौजूदगी से अन्य अपराधियों में भी हड़कंप मच गया।  

नीतीश कुमार ने 1 अणे मार्ग का मुख्यमंत्री आवास छोड़ा, 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट

पटना  बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर शुक्रवार को मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास 1 अणे मार्ग खाली कर दिया। वे 7 सर्कुलर रोड स्थित अपने आवास में शिफ्ट हो गए। सुबह से ही सामान की शिफ्टिंग की जा रही थी। दोपहर में वे स्‍वयं भी पहुंच गए। नए आवास को फूलों से सजाया गया था, जहां बौद्ध भिक्षुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इससे पहले भी आंशिक शिफ्टिंग की जा चुकी थी। शिफ्टिंग के दौरान प्लास्टिक कुर्सियां, किताबें, बुक शेल्फ, अलमारी, फाइलें और गमले जैसे सामान ट्रैक्टर के जरिए नए आवास तक पहुंचाए गए। पसंदीदा रहा 7 सर्कुलर रोड, पहले भी रह चुके हैं यहां बताया जाता है कि 7 सर्कुलर रोड स्थित यह बंगला नीतीश कुमार का पसंदीदा रहा है। वे पहले भी कई बार यहां आकर निरीक्षण कर चुके हैं। कुछ समय तक यहीं से कामकाज भी संचालित होता रहा। बंगले के लॉन में विशेष घास कोलकाता से मंगवाकर लगाई गई है। 20 साल में दूसरी बार छोड़ा CM आवास गौरतलब है कि नीतीश कुमार पहली बार 2006 में 1 अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास में आए थे। 2014 में लोकसभा चुनाव के बाद इस्तीफा देने पर वे इसी 7 सर्कुलर रोड बंगले में शिफ्ट हुए थे। तब जीतन राम मांझी को सत्‍ता सौंपी थी और करीब आठ महीने यहीं रहे। मांझी को हटाए जाने के बाद दोबारा मुख्यमंत्री आवास लौटे थे। अब करीब 20 वर्षों में यह दूसरी बार है जब उन्होंने 1 अणे मार्ग छोड़ा है। वर्तमान में उनके आवास पर Z+ सुरक्षा व्यवस्था तैनात है। लालू परिवार के करीब नया ठिकाना, सियासी चर्चा तेज दिलचस्प यह है कि 7 सर्कुलर रोड से महज 200 मीटर की दूरी पर लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का आवास 10 सर्कुलर रोड स्थित है। उन्हें पूर्व में यह आवास खाली करने का नोटिस दिया गया था और हार्डिंग रोड स्थित बंगला आवंटित किया गया था, लेकिन इस पर सियासी विवाद बढ़ने के बाद फिलहाल प्रक्रिया स्थगित है। क्या हैं राजनीतिक मायने? नीतीश कुमार का 1 अणे मार्ग छोड़ना सिर्फ एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और सत्ता संतुलन के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।  

मृत्यु, मातृत्व और उपचार योजनाओं में लाखों श्रमिकों को मिला सरकारी लाभ

 रांची  राज्य की सरकार झारखंड असंगठित सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ श्रमिकों को दे रही है। इस वित्तीय वर्ष 2025-26-मार्च तक श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विभाग ने करोड़ों की सहयोग राशि योजनाओं में प्रदान की। राज्य के 24 जिलों में इस वित्तीय वर्ष में मृत्यु-दुर्घटना सहायता योजना के तहत कुल 1219 को पांच करोड़ अड़सठ लाख से अधिक राशि प्रदान की गई। इसमें रांची के 81 लोग शामिल हैं और 41 लाख पचास हजार रुपये सहायता राशि दी गई। इसी तरह अंत्येष्टि सहायता योजना के तहत 1234 के आश्रितों को करीब दो करोड़ 46 लाख की राशि प्रदान की गई। रांची में 81 लोगों के आश्रितों को 1235000 राशि दी गई। मातृत्व प्रसुविधा योजना के तहत 9606 को लाभ मिला और इन्हें करीब 14 करोड़ चालीस लाख नब्बे हजार की राशि दी गई। मुख्यमंत्री असंगठित श्रमिक औजार सहायता योजना के तहत 72229 को 36,11,45000 की राशि प्रदान की गई। उपचार आजीविका सहायता योजना के तहत 17 को लाभ दिया गया। इन्हें 88215 रुपये प्रदान की गई। अन्य योजनाओं में भी लाभ दिया गया। लाभ के लिए निबंधन अनिवार्य है। कैसे करें निबंधन संयुक्त श्रमायुक्त सह अपर निबंधक श्रमिक संघ प्रदीप रोबर्ट लकड़ा ने बताया कि श्रमिक आनलाइन निबंधन करा सकते हैं। इसके लिए आधार कार्ड, बैंक खाता एवं एक पासपोर्ट साइज फोटो चाहिए। नामिनी के आधार के साथ श्रमाधान पोर्टल पर जाकर कर सकते हैं। यह वीडियो भी देखें श्रमिकों के लिए सरकार की योजनाएं, लें लाभ झारखंड सरकार असंगठित सामाजिक सुरक्षा योजना चला रही है। इस योजना के तहत वह ऐसे लोगों को लाभ दे रही है, जो योजना के लिए कानूनन योग्य हों। इसमें 18 से 59 साल तक के कामगारों को शामिल किया गया है। इसमें 18 से 59 साल तक के स्वनियोजित कर्मकार जिनके पास ढाई एकड़ या उससे कम कृषि योग्य भूमि हो, भवन या अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में निबंधन नहीं होने वाले नियोजनों में मजदूरी करने वाले कर्मकार जिनकी मजदूरी सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से बहुत अधिक नहीं हो। ऐसे लोग सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकते हैं। ऐसे लोग आनलाइन निबंधन भी करा सकते हैं। सरकार ने भवन निर्माण में लगे श्रमिकों के लिए बोर्ड बनाया है-झारखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार बोर्ड। निर्माण श्रमिकों के लिए योजना है। इसमें 18 से 60 साल के निबंधित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए है। इसमें काम के दौरान यदि दुर्घटना में मौत हो जाती है तो उसे पांच लाख का अनुदान दिया जाएगा। यदि दुर्घटना में पूर्ण अपंग हो जाता है तो तीन लाख का प्रविधान है और सामान्य मौत में एक लाख का। इस योजना के तहत मातृत्व प्रसुविधा योजना भी है। इसमें श्रमिक महिला को प्रथम दो प्रसूतियों के लिए पंद्रह हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। अंत्येष्टि सहायता योजना इस योजना के तहत निबंधित श्रमिक की मृत्यु होने पर वैध आश्रित को अंतिम संस्कार के लिए मृतक के नामित व्यक्ति-आश्रित को दस हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। इसी के साथ चिकित्सा सहायता योजना भी है। इसमें पांच या उससे अधिक कार्य दिवसों तक अस्पताल में भर्ती रहने पर अकुशल श्रेणी के श्रमिक के लिए विहित दर पर न्यूनतम मजदूरी का भुगतान किया जाएगा। अधिकतम चालीस कार्य दिवस के समतुल्य ही भुगतान होगा। निश्शक्तता पेंशन योजना इसमें वैसे निबंधित श्रमिक जो पक्षाघात, कुष्ठ, यक्ष्मा, दुर्घटना के कारण स्थायी रूप से अशक्त हो गए हों, उन्हें एक हजार रुपये प्रति माह एवं दस हजार एकमुश्त अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी। कब से शुरू हुआ श्रमिक दिवस श्रम दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 1886 में अमेरिका के शिकागो से हुई थी। उस समय मजदूरों से 12 से 16 घंटे तक काम कराया जाता था। श्रमिकों ने प्रतिदिन आठ घंटे कार्य, उचित वेतन और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर आंदोलन किया। इस आंदोलन के दौरान कई मजदूरों ने अपने प्राणों की आहुति दी। उनके संघर्ष और बलिदान की स्मृति में वर्ष 1889 में पेरिस में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में एक मई को श्रमिक दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। तभी से यह दिवस विश्वभर में मनाया जाने लगा। भारत में पहली बार वर्ष 1923 में चेन्नई में मई दिवस मनाया गया। इसके बाद से यह दिवस देशभर में विभिन्न श्रमिक संगठनों, उद्योगों, संस्थानों और सामाजिक संगठनों द्वारा मनाया जाता है। कई राज्यों में एक मई को सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया जाता है। श्रम संहिता का हो रहा विरोध इधर वाम दल केंद्र सरकार की श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) को लेकर विरोध कर रहे हैं। संसद में सितंबर 2020 में श्रम संहिताओं के पारित होने के बावजूद अभी तक लागू करने के लिए अधिसूचित नहीं किया गया। चार श्रम संहिता को लेकर मजदूर संगठन आपत्ति कर रहे हैं। इन्हें कारपोरेट हितों को बढ़ावा देने वाला बता रहे हैं। सीटू के राज्य महासचिव विश्वजीत देब ने कहा कि संहिताओं में परिभाषाओं को षड्यंत्रपूर्वक इस तरह से हेरफेर किया गया है, ताकि योजनाबद्ध तरीके से श्रमिकों के एक बड़े हिस्से को इससे बाहर रखा जा सके। उदाहरण के लिए 'व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता' (ओएसएचडब्ल्यूसी कोड) में 'वर्कर' और 'एम्पलाई शब्दों का प्रयोग इस प्रकार किया गया है कि अस्पष्टता का लाभ उठाकर गलत व्याख्या करने, भेदभाव करने और बड़ी संख्या में श्रमिकों को इस संहिता के दायरे से बाहर रखने की गुंजाइश बना रहे। परिभाषाओं में 'अप्रेंटिसेज' एवं 'ट्रेनीज शामिल नहीं हैं जो कुछ उद्योगों में कई वर्षों से काम कर रहे हैं। अनुबंधित कामगारों को 'वर्कर और 'एम्पलाई' के दायरे से बाहर रखा गया है। इंड्यूट्रियल रिलेशन कोड में श्रमिकों और कर्मचारियों के बड़े वर्ग को 'सुपरवाइजर' या 'मैनेजर' कहकर कवरेज से बाहर करने की गुंजाइश है। जिन लोग तथाकथित 'सुपरवाइजरी कैपेसिटी' में कार्यरत हैं और 18000 रुपये से अधिक वेतन प्राप्त करते हैं, उन्हें 'श्रमिक' या 'कर्मचारी' की परिभाषा से बाहर रखा जाएगा। इसी तरह, प्रतिष्ठान की परिभाषा में दस से कम कर्मचारियों को रोजगार देने वाली इकाइयां शामिल नहीं हैं। 'फैक्ट्री' की परिभाषा में 20 से कम कर्मचारियों को रोजगार देने वाली बिजली चालित फैक्ट्रियां और बिजली से चालित नहीं होने वाली 40 से कम कर्मचारियों को रोजगार देने वाली फैक्ट्रियां शामिल नहीं हैं। पांच हेक्टेयर से … Read more

60+ उम्र वालों के लिए प्रीवेंटिव वैक्सीनेशन, रैबिज-हेपेटाइटिस बी टीका मुफ्त

देवघर स्वास्थ्य ही धन है। यह बात कोई आज की नहीं, जमाने से चली आ रही है। सेहत का ख्याल सबको करना चाहिए। कोरोना काल में असमय दुनियां को अलविदा कह गए लोगों से यह सीख मिली। स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। भारत सरकार ने बच्चों का टीकाकरण शुरू किया। उसे अनिवार्य कर दिया गया। आज से चार दशक पहले बच्चों के टीकाकरण की कोई व्यवस्था नहीं थी। उस काल में जन्मे बच्चे जिनकी उम्र आज 50 से अधिक हो गयी है। उनको ध्यान में रखकर व्यस्कों का टीकाकरण शुरू हुआ है। एक ही छत के नीचे व्यस्क टीकाकरण की सुविधा एम्स देवघर में शुरू की गयी है। एम्स देवघर पूर्वी भारत का पहला व्यस्क टीकाकरण केंद्र बन गया है। जहां व्यस्कों का टीकाकरण होगा। कुत्ता व सियार के काटने का इंतजार क्यों, पहले ले लें टीका आपकी उम्र 60 से अधिक हो गयी है तो निमोनिया से लड़ने के लिए टीका ले लें। कुत्ता और सियार काट ले तभी टीका लें यह जरूरी नहीं। अपने जान की सुरक्षा के लिए पहले ही टीका ले लें। खासकर वे लोग जो कुत्ता को पालते हैं। चिड़ियाघर में काम करते हैं। जंगल-झाड़ी में जाना उनकी मजबूरी होती है। तो वह प्रीवेंटिव तौर पर पहले से टीका ले सकते हैं। इसके लिए उनको एम्स के टीकाकरण ओपीडी में संपर्क करना होगा। रैबिज, हेपटाइटिस बी का टीका मुफ्त में मिलता है। यह वीडियो भी देखें येलो फीवर का भी मिलेगा टीका आने वाले समय में येलो फीवर से बचने के लिए टीका मिल जाएगा। इसकी तैयारी भी एम्स में चल रही है। इस टीका की सुविधा शुरू होने पर अफ्रीका जाकर नौकरी करने वाले को देवघर में टीका लेने की सुविधा मिल जाएगी। सरकार का यह निर्देश है कि भारत से अफ्रीका जाकर नौकरी करने वाले मजदूर, ड्राइवर अथवा अन्य पहले ही यह टीका ले लें। कारण अफ्रीका में येलो फीवर के चपेट में लोग आते हैं। एम्स ओपीडी में निबंधन कराकर ले सकते टीका की सुविधा एम्स ओपीडी में दिखाने के लिए सबसे पहले निबंधन कराना होगा। निबंधन शुल्क 40 रुपया है। उसके बाद 30 रुपया का एक पर्ची कटेगा जो व्यस्क टीकाकरण के ओपीडी के लिए होगा। यहां डॉ. अरशद अयूब और डॉ. सुनील पाणिग्रही मरीज को देखेंगे। यदि उनको उस संबंधित टीका की जरूरत समझी जाएगी तो उनको टीका का डोज दिया जाएगा। सभी टीका का अलग अलग डोज होता है। मरीज का कार्ड बन जाएगा और वह तय तिथि पर डोज ले सकेंगे। वयस्क टीका केंद्र पर उपलब्ध टीका एम्स के एसोसियेट प्रोफेसर डॉ. अरशद अयूब ने बताया कि देवघर एम्स में व्यस्क टीका केंद्र शुरू हुआ है। यह पूर्वी भारत का पहला केंद्र है। जहां व्यस्कों को टीका दिया जाएगा। अभी रैबिज, टीडी, सर्वाइकल कैंसर, हेपेटाइटिस ए और बी। निमोनिया, चिकन पाक्स, इनफ्लूऐंजा, टायफाइड का टीका उपलब्ध है। लोगों को अपनी सेहत का ख्याल रखते हुए प्रीवेंटिव में ही टीका ले लेना चाहिए। जैसे इनफ्लूऐंजा का वायरस म्यूट करता रहता है। डीएनए बदल जाता है। ऐसे में टीका लेकर स्वस्थ रहा जा सकता है।