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मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – नर्मदापुरम-टिमरनी स्टेट हाईवे तरक्की का खोलेगा नया मार्ग

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज का दिन भारत के लोकतंत्र के इतिहास का बड़ा दिन है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 21वीं शताब्दी के सबसे बड़े निर्णय नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर लोकसभा में चर्चा की शुरुआत हुई है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम बहनों के राजनीतिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। नारी केवल सृष्टि की जननी ही नहीं, बल्कि राष्ट्र की उन्नति की वास्तविक सूत्रधार है। जब हम विकसित भारत की कल्पना करते हैं, तो उसकी नींव में आधी आबादी के सामर्थ्य, संघर्ष और सफलता की कहानियां स्पष्ट दिखाई देती हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसी सामर्थ्य को संवैधानिक मान्यता देने और लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं के लिए नेतृत्व के नए द्वार खोलने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। प्रधानमंत्री मोदी देशवासियों के सामाजिक-आर्थिक उन्नयन के साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर भी समान रूप से ध्यान दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 972 करोड़ से अधिक लागत के 72 किलोमीटर लंबे नर्मदापुरम-टिमरनी स्टेट हाईवे-67 का उन्नयन एवं पुनर्निर्माण कार्य के भूमि-पूजन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को नर्मदापुरम जिले के सिवनी-मालवा में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री और नर्मदापुरम के प्रभारी राकेश सिंह विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पहले से ही स्थानीय निकाय और नगरीय निकाय चुनावों में 50 प्रतिशत पद बहनों के लिए आरक्षित हैं। राज्य सरकार बहनों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है, राज्य सरकार जो कहती है, उसे पूरा करती है। प्रदेश की 1.25 करोड़ से अधिक लाड़ली बहनों को अब तक 55 हजार करोड़ रूपए से अधिक राशि दी जा चुकी है। लाड़ली बहना योजना की शुरुआत से लेकर अब तक प्रति बहन 40 हजार 500 रुपए से अधिक राशि बहनों के बैंक खातों में आई है। बहनें चिंता न करें, योजना की राशि बढ़कर 1500 रुपए करने के साथ आगे भी जो संभव होगा वह किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। प्रदेश में पहली बार शासकीय स्कूलों के बच्चों को "माता यशोदा योजना" के अंतर्गत नि:शुल्क दूध के पैकेट बांटे जाएंगे। हमारे बच्चे मानसिक और शारीरिक रूप से तंदुरुस्त बनेंगे। प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने और गौपालन को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए "डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना" की शुरू की है। इससे हमारे भाई-बहनों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। राज्य सरकार ने कठिन समय में सड़क पर घायलों की मदद के लिए राहवीर योजना शुरू की है, जिसमें घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले को 25 हजार रुपए की राशि प्रोत्साहन स्वरूप देने की व्यवस्था है। मुश्किल वक्त में गरीब-जरूरतमंदों की मदद के लिए एयर एम्बुलेंस भी संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि, पर्यटन, उद्योग, वन्य जीव और जनजातीय क्षेत्रों को समेटे नर्मदापुरम जिला विविधता से परिपूर्ण है। पचमढ़ी में राजा भभूत सिंह के नाम पर कैबिनेट बैठक आयोजित की गई थी। नर्मदापुरम में नर्मदा लोक भी बन रहा है। नर्मदापुरम में उद्योग और कृषि के विकास के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। सड़कें विकास का आधार हैं, इस तथ्य को दृष्टिगत रख नर्मदापुरम जिले में अनेक सड़क परियोजनाओं का कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि सिवनी मालवा को लगभग 1000 करोड़ से अधिक लागत के विकास कार्यों की सौगात मिल रही है। इसमें 972 करोड़ से अधिक लागत के 72 किलोमीटर लंबे नर्मदापुरम-टिमरनी स्टेट हाईवे-67 का उन्नयन एवं पुनर्निर्माण कार्य का भूमि-पूजन शामिल है। यह केवल सड़क नहीं है, इससे सीधे इंदौर-उज्जैन तक पहुंचना आसान हो जाएगा। इस स्टेट हाईवे के माध्यम से सिवनी-मालवा नए दौर में प्रवेश करेगा और कनेक्टिविटी का लाभ पूरे क्षेत्र को मिलेगा। सिवनी-मालवा में इस सड़क के साथ विकास का सूर्योदय हुआ है। स्टेट हाईवे के साथ सिवनी-मालवा को 106 करोड़ 30 लाख लागत के 96 विकास कार्यों की सौगात मिली है। जिसमें 48 करोड़ 61 लाख की लागत के 45 विकास कार्यों का लोकार्पण और 57 करोड़ 69 लाख की लागत के 51 विकास कार्यों का भूमि-पूजन संपन्न हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रमुख घोषणाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा नदी आंवली घाट के हथनापुर गांव में सिंचाई परियोजना के विकसित करने की घोषणा की। इस परियोजना का लाभ क्षेत्र के 40 गांवों के 10 हजार से अधिक किसानों को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने नगर पालिका सिवनी-मालवा में सड़क, सीवेज, बिजली-पानी की मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए विशेष निधि से राशि देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिवनी-मालवा-शिवपुर बावरी मुख्य मार्ग की मंजूरी, पीपलपुरा पुल निर्माण और बनापुरा के शासकीय स्कूलों में अतिरिक्त कक्ष निर्माण की घोषणा की। इसके साथ ही शिवपुर और डोलपुर में सांदीपनि विद्यालय के लिए सर्वे कराने और एक विद्यालय की मंजूरी देने की घोषणा की। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री एवं नर्मदापुरम जिले के प्रभारी राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के प्रत्येक जिले में विकास की अनेक सौगातें दी हैं। सिवनी-मालवा कृषि से समृद्ध क्षेत्र है। पिछले दो साल में ही 984 करोड़ की लागत की सड़कों की सौगात सिवनी-मालवा को मिली है। राज्य सरकार ने नर्मदापुरम जिले में ऐतिहासिक रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव की है, जिसमें अभूतपूर्व निवेश प्राप्त हुआ। लोक निर्माण विभाग गुणवत्तापूर्ण सड़कों का निर्माण कर रहा है। उन्होंने विभाग के लोकपथ ऐप की जानकारी दी। विधायक प्रेमशंकर वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में सिवनी-मालवा को लगातार विकास कार्यों की सौगातें मिल रही हैं। इस क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछाने और सिंचाई सुविधाओं के विकास से किसानों को लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल के परिणामस्वरूप इंडियन ऑयल द्वारा डोलरिया में नया प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इससे नर्मदापुरम के युवाओं को रोजगार मिलेगा। विधायक वर्मा ने आंवली घाट पर श्रद्धालुओं के लिए सुविधा के विकास कार्य और सिवनी-मालवा शहर का सीवेज नदी में मिलने से रोकने के लिए योजना तैयार करने का अनुरोध किया। कार्यक्रम में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा, विधायक विजयपाल सिंह, विधायक ठाकुर दास नागवंशी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती राधा पटेल, जिलाध्यक्ष सुप्रीति शुक्ला तथा बड़ी संख्या में स्थानीयजन उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का सिवनी … Read more

राज्यमंत्री गौर ने किया 6.20 करोड़ की लागत के सड़क निर्माण कार्य का भूमि-पूजन

भोपाल.  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने गुरुवार को 3 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया। खेजड़ा बरामद मार्ग के इस विकास कार्य से विदिशा रोड से अयोध्या बायपास रोड की कनेक्टिविटी और ज्यादा सुलभ होगी। इस सड़क निर्माण कार्य पर करीब 6 करोड़ 20 लाख रुपए की लागत आएगी। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि यह सड़क क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाएगी और भविष्य में व्यापारिक एवं सामाजिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगी। राज्यमंत्री गौर ने अधिकारियों को समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि यह सड़क क्षेत्र के यातायात को सुलभ और सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस मार्ग के निर्माण से आसपास के क्षेत्रों में आवागमन बेहतर होगा, साथ ही स्थानीय नागरिकों को राहत भी मिलेगी। कार्यक्रम में मौजूद स्थानीय नागरिकों ने इस पहल पर खुशी व्यक्त करते हुए राज्यमंत्री गौर का आभार व्यक्त किया। रहवासियों ने कहा कि यह निर्माण कार्य क्षेत्र के लिए बड़ी सौगात है। कार्यक्रम में पार्षद शकुन लोधी, राजू लोधी, राजू राठौड़ सहित बड़ी संख्या में स्थानीय रहवासी शामिल हुए।  

स्वरोजगार योजनाओं से सशक्त बन रहा अनुसूचित जाति वर्ग: मंत्री चौहान

भोपाल. अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश सरकार अनुसूचित जाति वर्ग के युवाओं को आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। विभिन्न स्वरोजगार एवं वित्तीय सहायता योजनाओं से युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ उन्हें उद्यमिता के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मंत्री चौहान ने कहा कि प्रदेश राज्य सहकारी अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के माध्यम से संचालित योजनाओं का उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग के परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना एवं उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है। संत रविदास स्वरोजगार योजना योजना में अनुसूचित जाति वर्ग के 18 से 45 वर्ष आयु के युवाओं को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए बैंक ऋण एवं ब्याज अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। उद्योग स्थापना के लिए 1 लाख से 50 लाख रुपये और सेवा एवं खुदरा व्यवसाय के लिए 1 लाख से 25 लाख रुपये तक का बैंक ऋण प्रदान किया जाता है। योजना में 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान अधिकतम 7 वर्षों तक दिया जाता है। पात्रता के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 8वीं कक्षा उत्तीर्ण निर्धारित है।आवेदक की वार्षिक आय सीमा 12 लाख तक निर्धारित है। डॉ. भीमराव अंबेडकर आर्थिक कल्याण योजना योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग के पात्र व्यक्तियों को स्वरोजगार के लिए लघु स्तर पर बैंक ऋण और ब्याज अनुदान उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। योजना में 18 से 55 वर्ष आयु वर्ग के हितग्राहियों को स्वरोजगार के लिए 10 हजार से 1 लाख रुपये तक का बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाता है।योजना में शैक्षणिक योग्यता का कोई बंधन नहीं है। आयकर दाता नहीं होने वाले आवेदक योजना के पात्र हैं।लाभार्थियों को 7 प्रतिशत ब्याज अनुदान अधिकतम 5 वर्षों तक प्रदान किया जाता है। मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति विशेष परियोजना वित्त पोषण योजना योजना के माध्यम से बड़े स्तर की परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पात्र हितग्राहियों को 2 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। योजना विभिन्न विभागों के समन्वय से संचालित होकर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देती है और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करती है। सावित्री बाई फुले स्व-सहायता समूह योजना यह विशेष केंद्रीय सहायता योजना, अनुसूचित जाति वर्ग की बी.पी.एल. श्रेणी की 18 से 55 वर्ष आयु की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह योजना संचालित है, जिसमें 5 से 10 महिलाओं के स्व-सहायता समूह बनाकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जाता है। समूहों को विभिन्न उद्यम स्थापित करने के लिए सहायता दी जाती है। योजना में प्रत्येक हितग्राही को 2 लाख रुपये तक का बैंक ऋण उपलब्ध कराने और प्रति समूह 10 हजार रुपये अनुदान देने का प्रावधान है। मंत्री चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है कि इन योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों तक पहुंचे और अनुसूचित जाति वर्ग के प्रत्येक युवा को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिले।  

पेयजल और सीवरेज लाइन निर्माण की कठिनाईयां समन्वय से करें दूर : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल.  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने सर्किट हाउस में आयोजित बैठक में रीवा नगर निगम के कार्यों की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि रीवा शहर का तेजी से विकास हो रहा है। लोगों की आवश्यकताओं के अनुरूप सड़क, पानी, नाली और पेयजल व्यवस्थाओं में तेजी से विस्तार किया जा रहा है। शहर में निर्माण कार्य समन्वय से करें। पेयजल की पाइपलाइन और सीवरेज लाइन निर्माण की कठिनाईयों को समन्वय से दूर करें। हर घर को पर्याप्त और साफ पानी देना आवश्यक है। निर्माण कार्यों के कारण यदि पेयजल की पाइपललाइन क्षतिग्रस्त होती है तो संबंधित पर भारी जुर्माना लगाएं। शहर में निर्माण कार्य करने वाले विभिन्न विभाग और निर्माण एजेंसियाँ, नगर निगम तथा अन्य एजेंसियों से समन्वय बनाकर निर्माण कार्य करें जिससे पूर्व से निर्मित संरचनाओं को किसी तरह का नुकसान न हो। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अमृत-2 योजना से निर्माणाधीन टंकियों और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का शीघ्र लोकार्पण कराएं। इनसे शहर के कई मोहल्लों में स्वच्छ पानी की आपूर्ति हो सकेगी। सीवरेज लाइन के शेष बचे लगभग सौ किलोमीटर निर्माण कार्य को तय समय से पूरा कराएं। नगर निगम के अधिकारी इसकी सतत् निगरानी करें। जयंती कुंज सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से 13,900 घरों के सीवरेज का ट्रीटमेंट होगा। इसके सुधार का कार्य शीघ्र शुरू कराएं। जयंती कुंज सहित बाबा घाट, बिछिया और विवेकानंद वार्ड में निर्मित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों का शीघ्र लोकार्पण कराएं। शहर को स्वच्छ रखने और पर्यावरण की समुचित सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है। सीवरेज लाइन के निर्माण के लिए खुदाई का कार्य जहाँ तक संभव हो मैन्युअल कराने का प्रयास करें। मशीनों से खुदाई करने पर ही पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि पीएनजी गैस के प्रतिनिधि प्रत्येक मोहल्ले में शिविर लगाकर लोगों को पाइप्ड नेचुरल गैस का कनेक्शन दें। इससे परिवारों को सिलेण्डर से मुक्ति मिलेगी। शासन द्वारा निर्धारित 2800 घरों को कनेक्शन देने का लक्ष्य दो माह में पूरा करें। निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि ने बताया कि रीवा में 363 किलोमीटर सीवर लाइन का निर्माण किया जाना है। इनमें से 252 किलोमीटर लाइन का निर्माण पूरा हो गया है। ढेकहा, रतहरा रोड, पीटीएस और बाजार में निर्माण कार्य शेष है। इस साल के अंत तक शेष कार्य पूरा हो जाएगा। शहर में तीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य पूरा हो गया है। शेष तीन का कार्य दो माह में पूरा कर लिया जाएगा। बैठक में कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने कहा कि नगर के निर्माण कार्यो तथा पेयजल व्यवस्था की हर सप्ताह टीएल बैठक में समीक्षा की जाएगी। किसी भी तरह की कठिनाई होने पर संबंधित अधिकारी और निर्माण एजेंसी तत्काल वस्तुस्थिति से अवगत कराएं। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीता कोल, अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय, प्रभारी आयुक्त नगर निगम मेहताब सिंह गुर्जर, शैलेन्द्र शुक्ला, एसडीएम हुजूर डॉ. अनुराग तिवारी तथा निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि एवं नगर निगम के अधिकारी उपस्थित रहे।  

मध्यप्रदेश पुलिस में आरक्षक (बैंड) के 679 पदों पर भर्ती हेतु आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई

भोपाल.  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा पुलिस बैंड के अंतर्गत आरक्षक (बैंड) के कुल 679 पदों पर सीधी भर्ती वर्ष 2026 हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह भर्ती प्रक्रिया विशेष रूप से पुरुष अभ्यर्थियों के लिए आयोजित की जा रही है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में आवेदन करने की अंतिम तिथि 19 अप्रैल 2026 निर्धारित थी, जिसे अब बढ़ाकर 30 अप्रैल 2026 कर दिया गया है। इच्छुक एवं पात्र पुरूषअभ्यर्थी अब दिनांक 30 अप्रैल 2026 तक एमपी ऑनलाइन की वेबसाईट https://iforms.mponline.gov.in पोर्टल के माध्यम से अपने आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। 

समर कैंप आरोह-2026 नए स्वरूप में होंगे : मंत्री सारंग

भोपाल.  खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने नई पहल शुरू करते हुए समर कैंप 'आरोह-2026' को नए स्वरूप में करवाने का निर्णय लिया है। इस बार व्यक्तित्व विकास एवं रचनात्मक गतिविधियों को भी समर कैंप में शामिल किया जा रहा है। इस संबंध में गुरूवार को तात्या टोपे खेल स्टेडियम में आयोजित प्रदेश के सभी खेल अधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री सारंग ने समर कैंप में नई गतिविधियों के बारे में बताया। एक मई से शुरू होगा समर कैंप मंत्री सारंग ने कहा कि भोपाल सहित सभी जगह 1 मई से समर कैंप शुरू होगा। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की अधिकारिक वेबसाइट और क्यूआर कोड को स्केन करके इसमें 18 अप्रैल से रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। उन्होंने सभी खेल अधिकारियों से कहा कि इसमें युवा समन्वयकों से जुड़ कर इसका आयोजन/गतिविधियां ब्लॉक एवं ग्रामीण स्तर तक की जाए। समर कैंप से सशक्त व्यक्तित्व का निर्माण हो मंत्री सारंग ने कहा कि प्रदेश में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक खेल विभाग के इस समर कैंप 'आरोह-26' की जानकारी हो और लोग इसमें शामिल हो। यह समर कैंप एक मूवमेंट के रूप में जाना जाए, जैसे फिट इंडिया मूवमेंट, स्वच्छता अभियान आदि। इसी प्रकार यह समर कैंप केवल गतिविधि केन्द्रित नहीं होकर बच्चों और परिवार सहित समाज को जोड़ने का एक सकारात्मक संदेश दें। हमारा उद्देश्य केवल प्रतिभा का विकास ही नहीं बल्कि एक ऐसे सशक्त व्यक्तित्व का निर्माण भी है जो परिवार का गौरव एवं राष्ट्र और समाज का आधार बने। मंत्री सारंग ने कहा कि खेल अधोसंरचना का विकास, प्रतिभाओं को निखारें वाले कोच और प्रतिभाएं तलाशना हमारा मुख्य उद्देश्य है। साथ ही खिलाड़ी को उत्तम खिलाड़ी बनाना और युवाओं को खिलाड़ी बनाने में कोचेस की महत्वपूर्ण भूमिका है। युवाओं का शारीरिक और मानसिक समग्र विकास खेल के जरिये ही हो सकता है। विभाग का मुख्य काम भी युवाओं को खेल से जोड़ना और युवाओं का कल्याण करना है, जो मानसिक एवं बौद्धिक विकास के जरिये किया जा सकता है। इसके लिए जागरूकता एवं काउंसिंग जैसे कार्यक्रम को भी शामिल किया जा सकता है। बैठक में खेल संचालक अंशुमान यादव एवं संयुक्त संचालक बी.एस. यादव सहित प्रदेश के खेल अधिकारी मौजूद थे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को ओंकारेश्वर में सांस्कृतिक महाकुंभ एकात्म पर्व का करेंगे शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव, ज्ञान की पुण्यभूमि ओंकारेश्वर में सांस्कृतिक महाकुंभ एकात्म पर्व का शुक्रवार को करेंगे शुभारंभ दार्शनिक चिंतन, सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक ऊर्जा का पाँच दिवसीय आयोजन देश-विदेश के शीर्ष संत, मनीषी और विद्वान देंगे एकात्मता का वैश्विक संदेश ओंकारेश्वर भारतीय संस्कृति के पुनरुद्धारक और अद्वैत वेदांत के प्रखर प्रणेता आदि गुरु शंकराचार्य की दीक्षा स्थली ओंकारेश्वर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कल, 17 अप्रैल शुक्रवार से पाँच दिवसीय 'एकात्म पर्व' का मंगलमय शुभारंभ करेंगे। मांधाता पर्वत की कंदराओं में रचे-बसे 'एकात्म धाम' में आयोजित यह महोत्सव दार्शनिक चिंतन, सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनूठा संगम होगा। वैशाख शुक्ल पंचमी के पावन अवसर पर आयोजित इस अनुष्ठान में देश-विदेश के शीर्ष संत, मनीषी और विद्वान सम्मिलित होकर एकात्मता के वैश्विक संदेश को रेखांकित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव अद्वैत लोक एवं अक्षर ब्रह्म प्रदर्शनी का लोकार्पण करेंगे साथ ही वैदिक अनुष्ठान में भी सम्मिलित होंगे। इस अवसर पर द्वारका पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती के पावन सान्निध्य तथा विवेकानंद केंद्र की उपाध्यक्ष पद्मनिवेदिता भिड़े, स्वामी शारदानंद सरस्वती की गरिमामय उपस्थिति रहेगी। एकात्म पर्व के महत्वपूर्ण वैचारिक सत्र 'अद्वैतामृतम् – विमर्श सभा' के अंतर्गत अद्वैत दर्शन की समकालीन प्रासंगिकता पर गहन संवाद होगा। विशेष रूप से प्रथम दिन 'अद्वैत एवं Gen-Z' जैसे आधुनिक विषय पर युवा दृष्टिकोण प्रस्तुत किया जाएगा। आगामी दिनों में अद्वैत दर्शन का कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), पर्यावरण संरक्षण, वैश्विक शांति और सिख संप्रदाय के 'एक ओंकार' के साथ अंतर्संबंधों पर विद्वतापूर्ण चर्चा होगी। यह बौद्धिक मंथन आधुनिक समाज और नई पीढ़ी को अद्वैत की शाश्वत अवधारणा से जोड़ने का एक अभिनव प्रयास है। सांस्कृतिक संध्या 'रसो वै सः' के अंतर्गत प्रतिदिन देश के प्रतिष्ठित कलाकार अपनी कला की प्रस्तुति देंगे। महोत्सव के प्रथम दिवस जयतीर्थ मेवुंडी का शास्त्रीय गायन और शुभदा वराडकर की ओड़िसी प्रस्तुति 'एकम्' आकर्षण का केंद्र रहेगी। इसी क्रम में आगामी दिनों में भरतनाट्यम, कर्नाटक संगीत और निर्गुण वाणी के माध्यम से अद्वैत के भावों को अभिव्यक्त किया जाएगा। महोत्सव का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष 21 अप्रैल को आयोजित होने वाला दीक्षा समारोह है, जिसमें देश-विदेश के 700 से अधिक युवा 'शंकरदूत' के रूप में संकल्प लेंगे। मध्य प्रदेश शासन 'ओंकारेश्वर' में 'एकात्म धाम'के माध्यम से आचार्य शंकर के दर्शन को वैश्विक फलक पर स्थापित कर रहा है। यहाँ स्थापित 108 फीट ऊँची 'एकात्मता की मूर्ति' (Statue of Oneness) और निर्माणाधीन 'अद्वैत लोक' संग्रहालय न केवल पर्यटन बल्कि आध्यात्मिक जिज्ञासा के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। कल से प्रारंभ हो रहा यह पर्व समस्त राष्ट्र को सांस्कृतिक और वैचारिक सूत्र में पिरोने की दिशा में एक महती कदम सिद्ध होगा।  

सभी अधिकारी नगरीय निकायों को स्वावलंबी और विकास केंद्र के रूप में स्थापित करें: मंत्री विजयवर्गीय

सभी अधिकारी नगरीय निकायों को स्वावलंबी और विकास केंद्र के रूप में करें स्थापित : मंत्री विजयवर्गीय अधिकारी विद्यार्थी भाव से सेवा और जन-भागीदारी को बनाएँ अपना ध्येय सड़क और जल आपूर्ति के साथ रोजगार सृजन और राजस्व वृद्धि पर दें विशेष ध्यान सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय नगर प्रबंधन संस्थान में "शहरी सुधार कार्यशाला" का किया शुभारंभ भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय नगर प्रबंधन संस्थान में दीप प्रज्ज्वलित कर "शहरी सुधार कार्यशाला"का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के नगरीय निकायों के अधिकारियों को संबोधित करते हुए दूरदर्शी नेतृत्व और कर्मठता के साथ नगरों के कायाकल्प करने का आह्वान किया। प्रशासन व्यवहार से चलता है, जन-सेवा ही सर्वोपरि: मंत्री विजयवर्गीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जीवन में सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि, "यदि सभी अधिकारी विद्यार्थी भाव को आत्मसात कर जीवन जिएंगे, तो व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन दोनों ही उत्कृष्ट होंगे। उन्होंने कहा  कि प्रशासन केवल नियमों से नहीं, बल्कि उचित व्यवहार से चलता है। जनता की सेवा के लिए समर्पण और कठोर परिश्रम ही एक सफल अधिकारी की वास्तविक पहचान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को दोहराते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की मंशा के अनुरूप हमें सभी नगरीय निकायों को 'आत्मनिर्भर' बनाना है। उन्होंने निर्देश दिए कि हमारे शहरी केंद्रों को 'विकास केंद्र' के रूप में विकसित किया जाए। अधिकारियों को अब केवल सुदृढ़ सड़क और स्वच्छ जल तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें शहर में रोजगार के नवीन अवसर उत्पन्न करने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। नवाचार और राजस्व वृद्धि पर विशेष बल मंत्री विजयवर्गीय ने नगरों के आर्थिक सुदृढ़ीकरण पर चर्चा करते हुए भूमि मुद्रीकरण और भूमि के कुशल प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने कहा कि अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि नगरीय भूमि का उपयोग जनकल्याणकारी और विकास कार्यों के लिए प्रभावी ढंग से हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाला समय शहरीकरण का है। यदि आप पारदर्शिता और जन-भागीदारी के साथ नवीन कार्य करेंगे और गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ देंगे, तो जनता भी कर वृद्धि जैसे निर्णयों में सहर्ष आपका साथ देगी। उन्होंने अधिकारियों को जन-प्रतिनिधियों के साथ सामंजस्य बिठाकर चुनौतियों को स्वीकार करने की सीख दी। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नवनियुक्त मुख्य नगर पालिका अधिकारियों से संवाद के दौरान कहा कि नगरीय निकायों में कार्य करते समय सेवा भाव अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह सीधे जनता से जुड़ा दायित्व है। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस संस्थान में प्रथम बार इस प्रकार का प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से सक्रियता, ऊर्जा और पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने की अपेक्षा की। दुबे ने बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आगामी वर्ष के लिए एक सुव्यवस्थित कार्ययोजना तैयार करना और नियोजित विकास के साथ नागरिक जागरूकता विकसित करना है। उन्होंने अर्बल चेलेंज फंड और द्वारका योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से नगरीय निकायों के कायाकल्प की संभावनाओं पर भी बल दिया। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि विभाग एक परिवार और सामूहिक भावना के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों के आयुक्त, मुख्य नगरपालिका अधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी इस कार्यशाला में सम्मिलित हैं। कार्यशाला का मुख्य केंद्र नागरिक संतुष्टि और मूलभूत सिद्धांतों पर कार्य करना है।        इस कार्यशाला के माध्यम से आगामी दो दिनों तक नगरीय निकायों की कार्यप्रणाली में सुधार , समीक्षा और संवाद का क्रम निरंतर जारी रहेगा, ताकि प्रदेश के शहरों को आधुनिक और जन-सुविधाओं से युक्त बनाया जा सके।  

भोजशाला विवाद में मंदिर पक्ष का बयान: इस्लामी सिद्धांत से जोड़ते हुए कहा- जबरन मस्जिद का निर्माण नहीं हो सकता

भोजशाला विवाद: मंदिर पक्ष ने इस्लामी सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा- जबरन जमीन पर मस्जिद मान्य नहीं भोजशाला विवाद में मंदिर पक्ष का बयान: इस्लामी सिद्धांत से जोड़ते हुए कहा- जबरन मस्जिद का निर्माण नहीं हो सकता भोजशाला विवाद में मंदिर पक्ष का बड़ा बयान, इस्लामी सिद्धांत पर आधारित कहा- जबरन मस्जिद की मान्यता नहीं इंदौर  मध्यप्रदेश में धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने के लिए हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में बुधवार से पुनः नियमित सुनवाई शुरू हो गई। मंदिर पक्ष के समर्थन में याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की ओर से एडवोकेट मनीष गुप्ता ने तर्क प्रस्तुत किए। उन्होंने हदीस का हवाला देते हुए कहा, इस्लामिक सिद्धांत के अनुसार जबरन जमीन लेकर मस्जिद का निर्माण नहीं किया जा सकता। यदि कहीं ऐसा हुआ भी है, तो उस जमीन को लौटाने के उदाहरण भी इस्लाम में हैं। वहीं, हिंदू धार्मिक नियमों व मान्यताओं के अनुसार, एक बार मंदिर रहा स्थल सदैव मंदिर ही रहता है। ये दोनों ही बातें इंगित करती हैं कि भोजशाला आज भी वाग्देवी का मंदिर ही है। गुप्ता ने ब्रिटिश संग्रहालय में रखी वाग्देवी की मूर्ति पर अंकित विवरण का संदर्भ देते हुए कहा, उससे इस मूर्ति की स्थापना राजा भोज द्वारा किए जाने का प्रमाण सामने आता है। उन्होंने कहा, भोजशाला में इसके पहले भी एएसआई का सर्वे हो चुका है। हर सर्वे में यहां देवी-देवताओं की मूर्तियां, चित्र मिले हैं, जो किसी मस्जिद में नहीं हो सकते। हवन कुंड से लेकर मूर्तियां तक मंदिर होने का प्रमाण: न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला व आलोक अवस्थी की पीठ के समक्ष शुक्रवार को अधूरी रही बहस आगे बढ़ाते हुए मनीष गुप्ता ने कहा, वर्ष 1908 में प्रकाशित राजपत्र में कहा गया है कि भोजशाला में पत्थरों पर लिखा है कि यहां बसंत पंचमी के दिन राजा भोज द्वारा लिखे गए नाटक का मंचन किया जाता था। राजा भोज द्वारा लिखी पुस्तकों में उल्लखित मानकों के अनुरूप ही भोजशाला में बने हवन कुंड की लंबाई-चौड़ाई है। भोजशाला का अस्तित्व मस्जिद से बहुत पहले से है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील प्रस्तुत करते हुए अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने इस्लामी सिद्धांत हदीस का हवाला देते हुए कहा कि इस्लामिक कानून कहता है कि जबरन जमीन लेकर मस्जिद का निर्माण नहीं किया जा सकता, अगर कहीं ऐसा हुआ भी है तो उस जमीन को लौटाने के उदाहरण भी इस्लाम में हैं। हिंदू कानून के अनुसार एक बार मंदिर रहा स्थल हमेशा मंदिर ही रहता है। ये दोनों ही बातें इंगित करती हैं कि भोजशाला वाग्देवी का मंदिर ही है। ऐतिहासिक राजपत्र और राजा भोज की पुस्तकों का उल्लेख  न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ के समक्ष भोजशाला मामले में सुनवाई शुरू हुई। एडवोकेट गुप्ता ने शुक्रवार को अधूरी रही बहस आगे बढ़ाते हुए कोर्ट को बताया कि वर्ष 1908 में प्रकाशित राजपत्र में कहा है कि भोजशाला में जो पत्थर लगे हैं उन पर लिखा है कि यहां बसंत पंचमी के दिन राजा भोज द्वारा लिखे गए नाटक का मंचन किया जाता था। एडवोकेट गुप्ता ने राजा भोज द्वारा लिखी गई पुस्तकों का उल्लेख किया और बताया कि इन पुस्तकों में बताया है कि हवन कुंड कैसा होना चाहिए, हवन कुंड का क्षेत्रफल कितना होना चाहिए, मंदिर में स्थापित देवी की मूर्ति की साइज कितनी होनी चाहिए। हवन कुंड और वाग्देवी की मूर्ति का मिलान मूर्ति की मुद्रा क्या होनी चाहिए, पुस्तक में बताया है कि हवन कुंड की लंबाई-चौड़ाई कितनी होनी चाहिए। भोजशाला में बने हवन कुंड की लंबाई-चौड़ाई उतनी ही है जो राजा भोज द्वारा लिखी गई पुस्तक में लिखी है। वाग्देवी की ब्रिटिश संग्रहालय में रखी मूर्ति पर भी उल्लेखित है कि इसे राजा भोज ने स्थापित किया था। यह मूर्ति भोजशाला से ही ब्रिटिश संग्रहालय पहुंचाई गई थी। इन बातों से सिद्ध होता है कि भोजशाला का अस्तित्व मस्जिद से बहुत पहले से है। भोजशाला के सर्वे में अब तक 150 से ज्यादा मूर्तियां मिल चुकी हैं। यह इस बात को सिद्ध करता है कि भोजशाला मंदिर ही है। सर्वे रिपोर्ट और मूर्तियों के साक्ष्य का हवाला अदालत में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट और पुरातात्विक साक्ष्यों का भी हवाला दिया गया। बताया गया कि भोजशाला परिसर से अब तक 150 से अधिक देवी-देवताओं की मूर्तियां, आकृतियां और चित्र मिले हैं, जो किसी मस्जिद में संभव नहीं हैं। ब्रिटिश संग्रहालय में रखी गई वाग्देवी की मूर्ति पर जो विवरण अंकित है वह बताता है कि मूर्ति की स्थापना राजा भोज ने की थी। धार भोजशाला में इसके पहले भी कई बार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) का सर्वे हो चुका है। हर बार सर्वे में यहां से देवी-देवताओं की मूर्तियां, आकृतियां, चित्र मिले हैं जो किसी मस्जिद में हो ही नहीं सकते क्योंकि इन्हें वहां रखने की अनुमति नहीं होती। भोजशाला मंदिर है इसलिए याचिकाकर्ता को 24 घंटे पूजा का अधिकार मिलना चाहिए। इस्लामिक कानून के उदाहरण और अगली सुनवाई एडवोकेट गुप्ता ने कोर्ट के समक्ष इस्लामिक कानून का हवाला भी दिया। उन्होंने कहा कि इस्लामिक कानून के अनुसार किसी की जमीन जबरन लेकर उस पर मस्जिद का निर्माण नहीं किया जा सकता। उन्होंने अपनी बात के समर्थन में ऐसे उदाहरण भी प्रस्तुत किए जब जबरन ली गई जमीन लौटाई गई हो। भोजशाला को लेकर हाई कोर्ट में चार याचिकाएं और एक अपील चल रही हैं। इन सभी में सुनवाई एक साथ हो रही है। 6 अप्रैल से हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई में अब तक दो याचिकाकर्ता हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और कुलदीप तिवारी की ओर से तर्क रखे जा चुके हैं। मामले में गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी। आज भी होगी सुनवाई भोजशाला को लेकर हाई कोर्ट में चार याचिकाएं और एक अपील विचाराधीन है। सभी में सुनवाई एक साथ हो रही है। छह अप्रैल से हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई में अब तक दो याचिकाकर्ता- हिंदू फ्रंट फार जस्टिस और कुलदीप तिवारी की ओर से तर्क रखे जा चुके हैं। मामले में गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी। एक अन्य याचिकाकर्ता अंतर सिंह की ओर से तर्क रखे जाएंगे।  

मध्य प्रदेश में 25 शहरों का तापमान 40 डिग्री से ऊपर, 16 जिलों में लू की चेतावनी, इंदौर-उज्जैन और अन्य संभागों में अलर्ट

भोपाल मध्य प्रदेश में गर्मी ने अपने तेवर तीखे कर दिए हैं. प्रदेश के 25 शहरों का तापमान 40 डिग्री पार हो चुका है. बुधवार को छतरपुर का नौगांव सबसे गर्म रहा. नौगांव का तापमान 42.4 डिग्री सेल्सियस रहा. राज्य के 16 जिलों में लू की चेतावनी जारी की गई है. मौसम केंद्र भोपाल की ओर से सीजन में पहली बार इतने ज्यादा जिलों में अलर्ट जारी किया गया है. अगले चार दिनों तक प्रदेश के कई जिले गर्म हवा की चपेट में हैं. जिन जिलों में लू का अलर्ट जारी गया है, वे हैं- रतलाम, झाबुआ, धार, अलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांदुर्णा, सिवनी, मंडला और बालाघाट।  राज्य के 25 शहरों में पारा 40 डिग्री पार हो चुका है. खजुराहो में 42.2 डिग्री सेल्सियस, रतलाम में 42 डिग्री और नर्मदापुरम में तापमान 41.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं मंडला में तापमान 41.6 डिग्री, सतना में 41.5 डिग्री, सीधी में 41.2 डिग्री और शाजापुर में तापमान 41.01 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. उज्जैन में तापमान 39.5 डिग्री, ग्वालियर में 39.5, इंदौर में 39.8 डिग्री, भोपाल में 39.6 डिग्री और जबलपुर में तापमान 39.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं टीकमगढ़, धार, खरगोन और रीवा में तापमान 41 डिग्री सेल्सियस, उमरिया और दतिया में 40.8 डिग्री सेल्सियस रहा. श्योपुर, दमोह, रायसेन में 40.4 डिग्री, गुना में 40.3 डिग्री, छिंदवाड़ा, मलाजखंड-बैतूल में 40.2 डिग्री, खंडवा में 40.1 डिग्री और सागर में पारा 40 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।  दोपहर में न निकलें बाहर खंडवा निवासी डॉक्टर योगेश शर्मा ने कहा कि खंडवा में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है. इस मौसम में छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्ग और गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे के बीच बाहर निकलने से बचना चाहिए क्योंकि इस समय लू का खतरा सबसे ज्यादा रहता है. गर्मी के कारण हीट रैश, हीट एक्सॉशन, हीट क्रैम्प और सबसे खतरनाक हीट स्ट्रोक जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. हीट स्ट्रोक में शरीर का तापमान 104 डिग्री तक पहुंच सकता है. ऐसे में फौरन अस्पताल जाना चाहिए. वहीं इन दिनों खंडवा के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी की संख्या से लोगों के तेजी से बीमार पड़ने का अंदाजा लगाया जा सकता है. हर रोज 1500 तक मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं. इनमें ज्यादातर बुखार, उल्टी-दस्त और बदन दर्द के मरीज हैं। नौगांव में 42 डिग्री पार पहुंचा पारा मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार को छतरपुर जिले का नौगांव प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 42.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा खजुराहो में 42.2 डिग्री, रतलाम में 42 डिग्री और नर्मदापुरम में 41.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। वहीं मंडला, सतना, सीधी और शाजापुर जैसे जिलों में भी तापमान 41 डिग्री के आसपास बना रहा है। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 39.6 डिग्री, इंदौर में 39.8 डिग्री, ग्वालियर और उज्जैन में लगभग 39.5 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। हालांकि ये आंकड़े 40 से थोड़े कम हैं, लेकिन गर्म हवाओं के कारण यहां भी लू जैसे हालात महसूस किए जा रहे हैं। आज से लू का अलर्ट, सावधानी बरतने की सलाह मध्य प्रदेश के 16 जिलों में आज से लू अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार झाबुआ, धार, अलीराजपुर, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, बैतूल और छिंदवाड़ा सहित 16 जिलों में लू का असर सबसे ज्यादा रहेगा। प्रशासन ने भी इन इलाकों में अलर्ट जारी कर लोगों को सावधानी बरतने की अपील की है। भीषण गर्मी को देखते हुए कई जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। बच्चों को दोपहर की तेज धूप से बचाने के लिए कक्षाएं सुबह के समय संचालित की जा रही हैं, जिससे अभिभावकों को भी राहत मिली है। दूसरे पखवाड़े में चरम पर गर्मी अप्रैल के पहले नौ दिनों तक प्रदेश में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ था। कहीं आंधी चली, तो कहीं बारिश और ओले गिरे। लेकिन 10 अप्रैल के बाद जैसे ही मौसम साफ हुआ, तापमान तेजी से बढ़ने लगा। अब अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में वही स्थिति बन रही है, जब हर साल गर्मी अपने सबसे तीखे तेवर दिखाती है। 25 शहरों में 40 डिग्री के पार पारा, कई जगह 42 के करीब गर्मी की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बुधवार को प्रदेश के 25 शहरों में तापमान 40 डिग्री या उससे ज्यादा दर्ज किया गया। छतरपुर का नौगांव सबसे ज्यादा गर्म रहा, जहां पारा 42.4 डिग्री तक पहुंच गया। खजुराहो में 42.2 डिग्री, रतलाम में 42 डिग्री और नर्मदापुरम में 41.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। इंदौर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में भी इस सीजन का सबसे ज्यादा तापमान दर्ज हुआ, जहां पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया। भोपाल, उज्जैन और जबलपुर भी 40 डिग्री के करीब रहे, जिससे आम जनजीवन पर गर्मी का असर साफ दिखने लगा है। स्कूलों का समय बदला गया तेज गर्मी और लू के खतरे को देखते हुए कई जिलों में स्कूलों का समय बदल दिया गया है। बच्चों को दोपहर की तेज धूप से बचाने के लिए सुबह के समय कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इससे अभिभावकों को भी राहत मिली है। नया सिस्टम एक्टिव, लेकिन राहत की उम्मीद कम मौसम विभाग का कहना है कि 16 अप्रैल से एक नया सिस्टम जरूर एक्टिव हो रहा है, लेकिन यह काफी कमजोर रहेगा। इसका असर मुख्य रूप से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में ही दिखाई देगा। प्रदेश में इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा, यानी गर्मी से राहत मिलने के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं। लोगों के लिए एडवायजरी बढ़ती गर्मी को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों के लिए जरूरी एडवायजरी भी जारी की है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, शरीर को हाइड्रेट रखने, दोपहर के समय धूप में बाहर निकलने से बचने और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। खास तौर पर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है, क्योंकि लू का असर इन पर ज्यादा तेजी से होता है। लोगों … Read more