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MP के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में उमड़ी पर्यटकों की भीड़, 8 दिन में 4598 लोगों ने देखा जंगल

उमरिया  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पर्यटन सीजन 2026-27 की शुरुआत पर्यटकों के लिए खास उत्साह लेकर आई है. कोर क्षेत्र के पर्यटन द्वार खुलने के बाद जंगल सफारी के लिए देश-विदेश से पर्यटक बड़ी संख्या में बांधवगढ़ पहुंच रहे हैं. पर्यटन सीजन के शुरुआती 8 दिनों से ही 4598 पर्यटकों ने टाइगर रिजर्व का भ्रमण किया है।  गेट खुलते ही बांधवगढ़ पहुंच रहे पर्यटक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र के पर्यटन द्वारा 1 अक्टूबर 2026 से नए पर्यटन सीजन के लिए खोल दिए गए थे. इसके पहले करीब तीन माह तक केवल बफर क्षेत्र के पर्यटन द्वारों से ही पर्यटकों को जंगल सफारी की अनुमति थी. कोर और बफर क्षेत्र एक साथ शुरू होने के बाद पर्यटकों की संख्या उत्साह जनक रुझान देखने को मिली है।  4598 पर्यटकों ने की जंगल सफारी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि, ''1 अक्टूबर से 8 अक्टूबर 2026 तक कुल 926 वाहनों से 4598 पर्यटकों ने बांधवगढ़ के जंगलों का भ्रमण किया. इसमें 4461 भारतीय पर्यटक शामिल रहे, जबकि 137 विदेशी पर्यटकों ने भी बांधवगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों को करीब से देखने का अनुभव लिया।  पर्यटकों को हो रहे बाघों के दीदार बांधवगढ़ की पहचान बाघों की शानदार दीदार के लिए देश-विदेश में है. पर्यटन सीजन की शुरुआत के साथ कोर क्षेत्र के विभिन्न जोन के साथ बफर क्षेत्र में भी पर्यटकों को बाघों के दीदार हो रहे हैं. जंगल सफारी के दौरान बाघ नजर आने से पर्यटकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. कई पर्यटक बांधवगढ़ के प्राकृतिक वातावरण वन्य जीवों और जंगल की खूबसूरती को अपने कैमरे में कैद कर रहे हैं।     पर्यटकों की सुविधा का ख्याल रख रहा वन विभाग बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि, ''पर्यटन गतिविधियों का संचालन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशा निर्देशों के अनुरूप किया जा रहा है. कोर और बफर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों और व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के साथ वन्य जीवों की सुरक्षा और पर्यटकों की सुविधा पर भी ध्यान दिया जा रहा है।  शुरुआती 8 दिनों में 4598 पर्यटकों का बांधवगढ़ पहुंचना आगामी पर्यटन सीजन को लेकर पर्यटकों की रुचि को दर्शाता है. आने वाले दिनों में छुट्टियों और पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने के साथ पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है. बांधवगढ़ का जंगल बाघों की मौजूदगी और प्राकृतिक वातावरण एक बार फिर देशी विदेशी सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। 

मध्यप्रदेश में रेल कनेक्टिविटी को मिलेगी रफ्तार, 500 किमी रेल लाइन का सर्वे जल्द पूरा होने की उम्मीद

भोपाल  पश्चिम मध्य रेलवे में लगातार बढ़ते रेल यातायात के दबाव से निपटने के लिए तीसरी रेल लाइन के विस्तार पर काम किया जा रहा है। रेलवे 500 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन बिछाने की तैयारी है। बताया जाता है कि परियोजना का सर्वे अंतिम चरण में है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद काम शुरु किया जाएगा। करीब तीन साल में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। तीसरी लाइन बनने के बाद यात्री और मालगाड़ियों के लिए नया रेल पाथ उपलब्ध होगा। इससे ट्रेनों को रोकने और लाइन क्लियर होने के इंतजार की समस्या कम होगी। ट्रेनों की गति बढ़ाने के साथ परिचालन को भी व्यवस्थित किया जा सकेगा। कार्य अंतिम स्तर पर थर्ड लाइन को लेकर सर्वे का कार्य अंतिम स्तर पर है। इसके तैयार होने से न केवल ट्रेनों की संख्या में इजाफा होगा, बल्कि पंक्चुअलिटी भी बेहतर होगी। इससे औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी लाभ मिलेगा। – डॉ. मधुर वर्मा, सीपीआरओ, पमरे रोजाना 450 से अधिक ट्रेनों का दबाव पश्चिम मध्य रेलवे का इटारसी जंक्शन प्रमुख रेल केंद्रों में शामिल है। यहां से रोजाना 450 से अधिक ट्रेनों का आवागमन होता है। यात्री ट्रेनों के साथ बड़ी संख्या में मालगाड़ियां भी इस नेटवर्क से गुजरती हैं। मौजूदा दो लाइनों पर बढ़ते यातायात के कारण कई बार ट्रेनों को लाइन क्लियरेंस के लिए रोकना पड़ता है। तीसरी लाइन बनने के बाद परिचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। 7 हजार करोड़ खर्च होने का अनुमान सूत्रों के अनुसार, तीसरी लाइन परियोजना पर करीब 7 हजार करोड़ खर्च होने का अनुमान है। रेलवे के प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, एक किलोमीटर रेल लाइन बिछाने में करीब 12 से 15 करोड़ रुपए तक खर्च हो सकता है। यह खर्च भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करेगा। इसमें ट्रैक निर्माण के साथ सिग्नलिंग, विद्युतीकरण और अन्य जरूरी रेल अधोसंरचना के काम भी शामिल होंगे। जबलपुर को भी मिलेगा फायदा इस रेलखंड से जबलपुर होकर कई लंबी दूरी की ट्रेनें संचालित होती हैं। यह रेलखंड माल परिवहन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। तीसरी लाइन बनने के बाद ट्रेनों के संचालन में सुधार का लाभ बड़ी संख्या में यात्रियों को मिलने की उम्मीद है। यात्री ट्रेनों के कारण मालगाड़ियों को लंबे समय तक रोकने की जरूरत कम होगी। इससे माल परिवहन की गति बढ़ने के साथ औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी लाभ मिल सकता है। यह है स्थिति 500 किलोमीटर लंबी रेल लाइन। 07 हजार करोड़ रुपए अनुमानित लागत। 450 से अधिक ट्रेनों का होता है आवागमन। 300 यात्री ट्रेनें, और 150 मालगाड़ियों की आवाजाही यह होगा फायदा ट्रैक मेंटेनेंस के लिए समय मिलेगा। ट्रैक का रखरखाव आसान होगा। ट्रेनों की गति बढ़ेगी। परिचालन व्यवस्था बेहतर होगी। कोचिंग ट्रेनों की संख्या बढ़ सकेगी।

अतिक्रमण के खिलाफ एनएचएआई की सख्त कार्रवाई, तेलीबांधा में अवैध एंट्री बंद

रायपुर राजधानी रायपुर में सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने  भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा अतिक्रमण एवं अनाधिकृत प्रवेश मार्गों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में रिंग रोड नंबर-1 पर तेलीबांधा स्थित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के पास की अवैध एंट्री को बंद कर दिया गया है। वहीं, रिंग रोड के भाठागांव क्षेत्र में भी अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई जारी है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों ने सार्वजनिक सड़कों को सुरक्षित और सुगम बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिक्रमण और अनाधिकृत प्रवेश मार्गों को हटाने की कार्रवाई लागू नियमों एवं सक्षम न्यायालयों के संबंधित निर्देशों के अनुरूप की जाती है। इस संबंध में एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी श्री आलोक कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना और यातायात को सुगम बनाए रखना एनएचएआई की प्राथमिकता है। अनाधिकृत प्रवेश मार्गों और अतिक्रमण के कारण सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिक्रमण के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। हमारा प्रयास है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात सुरक्षित, व्यवस्थित और निर्बाध रहे। राष्ट्रीय राजमार्गों पर पैचवर्क रिपेयरिंग लगातार जारी राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क की स्थिति बेहतर बनाए रखने और वाहन चालकों की सुरक्षित एवं सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए एनएचएआई द्वारा पैचवर्क रिपेयरिंग का कार्य लगातार कराया जा रहा है। सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों एवं गड्ढों की पहचान कर आवश्यक मरम्मत की जा रही है, ताकि सड़क की स्थिति बेहतर बनी रहे और वाहन चालकों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके। एनएचएआई द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिक्रमण हटाने, अनाधिकृत प्रवेश मार्गों पर नियंत्रण रखने तथा अवैध पार्किंग की समस्या के निराकरण के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। नागरिकों एवं वाहन चालकों से अपील है कि वे अनाधिकृत कट, अवैध पार्किंग और प्रवेश मार्गों का उपयोग करने से बचें तथा सुरक्षित एवं सुगम व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

टीबी और छाती रोगों की जांच के लिए कैमोर में दो दिवसीय विशेष शिविर

भोपाल  टीबी एवं छाती संबंधी बीमारियों की पहचान और समय पर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कटनी जिले में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कैमोर में दो दिवसीय विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निर्देश पर शुक्रवार को शुरू हुए शिविर में जिला चिकित्सालय के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मरीजों की जांच कर उन्हें निःशुल्क परामर्श एवं उपचार उपलब्ध कराया। शिविर के पहले दिन कुल 121 लोगों ने जांच के लिए पंजीयन कराया। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने की मरीजों की जांच शिविर के प्रथम दिवस जिला चिकित्सालय कटनी के टीबी एवं चेस्ट विशेषज्ञ डॉ. एस.पी. सोनी और डॉ. शिवमोहन सराफ ने मरीजों की जांच की। विकासखंड सिविल अस्पताल विजयराघवगढ़ के खंड चिकित्सा अधिकारी एवं चिकित्सा दल ने भी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कीं। इस दौरान कुल 60 मरीजों का एक्सरे किया गया जिसमें टीबी के 2 पुराने मरीज पाये गये जबकि 58 व्‍यक्ति स्‍वस्‍थ मिले। इसी प्रकार 84 मरीजों की ब्लड शुगर की जाँच की गई जिसमें 11 डाईबेटिक पाए गए। इसके अलावा 84 खखार जाँच, 90 निक्षय जाँच, 84 एचआईवीं जाँच एवं 84 हैपीटाइटिस जांच भी की गई। जबलपुर मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ भी करेंगे जांच शिविर के दूसरे दिन 10 अक्टूबर को नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर के विशेषज्ञ चिकित्सक मरीजों की जांच करेंगे। इनमें रेस्पिरेटरी मेडिसिन के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशीष दीवान तथा डीएम एवं सीनियर पल्मोनरी मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अनुज मोहन शामिल हैं। स्क्रीनिंग में चिन्हित मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। लक्षण दिखने पर कराएं जांच सीएमएचओ डॉ. राजसिंह ठाकुर ने बताया कि सांस लेने में परेशानी, खांसी में खून आना, लगातार वजन घटना, भूख न लगना, छाती में दर्द तथा 15 दिन से अधिक समय तक खांसी या बुखार रहने पर स्वास्थ्य जांच कराना जरूरी है। ऐसे लक्षणों से प्रभावित व्यक्ति शिविर में पहुंचकर निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण करा सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से शिविर का लाभ उठाकर समय पर जांच एवं उपचार कराने की अपील की है।  

स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन में पूर्ण सहयोग करेंगे पटवारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले पटवारी संघ के पदाधिकारी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से समत्व भवन मुख्यमंत्री निवास में मध्यप्रदेश पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने भेंट की। इस अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष   रमेश शर्मा और भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री  कुलदीप सिंह गुर्जर उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रस्तावित सम्मेलन के लिए भी आमंत्रित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट के पश्चात मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष  उपेन्द्र सिंह बघेल ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव से उनकी सार्थक चर्चा हुई है। स्वामित्व योजना में आवश्यक न्यायिक संरक्षण की व्यवस्था कर दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सहृदयतापूर्वक आवश्यक आदेश जारी करने की बात कही है। मध्यप्रदेश प्रांतीय पटवारी संघ के  अश्विन सैनी ने कहा कि स्वामित्व योजना से जुड़े कार्यों को सभी निष्ठा से करने के लिए तत्पर रहेंगे। भारतीय मजदूर संघ के प्रांतीय मंत्री  कुलदीप सिंह ने कहा कि स्वामित्व योजना से संबंधित कार्य राज्य सरकार की प्राथमिकता है। पटवारी बंधु अपने दायित्व निर्वहन में पीछे नहीं रहेंगे। जनकल्याण के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रत्येक निर्णय में सभी सहभागी होंगे। इस अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष  रमेश शर्मा ने पटवारी संघ के पदाधिकारियों से मुख्यमंत्री डॉ. यादव का परिचय करवाया।  

आध्यात्मिकता और धार्मिक संस्कारों से सशक्त होगा राष्ट्र- उपमुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल  देवी के प्रमुख 51 शक्तिपीठों पर आधारित शक्ति धाम प्रकल्प भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने की व्यापक परिकल्पना है। यह प्रकल्प देशभर के लोगों को प्रेरणा देने के साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। महान उद्देश्य की पूर्ति के लिए ज्ञान को साधना में ढालना और आध्यात्मिक ऊर्जा को समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाना आवश्यक है। यह विचार मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष  नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को  बालमुकुंद आश्रम, झालरिया मठ में 51 शक्तिपीठों पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन अवसर पर व्यक्त किए। शक्ति धाम न्यास, संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन तथा कालिदास संस्कृत अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष  तोमर ने कहा कि नवरात्रि के प्रारंभ होने से पहले मां भगवती का स्मरण करते हुए देवी के 51 शक्तिपीठों की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में विचार-विमर्श करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। शक्ति की आराधना, श्रद्धापूव्रक स्मरण और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं का अध्ययन हमारे जीवन को सार्थक, प्रेरणास्पद और सुगम बनाता है। उन्होंने कहा कि केवल ज्ञान प्राप्त कर लेना ही पर्याप्त नही है, बल्कि उस ज्ञान को साधना और व्यवहार में उतारकर अपने जीवन, देश की प्रगति तथा समाज के कल्याण के लिए उपयोग करना आवश्यक है। 51 शक्तिपीठों की परिकल्पना को मूर्त रूप देने के लिए सभी प्रयासरत हैं। दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के माध्यम से इस विषय से जुड़े गूढ़ रहस्यों और आध्यात्मिक पहलुओं को समझने का अवसर मिला है। यह पहल स्वागत योग्य है। जब यह प्रकल्प साकार होगा, तब देशभर के श्रद्धालुओं को प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी के सामूहिक प्रयासों से इस महत्वपूर्ण प्रकल्प को पूर्णता प्रदान की जाएगी। समापन कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक बटुकों द्वारा स्वस्तिवाचन के साथ हुआ। अतिथियों का परिचय कालिदास संस्कृत अकादमी के निदेशक  गोविंद गंधे ने दिया। दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का प्रतिवेदन शक्ति धाम न्यास के सचिव  राकेश शर्मा ने प्रस्तुत किया। आध्यात्मिकता और धार्मिक संस्कारों से सशक्त होगा राष्ट्र- उपमुख्यमंत्री  शुक्ल कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी आध्यात्मिक परंपरा, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत में निहित है। देश में आध्यात्मिकता का विकास आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढिय़ों में धार्मिक चेतना, मानवीय संवेदनाओं और सेवा के संस्कारों का विकास हो सके। इन संस्कारों से प्रेरित होकर युवा पीढ़ी पीडि़त मानवता की सेवा में अपना योगदान दे सकेगी। उन्होंने कहा कि धर्म और आध्यात्म के क्षेत्र में भारत की विशिष्ट पहचान है। भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक ज्ञान के प्रति विश्वभर में सम्मान का भाव है। धार्मिक परंपराएं समाज को नैतिक मूल्यों, सदाचार और मानव कल्याण की प्रेरणा देती है।  शुक्ल ने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जहां-जहां माता सती के शरीर के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। नर्मदा नदी के किनारे देवी के 51 शक्तिपीठों को एक साथ स्थापित करने की परिकल्पना साकार होने से श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर सभी शक्तिपीठों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो सकेगा। इससे देश में धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक चेतना को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकल्प के अंतर्गत भव्य भवन का निर्माण और संकल्प की पूर्णता हम सभी का सामूहिक दायित्व है। इस पुनीत कार्य में योगदान देने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात होगी। शक्ति धाम प्रकल्प विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने तथा भारत को सनातन धर्म और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में और अधिक सशक्त बनाने में योगदान देगा। भारत की आध्यात्मिक परंपरा विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है- भैयाजी जोशी कार्यक्रम के मुख्य वक्ता  सुरेश उपाख्य भैयाजी जोशी ने कहा कि 51 शक्तिपीठ शक्तिधाम प्रकल्प को साकार करने के संकल्प के साथ सभी यहां से जाएंगे। यह हम सभी का सौभाग्य है कि भारत में हो रहे महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों के साक्षी बन रहे है। उन्होंने कहा कि भारत की भूमि देवभूमि, पुण्यभूमि और तपस्वियों की साधना भूमि है। यहां ऋषि-मुनियों ने साधना और चिंतन के माध्यम से मानवता को मार्गदर्शन प्रदान किया है। भारत की पहचान यहां के तीर्थस्थलों, मंदिरों, मठों, धार्मिक यात्राओं, मेलों और साधु-संतों की परंपरा से है। यह भूमि महापुरुषों, चिंतकों और महान विचारकों की कर्मभूमि रही है। भारत का चिंतन शाश्वत है और समस्त मानवता के कल्याण की भावना से प्रेरित है।  जोशी ने कहा कि विश्व में भारत की प्रासंगिकता कभी समाप्त नही हो सकती। देश को ऐसा समाज बनाना होगा, जो दुर्बल नहीं, बल्कि शक्ति-संपन्न हो और विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने में सक्षम हो। महान ऋषि-मुनियों के योगदान तथा समग्र दृष्टिकोण पर आधारित भारतीय शास्त्र परंपरा ने भारत को विश्व में विशिष्ट स्थान प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति को विशेष सम्मान प्राप्त है। देवी शक्ति के प्रति करोड़ों लोगों की श्रद्धा और आस्था भारतीय समाज की सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण आधार है। शक्ति की उपासना समाज को सामर्थ्य संरक्षण और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। 51 शक्तिपीठों पर आधारित शक्तिधाम प्रकल्प इसी आध्यात्मिक चेतना को व्यापक स्वरूप प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। कार्यक्रम में संत समाज के अध्यक्ष संत  रितेश दास महाराज, सिंहस्थ केंद्रीय समिति के पूर्व अध्यक्ष  मखन सिंह चौहान, महापौर  मुकेश टटवाल, मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष  ओम जैन, सिंहस्थ प्राधिकरण के अध्यक्ष  जगदीश अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष मती कमला कुंवर तथा जिला पंचायत उपाध्यक्ष मती शिवानी कुंवर मंचासीन रहे। इस अवसर पर मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष  सौभाग्य सिंह, शक्तिधाम न्यास के अध्यक्ष  प्रशांत हरतालकर,  विभाष उपाध्याय,  सुरेश गिरी, नगर निगम के पूर्व अध्यक्ष  सोनू गेहलोत, कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज, एमआईसी सदस्य  शिवेंद्र तिवारी,  रघुवीर सिंह,  केतन भाई,  दिनेश गौतम,  आदित्य अग्रवाल,  प्रशांत त्रिपाठी और  अरुण व्यास सहित गणमान्य नागरिक, वैदिक बटुक तथा आमंत्रित वक्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन  दीपक उपाध्याय ने किया तथा आभार प्रदर्शन  राधेश्याम गुरुजी ने किया। कार्यक्रम के अंत में विश्व कल्याण की कामना के साथ सामूहिक शक्तिपाठ किया गया। इसके पश्चात वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ।  

प्रदेश के 20 हजार 456 अशासकीय स्कूलों को राशि होगी अंतरित

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 11 अक्टूबर को नरसिंहपुर जिले में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2024-25 की फीस प्रतिपूर्ति राशि का सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरण करेंगे। इसके अंतर्गत प्रदेश के 20 हजार 456 अशासकीय स्कूलों के खातों में 502 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की जाएगी। इससे 8 लाख 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा नरसिंहपुर जिले में 45 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त शासकीय सांदीपनि उत्कृष्ट विद्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण भी करेंगे। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह, स्थानीय जन प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ ही बडी संख्या विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित रहेंगे। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के सांदीपनी विद्यालय बेहतर शैक्षणिक वातावरण और विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रदेश सरकार द्वारा गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में अशासकीय स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति की राशि उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे पात्र विद्यार्थियों की नि:शुल्क शिक्षा सुनिश्चित की जा सके। अब तक 3,600 करोड़ रुपये की राशि हो चुकी है जारी शिक्षा के अधिकार से प्रदेश का कोई भी बच्चा वंचित न रहे, इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) अंतर्गत निजी स्कूलों में कक्षा 1 से 8वीं तक गरीब एवं वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को नि:शुल्क प्रवेश दिलाया जा रहा है। इन विद्यार्थियों की फीस की प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा सीधे संबंधित निजी स्कूलों को दी जाती है। इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2011 से अब तक 16 लाख 85 हजार से अधिक विद्यार्थियों की फीस प्रतिपूर्ति के रूप में 3,600 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया जा चुका है, जिससे जरूरतमंद बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का मार्ग आसान हुआ है। विद्यार्थियों को मिलेंगी अत्याधुनिक सुविधाएं विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा सांदीपनि विद्यालय योजना अंतर्गत प्रथम चरण में नरसिंहपुर जिले में शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का सर्वसुविधायुक्त नवीन भवन का निर्माण कराया गया है। केजी-1 से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के शैक्षणिक, बौद्धिक, शारीरिक एवं सर्वांगीण विकास के लिए एक आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण तैयार किया गया है। विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के लिए सुसज्जित डिजिटल क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला, समृद्ध पुस्तकालय, मल्टीपर्पज हॉल एवं ऑडिटोरियम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके साथ ही, विद्यार्थियों की बाह्य शारीरिक गतिविधियों एवं खेलकूद को प्रोत्साहन देने के लिए खेल मैदान, सुगम एवं सुरक्षित आवागमन के लिए परिवहन सुविधा भी प्रदान की जा रही है। उल्लेखनीय है कि इस आधुनिक शैक्षणिक वातावरण के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में इसी विद्यालय की मेधावी छात्रा कु. माही साहू ने कक्षा-12वीं की मेरिट लिस्ट में स्थान प्राप्त कर विद्यालय एवं क्षेत्र का मान बढ़ाया है।  

मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान में ग्रामीणों को मिल रहा संपत्ति का वैधानिक अधिकार

भोपाल मध्यप्रदेश में ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का वैधानिक अधिकार उपलब्ध कराने की दिशा में स्वामित्व योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अंतर्गत शुक्रवार, 9 अक्टूबर को प्रदेश के 17 जिलों के 82 हितग्राहियों को संपत्ति के मालिकाना हक के दस्तावेज प्रदान किए गए। डिजिटल तकनीक के माध्यम से पंजीयन एवं सत्यापन की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाकर ग्रामीणों को उनकी संपत्ति के अधिकार संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। 17 जिलों के 82 हितग्राहियों को मिला लाभ स्वामित्व योजना के तहत छिंदवाड़ा जिले में 34, हरदा में 10 और सिंगरौली में 6 हितग्राहियों के संपत्ति दस्तावेजों का पंजीयन पूर्ण किया गया है। डिंडोरी, मंडला और रायसेन में 5-5, जबकि अनूपपुर, उमरिया और नरसिंहपुर में 3-3 हितग्राहियों के दस्तावेजों का पंजीयन पूर्ण हुआ है। इसी प्रकार अशोकनगर, आलीराजपुर, कटनी, ग्वालियर, बालाघाट, श्योपुर, सागर और सीधी में एक-एक हितग्राही के दस्तावेजों का पंजीयन पूर्ण किया गया है। ग्रामीणों को संपत्ति के वैधानिक अधिकार और वित्तीय सशक्तिकरण का आधार स्वामित्व योजना के अंतर्गत ग्रामीण आबादी भूमि पर स्थित मकानों एवं भूखंडों का ड्रोन तकनीक से सर्वेक्षण कर संपत्ति संबंधी अभिलेख तैयार किए जा रहे हैं। इसके माध्यम से पात्र हितग्राहियों को संपत्ति के स्वामित्व के वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं। इन दस्तावेजों से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति पर अधिकार का प्रमाण मिलने के साथ बैंक ऋण सहित अन्य वित्तीय सुविधाओं का लाभ लेने में भी मदद मिलती है। छिंदवाड़ा में पटवारी ने प्रदर्शित की डिजिटल पंजीयन प्रक्रिया छिंदवाड़ा जिले के बिछुआ विकासखंड की ग्राम पंचायत जमुनिया कला में आयोजित जनविश्वास शिविर में पटवारी  सुनील गागड़े ने ‘सारा ऐप’ के माध्यम से संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। इसके बाद ‘संपदा 2.0’ के माध्यम से ऑनलाइन सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई। स्वामित्व योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति संबंधी अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप देने और शासकीय सेवाओं को अधिक सुगम एवं पारदर्शी बनाया जा रहा है। 

“ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” को सशक्त करना हमारी प्राथमिकता-प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी.

भोपाल  सचिव पर्यटन और मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विज़न को आगे बढ़ाते हुए हमारा फोकस पर्यटन क्षेत्र में "ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस" को मजबूत करना है। मध्यप्रदेश निवेश, नवाचार और व्यावसायिक अवसरों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 के लिए एक सशक्त पर्यटन रोडमैप तैयार किया जाएगा, ताकि मध्यप्रदेश पर्यटन निवेश, सुगम व्यावसायिक प्रक्रियाओं और विविध पर्यटन अनुभवों के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बनाए। सचिव डॉ. इलैयाराजा ने बताया कि हम “3Gs” पर काम कर रहे है, जिनमें गाइड (Guides), गाइडलाइंस (Guidelines) और गियर (Gear) शामिल हैं। प्रक्रियाओं को सरल बनाना और निवेशकों को अनुकूल नीतिगत वातावरण उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। मध्यप्रदेश पर्यटन नीति का उद्देश्य बड़े निवेशकों के साथ-साथ स्थानीय उद्यमियों, ग्रामीण समुदायों और होमस्टे संचालकों को भी पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पर्यटन का लाभ प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचेगा। मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट (MPTM) 2026 के तीसरे दिन बीटूबी मीटिंग्स के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों एवं संस्थानों को सम्मानित किया गया। इसका उद्देश्य प्रदर्शकों की रचनात्मकता, नवाचार और पर्यावरण-अनुकूल पहलों के साथ-साथ मध्यप्रदेश की पर्यटन विरासत, कला एवं शिल्प के प्रभावी प्रदर्शन को प्रोत्साहित करना रहा। सम्मान समारोह में उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक  आशीष कुमार, छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक  सौमिल रंजन चौबे, मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध संचालक  दिलीप कुमार यादव और मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेडेकर सहित ट्रैवल एंड टूर ऑपरेटर, एग्जीबिटर और होटलियर उपस्थित रहे। समारोह में मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। इसके बाद ऑर्गनाइजिंग कमेटी के 36 सदस्यों और 52 स्पॉन्सर्स को सम्मानित किया गया, फिर विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए गए। सर्वश्रेष्ठ टेबल स्पेस प्रथम: टूरिज्म विलेज धोबा। बैगा जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक खानपान, लोककलाओं और ग्रामीण जीवन के वास्तविक अनुभव इसकी विशेषता हैं, जहां पर्यटक स्थानीय परिवारों के साथ रहकर जनजातीय परंपराओं और प्रकृति से जुड़ सकते हैं। द्वितीय: वीवर्स पैराडाइज को बुनकरों और हथकरघा परंपरा को प्रदर्शित करने वाली प्रस्तुति के लिए। सर्वश्रेष्ठ स्टॉल डिजाइन (6 वर्ग मीटर) प्रथम: बैम्बू राज। बांस से निर्मित पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के माध्यम से उपयोगिता, प्राकृतिक सौंदर्य और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने की पहल के लिए। द्वितीय: जिप्सी एडवेंचर्स। जंगल के समीप कैंपिंग, साइकिलिंग अभियान, ट्रेकिंग और तारों के अवलोकन जैसे प्रकृति-आधारित रोमांचक अनुभवों के लिए। सर्वश्रेष्ठ स्टॉल डिजाइन (9 वर्ग मीटर) प्रथम: कुनो रिसॉर्ट। कुनो क्षेत्र की वन्यजीव संपदा और प्राकृतिक परिवेश को पर्यटन अनुभवों से जोड़ने वाली प्रस्तुति के लिए। द्वितीय: यारनगर जंगल रिसॉर्ट। जंगल और प्रकृति-आधारित पर्यटन की प्रभावी प्रस्तुति के लिए। सर्वश्रेष्ठ स्टॉल डिजाइन (9 वर्ग मीटर से अधिक) प्रथम: एमपी एस्केप्स। मध्यप्रदेश की प्राकृतिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को विशेष रूप से तैयार किए गए यात्रा कार्यक्रमों के माध्यम से प्रस्तुत करने के लिए। द्वितीय: शंभाला। भोपाल स्थित यह प्राकृतिक पर्यटन स्थल जैविक फार्म, हरियाली से घिरे आवास, फार्म टूर और प्रकृति के बीच विश्राम के अनुभवों के लिए जाना जाता है। सर्वश्रेष्ठ पर्यावरण-अनुकूल स्टॉल प्रथम: वैन वाइब। पर्यावरण के प्रति संवेदनशील स्टॉल प्रस्तुति के लिए। मध्यप्रदेश की सर्वश्रेष्ठ विषयगत प्रस्तुति संयुक्त प्रथम: एमपी टूर्स एवं ट्रैवलिशियस एमपी। दोनों संस्थाओं को प्रदेश की पर्यटन पहचान को विषयगत रूप से प्रस्तुत करने के लिए सम्मानित किया गया। एमपी टूर्स वन्यजीव, विरासत, जनजातीय संस्कृति, स्थानीय खानपान और ग्रामीण अनुभवों को समाहित करती यात्राओं का आयोजन करती है। सर्वश्रेष्ठ कला एवं शिल्प प्रदर्शनी प्रथम: जरी जरदोजी में ताजवर खान को सम्मानित किया गया। मध्यप्रदेश की पारंपरिक कढ़ाई कला, बारीक हस्तकारीगरी और धात्विक धागों से तैयार अलंकरण इसकी विशिष्ट पहचान हैं, जो प्रदेश की समृद्ध शिल्प परंपरा को दर्शाती है। द्वितीय: वुड क्राफ्ट में रीना भूरिया को लकड़ी पर आधारित हस्तशिल्प एवं कलात्मक कारीगरी के प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।  मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 का यह पुरस्कार समारोह प्रदेश के पर्यटन उद्यमियों और कारीगरों की रचनात्मकता तथा प्रतिबद्धता का उत्सव रहा। जनजातीय संस्कृति, वन्यजीव पर्यटन, हस्तशिल्प और पर्यावरण-अनुकूल पहलों से जुड़ी प्रस्तुतियों ने मध्यप्रदेश की विविधता और समृद्ध विरासत को सशक्त रूप से सामने रखा।

मध्यप्रदेश पर्यटन पवेलियन में छाया AI अवतार ‘मोगली’, तकनीक से दिखा रहा पर्यटन की राह

भोपाल मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 एग्जिबिशन में पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, तकनीक, हस्तशिल्प और ग्रामीण पर्यटन के विविध आयाम आकर्षण का केंद्र बने रहे। आयोजन में लगाए गए 177 स्टॉल्स के माध्यम से मध्यप्रदेश सहित देश-विदेश के पर्यटन स्थलों, होटल एवं रिसॉर्ट, ट्रैवल-टूर ऑपरेटर्स, होमस्टे, पारंपरिक कला और हस्तशिल्प को व्यावसायिक मंच उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदर्शनी का उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाकर व्यावसायिक साझेदारियों को प्रोत्साहित करना और मध्यप्रदेश को प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में वैश्विक पहचान दिलाना है। तकनीक और पर्यटन स्थलों का संगम बना मध्यप्रदेश पर्यटन पवेलियन मध्यप्रदेश पर्यटन के पवेलियन में प्रदेश के ऐतिहासिक स्मारकों, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीव पर्यटन और विविध पर्यटन अनुभवों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। बड़ी डिजिटल स्क्रीन, इंटरैक्टिव कियोस्क और डिजिटल डिस्प्ले के जरिए आगंतुक प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों और वहां उपलब्ध अनुभवों की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। पवेलियन का विशेष आकर्षण AI आधारित डिजिटल पहल और AI अवतार ‘मोगली’ है। मोगली के माध्यम से आगंतुक मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थलों, स्थानीय अनुभवों और अपनी रुचि के अनुरूप यात्रा विकल्पों के बारे में संवादात्मक तरीके से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह AI अवतार पर्यटकों की पसंद और यात्रा संबंधी जरूरतों के आधार पर संभावित यात्रा कार्यक्रम (इटिनरेरी) तैयार करने में भी सहायता करता है। इस पहल के माध्यम से मध्यप्रदेश पर्यटन ने डिजिटल नवाचार को पर्यटकों की यात्रा योजना से जोड़ने का प्रयास किया है। मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 में ग्रामीण पर्यटन के प्रामाणिक अनुभवों को प्रदर्शित करने के लिए विशेष ग्रामीण पर्यटन प्रदर्शनी तैयार की गई है। इसमें पर्यटक पारंपरिक होमस्टे, बैलगाड़ी की सवारी, स्थानीय लोक संगीत कलाकारों की प्रस्तुतियों और मिट्टी के बर्तन बनाने जैसी पारंपरिक कलाओं के माध्यम से गांवों की समृद्ध संस्कृति और जीवनशैली से रूबरू हो रहे हैं। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य ग्रामीण परिवेश, स्थानीय परंपराओं, लोक कलाओं और पारंपरिक कौशल को पर्यटन से जोड़ते हुए पर्यटकों को संपूर्ण ग्रामीण अनुभव प्रदान करना है। साथ ही, यह पहल स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और ग्रामीण समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित करने तथा ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।  वहीं, कला एवं शिल्प के स्टॉल्स पर बाघ प्रिंट, चंदेरी साड़ियां, भील आर्ट, बटिक प्रिंट और अन्य पारंपरिक हस्तशिल्प के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध रचनात्मक विरासत प्रदर्शित की जा रही है। ये पहल स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और ग्रामीण पर्यटन से जुड़े उद्यमियों को व्यापक बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। पर्यावरण-अनुकूल व्यवस्थाओं के साथ जिम्मेदार पर्यटन पर जोर MPTM 2026 में पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार पर्यटन को भी प्राथमिकता दी जा रही है। आयोजन को पूरी तरह सिंगल-यूज प्लास्टिक मुक्त और पेपरलेस रखने की व्यवस्था की गई है। अतिथियों के लिए स्थानीय जूट एवं कपड़े से बनी किट, पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों और कुल्हड़ों तथा पर्यावरण-अनुकूल हस्तशिल्प उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अतिथियों के आवागमन के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के उपयोग के माध्यम से कार्बन फुटप्रिंट कम करने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही, B2B बैठकों के जरिए पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन और जिम्मेदार पर्यटन से जुड़े अवसरों एवं व्यावसायिक साझेदारियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट का तीसरा दिन प्रदेश की पर्यटन विविधता, तकनीकी नवाचार, स्थानीय कला एवं संस्कृति और सतत पर्यटन के प्रति प्रतिबद्धता को एक साझा मंच पर प्रस्तुत करने के उद्देश्य को आगे बढ़ा रहा है। यह आयोजन पर्यटन क्षेत्र के हितधारकों के बीच संवाद, सहयोग और नए व्यावसायिक अवसरों को प्रोत्साहित करने के साथ मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।