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54 हजार 923 ग्रामों एवं 425 नगरीय निकायों में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य पूर्ण

भोपाल  मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (House Listing Operation-HLO) का फील्ड कार्य 30 मई 2026 को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। राज्यभर में 01 मई 2026 से प्रारंभ हुए इस व्यापक अभियान के दौरान प्रत्येक ग्राम एवं नगरीय क्षेत्र में प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर मकानों तथा उनमें निवासरत परिवारों से निर्धारित जानकारी संकलित की गई। इस चरण में भारत सरकार द्वारा अधिसूचित 33 प्रश्नों के माध्यम से मकानों की स्थिति, उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं एवं परिसंपत्तियों संबंधी जानकारी मोबाइल एप के जरिए डिजिटल रूप से एकत्रित की गई। जनगणना 2027 की यह प्रक्रिया पूर्णतः डिजिटल माध्यमों पर आधारित रही, जिसके अंतर्गत फील्ड कार्य की सतत मॉनिटरिंग पोर्टल के माध्यम से की गई। इससे कार्य की गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा समयबद्धता सुनिश्चित हुई। सचिव गृह एवं नोडल अधिकारी जनगणना कार्य मती शिल्पा गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में यह कार्य 55 जिलों, 425 नगरीय निकायों तथा 449 तहसीलों के अंतर्गत 54 हजार 923 ग्रामों में संपादित किया गया। मकान सूचीकरण ब्लॉकों में 1 लाख 44 हजार से अधिक प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों द्वारा कार्य किया गया। इसके अतिरिक्त लगभग 15 हजार प्रगणक एवं पर्यवेक्षक रिजर्व के रूप में तैनात किए गए थे। निर्धारित समयसीमा में पूरे प्रदेश में मकानों की गणना का कार्य पूर्ण होना प्रशासनिक समन्वय एवं जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण है। जनगणना के दौरान संकलित की गई सभी व्यक्तिगत जानकारियां जनगणना अधिनियम, 1948 तथा जनगणना नियमावली, 1990 के प्रावधानों के तहत पूर्णतः गोपनीय रहेंगी। इन आंकड़ों का उपयोग केवल नीति-निर्माण, विकास योजनाओं के निर्माण तथा जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु किया जाएगा। भारत सरकार द्वारा संपूर्ण जनगणना प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत निर्धारित समय पर संबंधित आंकड़े जारी किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि प्रथम चरण के पूर्व राज्य में 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक स्व-गणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया संचालित की गई थी। इस अवधि में प्रदेश के 7 लाख से अधिक परिवारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज की, जो नागरिक सहभागिता का महत्वपूर्ण उदाहरण है। जनगणना 2027 के द्वितीय चरण के अंतर्गत जनसंख्या की गणना (Population Enumeration-PE) का कार्य फरवरी 2027 में संपादित किया जाएगा। इस चरण में परिवारों के सभी सदस्यों से निर्धारित सामाजिक, आर्थिक एवं जनसांख्यिकीय जानकारी एकत्रित की जाएगी। जनगणना अभियान के सफल संचालन में जिला प्रशासन, जनगणना अधिकारियों, पर्यवेक्षकों, प्रगणकों एवं प्रदेशवासियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। साथ ही प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया द्वारा जनजागरूकता और प्रचार-प्रसार में निभाई गई सक्रिय भूमिका से जनसहभागिता को व्यापक बल मिला। निदेशक जनगणना कार्य, मध्यप्रदेश  संजीव वास्तव एवं सचिव गृह एवं नोडल अधिकारी जनगणना कार्य मती शिल्पा गुप्ता ने जनगणना 2027 के प्रथम चरण के सफल एवं समयबद्ध संपादन पर प्रदेश के सभी नागरिकों, प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों तथा मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि फरवरी 2027 में आयोजित होने वाले जनगणना के द्वितीय चरण में भी प्रदेशवासियों का इसी प्रकार सक्रिय एवं सकारात्मक सहयोग प्राप्त होगा, जिससे इस राष्ट्रीय महत्व के अभियान को सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा सकेगा।  

मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी भोपाल में पांच दिवसीय परिचयात्मक प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन

भोपाल  मध्यप्रदेश में सुशासन, प्रभावी प्रशासनिक समन्वय एवं कानून-व्यवस्था प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भोपाल द्वारा परिवीक्षाधीन उप जिलाध्यक्षों के लिए आयोजित पांच दिवसीय परिचयात्मक प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। 25 मई से 29 मई 2026 तक संचालित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन 25 मई को विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण  रवि कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में किया गया था। कार्यक्रम का उद्देश्य नवागत प्रशासनिक अधिकारियों को पुलिस व्यवस्था, कानून-व्यवस्था प्रबंधन तथा विभिन्न संवेदनशील परिस्थितियों में पुलिस एवं प्रशासन की संयुक्त भूमिका से व्यवहारिक रूप से परिचित कराना था। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को पुलिस एवं प्रशासन के मध्य समन्वय, पुलिस एक्ट, वी.वी.आई.पी. ड्यूटी एवं कवरेज, निर्वाचन संबंधी व्यवस्थाएं, सांप्रदायिक तनाव की स्थिति में पुलिस-प्रशासन की भूमिका एवं कार्यवाही सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ अधिकारियों द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षक एवं परिवीक्षाधीन उप जिलाध्यक्षों के मध्य बलवा ड्रिल की संयुक्त कार्यवाही का व्यावहारिक प्रदर्शन भी आयोजित किया गया, जिसमें कानून एवं व्यवस्था की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने की रणनीतियों का प्रदर्शन किया गया। इस अभ्यास ने प्रतिभागियों को मैदानी परिस्थितियों में पुलिस बल की कार्यप्रणाली, समन्वित कार्रवाई तथा भीड़ नियंत्रण संबंधी व्यवस्थाओं की व्यवहारिक समझ प्रदान की। इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया, जिसने प्रशिक्षण कार्यक्रम को उत्साहपूर्ण एवं यादगार बनाया। कार्यक्रम का समापन उपनिदेशक मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी  संजय कुमार अग्रवाल की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर पर सहायक निदेशक मती रश्मि पाण्डेय, मती यास्मीन जहरा, मती ज्योति उमठ , उप पुलिस अधीक्षक  नीरज नामदेव,  अनिल कुमार सिंह ,  नारायण चौधरी, सूबेदार  विजय गौर सहित अकादमी के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से परिवीक्षाधीन अधिकारियों को प्रशासनिक एवं कानून-व्यवस्था संबंधी विषयों की व्यवहारिक जानकारी प्रदान कर उनके दायित्वों के प्रभावी निर्वहन हेतु तैयार किया गया। मध्य प्रदेश पुलिस अकादमी द्वारा आयोजित ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रशासनिक एवं पुलिस तंत्र के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ जनहित में प्रभावी एवं उत्तरदायी शासन व्यवस्था सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  

दमोह के डायल-112 हीरोज सूझबूझ और तत्परता से 16 वर्षीय किशोरी की बचाई जान

भोपाल दमोह जिले के थाना कोतवाली क्षेत्र में डायल-112 जवानों की त्वरित, संवेदनशील एवं मानवीय कार्रवाई से एक 16 वर्षीय किशोरी को गंभीर घटना से सुरक्षित बचाया गया। समय पर हस्तक्षेप एवं समझाइश के माध्यम से किशोरी को सुरक्षित परिजनों के सुपुर्द कर आवश्यक परामर्श दिया गया। 29 मई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत ग्राम देवरान में एक 16 वर्षीय किशोरी स्वयं को कमरे में बंद कर फाँसी लगाने का प्रयास कर रही है एवं तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही थाना कोतवाली क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ सैनिक  सुनील तिवारी एवं पायलट  शारदा आठिया ने मौके पर पहुँचकर त्वरित कार्रवाई करते हुए खिड़की के माध्यम से किशोरी से लगातार संवाद स्थापित किया तथा उसे धैर्यपूर्वक समझाने का प्रयास किया। जवानों की सूझबूझ, संवेदनशीलता एवं निरंतर समझाइश के परिणामस्वरूप किशोरी ने दरवाजा खोल दिया। इसके बाद डायल-112 टीम ने किशोरी एवं उसके परिजनों को समझाइश दी तथा भविष्य में विशेष देखभाल एवं भावनात्मक सहयोग बनाए रखने की सलाह दी। डायल-112 जवानों की त्वरित एवं मानवीय कार्यवाही से एक किशोरी को सुरक्षित बचाया जा सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात परिस्थितियों में न केवल त्वरित सहायता प्रदान करती है, बल्कि संवेदनशील मामलों में मानवीय दृष्टिकोण के साथ जीवन की सुरक्षा हेतु सदैव प्रतिबद्ध है।  

मंदसौर पुलिस ने अंतर्राज्यीय ड्रग्स तस्कर गिरोह का किया पर्दाफाश

भोपाल  पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा के निर्देशन में मध्यप्रदेश को नशा मुक्त करने के उद्देश्य से पुलिस द्वारा नशे के कारोबार के विरुद्ध लगातार कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई की जा रही हैं। इसी क्रम में मंदसौर पुलिस ने सुनियोजित कार्रवाई करते हुए एक अंतर्राज्यीय मादक पदार्थ तस्कर गिरोह का पर्दाफाश कर 20 किलोग्राम अवैध ब्राउन शुगर (स्मैक) अनुमानित कीमत लगभग 20 करोड़ रुपये, 02 चार पहिया वाहन, 7 मोबाइल फोन एवं 7 हजार 700 रुपए नगद सहित लगभग 20 करोड़ 35 लाख रुपए से अधिक की संपत्ति जब्त की है। पुलिस ने इस मामले में 05 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी की तलाश जारी है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक मंदसौर  विनोद कुमार मीना के निर्देशन में गठित विशेष पुलिस टीम द्वारा की गई। 31 मई को थाना नई आबादी पुलिस को विश्वसनीय मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि कुछ तस्कर बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ की खेप लेकर गुजरने वाले हैं। सूचना प्राप्त होते ही विशेष टीम का गठन कर रणनीतिक रूप से घेराबंदी की गई। संदिग्ध वाहनों को रोककर तलाशी लेने पर आरोपियों के कब्जे से 20 किलोग्राम अवैध ब्राउन शुगर जब्त की गई। कार्रवाई के दौरान तस्करी एवं पायलटिंग में प्रयुक्त एक सुजुकी एस-क्रॉस तथा एक हुंडई क्रेटा कार, 07 मोबाइल फोन एवं 7 हजार 700 रूपये नगद भी जब्त किये गए। मोबाइल फोनों का तकनीकी एवं साइबर विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे गिरोह के नेटवर्क, सप्लायरों तथा वित्तीय लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों का पता लगाया जा सके। प्रारंभिक पूछताछ में यह तथ्य सामने आया है कि आरोपी मध्यप्रदेश एवं राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों में सक्रिय रहकर मादक पदार्थों की तस्करी करते थे। पुलिस द्वारा गिरोह के अन्य सदस्यों, सप्लाई चेन तथा अवैध आर्थिक नेटवर्क के संबंध में विस्तृत जांच की जा रही है। फरार आरोपी की तलाश के लिए भी पुलिस टीमें सक्रिय हैं। इस उल्लेखनीय कार्रवाई ने एक बार फिर सिद्ध किया है कि मध्यप्रदेश पुलिस मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध पूरी प्रतिबद्धता एवं दृढ़ता के साथ कार्य कर रही है। नशे के अवैध कारोबार में संलिप्त अपराधियों के नेटवर्क को चिन्हित कर उनके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। प्रदेश में सुरक्षित एवं नशामुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा इस प्रकार की कार्यवाहियां निरंतर जारी रहेंगी तथा युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले तस्करों के विरुद्ध कठोरतम वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।  

अधिकारियों को दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज इंदौर स्थित संभागायुक्त कार्यालय पहुंचकर शहर में उत्पन्न जल संकट की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की तथा अधिकारियों को त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 24×7 जल नियंत्रण कक्ष के माध्यम से प्रतिदिन सुबह एवं शाम जलापूर्ति की समीक्षा की जाए। संकटग्रस्त वार्डों में विशेष जलापूर्ति योजना लागू कर प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर राहत प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिये कि नल से जल सप्लाई के समय में असमानता और विसंगतियों को तत्काल दूर किया जाये। साथ ही सभी क्षेत्रों में संतुलित जल वितरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने शासकीय महाविद्यालयों, छात्रावासों तथा अन्य आवासीय संस्थानों में जल उपलब्धता की विशेष चिंता करने के निर्देश दिए। साथ ही जल चोरी करने वालों एवं मोटरों के माध्यम से अवैध रूप से पानी खींचने वालों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर कठोर कार्रवाई करने को कहा। जल टंकियों का पूर्ण क्षमता से उपयोग सुनिश्चित करें मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शहर की बड़ी जल टंकियों का पूर्ण क्षमता से उपयोग सुनिश्चित किया जाए। निजी एवं नगर निगम के टैंकरों की मिनट-टू-मिनट मॉनिटरिंग की जाए। पाइपलाइन लीकेज एवं वितरण हानि को तत्काल सुधारकर जल की बर्बादी रोकी जाए। इउन्होंने कहा कि भोपाल से वरिष्ठ अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी पूर्व में भी इंदौर का दौरा कर चुके हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें पुनः भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों और नागरिक समितियों के साथ नियमित संवाद तथा समन्वय बनाए रखने तथा जल संकट की स्थिति से संबंधित जानकारी एवं प्रतिवेदन मुख्यमंत्री कार्यालय को निरंतर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। बैठक में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, सांसद श्री शंकर लालवानी, विधायक श्री गोलू शुक्ला, विधायक श्रीमती मालिनी गौर, विधायक श्री मधु वर्मा, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव सहित जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।  

लोकमाता अहिल्याबाई ने राष्ट्रवासियों को आत्मसम्मान से जीना और लड़ना सिखाया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को इंदौर के गांधी हाल में पुण्य श्लोका लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जन्म जयंती उत्सव कार्यक्रम में सहभागिता की। भव्य जयंती समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देवी अहिल्याबाई को सुशासन, लोकसेवा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की अद्वितीय प्रतिमूर्ति बताया। उन्होंने कहा कि लोकमाता का शासन-प्रशासन हम सबको राम राज्य की याद दिलाता है। उस समय की बड़ी-बड़ी राजसत्ताओं के सामने देवी अहिल्याबाई ने अपने राज कौशल से सुशासन के नए प्रतिमान गढ़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हमारा भारत जिस नए सांस्कृतिक और धार्मिक जनजागरण का साक्षी बन रहा है, उसकी नींव लोकमाता ने लगभग तीन शताब्दी पहले ही रख दी थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देवी अहिल्याबाई होल्कर ने न केवल एक कुशल शासक के रूप में, वरन् धर्म, समाज और संस्कृति की ममतामयी संरक्षक के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने देशभर में अनेक मंदिरों और तीर्थस्थलों का जीर्णोद्धार कर भारतीय आस्था और सनातन संस्कृति को नई ऊर्जा प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवी अहिल्याबाई ने आस्था और अर्चना के प्रतीक हमारे मंदिरों की पुनर्स्थापना कर धर्म की रक्षा की तथा लोककल्याण को शासन का मूल आधार बनाया। उन्होंने भारतीयों को आत्मसम्मान के साथ जीना और इसके लिए लड़ना भी सिखाया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने इंदौर की दो विभूतियों म.प्र. उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति  आनंद सिंह बहरावत और न्यायमूर्ति  हिमांशु जोशी को 'अहिल्या गौरव सम्मान' से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने यहां फोटो प्रतियोगिता के विजेताओं को भी पुरस्कार वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता धर्म का मर्म समझती थीं। वे उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली दूरदर्शी शासक थीं। राजनीति, कूटनीति, वित्तीय प्रबंधन और अर्थव्यवस्था पर उनकी गहरी समझ थी। उनकी दूरदृष्टि का ही परिणाम है कि महेश्वरी साड़ियां आज विश्वभर में भारत की समृद्ध एवं बेजोड़ परिधान कला और उद्यमिता का गौरव बढ़ा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार भी लोकमाता द्वारा बताये गये लोकसेवा और जनकल्याण के आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के समग्र सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रदेश में देवी अहिल्या नारी सशक्तिकरण मिशन संचालित किया जा रहा है। इस मिशन के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने इंदौर की पुलिस बटालियन नंबर-1 का नाम अहिल्याबाई बटालियन रखा है। लोकमाता अहिल्या बाई की 300वीं जयंती पर इंदौर के राजबाड़ा में ही कैबिनेट बैठक की और भोपाल में वृहद महिला सम्मेलन भी आयोजित किया था। मुख्यमंत्री ने राष्ट्र निर्माण में लोकमाता के योगदान का उल्लेख कर उन्हें कुशल प्रशासिका, सुशासन की अग्रदूत और महिला सशक्तिकरण की प्रेरणास्रोत बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकमाता की जन्म स्मृति में इस भव्य एवं सफल आयोजन के लिए नगर निगम इंदौर एवं सहयोगी संस्था अवोम भारत के पदाधिकारियों को बधाई दी। इंदौर के महापौर  पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर लोकमाता की कर्मस्थली रहा है। उन्हीं के पुण्य प्रताप से इंदौर स्वच्छता के मामले में सुपर लीग में आ चुका है। क्लीन एयर इनीशियेटिव में भी इंदौर आगे है। इंदौर अब डिजिटल सिटी बनने जा रहा है। यहां हर दिशा में विकास कार्य हो रहे हैं। वर्ष 2029 तक इंदौर की जल क्षमता दुगुनी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि देवी अहिल्या उत्सव 2026 लोकमाता को सच्ची श्रद्धांजलि है। हम उन्हीं के बताए सद्मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। अहिल्या उत्सव 2026 कार्यक्रम के आरंभ में करीब 150 सदस्यों के एक आर्केस्ट्रा समूह द्वारा बांसुरी एवं अन्य वाद्य यंत्रों के सुमधुर वादन से राष्ट्रगीत वंदे मातरम की आकर्षक संगीतमय प्रस्तुति दी गई। इसके बाद  ब्रजेश ब्रज ने अपने समूह के साथ गणेश वंदना प्रस्तुति दी। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, इंदौर के सांसद  शंकर लालवानी, पूर्व मंत्री एवं विधायिका सु उषा ठाकुर, पूर्व मंत्री एवं विधायक  महेन्द्र हार्डिया, विधायिका  मालिनी गौड़, विधायक  मधु वर्मा, विधायक  राकेश गोलु शुक्ला,  प्रताप करोसिया,  सावन सोनकर,  गौरव रणदिवे, डॉ. निशांत खरे,  श्रवण चावड़ा सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं नागरिकगण उपस्थित थे।  

पर्यावरण अनुकूल शहरी विकास पर विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और पर्यावरणविदों ने किया मंथन

भोपाल  ‘मेनस्ट्रीमिंग-एलआईएफईः पर्यावरण अनुकूल टिकाऊ शहरी आवासों का निर्माण’ विषय पर प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन भोपाल में आयोजित किया गया। सोसायटी ऑफ नेचर हीलर्स, कंजर्वेटर्स एंड लोकल टूरिज्म डेवलपमेंट (एसएनएचसी इंडिया) तथा मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड ने दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन संयुक्त रूप से किया। एपको (एनवाइरनमेंटल प्लानिंग एंड को-ऑर्डिनेशन ऑर्गनाइजेशन) में आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के प्रमुख वैज्ञानिक, पर्यावरणविद, शहरी योजनाकार, नीति विशेषज्ञ और जमीनी स्तर पर कार्यरत संगठन शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य तेजी से बढ़ते शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच जैव-विविधता संरक्षण, पर्यावरण-अनुकूल विकास और टिकाऊ शहरी नियोजन को बढ़ावा देना था। विशेषज्ञों ने इस बात पर बल दिया कि शहरों के विकास मॉडल में प्रकृति और स्थानीय पारिस्थितिकी को केंद्र में रखना समय की आवश्यकता है। दिल्ली विश्वविद्यालय के सीईएमडीई के प्रो. डॉ. फैयाज़ ए. खुसरो ने कहा कि दिल्ली सहित देश के अनेक शहरों में बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरणीय संकट शहरी नियोजन के लिए गंभीर चेतावनी है। उन्होंने स्थानीय पारिस्थितिकीय समाधानों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। पूर्व विशेष पुलिस महानिदेशक मती अनुराधा शंकर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। तकनीकी सत्रों में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ ह्यूमन सेटलमेंट बेंगलुरु के  जगदीश कृष्णस्वामी, डॉ. चंद्रशेखर एम. बिरादर, वन्यजीव संस्थान देहरादून के डॉ. गौतम तालुकदार तथा अन्य विशेषज्ञों ने शहरी तापमान वृद्धि, हरित क्षेत्रों की कमी, जैव विविधता संरक्षण और शहरी नियोजन में प्रकृति-आधारित समाधानों की आवश्यकता पर विस्तृत विचार रखे। उन्होंने शहरों में देशी वृक्षारोपण, ब्लू-ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर और वार्ड स्तर पर जैव विविधता रजिस्टर तैयार करने की आवश्यकता जताई। दूसरे तकनीकी सत्र में नदियों, आर्द्र भूमियों और शहरी जल प्रणालियों के संरक्षण पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने भूजल दोहन, रेत खनन और नदी संरक्षण की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए शहरी विकास योजनाओं में जल संसाधनों और आर्द्रभूमियों के संरक्षण को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया। ‘सस्टेनेबल सिटी —गवर्नेंस, प्लानिंग एंड कम्युनिटी’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने शहरी नियोजन में जैव विविधता संरक्षण, पक्षी-अनुकूल भवन निर्माण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग और समावेशी विकास मॉडल को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। सम्मेलन के दूसरे दिन, 31 मई को प्रतिभागियों ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान विशेषज्ञों ने पारंपरिक ज्ञान, प्रकृति-आधारित जीवनशैली और टिकाऊ विकास के भारतीय दृष्टिकोण पर चर्चा की। यह भ्रमण सम्मेलन के उद्देश्यों को व्यवहारिक संदर्भ प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा। सम्मेलन में यह स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि जलवायु परिवर्तन और तेजी से बढ़ते शहरीकरण की चुनौतियों का समाधान केवल बुनियादी ढांचे के विस्तार से नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलित विकास मॉडल अपनाकर ही संभव है। विशेषज्ञों ने पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को जन-आंदोलन बनाने और शहरी विकास के केंद्र में जैव विविधता एवं पारिस्थितिकी को स्थान देने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’ राज्यपाल ने सुनी किसानों के साथ

भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि वैज्ञानिक आधुनिक कृषि तकनीक का व्यवहारिक अनुभव किसानों को दें। केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान द्वारा आस-पास के क्षेत्रों के किसानों को केंद्र में आमंत्रित किया जाना चाहिए। यहाँ किसानों को उनके सामर्थ्य और आवश्यकता के अनुरूप उपयोगी आधुनिक तकनीकों के बारे में बताया जाए। उन्हें कृषि यंत्रों का व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाए, ताकि किसान इनका स्वयं उपयोग करने में सक्षम हो सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ 'मन की बात' केवल एक रेडियो कार्यक्रम नहीं, हमारे पूरे राष्ट्र की सामूहिक चेतना, शक्ति और संकल्प का प्रतीक है। राज्यपाल  पटेल प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के पूर्व किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल के साथ किसानों, कृषि वैज्ञानिकों के साथ ‘मन की बात’ के सामूहिक श्रवण कार्यक्रम का आयोजन रविवार को केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान के सभागार में किया गया था। इस अवसर पर संचालक कृषि कल्याण  उमाशंकर भार्गव भी मौजूद थे। मन की बात राष्ट्र की सामूहिक चेतना राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से देश के सुदूर कोनों के गुमनाम नायकों की उपलब्धियों को बताते हैं, जिनके एकल प्रयासों ने समाज में बड़े बदलाव किए हैं। यह कार्यक्रम हमें सिखाता है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता, क्योंकि जब पूरा देश एक दिशा में सोचता है और सामूहिक चेतना के साथ काम करता है, तो बड़े से बड़ा बदलाव आसानी से हो जाता है। केंद्र और राज्य सरकार के लिये हैं किसान कल्याण सर्वोपरि राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कृषि वैज्ञानिकों को बदलते परिवेश में खेती पर होने वाले मौसम के प्रकोप को सहने और फसलों की सुरक्षा करने की क्षमता बढ़ाने में किसानों की सहायता करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित महिला किसानों की उपस्थिति पर हर्ष व्यक्त किया। बताया कि वर्तमान में केंद्र और राज्य, दोनों ही सरकारों के केंद्र में किसान कल्याण सर्वोपरि है। सरकार किसानों के चहुंमुखी विकास और उनकी आय बढ़ाने के लिए हर संभव कदम उठाने को तत्पर रहती है। मोदी जी के नेतृत्व में खेती को लाभकारी बनाने के लिए अनेक कार्य किए गए हैं, नई योजनाएं बनी हैं। उन्नत कृषि के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने देश में 3 करोड़ 'ड्रोन दीदी' बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि में महिलाओं की भागीदारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा कृषि कल्याण वर्ष के माध्यम से आधुनिक खेती के विकास के द्वारा किसानों की आमदनी को बढ़ाने प्रयासों की सराहना की। गुजरात के कृषि मेलों की पहल का किया स्मरण राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने अपने गृह राज्य गुजरात का संस्मरण साझा करते हुए बताया कि वे गुजरात के नवसारी के रहने वाले हैं, जहाँ एक प्रतिष्ठित कृषि विश्वविद्यालय स्थित है। उन्होंने याद दिलाया कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2007 में ऐतिहासिक 'कृषि मेलों' की शुरुआत कराई थी। इस अभिनव पहल के तहत उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों को 'लैब से फील्ड' भेजने की शुरुआत की, ताकि वैज्ञानिक सीधे किसानों से जुड़ सकें। राज्यपाल ने बताया कि इन कृषि मेलों के माध्यम से ही गुजरात में रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में वर्मी कंपोस्ट केंचुआ खाद के उपयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिला, जिससे जैविक खेती की नींव मजबूत हुई। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत के महान कृषि वैज्ञानिक, स्वर्गीय डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन जी ने स्वयं गुजरात में एक माह तक प्रवास कर इन कृषि मेलों के सकारात्मक प्रभावों और उनके दूरगामी परिणामों का अध्ययन किया था। अनुसंधान केन्द्र का किया अवलोकन राज्यपाल  पटेल ने कार्यक्रम के पूर्व केंद्र में विकसित किए गए आधुनिक उपकरण आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीक का अवलोकन किया। कृषि वैज्ञानिकों का उत्साह वर्धन किया और कहा कि कृषक उपयोगी यंत्रों और तकनीक के विकास को देखकर उन्हें प्रसन्नता हुई है। केंद्र के निदेशक  सी.आर. मेहता ने स्वागत उद्बोधन में संस्थान की उपलब्धियां और नवाचार की जानकारी दी। आभार प्रदर्शन केंद्र के परियोजना समन्वयक  के.एन. अग्रवाल ने किया। मन की बात के सामूहिक श्रवण कार्यक्रम के प्रारंभ में दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर आई.सी.ए.आर. गान का प्रस्तुत किया गया। अनुसूचित जाति उप योजना के तहत किसानों को उन्नत कृषि किट प्रदान किए गए।  

प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षों का स्वर्णिम कार्यकाल अभिनंदन योग्य

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास के नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। प्रधानमंत्री  मोदी के 12 वर्षों के स्वर्णिम कार्यकाल के लिए उनका अभिनंदन करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के मार्ग दर्शन में मध्यप्रदेश भी निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। मध्यप्रदेश के गठन के बाद यहां सिर्फ 5 मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन हमारी सरकार ने जनहित को सर्वोपरि रखा और पिछले दो साल में ही प्रदेश को 7 नए मेडिकल कॉलेजों की सौगात मिल चुकी है। मध्यप्रदेश में शाजापुर जिले की अपनी एक अलग पहचान रही है। शुजालपुर के सुंदरसी का संबंध पुराने समय में सम्राट विक्रमादित्य से जुड़ता है। शुजालपुर शाजापुर जिले की सबसे सक्षम और संपन्न तहसील है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, शुजालपुर में आयोजित कॉलेज चलो अभियान और प्रदेश के महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया के शुभांरभ के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री  इन्दर सिंह परमार तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय तथा आयुष चिकित्सालय का किया भूमिपूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 388 करोड़ रुपये की लागत से 43 विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण किया। इसके साथ ही 70 करोड़ रुपये की लागत से आयुर्वेदिक महाविद्यालय, चिकित्सालय और 14 करोड़ 37 लाख की लागत से 50 बिस्तरीय आयुष चिकित्सालय का भूमि-पूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 4 सांदीपनि विद्यालयों का किया लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 122 करोड़ रुपये की लागत से माँ शारदा सांदीपनि विद्यालय, महाराणा प्रताप सांदीपनि विद्यालय, मिहिर भोज सांदीपनि विद्यालय और राजा भोज सांदीपनि विद्यालय का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में 14 करोड़ 58 लाख रुपये की लागत से 4 नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का लोकार्पण संपन्न हुआ। प्रदेश में गेहूं खरीद का नया कीर्तिमान स्थापित हुआ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शुरू से ही मध्यप्रदेश संभावनाओं का प्रदेश था, लेकिन प्रदेश में 2002-03 तक केवल साढ़े 7 लाख हेक्टेयर भूमि ही सिंचित थी। गांवों में किसानों को बिजली नहीं मिलती थी, पानी-बिजली-सड़क, हर व्यवस्था में गढ्ढे थे। हमारी सरकार ने सिंचाई का रकबा बढ़ाया है और किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम भी दिलवाया है। इसी वर्ष किसानों से 2625 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदा गया। प्रदेश में गेहूं खरीद का नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है। हम किसान कल्याण वर्ष की घोषणाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। देश में 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला जा चुका हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार सुशासन के माध्यम से प्रदेश की प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर रही है। राज्य के प्रत्येक गरीब, किसान, युवा और महिला सहित सभी वर्गों के जरूरतमंदों को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। आज देशभर में 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला गया हैं। यह गर्व का विषय है। आज उज्जैन से लेकर अयोध्या और धार की भोजशाला तक जयकारे गूंज रहे हैं। हमारी सरकार न्यायालय के निर्णय को लागू कराने की प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में विकास की गंगा प्रवाहमान है। नए मेडिकल कॉलेज और आयुर्वेदिक कॉलेज खुल रहे हैं। आगामी ढाई साल में प्रदेश के विकास कार्यों में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। आयुर्वेदिक चिकित्सा के लिए आज का दिन ऐतिहासिक उच्च शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार ने कहा कि शुजालपुर शिक्षा की स्थली रही है। आज यहां से शाजापुर जिले को स्कूल शिक्षा और आयुष की बड़ी सौगात मिल रही है। शाजापुर को 4 नए सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण किया गया है। इनके नाम हमारे महापुरुषों के नाम पर रखे गए हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा में प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। प्रदेश में पिछले ढाई साल में 9 नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय शुरू करने की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। राज्य में नई सरकार बनने के बाद 11 नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। उज्जैन में आरंभ होगा शासकीय होम्योपैथिक महाविद्यालय मंत्री  परमार ने कहा कि एक शासकीय होम्योपैथिक महाविद्यालय उज्जैन में खोला जाएगा। नागरिकों के लिए बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य हमारी सरकार की प्राथमिकता है। मध्यप्रदेश नई शिक्षा नीति को लागू करने वाला देश का अग्रणी राज्य है। प्रदेश के प्रत्येक जिले में पीएम एक्सीलेंस कॉलेज खोले गए हैं। युवाओं को कृषि की पढ़ाई करने का अवसर मिल रहा है। बच्चों को स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है, जिसका परिणाम इस वर्ष बोर्ड परीक्षाओं में देखने को मिला है। मंत्री  परमार ने शुजालपुर में सड़कों के चौड़ीकरण की आवश्यकता बताई तथा अन्य स्थानीय अपेक्षाओं से मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अवगत कराया। मंदसौर से भोपाल के स्वीकृत नए फोर लेन का लाभ, गुना, राजगढ़, शाजापुर को मिलेगा सांसद  महेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में अधोसंरचना विकास के उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा मंदसौर से भोपाल के स्वीकृत नए फोर लेन मार्ग का लाभ, गुना, राजगढ़, शाजापुर और शुजालपुर के आसपास के क्षेत्र को भी मिलेगा। कार्यक्रम में शाजापुर जिले के प्रभारी मंत्री  नारायण सिंह कुशवाहा, विधायक  घनश्याम चंद्रवंशी तथा  अरुण भीमावद, जिला पंचायत अध्यक्ष  हेमराज सिसोदिया तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। शुजालपुर के लिये मुख्यमंत्री ने की घोषणाएँ              पुलिस चौकी शुजालपुर से व्हाया भीलखेड़ी, मेहरखेड़ी, कालापीपल का 2 लाइन रोड              शाजापुर बायपास – आष्टा रोड से पचोर रोड – शुजालपुर बायपास              अकोदिया में कॉलेज              गौलाना में बायपास रोड              गौलाना को नगर पंचायत बनायेंगे              शुजालपुर में सुरक्षा कर्मियो के लिए पुलिस आवास              शुजालपुर थाना मण्डी में बल के लिये विभिन्न श्रेणी के 50 बल वृद्धि करने मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुजालपुर में शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से निकलते हुए आम जनता से मिलने के लिए डेढ़ किमी लंबा रोड शो किया। इस अवसर पर अनेक सामाजिक संस्थाओं के द्वारा 50 से अधिक मंचों से मुख्यमंत्री का पुष्प वर्षा कर जोरदार स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री … Read more

तेल कंपनियों को राहत! पेट्रोल, डीजल और ATF की एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती

भोपाल. वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में जारी भारी उथल-पुथल के बीच केंद्र सरकार ने देश के पेट्रोलियम निर्यातकों को एक बड़ी विधिक राहत दी है। सरकार ने 1 जून 2026 से शुरू होने वाले नए पाक्षिक (15 दिनों की अवधि) चक्र के लिए पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF – हवाई ईंधन) पर लागू एक्सपोर्ट ड्यूटी (निर्यात शुल्क) में भारी कटौती करने का एलान किया है. शनिवार को जारी एक आधिकारिक सरकारी बयान में इस कूट फैसले की जानकारी साझा की गई है. यह राहत भरा प्रशासनिक कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब अमेरिका-ईरान युद्ध छिड़ने के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें लगातार आसमान छू रही हैं. इस भीषण सैन्य संघर्ष के कारण तेल की वैश्विक सप्लाई बाधित हुई है और सामरिक रूप से बेहद कूट 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Hormuz Strait) के आसपास पैदा हुई समुद्री बाधाओं ने ऊर्जा बाजार पर भारी दबाव बना दिया है. तेल उत्पादों पर तय हुईं नई विधिक दरें संशोधित नियमों के तहत तीनों प्रमुख पेट्रोलियम ईंधनों पर निर्यात शुल्क को कूट रूप से घटाकर आधा या बेहद कम कर दिया गया है: पेट्रोल: पेट्रोल के अंतरराष्ट्रीय निर्यात पर ड्यूटी को घटाकर अब 1.5 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है. डीजल: विदेशी बाजारों में भेजे जाने वाले डीजल पर अब 13.5 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से निर्यात शुल्क लगेगा. ATF (हवाई ईंधन): विमानों के ईंधन यानी एटीएफ के निर्यात पर अब ड्यूटी 9.5 रुपये प्रति लीटर निर्धारित की गई है. 16 मई बनाम 1 जून 2026 की दरें केंद्र सरकार द्वारा हर 15 दिनों में की जाने वाली विधिक समीक्षा के बाद निर्यात शुल्कों में आया कूट बदलाव इस प्रकार है: ईंधन का प्रकार        16 मई को घोषित दरें       1 जून से दरें       प्रति लीटर शुद्ध राहत पेट्रोल (Petrol)     ₹3.00 प्रति लीटर     ₹1.50 प्रति लीटर     ₹1.50 की कमी डीजल (Diesel)     ₹16.50 प्रति लीटर     ₹13.50 प्रति लीटर     ₹3.00 की कमी हवाई ईंधन (ATF)     ₹16.00 प्रति लीटर     ₹9.50 प्रति लीटर     ₹6.50 की कमी घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल कोई राहत नहीं निर्यातकों के लिए शुल्क घटाने के बावजूद आम जनता के लिए राहत की खबर नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोग के लिए जारी होने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा एक्साइज ड्यूटी (केंद्रीय उत्पाद शुल्क) की दरों को यथावत रखा गया है। इसका विधिक मतलब यह है कि देश के भीतर पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई कमी या बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। क्यों लागू किया गया था यह निर्यात शुल्क? वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने पर घरेलू रिफाइनरी कंपनियां ज्यादा मुनाफे के लालच में पेट्रोल-डीजल विदेशों में न खपा दें, इसे रोकने के लिए सरकार ने 27 मार्च 2026 को पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह कड़ा टैक्स विन्यास लागू किया था। इस टैक्स (जिसमें विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और सड़क एवं बुनियादी ढांचा उपकर शामिल हैं) का मुख्य कूट उद्देश्य अत्यधिक अनियंत्रित निर्यात पर लगाम लगाना और भारत के भीतर पेट्रोलियम उत्पादों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना था।