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प्रतिनियुक्ति कर्मचारियों को बड़ी राहत: महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी, एरियर भी मिलेगा किस्तों में

भोपाल : राज्य शासन ने उपक्रमों, निगमों, मंडलों एवं अनुदान प्राप्त संस्थाओं से प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत कर्मचारियों को राहत देते हुए महंगाई भत्ते में वृद्धि का निर्णय लिया है। इस फैसले से चौथे एवं पांचवें वेतनमान में वेतन प्राप्त कर रहे कर्मचारियों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। राज्य शासन द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय अनुसार प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में वृद्धि की गई है। संशोधित दरों के अनुसार पांचवें वेतनमान के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़कर 323 प्रतिशत तथा चौथे वेतनमान के कर्मचारियों का 1465 प्रतिशत हो जाएगा। यह वृद्धि 1 जुलाई 2025 से प्रभावशील मानी जाएगी। इस निर्णय का लाभ कर्मचारियों को 1 अप्रैल 2026 से (भुगतान माह मई 2026) से दिया जाएगा। वहीं, 1 जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 तक की अवधि का एरियर 6 समान किस्तों में मई से अक्टूबर 2026 तक भुगतान किया जाएगा, जिससे कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से वित्तीय लाभ प्राप्त होगा। विशेष प्रावधान के तहत इस अवधि में सेवानिवृत्त या दिवंगत कर्मचारियों के मामलों में एरियर राशि का भुगतान एकमुश्त किया जाएगा, जिससे उनके परिवारों को त्वरित राहत मिल सके। शासन ने स्पष्ट किया है कि महंगाई भत्ते की गणना में 50 पैसे या उससे अधिक राशि को अगले पूर्ण रुपये में गोल किया जाएगा। साथ ही, महंगाई भत्ते को किसी अन्य प्रयोजन के लिए वेतन का हिस्सा नहीं माना जाएगा।  

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: MP में संविदा कर्मियों को मिलेगा 10 साल की सेवा का हक, न्यूनतम वेतन और अन्य लाभ

MP में संविदा कर्मियों को HC से राहत, 10 साल की सेवा का मिलेगा हक, न्यूनतम वेतन और अन्य लाभों से नहीं होंगे वंचित हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: MP में संविदा कर्मियों को मिलेगा 10 साल की सेवा का हक, न्यूनतम वेतन और अन्य लाभ MP में संविदा कर्मियों के लिए हाईकोर्ट ने दी राहत, 10 साल की सेवा का हक मिलेगा, न्यूनतम वेतन समेत अन्य लाभ होंगे जारी जबलपुर मध्य प्रदेश में वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मचारियों के लिए हाई कोर्ट से बड़ी राहत सामने आई है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने स्पष्ट किया है कि 10 वर्ष से अधिक समय से लगातार सेवाएं दे रहे संविदा, आउटसोर्स और अंशकालिक कर्मचारी वर्गीकरण और उससे जुड़े लाभों के हकदार हैं। आर्थिक न्याय का अधिकार माना कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि लंबे समय से काम कर रहे इन कर्मचारियों को आर्थिक न्याय और सम्मानजनक जीवन स्तर का अधिकार है। ऐसे में उन्हें नीति के तहत वर्गीकृत किया जाए और उनके पद के अनुरूप न्यूनतम वेतन दिया जाए। वर्षों से सेवारत कर्मियों की दलील स्वीकार जबलपुर सहित प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों ने याचिकाएं दायर कर बताया था कि उन्हें वर्ष 2009 में अनुबंध के आधार पर नियुक्त किया गया था और तब से लगातार सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारियों के समान लाभ नहीं दिए जा रहे। याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने कर्मचारियों के वर्गीकरण और न्यूनतम वेतन को लेकर नीति बनाई है, लेकिन उसका लाभ उन्हें नहीं मिल रहा। संवैधानिक अधिकारों का हवाला याचिकाओं में यह तर्क दिया गया कि नियमितीकरण में भेदभाव हो रहा है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। कोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लेते हुए माना कि पात्र कर्मचारियों को नीति के अनुसार लाभ दिया जाना चाहिए। सरकार को निर्देश हाई कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 2016 की नीति के तहत पात्र संविदा कर्मचारियों का वर्गीकरण किया जाए और उन्हें सभी परिणामी लाभ दिए जाएं। यह फैसला प्रदेश के हजारों संविदा कर्मचारियों के लिए राहतकारी माना जा रहा है, जो लंबे समय से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे थे।  

नर्सिंग ऑफिसर में 100% महिला आरक्षण, पुरुष अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का आदेश

नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में 100% महिला आरक्षण पर आदेश, पुरुष अभ्यर्थियों को भी प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश नर्सिंग ऑफिसर में 100% महिला आरक्षण, पुरुष अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का आदेश महिला आरक्षण पर विवाद: नर्सिंग ऑफिसर में 100% आरक्षण, पुरुष अभ्यर्थियों को प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश जबलपुर  मप्र हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के पदों पर होने वाली भर्ती प्रक्रिया में पुरुष अभ्यर्थियों को शामिल करने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने उक्त अंतरिम आदेश देते हुए आवेदकों के परीक्षा परिणाम याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रखने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही मामले में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग सहित मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। उक्त पदों में महिलाओं को सौ फीसदी आरक्षण दिए जाने को चुनौती दी गई थी। दरअसल संतोष कुमार लोधी व अन्य पुरुष अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर हाल ही में जारी नर्सिंग ऑफिसर के भर्ती विज्ञापन को चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने बताया कि कर्मचारी चयन मंडल के विज्ञापन (नर्सिंग ऑफिसर एवं सिस्टर ट्यूटर भर्ती परीक्षा-2026) में नर्सिंग ऑफिसर के पदों को 100 प्रतिशत केवल महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कर दिया गया है। इससे योग्य पुरुष अभ्यर्थी आवेदन करने से पूरी तरह वंचित हो गए हैं। दलील दी गई कि मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा (अराजपत्रित) सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2023 के तहत नर्सिंग ऑफिसर के पद के लिए कोई जेंडर आधारित प्रतिबंध नहीं है। मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के भर्ती विज्ञापन में किया गया यह प्रावधान संवैधानिक नियमों के विपरीत है। तर्क दिया गया है कि पुरुष और महिला दोनों एक ही पाठ्यक्रम (बीएससी नर्सिंग-जीएनएम) पढ़ते हैं और उनके पास समान योग्यता व पंजीकरण होता है। केवल जेंडर के आधार पर सार्वजनिक रोजगार से पूर्णत: बाहर करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन है। सुनवाई पश्चात न्यायालय ने उक्त अंतरिम आदेश देते हुए अनावेदकों को जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।   

CM मोहन यादव ने कहा: ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम सदी का सबसे क्रांतिकारी कदम’

भोपाल  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को देश की शताब्दी की सबसे बड़ी घटना बताया है. उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय ऐतिहासिक और क्रांतिकारी है, जिससे पूरे देश में उत्साह का माहौल है. उन्होंने कहा कि यह वह समय है जब देश की बहनों को राजनीति में बराबरी का अवसर मिलने जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह बड़ा निर्णय लिया गया है और सरकार इसका स्वागत करती है।  विपक्ष की आपत्तियों पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस को इस बिल का समर्थन करना चाहिए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी पहले महिला आरक्षण लागू करने की बात कही थी और अब जब सरकार इसे आगे बढ़ा रही है तो सभी को इसका समर्थन करना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने सभी दलों को पत्र लिखकर समर्थन की अपील की है, इसलिए विपक्ष को राजनीतिक विरोध छोड़कर इसे लागू कराने में सहयोग करना चाहिए।  33% महिला आरक्षण पर विपक्ष से समर्थन की अपील राहुल गांधी के इस आरोप पर कि ओबीसी, दलित और आदिवासी महिलाओं का हिस्सा छीना जा रहा है, मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूरी तरह गलत धारणा है. उन्होंने कहा कि सरकार सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के सिद्धांत पर काम कर रही है और सभी वर्गों को साथ लेकर चल रही है. उन्होंने कहा कि संसद में इस पर चर्चा का पूरा अवसर है और विपक्ष को अपनी बात वहीं रखनी चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं कर रही है।  दक्षिण भारत और छोटे राज्यों के साथ अन्याय के आरोपों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल राजनीतिक भय और भ्रम है. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों का समाधान संसद के फ्लोर पर चर्चा से ही होगा और सभी को मिलकर इस ऐतिहासिक बिल को पास कराना चाहिए।  उन्होंने कहा कि नारी शक्ति को आगे बढ़ाने के लिए सरकार पहले भी कई कदम उठा चुकी है, जैसे ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून और अन्य योजनाएं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने का काम किया है, चाहे वह स्टार्टअप हो या सशस्त्र बल. मोहन यादव ने यह भी कहा कि देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का सर्वोच्च पद पर पहुंचना भी इस दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।  OBC-दलित महिलाओं के अधिकार पर बोले CM उन्होंने कहा कि यह अधिनियम वास्तव में शताब्दी की सबसे बड़ी घटना है और यह महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगा. मध्यप्रदेश की तैयारी पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री मोदी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार है और प्रदेश में नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा भी मनाया जा रहा है। 

भोपाल की हाई-प्रोफाइल लड़कियां रील्स से नशा बेचने का तरीका सीख रही थीं, VIP स्टाइल में पुलिस को चकमा

भोपाल  राजधानी भोपाल में क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस ने नशा तस्करी के एक ऐसे गिरोह को दबोचा है, जो लग्जरी और सादगी के मुखौटे के पीछे काला कारोबार कर रहा था। भोपाल पुलिस ने दो युवतियों और उनके एक पुरुष साथी को ओडिशा से गांजा लाकर भोपाल में बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया है। ये आरोपी एसी फर्स्ट क्लास में वीआईपी बनकर सफर करते थे, क्योंकि उन्हें पता था कि पुलिस महिलाओं और रईस दिखने वाले यात्रियों की तलाशी कम ही लेती है। पुलिस ने इनके पास से करीब 6.285 किलो गांजा और मोटरसाइकिल बरामद की है। रील्स ने दिखाया रास्ता पकड़ी गई युवतियों में से एक M.Com की छात्रा है जो कॉल सेंटर में काम करती है, जबकि दूसरी 10वीं पास है और एक दुकान पर काम करती थी। उनका साथी प्रॉपर्टी डीलर है। पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि उन्हें ओडिशा से सस्ते गांजे की तस्करी का आईडिया सोशल मीडिया रील्स, विज्ञापनों और खबरों से मिला था। उन्होंने देखा कि ओडिशा में गांजा 4,000–5,000 रुपये प्रति किलो मिल जाता है, जबकि भोपाल में इसे 40,000 रुपये तक में बेचा जा सकता है। तस्करों ने पुलिस की मानसिकता को हथियार बनाया था, उन्हें लगा कि अमीर दिखने वालों पर हाथ नहीं डाला जाएगा। पर अपराधियों का हर हाई फाई तरीका पुलिस के रडार पर है। जांच अधिकारी विदेशी टूरिस्ट का हुलिया बनाकर करते थे सफर इन युवतियों का तस्करी का तरीका बेहद शातिर था। ये महंगे कपड़े पहनती थीं और उनके पास मौजूद बैग विदेशी पर्यटकों जैसे होते थे। वे जानबूझकर एसी फर्स्ट क्लास में टिकट बुक कराती थीं। उन्हें पता था कि पुलिस आमतौर पर एसी कोच के यात्रियों, खासकर महिलाओं पर शक नहीं करती। इसी एलीट क्लास की आड़ में वे भारी मात्रा में गांजा छिपाकर भोपाल लाती थीं। लेकिन एक ग्राहक द्वारा पुलिस मुखबिर को दी गई सूचना ने इनके इस सफर का अंत कर दिया।    

मध्य प्रदेश में बाल विवाह का मामला, 9 साल के दूल्हे और 8 साल की दुल्हन पर ऐक्शन, पंडित और टेंट संचालक गिरफ्तार

राजगढ़  मध्य प्रदेश के राजगढ़ में बाल विवाह का मामला सामने आया है। यहां 8 साल की बच्ची की शादी 9 साल के लड़के के साथ की गई। शादी से पहले सारी रस्में पूरी की गईं। इसमें दूल्हा-दुल्हन को मेहंदी लगी, हल्दी लगी और घोड़ी चढ़ने की भी रस्में पूी की गईं। शादी का वीडियो रिकॉर्ड कर किसी ने सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत ऐक्शन लिया और राजगढ़ के भोजपुर थाने में केस दर्ज कर लिया गया। प्रशासन से बोला झूठ मामला राजगढ़ के भोजपुर पुलिस थाना क्षेत्र का है। बाल विवाह की जानकारी पुलिस को एक दिन पहले ही लग गई थी। जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जानकारी लेनी चाही तो परिवार ने झूठ बोल दिया। परिजनों ने बताया कि बच्चों की शादी नहीं हो रही है बल्कि बालिग लड़के-लड़कियों की शादी हो रही है। इसके लिए बकायदा परिजनों ने दूसरे बालिग लड़के-लडकी को पेश कर दिया। इसके बाद प्रशासन की टीम चली गई और विधि-विधान से नाबालिग बच्चों की शादी कर दी गई। घटना की जानकारी मिलने पर खिलचीपुर के एसडीओपी धर्मराज नागर थाना के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे और महिला एवं बाल विकास अधिकारी की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया। इस कार्रवाई में पुलिस ने बच्चों के माता-पिता, टेंट संचालक, पंडित के साथ ही घोड़ी वाले का नाम भी शामिल है। 9 साल की बच्ची की भी हुई सगाई इसी तरह का मामला रागजगढ़ के करनवास में भी सामने आया है। करनवास में 9 साल की बच्ची की सगाई एक सामूहिक विवाह में कर दी गई। आगामी 26 अप्रैल को बच्ची की शादी भी तय की गई थी। मिली जानकारी के अनुसार, सगाई की जानकारी बच्ची के परिजनों को भी नहीं दी गई थी। इस दौरान शादी का समय करीब आते ही किसी बात को लेकर विवाद हो गया तो मामला पुलिस तक पहुंचा। अब पुलिस ने एक्शन शुरू कर दिया है।

खाद्य मंत्री राजपूत का बयान: सभी संभागों में गेहूँ उपार्जन की प्रक्रिया शुरू

सभी संभागों में गेहूँ का उपार्जन शुरू : खाद्य मंत्री राजपूत 42689 किसानों से 18 लाख 97 हजार 480 क्विंटल गेहूँ उपार्जित भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अभी तक 42 हज़ार 689 किसानों से 18 लाख 97 हजार 480 क्विंटल गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। किसानों को 28 करोड़ 40 लाख रुपए का भुगतान उनके बैंक खाते में किया जा चुका है। गेहूँ का उपार्जन सभी संभागों में शुरू हो चुका है। अभी तक 2 लाख 58 हजार 644 किसानों द्वारा 1 करोड़ 13 लाख 95 हजार 407 क्विंटल गेहूँ के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किये जा चुके हैं। किसान गेहूँ बिक्रय के लिये 24 अप्रैल 2026 तक स्लॉट बुक कर सकते हैं। खरीदी के लिये 3171 उपार्जन केन्द्र बनाये गये हैं। गेहूँ की खरीदी कार्यालयीन दिवसों में होती है। उपार्जन केंद्र में किसानों के लिये गेहूँ बिक्री की सभी सुविधाएं मंत्री राजपूत ने बताया है कि जिन जिलों में गेहूँ उपार्जन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, वहाँ गेहूँ विक्रय की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उपार्जन केन्द्रों में छायादार स्थान में बैठने और पेय जल की समुचित सुविधा उपलब्ध कराई गई है। केंद्र में बारदाने, तौल कांटे सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छनना आदि की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। मंत्री राजपूत ने बताया है कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा घोषित 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। गेहूँ के उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ को रखने के लिये जूट बारदानों के साथ ही पीपी/एचडीपी बैग एवं जूट के भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ के सुरक्षित भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। उपार्जित गेहूं में से 8 लाख 65 हजार 600 क्विंटल गेहूँ का परिवहन किया जा चुका है। प्रदेश में गेहूँ उपार्जन के लिये इस वर्ष रिकार्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष युद्ध की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है, जो कि पिछले वर्ष से एक लाख मीट्रिक टन अधिक है।  

महिला किसान वर्ष 2026: डॉ. प्रतिभा तिवारी ने उत्पादन से उपयोग तक की प्रक्रिया पर चर्चा और सर्वेक्षण किया

महिला किसान वर्ष 2026 में डाॅ0 प्रतिभा तिवारी जी ने किया उत्पादन से उपयोग तक की प्रक्रिया में संपर्क/परिचय/चर्चा एवं सवेक्षण   टीकमगढ़ दिनांक 15/04/2026 को भारतीय स्त्रीशक्ति मध्यप्रदेश के द्वारा टीकमगढ़ के मिनोरा गाँव में “महिला किसान वर्ष 2026” में भारतीय स्त्री शक्ति मध्यप्रदेष की प्रदेश अध्यक्ष-डाॅ0 प्रतिभा तिवारी ने उत्पादन से उपयोग तक की प्रक्रिया में संपर्क/परिचय/चर्चा एवं सवेक्षण  किया जिसमें आपने कहा कि-उत्पादन से उपयोग तक की यह यात्रा केवल वस्तु के लेन-देन की नहीं, बल्कि विश्वास के निर्माण की प्रक्रिया है। यदि हमारा संपर्क मजबूत है, परिचय स्पष्ट है, चर्चा सकारात्मक है और सर्वेक्षण ईमानदार है, तो वह उत्पाद न केवल सफल होगा बल्कि समाज में अपनी एक अमिट छाप छोड़ेगा। उपयोगकर्ता की संतुष्टि ही किसी भी उत्पादन की वास्तविक सफलता है। उपयोगकर्ता के अनुभव को महिला किसान से बेहतर कोई नहीं समझ सकता। महिला किसान खुद उत्पादक भी है और उपभोक्ता भी। वह जानती है कि किस दाल को पकने में कम समय लगता है या किस अनाज का स्वाद मीठा है। उसका सर्वेक्षण किताबी नहीं, अनुभवी होता है। जब वह उत्पाद बाजार में लाती है, तो वह क्वालिटी कंट्रोल की पहली गारंटी होती है। किसान संघ महाकोशल की प्रदेश उपाध्यक्ष-सुश्री ज्ञानमंजरी दीक्षित ने बताया कि- आज के युग में उत्पादन का अर्थ केवल वस्तु बनाना नहीं है, बल्कि एक सम्बन्ध बनाना है। यह सम्बन्ध संपर्क से शुरू होकर उपयोग के बाद भी सर्वेक्षण के माध्यम से जीवित रहता है। आज हम जिस समाज में रहते हैं, वहां जब भी किसान शब्द का नाम लिया जाता है, तो आंखों के सामने एक पुरुष का चित्र उभरता है। लेकिन हकीकत यह है कि भारत के खेतों की असली रीढ़ हमारी महिलाएं हैं। सरपंच-श्रीमती शान्ति प्रजापति ने कहा कि- अक्सर खेतों के बाहर लगे बोर्ड पर पुरुष का नाम होता है, लेकिन उस खेत की मिट्टी के भीतर महिला किसान का पसीना होता है। महिला किसान वर्ष केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उस अदृश्य श्रम को पहचान देने का एक आंदोलन है। खेत की धूल को माथे का तिलक बनाती है, वो महिला किसान ही है जो पत्थर से भी फसल उगाती है। सिर्फ अन्न नहीं उगाती वो, इस देश का भविष्य बनाती है। प्रदेष कार्य समीति सदस्य महिला मोर्चा की श्रीमती पूनम अग्रवाल ने बताया कि-महिला किसान वर्ष मनाना तब सार्थक होगा जब हम उत्पादन से लेकर बाजार के हर सर्वेक्षण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। हमें यह स्वीकार करना होगा कि यदि किसान का हाथ मिट्टी में है, तो महिला किसान का दिल उस मिट्टी की खुशबू में है। संम्पर्क अभियान में श्रीमती रीना श्रीवास्तव, श्रीमती अनुराधा बक्षी से सम्पर्क किया गया। इसमें उपस्थित महिलाओं की संख्या 67 रही।

मध्यप्रदेश में कर्मचारियों का DA 5% बढ़ा, अप्रैल की सैलरी से मिलेगा लाभ, एरियर का भुगतान 6 किस्तों में

भोपाल  मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है। राज्य की मोहन सरकार ने  छठे वेतनमान के तहत आने वाले कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में वृद्धि की है। इस संबंध में वित्त विभाग, मप्र शासन ने 15 अप्रैल 2026 को आदेश भी जारी कर दिए हैं। एरियर का भुगतान किस्तों में किया जाएगा। वित्त विभाग के आदेशानुसार, छठे वेतनमान (6th Pay Commission) के अंतर्गत वेतन पा रहे कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) में 5 फीसदी की वृद्धि की गई है। इसके बाद महंगाई भत्ते की दर 252 फीसदी से बढ़कर 257 फीसदी हो गई है। बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता मई 2026 में मिलने वाले अप्रैल के वेतन के साथ जुड़कर आएगा। चुंकी यह वृद्धि 1 जुलाई 2025 से प्रभावी मानी जाएगी, ऐसे में जुलाई 2025 से मार्च 2026 (9 महीने) तक एरियर 6 किस्तों में दिया जाएगा। एरियर की किस्तें मई, जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2026 में वेतन के साथ खाते में जमा की जाएंगी। जिन कर्मचारी या अधिकारी इस अवधि के दौरान रिटायर्ड हो चुके हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है उनके नामांकित सदस्य को एरियर की राशि एकमुश्त दी जाएगी। इसके अलावा पांचवें वेतनमान का लाभ पाने वाले कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 8 फीसदी और चतुर्थ वेतनमान प्राप्त कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी की गई है। नई दरें 1 जुलाई 2025 से प्रभावी होंगी। एरियर की राशि 6 किस्तों में दी जाएगी। बता दें कि इससे पहले राज्य सरकार ने सातवें वेतनमान के तहत आने वाले 7.50 लाख कर्मचारियों के महंगाई भत्ते और 4.50 लाख पेंशनधारकों की महंगाई राहत में 3 फीसदी की वृद्धि की थी। एरियर का भुगतान करेगी मोहन सरकार DA का लाभ सरकार 1 जुलाई 2025 से देगी. इस तरह से जुलाई 2025 और अप्रैल 2026 के बीच के महीनों के लिए सरकार एरियर देगी. इसके लिए सरकार एरियर का भुगतान करेगी. एरियर के भुगतान को लेकर भी सरकार ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों को बकाया राशि 6 किस्तों में दी जाएगी. राज्य सरकार सातवां वेतनमान पा रहे कर्मचारियों का महंगाई भत्ता पहले ही 3 फीसदी बढ़ा चुकी है, जिसमें उनका कुल DA 58 प्रतिशत हो गया है।  कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद सरकार के इस फैसले से हजारों कर्मचारियों और पेंशनरों को राहत मिलने की उम्मीद है. बढ़ती महंगाई के बीच यह फैसला कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. ताकि वह अपने परिवार की अच्छे से देखभाल कर सकें।  अब 252% से बढ़कर 257% हुआ DA बढ़ोतरी के बाद छठे वेतनमान वाले कर्मचारियों का कुल महंगाई भत्ता 252 प्रतिशत से बढ़कर 257 प्रतिशत हो जाएगा। यह बदलाव अप्रैल 2026 के वेतन से लागू माना जाएगा। यानी इस महीने की सैलरी में कर्मचारियों को बढ़ा हुआ DA मिलना शुरू हो जाएगा। हालांकि इसका लाभ असल में 1 जुलाई 2025 से दिया जाएगा। इसका मतलब यह है कि जुलाई 2025 से मार्च 2026 तक यानी नौ महीने का एरियर भी कर्मचारियों को मिलेगा। एरियर 6 किस्तों में, रिटायर्ड को एकमुश्त सरकार ने यह भी तय कर दिया है कि नौ महीने का एरियर एक साथ नहीं दिया जाएगा। इसे छह बराबर किस्तों में बांटा जाएगा। यह किस्तें मई, जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2026 में दी जाएंगी। हर किस्त में कर्मचारी को कुल एरियर का छठा हिस्सा मिलेगा। जो कर्मचारी या अधिकारी जुलाई 2025 से मार्च 2026 के बीच रिटायर हो चुके हैं, उनके लिए अलग व्यवस्था की गई है। उन्हें एरियर की पूरी राशि एकमुश्त यानी एक ही बार में दी जाएगी। इससे रिटायर्ड कर्मचारियों को भी इस फैसले का पूरा फायदा मिल सकेगा। सातवें वेतनमान वालों को पहले ही मिली राहत मध्यप्रदेश सरकार पहले ही सातवां वेतनमान पाने वाले कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ा चुकी है। उनके DA में 3 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद सातवें वेतनमान वाले कर्मचारियों का कुल DA 58 प्रतिशत हो गया। यह बढ़ोतरी भी अप्रैल के वेतन से लागू की गई है। यानी अब दोनों वेतनमानों के कर्मचारियों को राहत मिल चुकी है। छठे वेतनमान वालों को 5% और सातवें वेतनमान वालों को 3% की बढ़ोतरी का फायदा अप्रैल की सैलरी से मिलेगा। क्यों अलग-अलग है DA दोनों के लिए छठे और सातवें वेतनमान में DA का प्रतिशत इसलिए अलग-अलग दिखता है क्योंकि दोनों की मूल वेतन संरचना अलग है। छठे वेतनमान में मूल वेतन कम होता है इसलिए DA का प्रतिशत ज्यादा रखा जाता है। सातवें वेतनमान में मूल वेतन पहले से अधिक है इसलिए DA का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम होता है। यह खबर क्यों जरूरी है? मध्यप्रदेश में छठे वेतनमान के करीब 40 हजार कर्मचारी और अधिकारी हैं। DA बढ़ोतरी का सीधा असर उनकी मासिक आय पर पड़ता है। महंगाई के इस दौर में यह फैसला उनके परिवारों के लिए राहत लेकर आया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है और सरकारी कर्मचारियों की क्रय शक्ति बनाए रखना इसी दिशा में एक कदम है।  एरियर को किस्तों में देने का फैसला सरकारी खजाने पर एकमुश्त बोझ से बचाता है, जो वित्तीय अनुशासन के लिहाज से भी सही है। रिटायर्ड कर्मचारियों को एकमुश्त भुगतान की व्यवस्था सामाजिक न्याय की भावना को दर्शाती है। यह खबर लाखों परिवारों की आर्थिक स्थिति से जुड़ी है, इसलिए इसकी अहमियत बहुत ज्यादा है।

हमारे प्रयास: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया मातृसत्ता से जुड़ने का रास्ता

हम देश को मातृसत्ता से जोड़ रहे हैं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के राजनैतिक सशक्तिकरण का नया युग हो रहा है आरंभ 16 अप्रैल 2026 महिला सशक्तिकरण की होगी मंगलमय तारीख विधानसभाओं और लोकसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण से हमारा लोकतंत्र बनेगा अधिक समावेशी, सशक्त और संवेदनशील मध्यप्रदेश नारी शक्ति के वंदन का है उत्कृष्ट उदाहरण जन चेतना के लिए नारी शक्ति वंदन अभियान को घर-घर पहुंचाना आवश्यक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम को किया संबोधित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने चुनौतीपूर्ण कार्यों को पूरा करते हुए मध्यप्रदेश सहित देश को सशक्त बनाया है। उन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया है। हम देश को मातृसत्ता से जोड़ रहे हैं। गुरुवार 16 अप्रैल 2026 महिला सशक्तिकरण की मंगलमय तारीख होगी। देश की विधानसभाओं और लोकसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का विषय आएगा तो वह समय देश में होली-दीवाली एक साथ मनाने जैसा होगा। शासन के सूत्र जब बहनों के हाथ में आते हैं तो संवेदनशीलता से परिपूर्ण कितने नवाचार किए जा सकते हैं, इसके कई उत्कृष्ट उदाहरण हमारे सामने हैं। मध्यप्रदेश रानी दुर्गावती की धरती है। राज्य सरकार ने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती मनाई। उनकी शासन व्यवस्था में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के बलबूते पर काशी में बाबा विश्वनाथ का धाम बनाया। सभी तीर्थ स्थलों पर अन्न क्षेत्र और यात्रियों के रुकने की व्यवस्था कराई। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के राजनैतिक सशक्तिकरण का नया युग आरंभ हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव "नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम-प्रबुद्ध जन सम्मेलन'' को संबोधित कर रहे थे। रविंद्र भवन के हंस ध्वनि सभागार में कार्यक्रम वंदे मातरम गान के साथ आरंभ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नारी शक्ति वंदन पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला संगठनों, स्वयं सेवी संस्थाओं, नगरीय निकायों तथा पंचायत राज संस्थाओं की प्रतिनिधियों, महिला पत्रकार, छात्राएं शामिल हुईं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोर्ड परीक्षा में टॉपर बालिकाओं को सराहा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माध्यमिक शिक्षा मंडल की हायर सेकेंड्री और हाई स्कूल परीक्षा की टॉपर छात्राओं की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉक्टर यादव ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत करने वाली छात्राओं का अंगवस्त्रम के साथ नारियल और पौधा भेंट कर अभिवादन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महिला सशक्तिकरण पर लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। कार्यक्रम में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उईके, महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, नागरिक विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, पंचायत और ग्रामीण विकास राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह, शिक्षाविद सुश्री शोभा पैठनकर, विधायक एवं पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस और सांसद श्रीमती लता वानखेड़े विशेष रूप से उपस्थित थीं। कार्यक्रम में जवाहर बाल भवन की बालिकाओं ने सरस्वती वंदना का गायन किया। मध्यप्रदेश में महिलाओं ने अदम्य साहस और नेतृत्व क्षमता के कई उदाहरण किए प्रस्तुत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नारी शक्ति के वंदन का उत्कृष्ट उदाहरण है। प्रदेश के नगरीय निकायों में बहनों को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। प्रदेश के आधे से अधिक स्थानीय निकायों की कमान बहनें संभाल रही हैं। लोकसभा में हमारी 6 बहनें सांसद और विधानसभा में 27 बहनें विधायक हैं। प्रदेश में 5 महिला मंत्री अपने विभागों की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। मध्यप्रदेश में महिलाओं ने अदम्य साहस और नेतृत्व क्षमता के कई उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। ग्वालियर अंचल से राजमाता विजया राजे सिंधिया ने तत्कालीन सरकार को छोड़ा और प्रदेश में पहली संविद सरकार बनाई । विनम्रता की प्रतिमूर्ति राजमाता ने कभी कोई पद नहीं लिया और जनता के लिए कार्य करती रहीं। इंदौर की बहन श्रीमती सुमित्रा महाजन लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष रहीं। पूर्व विदेश मंत्री स्व. सुषमा स्वराज ने भी लोकसभा में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। आज देश का राष्ट्रपति का पद श्रीमती द्रोपदी मुर्मु संभाल रही हैं। महिला कल्याण और महिलाओं के नेतृत्व में विकास हमारी प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में सभी क्षेत्रों में देश सशक्त हो रहा है। महिला कल्याण और महिलाओं के नेतृत्व में विकास उनकी प्राथमिकता है। इसी क्रम में हमारी बहनों को तीन तलाक से मुक्ति दिलाने का उल्लेखनीय कार्य भी हुआ है। देश में महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। जन चेतना के लिए नारी शक्ति वंदन अभियान को घर-घर पहुंचाना आवश्यक है। इससे हमारा लोकतंत्र अधिक समावेशी, सशक्त और संवेदनशील बनेगा। सभी वर्गों और पार्टियों से नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने में सहयोग अपेक्षित : सुश्री भूरिया महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में लागू होने जा रहे नारी शक्ति वंदन अधिनियम से देश में नारी शक्ति को सशक्त नेतृत्व के और अधिक अवसर मिलेंगे। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने लोकतंत्र की मजबूती के लिए महिलाओं को आरक्षण देने की पहल की है। इससे देश की विधानसभाओं और लोकसभा में महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी होगी। देश के नीतिगत निर्णयों में मातृ शक्ति की हिस्सेदारी बढ़ेगी। राज्य सरकार भी नारी सशक्तिकरण में कोई कसर नहीं छोड़ रही है, जिसका लाभ प्रदेश की महिलाओं को मिल रहा है। पहली बार महेश्वर में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर को समर्पित कैबिनेट हुई और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पूरा वर्ष नारी कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। अब समय आ गया है कि देश के सभी वर्गों और दलों के प्रतिनिधियों को नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने में सहयोग करना चाहिए। हमारा हर कदम देश-प्रदेश को आगे ले जाने के लिए होगा। नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम : राज्य मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर नारी शक्ति सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्य मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा लाए गए 106वें संविधान संशोधन के माध्यम से देश की करोड़ों महिलाओं को वह सम्मान और संवैधानिक शक्ति मिली है, जिसका 1996 से 2010 … Read more