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प्रदेश में जनगणना 2027 की शुरुआत, 33 सवालों का जवाब देना होगा घर आए कर्मचारियों को

भोपाल  मध्य प्रदेश में 1 मई से जनगणना-2027 के 'हाउस लिस्टिंग' यानी मकानों की सूची बनाने का काम शुरू हो गया है। इस बार की जनगणना खास है क्योंकि यह पूरी तरह डिजिटल है। आपके घर पहुंचने वाले प्रगणक आपसे 33 मुख्य सवाल पूछेंगे। इसमें आपके मकान की स्थिति, दीवारों में इस्तेमाल सामग्री से लेकर घर में कौन सा अनाज खाया जाता है, इसकी जानकारी भी ली जाएगी। इन चीजों का देना होगा ब्यौरा पहले फेज में मुख्य रूप से सुविधाओं और संपत्तियों पर फोकस रहेगा: घर की संपत्ति: गाड़ी, लैपटॉप, कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्शन। मकान की बनावट: दीवार और छत की सामग्री। खान-पान: परिवार में इस्तेमाल होने वाला मुख्य अनाज। जातिगत गणना: ध्यान रहे कि जाति से जुड़े सवाल इस बार नहीं, बल्कि फरवरी 2027 में होने वाले दूसरे चरण में पूछे जाएंगे। पूरी तरह गुप्त रहेगी जानकारी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने स्पष्ट किया है कि लोगों को अपनी संपत्ति बताने में हिचकिचाना नहीं चाहिए। गोपनीयता: आपकी दी गई जानकारी पूरी तरह गुप्त रहेगी और किसी भी एजेंसी के साथ साझा नहीं की जाएगी। सरकारी लाभ: जनगणना का मकसद केवल विकास की योजनाएं बनाना है। इससे किसी के सरकारी लाभ या पात्रता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सुरक्षा: डेटा पूरी तरह 'एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड' है, यानी सर्वर तक पहुंचने के दौरान इसे कोई नहीं देख सकता। यह देश की पहली डिजिटल जनगणना है और डेटा प्रोटेक्शन हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। लोग बेझिझक और सही जानकारी साझा करें। आपके सहयोग से ही बेहतर सरकारी नीतियां बन सकेंगी। कार्तिकेय गोयल, निदेशक (जनगणना-2027, MP & CG) 1.5 लाख कर्मचारियों की फौज तैनात इस महा-अभियान के लिए मध्य प्रदेश में करीब 1.5 लाख कर्मचारियों को लगाया गया है, जिनमें से ज्यादातर स्कूल शिक्षक हैं। हाउस लिस्टिंग का यह काम एक महीने के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के किसान हितेषी फैसले से इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर को मिली नई रफ्तार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के किसान हितेषी फैसले से इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर को मिली रफ्तार मुख्यमंत्री डॉ. यादव 3 मई को प्रथम चरण का करेंगे भूमिपूजन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट को गति देने के लिए किसानों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने जमीन देने वाले भू-स्वामियों को मिलने वाली विकसित जमीन का हिस्सा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले से किसानों का भरोसा बढ़ा है और वे प्रोजेक्ट में स्वेच्छा से जुड़ रहे हैं। इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर क्षेत्र के औद्योगिक विकास को नई दिशा देने वाली प्रमुख परियोजना है। इस परियोजना में 75 मीटर चौड़ी और 20 किलोमीटर लंबी सड़क के दोनों ओर 300-300 मीटर क्षेत्र में सुनियोजित विकास किया जाएगा। परियोजना में 1300 हैक्टेयर से अधिक भूमि शामिल है और इसकी कुल लागत 2360 करोड़ रु. निर्धारित की गई है। इसके माध्यम से उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित होंगी, जिससे बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती भू-स्वामियों से सहमति के साथ जमीन प्राप्त करना थी, क्योंकि शहर के समीप होने के कारण भूमि का बाजार मूल्य अधिक है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस स्थिति को समझते हुए किसानों के हित में बेहतर निर्णय लिया। इससे विकास और किसानों के हितों के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इस निर्णय के बाद किसानों की भागीदारी में तेजी आई है। योजना में किसानों को उनकी जमीन के बदले विकसित जमीन दी जाती है, यानी ऐसी जमीन जिसमें सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं पहले से उपलब्ध हों। अब 60 प्रतिशत विकसित जमीन मिलने से किसानों को भविष्य में अधिक मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही वे इस जमीन का उपयोग आवासीय, वाणिज्यिक या अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए कर सकेंगे, जिससे उनकी आय के स्थायी स्रोत बनेंगे। परियोजना के प्रथम चरण का भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा 3 मई को सेक्टर-ए, ग्राम नैनोद, इंदौर में किया जाएगा। प्रथम चरण की लागत 326.51 करोड़ रु. है, जिसके तहत प्रारंभिक अधोसंरचना विकास कार्य शुरू किए जाएंगे। परियोजना से क्षेत्र में आधुनिक अधोसंरचना विकसित होगी, कनेक्टिविटी मजबूत होगी और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होगा। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे, जिससे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। जिला प्रशासन और एमपीआईडीसी द्वारा भू-स्वामियों से लगातार संवाद स्थापित किया जा रहा है और उन्हें योजना के लाभों की जानकारी दी जा रही है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और किसान इस महत्वाकांक्षी परियोजना में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं।  

अल्प समय में ही 61 जटिल जीवन-रक्षक प्रक्रियाएँ सफल

भोपाल  विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र, संजय गांधी अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में एक नई और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में स्थापित अत्याधुनिक मशीनों की सहायता से विभाग ने एक माह से भी कम समय में 61 से अधिक जटिल और चुनौतीपूर्ण प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक संपन्न किया है। उप मुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ल ने स्वयं विभाग का निरीक्षण कर इन उपलब्धियों और स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने उन्नत ईआरसीपी, एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड, कोलैन्जियोस्कोपी और लिथोट्रिप्सी जैसी मशीनों की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया और विभाग की दक्षता की सराहना की। मध्यप्रदेश के सबसे उन्नत 'एडवांस्ड गैस्ट्रोएंटरोलॉजी स्किल लैब' के माध्यम से अस्पताल ने न केवल अपनी कार्यक्षमता में वृद्धि की है, बल्कि गंभीर रूप से बीमार रोगियों के लिए जीवनदायिनी भी सिद्ध हुआ है। सफल रही 61 प्रक्रियाओं में से एक बड़ी संख्या उन जीवन-रक्षक हस्तक्षेपों की है, जिनमें सक्रिय रक्तस्राव से जूझ रहे मरीजों का समयबद्ध एंडोस्कोपिक हीमोस्टेसिस किया गया। यदि ये आधुनिक सुविधाएं यहाँ उपलब्ध न होतीं, तो मरीजों को अन्य बड़े शहरों के केंद्रों में रेफर करना अनिवार्य हो जाता, जिससे उपचार में देरी के साथ-साथ मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ और जान-माल का खतरा भी बना रहता। वर्तमान में यह विभाग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. एम.एच. उस्मानी के कुशल नेतृत्व और सह-प्राध्यापक डॉ. प्रदीप निगम के सहयोग से अपनी अधिकतम परिचालन क्षमता पर कार्य कर रहा है। अस्पताल अब उन्नत इंटरवेंशनल एंडोस्कोपी सेवाएं प्रदान करने में आत्मनिर्भर हो चुका है। इन सुविधाओं के विस्तार से अब स्थानीय स्तर पर ही जटिल बीमारियों का सटीक उपचार संभव हो पा रहा है, जिससे क्षेत्र के मरीजों को अनावश्यक रेफरल और आर्थिक चुनौतियों से बड़ी राहत मिली है।  

भाजपा की रणनीति तेज, राज्यसभा की तीसरी सीट पर आदिवासी प्रत्याशी पर मंथन

भोपाल मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटें जून महीने में रिक्त हो रही हैं। संख्या बल के हिसाब से दो सीटें भाजपा और एक कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही है। लेकिन कांग्रेस में चल रही गुटबाजी और कलह का फायदा उठाकर भाजपा तीसरी सीट पर भी अपना उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है। पहले इस सीट के लिए पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम चर्चा में था, लेकिन दतिया में संभावित विधानसभा उपचुनाव के चलते अब किसी आदिवासी चेहरे को मैदान में उतारने पर विचार किया जा रहा है। इसकी दो वजहें हैं-पहली, कांग्रेस के आदिवासी विधायकों का समर्थन हासिल करना और दूसरी, विपक्ष के खेमे में सेंध लगाना। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस के कुछ आदिवासी विधायक उनके संपर्क में हैं। प्रदेश की जिन सीटों पर जून 2026 में चुनाव संभावित हैं, उनमें से एक पर कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, दूसरी पर भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी और तीसरी सीट से केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय तथा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री जार्ज कुरियन राज्यसभा सदस्य हैं। तीनों का कार्यकाल जून में समाप्त हो रहा है। लेकिन कांग्रेस के लिए आसान मानी जाने वाली राज्यसभा की तीसरी सीट पर सियासी गणित इस बार उलझता दिख रहा है। दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद 230 सदस्यीय सदन में कांग्रेस विधायकों की संख्या घटकर 64 हो गई। विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर कोर्ट ने रोक लगा रखी है। वहीं बीना विधायक निर्मला सप्रे का मामला लंबित होने के बावजूद झुकाव भाजपा की ओर माना जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस के प्रभावी वोट घटकर लगभग 62 रह गए हैं।     दरअसल, राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत होती है। अभी यह संख्या तो कांग्रेस के पास है, लेकिन पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित क्रास वोटिंग उसकी मुश्किलें बढ़ा सकती है।     भाजपा आदिवासी प्रत्याशी उतारती है तो कांग्रेस के आदिवासी विधायकों का समर्थन भी उसे मिल सकता है। यही, दांव चलकर भाजपा कांग्रेस से तीसरी सीट छीनने का प्रयास कर सकती है।     पार्टी के पास 164 विधायक हैं, यानी दो सीटें जीतने के बाद भी उसके पास करीब 48 वोट बचेंगे।     यदि कांग्रेस में क्रास वोटिंग होती है और कुछ अतिरिक्त समर्थन मिल जाता है, तो भाजपा तीसरी सीट पर भी जीत दर्ज कर सकती है।     कांग्रेस में फिलहाल मीनाक्षी नटराजन व कमल नाथ सहित कुछ अन्य नाम चर्चा में हैं। लेकिन, भाजपा की रणनीति देखकर कांग्रेस भी आदिवासी या दलित चेहरे को मौका दे सकती है।  

6.91 लाख किसानों से 34.73 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का हुआ उपार्जन : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 6 लाख 91 हजार किसानों से 34 लाख 73 हजार मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। अभी तक 14 लाख 64 हजार किसानों द्वारा गेहूँ उपार्जन के लिए स्लॉट बुक कराए गए हैं। किसानों के हित में गेहूँ उपार्जन की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक की गई। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईसी सर्वर की क्षमता एवं संख्या में वृद्धि कराई गई। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन की मॉनीटरिंग की जा रही है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि किसानों को 5462.42 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाए आदि की व्यवस्थाएँ की गई हैं। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके, इस हेतु समस्त आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं। इसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि की व्यवस्था की गई है। उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध सुविधाओं के फोटो ग्राफ्स भारत सरकार के PCSAP पोर्टल पर अपलोड करने की कार्यवाही की जा रही है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ की भर्ती जूट बारदाने के साथ साथ PP/HDP बेग एवं जूट के एक भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये भण्डारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई, जिससे उपार्जित गेहूँ का सुरक्षित भण्डारण किया जा सके।  

उप मुख्यमंत्री ने किया प्राकृतिक खेती का निरीक्षण

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ल ने रविवार हरिहर धाम स्थित खेत का भ्रमण कर वहां अपनाई जा रही प्राकृतिक खेती की प्रगति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने खेत में इस्तेमाल हो रहे प्राकृतिक खाद और जीवामृत के निर्माण व प्रयोग की प्रक्रिया का बारीकी से अवलोकन किया।  शुक्ल ने मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और जल संरक्षण के लिए अपनाए गए विशेष उपायों की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए पारंपरिक कृषि पद्धतियों की ओर लौटना अनिवार्य है। निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री ने उपस्थित सहायकों और कृषि विशेषज्ञों को रसायन मुक्त खेती की तकनीकों को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खेती में रसायनों का न्यूनतम उपयोग न केवल लागत कम करता है, बल्कि भूमि की उपजाऊ शक्ति को भी दीर्घकालिक लाभ पहुँचाता है।  शुक्ल ने प्राकृतिक कृषि को आधुनिक समय की मांग बताते हुए इसे जन-आंदोलन के रूप में प्रसारित करने की बात कही, ताकि आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध आहार और सुरक्षित वातावरण मिल सके।

गंगा दशहरा पर जल स्त्रोतों की साफ-सफाई में योगदान दें प्रदेशवासी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल ही जीवन है और जल संरक्षण ही सुरक्षित भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के प्रेरक मार्गदर्शन में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत पानी को सहेजने के कार्य में जन-जन को जोड़ा जा रहा है। मध्यप्रदेश में जनभागीदारी आधारित जल संचय अभियान में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि केवल एक रैंक नहीं बल्कि प्रदेशवासियों की जागरूकता, सहभागिता और भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। जल संरक्षण और प्रकृति अनुरूप रहन-सहन की व्यवस्था भारतीय जीवनशैली और परम्पराओं में सदियों से रची-बसी है। हमारे यहां नदी-तालाब-कुंओं की साफ-सफाई को पुण्य कार्य माना गया है। इन गतिविधियों के धार्मिक महत्व को देखते हुए गंगा दशहरा 25 मई को जल स्त्रोतों के आस-पास साफ-सफाई और पौधरोपण के लिए श्रमदान तथा अन्य गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इन गतिविधियों का पुण्य प्राप्त करने के लिए अधिक से अधिक नागरिक गंगा दशहरा पर अपने आस-पास के जल स्त्रोतों और जल संरचनाओं की साफ-सफाई तथा रखरखाव के कार्य से जुड़ें। जनसामान्य की यह पहल मध्यप्रदेश को जल संरक्षण में एक आदर्श व अनुकरणीय राज्य के रूप में देश में प्रस्तुत करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार यह विचार कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में व्यक्त किए। जल स्त्रोतों की बेहतरी के लिए पारिवारिक और व्यक्तिगत स्तर पर भी पहल करना जरूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संचय भागीदारी अभियान में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम रहा है। अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 5 लाख 64 हजार 119 कार्य पूर्ण हुए हैं। जिला स्तर पर डिण्डौरी और खण्डवा जिले देश में क्रमश: प्रथम और द्वितीय रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर, सुरक्षित और सस्टेनेबल धरती सौंपना हमारा दायित्व है, जो बिना पर्याप्त जल की उपलब्धता के संभव नहीं है। अत: जल संरक्षण के कार्य में जन-जन को जोड़ना जरूरी है। उन्होंने पंचायतों, नगरीय निकायों, सामाजिक-धार्मिक संगठनों, स्वंयसेवी संस्थाओं, स्व-सहायता समूहों, व्यापारिक संगठनों तथा अन्य सभी संस्थाओं से पानी बचाने की गतिविधियों में जुड़ने का आहवान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पानी बचाने और जल स्त्रोतों की बेहतरी के लिए पारिवारिक और व्यक्तिगत स्तर पर पहल करने के लिए भी लोग आगे आएं। जल संरक्षण के लिए स्कूल, कॉलेज और संस्थाएं कर रही हैं जन-जन को प्रेरित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत राज्य सरकार, नगरीय और ग्राम स्तर पर अनेक गतिविधियां संचालित कर रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 2 लाख 43 हजार 887 कार्यों के लिए 6 हजार 232 करोड़ रूपए की स्वीकृति प्रदान की है। प्रदेश में 45 हजार 132 खेत-तालाब, 68 अमृत सरोवर, 77 हजार 975 डगवेल रिचार्ज औ वॉटर शेड से संबंधित 3 हजार 346 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। नगरीय क्षेत्र में भी तालाबों, कुंओं, बावड़ियों को अतिक्रमण मुक्त करने, नाले-नालियों की साफ-सफाई आदि का कार्य जारी है। नगरीय निकायों द्वारा 3 हजार 40 रेन वॉटर हार्वेस्टिंग इकाईयां स्थापित की गई हैं। जन सहयोग से बड़े पैमाने पर प्याऊ सेवा संचालित की जा रही हैं। स्कूल, कॉलेजों और जन अभियान परिषद से जुड़ी संस्थाओं के माध्यम से जन-जन को अभियान से जोड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।  

शहडोल के डायल-112 हीरोज रास्ता भटके 10 वर्षीय बालक को सुरक्षित परिजनों से मिलाया

भोपाल  शहडोल जिले के थाना बुढ़ार क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं तत्पर कार्रवाई से घर का रास्ता भटक गए 10 वर्षीय बालक को सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाया गया। समय पर की गई इस मानवीय पहल से बालक को सुरक्षा एवं परिवार का सान्निध्य पुनः प्राप्त हो सका। 30 अप्रैल को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल में सूचना प्राप्त हुई कि थाना बुढ़ार क्षेत्र अंतर्गत कॉलेज तिराहा के पास एक 10 वर्षीय बालक अकेला मिला है, जो घर का रास्ता भटक गया है। पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही बुढ़ार थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। मौके पर पहुँचकर डायल-112 स्टाफ आरक्षक  प्रिंस अग्रवाल एवं पायलट  पंकज लोधी ने बालक को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। बालक से स्नेहपूर्वक बातचीत करने पर बालक ने बताया कि वह बरतरा गाँव का निवासी है। डायल-112 टीम ने तत्परता दिखाते हुए बालक के बताए स्थान के आधार पर उसके परिजनों से संपर्क स्थापित किया एवं उन्हें मौके पर बुलाया । बालक द्वारा पहचान एवं आवश्यक सत्यापन उपरांत उसे सुरक्षित परिजनों के सुपुर्द किया गया। बालक के सुरक्षित मिलने पर परिजनों द्वारा डायल-112 सेवा के प्रति आभार व्यक्त किया। डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं समर्पित कार्यवाही से एक मासूम बालक को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुँचाया जा सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आमजन, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा एवं सहायता हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।  

प्रदेश के 6 लाख घर सौर ऊर्जा से होंगे रोशन : मंत्री शुक्ला

भोपाल नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  राकेश शुक्ला ने बताया कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत प्रदेश के 6 लाख घर सौर ऊर्जा से रोशन होंगे। इसके लिए घरों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए वेंडर्स के साथ डिजिटल एग्रीमेंट की व्यवस्था लागू की जा रही है। डिजिटल एग्रीमेंट से लागत में कमी और लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में तेजी से कार्य किया जा सकेगा। मंत्री  शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में सौर ऊर्जा संयंत्र को स्थापित करने के लिए आम जनता में उत्साह है। अब तक लगभग 2 लाख आवेदन प्राप्त हो गए हैं। निर्धारित लक्ष्य को समय से पहले प्राप्त कर लिया जाएगा। मंत्री  शुक्ला ने बताया कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार नवकरणीय ऊर्जा के विस्तार के लिए दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रही है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड द्वारा हितग्राहियों और वेंडर्स के हितों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न शुल्कों में कमी लाने की विशिष्ट पहल की गई। मंत्री  शुक्ला ने बताया कि मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के समक्ष याचिका प्रस्तुत की गई थी, जिसमें रजिस्ट्रेशन शुल्क, प्रोसेसिंग शुल्क, मीटर जांच शुल्क तथा इंस्टॉलेशन/कमीशनिंग शुल्क में राहत देने और भौतिक अनुबंधों के स्थान पर डिजिटल एग्रीमेंट लागू करने का प्रस्ताव रखा गया था। आयोग द्वारा सुनवाई के बाद डिजिटल एग्रीमेंट लागू करने के आदेश जारी किए गए हैं। मंत्री  शुक्ला ने बताया कि आयोग के इस निर्णय से न केवल सौर संयंत्रों की स्थापना लागत में कमी आएगी, बल्कि स्थापना प्रक्रिया भी सरल होने के साथ तेजी से पूरी की जा सकेगी। इससे योजना के लक्ष्यों को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने में मदद मिलेगी और लाखों उपभोक्ताओं को यथाशीघ्र लाभ प्राप्त होगा। योजना से प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ ही आम नागरिकों के बिजली खर्च में कमी आएगी और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मध्यप्रदेश मजबूत कदम बढ़ाएगा। मंत्री  शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में 1 मई 2026 तक योजना के अंतर्गत सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिये कुल 1,89,147 आवेदन प्राप्त हुये हैं। इस योजना में 1,18,796 संयंत्र स्थापित किये जा चुके हैं, जिनसे 445 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत लाभार्थियों को 790.97 करोड़ रुपये का अनुदान वितरित किया जा चुका है।  

24वीं कुमार सुरेन्द्र सिंह मेमोरियल शूटिंग चैम्पियनशिप का किया शुभारंभ

भोपाल सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने शनिवार को मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी, भोपाल में आयोजित 24वीं कुमार सुरेन्द्र सिंह मेमोरियल शूटिंग चैम्पियनशिप का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने देशभर से आए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिये शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार खेलों के समग्र विकास के लिए सतत रूप से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की खेलोन्मुखी नीतियों और अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण के कारण प्रदेश आज देश के अग्रणी खेल राज्यों में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। मंत्री  सारंग ने कहा कि म.प्र. राज्य शूटिंग अकादमी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ शूटिंग अकादमियों में से एक है। यह अकादमी विश्वस्तरीय सुविधाओं और अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित है। यहाँ खिलाड़ियों को उच्च गुणवत्ता का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, जिससे वे राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश और प्रदेश का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में शूटिंग खेल की अपार संभावनाएं हैं और प्रदेश के खिलाड़ी ओलम्पिक, एशियन गेम्स सहित विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक अर्जित कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। मंत्री  सारंग ने शूटिंग परिसर स्थित बैठक कक्ष में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर ग्रीष्मकालीन खेल शिविर आरोह-2026 सहित आगामी खेल गतिविधियों एवं कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में संचालक, खेल और युवा कल्याण  अंशुमान यादव, उप-संचालक  बीएस यादव सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।