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Gwalior Tourism: स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत संवरेगा फूलबाग, ऐतिहासिक स्थलों को मिलेगा नया रूप

ग्वालियर  शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों को नए आकर्षण के रूप में विकसित करने के लिए स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के अंतर्गत फूलबाग एक्सपीरियंस जोन में चल रहे कार्य अब रफ्तार पकड़ेंगे। अभी तक जलविहार के सामने से ट्रैफिक डायवर्ट होने के कारण काम की गति तेज नहीं हो पा रही थी। अब बैजाताल में पाथवे का काम लगभग पूरा होने के साथ ही हेरिटेज ई-व्हीकल के संचालन की तैयारी भी आगे बढ़ी है। इसके लिए ई-चार्जिंग स्टेशन का निर्माण शुरू करा दिया गया है। गोपाल मंदिर में पत्थर की नई जालियां लगाने का काम भी तेज किया गया है। इटालियन गार्डन में इंपोजिंग शो की तैयारी     वहीं इटालियन गार्डन में प्रस्तावित इंपोजिंग शो को शुरू करने के लिए उपकरण जुटाने के साथ इसकी स्क्रिप्ट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। योजना के तहत फूलबाग क्षेत्र के विभिन्न स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य यहां आने वाले पर्यटकों को केवल ऐतिहासिक और दर्शनीय स्थलों तक सीमित अनुभव देने के बजाय बेहतर सुविधाओं और नए आकर्षणों से जोड़ना है। बैजाताल की ओर पाथवे का निर्माण इसी दिशा में महत्वपूर्ण है।     दूसरी ओर, हेरिटेज ई-व्हीकल के लिए चार्जिंग स्टेशन तैयार होने से इनके संचालन के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधा विकसित होगी। फूलबाग एक्सपीरियंस जोन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल इटालियन गार्डन के इंपोजिंग शो की तैयारियां भी आगे बढ़ रही हैं। संबंधित कंपनी ने इसके लिए उपकरण मंगाने शुरू कर दिए हैं। शो की सैंपल स्क्रिप्ट तैयार कर पर्यटन विभाग के भोपाल स्थित मुख्यालय को अंतिम स्वीकृति के लिए भेजी गई है। स्क्रिप्ट को मंजूरी मिलने के बाद शो से संबंधित आगामी गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा सकेगा। इससे इटालियन गार्डन में पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण विकसित करने की योजना को गति मिलेगी। गोपाल मंदिर से जलविहार तक भी काम गोपाल मंदिर में पत्थर की नई जालियां लगाने से संबंधित काम पूरा हो चुका है। वहीं जलविहार के सामने मुख्य मार्ग पर पत्थर बदलने का काम भी तेज करने की तैयारी है। इन कार्यों के माध्यम से क्षेत्र की संरचनाओं और आसपास के हिस्सों को बेहतर स्वरूप देने पर ध्यान दिया जा रहा है। फूलबाग, गोपाल मंदिर, बैजाताल, जलविहार और इटालियन गार्डन जैसे स्थलों के आसपास चल रहे कार्यों से इस पूरे क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की योजना आगे बढ़ेगी। एलिवेटेड रोड और बारिश से धीमी हुई थी गति फूलबाग एक्सपीरियंस जोन के विकास कार्यों पर एलिवेटेड रोड परियोजना के कारण लागू ट्रैफिक डायवर्जन का असर पड़ा था। वर्षा के मौसम में भी निर्माण कार्यों की गति प्रभावित हुई। अब अलग-अलग हिस्सों में काम आगे बढ़ने के साथ परियोजना को गति देने पर जोर है। पाथवे, ई-चार्जिंग स्टेशन और इंपोजिंग शो से संबंधित गतिविधियों में प्रगति से योजना के तहत विकसित की जा रही पर्यटन सुविधाओं को आकार मिलने लगेगा।

मध्यप्रदेश के राजकीय पशु बारहसिंगा की बढ़ी आबादी, 1964 में बचे थे सिर्फ 66; अब 1,400 के करीब पहुंचे

भोपाल   मध्य प्रदेश के राजकीय पशु बारहसिंगा की संख्या अब 1,400 हो गई है। एक समय बारहसिंगा छत्तीसगढ़ के रायपुर, जगदलपुर से लेकर गुजरात के अहमदाबाद और महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले तक पाए जाते थे। वर्ष 1964 में केवल 66 हार्ड ग्राउंड प्रजाति के बारहसिंगा ही कान्हा में बच गए थे। वर्ष 2010 के आसपास इनकी संख्या बढ़कर 250 हुई थी, अब यहां संख्या बढ़कर करीब 1000 हो गई है। पुनर्वास अभियान सफल विलुप्त होती इस प्रजाति को बचाने के लिए सतपुड़ा और बांधवगढ़ में पुनर्वास अभियान सफल रहा है। कान्हा टाइगर रिजर्व में बारहसिंगा विलुप्त न हो जाएं इसलिए सतपुड़ा को इनके अनुकूल मानते हुए यहां बसाने का निर्णय लिया गया। इससे पहले वन विहार में कान्हा से बारहसिंगा लाकर बसाए गए। यहां मिली सफलता के बाद सतपुड़ा के बोरी में वर्ष 2015 में एन्क्लोजर बनाकर इसकी शिफ्टिंग की गई। वर्ष 2015 से 2023 तक 115 बारहसिंगा शिफ्ट किए गए। अब इनकी संख्या बढ़कर 300 हो गई है। प्रदेश में दो प्रजातियां बारहसिंगा की दो प्रजातियां बारहसिंगा की दो प्रजाति है। इनमें हार्ड ग्राउंड प्रजाति कान्हा राष्ट्रीय उद्यान जैसे सूखे घास के मैदानों और ठोस जमीनों पर रहती है। इसे भी दलदली भूमि पर रहना पसंद है इसलिए यह कुछ समय के लिए पानी में जाता है। वहीं वेटलैंड बारहसिंगा दलदली इलाकों में ही पाया जाता है।     सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बारहसिंगा मेगा पॉपुलेशन में 3 जगह पर है। इनकी जनसंख्या बढ़ाई जा सके इसके लिए सतपुड़ा में बारहसिंगा कॉरिडोर बना रहे हैं। 12 साल में अलग-अलग समय पर कान्हा से बारहसिंगा सतपुड़ा लाए गए। अब इनकी संख्या बढ़कर 300 हो गई है। इसी तरह कान्हा और बांधवगढ़ में भी बारहसिंगा की संख्या बढ़ी है।- राखी नंदा, क्षेत्र संचालक, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व  

MP में चीतों की संख्या बढ़ी, कूनो में भारतीय चीतों ने विदेशी चीतों को पीछे छोड़ा; गांधीसागर-नौरादेही में भी बसाने की तैयारी

श्योपुर   कूनो नेशनल पार्क जन्मे यानी भारतीय चीतों की बढ़ती संख्या ने चीता पुनर्स्थापना परियोजना के भविष्य को लेकर नई उम्मीदें जगाई हैं। कम उम्र के देसी चीतों की अच्छी उपस्थिति इस लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि वे आगामी वर्षों में कुनबे के विस्तार में योगदान कर सकेंगे। परियोजना की सफलता अब केवल देश में चीतों की संख्या बढ़ने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उनके स्वस्थ रहने, प्राकृतिक वातावरण में ढलने और उनमें अगली पीढ़ी तैयार करने की क्षमता भी निर्भर करेगी। कूनो में विदेशी से अधिक हुई भारत में जन्मे चीतों की संख्या उल्लेखनीय है कि ढाई वर्ष की उम्र के बाद चीता वयस्क माना जाता है। वर्तमान में कूनो में 54 चीते हैं, उनमें 38 भारत में जन्मे हैं। इनमें एक साल से कम उम्र के 28 शावक सबसे बड़ा समूह हैं। वहीं, एक से ढाई वर्ष के 10 और तीन से छह वर्ष के 16 चीते शामिल हैं। वयस्क समूह में विदेशी चीतों में नामीबिया के दो, दक्षिण अफ्रीका के पांच और बोत्सवाना के सात चीते शामिल हैं। इस तरह कूनो में अब भारत में जन्मे चीतों की संख्या विदेशी मूल के चीतों से अधिक है। सर्वाइवल रेट में कूनो का प्रदर्शन उच्च स्तर पर केंद्र सरकार की मार्च 2026 में जारी जानकारी के अनुसार, शावकों की सर्वाइवल रेट 73.33 प्रतिशत रही। सरकार ने इसे दुनिया में चीतों के पुनर्स्थापन की परियोजनाओं के मुकाबले ऊंचे स्तरों में शामिल बताया था। हालांकि, अलग-अलग देशों के आंकड़ों की तुलना करते समय अवधि, उम्र और निगरानी की परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।   439 हेक्टेयर में तैयार किया गया सुरक्षित क्षेत्र चीतों के लिए वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र तैयार किया गया है। यहां विशेष बाड़े यानी बोमा के साथ निगरानी और स्वास्थ्य देखभाल की व्यवस्था की गई है। चीतों को नए वातावरण में ढलने तक वन विभाग की निगरानी में रखा जाएगा। क्षेत्र में पहले से बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय और भालू जैसे वन्यजीव मौजूद हैं। ऐसे में चीतों की मौजूदगी के साथ पूरे क्षेत्र के वन्यजीव प्रबंधन और पर्यटन को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी है।  प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बनेगा तीसरा चीता ठिकाना वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में करीब 2,339 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसे प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बताया जाता है। नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य और आसपास के क्षेत्र को मिलाकर 20 सितंबर 2023 को इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला था। अब इसी क्षेत्र में चीते आने से बुंदेलखंड का यह वन क्षेत्र देश के चीता संरक्षण अभियान के नक्शे पर भी प्रमुखता से आएगा। यानी कूनो तक सीमित रहा चीता संरक्षण अभियान अब मध्यप्रदेश के दूसरे बड़े वन क्षेत्रों तक पहुंच चुका है।  देश में 60 हुए चीते, 41 भारत में जन्मे चीता पुनर्स्थापना अभियान के तहत भारत में चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 5 अक्टूबर को कूनो में मादा चीता KJP21 ने पांच शावकों को जन्म दिया। इसके बाद देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है। इनमें 41 चीते भारत में जन्मे हैं। 7 अक्टूबर को कूनो से नर चीता थोलो और मादा CCB-3 को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया जाएगा। इनके स्थानांतरण के बाद कूनो में 54 चीते रह जाएंगे। गांधीसागर में दक्षिण अफ्रीकी मूल के प्रभास, पावक और धीरा के अलावा बोत्सवाना से लाई गई मादा राधा मौजूद है। बुंदेलखंड के लिए क्यों अहम है चीता बुंदेलखंड लंबे समय से पानी, पलायन और रोजगार जैसी चुनौतियों से जूझता रहा है। ऐसे में वन्यजीव पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। चीतों के आने के बाद केवल पर्यटक ही नहीं, बल्कि उनके आसपास सेवाएं देने वाले स्थानीय लोगों के लिए भी काम के नए अवसर बन सकते हैं। सरकार की योजना वन्यजीव पर्यटन को स्थानीय रोजगार से जोड़ने की है। आने वाले समय में गाइड, वाहन चालक, होम-स्टे और स्थानीय उत्पादों से जुड़े कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।  कूनो से शुरू हुआ सफर अब तीन इलाकों तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो में नामीबिया से लाए गए चीतों को विमुक्त कर भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते लाए गए। मध्यप्रदेश में अब कूनो के साथ गांधीसागर और वीरांगना दुर्गावती तीन प्रमुख चीता आवास बन रहे हैं। इस तरह 7 अक्टूबर को होने वाली विमुक्ति सिर्फ दो चीतों को नए जंगल में छोड़ने की घटना नहीं होगी, बल्कि मध्यप्रदेश में चीता संरक्षण के भौगोलिक विस्तार का अगला चरण भी होगी।  नामीबियाई और दक्षिण अफ्रीकी चीतों के आंकड़े     कूनो में नामीबिया से लाए गए आठ चीतों में से दो जीवित हैं। दक्षिण अफ्रीका से आए 12 चीतों में से आठ चीते जिंदा हैं। इस लिहाज से शुरुआती समूहों में नामीबियाई चीतों की जीवित रहने की दर 25 प्रतिशत और दक्षिण अफ्रीकी चीतों की 66.7 प्रतिशत रही। बोत्सवाना से आए नौ चीते अपेक्षाकृत हाल में यहां पहुंचे हैं, इसलिए उनके लिए इतनी कम अवधि में सर्वाइवल रेट की तुलना करना उचित नहीं होगा। ये आंकड़े अलग-अलग मूल समूहों की स्थिति बताते हैं, न कि उन देशों के प्राकृतिक आवास में चीतों की सर्वाइवल रेट। फैक्ट फाइल     कुल चीतों की संख्या 60 है।     41 भारत में जन्मे चीता हैं। 19 चीते विदेशी हैं। इनमें 2 नामीबिया, 8 साउथ अफ्रीका, 9 बोत्सवाना के हैं।     28 शावक एक साल से कम उम्र के हैं।     7 शावक 1 से 2 साल के बीच की उम्र के हैं।     54 चीते कूनो नेशनल पार्क में।     04 गांधीसागर में।     2 नौरादेही में रह रहे। विदेश से लाए चीतों से ज्यादा भारत में जन्मे चीतों की संख्या भारत में जन्मे शावक-चीतों की संख्या अब विदेश से लाए चीतों से ज्यादा हो गई है। यह देश के लिए बड़ी खुशखबरी है, पूरी उम्मीद है कि भारतीय चीते आने वाले समय में अपनी संख्या को और बढ़ाएंगे। अब कूनो के अलावा गांधीसागर और नौरादेही में भी चीते रह रहे हैं। उत्तम शर्मा, सीसीएफ, कूनो नेशनल पार्क, श्योपुर।

Cancer Treatment: कैंसर के इलाज में आएगी तेजी! नई रेडियोथेरेपी तकनीक से ट्यूमर पर रहेगी पल-पल नजर

इंदौर  कैंसर मरीजों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। जानकारी के लिए बता दें कि आधुनिक रेडियोथेरेपी तकनीक पर हो रहे शोध से संभावना है कि उपचार के दौरान कैंसर के ट्यूमर पर नजर रखते हुए रेडिएशन दिया जा सकेगा। इससे कैंसरग्रस्त हिस्से पर सटीक निशाना लगाने और आसपास के स्वस्थ अंगों को नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी। भविष्य में ऐसी व्यवस्था विकसित करने का लक्ष्य है, जिसमें सुबह बीमारी की पहचान हो, दोपहर तक जांच और इलाज की प्रक्रिया शुरू हो जाए और उपचार के बाद मरीज को जल्द घर भेजा जा सके। यह बात इंग्लैंड में इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर रिसर्च और द रॉयल मार्सडेन एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट के ज्वाइंट डिपार्टमेंट ऑफ फिजिक्स के प्रमुख प्रो. उवे ओएल्फके ने कैंसर उपचार में रेडियोथेरेपी की बदलती तकनीक पर चर्चा में कही। कैंसर के आधुनिक उपचार में कर रहे शोध वे करीब दो दशक से रेडियोथेरेपी, मेडिकल फिजिक्स और कैंसर के आधुनिक उपचार से जुड़ी तकनीकों पर शोध कर रहे हैं। वे इंटरनेशनल साइंटिफिक एक्सचेंज प्रोग्राम मीट द प्रोफेसर के तहत इंदौर पहुंचे थे। यहां उन्होंने ऑन्कोलॉजी के जटिल और अस्पष्ट पहलुओं पर काम करना, रेडिएशन थेरेपी अनुसंधान की चुनौतियां और अवसर विषय पर विचार साझा किए। उन्होंने एक दिन पहले आरआर कैट में भी विशेष सत्र लेकर इसी विषय पर चर्चा की। उनके मुताबिक, कैंसर के बेहतर उपचार के लिए आधुनिक तकनीक के साथ वैज्ञानिक शोध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग महत्वपूर्ण है। भारतीय कैंसर केंद्रों की सराहना प्रो. ओएल्फके ने रियल टाइम ट्यूमर थेरेपी पर कहा कि इस तकनीक में उपचार के दौरान ट्यूमर की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाती है। सांस लेने जैसी शारीरिक गतिविधियों के कारण भी कुछ ट्यूमर की स्थिति बदल सकती है। ऐसे में इमेजिंग तकनीक से ट्यूमर की वास्तविक स्थिति के अनुसार रेडिएशन देने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रो. ओएल्फके के शोध का प्रमुख क्षेत्र यह भी है कि रेडिएशन थेरेपी को प्रभावी कैसे बनाया जाए। उन्होंने भारत में रेडियोथेरेपी की आधुनिक सुविधाओं पर संतोष जताया। मुंबई के टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां उपलब्ध सुविधाएं यूरोप के कैंसर केंद्रों के स्तर की हैं।

वार्ड 77 को मिलेगी विकास कार्यों की सौगात, मंत्री सारंग ने किया भूमिपूजन

भोपाल सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सोमवार को नरेला विधानसभा अंतर्गत वार्ड क्रमांक 77 के हाउसिंग बोर्ड गैस राहत कॉलोनी में सीवेज एवं विभिन्न विकास कार्यों का वर्चुअल भूमिपूजन किया। मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विकास और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि नरेला विधानसभा में विकास कार्यों को सुनियोजित एवं चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। विधानसभा के प्रत्येक वार्ड की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देते हुए सड़क, सीवेज, जल निकासी और अन्य नागरिक सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रयास है कि विकास केवल निर्माण कार्यों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए। अमृत 2.0 परियोजना के तहत ये होंगे विकास कार्य अमृत 2.0 परियोजना के तहत वार्ड क्र. 77 में लगभग 18 करोड़ से अधिक की लागत से कुल 23.11 किलोमीटर का सीवेज नेटवर्क बिछाया जायेगा। इस परियोजना के तहत बिछाए जाने वाले नेटवर्क में 1111 मेनहोल एवं 1552 चेम्बर का निर्माण किया जाएगा। उक्त प्रस्तावित सीवेज नेटवर्क के माध्यम से कुल 3104 घरों को मेनलाइन से जोड़ा जायेगा। जलप्रदाय अमृत 2.0 परियोजना के तहत ये होंगे कार्य अमृत 2.0 परियोजना के अंतर्गत भोपाल जल प्रदाय परियोजना में जोन क्रमांक 17 के वार्ड क्रमांक 77 में कुल 5 किलोमीटर का जलप्रदाय नेटवर्क बिछाया जायेगा। राशि 5 करोड़ से अधिक की लागत से कुल 3104 घरों में नये कनेक्शन दिये जाएंगे, जिससे वार्ड की जनता को स्वच्छ एवं शुद्ध पेयजल प्राप्त हो सकेगा।  

कर्ज में डूबा मध्य प्रदेश, इनोवा हाइब्रिड पर वित्त विभाग का इनकार

इंदौर मध्य प्रदेश सरकार का खजाना इन दिनों नई गाड़ियां खरीदने की अनुमति नहीं दे रहा है। दोनों उप मुख्यमंत्रियों जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल ने इनोवा क्रिस्टा हाइब्रिड कार की मांग की है। गृह विभाग के स्टेट गैरेज की ओर से इसके लिए बजट का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा गया था, जिसे बजट की कमी बताकर लौटा दिया गया है। साथ ही कहा गया है कि नए वाहन अभी नहीं लिए जा रहे हैं, इसलिए फिलहाल पुराने वाहनों की मरम्मत कराकर काम चलाया जाए। द्वितीय अनुपूरक बजट की तैयारी, अनावश्यक खर्च पर रोक दरअसल द्वितीय अनुपूरक बजट की तैयारी में जुटे वित्त विभाग ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि ऐसा कोई प्रस्ताव न भेजा जाए, जिससे राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अनावश्यक भार पड़े। राज्य सरकार पर कर्ज भी पांच लाख 65 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। बता दें कि प्रदेश के मंत्रियों और अधिकारियों के लिए जो वाहन खरीदे जाते हैं, वे हाइब्रिड नहीं होकर बेस मॉडल के होते हैं।  

भोपाल कफ सिरप केस में बड़ी कार्रवाई, आरोपी देहरादून से गिरफ्तार

भोपाल स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने नशीले कफ सीरप की अवैध सप्लाई के मामले में फरार चल रहे 20 हजार रुपये के इनामी आरोपित अभिषेक निगम को देहरादून से गिरफ्तार किया है। आरोपित रीवा का रहने वाला है और पुलिस कार्रवाई के बाद फरार हो गया था। एसटीएफ की विशेष टीम ने उसे सात अक्टूबर को उत्तराखंड के देहरादून से पकड़ा। ट्रांजिट वारंट पर भोपाल लाकर उसे पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में लिया गया है। भोपाल में चल रही थी अवैध कफ सीरप की फैक्ट्री एसटीएफ ने 30 मई 2026 को भोपाल के गांधीनगर स्थित पटेल सिटी में नशीले कफ सीरप की फैक्ट्री का पर्दाफाश किया था। कार्रवाई के दौरान 74 हजार बाटल कोडीनयुक्त कफ सीरप बरामद किए गए थे। ये सीरप ‘आनरेक्स’ और ‘आफकफ’ नाम से तैयार किए जा रहे थे। जांच में सामने आया था कि अभिषेक निगम, राहुल कुशवाह और सीटी जैन निवासी सागर के साथ मिलकर कोडीनयुक्त कफ सीरप की अवैध सप्लाई करता था। मामले में अब तक 25 आरोपित गिरफ्तार रीवा में एसटीएफ की कार्रवाई के बाद अभिषेक फरार हो गया था। उसकी गिरफ्तारी पर एसटीएफ के उप पुलिस महानिरीक्षक राहुल कुमार लोढ़ा ने 20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। इस मामले में अब तक 25 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। एसटीएफ की भोपाल इकाई मामले की आगे जांच कर रही है।

प्रदेश में फार्म-6 प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी, अब तक 4 लाख 6 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त

भोपाल भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार संपूर्ण प्रदेश में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा फार्म-6 प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री संजीव कुमार झा ने बताया कि 1 अक्टूबर से अब तक प्रदेश में कुल 4 लाख 6 हजार 338 फार्म-6 प्राप्त हुए हैं। इनमें 18 से 19 आयु वर्ग के 1 लाख 92 हजार 851 फार्म शामिल हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री झा ने बताया है कि फार्म-6 प्राप्त करने के लिए प्रदेशभर में विभिन्न स्थानों में शिविर लगाए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया के माध्यम से पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का अवसर प्रदान किया जा रहा है।  

किसानों को रबी सीजन के लिये बिजली की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करें : ऊर्जा मंत्री तोमर

वरिष्ठ अधिकारी जन-प्रतिनिधियों से सतत संवाद करें भोपाल किसानों को रबी सीजन के लिये बिजली की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करें। साथ ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जन-प्रतिनिधियों से सतत संवाद कर बिजली की उपलब्धता एवं अन्य कठिनाइयों की जानकारी देते रहें। ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह निर्देश सोमवार को मंत्रालय में विभागीय योजनाओं की समीक्षा के दौरान दिये। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने कहा कि एमडी पॉवर जनरेशन कम्पनी यह सुनिश्चित करें कि सभी प्लांट पूरी क्षमता के साथ बिजली का उत्पादन करें। कोयले की सतत आपूर्ति सुनिश्चित करें। एमडी श्री मंजीत सिंह ने बताया कि प्रदेश के सभी प्लांटों में कोयले का पर्याप्त भण्डारण है। तोमर ने एमडी ट्रांसमिशन कम्पनी श्री सुनील तिवारी को निर्धारित लक्ष्य के अनुसार समय-सीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिये। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि बिजली की माँग का आंकलन अग्रिम रूप से करें और उसकी आपूर्ति की सुनियोजित कार्य-योजना बनायें। उन्होंने प्रदेश में उपलब्ध नवकरणीय ऊर्जा के संबंध में भी जानकारी ली। किसानों को सिंचाई के लिये दिन में बिजली की आपूर्ति करने पर भी चर्चा हुई। तीनों विद्युत वितरण कम्पनियों के एमडी ने रबी सीजन के लिये विद्युत उपलब्धता के संबंध में की गई तैयारियों के संबंध में जानकारी दी। बैठक में प्रमुख सचिव ऊर्जा श्री मनीष सिंह, एमडी पॉवर मैनेजमेंट कम्पनी श्री विशेष गढ़पाले सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। विभिन्न कम्पनियों के एमडी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।  

टाइम ऑफ डे टैरिफ से 10 लाख उपभोक्ताओं को राहत

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यक्षेत्र के भोपाल एवं ग्वालियर रीजन के अंतर्गत आने वाले 16 जिलों के स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए सितंबर माह लाभदायक रहा। कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को टाइम ऑफ डे (ToD) टैरिफ व्यवस्था के तहत सोलर आवर्स (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) में बिजली की खपत पर 20 प्रतिशत तक की विशेष छूट का लाभ दिया जा रहा है। इसी क्रम में सितंबर 2026 में कंपनी के कार्यक्षेत्र के कुल 10 लाख 11 हजार 291 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को उनके बिजली बिलों में कुल 10 करोड़ रुपये से अधिक की ToD छूट का लाभ मिला। इनमें भोपाल रीजन के 8 लाख 17 हजार 227 उपभोक्ताओं को 7 करोड़ 33 लाख 47 हजार रुपये तथा ग्वालियर रीजन के 1 लाख 94 हजार 64 उपभोक्ताओं को 2 करोड़ 66 लाख 76 हजार रुपये की छूट प्रदान की गई। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे आधुनिक तकनीक का लाभ उठाते हुए अपने परिसरों में स्मार्ट मीटर लगवाएं। स्मार्ट मीटर न केवल ऊर्जा प्रबंधन को बेहतर बनाते हैं, बल्कि उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत पर नियंत्रण रखने और आर्थिक बचत करने का अवसर भी प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि टाइम ऑफ डे (ToD) टैरिफ के तहत स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को सोलर आवर्स (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) बिजली उपयोग करने पर ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर में 10 किलोवाट तक स्वीकृत लोड/अनुबंध मांग वाले उपभोक्ताओं को 20 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। स्मार्ट मीटर से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए उपभोक्ता 1912 पर संपर्क कर सकते हैं अथवा कैलाश कुमार चौधरी, प्रबंधक (स्मार्ट मीटरिंग सेल) से संपर्क कर सकते हैं। साथ ही Smartmeteringcellbhopal@gmail.com पर ई-मेल के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उपभोक्ताओं को घरेलू स्मार्ट मीटर से मिलने वाले फायदे 1. ऊर्जा की खपत को ट्रैक करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद करता है। 2. बिजली की खपत को सटीक रूप से मापता है, जिससे बिल में कोई गलती नहीं होती। 3. ऐप के जरिए मोबाइल पर रियल-टाइम डेटा देखकर ऊर्जा की खपत को नियंत्रित कर सकते हैं। 4. ऊर्जा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है, ताकि ऊर्जा की खपत को बेहतर बना सकते हैं। 5. ऊर्जा की खपत को ऑनलाइन ट्रैक करने और नियंत्रित करने की सुविधा मिलती है। 6. ऊर्जा की खपत को कम करने से पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव कम होता है।