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झारखंड बैंक में डकैती की वारदात, 10 मिनट में 7 करोड़ का सोना और 5 लाख रुपये लूटे

हजारीबाग झारखंड के हजारीबाग जिले में बैंक डकैती की सनसनीखेज घटना सामने आई है. बरही थाना क्षेत्र में हजारीबाग रोड स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र में चार नकाबपोश बदमाश हथियार लेकर घुसे और बड़ी लूट को अंजाम दिया. बदमाश महज 10 मिनट के भीतर करीब 7 करोड़ रुपये का सोना और लगभग 5 लाख रुपये नकद लेकर फरार हो गए।  पुलिस जांच में सामने आया है कि यह पूरी वारदात पहले से प्लान की हुई थी. दो बदमाश पहले बैंक में ग्राहक बनकर पहुंचे थे और करंट अकाउंट खुलवाने का बहाना किया. कुछ ही देर बाद उनके दो साथी भी बैंक के अंदर दाखिल हो गए. इसके बाद चारों ने अचानक हथियार निकालकर बैंक कर्मचारियों को धमकाना शुरू कर दिया।  बदमाशों ने बैंक में घुसते ही कर्मचारियों और मौजूद ग्राहकों को एक जगह इकट्ठा कर लिया. हथियार दिखाकर सभी को डराया गया और विरोध करने पर गंभीर परिणाम की धमकी दी गई. इस दौरान बैंक मैनेजर के साथ मारपीट भी की गई, ताकि पूरे स्टाफ में दहशत फैल जाए।  प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह पूरी डकैती सिर्फ 10 मिनट में डाली गई. बदमाश करीब 3:19 बजे बैंक में दाखिल हुए और 3:29 बजे तक वारदात को अंजाम देकर बाहर निकल गए. इस दौरान किसी को समझने का मौका तक नहीं मिला कि आखिर क्या हो रहा है. लुटेरे बैंक में मौजूद गोल्ड लोन और लॉकर में रखा सोना अपने साथ ले गए. इसके साथ ही कैश काउंटर से नकदी भी समेट ले गए।  घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे इलाके में नाकेबंदी कर दी गई. बैंक के अंदर मौजूद CCTV फुटेज को खंगाला जा रहा है, ताकि बदमाशों की पहचान की जा सके. पुलिस का मानना है कि यह किसी संगठित गिरोह का काम हो सकता है, जिसने बैंक की रेकी पहले से कर रखी थी।  बैंक कर्मचारियों ने बताया कि करंट अकाउंट खुलवाने के बहाने दो डकैत पहले बैंक में आए थे. फिर पीछे से दो और लोग दाखिल हुए. उनके पास छोटे हथियार भी थे. हथियार के बल पर सभी बैंक कर्मचारियों को एक तरफ जाने को कहा. उसके बाद बैंक मैनेजर के साथ मारपीट की. बंदूक के बल पर घटना को अंजाम देकर 10 मिनट में बैंक से बाहर निकल गए।  बरही एसडीपीओ अजीत कुमार विमल ने कहा कि चार डकैतों ने घटना को अंजाम दिया है. क्षेत्र में नाकेबंदी कर दी गई है. इस घटना में 7 करोड़ का सोना और 5 लाख की लूट हुई है. बैंक के अंदर भी पड़ताल चल रही है. सीसीटीवी फुटेज खगाले जा रहे हैं. हजारीबाग के SP अमन कुमार ने आजतक को फोन पर बताया कि जल्द इस मामले का खुलासा कर दिया जाएगा. पुलिस इनपुट के आधार पर पड़ोसी राज्यों में रेड कंडक्ट की जा रही है, जल्द गिरफ्तारियां होंगी। 

पटना में नीतीश कुमार की सम्राट चौधरी से मुलाकात, डिप्टी सीएम और मुख्य सचिव से भी भेंट

पटना जनता दल यूनाईटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उनके आवास 1-अणे मार्ग पर पहुंचकर मुलाकात की। सम्राट चौधरी के विश्वास मत हासिल करने के बाद नीतीश की उनसे यह पहली मुलाकात थी। राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार ने बिहार के उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत से भी मुलाकात की। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के एक-अणे मार्ग आवास पर पहुंचे। उन दोनों की की मुलाकात बेहद सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई। इस मौके पर जेडीयू के नेता राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) भी मौजूद थे। बताया जाता है कि नीतीश की सम्राट चौधरी से यह मुलाकात एक शिष्टाचार भेंट थी। डिप्टी सीएम और चीफ सेक्रेटरी से भी मिले नीतीश बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को बिहार के उप मुख्यमंत्री और जेडीयू के नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव से भी मुलाकात की। इसके अलावा वे बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के आवास भी पहुंचे और उनसे मुलाकात की। सम्राट ने हासिल किया विश्वास मत शुक्रवार को बिहार विधानसभा के विशेष सत्र में नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ध्वनिमत से विश्वासमत हासिल कर लिया। चौधरी ने इस दौरान सदन को संबोधित भी किया। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सदन में वक्तव्य के बाद अपनी बात कही। सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में तेजस्वी यादव को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि वे किसी 'पाठशाला' से नहीं बल्कि बिहार के 14 करोड़ लोगों के आशीर्वाद से मुख्यमंत्री बने हैं। तेजस्वी पर बरसे सम्राट उन्होंने तेजस्वी यादव के कुछ दिन पहले के उस बयान को लेकर यह बात कही जिसमें तेजस्वी ने कहा थी कि बीजेपी के पास योग्य नेता नहीं हैं इसलिए मुख्यमंत्री जो भी बनाएं लालू यादव की पाठशाला का ही निकला हुआ होगा। गौरतलब है कि सम्राट चौधरी ने राजनीति की शुरुआत लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल से ही की थी। सीएम पद किसी की बपौती नहीं सम्राट चौधरी ने तेजस्वी पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का पद किसी की बपौती नहीं है। तेजस्वी यादव अपनी बपौती से बाहर निकलें। उन्होंने कहा एक व्यक्ति या परिवार की सत्ता नहीं होती। 14 करोड़ बिहारियों के आशीर्वाद से आज मैं यहां बैठा हूं। मैं नीतीश कुमार, पीएम नरेंद्र मोदी, नितिन नवीन और चिराग पासवान का आभारी हूं। मैं उपेंद्र कुशवाहा का आभारी हूं। मुझे मांझी जी का आशीर्वाद भी मिला है। तब यहां आकर बैठा हूं। कोई गलतफहमी में नहीं रहे। सम्राट चौधरी ने कहा कि सत्ता किसी की बपौती नहीं होती है। कोई पाठशाला से नहीं आता है। मैं तो यहां तक कहता हूं कि अगर लालू प्रसाद यादव का अत्याचार मुझ पर नहीं होता, तो मैं सीएम नहीं होता। नीतीश कुमार जी की इच्छा थी कि सम्राट चौधरी बिहार के सीएम हों, इससे इनकार नहीं करता हूं।  

Higher Education Reform: बिहार में यूनिवर्सिटीज की ग्रेडिंग अब रिसर्च और इनोवेशन पर आधारित

पटना. सामाजिक दायित्व निभाने के लिए राज्य के सभी उच्च शिक्षण संस्थान अब पांच-पांच गांव गोद लेंगे। इस संबंध में राज्यपाल एवं कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) Syed Ata Hasnain ने ‘उन्नत भारत अभियान’ के तहत आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देश के अनुसार, 13 विश्वविद्यालय कुल 65 गांव गोद लेंगे, जबकि 250 अंगीभूत महाविद्यालय 1250 गांवों को अपनाएंगे। 1315 गांवों में होंगे विकास कार्य  इस तरह कुल 1315 गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण, डिजिटल साक्षरता, कौशल विकास, महिला सशक्तीकरण, पर्यावरण संरक्षण और आजीविका संवर्द्धन से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जाएंगी, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र और सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके। 30 मार्च को कुलपतियों की बैठक के बाद राज्यपाल के सचिव गोपाल मीणा द्वारा सभी विश्वविद्यालयों को कार्यवाही रिपोर्ट भेजी गई है। इसके तहत हर विश्वविद्यालय और महाविद्यालय अपने कार्यक्षेत्र के कम-से-कम पांच गांव गोद लेकर सामाजिक जिम्मेदारी निभाएंगे। इससे छात्रों में समाज-सेवा की भावना विकसित होगी और शहरी विद्यार्थी ग्रामीण जीवन से परिचित हो सकेंगे। गांवों में छात्रों के माध्यम से स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता और पर्यावरण को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। साथ ही प्रत्येक छात्र गोद लिए गए गांव में एक पौधा लगाएगा।  उनकी देखभाल भी करेगा। इन गांवों की एंट्री ‘समर्थ पोर्टल’ पर दर्ज की जाएगी, जबकि किए जा रहे कार्यों की मॉनिटरिंग बिहार लोक भवन सचिवालय स्तर से होगी। प्रदर्शन के आधार पर होगी ग्रेडिंग रिपोर्ट में कहा गया है कि अब विश्वविद्यालयों की ग्रेडिंग उनके प्रदर्शन के आधार पर की जाएगी। इसके लिए ग्रेडिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और परिणाम-उन्मुख बनाया जाएगा। मूल्यांकन में प्रोफेसरों की रिसर्च, पेटेंट, प्रोजेक्ट्स, इनोवेशन, पाठ्यक्रम सुधार, टीचिंग-लर्निंग प्रोसेस, परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक सुधार जैसे पहलुओं को शामिल किया जाएगा। साथ ही सभी विश्वविद्यालयों में डिजिटल व्यवस्था पूरी तरह लागू की जाएगी। इसके तहत भौतिक डिग्रियों और अंकपत्रों को स्कैन कर डिजिटल लॉकर-नैड पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।

शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की तैयार,सरकारी स्कूलों में पढ़ाई अनिवार्य करने पर जोर

पटना  बिहार में मंत्रियों और अधिकारियों के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे। इसे लेकर राज्य सरकार जल्द ही ठोस कदम उठा सकती है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को विधानसभा में विश्वास मत प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सरकार की प्राथमिकताओं का जिक्र किया। सीएम सम्राट चौधरी का स्पष्ट कहना था कि राज्य में शिक्षा की ऐसी व्यवस्था की जाएगी, जिससे मंत्री और अधिकारी के बच्चे भी सरकारी स्कूल में पढ़ने को बाध्य हो। इसी दिशा में जुलाई में राज्य के 209 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज को चालू कर दिया जाएगा। इसके साथ ही स्कूल और कॉलेज में छात्राओं की सुरक्षा के लिए पुलिस दीदी की तैनाती की जाएगी। नवंबर में पांच लाख करोड़ रुपये का निवेश विधानसभा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कई घोषणाएं की। उन्होंने बताया कि एनडीए सरकार के एक वर्ष पूरे होने पर नवंबर में पांच लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में 1.36 लाख करोड़ रुपये के बिहार में निवेश हुए। लेकिन, सरकार की उपलब्धियों को जिस तरह जनता के बीच पहुंचाना चाहिए था नहीं पहुंचा पाई। मेरी सरकार की प्राथमिकता रोजगार, कारोबार बढ़ावा देना और प्रवासन रोकना है। प्रखंड,अंचल और थानों पर सीएमओ की सीधी नजर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से जन समस्याओं के निदान के लिए प्रखंड, अंचल और थानों पर मुख्यमंत्री सचिवालय (सीएमओ) के माध्यम से सीधी नजर रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौत पर बीमा कंपनियों की ओर से परिजनों को चार लाख और राज्य सरकार की ओर से भी चार लाख दिए जाएंगे। घोषणाओं को लागू करने के लिए ठोस कदम सीएम सम्राट चौधरी की ओर से शिक्षा, निवेश और जन समस्याओं के निदान को लेकर विधानसभा में जो ऐलान किया है, इसे प्रभावी बनाने के लिए सम्राट चौधरी जल्द की कोई ठोस निर्णय ले सकते हैं। इसके अलावा स्वच्छ प्रशासन और कानून-व्यवस्था की स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए भी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कई बड़े फैसले ले सकते हैं। कैबिनेट विस्तार के बाद सख्त फैसला मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व की नीतीश सरकार में भी कई सख्त फैसला लेकर सभी को चौंकाने का काम किया। अब राज्य की बागडोर संभालने के बाद उनकी ओर से कई महत्वपूर्ण फैसला लिए जाने की संभावना है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कैबिनेट विस्तार के बाद ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सभी को विश्वास में लेकर सख्त फैसला लेंगे, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो और युवाओं को रोजगार मिल सके।  

बिहार में अगले 3–4 दिन तक लू और तेज गर्मी का असर रहेगा

पटना  बिहार में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी है। शुक्रवार को रोहतास का डेहरी प्रदेश का सबसे गर्म स्थान रहा, जहां का अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पटना का अधिकतम तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग ने अगले तीन से चार दिनों के दौरान भीषण गर्मी का दौर बने रहने की संभावना जताई है। अरवल में सबसे कम तापमान मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान बिहार का अधिकतम तापमान 33.0 से 43.0 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। इस दौरान राज्य के अनेक स्थानों के अधिकतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं दर्ज की गई। सबसे कम न्यूनतम तापमान 22.0 डिग्री सेल्सियस अरवल में दर्ज किया गया। राज्य का न्यूनतम तापमान 22.0 से 27.5 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। निम्न दबाव क्षेत्र का दिखेगा असर पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के अनेक स्थानों पर न्यूनतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन दर्ज नहीं की गई। जबकि उत्तर पूर्व जिलों के भाग में एक से तीन डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। अरवल जिले में अधिकतम हवा की गति 46 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। आज की मौसम प्रणाली की बात करें तो बिहार, झारखंड और गंगा के पश्चिमी बंगाल क्षेत्र से होकर 0.9 किलोमीटर समुद्र तल से ऊपर पर एक निम्न दबाव क्षेत्र विस्तृत है। अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान पटना स्थित मौसम विज्ञान विभाग की ओर से जारी पूर्वानुमान में कहा गया है कि अगले 24 घंटों के दौरान बिहार राज्य के दक्षिण पश्चिमी भाग के एक या दो स्थानों में अधिकतम तापमान 40.0 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान सामान्य से तीन से चार डिग्री अधिक रहने की संभावना है। अगले तीन से चार दिनों के दौरान राज्य के अनेक भागों के अधिकतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होने की संभावना है। पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर समेत 6 जिलों में बारिश की संभावना मौसा विभाग के अनुसार 25 अप्रैल को राज्य के पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल, अरिया और किशनगंज जिलों में एक या दो स्थानों पर बारिश की संभावना है। जबकि शेष जिलों का मौसम आमतौर से शुष्क बने रहने की संभावना है। इस दौरान एक-दो स्थानों पर मेज गर्जन और वज्रपात के साथ तेज हवा चलने की भी संभावना है। वहीं राज्य के औरंगाबाद, भभुआ, गया, नवादा एवं रोहतास जिलों में एक दो स्थानों पर उमस भरा दिन होने की संभावना है।  

छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर सुधार को लेकर झारखंड हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी

रांची  झारखंड हाईकोर्ट ने रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और बुनियादी सुविधाओं को लेकर दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया है. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया कि आगामी बरसात से पहले भैरवी नदी के डेंजर जोन में बैरिकेडिंग का कार्य हर हाल में पूरा किया जाए, ताकि हादसों को रोका जा सके. बैरिकेडिंग से हादसों पर लगेगा ब्रेक कोर्ट ने जल संसाधन विभाग को निर्देश दिया कि भैरवी नदी के किनारे चिन्हित खतरनाक क्षेत्रों में मजबूत बैरिकेडिंग लगाई जाए. यह कदम इसलिए जरूरी माना गया है क्योंकि हर साल यहां कई श्रद्धालु और पर्यटक दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं. सरकार की ओर से बताया गया कि करीब 50 लाख रुपये की लागत से इस परियोजना का डीपीआर तैयार कर लिया गया है और जल्द ही काम शुरू होगा. विस्थापित दुकानदारों के लिए स्थायी व्यवस्था का आदेश खंडपीठ ने मंदिर परिसर से हटाए गए दुकानदारों के पुनर्वास को लेकर भी अहम निर्देश दिए. कोर्ट ने कहा कि सभी प्रभावित दुकानदारों के लिए स्थायी दुकानें बनाकर दी जाएं और उनसे नियमानुसार किराया वसूला जाए. इससे न केवल दुकानदारों को स्थायित्व मिलेगा, बल्कि सरकार को भी राजस्व प्राप्त होगा. 254 दुकानदारों के पुनर्वास की तैयारी पूरी रामगढ़ के उपायुक्त ने अदालत को जानकारी दी कि कुल 254 दुकानदारों को पुनर्वासित करने की योजना बनाई गई है. इसके लिए मंदिर के पास ही उपयुक्त स्थान चिन्हित कर लिया गया है. प्रशासन का दावा है कि जल्द ही इन दुकानों का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा, जिससे प्रभावित लोगों को राहत मिल सकेगी. श्रद्धालुओं के लिए अस्पताल बनाने का सुझाव कोर्ट ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) को अपने सीएसआर फंड के तहत मंदिर परिसर के पास एक अस्पताल बनाने पर विचार करने का निर्देश दिया है. इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी. फिलहाल इस प्रस्ताव पर कंपनी को निर्णय लेना है. मंदिर सौंदर्यीकरण और सुविधाओं पर भी जोर हाईकोर्ट ने मंदिर परिसर के व्यापक विकास के लिए कई अहम बिंदुओं पर जोर दिया है. इनमें सौंदर्यीकरण, स्थायी स्नान घाटों का निर्माण, कपड़े बदलने के कक्ष, स्वच्छ शौचालय, पेयजल की व्यवस्था, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और चिकित्सा सुविधाएं शामिल हैं. साथ ही अतिक्रमण हटाने और भैरवी नदी के चौड़ीकरण की भी योजना पर काम करने को कहा गया है. डीपीआर तैयार, विशेषज्ञ एजेंसी कर रही काम राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मंदिर के पुनर्निर्माण और विकास के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है. यह कार्य चड्ढा एंड एसोसिएट नामक एजेंसी को सौंपा गया है. सरकार ने भरोसा दिलाया कि सभी कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरे किए जाएंगे. 11 मई को अगली सुनवाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 मई की तारीख निर्धारित की है. साथ ही रामगढ़ के उपायुक्त को अगली सुनवाई में फिर से उपस्थित रहने और कार्यों की प्रगति पर स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है. इससे यह स्पष्ट है कि कोर्ट इस मामले की निगरानी गंभीरता से कर रहा है. जनहित याचिका के आदेश के अनुपालन पर जोर यह मामला पहले दायर जनहित याचिका से जुड़ा हुआ है, जिसमें 11 अगस्त 2023 को हाईकोर्ट ने मंदिर परिसर के विकास और सुरक्षा को लेकर कई निर्देश दिए थे. अवमानना याचिका के माध्यम से उन आदेशों के अनुपालन की मांग की गई थी. सुरक्षा और पर्यटन विकास का संतुलन जरूरी रजरप्पा मंदिर झारखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां हर साल हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं. ऐसे में सुरक्षा और सुविधाओं का अभाव गंभीर चिंता का विषय रहा है. हाईकोर्ट के ताजा निर्देशों से उम्मीद है कि न केवल दुर्घटनाओं पर रोक लगेगी, बल्कि यहां आने वाले पर्यटकों को बेहतर अनुभव भी मिलेगा.

निशांत कुमार का सियासी सफर शुरू, जेडीयू संगठन पर रहेगा फोकस

पटना बिहार में इन दिनों सबसे ज्यादा सियासी चर्चा में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार है, जो सियासत के पिच पर कदम तो रख दिए हैं, लेकिन सरकार में कोई भी जिम्मेदारी न लेने का फैसला किया है. निशांत कुमार 3 मई से बिहार की यात्रा पर निकल रहे हैं, लेकिन उनके राजनीतिक भविष्य का फैसला जून में होगा. इसके बाद ही तय होगा कि उनका भूमिका सत्ता में होगा या फिर संगठन में होगा अहम रोल? निशांत कुमार 3 मई से बिहार की यात्रा पर निकल रहे हैं और इसकी शुरुआत पश्चिमी चंपारण से करेंगे. यह वही क्षेत्र है, जहां से पहले भी नीतीश कुमार अपनी कई प्रमुख यात्राएं शुरू करते रहे हैं. चंपारण से यात्रा शुरू करना निशांत के लिए सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि रणनीतिक प्रयोग माना जा रहा है. निशांत कुमार अपने पिता के राजनीतिक मॉडल को ही आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. नीतीश कुमार लंबे समय तक 'यात्रा' के जरिए सीधे जनता से जुड़ते रहे हैं, और अब निशांत कुमार उसी रास्ते पर चल रहे हैं. यात्रा के एक महीने गुजर जाने के बाद निशांत के सियासी भविष्य और रोल को लेकर फैसला होगा? निशांत यात्रा से तैयार करेंगे 'पावर ग्राउंड' नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार 3 मई से राज्यव्यापी यात्रा पर निकलेंगे. खास बात यह है कि वे इस दौरे पर किसी बड़े पदाधिकारी के तौर पर नहीं, बल्कि एक साधारण जेडीयू कार्यकर्ता के रूप में उतरेंगे. उनकी इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य पार्टी के ज़मीनी कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क स्थापित करना है. निशांत कुमार यात्रा के दौरान पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर के पदाधिकारियों से मुलाकात करेंगे और संगठन की जमीनी हकीकत को समझने की कोशिश करेंगे. बताया जा रहा है कि यह यात्रा तीन से चार महीने तक चलेगी, जिससे उन्हें पूरे राज्य में संगठन की स्थिति का व्यापक अनुभव मिल सके.इसलिए यह यात्रा उनके लिए पावर से पहले ग्राउंड तैयार करने की रणनीति के रूप में देखी जा रही है. राजनीतिक जानकारों की नजर में यह सिर्फ एक सामान्य यात्रा नहीं है, बल्कि राजनीतिक लॉन्च का अगला चरण, संगठन को मजबूत करने की कोशिश और बिहार में नए नेतृत्व की तैयारी है.  नीतीश कुमार ने पिछले कई दशकों में देश-प्रदेश की राजनीति में अपनी जो साख बनाई है, निशांत कुमार उसे ही आगे बढ़ाने की तैयारी पर बढ़ रहे हैं. जून होगा निशांत के राजनीति का डिसाइडर नीतीश कुमार के सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद से चर्चा थी कि निशांत कुमार को बिहार सरकार में कोई बड़ा पद मिल सकता है. सम्राट सरकार में डिप्टीसीएम बनाने के भी कयास लगाए जा रहे थे, जिसके लिए तैयार नहीं हुए. निशांत ने फिलहाल सरकार में कोई ज़िम्मेदारी न लेने का फैसला किया है. सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय उनका व्यक्तिगत है और वे किसी पद को संभालने से पहले खुद को पूरी तरह तैयार करना चाहते हैं. इसीलिए उन्होंने यात्रा के जरिए संगठन और जमीनी काम पर फोकस करने का रास्ता चुना है. राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि निशांत कुमार जून महीने में विधान परिषद के सदस्य बन सकते हैं. जून में बिहार में 9 एमएलसी की सीटों पर चुनाव हैं, जिसमें से तीन सीटें जेडीयू के खाते में आ सकती हैं. इन्हीं में से एक सीट को निशांत कुमार को एमएलसी के लिए चुना जा सकता है. इसके बाद  निशांत कुमार खुद यह तय करेंगे कि उनकी भूमिका सरकार में होगी या संगठन में रोल अदा करेंगे. पहले संगठन पर फोकस करेंगे निशांत निशांत कुमार जिस तरह से कोई पद लेने से पहले यात्रा का रास्ता चुना है, उससे उनके राजनीतिक प्लान को बहुत आसानी से समझा जा सकता है. सत्ता के बजाय संगठन शक्ति पर भरोसा. निशांत का मानना है कि अगर जनता के बीच सीधे पैठ बना ली जाए, तो सत्ता खुद-ब-खुद कदम चूमेगी. चंपारण से शुरुआत करना यह बताता है कि वे अपने पिता के उसी 'गांधीवादी और विकासवादी' मॉडल को 2.0 वर्जन में पेश करने जा रहे हैं. नीतीश कुमार की नक्शेकदम पर चलते हुए निशांत कुमार तीन से चार महीने तक बिहार के अलग-अलग इलाके की यात्रा करेंगे. जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि निशांत पार्टी का भविष्य हैं और आने वाले समय में उनकी भूमिका बेहद अहम हो सकती है. ऐसे में सरकार और संगठन में किसी पद को लेने से पहले अपनी सियासी जमीन को तैयार करने का प्लान बनाया है. एनडीए में मंत्रिमंडल का फॉर्मूला तय सम्राट चौधरी के अगुवाई में बिहार सरकार बनने के बाद अभी सीएम और दो डिप्टीसीएम है. बिहार में अधिकतम 36 मंत्री बन सकते हैं. ऐसे में सम्राट के कैबिनेट विस्तार को लेकर भी हलचल तेज है. सूत्रों के मुताबिक पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद कैबिनेट विस्तार हो सकता है. इसके लिए 4 से 10 मई के बीच मंत्रिमंडल विस्तार संभव है बिहार में एनडीए की सरकार है, मंत्रिमंडल में 16-16 सीटें बीजेपी और जेडीयू को मिल सकती हैं. इसके अलावा 2 पद चिराग पासवान की पार्टी को, जबकि जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को एक-एक पद दिए जाने की संभावना है.राज्य की राजनीति में इन घटनाक्रमों को आगामी चुनावों से पहले बड़े रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है.

आईएएस समिति की सख्ती, हजारीबाग-बोकारो से 7 साल के रिकॉर्ड तलब

रांची झारखंड में ट्रेजरी (कोषागार) के माध्यम से हुए संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और घोटाले की जांच अब अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है. आईएएस अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति ने हजारीबाग और बोकारो के उपायुक्तों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर जांच की प्रगति की समीक्षा की. समिति ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों जिलों से पिछले सात वर्षों के वेतन भुगतान और अन्य मदों से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. 20 बिंदुओं पर जवाब और अप्रैल 2020 का डेडलाइन जांच टीम ने विशेष रूप से 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2026 के बीच हुए तमाम वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड मांगे हैं. समिति ने 20 मुख्य बिंदुओं पर रिपोर्ट तलब की है, जिसमें निकासी का विवरण, स्थापना खर्च, वेतन पंजी, सेवानिवृत्त कर्मियों का डेटा और उस कार्यकाल में तैनात रहे आहरण एवं संवितरण पदाधिकारियों (DDO) की सूची शामिल है. सूत्रों के अनुसार, टीम जल्द ही हजारीबाग और बोकारो का भौतिक दौरा कर फाइलों की जांच करेगी. कुबेर पोर्टल ने खोली पोल, कई जिलों में ‘खतरे की घंटी’ वित्त विभाग की पैनी नजर अब राज्य के उन जिलों पर भी है जहां कुबेर पोर्टल के माध्यम से बड़ी और संदिग्ध निकासी देखी गई है. रामगढ़, रांची, पलामू, गोड्डा, साहेबगंज, देवघर और गिरिडीह जिलों में भी भारी वित्तीय हेराफेरी की आशंका जताई गई है. वित्त विभाग ने इन जिलों के उपायुक्तों को भी आंतरिक जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. वर्तमान में जांच का मुख्य केंद्र हजारीबाग और बोकारो हैं, लेकिन यहां गड़बड़ी पुष्ट होने पर जांच का दायरा पूरे राज्य में बढ़ाया जा सकता है. DDO के रडार पर आने से मचा हड़कंप इस पूरे घोटाले में निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों (DDO) की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध मानी जा रही है. वित्त विभाग का मानना है कि बिना निचले स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत या घोर लापरवाही के वेतन मद में इतनी बड़ी अवैध निकासी संभव नहीं है. स्थापना शाखा और ट्रेजरी के बीच हुए इस ‘खेल’ में शामिल अधिकारियों की पहचान की जा रही है. जांच टीम यह भी देख रही है कि सेवानिवृत्त कर्मियों के नाम पर भी कहीं भुगतान तो नहीं किया गया.

मटकमडीह में बाइक-साइकिल रैली, ग्रामीणों और बच्चों की बड़ी भागीदारी

 सरायकेला सशस्त्र सीमा बल की 26वीं वाहिनी (‘ई’ कंपनी) की ओर से सरायकेला खरसावां जिले के मटकमडीह में भव्य बाइक और साइकिल रैली निकाली गई. अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में चल रहे ‘100 दिवसीय योग काउंटडाउन अभियान’ के अंतर्गत बाइक और साइकिल रैली का आयोजन किया गया. ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की भागीदारी एसएसबी के 26वीं वाहिनी निरीक्षक अमल सेन के नेतृत्व में आयोजित साइकिल रैली की शुरुआत मटकमडीह कैंप से हुई, बंसा मोड़ में समाप्त हुई. इस रैली में जवानों के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीण और स्कूली बच्चों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई. रैली के दौरान प्रतिभागियों द्वारा योग के महत्व, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के संदेश दिए गए. आयोजन का मुख्य उद्देश्य कार्यक्रम में मटकमडीह पंचायत के मुखिया सुखलाल मांझी, उत्क्रमित मध्य विद्यालय मटकमडीह के शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस में योग के प्रति जागरूकता फैलाना, लोगों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करना तथा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के प्रति उत्साह का माहौल बनाना था. सशस्त्र सीमा बल द्वारा इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से न केवल फिटनेस को बढ़ावा दिया जा रहा है, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी विकसित की जा रही है.

बिहार समेत 8 राज्यों में साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर सीबीआई की सख्त नजर

वैशाली  सीबीआई ने साइबर क्राइम के लिए फर्जी तरीके से सिम की खरीद-बिक्री करने वालों के खिलाफ ऑपरेशन चक्र-5 अभियान शुरू किया है। इसके तहत साइबर फ्रॉड की बड़ी घटनाओं में इस्तेमाल मोबाइल सिम के विक्रेताओं पर अंकुश लगाया जाएगा। इस ऑपरेशन के तहत बिहार, असम, राजस्थान, यूपी, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, झारखंड समेत आठ राज्यों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। वैशाली के कई सिम विक्रेता सीबीआई की रडार पर हैं जिनकी तलाश की जा रही है। चार की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। बिहार में बड़े पैमाने पर फर्जी सिम से सिम बॉक्स डिवाइस संचालित किए जाने के कई मामले पकड़ में आ चुके हैं। इस डिवाइस के जरिए अंतरराष्ट्रीय वीओआईपी कॉल को लोकल वॉइस कॉल में परिवर्तित कर साइबर फ्रॉड किया जाता है। सुपौल, समस्तीपुर समेत कई जिलों में इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। इसमें वैशाली इलाके के कई सिम विक्रेता फर्जी नाम पते पर सिम बेचने में चिह्नित हुए हैं। इस तरह के मामलों में सीबीआई बड़े पैमाने पर साइबर फ्रॉड के लिए सिम बेचने और एजेंट को सिम उपलब्ध कराने वाले डीलर आदि को जांच के रडार पर लिया है। इस तरह के सिम का न केवल कॉल करने में बल्कि म्यूल खातों को संचालित करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है। फर्जी कंपनियों के नाम पर खोले गए बैंक खातों में देशभर से साइबर फ्रॉड की राशि मंगाकर उसकी निकासी की जा रही है। ऐसे खातों को संचालित करने में मदद पहुंचाने वाले बैंक कर्मियों का भी सुराग सीबीआई ढूंढ़ रही है। सूत्रों के अनुसार, हाल में हुए कई मामलों में सीबीआई ने असम और बिहार के सिम विक्रेताओं की जांच पड़ताल शुरू की है। वैशाली में कई सिम विक्रेताओं के संबंध में सीबीआई ने जानकारी जुटाई है। आर्थिक अपराध इकाई ने भी चार सिम विक्रेताओं को वैशाली के महुआ इलाके से पूर्व में गिरफ्तार किया था।