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प्रदेश की दीदियों के बनाए उत्पाद अब अमेजन सहेली, इंडिया पोस्ट और अन्य ई-प्लेटफार्म पर होंगे उपलब्ध

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आजीविका मिशन से जुड़ी दीदियाँ एकता की शक्ति का सजीव उदाहरण है। बहनों द्वारा एकजुटता से किए जा रहे प्रयास 'बंद मुट्ठी लाख की' के भाव को चरितार्थ करते हुए देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। बहनें आज ट्रैक्टर से लेकर ड्रोन तक चलाने के साथ गैस और पेट्रोल रिफिलिंग जैसे कार्य भी कर रही हैं। कैफे संचालन से लेकर मार्केट का टारगेट पूरा करने में अव्वल बहनें अचार, पापड़ निर्माण सहित कई छोटे उद्योगों से बेहतर कमाई कर रही हैं। भारतीय संस्कृति में मातृ सत्ता का विशेष महत्व है। राज्य सरकार के प्रयासों से प्रदेश की बहनें सशक्त हो रही हैं। प्रदेश के 5 लाख स्व-सहायता समूहों से 65 लाख से अधिक दीदियां जुड़कर सशक्त हुई हैं। इनमें से 12 लाख से अधिक दीदियां लखपति दीदी बन चुकी हैं। राज्य सरकार प्रदेश की बहनों के सशक्तिकरण के लिए संकल्पित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व-सहायता समूहों ने एक वर्ष में विभिन्न कंपनी और मेलों के माध्यम से 310 करोड़ रुपए का व्यापार किया है। मध्यप्रदेश, देश का सर्वाधिक प्राकृतिक खेती वाला राज्य है। हमारे स्व-सहायता समूहों की 50 हजार बहनें प्राकृतिक खेती में जुटी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में महिला बाल विकास विभाग में 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। साथ ही बजट का कुल 34 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण विकास पर खर्च किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में स्वसहायता समूहों की आजीविका मिशन क्षमतावर्धन कार्यशाला का शुभारंभ कर कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल, कौशल विकास मंत्री  गौतम टेटवाल और पंचायत और ग्रामीण विकास राज्यमंत्री मती राधा सिंह उपस्थित थीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न जिलों के स्व सहायता समूहों की दीदियों द्वारा लगाए गए विभिन्न उत्पादों के स्टालों का अवलोकन कर दीदियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदर्शनी स्थल पर ग्राम छावनी पठार के मिलेट्स कैफे पर स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के 7 वाहनों को झंडी दिखाकर रवाना किया। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की दीदीयों द्वारा तैयार स्पेशल होली हैम्पर को लाँच किया गया। इसमें प्राकृतिक रंग, देशी घी, मिष्ठान, गोकाष्ठ, पूजन सामग्री और टीशर्ट जैसे 10 उत्पाद शामिल हैं। उज्जैन, सागर, कटनी, सीहोर, रीवा जिले की दीदीयों द्वारा तैयार होली हैम्पर पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समुदाय प्रबंधित प्रशिक्षण केंद्र (सीएमटीसी) का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में प्रशिक्षण केन्द्र पर लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आजीविका मार्ट ग्वालियर, जबलपुर एयरपोर्ट पर स्व-सहायता समूहों के रिटेल आउटलेट और संभागीय एवं जिला स्तर पर होली मेलों का वर्चुअली शुभारंभ किया। कार्यशाला में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल का विमोचन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ (एमपीएसआरएलएम) इंडिया पोस्ट, अमेजन सहेली, एक्सेस डेवलपमेंट सर्विस, बुद्धा इंस्टीट्यूट, टीआरआईएफ और साइटसेवर संस्थान के साथ एमओयू का आदान-प्रदान हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्कृष्ट कार्य करने वालीं स्व-सहायता समूहों की 5 दीदियों को सम्मानित किया। कार्यशाला में विपणन क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली गुना जिले की मती मीनाक्षी फरागते ने अपनी सफलता की कहानी सभी के साथ साझा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला उद्यमिता के इतिहास का आज स्वर्णिम दिन है। पारिवारिक स्तर पर मां-बेटियों-बहनों के हाथों से बने व्यंजन पूरे परिवार में आनंद का संचार करते हैं और यह व्यंजन ही त्यौहार की प्रसन्नता का आधार बनते हैं। आजीविका मिशन द्वारा हमारी बहनों के हाथों से बनी सामग्री को वैश्विक बाजार से जोड़ने की पहल सराहनीय है। भारतीय संस्कृति में ऋतुओं से व्यंजनों तथा अन्य उपयोगी सामग्री बनाने का विशेष संबंध है। क्षमतावर्धन की आज की कार्यशाला हमारी बहनों के हुनर और कर्मठता को नई दिशा प्रदान करेगी। घर से निकलकर बैंकों और शासन के सहयोग से स्वयं को व्यापारिक गतिविधियों में सफलतापूर्वक स्थापित करने की बहनों की पहल ने ग्राम स्तर पर विकास को नई गति दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार बहनों को प्रशिक्षण के साथ आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध करा रही है। बहनें अपने समूह की शक्ति को बढ़ाएं और नई मंजिलें प्राप्त करें, राज्य सरकार सदैव उनके साथ है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  पटेल ने कहा कि स्वसहायता समूहों की दीदियों ने सफलता का मुकाम हासिल किया है। हमारी मातृ शक्ति अपनी क्षमता के बल पर आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने देश के विकास में दीदियों की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में बहनों का महत्वपूर्ण योगदान होगा। मंत्री  पटेल ने कहा कि स्वावलंबन की दिशा में अग्रसर महिलाओं की सफलता केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके प्रमाण आँकड़ों और जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने बहनों से बदलती तकनीक के साथ स्वयं को अपडेट रखते हुए आगे बढ़ने का आव्हान किया। मंत्री  पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश भौगोलिक रूप से देश के बीच में स्थित है, देश का अधिकांश आवागमन मध्यप्रदेश से होता है, इस स्थिति का लाभ उठाते हुए हमें अपने व्यापार-व्यवसाय को बढ़ाने के हरसंभव प्रयास करना चाहिए। उन्होंने आजीविका मिशन के डाक विभाग के साथ हुए एमओयू के संबंध में कहा कि इससे समूहों के उत्पादकों की सप्लाई चेन मजबूत होगी। मंत्री  पटेल होली के अवसर पर नशा और अकर्मण्यता की बुराई को जलाने का सभी से आहवान किया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन मती हर्षिका सिंह ने कहा कि यह कार्यशाला विभिन्न जिलों के स्व-सहायता समूहों की दीदियों को उत्पादन और मार्केटिंग में सहायता व मार्गदर्शन प्रदान करेगी। इस कार्यशाला से प्रदेश के विभिन्न जिलों से समूहों को अपने उत्पाद राजधानी भोपाल में प्रदर्शित करने का अवसर प्राप्त हुआ है। आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना में प्रदेश के 6 जिले- बैतूल, विदिशा, राजगढ़, कटनी, ग्वालियर एवं भोपाल से 7 एजीईवाय गाड़ियों को हरी झंडी दिखाई गई … Read more

भोपाल में 28 फरवरी को होगा राज्य स्तरीय विज्ञान महोत्सव

भोपाल मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मैपकास्ट) द्वारा 28 फरवरी को ‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस’ के अवसर पर प्रदेश में विज्ञान जागरूकता एवं नवाचार आधारित विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम ‘वीमेन इन साइंस: कैटेलाइजिंग विकसित भारत’ है, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महिलाओं की सशक्त भूमिका और विकसित भारत के निर्माण में उनकी सक्रिय सहभागिता को रेखांकित करती है। थीम के अनुरूप आयोजनों में विज्ञान एवं अनुसंधान में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, महिला वैज्ञानिकों की उपलब्धियों को सम्मानित करने और छात्राओं को विज्ञान के क्षेत्र में करियर के लिए प्रेरित करने पर विशेष बल दिया जाएगा। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 का राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम 28 फरवरी को रवीन्द्र भवन, भोपाल में आयोजित होगा। कार्यक्रम में महिला वैज्ञानिकों एवं नवाचारकर्ताओं के विचार-विमर्श, विशेषज्ञ व्याख्यान, आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी द्वारा ‘स्टेम शो’ और 41वें युवा वैज्ञानिक सम्मेलन के विजेताओं को पुरस्कार वितरण किया जाएगा। आयोजन में लगभग 1500 विद्यार्थी एवं शिक्षक प्रत्यक्ष रूप से सहभागी होंगे। साथ ही प्रदेश के विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, स्वैच्छिक संगठनों और अनुसंधान संस्थानों से विद्यार्थी, शिक्षक, वैज्ञानिक एवं विज्ञान संचारक कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़ेंगे। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर प्रदेश के 45 जिलों में लगभग 260 शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से व्यापक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें विज्ञान मॉडल प्रदर्शनियां, प्रेरक व्याख्यान, विज्ञान जागरूकता गतिविधियां, विद्यार्थी-उन्मुख कार्यक्रम, नवाचार आधारित प्रतियोगिताएं, विज्ञान फिल्म प्रदर्शन, भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान पर संवाद तथा विद्यार्थी–वैज्ञानिक संवाद शामिल होंगे। इन गतिविधियों का उद्देश्य समाज में वैज्ञानिक चेतना और तार्किक सोच को प्रोत्साहित करना है। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस प्रतिवर्ष 28 फरवरी को महान भारतीय वैज्ञानिक सर सी.वी. रमन द्वारा वर्ष 1928 में ‘रमन प्रभाव’ की खोज की स्मृति में मनाया जाता है। इस खोज के लिए उन्हें वर्ष 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वर्ष 1986 में भारत सरकार ने 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस घोषित किया। इस दिवस का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं आमजन को विज्ञान के प्रति प्रेरित करना, वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सुदृढ़ करना है। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा आयोजित यह पहल प्रदेश में वैज्ञानिक सोच, नवाचार संस्कृति एवं लैंगिक समानता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। परिषद का लक्ष्य महान वैज्ञानिक सी.वी. रमन की विरासत से प्रेरणा लेते हुए “विकसित भारत” के निर्माण में विज्ञान तथा विशेष रूप से महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।  

आरडीएसएस अंतर्गत मालवा निमाड़ का 87वां ग्रिड बुरहानपुर शहर में ऊर्जीकृत : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल  शासन की महत्वपूर्ण रिवेम्प्ड डिस्ट्रिब्य़ूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) में मालवा निमाड़ निमाड़ में नए 33/11 केवी ग्रिड श्रृंखलाबद्ध रूप से बनाए जा रहे हैं। आरडीएसएस अंतर्गत मालवा निमाड़ का 87वां सब स्टेशन बुरहानपुर शहर के मंडी क्षेत्र में ऊर्जीकृत किया गया। ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि इस नये ग्रिड से बुरहानपुर मध्य शहर के हजारों उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में ज्यादा गुणवत्ता से बिजली मिलेगी। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर के प्रबंध निदेशक  अनूप कुमार सिंह ने बताया कि निमाड़ का 26वां और पश्चिम क्षेत्र कंपनी का यह 87वां ग्रिड बुरहानपुर के मध्य शहरी क्षेत्र में 2.18 करोड़ रूपए से निर्मित हुआ है। इसकी क्षमता 5 एमवीए है। इससे मध्य शहरी क्षेत्र को ज्यादा गुणवत्ता से बिजली मिलेगी। निमाड़ में सबसे ज्यादा ग्रिड बुरहानपुर, खंडवा में 8, 8, खरगोन में 6, बड़वानी में 4 तैयार किए गए हैं। वहीं इंदौर शहर व ग्रामीण वृत्त में कुल 13, उज्जैन जिले में 12 ग्रिड तैयार किए गए हैं। शेष ग्रिड अन्य जिलों में तैयार किए गए हैं। कंपनी क्षेत्र में अब तक आरडीएसएस के 87 ग्रिड ऊर्जीकृत होकर विद्युत प्रदाय कर रहे हैं। आरडीएसएस के इन ऊर्जीकृत ग्रिडों से पश्चिम मप्र की वितरण क्षमता में 435 एमवीए की और वृद्धि हो चुकी है। कंपनी क्षेत्र में कुछ जिलों में ग्रिडों के कार्य अभी भी प्रगतिरत हैं।  

10 हजार से अधिक विद्यार्थियों को रोजगार का प्रशिक्षण दिलाने का लक्ष्य

भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों को अप्रेंटिसशिप के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ उद्योग आधारित व्यावहारिक शिक्षा प्राप्त हो और रोजगारपरक कौशल में वृद्धि हो, इस उद्देश्य से बुधवार को अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP) को बढ़ावा देने के लिए अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन एवं आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा की उपस्थिति में 85 महाविद्यालयों, 5 शासकीय एवं 3 निजी विश्वविद्यालयों ने क्रिस्प, नई दिल्ली (CRISP) के सहयोग से बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग (BOAT-पश्चिमी क्षेत्र, मुम्‍बई) के साथ एमओयू किया। महाविद्यालय, विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों और बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग (BOAT- पश्चिमी क्षेत्र) के पदाधिकारियों ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। राज्य स्तरीय समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर समारोह का आयोजन सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय में भोपाल में हुआ। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन ने कहा कि वर्ष 2024–25 में एईडीपी (Apprenticeship Embedded Degree Program) प्रारंभ किया गया था। विभाग का प्रयास है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसरण में, शिक्षा को रोजगारमूलक बनाया जाए तथा विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ, उद्योग जगत की आवश्यकता अनुरूप रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराई जाए।  राजन ने कहा कि वर्तमान में आईआईटी दिल्ली के सहयोग से AI, FinTech with AI एवं एईडीपी पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। आज की आवश्यकता के अनुरूप विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग, स्वयं पोर्टल सहित विभिन्न डिजिटल माध्यमों के जरिए निरंतर आगे बढ़ रहा है और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान स्थापित कर रहा है।  राजन ने कहा कि एईडीपी पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को अप्रेंटिसशिप की सुविधा मिलेगी। साथ ही अप्रेंटिसशिप अवधि के दौरान प्रतिमाह स्टाइपेंड भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एईडीपी कोर्स के क्रियान्वयन में निजी शैक्षणिक संस्थान भी आगे आ रहे हैं। विद्यार्थियों को रोजगार उपलब्ध करवाने की दिशा में विभाग लगातार कर रहा प्रयास आयुक्त,उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा ने कहा कि विद्यार्थियों को रोजगार उपलब्ध करवाने की दिशा में, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कौशल आधारित एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों में रोजगार निमित्त कौशल बढ़ेगा और उन्हें करियर के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। सेवानिवृत्त आईएएस एवं संस्थापक सदस्य, सेंटर फॉर रिसर्च इन स्कीम्स एंड पॉलिसीज (Centre for Research in Schemes and Policies)  राधेश्याम जुलानिया ने क्रिस्प (CRISP) द्वारा किए जा रहे कार्यों के संबंध में महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों को विस्तार से जानकारी दी। एमओयू का उद्देश्य एमओयू कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को अप्रेंटिसशिप से जोड़ना है। इसके अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2025-26 में AEDP लागू करने वाले संस्थानों को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को उद्योग आधारित व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा, जिससे उनका रोजगार निमित्त कौशल निखरेगा। साथ ही अकादमिक शिक्षा को कौशल एवं उद्योग आवश्यकताओं से जोड़कर युवाओं को भविष्य के रोजगार अवसरों के लिए सक्षम और तैयार किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों को BOAT के अधिकारियों द्वारा नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग स्कीम (NATS) पोर्टल की कार्यप्रणाली से भी अवगत कराया गया। समझौता हस्ताक्षर कार्यक्रम में डॉ. पी.एन. जुमले (निदेशक-प्रशिक्षण, Board of Apprenticeship Training (BOAT) – Western Region) सहित विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, कुलसचिव तथा महाविद्यालयों के प्राचार्य एवं नोडल अधिकारी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा शैक्षणिक वर्ष 2024–25 में एईडीपी (Apprenticeship Embedded Degree Program) प्रारंभ किया गया था। इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रारंभिक चरण में 6 सेक्टर स्किल काउंसिल से जुड़े 7 पाठ्यक्रमों का संचालन प्रदेश के 36 महाविद्यालयों एवं 5 विश्वविद्यालयों में किया गया। शैक्षणिक वर्ष 2025–26 में कार्यक्रम का विस्तार करते हुए 7 सेक्टर स्किल काउंसिल से संबद्ध 10 पाठ्यक्रमों का प्रदेश के 85 महाविद्यालयों एवं 5 विश्वविद्यालयों में संचालन किया जा रहा है। आगामी शैक्षणिक वर्ष 2026–27 में इसका और अधिक विस्तार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे अधिक से अधिक युवाओं को कौशल आधारित एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।  

बिरसिंगपुर से आई गुड न्यूज, बिजली उत्पादन में ऐतिहासिक प्रदर्शन

भोपाल  विशेषज्ञ एजेंसि‍यों की सलाह अनुसार मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड की जिस यूनिट को वार्ष‍िक रखरखाव के दौरान रोटर में क्रेक टरबाइन के लो-प्रेशर रोटर ग्रूव्स में गंभीर दरार होने और नए रोटर लगाने के लिए लगभग 48 माह लगते, उसी यूनिट को पावर जनरेटिंग कंपनी के इंजीनियरों ने इन-हाउस मरम्मत करके 100 दिन तक लगातार संचालित कर दिया। यहां जिस यूनिट का जिक्र किया जा रहा है वह संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर की 500 मेगावाट क्षमता यूनिट नंबर 5 है। इस यूनिट ने गत दिवस लगातार 100 दिन संचालित होने का रिकार्ड बनाया। यदि यह यूनिट विशेषज्ञ एजेंसियों की सलाह के आधार नए रोटर लगने तक लगभग चार वर्ष के लिए बंद रहती तो विद्युत उत्पादन का नुकसान होता। इसके अतिरिक्त नए रोटर की खरीद पर अतिरिक्त व्यय भी कंपनी को वहन करना पड़ता। विशेषज्ञ एजेंसि‍यों ने कहा रोटर को बदलना ही एकमात्र विकल्प संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर की 500 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 5 को गत वर्ष 10 जुलाई को केपिटल ओवरहालिंग के लिए बंद किया गया था। रखरखाव के दौरान जानकारी मिली कि टरबाइन के लो-प्रेशर (LP) रोटर ग्रूव्स में गंभीर दरारें हैं। विस्तृत तकनीकी परीक्षण एवं मूल्यांकन के उपरांत एजेंसियों के विशेषज्ञों ने रोटर को भविष्य की सेवा के लिए अनुपयुक्त बताते हुए नया रोटर लगाने की अनुशंसा की। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने खराब एलपी रोटर को इन-हाउस मरम्मत करने का साहसिक निर्णय लिया रोटर की मरम्मत करके यूनिट को पुन: विद्युत उत्पादन करने के लिए सक्षम बना दिया। देश में पहली बार यथा स्थान पर सुधारा गया रोटर देश में पहली बार किसी LP टरबाइन रोटर की यथा स्थान पर इस तरह की मरम्मत की गई। इस जटिल व मुश्क‍िल मरम्मत का सफल होना और उसके बाद 100 दिनों से यूनिट का एक सा संचालन इस कामयाबी को खास और शानदार बनाता है। उल्लेखनीय है कि यूनिट ने इसके बाद लगभग 1592 मिलियन यूनिट (MU) विद्युत उत्पादन करते हुए लगभग 97.97% प्लांट लोड फेक्टर (पीएलएफ), 98% प्लांट अवेलेबिलिटी फेक्टर (पीएएफ) और 5.48% ऑक्जलरी खपत का मापदंड अर्जित किया। राष्ट्रीय पटल पर कंपनी मनवा रही अपना लोहा मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक  मनजीत सिंह ने कहा कंपनी के अभियंता न सिर्फ विद्युत गृहों के सुचारु संचालन से राष्ट्रीय पटल पर कंपनी का नाम रोशन कर रहे हैं, बल्कि अपने तकनीकी कौशल और काबिलि‍यत से विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान सुदृढ़ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचार, जोखिम प्रबंधन और संसाधन अनुकूलन का टीम ने उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह उपलब्धि कंपनी के अभियंताओं व कार्मिकों की प्रतिबद्धता, दक्षता और टीम भावना का प्रमाण है। 

सेफ टूरिज्म की ओर बड़ा कदम, पर्यटन स्थलों पर महिला सुरक्षा को लेकर मंथन

भोपाल  मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षित, संवेदनशील और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में “महिलाओं के लिये सुरक्षित पर्यटन स्थल परियोजना” के अंतर्गत पर्यटन स्थलों पर महिला सुरक्षा: पुलिस की भूमिका एवं रणनीति विषय पर तीन दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन 26 से 28 फरवरी तक होटल पलाश रेसिडेंसी, भोपाल में किया जा रहा है। कार्यशाला का उद्देश्य पर्यटन और पुलिस विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर पर्यटन स्थलों पर महिला पर्यटकों की सुरक्षा, सहजता और विश्वास को मजबूत करना है। कार्यक्रम में गृह, पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग, पर्यटन बोर्ड, पर्यटन निगम और विभिन्न विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी रहेगी। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैया राजा टी. ने बताया कि प्रदेश में पर्यटन स्थलों को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने के लिए पर्यटन बोर्ड द्वारा लगातार प्रयास किये जाते रहे हैं। इसी क्रम में महिला पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पर्यटन स्थलों पर अधोसंरचना, पुलिस समन्वय, सामुदायिक सहभागिता और संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए इस तरह की कार्यशालाएं भविष्य में भी की जाएंगी। उन्होंने कहा इससे मध्यप्रदेश को सुरक्षित पर्यटन गंतव्य के रूप में पहचान को और मजबूती मिलेगी। कार्यशाला में 26 फरवरी को पर्यटन विभाग द्वारा समुदाय आधारित पर्यटन और महिला सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रस्तुति दी जाएगी, वहीं पुलिस विभाग महिला सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों और रणनीतियों पर चर्चा करेगा। समूह कार्यों के माध्यम से धार्मिक पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन, पुरातात्विक स्थलों, वन क्षेत्रों, विशेष आयोजनों, साहसिक पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर और साइबर धोखाधड़ी जैसे विषयों पर मंथन होगा। कार्यशाला में 27 फरवरी को समूह कार्यों से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर एक्शन प्लान और पॉलिसी एडवोकेसी पर चर्चा की जाएगी। साथ ही खारी, भोजपुर, भीमबेठिका, वन विहार और भोपाल के आसपास के पर्यटन स्थलों का क्षेत्र भ्रमण कर जमीनी स्तर पर सुरक्षा और सुविधाओं का आकलन किया जाएगा। कार्यशाला में 28 फरवरी को कई राज्यों और देशों के केस स्टडी, विशेषज्ञ व्याख्यान, यूएन-विमेन की प्रस्तुति, जेंडर संवेदनशीलता, सामुदायिक पुलिसिंग और सोशल मीडिया की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तृत संवाद होगा। कार्यशाला का समापन स्मृति चिह्न वितरण के साथ किया जाएगा।  

बीहर रिवर फ्रंट शेष कार्य को शीघ्र पूर्ण करें: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में रीवा शहर में पुनर्घनत्वीकरण योजना की प्रगति एवं आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने विभिन्न विकास योजनाओं, अधोसंरचना उन्नयन तथा सौंदर्यीकरण कार्यों पर विस्तार से चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने विशेष रूप से बीहर नदी के रिवर फ्रंट विकास कार्य की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि नदी के पूर्वी तट का सौंदर्यीकरण कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि पश्चिमी तट का कार्य शेष है। उन्होंने पश्चिमी तट पर शेष रिवर फ्रंट कार्य को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि बीहर नदी के दोनों तटों का समग्र विकास होने से रीवा शहर को विशिष्ट पहचान मिलेगी तथा नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक स्थल उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही पुनर्घनत्वीकरण योजना अंतर्गत अन्य प्रस्तावित कार्यों को भी समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति बढ़ाने, आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृतियों को शीघ्र पूर्ण करने तथा समन्वय के साथ कार्य करने पर बल दिया गया। उन्होंने केंद्रीय जेल रीवा में पुनर्घनत्वीकरण योजना के कार्यों की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल के आयुक्त  गौतम सिंह सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री ने चित्रकूट के पं. दीनदयाल उपाध्याय शोध संस्थान के कार्यक्रम को किया वर्चुअली संबोधित

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख केवल एक राजनेता नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन के महान साधक थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन ग्राम विकास-शिक्षा-स्वावलंबन के लिए समर्पित कर दिया और समाज सेवा के उद्देश्य को तप के साथ सिद्ध किया। स्व. नानाजी देशमुख का मानना था कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। जब गांव मजबूत होंगे तभी राष्ट्र मजबूत बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख की 16वीं पुण्यतिथि के संदर्भ में चित्रकूट स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध संस्थान में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम को विधानसभा भोपाल से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। स्व. नानाजी देशमुख की 16वीं पुण्यतिथि 27 फरवरी को है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चित्रकूट को भगवान  राम की तपोस्थली के साथ-साथ नानाजी देशमुख की कर्मस्थली होने का भी गौरव प्राप्त है। स्व. नानाजी देशमुख ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद के सपने को मूर्त रूप देने के संकल्प को, चित्रकूट से ही साकार करने का प्रण किया। इस उद्देश्य से ही ग्रामीण विश्वविद्यालय की स्थापना 1991 में चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के रूप में की गई। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार स्व. नानाजी देशमुख की शिक्षाओं के अनुरूप समाज और देश के संवर्धन तथा सशक्तिकरण की दिशा में कार्य कर रही है। दीनदयाल शोध संस्थान, ग्रामीण विकास के साथ ही स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा, कृषि, स्वावलंबन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में अनुकरणीय कार्य कर रहा है। राज्य सरकार विरासत के साथ विकास को ध्यान में रखते हुए गांवों को मजबूत कर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे रही है। चित्रकूट में स्थानीय सांसद  गणेश सिंह, विश्वविद्यालय के कुलगुरू  आलोक दुबे, दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव  अभय महाजन तथा विषय विशेषज्ञ और शोधार्थी उपस्थित थे।    

जनजातीय, गरीब परिवार को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाना सर्वोच्च प्राथमिकता

भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि शिक्षा से ही जीवन में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त होता है। शिक्षा जीवन में प्रगति का आधार है। प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने जनजातीय और वंचितों को शासन की योजनाओं का प्राथमिकता से लाभ दिलाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से समाज के अंतिम व्यक्ति का सशक्तिकरण संभव होगा। राज्यपाल  मंगुभाई पटेल मऊगंज जिले के हनुमना जनपद अंतर्गत दूरस्थ जनजातीय धरती आबा ग्राम सलैया खास में आयोजित कार्यक्रम में बुधवार को शामिल हुए। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि बिरसा मुंडा के त्याग से प्रेरणा लेकर जनजातीय समाज के उत्थान के लिए कार्य करना चाहिए। उन्होंने बताया कि धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत 18 विभागों की योजनाओं का लाभ जनजातीय परिवारों को मिलेगा। उन्होंने जनजातीय युवाओं का शिक्षित होकर समाज को जागरूक करने और मुख्यधारा में शामिल करने के प्रयासों में सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने महिला सशक्तिकरण में स्वसहायता समूहों के योगदान की सराहना की। सिकल सेल उन्मूलन के लिए संवेदनशील प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा 15 हजार करोंड़ रूपये के प्रवाधान की जानकारी दी। प्रधानमंत्री के प्रति आभार प्रदर्शन किया। उन्होंने निक्षय मित्र योजना, उज्ज्वला योजना सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों को प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। राज्यपाल  पटेल के सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों की सराहना सांसद  जनार्दन मिश्र ने की। उन्होंने सलैया मार्ग निर्माण के लिये सांसद निधि से राशि उपलब्ध कराने की जानकारी दी। विधायक  प्रदीप पटेल ने कहा कि हनुमना क्षेत्र के 144 ग्रामों को धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना से जोड़कर जनजातीय विकास और मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। कार्यक्रम में राज्यपाल  पटेल का जनजातीय पारंपरिक नृत्य शैला एवं कर्मा से स्वागत हुआ। भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ शुभारंभ हुआ। राज्यपाल ने हितलाभ वितरण एवं प्रदर्शनी का किया अवलोकन राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण किया। इस अवसर पर राज्यपाल द्वारा जनजातीय नायकों मोतीलाल बैगा, सुदर्शन सिंह गोड़ तथा जगन्नाथ कोल का शॉल और फल से सम्मान किया। कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी ली। राज्यपाल ने हितग्राहियों को योजनाओं का अधिकतम लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। राज्यपाल ने ग्रामीण चौपाल में किया जनसंवाद राज्यपाल  पटेल ने मऊगंज जिले के ग्राम सलैया खास में प्रथम प्रवास के दौरान ग्रामीण चौपाल में जनसंवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों और अधिकारियों से आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं की जानकारी ली। जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और अंतिम व्यक्ति तक विकास को पहुंचाने पर जोर दिया।  

सूखे खेतों में पानी पहुँचने पर मिट्टी उगलती है सोना

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों के सूखे खेतों में जब सिंचाई का पानी पहुंचता है तो मिट्टी सोना उगलती है। किसान कल्याण वर्ष 2026 में किसानों की समृद्धि के लिए उनके खेतों में सिंचाई की भरपूर व्यवस्था की जाएगी, जिससे वे वर्ष भर फसलें ले सकें। सिंचाई का रकबा बढ़ाने और हर खेत किसान के खेत तक पानी पहुंचाने के लिये मध्यप्रदेश के बजट 2026-27 में जल प्रदाय योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किये गये है। प्रदेश में सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से सिंचित रकबे में निरंतर बढ़ोत्तरी हो रही है। शीघ्र ही प्रदेश में सिंचाई के रकबे को 100 लाख हैक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आगामी वित्तीय वर्ष में जल प्रदाय योजनाओं के लिये जो प्रावधान किये गये हैं, उनमें मुख्य रूप से नर्मदा घाटी विकास के अंतर्गत एन.वी.डी.ए. के सभी बिजली बिलों के लिए 689 करोड़ रुपये, सेंधवा उद्वहन माइक्रो सिंचाई परियोजना में 500 करोड़ रुपये, सांवेर माइक्रो उद्वहन सिंचाई योजना में 400 करोड़ रुपये, आई.एस.पी. कालीसिंध उद्वहन माइक्रो सिंचाई योजना फेस-2 में 400 करोड़ रुपये, बरगी नहर व्यपवर्तन योजना में 399 करोड़ रुपये, चिंकी बोरास बैराज संयुक्त बहुउद्देशीय माइक्रो सिंचाई परियोजना में 350 करोड़ रुपये, सरदार सरोवर के डूब प्रभावित क्षेत्र का भू-अर्जन तथा अन्य कार्यों पर खर्च के लिये 308 करोड़ रुपये, एन. बी. कम्पनी लिमिटेड का निवेश में 303 करोड़ रुपये, खण्डवा उद्वहम माइक्रो सिंचाई योजना में 300 करोड़ रुपये, नर्मदा (आई.एस.पी.) पार्वती लिंक परियोजना फेस 3 एवं 4 में 300 करोड़ रुपये, शहीद इलाप सिंह माइक्रो सिंचाई योजना में 300 करोड़ रुपये, महेश्वर-जानापाव (लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर) उद्वहन सिंचाई योजना में 200 करोड़ रुपये, निवाली उद्वहन माइक्रो सिंचाई परियोजना में 200 करोड़ रुपये, मोरण्ड गंजाल परियोजना से संबंधित स्थापना व्यय के लिए 200 करोड़ रुपये, राघवपुर परियोजना के लिए 150 करोड़ रुपये, शङ्कर पेंच लिंक संयुक्त परियोजना में 150 करोड़ रुपये, धार उद्वहन माइक्रो सिंचाई परियोजना में 150 करोड़ रुपये, शेर सिंचाई योजना में 100 करोड़ रुपये बसानिया परियोजना में 100 करोड़ रुपये और अपर बुढ़नेर सिंचाई योजना में 100 करोड़ रुपये, हाट पिपल्या सिंचाई योजना के में 100 करोड़ रुपये, अपर नर्मदा परियोजना में 100 करोड़ रुपये, बहोरीबंद माइक्रो उद्वहन सिंचाई योजना में 100 करोड़ रुपये, माँ रेवा उद्वहन सिंचाई परियोजना में 100 करोड़ रुपये, सोंडवा उद्वहन माइक्रो सिंचाई परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये, भू अर्जन के लिये मुआवजा के लिये 100 करोड़ रुपये, सिंचाई एवं पेयजल योजनाओं का सौर उर्जीकरण के लिए 100 करोड़ रुपये, हण्डिया बैराज परियोजना में 100 करोड़ रुपये, नर्मदा नदी के किनारे घाट निर्माण के लिए 80 करोड़ रुपये, मुख्य अभियंता आई.एस.पी. के अधीन संचालित सभी योजनाओं के स्थापना व्यय के लिए 74 करोड़ रुपये, मुख्य अभियंता आर.ए.बी.एल.एस. के अधीन संचालित सभी योजनाओं के स्थापना व्यय में 66 करोड़ रुपये, मुख्यालय स्थापना के लिए 53 करोड़ रुपये, दूधी परियोजना में 50 करोड़ रुपये, कुक्षी उद्वहन माइक्रो सिंचाई परियोजना के लिए 50 करोड़ रुपये, मछरेवा सिंचाई योजना के लिए 50 करोड़ रुपये और खालवा उद्वहन माइक्रो सिंचाई योजना के लिए 50 करोड़ रुपये के प्रावधान शामिल हैं। जल संसाधन विभाग के अंतर्गत किये गए प्रावधानों में बांध तथा संलग्न कार्य के लिए 3062 करोड़ रुपये, केन बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना के लिए 1000 करोड़ रुपये, कार्यपालिक स्थापना के लिए रुपये 992 करोड़, नहर तथा उससे संबंधित निर्माण कार्य के लिए 450 करोड़ रुपये, बांध तथा नहरें के लिए 312 करोड़ रुपये, लघु एवं लघुतम सिंचाई योजनाएं के लिए 300 करोड़ रुपये, कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना के लिए 290 करोड़ रुपये, लघु सिंचाई योजनाओं के लिए 200 करोड़ रुपये, नहरें तथा तालाब के लिए 198 करोड़ रुपये, अन्य लघु सिंचाई निर्माण कार्य के लिए 115 करोड़ रुपये और निर्वाचित कृषक संस्थाओं को राशि की व्यवस्था के लिए 61 करोड़ रुपये के प्रावधान शामिल हैं।