samacharsecretary.com

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ढालसिंह बिसेन सहित नव नियुक्त राज्यपालों को दी बधाई

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ढालसिंह बिसेन सहित नव नियुक्त राज्यपालों को दी बधाई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नव नियुक्त राज्यपालों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने मध्यप्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री , वरिष्ठ नेता ढालसिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया है। यह हर्षदायी समाचार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कामना की बिसेन के सार्वजनिक जीवन के सुदीर्घ अनुभव से उत्तराखण्ड की प्रगति को लाभ मिलेगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अन्य राज्यों में नियुक्त किए गए राज्यपालों को भी हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा 6 राज्यों के नए राज्यपालों की नियुक्ति की गई है। इनमें ढाल सिंह बिसेन को (उत्तराखंड) के साथ ही ओम प्रकाश माथुर (केरलम) राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ( तमिलनाडु)ब्रज मोहन राम ( ओडिशा) डॉ. सुधा यादव ( कर्नाटक) और दुष्यंत गौतम ( सिक्किम) को राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

MP Nagar Nikay Election 2027: वार्डों की सीमाएं बदलने की हलचल, इटारसी में पार्षदों का चुनावी गणित बदलने के आसार

इटारसी  मध्य प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राज्य सरकार ने प्रशासनिक तैयारी शुरू कर दी है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सचिव बीएस जामोद द्वारा जारी आदेश के तहत प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को 31 अक्टूबर 2026 तक नगरीय निकायों की सीमावृद्धि, वार्डों का पुनर्गठन, परिसीमन, नवीन निकायों/ नगर निगम गठन के पूर्ण प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के बाद इटारसी नगरपालिका के वार्डों में हलचल शुरू हो गई है। हालांकि निकायों की सीमावृद्धि और वार्ड परिसीमन का निर्णय स्थानीय निकायों को ही लेना है। वे प्रस्ताव बनाकर भेजेंगे, तभी शासन कोई निर्णय ले पाएगा। राजनीतिक नफा-नुकसान इटारसी शहर के बाजार क्षेत्र में भाजपा का मजबूत गढ़ है। पुरानी इटारसी, नाला मोहल्ला और गरीबी लाइन के अलावा पीपल मोहल्ला क्षेत्र में कांग्रेस का जनाधार भी असरदार है। वार्डों की सीमाओं का यदि पुनर्गठन (Delimitation) किया गया तो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। जिसका असर नतीजों पर दिखने की उम्मीद है। इसके अलावा वार्ड बड़े और अधिक मतदाता होने की वजह से उन वार्डों में भाग्य आजमा रहे उम्मीदवारों को प्रचार-प्रसार में अधिक समय लगता है। कई बार तो वे दूसरी दफा कुछ क्षेत्रों के मतदाताओं तक संपर्क भी नहीं कर पाते हैं। क्यों जरूरी है वार्डों का परिसीमन? निकायों में कुछ वार्ड ऐसे हैं जिनमें मतदाता ज्यादा हैं। भौगोलिक क्षेत्र भी बड़ा है। कुछ वार्ड ऐसे हैं जिनमें मतदाता कम हैं। भौगोलिक क्षेत्र भी छोटा है। ऐसे में इन वार्डों में विकास कार्य प्रभावित होते हैं। बड़े क्षेत्र के जनप्रतिनिधि को अतिरिक्त मेहनत करनी होती है। उदाहरण के तौर पर शहर के 34 वार्डों में सबसे कम वोटर वाले वार्ड 8 (मतदाता 1070), वार्ड 14 (मतदाता 1053), वार्ड 32 (मतदाता 1170) हैं। इसके अलावा सबसे अधिक मतदाता वाले वार्ड 2 (मतदाता 3494), वार्ड 21 (मतदाता 3439) हैं। मतदाता संख्या के इन्हीं अंतरों को शासन ठीक कर लगभग बराबर पर लाना चाहता है। वार्ड परिसीमन व आरक्षण का पेंच पूर्व वरिष्ठ पार्षद व अधिवक्ता यज्ञदत्त गौर का कहना है कि मप्र नगरपालिका (वाडों का विस्तार) नियम, 1994 के तहत सीमाओं के पुनर्गठन के बाद नए सिरे से एसटी, एससी, ओबीसी, महिला आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। सीमावृद्धि और वाडों के पुनर्गठन से कई वर्तमान पार्षदों के पारंपरिक वाडों की सीमाएं बदल जाएंगी। कुछ सीटें आरक्षित हो सकती हैं। ऐसे में कई स्थापित नेताओं को नए वाडों की तलाश करनी पड़ेगी। मौजूदा जनप्रतिनिधि ऐसे बदलावों से डरते हैं। निकायों से मांगे गए है प्रस्ताव- सीएमओ वार्डों के परिसीमन के लिए शासन ने नगरीय निकायों से प्रस्ताव मांगे हैं। इटारसी नगरपालिका में इसकी आवश्यकता है या नहीं। इस संबंध में परिषद की बैठक बुलाकर निर्णय लिया जाएगा।- सुरेखा जाटव, सीएमओ नपा

Indore Water Crisis: 37% कम बारिश से गिरा भूजल स्तर, नर्मदा पर निर्भरता घटाने के लिए नया जल नेटवर्क तैयार

इंदौर   इंदौर शहर में इस बार औसत से करीब 37 प्रतिशत कम बारिश होने से न सिर्फ भूजल स्तर में गिरावट आई है, बल्कि कई जलस्रोतों में बहुत कम पानी स्टोर हुआ है। अब वैकल्पिक जलस्रोत विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि नर्मदा जल पर निर्भरता कम हो और भूजल के दोहन में भी कमी आए। जिला प्रशासन ने चोरल, तिंछा, और शीतला माता फॉल को जलस्रोत के तौर पर विकसित करने की योजना बनाई है। अभी प्रोजेक्ट का परीक्षण कराया जा रहा है। इंदौर को मिलने लगेगा पानी प्रोजेक्ट से जुड़े एक्सपर्ट का दावा है कि तिछा फाल में 120 से 150 मिलियन घन मीटर पानी स्टोरेज की क्षमता विकसित हो सकती है। महू के आसपास अन्य जलस्रोत तैयार करने की भी प्लानिंग है। ऐसा हुआ तो नर्मदा का महू में जाने वाला 50 एमएलडी पानी इंदौर को मिलने लगेगा। इस प्रोजेक्ट के साथ आसपास के कई तालाबों और जलस्रोतों को विकसित कर वहां आने वाला पानी असरावद या लिम्बोदी लाने की योजना है। यदि सब कुछ ठीक रहा तो प्रोजेक्ट की रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी और उसके आधार पर निर्णय होगा। भूजल स्तर में होगा सुधार मालूम हो, नर्मदा का पानी शहर में पीने के अलावा रास्ते में सिंचाई के लिए भी दिया जाता है। फसल के बाद भी इस पानी की सप्लाई जारी रहती है। कई जगह मोटर लगाकर पानी खींचा जाता है। यह पानी असरावद या लिम्बोदी के आसपास के तालाबों से लिफ्ट कर लाया जा सकता है। ओवरफ्लो होने वाला पानी कनाड़ नदी में 12 महीने बहता है और यह तिछा में आता है। इस पानी को स्टॉप डैम बनाकर रोका जा सकता है। यह पानी शहर के लिम्बोदी तालाब तक लाया जाए तो बायपास से लगी कई कॉलोनियों के भूजल स्तर में सुधार होगा। जल संचयन और संरक्षण जरूरी शहर के आसपास 40 से 50 किमी में कई वैकल्पिक स्रोत हैं, जिन पर काम करने से जल संचयन और संरक्षण होने से पानी की क्षमता बढ़ सकती है। कुछ वर्ष पहले तत्कालीन महापौर कृष्णमुरारी मोघे ने चोरल नदी में बारिश के दौरान आने वाले पानी को शहर में लाने की योजना बनाई थी। एक दशक में जलस्रोत बढ़ाने पर पर्याप्त काम नहीं हुआ। अब जरूरत है कि नर्मदा और यशवंत सागर के अलावा पानी के अन्य स्रोतों की भी नगर निगम तलाश करे। अलग-अलग स्रोतों से आने वाले पानी को स्टॉप डैम बनाकर रोकें और उसे शहर में नए तालाबों में लाया जाए। इससे एक्वेफर के जरिए वाटर रिचार्जिंग भी हो सकेगी। यह किया जा सकता है काम -तिंछा फाल में कानड़ नदी (दतोदा कैचमेंट) से बारिश के समय खूब पानी आता है, लेकिन यह बह जाता है। इस पानी को बांध बनाकर रोकना होगा। और आगे बड़े तालाब विकसित करने होंगे, ताकि वर्ष भर उपयोग किया जा सके। यह जलूद से पहले है, इसलिए इस पानी को इंदौर तक लाने की लागत भी कम रहेगी। -महू में ग्राम भाटखेड़ी के पास बड़े तालाब में जानापाव कैचमेंट एरिया से खूब पानी आता है। तालाब में कई महीनों तक पानी स्टोर रहता है। इस पानी के उपयोग की योजना बनाई जा सकती है। -तिंछाफाल में बड़ा जलाशय बनाया जाए तो उसका संभावित स्टोरेज 120 से 150 मिलियन क्यूबिक मीटर हो सकता है। इंदौर की पानी की मांग 700 से 900 एमएलडी है। तिंछाफाल से शहर की 35 से 50% पेयजल जरूरत पूरी हो सकती है। नर्मदा नदी के अलावा अन्य जलस्रोत विकसित करने की योजना पर काम किए जा रहे हैं। वैकल्पिक जलात में नया जलस्रोत बनाना नहीं है, बल्कि नेटवर्क स्थापित करना है। इसके लिए सभी बिंदुओं पर परीक्षण किया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी। प्रारंभिक स्थिति के आंकलन से स्पष्ट हुआ है कि शहर में पानी का समानांतर नया नेटवर्क स्थापित किया जा सकता है। इस नेटवर्क से पानी तो मिलेगा, भूजल स्तर में भी वृद्धि होगी। – सुरेश एमजी, जल प्रबंधन विशेषज्ञ समझें पानी का सिस्टम -कनाड़ नदी में पाताल पानी से पानी आता है। यह और आसपास से आया पानी तिंछा में जाता है। तिंछा के आगे इंटेक संरचना विकसित कर पम्पिंग स्टेशन से पानी असरावद -पाइप लाइन से यह पानी लिम्बोदी तालाब तक लाया जा सकता है। इस पूरे नेटवर्क में लगभग 15 किमी का पाइप लाइन का क्षेत्रफल विकसित करना होगा। ये हैं परियोजना के मुख्य बिंद प्रस्तावित क्षमता : 50 MLD (5 करोड़ लीटर प्रति दिन) कुल लंबाई:- 14-15 km टिया कनाड़ असत: 9.8 km असरावद लिम्बोदी: 4.4 km) संभावित पाइप व्यास: 800-900 mm पंपिंग हेड : स्थल सर्वे के बाद निधीरित (अनुमानित 20-80 मीटर) मध्यवर्ती जलाशय : 1-2 MCM

MP Police की अंतरराष्ट्रीय पहचान, DSP रेणु मुराव और TI नीरज वर्मा संयुक्त राष्ट्र पुलिस मिशन में तैनात

भोपाल  मध्य प्रदेश पुलिस के अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सेवा देने का अवसर मिला है. मध्य प्रदेश पुलिस की डीएसपी रेणु मुराव और टीआई नीरज वर्मा को एक वर्ष के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) पुलिस मिशन में तैनात किया गया है. इस दौरान दोनों अधिकारी अंतरराष्ट्रीय पुलिस सेवा के तहत अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे और विभिन्न देशों के पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर काम करने का अवसर प्राप्त करेंगे।  कार्यकुशलता और पेशेवर दक्षता का प्रदर्शन मध्य प्रदेश पुलिस के दो अधिकारी संयुक्त राष्ट्र पुलिस मिशन में एक वर्ष तक अपनी सेवा देंगे. DSP रेणु मुराव और TI नीरज वर्मा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिली है. यह तैनाती मध्य प्रदेश पुलिस के लिए गौरव की बात मानी जा रही है. अंतरराष्ट्रीय पुलिस मिशन में शामिल होकर अधिकारी अपने अनुभव, कार्यकुशलता और पेशेवर दक्षता का प्रदर्शन करेंगे. साथ ही उन्हें विभिन्न देशों की पुलिस व्यवस्था, कार्यप्रणाली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों को समझने का अवसर भी मिलेगा।  मध्य प्रदेश की महिला अधिकारियों को भी मिला अवसर संयुक्त राष्ट्र पुलिस मिशन में मध्य प्रदेश से तीन महिला पुलिस अधिकारियों को भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है. इनमें डीएसपी रेणु मुराव के अलावा पांढुर्णा की रिजर्व इंस्पेक्टर (RI) अनिता और एएसपी निधि शिवहरे शामिल हैं. इन अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी सेवाएं देने का अवसर मिला है. महिला अधिकारियों की इस भागीदारी को पुलिस सेवा में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और उनकी पेशेवर क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  एक वर्ष तक निभाएंगे जिम्मेदारी डीएसपी रेणु मुराव और टीआई नीरज वर्मा संयुक्त राष्ट्र पुलिस मिशन में एक वर्ष तक सेवाएं देंगे. जानकारी के अनुसार, टीआई नीरज वर्मा अपना एक वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद भारत लौटेंगे. वर्मा वर्तमान मे भोपाल के खजुरी थाना प्रभारी हैं।  एडिशनल पुलिस कमिश्नर शैलेन्द्र सिंह चौहान ने सभी पुलिस अधिकारियो को बधाई दी है. उन्होंने कहा कि, ''मप्र पुलिस के लिए ये सौभग्य की बात है की हमारे पुलिस अधिकारी अब विदेश में अपने कर्तव्य का पालन करेंगे।  पुलिसिंग के वैश्विक तौर-तरीकों समझेंगे संयुक्त राष्ट्र पुलिस मिशन में तैनाती पुलिस अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण पेशेवर अनुभव होता है. इस दौरान अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय, विभिन्न परिस्थितियों में कार्य करने और पुलिसिंग के वैश्विक तौर-तरीकों को समझने का अवसर मिलता है. मध्य प्रदेश पुलिस के इन अधिकारियों की तैनाती से प्रदेश की पुलिस सेवा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। 

Gwalior Tourism: स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत संवरेगा फूलबाग, ऐतिहासिक स्थलों को मिलेगा नया रूप

ग्वालियर  शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों को नए आकर्षण के रूप में विकसित करने के लिए स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के अंतर्गत फूलबाग एक्सपीरियंस जोन में चल रहे कार्य अब रफ्तार पकड़ेंगे। अभी तक जलविहार के सामने से ट्रैफिक डायवर्ट होने के कारण काम की गति तेज नहीं हो पा रही थी। अब बैजाताल में पाथवे का काम लगभग पूरा होने के साथ ही हेरिटेज ई-व्हीकल के संचालन की तैयारी भी आगे बढ़ी है। इसके लिए ई-चार्जिंग स्टेशन का निर्माण शुरू करा दिया गया है। गोपाल मंदिर में पत्थर की नई जालियां लगाने का काम भी तेज किया गया है। इटालियन गार्डन में इंपोजिंग शो की तैयारी     वहीं इटालियन गार्डन में प्रस्तावित इंपोजिंग शो को शुरू करने के लिए उपकरण जुटाने के साथ इसकी स्क्रिप्ट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। योजना के तहत फूलबाग क्षेत्र के विभिन्न स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य यहां आने वाले पर्यटकों को केवल ऐतिहासिक और दर्शनीय स्थलों तक सीमित अनुभव देने के बजाय बेहतर सुविधाओं और नए आकर्षणों से जोड़ना है। बैजाताल की ओर पाथवे का निर्माण इसी दिशा में महत्वपूर्ण है।     दूसरी ओर, हेरिटेज ई-व्हीकल के लिए चार्जिंग स्टेशन तैयार होने से इनके संचालन के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधा विकसित होगी। फूलबाग एक्सपीरियंस जोन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल इटालियन गार्डन के इंपोजिंग शो की तैयारियां भी आगे बढ़ रही हैं। संबंधित कंपनी ने इसके लिए उपकरण मंगाने शुरू कर दिए हैं। शो की सैंपल स्क्रिप्ट तैयार कर पर्यटन विभाग के भोपाल स्थित मुख्यालय को अंतिम स्वीकृति के लिए भेजी गई है। स्क्रिप्ट को मंजूरी मिलने के बाद शो से संबंधित आगामी गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा सकेगा। इससे इटालियन गार्डन में पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण विकसित करने की योजना को गति मिलेगी। गोपाल मंदिर से जलविहार तक भी काम गोपाल मंदिर में पत्थर की नई जालियां लगाने से संबंधित काम पूरा हो चुका है। वहीं जलविहार के सामने मुख्य मार्ग पर पत्थर बदलने का काम भी तेज करने की तैयारी है। इन कार्यों के माध्यम से क्षेत्र की संरचनाओं और आसपास के हिस्सों को बेहतर स्वरूप देने पर ध्यान दिया जा रहा है। फूलबाग, गोपाल मंदिर, बैजाताल, जलविहार और इटालियन गार्डन जैसे स्थलों के आसपास चल रहे कार्यों से इस पूरे क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की योजना आगे बढ़ेगी। एलिवेटेड रोड और बारिश से धीमी हुई थी गति फूलबाग एक्सपीरियंस जोन के विकास कार्यों पर एलिवेटेड रोड परियोजना के कारण लागू ट्रैफिक डायवर्जन का असर पड़ा था। वर्षा के मौसम में भी निर्माण कार्यों की गति प्रभावित हुई। अब अलग-अलग हिस्सों में काम आगे बढ़ने के साथ परियोजना को गति देने पर जोर है। पाथवे, ई-चार्जिंग स्टेशन और इंपोजिंग शो से संबंधित गतिविधियों में प्रगति से योजना के तहत विकसित की जा रही पर्यटन सुविधाओं को आकार मिलने लगेगा।

मध्यप्रदेश के राजकीय पशु बारहसिंगा की बढ़ी आबादी, 1964 में बचे थे सिर्फ 66; अब 1,400 के करीब पहुंचे

भोपाल   मध्य प्रदेश के राजकीय पशु बारहसिंगा की संख्या अब 1,400 हो गई है। एक समय बारहसिंगा छत्तीसगढ़ के रायपुर, जगदलपुर से लेकर गुजरात के अहमदाबाद और महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले तक पाए जाते थे। वर्ष 1964 में केवल 66 हार्ड ग्राउंड प्रजाति के बारहसिंगा ही कान्हा में बच गए थे। वर्ष 2010 के आसपास इनकी संख्या बढ़कर 250 हुई थी, अब यहां संख्या बढ़कर करीब 1000 हो गई है। पुनर्वास अभियान सफल विलुप्त होती इस प्रजाति को बचाने के लिए सतपुड़ा और बांधवगढ़ में पुनर्वास अभियान सफल रहा है। कान्हा टाइगर रिजर्व में बारहसिंगा विलुप्त न हो जाएं इसलिए सतपुड़ा को इनके अनुकूल मानते हुए यहां बसाने का निर्णय लिया गया। इससे पहले वन विहार में कान्हा से बारहसिंगा लाकर बसाए गए। यहां मिली सफलता के बाद सतपुड़ा के बोरी में वर्ष 2015 में एन्क्लोजर बनाकर इसकी शिफ्टिंग की गई। वर्ष 2015 से 2023 तक 115 बारहसिंगा शिफ्ट किए गए। अब इनकी संख्या बढ़कर 300 हो गई है। प्रदेश में दो प्रजातियां बारहसिंगा की दो प्रजातियां बारहसिंगा की दो प्रजाति है। इनमें हार्ड ग्राउंड प्रजाति कान्हा राष्ट्रीय उद्यान जैसे सूखे घास के मैदानों और ठोस जमीनों पर रहती है। इसे भी दलदली भूमि पर रहना पसंद है इसलिए यह कुछ समय के लिए पानी में जाता है। वहीं वेटलैंड बारहसिंगा दलदली इलाकों में ही पाया जाता है।     सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बारहसिंगा मेगा पॉपुलेशन में 3 जगह पर है। इनकी जनसंख्या बढ़ाई जा सके इसके लिए सतपुड़ा में बारहसिंगा कॉरिडोर बना रहे हैं। 12 साल में अलग-अलग समय पर कान्हा से बारहसिंगा सतपुड़ा लाए गए। अब इनकी संख्या बढ़कर 300 हो गई है। इसी तरह कान्हा और बांधवगढ़ में भी बारहसिंगा की संख्या बढ़ी है।- राखी नंदा, क्षेत्र संचालक, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व  

MP में चीतों की संख्या बढ़ी, कूनो में भारतीय चीतों ने विदेशी चीतों को पीछे छोड़ा; गांधीसागर-नौरादेही में भी बसाने की तैयारी

श्योपुर   कूनो नेशनल पार्क जन्मे यानी भारतीय चीतों की बढ़ती संख्या ने चीता पुनर्स्थापना परियोजना के भविष्य को लेकर नई उम्मीदें जगाई हैं। कम उम्र के देसी चीतों की अच्छी उपस्थिति इस लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि वे आगामी वर्षों में कुनबे के विस्तार में योगदान कर सकेंगे। परियोजना की सफलता अब केवल देश में चीतों की संख्या बढ़ने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उनके स्वस्थ रहने, प्राकृतिक वातावरण में ढलने और उनमें अगली पीढ़ी तैयार करने की क्षमता भी निर्भर करेगी। कूनो में विदेशी से अधिक हुई भारत में जन्मे चीतों की संख्या उल्लेखनीय है कि ढाई वर्ष की उम्र के बाद चीता वयस्क माना जाता है। वर्तमान में कूनो में 54 चीते हैं, उनमें 38 भारत में जन्मे हैं। इनमें एक साल से कम उम्र के 28 शावक सबसे बड़ा समूह हैं। वहीं, एक से ढाई वर्ष के 10 और तीन से छह वर्ष के 16 चीते शामिल हैं। वयस्क समूह में विदेशी चीतों में नामीबिया के दो, दक्षिण अफ्रीका के पांच और बोत्सवाना के सात चीते शामिल हैं। इस तरह कूनो में अब भारत में जन्मे चीतों की संख्या विदेशी मूल के चीतों से अधिक है। सर्वाइवल रेट में कूनो का प्रदर्शन उच्च स्तर पर केंद्र सरकार की मार्च 2026 में जारी जानकारी के अनुसार, शावकों की सर्वाइवल रेट 73.33 प्रतिशत रही। सरकार ने इसे दुनिया में चीतों के पुनर्स्थापन की परियोजनाओं के मुकाबले ऊंचे स्तरों में शामिल बताया था। हालांकि, अलग-अलग देशों के आंकड़ों की तुलना करते समय अवधि, उम्र और निगरानी की परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।   439 हेक्टेयर में तैयार किया गया सुरक्षित क्षेत्र चीतों के लिए वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र तैयार किया गया है। यहां विशेष बाड़े यानी बोमा के साथ निगरानी और स्वास्थ्य देखभाल की व्यवस्था की गई है। चीतों को नए वातावरण में ढलने तक वन विभाग की निगरानी में रखा जाएगा। क्षेत्र में पहले से बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय और भालू जैसे वन्यजीव मौजूद हैं। ऐसे में चीतों की मौजूदगी के साथ पूरे क्षेत्र के वन्यजीव प्रबंधन और पर्यटन को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी है।  प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बनेगा तीसरा चीता ठिकाना वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में करीब 2,339 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसे प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बताया जाता है। नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य और आसपास के क्षेत्र को मिलाकर 20 सितंबर 2023 को इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला था। अब इसी क्षेत्र में चीते आने से बुंदेलखंड का यह वन क्षेत्र देश के चीता संरक्षण अभियान के नक्शे पर भी प्रमुखता से आएगा। यानी कूनो तक सीमित रहा चीता संरक्षण अभियान अब मध्यप्रदेश के दूसरे बड़े वन क्षेत्रों तक पहुंच चुका है।  देश में 60 हुए चीते, 41 भारत में जन्मे चीता पुनर्स्थापना अभियान के तहत भारत में चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 5 अक्टूबर को कूनो में मादा चीता KJP21 ने पांच शावकों को जन्म दिया। इसके बाद देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है। इनमें 41 चीते भारत में जन्मे हैं। 7 अक्टूबर को कूनो से नर चीता थोलो और मादा CCB-3 को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया जाएगा। इनके स्थानांतरण के बाद कूनो में 54 चीते रह जाएंगे। गांधीसागर में दक्षिण अफ्रीकी मूल के प्रभास, पावक और धीरा के अलावा बोत्सवाना से लाई गई मादा राधा मौजूद है। बुंदेलखंड के लिए क्यों अहम है चीता बुंदेलखंड लंबे समय से पानी, पलायन और रोजगार जैसी चुनौतियों से जूझता रहा है। ऐसे में वन्यजीव पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। चीतों के आने के बाद केवल पर्यटक ही नहीं, बल्कि उनके आसपास सेवाएं देने वाले स्थानीय लोगों के लिए भी काम के नए अवसर बन सकते हैं। सरकार की योजना वन्यजीव पर्यटन को स्थानीय रोजगार से जोड़ने की है। आने वाले समय में गाइड, वाहन चालक, होम-स्टे और स्थानीय उत्पादों से जुड़े कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।  कूनो से शुरू हुआ सफर अब तीन इलाकों तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो में नामीबिया से लाए गए चीतों को विमुक्त कर भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते लाए गए। मध्यप्रदेश में अब कूनो के साथ गांधीसागर और वीरांगना दुर्गावती तीन प्रमुख चीता आवास बन रहे हैं। इस तरह 7 अक्टूबर को होने वाली विमुक्ति सिर्फ दो चीतों को नए जंगल में छोड़ने की घटना नहीं होगी, बल्कि मध्यप्रदेश में चीता संरक्षण के भौगोलिक विस्तार का अगला चरण भी होगी।  नामीबियाई और दक्षिण अफ्रीकी चीतों के आंकड़े     कूनो में नामीबिया से लाए गए आठ चीतों में से दो जीवित हैं। दक्षिण अफ्रीका से आए 12 चीतों में से आठ चीते जिंदा हैं। इस लिहाज से शुरुआती समूहों में नामीबियाई चीतों की जीवित रहने की दर 25 प्रतिशत और दक्षिण अफ्रीकी चीतों की 66.7 प्रतिशत रही। बोत्सवाना से आए नौ चीते अपेक्षाकृत हाल में यहां पहुंचे हैं, इसलिए उनके लिए इतनी कम अवधि में सर्वाइवल रेट की तुलना करना उचित नहीं होगा। ये आंकड़े अलग-अलग मूल समूहों की स्थिति बताते हैं, न कि उन देशों के प्राकृतिक आवास में चीतों की सर्वाइवल रेट। फैक्ट फाइल     कुल चीतों की संख्या 60 है।     41 भारत में जन्मे चीता हैं। 19 चीते विदेशी हैं। इनमें 2 नामीबिया, 8 साउथ अफ्रीका, 9 बोत्सवाना के हैं।     28 शावक एक साल से कम उम्र के हैं।     7 शावक 1 से 2 साल के बीच की उम्र के हैं।     54 चीते कूनो नेशनल पार्क में।     04 गांधीसागर में।     2 नौरादेही में रह रहे। विदेश से लाए चीतों से ज्यादा भारत में जन्मे चीतों की संख्या भारत में जन्मे शावक-चीतों की संख्या अब विदेश से लाए चीतों से ज्यादा हो गई है। यह देश के लिए बड़ी खुशखबरी है, पूरी उम्मीद है कि भारतीय चीते आने वाले समय में अपनी संख्या को और बढ़ाएंगे। अब कूनो के अलावा गांधीसागर और नौरादेही में भी चीते रह रहे हैं। उत्तम शर्मा, सीसीएफ, कूनो नेशनल पार्क, श्योपुर।

Cancer Treatment: कैंसर के इलाज में आएगी तेजी! नई रेडियोथेरेपी तकनीक से ट्यूमर पर रहेगी पल-पल नजर

इंदौर  कैंसर मरीजों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। जानकारी के लिए बता दें कि आधुनिक रेडियोथेरेपी तकनीक पर हो रहे शोध से संभावना है कि उपचार के दौरान कैंसर के ट्यूमर पर नजर रखते हुए रेडिएशन दिया जा सकेगा। इससे कैंसरग्रस्त हिस्से पर सटीक निशाना लगाने और आसपास के स्वस्थ अंगों को नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी। भविष्य में ऐसी व्यवस्था विकसित करने का लक्ष्य है, जिसमें सुबह बीमारी की पहचान हो, दोपहर तक जांच और इलाज की प्रक्रिया शुरू हो जाए और उपचार के बाद मरीज को जल्द घर भेजा जा सके। यह बात इंग्लैंड में इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर रिसर्च और द रॉयल मार्सडेन एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट के ज्वाइंट डिपार्टमेंट ऑफ फिजिक्स के प्रमुख प्रो. उवे ओएल्फके ने कैंसर उपचार में रेडियोथेरेपी की बदलती तकनीक पर चर्चा में कही। कैंसर के आधुनिक उपचार में कर रहे शोध वे करीब दो दशक से रेडियोथेरेपी, मेडिकल फिजिक्स और कैंसर के आधुनिक उपचार से जुड़ी तकनीकों पर शोध कर रहे हैं। वे इंटरनेशनल साइंटिफिक एक्सचेंज प्रोग्राम मीट द प्रोफेसर के तहत इंदौर पहुंचे थे। यहां उन्होंने ऑन्कोलॉजी के जटिल और अस्पष्ट पहलुओं पर काम करना, रेडिएशन थेरेपी अनुसंधान की चुनौतियां और अवसर विषय पर विचार साझा किए। उन्होंने एक दिन पहले आरआर कैट में भी विशेष सत्र लेकर इसी विषय पर चर्चा की। उनके मुताबिक, कैंसर के बेहतर उपचार के लिए आधुनिक तकनीक के साथ वैज्ञानिक शोध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग महत्वपूर्ण है। भारतीय कैंसर केंद्रों की सराहना प्रो. ओएल्फके ने रियल टाइम ट्यूमर थेरेपी पर कहा कि इस तकनीक में उपचार के दौरान ट्यूमर की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाती है। सांस लेने जैसी शारीरिक गतिविधियों के कारण भी कुछ ट्यूमर की स्थिति बदल सकती है। ऐसे में इमेजिंग तकनीक से ट्यूमर की वास्तविक स्थिति के अनुसार रेडिएशन देने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रो. ओएल्फके के शोध का प्रमुख क्षेत्र यह भी है कि रेडिएशन थेरेपी को प्रभावी कैसे बनाया जाए। उन्होंने भारत में रेडियोथेरेपी की आधुनिक सुविधाओं पर संतोष जताया। मुंबई के टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां उपलब्ध सुविधाएं यूरोप के कैंसर केंद्रों के स्तर की हैं।

वार्ड 77 को मिलेगी विकास कार्यों की सौगात, मंत्री सारंग ने किया भूमिपूजन

भोपाल सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सोमवार को नरेला विधानसभा अंतर्गत वार्ड क्रमांक 77 के हाउसिंग बोर्ड गैस राहत कॉलोनी में सीवेज एवं विभिन्न विकास कार्यों का वर्चुअल भूमिपूजन किया। मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विकास और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि नरेला विधानसभा में विकास कार्यों को सुनियोजित एवं चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। विधानसभा के प्रत्येक वार्ड की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देते हुए सड़क, सीवेज, जल निकासी और अन्य नागरिक सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रयास है कि विकास केवल निर्माण कार्यों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए। अमृत 2.0 परियोजना के तहत ये होंगे विकास कार्य अमृत 2.0 परियोजना के तहत वार्ड क्र. 77 में लगभग 18 करोड़ से अधिक की लागत से कुल 23.11 किलोमीटर का सीवेज नेटवर्क बिछाया जायेगा। इस परियोजना के तहत बिछाए जाने वाले नेटवर्क में 1111 मेनहोल एवं 1552 चेम्बर का निर्माण किया जाएगा। उक्त प्रस्तावित सीवेज नेटवर्क के माध्यम से कुल 3104 घरों को मेनलाइन से जोड़ा जायेगा। जलप्रदाय अमृत 2.0 परियोजना के तहत ये होंगे कार्य अमृत 2.0 परियोजना के अंतर्गत भोपाल जल प्रदाय परियोजना में जोन क्रमांक 17 के वार्ड क्रमांक 77 में कुल 5 किलोमीटर का जलप्रदाय नेटवर्क बिछाया जायेगा। राशि 5 करोड़ से अधिक की लागत से कुल 3104 घरों में नये कनेक्शन दिये जाएंगे, जिससे वार्ड की जनता को स्वच्छ एवं शुद्ध पेयजल प्राप्त हो सकेगा।  

कर्ज में डूबा मध्य प्रदेश, इनोवा हाइब्रिड पर वित्त विभाग का इनकार

इंदौर मध्य प्रदेश सरकार का खजाना इन दिनों नई गाड़ियां खरीदने की अनुमति नहीं दे रहा है। दोनों उप मुख्यमंत्रियों जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल ने इनोवा क्रिस्टा हाइब्रिड कार की मांग की है। गृह विभाग के स्टेट गैरेज की ओर से इसके लिए बजट का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा गया था, जिसे बजट की कमी बताकर लौटा दिया गया है। साथ ही कहा गया है कि नए वाहन अभी नहीं लिए जा रहे हैं, इसलिए फिलहाल पुराने वाहनों की मरम्मत कराकर काम चलाया जाए। द्वितीय अनुपूरक बजट की तैयारी, अनावश्यक खर्च पर रोक दरअसल द्वितीय अनुपूरक बजट की तैयारी में जुटे वित्त विभाग ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि ऐसा कोई प्रस्ताव न भेजा जाए, जिससे राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अनावश्यक भार पड़े। राज्य सरकार पर कर्ज भी पांच लाख 65 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। बता दें कि प्रदेश के मंत्रियों और अधिकारियों के लिए जो वाहन खरीदे जाते हैं, वे हाइब्रिड नहीं होकर बेस मॉडल के होते हैं।