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बड़ा प्रशासनिक बदलाव: 14 जिलों के कलेक्टर बदले, भोपाल की जिम्मेदारी प्रियंक को

भोपाल मध्यप्रदेश में गुरुवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए मोहन सरकार ने 26 आईएएस अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए। इस बदलाव में प्रियंक मिश्रा को भोपाल कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि वर्तमान कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को मुख्यमंत्री कार्यालय में सचिव पद के साथ आयुक्त सह-संचालक, नगर एवं ग्राम निवेश का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। तबादला सूची में महिला अधिकारियों को भी अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। राखी सहाय को उमरिया कलेक्टर, शीला दाहिमा को श्योपुर कलेक्टर और बिदिशा मुखर्जी को मैहर कलेक्टर बनाया गया है। इसके अलावा, नेहा मीना को झाबुआ से स्थानांतरित कर सिवनी कलेक्टर तथा प्रतिभा पाल को रीवा से सागर कलेक्टर की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, नर्मदापुरम की कलेक्टर सोनिया मीना को हटा कर वित्त विभाग में अपर सचिव और सिवनी कलेक्टर शीतला पटले को लोक सेवा आयोग आयोग में सचिव बनाया गया है। 

मंत्री टेटवाल ने ग्लोबल स्किल्स पार्क का भ्रमण कर प्रगतिरत कार्यों और योजनाओं की समीक्षा की

भोपाल.  कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क का भ्रमण कर संस्थान के प्रगतिरत कार्यों, निर्माण गतिविधियों एवं विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। उनके साथ राजगढ़ के विधायक अमर सिंह यादव भी उपस्थित रहे। मंत्री टेटवाल ने स्किल पार्क की अधोसंरचना, प्रशिक्षण सुविधाओं और निर्माणाधीन कार्यों का अवलोकन किया। उन्होंने कार्यों की प्रगति पर चर्चा की और निर्देश दिए कि सभी प्रगतिरत कार्य निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं, जिससे युवाओं को बेहतर और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। साथ ही उन्होंने संस्थान में संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों और भविष्य की योजनाओं की भी समीक्षा की। पुस्तकालय स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मंत्री टेटवाल ने विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं एवं प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद कर उनकी सहभागिता, रचनात्मकता और अनुशासन की सराहना की तथा उन्हें आगे भी निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। मंत्री टेटवाल ने इंडिया स्किल्स 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र विनीत शर्मा को बधाई और शुभकामनाएं दीं । उन्होंने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे विद्यार्थी प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा हैं और कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता को दर्शाते हैं। मंत्री टेटवाल ने स्किल पार्क के वर्ष 2025 बैच के उन विद्यार्थियों से भी संवाद किया, जिनका चयन ट्राइडेंट एवं एसआरएफ जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में हुआ है। उन्होंने विद्यार्थियों के प्रशिक्षण अनुभव, प्लेसमेंट प्रक्रिया और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हुए उन्हें अपने कौशल को निरंतर निखारने और रोजगार के नए अवसरों के लिए तैयार रहने के लिए प्रेरित किया। मंत्री टेटवाल ने कहा कि कौशल विकास को रोजगार से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है और स्किल पार्क जैसे संस्थान इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने कौशल को मजबूत कर प्रदेश और देश के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।  

दो पहिया वाहन चालकों को हेलमेट लगाकर चलने के लिए करें प्रेरित : परिवहन मंत्री सिंह

भोपाल.  परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने गुरुवार को शाजापुर जिले में परिवहन विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने परिवहन अधिकारी को बिना हेलमेट दो पहिया चलाने वाले वाहन चालकों को हेलमेट लगाने के लिए प्रेरित करने और हेलमेट लगाकर वाहन चलाने वालों का स्वागत करने के निर्देश दिए। मंत्री सिंह ने कहा कि विद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर पर शिविर लगाकर विद्यार्थियों को यातायात नियमों को लेकर जागरूक करें। समीक्षा बैठक के दौरान विधायक अरूण भीमावद, जिला पंचायत अध्यक्ष हेमराज सिंह सिसोदिया, डॉ. रवि पाण्डे, योगेन्द्र सिंह जादौन (बंटी बना), विजय सिंह बैस, आशीष नागर, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती अनुपमा चौहान सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।  

यूएनएफपीए की गुडविल एंबेसडर अभिनेत्री कृति सेनन मध्यप्रदेश पुलिस के सामुदायिक पुलिसिंग मॉडल से हुईं प्रभावित

भोपाल. मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा सामुदायिक पुलिसिंग के अंतर्गत भोपाल के महिला थाने में आयोजित एक प्रभावी एवं संवेदनशील कार्यक्रम में United Nations Population Fund (UNFPA) की गुडविल एंबेसडर कृति सेनन ने सहभागिता कर प्रदेश में संचालित जनोन्मुखी पुलिसिंग मॉडल की सराहना की। कार्यक्रम का मुख्‍य उद्देश्य सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों एवं वंचित समुदायों के सशक्तिकरण हेतु किए जा रहे प्रयासों को प्रदर्शित करना था। कार्यक्रम में सामाजिक संगठनों, सर्वाइवर्स, विद्यार्थियों एवं बच्चों की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे यह आयोजन बहुआयामी एवं प्रभावशाली स्वरूप में सामने आया। कार्यक्रम में स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों द्वारा अपने विचार साझा किए गए, जिसमें ‘आरंभ’ संस्था की अर्चना सहाय एवं ‘संगिनी’ संस्था की प्रार्थना मिश्रा ने सामाजिक मुद्दों पर अपने अनुभव एवं सुझाव प्रस्तुत किए। इसके बाद सर्वाइवर्स के साथ संवाद सत्र आयोजित किया गया, जो कार्यक्रम का सबसे संवेदनशील पक्ष रहा। "नातरा प्रथा" एवं विभिन्न प्रकार की प्रताड़ना से प्रभावित महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए। अभिनेत्री कृति सेनन ने उनसे संवाद कर उनके आत्मविश्वास को सुदृढ़ करने का महती प्रयास किया। कार्यक्रम में बीएसएस कॉलेज के ‘मयार ग्रुप’ द्वारा नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया, जिसमें नशा, नातरा प्रथा एवं बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के दुष्प्रभावों को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करते हुए जनजागरूकता का संदेश दिया गया। ‘सृजन कार्यक्रम’ के अंतर्गत थाना छोला क्षेत्र की स्लम बस्ती के बच्चों द्वारा मार्शल आर्ट का प्रदर्शन किया गया। कृति सेनन ने बच्चों के उत्साह एवं आत्मविश्वास की सराहना करते हुए एक बालिका से आत्मरक्षा के कुछ गुर भी सीखे, जिससे बच्चों का मनोबल और अधिक बढ़ा। कार्यक्रम के बाद ब्रांड एंबेसडर कृति सेनन द्वारा थाना परिसर का अवलोकन किया गया, जहां उन्हें सामुदायिक पुलिसिंग की विभिन्न पहल, जनसहभागिता आधारित मॉडल एवं संवेदनशील पुलिसिंग के प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी गई। पुलिस अधिकारियों द्वारा समाज में विश्वास निर्माण, सहयोग एवं सहभागिता आधारित पुलिसिंग के महत्व पर प्रकाश डाला गया। कृति सेनन ने समापन पर ‘शक्ति कैफे’ का भ्रमण कर वहां संचालित गतिविधियों की सराहना की तथा मध्यप्रदेश पुलिस की इस पहल को समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों के सशक्तिकरण की दिशा में एक सराहनीय एवं अनुकरणीय प्रयास बताया। यह आयोजन मध्यप्रदेश पुलिस की संवेदनशील एवं जनोन्मुखी कार्य प्रणाली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो समाज में विश्वास, सुरक्षा एवं सहभागिता की भावना को सुदृढ़ करते हुए समावेशी, मानवीय एवं भरोसेमंद पुलिसिंग की दिशा में उसकी सतत् प्रतिबद्धता को दर्शाता है।  

नदी जोड़ो परियोजनाओं से बदल रही है किसानों की तकदीर और मध्यप्रदेश की तस्वीर

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश की तीन अंतर्राज्यीय सिंचाई परियोजनाएं किसानों की समृद्धि और प्रदेश की तरक्की का आधार बन रही हैं। इन परियोजनाओं से जब किसान के खेतों तक पानी पहुँचेगा तो मिट्टी सोना उगलेगी। किसानों को भरपूर पानी मिलेगा, जिससे वे एक वर्ष में तीन-तीन फसलें ले सकेंगे। तीन पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के साथ प्रदेश में तीन बड़ी अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाओं पर तेजी से कार्य हो रहा है। उत्तर प्रदेश के साथ केन-बेतवा लिंक परियोजना, राजस्थान के साथ पार्वती-चंबल-कालीसिंध परियोजना और महाराष्ट्र के साथ मेगा-तापी अंडरग्राउंड वॉटर रिचार्ज परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर मध्यप्रदेश में कृषि, उद्योग, पेयजल के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध होगा। इन परियोजनाओं की विशेषता यह है कि इन पर आने वाली लागत का 90% खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। वर्तमान में मध्यप्रदेश का सिंचाई रकबा लगभग 55 लाख हेक्टेयर है। वर्ष 2028-29 तक इसे 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य मध्यप्रदेश सरकार ने रखा है। "केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना" अंतर्राज्यीय नदियों को जोड़ने की दिशा में केन्द्र सरकार, मध्यप्रदेश एवं उत्तर प्रदेश सरकार मिल कर देश की प्रथम अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना "केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना" का निर्माण कर रही है। इसकी कुल लागत 44,604 करोड़ रूपये है। मध्यप्रदेश के कार्यांश के लिए केन-बेतवा लिंक परियोजना की लागत 24,293 करोड़ रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति मध्यप्रदेश शासन द्वारा अप्रैल 2024 में जारी की गई। परियोजना के प्रथम चरण में दौधन बांध का प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिसंबर 2025 को शिलान्यास किया गया। परियोजना से दो चरणों में मध्यप्रदेश में 8 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वार्षिक सिंचाई क्षमता विकसित की जानी है। परियोजना में 126 एम.सी.एम. जल से 10 जिलों की 41 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा प्राप्त होगी। इससे 103 मेगावाट विद्युत उत्पादन किया जायेगा। परियोजना से 10 जिले छतरपुर, पन्ना, दमोह, सागर, टीकमगढ़, निवाड़ी, रायसेन, शिवपुरी, दतिया एवं विदिशा लाभान्वित होंगे। साथ ही छतरपुर, टीकमगढ़ एवं निवाड़ी के कुल 42 ऐतिहासिक तालाबों का जीर्णोद्धार भी किया जायेगा। संशोधित पार्वती-कालीसिंध चंबल लिंक परियोजना मध्यप्रदेश राज्य की अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना के अंतर्गत संशोधित पार्वती-कालीसिंध चंबल लिंक को धरातल पर लाने के लिए अनुमानित निर्माण राशि 35 हजार करोड़ रूपये है। इस परियोजना से मध्यप्रदेश राज्य में मालवा और चंबल क्षेत्र के 13 जिलों उज्जैन, गुना, शिवपुरी, श्योपुर, भिंड, मुरैना, सीहोर, शाजापुर, देवास, राजगढ़, मंदसौर, आगर-मालवा एवं इंदौर के 2012 ग्रामों की लगभग 6 लाख 15 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई हेतु जल उपलब्ध होगा। मालवा एवं चंबल क्षेत्र के 11 जिलों की 43 लाख आबादी को 61 एम.सी.एम. जल आरक्षित किया जाकर पेयजल की सुविधा प्राप्त होगी। साथ ही परियोजना से उद्योगों हेतु 17.4 मि.घ.मी. जल उपलब्ध होगा। दिसंबर 2024 में जयपुर में "पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना" का अनुबंध सहमति पत्र (मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट) भारत सरकार राजस्थान एवं मध्यप्रदेश के मध्य हस्ताक्षरित किया गया। पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना अंतर्गत परियोजना समूह की लागत 31479.48 करोड़ रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी की गई है। यह परियोजना मध्यप्रदेश के चंबल और मालवा क्षेत्र के जिलों में जल आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से लगभग 7 लाख 84 हजार कृषकों के जीवन में समृद्धि और खुशहाली आएगी। इस लिंक परियोजना के अंतर्गत 22 वृहद सिंचाई परियोजना के निर्माण के साथ ही 60 वर्ष पुरानी चम्बल दांई तट नहर एवं वितरिका तंत्र के आधुनिकीकरण से मुरैना, भिंड, एवं श्योपुर जिलों के 1205 ग्रामों में 3 लाख 62 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों को सिंचाई का सुनिश्चित लाभ मिलेगा। मेगा तापी रीचार्ज परियोजना मेगा तापी रीचार्ज परियोजना पारंपरिक जल भंडारण के स्थान पर भू-गर्भ जल पुर्नभरण योजना है, जिसका उददेश्य मानसून के दौरान तापी नदी के अतिरिक्त जल को नियंत्रित तरीके से भू-जल भरण के लिये उपयोग किया जाकर भू-जल स्तर में वृद्धि किया जाना है। तापी नदी के दाहिने किनारे सतपुड़ा पर्वत माला के तल पर स्थित बजाड़ा जोन में कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण किया जायेगा। परियोजना की लागत 19 हजार 244 करोड़ है, जिससे बुरहानपुर एवं खण्डवा जिले के 01 लाख 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जायेगी। मई 2025 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फडणवीस एवं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मध्य इसे राष्ट्रीय परियोजना के रूप में निर्मित किये जाने की सहमति प्रदान की गई। माइक्रो सिंचाई में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी उल्लेखनीय है कि माइक्रो सिंचाई में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी राज्य है एवं इस पद्धति के माध्यम से जल का अधिकतम उपयोग कर पाइप के माध्यम से प्रत्येक किसान के खेत तक पानी पहुंचाया जाता है। साथ ही ऐसे क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, जहां नहरों से पानी पहुंचाना कठिन हो। वर्तमान में प्रदेश में निर्माणाधीन अधिकतम वृहद एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाओं में इस पद्धति का उपयोग किया जा रहा है।  

कृषि केवल आजीविका नहीं, हमारी संस्कृति और अर्थव्यवस्था की है धुरी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषि केवल आजीविका नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा रही है। कृषि हमारी अर्थव्यवस्था की धुरी है और प्रदेश के समग्र विकास का आधार भी है। उन्होंने कहा कि आज कृषि एक नए मोड़ पर खड़ी है, जहां जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़, मृदा की घटती उर्वरता और बाजार की अस्थिरता जैसी चुनौतियां हमें नई सोच और नवाचार की ओर प्रेरित कर रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के कृषि क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए योजनाओं का विस्तार हुआ है, तकनीक को खेतों तक पहुंचाया गया है और नवाचार को जन-आंदोलन का रूप दिया गया है। “ड्रोन दीदी” जैसी पहल के माध्यम से महिलाएं भी आधुनिक कृषि तकनीक से जुड़ रही हैं, वहीं कृषि सखियों के माध्यम से जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी किसानों तक पहुंचाई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “कृषिः मूलं जीवनम्” का भाव हमारे समाज की जीवन-दृष्टि को व्यक्त करता है। कृषि धन्य है, पवित्र है और जीवन का मूल आधार है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए “समृद्ध किसान-समृद्ध मध्यप्रदेश” की थीम पर पूरे वर्ष 2026 को प्रदेश में कृषि उत्सव मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को भविष्य की कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना और कृषि को लाभकारी, स्थायी तथा तकनीक आधारित रोजगार सृजन मॉडल में परिवर्तित करना है। एग्री स्टैक योजना में म.प्र. अग्रणी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के जीवन को आसान बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग कर रही है। एग्रीस्टैक योजना के अंतर्गत किसानों का संपूर्ण डेटा डिजिटल रूप में उपलब्ध कराया जा रहा है और इस योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी रहा है। डिजिटल किसान डेटा इंटीग्रेशन से किसानों की जमीन, फसल और उत्पादन से जुड़ी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो रही है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। मोबाइल और ऑनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से किसानों को मौसम, बाजार भाव और फसल प्रबंधन से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है। कृषि के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की भावना के अनुरूप जय जवान-जय किसान के साथ जय विज्ञान जोड़ा गया था और वर्तमान दौर में इसमें “जय अनुसंधान” को भी जोड़ने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती, कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन और बेहतर मार्केट लिंकेज के माध्यम से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में खेती में नवीन पद्धतियों और फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। रसायन मुक्त खेती, जैविक कृषि और प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि अवशेषों अर्थात पराली के वैज्ञानिक प्रबंधन, मंडियों के आधुनिकीकरण और कृषि उत्पादों को ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफार्म से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए भी पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में कृषि को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे कृषक परिवारों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिल सके और शहरी परिवारों को ग्रामीण संस्कृति से परिचित होने का अवसर प्राप्त हो। साथ ही फूड प्रोसेसिंग और एग्री इंडस्ट्री को बढ़ावा देकर किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और प्रदेश के कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम के माध्यम से दुग्ध उत्पादन और पशुपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज और कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही सैटेलाइट और ड्रोन सर्वे के माध्यम से फसलों की निगरानी भी की जा रही है। प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स का विस्तार, मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा, पर्यावरण संरक्षण के लिए नरवाई प्रबंधन तथा जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2026 को प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीकों, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से किसानों के लिए लाभकारी कृषि का समग्र विकास सुनिश्चित करना है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से सहायता सीधे किसानों के खातों में पहुंच रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य से किसानों को फसलों का उचित मूल्य मिल रहा है और किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से कम ब्याज पर ऋण की सुविधा मिल रही है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से किसानों की फसलों को सुरक्षा प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और नवाचार के साथ कृषि को नई दिशा देने का संकल्प ही प्रदेश के किसानों को समृद्ध बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। किसानों के हित में किये जा रहे कार्य पीएम किसान सम्मान एवं मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अंतर्गत 84 लाख से अधिक किसानों के खातों में प्रतिवर्ष 12 हजार रुपये की सहायता । गेहूं उपार्जन पर 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस। धान पर 4 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर प्रोत्साहन राशि। मूंग-उड़द की एमएसपी पर खरीदी तथा उड़द पर 600 रुपये बोनस । आपदा प्रभावित 24 लाख से अधिक किसानों को 2106 करोड़ रुपये की राहत । पहली बार सोयाबीन का एमएसपी पर उपार्जन और भावांतर योजना में 1500 करोड़ रुपये का भुगतान। सरसों को भी भावांतर योजना में शामिल किया गया । किसानों को 0 प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण। 1.79 करोड़ से अधिक किसानों को फसल बीमा की सुरक्षा। पीएम कुसुम योजना के अंतर्गत 32 लाख किसानों को सोलर पंप। सूर्य मित्र … Read more

प्रधानमंत्री मोदी के 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को लागू करने के लिए उठाए कदम स्वागत योग्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के प्रावधानों को लागू करने की दिशा में बढ़ाए कदमों का हार्दिक स्वागत किया है। आगामी 16 अप्रैल को संसद की बैठक हो रही है। इस बैठक और विशेष सत्र का आयोजन महिलाओं की भूमिका को सशक्त बनाने का माध्यम बनेगा। मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री मोदी के मंत्र पर हो रहा निरंतर कार्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नारी सशक्तिकरण की इस यात्रा को अभूतपूर्व गति मिलेगी। हमारी बेटियां आज हवाई जहाज उड़ा लेती हैं और अंतरिक्ष में भी जाती हैं। जीवन के ऐसे क्षेत्रों में बहनें और बेटियां कार्य कर रही हैं, जिसकी हमने कभी कल्पना नहीं की थी। मध्यप्रदेश में उद्योग व्यवसाय के संचालन, पर्यटक स्थलों पर होम-स्टे के संचालन, टोल टैक्स की वसूली और नगरों एवं ग्रामों में मेयर और सरपंच जैसे पदों पर रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए जनकल्याण के कार्यों में बहनें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री जी के महिला सशक्तिकरण के मंत्र पर निरंतर कार्य हो रहा है। संसद की तीन दिवसीय बैठक ऐतिहासिक सिद्ध होगी उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में पहले नारी शक्ति वंदन अधिनियम सभी दलों की  सहमति से पारित किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने एक संदेश में कहा है कि वर्ष 2029 में जब लोकसभा के चुनाव होंगे तब हमारे देश की नारी शक्ति को प्रतिनिधि के रूप में लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत स्थान मिलना ही चाहिए। इसको लेकर देश में एक सकारात्मक माहौल दिख रहा है। इस विशेष कार्य के लिए 16,17 और 18 अप्रैल को संसद की विशेष बैठक हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संसद की यह तीन दिवसीय बैठक महिला सशक्तिकरण की दृष्टि से ऐतिहासिक सिद्ध होगी। आजादी के 100 साल पूरे होने तक विकसित भारत बनाने में नारी शक्ति की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रहने वाली है। 

मध्य प्रदेश में डेयरी और पशुपालन को मिलेगा बढ़ावा, महोत्सव में दिखेगा आदर्श गौशाला मॉडल और उन्नत नस्लों का दम

भोपाल खेती को लाभकारी बनाने, किसानों को आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने के उद्देश्य से रायसेन जिले में “उन्नत कृषि महोत्सव-2026” के अंतर्गत प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह महोत्सव तीन दिन तक चलेगा, जिसमें किसानों को देश के प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। महोत्सव के दौरान विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इससे किसानों को उन्नत खेती, नई तकनीकों और बेहतर उत्पादन के तरीकों की जानकारी दी जाएगी। महोत्सव में पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा स्टॉल लगाया जाएगा, जहां पशुपालकों एवं किसानों को केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही उन्नत पशु एवं कुक्कुट प्रजातियों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें गिर, साहिवाल, थारपारकर गाय, मुर्रा भैंस, कड़कनाथ मुर्गी तथा रंगीन बैकयार्ड बर्ड्स शामिल हैं। इसके साथ ही बकरी पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोजत, बीटल, बारबरी, जमुनापारी एवं सिरोही नस्लों का भी प्रदर्शन किया जाएगा। गौ-संवर्धन बोर्ड प्रस्तुत करेगा आदर्श गौशाला मॉडल मध्यप्रदेश गौ-संवर्धन बोर्ड द्वारा महोत्सव में आदर्श गौशाला का मॉडल प्रस्तुत किया जाएगा। इससे गौशाला स्थापना की दिशा में किए जा रहे बहुआयामी प्रयासों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही निराश्रित गोवंश के बेहतर प्रबंधन, स्वावलंबी गौशाला स्थापना नीति-2025 में किए जा रहे कार्यों और उनकी उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला जाएगा। इसके अतिरिक्त गौशाला उत्पादों जैसे पंचगव्य एवं गौ-शिल्प से संबंधित जानकारी भी किसानों और पशुपालकों को उपलब्ध कराई जाएगी। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने एवं पशुपालकों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से विभाग की विभिन्न प्रचलित योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की जाएगी। इनमें डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना, आचार्य विद्यासागर गौ-संवर्धन योजना, क्षीरधारा ग्राम योजना, कृत्रिम गर्भाधान हेतु संचालित हिरण्यगर्भा अभियान तथा दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान शामिल हैं। इन योजनाओं से पशुपालकों को आधुनिक डेयरी प्रबंधन, उत्पादन वृद्धि और आय संवर्धन के लिए आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। म.प्र. राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम तकनीक का करेगा प्रदर्शन महोत्सव में मध्यप्रदेश राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम, भोपाल द्वारा पशुपालकों को जानकारी देने एवं जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से उन्नत तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें भारत सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों जैसे नेशनल लाइवस्टॉक मिशन, राष्ट्रीय गोकुल मिशन, सेक्स सॉर्टेड सीमन तकनीक एवं एंब्रियो ट्रांसफर तकनीक का प्रदर्शन शामिल रहेगा। इसके अतिरिक्त चलित पशु चिकित्सा इकाई एंबुलेंस वाहन), राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम तथा राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के संबंध में भी विस्तृत जानकारी पशुपालकों को प्रदान की जाएगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से क्रिकेटर क्रांति गौड़ ने सौजन्य भेंट की

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य क्रांति गौड़ ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर खेल संगठनों के पदाधिकारी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्रिकेटर क्रांति गौड़ को आगे भी इसी तरह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव को कु. गौड़ ने क्रिकेट बाल भेंट की।                 

बड़ी खबर: प्रदेश बोर्ड में बदलाव, अब फेल और पास छात्र दे सकेंगे दूसरी परीक्षा, सप्लीमेंट्री एग्जाम खत्म

भोपाल मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने परीक्षा के संबंध में बड़ा बदलाव किया है। एमपी बोर्ड के लाखों छात्रों के हित में इसे बड़ा कदम बताया जा रहा है। एमपी बोर्ड ने दशकों से चली आ रही पारंपरिक पूरक परीक्षा यानी सप्लीमेंट्री एग्जाम प्रणाली को पूरी तरह से खत्म करने का फैसला लिया है। इसके बदले द्वितीय परीक्षा आयोजित की जाएगी। नई व्यवस्था के तहत अब सिर्फ फेल हुए छात्र ही नहीं, बल्कि वो छात्र भी पास हो सकेंगे, जो एक प्रकार से अपने रिजल्ट के पर्सेंटेज में सुधार करेंगे और जो अपने नंबरों से संतुष्ट नहीं है। खास बात ये है कि, छात्र किसी भी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। नए पैटर्न से छात्रों को अपने रिजल्ट को सुधारने का बेहतर मौका मिलेगा। परीक्षार्थी को 7 दिन में करना होगा आवेदन 12वीं की द्वितीय परीक्षा 7 मई से 25 मई तक आयोजित होगी। 10वीं की परीक्षा 7 मई से 19 मई के बीच होगी। छात्रों को मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित होने के मात्र 7 दिन के भीतर अपना आवेदन पूरा करना होगा। ये आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल रहेगी। छात्र अपने नजदीकी एमपी ऑनलाइन कियोस्क पर जाकर निर्धारित परीक्षा शुल्क जमा करके आसानी से पूरा कर सकते हैं। 7 मई से शुरू होगी परीक्षा जो छात्र किसी भी विषय में फेल होंगे, उनके तो पास होने के लिए संबंदित विषय की परीक्षा देना जरूरी है। लेकिन, नई व्यवस्था के तहत जो छात्र परीक्षा में पास हैं पर अपनी पास होने के पर्सेंटेज से संतुष्ट नहीं हैं, उन्हें लगता है कि, वो और मेहनत कर अपने परिणाम का अंक प्रतिशत सुधार सकते हैं वो भी इच्छानुसार किसी भी विषय की परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। बोर्ड ने द्वितीय परीक्षा को लेकर शेड्यूल जारी कर दिया गया है। हायर सेकेंडरी (12वीं) की द्वितीय परीक्षा 7 मई से 25 मई 2026 के बीच आयोजित होगी। जबकि, हाईस्कूल (10वीं) की परीक्षा 7 मई से 19 मई के बीच आयोजित होगी। इस तरह करें आवेदन द्वितीय परीक्षा के लिए आवेदन की प्रक्रिया को बेहद सरल रखी गई है, ताकि परीक्षा देने वाले छात्रों को कोई परेशानी न हो। द्वितीय परीक्षा में शामिल होने के लिए छात्रों को मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद सिर्फ 7 दिनों के भीतर अपना आवेदन करना होगा। ये आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल रहेगी, जिसे छात्र अपने नजदीकी एमपी ऑनलाइन कियोस्क पर जाकर निर्धारित परीक्षा शुल्क जमा करके आसानी से ऑनाइन जमा कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए परीक्षार्थी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.mpbse.nic.in पर विजिट कर सकते हैं।