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जबलपुर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: मुख्य सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव को तलब, मामला क्या है?

जबलपुर  हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने सोमवार को राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में चार और जिला उपभोक्ता आयोगों में 35 रिक्त सदस्यों के पदों को भरने से संबंधित अपील पर सुनवाई की। अगली सुनवाई 24 मार्च को होगी, कोर्ट ने इस दौरान मुख्य सचिव और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। दरअसल, एकलपीठ के आदेश के विरुद्ध राज्य सरकार ने अपील दायर की है। राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के पांच सदस्यों के पदों में से चार पद और जिला आयोगों के 102 सदस्यों के पदों में से 35 पद रिक्त हैं। उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने नियुक्ति में देरी को लेकर बताया कि केंद्र सरकार को आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की योग्यता अधिसूचित करनी है। प्रतिवादी की ओर से बताया गया कि 51 जिला मंचों में से केवल 19 ही कार्यरत हैं। राज्य सरकार ने 16 जनवरी के एकल पीठ के आदेश के विरुद्ध अपील दायर की, जिसमें निर्देश दिया गया था कि सदस्यों और अध्यक्षों को सेवानिवृत्ति या कार्यकाल पूरा होने के बाद भी नए नियम अधिसूचित होने और तदनुसार नियुक्तियां होने तक अपने पदों पर बने रहने की अनुमति दी जाएगी।

नायब तहसीलदार पर बगलामुखी मंदिर से चप्पल चोरी का आरोप, शिकायत सोशल मीडिया पर वायरल

आगर मालवा  जिले के नलखेड़ा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। विश्व प्रसिद्ध बगलामुखी माता मंदिर में दर्शन करने पहुंचे एक शासकीय अधिकारी की चप्पल चोरी हो गई। खास बात यह है कि पूरे घटनाक्रम का खुलासा मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरों से हुआ है। मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक और थाना प्रभारी को लिखित शिकायत भी की गई है। जानकारी के मुताबिक, सोमवार 2 मार्च को दोपहर में नायब तहसीलदार अरुण चंद्रवंशी दर्शन के लिए नलखेड़ा स्थित माँ बगलामुखी मंदिर पहुंचे थे। उन्होंने अपनी चप्पल रसीद काउंटर के पास निर्धारित स्थान पर उतारी थी। करीब दस मिनट बाद जब वे वापस लौटे तो उनकी चप्पल वहां नहीं मिली। इसके बाद मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। फुटेज में एक व्यक्ति चप्पल ले जाते हुए दिखाई दिया। मंदिर प्रबंधन की मदद से संदिग्ध व्यक्ति की पहचान की गई और उससे पूछताछ भी की गई, जिसमें उसने चप्पल ले जाने की बात स्वीकार कर ली। घटना के बाद मंदिर परिसर में कुछ देर के लिए भीड़ भी एकत्रित हो गई, जिससे अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि मंदिर में पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित होती है। नायब तहसीलदार ने पुलिस से भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। नायब तहसीलदार ने बताया कि मंदिर जैसे आस्था के केंद्र में इस तरह की घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और मंदिर प्रबंधन सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाता है।  

महाकाल नगरी में रंगों का जश्न, शिव-पार्वती के साथ थिरके पंडे-पुजारी और भक्त

उज्जैन  धार्मिक नगरी उज्जैन में विराजमान बाबा महाकाल के दरबार में हर त्योहार विशेष श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है. होलिका दहन से पहले ही शहर रंगों और भक्ति के रंग में सराबोर हो गया. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के सान्निध्य में शयन आरती परिवार पिछले 26 वर्ष से अनोखी होली की परंपरा निभा रहा है, जिसे देखने और इसमें शामिल होने के लिए दूर-दराज़ से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। भगवान महाकाल की नगरी में इस बार होली का पर्व बेहद खास अंदाज में मनाया गया. शिप्रा नदी के किनारे नृसिंह घाट स्थित कुमार धर्मशाला में भक्त भक्ति में लीन होकर झूमते-गाते नजर आए. पूर्णिमा तिथि पर महाकालेश्वर मंदिर, माता हरसिद्धि मंदिर और महाकाल वन में विशेष होली उत्सव का आयोजन किया गया। शिव-पार्वती की प्रतीकात्मक उपस्थिति इस भव्य आयोजन का दृश्य उस समय और भी खास हो गया, जब शिव और माता पार्वती प्रतीकात्मक रूप में मंच पर प्रकट हुईं. ऐसा लग रहा था मानो स्वयं भोलेनाथ अपनी अर्धांगिनी के साथ भक्तों के बीच पधार गए हों. जैसे ही शिव-पार्वती ने नृत्य आरंभ किया, वातावरण भक्ति और उल्लास से भर गया. ढोल-नगाड़ों की गूंज और भजनों की मधुर धुन पर भक्त अपने भावों को रोक नहीं सके. हर चेहरा खिल उठा। गर्भगृह और नंदी हॉल रंगों से सराबोर सोमवार को संध्या आरती के दौरान मंदिर का गर्भगृह और नंदी हॉल रंगों से सराबोर नजर आया। पंडे-पुजारियों ने बाबा महाकाल को गुलाल अर्पित कर उनके साथ होली खेली। जैसे ही पुजारी ने बाबा पर केसरिया और हर्बल गुलाल छिड़का, पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के उद्घोष से गूंज उठा। यहां मौजूद हर कोई शिव भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। संध्या आरती के बाद मंदिर परिसर में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर के सामने होलिका दहन किया गया। महाकाल करते हैं सभी त्योहारों की शुरुआत पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा महाकाल ही समस्त त्योहारों की शुरुआत करते हैं, इसलिए यहां सबसे पहले होलिका प्रज्वलित की जाती है। इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने। सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंध समिति ने विशेष इंतजाम किए थे। गर्भगृह में केवल प्राकृतिक और हर्बल गुलाल के उपयोग की ही अनुमति दी गई, ताकि मंदिर की मर्यादा और गर्भगृह की सुरक्षा बनी रहे। शिवगणों के साथ भक्तों की टोलियां भगवान महाकाल के साथ होली खेलने के लिए शिवगण, भूत-पिशाच और नंदी विशेष वेशभूषा में नजर आए. पूरा दृश्य ऐसा प्रतीत हो रहा था, जैसे साक्षात शिव की सेना धरती पर उतर आई हो, ढोल-नगाड़ों और भजनों की गूंज के बीच भक्तों की टोलियां नाचते-गाते जुलूस के रूप में आयोजन स्थल तक पहुंचीं. हर ओर रंग, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम दिखाई दिया, जिसने पूरे माहौल को शिवमय कर दिया। ग्रहण के चलते केवल शकर का भोग अर्पित धुलेंडी पर्व पर चंद्र ग्रहण होने के कारण महाकाल मंदिर में भस्मारती से लेकर शाम को ग्रहण समाप्त होने तक पट बंद नहीं किए जाएंगे। इस दौरान श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। हालांकि, सुबह भगवान को नियमित भोग नहीं लगाया जाएगा। ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिर का शुद्धिकरण किया जाएगा। इसके बाद ही भगवान को भोग अर्पित किया जाएगा। शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने बताया कि शाम 6:32 से 6:46 बजे तक रहने वाले 14 मिनट के इस ग्रहण का वेध काल सूर्योदय से ही प्रारंभ हो जाएगा। वेध काल के कारण सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शकर का भोग अर्पित किया जाएगा। ऐसे होगा महाकाल का पूजन     3 मार्च को शाम 6:32 से 6:46 बजे तक चंद्र ग्रहण रहेगा। उसका वेध काल सुबह सूर्योदय से शुरू हो जाएगा।     वेध काल के चलते सुबह की दद्योदक एवं भोग आरती में केवल शकर का भोग अर्पित किया जाएगा।     ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिर में शुद्धिकरण, भगवान का स्नान एवं पूजन किया जाएगा। इसके बाद भोग अर्पित कर संध्या आरती होगी। कल से ठंडे जल से होगा स्नान महाकाल मंदिर में साल में दो बार भगवान की दिनचर्या में परिवर्तन होता है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से ठंड के अनुसार आरती का समय तय होता है, जबकि चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से गर्मी के अनुसार समय तय किया जाता है। इस साल 4 मार्च से चैत्र कृष्ण प्रतिपदा शुरू हो रही है, जिससे भगवान महाकाल की दिनचर्या में भी परिवर्तन होगा। इस दिन से गर्मी की शुरुआत मानी जाती है। भगवान महाकाल को ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा। यह क्रम शरद पूर्णिमा तक चलेगा। इस अवधि में प्रतिदिन होने वाली 5 आरतियों में से 3 के समय में परिवर्तन किया जाएगा। इसलिए ग्रहण का असर नहीं महाकाल मंदिर पर ग्रहण का प्रभाव क्यों नहीं होता, इस पर मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि भगवान महाकाल कालों के काल कहलाते हैं। दक्षिण दिशा काल की मानी जाती है और महाकाल का मुख दक्षिण की ओर है, इसलिए वे काल पर नियंत्रण रखते हैं। इस कारण कोई भी ग्रह, नक्षत्र या ग्रहण महाकाल को प्रभावित नहीं कर सकता। ग्रहण के दिन मंदिर की व्यवस्थाएं सामान्य दिनों की तरह रहेंगी, लेकिन ग्रहण के चलते न पुजारी और न ही श्रद्धालु भगवान को स्पर्श करेंगे। इस दौरान गर्भगृह में पुजारी मंत्रोच्चार करेंगे। ग्रहण समाप्त होने के बाद पुजारी स्नान कर मंदिर का शुद्धिकरण करेंगे, फिर भगवान का जलाभिषेक किया जाएगा। शाम को भोग अर्पित किया जाएगा। भजन-कीर्तन और अबीर-गुलाल इस दौरान महिला भक्तों ने शिव-पार्वती के साथ बैठकर भजन गाए और एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया. यह आयोजन महाकाल मंदिर शयन आरती भक्ति मंडल द्वारा आयोजित किया जाता है, जिसमें मंदिर के पुजारी, भक्त और आम श्रद्धालु शामिल होते हैं. आयोजन के दौरान कुछ भक्त चौसर खेलते नजर आए, तो वहीं दूसरी ओर भांग भी तैयार की जा रही थी. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और हर साल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है  

होलिका दहन में मुख्यमंत्री निवास पर गौ-काष्ठ का विशेष उपयोग

मुख्यमंत्री निवास पर हुआ भव्य होलिका दहन, गौ-काष्ठ का हुआ उपयोग होलिका दहन में मुख्यमंत्री निवास पर गौ-काष्ठ का विशेष उपयोग मुख्यमंत्री निवास में हुआ होलिका का दहन, गौ-काष्ठ का किया गया उपयोग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सपत्नीक पूजा-अर्चना कर किया होलिका दहन प्रदेशवासियों को होली की दी मंगलकामनाएं भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होलिका की विधि-विधान से सपत्नीक पूजा-अर्चना कर होलिका का दहन किया। होलिका में गौ-काष्ठ का उपयोग किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की धर्मपत्नी मती सीमा यादव, अन्य परिजन एवं म.प्र. हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक  अशोक कड़ेल भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पदस्थ सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों को होली की बधाई देकर प्रसादी के रूप में गुझिया वितरित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने होलिका दहन कर प्रदेशवासियों को रंग पर्व की बधाई और मंगलकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि होली हम सबको रंगों से सराबोर कर देने वाला त्यौहार है। होली हमें एकजुट रहने की सीख देती है। हम सभी को अपने आपसी मतभेदों को भुलाकर होली से रंगपंचमी तक प्रेमपूर्वक यह त्यौहार मनाना चाहिए।  

Iran-Israel War के असर से दोहा में फंसी भारतीय बास्केटबॉल टीम, एमपी के तुशाल सिंह भी मुश्किल में

जबलपुर  पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हवाई सेवाओं के बाधित होने के कारण भारतीय सीनियर पुरुष बास्केटबॉल टीम कतर की राजधानी दोहा में फंस गई है। 18 सदस्यीय दल में 12 खिलाड़ी शामिल हैं, जिनमें मध्य प्रदेश के जबलपुर में पदस्थ रेलवे खिलाड़ी तुशाल सिंह भी शामिल हैं। बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) के महासचिव कुलविंदर सिंह गिल के अनुसार भारतीय टीम एफआईबीए विश्व कप 2027 के एशियाई क्वालीफायर में भाग लेने 25 फरवरी को कतर पहुंची थी। टीम को शनिवार को अगला मुकाबला खेलने के लिए लेबनान रवाना होना था, लेकिन क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति और उड़ानों के रद्द होने के कारण पूरी टीम दोहा में ही रुक गई है। स्वदेश वापसी के प्रयास जारी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हवाई सेवाओं के बाधित होने के कारण भारतीय सीनियर पुरुष बास्केटबॉल टीम कतर की राजधानी दोहा में फंस गई है। 18 सदस्यीय दल में 12 खिलाड़ी शामिल हैं, जिनमें मध्य प्रदेश के जबलपुर में पदस्थ रेलवे खिलाड़ी तुशाल सिंह भी शामिल हैं। बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) के महासचिव कुलविंदर सिंह गिल के अनुसार भारतीय टीम एफआईबीए विश्व कप 2027 के एशियाई क्वालीफायर में भाग लेने 25 फरवरी को कतर पहुंची थी। टीम को शनिवार को अगला मुकाबला खेलने के लिए लेबनान रवाना होना था, लेकिन क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति और उड़ानों के रद्द होने के कारण पूरी टीम दोहा में ही रुक गई है। स्वदेश वापसी के प्रयास जारी

9 लोग, 1 बाइक: जान जोखिम में डालकर मौत की ओर बढ़ता सफर, वीडियो देखकर पुलिस के उड़े होश

कटनी एक मोटर साइकिल में कितने लोग सवार हो सकते हैं- दो, तीन या हद से हद चार… लेकिन क्या कभी 9 सवारी बैठे देखा है? यह नजारा देखकर बाइक निर्माता कंपनी भी अपना माथा पीट लेगी  |  कटनी जिले में एक हैरान कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक मोटरसाइकिल पर 9 लोग सवार हैं. बाइक चालक महिलाओं बच्चों सहित नौ सवारी बैठाकर बाइक चला रहा है. बगैर इस बात की चिंता किए कि जरा सी भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है  |  जान जोखिम में डालकर बाइक में नौ लोगों को बैठाने का यह नजारा न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने वाला है  |  बाइक की नंबर प्लेट में दिए गए नंबर MP 21 ZE 8630 से जाहिर होता है कि यह कटनी जिले के किसी ग्रामीण क्षेत्र का मामला है. बच्चों के हाथ में पिचकारी नजर आ रही है जिससे प्रतीत होता है कि परिवार होली पर्व की खरीददारी कर वापस लौट रहा है  |  एक बाइक पर 9 सवारी देखकर किसी ने इसका वीडियो बना लिया जो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है. वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं  |  वहीं, वीडियो वायरल होते ही पुलिस हरकत में आ गई है. यातायात थाना प्रभारी राहुल पांडे ने बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए वाहन चालक की तलाश शुरू कर दी गई है और संबंधित वाहन चालक की पहचान कर नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी  | 

चंद्रग्रहण के कारण 3 मार्च को माँ शारदा के पट बंद, मैहर जाने वाले श्रद्धालु जानें कब खोले जाएंगे गर्भगृह के द्वार

सतना मैहर जिला में मौजूद त्रिकूट वासिनी माँ शारदा मंदिर में चंद्रग्रहण के अवसर पर मंदिर परंपरा अनुसार दर्शन व्यवस्था में परिवर्तन किया गया है। मंदिर प्रशासन एवं प्रधान पुजारी पवन महाराज द्वारा जारी सूचना के अनुसार 3 मार्च को सायं 5:00 बजे माता शारदा की आरती एवं पूजन संपन्न होने के पश्चात गर्भगृह के पट सायं 5:30 बजे बंद कर दिए जाएंगे। 4 मार्च को अभिषेक के बाद खुलेंगे पट बताया गया है कि 4 मार्च को माता का अभिषेक एवं विधिवत पूजा-अर्चना पूर्ण होने के बाद गर्भगृह के पट पुनः दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए जाएंगे। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे दर्शन के लिए निर्धारित समय से पूर्व मंदिर परिसर पहुंचें तथा व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। 3 मार्च को कितने बजे लग रहा चंद्रग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शाम को 6 बजकर 47 मिनट तक चंद्रग्रहण रहेगा. सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर सूतक काल लग जाएगा. इस दौरान कोई भी शुभ काम, पूजा-पाठ नहीं होंगे. गर्भवती महिलाएं घर से बाहर नहीं निकल सकतीं. सूतक काल लगने के बाद से चंद्रग्रहण तक मंदिरों के पट बंद रहेंगे. एमपी के मैहर में त्रिकूट पर्वत पर विराजमान मां शारदा के दर्शन करने आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी कर दी गई है. ग्रहण के चलते मंदिरों के पट हो जाएंगे बंद 3 मार्च को लगने वाले चंद्रग्रहण के चलते मां शारदा मंदिर की दर्शन व्यवस्था में अस्थायी बदलाव किया गया है. मंदिर की प्राचीन धार्मिक परंपराओं और ग्रहण काल के नियमों का पालन करते हुए 3 मार्च की शाम को गर्भगृह के पट निर्धारित समय से पहले बंद कर दिए जाएंगे. मंदिर के प्रधान पुजारी पवन महाराज द्वारा जारी सूचना के अनुसार, श्रद्धालुओं से दर्शन के लिए निर्धारित समय का विशेष ध्यान रखने की अपील की गई है, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो. 3 मार्च को शाम 5:30 बजे बंद होंगे गर्भगृह के पट मंदिर प्रशासन द्वारा जारी समय-सारणी के अनुसार 3 मार्च को चंद्रग्रहण के दिन शाम 5:00 बजे मां शारदा की सांध्यकालीन आरती व विशेष पूजन किया जाएगा. आरती के बाद ठीक शाम 5:30 बजे गर्भगृह के पट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बंद कर दिए जाएंगे. पट बंद होने के बाद मंदिर के गर्भगृह में किसी भी श्रद्धालु को प्रवेश या दर्शन की अनुमति नहीं होगी. इसलिए मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे समय रहते मंदिर पहुंचकर दर्शन कर लें. ग्रहण समाप्ति के बाद 4 मार्च को होगा शुद्धिकरण चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद 4 मार्च को मंदिर के गर्भगृह का विधि-विधान से शुद्धिकरण किया जाएगा. इसके बाद मां शारदा का पवित्र जल से अभिषेक एवं विशेष पूजा-अर्चना संपन्न की जाएगी. पूजन और अभिषेक की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ही गर्भगृह के पट दोबारा श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोले जाएंगे. इसके बाद नियमित दर्शन व्यवस्था शुरू हो जाएगी. प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं मैहर मां शारदा मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. विशेष अवसरों और त्योहारों पर श्रद्धालुओं की संख्या लाखों तक पहुंच जाती है. चंद्रग्रहण के कारण दर्शन व्यवस्था में बदलाव होने से दूर-दराज से आने वाले भक्तों को पहले से जानकारी देना आवश्यक माना गया है. श्रद्धालुओं से समय का ध्यान रखने की अपील मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि जो भक्त 3 मार्च को दर्शन के लिए आने वाले हैं, वे शाम 5:30 बजे से पहले मंदिर परिसर पहुंच जाएं. निर्धारित समय के बाद दर्शन संभव नहीं होगा. प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से मंदिर परिसर में अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने व प्रशासन का सहयोग करने का भी अनुरोध किया है, ताकि सभी भक्तों को सुगमता से दर्शन का लाभ मिल सके. परंपराओं के पालन हेतु मंदिर प्रबंधन की अपील मंदिर प्रबंधन ने कहा है कि ग्रहण काल की परंपराओं के पालन हेतु यह व्यवस्था की गई है और सभी भक्तों से समय का विशेष ध्यान रखने का अनुरोध किया गया है।

MP में टोल वसूली का बड़ा घोटाला: आदेश से पहले करोड़ों रुपये वसूले गए, PWD मंत्री का बयान

  भोपाल मध्य प्रदेश में टोल वसूली को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) ने कई सड़कों पर राज्यपाल की अधिसूचना जारी होने से 6 माह से लेकर एक साल पहले तक टोल वसूली शुरू कर दी थी. यानी जिस तारीख से टोल वसूली कानूनी रूप से लागू होनी थी, उससे पहले ही जनता की जेब से पैसा निकाला जाता रहा. यह खुलासा विधानसभा में PWD की ओर से जारी जवाब से हुआ है |  कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने विधानसभा में सवाल पूछा था कि प्रदेश की कौन-कौन सी सड़कों पर टोल वसूली की अधिसूचना कब-कब जारी हुई और इन पर टोल वसूली कब से शुरू हुई? इसका जवाब जब सदन में रखा गया तो हैरान करने वाली जानकारी सामने आई |   कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने आरोप लगाया कि लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की ओर से शेयर की गई जानकारी के अनुसार कई सड़क परियोजनाओं में अधिसूचना और टोल वसूली की तारीखों में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है जो ना सिर्फ नियमों के विरुद्ध है बल्कि सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है |     प्रताप ग्रेवाल का कहना है कि इंडियन टोल एक्ट के तहत शासन अपने स्तर पर किसी भी सड़क पर टोल नहीं ले सकता है. सड़क जनता की संपत्ति है , तथा शासन ट्रस्टी है. ट्रस्टी उस संपत्ति से बेजा लाभ नहीं कमा सकता है |  सुप्रीम कोर्ट ने मंदसौर पुलिया के टोल प्रकरण में आदेश दिया कि कोई भी निवेशक, लागत उस पर ब्याज तथा रखरखाव के अतिरिक्त टोल नहीं वसूल कर सकता है |  अधिसूचना बाद में, वसूली पहले? कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने सदन में पेश आंकड़ों के आधार पर आरोप लगाया कि कई सड़कों पर अधिसूचना जारी होने के पहले से टोल टैक्स वसूली शुरू कर दी गई, जिनमें के कुछ सड़कें हैं:- भोपाल बायपास – अधिसूचना: 8 दिसंबर 2020 | टोल वसूली शुरू: 12 दिसंबर 2019 इंदौर–उज्जैन मार्ग – अधिसूचना: 30 दिसंबर 2022 | टोल वसूली शुरू: 21 जनवरी 2022 सागर–दमोह मार्ग – अधिसूचना: 8 दिसंबर 2021 | टोल वसूली शुरू: 28 फरवरी 2021 भिंड–गोपालपुरा मार्ग – अधिसूचना: 4 जनवरी 2022 | टोल वसूली शुरू: 19 मार्च 2021 गुना–ईसागढ़ मार्ग – अधिसूचना: 10 अक्टूबर 2024 | टोल वसूली शुरू: 2 जून 2023 महू–घाटाबिल्लौद मार्ग – अधिसूचना: 24 दिसंबर 2021 | टोल वसूली शुरू: 28 फरवरी 2021 बीना–खिमलासा मार्ग – अधिसूचना: 8 दिसंबर 2021 | टोल वसूली शुरू: 19 मार्च 2021 43 सड़कों से 603 करोड़ का ‘शुद्ध लाभ’? प्रताप ग्रेवाल का आरोप है कि प्रदेश की 43 सड़कों पर अधिसूचना जारी होने से पहले कथित अवैध टोल वसूली के जरिए एमपीआरडीसी ने दिसंबर 2025 तक 603.66 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है जिसकी जांच होनी चाहिए |  पूरा पैसा सरकारी खजाने में गया, कोई भ्रष्टाचार नहीं PWD मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि सदन में जो जानकारी दी गई हैए उसमें स्पष्ट उल्लेख है कि टोल वसूली शासकीय खजाने में ही जमा हुई हैए इसलिए इसमें भ्रष्टाचार का कोई मामला बनता ही नहीं है. जहां तक अधिसूचना जारी होने की बात है तो वो कई बार बैकडेट में भी जारी होती है, इसलिए यह कहना गलत है कि विभाग ने अवैध रूप से टोल वसूली की है |   

मध्य प्रदेश में मत्स्यपालकों के लिए अच्छी खबर, सरकार ला रही है मत्स्य नीति, किसान कल्याण वर्ष में कैबिनेट बैठक हर अंचल में

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान कल्याण वर्ष में मध्यप्रदेश के हर अंचल में कैबिनेट की बैठक आयोजित की जाएगी। जनजातीय अंचल नागलवाड़ी (निमाड़) में आज सोमवार को कृषि कैबिनेट आयोजित की जा रही है। बीते वर्ष भी निमाड़ क्षेत्र के महेश्वर में अहिल्या माता की 300वीं जयंती पर कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई थी। मत्स्य नीति की सौगात देगी प्रदेश सरकार-मोहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में कृषि सहित बागवानी, सहकारिता, मत्स्य उत्पादन आदि से संबंधित 17 विभागों को जोड़कर हम कार्य कर रहे हैं। नर्मदा के किनारे मत्स्य पालन की बड़ी संभावनाएं हैं। इसे देखते हुए मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और मत्स्यपालकों के कल्याण के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं का समावेश करते हुए मत्स्य नीति की सौगात हम देने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि-पशुपालन से जुड़े क्षेत्रों के साथ मत्स्य उत्पादन में भी आत्मनिर्भरता से बढ़कर और बेहतर स्थिति पाने का हमारा प्रयास है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले हुए वंदे-मातरम के सामूहिक गान के बाद मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजाति अंचल बड़वानी-निमाड़ नर्मदा जलप्रदाय योजना से पहले सूखा और आमजन के पलायन वाला क्षेत्र हुआ करता था। अब यहां हालात बदल चुके हैं। यहां सिंचाई का रकबा बढ़ा है और कृषि के क्षेत्र में नई संभावनाएं बनी हैं। नर्मदा वैली से खेती संबंधी बेहतरीन प्रयोग एवं कार्य इस अंचल में किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने से सामान्य तापमान में भी 2-3 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नर्मदा जी के किनारे हमारी आध्यात्मिक संस्कृति फली-फूली है। यहां भगवान भीलट देव का अद्भुत स्थान है, उनका चरित्र और इतिहास प्रेरणादायी है। इस अंचल में ऐसे महापुरुषों की एक पूरी शृंखला है। यहां संत सिंगा जी महाराज का स्थान है, खंडवा में दादाजी धूनीवाले का स्थान है, समाजसेवी संत एक रोटी वाले बाबा की कृपा भी यहां प्राप्त होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक छोटे से परिवार में जन्म लेने वाले भीलट देव जी ने साधना के बलबूते पर भक्तिभाव के साथ,  सही अर्थ में आध्यात्म के लिए सभी को प्रेरित किया। वे सनातन धर्म के सबसे बड़े देवता और जीवित भगवान के रूप में पूजे जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय पर्व भगोरिया को राजकीय पर्व के रूप में प्रदेश में मनाया जा रहा है। यहां होली से 7 दिन पहले से ही यह पर्व मनाया जाता है, जनजातीय भाई-बंधु टोलियों में परम्परागत वाद्य यंत्रों के साथ नृत्य-गायन से होली की अनूठी प्रस्तुति देते हैं। इसे बढ़ावा देने के लिए भगोरिया हाट का आयोजन भी किया जा रहा है।

चंद्र ग्रहण के बावजूद महाकाल के दरबार में खुलेंगे पट, बाबा महाकाल खेलेंगे रंग-गुलाल

उज्जैन 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. चंद्र ग्रहण के दौरान सभी मंदिरों और शिवालयों के पट बंद रहते हैं. यहां तक की घरों में भी भगवान के मंदिर के पर्दे लगा दिए जाते हैं और पूजा-पाठ नहीं होती है. फिर ग्रहण खत्म होने पर शुद्धिकरण के बाद ही पट खुलते हैं. ये बातें तो सभी जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दौरान भगवान महाकालेश्वर मंदिर के पट सामान्य दिनों की तरह खुले रहते हैं. भक्त बाबा के दर्शन कर सकते हैं. जानिए बाबा महाकाल मंदिर में क्यों ग्रहण पर भी पट खुले रहते हैं. महाकाल के आगे ग्रह, नक्षत्र का कोई दुष्प्रभाव नहीं अवंतिका नगरी उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर मंदिर में हर दिन की तरह 3 मार्च यानि चंद्र ग्रहण पर भी बाबा के दर्शन का क्रम सुबह भस्म आरती से देर रात शयन आरती तक चलता रहेगा. इसके पीछे की वजह को लेकर मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने  चर्चा में बताया कि "बाबा महाकालेश्वर का मंदिर दक्षिण मुखी है. भगवान का मुख दक्षिण की और होने से वे कालों के काल महाकाल कहलाते हैं. दक्षिण दिशा काल का है, काल पर जिसका नियंत्रण हो वह महाकाल है. बाबा महाकाल के कारण कोई भी ग्रह, नक्षत्र या कोई बाधा किसी को प्रभावित नहीं कर पाता. इसलिए ग्रहण के दौरान भी कोई दुष्प्रभाव मंदिर क्षेत्र में नहीं पड़ेगा. लिहाजा चंद्रग्रहण के दौरान भी भगवान का पूजा-अर्चन और सभी आरती समय पर जारी रहेगी. इसके साथ ही भक्त बाबा के दर्शन हर दिन की तरह कर सकेंगे. मंदिर सुबह भस्म आरती से लेकर देर रात शयन आरती तक खुला रहेगा. मंदिर में 2 मार्च यानि सोमवार को होलिका दहन हुआ . इसके बाद 3 मार्च को ही होली पर्व मनाया जाएगा. वेद परंपरा का अपना महत्व है. उसका निर्वहन करने के लिए कुछ नियमों का पालन जरूर किया जाएगा." 14 मिनट का ग्रहण जानिए क्या रहेगा पूजन का क्रम मंगलवार को फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा का दिन है. शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने बताया कि "सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया जाएगा. ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर में शुद्धिकरण, भगवान का स्नान पूजन के बाद भगवान को भोग अर्पित कर संध्या आरती संपन्न की जाएगी. ग्रहण 3 मार्च को शाम 6:32 से 6:46 तक यानि 14 मिनट का रहने वाला है. ग्रहण का वेद काल सुबह सूर्योदय से ही प्रारंभ हो जाएगा. भगवान महाकालेश्वर की ऊर्जा के आगे सब कुछ क्षीण महेश पुजारी ने कहा कि " ग्रहण के दिन मंदिर की सारी व्यवस्थाएं हर दिन की तरह तो रहेगी, लेकिन ग्रहण के चलते कोई भी यानि पुजारी हो या श्रद्धालु भगवान को स्पर्श नहीं करेगा. इस दौरान गर्भ गृह में पुजारी मंत्रोच्चार करते हैं. जब ग्रहण खत्म हो जाता है, तो पुजारी स्नान करने के बाद भगवान का जलाभिषेक करेंगे, मंदिर परिसर में विराजमान सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का जलाभिषेक होगा. मंदिर शुद्धिकरण होगा. दूसरे मंदिरों की तरह महाकाल मंदिर का पट बंद नहीं होंगे. दक्षिण मुखी ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से सारे दुष्प्रभाव खत्म हो जाते हैं. भगवान महाकालेश्वर की ऊर्जा के आगे सब कुछ क्षीण है. जैसे सूर्य की ऊर्जा है, उससे कई गुना अधिक बाबा की ऊर्जा है." महाकाल मंदिर समिति ने क्या कहा? मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने जानकारी देते हुए बताया कि "पुजारी-पुरोहितों से चर्चा के बाद तय हुआ है कि होली पर्व 3 मार्च को ही मनाया जाएगा. ग्रहण में भी भगवान के दर्शन पूजन का क्रम हर रोज की तरह रहेगा. दर्शन करने आने वाले सभी दर्शनार्थियों को कोई परेशानी नहीं आए, इसका ध्यान रखा जाएगा. ग्रहण के कारण जो सामान्य जो बदलाव हुए हैं, जैसे मंदिर शुद्धिकरण हो या ग्रहण के दौरान गर्भ गृह के अंदर मंत्रोच्चार तमाम व्यवस्थाएं मंदिर समिति की ओर से की गई है.