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पीएचईडी की बड़ी कार्रवाई की चेतावनी, असफल अभियंताओं पर CRS की गाज गिरने के संकेत

पटना   बिहार में ‘हर घर नल का जल’ योजना में काम कर रहे अभियंता सरकार के दिए गए टारगेट को पूरा करने में अयोग्य निकले तो लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) इंजीनियर को जबरन रिटायर करके उनकी नौकरी का कनेक्शन ही काट देगा। मंगलवार को विभाग के मुंगेर, लखीसराय और जमुई प्रमंडल में हर घर नल का जल योजना की प्रगति और संचालन की पीएचईडी विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने पटना में गहन समीक्षा की। बैठक में सचिव पंकज पाल ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सचिव ने लापरवाह अफसरों को चेतावनी देते हुए दो टूक कह दिया कि जो अभियंता कार्य निष्पादन में असमर्थ या उदासीन पाए जाएंगे, उनको अनिवार्य सेवानिवृत्ति (सीआरएस) दे दी जाएगी। इससे विभाग में हड़कंप मच गया है। सचिव पंकज पाल ने मुंगेर प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता को विशेष रूप से निर्देशित किया कि काम में तेजी लाते हुए लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्रता से पूर्ण करें। साथ ही CGRC (केंद्रीकृत शिकायत निवारण केंद्र) पर लंबित शिकायतों का त्वरित निष्पादन भी सुनिश्चित करने को कहा गया है। सचिव ने यह भी निर्देश दिया कि जिन योजनाओं में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न हो रही है, उसे अविलंब दूर कर कार्य को सुचारू रूप से संचालित करें, ताकि आम लोगों को निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित हो सके। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताते हुए आवश्यक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। समीक्षा बैठक के दौरान यह बात भी सामने आई कि मुख्यालय से निरीक्षण के लिए नामित सहायक अभियंता फील्ड विजिट पर गए ही नहीं। इस पर विभागीय सचिव ने गंभीर असंतोष व्यक्त करते हुए ऐसे सहायक अभियंता के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया। लखीसराय और मुंगेर के कार्यपालक अभियंता को नियमित रूप से क्षेत्र भ्रमण कर योजनाओं की जमीनी स्थिति की निगरानी करने का निर्देश दिया गया है। सचिव ने स्पष्ट किया कि जो अभियंता कार्य निष्पादन में असमर्थ या उदासीन पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध CRS (अनिवार्य सेवानिवृत) की कार्रवाई हो जाएगी। सचिव ने कहा कि सभी पदाधिकारी कार्यप्रणाली में सुधार लाएं और सरकार की योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाएं। अभियंताओं को निदेशित किया गया कि क्षतिग्रस्त पाइपलाइन, लीकेज आदि को तुरंत ठीक कराया जाए। अधीक्षण अभियंता को भी नियमित रूप से फील्ड विजिट पर जाने का निदेश दिया गया है। बैठक में मुख्यालय के वरीय पदाधिकारी एवं संबंधित प्रमंडलों के कार्यपालक अभियंता उपस्थित रहे।

भारत-नेपाल रिश्तों को नई मजबूती, पूर्णिया प्रशासन ने शुरू की विशेष नागरिकता सुविधा

 पूर्णिया भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंधों को प्रशासनिक स्तर पर नई मजबूती मिलने जा रही है। पूर्णिया के जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए उन नेपाली मूल की महिलाओं के लिए नागरिकता की राह आसान कर दी है, जिन्होंने भारतीय नागरिकों से विवाह किया है। जिले के सीमावर्ती इलाकों में रोटी-बेटी के इस रिश्ते को अब कानूनी जामा पहनाने के लिए प्रशासन खुद जनता के द्वार तक पहुंचेगा। जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, नागरिकता पंजीकरण की प्रक्रिया को सुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति की कमान अपर समाहर्ता (विधि-व्यवस्था) को सौंपी गई है। समिति में अपर पुलिस अधीक्षक, उप निर्वाचन पदाधिकारी और सभी संबंधित प्रखंडों के प्रखंड विकास पदाधिकारियों को शामिल किया गया है। यह टीम जिले के सभी प्रखंडों में विशेष कैंप लगाकर नेपाली महिलाओं को पंजीकरण प्रक्रिया में तकनीकी और कानूनी सहयोग प्रदान करेगी। पूर्णिया जिला नेपाल की सीमा के काफी करीब है। अमौर, बायसी, कसबा, बनमनखी और धमदाहा जैसे प्रखंडों में बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं रहती हैं, जो नेपाल से विवाह कर यहां आई हैं। दशकों से यहां रहने और परिवार बसाने के बावजूद, दस्तावेजों की कमी और जटिल प्रक्रिया के कारण ये महिलाएं भारतीय नागरिकता से वंचित रही हैं। नागरिकता न होने के कारण उन्हें न तो मतदान का अधिकार मिल पाता है और न ही वे सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का पूर्ण लाभ उठा पाती हैं। डीएम की इस पहल से ऐसी हजारों महिलाओं के जीवन में स्थायित्व आएगा।

रांची: स्नातक शिक्षक नियुक्ति मामले में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की सुनवाई 2 मई को

 रांची  स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति से संबंधित मामले में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की सुनवाई दो मई को होगी। दो मई को दोपहर एक बजे पुराने हाई कोर्ट भवन, डोरंडा में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बैठेगी और सुनवाई की जाएगी। फिलहाल इस सुनवाई में केवल अधिवक्ता ही उपस्थित हो सकते हैं। अभ्यर्थियों की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक नहीं है। प्रार्थी के अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के चेयरमैन जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की ओर से इसकी जानकारी दी गई है। बता दें कि इस मामले में 257 याचिकाओं पर हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की कोर्ट में सुनवाई चल रही है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में सेवानिवृत्ति जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का नया चेयरमैन बनाया है। इससे पहले अदालत ने पूर्व में राज्य स्तर पर बने मेरिट लिस्ट की अनियमितता के मामले में इसकी जांच के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाने का निर्देश दिया था। अदालत ने उक्त कमेटी को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। प्रार्थियों का दावा था कि राज्य स्तर पर बनी मेरिट लिस्ट में काफी त्रुटियां है। जिन्हें निर्धारित कट आफ से कम नंबर मिले हैं उनका चयन कर लिया गया है, जबकि उनसे ज्यादा नंबर पाने वालों का चयन नहीं हुआ है।

निगरानी विभाग का शिकंजा: सिकंदरा में कार्यपालक पदाधिकारी समेत दो गिरफ्तार

जमुई जमुई जिले में मंगलवार को निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। सिकंदरा नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार को 50 हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। इस दौरान उनके साथ स्वच्छता प्रहरी सोनू चौधरी को भी टीम ने दबोच लिया। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। शिकायतों के बाद बिछाया गया जाल जानकारी के अनुसार, निगरानी विभाग को लंबे समय से दोनों के खिलाफ अवैध वसूली की शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों की सत्यता जांचने के लिए विभाग ने गुप्त रूप से जाल बिछाया। छापेमारी में रंगे हाथ पकड़े गए आरोपी योजना के तहत मंगलवार करीब 3 बजे टीम ने छापेमारी की। इसी दौरान दोनों आरोपी कथित रूप से 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए। लेन-देन की पुष्टि होते ही टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों को गिरफ्तार कर लिया और मौके से नकद राशि भी बरामद की। पुलिस का बयान और आगे की कार्रवाई सिकंदरा थानाध्यक्ष विकास कुमार ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया निगरानी विभाग द्वारा की जा रही है। उन्होंने कहा कि मामले में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में चर्चा का माहौल है और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। वहीं, निगरानी विभाग की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त कदम के रूप में देखा जा रहा है।  

साइबर ठगी पर बड़ा वार: बिहार पुलिस ने चिन्हित किए हजारों म्यूल अकाउंट्स

पटना बिहार पुलिस की साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट ने बढ़ते साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए फिर से बड़ा अभियान छेड़ दिया है। ‘साइबर प्रहार 3.0’ के तहत राज्यभर में व्यापक कार्रवाई करते हुए 5036 म्यूल अकाउंट्स की पहचान की गई है। इस कार्रवाई के दायरे में 22 बैंक शाखाओं के अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है, जिसकी गहन जांच की जा रही है। साइबर अपराध इकाई द्वारा कई संदिग्ध बैंक खातों को चिन्हित कर लिया गया है, जिनका उपयोग ठगी के पैसों के लेन-देन में किया जा रहा था। लालच देकर बैंक खाते का इस्तेमाल करते थे साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट की जांच में पता चला कि साइबर फ्रॉड लोगों को पैसों की लालच देकर उनके बैंक खाते का इस्तेमाल करते थे। पासबुक, सिम कार्ड और एटीएम अपने पास रख लेते थे। इन खातों में ठगी की रकम मंगाई जाती थी। बिहार पुलिस का कहना है कि इन खातों के जरिए बड़े स्तर पर साइबर ठगी के नेटवर्क को संचालित किया जा रहा था। कई संदिग्धों को नोटिस जारी किए गए अभियान के तहत अब तक 72 करोड़ रुपये से जुड़े साइबर फ्रॉड के मामलों में कानूनी शिकंजा कसा गया है। कई संदिग्धों को नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि कुछ की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। जांच के दौरान बैंकिंग सिस्टम में संभावित मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है। इसी को देखते हुए संबंधित बैंक अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। क्या होते हैं म्यूल अकाउंट्स? बोलचाल की भाषा में म्यूल का मतलब 'खच्चर' होता है, जिसका इस्तेमाल सामान ढोने के लिए किया जाता है। कुछ इसी तरह का काम म्यूल अकाउंट्स का भी होता है। म्यूल अकाउंट्स दरअसल ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल फाइनेंशियल फ्राड में किया जाता है। यह अकाउंट्स या तो फर्जी नाम-पते पर रजिस्टर्ड होते हैं या इन्हें कोई और यूज कर रहा होता है। इस तरह के अकाउंट्स का इस्तेमाल फाइनेंशियल फ्रॉड में पैसे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। चूकिं म्यूल अकाउंट में दी गई जानकारी सही नहीं होती, इन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।  

EO Murder Case: सम्राट चौधरी ने घोषित की 25 लाख की मदद, राजकीय सम्मान से होगी अंत्येष्टि

पटना. सुल्तानगंज नगर परिषद में दिनदहाड़े कार्यपालक पदाधिकारी कृष्‍ण भूषण कुमार की हत्‍या पर मुख्‍यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरी संवेदना व्‍यक्‍त की है। उन्‍होंने कहा कि कृष्‍ण भूषण कुमार ने अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। शोक संतप्त परिजनों के प्रति इस अपूरणीय क्षति पर गहरी संवेदनाएं प्रकट करते हैं। उनके परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। दिवंगत अधिकारी अंत्‍येष्‍ट‍ि राजकीय सम्मान के साथ सम्पन्न कराई जाएगी।  बता दें कि मंगलवार को भागलपुर जिले के सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में अपराधियों ने कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण की गोली मारकर हत्या कर दी। वे बिहार लोक सेवा आयोग के 59वें बैच के अधिकारी थे। सभापति की हालत गंभीर हमले में नगर परिषद सभापति राजकुमार गुड्डू भी घायल हो गए। उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। मेडिकल डायरेक्टर डॉ. रविशंकर के अनुसार, उन्हें पेट और सिर में गोली लगी है और वे न्यूरो ICU में इलाजरत हैं। इधर घटना के बाद पुलिस एक्‍शन में आई। हत्‍या मामले में पुलिस ने आरोपित का एनकाउंटर कर दिया है।   अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी  इधर घटना के बाद बिहार नगर सेवा संघ ने इस घटना के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी थी।48 घंटे की मोहलत दी थी। संघ के महासचिव अरविंद कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, गृह विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव, बिहार पुलिस प्रमुख (DGP), मानवाधिकार आयोग और लोकायुक्त को पत्र लिखकर अपनी मांगें रखी । कर्तव्यनिष्ठा का परिचय – अत्यंत ही दुःखद घटना में सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी श्री कृष्ण भूषण कुमार जी का असामयिक निधन हो गया। उन्होंने अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। शोक संतप्त परिजनों के प्रति इस अपूरणीय क्षति पर गहरी संवेदनाएँ प्रकट… — Samrat Choudhary (@samrat4bjp) April 29, 2026 

सुल्तानगंज हत्याकांड में बड़ा एक्शन: मुख्य आरोपी रामधनी यादव का एनकाउंटर

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि भागलपुर के सुल्तानगंज में अपराधियों की गोलियों के शिकार हुए कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ट्वीट किया है कि अत्यंत ही दुखद घटना में सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार का असामयिक निधन हो गया। उन्होंने अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। शोक संतप्त परिजनों के प्रति इस अपूरणीय क्षति पर गहरी संवेदनाएँ प्रकट करते हैं। उनके परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने तथा दिवंगत अधिकारी के दाह-संस्कार को राजकीय सम्मान के साथ सम्पन्न कराने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर लिखा, ‘अत्यंत ही दुःखद घटना में सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी श्री कृष्ण भूषण कुमार जी का असामयिक निधन हो गया। उन्होंने अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। शोक संतप्त परिजनों के प्रति इस अपूरणीय क्षति पर गहरी संवेदनाएँ प्रकट करते हैं। उनके परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने तथा दिवंगत अधिकारी के दाह-संस्कार को राजकीय सम्मान के साथ सम्पन्न कराने का निर्णय लिया गया है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिजनों को इस कठिन समय में धैर्य एवं संबल दें। ओम शांति!’ 12 घंटे के अंदर एनकाउंटर हुआ- संतोष सुमन हम सेकुलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सुमन ने कहा कि भागलपुर में सरकारी अधिकारी की हत्या निंदनीय है, लेकिन उससे भी बड़ा सच यह है कि अब बिहार में अपराधियों की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। महज 12 घंटे के अंदर आरोपी की पहचान, पीछा और एनकाउंटर यह बताता है कि अब सरकार जीरो टॉलरेंस पर सिर्फ बोलती नहीं, कार्रवाई करके दिखाती है। उन्होंने कहा कि अपराधियों ने पुलिस पर गोली चलाई, जवाब में उन्हें उसी भाषा में जवाब मिला। जो लोग कभी अपराधियों को संरक्षण देकर जंगलराज खड़ा करते थे, आज वही कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। कलेजे पर फटाफट गोली- जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कार्यपालक अधिकारी की हत्या पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रामधनी यादव को अपराध का सनक चढ़ गया था। सुल्तानगंज के नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी का परिवार और उनके बच्चे रो रहे हैं। लोकतंत्र में जनता की अदालत से चुने गए सभापति पर गोलियों की बौछार करना। कानून का राज है। अभी तक तो पैर पर गोली लग रही थी। पुलिस पर हमला करने की कोशिश की तो कलेजे पर फटाफट गोली…फटाफट गोली। अपराध करोगे तो ना सिर्फ कड़ा अंजाम होगा बल्कि मुकम्मल ऐसी कार्रवाई होगी कि बिहार नजीर के तौर पर दिखेगा। ईओ के घर चीख-पुकार इधर बुधवार को करीब 10 बजे जैसे ही कार्यपालक पदाधिकारी का पार्थिव शरीर उनके पैतृक घर पहुंचा तो वहां कोहराम मच गया। नगर आयुक्त उमेश भारती, सदर एसडीओ चंदन कुमार झा, सदर एसडीपीओ अमित कुमार, ट्रैफिक डीएसपी सुजीत कुमार, पुलिस लाइन डीएसपी जितेन्द्र प्रसाद, नगर थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर मनोज कुमार, ट्रैफिक थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर नीलमणि रंजन, नगर पंचायत जयनगर के कार्यपालक पदाधिकारी सुनील कुमार, बेनीपट्टी नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी गौतम आनंद एवं अन्य पुलिस व प्रशासनिक अफसर वहां मौजूद थे। मृतक की पत्नी, भाई सूर्यभूषण कुमार, अजय कुमार एवं घर के अन्य सदस्यों का रो रोकर बुरा हाल था। हत्याकांड का मुख्य आरोपी रामधनी यादव मारा गया सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त और नगर परिषद की उपसभापति नीलम देवी के पति रामधनी यादव का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया है। अभियुक्त के साथ मुठभेड़ में पुलिस के तीन पदाधिकारी भी जख्मी हुए हैं जिनमें डीएसपी लॉ एंड ऑर्डर नवनीत कुमार, सुल्तानगंज इंस्पेक्टर मृत्युंजय कुमार और तकनीकी शाखा प्रभारी परमेश्वर सब शामिल हैं।

फर्जी एफडी से ग्रामीण बैंक में बड़ा घोटाला, कोर्ट ने आर्थिक अपराध को बताया गंभीर

 पटना  पटना हाईकोर्ट ने बैंकिंग धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में आरोपी धर्मेंद्र कुमार सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान इसे व्यापक जनहित का विषय मानते हुए मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने का निर्देश दिया है।न्यायाधीश पूर्णेंदु सिंह की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि आर्थिक अपराध अलग श्रेणी के होते हैं। ऐसे मामलों में व्यक्तिगत स्वतंत्रता से अधिक सार्वजनिक हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। करीब ₹1.89 करोड़ के गबन से जुड़े इस मामले को अदालत ने गंभीर मानते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता बताई। फर्जी एफडी के जरिए करोड़ों की हेराफेरी मामला उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक के पूर्व कर्मी धर्मेंद्र कुमार सिंह से जुड़ा है, जिस पर 2013 से 2024 के बीच ग्रामीण ग्राहकों को फर्जी एफडी प्रमाणपत्र जारी कर सुनियोजित तरीके से धन की हेराफेरी करने का आरोप है। जांच में खुलासा हुआ कि कई मामलों में ग्राहकों की पासबुक में प्रविष्टि तो की गई, लेकिन बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम (सीबीएस) में खाते खोले ही नहीं गए। एक मामले में ₹15 लाख जमा करने वाले ग्राहक की राशि बैंक के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं पाई गई। अदालत ने टिप्पणी की कि यह धोखाधड़ी इतनी संगठित और तकनीकी रूप से जटिल थी कि करीब एक दशक तक इसका खुलासा नहीं हो सका। पैसे निकालने का प्रयास करते समय सामने आया मामला जब ग्राहकों ने अपनी जमा राशि निकालने का प्रयास किया, तब जाकर मामला सामने आया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे व्हाइट कॉलर क्राइम न केवल सार्वजनिक विश्वास को कमजोर करते हैं। ये देश की आर्थिक व्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरा हैं। साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया कि 2014 की स्टाफ अकाउंटेबिलिटी पॉलिसी में निर्धारित समय-सीमा का लाभ धोखाधड़ी या आपराधिक कृत्यों में नहीं दिया जा सकता। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने अपने आदेश की प्रति भारतीय रिजर्व बैंक, गृह मंत्रालय और वित्त मंत्रालय को भेजने का निर्देश दिया है तथा कार्रवाई रिपोर्ट की मांग की है।  

निगरानी का शिकंजा: 2.5 लाख रिश्वत के साथ विश्वविद्यालय के सहायक कुल सचिव पकड़े गए

पटना मौलाना मजहरूल हक अरबी व फारसी विश्वविद्यालय के सहायक कुल सचिव (असिस्टेंट रजिस्ट्रार) मो. सनाउल्लाह खान को निगरानी ब्यूरो ने मंगलवार को 2.5 लाख रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया है। सनाउल्लाह खान को उनके मीठापुर स्थित कार्यालय कक्ष से गिरफ्तार किया गया। आरोपित से फिलहाल पूछताछ हो रही है। इसके बाद इन्हें निगरानी की विशेष कोर्ट में पेश किया जाएगा। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से मिली जानकारी के अनुसार रोसड़ा जिला समस्तीपुर के रहने वाले रामानंद महतो ने शिकायत दर्ज कराई थी कि समस्तीपुर स्थित केआरसी 402 व 403 में नामांकित सभी छात्रों का परीक्षा फल प्रकाशित होने के बाद दोनों छात्रों का प्रैक्टिल मार्क्स रिजल्ट में नहीं था। प्रैक्टिकल मार्क्स चढ़ाने और लंबित परीक्षाफल प्रकाशित करने के लिए सहायक कुल सचिव रिश्वत मांग रहे थे। चूंकि मामला बड़े अधिकारी से जुड़ा था, लिहाजा इसका सत्यापन कराया गया। जिसमें आरोप सही पाए गए। जिसके बाद निगरानी डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार के निर्देश पर डीएसपी श्याम बाबू प्रसाद के नेतृत्व में एक धावा दल बनाया गया। मंगलवार को सहायक कुल सचिव जिस सनाउल्ला खान जिस वक्त रिश्वत के ढ़ाई लाख रुपये ले रहे थे उसी वक्त उन्हें विवि कैंपस स्थित उनके कार्यालय कक्ष से गिरफ्तार कर लिया गया। निगरानी ब्यूरो आगे की जांच में जुटा है। कार्यपालक पदाधिकारी को एसवीयू ने 50 हजार रिश्वत के साथ दबोचा दूसरी ओर विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने एक बड़ी कार्रवाई में नगर पंचायत सिकंदरा, जमुई के कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार को 50 हजार रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया है। उनकी यह गिरफ्तारी राजेश मिश्रा नामक एक व्यक्ति की लिखित शिकायत पर की गई। कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार पर आरोप लगाया गया था कि ये प्रधानमंत्री आवास योजना की फाइल करने के लिए प्रति फाइल ढ़ाई हजार रुपये की दर से 162500 रुपये की रिश्वत मांग रहे हैं। उन्होंने दो टूक कहा है कि यदि रिश्वत की यह रकम नहीं मिलती है तो काम नहीं होगा। शिकायत के आधार पर विशेष निगरानी इकाई ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। आरोपित को पूछताछ के बाद कोर्ट पेश कयया जाएगा।  

PET परीक्षा में बड़ी सफलता: बिहार पुलिस ड्राइवर भर्ती में 11,847 उम्मीदवार पास

पटना. केंद्रीय चयन पार्षद (CSBC)ने 28 अप्रैल को बिहार कॉन्स्टेबल ड्राइवर पद के लिए आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) के परिणाम अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिए हैं। वे सभी उम्मीदवार जो इस शारीरिक परीक्षा में शामिल हुए थे, अब अपना रिजल्ट csbc.bihar.gov.in पर जाकर देख सकते हैं। बता दें कि शारीरिक दक्षता परीक्षा में कुल 14,624 उम्मीदवार उपस्थित हुए थे और 888 उम्मीदवार अनुपस्थित थे। इसके साथ ही वाहन चालन दक्षता परीक्षा के लिए कुल 11,847 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। अगला चरण: ड्राइविंग टेस्ट इस सूची में उन सफल उम्मीदवारों के रोल नंबर दिए गए हैं जिन्होंने शारीरिक परीक्षा (PET) पास कर ली है। अब ये अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया के अगले चरण, यानी ड्राइविंग दक्षता परीक्षा (Driving Efficiency Test) के लिए पात्र माने जाएंगे। अपना रिजल्ट कैसे चेक करें? सफल उम्मीदवारों की सूची देखने के लिए आप इन आसान चरणों का पालन कर सकते हैं: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले csbc.bihar.gov.in पोर्टल खोलें। सही लिंक चुनें: होमपेज पर 'Bihar Police' टैब के अंदर "Results: List of Successful Candidates in PET (Advt. No. 02/2025)" वाले लिंक पर क्लिक करें। PDF डाउनलोड करें: क्लिक करते ही एक पीडीएफ फाइल खुलेगी, जिसे आप अपने डिवाइस में सेव कर लें। रोल नंबर खोजें: इस फाइल में अपना Roll Number सर्च करें। यदि आपका नंबर लिस्ट में है, तो इसका मतलब है कि आपने PET पास कर लिया है और अब आपको ड्राइविंग टेस्ट की तैयारी करनी होगी।