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हर विधानसभा में एक खेल परिसर का निर्माण हमारा लक्ष्य : मंत्री सारंग

मंत्री विश्वास सारंग ने ली खेल एवं युवा कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक हर विधानसभा में एक खेल परिसर का निर्माण हमारा लक्ष्य : मंत्री सारंग भोपाल  सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने बुधवार को टी.टी. नगर स्टेडियम, भोपाल स्थित मेजर ध्यानचंद हॉल में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विभागीय समीक्षा बैठक ली। मंत्री सारंग ने विभागीय योजनाओं, वर्तमान कार्यों की प्रगति तथा आगामी कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मंत्री सारंग ने निर्देश दिए कि प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा में एक आधुनिक खेल परिसर के निर्माण के लक्ष्य को प्राथमिकता के साथ शीघ्र पूर्ण करने की दिशा में विशेष ध्यान दें। इसके लिए पृथक एवं प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि खेल अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को निखारने का आधार बनेगा। मंत्री सारंग ने निर्देश दिए कि इस वर्ष समर कैंप को विशेष एवं नवाचारपूर्ण रूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में अधिक से अधिक नए बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए तथा उनके अभिभावकों को भी खेल गतिविधियों में शामिल करने की योजना बनाई जाए। इससे समाज में खेल के प्रति सकारात्मक वातावरण का निर्माण होगा तथा परिवार स्तर पर खेल संस्कृति को प्रोत्साहन मिलेगा। मंत्री सारंग ने प्रदेश में पूर्व से निर्मित खेल परिसरों के उन्नयन (अपग्रेडेशन) पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए कहा कि इन परिसरों में युवा केंद्रित गतिविधियों को भी जोड़ा जाए जिससे अधिक से अधिक युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित हो सके और खेल के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास को भी बढ़ावा मिल सके। मंत्री सारंग ने खिलाड़ी प्रशिक्षण कल्याण समिति का पुनरावलोकन कर उसमें आवश्यक संशोधन करते हुए उसे और अधिक प्रभावी एवं सशक्त बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समिति की कार्यप्रणाली ऐसी होनी चाहिए जिससे खिलाड़ियों को अधिकतम लाभ मिल सके और उनके प्रशिक्षण एवं कल्याण से संबंधित आवश्यकताओं की समय पर पूर्ति सुनिश्चित हो सके। बैठक में खेल एवं युवा कल्याण के प्रमुख सचिव मनीष सिंह, उप सचिव अजय श्रीवास्तव, संचालक अंशुमान यादव, संयुक्त संचालक बी.एस. यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने उद्यमियों को स्वावलंबी बनाया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत लगभग 58 करोड़ मुद्रा ऋण के माध्यम से 40 लाख करोड़ से अधिक की राशि वितरित किए जाने पर हर्ष व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी को मुद्रा योजना की उपलब्धि के लिए धन्यवाद देते हुए आभार भी माना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में संचालित इस योजना से प्रदेश और देश के गरीब नागरिकों के सपनों को उड़ान मिली है। देश के करोड़ों उद्यमियों, छोटे व्यापारियों और कारीगरों के आर्थिक स्वावलंबन का मार्ग प्रशस्त करते हुए यह योजना गरीबों के आर्थिक स्वावलंबन की ऋण व्यवस्था बन गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने "आत्मनिर्भर भारत" को समर्पित इस अभूतपूर्व यात्रा के लिए प्रधानमंत्री  मोदी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया है।  

केंद्र सरकार की उर्वरक सब्सिडी पहल: अन्नदाताओं को मिलेगी 41 हजार करोड़ की मदद

अन्नदाताओं को उरर्वकों पर सब्सिडी के लिए केंद्र सरकार ने दी 41 हजार करोड़ से अधिक की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी का माना आभार भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के हित में केंद्र सरकार द्वारा लिए गए फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केन्द्रीय मंत्रीमंडल ने फॉस्फेट एवं पोटेशियम उर्वरकों पर न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS) को मंजूरी दी है जो अन्नदाताओं के हित में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय निर्णय है। खरीब सीजन- 2026 में इससे किसान प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन-2026 के लिए फॉस्फेट एवं पोटेशियम उर्वरकों पर पोषक तत्व आधारित सब्सिडी के लिए 41 हजार 533.81 करोड़ की बजटीय व्यवस्था को स्वीकृति प्रदान की है। यह एक महत्वपूर्ण निर्णय है। गत वर्ष स्वीकृत राशि से यह 4,317 करोड़ रुपए अधिक है। वैश्विक चुनौतियों और अंतर्राष्ट्रीय कीमतों के रुझानों के बावजूद केंद्र सरकार ने किसानों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह सुनिश्चित किया है कि उर्वरक रियायती, किफायती एवं उचित दरों पर उपलब्ध हों और उन पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। मध्यप्रदेश में किसान-कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय कृषि लागत को संतुलित कर किसानों की आय और उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ करेगा। मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 कृषि और कृषक कल्याण वर्ष है। इस नाते ऐसे निर्णय मध्यप्रदेश के अन्नदाताओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी हैं। मध्यप्रदेश सरकार किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। किसानों को नई तकनीक से अवगत करवाने के लिए उन्नत कृषि महोत्सव भी आयोजित किए जा रहे हैं। कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों को शिक्षित जागरूक बनाने और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ प्रदान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान हितैषी इस पहल के लिए प्रधानमंत्री मोदी एवं केंद्रीय मंत्रीमंडल का हार्दिक आभार व्यक्त किया है।  

बालाघाट के 100 गांवों में बिजली, स्कूल और अन्य सुविधाओं की मिलेगी सौगात, बदलेगा माहौल

बालाघाट  मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी बाहुल्य वनांचल क्षेत्र के सैकड़ों गांव नक्सलवाद की चपेट में बीते 35 सालों से भी अधिक समय से न केवल डर के साये में जीवन बिताने को मजबूर रहे, बल्कि इस लम्बे अरसे के दौरान विकास की मुख्य धारा से कोसों दूर रह गए. लेकिन नक्सलवाद के खात्मे के साथ ही यहां के लोगों का जीवन भयमुक्त और खुशहाल नजर आने लगा है. अब यहां विकास की बयार नजर आने लगी है. यह कहना गलत नहीं होगी कि कभी नक्सलवाद का दंष झेलने वाले गांवों में अब विकास का पहिया घूमने लगा है।  100 गांवों में होगा विकास कार्य नक्सलवाद की चपेट में रहे तकरीबन 100 से अधिक गांवों में 300 करोड़ से अधिक की राशि से बिजली पानी, सड़क सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं को मुहैया कराया जायेगा. नक्सलवाद जिले के लिए नासूर की तरह था. जिसके कारण वनांचल क्षेत्र के सैकड़ों गांव विकास की मुख्य धारा से अलग थलग पड़े रह गए. चूंकि जब भी इन ग्रामीण अंचलों में कार्य किये जाते थे, तो नक्सली उन कार्यों में बाधा उत्पन्न करते थे, कभी मशीनों को जला देते थे, तो कभी ठेकेदारों को डराते धमकाते थे।  नक्सली इन क्षेत्रों का विकास कभी नहीं चाहते थे. नक्सलवाद यहां पर विकास की राह में सबसे बड़ा रोड़ा था. लेकिन अब समय बदला है और समय के साथ यहां की तस्वीर भी बदलने लगी है. बरसों विकास से दूर रहने वाले गांवों में अब जीवन खुशहाल नजर आ रहा है।  शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार पर जोर बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीणा ने बताया कि, ''जिले के बैहर, परसवाड़ा, बिरसा, लांजी, किरनापुर सहित बालाघाट विकासखण्ड के सैकड़ों गांव नक्सलवाद की चपेट में रहे. अब उन सभी गांवों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेव्हलपमेंट, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. जहां पर उन इलाकों के सभी जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर विकास का खाका तैयार किया जा रहा है, जिसे शासन को भेज कर स्वीकृति ली जा सकेगी।  सोलर सेंटर एवं ट्रांसफार्मर की स्थापना फिलहाल इन वनांचल क्षेत्रों के 16 गांवों में जल संसाधन विभाग द्वारा सिचांई की योजनाएं तैयार कर खेती को बेहतर बनाने काम जारी है. वहीं विद्युत विभाग द्वारा सोलर सेंटर एवं ट्रांसफार्मर स्थापना के लिए तकरीबन 13.50 करोड़ रूपये के प्रस्ताव तैयार हैं. खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की 37 गांवों में उचित मूल्य की दुकान और 50 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम के निर्माण की योजना है. इसके अलावा तीन करोड़ की राशि से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण व मरम्मत कार्य प्रस्तावित हैं।  इसी के साथ सर्व शिक्षा अभियान के तहत शाला भवन निर्माण, उद्योग एवं तकनीकि विभाग द्वारा आईटीआई भवन व छात्रावास, मत्स्य विभाग द्वारा तालाब निर्माण, पशुपालन विभाग द्वारा पशु पेड़, कृषि विभाग द्वारा 1.74 करोड़ की राशि से कृषि विकास कार्य, उद्यानिकी विभाग द्वारा नर्सरी स्थापना, पीएम सड़क योजनांतर्गत 189 किमी लंबाई की 41 सड़कों का निर्माण, स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य केन्द्रों का सुधार, आयुष विभाग द्वारा 3.45 करोड़ के औषधालय निर्माण के प्रस्ताव शामिल हैं।  डर से निकल खुशहाली की तरफ बढ़े ग्रामीण इस तरह अब कभी लाल आतंक का गढ़ माने जाने वाले बालाघाट जिले के वनांचल क्षेत्रों में जीवन खुशहाली की ओर है. डर और भयमुक्त माहौल निर्मित होने से लोगों के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे हैं. वहीं शासन प्रशासन द्वारा यहां के विकास का खाका तैयार कर जिस तरह से कार्यों का संपादन किया जा रहा है, निश्चित तौर पर आने वाले समय में यहां निवासरत लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ मिलेगा और उनके जीवन स्तर में भी बदलाव होगा। 

मंत्री दिलीप जायसवाल से मुलाकात, सम्मानित किए गए पत्रकार समिति के नेता

भोपाल मध्य प्रदेश शासन के मंत्री भाई दिलीप जायसवाल से मुलाकात कर,समिति अध्यक्ष अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति डल्लू कुमार सोनी एवं मध्य प्रदेश समिति अध्यक्ष प्रीतम कुमार वर्मन,छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव धर्मेंद्र वस्त्रकर  संयुक्त मुलाकात कर वार्तालाप कर स्मृति चिन्ह देकर देकर सम्मान करते हुए। 

जल गंगा संवर्धन अभियान-2026: प्रदेश में जल संरक्षण को मिल रही नई दिशा

जल गंगा संवर्धन अभियान-2026: प्रदेश में जल संरक्षण को मिल रही नई गति अभियान में 6242 करोड़ रुपये की लागत से कराए जा रहे 2 लाख 44 हजार से अधिक कार्य भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पानी की प्रत्येक बूंद को सहेजने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश में बड़ी संख्या में खेत तालाब, अमृत सरोवर, रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और सूखे कुँओं को नया जीवन देने का कार्य किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल द्वारा समूचे अभियान की निरंतर निगरानी रखी जा रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा अभियान के तहत पूरे प्रदेश में जल संरक्षण के 2 लाख 44 हजार से अधिक कार्य किए जा रहे हैं, जिसकी लागत 6242 करोड़ रुपये हैं। इस वर्ष के जल गंगा संवर्धन अभियान में पूर्व के कार्य की पूर्णता पर विशेष जोर दिया गया है। मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्त अवि प्रसाद ने बताया कि इस साल जल गंगा संवर्धन अभियान: 2025 के लंबित कार्यों तथा महात्मा गांधी नरेगा योजना अंतर्गत चल रहे पानी से संबंधित कार्यों की पूर्णता लक्षित की गई है। लक्ष्य के अनुक्रम में 84 हजार से अधिक कार्य पूरे प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान: 2026 की प्रगति भी दिखाई देने लगी है। 19 मार्च से शुरू हुए अभियान के तीसरे चरण को महज 20 दिन ही पूरे हुए और 84 हजार से अधिक कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं। ये वे कार्य हैं जो पिछले वर्ष अधूरे रह गए थे। जल गंगा संवर्धन अभियान में टॉप 5 जिले जल गंगा संवर्धन अभियान में खंडवा, उज्जैन, खरगोन, डिंडौरी और बालाघाट टॉप 5 जिलों में शामिल हैं।  

एमपी के 6 जिलों में खनिज खनन का रास्ता साफ, मैंगनीज और बाक्साइट से होगी समृद्धि

भोपाल  मध्यप्रदेश में प्रचुर खनिज हैं। इनमें मैंगनीज, बाक्साइट जैसे महंगे खनिज भी शामिल हैं। कई जगहों पर दुर्लभ खनिज भी मिले हैं। प्रदेश में खनिजों का उत्पादन बढ़ाने के लिए अब बंद पड़ी खदानों में भी दोबारा खनन शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इससे राजस्व बढऩे के साथ खनिजों की आवक भी बढ़ेगी। मप्र स्टेट माइनिंग डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने फिलहाल 6 जिलों में बंद पड़ी सात खदानों में खनिजों की खोजबीन शुरू कराने की तैयारी की है। इनमें मुख्यत: बॉक्साइट, मैंगनीज और लाइमस्टोन की खदानें शामिल हैं। यहां पर पहले यह देखा जाएगा कि अभी कितना खनिज भंडार मौजूद है। इसके बाद इन खदानों की दोबारा नीलामी की जाएगी। अन्य बंद पड़ी खदानों को भी दोबारा खनन के लिए खोजा जा रहा है। माइनिंग कॉरपोरेशन चिह्नित की गई सात बंद खदानों में बोरहोल और ड्रिलिंग कराकर खनिज के सैंपल एकत्रित करने के लिए एजेंसियों का चयन कर रहा है। कॉरपोरेशन के साथ पहले से काम कर रही कंपनियों में से ही इसके लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं। कंपनियां कॉरपोरेशन के अधिकारियों के साथ मिलकर काम करेंगी और बंद पड़े इन खनिज ब्लॉक्स में तय दूरी तक ड्रिलिंग कर खनिजों की मात्रा का आकलन करेंगी। खदानों से सैंपल लेकर क्वालिटी और कवांटिटी की होगी जांच कॉरपोरेशन के अधिकारियों अनुसार, सैंपलिंग के लिए इन सातों ब्लॉक में 20 बोरहोल्स कर कुल 660 मीटर ड्रिलिंग की जाएगी। सभी ब्लॉक से 462 सैंपल एकत्रित कर संबंधित एजेंसी देगी। सैंपलिंग के बाद खनिजों की क्वालिटी और क्वांटिटी का आकलन प्रयोगशालाओं में कराया जाएगा। इसके बाद इन ब्लॉक्स को नीलामी में लाया जाएगा। सात के अलावा अन्य खनिज ब्लॉक भी चिन्हित करने का काम किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि प्रमुख रूप से ऐसे ब्लॉक चिन्हित कर रहे हैं जिनकी लीज लेप्स हो गई है या जहां काम बंद हो चुका है। सबसे ज्यादा खदानों की नीलामी से उद्योग और रोजगार को बढ़ावा खनिज नीलामी में वर्ष 2025 में देशभर में नीलाम किए गए 141 खनिज बलॉकों में से 32 खनिज ब्लॉकों की नीलामी मध्यप्रदेश में हुई है, जो देश में सर्वाधिक है। खान एवं खनिज विकास (एमएमडीआर) संशोधन अधिनियम, 2025 और इससे जुड़े नियमों में किए गए बदलावों से खनिज अन्वेषण, नीलामी, निवेश और स्थानीय विकास को गति मिली है। चूना पत्थर, लौह अयस्क और बॉक्साइट जैसे प्रमुख खनिजों की नीलामी से सीमेंट, स्टील और संबद्ध उद्योगों को भी मजबूती मिली है। खनन नियमों के सरलीकरण, खनिज एक्सचेंज की व्यवस्था और नीलामी प्रक्रिया को तेज़ किए जाने से मध्यप्रदेश में खनिज क्षेत्र में निजी निवेश भी बढ़ रहा है। इससे राज्य के युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित हो रहे हैं। इन बंद खदानों में एक्सप्लोरेशन ब्लॉक और जिला खनिज क्षेत्रफल हेक्टेयर में गायत्री मिनरल्स रीवा बॉक्साइट 32 डीके जैन सतना बॉक्साइट 10.6 केसी बगाडिया कटनी लाइमस्टोन 8 सीतापथोर बालाघाट मैंगनीज 20.2 पीएस हजारी दमोह लाइमस्टोन 5.66 सीसीआईएल-1 नीमच लाइमस्टोन 336 सीसीआईएल-2 नीमच लाइमस्टोन 163

मंजू जायसवाल का अनोखा तरीका: चित्रों के जरिए गणित सिखाकर जबलपुर में बच्चों का 95% रिजल्ट

जबलपुर  शहर से लगभग 5 किलोमीटर दूर रेगवा नाम का एक बड़ा गांव है. इस गांव में सरकारी माध्यमिक शाला स्कूल है, इसमें छठवीं से लेकर आठवीं तक की पढ़ाई होती है. कुल मिलाकर तीन क्लासों में 120 से ज्यादा बच्चों का एडमिशन है. इसी स्कूल में मंजू जायसवाल गणित की शिक्षिका है. मंजू जायसवाल का पढ़ाई का तरीका बिलकुल अलग है. दरअसल उन्होंने मैथ्स की पढ़ाने के लिए एक अनोखा प्रयोग किया है. बच्चों के मन से गणित का निकाला डर मंजू जायसवाल का कहना है कि, ''उन्होंने बच्चों को पढ़ाने के दौरान पाया कि बच्चों को गणित बहुत कठिन लगती है और गणित की वजह से कई बार बच्चे स्कूल तक नहीं आते हैं. इन बच्चों को घर में भी कोई पढ़ाने वाला नहीं होता ना ही ये ट्यूशन पढ़ते हैं. ऐसी स्थिति में इनकी गणित बहुत कमजोरी रहती है. इसलिए हमने एक नया प्रयोग शुरू किया और गणित को रंगों और चित्रों के माध्यम से पढ़ाना शुरू किया.'' बच्चों की पढ़ाई में हुआ सुधार  मंजू जायसवाल का कहना है कि, ''पढ़ने में बच्चा कितना भी कमजोर हो लेकिन चित्रों और रंगों के प्रति बच्चों का आकर्षण रहता है. इसलिए जैसे ही हमने यह प्रयोग शुरू किया तो बच्चों ने गणित में भी इंटरेस्ट लेना शुरू कर दिया.हमारी टीम जब स्कूल में पहुंची तो उस समय स्कूल में 15 बच्चे थे. दरअसल अभी नए साल की क्लास शुरू हुई है, इसलिए स्कूल में उपस्थिति की संख्या कम है और ज्यादातर बच्चे नए हैं. लेकिन इसके बावजूद मंजू जायसवाल ने बच्चों को एक चित्र बनाने के लिए कहां और उन्होंने बच्चों से पूल बनवाया. 95 प्रतिशत हुआ स्कूल का रिजल्ट बच्चों ने तुरंत फूल बनाना शुरू कर दिया फिर स्कूल के भीतर उन्होंने गणित की संख्या रखी और बच्चों से भी कहा कि इस गणित की संख्या से जुड़े हुए सवाल को हल करें. लगभग सभी बच्चों ने इसकी कोशिश की, कुछ बच्चे इसमें सफल भी रहे. मंजू जायसवाल ने बताया कि, पिछले सालों में हमारे स्कूल का रिजल्ट लगभग 95% रहा है जिसमें गणित विषय में सभी को फर्स्ट डिवीजन के मार्क्स मिले हैं. बच्चों का लग रहा पढ़ाई में मन राधिका इसी स्कूल में 2 सालों से पढ़ रही है. उनका कहना है, ''उसका मन भी शुरू में गणित में नहीं लगता था लेकिन चित्रों के जरिए जब से गणित पढ़ना शुरू किया है तब से उनकी गणित अच्छी हो गई है और अब भी चित्रों के माध्यम से ही गणित को समझती हैं.'' स्कूल के प्रधानाध्यापक शैलेंद्र दुबे का कहना है कि ''हमारी कोशिश होती है कि हम ज्यादातर सामान्य शिक्षा को रुचि कर बनाकर पेश करें. पहले चित्रों का उपयोग केवल सामाजिक विज्ञान पर्यावरण जैसे विषयों में ही होता था लेकिन हमने गणित में भी इसका प्रयोग शुरू किया तो अच्छे परिणाम मिले.'' सरकारी स्कूलों के शिक्षक शिक्षा को नौकरी की तरह करते हैं बहुत हद तक उनकी कोशिश बच्चों को सिखाने की नहीं होती. यदि सरकारी माध्यम के स्कूलों में शिक्षक पूरी जिम्मेदारी के साथ छात्रों को पढ़ाना शुरू करें तो सरकारी स्कूल से भी होनहार बच्चे निकल सकते हैं. मंजू जायसवाल की कोशिश कुछ ऐसी ही है.

एमपी के इस बड़े शहर को लेकर हाईकोर्ट की चेतावनी: पहाड़ियां बचाना जरूरी, नहीं तो बनेगा रेगिस्तान

 ग्वालियर  प्राकृतिक धरोहर और पहचान रही पहाडिय़ों पर लैंड माफिया के अवैध कब्जों व मुरम के बेखौफ उत्खनन को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह मामला केवल कानूनी या प्रशासनिक नहीं है, बल्कि हमारे अस्तित्व से जुड़ा है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि इन पहाडिय़ों को समय रहते नहीं बचाया गया, तो इनका पूरी तरह समाप्त होना तय है, जिसका गंभीर पर्यावरणीय खामियाजा शहर की आने वाली पीढिय़ों को भुगतना पड़ेगा। अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए माना कि राजनीतिक संरक्षण, प्रशासनिक ढिलाई और पुलिस की निष्क्रियता के कारण लैंड माफिया बेखौफ होकर पहाडिय़ों को छलनी कर रहे हैं। विशेष रूप से गुड़ा-गुड़ी के नाके और आसपास के क्षेत्रों में पहाड़ों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। कोर्ट ने ​पब्लिक ट्रस्ट डॉकि्ट्रन (सार्वजनिक न्यास सिद्धांत) का हवाला देते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा करना राज्य की बुनियादी जिम्मेदारी है, जिसमें प्रशासन पूरी तरह विफल दिख रहा है। अब 'सिटी फॉरेस्ट' के रूप में पहचानेंगे पहाड़ : कोर्ट ने एक दूरगामी कल्पना पेश करते हुए इन पहाडिय़ों को 'सिटी फॉरेस्ट' के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया है। यहाँ मॉर्निंग वॉक, योग और पारिवारिक पिकनिक के लिए स्थान विकसित किए जाएंगे। इससे न केवल शहर का पर्यावरण सुधरेगा, बल्कि ग्वालियर में हर साल बढ़ती भीषण गर्मी से भी राहत मिल सकेगी। कोर्ट ने इस मॉडल को अन्य जिलों के लिए भी नजीर बनाने पर जोर दिया है। कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी हाई-लेवल कमेटी मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने ग्वालियर कलेक्टर की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। इस कमेटी में नगर निगम, पुलिस, वन विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति, आयुर्वेद विशेषज्ञ और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों को शामिल किया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहाडिय़ों को माफिया से मुक्त कराकर वहां फेंसिंग की जाए और बड़े पैमाने पर औषधीय व फलदार पौधे लगाए जाएं। हाई-पावर कमेटी में ये रहेंगे .     अध्यक्ष: जिला कलेक्टर, ग्वालियर     समन्वयक/सचिव: विवेक खेडकर (एडिशनल एडवोकेट जनरल)     सदस्य: पुलिस अधीक्षक, नगर निगम आयुक्त, डीएफओ, कुलपति (कृषि विवि)     विशेषज्ञ: गौरीशंकर दुबे (पूर्व प्रिंसिपल रजिस्ट्रार), डॉ. धर्मेन्द्र रिछारिया (आयुर्वेद), डॉ. आशुतोष गुप्ता (सीनियर वेटरनरी सर्जन), प्रशांत शर्मा (अधिवक्ता) प्रमुख बिंदु चार बिंदुओं पर 23 अप्रेल को मांगी रिपोर्ट हाई लेवल कमेटी का विधिवत गठन और सभी सदस्यों की सहमति। कमेटी की पहली बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का ब्यौरा। पहाडिय़ों के सर्वे और फेंसिंग के लिए तैयार की गई प्रारंभिक कार्ययोजना। सिटी फॉरेस्ट प्रोजेक्ट को लेकर धरातल पर शुरू की गई कार्रवाई।

संपत्ति में ‘मालिकाना हक’ बदलना हुआ महंगा, स्टांप शुल्क के बारे में जानें पूरी जानकारी

भोपाल  संपत्ति का परिवार में ही विक्रय या टाइटल में बदलाव पर भोपाल समेत मप्र में कलेक्टर गाइडलाइन का सवा फीसदी से दस फीसदी तक शुल्क चुकाना पड़ रहा है। उप्र में ये महज पांच हजार रुपए में हो जाता है। वहां रजिस्ट्री फीस फिक्स्ड है। पारिवारिक संपत्ति में मालिकाना हक बदलने की महंगी दर की वजह से यहां लोग बेहद जरूरी होने पर ही मालिकाना हक बदलवाते हैं, बाद में ये देरी पारिवारिक विवाद की वजह बनती है। मौजूदा संपत्ति मामलों में 60 फीसदी पारिवारिक ही है। सालाना करीब 15 हजार संपत्तियां परिवार में ही ट्रांसफर होती है। यदि उप्र की तरह यहां भी पारिवारिक मालिकाना हक बदलवाने की दर सस्ती हो तो ये विवाद खत्म हो जाए। अभी मध्यप्रदेश में है ये नियम     नगरीय निकाय के भीतर संपत्ति है और परिवार में इसे गिफ्ट करना चाहते हैं तो संपत्ति मूल्य का दस फीसदी स्टांप शुल्क लिया जाता है।     नगरीय निकाय से बाहर के इलाके में संपत्ति है और परिवार में इसे गिफ्ट करना चाहते हैं, तो सात फीसदी स्टांप ड्यूटी लगती है।     संपत्ति का एक को-ऑनर अपनी संपत्ति का हिस्सा साथी को-ऑनर के नाम करना चाहता है तो हक विलेख किया जाता है, इसमें 1.3 फीसदी स्टांप शुल्क लगता है।     को-ऑनर परिवार से बाहर का सदस्य है तो हक विलेख करने पर स्टांप शुल्क 5.8 फीसदी लगता है। यूपी में है ये नियम उत्तर प्रदेश सरकार ने पुरखों की संपत्ति के बंटवारे से लेकर पारिवारिक संपत्ति को परिवार में ही दूसरे सदस्य के नाम करने पर महज 5000 रुपए स्टांप शुल्क तय कर दिया। इसके लिए स्टांप एवं निबंधन विभाग के नियमों को बदला जा रहा है। …तो मिले ये लाभ     पारिवारिक संपत्ति विवाद 60 फीसदी तक खत्म होंगे।     बंटवारा ये लेकर हक त्याग आसान और सस्ता होगा। परिवार में हक विलेख पर 1.3 फीसदी शुल्क, जबकि गिफ्ट पर नगरीय सीमा में दस फीसदी स्टांप ड्यूटी लगेगी। मप्र सरकार के नियम हैं, जो पूरे प्रदेश में समान तौर पर लागू होते हैं। स्वप्नेश शर्मा, जिला पंजीयक, भोपाल एमपी में प्रॉपर्टी खरीदना महंगा मध्य प्रदेश में 1 अप्रेल से प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री महंगी हो चुकी है। केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक में विभिन्न जिलों की नई कलेक्टर गाइडलाइन को मंजूरी दे दी गई है। इससे प्रदेश में जमीन की कीमतों में औसतन 16% की बढ़ोतरी हो गई है। प्रदेश में कुल एक लाख से अधिक लोकेशन में से करीब 65 हजार स्थानों पर रेट बढ़ाए गए हैं। हालांकि कुछ क्षेत्रों में रेट यथावत भी रखे हैं। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी इंदौर और भोपाल की प्रॉपर्टी में हुई है। विभिन्न जिलों में 5 से 300 प्रतिशत तक रेट बढ़ाए गए। भोपाल में अधिकतम 180 प्रतिशत तक रेट बढ़ेंगे। इंदौर में कई लोकेशन पर 300% इजाफा होगा। यही नहीं इस बार पक्के मकानों की निर्माण लागत भी बढ़ा दी गई है। बने हुए मकानों की रजिस्ट्री और महंगी हो जाएगी। नई गाइडलाइन 1 अप्रेल से लागू होने के बाद रजिस्ट्री के लिए नए रेट्स के आधार पर ही जमीन का मूल्यांकन किया जाएगा, इसी के अनुसार स्टाम्प और पंजीयन शुल्क लगेगा।