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हेल्पलाइन लापरवाही मामला: सरकार का बड़ा एक्शन, दो सचिवों पर गिरी गाज

श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा द्वारा सीएम हेल्पलाइन के निराकरण को लेकर प्रतिदिन समीक्षा की जा रही है तथा सभी को निर्देश गए गए हैं कि सीएम हेल्पलाइन का निराकरण तत्परतापूर्वक गंभीरता से किया जाए। इसी क्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अतेन्द्र सिंह गुर्जर द्वारा सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के निराकरण में रुचि नहीं लेने एवं कार्यों में लापरवाही के चलते जहां दो पंचायत सचिवों के विरूद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई है।   13 अधिकारियों को नोटिस वहीं जनपद पंचायतों के 7 उपयंत्रियों, 3 एडीईओ सहित 13 पंचायतों के सचिव और ग्राम रोजगार सहायकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। जारी आदेश के अनुसार जनपद पंचायत विजयपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत गोहर के सचिव सोबरन कुशवाह और ग्राम पंचायत जाखेर के पंचायत सचिव राजेश जादौन को शासकीय कार्यों में लापरवाही एवं सीएम हेल्पलाइन में रुचि नहीं लेने के चलते निलंबित किया गया है। इन अधिकारियों को भेजे गए नोटिस निलंबन अवधि में दोनों सचिवों का मुख्यालय जनपद पंचायत विजयपुर किया गया है। इसी प्रकार सीएम हेल्पलाइन में शिकायतों के निराकरण नहीं करने पर जनपद पंचायत कराहल के उपयंत्री अजीत गिरी, जनपद पंचायत श्योपुर के दीपक धाकड़ एवं प्रेमनारायण राठौर, जनपद पंचायत विजयपुर के रामेश्वर गुप्ता, रामनिवास धाकड, शरद उच्चारिया एवं प्रियंका जादौन, सहायक विकास विस्तार अधिकारी जनपद श्योपुर अमन शिवहरे, एडीईओ विजयपुर अभिनंदन भदौरिया एवं देवेन्द्र प्रजापति को कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं। इसी प्रकार जनपद पंचायत विजयपुर के ग्राम पंचायत पार्वती बड़ौदा, गसवानी, गढी, वीरपुर, रघुनाथपुर, देवरी, लाडपुरा, इकलौद, फरारा, सहसराम, कींजरी, आरोदा एवं मैदावली के पंचायत सचिवों और जीआरएस को नोटिस जारी किए गए हैं।

MP में निवेश किसान भागीदारी, रोजगार सृजन एवं निर्यातोन्मुख उत्पादन को प्रोत्साहित करेगा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मैड्रिड में निवेशकों संग वन-टू-वन चर्चा निवेशकों ने मध्यप्रदेश में निवेश का बनाया मन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव MP में निवेश किसान भागीदारी, रोजगार सृजन एवं निर्यातोन्मुख उत्पादन को प्रोत्साहित करेगा एमपी बना वैश्विक निवेश का आकर्षण भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ स्पेन के निवेशकों के साथ हुई वन-टू-वन बैठक में मध्यप्रदेश की सरल औद्यौगिक नीतियों से निवेश की संभावनाएं बढ़ी है। अनेक निवेशकों ने प्रदेश में निवेश का मन भी बनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की स्पेन यात्रा के पहले दिन मैड्रिड में निवेशकों के साथ बैठकें आयोजित हुईं, जिनमें मध्यप्रदेश में निवेश की अपार संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इन बैठकों में राज्य के औद्योगिक विकास, अधोसंरचना, पर्यटन, ऊर्जा और अन्य उभरते क्षेत्रों में साझेदारी को लेकर विशेष रुचि दिखाई गई। नेचर बायो फूड्स (एलटी फूड्स लिमिटेड की सहायक इकाई) के सीईओ ने मध्यप्रदेश में 200 करोड़ रूपये के संभावित निवेश के साथ जैविक खाद्य और मूल्यवर्धित उत्पाद इकाई की स्थापना की संभावनाओं पर चर्चा की। यह निवेश किसान भागीदारी, रोजगार सृजन एवं निर्यातोन्मुख उत्पादन को प्रोत्साहित करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सैंटेंडर समूह के सीनियर एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (कॉरपोरेट डेवलपमेंट) जोसे लुइस दे मोरा गिल-गालाडॉ ने सौजन्य भेंट की। सैंटेंडर समूह की भारत में प्रत्यक्ष उपस्थिति नहीं होने के बावजूद, यह भारत से जुड़े वित्त-पोषण, व्यापार सेवाओं और परियोजनाओं में भागीदारी करता रहा है। बैठक के दौरान आधारभूत संरचना परियोजनाओं के वित्त पोषण, व्यापार एवं निवेश प्रवाह को सशक्त बनाने तथा नवाचार आधारित वित्तीय समाधान के क्षेत्र में मध्यप्रदेश के साथ संभावित सहयोग पर चर्चा हुई। मोएवे ग्रुप के प्रतिनिधि कार्लोस डियाज़ और बायोफ्यूल्स बिजनेस यूनिट की सुपिलार सिएनफुएगोस ने राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन, 2G बायोफ्यूल्स (सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल्स) तथा रसायन क्षेत्र में संभावित साझेदारी को लेकर रुचि जताई। कंपनी स्थानीय एजेंटों के साथ दीर्घकालिक फीडस्टॉक आपूर्ति सुनिश्चित करने एवं उत्पादन संयंत्रों की स्थापना की संभावनाओं का अन्वेषण कर रही है। ग्रुपो ग्रैनसोलर, एसएल के कॉर्पोरेट व्यवसाय निदेशक सईद इस्ताम्बुली ने सौर ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर राज्य में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। ग्रैनसोलर, 30 से अधिक देशों में सक्रिय है, मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के बरेठी में इंफ्राकॉन के सहयोग से दो परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिये एनटीपीसी की मंजूरी के लिए उन्होंने अपेक्षा की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से एयरो जॉयरोकॉप्टर स्पेन एस.ए. के सीईओ एवं पार्टनर मनीष जैन ने मुलाकात कर अल्ट्रालाइट जॉयरोकॉप्टर की श्रृंखला “डायमंड फ्लाई” को लेकर राज्य में संभावित निवेश पर चर्चा की। यह प्रणाली रक्षा, आपातकालीन सेवाएं, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स एवं कृषि जैसे क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। उन्होंने संभावित लोकेशन, राज्य सरकार की सब्सिडी, कर लाभ एवं विमानन अवसंरचना पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सेंटर फॉर एंटरटेनमेंट आर्ट्स के सह-संस्थापक एवं सह-प्रमुख दिवाकर गांधी ने राज्य में वैश्विक एवीजीसी स्किलिंग कंपनी की स्थापना के लिये चर्चा की। बैठक में एमपी एवीजीसी नीति के अंतर्गत मिलने वाले प्रोत्साहनों, कौशल विकास, युवा रोजगार और डिजिटल मीडिया उद्योग को सशक्त करने के लिये भी संभावित सहयोग के विषय पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। ग्रुप के सीएफओ फेहमी ने भी निवेश संबंधी चर्चा की। इन बैठकों ने मध्यप्रदेश में विविध क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने की दिशा में एक मजबूत आधार प्रस्तुत किया है, जिससे राज्य की आर्थिक प्रगति और रोजगार निर्माण को नई गति मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से कहा कि वे एक बार मध्यप्रदेश का भ्रमण जरूर करें, उन्हें निवेश के बेहतर अवसर मिलेंगे।  

पीके का फंडा’ की पहली प्रति राज्यपाल को भेंट

पीके का फंडा' की पहली प्रति राज्यपाल को भेंट   प्रवीण कक्कड़ ने माँ की स्मृति को किया समर्पित  भोपाल/इंदौर  प्रख्यात सामाजिक चिंतक, लेखक और पूर्व पुलिस अधिकारी प्रवीण कक्कड़ ने अपनी नई चिंतनपरक कृति "पीके का फंडा" की प्रथम प्रति आज मध्य प्रदेश के राज्यपाल, माननीय श्री मंगूभाई पटेल को राजभवन में सादर भेंट की। यह अवसर केवल एक पुस्तक भेंट नहीं, बल्कि प्रेरणा, श्रद्धा और सार्थक विचारों के संगम का साक्षी बना। श्री कक्कड़ ने इस दिन को अपने जीवन का एक अत्यंत भावपूर्ण क्षण बताया, क्योंकि 16 जुलाई उनकी पूज्यनीय माता, स्व. श्रीमती विद्यादेवी कक्कड़ जी की जयंती भी है। उन्होंने भावुकता से कहा, "यह पुस्तक मैंने माँ की पावन स्मृति को समर्पित की है। जीवन में जो कुछ भी मैंने पाया, उसमें उनकी प्रेरणा, संस्कारों और मूल्यों की गहरी छाया है।" यह समर्पण पुस्तक के मूल भाव—आत्मिक जागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन—से गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। शिवना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है। यह कृति प्रवीण कक्कड़ के प्रशासनिक, सामाजिक और निजी अनुभवों का ऐसा समावेश है, जो पाठकों को न केवल प्रेरित करती है, बल्कि उन्हें आत्ममंथन की दिशा में ले जाती है—यह स्पष्ट करते हुए कि वास्तविक परिवर्तन की शुरुआत भीतर से होती है, न कि बाहरी परिवेश से। माननीय राज्यपाल महोदय को पुस्तक भेंट करने के इस विशेष अवसर पर प्रवीण कक्कड़ के सुपुत्र सलिल कक्कड़, तथा "पीके का फंडा" टीम से सुमित अवस्थी और प्रकृति चटर्जी भी उपस्थित रहे।  आत्ममंथन का निमंत्रण  शिवना प्रकाशन प्रमुख पंकज सुबीर ने एक प्रेरक और चिंतनपरक कृति बताया। उन्होंने कहा, "यह केवल एक किताब नहीं, बल्कि जीवन की आपाधापी में कुछ पल ठहरकर, भीतर झाँकने और स्वयं से संवाद करने का हार्दिक निमंत्रण है।"  बेस्टसेलर: पाठकों का अपार स्नेह  शिवना प्रकाशन के संपादक शहरयार ख़ान ने बताया कि "पीके का फंडा" ने अपनी रिलीज़ से पहले ही पाठकों के बीच असाधारण लोकप्रियता प्राप्त की है। अमेज़न की प्री-बुकिंग बेस्टसेलर रैंकिंग में यह पुस्तक पहले स्थान पर रही, और अब तक 1000 से अधिक प्रतियाँ ऑनलाइन प्री-बुक हो चुकी हैं। यह उपलब्धि लेखक की विचारशील लेखनी और पाठकों के अटूट विश्वास का प्रमाण है। गौरतलब है कि इससे पहले प्रवीण कक्कड़ की पहली पुस्तक "दंड से न्याय तक" को अंतरराष्ट्रीय "शिवनाकृति सम्मान" प्राप्त हो चुका है।

पुजारी के बहिष्कार से बच्चों की पढ़ाई बाधित, प्रशासन ने शुरू की जांच

उज्जैन बड़नगर तहसील के पीर झलार गांव में खाप पंचायत जैसा मामला सामने आया है। यहां मंदिर में हुई सामाजिक बैठक में पुजारी और उसके परिवार का बहिष्कार कर दिया गया। सुनाए गए फैसले में बच्चों की पढ़ाई से लेकर पूजन, मजदूरी, घर के आसपास सफाई तक पर रोक लगा दी गई। फैसले का उल्लंघन करने पर 51 हजार रुपये जुर्माने की चेतावनी भी दी गई है। कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं।   मंदिर दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिश जानकारी के अनुसार पीर झलार गांव में करीब 300 साल पुराना देव धर्मराज मंदिर है। पूनमचंद चौधरी उर्फ पूनाजी यहां पुजारी हैं। मंदिर की करीब सात बीघा जमीन पर पुजारी खेती कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। चौधरी के मुताबिक कुछ ग्रामीण मंदिर की जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। उन्होंने मंदिर के जीर्णोद्धार के नाम पर चंदा इकट्ठा कर लिया। उसी राशि से मंदिर दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिश की जा रही है, जिसका पुजारी परिवार ने विरोध किया। पंचायत का फैसला माइक पर पढ़कर सुनाया पुजारी के बेटे मुकेश चौधरी ने बताया कि विरोध के बाद उन्हें और परिवार को निशाना बना लिया। गांव के प्रभावशाली लोगों ने 14 जुलाई को पंचायत बुलाकर बहिष्कार का फरमान सुना दिया। गांव के नागराज मंदिर परिसर में पूर्व सचिव गोकुल सिंह देवड़ा ने पंचायत का फैसला माइक पर पढ़कर सुनाया। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें ग्रामीण बैठे नजर आ रहे हैं। इस घटना के बाद पुजारी पूनमचंद चौधरी ने कलेक्टर रौशन कुमार सिंह से शिकायत की है। पुजारी परिवार के तीन बच्चों को स्कूल से निकाला पुजारी के बेटे मुकेश ने बताया कि उसके तीन बच्चे 13 वर्षीय संध्या (आठवीं), 10 वर्षीय सतीश (पांचवीं) और छह वर्षीय विराट (तीसरी कक्षा) निजी विद्यालय में पढ़ते हैं। पंचायत के फैसले के बाद तीनों को स्कूल से निकाल दिया गया है। स्कूल प्रबंधन ने कहा कि आपके परिवार का विवाद चल रहा है, इसलिए हम बच्चों को नहीं पढ़ा सकते। 'पुजारी परिवार की शिकायत पर जांच के आदेश दिए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मंदिर का मामला न्यायालय में विचाराधीन है।' रौशन कुमार सिंह, कलेक्टर

जबलपुर एवं ग्वालियर को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये मिलेगा मिनिस्ट्रियल अवार्ड

भोपाल नई दिल्ली में गुरुवार 17 जुलाई को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के मुख्य आतिथ्‍य एवं केन्‍द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर एवं केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री राज्‍य मंत्री श्री तोखन साहू की उपस्थिति में प्रात: 11 बजे विज्ञान भवन में स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 पुरस्कार समारोह का आयोजन किया जा रहा है। समारोह में मध्यप्रदेश के आठ शहरों इन्दौर, उज्जैन, बुदनी, भोपाल, देवास, शाहगंज, जबलपुर एवं ग्वालियर को उनके उत्कृष्ट स्वच्छता प्रयासों के लिए विभिन्‍न श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा। राष्‍ट्रीय स्‍तर पर प्रदेश के विजेता शहरों के गौरवशाली पलों के साक्षी बनने के लिये नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय और राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी उपस्थित रहेंगी। प्रदेश के इन 8 शहरों ने स्वच्छता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है। यह सम्मान उनके सतत प्रयासों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी का परिणाम है। उल्‍लेखनीय है कि इस आयोजन में स्‍वच्‍छ भारत मिशन (शहरी) अंतर्गत केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा शहरों के अथक प्रयासों को मान्‍यता देते हुए शहरी भारत के सबसे स्‍वच्‍छ शहरों को पुरस्‍कृत किया जाएगा। स्वच्छ सर्वेक्षण-2024, जो कि भारत में शहरी स्वच्छता के आंकलन का विश्व का सबसे बड़ा सर्वेक्षण है। यह सर्वेक्षण इस वर्ष अपने 9वें संस्करण में प्रवेश कर चुका है। इस वर्ष 'सुपर स्‍वच्‍छ लीग शहर, पाँच जनसंख्‍या श्रेणियों में शीर्ष, स्‍वच्‍छ शहर, विशेष श्रेणी : गंगा शहर, छावनी बोर्ड, सफाई मित्र सुरक्षा, महाकुंभ, राज्‍य स्‍तरीय पुरस्‍कार आदि श्रेणियों में पुरस्‍कार प्रदान किए जाएंगे। प्रदेश के इन्‍दौर, उज्‍जैन एवं बुदनी को सुपर स्‍वच्‍छ लीग श्रेणी, भोपाल, देवास और शाहगंज को राष्‍ट्रपति पुरस्‍कार, जबलपुर को विशेष श्रेणी एवं ग्‍वालियर को राज्‍य स्‍तरीय पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया जाएगा। इसके अलावा कचरा मुक्त शहरों की स्टार रेटिंग और खुले में शौच से मुक्‍त शहरों की श्रेणियों (ओडीएफ++, वॉटर+) के परिणाम भी इसी दिन जारी किए जाएंगे। इस वर्ष का सर्वेक्षण “रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकल” की थीम पर आधारित था। इसमें शहरी स्‍वच्‍छता और सेवा स्‍तर का आंकलन करने के लिए एक सजग, संरचित दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिसमें 54 संकेतकों सहित 10 सुपरिभाषित मापदंडों पर शहरों में स्‍वच्‍छता और अपशिष्‍ट प्रबंधन के आधार पर लगभग 3 हजार से अधिक मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा 45 दिनों तक देशभर के लगभग 4 हजार 500 से अधिक शहरों के प्रत्‍येक वार्ड का गहन निरीक्षण किया गया। स्‍वच्‍छता के विभिन्‍न मापदण्‍डों में समावेशिता, पारदर्शिता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता सहित 11 लाख से अधिक घरों का मूल्‍यांकन किया गया। यह राष्‍ट्रीय स्‍तर पर शहरी जीवन और स्‍वच्‍छता के मायने को समझने के लिए एक व्‍यापक और दूरगामी दृष्टिकोण को दर्शाता है। वर्ष-2024 के स्‍वच्‍छ सर्वेक्षण के मूल्‍यांकन में लगभग 14 करोड़ देशवासियों द्वारा प्रत्‍यक्ष संवाद, स्‍वच्‍छता ऐप, माईगव और सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म के माध्‍यम से अपना फीडबैक भी दिया गया। स्‍वच्‍छता में उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन करने वाले शहरों के लिए एक नई पहल सुपर स्‍वच्‍छ लीग (एसएसएल) की शुरूआत की गई है। सुपर स्‍वच्‍छ लीग का उद्देश्‍य शीर्ष प्रदर्शन करने वाले शहरों को स्‍वच्‍छता के उच्‍च मानकों तक पहुंचने के लिए प्रेरित करने के साथ ही अन्‍य शहरों को भी अपने प्रदर्शन में सुधार करने और शीर्ष रैंकिंग के लिए प्रतिस्‍पर्धा करने के लिये प्रोत्‍साहित करना है। स्‍वच्‍छ शहर लीग में वे शहर शामिल होंगे, जो पिछले तीन वर्षों में कम से कम एक बार शीर्ष तीन में शामिल हुए हैं और वर्तमान में अपनी संबंधित जनसंख्‍या श्रेणी में शीर्ष 20 प्रतिशत में बने हुए हैं। इस अवसर पर देश के सभी शहरों के लिये कचरा मुक्त शहरों की स्टार रेटिंग, खुले में शौच से मुक्ति ओडीएफ़ और उपयोगित जल के प्रबंधन के लिये वॉटर प्लस प्रमाणीकरण भी जारी किए जाएंगे। इनके अलावा 44 नगरीय निकायों ने वॉटर प्लस के लिये भी अपने दावे प्रस्तुत किए हैं। आठ शहरों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त होने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी विजेता शहरों को बधाई दी है। उन्होने अपने संदेश में इस उपलब्धि के लिए सभी सफाई मित्रों, नागरिकों, जन-प्रतिनिधियों, कर्मचारियों, अधिकारियों और सभी सहयोगियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि “प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने स्वच्छता का जो संकल्प लिया है, उसमें मध्यप्रदेश कदम से कदम मिलाकर चल रहा है।’’ समारोह में महापौर इंदौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, महापौर उज्जैन श्री मुकेश टटवाल, महापौर भोपाल श्रीमती मालती राय, महापौर ग्वालियर डॉ. शोभा सिकरवार, महापौर जबलपुर श्री जगत बहादुर सिंह और महापौर देवास श्रीमती गीता दुर्गेश अग्रवाल अपनी टीम के साथ भाग ले रहे हैं। इनके साथ नगर पालिका अध्यक्ष बुदनी श्रीमती सुनीता अर्जुन मालवीय एवं अध्यक्ष शाहगंज सुश्री सोनम भार्गव भी अपने टीम सदस्यों के साथ पुरुस्कार समारोह में उपस्थित रहेंगी। आयुक्त नगरीय प्रशासन श्री संकेत भोंडवे, मिशन संचालक डॉ. परीक्षित झाड़े, नगर निगम आयुक्त और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों के साथ इस समारोह में शामिल हो रहे हैं। इस आयोजन में अधिकारी, कर्मचारी, जन-प्रतिनिधि, स्वच्छता सहयोगियों और सफाई मित्रों सहित 100 से अधिक सदस्यों का प्रतिनिधि मण्डल मध्यप्रदेश का नेतृत्त्व करेगा।  

किसी भी कार्य की जीएडी निरस्त नहीं की गयी, आईआरसी कोड और मोर्थ के मापदंडों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाता

भोपाल ब्रिज परियोजनाओं का तकनीकी मापदंडों के अनुसार निर्माण सुनिश्चित करने की दिशा में लोक निर्माण विभाग द्वारा सतत कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने एक व्यापक दक्षता संवर्द्धन कार्यक्रम निर्धारित किया है, जिसके अंतर्गत राज्य के सभी अभियंताओं को इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) कोड्स और मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवेज़ (मोर्थ) के दिशा-निर्देशों का अध्ययन कर उनके आधार पर कार्यों का क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए गए हैं। ब्रिज परियोजनाओं के गुणवत्तापूर्ण निर्माण, मापदंड अनुसार डिजाइन, सतत सुपरविजन प्रणाली अपनाने एवं निर्माण के दौरान सतत निरीक्षण के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। रेलवे अथवा नगर निगम जैसे विभिन्न स्टेकहोल्डर्स से समन्वय स्थापित करने की प्रक्रिया भी स्पष्ट की गई है। मुख्य अभियंता सेतु परिक्षेत्र पीसी वर्मा द्वारा स्पष्ट किया गया है कि पुराने अलाइनमेंट्स को रद्द नहीं किया गया है अपितु गलती से जारी हुआ एक त्रुटिपूर्ण आदेश उसी दिन निरस्त कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि पुलों और फ्लायओवर की जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग (जीएडी) रेलवे और लोक निर्माण विभाग द्वारा संयुक्त रूप से जारी की जाती हैं। मुख्य अभियंता को इन्हें निरस्त करने का कोई अधिकार नहीं है और ऐसी कोई आवश्यकता किसी परियोजना में परिलक्षित नहीं हुई है। निर्माण कार्यों के दौरान अक्सर स्थान विशेष की परिस्थिति अनुसार अलाइनमेंट और डिजाइन में परिवर्तन की आवश्यकता होती है, जो कि सतत प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे परिवर्तनों के दौरान संबंधित आईआरसी कोड और मोर्थ के मापदंडों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाता है। राज्य शासन ने निर्देश जारी किए हैं कि निर्माण के दौरान होने वाले सभी परिवर्तन अन्य स्टेकहोल्डर्स जैसे नगर निगम और रेलवे के समन्वय से ही किए जाएं। परियोजनाओं के रुकने जैसी कोई स्थिति नहीं है। ब्रिज परियोजनाओं में आने वाली जटिल बाधाओं के शीघ्र निराकरण के लिये प्रमुख अभियंता की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है, जिसमें आवश्यकता अनुसार शासकीय या निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल किया जा सकता है। अब समस्याओं का तकनीकी स्तर पर शीघ्र समाधान हो सकेगा और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। राज्य शासन ने यह भी निर्णय लिया है कि प्रदेश के सभी अभियंताओं का दक्षता संवर्द्धन किया जाए। मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) के तकनीकी सलाहकार को इंडियन अकादमी फॉर हाईवे इंजीनियरिंग के साथ मिलकर पुलों के गुणवत्तापूर्ण निर्माण हेतु प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग बड़ी परियोजनाओं के लिए अनुबंध के अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है, जिससे कार्यों की गुणवत्ता और डिजाइन में निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। बड़ी परियोजनाओं को इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड पर करने की कार्ययोजना पर विचार किया जा रहा है। साथ ही राज्य शासन विभागीय क्रियान्वयन में अधिकतम सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग पर भी विचार कर रहा है, जिसमें बड़ी परियोजनाओं की कैमरा युक्त निगरानी भी शामिल है। इस संबंध में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सेतु परिक्षेत्र द्वारा किसी भी कार्य की जीएडी निरस्त नहीं की गई है और ना ही किसी कार्य को रोका गया है।  

40 करोड़ के एक्वा पार्क से भोपाल में नया जल रोमांच, वॉटर टनल और 3D जोन का होगा उद्घाटन

भोपाल  राजधानी भोपाल का आकर्षण जल्द ही और बढ़ जाएगा। यहां एक्वा पार्क के रूप में अत्याधुनिक मछलीघर बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को इसका भूमि-पूजन करेंगे। भोपाल के विख्यात मछलीघर को यह नया और भव्य रूप दिया जाएगा। अब यहां मछलियों की नई दुनिया बसेगी। अधिकारियों के अनुसार मछली घर से नए एक्वा पार्क तक का सफर, इतिहास से भविष्य को जोड़ने की कवायद भी होगी। यह अत्याधुनिक एक्वा पार्क करीब 40 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित किया जा रहा है। भोपाल आने वाले पर्यटकों के लिए मछलीघर की खास पहचान रही है। यहां रंग-बिरंगी मछलियों को देखने पूरे प्रदेश से लोग आते थे। नीली रोशनी में तैरती सुनहरी मछलियों को देख टूरिस्ट मंत्र मुग्ध रह जाते थे। समय के साथ मछलीघर अतीत को साथ में समेटे हुए फिर से भोपाल में एक नई पहचान के साथ लौट रहा है। यहां अब देश का सबसे सुंदर और आधुनिक “एक्वा पार्क” बनाया जा रहा है। 

ग्वालियर :जिला अस्पताल में इस महीने से IPHL की सुविधा, जिससे मरीजों को बेहतर और सुलभ जांच सेवाएं मिलेंगी

 ग्वालियर  एमपी में ग्वालियर के जिला अस्पताल में सर्वसुविधा युक्त इंट्रीगेटेड हेल्थ लैब (आईपीएचएल) की सुविधा इस महीने से मिलने लगेगी। इस सुविधा से मरीजों की महंगी जांचें भी आसानी से यहां पर फ्री में हो जाएंगी। इसके लिए जल्द ही शिफ्टिंग का काम शुरू किया जाएगा। जिला अस्पताल में अभी लगभग 162 के प्रकार की जांच होती हैं। इसमें महंगी जांचें शामिल नहीं हैं, लेकिन आईपीएचएल लैब के शुरू होने से कल्चर की सभी जांचें होने लगेंगी। इसमें लगभग 34 जांचें और जुड़ जाएंगी। मरीजों को दूसरे अस्पतालों में जाने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। वर्तमान में बड़ी जांच के लिए मरीजों को निजी लैब के अलावा जेएएच भेजा जाता है। ब्लड की सभी तरह की जांचें शुरू हो जाएंगी जिला अस्पताल में थाइराइड, विटामिन डी, विटामिन बी- 12, आदि की जांचें बाजार में एक हजार रुपए तक की होती हैं, लेकिन यहां पर यह सभी जांचें फ्री में हो रही हैं। वहीं यह लैब शुरू होने से अब कल्चर की जांच में ब्लड की सभी तरह की जांचें भी शुरू हो जाएंगी। बिल्डिंग शिफ्टिंग का काम होगा शुरू जिला अस्पताल में इस लैब के लिए तैयार हॉल में बारिश के पानी के कारण कुछ परेशानी आने से शिफ्टिंग का काम कुछ लेट हो गया है। संभवत: इसी महीने इस लैब का सामान शिफ्ट होकर जांचें शुरू कर दी जाएंगी। आईपीएचएल लैब में मरीजों को 196 तरह की जांचें होंगी। इसके लिए तैयारी शुरू हो गई है। जल्द ही मरीजों को इस लैब की सुविधाएं मिलना शुरू हो जाएंगी।– डॉ. राजेश शर्मा, सिविल अस्पताल

इंदौर का क्लीननेस रिकॉर्ड कायम! इंदौर फिर सबसे ऊपर? दिल्ली में आज 17 जुलाई को परिणाम का खुलासा

इंदौर स्वच्छ भारत सर्वेक्षण की रैंकिंग आज गुरुवार को जारी होगी। दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू की मौजूदगी में स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों को पुरस्कार मिलेंगे। जनसंख्या के हिसाब से शहरोंं को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है। इस बार इंदौर सहित अन्य 12 शहरों की स्वच्छता का पैमाना अलग रहेगा। उनका आंकलन भी अलग रहा। लगातार तीन वर्षों तक रैंकिंग में टाॅप रहे शहरों की केंद्रीय शहरी मंत्रालय ने अलग केटेगरी बनाई है। इन शहरों को प्रीमियर लीग में रखा गया है। सात साल से लगातार देश में स्वच्छता का ताज बरकार रखने वाले इंदौर का दावा इस बार मजबूत है, लेकिन सूरत की तरफ से कड़ी टक्कर इंदौर को मिल रही है। सूरत ने पिछले साल भी इंदौर के साथ स्वच्छता का पुरस्कार साझा किया था। सफाई में इस बार स्वच्छता की अलग-अलग श्रेणियां रखी गई है। लीग में जो शहर पहले स्थान पर होगा, उसे स्वच्छता लीग पुरस्कार दिया जाएगा,जबकि लीग से बाहर के शहरों के पुरस्कारों की घोषणा अलग से रैंकिंग के आधार पर होगी। इस रैंकिंग में गुजरात का अहमदाबाद शहर पहले स्थान पर हो सकता है। दूसरे नंबर पर भोपाल शहर है। विजेता शहरों को राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कृत किया जाएगा। दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने के लिए इंदौर से अफसर रवाना हो गए है।   चार हजार से अधिक शहरों की रैंकिंग स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग में 4 हजार 700 शहर शामिल है। इन शहरों को 12 हजार 500 में से अंक दिए जाएंगे। कचरा प्रबंधन, निपटान, पब्लिक फीडबैक, कचरा संग्रहण सहित अन्य केटेगरी में अलग-अलग नंबर दिए जाएंगे। इंदौर का दावा इसलिए मजबूत इंदौर में सड़कों की सफाई, कचरा कलेक्शन और कचरा निपटना का सिस्टम सबसे मजबूत है। इंदौर के लोग भी सफाई को लेकर सजग है। कचरा सड़कों पर नहीं फेंकते है। दूसरे शहरों में यह सिस्टम नियमित तौर पर काम नहीं कर पा रहा है। सूरत ने पिछले साल डोर डू डोर कचरा संग्रहण पर काफी काम किया था और उसमे समान नंबर आने के कारण रैंकिंग में इंदौर के समान नंबर पाए थे। स्वच्छता सर्वेक्षण-2024 में भोपाल देश के सबसे साफ शहरों में टॉप-3 पर स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में स्वच्छ शहरों के मामले राजधानी भोपाल ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया है. भोपाल की रैंकिंग में सुधार करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया. देश के दूसरे क्लीनेस्ट सिटी में शुमार हुए भोपाल में अब जश्न की तैयारी है. भोपाल नगर निगम ने जनप्रतिनिधि स्वच्छता मित्रों और जनता के साथ जश्न मनाएंगी. स्वच्छता सर्वेक्षण-2024 में भोपाल देश के सबसे साफ शहरों में टॉप-3 पर है। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू पुरस्कार देगी। निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने बताया, भोपाल ने 3 पायदान छलांग लगाई है और देश में दूसरे नंबर पर आया है स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में राजधानी भोपाल ने पिछले साल की तुलना में तीन पायदान की छलांग लगाते हुए भारत के दूसरे क्लीनेस्ट सिटी का तमगा हासिल किया है.अहमदाबाद अव्वल आया है, जबकि लखनऊ ने 44वें पायदान से बड़ी छलांग लगाकर तीसरे स्थान पर पहुंच गई है. 17 जुलाई को राष्ट्रपति भवन में होगा स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 अवॉर्ड वितरण कार्यक्रम गौरतलब है 17 जुलाई को राष्ट्रपति भवन में होने वाले स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 अवॉर्ड वितरण कार्यक्रम में होगा. अवॉर्ड समारोह में शामिल होने के लिए भोपाल मेयर और कमिश्नर आज नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे, जहां आधिकारिक रूप से स्वच्छ शहर के विजेताओं की घोषणा भी होगी, इसके बाद अवॉर्ड दिए जाएंगे. अवॉर्ड लेने नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे भोपाल नगर निगम मेयर और कमिश्नर रिपोर्ट के मुताबिक देश के स्वच्छ सिटी में दूसरा स्थान का अवॉर्ड पाने के लिए भोपाल नगर निगम मेयर और निगम कमिश्नर आज नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे और 17 जुलाई यानी कल राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के हाथों अवॉर्ड ग्रहण करेंगे.निगम शुक्रवार को भोपाल में जनप्रतिनिधि स्वच्छता मित्रों और जनता के साथ जश्न मनाने की तैयारी कर रही है. राष्ट्रपति 17 जुलाई को सुपर लीग श्रेणी में इंदौर को अवॉर्ड देंगी. यह अवॉर्ड इंदौर को 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में मिलेगा. 3 से 10 लाख तक की जनसंख्या में उज्जैन और 20 हजार से अधिक जनसंख्या वाले में सीहोर जिले की बुदनी को यह अवॉर्ड मिलेगा. इधर, पुरस्कार लेने के लिए मेयर मालती राय और निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण बुधवार को दिल्ली के रवाना होंगे। 17 जुलाई को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में एक आयोजन होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू करेंगी। सबसे स्वच्छ राजधानी का तमगा मिलने की उम्मीद स्वच्छ सर्वेक्षण में इस बार भी मध्यप्रदेश के शहर बाजी मारेंगे। राजधानी भोपाल देश के सबसे स्वच्छ शहरों में दूसरे नंबर पर रहेगा। साथ ही सबसे स्वच्छ राजधानी का तमगा भी फिर मिलने की उम्मीद है। पिछली बार पांचवें नंबर पर था भोपाल पिछले सर्वे में भोपाल 5वें नंबर पर था। कचरे की प्रोसेसिंग में सुधार व डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की व्यवस्था को और पुख्ता कर भोपाल ने दावा मजबूत किया है। वहीं, फरवरी में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) की वजह से भी भोपाल को फायदा मिलेगा। जीआईएस के चलते राजधानी में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा के काम शहर में हुए हैं। इसमें स्वच्छता से जुड़े काम भी शामिल थे। इसी दौरान स्वच्छता सर्वेक्षण टीमें भी भोपाल पहुंची थी। इसलिए दावा मजबूत है। स्वच्छ सर्वेक्षण में भोपाल का अब तक का सफर स्वच्छ सर्वेक्षण में भोपाल ने 2017 और 2018 में लगातार दो साल देश में दूसरी रैंक हासिल की थी। 2019 में भोपाल खिसककर 19वें नंबर पर आ गया था। उस समय अफसरों के लगातार तबादले के कारण तैयारियों की दिशा ही तय नहीं हो पाई थी, लेकिन 2020 में कम बैक करते हुए 12 पायदान ऊपर खिसका और 7वीं रैंक हासिल की। 2021 के सर्वेक्षण में भी भोपाल ने 7वां स्थान हासिल किया था। 2022 के सर्वेक्षण में भोपाल की रैंक सुधरी और यह छठवें स्थान पर आ गया। वहीं, भोपाल को 5 स्टार मिला। 2023 के सर्वेक्षण में पांचवीं रैंकिंग रही थी। इस बार यह टॉप-3 में हो सकती है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में इस बार प्रदेश के कुल 8 शहर सम्मानित किया गया हैं … Read more

इंदौर-खंडवा रेल परियोजना को लेकर एक बड़ी खुशखबरी, वन विभाग की NOC, दक्षिण भारत से सीधी कनेक्टिविटी

इंदौर इंदौर-खंडवा रेल परियोजना को लेकर एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। इस महत्वपूर्ण रेल लाइन के लिए वन विभाग ने अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी कर दिया है, जिससे परियोजना की सबसे बड़ी बाधा दूर हो गई है। अब इस रेल मार्ग के निर्माण को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा। यह रेल लाइन उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ने वाला सबसे छोटा और सीधा मार्ग होगी, जो न केवल इंदौर के व्यापारिक और औद्योगिक विकास को नई गति देगी, बल्कि यात्रियों के लिए समय और दूरी की बचत भी करेगी। यह परियोजना मालवांचल के लिए एक नया युग शुरू करने वाली है, जो क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को गति देगी।  यह रेल लाइन उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ने वाला सबसे छोटा और सीधा रेल मार्ग साबित होगी, जो न केवल इंदौर के व्यापारिक और औद्योगिक भविष्य को नई रफ्तार देगा, बल्कि यात्रियों को भी समय और दूरी दोनों में राहत देगी। इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने इस प्रोजेक्ट में आने वाली अड़चनों को दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। उन्होंने रेलवे अधिकारियों और वन विभाग के बीच संयुक्त बैठक करवाई थी, जिससे आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं सरल हुईं। इसके बाद हाल ही में सांसद लालवानी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर इस परियोजना की प्राथमिकता को रेखांकित किया और वन विभाग से अनुमति दिलवाने का अनुरोध किया था। इंदौर-खंडवा रेल लाइन के पूरा होने के बाद इंदौर का संपर्क सीधे खंडवा-भुसावल-नासिक-मुंबई की ओर तथा तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों से तेज़, किफायती और सुविधाजनक सफर हो जाएगा। इस रेल कॉरिडोर से मालवांचल के व्यापारियों, किसानों और यात्रियों सभी को लाभ मिलेगा। सांसद ने बताया कि यह रेल मार्ग मालवांचल और दक्षिण भारत के बीच सीधी व बेहतर कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद अहम है। बढ़कर 80 किमी हो जाएगी इंदौर-खंडवा की दूरी इंदौर से खंडवा की दूरी मीटरगेज में पहले 48 किमी थी, लेकिन अब बढ़कर 80 किमी हो जाएगी। ब्रॉडगेज का ट्रैक बनाने के लिए पातालपानी के पहले घूमकर ट्रेन बलवाड़ा पहुंचेगी, जिससे 32 किमी की दूरी बढ़ गई है। हालांकि इस ट्रैक के बनने से इंदौर की दक्षिण भारत के शहरों बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई व उत्तर भारत के जयपुर, अजमेर शहरों तक सीधी पहुंच होगी। अभी इन शहरों तक जाने के लिए घूमकर जाना पड़ता है। इंदौर खंडवा अकोला ब्रॉडगेज हो जाने से उत्तर और दक्षिण को जोड़ने वाला सबसे छोटा रूट होगा। इससे आम लोगों के समय की बचत होगी। रेलवे का मुनाफा बढ़ेगा। एक दशक से इंदौर से खंडवा रेल कनेक्टिविटी खत्म हो चुकी एक दशक से इंदौर से खंडवा के बीच रेल कनेक्टिविटी खत्म हो गई है। पूर्व में यहां पर मीटरगेज लाइन थी, जो महू से पातालपानी, कालाकुंड, बलवाड़ा, चौरल होकर खंडवा तक जाती थी। अब ब्रॉडगेज लाइन महू से पातालपानी के पहले घूमकर बलवाड़ा तक जा रही है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण 32 किमी का घुमाव है, जिसमें 454 हेक्टेयर जमीन वन विभाग की आ रही है। ट्रैक में महू और बड़वाह तहसील की अधिकांश भूमि जमीन आ रही है। उस पर ट्रैक डालने के लिए रेलवे लंबे समय से अनुमति मांग रहा था। दक्षिण भारत से सीधी कनेक्टिविटी का सपना होगा साकार इंदौर-खंडवा रेल लाइन के पूरा होने के बाद इंदौर का सीधा संपर्क खंडवा, भुसावल, नासिक और मुंबई के साथ-साथ तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों से हो जाएगा। यह रेल कॉरिडोर मालवांचल के व्यापारियों, किसानों और यात्रियों के लिए तेज, किफायती और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प प्रदान करेगा। सांसद लालवानी ने बताया कि यह रेल मार्ग मालवांचल और दक्षिण भारत के बीच बेहतर कनेक्टिविटी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। एक दशक से बंद थी रेल कनेक्टिविटी   पिछले एक दशक से इंदौर और खंडवा के बीच रेल कनेक्टिविटी बंद थी। पहले यहां मीटरगेज लाइन थी, जो महू से पातालपानी, कालाकुंड, बलवाड़ा और चौरल होते हुए खंडवा तक जाती थी। अब ब्रॉडगेज लाइन के लिए महू से पातालपानी के पहले घूमकर बलवाड़ा तक ट्रैक बनाया जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण 32 किमी का घुमाव है, जिसमें 454 हेक्टेयर वन विभाग की जमीन शामिल है। रेलवे लंबे समय से इस जमीन पर ट्रैक बिछाने की अनुमति मांग रहा था, जो अब मिल गई है।