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भोजशाला परिसर में कब्रों पर उठे नए विवाद, एएसआई सर्वे रिपोर्ट के बाद मुस्लिम पक्ष का कोर्ट जाने का ऐलान

धार  धार के भोजशाला परिसर में लंबे समय से शवों को दफनाने का विवाद चला आ रहा है। यहाँ कुछ परिवारों के सदस्यों की मौत होने पर उन्हें परिसर के भीतर ही दफनाया जाता था। हालांकि, हिंदू समाज द्वारा इसका लगातार विरोध किया गया। विवाद बढ़ता देख साल 1997 में तत्कालीन कलेक्टर ने एक आदेश जारी कर भोजशाला में शव दफनाने पर रोक लगा दी थी। इस आदेश के बाद वहां अंतिम संस्कार बंद हुआ, लेकिन मस्जिद के सामने वाले हिस्से में आज भी कई पुरानी कब्रें मौजूद हैं।  जांच में यह बात भी सामने आई है कि इन कब्रों को बनाने में उन पत्थरों का इस्तेमाल किया गया जो भोजशाला के हिस्सों को तोड़ने के बाद मलबे के रूप में वहां पड़े थे। एएसआई ने सर्वे के दौरान इन कब्रों के पास के इलाके की भी जांच की है। हालांकि इनके बारे में अभी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन यह साफ है कि शहर में अलग कब्रिस्तान होने के बावजूद कुछ लोग शवों को दफनाने के लिए भोजशाला परिसर का ही इस्तेमाल करते थे। भोजशाला के उस हिस्से में जहाँ मस्जिद बनी है, वहां के पत्थरों और गुंबदों पर ऐसी आकृतियां मिली हैं जो आमतौर पर मस्जिद निर्माण में नहीं होतीं। कुछ शिलालेखों पर पशुओं की आकृतियां बनी हुई हैं। वहीं, परिसर के 50 से ज्यादा शिलालेखों पर अरबी और फारसी में आयतें भी लिखी मिली हैं। दूसरी तरफ, मुस्लिम समाज ने एएसआई की इस सर्वे रिपोर्ट को गलत बताते हुए इसे कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। इसके लिए धार के मुस्लिम प्रतिनिधियों ने वकीलों से मशविरा शुरू कर दिया है। कोर्ट ने इस रिपोर्ट पर दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए 16 मार्च तक का समय दिया है। परिसर के उस हिस्से में, जहां मस्जिद निर्मित है, पत्थरों और गुंबदों पर ऐसी आकृतियां मिली हैं जो सामान्यतः मस्जिद निर्माण में नहीं देखी जातीं। कुछ शिलालेखों पर पशु आकृतियां उकेरी गई हैं, जबकि 50 से अधिक शिलालेखों पर अरबी और फारसी में आयतें लिखी पाई गई हैं। नींव में मिला परमारकालीन ‘शारदा सदन’ रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान ढांचे के नीचे बेसाल्ट पत्थरों की 10वीं–11वीं शताब्दी की नींव पाई गई। इन पत्थरों पर ‘शारदा सदन’ शब्द अंकित है, जो देवी सरस्वती या वाग्देवी के निवास का संकेत देता है। साथ ही सुप्रसिद्ध साहित्यिक कृति ‘पारिजात मंजरी’ के उल्लेख वाले शिलालेख भी मिले हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि यह स्थान पूजा का केंद्र होने के साथ ही शिक्षा और नाट्य गतिविधियों का प्रमुख स्थल भी था। तीन चरणों में निर्माण, अंतिम चरण में मस्जिद स्वरूप वैज्ञानिक परीक्षणों से एएसआई ने निष्कर्ष निकाला है कि परिसर का निर्माण तीन चरणों में हुआ। सबसे प्राचीन परत मंदिर की है। इसके ऊपर क्षतिग्रस्त संरचना के अवशेष और फिर अंतिम चरण में मस्जिदनुमा ढांचा निर्मित किया गया। रिपोर्ट कहती है कि मस्जिद निर्माण के दौरान मंदिर के स्तंभों, शिलाखंडों और सजावटी पत्थरों का पुनः उपयोग किया गया। जिसमें कि निर्माण में समरूपता का अभाव स्पष्ट दिखता है। कई पत्थर उल्टे या आड़े-तिरछे लगाए गए, जिन पर संस्कृत शिलालेख खुदे थे। कुछ अक्षरों को घिसकर मिटाने के प्रयास भी मिले हैं। इससे यह संदेह प्रबल होता है कि मूल पहचान को छिपाने की कोशिश की गई। 106 स्तंभ, 82 अर्धस्तंभ और कीर्तिमुख सर्वे में पाया गया कि पूरी संरचना 106 मुख्य स्तंभों और 82 अर्धस्तंभों पर आधारित है। अधिकांश स्तंभ चूना पत्थर के हैं, जिनका रंग हल्का लाल और धूसर है। इन पर कीर्तिमुख, नागबंध, चैत्य गवाक्ष और उल्टे पत्तों की नक्काशी उकेरी गई है। कीर्तिमुख भारतीय मंदिर वास्तुकला की विशिष्ट आकृति है, जिसे सिंहमुख रूप में दर्शाया जाता है और जिसे दुष्ट शक्तियों से रक्षा का प्रतीक माना जाता है। स्तंभों के शीर्ष पर गोलाकार अभाकस, अष्टकोणीय पट्ट और त्रिकोणीय आधार स्पष्ट रूप से मध्यकालीन मंदिर शैली को दर्शाते हैं। 150 से अधिक संस्कृत शिलालेख, 56 अरबी-फारसी अभिलेख रिपोर्ट में 150 से अधिक संस्कृत और प्राकृत भाषा के शिलालेख दर्ज किए गए हैं। इसके विपरीत 56 शिलालेख अरबी और फारसी में पाए गए। यह अनुपात भी मूल संरचना के मंदिर और शैक्षणिक केंद्र होने की ओर संकेत करता है। फर्श और दीवारों में लगे कई पत्थरों पर खुदे अक्षरों को जानबूझकर घिसा गया या उल्टा लगा दिया गया ताकि उन्हें पढ़ा न जा सके। एएसआई के अनुसार यह ‘आइकॉनोग्राफिक इरेजर’ का स्पष्ट उदाहरण है। मूर्तियों के साक्ष्य: गणेश से अर्धनारीश्वर तक सर्वे रिपोर्ट में 94 मूर्तियों और उनके अवशेषों का उल्लेख है। इनमें गणेश, ब्रह्मा, नृसिंह और चार भुजाओं वाले अन्य देवताओं की आकृतियां शामिल हैं। परिसर से पूर्व में प्राप्त अर्धनारीश्वर, कुबेर और नायिका की मूर्तियों को भी साक्ष्य के रूप में जोड़ा गया है। ये प्रतिमाएं वर्तमान में संग्रहालयों में सुरक्षित हैं। खिड़की फ्रेम पर देवी-देवताओं की अपेक्षाकृत सुरक्षित मूर्तियां और एक स्तंभ पर कटी-फटी आकृतियां इस बात की ओर संकेत करती हैं कि मूल प्रतिमाओं को क्षति पहुंचाई गई। 1455 ईस्वी का शिलालेख और ऐतिहासिक संदर्भ परिसर में स्थित मकबरे के प्रवेश द्वार पर लगे शिलालेख का उल्लेख रिपोर्ट के खंड चार, पृष्ठ 260 पर किया गया है। यह शिलालेख मालवा सल्तनत के शासक महमूद खिलजी के काल (हिजरी 859/1455 ईस्वी) का है। एएसआई द्वारा किए गए अनुवाद के अनुसार उसमें उल्लेख है कि एक पुराने आश्रम को ध्वस्त कर मूर्तियों को नष्ट किया गया और उसे नमाज की जगह में परिवर्तित किया गया। इस संदर्भ में उल्‍लेखित है कि रिपोर्ट इस अभिलेख को ऐतिहासिक परिवर्तन का प्रत्यक्ष साक्ष्य मानती है। कारीगरों के 139 निशान और युद्ध दृश्य स्तंभों पर 139 से अधिक प्रकार के चिह्न जैसे त्रिशूल, स्वास्तिक और अन्य प्रतीक मिले हैं। इन्हें कारीगरों के सिग्नेचर या कोड के रूप में देखा गया है। दीवारों पर हाथी और सैनिकों के युद्ध दृश्य भी उकेरे गए हैं। एक स्थान पर बच्चे के हाथ का निशान भी मिला है, जो निर्माणकालीन गतिविधियों का मानवीय संकेत देता है। 98 दिन का सर्वे और 2189 पृष्ठों की रिपोर्ट उल्‍लेखनीय है कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के निर्देश पर 22 मार्च से 27 जून 2024 तक 98 दिनों तक परिसर का वैज्ञानिक सर्वे किया गया। 4 जुलाई 2024 को एएसआई ने 10 … Read more

अब सरकारी स्कूलों में भी नर्सरी-केजी! MP में 4500 स्कूलों के लिए आयु सीमा और गाइडलाइन जारी

भोपाल राज्य सरकार सत्र 2026-27 में प्रदेश के 4500 सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू करने जा रही है। नई शिक्षा नीति में पहली कक्षा में प्रवेश से पहले प्री-प्राइमरी में प्रवेश का प्रविधान किया गया है। अभी तक करीब दो हजार स्कूलों में यह व्यवस्था की गई थी। प्रवेश के लिए तीन से साढ़े चार वर्ष की आयु निर्धारित की गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में तीन से छह वर्ष के बच्चों को औपचारिक स्कूली शिक्षा से पहले खेल-खेल में सीखने का माहौल देने का प्रविधान है। इसके तहत किंडरगार्टन की तर्ज पर प्री-प्राइमरी बालवाटिका कक्षाएं शुरू की जा रही हैं। सरकार ने इसे चरणबद्ध ढंग से लागू करने का निर्णय लिया था। अब राज्य शिक्षा केंद्र ने प्रवेश संबंधी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। नए प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु की गणना संबंधित सत्र की 31 जुलाई तथा पहली कक्षा के लिए 30 सितंबर से की जाएगी। कक्षाओं को बनाया जाएगा आकर्षक सरकारी स्कूलों में अब तक सीधे पहली कक्षा में प्रवेश दिया जाता था, जबकि निजी प्ले स्कूलों में अभिभावक बच्चों को प्री-प्राइमरी में पढ़ाते थे। इससे सरकारी स्कूल के बच्चे पिछड़ जाते थे। अब तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को स्कूलों से जोड़ने के लिए आकर्षक फर्नीचर, खिलौने और रंगीन दीवारों वाली कक्षाएं तैयार की जाएंगी। जिन परिसरों में पहले से हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित हैं, वहीं इन कक्षाओं का चयन किया गया है, ताकि बच्चों को एक ही परिसर में निरंतरता मिल सके। खेल और गतिविधि आधारित पढ़ाई इन कक्षाओं में पढ़ाई का बोझ नहीं होगा। बच्चों को एनसीईआरटी द्वारा तैयार विशेष पाठ्यक्रम ‘विद्या प्रवेश’ के माध्यम से पढ़ाया जाएगा। एलईडी स्मार्ट टेलीविजन लगाए जा रहे हैं, जिनके जरिए हिंदी और अंग्रेजी वर्णमाला, गिनती तथा पूर्व-प्राथमिक गतिविधियां विजुअल टूल्स से सिखाई जाएंगी। पेंटिंग, मिट्टी के खिलौने बनाना, कविताएं और कहानी सुनाने जैसी गतिविधियों से सीखने का अवसर मिलेगा। अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्राथमिक शिक्षकों को छोटे बच्चों को खेल-खेल में आधुनिक तरीकों से पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए अतिथि शिक्षकों की भी भर्ती की जाएगी। प्रवेश की आयु सीमा नर्सरी: 3 से 4.5 वर्ष केजी-1: 4 से 5.5 वर्ष केजी-2: 5 से 6.5 वर्ष पहली कक्षा: 6 से 7.5 वर्ष अधिकारियों का क्या कहना डॉ. अरुण सिंह, अपर संचालक, राज्य शिक्षा केंद्र का कहना है कि आगामी सत्र से प्रदेश के 4500 सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू की जाएंगी। इन कक्षाओं में बच्चों का सर्वांगीण विकास होगा।

बड़वानी में आधुनिक सब्जी मंडी से मजबूत होगी कृषि अर्थव्यवस्था : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

50 एकड़ में स्थापित होगा आदर्श बीज उत्पादन केंद्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी कृषि एवं विकास योजनाओं की सौगात राजकीय गरिमा के साथ मनाया गया भगोरिया पर्व : जुलवानिया भगोरिया हाट में उड़ा उल्लास और परंपरा का रंग भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भगोरिया केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ आनंद में झूमने का पर्व है। पर्व में महिला और पुरुष समान रूप से कदम से कदम मिलाकर नृत्य करते हैं और पारंपरिक वेशभूषा में लोक संस्कृति की अद्भुत छटा बिखेरते हैं। ताड़ी जैसे पारंपरिक पेय का आनंद भी इस उत्सव का हिस्सा है। जनजातीय संस्कृति की अपनी विशिष्ट पहचान और महत्व है। इसी परंपरा को संरक्षित करने के लिये राज्य सरकार ने इस पर्व को राजकीय पर्व का दर्जा देकर इसकी गरिमा को और बढ़ाया गया है। यह बातें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बड़वानी जिले के जुलवानिया में भगोरिया उत्सव में कही। बड़वानी के जुलवानिया में भगोरिया हाट में उस समय उल्लास और उमंग का अनूठा दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनजातीय बंधुओं के भगोरिया उत्सव में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आगमन से पूरा हाट परिसर उत्साह, रंग और पारंपरिक उल्लास से सराबोर हो गया। जनजातीय संस्कृति की जीवंत छटा से सजे इस पारंपरिक पर्व में मांदल की गूंजती थाप, पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित नर्तक-नर्तकियों की मनमोहक प्रस्तुतियां तथा गुलाल से रंगीन वातावरण ने भगोरिया को और भी आकर्षक बना दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय कलाकारों के साथ मांदल की थाप पर कदम मिलाकर उनकी कला और परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निमाड़ क्षेत्र अपनी सांस्कृतिक समृद्धि, उत्सवधर्मिता और जीवन के प्रति आनंदमयी दृष्टिकोण के लिए प्रसिद्ध है। यहां प्रत्येक मौसम के अनुरूप त्यौहारों की परंपरा रही है, जिससे जीवन में उल्लास और सामूहिकता बनी रहे। पूर्वजों द्वारा स्थापित यह आनंदमयी परंपरा आज भी जीवंत है। सदियों से भगोरिया पर्व इस क्षेत्र में हर्ष, उमंग और लोक जीवन की ऊर्जा का प्रतीक बना हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निमाड़ का क्षेत्र, मां नर्मदा के आशीर्वाद से समृद्ध है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल प्रबंधन एवं सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से सूखे खेतों तक पानी पहुंचा है और फसलें लहलहा रही हैं। यहां विविध प्रकार की फसलें, फल और सब्जियों का उत्पादन हो रहा है। प्राकृतिक खेती को भी किसान उत्साहपूर्वक अपना रहे हैं, जिसके कारण बड़वानी जिले के फल एवं सब्जियों की मांग देश-विदेश में बनी हुई है। अब लक्ष्य है कि फसल को खेत से कारखाने तक पहुंचाया जाए और फूड प्रोसेसिंग के माध्यम से किसानों के जीवन में व्यापक परिवर्तन लाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगोरिया के आनंद और बड़वानी की उन्नत कृषि को सम्मान देने के उद्देश्य से कृषि कैबिनेट का आयोजन किया गया, जिसमें किसान कल्याण वर्ष की पहली कैबिनेट में 27,500 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के निर्णय लिए गए। किसानों के हित में भावांतर भुगतान योजना में सोयाबीन पर 1,500 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई। लाड़ली बहनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिये 1,500 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जा रही है। किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों को आर्थिक संबल प्रदान कर समान अवसर सुनिश्चित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कैबिनेट के साथ पहली बार भीलट देव के दर्शन कर मन आनंदित हुआ। निमाड़ महान संत सिंगाजी, दादा धूनिवाले जैसी विभूतियों की पावन भूमि है, जिन्होंने समरसता और सद्भाव का संदेश दिया। आपसी द्वेष और मतभेद भुलाकर प्रेम और भाईचारे के साथ होली का त्यौहार मनाने का संदेश देते हुए अग्रिम शुभकामनाएं दी गईं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बड़वानी जिले में उद्यानिकी फसलों का रकबा अधिक है। इसके विस्तार के लिये कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग इकाइयों के साथ आधुनिक सब्जी मंडी की स्थापना की जाएगी। जनजातीय बहुल क्षेत्रों के लिए पानसेमल एवं वरला माइक्रो सिंचाई उद्वहन परियोजनाओं को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं से हजारों हैक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी और जनजातीय किसानों को सीधा लाभ होगा। खेतिया कृषि उपज मंडी को आदर्श मंडी के रूप में विकसित किया जाएगा। प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिये 25 किसानों को अन्य राज्यों में प्रशिक्षण देकर मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा। बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 50 एकड़ क्षेत्र में आदर्श बीज उत्पादन केंद्र स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान करते हुए विभिन्न महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पलसूद बायपास एवं ओझर बायपास का निर्माण कराया जाएगा, जिससे यातायात सुगम होगा और क्षेत्रीय आवागमन को नई सुविधा मिलेगी। साथ ही एबी रोड से भंवरगढ़ स्थित खाज्या नायक स्मारक तक पहुँच मार्ग का निर्माण भी किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों को बेहतर संपर्क सुविधा उपलब्ध हो सके। साथ ही दीवानी से जोगवाड़ा पहुँच मार्ग तक 5 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण भी कराया जाएगा। इन सभी कार्यों से क्षेत्र के विकास, व्यापारिक गतिविधियों और आमजन की सुविधा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।  

देवकरण झोरढ़ बने भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी

भोपाल  भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल की सहमति से भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्री जयपाल सिंह चावड़ा ने मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी नियुक्त किया गया। घोषित सूची के अनुसार देवकरण झोरढ़ को किसान मोर्चा का प्रदेश मीडिया प्रभारी नियुक्त किया गया है। संगठन द्वारा की गई इस नियुक्ति को आगामी संगठनात्मक गतिविधियों और किसान हित से जुड़े मुद्दों के प्रभावी प्रचार-प्रसार की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश पदाधिकारियों की घोषणा के साथ ही मोर्चा की आगामी रणनीतियों और कार्यक्रमों को गति देने की तैयारी प्रारंभ कर दी गई है। संगठन ने नव नियुक्त पदाधिकारियों से किसान हितों के संरक्षण एवं संगठन के विस्तार में सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा व्यक्त की है।

माँ मोटी माता परिसर में ताप्ती–नर्मदा रेल लाइन को लेकर बैठक संपन्न हुई

  बड़वानी नरेश रायक ताप्ती नर्मदा रेल लाइन समिति के केंद्रीय संयोजक दामोदर अग्रवाल की अध्यक्षता में माँ मोटी माता परिसर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में अवगत कराया गया कि खंडवा–अलीराजपुर रेलवे लाइन के सर्वे कार्य पूर्ण हो चुके हैं तथा वृहद परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। बैठक में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के सहयोग हेतु आभार व्यक्त किया गया, जिनमें झाबुआ–अलीराजपुर सांसद अनिता नागरसिंह चौहान, केंद्रीय राज्यमंत्री एवं धार सांसद सावित्री ठाकुर, खरगोन–बड़वानी सांसद गजेंद्र पटेल, खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल तथा राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेरसिंह सोलंकी शामिल हैं। बैठक में विश्वास व्यक्त किया गया कि शीघ्र ही रेल लाइन को स्वीकृति प्राप्त होगी और बड़वानी जिलेवासियों का रेल यात्रा का सपना साकार होगा। रेल लाइन से क्षेत्र को संभावित लाभ   सस्ती और सुगम यात्रा सुविधा – विद्यार्थियों, मरीजों व श्रमिकों को बड़े शहरों तक आसान आवागमन।  व्यापार एवं कृषि को बढ़ावा – कपास, मिर्च, सोयाबीन सहित स्थानीय उत्पादों का तेज परिवहन। रोजगार के अवसर – निर्माण कार्य से लेकर संचालन तक स्थानीय युवाओं को रोजगार।  स्वास्थ्य व शिक्षा में सुविधा – इंदौर, खंडवा, धार आदि शहरों तक शीघ्र पहुँच।  पर्यटन विकास – क्षेत्र के धार्मिक व प्राकृतिक स्थलों तक पहुँच आसान। इस अवसर पर सर्वश्री अमित शर्मा, राजेंद्र देवड़े, नारायण वर्मा, भगवती प्रसाद कुमरावत, दीपक जेमन, जगन्नाथ गुप्ता, ताराचंद शर्मा, वीरेंद्र रावत, अशोक शर्मा, संजय माले, संतोष गुप्ता, महेश धनगर, बालकृष्ण सोनगरा, नितिन बद्रीलाल अग्रवाल एवं राजेश राठौड़ सहित अनेक नागरिक उपस्थित थे। बैठक में उपस्थित नागरिकों ने एक स्वर में कहा कि यह रेल परियोजना बड़वानी जिले के समग्र विकास की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

विद्युत समाधान योजना की अवधि 31 मार्च तक बढ़ाई गई, ऊर्जा मंत्री तोमर का ऐलान

विद्युत समाधान योजना की अवधि 31 मार्च तक बढ़ाई गई : ऊर्जा मंत्री  तोमर 31 मार्च तक एकमुश्त राशि जमा करने पर सरचार्ज में मिलेगी 90 प्रतिशत तक की छूट भोपाल  ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी है कि मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 के द्वितीय व अंतिम चरण को 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है। पूर्व में यह योजना 28 फरवरी तक लागू थी। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 3 नवम्बर को समाधान योजना 2025-26 की शुरुआत हुई थी। समाधान योजना में तीन माह से अधिक के बकायादार उपभोक्ताओं को एकमुश्त राशि जमा करने पर 90 प्रतिशत तक सरचार्ज में छूट का लाभ दिया जा रहा है। मंत्री  तोमर ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि यदि वे तीन माह से अधिक के बकाएदार हैं और योजना में अभी तक शामिल नहीं हो पाए वे अब 31 मार्च तक योजना में शामिल होकर अपना बकाया बिल एकमुश्त जमा करके 90 फीसदी तक सरचार्ज माफी का लाभ उठा सकते हैं। 21 लाख 67 हजार उपभोक्ताओं ने लिया लाभ मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 में 28 फरवरी तक 21 लाख 67 हजार बिजली उपभोक्ताओं ने इस योजना का लाभ लिया है। कुल 1043 करोड़ 53 लाख रूपये जमा किये गये हैं, जबकि 388 करोड़ 77 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 6 लाख 38 हजार बकायादार उपभोक्ताओं ने अपना पंजीयन कराकर लाभ लिया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 616 करोड़ 42 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है, जबकि 285 करोड़ 39 लाख रूपए का सरचार्ज माफ किया गया है। इसी तरह पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 8 लाख से अधिक उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 222 करोड़ 82 लाख रूपये जमा हुए हैं, जबकि 73 करोड़ 7 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 7 लाख 29 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 204 करोड़ 29 लाख रूपये जमा हुए हैं, जबकि 30 करोड़ 31 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। यह योजना उन बकायादार उपभोक्ताओं के लिए वरदान बनी है जो सरचार्ज के कारण मूलधन राशि जमा नहीं कर पा रहे थे। अब उन्हें समाधान योजना में सरचार्ज में 50 से लेकर 90 प्रतिशत तक छूट के साथ एकमुश्त अथवा किस्तों में भुगतान करने का विकल्प मिल रहा है। समाधान योजना 2025-26 एक नजर में समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना जल्दी आएं, एकमुश्त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है। योजना में एक मुश्त भुगतान करने पर 70 से 90 फीसदी तथा किस्तों में भुगतान करने पर 50 से 60 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जा रहा है। समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को कंपनी के पोर्टल पर पंजीयन करना है। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है। घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। योजना की विस्तृत जानकारी तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखी जा सकती है। साथ ही विद्युत वितरण केंद्र में पहुंचकर भी योजना के संबंध में जानकारी ले सकते हैं।  

मुख्यमंत्री ने एनआरएलएम की लखपति दीदियों, नेशनल खिलाड़ियों और उन्नत किसानों से सुने अनुभव

ग्रामीण प्रतिभाओं के प्रोत्साहन के लिए दी जाएगी हर संभव मदद : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागलवाड़ी में प्रबुद्धजनों से किया आत्मीय संवाद मुख्यमंत्री ने एनआरएलएम की लखपति दीदियों, नेशनल खिलाड़ियों और उन्नत किसानों से सुने अनुभव बड़वानी में हॉकी खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए एस्ट्रो-टर्फ की उपलब्ध कराई जाएगी सुविधा बड़वानी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को नागलवाड़ी में आयोजित पहली कृषि कैबिनेट के अवसर पर बड़वानी जिले के प्रबुद्धजनों से भेंट की। उन्होंने एनआरएलएम की लखपति दीदियों, बड़वानी जिले के नेशनल खिलाड़ियों और उन्नत किसानों के अनुभव सुने और उन्हें शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रबुद्धजनों से भेंटकर कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं, ग्रामीणों, किसानों, खिलाड़ियों सहित समाज के सभी वर्गों की प्रगति के लिए जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से मदद उपलब्ध करा रही है। बड़वानी जिले के ग्राम भागसुर की सीमा नरगावे ड्रोन दीदी ने निमाड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बताया कि ग्रामीण आजीविका मिशन के स्व सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने जैविक खेती और ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण लिया। अब वह अन्य महिलाओं को जैविक खेती करना सिखा रही है। ड्रोन दीदी सीमा ने बताया कि स्व-सहायता समूह से जुड़कर उसकी आय में वृद्धि तो हुई ही है, साथ ही उसे एक नई पहचान भी मिली है। सीमा ने बताया कि वह गांव में ड्रोन के माध्यम से खेतों में उर्वरक और कीटनाशक का छिड़काव करती है जिससे घंटों का काम अब मिनिटों में होने लगा है और उसे नियमित रूप से आय भी प्राप्त हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से चर्चा करते हुए हॉकी की नेशनल खिलाड़ी सु स्नेहा मोहनिया ने बताया कि उसे राष्ट्रीय स्तर पर 2 गोल्ड मेडल और 1 सिल्वर मेडल मिल चुका है। स्नेहा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से बड़वानी में एस्ट्रो-टर्फ की सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, जिसे उन्होंने स्वीकार करते हुए यह सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आश्वस्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एयर राइफल शूटिंग की नेशनल खिलाड़ी जुलवानिया निवासी सु वैष्णवी महुले से भी चर्चा की। उन्होंने सु वैष्णवी को राज्य स्तर की शूटिंग अकादमी में प्रशिक्षण दिलाने के लिए निर्देश उपस्थित अधिकारियों को दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जुलवानिया में शूटिंग क्लब प्रशिक्षण केंद्र संचालन कर रहे प्रशिक्षक  नीरज को 5 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि बालिकाओं की ट्रेनिंग के सराहनीय कार्य के लिए देने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बड़वानी जिले के ग्राम घटवा निवासी उन्नत कृषक  महेश पाटीदार ने अपने उत्पाद "गुड़ की चाय" के बारे में बताया।  पाटीदार ने बताया कि उन्होंने पी.एम.एफ.एम.ई. योजना में 28 लाख रुपए का ऋण लिया था। इसमें उन्हें 10 लाख रुपए का अनुदान भी मिला है। वर्तमान में  पाटीदार "गुड़ की चाय" के 500 क्विंटल के पैकेट प्रतिवर्ष बेच रहे हैं। भविष्य में एक हजार क्विंटल प्रतिवर्ष "गुड़ की चाय" के पैकेट बेचने का उनका लक्ष्य है।  पाटीदार ने बताया कि उनकी गुड़ की चाय के पैकेट विक्रय के लिए अमेजॉन एवं अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध है। बड़वानी जिले के ही  अमोल महाजन ने भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव को केला उत्पादन के अपने व्यवसाय के बारे में बताते हुए कहा कि वह पहले अमेरिका में जॉब करते थे, बाद में जॉब छोड़कर अपने देश में ही केला उत्पादन का स्टार्ट-अप शुरू किया। आज उनका केला दुबई, ईरान और इराक सहित विश्व के कई देशों में निर्यात हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  महाजन की उपलब्धि की प्रशंसा की।  

लोक संस्कृति सम्मान के लिए भगोरिया पर्व पर बड़वानी में कृषि कैबिनेट की बैठक, बोले मुख्यमंत्री डॉ. यादव

लोक संस्कृति के सम्मान के प्रकटीकरण के लिए भगोरिया पर्व पर बड़वानी में कृषि कैबिनेट: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दी बसंत और रंगों के पर्व होली की मंगलकामनाएं देश का फूड बास्केट है मध्यप्रदेश परीक्षा के समय में तनावमुक्त रहें विद्यार्थी मध्य पूर्व की वर्तमान क्षेत्रीय स्थिति में राज्य सरकार, वहां रह रहे प्रदेश के परिवारों के साथ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को होली पर्व की मंगलकामनाएं देते हुए कहा कि ईश्वर से प्रार्थना की कि बसंत और रंगों का यह उत्सव सभी के लिए शुभ और कल्याणकारी हो। उन्होंने कहा कि आज भगोरिया पर्व का भी आखिरी भगोरिया है। राज्य सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। पर्व के समय जनजातीय भाई बहनों के साथ रहने और लोक संस्कृति के सम्मान के प्रकटीकरण के लिये पहली कृषि कैबिनेट बड़वानी में सोमवार को आयोजित की गई है। यह प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के विकास के लिए हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में किसानों सहित युवा, महिला, गरीब, सभी के कल्याण के लिए गतिविधियां संचालित हैं। राज्य सरकार ने किसान कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की हैं। फसल की सही कीमत सुनिश्चित करने के लिए भावांतर योजना में अब सरसों को भी शामिल किया जा रहा है। उड़द प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत अब किसानों को उड़द पर 600 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस दिया जाएगा। मध्यप्रदेश दलहन-तिलहन सहित सभी कृषि उत्पादों में एक प्रकार से देश का फूड बास्केट है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश कृषि और उससे जुड़े सभी क्षेत्रों में निरंतर उन्नति करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह विद्यार्थियों के लिए परीक्षा का समय है, जो उनके लिए विशेष महत्व का है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से तनावमुक्त रहते हुए और स्वयं का ध्यान रखते हुए होली पर्व का आनंद लेने और परीक्षा सहित अपने सभी कर्तव्यों का जिम्मेदारीपूर्वक निर्वहन करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यपूर्व की वर्तमान क्षेत्रीय स्थिति के संबंध में कहा कि प्रदेश के कई नागरिक इन देशों में हैं। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में हमारा प्रयास है कि किसी भी नागरिक को कष्ट नहीं हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बतया कि उन्होंने मध्यपूर्व के देशों में रह रहे प्रदेश के कई परिवारों से दूरभाष पर बात की है। राज्य सरकार इन परिवारों के साथ है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव और कैबिनेट मंत्रियों ने भीलट देव से समृद्धि की कामना, निमाड़-मालवा में श्रद्धा का माहौल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव और कैबिनेट मंत्रियों ने निमाड़-मालवा के लोक देवता भीलट देव से सभी की समृद्धि के लिए की कामना लोक देवता भीलट देव के आंगन नागलवाड़ी में है पहली कृषि कैबिनेट भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कैबिनेट मंत्रियों ने सोमवार को निमाड़-मालवा के लोक देवता भीलट देव का दर्शन कर प्रदेश के किसानों की सुख समृद्धि की कामना करते हुए पूजा-अर्चना की। किसान कल्याण वर्ष में बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में आयोजित कैबिनेट बैठक के पहले दर्शन लाभ लेने के बाद सतपुड़ा की पहाडी पर विराजित लोक देवता के रमणीय स्थल की सभी ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के विकास के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है। भीलट देव निमाड़-मालवा क्षेत्र के आराध्य देव है। आज वे आराध्य के दर्शन के साथ ही कैबिनेट बैठक की शुरूआत करेंगे। कैबिनेट में जो भी निर्णय लिये जायेंगे वे प्रदेशवासियों एवं किसानों के हितार्थ होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि निमाड़वासी बड़े सौभाग्यशाली हैं जो उन्हें मां नर्मदा का आंचल मिला है। मां नर्मदा के जल से ही सिंचाई करके निमाड़ क्षेत्र के किसान समृद्ध एवं प्रगतिशील हो रहे हैं। आज निमाड़ क्षेत्र के किसान कृषि एवं उद्यानिकी की एक से अधिक फसलें लेकर आर्थिक रूप से भी उन्नति कर रहे हैं। मां नर्मदा का जल सूक्ष्म उन्नयन सिंचाई परियोजनाओं से बड़वानी जिले सहित निमाड़ क्षेत्र में किसानों को सिंचाई के लिये मिल रहा है। किसानों की आर्थिक उन्नति से ही प्रदेश की उन्नति होगी प्रदेश की सरकार ने वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया है, जिससे किसानों को और अधिक समृद्ध एवं संपन्न बनाया जाए। उन्होंने किसानों से यह अपील भी कि की मृदा की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए किसान भाई रासायनिक खेती के स्थान पर प्राकृतिक खेती को अपनाएं। शुरुआती वर्षों में प्राकृतिक खेती में उत्पादन कम होगा लेकिन उससे प्रारंभ में मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और फिर धीरे-धीरे उत्पादन की क्षमता भी बढ़ती जाएगी। भीलट देव मंदिर अत्यंत रमणीय एवं सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संपूर्ण मंदिर परिसर को देखते हुए कहा कि सतपुड़ा की सुरम्य वादियों में बसा हुआ नागलवाड़ी भीलट देव मंदिर अत्यंत रमणीय एवं सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण स्थल है। भीलट देव के तपस्या स्थल पर बने मंदिर के जीर्णोद्धार में निमाड़ के संत  सियाराम बाबा का भी अमूल्य योगदान है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद सदस्यों के साथ नागलवाड़ी मंदिर दर्शन के बाद सामूहिक फोटो भी खिंचवाया। निमाड़ के खेत और बाड़ियों में उपजने वाली फसलों की प्रदर्शनी का अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट से पहले निमाड़ के फार्म/खेतो और बाड़ियों में उपजने वाली फसलों का परिसर में आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी के अवलोकन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव को किसानों ने निमाड़ की कृषि पद्धतियों के बारे में अवगत कराया। कार्यक्रम स्थल पर आयोजित प्रदर्शनी के सम्बंध में बड़वानी कलेक्टर मती जयति सिंह ने प्रस्तुतिकरण भी दिया। अलग-अलग थीम पर आधारित रही प्रदर्शनी कृषि कैबिनेट के मद्देनजर जिला प्रशासन और कृषि कार्यों से जुड़े विभागों ने प्रदर्शनी में अलग-अलग थीम पर अपना प्रस्तुतिकरण किया गया। इनमें प्राकृतिक खेती क्रियान्वयन और प्रभावी मॉडल, वोकल फ़ॉर लोकल, केले का विकास मॉडल, डॉलर चना संपूर्ण मूल्य श्रृंखला, बड़वानी मिर्च प्लास्टर, तिल उभरती हुई विकासशील फसल, गन्ना आर्थिक और प्रभावी मॉडल, मिशन सिकलसेल उन्मूलन कार्यक्रम, नवाचार वन्य ग्राम समृद्धि अभियान थीम पर आधारित थी।  

अहमदाबाद में स्पा सेंटरों के साथ मिलकर फ्लैट से देह व्यापार चला रही थी अमरीन, नया खुलासा

भोपाल  राजधानी भोपाल के बागसेवनिया थाना क्षेत्र में स्थित सागर रॉयल विला में किराये का मकान लेकर गरीब हिंदू युवतियों का धर्मांतरण कराने और देह व्यापार में धकेलने वाली अमरीन का गिरोह अहमदाबाद में भी फैला हुआ है। अमरीन ने जिस तरीके से भोपाल में अपरा रैकेट चलाने के लिए पुराने व विश्वसनीय ग्राहक चंदन यादव का धर्म परिवर्तन कराकर उसे लिवइन पार्टनर बनाया था। उसी तरह अहमदाबाद के पुराने ग्राहक यासिर को मंगेतर बनाकर उसे वहां देह व्यापार का काम सौंप रखा था।  अमरीन के देह व्यापार को अहमदाबाद में यासिर ही संभाल रहा था। अमरीन ने यासिर के साथ मिलकर अहमदाबाद में जुहापुरा क्षेत्र में राजदरबार होटल के पीछे एक फ्लैट किराये पर लिया था। इसी फ्लैट से वह अहमदाबाद में देह व्यापार का रैकेट चला रही थी। अहमदाबाद में रैकेट चलाने के लिए उसी शहर के आधा दर्जन से अधिक बड़े स्पॉ सेंटर में अमरीन और यासिर ने सांठगांठ की थी। इन्हीं स्पॉ सेंटर से देह व्यापार के लिए लड़कियां और ग्राहकों को सौदा तय करके यासिर अपने किराये के फ्लैट पर लाता और देह व्यापार कराता था। देह व्यापार के कारण टूट चुका है आफरीन का निकाह अमरीन की बहन आफरीन भी भोपाल में संचालित गिरोह का मुख्य किरदार है। आफरीन की शादी जमालपुर में हुई थी, लेकिन ससुराल वालों को जब पता चला कि अमरीन और आफरीन गलत धंधे में लिप्त हैं तो ससुराल वालों का आए दिन आफरीन से विवाद होने लगा। इसके बाद आफरीन ससुराल छोड़कर वापस भोपाल अपने बहन अमरीन के पास आ गई और धंधे में हाथ बंटाने लगी। हालांकि आफरीन के तलाक का केस अभी अदालत में विचाराधीन है। आफरीन के ससुराल वालों के जरिए ही यासिर का संपर्क अमरीन से हुआ था। इसके बाद यासिर भी इस गिरोह का ग्राहक बन गया। बाद में अमरीन का विश्वस्त बना। अमरीन ने उसे अपना मंगेतर बनाकर अहमदाबाद में देह व्यापार को संचालित करने का बड़ा काम सौंप दिया। इस केस में एक बात कॉमन मिली है कि अमरीन ने भोपाल में देह व्यापार का धंधा चलाने के लिए पुराने ग्राहक चंदन यादव को प्रेमी और लिवइन पार्टनर बनाया। वहीं अहमदाबाद में रैकेट चलाने पुराने ग्राहक यासिर को मंगेतर बनाकर काम सौंप दिया। पुलिस पहुंचने से पहले फरार हो गया यासिर भोपाल में अमरीन के गिरोह पर प्रकरण दर्ज होने की भनक लगते ही यासिर अहमदाबाद से फरार हो गया था। भोपाल पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम जब अहमदाबाद स्थित अमरीन-यासिर के किराए के फ्लैट पर पहुंची तो वहां यासिर नहीं मिला। धर्मांतरण, दुष्कर्म, देह व्यापार के इस मामले में भोपाल निवासी अमरीन के भाई बिलाल, रिश्ते का भाई चानू और अहमदाबाद निवासी यासिर फरार हैं। पुलिस संजना उर्फ जन्नत की भी तलाश कर रही है। अहमदाबाद गई भोपाल पुलिस की टीम वापस आ गई है। पुलिस का कहना है कि अमरीन भोपाल में भी इसी मॉडल पर देह व्यापार करती थी। भोपाल में सागर रॉयल विला कॉलोनी में प्रेमी चंदन के साथ मिलकर और अहमदाबाद में मंगेतर यासिर के साथ। आरोपियों के कबूलनामे और सबूतों के बाद अब पुलिस मामले में देह व्यापार की धारा बढ़ाकर कार्रवाई करने की तैयारी में है।