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मप्र में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट: 2-5 मई तक 21 जिलों में येलो अलर्ट, तबाही का खतरा

भोपाल  मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच मौसम ने अचानक करवट ली है और अब प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर शुरू हो गया है. मौसम विभाग (IMD) ने 2 मई 2026 को 21 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, जहां 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है. बीते दो दिनों से राज्य के आधे से अधिक जिलों में मौसम का यही रुख बना हुआ है, जिससे तापमान में गिरावट आई है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है. प्रदेश में अगले चार दिनों तक ऐसा ही अस्थिर मौसम बना रहेगा।  इस बदले हुए मौसम पैटर्न ने जहां आमजन को राहत दी है, वहीं किसानों और ग्रामीण इलाकों में चिंता भी बढ़ा दी है. तेज हवाएं और ओलावृष्टि फसलों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. मौसम विभाग का कहना है कि प्रदेश में अगले चार दिनों तक ऐसा ही अस्थिर मौसम बना रहेगा. चक्रवाती परिसंचरण और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से यह सिस्टम सक्रिय हुआ है, जो मई की शुरुआत में ही असामान्य मौसम का संकेत दे रहा है।  इन जिलों में आंधी और तेज बारिश का अलर्ट मौसम केंद्र ने शनिवार को एमपी के ग्वालियर समेत 21 जिलों में आंधी और तेज बारिश की चेतावनी जारी की है। इनमें ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, जबलपुर, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, गुना, अशोक नगर, नीमच और मंदसौर मुख्य रूप से शामिल हैं। इस दौरान 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना जताई गई है। इन जिलों में दिखेगा गर्मी का असर वहीं, भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, रतलाम, सागर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, कटनी, उमरिया, शहडोल, रीवा, मऊगंज, सीधी, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा और सिंगरौली में गर्मी का प्रकोप जारी रहेगा। मौसम विभाग ने इन जिलों में लोगों को गर्मी से बचाव के लिए अपील की गई है। प्रदेश में आने वाले दिनों के मौसम की बात करें तो 3, 4 और 5 मई तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मौसम खराब रहने की संभावना है। दरअसल, चक्रवाती गतिविधियों के सक्रिय होने के कारण मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिलेगा। तापमान में हल्कि गिरावट के आसार है। लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिल सकती है। लेकिन, किसानों पर बारिश का बुरा प्रभाव पड़ रहा है। उनकी खुली जगह पर रखी फसलें (अनाज) खराब हो रही है। अन्य जिलों में गर्मी, लेकिन बदल सकता है मौसम भोपाल, इंदौर, उज्जैन, सागर, रीवा और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में फिलहाल गर्मी का असर बना हुआ है. हालांकि दोपहर बाद बादल छाने और हल्की बारिश की स्थिति बन सकती है. मौसम विभाग के अनुसार, यह बदलाव अचानक और अल्पकालिक हो सकता है, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।  पिछले दो दिनों में कैसा रहा मौसम बीते 48 घंटों में प्रदेश के 35 से ज्यादा जिलों में कहीं न कहीं आंधी, बारिश या ओलावृष्टि दर्ज की गई है. जबलपुर और दमोह में हल्की बारिश हुई. तापमान में भी गिरावट देखी गई. खंडवा में अधिकतम तापमान 43.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि नरसिंहपुर, रतलाम और टीकमगढ़ में भी पारा 41 डिग्री के आसपास दर्ज हुआ. बड़े शहरों में भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में भी तापमान में कमी आई है।  अगले 4 दिन कैसा रहेगा मौसम मौसम विभाग के अनुसार, 5 मई तक प्रदेश में आंधी-बारिश का सिलसिला जारी रहेगा. 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. चक्रवाती सिस्टम और पश्चिमी विक्षोभ के चलते यह स्थिति बनी हुई है. विशेषज्ञों का कहना है कि मई के महीने में इस तरह का मौसम असामान्य जरूर है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ऐसे ट्रेंड देखने को मिले हैं।  किसानों और आम लोगों के लिए अलर्ट तेज हवाओं और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हो सकता है. खेतों में काम कर रहे किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. बिजली गिरने की घटनाओं से बचने के लिए खुले स्थानों पर खड़े रहने से बचें. पेड़ों और कच्चे ढांचों से दूर रहें।   

राजगढ़ में सीईओ का नया रूप, ‘ड्राइवर’ बने और ईमानदारी का मिला अद्भुत पुरस्कार

राजगढ़   मध्यप्रदेश के राजगढ़ के रहने वाले रमेश चंद्र शर्मा के लिए दिन बेहद खास था। जिंदगीभर उन्होंने जिस गाड़ी का स्टेयरिंग संभाला और ड्राइविंग की आज वो उसी गाड़ी में साहब की तरह बैठे थे। ये ईनाम था उनकी जिंदगीभर की ईमानदारी और अनुशासन का। दरअसल रमेश चंद्र शर्मा राजगढ़ जिला पंचायत में ड्राइवर थे। गुरुवार को जब उनका रिटायरमेंट था तो जिला पंचायत सीईओ डॉ. इच्छित गढ़पाले ने प्रशासनिक संवेदनशीलता की मिसाल पेश की। सीईओ ने ड्राइवर रमेश चंद्र के रिटायर होने पर उन्हें खुद अपनी गाड़ी में बैठाकर गाड़ी चलाते हुए उनके घर तक छोड़ने के लिए पहुंचे। जिला पंचायत सीईओ ने पेश की मिसाल जिला पंचायत राजगढ़ में एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जिसने प्रशासनिक संवेदनशीलता की मिसाल पेश कर दी। वर्षों तक अपनी सेवाएं ईमानदारी और अनुशासन से देने वाले वाहन चालक रमेश चंद्र शर्मा के सेवानिवृत्त होने पर जिला पंचायत सीईओ डॉ इच्छित गढ़पाले ने न सिर्फ उन्हें सम्मानित किया, बल्कि स्वयं वाहन चलाकर उन्हें घर तक छोड़ने पहुंचे। जिला पंचायत परिसर में आयोजित विदाई समारोह में सेवानिवृत्त वाहन चालक की निष्ठा, समयपालन और अनुशासन की सराहना करते हुए सीईओ ने कहा कि किसी भी संस्था की मजबूती उसके कर्मचारियों की मेहनत और समर्पण से तय होती है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक ईमानदारी से सेवा देने वाले कर्मचारी हमेशा सम्मान के अधिकारी होते हैं। रिटायर हो रहे हमारे साथी रमेश चंद्र भी उन्हीं कर्मचारियों में से एक हैं जिन्होंने अपना कर्तव्य हमेशा ईमानदारी से निभाया है। खुद गाड़ी चलाकर ड्राइवर को छोड़ा घर समारोह का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब सीईओ डॉ इच्छित गढ़पाले ने सेवानिवृत्त चालक रमेश चंद्र शर्मा को अपनी सीट पर बैठाया और खुद ड्राइविंग सीट संभाल ली। इसके बाद सीईओ गढ़पाते खुद गाड़ी चलाते हुए रमेश चंद्र को उनके घर तक सम्मानपूर्वक छोड़ने पहुंचे। इस दौरान मौजूद अधिकारी और कर्मचारी भावुक हो उठे और तालियों के साथ इस पहल का स्वागत किया। सेवानिवृत्त चालक रमेश चंद्र ने भी अपने सेवाकाल को याद करते हुए जिला पंचायत परिवार का आभार व्यक्त किया और सीईओ डॉ इच्छित गढ़पाले की ओर से दिए गए सम्मान के लिए उनका भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि यहां उन्हें हमेशा परिवार जैसा माहौल और सहयोग मिला, जिसे वे जीवनभर याद रखेंगे। कार्यक्रम में जिला पंचायत के अधिकारी, कर्मचारी और अन्य स्टाफ मौजूद रहे। सभी ने पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह भेंट कर सेवानिवृत्त कर्मचारी के सुखद एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

शिलांग कोर्ट का अहम फैसला, मुख्य आरोपी राज कुशवाहा की जमानत याचिका खारिज

इंदौर  राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम को मिली जमानत को आधार पर जेल में बंद अन्य आरोपी विशाल चौहान, आनंद कुर्मी और आकाश राजपूत ने भी कोर्ट में जमानत के लिए आवेदन दायर किया है। उधर, राज कुशवाहा की जमानत के लिए सोमवार को नई अर्जी लगाई जाएगी। शिलॉन्ग अदालत ने सोनम को जमानत दे दी है, जबकि इस हत्याकांड के एक अन्य आरोपी राज कुशवाहा की जमानत याचिका खारिज कर दी है। राज कुशवाहा के वकील फुयोसा योबिन के अनुसार, सेशन कोर्ट ने जमानत याचिका को ‘तकनीकी आधार’ पर निरस्त किया है। इस लिए अभी जमानत की उम्मीद बाकी है।  बेल के बाद से होटल में रह रही सोनम सोनम रघुवंश को जमानत मिल गई है। मंगलवार रात जेल से रिहा होने के बाद सोनम रघुवंशी शिलांग के एक होटल में ठहरी है। अदालत ने उसे शिलांग से बाहर नहीं जाने की शर्त पर जमानत दी है। लेकिन अब वह इस शर्त से बाहर निकलने के उपाय कर रही है। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार वह सुरक्षा कारणों का हवाला देकर शिलॉन्ग से बाहर जाने की अनुमति मांगने के लिए नई अर्जी लगाने वाली है। अगर उसकी मांग स्वीकार कर ली गई तो उसे शिलांग से निकलने की अनुमति मिल जाएगी।  इस आधार पर निरस्त हुई राज की याचिका राज के वकील ने बताया कि आवेदन में पिछले बेल आवेदन का उल्लेख नहीं किया गया था, जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। वकील ने कहा कि जमानत का आवदेन खारिज करने का निर्णय मेरिट के आधार पर नहीं लिया गया है। अब सोमवार को नई जमानत अर्जी दायर की जाएगी। उम्मीद है इस बार उसे जमानत मिल जाएगी। जमानत याचिका खारिज करते हुए शिलॉन्ग कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया आरोपी राज के वकील ने याचिका में उसके आपराधिक रिकॉर्ड का उल्लेख नहीं है, जो नियमों का उल्लंघन है। इसी आधार पर अर्जी निरस्त की गई। सोनम की जमानत रद्द करवाने के लिए हाईकोर्ट गए राजा के परिवार वाले शिलॉन्ग पुलिस ने अपनी जांच में सोनम और राज को राजा की हत्याकांड का मास्टरमाइंड बताया था. अब सोनम की जमानत रद्द कराने के लिए शिलॉन्ग पुलिस हाईकोर्ट जाएगी. इसके अलावा सोनम रघुवंशी की जमानत पर राजा रघुवंशी के परिवाले बिल्कुल भी खुश नजर नहीं आए. बताया जा रहा है कि राजा के बड़े भाई विपिन रघुवंशी भी जल्द हाईकोर्ट में सोनम की जमानत रद्द करने के लिए आवेदन करेंगे. राजा का परिवार सीबीआई जांच की मांग भी कर रहा है।  शिलॉन्ग की घाटी में पड़ा हुआ मिला था राजा रघुवंशी का शव सोनम रघुवंशी और राजा रघुवंशी की शादी मई 2025 में हुई थी. इसके बाद दोनों हनीमून मनाने के लिए मेघायल के शिलॉन्ग गए थे. जहां कुछ दिनों बाद ही दोनों लापता हो गए. फिर राजा का शव शिलॉन्ग की एक घाटी में पड़ा हुआ मिला. जहां उनके शरीर पर कई धारदार हथियार के निशान थे. बाद में पुलिस ने वह हथियार भी बरामद किया था. फिर शक की सुई पत्नी सोनम की तरफ घूमी थी, क्योंकि राजा की हत्या के बाद से ही वह भी लापता थी।  इसके बाद पुलिस ने सोनम को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार किया था. बाद में उसके प्रेमी राज कुशवाहा को पुलिस ने दबोचा था. पुलिस ने दोनों पर ही राजा की हत्या करने और उसकी साजिश रचने के आरोप लगाए थे. फिलहाल सोनम जेल से बाहर है, लेकिन प्रेम राज को अभी जेल में रहना होगा।  किया मुनेश बनाम यूपी केस का जिक्र कोर्ट ने अपने आदेश में अप्रैल 2025 के चर्चित फैसले मुनेश बनाम उत्तरप्रदेश का उल्लेख किया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिए थे कि अब नियमित या अग्रिम जमानत मांगने वाले हर याचिकाकर्ता को अपने आपराधिक इतिहास का पूरा खुलासा करना अनिवार्य होगा। देश के शीर्ष कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि कोई याचिकाकर्ता अपने बारे में कोई जानकारी छुपाता है या गलत जानकारी देता है, तो उसकी जमानत याचिका खारिज की जा सकती है। यह व्यवस्था न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और जमानत प्रावधानों के दुरुपयोग को रोकने के लिए लागू की गई है।   राज का परिवार दूर, वकील कर रहे कार्रवाई राज की गिरफ्तारी के बाद उसका परिवार इंदौर से उत्तर प्रदेश स्थित गांव चला गया है। फिलहाल कोई भी परिजन उससे मिलने नहीं आ रहा है और कोर्ट संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाने के लिए वकील ही शिलॉन्ग जेल पहुंचते हैं। बचाव पक्ष ने तर्क दिया है कि लंबे समय तक जेल में रखना आरोपी के अधिकारों का उल्लंघन है, लेकिन कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया है। इससे अन्य आरोपियों की जमानत राह भी कठिन हो गई है।   शिलांग पुलिस सोनम की बेल को देगी चुनौती  उधर, शिलॉन्ग पुलिस सोनम की जमानत को चुनौती देने के लिए मेघालय हाई कोर्ट का रुख करने की तैयारी कर रही है। पुलिस ने दावा किया कि सोनम इस हत्याकांड की मास्टरमाइंड है और उसकी रिहाई से गवाहों पर प्रभाव पड़ सकता है। शिलॉन्ग एसपी विवेक सियेम ने कहा कि जांच कानून के अनुसार जारी रहेगी और आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे। इंदौर निवासी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) पिछले 10 महीनों से जांच कर रही है। 

BJP में संगठनात्मक बदलाव, Hemant Khandelwal की सहमति से नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति

भोपाल मध्यप्रदेश में संगठन को मजबूत करने के लिए भारतीय जनता पार्टी लगातार सक्रिय नजर आ रही है। इसी क्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Hemant Khandelwal की सहमति से मध्यप्रदेश भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्षों की नई नियुक्तियों की सूची जारी कर दी गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इन नियुक्तियों के जरिए संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक सशक्त बनाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। खासकर किसान मोर्चा के माध्यम से ग्रामीण और कृषक वर्ग तक पार्टी की पहुंच को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। गौरतलब है कि प्रदेश भाजपा में इन दिनों लगातार नियुक्तियों का दौर जारी है। अलग-अलग मोर्चों और संगठनों में नई जिम्मेदारियां देकर पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जा रहा है, जिससे आगामी चुनावी तैयारियों को धार मिल सके। नई सूची जारी होने के बाद कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है और उम्मीद जताई जा रही है कि नए जिला अध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन को और मजबूती प्रदान करेंगे।

एक भारत श्रेष्ठ भारत संकल्पना के तहत भोपाल में महाराष्ट्र और गुजरात स्थापना दिवस का भव्य आयोजन

एक भारत श्रेष्ठ भारत संकल्पना के तहत भोपाल में महाराष्ट्र और गुजरात स्थापना दिवस का भव्य आयोजन भोपाल  एक भारत श्रेष्ठ भारत की संकल्पना के अंतर्गत आज लोकभवन, मध्यप्रदेश (भोपाल) में महाराष्ट्र एवं गुजरात स्थापना दिवस का भव्य एवं गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर मध्यप्रदेश के राज्यपाल आदरणीय  मंगू भाई पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम में गुजराती समाज एवं समग्र मराठी समाज के आई साहेब ग्रुप द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिन्होंने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई, जिसके पश्चात “मी मराठी”, पारंपरिक गोंधळ, छत्रपति शिवाजी महाराज पर आधारित “शिवकार्य”, भावपूर्ण प्रस्तुति “बिन जसे अंकुरते” एवं ऊर्जावान समापन “जय मल्हार” के साथ कार्यक्रम ने एक अद्भुत सांस्कृतिक यात्रा प्रस्तुत की। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से महाराष्ट्र की समृद्ध परंपरा, वीरता, भक्ति एवं सांस्कृतिक विविधता का सुंदर चित्रण किया गया। कलाकारों की सजीव प्रस्तुति, पारंपरिक वेशभूषा एवं भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने कार्यक्रम को अत्यंत प्रभावशाली बना दिया। कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु राजभवन/लोकभवन प्रबंधन टीम के उत्कृष्ट समन्वय, सुव्यवस्थित व्यवस्था एवं समर्पण की सभी ने सराहना की। अंत में, अतिथियों एवं उपस्थित जनसमूह ने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए इस आयोजन को “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की भावना का सशक्त उदाहरण बताया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा: बरगी क्रूज़ हादसे के दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा

बरगी क्रूज़ दुर्घटना के दोषियों को बख्शा नहीं जायेगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव दुर्घटना की जांच करेगी उच्च स्तरीय जांच समिति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की घोषणा नागरिकों की जान बचाने और सहयोग देने वाले प्रत्येक श्रमिक को दिए जाएंगे 51-51 हजार रूपए बचाव दल के सभी बहादुरों को राज्य सरकार करेगी सम्मानित क्रूज पायलट महेश पटेल, क्रूज हेल्पर छोटेलाल गोंड एवं टिकट काउंटर प्रभारी बृजेंद्र की सेवाएं तत्काल प्रभाव से की समाप्त होटल मैकल रिसॉर्ट और बोट क्लब बरगी के मैनेजर सुनील मरावी को कार्य में लापरवाही बरतने के कारण किया निलंबित रीजनल मैनेजर संजय मल्होत्रा को मुख्यालय अटैच कर विभागीय जांच की गई संस्थित क्रूज़ संचालन की बनाई जाएगी एसओपी मुख्यमंत्री ने घटनास्थल जाकर पीड़ित परिवारों से की भेंट, संवेदना जताकर दी सांत्वना जबलपुर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर जिले के बरगी में हुए क्रूज़ दुर्घटना पर गहन शोक व्यक्त कर इसे दुर्भाग्यपूर्ण और अत्यंत पीड़ादायक बताया। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में राज्य सरकार प्रत्येक पीड़ित परिवार के साथ है। उन्होंने कहा कि दुर्घटना में लापरवाही करने वाले दोषियों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की गई है। क्रूज पायलट महेश पटेल, हेल्पर छोटेलाल गोंड और टिकट काउंटर प्रभारी बृजेन्द्र की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। होटल मैकल रिसार्ट और मैनेजर बोट क्लब बरगी सुनील मरावी को लापरवाही के लिये निलंबित कर दिया गया है। साथ ही रीजनल मैनेजर संजय मल्होत्र को मुख्यालय अटैच कर विभागीय जांच संस्थित कर दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुर्घटना के दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जायेगा। पीड़ित परिवारों की सरकार हरसंभव सहायता करने के लिये प्रतिबद्ध है। उन्होंने व्यथित मन से कहा कि जिन परिजनों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उसकी भरपाई संभव नहीं है। कठिन समय में पीड़ितों के परिजन खुद को कतई अकेला न समझें। सरकार की ओर से सहायता राशि दी जा रही है। शासन-प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि दु:ख की इस घड़ी उनके साथ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को जबलपुर के बरगी में घटनास्थल का मौका मुआयना करने और पीड़ित परिवारों से मिलने के बाद स्थानीय मीडिया को संबोधित करते हुए यह बातें कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुर्घटना के हर पहलू की गहनता से जांच के लिये उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की जा रही है। समिति में महानिदेशक होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा, सचिव मध्यप्रदेश शासन, आयुक्त जबलपुर संभाग शामिल किए गए हैं। यह समिति तीन बिंदुओं पर दुर्घटना की बारीकी से जांच करेगी, जिसमें दुर्घटना के कारण, क्रूज संचालन के नियम सहित अन्य जरूरी जानकारियां भी जुटाई जाएंगी। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी, जिससे कि भविष्य में इस तरह की दु:खद घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पर्यटन विभाग के माध्यम से क्रूज संचालन से जुड़ी एसओपी तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राहत और बचाव कार्य में जुटे श्रमिकों को प्रोत्साहन स्वरूप 51-51 हजार रुपए की पुरस्कार राशि देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बचाव दल के सभी बहादुरों को राज्य सरकार सार्वजनिक रूप से सम्मानित करेगी। रेस्क्यू टीम की जीवटता और कर्मठता से ज्यादा से ज्यादा लोगों को जीवित बचाया जा सका है। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है। क्रूज बोट को खींचकर किनारे पर लाया गया है। कुछ लोग अभी लापता हैं, जिनकी हरसंभव तरीकों से तेजी से तलाश की जा रही है। जल्द ही सभी को रेस्क्यू कर लिया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्रूज हादसे में पीड़ित परिवारों के निवास पहुंचकर शोक संवेदनाएं व्यक्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुर्घटना के बारे में बताया कि जबलपुर के बरगी डैम में गुरुवार को हुए दु:खद हादसे में 9 लोगों की असमय मृत्यु हो गई। रेस्क्यू टीम ने तत्परता से कार्रवाई कर 28 लोगों को सुरक्षित बचा लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हादसे से पूरा प्रदेश स्तब्ध है। क्रूज हादसे के दौरान डैम के पास जल जीवन मिशन का कार्य चल रहा था, जिससे तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू हो पाया। सूचना मिलते ही लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी और जबलपुर सांसद आशीष दुबे तत्काल घटनास्थल पर पहुंच गए थे। साथ ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने तत्परता से यहां राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। उप-मुख्यमंत्री और जबलपुर जिले के प्रभारी जगदीश देवड़ा भी लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन में भारतीय सेना के गोताखोरों की भी मदद ली गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि क्रूज़ में 4 से 5 घंटे तक पानी में फंसे रहे पीड़ित रियाज को रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित निकाल लिया। पीड़ित रियाज को शायद उम्मीद भी नहीं थी कि वे जिंदा रह पाएंगे, लेकिन रेस्क्यू टीम के अथक परिश्रम से आज वे हमारे साथ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उन्होंने पीड़ित रियाज सहित अन्य पीड़ितों और मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस मुश्किल दौर में राज्य सरकार सभी परिवारों के साथ है। हमारी संवेदनाएं सभी के साथ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने क्रूज दुर्घटना में जान गंवाने वालों के निकटतम परिजन को 2-2 लाख रूपए और राज्य सरकार ने 4-4 लाख रुपए आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि हम सभी को मौसम विभाग द्वारा समय-समय दी जाने वाली सूचनाओं और चेतावनियों को पूरी गंभीरता के साथ अमल में लाना चाहिए। मौसम विभाग की चेतावनियां हमें सचेत करती हैं और ऐसी दुर्घटनाओं से बचाती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्रूज़ हादसे में दिन-रात काम करने वाले बचाव दल के सभी जवानों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्थानीयजनों और मीडिया बंधुओं के सहयोग की प्रशंसा की।  

जबलपुर क्रूज हादसा: डूबते वक्त लाइफ जैकेट्स बांटते हुए आया नया वीडियो

जबलपुर  बरगी डैम में डूबे एमपी टूरिज्म के क्रूज से सामने आया नया वीडियो अब इस हादसे को सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि बुनियादी सुरक्षा तंत्र की भयावह विफलता के रूप में पेश कर रहा है. वीडियो अंदर की उस दहला देने वाली सच्चाई को दिखाता है, जब क्रूज के भीतर बैठे पर्यटक अचानक मौत के जाल में फंस गए. ये तस्वीरें बेहद परेशान करने वाली हैं. क्रूज के अंदर बैठे यात्री सामान्य स्थिति में नजर आते हैं, तभी अचानक तेज़ी से पानी भीतर घुसना शुरू हो जाता है. कुछ ही सेकंड में सन्नाटा चीखों में बदल जाता है. बच्चे रोते हैं, परिवार घबराकर इधर-उधर भागते हैं, और तूफानी पानी के बीच क्रूज बुरी तरह डगमगाने लगता है।  जब डूबने लगा क्रूज, तब बांटे गए लाइफ जैकेट  लेकिन सबसे चौंकाने वाला दृश्य इसके बाद सामने आता है. क्रूज स्टाफ उस समय बंधे हुए लाइफ जैकेट खोलते दिखाई देता है, जब नाव पहले ही डूबने लगी थी. यानी जब तक सुरक्षा उपकरण यात्रियों तक पहुंचते, तब तक स्थिति नियंत्रण से बाहर हो चुकी थी. कई यात्री बिना लाइफ जैकेट के नजर आते हैं. कुछ लोग सीलबंद स्टोरेज से खुद जैकेट निकालने की कोशिश करते दिखाई देते हैं. बहुतों के लिए तब तक बहुत देर हो चुकी थी।  यह वीडियो उन गंभीर आरोपों की पुष्टि करता दिख रहा है, जो जीवित बचे लोगों ने लगाए कि बुनियादी सुरक्षा नियमों का पालन नहीं हुआ, यात्रियों को समय रहते लाइफ जैकेट नहीं दी गईं और तूफान के बीच उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया गया. इनलैंड वेसल्स एक्ट 2021 के तहत हर यात्री को यात्रा शुरू होने से पहले लाइफ जैकेट देना और पहनाना अनिवार्य है, लेकिन शुरुआती जांच में यह नियम बुरी तरह टूटता नजर आ रहा है।  क्रूज में 29 टिकट पर सवार थे 40 पर्यटक क्रूज में 40 से अधिक पर्यटक सवार थे, जबकि टिकट सिर्फ 29 यात्रियों के जारी किए गए थे. इससे भी अधिक गंभीर तथ्य यह है कि मौसम विभाग द्वारा ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने और 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की आंधी की चेतावनी के बावजूद क्रूज को बरगी डैम में उतारा गया. अब तक 9 शव बरामद किए जा चुके हैं. चार लोग, जिनमें तीन बच्चे शामिल हैं, अब भी लापता हैं. बारिश के कारण शुक्रवार शाम सर्च ऑपरेशन रोकना पड़ा, जिसे शनिवार सुबह फिर शुरू किया गया है।  टूटे ढांचे और लोहे की छड़ों में फंसा रेस्क्यू ऑपरेशन इसके बावजूद पैरामिलिट्री टीम ने कठिन परिस्थितियों में भी अब तक पांच शव बरामद किए हैं, जिनमें  महिला ने आखिरी समय तक अपने बच्चे को कसकर पकड़े हुई थी. अब तक इस हादसे में नौ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 28 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है. रेस्क्यू ऑपरेशन में एनडीआरएफ, पैरामिलिट्री फोर्स और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार जुटी रहीं।  हादसे के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए कई जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कदम उठाए गए हैं. क्रूज पायलट महेश पटेल, हेल्पर छोटेलाल गोंड और टिकट काउंटर प्रभारी बृजेंद्र की सेवाएं तत्काल समाप्त कर दी गई हैं. वहीं होटल मैकल रिसॉर्ट और बोट क्लब बरगी के मैनेजर सुनील मरावी को निलंबित कर दिया गया है. रीजनल मैनेजर संजय मल्होत्रा को मुख्यालय अटैच कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।  बरगी क्रूज हादसे के तीन वीडियो ने खोली पूरी सच्चाई जांच में यह भी सामने आया है कि कई यात्रियों को शुरुआत में लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी. बाद में जब स्थिति बिगड़ने लगी, तब जैकेट बांटी गईं. इसी कारण कई लोगों को बचाने में सफलता मिली. तीनों वायरल वीडियो ने इस हादसे के कई पहलुओं को सामने रखा है. पहला वीडियो लापरवाही और अफरा-तफरी दिखाता है, दूसरा वीडियो सामान्य लगते हुए खतरे को नजरअंदाज करने की कहानी बताता है, जबकि तीसरा वीडियो हादसे के बाद की भयावह सच्चाई और रेस्क्यू की कठिनाइयों को उजागर करता है. यह हादसा अब सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन की गंभीर चूक के रूप में देखा जा रहा है।  क्रूज पर चढ़ते समय नहीं दी गई थी लाइफ जैकेट 72 साल जीवित बचे यात्री रियाज हुसैन का बयान बेहद भयावह है. करीब चार घंटे तक पानी में फंसे रहे रियाज ने कहा कि किसी भी यात्री को चढ़ते समय लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी. जब क्रूज झुकने लगा, तब लोग लगभग आधे घंटे तक अफरा-तफरी में इधर-उधर भागते रहे, जबकि स्टाफ स्थिति संभालने में संघर्ष करता रहा।  दूसरे प्रत्यक्षदर्शियों ने भी दावा किया कि लाइफ जैकेट केबिन में बंद रखी गई थीं, जिन्हें यात्रियों को खुद ढूंढकर पहनना पड़ा।  इस त्रासदी की सबसे मार्मिक तस्वीर दिल्ली से आए परिवार की है. मरीना मैसी ने अपने चार वर्षीय बेटे त्रिशान को अपने ही लाइफ जैकेट में बांध लिया और अंतिम क्षण तक सीने से लगाए रखा. जब उनके शव निकाले गए, तब भी मां-बेटा एक-दूसरे से लिपटे हुए थे।  मरीना के पति प्रदीप मैसी, जो जीवित बच गए, ने दर्दनाक बयान दिया “क्रूज ऑपरेटर लगातार हमें सिर्फ बैठे रहने को कहते रहे. न लाइफ जैकेट दी गई, न कोई मदद. मुझे अचानक एक ट्यूब मिली, जिसकी मदद से मैं किनारे तक पहुंच सका. किनारे पर मौजूद लोगों ने रस्सियां फेंककर हमें बचाया।  दो घंटे बाद पहुंची रेस्क्यू टीम यह बयान पूरे संचालन तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है. हादसे के बाद बचाव कार्य में भी गंभीर देरी सामने आई. सूत्रों के मुताबिक, शाम 6:15 बजे सूचना मिलने के बावजूद पहली रेस्क्यू टीम 6:40 बजे तक रवाना नहीं हो सकी और उनका वाहन भी स्टार्ट नहीं हुआ. उपकरण दूसरी गाड़ी में शिफ्ट करने पड़े. दूसरी टीम लगभग 7 बजे रवाना हुई. यानी शुरुआती दो घंटे की यह देरी कई जिंदगियों पर भारी पड़ सकती थी।  मछुआरे-किसान बने नायक सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि शुरुआती समय में स्थानीय मछुआरे, किसान और आसपास के लोग ही वास्तविक नायक बने, जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर 15 से अधिक लोगों को बचाया. बाद में NDRF और अन्य विशेषज्ञ टीमें पहुंचीं. राजनीतिक और प्रशासनिक असर तुरंत दिखा।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूरे मध्य प्रदेश में सभी क्रूज, मोटरबोट और वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों पर तत्काल रोक लगा दी है. राज्यव्यापी सेफ्टी … Read more

अपैक्स बैंक के प्रशासक महेन्द्र सिंह यादव ने जबलपुर क्रूज हादसे पर जताया गहरा दुख

भोपाल  अपैक्स बैंक के प्रशासक श्री महेन्द्र सिंह यादव ने जबलपुर के बरगी डेम में क्रूज दुर्घटना पर गहन दुख व्यक्त किया है, उन्होने कहा कि यह अत्यंत हृदयविदारक है। उन्होंने इस दु:खद घटना में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया तथा रेस्क्यू किए गए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।उन्होंने कहा कि मै ईश्वर से दिवंगतों की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने एवं परिजनों को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना  है।

आउटसोर्स कर्मचारियों को 26 हजार सैलरी और स्थायी नौकरी का वादा, पर कब होगा लागू?

भोपाल  बीते दिन मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में बड़ी संख्या में प्रदेशभर के अस्थाई, ठेका और आउटसोर्स कर्मचारियों ने मांगों को लेकर 'महासंग्राम आंदोलन' किया गया। अस्थाई, आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन में कर्मचारियों ने सरकार से मुफ्त में काम कराने की आदत बदलने और न्यूनतम 26,000 रुपये वेतन व नौकरी की सुरक्षा देने की मांग की। न्यूनतम वेतन सिर्फ कागजों पर, हकीकत में शोषण आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में न्यूनतम मजदूरी 12,425 से 16,769 रुपये घोषित है, लेकिन धरातल पर पंचायत चौकीदारों, पंप ऑपरेटरों और अंशकालीन कर्मियों को 3 से 5 हजार रुपये थमाए जा रहे हैं। 2003 के बाद से तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की स्थायी नौकरियां खत्म कर दी गई हैं, जिससे गरीब, दलित और पिछड़ा वर्ग के युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो गया है। लोकल यूथ सर्वेयर महासंघ के अध्यक्ष वीरेंद्र गोस्वामी ने कहा कि ६ जुलाई को हाईकोर्ट के सामने आंदोलने करेंगे। प्रशासन की सख्ती और पाबंदियों के बीच आंदोलन कर्मचारियों ने पहले भाजपा कार्यालय के घेराव और 'सामूहिक आत्मदाह' का ऐलान किया था, लेकिन प्रशासन की तीन दिनों की खींचतान और पाबंदियों के बाद शर्तों के साथ नीलम पार्क में प्रदर्शन की अनुमति मिली। आंदोलन में डॉ. अमित सिंह, राजभान रावत, उमाशंकर पाठक और विपिन पांडे सहित कई संगठनों के नेता शामिल हुए। कर्मचारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी उग्र रूप लेगा। प्रदर्शनकारियों का हुआ बुरा हाल प्रदर्शनकारियों तेज गर्मी के चलेत काफी परेशान हुए। कुछ लोगों की तबीयत भी बिगड़ गई। एक महिला गर्मी की वजह से बेहोश भी हो गई। इस दौरान महिला पुलिस उन्हें संभालती नजर आई। कर्मचारियों का कहना है कि यदि हमारी मांगे पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन को और तेज करेंगे। पूरे प्रदेश के 1 लाख कर्मचारी भोपाल में डेरा डालेंगे। ये है वेतन का सच (प्रति माह) लोकल यूथ सर्वेयर: 1,000 पंचायत चौकीदार/पंप ऑपरेटर: 3,000 से 4,000 मध्यान्ह भोजन कार्यकर्ता, पेशा मोबिलाइजर: 4,000 स्वास्थ्य आउटसोर्स कर्मचारी: 7,000 से 8,000 (वेतन रुपए में) कौन होते हैं आउटसोर्स कर्मचारी जानकारी के लिए बता दें कि आउटसोर्स कर्मचारी वे श्रमिक होते हैं जिन्हें कोई कंपनी या सरकारी विभाग सीधे तौर पर नियुक्त न करके, किसी तीसरी निजी एजेंसी या ठेकेदार के माध्यम से काम पर रखती है। ये कर्मचारी मुख्य संस्थान के कर्मचारी नहीं माने जाते, बल्कि एजेंसी के पेरोल पर होते हैं और उन्हें आमतौर पर संविदा या अल्पकालिक (Temporary) आधार पर काम पर रखा जाता है। इनकी नियुक्ति और वेतन का प्रबंधन ठेकेदार या आउटसोर्सिंग कंपनी करती है। ये कर्मचारी स्थायी नहीं होते और उनकी नौकरी अक्सर टेंडर या ठेके की अवधि (जैसे 1-3 साल) तक ही सीमित होती है।

ग्वालियर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अल्पसंख्यक संस्थान तय करेंगे प्राचार्य, सरकार नहीं लगा सकेगी नियम

ग्वालियर  ग्वालियर स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की युगल पीठ ने अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के अधिकारों को लेकर अहम और ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक संस्थानों को अपने प्राचार्य या प्रभारी प्राचार्य के चयन का पूर्ण संवैधानिक अधिकार है। राज्य सरकार इन संस्थानों पर वरिष्ठता आधारित नियम लागू करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। सुनवाई के दौरान पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान में प्राचार्य की भूमिका केंद्रीय होती है, जो अनुशासन, प्रशासन और शिक्षा की गुणवत्ता को निर्धारित करता है। ऐसे में संस्थान को यह स्वतंत्रता होनी चाहिए कि वह अपनी आवश्यकता और योग्यता के आधार पर नेतृत्व का चयन करे, भले ही वह व्यक्ति वरिष्ठतम न हो। कोर्ट ने 25 अगस्त 2021 और 8 सितंबर 2021 को जारी उन सरकारी सर्कुलरों को अल्पसंख्यक संस्थानों पर लागू होने के मामले में निरस्त कर दिया, जिनमें वरिष्ठतम शिक्षक को ही प्रभारी बनाने का प्रावधान था। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि एक बार प्रबंधन द्वारा किसी योग्य व्यक्ति का चयन कर लिया जाए, तो उसकी उपयुक्तता पर सरकार या न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करेंगे। विदिशा से ग्वालियर तक की कानूनी जंग वरिष्ठ अधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी के मुताबिक, यह मामला विदिशा स्थित एसएसएल जैन पीजी कॉलेज से शुरू हुआ। कॉलेज की तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य डॉ. शोभा जैन के सेवानिवृत्त होने के बाद प्रबंधन समिति ने डॉ. एसके उपाध्याय को प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया। हालांकि, शासन के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक ने इस फैसले को निरस्त करते हुए वरिष्ठता के आधार पर डॉ. अर्चना जैन को प्रभार सौंपने का आदेश जारी कर दिया। प्रबंधन ने इसे अपनी स्वायत्तता में हस्तक्षेप मानते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में चुनौती दी। शुरुआत में सिंगल बेंच ने शासन के पक्ष में फैसला दिया, लेकिन अब ग्वालियर की युगल पीठ ने उस आदेश को पूरी तरह पलटते हुए प्रबंधन के अधिकार को सही ठहराया।