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नवागत जनपद सीईओ और विकास खंड अधिकारियों के अभिमुखीकरण प्रशिक्षण का हुआ समापन

नवागत जनपद सीईओ एवं विकास खंड अधिकारियों के अभिमुखीकरण प्रशिक्षण का हुआ समापन मंत्री पटेल ने नवनियुक्त अधिकारियों से किया संवाद, लक्ष्य आधारित कार्यशैली पर दिया जोर भोपाल भोपाल स्थित मध्यप्रदेश जल एवं भूमि प्रबन्ध संस्थान में नवागत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जनपद पंचायत) एवं विकास खंड अधिकारियों के अभिमुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज समापन समारोह हुआ। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री पटेल ने नवनियुक्त अधिकारियों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि आगामी 3 वर्षों में ऐसा कार्य करें जिससे उन्हें स्वयं संतुष्टि प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि “आपकी आत्मसंतुष्टि ही इस बात का प्रमाण होगी कि आप आमजन के जीवन में कितना सकारात्मक परिवर्तन लाये है।” मंत्री पटेल ने अधिकारियों से उनके कार्य क्षेत्र, भविष्य की योजनाओं एवं चुनौतियों पर चर्चा की तथा उन्हें निरंतर संवाद बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि संवाद बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देता है और इससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता एवं प्रभावशीलता आती है। उन्होंने आगे कहा कि कई बार हम यह सोचते हैं कि हम सभी कार्य कर सकते हैं, जो सकारात्मक सोच है, लेकिन अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार कार्य करने से बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं। हर कार्य को एक स्पष्ट लक्ष्य, सुदृढ़ योजना और टीम वर्क के साथ किया जाए तो सफलता सुनिश्चित होती है। इस अवसर पर नव नियुक्त अधिकारियों ने प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्राप्त अपने अनुभवों को साझा किया। अधिकारियों ने बताया कि विगत 45 दिनों से संचालित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने उन्हें प्रशासनिक कार्य प्रणाली को समझने, विभिन्न क्षेत्रों का अवलोकन करने तथा जमीनी स्तर पर कार्य करने के व्यावहारिक पहलुओं को जानने का अवसर प्रदान किया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें विभिन्न स्थानों का भ्रमण करने का अवसर मिला, जिससे उन्होंने आने वाली चुनौतियों को समझते हुए अपने कार्य की रूपरेखा पर भी चर्चा की। कार्यक्रम के समापन अवसर पर मंत्री पटेल द्वारा सभी नवनियुक्त अधिकारियों को सम्मानित भी किया गया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी गईं। कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।  

पुष्पराजगढ़ में अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति की बैठक संपन्न

पुष्पराजगढ़ में अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति की बैठक संपन्न राजेन्द्रग्राम  अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति,के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देशनुसार राजेंद्रग्राम के गेस्ट हाउस में पुष्पराजगढ़ ब्लॉक इकाई की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम में पत्रकारों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही, जिससे संगठन की सक्रियता और एकजुटता स्पष्ट रूप से दिखाई दी। सभी अतिथियों एवं सदस्यों का माल्यार्पण से स्वागत किया गया, साथ ही स्वल्पाहार समुचित व्यवस्था की गई। समिति की कार्यक्रम को वातावरण और गरिमामय बनाते हुए ।   जिला अध्यक्ष प्रवीण चंद्रवंशी के अध्यक्षता मे बैठक आयोजित रहा। जिला अध्यक्ष नेे कहा की समिति के सभी सदस्यों हेतु  पत्रकार सुरक्षा कानून का शीघ्र कार्यान्वयन, निष्पक्ष पत्रकारिता और फेक खबरों से बचे रहने की सलाह दिया गया। और उपस्थित सदस्यों ने जिम्मेदार और सत्यनिष्ठ पत्रकारिता के महत्व पर जोर दिया। और कहा गया कि पत्रकारिता समाज का आईना होती है, इसलिए इसकी विश्वसनीयता बनाएं रखना हर पत्रकार का कर्तव्य है। समिति के विस्तार को लेकर जिला अध्यक्ष प्रवीण चंद्रवंशी ने छबिलाल महरा को ब्लॉक अध्यक्ष मनोनीत किया गया। और उनके नेतृत्व में उम्मीद जताई गई कि ब्लॉक इकाई और अधिक सशक्त और सक्रिय होगी। बैठक के दौरान सदस्यता अभियान भी चलाया गया जिसमें समिति के नए सदस्य सामिल हुए और पत्रकारों को समिति से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया। सदस्यों ने अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया। आगामी योजनाओं पर चर्चा करते हुए सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जिला स्तरीय बैठक अतिशीघ्र आयोजित की जाएगी। जिसमें संगठन के विस्तार,और नई रणनीतियों और पत्रकारों के हितों से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी। प्रमुख सदस्य प्रवीण चन्द्रवंशी, अनिल पांडे, अशोक गुप्ता, आर.पी. बघेल सहित अन्य पत्रकार उपस्थित रहे। अंत में जिला अध्यक्ष संबोधित करते हुए कहा कि समिति आप सभी के साथ खडा है और कंधे से कंधे मिलाकर चलेगा ।  

लाडली बहना योजना: कब आएंगे 1500 रुपये? 35वीं किस्त का इंतजार कर रही लाडली बहनों के लिए बड़ी खबर

भोपाल   मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक मजबूत आधार बन चुकी है. इस योजना के तहत राज्य की करोड़ों महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे वे अपने घरेलू और व्यक्तिगत खर्च आसानी से संभाल पा रही हैं. अब लाभार्थी महिलाओं को योजना की 35वीं किस्त का इंतजार है, जिसे लेकर सरकार स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं।  कब आ सकती है 35वीं किस्त? हालांकि फिलहाल लाड़ली बहना योजना की 35वीं किस्त को लेकर कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है, लेकिन सरकारी संकेतों और पिछले पैटर्न को देखते हुए माना जा रहा है कि यह राशि 10 से 15 अप्रैल के बीच महिलाओं के खातों में ट्रांसफर की जा सकती है. इससे पहले योजना की 34वीं किस्त 13 मार्च को भेजी गई थी. इस बार भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सिंगल क्लिक के माध्यम से राशि जारी कर सकते हैं।  1.25 लाख बहनों के खातों में आएंगे 1500 रुपए बता दें कि हर महीने सीएम मोहन यादव अपने किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में लाडली बहना योजना की किस्त देने के साथ ही लाडलियों के साथ राज्य स्तरीय संवाद कार्यक्रम का ऐलान कुछ दिन पहले ही कर देते हैं। लेकिन इस बार अभी तक सीएम मोहन यादव ने यह ऐलान नहीं किया है कि वह किस अप्रैल में Ladli Behna Yojana कि किस्त किस तारीख को खातों में ट्रांसफर करेंगे। न ही फिलहाल यह तय किया गया है कि लाडली बहनों के साथ संवाद का यह कार्यक्रम इस बार कौन सा गांव, तहसील, शहर बनेगा। जहां से सीएम मोहन यादव 1.25 लाख बहनों के खातों में 1500 रुपए की राशि भेजेंगे। हर महीने 10-15 के बीच आने लगी है लाडली बहना योजना की किस्त बता दें कि शुरुआती चरण में जहां लाडली बहना योजना की किस्त 5-7 तारीख के बीच आती थी, बाद में इसे बदलकर 5-10 तारीख कर दिया गया था। वहीं अब तीसरी बार जब लाडली बहना योजना की किस्त का समय बदला गया है, तो इसे बदलकर 10-15 के बीच कर दिया गया है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि कल यानी शुक्रवार 10 अप्रैल से 15 अप्रैल बुधवार के बीच कभी भी Ladli Behna Yojana की किस्त जमा की जा सकती है। ई-केवाईसी नहीं तो खाते में नहीं आएंगे पैसे बता दें कि लाडली बहना योजना का लाभ लेने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने E-KYC को अनिवार्य किया है। अगर आप योजना का लाभ लेना चाहती हैं, तो आपको E-KYC करवाना होगा। अगर आपने अभी तक यह जरूरी काम नहीं करवाया है, तो ध्यान दें लाडली बहना योजना की 35वीं किस्त का लाभ आपको नहीं मिलेगा। यानी अप्रैल माह की 35वीं किस्त के 1500 रुपए आपके खाते में नहीं आएंगे। कैसे कराएं E-KYC     E-KYC के लिए आप समग्र पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट samagra.gov.in पर जाएं     वेबसाइट पर e-KYC के ऑप्शन पर क्लिक करें     अब यहां अपनी समग्र ID और कैप्चा दर्ज करें     जैसे ही आप ID और कैप्चा दर्ज करती हैं आपके सामने पूरी जानकारी आ जाएगी     समग्र ID से जुड़ा मोबाइल नंबर आपकी स्क्रीन पर आ जाएगा     अब मोबाइल नंबर पर otp आएगा, इसे दर्ज करें और वेरिफिकेशन कर लें     इसके बाद आधार कार्ड की मदद से E-KYC प्रोसेस को पूरा करें अगर आपके पास नहीं है कहीं जाने का समय तो E-KYC के लिए यहां करें क्लिक- E-KYC महीना शुरू होते ही शुरू हो जाता है 1500 रुपए आने का इंतजार लाडली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) की पात्र भोपाल निवासी जमुना देवी का कहना है कि महीना शुरू होते ही उन्हें इंतजार होता है कि इस बार देखो सीएम कब हमें पैसे भेजेंगे। उनका कहना है कि सीएम जैसे ही पैसे भेजते हैं तो मन खुश हो जाता है, क्योंकि इस पैसे से मैं बच्चों की जरूरतें पूरी करती हूं। पोता-पोती हो जाते हैं खुश लाडली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) का लाभ लेने वाली 56 वर्षीय हेमलता का कहना है कि जब उनके खाते में लाडली बहना योजना की किस्त आती है, तो वो खुद ही नहीं उनके पोता-पोती भी खुश हो जाते हैं। क्योंकि उन्हें पता होता है कि दादी अब हमें 10-10 रुपए पॉकेटमनी के देगी। वह बताती हैं कि बेटे की कमाई ज्यादा नहीं है, घर में 6 सदस्य हैं, ऐसे में इस राशि से मेरी दवाएं आ जाती हैं। सहारा तो तिनके का भी बहुत होता है।

मध्य प्रदेश की नर्सिंग भर्ती में 100% महिला आरक्षण पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल, सरकार से पूछा- जेंडर भेदभाव क्यों?

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में महिलाओं को सौ प्रतिशत आरक्षण देने को चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने सरकार से पूछा है कि जेंडर के आधार पर भेदभाव क्यों किया जा रहा है। दरअसल, प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के पदों पर 800 से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। मामले पर अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी। संतोष कुमार लोधी सहित कई अन्य पुरुष अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर हाल ही में जारी नर्सिंग ऑफिसर के भर्ती विज्ञापन को चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने बताया कि कर्मचारी चयन मंडल द्वारा दो अप्रैल, 2026 को जारी विज्ञापन (नर्सिंग ऑफिसर व सिस्टर ट्यूटर भर्ती परीक्षा-2026) में नर्सिंग आफिसर के सौ प्रतिशत पद केवल महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कर दिया गया है। पुरुष अभ्यर्थी पूरी तरह से वंचित हो गए इससे योग्य पुरुष अभ्यर्थी आवेदन करने से पूरी तरह वंचित हो गए हैं। दलील दी गई कि मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा (अराजपत्रित) सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2023 के तहत नर्सिंग ऑफिसर के पद के लिए कोई लिंग-आधारित प्रतिबंध नहीं है। मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के भर्ती विज्ञापन में किया गया यह प्रविधान वैधानिक नियमों के विपरीत है। 100 प्रतिशत पदों पर आरक्षण को हटाया जाए तर्क दिया गया है कि पुरुष और महिला दोनों एक ही पाठ्यक्रम (बीएससी नर्सिंग/जीएमएम) पढ़ते हैं और उनके पास समान योग्यता व पंजीकरण होता है। केवल जेंडर के आधार पर सार्वजनिक रोजगार से पूर्णतः बाहर करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन है। मांग की गई है कि विज्ञापन के उस हिस्से को निरस्त किया जाए जो 100 प्रतिशत पदों को महिलाओं के लिए आरक्षित करता है।  

धार भोजशाला पर बड़ा खुलासा, मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट में बताया मंदिर या मस्जिद होने का सच

धार   इंदौर में चल रहे भोजशाला मामले में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस (HFJ) ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में कहा कि उन्हें भोजशाला कमाल मौला परिसर में पूजा करने का खास अधिकार मिलना चाहिए. उनका कहना है कि वहां पहले एक हिंदू मंदिर था और मंदिर का पवित्र महत्व समय के साथ खत्म नहीं होता है. भगवान की पहचान नहीं मिटती, हाई कोर्ट में भोजशाला पर टकराव HFJ के वकील विष्णु शंकर जैन ने अपनी दलील में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद और श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह से जुड़े मामलों के फैसलों का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि भगवान को कानून में एक “कानूनी व्यक्ति” माना जाता है और अगर मंदिर या मूर्ति को नुकसान भी पहुंच जाए, तब भी उसकी पहचान खत्म नहीं होती है. उन्होंने यह भी कहा कि उनका तर्क सिर्फ इस पर नहीं है कि वहां पूजा होती रही है, बल्कि इस पर है कि वहां पहले से मंदिर मौजूद था. इसलिए उन्हें पूजा का अधिकार मिलना चाहिए. उन्होंने अपनी बात को एक बार मंदिर, हमेशा मंदिर कहकर समझाया. इस मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी. भोजशाला के प्राचीन इतिहास पर विस्तार इससे पहले भी हिंदू पक्ष ने भोजशाला के प्राचीन इतिहास पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 10वीं और 11वीं शताब्दी में परमार वंश के शासनकाल के दौरान भोजशाला एक प्रमुख विद्या और संस्कृति केंद्र के रूप में स्थापित थी. राजा भोज द्वारा निर्मित यह जगह मूल रूप से सरस्वती मंदिर के रूप में जाना जाता था, जहां छात्रों को शिक्षा दी जाती थी. सुनवाई के दौरानभोजशाला परिसर में लगाए गए बोर्ड का भी जिक्र किया गया, जिसमें स्थल की ऐतिहासिक और पुरातात्विक को दिखाता था. हिंदू पक्ष ने पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) द्वारा किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण का समर्थन किया और रिपोर्ट में आए तथ्यों को अपनी दलीलों के पक्ष में बताया. शपथ पत्र में क्या लिखा था? उन्होंने बताया कि इसी शपथ-पत्र में माना गया है कि इसके निर्माण(Dhar Bhojshala) में जिन पत्थरों का उपयोग हुआ, वो यहां मौजूद मंदिर भोजशाला के थे। इसी कारण इसमें संस्कृत के श्लोक भी हैं। इस्लाम में किसी मंदिर को तोड़कर या उसी जगह पर मस्जिद बनाने को गलत माना गया है। हमने जो फोटो और बातें रखी हैं, उनका कहीं भी सोसायटी ने विरोध नहीं किया, न ही इन्हें नकारा है।  आजाद भारत में खिलजी के कानून नहीं चल सकते अभिभाषक जैन ने आगे कहा कि गुलाम वंश, खिलजी वंश, मुगलों का समय, ये ऐसे दौर रहे हैं जब हिंदुओं के धार्मिक अधिकारों को उनसे छीना गया था। धार्मिक स्थानों पर पूजा-अर्चना पर पाबंदी लगाई गई थी। जबकि वर्ष 1950 में भारत में संविधान लागू होने के बाद सभी को अनुच्छेद-25 और 30 के तहत अधिकार मिले, तो यह अधिकार भी मिला कि सभी अपने धार्मिक रिवाजों का पालन करने और अपने शैक्षणिक संस्थानों के संरक्षण के अधिकार के पात्र हैं। गुलाम वंश या खिलजी वंश के शासकों ने आदेश दिए थे, वो आदेश भारत में संविधान आने के बाद लागू नहीं किए जा सकते। कोर्ट ने उन्हें टोकते हुए इसका आशय उनसे पूछा तो जैन ने कहा, इन शासकों ने ही धर्मस्थलों को तोड़कर बदला था। समर्थन में राम जन्मभूमि के फैसले का जिक्र सुनवाई (Dhar Bhojshala) के दौरान अभिभाषक जैन ने अपनी दलीलों को पुख्ता करने के लिए पूर्व में सुप्रीम कोर्ट, इलाहबाद हाईकोर्ट सहित अन्य हाईकोर्ट द्वारा अलग-अलग मामलों में दिए आदेशों का हवाला भी दिया। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि केस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए फैसले को कई दलीलों के समर्थन में रखा।

एमपी में किसानों के लिए बड़ी राहत: चार संभागों में शुरू हुई गेहूं खरीदी, सरकार देगी बोनस

भोपाल   न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीदी आज से भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम और उज्जैन संभाग के जिलों में हुई शुरू । इसके लिए तीन दिन पहले से स्लॉट बुकिंग शुरू हो गई थी, जिन किसानों ने गेहूं तुलाई की तारीख 9 अप्रेल चुनी होगी, उनका ही गेहूं खरीदा जाएगा। शेष संभागों में खरीदी 15 अप्रेल से होगी। सीएम डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को किसानों व जनप्रतिनिधियों से वर्चुअल चर्चा की। बारिश-धूप से बचाव के इंतजाम किए जाएं सीएम ने कहा कि मप्र किसान जब उपज लेकर केंद्रों तक आएं तो उसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्रों की होगी। बेमौसम बारिश में किसानों की उपज न भीगे। गर्मी में उन्हें परेशान न होना पड़े, इसका ध्यान रखा जाए। अगले वर्षों में 2700 रुपए देंगे सीएम ने किसानों से कहा कि सरकार हर किसान का गेहूं खरीदेगी। भुगतान समय पर करेंगे। इस साल बोनस मिलाकर 2625 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान होगा। आगामी वर्षों में राशि 2700 प्रति क्विंटल तक लेकर जाएंगे।  बता दें कि राज्य सरकार प्रदेश के किसानों को गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त बोनस के रूप में 40 रुपए प्रति क्विंटल का लाभ भी इस वर्ष देने जा रही है। इसके लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं। 19 लाख से ज्यादा किसानों ने कराया पंजीयन उपार्जन वर्ष 2026-27 में गेहूं उपार्जन के लिए प्रदेश के 19 लाख 4 हजार 644 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। गेहूं उपार्जन के लिए इस वर्ष प्रदेश में कुल 3 हजार 627 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं। बीते उपार्जन वर्ष 2025-26 में 15 लाख 44 हजार 55 किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए अपना पंजीयन कराया था। हेल्प डेस्क बनाए, सीएम ने किसानों को भी दिए निर्देश सीएम मोहन यादव ने बताया कि उपार्जन केंद्रों पर हेल्प डेस्क स्थापित किए जा रहे हैं, जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम से खरीदी की संपूर्ण व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाएगी। उपार्जन केंद्रों पर पंप्लेट और होर्डिंग के जरिए भी किसानों को व्यवस्था के संबंध में जानकारियां देने के निर्देश दिए गए हैं। बताते चलें कि वर्ष 2026 से किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। उपार्जन केन्द्रों पर आने वाले किसानों को उनके कल्याण तथा हितों से जुड़ी शासन की योजनाओं से भी अवगत कराए जाने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर कार्यालयों को घेरने की तैयारी में कांग्रेस मध्य प्रदेश में देरी से गेहूं की खरीद शुरू होने के मामले में एमपी कांग्रेस, किसान कांग्रेस के पदाधिकारी और सभी जिलों के अध्यक्ष कलेक्टर कार्यालयों का घेराव करने की तैयारी कर चुके हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी छतरपुर जिले में प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं। आज से इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में गेहूं की खरीद शुरू हो रही है। 15 अप्रैल से प्रदेश के दूसरे संभागों में गेहूं खरीद शुरू हो जाएगी।

कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल को स्कूल शिक्षा मंत्री ने दिया भरोसा, पात्रता परीक्षा पर सरकार सुप्रीम कोर्ट में रखेगी पक्ष

भोपाल  स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने राज्य कर्मचारी संघ और शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल से कहा है कि तकनीकी एवं विधि सम्मत कार्यवाही की प्रकिया के उपरांत सरकार शीघ्र ही उच्चतम न्यायालय में प्रदेश के शिक्षकों का पक्ष रखेगी। सरकार जल्दबाजी में शिक्षकों की विपरीत कोई भी निर्णय नहीं करेगी। शिक्षकों की पात्रता परीक्षा को लेकर मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ एवं शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों ने स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप से मुलाकात कर समस्याएं बताईं। प्रतिनिधि मंडल ने संयुक्त रूप शिक्षा मंत्री से पात्रता परीक्षा को लेकर प्रदेश के शिक्षकों का पक्ष रखा तथा सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट मे पक्ष रखने का आग्रह किया। इसके बाद शिक्षा मंत्री ने आश्वस्त किया कि सरकार शिक्षकों के साथ है, हम शिक्षकों के पक्ष में पूरी तरह से खड़े हुए हैं। सरकार जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं करेगी राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. अनिल भार्गव वायु ने जानकारी दी है कि तकनीकी एवं विधि सम्मत कार्यवाही की प्रकिया के उपरांत सरकार शीघ्र ही उच्चतम न्यायालय में प्रदेश के शिक्षकों का पक्ष रखेगी। सरकार जल्दबाजी में कोई भी शिक्षकों की विपरीत निर्णय नहीं करेगी। प्रतिनिधि मंडल मे भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर, मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौड़, मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत श्रीवास्तव एवं प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह उपस्थित रहे। प्रदेश के समस्त शिक्षक एकजुट हैं मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत श्रीवास्तव ने कहा कि “प्रदेश के समस्त शिक्षक एकजुट हैं और अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं। हमें विश्वास है कि सरकार शिक्षकों के हितों की रक्षा करते हुए न्याय दिलाएगी।” शिक्षकों का पक्ष मजबूती से रखेंगे मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौड़ ने भी कहा कि “शिक्षकों का पक्ष पूरी मजबूती से रखा है और हमें पूर्ण विश्वास है कि सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि “सरकार के सकारात्मक रुख से प्रदेश के शिक्षकों में विश्वास मजबूत हुआ है। हम सभी शिक्षक एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं और न्याय मिलने की पूरी आशा है।” '28 साल बाद मांग रहे योग्यता का प्रमाण' रायसेन जिले में बतौर शिक्षक सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाली नेहा पटेल टेट परीक्षा के खिलाफ लोक शिक्षण संचालनालय पर प्रदर्शन करने पहुंची. वह कहती हैं कि "उन्हें स्कूलों में बच्चों को पढ़ाते हुए 28 साल का वक्त बीत चुका है. इस दौरान उनके पढ़ाए हुए कई बच्चे सरकारी नौकरी में हैं और कुछ बच्चे अच्छे पदों तक पहुंचे हैं लेकिन आज मुझे ही मेरी योग्यता का प्रमाण पात्रता परीक्षा के रूप में मांगा जा रहा है।  महाराष्ट्र राज्य से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय केन्द्र सरकार ने 2009 में शिक्षा का अधिकार कानून पूरे देश में लागू किया था. सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र राज्य से संबंधित एक मामले में और अन्य याचिकाओं पर निर्णय दिया था कि प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में कार्यरत सभी शिक्षकों को टीईटी परीक्षा पास करना जरूरी होगा. जिन शिक्षकों का रिटायरमेंट 5 साल रह गया है, उन्हें इससे छूट दी गई है. परीक्षा पास न होने पर टीचर्स को रिटायर्ड कर दिया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा भी परीक्षा को पास करने का आदेश जारी कर दिया गया।  सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए मध्य प्रदेश के सभी शिक्षकों को टीईटी परीक्षा पास करने के निर्देश दिए गए हैं. यह परीक्षा संभवता जुलाई और अगस्त माह में होगी. हालांकि इसको लेकर सवाल उठाया जा रहा है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय महाराष्ट्र के संबंध में दिया और मध्य प्रदेश इसमें पक्षकार ही नहीं था, तब भी इसे प्रदेश में क्यों लागू कर दिया गया।  नई परीक्षा शर्त लागू करना अनुचित शिक्षकों ने बताया कि वह वर्षों से शिक्षा विभाग में नौकरी कर रहे हैं और सभी पात्रता मापदंड को पूरा करने के बाद ही भर्ती हुए हैं। उनके द्वारा विषय के अनुसार बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, लेकिन अचानक से नई परीक्षा की शर्त उनके ऊपर थोप देना कहीं से भी न्याय ओचित्य नहीं है। आदेश के बाद लाखों शिक्षकों के भविष्य पर संकट खड़ा हो रहा है। इधर पात्रता परीक्षा का आदेश जारी होने के बाद शिक्षकों के लिए काम करने वाले संगठन भी एकजुट हो गए हैं। उन्होंने भी आदेश के विरोध में कहा है कि प्रदेश में कई शिक्षक 20-25 साल से विभाग को अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जब उनकी नियुक्ति हुई थी तब सेवा शर्तों में पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता नहीं थी। ऐसे में इतने वर्ष बाद नई शर्त को लागू कर परीक्षा लेना नियमों के विपरीत है। संयुक्त संगठन का आरोप है की डीपीआई जो आदेश परीक्षा को लेकर जारी किया है। उसमें राज्य सरकार से औपचारिक मंजूरी नहीं ली गई है। दरअसल लोक शिक्षण संचनालय ने 3 मार्च को एक आदेश जारी किया था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए वर्तमान में सेवाएं दे रहे। शिक्षकों के लिए जुलाई अगस्त में टीईटी परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए गए थे। निर्देश मिलने के बाद से ही शिक्षकों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। शिक्षकों ने लगाया परेशान करने का आरोप डीपीआई पहुंचे शिक्षकों ने अपने विभाग पर परेशान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि हर काम में शिक्षकों को आगे किया जाता है। चुनाव ड्यूटी, बीएलओ, एसआईआर,जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कामों में शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाती है और वह बच्चों को पढ़ाने के साथ पूरी ईमानदारी से दिए हुए कामों को पूरा करते हैं। कुछ शिक्षकों ने कहा कि वर्तमान समय में जनगणना का काम चल रहा है, उसमें उनकी ड्यूटी लगाई गई है। इसके ऊपर विभाग ने आदेश जारी कर जुलाई अगस्त में परीक्षा लेने की बात कही है। शिक्षक स्कूल में बच्चों की पढ़ाई भी करवा रहे हैं, जनगणना भी कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें परीक्षा के लिए पढ़ाई का समय कैसे मिलेगा यह सोचने वाली बात है। शिक्षकों ने कहा कि विभाग उन्हें परेशान करने का काम कर रहा है। कई शिक्षक परीक्षा की बात से चिंतित होकर तनाव में आ रहे हैं।

MP में बढ़ेगी गर्मी: कल से पारा 5-6°C तक बढ़ेगा, 7 जिलों में अलर्ट जारी

भोपाल मध्यप्रदेश में मौसम का मिजाज एक बार फिर करवट लेने वाला है। बीते कई दिनों से आंधी-बारिश और बादलों के कारण मिली राहत अब खत्म होने जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार 10 अप्रैल से प्रदेश में तेज गर्मी का दौर शुरू होगा और दिन के तापमान में 5 से 6 डिग्री सेल्सियस तक उछाल आ सकता है।हालांकि, इससे पहले गुरुवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम सक्रिय रहेगा। उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, सिवनी और बालाघाट जिलों में आंधी, बारिश और गरज-चमक का अलर्ट जारी किया गया है।  मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट में आंधी, बारिश और गरज-चमक का अलर्ट जारी किया है। इससे पहले बुधवार को भोपाल, जबलपुर, रायसेन, शिवपुरी, रतलाम, छतरपुर, नर्मदापुरम, उज्जैन, इंदौर, धार समेत 15 से ज्यादा जिलों में बारिश का दौर रहा। इससे दिन के तापमान में भी गिरावट देखने को मिली। यह सिस्टम एक्टिव रहे बुधवार को एमपी के उत्तर, पूर्वी और पश्चिमी हिस्से में 3 साइक्लोनिक सकुर्लेशन (चक्रवात) एक्टिव रहे। इस वजह से बारिश का दौर रहा। भोपाल में भी हल्की बारिश के साथ तेज आंधी चली। 11 अप्रैल को नया सिस्टम मौसम विभाग की माने तो 11 अप्रैल को उत्तर-पश्चिमी हिस्से में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक्टिव होगा। हालांकि, एमपी में इसका असर कम ही देखने को मिलेगा। तेज आंधी भी चलेगी मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को प्रदेश में तेज आंधी भी चलेगी। कुछ जिलों में इसकी अधिकतम रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक रहेगी। बाकी में 30 से 40 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी चलेगी। मौसम का मिजाज दोपहर बाद ही बदलेगा। अब शुरू होगा असली गर्मी का सीजन मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अप्रैल और मई प्रदेश में गर्मी के पीक महीने होते हैं। इस बार मार्च के आखिरी दिनों में तापमान 41°C के पार पहुंच गया था, लेकिन बार-बार एक्टिव सिस्टम के चलते गर्मी का असर धीमा पड़ा। पिछले 8 दिनों से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार बारिश, ओलावृष्टि और आंधी का दौर बना रहा। फरवरी और मार्च में भी चार-चार बार मौसम बदला, जिससे फसलों को भारी नुकसान हुआ। . अप्रैल-मई में सबसे ज्यादा गर्मी जिस तरह दिसंबर-जनवरी में सर्दी और जुलाई-अगस्त में सबसे ज्यादा बारिश होती है, उसी तरह गर्मी के दो प्रमुख महीने अप्रैल और मई हैं। इस बार मध्यप्रदेश में मार्च के दूसरे पखवाड़े में पारा 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचा था। मार्च के आखिरी में टेम्प्रेचर बढ़ने लगता है, लेकिन इस बार ऐसा मौसम नहीं रहा। आखिरी 3 दिन वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की वजह से पारे में गिरावट आई। इसी तरह अप्रैल के पहले पखवाड़े में बारिश, ओले और आंधी का दौर चल रहा है। पिछले 8 दिन से प्रदेश में कहीं न कहीं बारिश हो रही है। फरवरी-मार्च में 4-4 बार बदला मौसम इस साल जनवरी में बारिश नहीं हुई, लेकिन फरवरी और मार्च में 4-4 बार मौसम बदला। ठंड के मौसम में ही फरवरी में मौसम का मिजाज बदल गया। शुरुआत में ही प्रदेश में दो बार ओले, बारिश और आंधी का दौर रहा। इससे फसलों को खासा नुकसान हुआ था। इसके बाद सरकार ने प्रभावित फसलों का सर्वे भी कराया था। 18 फरवरी से तीसरी बार प्रदेश भीग गया है। 19, 20 और 21 फरवरी को भी असर रहा। फिर चौथी बार 23-24 फरवरी को भी ओले-बारिश का दौर रहा। मार्च में गर्मी के सीजन की शुरुआत हो गई। पहले पखवाड़े में तेज गर्मी वाला मौसम रहा। दूसरे पखवाड़े में बारिश शुरू हो गई। एक दौर लगातार 4 दिन तक रहा। इस दौरान 45 से ज्यादा जिलों में आंधी-बारिश हुई। वहीं, 17 जिलों में ओले भी गिरे। इससे गेहूं, पपीता और केले की फसलें बर्बाद हुई है। तीसरा दौर 26-27 मार्च को रहा। 27 मार्च को सतना, रीवा, दतिया और भिंड में बारिश हुई। सतना के चित्रकूट में आंधी चलने और बारिश होने की वजह से दीप सज्जा के कार्यक्रम पर असर पड़ा था। चौथी बार मौसम ने 29-30 मार्च को फिर से करवट बदली है। 30 मार्च को एमपी के आधे हिस्से में कहीं बारिश-आंधी तो कहीं ओले भी गिरें।

मुख्य सचिव जैन ने निर्देश दिया: 2026-27 की कार्य योजना और लक्ष्य 15 अप्रैल तक प्रस्तुत करें

विभाग वर्ष 2026-27 की कार्य योजना और लक्ष्य 15 अप्रैल तक प्रस्तुत करें : मुख्य सचिव जैन लोक सेवा गांरटी और सी.एम हेल्पलाइन प्रकरणों का साप्ताहिक करें रिव्यू महिला सशक्तिकरण की सफल कहानियों का करें प्रचार मुख्य सचिव जैन ने की योजनाओं की वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा भोपाल  मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी विभागाध्यक्षों से कहा है कि वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं को समाहित कर अपने विभाग की वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कार्य योजना और लक्ष्य 15 अप्रैल तक प्रस्तुत करें। उन्होंने सी.एम हेल्पलाइन और लोक सेवा गारंटी के प्रकरणों में समय-सीमा से ऊपर के प्रकरणों की समीक्षा करने के साथ सेंपल जांच करने के निर्देश भी दिए हैं। मुख्य सचिव जैन बुधवार को मंत्रालय में समस्त विभागाध्यक्षों के साथ विभागीय योजनाओं की समीक्षा कर रहे थे। मुख्य सचिव जैन ने अधिकारियों से कहा कि वे पिछले ढाई साल में अपने-अपने विभाग की बड़ी और विशेष उपलब्धियों और आगामी वर्ष में किये जाने वाले महत्वपूर्ण कार्यों की जानकारी अगले एक सप्ताह में प्रस्तुत करें। उन्होंने लोक सेवा गारंटी और सी.एम हेल्पलाइन के समय-सीमा से अधिक लंबित प्रकरणों में योजना और प्रक्रिया की जानकारी ली तथा अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे हर सप्ताह रिव्यू करें जिससे लंबित प्रकरणों में संतोषजनक निराकरण हो सके। उन्होंने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने के निर्देश भी दिए। मुख्य सचिव जैन ने वर्ष 1947 के पूर्व बने कानूनों में संशोधन, निरसन और नया एक्ट लाने की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने 31 मई की अंतिम समय-सीमा निर्धारित करते हुए संबंधित विभागाध्यक्षों से कहा है कि वे सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस कार्य को पूर्ण करें जिससे आवश्यक होने पर मंत्रि-परिषद की मंजूरी ली जा सके। बैठक में एक्शन प्लान-2028 की प्रगति रिपोर्ट का स्टेट्स रिव्यू भी किया गया। मुख्य सचिव जैन ने कहा कि प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में काफी बेहतर काम हुआ है। इन कार्यों को जन-जन तक लाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार भी होना चाहिए। उन्होंने सफल महिलाओं की सक्सेस स्टोरी समाज के सामने लाए जाने के लिए अभियान चलाने के लिए कहा है। मुख्य सचिव जैन ने जल गंगा संवर्धन अभियान में सम्मलित सभी ग्रामीण, नगरीय, वन क्षेत्र आदि के कार्यों की समीक्षा की और सभी संबंधित विभागों की प्रगति रिपोर्ट एक ही प्रारूप में रखने के निर्देश दिए। उन्होंने गर्मी के मौसम को दृष्टिगत रखते हुए पेयजल की सुगम उपलब्धता के लिए लगातार एक्शन मोड में काम करने को कहा। उन्होंने नए हैंडपंप खनन के लिए एक-दो दिन में एसओपी जारी करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि जिलों में आवश्यकता अनुसार राइजर पाइप सहित अन्य सामग्री उपलब्ध करा दी गई है। मुख्य सचिव जैन ने ग्रामीण अंचलों में अग्नि-दुर्घटनाओं की रोकथाम के अलावा बचाव कार्य के लिए योजना बनाने के लिए कहा है। उन्होंने गृह विभाग को निर्देश दिए कि वे थाना स्तर पर अग्नि शमन के लिए उपलब्ध टैंकर्स आदि की जानकारी एकत्र कर लें और नागरिकों तक इसे प्रचारित भी करें जिससे अग्नि दुघर्टना आदि की स्थिति में सहायता ली जा सके। उन्होंने गर्मीजनित रोगों के बचाव और उपचार की व्यवस्थाएं बेहतर करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव जैन ने एमपीई-सेवा पोर्टल के उपयोग की समीक्षा की और इसे नागरिकों के लिए और भी आसान बनाने के निर्देश दिए। अब तक 1055 सेवाएं आनॅलाइन हुई हैं। उन्होंने कहा कि सभी विभाग अपनी-अपनी सेवाएं देखकर अद्यतन कर लें। बैठक में कैबिनेट के निर्णयों का समय पर पालन सुनिश्चित करने, न्यायालयीन प्रकरणों में संवेदनशीलता बरतने और अधीनस्थों की सी आर समय सीमा में लिखने पर भी चर्चा हुई। बैठक में अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव सहित विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।  

जनजातीय कल्याण केंद्र बरगांव में विकास कार्यों का लोकार्पण, शिक्षा और संस्कार पर जोर

जनजातीय कल्याण केंद्र बरगांव में विकास कार्यों का लोकार्पण, शिक्षा व संस्कार पर दिया गया जोर भोपाल उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि जनजातीय कल्याण केंद्र में गरीब एवं पिछड़े वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करते हुए उनके शारीरिक, मानसिक एवं सांस्कारिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज कार्यक्रम में प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मल्लखंभ के प्रदर्शन को देखकर अत्यंत संतोष एवं गर्व का अनुभव हो रहा है। उन्होंने आगे कहा कि जिस प्रकार यह परिसर तैयार हुआ है, वह संकल्प से सिद्धि का एक जीवंत उदाहरण है। समाज सेवा ही राष्ट्र सेवा है, और समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को सुविधा सम्पन्न बनाना, उसे शिक्षित एवं संस्कारित करना ही पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय दर्शन का मूल उद्देश्य रहा है।’’ उपमुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कथन को स्मरण करते हुए कहाकृ “आओ दीप वहां जलाएं, जहां आज भी अंधेरा है।” उन्होंने कहा कि इस केंद्र को देखकर प्रतीत होता है कि वह संकल्प आज साकार रूप ले रहा है और समाज के वंचित वर्ग के जीवन में उजाला फैल रहा है।’’ सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर ने कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए सर्वप्रथम अच्छे व्यक्तियों का निर्माण आवश्यक है। उन्होंने बताया कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के उद्देश्य से 100 ग्रामों को चिन्हित कर उन्हें रोगमुक्त, व्यसनमुक्त, विवादमुक्त एवं क्षुधामुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने “मेरा गांव, स्वस्थ गांव” की थीम पर कार्य करने का आह्वान करते हुए आदर्श ग्राम निर्माण का संकल्प दोहराया तथा प्रत्येक ग्राम में सद्भावना बैठकों के माध्यम से सामाजिक समरसता एवं स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। राजकुमार मटोले ने कहा कि अनुसूचित जनजाति के आर्थिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़े ग्रामीण विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर उनके शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास को सुनिश्चित करना आवश्यक है। साथ ही नैतिक एवं मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण, उच्च आदर्शों एवं मातृशक्ति युक्त परिवेश का निर्माण करना भी हमारा लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि नेतृत्व क्षमता एवं अपरिमित संभावनाओं से युक्त आत्मनिर्भर युवाओं का निर्माण किया जाना चाहिए, ताकि वे जिम्मेदार नागरिक बनकर समाज एवं राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित हो सकें। विकासखंड शहपुरा के ग्राम पंचायत बरगांव में स्थित जनजातीय कल्याण केंद्र प्रांगण के बाउंड्री वॉल एवं नर्मदाँचल विद्यापीठ शिक्षक भवन, सोलर पेनल और वार्षिक प्रतिवेदन का भव्य लोकार्पण समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, राम दत्त चक्रधर, राजकुमार मटाले, स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी, राज्य मंत्री एवं संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी तथा पर्यटन मंत्री प्रीतम लोधी की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभांरभ अतिथियों के द्वारा लोकार्पण के साथ हुआ। तत्पश्चात मुख्य अतिथियों द्वारा भारत माता, वीरांगना रानी दुर्गावती एवं भगवान बिरसा मुंडा के छायाचित्र पर दीप प्रज्ज्वलित व माल्यार्पण किया गया। तत्पश्चात नर्मदाचंल विद्यापीठ की बालिकाओं के द्वारा सरस्वती वंदना एंव सामूहिक लोकनृतय पर सुन्दर प्रस्तुति दी गई एवं विद्यालय के खिलाडी बच्चों के द्वारा राजकीय खेल मलखम्ब का शानदार प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में शहडोल सांसद श्रीमती हिमाद्री सिंह, शहपुरा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे, सीधी सांसद डॉ. राजेश मिश्रा, राजनगर विधायक अरविन्द पटेरिया, पन्ना विधायक ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह, मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल, जबलपुर कैंट विधायक अशोक रोहाणी, सागर विधायक शैलेन्द्र जैन, देवसर विधायक राजेंद्र मेश्राम, ब्योहारी विधायक शरद कोल, विधायक गौरव पराधी, सचिव डॉ अनिच बाजपेयी, अध्यक्ष मनोहर शाहू, जिला अध्यक्ष चमरू सिंह नेताम, जनपद अध्यक्ष शहपुरा श्रीमती प्रियंका आर्मो, सुधीर दत्त तिवारी, आशीष वैश्य सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। जिला प्रशासन की ओर से कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया, पुलिस अधीक्षक श्रीमती वाहनी सिंह, एसडीएम शहपुरा ऐश्वर्य वर्मा, तहसीलदार रामप्रसाद मार्को सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।