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मध्यप्रदेश के हमीदिया हॉस्पिटल की बड़ी उपलब्धि, NABH के नए मानकों पर मिली पूर्ण मान्यता

भोपाल गांधी चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध हमीदिया अस्पताल को नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फार हॉस्पिटल्स (NABH) के नवीनतम छठवें एडिशन मानकों के अनुरूप पुनः पूर्ण मान्यता प्रदान की गई है। इसके साथ ही हमीदिया अस्पताल देश का पहला ऐसा सबसे बड़ा 1820 बिस्तरीय शासकीय अस्पताल बन गया है, जिसे एनएबीएच के छठे संस्करण की यह प्रतिष्ठित मान्यता प्राप्त हुई है। तीन सदस्यीय टीम ने किया सर्विलांस असेसमेंट अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं, व्यवस्थाओं और गुणवत्ता संबंधी प्रक्रियाओं का बारीकी से निरीक्षण करने के लिए एनएबीएच की तीन सदस्यीय संयुक्त टीम ने 10 जुलाई 2026 से 12 जुलाई 2026 तक यहां सर्विलांस असेसमेंट किया था। टीम द्वारा सभी पैमानों पर विस्तृत और गहन मूल्यांकन किए जाने के बाद 12 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक रूप से अस्पताल को अगस्त 2028 तक के लिए यह मान्यता सौंप दी गई। 2024 में मिला था पांचवें एडिशन का प्रमाण उल्लेखनीय है कि हमीदिया अस्पताल को इससे पहले वर्ष 2024 के अगस्त माह में एनएबीएच के पांचवें एडिशन के तहत पूर्ण मान्यता प्राप्त हुई थी। समय के साथ अस्पताल ने अपनी चिकित्सा प्रणालियों को और अधिक उन्नत बनाते हुए अब नवीनतम छठवें एडिशन के कड़े मानकों को भी पूरा कर लिया है। अधीक्षक ने बताई बड़ी उपलब्धि अधीक्षक डा. सुनीत टंडन ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को दिखाता है। जिससे आम मरीजों को और अधिक बेहतर, सुरक्षित और व्यवस्थित सुविधाएं मिल सकेंगी।

इंदौर कुटुंब न्यायालय में अधिवक्ताओं का हंगामा, जज धीरेंद्र सिंह के खिलाफ अभिभाषक संघ ने जताई नाराजगी

इंदौर  कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश धीरेंद्र सिंह से जुड़े मामले में अधिवक्ताओं में भारी रोष है। न्यायाधीश धीरेंद्र सिंह के कथित अपमानजनक व्यवहार के विरोध में इंदौर अभिभाषक संघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन किया। बताया गया कि प्रदर्शनकारी अधिवक्ता जज के कोर्ट रूम में भी पहुँचे और वहाँ विरोध दर्ज कराया। अधिवक्ताओं का आरोप है कि संबंधित अधिकारी का व्यवहार वकीलों के प्रति लगातार अच्छा नहीं रहा है। उनके अनुसार वकील कोर्ट में आते हैं तो उनसे "आप मुझे दिख नहीं रहे हो" जैसी बातें कही जाती हैं। आरोप यह भी है कि बहस के दौरान वकीलों को अपनी बात पूरी करने और जिरह (क्रॉस) करने नहीं दिया जाता, और उनके मुवक्किलों के सामने ही यह तक कह दिया जाता है कि "आपको वकालत करना नहीं आती, वकालत छोड़कर कोई और काम करें।" प्रदर्शन में शामिल अधिवक्ता ने बताया कि वे चुनाव जीतकर आए हैं और जब से पदभार संभाला है, तब से इस अधिकारी की रोज शिकायतें आ रही हैं। उन्होंने कहा, "इस आचरण से वकीलों में काफी रोष था। हम दो बार लिखित में उच्च न्यायालय को शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। आज सुबह भी हम उच्च न्यायालय में शिकायत करके आए हैं।" अधिवक्ताओं ने इसके बाद संबंधित वरिष्ठ न्यायाधीश से भी मुलाकात की और उन्हें अपनी बात बताई। उनका कहना है कि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि आचरण में सुधार न हुआ तो वे उग्र आंदोलन से भी पीछे नहीं हटेंगे। प्रदर्शन बाल न्यायालय पर भी हुआ, जहाँ संबंधित अधिकारी पीठासीन अधिकारी हैं। सामाजिक संस्था का समर्थन: इस आंदोलन को सामाजिक संस्था पौरुष, इंदौर ने भी समर्थन दिया। संस्था के अध्यक्ष अशोक दशोरा ने बताया कि वकीलों के साथ हो रहे कथित अन्याय के मुद्दे पर संस्था के सदस्यों ने कोर्ट के मुख्य गेट पर प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। दशोरा का आरोप है कि अब तक कोर्ट रूम में पुरुषों के साथ जजों द्वारा बदतमीज़ी और अपमान किया जाता रहा है और अब ऐसी घटनाएँ वकीलों के साथ भी हो रही हैं, जिसका संस्था पुरज़ोर विरोध करती है। संस्था के सदस्यों ने "अगर न्याय की बात है, हम एडवोकेट्स के साथ हैं", "अधिवक्ताओं का सम्मान करो" और "गर्व करो, अभिमान नहीं" जैसे नारों की तख्तियाँ लेकर विरोध जताया। आंदोलनकारी वकीलों ने भी हाथों में हाथ लेकर ये नारे लगाए। अभिभाषक संघ के पदाधिकारियों ने संस्था के समर्थन की सराहना की।

MP News: आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने का मामला गरमाया, शिवराज के विरोध के बाद सरकार ने शुरू की जांच

भोपाल  मध्य प्रदेश के एक गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान गिराए जाने के मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है। यह कदम केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रभावित परिवारों से मिलने और वन विभाग व स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाने के एक दिन बाद उठाया गया है। शिवराज सिंह चौहान ने सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने और उनकी फसल नष्ट किए जाने को सरासर 'अन्याय' करार दिया। उन्होंने रविवार को कहा कि यह कार्रवाई अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा की छवि खराब करने की साजिश प्रतीत होती है। पीड़ित परिवारों से मिलने के बाद उन्होंने कहा कि यहां जो कुछ हुआ, वह बेहद दुखद है। मैंने सालों पहले अधिकारियों से कहा था कि इन परिवारों को परेशान न किया जाए, क्योंकि वे लंबे समय से यहां रह रहे हैं। मैं मुख्यमंत्री को इनके आंसुओं, बर्बाद हुई फसलों और उजड़े भविष्य के बारे में बताऊंगा। कोसमी गांव शिवराज सिंह चौहान के विदिशा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। मुख्यमंत्री ने दिए जांच के निर्देश इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को कहा कि मैंने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। हमारी सरकार संवेदनशील है और जांच के बाद सारी स्थिति साफ हो जाएगी। सूत्रों के अनुसार, शिवराज सिंह चौहान जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलकर इन परिवारों की परेशानी से उन्हें अवगत करा सकते हैं। वन विकास निगम के सूत्रों के मुताबिक, इन 12 परिवारों ने वन भूमि पर अतिक्रमण किया हुआ था। सूत्रों ने बताया कि वर्ष 2021 में 186.9 हेक्टेयर जमीन पर पौधारोपण किया गया था, जिसमें से 38.84 हेक्टेयर पर कथित तौर पर अतिक्रमण कर लिया गया था। क्या था मामला ? कोसमी गांव में वन विभाग और प्रशासन की कार्रवाई के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नाराजगी जताई थी। वह देर रात पीड़ित आदिवासी परिवारों के बीच पहुंचे और धरने पर बैठ गए। उन्होंने कार्रवाई को लेकर कड़े शब्दों में विरोध दर्ज कराया और जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की। शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि जिन परिवारों के घर तोड़े गए हैं, उनके लिए नए पक्के मकान बनवाए जाएंगे। स्थायी व्यवस्था होने तक उनके रहने और खाने-पीने का खर्च उठाने की बात भी उन्होंने कही थी। अधिकारियों से चर्चा के बाद भी हुई कार्रवाई शिवराज सिंह चौहान ने बताया था कि कार्रवाई रोकने के लिए उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल से चर्चा की थी। इसके बावजूद तोड़फोड़ की कार्रवाई होने पर उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने और कार्रवाई में शामिल दोषी वन कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की थी। प्रशासन ने बताई कार्रवाई की वजह प्रशासन के मुताबिक, सीहोर जिले के वन विकास निगम के वन कक्ष क्रमांक 426 में वर्ष 2021 में पौधरोपण किया गया था। प्रशासन का आरोप है कि सिंहपुर के 10 आदिवासी परिवारों ने इस क्षेत्र में पौधरोपण को नुकसान पहुंचाकर खेती शुरू कर दी थी और झोपड़ियां बना ली थीं। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित परिवारों के खिलाफ पहले से वन अपराध के मामले दर्ज थे और उन्हें बेदखली के नोटिस भी दिए गए थे। प्रशासन का कहना है कि इन्हीं प्रक्रियाओं के तहत झोपड़ियों को हटाया गया। OBC आरक्षण पर भी सरकार करा रही परीक्षण अब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले में जांच की बात कही है। इसके साथ ही उन्होंने मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले का परीक्षण करा रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने इस संबंध में आगे की कार्रवाई या निर्णय की समयसीमा को लेकर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी। पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे शिवराज, कार्रवाई पर जताई नाराजगी यह पूरा मामला सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा के कोसमी गांव का है। यहां वन विभाग और प्रशासन की कार्रवाई के दौरान आदिवासी परिवारों के घरों को तोड़े जाने की शिकायत सामने आई थी। रविवार को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान गांव पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी परेशानियां सुनीं। मुख्य सचिव और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष से की बात मौके पर वरिष्ठ प्रशासनिक और वन विभाग के अधिकारियों की अनुपस्थिति पर भी शिवराज सिंह चौहान ने आपत्ति जताई। उन्होंने घटनास्थल से ही मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी और अपनी चिंता व्यक्त की। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से भी बातचीत कर प्रभावित परिवारों की स्थिति से अवगत कराया। शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा दिलाया कि जिन परिवारों के मकान तोड़े गए हैं, उन्हें बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने प्रभावित लोगों के लिए नए मकान बनवाने और स्थायी आवास की व्यवस्था होने तक अस्थायी रूप से रहने तथा भोजन-पानी की सुविधा सुनिश्चित करने की बात कही। घरों के साथ फसल और पानी का संकट भी कोसमी गांव की कार्रवाई को लेकर उठे सवाल केवल आवास तक सीमित नहीं हैं। प्रभावित परिवारों की मक्का और तुअर की फसलों को नुकसान पहुंचने तथा पानी के लिए उपयोग किए जाने वाले कुएं में मिट्टी भरने की बात भी सामने आई है। इससे ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों और आजीविका को लेकर मुश्किलें खड़ी होने की चिंता जताई जा रही है। अब मुख्यमंत्री के निर्देश पर होने वाली जांच इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच में कार्रवाई की परिस्थितियों, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और प्रभावित परिवारों को हुए नुकसान जैसे पहलुओं की पड़ताल किए जाने की उम्मीद है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आदिवासी परिवारों को राहत और आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन कितनी जल्दी ठोस कदम उठाता है।  

‘जातिवाद नहीं, राष्ट्रवाद जरूरी’, दमोह के लिए निकली सनातन हिंदू एकता रथयात्रा

दमोह बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू एकता रथयात्रा तीसरे दिन दमोह जिले के हटा से रवाना हो गई। इससे पहले, पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने गौरी शंकर भगवान के दर्शन किए। आज यात्रा में अयोध्या की हनुमानगढ़ी से राजू दास महाराज, मलूकपीठ के गंगा दास महाराज, हरिद्वार के मोनी महाराज, चित्रकूट धाम के राधेश्याम महाराज धीरेन्द्र शास्त्री के साथ मौजूद हैं। दोपहर में रथयात्रा दमोह के पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड पहुंचेगी। यहां भोजन और 90 मिनट का कार्यक्रम रखा गया है। यहां से यात्रा सागर के लिए रवाना होगी। इससे पहले, रविवार को पन्ना में शास्त्री ने कहा- भारत में कास्टवाद नहीं, राष्ट्रवाद जरूरी है। अगर सभी हिंदू एकजुट नहीं हुए, तो आने वाला समय बहुत खराब हो जाएगा। यात्रा में अयोध्या की हनुमानगढ़ी से राजू दास महाराज, मलूकपीठ के गंगा दास महाराज, हरिद्वार के मोनी महाराज, चित्रकूट धाम के राधेश्याम महाराज मौजूद हैं। शास्त्री बोले- चाहे प्राण चले जाएं, धर्म नहीं छोड़ना यात्रा के पहले दिन शास्त्री ने कहा था, ‘चाहे जितने विरोधी आएं, प्राण चले जाएं, तो भी धर्म नहीं छोड़ना है।’ उन्होंने सनातनियों की एकता से भारत मजबूत होने की बात कही। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने ‘जात-पात की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई-भाई’ के नारे लगाए। यात्रा में शामिल कुछ युवकों ने चुनौती देते हुए कहा, ‘अब आ जाएं बागेश्वर धाम और रोककर दिखाएं यात्रा को।’ बिहार से आए संत ऋषि ने पन्ना में मिले सहयोग और उत्साह की सराहना की। उन्होंने लोगों से अच्छे कार्यों में सहयोग देने, गुरुदेव के साथ जुड़े रहने और उनकी बातों का पालन करने की अपील की। 500 किमी की यात्रा, पांच जिलों से गुजरेगी सनातन हिंदू एकता रथयात्रा 3.0 रविवार सुबह करीब 11:30 बजे बागेश्वर धाम से शुरू हुई थी। पांच दिवसीय यात्रा करीब 500 किलोमीटर का सफर तय कर पांच जिलों से गुजरेगी। इसका उद्देश्य सनातन एकता, सामाजिक समरसता, नशामुक्ति और लव जिहाद से मुक्त बुंदेलखंड बनाना बताया गया है। सोमवार को पन्ना में रात्रि विश्राम के बाद यात्रा सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ, राष्ट्रगान और बच्चों को शपथ दिलाने के साथ रवाना हुई। शास्त्री ने हजारों श्रद्धालुओं को सनातन धर्म, हिंदू एकता और सामाजिक समरसता से जुड़े सात वचनों की शपथ दिलाई।

स्कूल शिक्षा विभाग में प्रमोशन अटके, जनजातीय विभाग ने दिए आदेश

भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग के 32 हजार से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति लटकी हुई है, जबकि जनजातीय कार्य विभाग ने 264 उच्च श्रेणी शिक्षकों और प्रधान पाठकों को व्याख्याता बना दिया है। इस दोहरे रवैये से शिक्षकों में नाराजगी है। शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने कहा है कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भी स्कूल शिक्षा विभाग पदोन्नति आदेश जारी नहीं कर रहा है। शासकीय शिक्षक संगठन का विरोध: दो साल से लंबित हैं पदोन्नतियां संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने बताया कि दोनों विभागों में शिक्षकों की योग्यता, अर्हता और सेवा शर्तें समान हैं। जनजातीय विभाग में सहायक शिक्षक से उच्च श्रेणी शिक्षक और उच्च श्रेणी शिक्षक से व्याख्याता तक पदोन्नतियां हो चुकी हैं। जल्द लाभ देने की मांग वहीं स्कूल शिक्षा विभाग में प्राथमिक, सहायक, माध्यमिक और उच्च श्रेणी शिक्षकों की पदोन्नति दो साल से लंबित है। उन्होंने बताया कि करीब दो साल पहले उच्च पद का प्रभार लेने वाले शिक्षकों को भी अभी तक नियमित पदोन्नति नहीं मिली है। इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। संगठन ने मांग की है कि शासन समय-सीमा तय कर पात्र शिक्षकों को जल्द पदोन्नति का लाभ दे।

नरोत्तम मिश्रा लिफ्ट में फंसे, कर्मचारियों ने मशक्कत के बाद खोला दरवाजा

ग्वालियर  ग्वालियर में पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा सोमवार शाम एक ऐसी स्थिति में फंस गए, जिसने मौके पर मौजूद लोगों की चिंता बढ़ा दी। वे जयेंद्रगंज में एक स्पोकन इंग्लिश कोचिंग सेंटर की नई ब्रांच का उद्घाटन करने पहुंचे थे। पहले फ्लोर से तीसरे फ्लोर पर जाते समय लिफ्ट दूसरे फ्लोर पर तकनीकी खराबी के कारण अचानक रुक गई। इसके बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा लिफ्ट के अंदर फंस गए। कर्मचारियों ने करीब 10 से 15 मिनट की मशक्कत के बाद दरवाजा खोला और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है। दूसरे फ्लोर पर अचानक रुक गई लिफ्ट यह घटना ग्वालियर के लश्कर क्षेत्र में स्थित जयेंद्रगंज की है। यहां संजय कॉम्प्लेक्स के सामने वाली बिल्डिंग में 'ग्वालियर नंबर 01 स्पोकन इंग्लिश क्लासेस' की नई ब्रांच का उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में डॉ. नरोत्तम मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंचे थे। जानकारी के मुताबिक, कोचिंग सेंटर तीसरे फ्लोर पर स्थित था। वहां पहुंचने के लिए डॉ. मिश्रा लिफ्ट में सवार हुए। लिफ्ट पहले फ्लोर से ऊपर की ओर बढ़ी, लेकिन दूसरे फ्लोर पर पहुंचते ही तकनीकी खराबी आ गई और वह झटके के साथ रुक गई। लिफ्ट के अचानक रुकने से उसके अंदर मौजूद लोग बाहर नहीं निकल सके। घटना की जानकारी मिलते ही बिल्डिंग के कर्मचारी और कार्यक्रम के आयोजक सक्रिय हो गए। मौके पर मौजूद लोगों को चिंता थी कि लिफ्ट का दरवाजा कैसे खोला जाए और अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर कैसे निकाला जाए। 10 से 15 मिनट तक लिफ्ट में फंसे रहे नरोत्तम मिश्रा लिफ्ट के रुकने के बाद कर्मचारियों ने तुरंत दरवाजा खोलने की कोशिश शुरू की। तकनीकी खराबी के कारण लिफ्ट का दरवाजा सामान्य तरीके से नहीं खुल पा रहा था। ऐसे में कर्मचारियों को इसे खोलने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।करीब 10 से 15 मिनट बाद दरवाजा खोला जा सका। इसके बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस दौरान उनके सुरक्षाकर्मी, आयोजक और पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद रहे। लिफ्ट में फंसने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल इस पूरी घटना का वीडियो मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने रिकॉर्ड कर लिया। बाद में इसे सोशल मीडिया पर साझा किया गया, जिसके बाद यह चर्चा में आ गया। वीडियो में लिफ्ट से जुड़ी घटना और डॉ. मिश्रा को बाहर निकालने की स्थिति को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी। हालांकि, घटना से जुड़े वीडियो को साझा करते समय उसके वास्तविक संदर्भ और उपलब्ध जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है। लिफ्ट से बाहर आते ही नरोत्तम मिश्रा ने किया उद्घाटन लिफ्ट से सुरक्षित बाहर निकलने के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने अपना निर्धारित कार्यक्रम जारी रखा। उन्होंने 'ग्वालियर नंबर 01 स्पोकन इंग्लिश क्लासेस' की नई ब्रांच का रिबन काटकर उद्घाटन किया। इस घटनाक्रम के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। लिफ्ट में फंसने के कारण उद्घाटन कार्यक्रम पर कुछ समय के लिए असर जरूर पड़ा, लेकिन डॉ. मिश्रा बाहर आने के बाद कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम पूरा होने के बाद उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए। उन्होंने कोचिंग संस्थान को युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक बेहतर विकल्प बताया। युवाओं के लिए शुरू हुई स्पोकन इंग्लिश कोचिंग की नई ब्रांच जयेंद्रगंज में शुरू हुई 'ग्वालियर नंबर 01 स्पोकन इंग्लिश क्लासेस' की नई ब्रांच का उद्देश्य युवाओं को अंग्रेजी बोलने और संवाद करने का प्रशिक्षण देने से जुड़ा है। आज के समय में अंग्रेजी भाषा का ज्ञान शिक्षा, नौकरी, इंटरव्यू और पेशेवर जीवन में उपयोगी माना जाता है। ऐसे में स्पोकन इंग्लिश क्लासेस उन विद्यार्थियों और युवाओं के लिए एक विकल्प बन सकती हैं, जो अपनी बातचीत की क्षमता बेहतर करना चाहते हैं। उद्घाटन कार्यक्रम में डॉ. नरोत्तम मिश्रा की मौजूदगी इसी अवसर का हिस्सा थी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ढालसिंह बिसेन सहित नव नियुक्त राज्यपालों को दी बधाई

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ढालसिंह बिसेन सहित नव नियुक्त राज्यपालों को दी बधाई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नव नियुक्त राज्यपालों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने मध्यप्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री , वरिष्ठ नेता ढालसिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया है। यह हर्षदायी समाचार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कामना की बिसेन के सार्वजनिक जीवन के सुदीर्घ अनुभव से उत्तराखण्ड की प्रगति को लाभ मिलेगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अन्य राज्यों में नियुक्त किए गए राज्यपालों को भी हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा 6 राज्यों के नए राज्यपालों की नियुक्ति की गई है। इनमें ढाल सिंह बिसेन को (उत्तराखंड) के साथ ही ओम प्रकाश माथुर (केरलम) राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ( तमिलनाडु)ब्रज मोहन राम ( ओडिशा) डॉ. सुधा यादव ( कर्नाटक) और दुष्यंत गौतम ( सिक्किम) को राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

MP Nagar Nikay Election 2027: वार्डों की सीमाएं बदलने की हलचल, इटारसी में पार्षदों का चुनावी गणित बदलने के आसार

इटारसी  मध्य प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राज्य सरकार ने प्रशासनिक तैयारी शुरू कर दी है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सचिव बीएस जामोद द्वारा जारी आदेश के तहत प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को 31 अक्टूबर 2026 तक नगरीय निकायों की सीमावृद्धि, वार्डों का पुनर्गठन, परिसीमन, नवीन निकायों/ नगर निगम गठन के पूर्ण प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के बाद इटारसी नगरपालिका के वार्डों में हलचल शुरू हो गई है। हालांकि निकायों की सीमावृद्धि और वार्ड परिसीमन का निर्णय स्थानीय निकायों को ही लेना है। वे प्रस्ताव बनाकर भेजेंगे, तभी शासन कोई निर्णय ले पाएगा। राजनीतिक नफा-नुकसान इटारसी शहर के बाजार क्षेत्र में भाजपा का मजबूत गढ़ है। पुरानी इटारसी, नाला मोहल्ला और गरीबी लाइन के अलावा पीपल मोहल्ला क्षेत्र में कांग्रेस का जनाधार भी असरदार है। वार्डों की सीमाओं का यदि पुनर्गठन (Delimitation) किया गया तो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। जिसका असर नतीजों पर दिखने की उम्मीद है। इसके अलावा वार्ड बड़े और अधिक मतदाता होने की वजह से उन वार्डों में भाग्य आजमा रहे उम्मीदवारों को प्रचार-प्रसार में अधिक समय लगता है। कई बार तो वे दूसरी दफा कुछ क्षेत्रों के मतदाताओं तक संपर्क भी नहीं कर पाते हैं। क्यों जरूरी है वार्डों का परिसीमन? निकायों में कुछ वार्ड ऐसे हैं जिनमें मतदाता ज्यादा हैं। भौगोलिक क्षेत्र भी बड़ा है। कुछ वार्ड ऐसे हैं जिनमें मतदाता कम हैं। भौगोलिक क्षेत्र भी छोटा है। ऐसे में इन वार्डों में विकास कार्य प्रभावित होते हैं। बड़े क्षेत्र के जनप्रतिनिधि को अतिरिक्त मेहनत करनी होती है। उदाहरण के तौर पर शहर के 34 वार्डों में सबसे कम वोटर वाले वार्ड 8 (मतदाता 1070), वार्ड 14 (मतदाता 1053), वार्ड 32 (मतदाता 1170) हैं। इसके अलावा सबसे अधिक मतदाता वाले वार्ड 2 (मतदाता 3494), वार्ड 21 (मतदाता 3439) हैं। मतदाता संख्या के इन्हीं अंतरों को शासन ठीक कर लगभग बराबर पर लाना चाहता है। वार्ड परिसीमन व आरक्षण का पेंच पूर्व वरिष्ठ पार्षद व अधिवक्ता यज्ञदत्त गौर का कहना है कि मप्र नगरपालिका (वाडों का विस्तार) नियम, 1994 के तहत सीमाओं के पुनर्गठन के बाद नए सिरे से एसटी, एससी, ओबीसी, महिला आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। सीमावृद्धि और वाडों के पुनर्गठन से कई वर्तमान पार्षदों के पारंपरिक वाडों की सीमाएं बदल जाएंगी। कुछ सीटें आरक्षित हो सकती हैं। ऐसे में कई स्थापित नेताओं को नए वाडों की तलाश करनी पड़ेगी। मौजूदा जनप्रतिनिधि ऐसे बदलावों से डरते हैं। निकायों से मांगे गए है प्रस्ताव- सीएमओ वार्डों के परिसीमन के लिए शासन ने नगरीय निकायों से प्रस्ताव मांगे हैं। इटारसी नगरपालिका में इसकी आवश्यकता है या नहीं। इस संबंध में परिषद की बैठक बुलाकर निर्णय लिया जाएगा।- सुरेखा जाटव, सीएमओ नपा

Indore Water Crisis: 37% कम बारिश से गिरा भूजल स्तर, नर्मदा पर निर्भरता घटाने के लिए नया जल नेटवर्क तैयार

इंदौर   इंदौर शहर में इस बार औसत से करीब 37 प्रतिशत कम बारिश होने से न सिर्फ भूजल स्तर में गिरावट आई है, बल्कि कई जलस्रोतों में बहुत कम पानी स्टोर हुआ है। अब वैकल्पिक जलस्रोत विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि नर्मदा जल पर निर्भरता कम हो और भूजल के दोहन में भी कमी आए। जिला प्रशासन ने चोरल, तिंछा, और शीतला माता फॉल को जलस्रोत के तौर पर विकसित करने की योजना बनाई है। अभी प्रोजेक्ट का परीक्षण कराया जा रहा है। इंदौर को मिलने लगेगा पानी प्रोजेक्ट से जुड़े एक्सपर्ट का दावा है कि तिछा फाल में 120 से 150 मिलियन घन मीटर पानी स्टोरेज की क्षमता विकसित हो सकती है। महू के आसपास अन्य जलस्रोत तैयार करने की भी प्लानिंग है। ऐसा हुआ तो नर्मदा का महू में जाने वाला 50 एमएलडी पानी इंदौर को मिलने लगेगा। इस प्रोजेक्ट के साथ आसपास के कई तालाबों और जलस्रोतों को विकसित कर वहां आने वाला पानी असरावद या लिम्बोदी लाने की योजना है। यदि सब कुछ ठीक रहा तो प्रोजेक्ट की रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी और उसके आधार पर निर्णय होगा। भूजल स्तर में होगा सुधार मालूम हो, नर्मदा का पानी शहर में पीने के अलावा रास्ते में सिंचाई के लिए भी दिया जाता है। फसल के बाद भी इस पानी की सप्लाई जारी रहती है। कई जगह मोटर लगाकर पानी खींचा जाता है। यह पानी असरावद या लिम्बोदी के आसपास के तालाबों से लिफ्ट कर लाया जा सकता है। ओवरफ्लो होने वाला पानी कनाड़ नदी में 12 महीने बहता है और यह तिछा में आता है। इस पानी को स्टॉप डैम बनाकर रोका जा सकता है। यह पानी शहर के लिम्बोदी तालाब तक लाया जाए तो बायपास से लगी कई कॉलोनियों के भूजल स्तर में सुधार होगा। जल संचयन और संरक्षण जरूरी शहर के आसपास 40 से 50 किमी में कई वैकल्पिक स्रोत हैं, जिन पर काम करने से जल संचयन और संरक्षण होने से पानी की क्षमता बढ़ सकती है। कुछ वर्ष पहले तत्कालीन महापौर कृष्णमुरारी मोघे ने चोरल नदी में बारिश के दौरान आने वाले पानी को शहर में लाने की योजना बनाई थी। एक दशक में जलस्रोत बढ़ाने पर पर्याप्त काम नहीं हुआ। अब जरूरत है कि नर्मदा और यशवंत सागर के अलावा पानी के अन्य स्रोतों की भी नगर निगम तलाश करे। अलग-अलग स्रोतों से आने वाले पानी को स्टॉप डैम बनाकर रोकें और उसे शहर में नए तालाबों में लाया जाए। इससे एक्वेफर के जरिए वाटर रिचार्जिंग भी हो सकेगी। यह किया जा सकता है काम -तिंछा फाल में कानड़ नदी (दतोदा कैचमेंट) से बारिश के समय खूब पानी आता है, लेकिन यह बह जाता है। इस पानी को बांध बनाकर रोकना होगा। और आगे बड़े तालाब विकसित करने होंगे, ताकि वर्ष भर उपयोग किया जा सके। यह जलूद से पहले है, इसलिए इस पानी को इंदौर तक लाने की लागत भी कम रहेगी। -महू में ग्राम भाटखेड़ी के पास बड़े तालाब में जानापाव कैचमेंट एरिया से खूब पानी आता है। तालाब में कई महीनों तक पानी स्टोर रहता है। इस पानी के उपयोग की योजना बनाई जा सकती है। -तिंछाफाल में बड़ा जलाशय बनाया जाए तो उसका संभावित स्टोरेज 120 से 150 मिलियन क्यूबिक मीटर हो सकता है। इंदौर की पानी की मांग 700 से 900 एमएलडी है। तिंछाफाल से शहर की 35 से 50% पेयजल जरूरत पूरी हो सकती है। नर्मदा नदी के अलावा अन्य जलस्रोत विकसित करने की योजना पर काम किए जा रहे हैं। वैकल्पिक जलात में नया जलस्रोत बनाना नहीं है, बल्कि नेटवर्क स्थापित करना है। इसके लिए सभी बिंदुओं पर परीक्षण किया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी। प्रारंभिक स्थिति के आंकलन से स्पष्ट हुआ है कि शहर में पानी का समानांतर नया नेटवर्क स्थापित किया जा सकता है। इस नेटवर्क से पानी तो मिलेगा, भूजल स्तर में भी वृद्धि होगी। – सुरेश एमजी, जल प्रबंधन विशेषज्ञ समझें पानी का सिस्टम -कनाड़ नदी में पाताल पानी से पानी आता है। यह और आसपास से आया पानी तिंछा में जाता है। तिंछा के आगे इंटेक संरचना विकसित कर पम्पिंग स्टेशन से पानी असरावद -पाइप लाइन से यह पानी लिम्बोदी तालाब तक लाया जा सकता है। इस पूरे नेटवर्क में लगभग 15 किमी का पाइप लाइन का क्षेत्रफल विकसित करना होगा। ये हैं परियोजना के मुख्य बिंद प्रस्तावित क्षमता : 50 MLD (5 करोड़ लीटर प्रति दिन) कुल लंबाई:- 14-15 km टिया कनाड़ असत: 9.8 km असरावद लिम्बोदी: 4.4 km) संभावित पाइप व्यास: 800-900 mm पंपिंग हेड : स्थल सर्वे के बाद निधीरित (अनुमानित 20-80 मीटर) मध्यवर्ती जलाशय : 1-2 MCM

MP Police की अंतरराष्ट्रीय पहचान, DSP रेणु मुराव और TI नीरज वर्मा संयुक्त राष्ट्र पुलिस मिशन में तैनात

भोपाल  मध्य प्रदेश पुलिस के अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सेवा देने का अवसर मिला है. मध्य प्रदेश पुलिस की डीएसपी रेणु मुराव और टीआई नीरज वर्मा को एक वर्ष के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) पुलिस मिशन में तैनात किया गया है. इस दौरान दोनों अधिकारी अंतरराष्ट्रीय पुलिस सेवा के तहत अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे और विभिन्न देशों के पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर काम करने का अवसर प्राप्त करेंगे।  कार्यकुशलता और पेशेवर दक्षता का प्रदर्शन मध्य प्रदेश पुलिस के दो अधिकारी संयुक्त राष्ट्र पुलिस मिशन में एक वर्ष तक अपनी सेवा देंगे. DSP रेणु मुराव और TI नीरज वर्मा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिली है. यह तैनाती मध्य प्रदेश पुलिस के लिए गौरव की बात मानी जा रही है. अंतरराष्ट्रीय पुलिस मिशन में शामिल होकर अधिकारी अपने अनुभव, कार्यकुशलता और पेशेवर दक्षता का प्रदर्शन करेंगे. साथ ही उन्हें विभिन्न देशों की पुलिस व्यवस्था, कार्यप्रणाली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों को समझने का अवसर भी मिलेगा।  मध्य प्रदेश की महिला अधिकारियों को भी मिला अवसर संयुक्त राष्ट्र पुलिस मिशन में मध्य प्रदेश से तीन महिला पुलिस अधिकारियों को भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है. इनमें डीएसपी रेणु मुराव के अलावा पांढुर्णा की रिजर्व इंस्पेक्टर (RI) अनिता और एएसपी निधि शिवहरे शामिल हैं. इन अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी सेवाएं देने का अवसर मिला है. महिला अधिकारियों की इस भागीदारी को पुलिस सेवा में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और उनकी पेशेवर क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  एक वर्ष तक निभाएंगे जिम्मेदारी डीएसपी रेणु मुराव और टीआई नीरज वर्मा संयुक्त राष्ट्र पुलिस मिशन में एक वर्ष तक सेवाएं देंगे. जानकारी के अनुसार, टीआई नीरज वर्मा अपना एक वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद भारत लौटेंगे. वर्मा वर्तमान मे भोपाल के खजुरी थाना प्रभारी हैं।  एडिशनल पुलिस कमिश्नर शैलेन्द्र सिंह चौहान ने सभी पुलिस अधिकारियो को बधाई दी है. उन्होंने कहा कि, ''मप्र पुलिस के लिए ये सौभग्य की बात है की हमारे पुलिस अधिकारी अब विदेश में अपने कर्तव्य का पालन करेंगे।  पुलिसिंग के वैश्विक तौर-तरीकों समझेंगे संयुक्त राष्ट्र पुलिस मिशन में तैनाती पुलिस अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण पेशेवर अनुभव होता है. इस दौरान अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय, विभिन्न परिस्थितियों में कार्य करने और पुलिसिंग के वैश्विक तौर-तरीकों को समझने का अवसर मिलता है. मध्य प्रदेश पुलिस के इन अधिकारियों की तैनाती से प्रदेश की पुलिस सेवा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है।