samacharsecretary.com

सौर ऊर्जा क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने वाले वेंडरों को मिलेगा सम्मान

सौर संयंत्र स्थापना में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वेंडर होंगे सम्मानित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अद्वितीय कार्य किया जा रहा है। सरकार "पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली" योजना अंतर्गत घरों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का कार्य प्रतिबद्धतापूर्वक कर रही है। प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम अमनबीर सिंह बैंस ने बताया है कि निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सौर संयंत्र स्थापना में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वेंडरों को सम्मानित किया जाएगा। एमडी बैंस ने कहा कि जो वेंडर अपना कार्य ठीक प्रकार से नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी। एमडी बैंस ने विगत दिनों भोपाल मुख्यालय में प्रगति की समीक्षा कर सभी वेंडर्स कार्य में आने वाली दिक्कतों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बताया कि कार्य क्षेत्र में आने वाली सभी समस्याओं का समय रहते समाधान किया जाएगा जिससे कि सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को समय सीमा में हासिल किया जा सके। लगभग सवा लाख संयंत्र किये स्थापित एमडी बैंस ने बताया कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में एक लाख 21 हजार 392 घरों पर सौर संयंत्र स्थापित कर दिए गए हैं। सोलर सिस्टम स्थापित करने के लिए 847.13 करोड रुपए का अनुदान केंद्र सरकार द्वारा दिया गया है। उन्होंने बताया कि अभी तक एक लाख 92 हजार 647 आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं, आवेदन पत्रों पर त्वरित कार्यवाही कर संयंत्र स्थापित करने की कार्रवाई द्रुत गति से जारी है।  

UP-MP के बीच यात्रा आसान: भोपाल से कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर से केवल 7 घंटे में पहुंचेगे

भोपाल भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले फेस में भोपाल से विदिशा के बीच इस साल के आखिर तक लॉजिस्टिक और इंडस्ट्रियल अधोसंरचना का काम नजर आने लगेगा। नेशनल हाईवे के निर्माणाधीन इस 42 किमी. के हिस्से के पास एमपीआइडीसी ने इंटीग्रेटेड मैन्यूफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक क्लस्टर के तौर पर विकसित करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स होंगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण रोड पर काम कर रहा है, जबकि एमपीआइडीसी लॉजिस्टिक हब डेवलपमेंट से जुड़ी गतिविधियां तय करेगा। लॉजिस्टिक हब के तौर पर इसके विकसित होने से भोपाल व विदिशा के बीच छोटे उद्योगों और वेयरहाउसिंग का बड़ा जाल बिछने की उम्मीद है, जिससे प्रदेश में रोजगार बढ़ेगा। राजधानी के विकास का रास्ता भी बदलेगा टाउन प्लानर सुयश कुलश्रेष्ठ के अनुसार अभी शहर का पूरा विकास दक्षिण दिशा यानी नर्मदापुरम रोड व इंदौर रोड की ओर है। इस कॉरिडोर के बनने से ये रायसेन रोड, विदिशा रोड की ओर होगा। विदिशा रोड खुद इकोनॉमिक कॉरिडोर में बदलेगा तो यहां नए प्रोजेक्ट्स नए विकास की स्थितियां बनेंगी। नर्मदापुरम रोड से इसे जोडऩे पहले से ही बायपास है। इंदौर रोड की ओर भी प्रस्तावित पश्चिमी बायपास से जुड़ेगा। मंत्री नितिन गडकरी ने मध्य प्रदेश को 6800 करोड़ का तोहफा दिया है। नितिन गडकरी ने 6800 करोड़ के राजमार्गों को तोहफा मध्य प्रदेश को दिया है। इसमें 18 नेशनल हाईवे का निर्माण किया जाएगा। जिसकी कुल लंबाई 550 किमी की होगी। सोमवार को नितिन गडकरी ने इस परियोजना का उद्घाटन किया। इस परियोजना के साथ भोपाल से कानपुर के बीच भोपाल कानपुर इकोनॉमी कोरिडोर का ऐलान किया गया। भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर भोपाल-विदिशा-सागर-कानपुर इकोनॉमी कोरिडोर का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए भोपाल से विदेशा होकर सागर तक और सागर से महोबा जिले तक कवरई होकर कानपुर तक 11300 करोड़ की लागत से इस इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण होगा। इस हाईवे को निर्माण से भोपाल के कानपुर की दूरी 15 घंटे के घटकर 7 घंटे रह जाएगी। इस कॉरिडोर के बनने से भोपाल से कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी की कनेक्लिविटी अच्छी हो जाएगी। वहीं बुंदेलखंड से भोपाल और कानपुर आने-जाने में भी समय बचेगा। सिर्फ 7 घंटे में भोपाल से कानपुर इसके अलावा केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मध्यप्रदेश के ओरछा में 6800 करोड़ रुपये की लागत से 550 किलोमीटर की कुल लंबाई वाली 18 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इस मौके पर गडकरी ने कहा कि स्थानीय लोगों की बेतवा में पुल बनाने की दो दशक पुरानी मांग पूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि 665 मीटर लंबे इस पुल को 25 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। उन्होंने कहा कि 2-लेन के पेव्ड शोल्डर ब्रिज और फुटपाथ के निर्माण से ओरछा, झांसी, टीकमगढ़ की कनेक्टिविटी में सुधार होगा। मंत्री ने कहा कि पवई, ओरछा, हरपालपुर, कैथी पड़रिया कला, पटना तमौली, जस्सो, नागौद और सागर लिंक रोड बाईपास के निर्माण से शहर में यातायात का दबाव कम होगा। सागर ग्रीनफील्ड लिंक रोड से भोपाल से कानपुर की दूरी 21 किमी कम हो जाएगी, मोहरी से सताई घाट और चौका से एमपी/यूपी तक की दूरी भी कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सीमा तक 4 लेन चौड़ा करने से यात्रा के समय में भारी कमी आएगी। उन्होंने कहा कि सागर सिटी, छतरपुर सिटी और गढ़ाकोटा में फ्लाईओवर बनने से ट्रैफिक जाम की समस्या का समाधान हो जाएगा। गडकरी ने कहा कि मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थलों ओरछा, खजुराहो, पन्ना, चित्रकूट, टीकमगढ़, सांची तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भोपाल-कानपुर आर्थिक कॉरिडोर के निर्माण से सीमेंट और खनिजों का परिवहन आसान होगा और लॉजिस्टिक लागत कम होगी। मंत्री ने कहा कि इस कॉरिडोर के बनने से भोपाल से कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी की कनेक्टिविटी अच्छी होगी, टीकमगढ़ से ओरछा तक पक्की शोल्डर वाली 2 लेन सड़क बनने से यातायात सुरक्षित होगा। इस कार्यक्रम में गडकरी ने 2000 करोड़ रुपये की लागत से बमीठा से सतना तक 105 किलोमीटर लंबी 4 लेन की ग्रीनफील्ड सड़क बनाने की भी घोषणा की। इस सड़क के बनने से टीकमगढ़, पन्ना, छतरपुर, खजुराहो, बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महाकाल मंदिर में तैयार हो रहा हीट प्रूफ पाथ-वे

 उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में गर्मी को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हीट प्रूफ पाथवे का निर्माण कराया गया है। इस पर चलने से श्रद्धालुओं के पैर नहीं जलेंगे।प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया मंदिर समिति अध्यक्ष कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के निर्देश पर ग्रीष्म ऋतु में भक्तों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इसी क्रम में मंदिर परिसर एवं श्री महाकाल महालोक में दर्शन पथ पर (लगभग 13 हजार स्क्वेयर फीट में ) हीट प्रूफ पाथ-वे (सोलर रिफ्लेक्टिव पेंट) का निर्माण कार्य किया जा रहा है। यह हीट प्रूफ पाथ-वे नीलकंठ से पंचमुखी हनुमान, मानसरोवर से होते हुए शंख द्वार एवं बड़ा गणेश मंदिर तक बनाया जा रहा है। इस हीट प्रूफ पाथ-वे के निर्माण से तपती धूप में भी श्रद्धालुओं के पैर नहीं जलेंगे तथा वे बिना किसी असुविधा के सहजता से दर्शन पथ पर आवागमन कर सकेंगे। दर्शन हेतु प्रवेश एवं निर्गम मार्ग पर यह व्यवस्था विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होगी, जिससे श्रद्धालु गर्मी के बावजूद सुरक्षित एवं आरामदायक तरीके से भगवान श्री महाकालेश्वर जी के दर्शन कर सकेंगे। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर समिति ने लिया फैसला बाबा महाकाल के दर्शन करने रोजाना 1 लाख से ज्यादा श्रदालु आते हैं. इन्हीं के साथ वीवीआईपी, राजनेता, अभिनेता, व क्रिकेटर भी बाबा महाकाल के दरबार में माथा टेकने पहुंचते हैं. उज्जैन व आसपास क्षेत्र में गर्मी भी अपना तेवर दिखा रही है. जिससे महाकाल मंदिर में आने वाले श्रदालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ऐसा में श्रद्धालुओं की सुविधान का ध्यान में रखते हुए महाकाल प्रबंधन समिति ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।  महाकाल मंदिर में बनाया जा रहा हीट प्रूफ पाथ-वे जिसमें महाकाल लोक में शेड लगाने व हीट प्रूफ पाथ-वे बनाया जा रहा है. प्रंबधन समिति ने ठंडे पानी, मेटिंग व कूलर की व्यवस्था तो पहल ही कर रखी है. साथ ही गर्मी से बचने के लिए स्प्रिंगर भी लगाए गए हैं. सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया ने बताया कि "श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर व अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह, प्रशासक व अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक द्वारा दिए गए निर्देश पर विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।  कहां से कहां तक बन रहा पाथ वे इसी क्रम में मंदिर परिसर व महाकाल महालोक में दर्शन पथ पर लगभग 13 हजार स्क्वायर फीट में हीट प्रूफ पाथ-वे सोलर रिफ्लेक्टिव पेंट का निर्माण कार्य किया जा रहा है. यह हीट प्रूफ पाथ-वे नीलकंठ से पंचमुखी हनुमान, मानसरोवर से होते हुए शंख द्वार एवं बड़ा गणेश मंदिर तक किया जा रहा है. इस हीट प्रूफ पाथ-वे के निर्माण से तपती धूप में भी श्रद्धालुओं के पैर नहीं जलेंगे. वे बिना किसी असुविधा के सहजता से दर्शन पथ पर आवागमन कर सकेंगे।  जलकुंभी निकालने व उसके निपटान के लिए उठाया कदम  श्री महाकालेश्वर मंदिर के पीछे स्थित पौराणिक और धार्मिक महत्व के रुद्र सागर को स्वच्छ रखने के लिए उज्जैन नगर निगम ने एक बार फिर कवायद शुरू की है। निगम के स्वास्थ्य विभाग द्वारा रुद्र सागर (बड़ा एवं छोटा) से जलकुंभी निकालने और उसके निपटान के लिए वार्षिक सफाई का टेंडर जारी किया गया है। अनुमानित लागत 14 लाख 55 हजार रुपये तय की है। कहा है कि यह अनुबंध एक वर्ष के लिए होगा। रुद्र सागर उज्जैन के उन पौराणिक सप्त सागरों में शामिल है, जिनका शास्त्रों में विशेष उल्लेख है। इसके केंद्र में सम्राट विक्रमादित्य की अपने नौ रत्नों के साथ विशाल प्रतिमा स्थापित है, जो उज्जैन के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है। सागर की दीवारों पर सम्राट विक्रमादित्य काल के प्रतीक चिन्ह और 32 पुतलियां इसकी सुंदरता में चार चांद लगाती हैं। प्रशासन का यह नैतिक और प्रशासनिक दायित्व है कि महाकाल मंदिर के इतने करीब स्थित इस जल निकाय को सदैव स्वच्छ रखा जाए। विशेष रूप से 2022 में महाकाल महालोक के निर्माण के बाद यहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। नगर निगम द्वारा अब वार्षिक सफाई का टेंडर जारी करना इस बात का संकेत है कि प्रशासन इस समस्या का स्थाई समाधान ढूंढने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों का मानना है कि केवल टेंडर जारी करने से काम नहीं चलेगा; सफाई की निरंतरता और गुणवत्ता की निगरानी करना भी उतना ही आवश्यक है ताकि करोड़ों की लागत से संवारा गया यह पौराणिक सागर अपनी पहचान न खोए। करोड़ों का बजट, फिर भी उपेक्षा का शिकारहैरानी की बात यह है कि बीते डेढ़ दशकों में रुद्र सागर के सुंदरीकरण और सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। 2022 से पहले यह क्षेत्र घोर उपेक्षा का शिकार था। महालोक के निर्माण के बाद स्थिति में सुधार की उम्मीद थी, लेकिन अनुभव यह रहा है कि रुद्र सागर साल में केवल दो से चार महीने ही साफ रह पाता है। शेष समय यह जलकुंभी की मोटी चादर से ढंका रहता है, जो न केवल जलीय पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि आने वाले श्रद्धालुओं के अनुभव को भी खराब करती है।  

लग्जरी वृद्धाश्रम में खाली कमरों की स्थिति, 80,000 रुपए तक का किराया रोक रहा बुजुर्गों को

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कुछ महीने पहले एक पेड वृद्धाश्रम की शुरुआत हुई थी। यह वृद्धाश्रम आधुनिक सुविधाओं से लैस था। उद्घाटन के इतने दिनों बाद भी इस वृद्धाश्रम में रहने वाला कोई नहीं है। सिर्फ दो बुजुर्गों को छोड़कर यह आधुनिक वृद्धाश्रम पूरी तरह से खाली है। ऐसे में इसकी व्यावहारिकता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। 56 बुजुर्ग नागरिकों को रहने की है व्यवस्था इस हाईटेक वृद्धाश्रम में 34 कमरे हैं। इन 34 कमरों में 56 बुजुर्ग नागरिक रह सकते हैं। कमरों के विकल्पों में सिंगल कमरों से लेकर सुइट तक शामिल हैं, जिन्हें बुजुर्गों को अलग-अलग स्तर पर आराम और प्राइवेसी देने के लिए डिजाइन किया गया है। पहले आओ, पहले पाओ की सुविधा वहीं, इस वृद्धाश्रम में बुकिंग पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होती है। उद्घाटन के बाद से, दो कमरों को छोड़कर बाकी सभी कमरे खाली पड़े हैं। कमरे पूरी तरह से तैयार हैं लेकिन इन्हें लेने वाला कोई नहीं है। जनवरी में हुआ था उद्घाटन दरअसल, इसका उद्घाटन इसी साल जनवरी महीने में सीएम मोहन यादव ने किया था। इसके संचालन का जिम्मा एक एनजीओ के पास है। अपनी जरूरत के हिसाब से बुजुर्ग बुकिंग कर सकते हैं। खर्च अधिक होने की वजह से खाली पेड वृद्धाश्रम का कैंपस भोपाल के लिंक रोड पर नंबर 3 पर है। यह 5.25 एकड़ में फैला है। साथ ही इसमें काफी अत्याधुनिक सुविधाएं भी हैं। मगर रिस्पॉन्स कम होने की वजह यह है कि यह किसी बुजुर्ग को रखने का खर्च बहुत ज्यादा है। एक व्यक्ति के लिए हर महीने 45,000 रुपए से ज्यादा का खर्च आता है, जिसे कई लोग अपनी पहुंच से बाहर मानते हैं। 24 करोड़ रुपए की लागत से हुआ था निर्माण यहां रहने वाले लोगों की संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने अब इस बुजुर्गों के आश्रय को अपने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जरिए चलाने का प्रस्ताव रखा है। इसी विभाग ने 24 करोड़ रुपए की लागत से इस विशाल वृद्धाश्रम का निर्माण करवाया था। सरकार इसे न लाभ, न हानि के आधार पर चलाने की योजना बना रही है, जिससे प्रति व्यक्ति रहने का खर्च कम हो जाएगा और ज्यादा से ज्यादा बुजुर्ग नागरिक इसकी ओर आकर्षित होंगे। एक अधिकारी, सामाजिक न्याय विभाग अत्याधुनिक है वृद्धाश्रम इस आश्रय गृह में एसी कमरे, इंटरटेनमेंट और आराम की जगहें, टहलने के लिए पक्का रास्ता, फिजियोथेरेपी सेंटर, लॉन्ड्री, किचन, मेडिकल रूम और रोजमर्रा की जरूरत की सारी चीजें हैं। साथ ही बुजुर्गों की देखभाल करने वाला स्टाफ भी उपलब्ध है। मुनेश्वर कुमार

मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल की वन एवं वन्य जीव संरक्षण प्रयासों की सराहना

भोपाल  मंडला जिले स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व में मलेशियाई वन विभाग का 7 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तीन दिवसीय अध्ययन भ्रमण पर पहुँचा है। मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल ने कान्हा में संचालित संरक्षण प्रयासों की सराहना करते हुए अपने देश में भी ऐसे मॉडल अपनाने में रुचि व्यक्त की। एपीसीसीएफ श्री एल. कृष्णमूर्ति एवं फील्ड डायरेक्टर श्री रवीन्द्र मणि त्रिपाठी ने प्रतिनिधिमंडल को अनाथ शावकों के पुनर्वास, ग्राम पुनर्स्थापन तथा पर्यटन प्रबंधन गतिविधियों का फील्ड भ्रमण कराया। मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल के भ्रमण के पहले दिन खटिया ईको सेंटर में वन्यजीव प्रबंधन, संरक्षण रणनीतियों, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों पर विस्तृत चर्चा सत्र आयोजित किया गया। चर्चा सत्र में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. एच.एस. नेगी, एपीसीसीएफ श्री एल. कृष्णमूर्ति, फील्ड डायरेक्टर श्री रवीन्द्र मणि त्रिपाठी, डिप्टी डायरेक्टर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। विशेषज्ञों द्वारा कान्हा टाइगर रिजर्व की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों एवं सफल संरक्षण मॉडलों पर प्रस्तुतियाँ दी गईं।  

बाल अधिकारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता : डॉ. शर्मा

भोपाल  मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने शुक्रवार को पदभार ग्रहण किया। उन्होंने आयोग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ बैठक कर बाल अधिकारों के संरक्षण और बच्चों से जुड़े मामलों के त्वरित निराकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। डॉ. निवेदिता शर्मा ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा, सुरक्षा एवं उनके समग्र विकास के लिए आयोग संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगा। उन्होंने बाल संरक्षण से संबंधित शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किए जाने तथा बच्चों के हितों से जुड़े मामलों में समन्वय और सक्रियता के साथ कार्य किए जाने पर जोर दिया। बैठक में आयोग की कार्यप्रणाली, बाल संरक्षण से संबंधित योजनाओं एवं विभिन्न प्रकरणों की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने आयोग की गतिविधियों और कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की।  

नीमच में 12 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण के प्रयास से मुक्त

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में वन संरक्षण और अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध सख्त कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में नीमच जिले के पङदा सबरेंज अंतर्गत बीट मोकडी में वन विभाग ने विशेष अभियान चलाकर लगभग 12 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण के प्रयास से मुक्त कराया। मुख्य वन संरक्षक उज्जैन  आलोक पाठक एवं वनमंडलाधिकारी नीमच  एस.के. अटोदे के निर्देशन तथा उप वन मंडल अधिकारी मानसा  दशरथ अखंड के मार्गदर्शन में परिक्षेत्राधिकारी  शाश्वत द्विवेदी के नेतृत्व में 7 मई को यह कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान कक्ष क्रमांक 297 में लगभग 6 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण के प्रयास को विफल किया गया। ग्रामीणों द्वारा भूमि पर अवैध कब्जे का प्रयास किया जा रहा था। मौके पर जेसीबी मशीनों की सहायता से डबरा-डबरी कंटूर ट्रेंच (सीपीटी) का निर्माण कराया गया तथा वन एवं राजस्व भूमि के बीच स्पष्ट सीमा रेखा निर्धारित करने के लिए खुदाई की गई, ताकि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो सके। इसी प्रकार 5 मई 2026 को कक्ष क्रमांक 298 में 4 हेक्टेयर तथा 6 मई 2026 को 2 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण के प्रयास को विफल किया गया। लगातार तीन दिनों तक चली कार्रवाई में कुल 12 हेक्टेयर वन भूमि को सुरक्षित किया गया।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव गेहूँ उपार्जन की कर रहे सतत मॉनीटरिंग

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और सतत मॉनीटरिंग तथा उपार्जन केन्द्रों के औचक निरीक्षण के परिणामस्वरूप गेहूँ की उपार्जन प्रक्रिया सुगमता से जारी है। किसानों को समय पर उपार्जित गेहूँ का भुगतान हो रहा है। अभी तक किसानों को 10403.17 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। गेहूँ का उपार्जन 23 मई तक होगा। 9.38 लाख किसानों से 56.45 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 9 लाख 38 हजार किसानों से 56 लाख 45 हजार मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। उन्होंने बताया है कि तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है। गेहूँ का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन सोमवार से शनिवार तक किया जाता है। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईसी सर्वर की क्षमता एवं संख्या में वृद्धि कराई गई। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा उपार्जन की मॉनीटरिंग की जा रही है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाए आदि की व्यवस्थाएँ की गई हैं। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके, इस हेतु समस्त आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं। इसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि की व्यवस्था की गई है। उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध सुविधाओं के फोटोग्राफ्स भारत सरकार के PCSAP पोर्टल पर अपलोड करने की कार्यवाही की जा रही है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ की भर्ती जूट बारदाने के साथ साथ PP/HDP बेग एवं जूट के एक भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये भण्डारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई, जिससे उपार्जित गेहूँ का सुरक्षित भण्डारण किया जा सके। मैं ट्रॉली में गेहूं लेकर आया था और मात्र 10 मिनट में मेरी ट्रॉली खाली हो गई। यहाँ पानी, बैठने और अन्य सभी सुविधाओं की बहुत अच्छी व्यवस्था है। आराम से बैठ सकते हैं, किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती।”- रामचरण अन्ना, ग्राम रामकोट हमारी पंचायत में भी सायलो की व्यवस्था है। हम यहाँ ट्रॉली खाली कराने आए थे। यहाँ पानी, छाया और बैठने की बहुत अच्छी व्यवस्था है। बाहर और अंदर दोनों जगह किसान आराम से पानी पी सकते हैं। टेंट लगाए गए हैं और पेड़ों की छांव भी अच्छी है। अंदर बैठने और गार्डन जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं।

गुणवत्ता के साथ कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल  ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने शुक्रवार को उप नगर ग्वालियर बिरला नगर पुल से चंदन पुरा तक जनकल्याण समिति के सहयोग से सुपर सकर मशीन द्वारा चल रहे सीवर सफाई अभियान का निरीक्षण करते हुए सफाई कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बारिश से पहले इस काम को हर हाल में पूर्ण करना है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां नवीन सीवर लाइन बिछाने का काम किया जा रहा है वहां गुणवत्ता के साथ किसी प्रकार का कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री  तोमर के निरीक्षण के दौरान जिला प्रशासन,नगर निगम प्रशासन, विद्युत वितरण कंपनी सहित अन्य विभागों के अधिकारी एवं पार्षद गण उपस्थित रहे। मंत्री  तोमर ने कहा कि आज ग्वालियर की स्वच्छता को नई ऊर्जा प्रदान करते हुए सीवर समस्या के समाधान के लिए “सुपर सकर” मशीन द्वारा सफाई का महाअभियान चलाया जा रहा है। इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से सफाई व्यवस्था और अधिक तेज, प्रभावी व सुदृढ़ बनेगी। मंत्री  तोमर ने 15 ग्वालियर विधानसभा में आ रहे बदलाव का जिक्र करते हुए कहा, आज स्वास्थ्य, सड़क, खेलकूद, शिक्षा हर क्षेत्र में बदलाव हो रहा है।यही बदलाव है। जो हमने और आपने साथ मिलकर किया है। मंत्री  तोमर ने कहा कि हमने बदलाव लाने की ठान ली है और जल्दी ही ग्वालियर स्वच्छता के मामले में नंबर एक पर होगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि स्वच्छता, सुविधा और बेहतर जीवन स्तर बनाना हमारा संकल्प है।  

अंग्रेजी ओलंपियाड वर्ड पावर के बने राष्ट्रीय विजेता

भोपाल  भोपाल के सांदीपनि विद्यालय गोविंदपुरा के कक्षा 5वीं के छात्र मास्टर आराध्य पाराशर ने ‘वर्ड पावर चैम्पियनशिप’ में प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रदेश एवं जिले का गौरव बढ़ाया है। छात्र आराध्य की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. संजय गोयल तथा राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह ने उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया है। इस अवसर पर प्रदेश ओलंपियाड प्रभारी डॉ. आर. पी. त्रिपाठी, सांदीपनि विद्यालय गोविंदपुरा की प्राचार्या डॉ. पूनम अवस्थी, शिक्षिका ऋतु सक्सेना एवं आराध्य के अभिभावक उपस्थित रहे। विगत दिनों मुंबई में आयोजित ‘वर्ड पावर चैम्पियनशिप’ राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य स्तरीय विजेता विद्यार्थियों ने सहभागिता की। प्रतियोगिता का आयोजन प्रतिवर्ष तीन चरणों में जन शिक्षा केंद्र, जिला एवं राज्य स्तर पर किया जाता है। मध्यप्रदेश में इस प्रतियोगिता का संचालन राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा किया जाता है। राज्य स्तर पर चयनित विद्यार्थियों के बीच राष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन आयोजक संस्था ‘लीप फॉर वर्ड’ द्वारा मेरिको एवं निहार शांति पाठशाला के सहयोग से किया जाता है। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 2 से 5 तक के विद्यार्थी भाग लेते हैं। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेता विद्यार्थियों एवं उनके मार्गदर्शक शिक्षकों को प्रमाण-पत्र, ट्रॉली बैग, स्पीकर, स्पोर्ट्स किट सहित विभिन्न उपहार प्रदान कर सम्मानित किया जाता है।