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Twisha Sharma Case: जांच के बीच सामने आया तीसरा किरदार, घटना के 19 दिन बाद अमित नाम की चर्चा तेज

भोपाल. भोपाल के हाईप्रोफाइल ट्विशा शर्मा मौत मामले 19वें दिन एक नये किरदार की एंट्री हुई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की पड़ताल में कथित तौर पर एक तीसरे व्यक्ति का नाम सामने आया है। इसके बाद CBI ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान अमित नाम के एक व्यक्ति का उल्लेख सामने आया है, जिसके बाद CBI ने मामले को नए एंगल से खंगालना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि ट्विशा की प्रेग्नेंसी को लेकर पति समर्थ सिंह को कुछ शंकाएं थीं, जिसके चलते दोनों के बीच विवाद बढ़ा था। डॉक्टरों से भी होगी पूछताछ CBI अब इस पहलू से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करने में जुटी है। जांच एजेंसी मामले से जुड़े डॉक्टरों से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है, ताकि चिकित्सा संबंधी तथ्यों और परिस्थितियों को स्पष्ट किया जा सके। समर्थ-गिरिबाला से संतोषजनक जवाब नहीं सूत्रों के मुताबिक, CBI ने समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह से अलग-अलग कई सवाल किए हैं। हालांकि, एजेंसी  को दोनों से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। जांच एजेंसी कई एंगल से मामले की गहन जांच कर रही है। फिलहाल CBI ने आधिकारिक रूप से किसी निष्कर्ष की घोषणा नहीं की है और जांच लगातार जारी है। 12 मई: रात बरीब 10:30 बजे द्विशा शर्मा का शव घर में फांसी पर लटका मिला। 13 मई:  सुबह एम्स भोपाल में पोस्टमॉर्टम किया गया। देर रात परिजनों ने कटारा थाने में हंगामा किया। 14 मई: दोपहर में परिजन पुलिस कमिश्रर कार्यालय पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। देर रात पुलिस ने रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ के खिलाफ FIR दर्ज की।15 मई: गिरिवाना सिंह ने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दिया। शाम करीब 7 बजे कोर्ट ने जमानत मंजूर की। परिजनों ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मानने से इनकार किया। 16 मई: परिजन ने जांच दिल्ली पुलिस को सौंपने की मांग उठाई। 17 मई: परिजन ने सीएम हाउस के बाहर धरना दिया। शव देर रात तक एम्स की मॉर्चुरी में रखा रहा। 18 मई: भोपाल कोर्ट ने समर्थ की अग्रिम जमानत खारिज की। परिजन ने गिरिबाला सिंह को कंज्यूमर फोरम से हटाने के लिए राज्यपाल को पत्र लिखा। 20 मई: जबलपुर हाईकोर्ट ने समर्थ के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया। राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया। DG से ATH रिपोर्ट मागी गई। 22 मई: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने ट्विशा की डेडबॉडी का दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने के आदेश दिए। मध्य प्रदेश सरकार ने मामाले की CBI जांच के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा। समर्थ सिंह को पुलिस ने जबलपुर कोर्ट से गिरफ्तार किया। 23 मई: समर्थ को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। इधर, दिल्ली एम्स की टीम भोपाल पहुंची। 24 मई: भोपाल एम्स में दोबारा पोस्टमॉर्टम। परिसर में फोर्स तैनात। 24 मई: 13वें दिन ट्विशा का भदभदा विश्राम घाट में अंतिम संस्कार, भाई हर्षित शर्मा ने मुखाग्नि दी। उधर,पुलिस और एम्स डॉक्टर्स की टीम गिरिबाला सिंह के कटारा हिल्स स्थित बंगले पहुंची। क्राइम सीन रिक्रिएट किया। 25 मई: सुप्रीम कोर्ट में सुनावाई पूरी। अब हाईकोर्ट जबलपुर और भोपाल जिला कोर्ट में सुनवाई। 26 मई: सीबीआई ने टेक ओवर किया केस। 26 मई : भोपाल जिला कोर्ट में CDR-CCTV फुटेज सुरक्षित रखने सुनवाई। 27 मई: हाईकोर्ट ने गिरबाला सिंह को भोपाल जिला कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत रद्द की। वहीं सीबीआई आरोपी पति समर्थ को लेकर कटारा हिल्स उसके घर पहुंची थी। 28 मई : सीबीआई टीम सुबह-सुबह रिटायर्ड जज गिरबाला सिंह के घर पहुंची।

धर्मांतरण के आरोप पर जबलपुर में बवाल, बजरंग दल और विहिप कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

जबलपुर. आधारताल थाना क्षेत्र के सुहागी इलाके में रविवार को मतांतरण की सूचना मिलने पर बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए, जिससे क्षेत्र में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई। सूचना मिलते ही पुलिस भी तत्काल मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। बताया जा रहा है कि संगठन के पदाधिकारियों को जानकारी मिली थी कि कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से लालच देकर मतांतरण कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसके बाद बजरंग दल और विहिप के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और विरोध जताते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की। संगठन के नेताओं ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाली किसी भी अवैध गतिविधि की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस ने हस्तक्षेप किया और मौके से दो महिलाओं तथा एक पुरुष को पूछताछ के लिए थाने ले गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार तीनों संदेहियों से मामले के संबंध में विस्तृत पूछताछ की जा रही है। अभी मामले की जांच प्रारंभिक स्तर पर है और सभी तथ्यों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। जांच में प्राप्त साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्र में बढ़ी पुलिस की निगरानी वहीं, घटना के बाद क्षेत्र में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे और किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को देने की अपील की है। मामले की जांच जारी है।

Bargi Cruise हादसा: चश्मदीद का दावा- एम्बुलेंस में नहीं था मेडिकल स्टाफ, जांच टीम को दिए वीडियो सबूत

जबलपुर. मध्य प्रदेश के बहुचर्चित बरगी बांध क्रूज हादसे की न्यायिक जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। हादसे के प्रत्यक्षदर्शी और बचाव कार्य में शामिल रहे बरगी निवासी नीरज मिश्रा ने जांच आयोग के समक्ष कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि दुर्घटना के बाद मौके पर पहुंची 108 एम्बुलेंस में चालक के अलावा कोई मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं था, जिसके कारण घायलों को समय पर प्राथमिक उपचार नहीं मिल सका। इस संबंध में उन्होंने वीडियो, पेन ड्राइव और 14 बिंदुओं पर आधारित विस्तृत शिकायत न्यायिक जांच आयोग को सौंपी है। नीरज मिश्रा ने न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस संजय द्विवेदी को सौंपे गए दस्तावेजों में कहा है कि क्रूज डूबने के बाद कई लोगों को स्थानीय लोगों ने पानी से बाहर निकाला था। इनमें कुछ लोग जीवित थे और उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता थी। आरोप है कि मौके पर पहुंची एम्बुलेंस में न तो कोई अटेंडर मौजूद था और न ही कोई प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ, जिससे शुरुआती उपचार नहीं मिल पाया। उन्होंने आयोग को एक वीडियो भी सौंपा है, जिसमें कथित रूप से एम्बुलेंस चालक यह स्वीकार करता दिखाई दे रहा है कि वह अकेले मौके पर पहुंचा था। राहत और बचाव कार्य पर उठे सवाल शिकायत में दावा किया गया है कि हादसे के बाद प्रशासनिक प्रतिक्रिया अपेक्षित स्तर की नहीं थी। नीरज मिश्रा के अनुसार शाम 5:30 बजे से 6:15 बजे के बीच हुई घटना के बाद भी राहत और बचाव दल समय पर सक्रिय नहीं हो सके। SDRF और अन्य आपदा प्रबंधन संसाधनों के देर से पहुंचने के कारण बचाव अभियान प्रभावित हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि मोटर बोट, प्रशिक्षित गोताखोर और आपदा राहत दल तत्काल सक्रिय हो जाते, तो जनहानि को कम किया जा सकता था। बीमा और सुरक्षा मानकों पर भी सवाल शिकायत में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के दिशा-निर्देशों के अनुसार क्रूज और यात्रियों के लिए बीमा व्यवस्था होना आवश्यक है। आरोप है कि दुर्घटनाग्रस्त क्रूज और उसमें सवार पर्यटकों का कोई बीमा नहीं था, जबकि यात्रियों से टिकट शुल्क लिया गया था। इसके अलावा लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय, आपातकालीन संचार व्यवस्था और मौसम संबंधी सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन को लेकर भी जांच की मांग की गई है। 13 लोगों की गई थी जान गौरतलब है कि 30 अप्रैल की शाम बरगी बांध के बैकवॉटर क्षेत्र में 41 लोगों को लेकर निकला क्रूज पानी में डूब गया था। इस दर्दनाक हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 28 यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया था। 60 दिन में देनी है रिपोर्ट राज्य सरकार द्वारा गठित न्यायिक जांच समिति पर्यटन विभाग के अधिकारियों, रिसॉर्ट प्रबंधन और क्रूज चालक के बयान दर्ज कर चुकी है। आयोग को 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है। अब प्रत्यक्षदर्शी द्वारा प्रस्तुत नए साक्ष्यों और शिकायतों के बाद जांच का दायरा और व्यापक हो गया है। हादसे की वास्तविक वजह, सुरक्षा मानकों की स्थिति और प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर आयोग की रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

भंडारा खाकर लौट रहे लोगों पर गिरी बिजली, अनूपपुर में दो की मौत और एक घायल

अनूपपुर. धार्मिक नगरी अमरकंटक नगर क्षेत्र में शनिवार शाम आकाशीय बिजली गिरने से एक दर्दनाक हादसा हो गया। नगर परिषद अमरकंटक के वार्ड क्रमांक दो बराती क्षेत्र में शाम लगभग 4 बजे तेज आंधी-तूफान और मूसलाधार वर्षा के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से एक युवक और एक युवती की मौके पर ही गंभीर रूप से झुलस जाने से मृत्यु हो गई, जबकि एक अन्य किशोरी घायल हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार बराती में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के समापन के बाद भंडारे में प्रसाद ग्रहण कर तीनों अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान मौसम अचानक खराब हो गया और तेज गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिर गई, जिसकी चपेट में आने से 18 वर्षीय हर्ष टांडिया और 17 वर्षीय आरती वर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए। 17 वर्षीय राधा भी बिजली की चपेट में आकर घायल हो गई। डॉक्टरों ने दोनों को किया मृत घोषित घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की सहायता से तीनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमरकंटक पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने हर्ष टांडिया और आरती वर्मा को मृत घोषित कर दिया। घायल राधा का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जारी है। घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। स्वजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

रतलाम में नाबालिग से ब्लैकमेलिंग का मामला, सोशल मीडिया पर दोस्ती के बाद दरगाह में निकाह

ढोढर/रतलाम. इंटरनेट मीडिया से हुई दोस्ती के बाद 17 वर्षीय किशोरी को धमकाकर निकाह कराने और बाद में पीछा कर धमकी देने का मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपित युवक ढोढर निवासी ईरशाद शेख के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। किशोरी ने अपने माता-पिता के साथ चौकी पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। युवती ने बताया कि अक्टूबर 2024 में उसकी पहचान ईरशाद शेख से इंस्टाग्राम के माध्यम से हुई थी। दोनों के बीच पहले इंस्टाग्राम पर चैटिंग होती रही, बाद में मोबाइल नंबरों का आदान-प्रदान हुआ और फोन पर बातचीत शुरू हो गई। दोनों ने साथ में कुछ फोटो भी खिंचवाए थे। बातचीत के दौरान ईरशाद ने उससे प्रेम और निकाह करने की बात कही थी। दरगाह पर ईरशाद ने निकाह करने का दबाव बनाया 2 अप्रैल को वह कालूखेड़ा फंटे से बस द्वारा जावरा कोचिंग जाने निकली थी। ईरशाद अपने परिचित राजा के साथ कार से पीछा करते हुए जावरा बस स्टैंड पहुंच गया। वहां दोनों ने किशोरी को ज्यूस पिलाने की बात कही। ज्यूस पीने के बाद उसे चक्कर आने लगे, जिसके बाद दोनों उसे कार में बैठाकर बड़ावदा स्थित बाबा फरीद दरगाह ले गए। दरगाह पर ईरशाद ने निकाह करने का दबाव बनाया। मना करने पर ईरशाद ने साथ में खिंचवाए फोटो बहुप्रसारित करने की धमकी दी। डर के कारण किशोरी ने निकाह के लिए सहमति दे दी, जिसके बाद वहां मौजूद काजी द्वारा निकाह कराया गया। बाद में दोनों उसे वापस जावरा छोड़ गए, जहां से वह बस द्वारा घर पहुंची। हाथ पकड़कर जान से मारने की धमकी दी 16 मई को जब वह जिम जाने के लिए बस से जावरा जा रही थी, तब ईरशाद फिर उसका पीछा करते हुए जिम तक पहुंच गया और साथ चलने के लिए कहा। मना करने पर उसका हाथ पकड़कर जान से मारने की धमकी दी और वहां से चला गया। पीड़िता ने बताया कि लगातार डर के कारण वह अब तक चुप रही, लेकिन 29 मई को हिम्मत जुटाकर उसने पूरी घटना की जानकारी अपने माता-पिता को दी।

गिरिबाला सिंह से CBI के तीखे सवाल, शरीर पर चोट के निशानों को लेकर साधी चुप्पी

भोपाल. मॉडल और एक्ट्रेस त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह से पूछताछ का दायरा और तेज कर दिया है। 5 दिन की सीबीआई रिमांड के दौरान जांच एजेंसी कथित क्राइम सीन से छेड़छाड़, सीसीटीवी फुटेज, व्हाट्सएप चैट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों के निशानों को लेकर लगातार सवाल पूछ रही है। इन तीखे सवालों के चक्रव्यूह में घिरीं पूर्व जज पूछताछ के दौरान काफी असहज नजर आईं और उन्होंने बेचैनी की शिकायत भी की है। FIR के आरोपों पर स्पष्टीकरण और चोट के निशानों पर फोकस सीबीआई ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में पूर्व जज की भूमिका और घटनास्थल की परिस्थितियों को लेकर अपनी जांच केंद्रित की है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं: गंभीर आरोपों पर जवाब तलब: सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने गिरिबाला सिंह के सामने दर्ज एफआईआर (FIR) में लगाए गए आरोपों को रखकर स्पष्टीकरण मांगा है। जांच एजेंसी यह जानना चाहती है कि शिकायतकर्ता पक्ष (त्विषा के परिजनों) द्वारा लगाए गए आरोपों के बावजूद उनकी भूमिका को सीमित क्यों माना जाए। शरीर पर मिली चोटों का सस्पेंस: पूछताछ के दौरान सीबीआई ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों का हवाला देते हुए सीधा सवाल किया कि त्विषा के शरीर पर मिले मृत्यु-पूर्व चोटों के निशान कैसे आए? एजेंसी ने यह भी पूछा कि घटना के समय परिवार के कौन-कौन से सदस्य घर में मौजूद थे और क्या ये चोटें सामान्य परिस्थितियों में लग सकती थीं? इन सवालों पर गिरिबाला सिंह अधिकांश समय पूरी तरह खामोश रहीं। डिजिटल साक्ष्य बने जांच का आधार; रिश्तों की कड़वाहट खंगाल रही CBI जांच एजेंसी अब केवल बयानों पर निर्भर न रहकर तकनीकी और वैज्ञानिक सबूतों के जरिए सच का पता लगाने में जुटी है: व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड: सीबीआई ने दोनों पक्षों के बीच हुए व्हाट्सएप चैट्स, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल फुटप्रिंट्स को पूछताछ का प्रमुख आधार बनाया है। इसके जरिए शादी के बाद त्विषा और उसके ससुराल पक्ष के रिश्तों, कथित विवादों तथा मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना के आरोपों पर बारीकी से जानकारी जुटाई जा रही है। गर्भावस्था को लेकर दबाव के आरोप: त्विषा की प्रेग्नेंसी को लेकर परिवार में हुई चर्चाओं और उस पर कथित रूप से डाले जा रहे मानसिक दबाव के आरोपों को लेकर भी पूर्व जज से कई तीखे सवाल पूछे गए हैं। पूर्व जज का दावा: गर्भपात के बाद डिप्रेशन में थीं त्विषा; जांच जारी पूछताछ के दौरान पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह ने खुद पर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने मामले में एक नई थ्योरी सामने रखते हुए दावा किया है कि गर्भपात (मिसकैरेज) होने के बाद त्विषा गहरे अवसाद (डिप्रेशन) की स्थिति में आ गई थीं, जिसके कारण संभवतः उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया होगा। सीबीआई पूर्व जज द्वारा किए गए इस डिप्रेशन और आत्महत्या की आशंका वाले दावे को अंतिम सच नहीं मान रही है। एजेंसी अब त्विषा के पुराने मेडिकल रिकॉर्ड्स, संबंधित डॉक्टरों के बयानों और उपलब्ध फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर इस दावे की बारीकी से पड़ताल कर रही है।

सोशल मीडिया पर जातीय तनाव फैलाने का आरोप, यूट्यूबर मनीष पटेल की बेल चौथी बार रिजेक्ट

रीवा. आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में गिरफ्तार यूट्यूबर मनीष पटेल की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अदालतों से राहत मिलने की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है। बीते कुछ दिनों में उनकी जमानत याचिका लगातार चार बार खारिज हो चुकी है। जिला न्यायालय से लेकर हाईकोर्ट तक किसी भी अदालत ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया है। वहीं दूसरी ओर, इस मामले ने अब कानूनी दायरे से निकलकर सामाजिक और जातीय बहस का रूप ले लिया है। रीवा और पूरे विंध्य क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध के बीच माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। लगातार चार बार खारिज हुई जमानत याचिका मनीष पटेल के खिलाफ दर्ज मामले को अदालतों ने गंभीर मानते हुए अब तक कोई राहत नहीं दी है। जानकारी के अनुसार 28 मई को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पन्ना नागेश की अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद 30 मई को चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश आर.के. शर्मा की अदालत ने भी याचिका निरस्त कर दी। इससे पहले जिला न्यायालय और हाईकोर्ट भी मनीष पटेल को जमानत देने से इनकार कर चुके हैं। इस तरह अब तक चार अलग-अलग स्तरों पर उनकी जमानत याचिका अस्वीकार हो चुकी है। कानूनी जानकारों के अनुसार अब निर्धारित अवधि तक हाईकोर्ट में दोबारा जमानत याचिका दाखिल करने का रास्ता भी सीमित हो गया है। गिरफ्तारी के बाद दो धड़ों में बंटा समाज मनीष पटेल की गिरफ्तारी के बाद विंध्य क्षेत्र में सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। इंटरनेट मीडिया पर उनके समर्थक और विरोधी लगातार अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। कुछ संगठन उनके समर्थन में खुलकर सामने आए हैं, जबकि कई समूह गिरफ्तारी को उचित कार्रवाई बता रहे हैं। उत्तर प्रदेश के कुछ संगठनों द्वारा भी मनीष पटेल के समर्थन में रीवा पहुंचने की घोषणाएं सोशल मीडिया पर की गई हैं। इससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। पुलिस और जिला प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो। व्हाट्सएप ग्रुपों में फैल रहा जातीय तनाव पुलिस के अनुसार आरोपी के समर्थन में बनाए गए कुछ सोशल मीडिया और व्हाट्सएप समूहों में जाति विशेष को लेकर आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणियां साझा की जा रही हैं। इन संदेशों में सामाजिक बहिष्कार, धार्मिक गतिविधियों से दूरी बनाने और व्यापारिक संबंध समाप्त करने जैसी बातें लिखी जा रही हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार कुछ संदेशों में लोगों से एक विशेष समुदाय के नेताओं को वोट न देने, धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल न करने, व्यापारिक संबंध खत्म करने और सामाजिक व्यवहार में दूरी बनाने जैसी अपीलें की जा रही हैं। पुलिस का मानना है कि इस तरह की सामग्री सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती है और कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है। भड़काऊ पोस्ट से बचें रीवा पुलिस ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सार्वजनिक एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी जाति, धर्म या समुदाय के खिलाफ घृणा फैलाने वाली सामग्री साझा न करें। साथ ही बिना सत्यापन के किसी भी पोस्ट, वीडियो या संदेश को आगे बढ़ाने से बचें। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहे संदेशों, वीडियो और टिप्पणियों की लगातार निगरानी की जा रही है। यदि कोई व्यक्ति सांप्रदायिक या सामाजिक वैमनस्य फैलाने का प्रयास करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एसपी ने कहा- माहौल बिगाड़ने वालों पर होगी कार्रवाई रीवा पुलिस अधीक्षक गुरुकरण सिंह ने स्पष्ट कहा है कि पुलिस फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और एक्स सहित सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजर रख रही है। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक या भड़काऊ जानकारी साझा न करें। एसपी के अनुसार सोशल मीडिया पर सनसनीखेज दावे, पुराने वीडियो और संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत की गई तस्वीरों का उपयोग अक्सर लोगों को भड़काने के लिए किया जाता है। ऐसे मामलों में सावधानी बरतना आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि समाज में वैमनस्य फैलाने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। अमृता पटेल ने लगाए धमकियों के आरोप इस बीच मनीष पटेल के साथ वीडियो बनाने वाली अमृता पटेल भी चर्चा में हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर दावा किया है कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं। अमृता का आरोप है कि उन्हें इंटरनेट मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर अपमानजनक संदेश भेजे जा रहे हैं और जान से मारने तक की धमकी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसे संदेशों और पोस्ट के स्क्रीनशॉट मौजूद हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि धमकियां देने वाले लोग कौन हैं। दूसरी ओर रीवा पुलिस का कहना है कि अब तक इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यदि शिकायत मिलती है तो नियमानुसार जांच कर कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया की लड़ाई से बढ़ी प्रशासन की चुनौती पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली भड़काऊ सामग्री किस तेजी से सामाजिक तनाव का कारण बन सकती है। मनीष पटेल का मामला अब केवल एक आपराधिक प्रकरण नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक विमर्श और डिजिटल जिम्मेदारी का विषय भी बन चुका है। फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सोशल मीडिया पर फैल रहे भड़काऊ संदेशों पर नियंत्रण रखना है। आने वाले दिनों में अदालत की अगली सुनवाई और पुलिस की जांच इस मामले की दिशा तय करेगी, लेकिन इतना तय है कि रीवा और विंध्य क्षेत्र की नजरें इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।

त्विषा शर्मा केस में नया मोड़, कोर्ट में दोनों पक्षों ने दायर किए नए आवेदन; CBI के सवालों पर पूर्व जज की सफाई

भोपाल. बहुचर्चित एक्ट्रेस त्विषा शर्मा मौत मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कानूनी दांव-पेंच और तीखे होते जा रहे हैं। भोपाल कोर्ट में दोनों पक्षों ने कॉल रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट खंगालने के लिए 3 नए आवेदन लगाए हैं। सीबीआई के तीखे सवालों पर पूर्व जिला जज ने माना कि एफआईआर से पहले अग्रिम जमानत की अर्जी लगाना उनकी बड़ी भूल थी। मामले की कमान संभालते ही सीबीआई ने पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह की घेराबंदी शुरू कर दी है। शुरुआती पूछताछ में जब उनसे पूछा गया कि- "अगर आपकी कोई गलती नहीं थी, तो आपने एफआईआर दर्ज होने से पहले ही इतनी जल्दबाजी में अग्रिम जमानत की अर्जी क्यों लगाई? और बेटे समर्थ को फरार होने के लिए क्यों कहा? इस सवाल पर कानून की जानकार गिरिबाला सिंह पहले तो पूरी तरह खामोश रहीं। हालांकि, बाद में उन्होंने इसे अपनी बड़ी रणनीतिक भूल स्वीकार करते हुए कहा कि "उन्हें इस बात का रत्ती भर भी अंदाजा नहीं था कि इस कदम से उन पर ही संदेह और ज्यादा मजबूत हो जाएगा।" भोपाल कोर्ट में दोनों पक्षों की ओर से कुल तीन नए आवेदन दाखिल किए गए हैं, जिसने इस मिस्ट्री को और उलझा दिया है। 1. त्विषा के वकील (अंकुर पांडे) का आवेदन: उन्होंने अदालत से मांग की है कि 12 से 20 मई के बीच पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए। इसके साथ ही एम्स (AIIMS) में पोस्टमार्टम के समय के सीसीटीवी फुटेज को भी सीबीआई अपनी कस्टडी में लेकर सुरक्षित करे। 2. गिरिबाला सिंह की ओर से दो आवेदन: पूर्व जज के वकील ने त्विषा के परिजनों के कॉल रिकॉर्ड निकालने और त्विषा के बैंक अकाउंट का स्टेटमेंट सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका दावा है कि त्विषा को करीब 7 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। परिजनों का बड़ा आरोप: त्विषा के परिवार का दावा है कि मौत की वारदात के ठीक बाद पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने शहर के 46 प्रभावशाली लोगों को लगातार फोन किए थे। यही वजह है कि उनके कॉल रिकॉर्ड्स को खंगालना बेहद जरूरी है। सीबीआई ने इन तीनों आवेदनों पर अपना पक्ष रखने के लिए कोर्ट से समय मांगा है। केस डायरी में साइन कराने पहुंचे एसीपी; डमी पुतले से होगा टेस्ट शनिवार दोपहर करीब 1 बजे सीबीआई के अधिकारी, एफआईआर में फरियादी बनाए गए एसीपी रजनीश कश्यप के साथ भोपाल कोर्ट पहुंचे। केस डायरी में कई महत्वपूर्ण जगहों पर उनके हस्ताक्षर बाकी थे, जिन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत पूरा कराया गया। इसके तुरंत बाद, सीबीआई की टीम ट्विशा के हुबहू वजन और ऊंचाई का एक डमी पुतला तैयार कर घटनास्थल पर पूरा क्राइम सीन री-क्रिएट करने की तैयारी में जुट गई है। गिरिबाला से पूछे जाएंगे 50 सवाल; सीबीआई की 'चेकलिस्ट' तैयार सीबीआई ने पूर्व जज से पूछताछ के लिए 50 से ज्यादा तीखे सवालों की एक विस्तृत लिस्ट तैयार की है, जिसमें शामिल हैं ऐसे कुछ अहम बिंदु: एम्स पहुंचने के बाद भी स्थानीय पुलिस को तुरंत सूचना क्यों नहीं दी गई? वारदात के बाद बेटे समर्थ को अचानक फरार होने के लिए क्यों कहा गया? घर में सीसीटीवी लगाने वाले वेंडर को फुटेज डिलीट करने या छेड़छाड़ के लिए कॉल क्यों किए गए? ब्यूटी पार्लर से सीसीटीवी फुटेज निकलवाने के पीछे क्या मकसद था? पोस्टमार्टम रिपोर्ट में त्विषा के शरीर पर मिले चोट के निशान कैसे आए? त्विषा की प्रेग्नेंसी (गर्भावस्था) को लेकर दोनों पक्षों के बीच क्या विवाद चल रहा था? क्या आप प्रभावशाली लोगों को फोन कर दबाव बना रही थीं? क्या आप दबाव बनाकर त्विषा के बिजनेस शेयर अपने नाम कराना चाहती थीं?

मिशन वात्सल्य की चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 बनी बच्चों की मजबूत ढाल, संकट में मिल रही तुरंत मदद

मिशन वात्सल्य की चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 बनी संकटग्रस्त बच्चों का सशक्त सुरक्षा कवच 24×7 मुस्तैदी: वित्तीय वर्ष 2025-26 में 30 हजार से अधिक बच्चों को मिला नया जीवन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लगभग ढाई साल के कार्यकाल में राज्य ने महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में संवेदनशीलता और गवर्नेंस के एक नये प्रतिमान स्थापित किये है। उनके नेतृत्व में 'चाइल्ड हेल्पलाइन-1098' प्रदेश के संकटग्रस्त, शोषित और बेसहारा बच्चों के लिए एक बेहद सशक्त और अभेद्य सुरक्षा कवच बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 'मिशन वात्सल्य' योजना में चाइल्ड हेल्पलाइन 24 घंटे कार्य कर रही है। यह हेल्पलाइन प्रदेश में हजारों बच्चों को हिंसा, बाल श्रम और मानव तस्करी के चंगुल से छुड़ाकर उनका पुनर्वास सुनिश्चित कर रही है। सरकार के इस प्रभावी कदम से न केवल संकट के समय बच्चों को आपातकालीन मदद मिल रही है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण भी मिल रहा है। इस हेल्पलाइन की व्यापकता और रिस्पॉन्स टाइम में अभूतपूर्व सुधार आया है, जिसका अंदाजा विभागीय आंकड़ों से साफ लगाया जा सकता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस हेल्पलाइन से रिकॉर्ड 30 हजार 810 संकटग्रस्त बच्चों को सहायता पहुंचाई गई। वहीं, वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी हेल्पलाइन की टीम पूरी मुस्तैदी से डटी हुई है, जहां महज़ 15 मई तक ही 4 हजार 376 बच्चों तक त्वरित मदद पहुंचाई जा चुकी है। अब तक 2 हजार 367 मामलों का पूरी तरह से निराकरण किया जा चुका है, जबकि शेष बचे मामलों में जिला स्तर पर फॉलो-अप कार्रवाई तेजी से जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की 'जीरो टॉलरेंस' नीति 'मिशन वात्सल्य' के अंतर्गत नए स्वरूप में संचालित इस हेल्पलाइन को और अधिक हाईटेक और चुस्त रिस्पॉन्स सिस्टम से लैस किया गया है। हेल्पलाइन पर आने वाली कॉल्स को उनकी गंभीरता के आधार पर 2 हिस्सों में बांटा जाता है। कोई बच्चा किसी गंभीर या तत्काल खतरे में होता है, तो मुख्यमंत्री डॉ. यादव की 'जीरो टॉलरेंस' नीति में उस आपातकालीन मामले को तुरंत 'रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम' यानी आरएसएस-112 को ट्रांसफर किया जाता है, जिससे गृह विभाग और पुलिस की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच सके। गैर-आपातकालीन मामलों को संबंधित जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) को प्रेषित किया जाता है। इस हेल्पलाइन से प्रदेश के बच्चों को केवल रेस्क्यू ही नहीं किया जा रहा, बल्कि उन्हें समुचित सुरक्षा दी जा रही है। इसमें बच्चों को हिंसा और शोषण से बचाना, उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देना, मानसिक एवं सामाजिक परामर्श उपलब्ध कराना, बाल श्रम से मुक्ति और सबसे महत्वपूर्ण—लापता बच्चों का उनके परिवारों से पुनर्मिलन कराना शामिल है। बेघर हुए या मानव तस्करी के शिकार बच्चों के लिए यह हेल्पलाइन एक नई जिंदगी की शुरुआत साबित हो रही है। इन शहरों में दिखा सबसे ज्यादा असर प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और सतना जैसे बड़े जिलों में हेल्पलाइन का नेटवर्क सबसे ज्यादा सक्रिय रहा है और यहां बड़ी संख्या में बच्चों को रेस्क्यू किया गया है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि हमारा उद्देश्य केवल आपातकालीन सहायता देना नहीं, बल्कि हर बच्चे के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है। विभाग ने मध्यप्रदेश के सभी जागरूक नागरिकों, प्रबुद्ध वर्ग और ग्रामीणों से अपील की है कि वे सूबे के बच्चों के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाएं। प्रदेश के किसी भी कोने में यदि कोई बच्चा संकट में, बाल विवाह का शिकार, बाल श्रम करता हुआ या किसी भी प्रकार के शोषण से पीड़ित दिखाई दे, तो मूकदर्शक न बनें। राज्य सरकार की 'चाइल्ड हेल्पलाइन-1098' पर तुरंत इसकी सूचना दें, ताकि समय रहते मध्यप्रदेश के हर मासूम का भविष्य सुरक्षित और खुशहाल बनाया जा सके।  

युवाओं के भविष्य को संवार रहा ग्लोबल स्किल पार्क, साकार हो रहा CM डॉ. यादव का सपना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन को साकार कर रहा ग्लोबल स्किल पार्क कौशल प्रशिक्षण से अंतर्राष्ट्रीय रोजगार तक पहुंच रहे मध्यप्रदेश के युवा तीन प्रशिक्षणार्थियों को मिला हंगरी जॉब भोपाल संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क कौशल विकास की उस नई कार्य संस्कृति का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है, जहां प्रशिक्षण केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को वैश्विक उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में विकसित हो रहा कौशल तंत्र अब युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार अवसरों से भी जोड़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेश में कौशल विकास को औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार से जोड़ते हुए युवाओं के लिए नए अवसर निर्मित किए जा रहे हैं। इसी दिशा में कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल के मार्गदर्शन में प्रदेश में कौशल आधारित प्रशिक्षण व्यवस्थाओं को अधिक उद्योगोन्मुख और रोजगारपरक बनाया गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। इसी क्रम में संस्थान के बैच-9 के तीन विद्यार्थियों का चयन हंगरी में रोजगार के लिए हुआ है। चयनित विद्यार्थी हंगरी पहुंचकर अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन प्रारंभ कर चुके हैं। यह उपलब्धि प्रदेश में विकसित हो रहे आधुनिक कौशल प्रशिक्षण मॉडल और उद्योगोन्मुख शिक्षा व्यवस्था को रेखांकित करती है। हंगरी में रोजगार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में एडवांस्ड मैकेनिकल टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम के विद्यार्थी लकी साहू तथा एडवांस्ड मैकेनिकल एंड इलेक्ट्रिकल सर्विसेज पाठ्यक्रम के विद्यार्थी रौशन कुमार एवं मयंक जांगिड़ शामिल हैं। सिवनी, चंपारण और दौसा जैसे क्षेत्रों से आने वाले इन विद्यार्थियों ने यह सिद्ध किया है कि अवसर और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिलने पर युवा वैश्विक स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना सकते हैं। एसएसआरजीएसपी में विद्यार्थियों को अत्याधुनिक मशीनों, सिम्युलेशन आधारित प्रशिक्षण, व्यवहारिक अभ्यास और उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किए गए पाठ्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाता है। प्रशिक्षण प्रक्रिया में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ कार्यस्थल अनुशासन, व्यावसायिक व्यवहार, सुरक्षा मानकों और अंतरराष्ट्रीय कार्य संस्कृति की समझ पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। यही कारण है कि संस्थान से प्रशिक्षित युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की अपेक्षाओं पर खरे उतर रहे हैं। कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) टेटवाल ने चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि हंगरी में विद्यार्थियों का चयन प्रदेश के कौशल विकास मॉडल की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को प्रदर्शित करता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार युवाओं को केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य के साथ कार्य कर रही है। आधुनिक कौशल, व्यवहारिक प्रशिक्षण और उद्योगों की मांग के अनुरूप तैयार मानव संसाधन ही विकसित मध्यप्रदेश की आधारशिला बनेंगे। इन विद्यार्थियों की सफलता उस व्यापक परिवर्तन का संकेत है जिसमें मध्यप्रदेश के युवा अब स्थानीय सीमाओं से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। आने वाले समय में एसएसआरजीएसपी प्रदेश के अधिक से अधिक युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय रोजगार अवसरों से जोड़ते हुए कौशल विकास के क्षेत्र में नई उपलब्धियां स्थापित करेगा। हंगरी में इन तीनों विद्यार्थियों का चयन वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित औद्योगिक समूह SRF Limited में हुआ है। SRF विशेष रसायन, फ्लोरोकेमिकल्स, पैकेजिंग फिल्म्स और टेक्निकल टेक्सटाइल्स के क्षेत्र में कार्यरत भारत की अग्रणी विनिर्माण कंपनियों में से एक है, जिसकी उत्पादन इकाइयाँ भारत के साथ-साथ यूरोप के हंगरी सहित कई देशों में संचालित हैं। कंपनी अपनी उन्नत तकनीक, वैश्विक गुणवत्ता मानकों और नवाचार आधारित कार्य संस्कृति के लिए जानी जाती है। ऐसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कंपनी में रोजगार प्राप्त करना विद्यार्थियों के कौशल, प्रशिक्षण और पेशेवर दक्षता का प्रमाण है तथा यह दर्शाता है कि एसएसआरजीएसपी से प्रशिक्षित युवा वैश्विक उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को सफलतापूर्वक स्थापित कर रहे हैं।